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वॉशिंगटन. अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के बीच टेक्सास में भगवान हनुमान की 90 फुट ऊंची प्रतिमा राजनीतिक बहस का केंद्र बन गई है। एक रूढ़िवादी यूट्यूबर द्वारा प्रतिमा को हटाने की मांग किए जाने के बाद हिंदू संगठनों और उनसे मिलती-जुलती सोच रखने वाले लोगों ने इसका कड़ा विरोध किया है। शुगर लैंड स्थित 'अष्टलक्ष्मी मंदिर' में स्थापित प्रतिमा की अगस्त 2024 में प्राण-प्रतिष्ठा हुई थी। इसके बाद से ही यह विवाद के केंद्र में है। ईसाई रूढ़िवादी समुदाय के एक वर्ग ने इसे "ईसाई विरोधी" बताया है। यूट्यूबर जेसी ह्यूज ने मूर्ति की एक तस्वीर साझा करते हुए कहा, "वैसे, जब हम जीतेंगे, तो हम इसे गिरा देंगे।" अमेरिकी सेना के पूर्व सैनिक रुचिर बख्शी ने ह्यूज की टिप्पणी को "हिंदू धर्म के खिलाफ धमकी" करार दिया।9
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न्यूयॉर्क. अमेरिका के पूर्वोत्तर इलाके में सोमवार को एक अहम क्षेत्रीय हवाई यातायात नियंत्रण केंद्र में तकनीकी खराबी के कारण सैकड़ों उड़ानें रद्द कर दी गईं। यह व्यवधान ऐसे समय हुआ जब संयुक्त राष्ट्र महासभा में शामिल होने के लिए कई देशों के नेता अमेरिका पहुंच रहे थे। हालांकि, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का विमान तय समय अनुसार वॉशिंगटन से न्यूयॉर्क के लिए रवाना हुआ।
फिलाडेल्फिया में हवाई यातायात केंद्र का एक अहम सर्किट खराब हो गया, जिससे इस शहर के साथ-साथ कैनेडी, ला-गार्डिया और नेवार्क हवाई अड्डों पर आने वाली उड़ानें भी प्रभावित हुईं। बाद में संघीय उड्डयन प्रशासन को पता चला कि कहीं और जारी निर्माण कार्य की वजह से 'बैकअप फाइबर ऑप्टिक लाइन' भी कट गई थी। -
काहिरा. सूडान के एक सुदूरवर्ती इलाके में सोने की खदान ढहने से कम से कम 67 लोगों की मौत हो गई। चिकित्सकों के एक समूह और हादसे में बचे लोगों ने बुधवार को यह जानकारी दी। यह हादसा वेस्ट कोर्डोफान प्रांत के नूहूद शहर में अल-जारा सोने की खदान में हुआ। यह इलाका अर्धसैनिक बल 'रैपिड सपोर्ट फोर्सेज' के नियंत्रण में है, जो पिछले तीन साल से ज्यादा समय से देश की सेना के साथ लड़ाई लड़ रही है। हादसे में बचे हुए लोगों ने बताया कि खदान ढहने की घटना मंगलवार देर रात हुई और कई लोग अब भी लापता हैं। चिकित्साकर्मियों के समूह ने कहा कि मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है, क्योंकि मलबे में दबे लोगों या जीवित बचे लोगों की तलाश के लिए खोज और बचाव अभियान अभी जारी है।
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वाशिंगटन. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) उद्योग के प्रमुख दिग्गजों के बीच आमतौर पर सहमति कम ही देखने को मिलती है और ऐसे में जब वे किसी मुद्दे पर एक राय बनाते हैं तो उस पर ध्यान जाना स्वाभाविक है। एंथ्रोपिक के दारियो अमोडेई, ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन, स्पेसएक्सएआई के एलन मस्क और उद्योग जगत की अन्य प्रमुख हस्तियों ने हाल के दिनों में कहा है कि एआई के विकास की रफ्तार धीमी करने की जरूरत है। यह सहमति एंथ्रोपिक के एक शोधकर्ता के इस्तीफे के बाद सामने आई, जिन्होंने इस तकनीक से मानवता को होने वाले गंभीर खतरों की चेतावनी दी थी। हालांकि, घरेलू और वैश्विक प्रतिस्पर्धा, मुनाफे की प्रेरणा और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विरोध जैसे कारक एआई के विकास की गति को लेकर किसी समन्वित प्रयास की राह में बाधा बने हुए हैं। गृह सुरक्षा विभाग में उभरती प्रौद्योगिकी नीति के पूर्व निदेशक और न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर निक रीज का कहना है कि फिर भी, यह स्थिति उद्योग को ''सफलता की हमारी परिभाषा को नए सिरे से तय करने'' के लिए मजबूर कर सकती है।
रीज ने कहा, ''अगर हम एआई में सफलता को उसी तरह देखें जैसे विमानन क्षेत्र में सफलता को देखते हैं? विमान समय पर पहुंचे और न जाने कितने समय से कोई दुर्घटना न हुई हो। हम वाणिज्यिक विमानों की दुर्घटनाओं को स्वीकार नहीं करते, लेकिन एआई की बड़ी विफलताओं को स्वीकार कर लेते हैं।'' सैद्धांतिक रूप से प्रमुख एआई स्टार्टअप अपने मॉडल के विकास की गति कभी भी धीमी कर सकते हैं। लेकिन तकनीक में हुई तेज प्रगति के पीछे और अधिक शक्तिशाली मॉडल बनाने की प्रतिस्पर्धा भी एक प्रमुख कारण रही है। व्हाइट हाउस भी इस प्रयास का समर्थन करता रहा है ताकि अमेरिका एआई के क्षेत्र में चीन से अपनी बढ़त न खोए। एंथ्रोपिक और ओपनएआई संभावित रूप से रिकॉर्ड स्तर के सार्वजनिक शेयर निर्गम की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं। हालांकि, ओपनएआई ने कहा है कि वह इस साल सार्वजनिक होने की योजना को टाल रहा है और फिलहाल सुरक्षा प्रयासों पर ध्यान दे रहा है। इसी वजह से उद्योग की ओर से सामने रखे गए प्रस्ताव आपसी सहयोग और कुछ हद तक सरकारी नियमन पर निर्भर हैं। अमोडेई ने हाल में एक विस्तृत लेख प्रकाशित किया, जिसमें उन्होंने उन्नत एआई के विकास को धीमा करने की योजना सामने रखी। उनके एक प्रस्ताव के अनुसार, एआई के क्षेत्र में अग्रणी कंपनियों, जिन्हें आम तौर पर 'फ्रंटियर लैब्स' कहा जाता है, को स्वतंत्र बाहरी मूल्यांकनकर्ताओं को ''लगातार, कर्मचारी जैसे स्तर का पहुंच अधिकार'' देने के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए। इन मूल्यांकनकर्ताओं की टीमों के पास कंपनियों के कार्यालयों में काम करने, प्रवेश कार्ड और कंपनी के लैपटॉप इस्तेमाल करने जैसी सुविधाएं होनी चाहिए, ताकि वे सुरक्षा संबंधी गतिविधियों की निगरानी कर सकें। अमोडेई ने लिखा कि एंथ्रोपिक इस कदम के लिए अभी ''एकतरफा प्रतिबद्धता'' जता रही है। ऑल्टमैन ने सोशल मीडिया पर इसे ''बहुत अच्छा विचार'' बताया और कहा कि ओपनएआई भी इसका अनुसरण करेगी। ऑल्टमैन ने उन्नत एआई के लिए सुरक्षा मानक तय करने वाले ''संघीय ढांचे'' का स्वागत किया। हालांकि उन्होंने कहा कि एआई सुरक्षा पर काम करने के लिए कंपनी को कानून बनने या प्रतिस्पर्धा-विरोधी नियमों से छूट मिलने का इंतजार करने की जरूरत नहीं है। अमोडेई ने सरकार द्वारा नियमन और हस्तक्षेप की भी वकालत की। इसमें अमेरिका और अन्य लोकतांत्रिक देशों की सरकारों की मदद से अग्रणी एआई कंपनियों के बीच समन्वय शामिल है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रमुख प्रयोगशालाएं ''साझा सुरक्षा मानक और अनियंत्रित एआई विकास की रफ्तार की सीमाएं'' तय कर सकती हैं। अमोडेई की योजना में अमेरिका और अन्य देशों द्वारा ''सत्तावादी सरकारों'' के साथ भी समन्वय का प्रस्ताव है। उन्होंने माना कि चीन से सहयोग हासिल करने सहित इसमें कई कठिनाइयां हैं। -
हांगकांग. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के तेजी से विकास के संभावित जोखिमों पर दुनिया में बहस तेज होने के बीच अमेरिका और चीन अधिक शक्तिशाली एआई मॉडल विकसित करने की दौड़ में आगे बढ़ रहे हैं। अमेरिका कई वर्षों तक एआई मॉडल की क्षमता, शोध और अन्य क्षेत्रों में चीन सहित अन्य देशों से आगे रहा है। हालांकि, चीन अब तेजी से इस अंतर को कम कर रहा है। अमेरिकी नेतृत्व वाले प्रतिबंधों के कारण चीन को अत्याधुनिक चिप और उन्हें बनाने वाली मशीनों सहित कुछ उन्नत प्रौद्योगिकियों तक पहुंच नहीं है। स्टैनफोर्ड इंस्टीट्यूट फॉर ह्यूमन-सेंटर्ड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के एक जानकार सहित विशेषज्ञों और हालिया रिपोर्टों के अनुसार, चीन एआई के क्षेत्र में अमेरिका के लिए मजबूत प्रतिद्वंद्वी बनकर उभरा है और इस साल उसने अमेरिकी बढ़त को काफी हद तक कम कर दिया है। जॉन्स हॉपकिन्स स्कूल ऑफ एडवांस्ड इंटरनेशनल स्टडीज के सैम सैक्स ने कहा, ''अमेरिकी और चीनी मॉडलों के बीच अंतर कम और अस्थिर है।'' एआई को लेकर यह बहस ऐसे समय हो रही है जब चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के इस महीने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात के लिए वाशिंगटन आने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का कहना है कि एआई का भविष्य काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिका और चीन क्या कदम उठाते हैं और किन कदमों से बचते हैं। बीजिंग स्थित स्टार्टअप मूनशॉट एआई ने 'किमी के3' मॉडल जारी कर सिलिकॉन वैली का ध्यान आकर्षित किया। एआई बेंचमार्किंग मंच 'आर्टिफिशियल एनालिसिस' के अनुसार, जुलाई में जारी होने के कुछ समय बाद यह वैश्विक स्तर पर मॉडल की क्षमता के मामले में तीसरे स्थान पर था। हालांकि, अब यह नौवें स्थान पर है और एंथ्रोपिक, ओपनएआई, मेटा तथा स्पेसएक्सएआई के नए मॉडलों से पीछे है। डीपसीक ने जनवरी 2025 में अपना 'आर1'
