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वॉशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर जल्द ही अमेरिकी मुद्रा (डॉलर) पर दिखाई देंगे और यह 1861 में डॉलर की शुरुआत के बाद से पहली बार होगा जब किसी मौजूदा राष्ट्रपति के हस्ताक्षर मुद्रा पर अंकित किए जाएंगे। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने यह निर्णय ऐसे वक्त लिया है जब अमेरिका इस वर्ष देश की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ का जश्न मना रहा है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय के अधिकारी ब्रैंडन बीच ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा ''अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ पर राष्ट्रपति डोनाल्ड जे ट्रंप के हस्ताक्षर वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के हस्ताक्षर के साथ जल्द ही अमेरिकी मुद्रा पर दिखाई देंगे। ऐसा इतिहास में पहली बार होगा और यह राष्ट्रपति के नेतृत्व एवं हमारे महान राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण का प्रतीक है।'' इस महीने की शुरुआत में, एक संघीय कला आयोग ने अमेरिकी स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ पर ट्रंप की छवि वाले 24 कैरेट सोने के स्मारक सिक्के के अंतिम डिजाइन को मंजूरी दी थी। बेसेंट ने एक बयान में कहा, ''राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में, हम अभूतपूर्व आर्थिक विकास, डॉलर के स्थायी प्रभुत्व और राजकोषीय मजबूती एवं स्थिरता की राह पर हैं।" उन्होंने कहा, "हमारे महान देश और राष्ट्रपति डोनाल्ड जे ट्रंप की ऐतिहासिक उपलब्धियों को मान्यता देने का इससे अधिक प्रभावशाली तरीका कोई नहीं हो सकता कि अमेरिकी डॉलर पर उनका नाम अंकित हो और यह पूरी तरह उचित है कि यह ऐतिहासिक मुद्रा स्वतंत्रता के 250वें वर्ष के अवसर पर जारी की जाए।'' ब्रैंडन बीच ने कहा कि अमेरिका के 'गोल्डन एज' आर्थिक पुनरुत्थान के वास्तुकार के रूप में राष्ट्रपति ट्रंप की छवि निर्विवाद है और अमेरिकी मुद्रा पर उनके हस्ताक्षर छापना न केवल उचित है, बल्कि पूरी तरह से न्यायसंगत भी है।
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दुबई (यूएई). इजराइल ने शुक्रवार को ईरान पर नये सिरे से हमले शुरू किए जबकि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि युद्ध खत्म करने के लिए सार्थक बातचीत जारी है। ट्रंप ने होर्मुज जलडमरुमध्य खोलने के लिए ईरान को दी गई समय-सीमा आगे बढ़ा दी, हालांकि ईरान के झुकने के कोई संकेत नहीं मिले हैं। इजराइल की सेना ने कहा कि शुक्रवार को तेहरान में हमले करते हुए बैलिस्टिक मिसाइल और अन्य हथियार बनाने के ठिकानों को निशाना बनाया गया। सेना ने कहा कि इसके अलावा पश्चिमी ईरान में मिसाइल लॉन्चर और भंडारण स्थलों पर भी हमले किए गए।
इजराइल में भी हवाई हमले के सायरन बजे और सेना ने कहा कि वह ईरान की मिसाइलों को रोकने की कोशिश कर रही है। वहीं, ईरान ने खाड़ी देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले जारी रखे, जिसकी वजह से बहरीन, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में अलर्ट जारी किया गया। कुवैत ने कहा कि शुवेख बंदरगाह को हमले में "भौतिक नुकसान" हुआ है, लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ।
शेयर बाजारों में गिरावट और पश्चिम एशिया के बाहर युद्ध का आर्थिक प्रभाव फैलने के बाद ट्रंप पर दबाव बढ़ता जा रहा है कि वह होर्मुज जलडमरुमध्य से ईरान का नियंत्रण खत्म करवाएं। यह एक बहुत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जिसके जरिए आमतौर पर दुनियाभर में 20 प्रतिशत तेल की आपूर्ति होती है। अमेरिका ने युद्धविराम के लिए ईरान के सामने 15 बिंदुओं का प्रस्ताव पेश करने का दावा किया है, जिनमें इस जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण खत्म करना भी शामिल है। साथ ही, अमेरिका ने क्षेत्र में हजारों अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती का आदेश भी दिया है, जिससे संकेत मिलता है कि वह इस अहम समुद्री मार्ग पर सैन्य कार्रवाई भी कर सकता है। ट्रंप ने पहले चेतावनी दी थी कि अगर 48 घंटे में जलमार्ग नहीं खोला गया तो ईरान के ऊर्जा संयंत्रों को नष्ट कर दिया जायेगा। बाद में उन्होंने इस समय-सीमा को बढ़ाकर पांच दिन कर दिया था। बृहस्पतिवार को उन्होंने इसे छह अप्रैल तक बढ़ा दिया और कहा कि सार्थक बातचीत हो रही है। हालांकि, ईरान का कहना है कि वह किसी भी तरह की बातचीत में शामिल नहीं है।
इस बीच, युद्ध शुरू होने के बाद वॉल स्ट्रीट में सबसे खराब गिरावट देखी गई, और एशियाई बाजारों में भी गिरावट आई। तनाव कम होने की संभावनाओं पर संदेह बढ़ने के कारण तेल की कीमतें फिर बढ़ गईं। 'ब्रेंट क्रूड' की कीमत 107 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो 28 फरवरी को ईरान पर इजराइल और अमेरिका के हमले के बाद से 45 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्शाती है। ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ ने कहा कि अमेरिका ने युद्धविराम की संभावना के लिए ईरान को 15 बिंदुओं की एक सूची सौंपी है। इस सूची में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर प्रतिबंध और होर्मुज जलडमरुमध्य को फिर से खोलने जैसी शर्तें शामिल हैं। ईरान ने अमेरिकी प्रस्ताव को खारिज कर दिया है और अपनी ओर से पांच बिंदुओं का प्रस्ताव रखा है, जिसमें युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई और होर्मुज जलडमरुमध्य पर उसकी संप्रभुता को मान्यता देने की मांग शामिल है। कई देशों के राजनयिक अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच सीधी वार्ता कराने की कोशिश कर रहे हैं। यह वार्ता संभवतः पाकिस्तान में आयोजित की जा सकती है। - काठमांडू। 'जेन जेड' आंदोलन के आदर्श 35 वर्षीय बालेंद्र शाह 'बालेन' ने शुक्रवार को लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित नेपाल के सबसे युवा प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेकर इतिहास रच दिया। रैपर, इंजीनियर और फिर नेता बने बालेंद्र शाह नेपाल की राजनीति में पीढ़ीगत बदलाव का प्रतीक बन गए हैं। बालेन मधेस क्षेत्र से देश के 47वें प्रधानमंत्री बनने वाले पहले व्यक्ति भी हैं। बालेन ने नेपाल के झापा-5 निर्वाचन क्षेत्र में के.