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थिम्पू. भारत ने भूटान के आर्थिक प्रोत्साहन कार्यक्रम (ईएसपी) के तहत बृहस्पतिवार को 250 करोड़ रुपये की पांचवीं किस्त जारी की। भारतीय दूतावास ने यह जानकारी दी। इसके साथ ही ईएसपी के लिए भारत द्वारा घोषित 1,500 करोड़ रुपये की सहायता राशि में से अब तक कुल 1,250 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। भारत पड़ोसी हिमालयी देश भूटान में विभिन्न विकास परियोजनाओं को नियमित रूप से वित्तीय सहायता प्रदान करता है। भूटान के 2026-27 के बजट में पूंजीगत व्यय का 30 प्रतिशत से अधिक हिस्सा भारत सरकार के अनुदान से समर्थित होगा। भारतीय दूतावास की विज्ञप्ति के अनुसार, थिम्पू में भारत के राजदूत संदीप आर्य ने भूटान के विदेश मंत्री ल्योंपो डीएन धुंग्येल को 250 करोड़ रुपये का चेक सौंपा। आर्य ने कहा कि भारत भूटान के प्रति अपनी विकास संबंधी प्रतिबद्धताओं को पूरा कर रहा है और 13वीं पंचवर्षीय योजना (2024-2029) के तहत परियोजना सहायता, आर्थिक प्रोत्साहन कार्यक्रम, उच्च प्रभाव वाली सामुदायिक विकास परियोजनाओं तथा कार्यक्रम अनुदानों के लिए धनराशि जारी कर रहा है। धुंग्येल ने कहा कि आर्थिक प्रोत्साहन कार्यक्रम ने कोविड-19 महामारी के बाद भूटान की अर्थव्यवस्था को फिर खड़ा करने और रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम का सकारात्मक प्रभाव किसानों, विद्यार्थियों, युवाओं, लघु एवं मझोले उद्यमों, स्टार्टअप, रचनात्मक उद्योग, आतिथ्य तथा पर्यटन क्षेत्रों पर पड़ा है।
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वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को सीनेट में रिपब्लिकन सांसदों को ईरान युद्ध को रोकने संबंधी प्रस्ताव के पक्ष में वोट किए जाने को लेकर खूब खरी-खोटी सुनाई। फ्लोरिडा के सीनेटर रिक स्कॉट के निमंत्रण पर ट्रंप 'कैपिटल हिल' (अमेरिका की संसद का भवन) में रिपब्लिकन सांसदों के दोपहर भोज में शामिल हुए। बैठक से पहले ट्रंप ने संकेत दिया था कि वह बंद कमरे में होने वाली इस बैठक में नागरिकता प्रमाणित करने संबंधी विधेयक के पक्ष में वोट करने के लिए सांसदों पर दबाव बनाएंगे। हालांकि, पूरी बातचीत मंगलवार को पारित हुए युद्ध शक्तियों संबंधी प्रस्ताव (वॉर पावर्स रेजोल्यूशन) पर ही केंद्रित हो गई। ट्रंप ने खासतौर पर उन चार रिपब्लिकन सांसदों को निशाने पर लिया, जिन्होंने इस प्रस्ताव पर डेमोक्रेट सांसदों का साथ दिया था। इनमें अलास्का से लिसा मुर्कोव्स्की, मेन से सुसान कॉलिन्स, केंटकी से रैंड पॉल और लुइसियाना से बिल कैसिडी शामिल हैं। ट्रंप इससे पहले सोशल मीडिया पर इन्हें ''नकारा'' कहा।
अधिकांश रिपब्लिकन सांसद चुप रहे। हालांकि, कैसिडी खड़े हुए और उन्होंने अपने मतदान का बचाव किया। कैसिडी पिछले माह अपनी पार्टी की प्राथमिक चुनावी प्रतिस्पर्धा में हार गए थे, जहां ट्रंप ने उनके प्रतिद्वंद्वी का समर्थन किया था। बैठक के बाद कैसिडी ने संवाददाताओं से कहा, ''मैं खड़ा हुआ और मैंने कहा कि आपने अमेरिकी जनता को यह नहीं बताया है कि वास्तव में क्या हो रहा है। यह अभियान चार सप्ताह चलने वाला था, लेकिन अब चार महीने से जारी है। हमारे मूल उद्देश्य अब तक पूरे नहीं हुए हैं।'' कैसिडी ने कहा कि दोनों के बीच तीखी बहस हुई और उन्होंने भी ट्रंप को उनकी भी भाषा में जवाब दिया। रिपब्लिकन सांसद ने कहा कि बाद में उन्होंने स्थिति को शांत करने की कोशिश की, लेकिन किसी की अकड़ के आगे झुकना नहीं चाहते थे। उन्होंने कहा, ''जब तक मुझे पूरी जानकारी नहीं दी जाती, मैं युद्ध शक्तियों से जुड़े प्रस्ताव के समर्थन में मतदान करता रहूंगा।'' इस बैठक से परिचित एक अधिकारी के अनुसार, ट्रंप ने बातचीत के दौरान कई बार कैसिडी को बैठ जाने के लिए कहा। एक मौके पर उन्होंने सीनेटर को ''सनकी'' तक कह दिया। हालांकि, सार्वजनिक रूप से ट्रंप ने बाद में कहा कि उनकी ''बेहद अच्छी बैठक'' हुई। उन्होंने मतभेदों के संकेत भी दिए। ट्रंप ने बाहर निकलते समय संवाददाताओं से कहा, ''कुछ लोगों को छोड़कर बैठक में मौजूद सभी लोग अच्छे है, लेकिन कोई बात नहीं।'' यह दोपहर भोज ट्रंप और सीनेट के रिपब्लिकन सांसदों के बीच कई सप्ताह से जारी तनातनी के बीच हुआ।
अमेरिकी संसद के ऊपरी सदन सीनेट ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को बाधित करने के लिए युद्ध शक्तियों संबंधी प्रस्ताव को मंगलवार को पहली बार मंजूरी दी। अमेरिकी सांसद युद्ध समाप्त करने के लिए देश के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर सतर्कता से नजर रख रहे हैं। यह युद्ध शुरू करने का फैसला अमेरिकी प्रशासन ने लिया था लेकिन अब उसे संसद से धन की जरूरत है। सीनेट ने युद्ध रोकने के लिए 10वीं बार प्रयास किया। इस प्रस्ताव के पक्ष में 50 तथा विरोध में 48 मत पड़े जो पिछले प्रयासों की तुलना में एक चौंकाने वाला बदलाव है। -
काराकस. वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने बृहस्पतिवार को कहा कि देश में बुधवार शाम आए लगातार दो शक्तिशाली भूकंपों में कम से कम 164 लोगों की मौत हो गई है और 971 लोग घायल हुए हैं। रोड्रिगेज ने कहा कि मृतकों की संख्या अभी और बढ़ सकती है, क्योंकि बचाव दल क्षतिग्रस्त इमारतों में तलाश अभियान चला रहे हैं। उन्होंने बताया कि 7.2 और 7.5 तीव्रता के भूकंपों के बाद आपातकालीन टीमें प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। उन्होंने कहा कि ला गुएरा प्रांत इस आपदा से सबसे अधिक प्रभावित हुआ है।
उन्होंने कहा, ''कई इमारतें पूरी तरह ढह गई हैं और बचाव अभियान जारी है। ला गुएरा राज्य एक भीषण त्रासदी का सामना कर रहा है और व्यापक स्तर पर तबाही झेल रहा है।'' भूकंप का असर पड़ोसी देशों तक महसूस किया गया, और ब्राजील के अमेजन क्षेत्र में भी कई इमारतों को खाली कराया गया। -
दुबई. ईरान की धमकियों के बावजूद, संयुक्त राष्ट्र की समुद्री एजेंसी द्वारा सुझाए गए नए समुद्री मार्ग का इस्तेमाल करते हुए कई तेल टैंकर बृहस्पतिवार को होर्मुज जलडमरूमध्य से आगे बढ़े। यह मार्ग ओमान के तट के समानांतर गुजरता है। इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में वैकल्पिक मार्ग खुलने से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव कम होगा और अमेरिका के साथ जारी शांति वार्ता में ईरान की उस रणनीतिक बढ़त को भी कमजोर किया जा सकता है, जो उसे इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर हासिल है। खाड़ी क्षेत्र के दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि वाशिंगटन इस नए समुद्री मार्ग के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही बढ़ी है, लेकिन यह अब भी युद्ध शुरू होने से पहले के स्तर से काफी कम है। इस बीच, लेबनान में इजराइल और ईरान समर्थित हिज़्बुल्ला लड़ाकों के बीच फिर से शुरू हुई लड़ाई ने व्यापक युद्धविराम के लिए खतरा पैदा कर दिया है। लेबनान की सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार, सप्ताहांत में युद्धविराम लागू होने के बाद लेबनान पर इज़राइल के पहले हवाई हमले में बुधवार को दो लोगों की मौत हो गई। 'स्टोइक वॉरियर' नामक जहाज के साथ तेल टैंकरों का एक समूह बृहस्पतिवार तड़के संयुक्त अरब अमीरात और फिर ओमान के तट के पास से आगे बढ़ा। यह वैकल्पिक समुद्री मार्ग ओमान और संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) द्वारा निर्धारित किया गया है। समुद्री आंकड़े और विश्लेषण उपलब्ध कराने वाली 'लॉयड्स लिस्ट इंटेलिजेंस' के आंकड़ों के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। पिछले सप्ताह 125 जहाज इस मार्ग से गुजरे, जबकि उससे पहले के सप्ताह में केवल 33 जहाजों ने इसका इस्तेमाल किया था। ईरान ने नए समुद्री मार्ग को अस्वीकार्य बताया है। नए समुद्री मार्ग और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की बढ़ती गतिविधियों पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड (आईआरजीसी) की नौसैनिक शाखा ने बृहस्पतिवार को चेतावनी जारी की।