मॉडल जारी कर वैश्विक स्तर पर हलचल मचा दी थी। यह समान अमेरिकी मॉडलों की तुलना में कम लागत वाला था। अप्रैल में कंपनी ने अपने 'वी4' मॉडल का पूर्वावलोकन किया और ज्ञान, तर्क क्षमता तथा सीमित मानवीय मार्गदर्शन में जटिल कामों की योजना बनाकर उन्हें पूरा करने की क्षमता में सुधार का दावा किया। चीनी स्टार्टअप जेड.एआई के 'जीएलएम-5.2' मॉडल ने जून में सिलिकॉन वैली में ध्यान आकर्षित किया। इसके बाद अगस्त में जारी 'जीएलएम-5.3' में कोडिंग और स्वायत्त रूप से कार्य करने की क्षमता में सुधार किया गया, जिससे इसकी वैश्विक रैंकिंग में बढ़ोतरी हुई। अलीबाबा ने जुलाई में 'क्यूवेन3.8-मैक्स' मॉडल का पूर्वावलोकन किया। कंपनी ने इसे शृंखला का अपना सबसे शक्तिशाली मॉडल बताया। चीन के सुरक्षा राज्य मंत्री चेन यीशिन ने चेतावनी दी है कि एआई देश की राजनीतिक और वैचारिक सुरक्षा के साथ-साथ साइबर हमलों, डेटा लीक और शासन व्यवस्था के लिए कई तरह के खतरे पैदा कर सकता है। रविवार को प्रकाशित एक लेख में चेन ने कहा कि ''शत्रुतापूर्ण ताकतों और गलत मंशा वाले व्यक्तियों'' द्वारा इस्तेमाल किए जाने पर एआई चीन की राजनीतिक, संस्थागत और वैचारिक सुरक्षा को नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने कहा कि एआई से तैयार नकली ऑडियो और वीडियो का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर ''राजनीतिक अफवाहें'' फैलाने के लिए किया जा सकता है। उन्होंने एंथ्रोपिक के क्लॉड और ओपनएआई के जीपीटी जैसे मॉडलों का उदाहरण देते हुए कहा कि इनका इस्तेमाल साइबर सुरक्षा की कमजोरियों की पहचान कर उन्हें नुकसान पहुंचाने के लिए किया जा सकता है। चीनी नेताओं ने एआई के विकास में तेजी लाने और तकनीकी आत्मनिर्भरता हासिल करने की जरूरत पर जोर दिया है। साथ ही उन्होंने जोखिमों पर नियंत्रण और एआई के वैश्विक नियमन के लिए एक ढांचा बनाने की आवश्यकता भी बताई है। अमेरिका ने चीन की एआई कंपनियों पर ''औद्योगिक स्तर पर डिस्टिलेशन'' का आरोप लगाया है। इसमें अपेक्षाकृत शक्तिशाली एआई मॉडलों की क्षमताओं की नकल या उन्हें दोहराने के लिए उनका इस्तेमाल करना शामिल है।
एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट की लिजी ली के अनुसार, डिस्टिलेशन एआई उद्योग में इस्तेमाल होने वाली सामान्य तकनीक है। हालांकि, अमेरिकी एजेंसियों ने विशेष रूप से आरोप लगाया है कि चीनी कंपनियों ने अमेरिकी अग्रणी मॉडलों की प्रतिबंधित क्षमताएं हासिल करने के लिए अनधिकृत पहुंच और अन्य तरीकों का इस्तेमाल किया। एफबीआई, राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी और साइबर सुरक्षा एवं बुनियादी ढांचा सुरक्षा एजेंसी ने आठ सितंबर को जारी रिपोर्ट में आरोप लगाया कि चीनी एआई डेवलपर्स ने ''आक्रामक, दुर्भावनापूर्ण और लक्षित डिस्टिलेशन गतिविधियों'' के जरिये अमेरिका के कुछ सबसे उन्नत एआई मॉडलों की क्षमताएं हासिल कीं। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने भी आठ सितंबर को एक कार्यक्रम में कहा था, ''चीनी हमारे मॉडलों से डिस्टिल करते हैं और वे हमसे कभी आगे नहीं निकल सकते।'' चीन ने इन आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि डिस्टिलेशन का इस्तेमाल कई एआई कंपनियां करती हैं। उसने अमेरिका से ''बेबुनियाद आरोप'' लगाने से बचने को कहा और उस पर ''एआई उद्योग पर एकाधिकार'' कायम करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। -
लॉस एंजिलिस. सोमवार रात आयोजित एमी पुरस्कार समारोह में 'एप्पल टीवी' के धारावाहिक 'विडोज बे' की धूम रही जिसने कॉमेडी श्रेणी में एक ही सत्र में सबसे ज्यादा पुरस्कार जीतने का नया रिकॉर्ड बना दिया। धारावाहिक ने सर्वश्रेष्ठ कॉमेडी सीरीज और सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार समेत कुल 14 पुरस्कार अपने नाम किए। धारावाहिक के मुख्य अभिनेता मैथ्यू रीस ने अकेले तीन पुरस्कार जीते।
'द पिट' ने लगातार दूसरी बार सर्वश्रेष्ठ ड्रामा सीरीज का पुरस्कार अपने नाम किया। इसके मुख्य अभिनेता नोआ वाइल भी लगातार दूसरी बार ड्रामा श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता चुने गए। 'प्लुरिबस' के लिए रिया सीहॉर्न ने ड्रामा श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार जीता। वहीं 'हैक्स' के पांचवें और अंतिम सीजन के लिए जीन स्मार्ट ने पांचवीं बार कॉमेडी श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार अपने नाम किया। स्मार्ट, एमी के इतिहास में ऐसी पहली अभिनेत्री बन गई हैं, जिन्होंने तीन से अधिक सीजन तक चलने वाली किसी सीरीज के हर सीजन में अभिनय के लिए पुरस्कार जीता है। कॉमेडी की बाकी सभी प्रमुख श्रेणियों में 'विडोज बे' का दबदबा रहा। शो ने समारोह की रात लगभग हर बड़े पुरस्कार पर कब्जा जमाया और कॉमेडी सीरीज के एक ही सीजन में सबसे ज्यादा एमी पुरस्कार जीतने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। उसने पिछले साल 'द स्टूडियो' के बनाए 13 पुरस्कारों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। दिलचस्प बात यह है कि 'द स्टूडियो' भी 'एप्पल टीवी' का धारावाहिक था। दो एमी पुरस्कार हाथ में लिए रीस ने समारोह के बाद कहा, ''जश्न लंबे समय तक चलेगा, अलग-अलग अंदाज में होगा और उम्मीद है कि कभी-कभी काफी जोरदार भी होगा।'' 'द पिट' 25 नामांकनों के साथ इस साल ड्रामा श्रेणी में सबसे आगे थी, जबकि अंतिम सीजन के लिए 'हैक्स' को 24 नामांकन मिले थे और वह कॉमेडी श्रेणी में सबसे आगे थी। लेकिन जब पुरस्कार जीतने की बारी आई तो दोनों ही सीरीज खास असर नहीं छोड़ सकीं। सोमवार रात 'हैक्स' के लिए जीन स्मार्ट की जीत ही एकमात्र पुरस्कार रही। पुरस्कार लेते समय भावुक स्मार्ट ने दर्शकों की तालियों के बीच कहा, ''यह सफर कितना शानदार रहा है।''
75 वर्षीय स्मार्ट अब तक कुल आठ एमी पुरस्कार जीत चुकी हैं।
रिया सीहॉर्न ने 'एप्पल टीवी' की 'प्लुरिबस' में अहम भूमिका निभाने के लिए अपने करियर का पहला एमी पुरस्कार जीता। सीहॉर्न को 'ब्रेकिंग बैड' के निर्माता विंस गिलिगन की सीरीज 'बेटर कॉल शॉल' में अपनी शानदार भूमिका के लिए दो बार नामांकित किया गया था, लेकिन तब वह पुरस्कार नहीं जीत पाई थीं। गिलिगन ने ही 'प्लुरिबस' में सीहॉर्न को मुख्य भूमिका में रखा। उन्होंने इस सीरीज के लेखन के लिए अपने करियर का पांचवां एमी पुरस्कार जीता। एलिसन जेनी ने 'द डिप्लोमैट' के लिए ड्रामा श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री और टॉम पेल्फ्रे ने 'टास्क' के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार जीता। दोनों ने 'द पिट' के कई नामांकित कलाकारों को पीछे छोड़ा। सीबीएस द्वारा प्रसारण से हटाए गए 'द लेट शो विद स्टीफन कोलबर्ट' ने सर्वश्रेष्ठ विविधतापूर्ण कार्यक्रम का पुरस्कार जीता। इस साल यह शो छह एमी पुरस्कार जीत चुका है। सीबीएस ने इसके बंद होने की वजह आर्थिक कारण बताई थी। हालांकि, कई लोगों का मानना था कि ट्रंप प्रशासन की आलोचना करने के कारण शो को निशाना बनाया गया। पुरस्कार समारोह के दौरान कोलबर्ट ने मजाकिया अंदाज में कहा, ''अगर आपको आज रात की कॉमेडी पसंद आ रही है, तो इसका श्रेय मेरे पुराने लेखकों को जाता है।''