पी. शर्मा ओली को लगभग 50,000 मतों के भारी अंतर से हराया था। ओली चार बार देश के प्रधानमंत्री रह चुके हैं। बालेन ने 2022 में काठमांडू के महापौर पद के लिए हुए चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की थी। पिछले साल सितंबर में सोशल मीडिया पर प्रतिबंध और भ्रष्टाचार के खिलाफ राष्ट्रव्यापी हिंसक प्रदर्शनों के बाद ओली नीत गठबंधन सरकार गिर गई थी। इसके बाद 'जेन जेड' के युवाओं ने अंतरिम सरकार का नेतृत्व करने के लिए 35 वर्षीय इंजीनियर बालेन को लोकप्रिय उम्मीदवार माना था। लेकिन बालेन ने उस समय अंतरिम सरकार का नेतृत्व करने से इनकार कर दिया और कहा कि वह संसदीय चुनाव लड़कर पूर्ण कार्यकाल के लिए सरकार का नेतृत्व करना पसंद करेंगे। 'जेन जेड' 1997 से 2012 के बीच पैदा हुई पीढ़ी है।जनवरी में, बालेन रवि लामिछाने के नेतृत्व वाली नवगठित राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) में शामिल हो गए और जल्द ही उन्हें पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया गया। काठमांडू के महापौर के रूप में, बालेन को व्यापक सुधारों और महानगर के सौंदर्यीकरण का श्रेय दिया जाता है। देश की राजधानी काठमांडू में जन्मे बालेन आयुर्वेद चिकित्सक राम नारायण शाह और गृहिणी ध्रुवदेवी शाह के सबसे छोटे पुत्र हैं। उन्हें बचपन से ही संगीत और कविता में रुचि थी तथा शिक्षा के दौरान उन्होंने रैप संगीत की ओर रुख किया। काठमांडू से सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी करने के बाद, बालेन ने कर्नाटक के विश्वेश्वरैया प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग में स्नातकोत्तर की उपाधि हासिल की। बालेन ने 2018 में सबीना काफले से शादी की और इस दंपति की एक बेटी है। बालेन के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर 10 लाख से अधिक 'सब्सक्राइबर' हैं।
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नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के नेता बालेंद्र शाह ने शुक्रवार को नेपाल के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। महज 35 साल की उम्र में पीएम बनने वाले बालेंद्र शाह के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स अकाउंट का बायो चेंज हो गया। पीएम बालेंद्र शाह के एक्स अकाउंट के बायो में “नेपाल के प्रधानमंत्री, रैपर/स्ट्रक्चरल इंजीनियर/पूर्व मेयर, काठमांडू मेट्रोपॉलिटन हमसे संपर्क करें: +977 9851279900” लिखा है।
राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने संविधान के आर्टिकल 76(1) के तहत बालेंद्र शाह को नियुक्त करने के बाद दिन में पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस समारोह में देश के उपराष्ट्रपति राम सहाय प्रसाद यादव, चीफ जस्टिस प्रकाश मान सिंह राउत, नेशनल असेंबली के चेयरमैन नारायण प्रसाद दहल, पूर्व प्रधानमंत्री, सीनियर अधिकारी, सिक्योरिटी चीफ और डिप्लोमैटिक कम्युनिटी के सदस्य शामिल हुए।पीएम बालेंद्र शाह का शपथग्रहण समारोह हिंदू रीति-रिवाज से पूरा हुआ। पहली बार वैदिक-सनातन परंपरा में हुए शपथ समारोह में सात शंख बजाए गए। यह पहली बार है जब मधेसी समुदाय का कोई नेता प्रधानमंत्री बना है।बालेंद्र शाह ने पीएम पद की शपथ लेने से कुछ घंटे पहले गुरुवार को अपना नया रैप सॉन्ग रिलीज किया। यह गाना नेपाल के भविष्य को लेकर उम्मीदों से भरा है। इस गाने को रिलीज होने के कुछ ही घंटों के भीतर बीस लाख से ज्यादा बार देखा गया।इस गाने में उनके अब तक के सफर की एक झलक है, जब वे ‘अंडरग्राउंड रैप’ की दुनिया में सक्रिय थे और संगीत के जरिए नेपाल में भ्रष्टाचार और दूसरी सामाजिक समस्याओं पर आवाज उठाते थे। बालेंद्र शाह ने पूर्वी नेपाल के झापा-5 में पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली को 49,614 वोटों के बड़े अंतर से हराया। उन्हें 68,348 वोट मिले, जबकि ओली को 18,734 वोट मिले। यह 1991 के बाद से नेपाल के संसदीय चुनावों में किसी भी उम्मीदवार को मिले सबसे ज्यादा वोट हैं।शाह ने 2022 में राजनीति में कदम रखा, जब उन्होंने काठमांडू के मेयर का चुनाव लड़ा और एक निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीते। 27 अप्रैल 1990 को काठमांडू में एक मधेसी परिवार में जन्मे बालेंद्र शाह ने भारत में विश्वेश्वरैया टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी से स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री ली थी। इंजीनियरिंग में उनके एकेडमिक बैकग्राउंड ने उन्हें इंफ्रास्ट्रक्चर, शहरी विकास और पब्लिक वर्क्स की प्रैक्टिकल समझ दी, जिससे काठमांडू मेट्रोपॉलिटन सिटी के मेयर के तौर पर उनके कार्यकाल के दौरान उनके गवर्नेंस के तरीके को बनाने में मदद मिली। (I -
वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बृहस्पतिवार को सोशल मीडिया मंच 'ट्रुथ सोशल' पर कहा कि ईरानी नेताओं को ''बहुत देर होने से पहले बातचीत शुरू कर देनी चाहिए, क्योंकि एक बार ऐसा हो जाने पर, पीछे मुड़ने का कोई रास्ता नहीं होगा।'' यह पोस्ट ट्रंप के उस बयान के एक दिन बाद की गई है जिसमें उन्होंने कहा था कि दोनों देश समझौते के करीब हैं। ट्रंप ने बृहस्पतिवार को फिर कहा कि अमेरिका द्वारा प्रस्तावित 15 सूत्री युद्धविराम योजना को ईरान द्वारा अस्वीकार किए जाने के बाद तेहरान ''हमसे समझौता करने की भीख मांग रहा है।''
- ढाका.। बांग्लादेश में एक बस के परिवहन नौका पर चढ़ने की कोशिश के दौरान नदी में गिर जाने से कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य लोग लापता हैं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि बस दक्षिण-पश्चिमी राजबारी जिले में दौलाडिया टर्मिनल पर बुधवार शाम करीब सवा पांच बजे पद्मा नदी में गिर गई। दमकल सेवा के अधिकारी सोहेल राणा ने घटनास्थल पर संवाददाताओं से कहा, '' हमजा (बचाव पोत) ने क्रेन की मदद से बस को बाहर निकाला और उसके भीतर से 14 शव मिले।'' उन्होंने बताया कि गोताखोरों ने इससे पहले दो महिलाओं के शव बरामद किए थे और शेष 14 शव खराब मौसम के बीच छह घंटे के प्रयास के बाद बस को नदी से बाहर निकाले जाने पर बुधवार मध्यरात्रि के आस पास मिले। राणा ने बताया कि दमकल सेवा और तटरक्षक बल के गोताखोर सेना और पुलिस की मदद से लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं। अधिकारियों का अनुमान है कि ढाका जा रही इस बस में बच्चों समेत करीब 40 यात्री सवार थे और उनमें से अधिकतर ईद की छुट्टियां मनाकर राजधानी लौट रहे थे। राजबारी जिला प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने बचाव अभियान की अद्यतन जानकारी लेने के लिए उनसे फोन पर बात की और हादसे की जांच के आदेश दिए। पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों ने पहले बताया था कि करीब 11 यात्री तैरकर किनारे पहुंचने में सफल रहे या उन्हें बचा लिया गया लेकिन अधिकतर अन्य लोग अब भी लापता हैं। टर्मिनल के पर्यवेक्षक मोनिर हुसैन ने कहा, ''जब बस पोंटून (जलाशय में तैरता पुल) से नौका की ओर बढ़ रही थी तभी एक छोटी सहायक नौका पोंटून से टकरा गई और बस चालक के स्टीयरिंग पर से नियंत्रण खो देने के कारण बस नदी में जा गिरी।'' उन्होंने कहा, ''बस हमारी आंखों के सामने नदी में गिर गई लेकिन हम कुछ नहीं कर सके।''दौलाडिया स्वास्थ्य परिसर के चिकित्सकों ने कहा कि दो महिलाओं के शव लाए गए जबकि एक अन्य महिला का उपचार किया गया। प्रत्यक्षदर्शियों और अधिकारियों ने बताया कि यात्रियों में से कई एक ही परिवार के सदस्य थे और उनमें से कई लोग बाहर खड़े होने के कारण बच गए लेकिन उनके रिश्तेदार बस डूबने के समय उसके भीतर थे।
