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- चेन्नई। सलामी बल्लेबाज तनिष्का शर्मा के शानदार अर्धशतक और जाह्नवी वीरकर तथा मैत्री मनियार की बेहतरीन गेंदबाजी की बदौलत भारत ने बुधवार को यहां अंडर-19 महिला टी20 मुकाबले में श्रीलंका को 11 रन से हरा दिया। पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही और दूसरे ही ओवर में दीक्षा कटरगड्डा बिना खाता खोले आउट हो गईं। इसके बाद तनिष्का शर्मा ने संयमित बल्लेबाजी करते हुए आठ चौकों की मदद से 56 गेंदों में 58 रन बनाए। तनिष्का ने इरा जाधव (21 गेंदों में 26 रन) के साथ दूसरे विकेट के लिए 57 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी की। कुमारी पलक ने 18 गेंदों में 21 रन और काश्वी कंडिकुप्पा ने 12 रन का योगदान देकर टीम को 20 ओवर में 6 विकेट पर 134 रन तक पहुंचाया। इसके बाद जाह्नवी (14 रन पर तीन विकेट) और मैत्री (26 रन पर तीन विकेट) की शानदार गेंदबाजी ने भारत ने श्रीलंका को 20 ओवर में आठ विकेट 123 रन पर रोक दिया। श्रीलंका के लिए विमोक्षा बालासूर्या ने 52 गेंदों पर आठ चौकों की मदद से 61 रन की शानदार पारी खेली।उन्होंने सलामी जोड़ीदार संजना कविंदी (14) और मनुडी नानायक्कारा (24) के साथ उपयोगी साझेदारियां कर टीम को मुकाबले में बनाए रखा। काश्वी कंडिकुप्पा (24 रन पर एक विकेट) ने सातवें ओवर में संजना को आउट कर भारत को सफलता दिलाई। इसके बाद 16वें ओवर में मैत्री ने मनुडी का विकेट लेकर श्रीलंका का स्कोर दो विकेट पर 95 रन कर दिया। मैत्री ने 18वें ओवर में खतरनाक साबित हो रहीं विमोक्षा बालासूर्या को भी पवेलियन भेज दिया। इसके बाद श्रीलंकाई टीम दबाव में आ गई और लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकी। इस जीत के साथ भारत ने तीन मैचों की श्रृंखला में 2-0 की अजेय बढ़त बना ली। तीसरा और अंतिम टी20 मैच शनिवार को खेला जाएगा।
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नयी दिल्ली।'' केंद्रीय संसदीय एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने भरोसा जताया है कि भारतीय तलवारबाज आगामी एशियाई खेलों में पदक जीतने के साथ ही 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक के लिए भी क्वालिफाई कर सकते हैं। पूर्व खेल मंत्री रहे रीजीजू ने कहा कि तलवारबाजी खेल में युवाओं को आकर्षित करने की क्षमता है और भारत में इसे अधिक लोकप्रिय बनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जब वह खेल मंत्री थे, तब उन्होंने तलवारबाजी को प्राथमिकता दी थी। इस खेल में काफी प्रगति हुई है। उन्हें उम्मीद है कि आगामी एशियाई खेलों ( जापान के आइची-नागोया में 19 सितंबर से चार अक्टूबर तक) में भारत के तलवारबाजी में पदक जरूर जीतेगा। रीजीजू ने कहा, "आज हमने एशियाई चैंपियनशिप की मेजबानी की है। भारत भविष्य में विश्व चैंपियनशिप की भी मेजबानी कर सकता है। मुझे लगता है कि 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक के लिए भारत से दो-चार खिलाड़ी तलवारबाजी में क्वालिफाई करेंगे, क्योंकि वे जिस तरह से अभ्यास और प्रदर्शन कर रहे हैं, वह बहुत उत्साहजनक है।'' उन्होंने कहा कि भारत में इस खेल को लोकप्रिय बनाने की बड़ी संभावना है।
उन्होंने कहा, "भारत में इस चैंपियनशिप की मेजबानी करना बड़ी उपलब्धि है। मुझे बताया गया कि कई भारतीय खिलाड़ी सिर्फ एक या दो अंकों के अंतर पदक जीतने से चूक गये, लेकिन उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया।'' रीजीजू ने कहा, '' भविष्य में तलवारबाजी पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए क्योंकि यह बहुत रोचक खेल है। ओलंपिक में इसके 12 स्वर्ण पदक दांव पर होते हैं और इसमें फॉइल, एपी और सेबर जैसी स्पर्धाएं शामिल हैं जो युवाओं को आकर्षित कर सकते हैं और यह खेल और लोकप्रिय होगा।" उन्होंने भारतीय टेबल टेनिस खिलाड़ी मनिका बत्रा के एशियाई खेलों की टीम से बाहर किए जाने के मुद्दे पर कहा कि सरकार खेल संघों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करती। मनिका बत्रा को चयन मानदंड पूरा नहीं करने के कारण भारतीय टेबल टेनिस महासंघ द्वारा टीम से बाहर किया गया था। उन्होंने खेल मंत्री से चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की है। रीजीजू ने कहा "हम खिलाड़ियों और खेल के प्रचार की बात कर सकते हैं, लेकिन खेलों के आंतरिक प्रशासन में हम हस्तक्षेप नहीं करते हैं।'' -