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वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'गॉड ब्लेस द यूएसए' के गायक ली ग्रीनवुड की पत्नी किम्बर्ली ग्रीनवुड को बारबाडोस और पूर्वी कैरिबियाई देशों के लिए अमेरिकी राजदूत के तौर पर सोमवार को नामित किया। किम्बर्ली ग्रीनवुड उन नामित लोगों की सूची में शामिल हैं, जिनके नामों को पुष्टि के लिए ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी सीनेट (उच्च सदन) के पास भेजा है। किम्बर्ली ने सोमवार को बाद में इंस्टाग्राम पर अपने पति और ट्रंप के साथ एक तस्वीर साझा की और उन्हें नामित करने के लिए राष्ट्रपति का आभार जताया। उन्होंने पोस्ट में कहा, ''राष्ट्रपति जी, मुझ पर विश्वास जताने और मुझे सेवा का यह असाधारण अवसर देने के लिए धन्यवाद।'' किम्बर्ली के पति ली ग्रीनवुड राष्ट्रपति ट्रंप के पसंदीदा गायकों में से एक हैं। उनका लोकप्रिय देशभक्ति गीत वर्षों से ट्रंप के राजनीतिक कार्यक्रमों में उनके मंच पर आने के दौरान बजाया जाता रहा है। ट्रंप ने ली ग्रीनवुड के साथ कारोबारी साझेदारी भी की थी। दोनों ने मिलकर 59.99 अमेरिकी डॉलर की 'गॉड ब्लेस द यूएसए बाइबल' बेची थी। ली ग्रीनवुड ने अपनी पत्नी की सराहना और उनके नामांकन का स्वागत करते हुए इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट में कहा कि उनकी पत्नी ने ट्रंप के साथ 18 वर्षों तक काम किया था जब ट्रंप 'मिस यूनिवर्स संगठन' के मालिक थे और किम्बर्ली ग्रीनवुड विभिन्न राज्यों में होने वाली सौंदर्य प्रतियोगिताओं का संचालन करती थीं।
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वाशिंगटन. अमेरिका के एक सांसद ने रूस पर प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव वाले विधेयक में एक संशोधन पेश किया है जिसमें भारत समेत रूस के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के नाम कानून में शामिल करने की मांग की गई है। 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट' को पिछले महीने अमेरिकी सीनेट ने भारी बहुमत (86-11 वोट) से पारित किया था। इस विधेयक का मकसद न सिर्फ रूस के नेतृत्व और ऊर्जा क्षेत्र पर प्रतिबंध लगाना है, बल्कि उन जहाजों के 'शैडो फ्लीट' (गुप्त बेड़े) पर भी प्रतिबंध लगाना है जिनकी मदद से मॉस्को तेल आपूर्ति पर लगी पाबंदियों से बचता है। अमेरिका का मानना है कि रूस के कच्चे तेल व्यापार से यूक्रेन के खिलाफ युद्ध के लिए धन जुटाया जा रहा है। इस विधेयक में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चीन और भारत समेत रूस के प्रमुख तेल व्यापार साझेदार देशों पर शत प्रतिशत शुल्क लगाने का अधिकार देने का भी प्रस्ताव है। गत सात अगस्त को अमेरिकी सीनेट से पारित हुए विधेयक में रूस के व्यापारिक साझेदारों के नाम नहीं हैं, लेकिन इसमें मात्रा के हिसाब से तेल और गैस के पांच सबसे बड़े आयातकों का जिक्र है। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के लिए भेजे जाने से पहले इस विधेयक का 'हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स' (प्रतिनिधि सभा) में पारित होना जरूरी है। तीन नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले सदन में कामकाज के लिए चार दिन बचे हैं। डेमोक्रेट सांसद स्टेनी होयर द्वारा पेश किए गए संशोधन में चीन, भारत, तुर्किए, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाक गणराज्य, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), सिंगापुर, कजाकिस्तान और किर्गिज गणराज्य को उन देशों के रूप में नामित करने की मांग की गई है जिन पर शत प्रतिशत शुल्क लगाया जा सकता है। दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप को शुल्क लगाने की और अधिक शक्तियां देने का कड़ा विरोध करते डेमोक्रेट सांसद ग्रेगरी मीक्स ने 'प्रावधान-113' को पूरी तरह खत्म करने का संशोधन पेश किया है। इस प्रावधान के तहत राष्ट्रपति को रूस के व्यापारिक साझेदारों पर व्यापक द्वितीयक शुल्क लगाने का अधिकार देने का प्रस्ताव है।
- काठमांडू. नेपाल ने पिछले महीने आई भयावह बाढ़ में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई स्याफ्रुबेसी-रसुवागढ़ी सड़क को फिर से बनाने के लिए चीन से मदद मांगी है। चीन के साथ व्यापार के लिये अहम माने जाने वाले इस मार्ग को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 26 अगस्त को अचानक आई बाढ़ से काफी नुकसान पहुंचा था। इस बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल में भारी तबाही मचाई। इस आपदा में करीब 1,400 लोगों की मौत हो गई, जबकि 5,000 से अधिक लोग लापता हैं। 'द काठमांडू पोस्ट' अखबार की खबर के मुताबिक, स्याफ्रुबेसी को रसुवागढ़ी से जोड़ने वाली लगभग 16 किलोमीटर लंबी सड़क का 6.5 अरब नेपाली रुपये की चीनी निधि वाली परियोजना के तहत उन्नयन किया जा रहा था।लेकिन बाढ़ ने इसके बड़े हिस्से को बहा दिया, जिससे सड़क को भारी नुकसान पहुंचा और दोनों देशों के बीच व्यापार का एक अहम संपर्क टूट गया। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के शुरुआती अनुमानों के अनुसार, रसुवागढ़ी और गल्छी के बीच क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत में कुल मिलाकर लगभग 55 अरब नेपाली रुपये (करीब 36.4 करोड़ अमेरिकी डॉलर) का खर्च आएगा। अवसंरचना विकास मंत्री सुनील लमसाल ने शनिवार को अखबार को बताया, "चीन ने हमें मदद देने का मौखिक भरोसा दिया है, हालांकि अभी तक कोई लिखित समझौता नहीं हुआ है।" लमसाल ने कहा, "यह रास्ता न सिर्फ नेपाल और चीन के बीच व्यापार का गलियारा है, बल्कि इसके किनारे कई बस्तियां भी हैं।" उन्होंने कहा, "फिलहाल, हम रसुवागढ़ी जाने वाले रास्ते को खुला रखने के लिए एक अस्थायी मार्ग का इस्तेमाल करने की तैयारी कर रहे हैं। लंबे समय के लिए हमें एक सुरक्षित सड़क बनाने की जरूरत है, लेकिन अभी हम अस्थायी मार्ग से ही काम चला लेंगे।"
- काठमांडू. से नेपाल विद्युत प्राधिकरण को रोजाना 18 घंटे बिजली निर्यात करने की मंजूरी दे दी है। भारतीय दूतावास के सूत्रों ने भारत के बिजली मंत्रालय के एक नोटिस का हवाला देते हुए बताया कि मुजफ्फरपुर-ढलकेबार 400 केवी लाइन के जरिये 600 मेगावाट तक और टनकपुर-महेंद्रनगर 132 किलोवाट पारेषण लाइन के जरिये 54 मेगावाट तक बिजली निर्यात करने की मंजूरी 31 दिसंबर तक दी गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 26 अगस्त को नेपाल में आई भोटेकोशी-त्रिशूली बाढ़ से सात चालू पनबिजली परियोजनाओं और पांच सौर संयंत्रों को नुकसान पहुंचा, जिससे कुल मिलाकर लगभग 275 मेगावाट बिजली आपूर्ति में रुकावट आई। एक सरकारी बयान में कहा गया, ''इस मंजूरी से नेपाल को इस मुश्किल समय में अपनी बिजली की जरूरतें पूरी करने में मदद मिलेगी और भारत व नेपाल के बीच गहरे और लंबे समय से चले आ रहे ऊर्जा सहयोग को और मजबूती मिलेगी।'' बयान में आगे कहा गया, ''भारत, नेपाल का समर्थन करने और ऊर्जा क्षेत्र में आपसी सहयोग को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।''
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लंदन. लंदन में टेम्स नदी के तट पर रविवार को पहली बार गंगा आरती का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों लोगों ने हिस्सा लिया। 'टेम्स तट पर गंगा आरती : प्रकाश उत्सव' नाम से आयोजित इस कार्यक्रम का आयोजन 'चिन्मय मिशन यूके' ने 'टोटली टेम्स' के वार्षिक उत्सव के सहयोग से किया। यह आयोजन 'चिन्मय मिशन' की स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में दुनियाभर में हो रहे कार्यक्रमों का हिस्सा था। भारत में गंगा के तट पर होने वाली प्रसिद्ध आरती की परंपरा से प्रेरित इस आयोजन की परिकल्पना प्रकृति, ज्ञान और चेतना के जीवनदायी प्रवाह के प्रतीक के रूप में की गई थी। 'चिन्मय मिशन यूके' की शिक्षिका ब्रह्मचारिणी श्रीप्रिया चैतन्य ने कहा, "पीढ़ियों से श्रद्धालु गंगा के तट पर दीप प्रज्वलित कर मां गंगा की आराधना करते और प्रकृति एवं जीवन को संवारने वाली दिव्य शक्तियों के प्रति श्रद्धा एवं कृतज्ञता दर्शाते आए हैं।'' उन्होंने कहा, "टेम्स नदी के तट पर गंगा आरती भी इसी भावना को आगे बढ़ाती है और कृतज्ञता, आशा तथा एकता के साझा भाव में लोगों को एक साथ लाती है।" चैतन्य ने बताया कि चिन्मय मिशन के लिए गंगा ज्ञान के प्रवाह का भी प्रतीक है।