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वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पश्चिम एशिया में युद्ध में जीत का दावा करते हुए कहा कि ईरान परमाणु हथियार कभी नहीं रखने पर सहमत हो गया है और उसने होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी एक ''महत्वपूर्ण सौगात'' भेजी है। ट्रंप ने मंगलवार को 'ओवल ऑफिस (अमेरिका के राष्ट्रपति का कार्यालय) में संवाददाताओं से बातचीत में दावा किया कि ईरान ''समझौता करने'' का इच्छुक है और उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे डी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रूबियो, पश्चिम एशिया के मामलों के लिए विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर इस बातचीत का नेतृत्व कर रहे हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान के मौजूदा नेतृत्व में पहले ही बड़े बदलाव हो चुके हैं।
उन्होंने कहा, ''असल में यह वही है, जिसे हम सत्ता परिवर्तन कह सकते हैं। आप जानते हैं कि यह सत्ता परिवर्तन है क्योंकि अब सत्ता में बैठे लोग उन लोगों से बिल्कुल अलग हैं, जिनके साथ हमने शुरुआत की थी और जिन्होंने वे सारी समस्याएं पैदा की थीं।'' इससे पहले, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट साझा करते हुए मंगलवार को कहा था कि उनका देश अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त कराने के लिए ''सार्थक और निर्णायक वार्ता'' की मध्यस्थता के लिए तैयार है। इसके कुछ घंटों बाद ट्रंप ने शरीफ की पोस्ट को अपने सोशल मीडिया मंच 'ट्रुथ सोशल' पर साझा किया था। ट्रंप ने नए गृह मंत्री के रूप में मार्कवेन मुलिन के शपथ ग्रहण समारोह के बाद संवाददाताओं से कहा, ''मैं पहले से यह नहीं कहना चाहता लेकिन वे इस बात पर सहमत हो गए हैं कि वे कभी परमाणु हथियार नहीं रखेंगे।'' ट्रंप ने कहा कि ईरानी नेतृत्व ने होर्मुज जलडमरूमध्य और तेल की आपूर्ति से जुड़ी एक ''महत्वपूर्ण सौगात'' अमेरिका को दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, ''वे समझौता करने जा रहे हैं। उन्होंने कल कुछ ऐसा किया जो वास्तव में हैरान करने वाला था। उन्होंने हमें एक तोहफा दिया और वह तोहफा आज पहुंच गया। वह बहुत बड़ा तोहफा है जिसकी कीमत बहुत ज्यादा है।'' उन्होंने कहा, ''मैं आपको यह नहीं बताऊंगा कि वह तोहफा क्या है, लेकिन वह बहुत बड़ी सौगात है।''
ट्रंप ने कहा, ''तो मेरे लिए उसका एक ही मतलब है कि हम सही लोगों से बातचीत कर रहे हैं। नहीं, यह (तोहफा) परमाणु हथियार से जुड़ा नहीं है। यह तेल और गैस से जुड़ा है।'' अमेरिकी राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि ईरान के खिलाफ युद्ध जीत लिया गया है।
ट्रंप ने कहा, ''हम इसे जीत चुके हैं। यह युद्ध जीता जा चुका है... ऐसा नहीं है कि हम कोई ऐसा युद्ध जीत रहे हैं जहां उनके पास नौसेना नहीं है और उनके पास वायुसेना नहीं है और उनके पास कुछ भी नहीं है। हमारे विमान वास्तव में तेहरान और देश के अन्य हिस्सों के ऊपर उड़ रहे हैं। वे इसके बारे में कुछ नहीं कर सकते।'' उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ईरान की उस परमाणु क्षमता को पूरी तरह नष्ट कर दिया जिसका इस्तेमाल पश्चिम एशिया में अमेरिका के सहयोगियों के खिलाफ किया जा सकता था। ट्रंप ने कहा, ''हमने उसे तबाह कर दिया। उनकी परमाणु क्षमता को बिल्कुल तबाह कर दिया। अगर हमने (बी-2 बमवर्षक विमानों का इस्तेमाल करते हुए) हमला नहीं किया होता तो उस हमले के दो हफ्ते बाद उनके पास परमाणु हथियार होता। वे निश्चित रूप से उसका इस्तेमाल करते और वे उसका इस्तेमाल इजराइल समेत पूरे पश्चिम एशिया में करते।'' अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि इतिहास में कभी भी किसी आधुनिक सेना को इतनी तेजी से और इस तरह पूरी तरह तबाह नहीं किया गया। हेगसेथ ने कहा, ''ईरान के पास आधुनिक सेना थी। उसके पास आधुनिक नौसेना, आधुनिक वायुसेना, आधुनिक हवाई रक्षा प्रणाली, नेतृत्व, विशाल बंकर था। इतिहास में पहले कभी किसी आधुनिक सेना को इतनी तेजी से और ऐतिहासिक तरीके से तबाह नहीं किया गया, किसी को पहले ही दिन भारी मारक क्षमता के साथ पराजित नहीं किया गया।'' -
नई दिल्ली। अमेरिकन ऑटोमोबाइल एसोसिएशन (एएए) के नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका के कैलिफोर्निया में डीजल की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई हैं। सिन्हुआ न्यूज एजेंसी ने बताया कि कैलिफोर्निया में डीजल की औसत कीमत मंगलवार को 7.018 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई, जो एएए के डेटाबेस में दर्ज सबसे ऊंचा स्तर है। इसकी तुलना में, डीजल की मौजूदा यूएस नेशनल औसत कीमत लगभग 5.345 डॉलर प्रति गैलन है।
यूएस मीडिया रिपोर्ट्स ने डीजल की बढ़ती कीमतों की वजह तेल-रिफाइनिंग कैपेसिटी में कमी और ईरान में युद्ध के बीच ग्लोबल एनर्जी शिपमेंट में रुकावट को बताया। कैलिफोर्निया की दो रिफाइनरियां अक्टूबर 2025 में बंद हो गई थीं, जिससे उसकी रिफाइनिंग क्षमता का लगभग 20 फीसदी खत्म हो गया। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से परिवहन का खर्चा बढ़ रहा है, जिसका असर डीजल से चलने वाले ट्रकों से भेजे जाने वाले खाने-पीने की चीजों, बिल्डिंग मटीरियल और रिटेल सामान पर पड़ सकता है।ईरान में चल रहे युद्ध के बीच कैलिफोर्निया को अभी भी सीमित रिफाइनरी क्षमता का सामना करना पड़ रहा है, जिससे ग्लोबल शिपमेंट में रुकावट आ रही है। सैन जोकिन फार्म ब्यूरो के कार्यकारी निदेशक एंड्रयू गेनास्की ने कहा, “बहुत सारी रातें बिना सोए गुजर रही हैं। बहुत तनाव है, और लोग बस अपना बेहतरीन करने की कोशिश कर रहे हैं। फार्म पर आने वाली या फार्म से जाने वाली कोई भी चीज अब ज्यादा महंगी हो गई है।” एएए के मुताबिक, इस नई कीमत ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं, जिसमें 2022 में यूक्रेन में रूस के युद्ध के पहले कुछ महीने भी शामिल हैं। मिडिल ईस्ट में होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से बहुत सारा तेल रुका हुआ है। अगर स्ट्रेट अभी खुल भी जाता है, तो भी उस सारे तेल को रिफाइनरियों से गुजरना होगा, जिसका मतलब है कि कीमतें तुरंत कम नहीं होंगी।