- बर्लिन। संचार प्रणाली में खराबी के कारण जर्मनी के रेलवे नेटवर्क को मंगलवार देर रात सभी ट्रेन रोकनी पड़ीं जिससे देशभर में यात्री फंस गए। रेलगाड़ियों को स्टेशनों पर रोक दिया गया और यात्री यह पता लगाने के लिए पूछताछ काउंटरों पर लंबी कतारों में खड़े रहे कि वे अपने गंतव्य तक कैसे पहुंचें। देश की प्रमुख रेलवे परिचालक कंपनी 'डॉयचे बान' ने संचार प्रणाली में खराबी की सूचना देने के करीब ढाई घंटे बाद मंगलवार देर रात करीब एक बजे बताया कि समस्या का समाधान कर लिया गया है और सेवाएं ''चरणबद्ध तरीके से'' बहाल की जा रही हैं। कंपनी ने बताया कि देशभर में 'ग्लोबल सिस्टम फॉर मोबाइल कम्युनिकेशंस-रेलवे' (जीएसएम-आर) डिजिटल संचार प्रणाली में समस्या आई थी। इस प्रणाली का इस्तेमाल रेलवे नेटवर्क पर आंतरिक संचार के लिए किया जाता है। कंपनी ने बाद में बताया कि खराबी के कारण का पता लगा लिया गया है लेकिन उसने इस बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी। 'बिल्ड' समाचार पत्र ने डॉयचे बान की मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवलिन पाला के हवाले से कहा कि वे ''एक आपातकालीन प्रणाली की मदद से स्थिति को स्थिर करने में सफल रहे।'' 'डॉयचे बान' ने बताया कि सेवाएं बाधित रहने के दौरान यात्रियों को टैक्सी और होटल के वाउचर दिए गए। कंपनी ने यात्रियों को हुई असुविधा के लिए माफी मांगी। जर्मनी में हाल के वर्षों में ट्रेन संचालन में देरी और सेवाएं बाधित होने की शिकायतें लगातार बढ़ी हैं
- वाशिंगटन । अमेरिकी संसद के ऊपरी सदन सीनेट ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को बाधित करने के लिए युद्ध शक्तियों संबंधी प्रस्ताव को मंगलवार को पहली बार मंजूरी दी। अमेरिकी सांसद युद्ध समाप्त करने के लिए देश के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर सतर्कता से नजर रख रहे हैं। यह युद्ध शुरू करने का फैसला अमेरिकी प्रशासन ने लिया था लेकिन अब उसे संसद से धन की जरूरत है। सीनेट ने युद्ध रोकने के लिए 10वीं बार प्रयास किया। इस प्रस्ताव के पक्ष में 50 तथा विरोध में 48 मत पड़े जो पिछले प्रयासों की तुलना में एक चौंकाने वाला बदलाव है। यह प्रस्ताव काफी हद तक प्रतीकात्मक है और इसे पूरी तरह कानून का दर्जा हासिल नहीं है लेकिन यह युद्ध और इसे समाप्त करने के लिए ईरान के साथ ट्रंप के समझौते को लेकर प्रतिनिधि सभा एवं सीनेट के कई रिपब्लिकन सांसदों की बढ़ती चिंताओं को दर्शाता है। प्रतिनिधि सभा ने इस महीने की शुरुआत में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी।ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच 'ट्रुथ सोशल' पर इस प्रस्ताव पर मंगलवार रात नाराजगी जताई। उन्होंने मतदान को ''गलत समय पर कराया गया और निरर्थक'' बताते हुए कहा कि इससे ईरान को ''सहायता और समर्थन'' मिला है। सीनेट में डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता चक शूमर ने कहा, ''सीनेट में बड़ी संख्या में रिपब्लिकन पार्टी के सदस्यों ने अमेरिकी जनता के बजाय बार-बार ट्रंप और उनके युद्ध का साथ दिया।'' शूमर ने कहा कि अमेरिकियों को ''ईरान में ट्रंप की ऐतिहासिक भूल'' की कीमत चुकानी पड़ी है। उन्होंने कहा, ''इसे इतिहास में अमेरिका की विदेश नीति के अब तक के सबसे खराब निर्णयों में से एक के रूप में याद किया जाएगा।'' इससे पहले युद्ध शक्तियों संबंधी प्रस्तावों के पक्ष में अधिकतम चार रिपब्लिकन सीनेटर ने मतदान किया था और मंगलवार को भी उन्होंने इसका समर्थन किया। इनमें अलास्का से लिसा मुर्कोव्स्की, मेन से सुसान कॉलिन्स, केंटकी से रैंड पॉल और लुइसियाना से बिल कैसिडी शामिल हैं। पेनसिल्वेनिया से डेमोक्रेटिक सीनेटर जॉन फेटरमैन ने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया।ट्रंप ने इन चारों रिपब्लिकन नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा, ''इन सीनेटर ने मेरा काम और कठिन बना दिया है।'' हाल में किसी अज्ञात कारण से अस्पताल में भर्ती केंटकी से मिच मैककॉनेल समेत दो रिपब्लिकन सदस्यों की अनुपस्थिति के कारण रिपब्लिकन पार्टी के पास इस प्रयास को रोकने के लिए पूर्ण बहुमत नहीं था। सीनेटर डेव मैककॉर्मिक भी मतदान में शामिल नहीं हुए। यह मतदान ऐसे समय हुआ है, जब पेंटागन (अमेरिकी रक्षा मंत्रालय का मुख्यालय) मुख्य रूप से ईरान युद्ध के बाद गोला-बारूद और हथियारों के भंडार को फिर से भरने के लिए संसद से 80 अरब अमेरिकी डॉलर की मांग कर रहा है।
- वाशिंगटन। अमेरिका की एक संघीय अपीलीय अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन को न केवल सीमा क्षेत्रों में, बल्कि पूरे देश में अवैध प्रवासियों के त्वरित निर्वासन की प्रक्रिया फिर शुरू करने की मंगलवार को अनुमति दे दी। 'डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया सर्किट' के लिए अपीलीय अदालत की तीन न्यायाधीशों वाली पीठ ने अधीनस्थ अदालत के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसके तहत ट्रंप प्रशासन द्वारा त्वरित निष्कासन के दायरे का विस्तार करने पर अस्थायी रोक लगाई गई थी। संस्था एसीएलयू की आव्रजक अधिकार परियोजना से जुड़े वरिष्ठ स्टाफ अटॉर्नी आनंद बालकृष्णन ने एक बयान में कहा, ''त्वरित निर्वासन पर ट्रंप प्रशासन के जोर देने से लोग एक पक्षपातपूर्ण और त्रुटिपूर्ण व्यवस्था का शिकार होंगे।'' पीठ के सदस्य न्यायाधीश जस्टिन आर. वॉकर ने कहा कि वादी यह साबित नहीं कर सके कि त्वरित निष्कासन के दायरे का विस्तार संवैधानिक न्यायिक प्रक्रिया के अधिकारों का उल्लंघन करता है। उन्होंने अपने फैसले में लिखा कि प्रवासियों को निष्कासन संबंधी कार्रवाई की सूचना दी जाती है और उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर भी प्रदान किया जाता है। न्यायाधीश वॉकर ने कहा कि प्रशासन पर यह जानकारी देने की कोई संवैधानिक जिम्मेदारी नहीं है कि दो वर्ष से अधिक समय से अमेरिका में रह रहे प्रवासी त्वरित निर्वासन से राहत पाने के पात्र हो सकते हैं। उन्होंने आदेश में कहा, "संविधान के तहत आवश्यक यह है कि सरकार जिस कार्रवाई को अंजाम दे रही है और उसके आधार क्या हैं, इसकी स्पष्ट सूचना दी जाए तथा संबंधित व्यक्ति को जवाब देने का अवसर मिले।" यह फैसला रिपब्लिकन प्रशासन के लिए बड़ी जीत माना जा रहा है, जो त्वरित निष्कासन की व्यवस्था के विस्तार को अपनी व्यापक निर्वासन नीति लागू करने का एक अहम साधन मानता है। त्वरित निष्कासन ऐसी प्रक्रिया है, जिसके तहत किसी प्रवासी को अदालत में न्यायाधीश के समक्ष अपना पक्ष रखने का अवसर दिए बिना ही देश से निर्वासित किया जा सकता है। अब तक यह व्यवस्था मुख्य रूप से समुद्री मार्ग से आने वाले प्रवासियों या सीमा पार करने के तुरंत बाद सीमा पर अथवा उसके निकट पकड़े गए लोगों पर लागू की जाती रही है। जनवरी में ट्रंप प्रशासन ने इस व्यवस्था का दायरा बढ़ाकर इसे पूरे अमेरिका में अवैध प्रवासियों पर लागू कर दिया था।
- दुबई। भारत ने ईरान में हालात में हाल में सुधार के बावजूद अपने नागरिकों को अगली सूचना तक वहां की गैर-जरूरी यात्राओं से परहेज करने की बुधवार को सलाह दी। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने कहा कि वह ईरान में मौजूदा सुरक्षा स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है और हालिया सकारात्मक घटनाक्रम तथा समग्र हालात में आए सुधार को देखते हुए संशोधित यात्रा परामर्श जारी कर रहा है। दूतावास ने अपने परामर्श में कहा, ''हाल में हालात में सुधार के बावजूद भारतीय नागरिकों को अगली सूचना तक ईरान की सभी गैर-आवश्यक यात्राओं से बचने की सलाह दी जाती है।'' दूतावास ने परामर्श की प्रति सोशल मीडिया पर साझा की।इसमें कहा गया है कि वर्तमान में ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों और अपरिहार्य कारणों से वहां यात्रा करने वाले लोगों को अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए, हर समय सतर्क रहना चाहिए तथा आसपास की परिस्थितियों के प्रति लगातार चौकस रहना चाहिए। दूतावास ने भारतीय नागरिकों से विश्वसनीय सूचना स्रोतों के माध्यम से स्थानीय घटनाक्रम पर कड़ी नजर बनाए रखने और स्थानीय अधिकारियों द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने का भी आग्रह किया। परामर्श में ईरान में रह रहे सभी भारतीय नागरिकों तथा वहां पहुंचने वाले भारतीयों को अपनी जानकारी जल्द से जल्द भारतीय दूतावास में पंजीकृत कराने के लिए कहा गया। पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से भारत ने ऐसे कई परामर्श जारी किए हैं। यह संघर्ष 28 फरवरी को तब शुरू हुआ जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर संयुक्त हमला किया, जिसके बाद तेहरान ने जवाबी कार्रवाई की।