उन्होंने कहा, "हमारे संस्थापक स्वामी चिन्मयानंद ने अपना जीवन वेदांत के शाश्वत ज्ञान और आध्यात्मिक संदेश को हिमालय की पवित्र भूमि से जन-जन तक पहुंचाने और उसे उनके दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के लिए समर्पित कर दिया। हिंदू धर्म की महान दार्शनिक एवं आध्यात्मिक परंपराओं में से एक वेदांत की इस दिव्य विरासत को आगे बढ़ाते हुए चिन्मय मिशन के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित यह समारोह ज्ञान, सेवा और कृतज्ञता की उस पवित्र धारा का उत्सव भी है, जो भौगोलिक सीमाओं से परे निरंतर प्रवाहित हो रही है।'' गंगा आरती हिंदू धर्म का एक प्राचीन धार्मिक अनुष्ठान है। इसमें बड़ी संख्या में दीयों को प्रज्वलित कर प्रार्थना, भजन-संगीत और मंत्रोच्चार के माध्यम से मां गंगा के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त की जाती है। यह अनुष्ठान प्रकृति और उसके जीवनदायी स्वरूप के प्रति आस्था तथा सम्मान की भी अभिव्यक्ति है। चिन्मय मिशन के एक प्रवक्ता ने कहा, "प्रकृति के प्रति श्रद्धा गंगा आरती का केवल एक हिस्सा नहीं, बल्कि इसकी आत्मा में निहित है। यह मां गंगा के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता अर्पित करने का माध्यम है। हिंदू परंपरा में मां गंगा को पवित्र, जीवनदायिनी और समस्त जीवों का पोषण करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है।" टेम्स के तट पर आयोजित इस आरती में परंपरा की पवित्रता के साथ नदी की निर्मलता और पर्यावरण की मर्यादा का भी पूरा ध्यान रखा गया। पूरा अनुष्ठान नदी के तट पर जमीन पर ही संपन्न हुआ। आरती में प्रयुक्त किसी भी वस्तु को टेम्स में प्रवाहित नहीं किया गया। 'टोटली टेम्स' एक न्यास की ओर से आयोजित वार्षिक उत्सव है, जिसकी शुरुआत 1997 में हुई थी। इस उत्सव के तहत कला, पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक विरासत और शिक्षा से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से टेम्स नदी के महत्व और समृद्ध विरासत को रेखांकित किया जाता है। -
लंदन/ दिवंगत भारतीय उद्यमी श्रीचंद परमानंद हिंदुजा द्वारा स्थापित स्विट्जरलैंड के निजी बैंक का नाम बदलकर 'आर्या बैंक प्रिवी' कर दिया गया है। बैंक ने यह कदम अपने संस्थापक की स्विट्जरलैंड और भारत के बीच संबंधों को मजबूत करने की विरासत के सम्मान में उठाया है। जेनेवा मुख्यालय वाला यह बैंक अब एक नयी कार्यकारी टीम और नए दृष्टिकोण के साथ कारोबार के अगले चरण में प्रवेश कर रहा है। संस्थापक की बेटी शानू एस. पी. हिंदुजा बैंक की चेयरपर्सन हैं और परिवार की विरासत को आगे बढ़ा रही हैं। शानू हिंदुजा ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा, "स्विट्जरलैंड, यूरोप और भारत के बीच आर्थिक संबंधों को और मजबूत करना दशकों से हमारे परिवार के दृष्टिकोण का केंद्र रहा है।" उन्होंने कहा, ''यह प्रतिबद्धता श्रीचंद पी. हिंदुजा के दोनों देशों के बीच सेतु बनाने के विश्वास से जुड़ी है। वह स्विट्जरलैंड बैंकिंग लाइसेंस हासिल करने वाले पहले भारतीय उद्यमी थे। इसलिए हम ऐसे कदमों का स्वागत करता है, जो व्यापार, निवेश और साझा समृद्धि को मजबूत करते हैं।'' शानू ने बताया कि 'आर्या' नाम संस्कृत के उस शब्द से लिया गया है, जो सम्मान, ईमानदारी और श्रेष्ठ आचरण को दर्शाता है।
- कोलंबो. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कहा कि भारत संकट के समय हमेशा श्रीलंका के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंध साझा इतिहास, संस्कृति और आस्था पर आधारित हैं।तीन दिवसीय श्रीलंका दौरे पर कोलंबो पहुंचे सिंह ने भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि दोनों देशों के करीबी सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंध द्विपक्षीय रिश्तों की मजबूत नींव हैं। सिंह ने कहा, "जब भी इस द्वीपीय देश पर कोई संकट आएगा, भारत हमेशा श्रीलंका के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा।" उन्होंने भारतीय प्रवासियों को दोनों देशों के बीच ''सेतु'' बताते हुए कहा कि वे मित्रता मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सिंह ने भारत की आर्थिक प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि 2026-27 की पहली तिमाही में वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच देश की अर्थव्यवस्था 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी। वस्तुओं और सेवाओं का निर्यात 2014 के 45 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 79 लाख करोड़ रुपये हो गया है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन विनिर्माता भी बन गया है। उन्होंने कहा कि भारत ने पिछले 12 वर्षों में 38 देशों के साथ व्यापार समझौते किए हैं, जिनमें आठ प्रमुख देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते शामिल हैं। भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते पर उन्होंने कहा कि यह समझौता विशाल ईयू बाजार तक पहुंच उपलब्ध कराता है और भारत की बढ़ती कूटनीतिक और आर्थिक क्षमताओं को दर्शाता है।
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न्यूयॉर्क. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि वैश्विक व्यवधानों के बावजूद भारत ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की "उल्लेखनीय वृद्धि" दर्ज की है और तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद वह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है। सीतारमण ने बुधवार को न्यूयॉर्क में निवेशकों के साथ उच्चस्तरीय कारोबारी बैठक में हिस्सा लिया। इसका आयोजन न्यूयॉर्क स्थित भारत के महावाणिज्य दूतावास ने बैंक ऑफ अमेरिका के साथ मिलकर किया था। वित्त मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा कि निवेशकों को संबोधित करते हुए सीतारमण ने कहा, "वैश्विक व्यवधानों और तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है और उसने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है।" सीतारमण उत्तरी कैरोलाइना के एशविल में जी20 सदस्य देशों के वित्त मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने के बाद यहां पहुंची थीं। सीतारमण ने कहा कि भारत ने मजबूत सुधारोन्मुखी रुख अपनाते हुए दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) सहित कई सुधारों के जरिये नियामकीय व्यवस्था में अधिक निश्चितता भी प्रदान की है।
'एक्स' पर दी जानकारी में कहा गया, "इन सुधारों से अनुपालन को आसान बनाने और कागजी कार्रवाई कम करने में मदद मिली है। एक दशक से अधिक समय पहले केंद्र में सरकार के कार्यभार संभालने के बाद से यह उसकी प्रमुख प्राथमिकताओं में रहा है।" उन्होंने कहा कि सरकार ने जिन प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया है, उनमें पूंजीगत परिसंपत्तियों का निर्माण, बुनियादी ढांचे के विकास के जरिये उद्योग को लगातार समर्थन देना, खासकर विमानन क्षेत्र में निवेश बढ़ाना; अनुकूल व निवेश के लिए सुविधाजनक माहौल तैयार करना; एआई व डेटा केंद्रों के विकास को बढ़ावा देना; वैश्विक क्षमता केंद्रों को समर्थन देना; सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के लिए ऋण की उपलब्धता सुनिश्चित करना और बैंकों की गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) को कम करना शामिल है।