( - नई दिल्ली। ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर अपनी पकड़ बनाए रखी है, इसलिए जापान की सरकार गुरुवार से अपने सरकारी रिजर्व से 30 दिनों का तेल निकालना शुरू करेगी। यह एक बड़े प्लान का हिस्सा है, जिसमें कुल मिलाकर 45 दिनों का तेल निकाला जाएगा। यह अब तक का सबसे बड़ा तेल का हिस्सा है, जो निकाला जाएगा। इसके साथ ही, प्राइवेट सेक्टर के स्टॉक से और तेल निकाला जाएगा ताकि दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश में बिना किसी रुकावट के काम किया जा सके।जापान के पास दुनिया के सबसे बड़े तेल स्टॉक में से एक है, जिसमें सरकारी और प्राइवेट रिजर्व मिलाकर लगभग 254 दिनों की खपत है। लेकिन, यह अभी भी अपना 90 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल मिडिल ईस्ट से आयात करता है, जिससे ईरान के साथ अमेरिका और इजरायल की लड़ाई के दौरान जापान को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।हालांकि, सरकार ने अब तक एनर्जी बचाने के सख्त नियमों से परहेज किया है, लेकिन सप्लाई की चिंताओं के बीच टॉयलेट पेपर की तेजी से बढ़ती मांग के खिलाफ चेतावनी दी है। जैसे ही फ्यूल की कीमतें 190 येन (1.20 डॉलर) प्रति लीटर के रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गईं, जापान ने फ्यूल प्रोडक्ट्स पर सब्सिडी शुरू कर दी है ताकि गैसोलीन की कीमत लगभग 170 येन (1.07 डॉलर) प्रति लीटर पर सीमित रहे।जब एनर्जी की कमी की बात आती है तो जापान अपने कई पड़ोसियों की तुलना में बेहतर तरीके से तैयार है। इसके लिए उसने 1970 के दशक के तेल के झटकों से सीख ली है। 1970 के दशक में वैश्विक अर्थव्यवस्था स्टैगफ्लेशन से प्रभावित हुई थी, जो 1973 के तेल संकट से शुरू हुई थी। योम किप्पुर युद्ध के बाद, अरब तेल प्रोड्यूसर्स ने सप्लाई में कटौती की और कीमतें बढ़ा दीं। कच्चे तेल की कीमतें कुछ ही महीनों में लगभग चार गुना बढ़ गईं, जिससे जापान जैसी इंपोर्ट पर निर्भर अर्थव्यवस्था में दिक्कतें बढ़ गईं।इसका असर बहुत बुरा था। जापान अपने लगभग सारे तेल के लिए आयात पर निर्भर था और युद्ध के बाद उसकी आर्थिक विकास में अचानक से रुकावट देखने को मिली। पैनिक बाइंग फैल गई और 1974 में, दूसरे विश्व युद्ध के बाद पहली बार जापान की अर्थव्यवस्था सिकुड़ गई, जिससे धीमी ग्रोथ की शुरुआत हुई। दूसरी बार, 1979 के तेल संकट ने कीमतों को फिर से बढ़ा दिया। लेकिन तब तक, जापान ने खुद को ढालना शुरू कर दिया था, एनर्जी एफिशिएंसी में निवेश करना, एनर्जी सोर्स को अलग-अलग करना और रणनीतिक रिजर्व बनाना।
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बगोटा/ कोलंबिया के प्यूर्तो लेग्विजामो में सोमवार को एक सैन्य विमान उड़ान भरने के थोड़ी देर बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिससे कम से कम 66 लोगों की मौत हो गई। कोलंबिया के सशस्त्र बलों के प्रमुख जनरल ह्यूगो अलेजांद्रो लोपेज बरेटो ने कहा, ''दुर्भाग्यवश, इस भयावह दुर्घटना में हमारे 66 सैन्यकर्मियों की मौत हो गई।'' उन्होंने कहा कि चार सैन्यकर्मी लापता हैं। विमान में सैनिकों समेत कुल 121 लोग सवार थे।
इससे पहले प्यूर्तो लेग्विजामो के उपमहापौर कार्लोस क्लेरोस ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में कहा कि शवों को शवगृह ले जाया गया है और घायलों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। प्यूर्तो लेग्विजामो इक्वाडोर और पेरु से सटे पुतुमायो प्रांत में स्थित है।
रक्षा मंत्री पेद्रो सांचेज ने 'एक्स' पर कहा कि सैनिकों को पुतुमायो प्रांत के एक अन्य शहर ले जाया जा रहा था। कोलंबिया के मीडिया संस्थानों की ओर से जारी तस्वीरों में घटनास्थल पर धुएं का गुबार उठता हुआ दिख रहा है। वायुसेना ने कहा कि हर्क्यूलिस सी-130 विमान में 110 सैनिक और चालक दल के 11 सदस्यों समेत कुल 121 लोग सवार थे। कोलंबिया वायुसेना के कमांडर कार्लोस फर्नांडो सिल्वा ने कहा कि दुर्घटना कैसे हुई, इसके बारे में विस्तृत जानकारी नहीं मिल पाई है। उन्होंने कहा कि केवल यह पता चला है कि विमान में कुछ दिक्कत आई और यह हवाई अड्डे से लगभग दो किलोमीटर दूर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। -
कीव. रूस की ओर से यूक्रेन के नागरिक इलाकों पर किए गए ड्रोन और मिसाइल हमलों में चार लोगों की मौत हो गई, जबकि कम से कम 27 लोग घायल हो गए। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। मॉस्को की सेना ने यूक्रेनी अग्रिम पंक्ति की रक्षा पंक्ति को भेदने के प्रयासों को तेज कर दिया है, जो वसंत ऋतु में होने वाले संभावित जमीनी आक्रमण की शुरुआत हो सकती है। यूक्रेन की वायुसेना के अनुसार, रूस ने रात भर में लगभग 400 लंबी दूरी के ड्रोन दागे, जो हाल के हफ्तों में सबसे बड़ा हमला है। यह हमला मंगलवार सुबह तक जारी रहा, जब दिन के उजाले में भी कई ड्रोन ने राजधानी कीव को निशाना बनाया। यूक्रेन की वायुसेना ने बताया कि इसके अलावा, रूस ने रात में 23 क्रूज मिसाइल और सात बैलिस्टिक मिसाइलें भी दागीं, जिनसे देशभर में कम से कम 10 स्थान प्रभावित हुए। चार साल से भी अधिक समय पहले रूस द्वारा अपने पड़ोसी देश पर पूर्ण पैमाने पर आक्रमण शुरू करने के बाद से यूक्रेनी नागरिक लगातार बमबारी का सामना कर रहे हैं। पिछले एक साल में अमेरिका की मध्यस्थता में मॉस्को और कीव के बीच हुई वार्ताओं से कोई राहत नहीं मिली है। रूस ने यूक्रेन के युद्धविराम प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, वहीं हाल के हफ्तों में ईरान से जुड़े संघर्ष ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के ध्यान को यूक्रेन से हटा दिया है। पूर्वी और दक्षिणी यूक्रेन में फैली लगभग 1,250 किलोमीटर लंबी अग्रिम पंक्ति पर तैनात यूक्रेनी सैनिक बेहतर मौसम के साथ रूस के नए हमले के लिए तैयार हैं। यूक्रेन के सशस्त्र बलों के प्रमुख जनरल ओलेक्सांद्र सिरस्की ने कहा कि हाल के दिनों में रूसी सैनिकों ने कई रणनीतिक क्षेत्रों में एक साथ रक्षा पंक्तियों को तोड़ने की कोशिश की है।