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लंदन. केअर स्टॉर्मर ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री और लेबर पार्टी के नेता पद से सोमवार को इस्तीफा देने की घोषणा की। उन्होंने अपने उत्तराधिकारी के चुनाव की समय-सीमा भी तय करते हुए कहा कि आने वाले हफ्तों में नए नेता का चयन कर लिया जाएगा और वह सितंबर तक पदभार संभाल लेंगे। स्टॉर्मर (63) ने कहा कि लेबर पार्टी के नए नेता के चुने जाने तक वह कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में पद पर बने रहेंगे। उन्होंने सत्ता का सुचारू हस्तांतरण सुनिश्चित करने के लिए नए नेता को अपना ''पूरा समर्थन'' देने का वादा किया। पिछले सप्ताह हुए एक अहम उपचुनाव में स्टॉर्मर के प्रतिद्वंद्वी माने जाने वाले एंडी बर्नहैम की जीत के बाद उनके प्रधानमंत्री पद से हटने की पृष्ठभूमि तैयार हुई। माना जा रहा कि बर्नहैम प्रधानमंत्री बनेंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय '10 डाउनिंग स्ट्रीट' से अपने संबोधन में भावुक स्टॉर्मर ने कहा, ''मेरी पार्टी अब यह सवाल पूछ रही है कि क्या अगले आम चुनाव में पार्टी का नेतृत्व करने के लिए मैं सबसे उपयुक्त व्यक्ति हूं?'' उन्होंने कहा, ''मैंने उस सवाल पर अपनी संसदीय पार्टी का जवाब सुना है और मैं उस जवाब को सम्मान के साथ स्वीकार करता हूं। मैंने जो भी फैसला लिया है, उसमें हमेशा उस देश को प्राथमिकता दी है जिससे मैं प्यार करता हूं। इसीलिए मैं लेबर पार्टी के नेता के पद से इस्तीफा दे रहा हूं।'' स्टॉर्मर ने कहा कि उन्होंने सोमवार सुबह महाराजा चार्ल्स तृतीय से बात करके उन्हें इस फैसले के बारे में जानकारी दी। अब वह लेबर पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारी समिति से अपने उत्तराधिकारी के चयन की समय-सीमा तय करने का अनुरोध करेंगे। इसके तहत नौ जुलाई से नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी और संसद के ग्रीष्मकालीन अवकाश, जो 17 जुलाई से निर्धारित है, से पहले नए नेता के चयन की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। स्टॉर्मर ने कहा, ''अगर मुकाबला होता है, तो इससे यह पक्का हो जाएगा कि सितंबर में संसद के फिर से शुरू होने से पहले नया नेता चुन लिया जाए। जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, मैं प्रधानमंत्री के पद पर बना रहूंगा और सत्ता का सुचारू रूप से हस्तांतरण सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कोशिश करूंगा।'' उन्होंने कहा, "मैं अपने उत्तराधिकारी को पूर्ण और बिना शर्त समर्थन दूंगा। मुझे विश्वास है कि उन्हें ऐसा ब्रिटेन मिलेगा जो दो साल पहले मुझे मिले ब्रिटेन से कहीं ज्यादा मजबूत और न्यायपूर्ण है, आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए बेहतर तरीके से तैयार है और लेबर पार्टी को लगातार दूसरी बार सत्ता में वापस लाने में भी अधिक सक्षम है।'' स्टॉर्मर के नेतृत्व में लेबर पार्टी ने जुलाई 2024 के आम चुनाव में भारी जीत हासिल की थी। हाल के महीनों में कुछ विवादित फैसलों की वजह से प्रधानमंत्री के तौर पर उनकी लोकप्रियता में भारी गिरावट आई है। भावुक दिख रहे स्टॉर्मर ने कहा, ''जब मैं देश की सबसे बड़ी जिम्मेदारी वाला पद छोड़ूंगा, तो मैं अपनी जिंदगी की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों पर अधिक समय दूंगा। मैं अपनी पत्नी विक का बेहतर पति बनने की कोशिश करूंगा, जिन्होंने अच्छे और बुरे हर दौर में मेरा मजबूती से साथ दिया है। साथ ही, मैं अपने प्यारे बच्चों का सबसे अच्छा पिता बनने का प्रयास करूंगा, जो मेरे गर्व और खुशी का सबसे बड़ा कारण हैं।''
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ओबबुर्गेन (स्विटजरलैंड). अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने सोमवार को कहा कि ईरान के साथ शांति वार्ता ने फरवरी के आखिर में शुरू हुई जंग को खत्म करने के लिए "एक सफल अंतिम समझौते की अच्छी नींव" तैयार की है। वेंस ने अंतिम समझौते की तुलना एक मकान से करते हुए पत्रकारों से कहा, "हमने नींव रखी है। हमने घर तो नहीं बनाया है, लेकिन अमेरिकी लोगों के लिए एक अच्छी स्थिति तक पहुंचने के लिए हमने एक मजबूत नींव जरूर रखी है।" वेंस की ये टिप्पणियां तब आईं जब उन्होंने और ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघिर गालिबाफ ने सोमवार को दोनों देशों के बीच युद्ध को स्थायी रूप से खत्म करने के मकसद से शुरुआती बातचीत का एक लंबा दौर पूरा किया। वेंस और अमेरिकी अधिकारियों ने कई मोर्चों पर प्रगति का दावा किया। इनमें ऐसे "तरीके" बनाना शामिल है जिनसे यह पक्का किया जा सके कि दुनिया भर में ऊर्जा की आपूर्ति के लिए अहम समुद्री रास्ते, 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को खुला रखा जाए और दक्षिणी लेबनान में इजराइल और ईरान-समर्थित हिज़्बुल्ला लड़ाकों के बीच युद्धविराम बना रहे। बड़े पैमाने पर संघर्ष शुरू होने के कुछ ही समय बाद हिज़्बुल्ला और इजराइल के बीच युद्ध छिड़ गया; हिज़्बुल्ला ने उत्तरी इजराइल में आम लोगों की बस्तियों पर रॉकेट और ड्रोन दागे, जबकि इजराइल ने दक्षिणी लेबनान के बड़े इलाकों पर कब्जा कर लिया। ईरान ने लेबनान में लड़ाई खत्म करने की दिशा में "बड़ी प्रगति" का जिक्र किया और इसे बातचीत की पहली असली परीक्षा बताया। इसके अलावा, युद्ध खत्म करने के अंतरिम समझौते के तहत अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों में 60 दिन की छूट देने वाला लाइसेंस जारी किया। खास बात यह है कि इस लाइसेंस से ईरानी तेल का अमेरिका में आयात किया जा सकेगा। अमेरिका ने 1990 के दशक के बाद से ईरानी तेल का बड़े पैमाने पर आयात नहीं किया है। वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में इस लाइसेंस की घोषणा करते हुए "स्विट्जरलैंड में चल रही सार्थक बातचीत" का ज़िक्र किया; यह लाइसेंस 21 अगस्त तक लागू रहेगा। ट्रंप स्विट्जरलैंड में तो नहीं थे, लेकिन बातचीत पर उनका असर साफ दिख रहा था।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप "लेक ल्यूसर्न समिट" में शामिल नहीं हुए, लेकिन उनकी छाप को साफ तौर पर महसूस किया गया। ट्रंप के बयानों से बातचीत पर बुरा असर पड़ा; उन्होंने हज़ारों मील दूर से ऐसी बातें कहीं जिनसे ईरानियों को बुरा लगा। ईरान के सरकारी मीडिया ने कहा कि "अमेरिकी राष्ट्रपति के अपमानजनक संदेश के प्रकाशन" के बाद बातचीत रुक गई थी। बाद में बातचीत फिर से शुरू हुई। वेंस ने इस बात का खंडन किया कि ट्रंप की धमकियों से बातचीत मुश्किल हो गई थी।
वेंस ने कहा, "नहीं, उन्होंने सिस्टम में कोई रुकावट नहीं डाली।" उन्होंने आगे कहा, "हां, उन्होंने बाहर जाने की धमकी जरूर दी थी, या कम से कम सोशल मीडिया पर ऐसी धमकियां आई थीं कि वे बाहर चले जाएंगे। लेकिन हम कल रात एक बजे के बाद तक बातचीत कर रहे थे, इसलिए वे बाहर नहीं गए।" उपराष्ट्रपति ने यह भी सुझाव दिया कि अमेरिकी प्रशासन अमेरिकी सोया, मक्का और गेहूं की खरीद के लिए ईरान की जब्त की गई संपत्ति को जारी करने पर सहमत हो सकता है। उन्होंने कहा कि ट्रंप के दामाद और अमेरिका की ओर से बातचीत करने वाले मुख्य लोगों में से एक, जेरेड कुशनर को कतर के अधिकारियों के साथ मिलकर यह विचार आया। वेंस ने कहा कि इस प्रक्रिया पर कतर की मंज़ूरी होगी और प्रतिबंध हटने के बाद जो ईरानी पैसा उपलब्ध होगा, उससे "ईरानी लोगों के फायदे के लिए" अमेरिकी उत्पाद खरीदे जाएंगे। मध्यस्थता करने वाले देशों कतर और पाकिस्तान ने सोमवार को बताया कि स्विट्जरलैंड के बुर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में घंटों चली बातचीत के बाद अमेरिका व ईरान एक रूपरेखा पर सहमत हो गए हैं। इस रूपरेखा का मकसद 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते पर पहुंचना है। उन्होंने इस प्रगति को "उत्साहजनक" बताया। मध्यस्थों ने एक संयुक्त बयान में कहा कि बातचीत "सकारात्मक और रचनात्मक" माहौल में हुई।