वित्त मंत्री ने कहा कि इन उपायों से बैंकों और उद्योग के लिए कारोबार के अधिक अनुकूल माहौल तैयार करने में मदद मिली है जिससे वे आगे बढ़ने, विस्तार करने और अधिक मजबूत होकर उभरने में सक्षम हुए हैं। सीतारमण ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने लगातार बनी चुनौतियों के बावजूद भारत पिछले कई वर्षों से राजकोषीय विवेक और राजकोषीय अनुशासन के रास्ते पर निरंतर प्रतिबद्ध रहा है। ये चुनौतियां कोविड-19 वैश्विक महामारी की शुरुआत के बाद से बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि भारत में निवेश के माहौल में काफी सुधार हुआ है। केंद्र तथा राज्य सरकारें अपने-अपने क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने और उसे सुगम बनाने के लिए पहले की तुलना में अधिक उत्सुकता एवं प्रतिस्पर्धी रवैया दिखा रही हैं। मंत्री ने कहा कि ये प्रयास 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य को हासिल करने के व्यापक राष्ट्रीय प्रयास का हिस्सा हैं। इससे पहले, स्वागत भाषण में अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने कहा कि पहली तिमाही के जीडीपी आंकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाते हैं। वित्त मंत्रालय के अनुसार, उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार एवं निवेश के संबंधों को और मजबूत कर दोनों देश भारत की तेजी से बढ़ती आर्थिक यात्रा का लाभ उठा सकते हैं। -
वॉशिंगटन. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा से मुलाकात की और वैश्विक आर्थिक परिदृश्य तथा भारत के बदलते वृद्धि परिवेश पर चर्चा की। सीतारमण ने मंगलवार को एशविल में जी20 सदस्य देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नर (एफएमसीबीजी) की बैठक से इतर जॉर्जीवा से मुलाकात की। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, '' बैठक में भारत में जारी संरचनात्मक बदलावों एवं व्यापक आर्थिक आकलन तथा वृद्धि के अनुमानों में इन बदलावों को उचित रूप से शामिल करने के महत्व पर भी चर्चा हुई।'' मंत्रालय ने कहा कि दोनों नेताओं ने वैश्विक आर्थिक परिदृश्य और भारत की बदलती विकास यात्रा पर चर्चा की। जॉर्जीवा ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, ''भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ विचार साझा किए। भारत के शानदार वृद्धि प्रदर्शन, वैश्विक परिदृश्य और साथ मिलकर काम करने के हमारे साझा संकल्प पर विचार किया।'' वित्त मंत्रालय के बयान के अनुसार, आईएमएफ की प्रबंध निदेशक ने भारत के मजबूत आर्थिक प्रदर्शन की सराहना की तथा कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूती हासिल की है। वित्त मंत्री ने भारत की मजबूत व्यापक आर्थिक बुनियाद तथा उभरते बाजारों एवं विकासशील अर्थव्यवस्थाओं (ईएमडीई) में हो रहे संरचनात्मक बदलावों को पर्याप्त रूप से दर्शाने वाले मजबूत और साक्ष्य-आधारित निगरानी ढांचे के महत्व पर जोर दिया। बैठक में उभरते बाजारों एवं विकासशील अर्थव्यवस्थाओं (ईएमडीई) में संस्थागत क्षमता, व्यापक आर्थिक नीति निर्माण और सांख्यिकीय प्रणालियों को मजबूत करने के लिए समर्थन सहित आईएमएफ की क्षमता विकास पहलों पर भी चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने विश्लेषणात्मक क्षमताओं को मजबूत करने, मजबूत व्यापक आर्थिक नीतियों को समर्थन देने और वैश्विक आर्थिक मजबूती में योगदान के लिए भारत-आईएमएफ के निरंतर सहयोग के महत्व पर जोर दिया।
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काठमांडू. नेपाल के एकमात्र अरबपति और समाजसेवी बिनोद चौधरी ने देश में अचानक आई भयानक बाढ़ के बाद त्वरित कार्रवाई के लिये मंगलवार को भारत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस आपदा का दायरा किसी की भी सोच से कहीं ज्यादा बड़ा था। चौधरी ने फिर से निर्माण के काम को "बहुत बड़ा" बताया और बताया कि कैसे गांव, बाजार, स्कूल और पुल बह गए और 500 मेगावाट से ज्यादा बिजली उत्पादन क्षमता ठप हो गई। चौधरी ने 'पीटीआई-वीडियो' को बताया, "इस तबाही का पैमाना उतना बड़ा है, जितना किसी ने कभी सोचा भी नहीं होगा। इसी जगह पर पहले भी बाढ़ आई थी, यहां तक कि पिछले साल भी, लेकिन वह मौजूदा हालात के मुकाबले कुछ भी नहीं थी।" उन्होंने नुकसान का दायरा बताते हुए कहा, "हमने लगभग एक हजार लोगों को खो दिया है। करीब 4,000 लोग लापता हैं... मेरी पिछली गिनती के अनुसार, हमने लगभग 40 पुल खो दिए हैं।" चौधरी ने कहा, "500 मेगावाट से ज्यादा क्षमता वाले ऊर्जा संयंत्र ठप हो गए। साथ ही, कई परियोजनाओं - खासकर ऊर्जा परियोजना - जो निर्माणाधीन थीं, उन्हें रोकना पड़ा; वे बह गए या उन्हें नुकसान पहुंचा। इसलिए, यह वाकई बहुत दुखद स्थिति है।" मंगलवार को नेपाल में आई भयानक अचानक बाढ़ से मरने वालों की संख्या 1,000 के पार पहुंच गई।
रुक-रुक कर हो रही बारिश और बाढ़ की नयी चेतावनी के बीच बचावकर्मी फंसे हुए लोगों का पता लगाने की कोशिश कर रहे थे। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, 583 विदेशियों समेत लगभग 4,000 लोग लापता हैं, जबकि करीब 12,000 लोगों को बचाया जा चुका है। चौधरी ने आपदा के समय नेपाल सरकार, सुरक्षा एजेंसियों और मित्र पड़ोसी देशों, खासकर भारत की प्रतिक्रिया की तारीफ की। उन्होंने कहा, "मुझे यह मानना होगा कि सरकार और सुरक्षा एजेंसियों ने, और साथ ही हमारे मित्र पड़ोसी देशों-खासकर भारत-ने राहत सामग्री तुरंत उपलब्ध कराकर बहुत अच्छा काम किया है।" उन्होंने नेपाल का साथ देने के लिए खास तौर पर नयी दिल्ली और प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ की—न सिर्फ हालिया आपदा के बाद, बल्कि 2015 के भूकंप के दौरान भारत की मदद को याद करते हुए भी। उन्होंने कहा, "मुझे इसमें कोई शक नहीं है कि भारत भी उतना ही चिंतित है।
मैंने कई बार ऐसा देखा है। यहां तक कि 2015 के भूकंप के दौरान भी, भारत सबसे आगे था; प्रधानमंत्री मोदी ही सबसे पहले थे जिन्होंने तुरंत बचाव कार्य, मदद, अवसंरचना और साजोसामान का इंतज़ाम किया।" उन्होंने कहा कि भारत ने "वह अहमियत और वह क्षमता" हासिल कर ली है, साथ ही बड़े पैमाने पर जवाब देने की काबिलियत भी पा ली है। चौधरी ने कहा, "भारत ने जिस बड़े पैमाने पर काम किया है और अवसंरचना बनायी है, उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि पिछले 12 सालों में भारत द्वारा तैयार अवसंरचना की गुणवत्ता में जबरदस्त बदलाव आया है। इसलिए, पूरी प्रणाली ही एक अलग स्तर और क्षमता की है।" उन्होंने कहा, "मैं उम्मीद करता हूं और भारत सरकार, प्रधानमंत्री मोदी और उन सभी लोगों से अपील करता हूं जो अहम भूमिका निभा सकते हैं, कि वे हर संभव कोशिश करें। मुझे लगता है कि ये ऐसे पल हैं जब भारत बड़ा बदलाव ला सकता है। -
लंदन. ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री केअर स्टार्मर ने मंगलवार को लंदन से सांसद पद से इस्तीफा देने की योजना की घोषणा की और कहा कि वह अब ''अंतरराष्ट्रीय मामलों'' पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं। स्टार्मर ने पिछले महीने लेबर पार्टी के नेता और प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद एंडी बर्नहम ने 10 डाउनिंग स्ट्रीट में प्रधानमंत्री का पद संभाला था। स्टार्मर ने पहले संकेत दिया था कि वह सांसद बने रहेंगे और हाउस ऑफ कॉमन्स में बैठकर सरकार का समर्थन करेंगे। पूर्व वकील स्टार्मर (63) ने संसद के ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद मंगलवार को उसके दोबारा शुरू होने के दिन सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में कहा कि उन्होंने लेबर पार्टी की सक्रिय राजनीति से हटने का फैसला किया है। उनके इस्तीफे से लंदन की होलबोर्न और सेंट पैनक्रास सीट पर उपचुनाव होगा। स्टार्मर ने कहा, ''गर्मियों के दौरान मुझे अपने भविष्य पर विचार करने का समय मिला। मैंने फैसला किया है कि अब होलबोर्न और सेंट पैनक्रास से सांसद पद छोड़ने और यह जिम्मेदारी किसी और को सौंपने का सही समय है।'' उन्होंने कहा, ''महान फ्रैंक डॉबसन से 11 साल पहले यह जिम्मेदारी संभालने के बाद देश के सबसे अच्छे निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करना मेरे लिए सम्मान और सौभाग्य की बात रही है।'' स्टार्मर ने कहा कि अब वह अन्य मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं, जिनमें तेजी से बदलती दुनिया में अंतरराष्ट्रीय मामले, रक्षा, सुरक्षा, व्यापार और प्रौद्योगिकी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि वह महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा से निपटने के लिए भी अन्य लोगों के साथ मिलकर काम करते रहेंगे। उन्होंने कहा, ''मैं हमेशा इस बात पर बेहद गर्व महसूस करूंगा कि मैंने उस जगह का प्रतिनिधित्व किया, जिसे मेरी पत्नी बच्चे और मैं अपना घर कहते हैं।'' उपचुनाव से ग्रीन पार्टी को लंदन की उस सीट पर अपनी दावेदारी मजबूत करने का मौका मिल सकता है, जहां इस वामपंथी दल को लगता है कि उसका अच्छा-खासा समर्थन है। ऐसी संभावना भी जताई जा रही है कि यह उपचुनाव ग्रीन पार्टी के नेता जैक पोलांस्की के लिए हाउस ऑफ कॉमन्स में सीट हासिल करने की परीक्षा बन सकता है। पार्टी के एक प्रवक्ता ने कहा, ''जैक ने हमेशा स्पष्ट किया है कि वह लंदन से सांसद बनना चाहते हैं। लंदन पिछले 20 वर्षों से अधिक समय से उनका घर रहा है।'' प्रवक्ता ने इस मुकाबले में उनके उतरने की संभावना से इनकार नहीं किया।
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न्यूयॉर्क. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि विविधता में एकता भारत के डीएनए में है और ''इसका उत्सव मनाया जाना चाहिए, इसका सम्मान किया जाना चाहिए और इसे स्वीकार किया जाना चाहिए।'' शनिवार को न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन स्थित इन्फोसिस थिएटर में आयोजित एक विशाल कार्यक्रम में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के 6,000 से अधिक सदस्यों और विभिन्न धर्मों के नेताओं को संबोधित करते हुए भागवत ने विविधता को अपनाने और समुदायों का समर्थन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, ''जब हम अमेरिका या यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका कहते हैं, तो एक शब्द की अक्सर चर्चा होती है और वह है बहुलतावाद। और जब हम भारत कहते हैं, तो एक और वाक्यांश की चर्चा होती है : विविधता में एकता।'' उनकी इस बात पर वहां उपस्थित लोगों ने तालियां बजाईं। उन्होंने यह बात 'अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग' फोरम द्वारा आयोजित 'यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन' कार्यक्रम में कही। उन्होंने कहा, ''भारत के लिए एकता और विविधता, दोनों उसके डीएनए में हैं।'' उन्होंने स्वामी विवेकानंद के एक संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि हर राष्ट्र के सामने एक लक्ष्य होता है, जिसे उसे पूरा करना होता है और एक नियति होती है, जिसे उसे साकार करना होता है। आरएसएस प्रमुख ने कहा, ''भारत को कौन-सी नियति मिली है? भारत का उद्देश्य इस विविधता में एकता को साकार करना और समय-समय पर दुनिया को भी इसका एहसास कराना है। हम एक हैं और हमारी यही विविधता हमारी एकता को और अधिक खूबसूरत बनाती है।'' करीब एक घंटे के अपने संबोधन में उन्होंने कहा, ''विविधता का उत्सव मनाया जाना चाहिए, उसका सम्मान किया जाना चाहिए और उसे स्वीकार किया जाना चाहिए। साथ ही हमें एकता की इस भावना को भी ध्यान में रखना चाहिए। यह बहुत सच्ची भावना है।'' 'यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन' कार्यक्रम में अमेरिका के 39 राज्यों और 853 शहरों से लोग शामिल हुए। अमेरिका के विभिन्न विश्वविद्यालयों के 250 से अधिक छात्र और 250 संगठन भी इसमें शामिल हुए। भागवत ने विविधता को अपनाने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा, ''हम एक-दूसरे के हैं''। उन्होंने समुदाय तथा दुनिया के प्रति अपना योगदान देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा, ''हम जो कुछ भी हासिल करते हैं, उसमें दूसरों का योगदान होता है। हम दुनिया से बहुत कुछ लेते हैं, इसलिए हमें भी दुनिया को कुछ वापस देना चाहिए। हम कितना कमाते हैं, यह महत्वपूर्ण नहीं है; महत्वपूर्ण यह है कि हम उसमें से कितना दूसरों के साथ बांटते हैं।'' भागवत (75) ने अमेरिका में रह रहे भारतीय प्रवासियों से अपनी 'कर्मभूमि' यानी जिस देश में वे रहकर काम कर रहे हैं, उसके प्रति वफादार रहने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा, ''हमारा कर्तव्य क्या है? हम अमेरिका में हैं। हम अमेरिका में रहते हैं। हम अमेरिका में कमाते हैं। इसलिए हम अमेरिका का हिस्सा हैं और हमें अमेरिका के प्रति सच्ची निष्ठा के साथ व्यवहार करना चाहिए।'' उनकी इस बात पर उपस्थित लोगों ने तालियां बजाईं। उन्होंने कहा, ''भारतीय प्रवासियों का अपनी कर्मभूमि के प्रति एक कर्तव्य है। उन्हें इसे पूरा करना चाहिए। उन्हें अपनी कर्मभूमि के प्रति वफादार रहना चाहिए।'' उन्होंने कहा, ''चूंकि भारत उनकी जन्मभूमि है, अगर उनके मन में कुछ करने की इच्छा है और वे अपनी कर्मभूमि के प्रति अपना कर्तव्य पूरा करने के बाद ऐसा कर सकते हैं, तो इसमें कोई रोक नहीं है, लेकिन यह अनिवार्य भी नहीं है। आपकी जन्मभूमि आपसे अपेक्षा करती है कि आप उन मूल्यों के अनुसार जीवन जिएं, जो उसने आपको दिए हैं। वह मूल्य है एकता।'' उन्होंने कहा, ''भारत आपसे अपेक्षा करता है कि आप उसी तरह जीवन जिएं, जिस तरह भारत ने आपको जीवन जीने की सोच दी है, क्योंकि यही मनुष्य के लिए संतुलित जीवन जीने का एक आदर्श तरीका है।'' आरएसएस प्रमुख ने जोर देकर कहा कि कोई राष्ट्र केवल भौगोलिक जमीन का एक टुकड़ा नहीं होता।
उन्होंने कहा, ''हर राष्ट्र की एक नियति होती है, जिसे उसे पूरा करना होता है। यही भारत की नियति है। आइए, भारतीयों के रूप में उस नियति के प्रति जागरूक हों और अपनी कर्मभूमि के साथ-साथ जन्मभूमि के प्रति भी अपने कर्तव्यों को पूरा करें। अगर हम ऐसा करते हैं, तो यह उन सभी समस्याओं से जूझ रही और हर कदम पर मुश्किलों का सामना कर रही दुनिया के लिए वरदान साबित होगा। हमें दुनिया को सहारा देना है। हमें इस दुनिया को किसी न किसी रूप में अपना सहयोग देना है।'' भागवत के मुख्य संबोधन से पहले विभिन्न धर्मों के नेताओं ने एकता, विविधता में एकजुटता, दयालुता, करुणा और एक-दूसरे की मदद करने की जरूरत का संदेश दिया। कार्यक्रम में रब्बियों के अंतरराष्ट्रीय संगठन रब्बिनिकल असेंबली के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रब्बी जैकब ब्लुमेंथल, न्यूयॉर्क शहर के ऐतिहासिक रिवरसाइड चर्च की आठवीं वरिष्ठ मंत्री और इस पद पर पहुंचने वाली पहली अफ्रीकी-अमेरिकी महिला एड्रिएन थॉर्न और वाशिंगटन डीसी स्थित ऐतिहासिक मस्जिद मुहम्मद के अध्यक्ष एवं इमाम तालिब एम शरीफ भी शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से हुई। इनमें भारतीय-अमेरिकी बच्चों ने भी प्रस्तुति दी और गीत-संगीत व नृत्य के जरिए भारत तथा दुनिया की संगीत विविधता को प्रदर्शित किया। प्रस्तुतियों में अफ्रीका, लातिन अमेरिका, चीन, यूरोप और पश्चिम एशिया समेत दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों की संस्कृतियों को प्रदर्शित किया गया। इनके जरिए एकता और विविधता तथा 'वसुधैव कुटुंबकम' (पूरी दुनिया एक परिवार है) का संदेश दिया गया। दर्शकों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद लिया और उत्साह बढ़ाने के तौर पर तालियां बजाईं। इनमें ढोल-ताशा जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों के जरिए संगीत प्रस्तुतियां भी शामिल थीं। इस अवसर पर 30 देशों के करीब 180 धार्मिक नेताओं ने पांच सूत्रीय 'कार्रवाई का आह्वान' जारी किया। इसमें कहा गया कि हमें ''शुरुआत खुद से करनी चाहिए'', ''एक-दूसरे के लिए खड़ा होना चाहिए'', ''जरूरत पड़ने से पहले रिश्ते बनाने चाहिए'', ''मिलकर सेवा करनी चाहिए'' और ''भविष्य की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।'' भागवत ने ''एकता की भावना के साथ विविधता को अपनाने और उससे समाज को समृद्ध बनाने'' के संदेश पर जोर दिया। उन्होंने कहा, ''विविधता स्वाभाविक है और एकता सत्य है। हमें इसे समझना होगा और इसी के अनुरूप अपने जीवन को ढालना होगा। -