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एनापोलिस (अमेरिका) .इतालवी खोजकर्ता क्रिस्टोफर कोलंबस की एक प्रतिमा को अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक कार्यालय एवं आवास व्हाइट हाउस के पास स्थित आइजनहावर सरकारी कार्यालय परिसर में स्थापित किया गया है। यह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन द्वारा इस कथित विवादित खोजकर्ता को सम्मान देने के प्रयास का हिस्सा है। यह उस प्रतिमा की प्रतिकृति है, जिसे 2020 में ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान देशभर में संस्थागत नस्लवाद के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों के बीच बाल्टीमोर के बंदरगाह में फेंक दिया गया था। ट्रंप पारंपरिक रूप से कोलंबस को 1492 के उस अभियान के नेता के रूप में देखते हैं, जिसे अमेरिका में यूरोपीय उपनिवेशवाद की अनौपचारिक शुरुआत और आधुनिक आर्थिक-राजनीतिक व्यवस्था के विकास का आधार माना जाता है। हालांकि, हाल के वर्षों में कोलंबस को पश्चिमी यूरोप द्वारा 'न्यू वर्ल्ड' उसके संसाधनों और मूल निवासियों के दमन और शोषण के प्रतीक के रूप में भी देखा जाने लगा है। 'न्यू वर्ल्ड' से तात्पर्य अमेरिका (उत्तरी, दक्षिणी और मध्य अमेरिका) और आसपास के द्वीपों से है व्हाइट हाउस ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''इस व्हाइट हाउस में क्रिस्टोफर कोलंबस एक नायक हैं और राष्ट्रपति ट्रंप यह सुनिश्चित करेंगे कि आने वाली पीढ़ियों तक उन्हें इसी रूप में सम्मानित किया जाए।'' मुख्यतः संगमरमर से बनी यह प्रतिमा मैरीलैंड के सेंटरविल स्थित मूर्तिकार विल हेम्सली ने बनाई है।
मूल प्रतिमा को चार जुलाई 2020 को प्रदर्शनकारियों ने गिराकर बाल्टीमोर के इनर हार्बर में फेंक दिया था। यह घटना पुलिस हिरासत में जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद भड़के गुस्से के बीच हुई थी। उसी समय देशभर में कोलंबस की कई प्रतिमाओं को नुकसान पहुंचाया गया, क्योंकि प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि यह इतालवी अन्वेषक अमेरिका के मूल निवासियों के नरसंहार और शोषण के लिए जिम्मेदार था। ट्रंप ने अपने 2024 के चुनावी अभियान के दौरान लगाए आरोप को दोहराया कि ''डेमोक्रेट सदस्यों ने क्रिस्टोफर कोलंबस की छवि और उन्हें पसंद करने वाले इतालवी समुदाय को नुकसान पहुंचाने की हरसंभव कोशिश की है। - काहिरा. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को चेतावनी दी कि अगर ईरान 48 घंटे के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह नहीं खोलता है तो अमेरिका उसके ऊर्जा संयंत्रों को ''नेस्तनाबूद'' कर देगा। ट्रंप ने यह चेतावनी फ्लोरिडा में सप्ताहांत बिताने के दौरान सोशल मीडिया पर पोस्ट के जरिए दी।उन्होंने कहा कि ईरान को इस अहम जलमार्ग को खोलने के लिए ठीक 48 घंटे का समय दिया जा रहा है, अन्यथा उसे नए हमलों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका ''विभिन्न ऊर्जा संयंत्रों को नष्ट कर देगा और इसकी शुरुआत सबसे बड़े संयंत्र से होगी।'' तेल की कीमतों में तेजी के बीच ट्रंप पर इस जलडमरूमध्य को सुरक्षित कराने का दबाव बढ़ता जा रहा है।
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नई दिल्ली। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने स्पष्ट किया है कि उनका देश मुस्लिम देशों के साथ किसी भी तरह का युद्ध या टकराव नहीं चाहता। उन्होंने यह बात ईद-उल-फितर और नवरोज के अवसर पर दिए गए अपने संदेश में कही। ईद-उल-फितर जहां रमजान के महीने के समापन का प्रतीक है, वहीं नवरोज 21 मार्च को मनाया जाने वाला ईरानी नववर्ष है।
सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार,राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने हाल के दिनों में ईरान और कुछ अरब देशों के बीच बढ़ते तनाव पर भी बात की। उन्होंने कहा, “हम मुस्लिम देशों के साथ किसी भी तरह का मतभेद नहीं चाहते। हम न तो संघर्ष चाहते हैं और न ही युद्ध। वे हमारे भाई हैं।” उन्होंने इन तनावों के लिए संयुक्त राज्य और इजरायल को जिम्मेदार ठहराया।उन्होंने आगे कहा कि ईरान अपने पड़ोसी देशों के साथ सभी विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाने के लिए तैयार है। इसके साथ ही उन्होंने मध्य पूर्व में मुस्लिम देशों का एक साझा सुरक्षा ढांचा बनाने का प्रस्ताव भी रखा, जिससे क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।परमाणु हथियारों के मुद्दे पर भी उन्होंने अपनी स्थिति साफ की। उन्होंने कहा कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में नहीं बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि देश के पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई पहले ही एक धार्मिक आदेश जारी कर चुके हैं, जिसमें परमाणु हथियारों पर रोक लगाई गई है। ऐसे में कोई भी अधिकारी इस दिशा में कदम नहीं उठा सकता।हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका दुनिया को यह विश्वास दिलाने की कोशिश कर रहा है कि ईरान परमाणु हथियार बना रहा है।बता दें कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से तेहरान और ईरान के कई अन्य शहरों पर हमले किए थे। इन हमलों में ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता, कई वरिष्ठ सैन्य कमांडर और आम नागरिकों की मौत हो गई थी। इसके जवाब में ईरान ने भी मिसाइल और ड्रोन हमलों की शृंखला शुरू कर दी, जिसमें इजरायल और मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। - वाशिंगटन. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने करीब 100 साल पुराने 'जोन्स अधिनियम' के नियमों से 60 दिन की छूट देने की घोषणा की है। अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास और कार्यालय व्हाइट हाउस के अनुसार, इस छूट के बाद अब अमेरिकी बंदरगाहों के बीच माल की ढुलाई के लिए केवल 'अमेरिकी ध्वज वाले जहाजों' के उपयोग की कानूनी अनिवार्यता नहीं रहेगी। वर्ष 1920 में बना यह कानून अमेरिकी जहाज निर्माण क्षेत्र के हितों की रक्षा के लिए बनाया गया था, लेकिन अक्सर इसे ईंधन और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी का एक मुख्य कारण माना जाता है। यह फैसला अमेरिका और इजराइल के ईरान के साथ जारी अनिश्चित युद्ध के बीच तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के भारी दबाव को दर्शाता है। ईरान द्वारा सामरिक रूप से महत्वपूर्ण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' मार्ग को बाधित किए जाने के बाद से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम आसमान छू रहे हैं। दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का पांचवां हिस्सा इसी संकरे समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है।