वॉशिंगटन लौटने की योजना बना रहे वेंस ने कहा कि तकनीकी बातचीत बहुत जरूरी है।
वेंस ने पत्रकारों से कहा, "हम इसके लिए एक ढांचा तैयार करना चाहते थे ताकि उचित राजनीतिक निगरानी हो सके, लेकिन ज़ाहिर है, भले ही यह जगह बहुत खूबसूरत है, मैं अगले 60 दिनों तक यहां नहीं रह सकता।" अमेरिकी दूत कुशनर और स्टीव विटकॉफ कई तकनीकी मामलों को संभाल रहे हैं। - काठमांडू. प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने रविवार को स्पष्ट किया कि नेपाल सरकार ने भारत के साथ सीमा विवाद को सुलझाने के लिए ब्रिटेन से मध्यस्थता की मांग नहीं की थी। चितवन जिले में सत्ताधारी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के पहले आम अधिवेशन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ''हमने कहा था कि अगर (भारत में) ब्रिटिश शासन के समय के सबूतों की जरूरत पड़ी तो हम उन्हें पेश करेंगे। हमने उनकी मध्यस्थता की मांग नहीं की थी।'' बालेंद्र शाह के ये बयान विदेश मंत्री शिशिर खनाल के संसद में यह कहने के कुछ दिनों बाद आए हैं कि एक संयुक्त कार्य समूह नेपाल और भारत के बीच सीमा-पार कब्जे के मुद्दे को सुलझाएगा। पिछले महीने बालेंद्र शाह ने संसद में कहा था कि नेपाल ने अलग-अलग जगहों पर भारतीय इलाकों पर कब्जा किया है और इस मुद्दे को सुलझाने के लिए देश ने चीन और ब्रिटेन को शामिल किया है, जिससे बड़ा विवाद शुरू हो गया। नयी दिल्ली ने इस विवाद को सुलझाने में किसी भी तीसरे पक्ष की भूमिका को साफ तौर पर खारिज किया है।
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वॉशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नए सिरे से तैयार किए गए 'एयर फोर्स वन' विमान का अनावरण किया जिसे अगले महीने की शुरुआत से राष्ट्रपति की आधिकारिक यात्राओं के लिए इस्तेमाल किए जाने से पहले परीक्षण उड़ानों पर भेजा जाएगा। यह विमान पहले कतर के स्वामित्व में था और इसे व्यापक रूप से नवीनीकृत करके आधुनिक बनाया गया है।
बोइंग 747-8आई विमान को अमेरिकी ध्वज के रंगों- लाल, सफेद और गहरे नीले रंग में रंगा गया है, जबकि पुराना विमान हल्के आसमानी रंग का है और उसका इस्तेमाल अमेरिका के राष्ट्रपतियों द्वारा लगभग 40 वर्षों से किया जाता रहा है। नए विमान की 'टेल' पर अमेरिकी राष्ट्रीय ध्वज का चित्र अंकित किया गया है।
ट्रंप ने यहां के निकट 'ज्वाइंट बेस एंड्रूज' में एक समारोह में कहा, ''सबसे बड़ा अंतर इसके आकार में है। यह लगभग दोगुना बड़ा हैं।'' 'ज्वाइंट बेस एंड्रूज' राष्ट्रपति के आधिकारिक विमान का मुख्य ठिकाना है।
ट्रंप ने कहा, ''ये नए रंग हैं- लाल, सफेद और नीला। हमें हल्का आसमानी रंग भी पसंद था, लेकिन अब बदलाव का समय आ गया था... मुझे अमेरिकी ध्वज के रंग पसंद हैं।'' अमेरिकी वायु सेना ने कहा कि यह विमान जल्द ही ''परीक्षण उड़ानें'' भरेगा जो राष्ट्रपति के परिवहन के लिए उपयोग किए जाने से पहले इसकी अंतिम परीक्षा होगी। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने यह विमान कतर के अमीर (कतर के शासक) से इसलिए प्राप्त करने की पहल की क्योंकि बोइंग के एयर फोर्स वन प्रतिस्थापन कार्यक्रम में हो रही देरी से वह निराश थे। साथ ही, अमेरिका के राष्ट्रपति बेड़े के पुराने हो चुके विमानों की तुलना विदेशी सरकारों के अधिक आधुनिक विमानों से किए जाने की बातें भी लगातार बढ़ रही थीं। ट्रंप ने कहा, ''मैंने अमीर से पूछा कि क्या हम इस बिल्कुल नए 747 विमान का उपयोग कर सकते हैं।" उन्होंने यह भी बताया कि इस विमान ने अपेक्षाकृत बहुत कम उड़ान घंटे पूरे किए हैं। ट्रंप ने कहा, "देखिए, कोई सामान्य राष्ट्रपति ऐसा नहीं करता। एक सामान्य राष्ट्रपति विमान जैसे मामलों से दूर रहना चाहता है लेकिन हमारे देश का प्रतिनिधित्व उचित ढंग से होना चाहिए।'' अमेरिकी वायु सेना ने कहा कि एयर फोर्स वन बनने वाले किसी भी विमान को कड़े सुरक्षा मानकों को पूरा करना होता है। वायु सेना के अनुसार, कतर से प्राप्त इस विमान में सुव्यवस्थित और अनुशासित इंजीनियरिंग प्रक्रिया के तहत संशोधन किए गए है। ट्रंप ने कहा कि नया एयर फोर्स वन अमेरिका के 250वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर चार जुलाई को 'नेशनल मॉल'' में आयोजित समारोहों के दौरान हवाई प्रदर्शन करेगा। राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि वह अगले महीने तुर्किये में होने वाले नाटो के शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए इस नए विमान का उपयोग करेंगे। -
दुबई. ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ने शनिवार को कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से बंद कर दिया गया है। इसने कहा कि यह कदम लेबनान में इज़राइल के हमले जारी रहने और अमेरिका की ''बदनीयती'' व युद्ध खत्म करने संबंधी वादों के स्पष्ट उल्लंघन की वजह से उठाया गया है। सरकारी टेलीविज़न पर दिए गए बयान में यह चेतावनी भी दी गई कि ''अगर आक्रामकता जारी रहती है, तो आगे के कदम उठाने की योजना बना ली गई है।'' इस हफ़्ते की शुरुआत में अमेरिका और ईरान के बीच अंतरिम समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद जहाज़ों ने जलडमरूमध्य से गुज़रना शुरू कर दिया था। युद्धविराम समझौते की ख़बरें आने के कुछ ही घंटों बाद, शनिवार को दक्षिणी लेबनान पर इज़राइली हमलों में कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई, जिनमें दो बच्चे भी शामिल हैं। इस बीच, सरकारी टीवी ने कहा कि युद्ध के मुद्दे पर अमेरिका के साथ बातचीत करने वाली ईरानी टीम स्विट्जरलैंड जा रही है।
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तेल अवीव. भारत ने कहा है कि उसने जनसंख्या स्थिरीकरण के लक्ष्य को अधिकार-आधारित, स्वैच्छिक और विकास-उन्मुख दृष्टिकोण के माध्यम से आगे बढ़ाया है। इजराइल में भारत के राजदूत जे पी सिंह ने बुधवार को तेल अवीव यूनिवर्सिटी में ''अंतरराष्ट्रीय जनसांख्यिकीय रुझान और सार्वजनिक नीति'' पर आयोजित एक सामूहिक परिचर्चा के दौरान ये बातें कहीं। सिंह ने कहा कि भारत की रणनीति में आबादी को स्थिर करने के राष्ट्रीय लक्ष्य के साथ-साथ परिवार नियोजन के निजी फैसलों को ध्यान रखा गया है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि प्रजनन से जुड़े फैसले पूरी जानकारी और अच्छी गुणवत्ता वाली सेवाओं तक पहुंच के आधार पर लिए जाएं। उन्होंने कहा, ''इस दृष्टिकोण को स्वास्थ्य सुविधा, शिक्षा, महिलाओं के सशक्तिकरण और परिवार नियोजन तक बेहतर पहुंच में निवेश से समर्थन मिला है।'' सिंह ने कहा, ''भारत, जहां लगभग 1.4 अरब लोग रहते हैं और जो दुनिया की आबादी का करीब 17 प्रतिशत है, उसने जनसांख्यिकीय बदलाव के लिए लोकतांत्रिक रास्ता अपनाया है।'' राष्ट्रीय जनसंख्या नीति (2000) का जिक्र करते हुए, भारतीय राजदूत ने इस बात पर जोर दिया कि यह नीति स्वैच्छिक और सुविचारित चयन, प्रजनन अधिकारों, मां और बच्चे की सेहत और सामाजिक विकास पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि ''भारत का अनुभव यह दिखाता है कि टिकाऊ जनसंख्या बदलाव जबरदस्ती के उपायों के बजाय विकास और बेहतर मौकों के जरिए हासिल किया जाता है।'' भारतीय राजदूत ने मां और बच्चे की सेहत, परिवार नियोजन, टीकाकरण, पोषण, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और महिलाओं के सशक्तिकरण के क्षेत्रों में हुई अहम प्रगति पर जोर दिया। उन्होंने कहा, ''मां और नवजात शिशु की सेहत से जुड़े नतीजों में लगातार सुधार हो रहा है। गर्भवती महिलाओं के लिए प्रसव-पूर्व देखभाल का दायरा 2020-21 में 92.6 प्रतिशत था, जो 2023-24 में बढ़कर 95.9 प्रतिशत हो गया, संस्थागत प्रसव 88.6 प्रतिशत से बढ़कर 90.6 प्रतिशत हो गए हैं, और कुशल स्वास्थ्य कर्मियों की देखरेख में होने वाले प्रसव 91.3 प्रतिशत तक पहुंच गए हैं।