केप कैनावेरल (अमेरिका). नासा की सबसे नयी और अत्याधुनिक अंतरिक्ष दूरबीन रविवार को अंतरिक्ष के लिए रवाना हो गई। इसका उद्देश्य दूसरे तारों के आसपास मौजूद ग्रहों की खोज करना, रहस्यमयी 'डार्क एनर्जी' का अध्ययन करना और ब्रह्मांड का अब तक का सबसे व्यापक सर्वेक्षण करना है। 'नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन' (नासा) में विज्ञान मिशन निदेशक निक्की फॉक्स ने कहा, ''यह दूरबीन हजारों सुपरनोवा, दसियों हजार ग्रहों, अरबों आकाशगंगाओं और खरबों तारों की खोज करने में सक्षम होगी। अपने विशाल दृश्य क्षेत्र के कारण यह ऐसे काम कर पाएगी, जो हम पहले कभी नहीं कर सके।
स्पेसएक्स ने केनेडी स्पेस सेंटर से सुबह 4.3 अरब डॉलर की लागत वाले 'रोमन स्पेस टेलीस्कोप' (रोमन अंतरिक्ष दूरबीन) को अत्यधिक शक्तिशाली फाल्कन हेवी रॉकेट के जरिए प्रक्षेपित किया। यह दूरबीन 16 लाख किलोमीटर दूर उस स्थान के लिए रवाना हुई जहां नासा की एक अन्य प्रमुख अंतरिक्ष दूरबीन 'जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप' पहले से मौजूद है। बस के आकार वाली इस दूरबीन का नाम नासा की पहली मुख्य खगोलशास्त्री दिवंगत नैंसी ग्रेस रोमन के नाम पर रखा गया है। इसे अपने गंतव्य तक पहुंचने में तीन महीने से अधिक का समय लगेगा। वहां पहुंचने के बाद यह अंतरिक्ष के छिपे हुए हिस्सों की अब तक की सबसे व्यापक तस्वीर पेश करेगी और ब्रह्मांड के अनजाने रहस्यों का पता लगाएगी। 'रोमन स्पेस टेलीस्कोप' का दृश्य क्षेत्र नासा की 'हबल स्पेस टेलीस्कोप' की तुलना में 100 गुना से भी अधिक बड़ा है। हबल 36 वर्षों से कक्षा में रहते हुए अंतरिक्ष की शानदार तस्वीरें भेज रही है। वहीं, जेम्स वेब दूरबीन ने कुछ वर्षों पहले इस अभियान में शामिल होकर ब्रह्मांड की शुरुआत से जुड़े बेहद पुराने खगोलीय पिंडों का अध्ययन शुरू किया था। ये तीनों अंतरिक्ष दूरबीनें यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के यूक्लिड अंतरिक्ष यान और चिली स्थित वेरा सी. रुबिन वेधशाला के साथ मिलकर ब्रह्मांड के कई बड़े रहस्यों को उजागर करने में मदद करेंगी। रोमन परियोजना की वरिष्ठ वैज्ञानिक जूली मैकएनेरी ने कहा, ''रोमन की विशाल पहुंच हमें अजीब, दुर्लभ और असामान्य चीजों को खोजने में मदद करेगी। यह भूसे के ढेर में सुई खोजने की हमारी परिभाषा को बदल देगी।'' वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि रोमन दूरबीन ब्रह्मांड के अधिकांश हिस्से को बनाने वाले 'डार्क मैटर' और 'डार्क एनर्जी' के बारे में भी नयी जानकारी देगी। ये दोनों अब तक वैज्ञानिकों के लिए रहस्य बने हुए हैं। रोमन द्वारा तैयार आकाशगंगाओं की सूची से वैज्ञानिक को यह समझने में मदद मिलेगी कि इन अदृश्य शक्तियों के कारण ब्रह्मांड कितनी तेजी से फैल रहा है। रोमन की सबसे बड़ी खासियत उसकी गति होगी। मैकएनेरी के अनुसार, रोमन जितने मिल्की वे (आकाशगंगा) के अवलोकन एक महीने में कर लेगी, उन्हें पूरा करने में हबल को करीब एक सदी लग सकती है। उन्होंने कहा कि रोमन हमारी आकाशगंगा के केंद्र में मौजूद हिस्से का अब तक का सबसे गहरा अध्ययन कर सकेगी। इस दूरबीन में एक अत्याधुनिक इन्फ्रारेड कैमरा लगाया गया है, जिसकी संवेदनशीलता हबल जैसी है, लेकिन यह हबल से करीब 1,000 गुना तेजी से काम करेगा। इसके अलावा इसमें ऐसा उपकरण भी है, जो तारों की रोशनी को रोक सकेगा। इससे रोमन उन बेहद हल्के ग्रहों की सीधी तस्वीर लेने में सक्षम हो सकती है, जो किसी तारे की परिक्रमा कर रहे हों। इस दूरबीन को भविष्य में ईंधन भरने के लिए भी डिजाइन किया गया है। यदि आने वाले दशक में कोई रोबोटिक ईंधन टैंकर उपलब्ध होता है, तो इससे रोमन का कार्यकाल बढ़ाया जा सकता है। -
वाशिंगटन. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को कहा कि भारत ने वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच विदेशों में हो रहे घटनाक्रम पर लगातार नजर रखते हुए और देश की अपनी जरूरतों को ध्यान में रखकर मजबूती से स्थिति का सामना किया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शिकागो में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा, ''इसके परिणामस्वरूप भारतीय किसानों, भारतीय परिवारों और भारत की रसद व्यवस्था को नुकसान नहीं उठाना पड़ा।'' उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच कई देशों की आर्थिक गणनाएं गड़बड़ा गईं, लेकिन भारत ने अपनी सीमाओं के बावजूद चुनौतीपूर्ण माहौल में अपने नागरिकों की रक्षा करने में सफलता हासिल की। सीतारमण ने कहा कि कोविड-19 महामारी के बाद से भारत ने सात प्रतिशत से अधिक की आर्थिक वृद्धि बनाए रखी है और इस साल भी वृद्धि इसी दायरे में रहने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि यह वृद्धि कोविड-19 महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध, शुल्क संबंधी अनिश्चितताओं और ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच हासिल हुई है। वित्त मंत्री ने कहा कि वैश्विक घटनाक्रम पर नजर रखने के साथ-साथ घरेलू जरूरतों को समझने की भारत की क्षमता ने देश को अनिश्चित माहौल में मजबूती से आगे बढ़ने में मदद की। राजकोषीय अनुशासन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ''हमने एक लक्ष्य तय किया है कि 2030 तक कर्ज को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 50 प्रतिशत के स्तर तक लाना है। इसलिए मैं उसी दिशा में काम करूंगी।'' उन्होंने कहा कि कई विकसित अर्थव्यवस्थाओं का कर्ज अभी भी उनके जीडीपी के 200 प्रतिशत से अधिक है। भारत ने राजकोषीय घाटे को लेकर भी अनुशासन का रास्ता अपनाया है और उसने तय लक्ष्य की दिशा में प्रगति की है। सीतारमण ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री रहने के दौरान और देश के प्रधानमंत्री के रूप में उनके राजकोषीय अनुशासन को दुनिया ने देखा है। क्रेडिट रेटिंग के बारे में उन्होंने कहा कि इसमें सुधार हो रहा है। यह सुधार सामाजिक कल्याण के लिए जरूरी संसाधनों में कटौती करके नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था के बेहतर प्रबंधन से हो रहा है। सीतारमण ने 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि अब इसके लिए करीब 20 वर्ष ही बचे हैं। उन्होंने कहा कि जिस गति और स्तर पर सुधार हो रहे हैं, उसके लिए अधिक समर्थन की जरूरत है। उन्होंने कहा कि देश को ऐसे प्रतिभाशाली और अनुभवी लोगों से अधिक सहयोग चाहिए, जो आगे की दिशा के लिए सुझाव दे सकें। वित्त मंत्री ने कहा कि इसके अलावा देश की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए पूंजी के रूप में समर्थन भी बेहद जरूरी है।
- वाशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नयी सैन्य अंतरिक्ष एकेडमी बनाने की घोषणा की और ह्यूस्टन स्थित नासा के मिशन नियंत्रण केंद्र के दौरे के दौरान अंतराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (स्टेशन) पर मौजूद अंतरिक्ष यात्रियों से बातचीत की, जिनमें अनिल मेनन भी शामिल हैं। ट्रंप ने शुक्रवार को 'जॉनसन स्पेस सेंटर' के मिशन नियंत्रण केंद्र से आईएसएस पर मौजूद अंतरिक्षयात्रियों से फोन पर बात करते हुए कहा, ''यह बहुत बड़े सम्मान की बात है, आपके साथ होना बहुत बड़ा सम्मान है और मैं बस जेसिका, अनिल तथा जैक का धन्यवाद व्यक्त करना चाहता हूँ - ये महान अमेरिकी, महान देशभक्त और बहादुर लोग हैं।'' नासा के अंतरिक्ष यात्री जैक हैथवे, अनिल मेनन और जेसिका मीर आईएसएस के लिए एक्सपिडिशन 75' का हिस्सा हैं। ट्रंप ने अंतरिक्ष खोज में प्रयासों के लिए संबंधित अंतरिक्षयात्रियों को ''अग्रदूतों का समूह'' करार दिया। उन्होंने नयी अंतरिक्ष एकेडमी बनाने की भी घोषणा की।