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नई दिल्ली। अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट के पास ईरान के मिसाइल ठिकानों पर नए हमले किए हैं। सेना के अधिकारियों का कहना है कि ये ठिकाने अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खतरा बन रहे थे। यह कार्रवाई “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” के तहत की जा रही है, जो अब और तेज हो गया है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के अनुसार, इन हमलों में भारी वजन वाले बमों का इस्तेमाल किया गया, जो मजबूत और सुरक्षित ठिकानों को भी नष्ट कर सकते हैं। ये मिसाइल ठिकाने ईरान के तटीय इलाके में, होर्मुज स्ट्रेट के पास स्थित थे। यहां तैनात एंटी-शिप मिसाइलें गुजरने वाले जहाजों के लिए खतरा पैदा कर रही थीं।दरअसल, यह कार्रवाई इस पूरे अभियान में एक बड़ा कदम मानी जा रही है, क्योंकि अब समुद्री क्षेत्र भी इसका अहम हिस्सा बन गया है। होर्मुज स्ट्रेट इस समय अमेरिकी सैन्य गतिविधियों का मुख्य केंद्र बन गया है। सेंटकॉम ने बताया कि इस ऑपरेशन के दौरान अमेरिकी नौसेना के विमानों ने सैकड़ों लड़ाकू उड़ानें भरी हैं। इससे यह दिखता है कि अमेरिका समुद्र से भी हवाई ताकत बनाए रखने में सक्षम है।वहीं एक दिन पहले जारी जानकारी के मुताबिक, 28 फरवरी से शुरू हुए इस अभियान में अब तक 7,000 से ज्यादा लक्ष्यों पर हमला किया जा चुका है। यह अभियान राष्ट्रपति के निर्देश पर शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य ईरान की सुरक्षा व्यवस्था को कमजोर करना और उन ठिकानों को निशाना बनाना है जो तुरंत खतरा पैदा कर सकते हैं।अब तक 100 से ज्यादा ईरानी जहाजों को नुकसान पहुंचाया गया है या उन्हें नष्ट कर दिया गया है। साथ ही अमेरिकी सेना 6,500 से ज्यादा लड़ाकू उड़ानें भर चुकी है। हमलों के निशाने पर कई तरह के सैन्य ठिकाने हैं। इनमें बैलिस्टिक मिसाइल साइट, एंटी-शिप मिसाइल ठिकाने, आईआरजीसी (ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड) के मुख्यालय, एयर डिफेंस सिस्टम और सैन्य संचार से जुड़े सिस्टम शामिल हैं।इस पूरे ऑपरेशन में अमेरिका ने हवा, जमीन और समुद्र तीनों मोर्चों पर अपनी ताकत का इस्तेमाल किया है। इसमें बी-1, बी-2 और बी-52 जैसे बमवर्षक विमान, एफ-22 और एफ-35 जैसे आधुनिक फाइटर जेट, निगरानी विमान और ड्रोन शामिल हैं। समुद्र में परमाणु ऊर्जा से चलने वाले विमानवाहक पोत, पनडुब्बियां और मिसाइल से लैस युद्धपोत तैनात किए गए हैं।जमीन पर पैट्रियट और थाड जैसे मिसाइल रक्षा सिस्टम, रॉकेट आर्टिलरी और ड्रोन से निपटने वाली तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे साफ है कि यह अभियान कई स्तरों पर एक साथ चलाया जा रहा है। एंटी-शिप मिसाइल ठिकानों पर खास ध्यान इसलिए दिया जा रहा है, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया में तेल आपूर्ति का एक बेहद महत्वपूर्ण रास्ता है। अगर यहां कोई बाधा आती है, तो इसका असर पूरी दुनिया के व्यापार और तेल बाजार पर पड़ सकता है। -
वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रीय आतंकवाद रोधी केंद्र के निदेशक जो. केंट ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है और कहा है कि उनका दिल इस बात की गवाही नहीं देता कि वह ट्रंप प्रशासन के ईरान युद्ध का समर्थन करें। केंट ने सोशल मीडिया पर कहा कि ईरान से ''हमारे देश को कोई तात्कालिक खतरा नहीं था, और यह स्पष्ट है कि हमने इस युद्ध की शुरुआत इजराइल तथा उसकी शक्तिशाली अमेरिकी लॉबी के दबाव के कारण की।'' इस संबंध में व्हाइट हाउस की ओर से तत्काल कोई टिप्पणी नहीं आई।
केंट को राष्ट्रीय आतंकवाद रोधी केंद्र के निदेशक के रूप में गत जुलाई में नियुक्त किया गया था। इस पद पर वह एक ऐसी एजेंसी के प्रभारी थे जो आतंकवादी खतरों का विश्लेषण और पता लगाने का काम करती है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन से जुड़ने से पहले केंट ने वाशिंगटन राज्य में कांग्रेस में पहुंचने के दो असफल चुनावी प्रयास किए थे। डेमोक्रेटिक नेताओं ने केंट की नियुक्ति का कड़ा विरोध किया था और अतीत में उनके धुर दक्षिणपंथी लोगों से संबंध होने का हवाला दिया था। वहीं, रिपब्लिकन नेताओं ने केंट की आतंकवाद-रोधी योग्यताओं की प्रशंसा करते हुए उनके सैन्य और खुफिया अनुभव का हवाला दिया था। इस तरह, राष्ट्रीय आतंकवाद रोधी केंद्र के निदेशक के रूप में उनकी नियुक्ति 44 के मुकाबले 52 मतों से हुई थी। - बीजिंग. चीन ने सोमवार को सभी पक्षों से पश्चिम एशिया में सैन्य अभियान तुरंत रोकने का आह्वान किया। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय परिवहन के लिए खुला रखने में चीन सहित अन्य देशों से सहयोग करने का आह्वान किया था, जिसके जवाब में बीजिंग ने यह टिप्पणी की। अमेरिका और इजराइल के हवाई हमलों के जवाब में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को निशाना बनाया, जिससे वैश्विक ऊर्जा के प्रवाह और व्यापार पर विनाशकारी प्रभाव पड़ा है। ईरान के हमलों से तेल आपूर्ति में अब तक की सबसे बड़ी बाधा उत्पन्न हुई है और वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। चीन ने यह भी कहा कि वह इस महीने के अंत में ट्रंप की बीजिंग यात्रा को लेकर अमेरिका के साथ बातचीत कर रहा है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने ट्रंप के जलडमरूमध्य को 'खुला और सुरक्षित' रखने के लिए युद्धपोत तैनात करने के आह्वान पर यहां प्रेसवार्ता में कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य और आसपास के जलक्षेत्र में हालिया तनाव ने माल व अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा के प्रवाह को प्रभावित किया है तथा क्षेत्रीय शांति व वैश्विक स्थिरता को नुकसान पहुंचाया है। लिन ने कहा कि चीन एक बार फिर सभी पक्षों से सैन्य अभियानों को तत्काल रोकने का आह्वान करता है, ताकि तनाव को और बढ़ने से रोका जा सके तथा क्षेत्रीय अशांति का वैश्विक आर्थिक विकास पर व्यापक प्रभाव न पड़े। ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि वह महीने के अंत में होने वाली अपनी चीन यात्रा को स्थगित कर सकते हैं, जिसपर लिन ने कहा कि बीजिंग और वाशिंगटन दोनों अमेरिकी राष्ट्रपति की यात्रा के बारे में बातचीत कर रहे हैं। ऐसा माना जा रहा है कि ट्रंप की इस टिप्पणी का संबंध स्पष्ट रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने में मदद करने की उनकी अपील पर बीजिंग की प्रतिक्रिया से है।