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पेरिस. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा कि प्रौद्योगिकी तभी प्रगति का माध्यम बन सकती है जब उसका लोकतंत्रीकरण किया जाए और भारत के लिए एआई (कृत्रिम मेधा) का मतलब 'ऑल इनक्लूसिव' (सर्वसमावेशी) होना है। प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक प्रौद्योगिकी शिखर सम्मेलन 'वीवाटेक 2026' में यह बयान ऐसे समय दिया है जब अमेरिका ने विदेशी नागरिकों के लिए एंथ्रोपिक के नवीनतम एआई मॉडल के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया है। उन्होंने कहा, "प्रौद्योगिकी तभी प्रगति का माध्यम बन सकती है, जब उसका लोकतंत्रीकरण किया जाए।"
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत प्रौद्योगिकी के दम पर तेज बदलाव के दौर से गुजरा है। उन्होंने प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की बढ़ती क्षमता का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया के कुल डिजिटल लेनदेन का लगभग आधा भारत में हो रहा है। उन्होंने कहा, "दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल पहचान प्रणाली से लेकर सबसे बड़े डिजिटल भुगतान मंच तक, हम वित्तीय समावेशन, शिक्षा और टेलीमेडिसिन के लिए बड़े पैमाने पर प्रौद्योगिकी का उपयोग कर रहे हैं।" वीवाटेक सम्मेलन यूरोप का प्रमुख प्रौद्योगिकी एवं नवाचार सम्मेलन है। इस बार के सम्मेलन में भारत ने भारतीय और यूरोपीय नवाचार पारिस्थितिकी के बीच साझेदारी की संभावनाओं को दर्शाते हुए सबसे बड़ा राष्ट्रीय मंडप स्थापित किया है। -
पेरिस. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कई कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात कर भारत में निवेश अवसरों और विस्तार योजनाओं पर चर्चा की। प्रधानमंत्री से मुलाकात करने वाले मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) विभिन्न क्षेत्रों की कंपनियों से संबंधित हैं। इनमें टिकाऊ निर्माण, परिवहन और कृत्रिम मेधा (एआई) क्षेत्र शामिल हैं। फ्रांस की यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले दो दिनों में जी-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सहित कई विश्व नेताओं के साथ बातचीत की। प्रधानमंत्री से बृहस्पतिवार को पेरिस में मिलने वालों में सीएमए सीजीएम के चेयरमैन एवं सीईओ रोडोल्फ सादे शामिल थे, जिनके साथ समुद्री परिवहन, लॉजिस्टिक और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर केंद्रित चर्चा हुई। सादे ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के बाद 'पीटीआई-भाषा' से कहा, "हमने विकास से जुड़े वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की, जिन्हें हम अंततः भारत में लागू कर सकते हैं। हमने जहाज विनिर्माण, जहाज पुनर्चक्रण, गहरे समुद्री बंदरगाहों के साथ-साथ कंटेनर विनिर्माण पर भी चर्चा की।" उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि फ्रांस और भारत के पास सहयोग जारी रखने और नए साझेदारियां बनाने की बहुत संभावनाएं हैं। हमारी ओर से हम भारत के साथ साझेदारी को बहुत अच्छा मानते हैं और मेरा मानना है कि शिपिंग और लॉजिस्टिक के क्षेत्र में हम और अधिक काम कर सकते हैं।" उन्होंने आगे कहा, "मेरा मानना है कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की बड़ी भूमिका है। अब हम भारत में कंटेनर जहाज बनाने की स्थिति में हैं, जो निश्चित रूप से एक सकारात्मक कदम है। भारत का भविष्य अब आकार ले रहा है।" विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने समूह की भारत में मजबूत और निरंतर बढ़ती उपस्थिति को रेखांकित किया। विदेश मंत्रालय ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि प्रधानमंत्री ने सेंट-गोबेन के चेयरमैन एवं सीईओ बेनोआ बाजिन से मुलाकात की। इस दौरान निर्माण सामग्री क्षेत्र में अवसरों पर चर्चा हुई, जिसमें विशेष रूप से टिकाऊपन पर खास जोर दिया गया। मंत्रालय ने बताया कि बाजिन ने भारत में निवेश बढ़ाने और विस्तार करने की अपनी योजनाएं साझा की हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने एल्सटॉम के सीईओ मार्टिन सियॉन से भी मुलाकात की और परिवहन एवं रेल आधुनिकीकरण से जुड़े अवसरों पर चर्चा की। विदेश मंत्रालय ने कहा कि प्रधानमंत्री ने भारत में एल्सटॉम के महत्वपूर्ण निवेश और विनिर्माण उपस्थिति का उल्लेख किया, जो रोजगार सृजन और देश के रेल क्षेत्र के विकास में योगदान दे रहे हैं। सियॉन ने भारत में भविष्य में विस्तार और निवेश की अपनी योजनाएं साझा कीं।
इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने मिस्ट्रल एआई के सह-संस्थापक एवं सीईओ आर्थर मेंश से भी मुलाकात की और भारत के तेजी से बढ़ते कृत्रिम मेधा (एआई) क्षेत्र में अवसरों को रेखांकित किया। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, मेंश ने भारत के साथ सहयोग में गहरी रुचि व्यक्त की और भारतीय कंपनियों के साथ साझेदारी कर नवाचार को बढ़ावा देने तथा एआई क्षमताओं के विस्तार की इच्छा जताई। -
वाशिंगटन. डेमोक्रेटिक पार्टी की दो सांसदों ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से रूसी तेल की खरीद पर अमेरिकी प्रतिबंधों से और छूट नहीं दिए जाने का आग्रह करते हुए कहा है कि ईरान के साथ युद्ध अब समाप्त हो चुका है इसलिए इस कदम का कोई औचित्य नहीं है। सीनेटर जीन शाहीन और एलिजाबेथ वॉरेन ने मंगलवार को यहां जारी एक बयान में कहा कि प्रतिबंधों से दी गई छूट से केवल रूस को यूक्रेन के खिलाफ अपने ''अवैध युद्ध'' का वित्तपोषण करने में मदद मिली है। अमेरिका ने मार्च में भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए प्रतिबंधों से छूट दी थी। इसका उद्देश्य 28 फरवरी को ईरान के साथ युद्ध शुरू होने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि होने के बीच वैश्विक तेल बाजारों को स्थिर रखना था। बाद में यह छूट अन्य देशों को भी दे दी गई। शुरुआत में एक महीने के लिए दी गई इस छूट की अवधि दो बार बढ़ाई जा चुकी है और इसकी अवधि 17 जून को समाप्त हो रही है। दोनों सीनेटर ने कहा, ''इस छूट की अवधि फिर से बढ़ाने से (रूस के राष्ट्रपति) व्लादिमीर पुतिन को ऐसे समय में भारी वित्तीय लाभ हासिल करने का एक और अवसर मिलेगा, जब वह यूक्रेन के खिलाफ अपना युद्ध जारी रखे हुए हैं।'' उन्होंने कहा कि छूट को बढ़ाना ट्रंप की उस घोषणा के भी स्पष्ट रूप से विपरीत होगा कि ईरान के साथ युद्ध समाप्त हो गया है और यह इन छूटों के पीछे दिए गए उनके इस तर्क के भी खिलाफ होगा कि ईरान के विरुद्ध युद्ध के कारण ऊर्जा बाजार में पैदा हुई बाधाओं को कम करने के लिए यह फैसला किया गया। सांसदों ने कहा कि तेल बाजार में बाधाएं कम करने के ट्रंप के प्रयास स्पष्ट रूप से विफल रहे हैं और युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिकियों को पेट्रोल पंपों पर और किराना दुकानों से सामान खरीदने पर अत्यधिक दाम चुकाने पड़ रहे हैं। शाहीन और वॉरेन ने कहा, ''हमें उम्मीद है कि राष्ट्रपति ट्रंप वह बात समझेंगे जो साफ दिखाई दे रही है: यूक्रेन जीत रहा है और यदि राष्ट्रपति ट्रंप शांति समझौते में रुचि रखते हैं तो उन्हें पुतिन पर न्यायसंगत और स्थायी शांति स्वीकार करने के लिए दबाव बढ़ाना चाहिए, न कि उन्हें प्रतिबंधों से और राहत देनी चाहिए।''