- काठमांडू. नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश और बचाव अभियान में मदद के लिए भारत की 11 सदस्यीय तकनीकी टीम ने शनिवार को प्रभावित क्षेत्रों में मौके पर जाकर निरीक्षण किया। शुक्रवार को काठमांडू पहुंची इस टीम में चिकित्सक, चिकित्सा सहायक और अभियंता शामिल थे।यह टीम शनिवार को नुवाकोट जिले के त्रिशूली पहुंची, ताकि एक जलविद्युत परियोजना की सुरंग में फंसे श्रमिकों को बचाने के प्रयासों में मदद की जा सके। भारतीय दूतावास ने शनिवार को काठमांडू में 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''आज भारत की विशेषज्ञ तकनीकी टीम ने अचानक आई बाढ़ से प्रभावित क्षेत्र में जलविद्युत सुरंगों का मौके पर जाकर जायजा लिया, ताकि वहां फंसे लोगों की तलाश और बचाव अभियान में मदद की जा सके।'' राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, चिलीमे और लांगटांग क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण पूरा करने के बाद भारतीय टीम ने सुरंग के आसपास बचाव कार्य से जुड़े आवश्यक काम शुरू कर दिए। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास रसुवा जिले में स्थित त्रिशूली-3ए जलविद्युत परियोजना की सुरंग में फंसे लोगों तक पहुंचने और मलबा हटाने के लिए नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के 82 सदस्यीय संयुक्त सुरक्षा दल ने शुक्रवार रात अभियान शुरू किया। सुरंग के प्रवेश द्वार पर जमा मिट्टी व मलबे और खराब मौसम के कारण बचाव अभियान में मुश्किलें आ रही हैं। नेपाल सेना के अनुसार, नेपाली सुरक्षा बलों ने अब तक विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों से 191 श्रमिकों को सुरक्षित निकाल लिया है। नेपाल ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में परिवहन सेवाएं फिर शुरू करने के लिए भारत और चीन से 42 'बेली ब्रिज' बनाने में मदद का अनुरोध किया था। बेली ब्रिज ऐसे पुल होते हैं जिन्हें भारी मशीनरी या विशेष उपकरणों के बिना भी तेजी से जोड़कर तैयार किया जा सकता है।
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काठमांडू. नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ के बाद स्थानीय अधिकारियों की सहायता के लिए 11 सदस्यीय भारतीय टीम शनिवार को काठमांडू पहुंची। इस प्राकृतिक आपदा में 500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि लगभग 2,000 लोग अब भी लापता हैं। भारतीय दूतावास के सूत्रों के अनुसार, नेपाल सरकार के अनुरोध पर इस टीम को भेजा गया है, जिसमें चिकित्साकर्मी और बचाव विशेषज्ञ शामिल हैं। टीम को नेपाल के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में भेजा जा रहा है, जहां व्यापक स्तर पर राहत एवं बचाव अभियान चलाया जा रहा है। बुधवार को रसुवा और मध्य नेपाल के अन्य हिस्सों में आई भीषण बाढ़ के कारण 500 से अधिक लोगों की जान चली गई और मानव बस्तियों, सड़कों, पुलों तथा जलविद्युत बुनियादी ढांचों को भारी नुकसान पहुंचा है। नेपाल ने शुक्रवार को कहा था कि वह अपने सुरक्षाबलों की अधिकतम तैनाती को ''प्राथमिकता'' देना चाहता है, जो स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों और दुर्गम इलाकों से अच्छी तरह परिचित हैं। हालांकि, विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा कि सरकार उन जटिल मामलों में अंतरराष्ट्रीय सहायता लेने के लिए तैयार है, जहां अत्यंत कठिन संरचनाओं के लिए विशेष तकनीकी कौशल की आवश्यकता है। नेपाल ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में परिवहन सेवाएं फिर से शुरू करने के लिए भारत और चीन से 42 'बेली ब्रिज' बनाने में मदद का अनुरोध किया था। बेली ब्रिज ऐसे पुल ऐसे होते हैं जिन्हें भारी मशीनरी या विशेष उपकरणों के बिना भी तेजी से जोड़कर तैयार किया जा सकता है।
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ताशकंद. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शनिवार को उज्बेकिस्तान पहुंचे। अपने दौरे के दौरान वह दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के उद्देश्य से उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी की उज्बेकिस्तान की चौथी यात्रा के दौरान हवाई अड्डे पर पहुंचने पर राष्ट्रपति मिर्जियोयेव ने उनका स्वागत किया। मोदी दो देशों उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान की यात्रा के पहले चरण में ताशकंद पहुंचे हैं। इस यात्रा का उद्देश्य मध्य एशिया में भारत की रणनीतिक साझेदारियों को मजबूत करना और इस क्षेत्र के साथ सभ्यतागत संबंधों को और गहरा करना है। प्रधानमंत्री मोदी उज्बेकिस्तान की अपनी दो दिवसीय यात्रा के दौरान राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ व्यापार, निवेश, डिजिटल संपर्क, रक्षा और ऊर्जा क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा करेंगे। मोदी ने रवाना होने से पहले कहा, ''मैं राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ व्यापार और निवेश, डिजिटल संपर्क, रक्षा तथा ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने तथा 'विकसित भारत' और 'नया उज्बेकिस्तान' के हमारे साझा दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के उपायों पर चर्चा के लिए उत्सुक हूं।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि वह ताशकंद में शास्त्री स्मारक और 'ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ऑरिएनटल स्टडी' स्थित महात्मा गांधी केंद्र का भी दौरा करेंगे। उन्होंने कहा कि ये दोनों देशों के बीच कायम घनिष्ठ सांस्कृतिक और लोगों से लोगों के संबंधों के प्रति सम्मान के प्रतीक हैं। ताशकंद से प्रधानमंत्री किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर जापारोव के निमंत्रण पर बिश्केक जाएंगे, जहां वह शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के 26वें शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।
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वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि उनके देश ने वेनेजुएला के 65 अरब बैरल तेल भंडार पर नियंत्रण हासिल करने के लिए एक समझौता किया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए इस समझौते के संबंध में जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि इस समझौते के लिए अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने बातचीत की थी। ट्रंप ने अपने पोस्ट में लिखा, "अमेरिका ने अभी-अभी वेनेजुएला के साथ एक समझौता किया है जो दुनिया के इतिहास का सबसे बड़ा तेल सौदा है!'' वेनेजुएला सरकार के प्रेस कार्यालय से संपर्क किया गया लेकिन अभी तक उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। ट्रंप के निर्देश पर अमेरिकी सेना द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़कर अमेरिका लाने और उन पर मादक पदार्थ तस्करी से जुड़े संघीय आरोपों में मुकदमा चलाने के लिए की गई कार्रवाई के करीब नौ महीने बाद इस समझौते की घोषणा हुई है। ट्रंप ने शुक्रवार शाम सोशल मीडिया पर अपनी पोस्ट में संकेत दिया कि वेनेजुएला के साथ हुआ यह समझौता एक निजी साझेदारी का हिस्सा है। 'व्हाइट हाउस' (अमेरिकी राष्ट्रपति का अधिकारिक आवास एवं कार्यालय) ने इस सौदे में शामिल निजी क्षेत्र के साझेदारों के बारे में टिप्पणी के अनुरोध पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। साथ ही, यह व्यवस्था किस तरह काम करेगी, इसके बारे में भी कोई विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया।
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने शुक्रवार को 'एक्स' पर कहा कि यह समझौता वेनेजुएला में 100 अरब अमेरिकी डॉलर के निजी निवेश का रास्ता खोलेगा और अमेरिका में गैस की कीमतों में कमी लाएगा। रूबियो ने पोस्ट में कहा, "यह समझौता अमेरिकी और वेनेजुएला के लोगों, दोनों के लिए एक बड़ी जीत है।
























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