- कोलंबो. पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच संभावित ईंधन संकट से निपटने के लिए श्रीलंका ने सोमवार को चार दिन का कार्य सप्ताह लागू करने की घोषणा की है। इसके तहत अब हर बुधवार को सार्वजनिक अवकाश रहेगा। वर्तमान में श्रीलंका में पांच दिन का कार्य सप्ताह लागू है।आवश्यक सेवाओं के आयुक्त प्रभात चंद्रकीर्ति ने कहा कि 18 मार्च से हर बुधवार को सार्वजनिक अवकाश रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था स्वास्थ्य सेवाओं, बंदरगाह, जल आपूर्ति और सीमा शुल्क विभाग पर लागू नहीं होगी। हालांकि स्कूलों, विश्वविद्यालयों और न्यायपालिका में यह लागू रहेगा। सरकार ने निजी क्षेत्र से भी इसी तरह की व्यवस्था अपनाने की अपेक्षा की है। यह फैसला राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके की अध्यक्षता में हुई एक विशेष बैठक में लिया गया।
- ब्रसेल्स. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को यूरोपीय संघ (ईयू) के शीर्ष नेतृत्व और विदेश मंत्रियों के साथ मुलाकात के दौरान भारत-ईयू के बीच हुए समझौतों के कार्यान्वयन और प्रमुख वैश्विक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स के दो-दिवसीय दौरे पर पहुंचे जयशंकर ने ईयू के विदेश मामलों की परिषद की बैठक में भाग लिया। इसके लिए उन्हें ईयू की उच्च प्रतिनिधि और उपाध्यक्ष काजा कल्लास ने आमंत्रित किया था। इस अवसर पर जयशंकर ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि 2026 में भारत-ईयू संबंधों में 'नया अध्याय' खुला है और बैठक में दोनों पक्षों के बीच हुए विभिन्न समझौतों को ठोस परिणामों में बदलने पर चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि वार्ता में विशेष रूप से व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, आवागमन और रक्षा मुद्दों पर चर्चा हुई। विदेश मंत्री ने कहा कि इन चर्चाओं ने 'बहुध्रुवीय विश्व में भारत और ईयू के बीच मजबूत सहमति' को भी दर्शाया और पश्चिम एशिया संकट, यूक्रेन की स्थिति तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर विचार-विमर्श किया गया। जयशंकर ने इस दौरे पर यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष अर्सुला फॉन डेर लायन से भी मुलाकात की। उन्होंने कहा कि जनवरी में लायन का भारत दौरा द्विपक्षीय संबंधों में 'मोड़' लेकर आया और इस पर तेजी से अमल किया जा रहा है।फॉन डेर लायन ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि ईयू और भारत अब हाल ही में संपन्न मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) और सुरक्षा साझेदारी के कार्यान्वयन पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। फॉन डेर लायन ने कहा, "जनवरी में हुए ईयू-भारत शिखर सम्मेलन में हमने एफटीए और सुरक्षा एवं रक्षा साझेदारी पर हस्ताक्षर किए थे। अब हम इसे प्रभावी रूप से लागू करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं ताकि यूरोप और भारत के लोगों को जल्द परिणाम मिल सके।" जयशंकर ने जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल, स्लोवाकिया के विदेश मंत्री जुराज ब्लानार, और यूनान के विदेश मंत्री जियोर्गोस जेरापेट्रिटिस से भी द्विपक्षीय वार्ता की। उन्होंने अपनी पोस्ट में कहा कि इन मुलाकातों में मुख्य रूप से रक्षा, विनिर्माण, अंतरिक्ष, कनेक्टिविटी और व्यापार को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई। आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का यूरोपीय संघ के साथ कुल वस्तु व्यापार लगभग 136 अरब डॉलर का रहा, जिसमें भारत का निर्यात लगभग 76 अरब डॉलर और आयात 60 अरब डॉलर रहा।
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नई दिल्ली। ईरान में इंटरनेट ब्लैकआउट जारी है। सोमवार को 17वें दिन भी बाहरी दुनिया से संपर्क साधने में लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इंटरनेट गतिविधियों पर नजर रखने वाले नेटब्लॉक्स के अनुसार देश में इंटरनेट कनेक्टिविटी सामान्य स्तर से बहुत नीचे गिर चुकी है, जिससे लोगों के लिए ऑनलाइन सेवाओं और बाहरी दुनिया से संपर्क करना बेहद मुश्किल हो गया है।
इस ब्लैकआउट के कारण ईरान में केवल कुछ व्हाइटलिस्टेड सेवाएं और राष्ट्रीय इंटरनेट नेटवर्क (एनआईएन) ही सीमित रूप से काम कर पा रहे हैं, जबकि ज्यादातर वैश्विक वेबसाइट और प्लेटफॉर्म ठप पड़े हैं। एनआईएन को ‘हलाल इंटरनेट’ नाम से भी जाना जाता है; यह एक घरेलू इंट्रानेट सिस्टम है, जिसे सरकार अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट को बंद करने के बावजूद आंतरिक सेवाओं (बैंकिंग, सरकारी वेबसाइट) को चलाने के लिए प्रयोग में लाती है। 2026 की शुरुआत में विरोध प्रदर्शनों के दौरान जब व्यापक इंटरनेट ब्लैकआउट लागू किया गया तो जनता को इसी नियंत्रित नेटवर्क पर स्विच कर दिया गया, जिससे उनका बाहरी दुनिया से संपर्क पूरी तरह टूट गया था।दरअसल, सामान्य इंटरनेट ‘ब्लैकलिस्ट’ पर काम करता है, यानी सब ओपन रहता है, बस कुछ चीजों पर पाबंदी रहती है। ये पाबंदियां पूरी दुनिया पर लागू नहीं होती हैं, यानी दूसरे देश के लोग इसे देख सुन सकते हैं। हलाल इंटरनेट ‘व्हाइटलिस्ट’ पर चलता है; इसमें सब कुछ बंद है, केवल वे वेबसाइटें खुली हैं जिन्हें सरकार ने ‘हलाल’ या ‘सुरक्षित’ घोषित किया है। नेटब्लॉक्स के मुताबिक, अगर आप ईरान में हैं, तो इसके जरिए मोहल्ले के दुकानदार को पैसे ट्रांसफर कर सकते हैं, लेकिन किसी दूसरे देश में संपर्क नहीं साध सकते। आप केवल सरकार की ओर से सुझाई गई या अप्रूव न्यूज पढ़ सकते हैं, लेकिन इंस्टाग्राम सहित अन्य सोशल मीडिया का एक्सेस आपको नहीं होता है। -
काहिरा. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य को ''बंद करने'' के ईरान के प्रयास से प्रभावित देशों से आग्रह किया है कि वे वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण इस संकरे समुद्री मार्ग को सुरक्षित करने के लिए पोत भेजें। ईरान ने अमेरिका और इजराइल के साथ उसके युद्ध के समाप्त होने के कोई आसान नजर नहीं आने के बीच, लोगों से संयुक्त अरब अमीरात के तीन बंदरगाहों को खाली करने का आग्रह किया। ईरान ने पश्चिम एशिया के सबसे व्यस्त बंदरगाह और संयुक्त अरब अमीरात के दो अन्य बंदरगाहों को खाली करने का आह्वान किया है। यह पहली बार है जब ईरान ने किसी पड़ोसी देश की गैर-अमेरिकी परिसंपत्तियों पर हमले की खुले तौर पर धमकी दी है। ईरान ने कोई साक्ष्य दिए बिना कहा कि अमेरिका ने ईरान के तेल निर्यात के मुख्य टर्मिनल वाले खार्ग द्वीप पर हमला करने के लिए संयुक्त अरब अमीरात में ''बंदरगाहों, गोदियों और ठिकानों'' का इस्तेमाल किया। उसने लोगों से उन इलाकों को छोड़ने का आग्रह किया, जहां उसके अनुसार अमेरिकी बलों ने शरण ली है। इस बीच, लेबनान का मानवीय संकट और गहरा गया है। इजराइल ने ईरान समर्थित हिज्बुल्ला चरमपंथियों के खिलाफ कई हमले किए जिनमें 800 से अधिक लोग मारे गए हैं और 8,50,000 लोग विस्थापित हुए हैं। ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट में चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अन्य देशों से होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाज भेजने का आग्रह किया तथा कहा कि अमेरिका तटरेखा पर बमबारी जारी रखेगा और ईरानी पोतों एवं नौकाओं को निशाना बनाएगा। अमेरिका एवं इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर एक बड़ा संयुक्त हमला शुरू किया था और ईरान की जवाबी कार्रवाई के साथ यह युद्ध पूरे खाड़ी क्षेत्र में फैल गया। ईरानी हमलों ने होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात को प्रभावित किया है जो कच्चे तेल की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए महत्वपूर्ण है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच शनिवार को इराक की राजधानी बगदाद में अमेरिकी दूतावास परिसर के अंदर एक हेलीपैड पर मिसाइल से हमला हुआ जबकि संयुक्त अरब अमीरात में ईरान की रोकी गई मिसाइल का मलबा तेल संयंत्र पर गिर गया। 'एसोसिएटेड प्रेस' की तस्वीरों में बगदाद में स्थित अमेरिकी दूतावास से धुआं उठता दिखा। इसके अलावा यूएई में फुजैरा बंदरगाह में आग लगती हुई दिखी जहां अधिकारियों के अनुसार एक ड्रोन को मार गिराया गया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अमेरिका ने खार्ग द्वीप और अबू मूसा द्वीप पर संयुक्त अरब अमीरात के दो स्थानों- रस अल खैमाह और दुबई के ''बेहद करीब'' एक जगह से हमला किया। उन्होंने इसे खतरनाक बताते हुए कहा कि ईरान ''वहां आबादी वाले किसी भी क्षेत्र पर हमला नहीं करने के लिए सावधानी बरतने की कोशिश करेगा।''
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नयी दिल्ली. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यूरोपीय यूनियन (ईयू) के सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों के साथ वार्ता के लिए रविवार को ब्रसेल्स का दो दिवसीय दौरा शुरू किया। जनवरी में दोनों पक्षों के बीच एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर मुहर लगने के बाद भारत की ओर से ब्रसेल्स का यह पहला उच्चस्तरीय दौरा है। ब्रसेल्स में ईयू का मुख्यालय है।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि जयशंकर यूरोपीय आयोग की उपाध्यक्ष काजा कैलास के निमंत्रण पर बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स जा रहे हैं, जहां वह 27 देशों वाले ईयू के विदेश मंत्रियों से एक बैठक के दौरान बातचीत करेंगे। मंत्रालय ने कहा, "यात्रा के दौरान, विदेश मंत्री यूरोपीय यूनियन के नेताओं और बेल्जियम तथा अन्य ईयू सदस्य देशों के अपने समकक्षों के साथ बैठकें भी करेंगे।" मंत्रालय ने एक संक्षिप्त बयान में कहा, "ऐतिहासिक 16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन के ठीक बाद हो रही विदेश मंत्री की इस यात्रा से भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच रणनीतिक साझेदारी मजबूत होने की उम्मीद है।" भारत और यूरोपीय यूनियन ने 27 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और ईयू के शीर्ष नेताओं के शिखर सम्मेलन के बाद मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। - काठमांडू,। नेपाल के मध्य क्षेत्र में भारतीय तीर्थयात्रियों को ले जा रही एक यात्री बस के दुर्घटनाग्रस्त होने से सात लोगों की मौत हो गई और सात अन्य घायल हो गए। पुलिस ने यह जानकारी दी। यह घटना शनिवार को नेपाल के गंडकी प्रांत में हुई।पुलिस के अनुसार, तीर्थयात्रियों को ले जा रही एक बस मनकामना मंदिर से लौट रही थी तभी गोरखा जिले में सड़क से नीचे गिर गई। गोरखा जिले के जिला यातायात पुलिस कार्यालय के प्रमुख सूरज आर्यल ने बताया कि मृतकों में दो महिलाएं और पांच पुरुष शामिल हैं और ये सभी भारतीय नागरिक हैं। जिला पुलिस कार्यालय प्रमुख भरत बहादुर बीके के अनुसार, पीड़ितों की पहचान मुथु कुमार (58), अनामलिक (58), मीनाक्षी (59), शिवगामी (53), विजयल (57), मीना (58) और तमिलारसी (60) के रूप में की गई है। 'काठमांडू पोस्ट' की रिपोर्ट के अनुसार, सात अन्य घायल यात्रियों को बचा लिया गया है और उनका आंबुखैरेनी के एक अस्पताल में इलाज किया जा रहा है। 'हिमालयन टाइम्स' के अनुसार, इलेक्ट्रिक बस का चालक बाल-बाल बच गया, जबकि उसका सहायक इस घटना में घायल हो गया। पुलिस ने बताया कि मामले की जांच जारी है।
- इस्लामाबाद. शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली पाकिस्तान सरकार ने शनिवार को सरकारी स्वामित्व वाले उपक्रमों (एसओई) और स्वायत्त संस्थानों के कर्मचारियों के वेतन में पांच से 30 प्रतिशत तक कटौती को मंजूरी दे दी। यह कदम व्यापक मितव्ययिता अभियान के तहत उठाया गया है। प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, ईंधन कीमतों में उतार-चढ़ाव और सरकारी बचत उपायों की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री शरीफ ने की। बैठक में निर्णय लिया गया कि सरकारी कर्मचारियों की तरह ही राज्य के स्वामित्व वाले उपक्रमों और सरकार के संरक्षण में चलने वाले स्वायत्त संस्थानों के कर्मचारियों के वेतन में भी 5 से 30 प्रतिशत तक कटौती की जाएगी। बयान में कहा गया है कि इन उपायों से होने वाली बचत का उपयोग केवल जनता को राहत देने के लिए किया जाएगा। बैठक में यह भी बताया गया कि सरकारी वाहनों के लिए ईंधन आवंटन में 50 प्रतिशत कटौती की निगरानी तीसरे पक्ष के ऑडिट के माध्यम से की जाएगी, जबकि अगले दो महीनों में 60 प्रतिशत सरकारी वाहनों को सड़कों से हटा दिया जाएगा। बयान के अनुसार, सरकार द्वारा नए वाहनों की खरीद पर पूर्ण प्रतिबंध और अन्य सरकारी खरीद पर रोक के फैसले को भी लागू रखा जाएगा। कैबिनेट सदस्यों, मंत्रियों, सलाहकारों और विशेष सहायकों के दो महीनों के वेतन को भी जनकल्याण के लिए बचत के रूप में उपयोग किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकारी अधिकारियों, मंत्रियों, राज्य मंत्रियों और विशेष सहायकों की विदेशी यात्राओं पर लगाया गया पूर्ण प्रतिबंध जारी रहेगा। अमेरिका-ईरान युद्ध के तीसरे सप्ताह में पहुंचने के बाद पाकिस्तान पर इसका असर दिखने लगा है। पिछले शुक्रवार को पेट्रोलियम कीमतों में 55 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि के बाद सरकार ने ईंधन खपत कम करने के लिए कई उपायों की घोषणा की थी।




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