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एवियॉन (फ्रांस) .प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कनेक्टिविटी और व्यापार में सहयोग बढ़ाने के लिए 'जी-7', भारत और 'ग्लोबल साउथ' देशों की क्षमताओं का इस्तेमाल करके एक वैश्विक व्यवस्था बनाने का बुधवार को सुझाव दिया। साथ ही उन्होंने विकासशील देशों पर पश्चिम एशिया संकट के दीर्घकालिक प्रभावों को लेकर चिंता भी जताई। उन्होंने फ्रांस के एवियॉन शहर में जी-7 शिखर सम्मेलन के एक सत्र के दौरान 'इंटरनेशनल मोबिलाइजेशन पार्टनरशिप फॉर एक्सलरेटिंग कनेक्टिविटी एंड ट्रेड' (इम्पैक्ट) नामक नयी व्यवस्था बनाने का प्रस्ताव रखा। मोदी ने जोर देकर कहा कि आधुनिक आर्थिक विकास को केवल व्यापार की मात्रा या सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़ों से नहीं मापा जा सकता। उन्होंने कहा कि असली महत्व इस बात का है कि विकास किस दिशा में हो रहा है और उसका लाभ आखिर किसे मिल रहा है। मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया के संकट का ईंधन, उर्वरक और खाद्य आपूर्ति शृंखलाओं पर पड़ने वाला प्रभाव ग्लोबल साउथ के देशों पर लंबे समय तक असर डालेगा। उन्होंने कहा कि सबसे कमजोर देशों पर भू-राजनीतिक संकटों का बोझ नहीं पड़ना चाहिए।
उन्होंने कहा, "यदि हम वास्तव में अंतरराष्ट्रीय एकजुटता को मजबूत करना चाहते हैं, तो इन संकटों का बोझ केवल सबसे कमजोर देशों पर नहीं पड़ना चाहिए।" मोदी ने कहा, "हमारी अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं को ऐसी सहायता व्यवस्थाएं बनानी चाहिए, जो विकासशील देशों को इन झटकों का सामना करने और उनकी आर्थिक मजबूती बनाए रखने में मदद करें।" मोदी ने कहा कि इस नयी व्यवस्था को महत्वाकांक्षी भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) की तर्ज पर बनाया जा सकता है। उन्होंने सवाल किया, "आईएमईसी की तरह, क्या हम अफ्रीका, लातिन अमेरिका और प्रशांत द्वीप के देशों के साथ कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर काम कर सकते हैं?" प्रधानमंत्री ने कहा, "जी-7 की पूंजी, भारत की प्रतिभा और 'ग्लोबल साउथ' देशों की भागीदारी के जरिये हम कनेक्टिविटी और व्यापार को तेज करने के लिए 'इंटरनेशनल मोबिलाइजेशन पार्टनरशिप फॉर एक्सलरेटिंग कनेक्टिविटी एंड ट्रेड' (इम्पैक्ट) की स्थापना पर भी विचार कर सकते हैं।" उन्होंने कहा, "इसका उद्देश्य ऐसे गलियारे बनाना होना चाहिए, जो व्यापार, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और अवसरों को आपस में जोड़ें।" आईएमईसी पहल को वर्ष 2023 में दिल्ली में हुए 'जी20' शिखर सम्मेलन के दौरान अंतिम रूप दिया गया था। इसे एक महत्वपूर्ण पहल माना जाता है, जिसमें सऊदी अरब, भारत, अमेरिका और यूरोप के बीच बड़े सड़क, रेल व समुद्री नेटवर्क बनाने की योजना है, ताकि एशिया, पश्चिम एशिया और पश्चिम के बीच एकीकरण सुनिश्चित किया जा सके। पश्चिम एशिया में संकट के कारण यह परियोजना अभी शुरू नहीं हो सकी है।
उन्होंने कहा, "अच्छी बात है कि जी-7 के अध्यक्ष फ्रांस ने इस विषय को महत्व दिया है। आज की सच्चाई यह है कि जब विकास की बात होती है, तो सवाल सिर्फ सकल घरेलू उत्पाद या व्यापार के आंकड़ों का नहीं होना चाहिए। असली सवाल यह है कि विकास किसके लिए, किसके साथ और किस दिशा में है?" मोदी ने कहा कि भारत का अनुभव दिखाता है कि साझा विकास को केवल एक सपना नहीं, बल्कि हकीकत बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा, "जब भारत आगे बढ़ता है, तो आबादी का छठा हिस्सा आगे बढ़ता है। इसलिए भारत की विकास यात्रा सभी के लिए समावेश, बड़े स्तर पर विकास और लोकतांत्रिक सशक्तिकरण की कहानी है।" उन्होंने कहा, "पिछले 12 वर्षों में भारत 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास' के मंत्र पर आगे बढ़ा है। यही सिद्धांत दुनिया के साथ हमारे संबंधों का भी मार्गदर्शन करता है।" प्रधानमंत्री ने कहा कि आईएमईसी से व्यापार को तेजी मिलेगी, आपूर्ति शृंखलाएं मजबूत होंगी और निवेश, रोजगार तथा नवाचार के नए अवसर पैदा होंगे। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने ग्लोबल साउथ देशों की ताकतों का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा, "आज कई समाज वृद्ध होते जा रहे हैं, जबकि भारत और ग्लोबल साउथ के अन्य देशों के पास युवा प्रतिभा, उद्यमिता और कौशल की भरमार है।" प्रधानमंत्री ने कहा, "इस प्राकृतिक मेल-जोल का फायदा उठाने के लिए एक वैश्विक कौशल साझेदारी बनाई जानी चाहिए। इसमें सभी देश मिलकर लोगों के कौशल की पहचान करेंगे और भरोसेमंद कुशल कामगारों के एक देश से दूसरे देश में जाने को बढ़ावा देंगे।" मोदी ने कहा कि भारत साझा वैश्विक समृद्धि में विश्वास करता है और यह केवल कथनों तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके कार्यों में भी दिखाई देता है। उन्होंने कहा, "पिछले कुछ वर्षों में भारत ने इस बैठक में मौजूद अधिकांश देशों के साथ व्यापार समझौते किए हैं। इससे साबित होता है कि भारत बंटवारे नहीं, बल्कि एकीकरण में; संरक्षणवाद नहीं, बल्कि साझेदारी में; और अनिश्चितता नहीं, बल्कि साझा समृद्धि में विश्वास करता है।" उन्होंने कहा, "आने वाले समय में भारत आप सभी के साथ मिलकर साझा आर्थिक संबंध प्रगाढ़ बनाने और अधिक स्थिर, भरोसेमंद तथा समृद्ध वैश्विक अर्थव्यवस्था बनाने के लिए काम करता रहेगा।" मोदी जी-7 शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए फ्रांस में हैं। सम्मेलन में भारत को अतिथि देश के रूप में आमंत्रित किया गया है। 'जी-7' दुनिया की सात सबसे विकसित अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों का समूह है, जिसमें कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका शामिल हैं। यूरोपीय संघ भी इस समूह का सदस्य है। यह समूह अपने सदस्यों के लिए वैश्विक आर्थिक, वित्तीय और भू-राजनीतिक चुनौतियों पर चर्चा एवं समन्वय करने का प्रमुख मंच है। -
एवियन-लेस-बैंस (फ्रांस)) अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की 'कुशल और बहुत सख्त वार्ताकार' के रूप में प्रशंसा की और कहा कि वह भविष्य में भारत का दौरा करेंगे। दोनों नेताओं की यहां जी-7 शिखर सम्मेलन के इतर मुलाकात हुई।
दोनों देश व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में कितने करीब है, इस सवाल के जवाब में ट्रंप ने मोदी के वार्ता कौशल की सराहना की। ट्रंप ने कहा, ''बहुत करीब।'' उन्होंने कहा, '''हम इस पर कुछ समय से काम कर रहे हैं। वह बहुत सख्त वार्ताकार हैं। सबसे सख्त लोगों में से एक।'' अपने विशिष्ट अंदाज में प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा करते हुए ट्रंप ने कहा, ''वह देखने में सबसे खूबसूरत व्यक्ति हैं, वह बहुत अच्छे लगते हैं, वह एक फरिश्ते (एंजल) जैसे हैं। लेकिन वास्तव में वह बेहद सख्त हैं, वह एक 'घातक (किलर)' हैं।'' अमेरिकी राष्ट्रपति जब यह टिप्पणी कर रहे थे तो बगल में बैठे मोदी मुस्कुरा रहे थे। ट्रंप ने कहा, ''लेकिन वह देखने में इतने अच्छे लगते हैं कि वे आपको चौंका देते हैं। लोग कहते हैं कि वह बहुत अच्छे व्यक्ति हैं, लेकिन मैं कहता हूं कि सौदेबाजी के मामले में वह बेहद सख्त हैं।'' ट्रंप ने यह भी कहा कि मोदी भारतीय लोगों से बहुत प्रेम करते हैं। साथ ही उन्होंने 2019 में टेक्सास में आयोजित ''हाउडी मोदी!'' कार्यक्रम का भी उल्लेख किया। जब मोदी ने 2020 में अहमदाबाद में आयोजित 'नमस्ते ट्रंप' कार्यक्रम का उल्लेख किया, तब ट्रंप ने कहा, ''हम भविष्य में भारत की यात्रा करेंगे।'' इस फ्रांसीसी शहर में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के इतर दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत के बाद आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान ट्रंप ने ये टिप्पणियां कीं। उनकी व्यापक चर्चा प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते, रक्षा और सुरक्षा संबंधों तथा पश्चिम एशिया संकट पर केंद्रित रही। - एवियॉन (फ्रांस). ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सेना के हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत के कुछ दिनों बाद, मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत जी7 नेताओं की बैठक में कहा कि सभी देशों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि समुद्री मार्ग सुरक्षित रहें और नाविक बिना किसी डर के अपना काम कर सकें। जी7 शिखर सम्मेलन के संपर्क सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री व्यापार में रुकावटों से वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा है और कई भारतीय नागरिकों की जान गई है। पिछले हफ़्ते ओमान के तट पर एक वाणिज्यिक जहाज पर अमेरिकी सेना के हमले में चालक दल के तीन भारतीय सदस्यों की मौत के बाद भारत में बढ़ते गुस्से के बीच, मोदी ने समुद्री यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के महत्व पर ज़ोर दिया। मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ अपनी द्विपक्षीय बातचीत से एक दिन पहले यह मुद्दा उठाया।'नयी साझेदारियां तैयार करने और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता को फिर से बनाने' के विषय पर यहां आयोजित सत्र में मोदी ने अपने संबोधन में कहा, "हम पश्चिम एशिया में शांति प्रयासों में हुई प्रगति का स्वागत करते हैं। इस संघर्ष के कारण क्षेत्र में हमारे मित्र देशों में जान-माल का नुकसान हुआ है।" प्रधानमंत्री ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री व्यापार में रुकावटों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा, "यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम उन नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करें जो वैश्विक समुद्री व्यापार के जरिए सभी देशों को जोड़ते हैं। हमें यह पक्का करना होगा कि समुद्री रास्ते सुरक्षित रहें और नाविक बिना किसी डर के अपना काम कर सकें।" अपने संबोधन में, भू-राजनीतिक उथल-पुथल और घटनाक्रमों पर चर्चा करते हुए मोदी ने देशों के बीच "भरोसे" की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज सबसे अहम रणनीतिक संपत्ति खनिज, तकनीक या बाज़ार नहीं, बल्कि आपसी भरोसा है। उन्होंने कहा, "आज की दुनिया पहले से कहीं ज़्यादा आपस में जुड़ी और एक-दूसरे पर निर्भर है। किसी देश की ऊर्जा, भोजन, स्वास्थ्य और साइबर सुरक्षा, साथ ही उसकी आर्थिक समृद्धि, सिर्फ़ उसकी अपनी सीमाओं के भीतर तय नहीं होती। आवाजाही, डेटा, पूंजी और प्रौद्योगिकी—ये सभी हमें आपस में जोड़ते हैं।" प्रधानमंत्री ने कहा, "ऐसे समय में, साझेदारी का महत्व स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है। हालांकि, साझेदारी तभी सफल होती है जब उसके मूल में भरोसा हो।" मोदी ने 'ग्लोबल साउथ' के देशों की चिंताओं का भी ज़िक्र किया और कहा कि वे वैश्विक विकास में भागीदार बनना चाहते हैं।
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ब्रातिस्लावा. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी ने स्लोवाकिया की राजधानी में स्कूली बच्चों की योग की प्रस्तुति देखी। मोदी अपने सप्ताहभर के यूरोप दौरे के तहत स्लोवाकिया की राजधानी ब्रातिस्लावा में हैं और उन्होंने वाराणसी पर आधारित एक आकर्षक प्रदर्शनी भी देखी। सोमवार को उन्होंने 'एक्स' पर पोस्ट किया, '' राष्ट्रपति पेलेग्रिनी और मुझे स्लोवाकिया के स्कूली बच्चों के एक विशेष योग प्रदर्शन को देखकर प्रसन्नता हुई।'' उन्होंने अपने पोस्ट में कहा, '' जैसे-जैसे दुनिया अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की ओर बढ़ रही है, युवाओं द्वारा योग को अपनाते देखना बहुत सुखद है। यह भी खुशी की बात है कि योग कल्याण के माध्यम से लोगों को लगातार एकजुट कर रहा है।'' अंतरराष्ट्रीय योग दिवस हर साल 21 जून को मनाया जाता है। प्रधानमंत्री मोदी के प्रस्ताव पर 2014 में संयुक्त राष्ट्र ने इसे योग दिवस की मान्यता दी थी। मोदी ने अपने पोस्ट में कहा, ''ब्रातिस्लावा में बनारस से जुड़ाव ।
उन्होंने 'एक्स' पर पोस्ट किया, कल ब्रातिस्लावा के राष्ट्रपति भवन में, राष्ट्रपति पेलेग्रिनी और मैंने वाराणसी पर केंद्रित एक आकर्षक प्रदर्शनी देखी। हाल ही में इस शहर का दौरा करने वाले स्लोवाक कलाकारों की कृतियां भी इसमें शामिल थीं। कला और संस्कृति में वास्तव में एक अनूठी क्षमता होती है।'' मोदी ने कहा, ''इस प्रदर्शनी में जिनकी कृतियां प्रदर्शित की गईं, उन सभी को मेरी बधाई।
एक अलग पोस्ट में मोदी ने साहित्यिक विद्वान रॉबर्ट गैफ्रिक के साथ अपनी बातचीत साझा की, जिन्होंने दस प्रमुख उपनिषदों का संस्कृत से स्लोवाक भाषा में अनुवाद करने में पांच वर्ष समर्पित किए। मोदी ने एक्स पर पोस्ट किया, '' कल शाम (सोमवार) ब्रातिस्लावा में मैंने डॉ. रॉबर्ट गैफ्रिक से मुलाकात की, जिन्होंने उपनिषदों का स्लोवाक भाषा में अनुवाद करने के प्रयास का किया है।'' प्रधानमंत्री ने कहा, ''भारतीय इतिहास, संस्कृति और आध्यात्मिकता के प्रति उनका जुनून सराहनीय है।''
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वाशिंगटन. अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने शिकागो स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास परिसर में स्वामी विवेकानंद की आदमकद प्रतिमा का अनावरण किया। स्वामी विवेकानंद एक महान दार्शनिक, चिंतक और आध्यात्मिक नेता थे। उन्होंने वेदांत और योग के संदेश को विश्वभर में पहुंचाया। अमेरिका में उन्हें विशेष रूप से वर्ष 1893 में शिकागो में आयोजित विश्व धर्म संसद में दिए गए ऐतिहासिक और प्रेरणादायी संबोधन के लिए याद किया जाता है। विनय मोहन क्वात्रा ने प्रतिमा के अनावरण के अवसर पर सोमवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, "शिकागो स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का अनावरण करना मेरे लिए गर्व का क्षण है। यह हमारे प्रवासी भारतीय समुदाय की ओर से मिला एक अनमोल उपहार है। सेवा, मानवता और सार्वभौमिक सद्भाव का उनका (स्वामी विवेकानंद) कालजयी संदेश आज भी हम सभी को प्रेरित करता है। हमारे जीवंत और ऊर्जावान भारतीय समुदाय से जुड़ने का अवसर मिलने के लिए मैं हृदय से आभारी हूं।" स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा के अनावरण का समारोह रविवार को शिकागो स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास में आयोजित किया गया। प्रतिमा के अनावरण के बाद एक विशेष परिचर्चा का आयोजन भी किया गया, जिसमें निर्वाचित जनप्रतिनिधियों, प्रवासी भारतीय संगठनों के प्रतिनिधियों तथा विभिन्न समुदायों के प्रमुख नेताओं ने भाग लिया। दूतावास ने सोशल मीडिया पर बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत 'वंदे मातरम्' की भावपूर्ण प्रस्तुति से हुई, जिसने उपस्थित लोगों को भाव-विभोर कर दिया। इसके बाद कई गणमान्य अतिथियों ने अपने विचार व्यक्त किए और स्वामी विवेकानंद के आदर्शों तथा उनके वैश्विक योगदान पर प्रकाश डाला। भारतीय दूतावास के अनुसार, इस अवसर पर भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने भारत की तेज आर्थिक प्रगति, देश में हो रहे सकारात्मक सामाजिक-आर्थिक परिवर्तनों तथा लगातार मजबूत हो रही भारत–अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंध नए आयाम प्राप्त कर रहे हैं और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है।
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ब्रातिस्लावा ।स्लोवाकिया यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वहां के प्रमुख उद्योगपतियों और व्यापारिक नेताओं से मुलाकात की। इस बैठक में भारत और स्लोवाकिया के बीच निवेश, तकनीकी सहयोग और व्यापारिक संबंधों को और मजबूत बनाने के अवसरों पर व्यापक चर्चा हुई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फित्सो के साथ मिलकर देश के प्रमुख उद्योगपतियों और व्यापारिक नेताओं से बातचीत की। बैठक में रेलवे, रक्षा, ऑटोमोबाइल, ऊर्जा, सूचना प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों से जुड़े उद्योग प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।पीएम मोदी ने भारत और स्लोवाकिया के बीच बढ़ते बिजनेस-टू-बिजनेस संबंधों की सराहना की। उन्होंने हाल के वर्षों में भारत में कारोबार सुगमता बढ़ाने, पारदर्शी और स्थिर आर्थिक व्यवस्था विकसित करने तथा निवेशकों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने के उद्देश्य से किए गए प्रमुख सुधारों और नीतिगत पहलों की जानकारी दी।प्रधानमंत्री ने स्लोवाक कंपनियों को भारत में उपलब्ध व्यापक अवसरों का लाभ उठाने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने विशेष रूप से इंफ्रास्ट्रक्चर, रक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल नवाचार, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्वास्थ्य सेवा जैसे क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर जोर दिया।उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में भारत द्वारा किए जा रहे सुधारों का स्वागत किया और देश की आर्थिक प्रगति पर विश्वास व्यक्त किया। उन्होंने भारत में निवेश बढ़ाने, तकनीकी साझेदारी विकसित करने और भारतीय कंपनियों के साथ संयुक्त उद्यम स्थापित करने में रुचि दिखाई।बैठक में शामिल उद्योगपतियों ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के संपन्न होने का स्वागत किया। उनका मानना है कि इसके लागू होने से व्यापार और निवेश के नए अवसर पैदा होंगे तथा दोनों पक्षों के उद्योगों को लाभ मिलेगा।विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री रॉबर्ट फित्सो ने रेलवे, रक्षा, ऑटोमोटिव, ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा, सूचना प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य सेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों के उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ विचार-विमर्श किया।बैठक के दौरान परिवहन, हरित ऊर्जा, नई प्रौद्योगिकियों और रक्षा उत्पादन जैसे क्षेत्रों में आर्थिक सहयोग को गहरा करने, निवेश प्रवाह बढ़ाने और तकनीकी साझेदारी को मजबूत करने की संभावनाओं पर चर्चा की गई। दोनों देशों ने इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। -
ब्रातिस्लावा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्लोवाकिया की यात्रा के दौरान देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ द व्हाइट डबल क्रॉस (फर्स्ट क्लास)’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान भारत और स्लोवाकिया के बीच मजबूत होते संबंधों और वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जा रहा है।
स्लोवाकिया का सर्वोच्च सम्मान प्राप्त करना भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है। यह किसी विदेशी देश की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया गया 33वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने स्लोवाकिया की सरकार और वहां के नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त किया।प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि ब्रातिस्लावा में ‘ऑर्डर ऑफ द व्हाइट डबल क्रॉस (फर्स्ट क्लास)’ प्राप्त कर वह सम्मानित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह सम्मान स्लोवाकिया के लोगों और सरकार के साथ-साथ भारत के 140 करोड़ नागरिकों का भी सम्मान है। प्रधानमंत्री ने इस पुरस्कार को भारत और स्लोवाकिया की स्थायी मित्रता को समर्पित किया।पीएम नरेंद्र मोदी ने स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी के साथ हुई बातचीत का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि बैठक में विनिर्माण, परिवहन, नवाचार, निवेश, ऊर्जा और जैव ईंधन जैसे अनेक विषयों पर चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने डिजिटल प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग की व्यापक संभावनाओं और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और स्लोवाकिया के बीच डिजिटल प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग की अपार संभावनाएं हैं। दोनों पक्षों ने निवेश संबंधों को मजबूत करने और नई प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में साझेदारी बढ़ाने पर सहमति जताई।स्लोवाकिया यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने वहां के प्रमुख उद्योगपतियों और व्यापारिक नेताओं से भी मुलाकात की। उन्होंने स्लोवाक कंपनियों को भारत में उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने और निवेश बढ़ाने के लिए आमंत्रित किया। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि प्रधानमंत्री रॉबर्ट फित्सो की मेजबानी में आयोजित बैठक में दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने, निवेश प्रवाह बढ़ाने तथा नवाचार, प्रौद्योगिकी और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार करने पर सार्थक चर्चा हुई। उन्होंने भारत की सुधार यात्रा और निवेशकों के लिए उपलब्ध अवसरों को भी रेखांकित किया।पीएम नरेंद्र मोदी ने स्लोवाक उद्योग जगत से भारत के साथ अपनी साझेदारी को और गहरा करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत में तेजी से विकसित हो रहा आर्थिक और औद्योगिक वातावरण विदेशी निवेशकों के लिए अनेक नए अवसर प्रदान कर रहा है। -
ब्रातिस्लावा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फित्सो के साथ हुई बैठक को भारत-स्लोवाकिया संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने अपने रिश्तों को ‘कॉम्प्रिहेंसिव पार्टनरशिप’ (व्यापक साझेदारी) का दर्जा देकर द्विपक्षीय सहयोग को नई दिशा प्रदान की है।
पीएम नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि रॉबर्ट फित्सो के साथ उनकी बैठक बेहद सकारात्मक रही और यह भारत-स्लोवाकिया मित्रता के लिए एक विशेष क्षण है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंधों की व्यापक संभावनाओं को देखते हुए उन्हें ‘कॉम्प्रिहेंसिव पार्टनरशिप’ के स्तर तक उन्नत किया गया है।प्रधानमंत्री ने बताया कि बैठक के दौरान ऑटोमोबाइल, रेलवे, उन्नत विनिर्माण (एडवांस मैन्युफैक्चरिंग) और ग्रीन टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) भी दोनों देशों के आर्थिक सहयोग को नई गति प्रदान करेगा।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और स्लोवाकिया की साझेदारी में प्रौद्योगिकी की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) से सहयोग के नए अवसर खुलेंगे। दोनों देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और अंतरिक्ष जैसे उभरते क्षेत्रों में भी मिलकर काम करेंगे।पीएम नरेंद्र मोदी और रॉबर्ट फित्सो ने संयुक्त प्रेस वार्ता में बैठक के प्रमुख परिणामों की जानकारी दी। प्रधानमंत्री मोदी ने विश्वास व्यक्त किया कि यह व्यापक साझेदारी आने वाले वर्षों में नए अवसरों, साझा समृद्धि और दोनों देशों के नागरिकों के उज्ज्वल भविष्य का आधार बनेगी। दौरे के दौरान तीन महत्वपूर्ण घोषणाएं की गईं। इनमें भारत और स्लोवाकिया के संबंधों को ‘कॉम्प्रिहेंसिव पार्टनरशिप’ का दर्जा देना, आतंकवाद-रोधी सहयोग के लिए संयुक्त कार्य समूह (ज्वाइंट वर्किंग ग्रुप) की स्थापना तथा नियमित कांसुलर संवाद शुरू करने का निर्णय शामिल है।दोनों देशों के बीच क्वांटम कम्युनिकेशन और क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोटेक्शन के क्षेत्र में सहयोग समझौते हुए। इसके अलावा भारत के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ नेचरोपैथी और स्लोवाक हेल्थ स्पा पीएस्टनी के बीच स्वास्थ्य क्षेत्र में साझेदारी स्थापित की गई। प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों के सांस्कृतिक और जन-जन के संबंधों को भी विशेष महत्व दिया। उन्होंने कहा कि भारत के प्राचीन उपनिषदों का स्लोवाक भाषा में अनुवाद दोनों देशों की सांस्कृतिक निकटता का उत्कृष्ट उदाहरण है।पीएम नरेंद्र मोदी ने स्लोवाकिया में रह रहे भारतीय मूल के लोगों की सराहना करते हुए कहा कि वे वहां की अर्थव्यवस्था और समाज में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि यह नई व्यापक साझेदारी व्यापार, प्रौद्योगिकी, रक्षा, अंतरिक्ष, शिक्षा और सांस्कृतिक सहयोग सहित अनेक क्षेत्रों में संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।

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