सुहल (जर्मनी). भारत के युवा निशानेबाज प्रीतम केंद्रे ने अपने कौशल और एकाग्रता का शानदार नमूना पेश करते हुए रविवार को यहां आईएसएसएफ जूनियर विश्व चैंपियनशिप में पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता। भारत ने महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल टीम स्पर्धा में कांस्य पदक भी जीता, जिससे उसके पदकों की कुल संख्या 11 हो गई। इनमें पांच स्वर्ण पदक भी शामिल हैं। अपने दूसरे अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में भाग ले रहे 16 वर्षीय प्रीतम ने आठ खिलाड़ियों के फाइनल में 251.3 का स्कोर बनाकर तटस्थ खिलाड़ी टिमोफेई एलेनिकॉव और नॉर्वे के जेन्स ओस्टली को पीछे छोड़ते हुए भारत को स्वर्ण पदक दिलाया। पुणे के इस निशानेबाज ने हाल ही में अपनी कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा उत्तीर्ण की थी। प्रीतम ने कहा, ''मैं स्वर्ण पदक जीत कर बेहद खुश हूं। प्रतियोगिता के दौरान मेरा पूरा ध्यान अपनी तकनीक और प्रत्येक शॉट में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने पर था। उन्होंने कहा, ''विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने से मेरा आत्मविश्वास काफी बढ़ा है। मैं 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में लगातार सुधार करना चाहता हूं और देश के लिए लगातार पदक जीतना चाहता हूं।'' प्रीतम और उनके साथी पीयूष शर्मा क्वालीफाइंग राउंड में क्रमशः 628.2 और 629.0 का स्कोर बनाकर क्रमशः तीसरे और पांचवें स्थान पर रहते हुए फाइनल में पहुंचे थे। प्रीतम दूसरी सीरीज के बाद छठे स्थान पर थे, जबकि पीयूष ने बढ़त बना ली थी। प्रीतम ने हालांकि इसके बाद अच्छा प्रदर्शन किया। पीयूष ने भी पदक की उम्मीद बनाए रखी थी लेकिन वह चौथे एलिमिनेशन राउंड के बाद शीर्ष तीन में जगह बनाने से सिर्फ 0.1 अंक से चूक गए और चौथे स्थान पर रहे। प्रीतम ने इसके बाद भी एकाग्रता बनाए रखी और आखिर में स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
भारतीय पुरुष टीम हालांकि रैंकिंग में जगह नहीं बना पाई क्योंकि टीम के तीसरे सदस्य अभिनव साव को अयोग्य घोषित कर दिया गया। उनके उपकरण आईएसएसएफ के मानकों पर खरे नहीं उतरे थे। भारत ने महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल टीम स्पर्धा में अंजलि भागवत, परिशा गुप्ता और निथिला क्रिस्टोफर के संयुक्त प्रयास से कांस्य पदक जीता। इन तीनों ने कुल मिलाकर 1713 अंक बनाए। अंजलि इस स्पर्धा के व्यक्तिगत फाइनल में पहुंचने वाली एकमात्र भारतीय निशानेबाज थीं। उन्होंने 577 के स्कोर के साथ सातवें स्थान पर रहते हुए क्वालीफाई किया। फाइनल में हालांकि वह छठा स्थान ही हासिल कर पाई। - नयी दिल्ली/ भारतीय सुपरस्टार विराट कोहली से रविवार को जब पूछा गया कि वह फिर से सफेद जर्सी पहनकर मैदान में लौटना चाहेंगे तो उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि वह अपने नए लांच किए गए जूतों की बिक्री कम होना पसंद करेंगे, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में वापसी नहीं करेंगे। पिछले वर्ष टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने वाले कोहली अब केवल एक प्रारूप में ही खेलते हैं। उन्होंने अपने टेस्ट करियर में 9,230 रन बनाए थे। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने अपने नए जूतों की कीमत भी अपने टेस्ट रन के बराबर रखी है। 'वन8 ग्लोबल' के प्रीमियर कार्यक्रम में उनसे मजाक में पूछा गया कि क्या वह टेस्ट क्रिकेट में वापसी करना चाहेंगे ताकि उनके लाल रंग के जूतों की बिक्री और मुनाफा बढ़ सके। ये जूते टेस्ट क्रिकेट में उनके योगदान और समर्पण से प्रेरित हैं। इस पर कोहली ने हंसते हुए कहा, ''मैं कम बिक्री होना पसंद करूंगा। मैं इससे (टेस्ट क्रिकेट से) आगे बढ़ चुका हूं। '' उनके इस जवाब पर मौजूद लोगों की हंसी छूट गई।इस बातचीत के दौरान कोहली ने अपने 'कभी हार नहीं मानने' वाले रवैये पर भी बात की जिसके साथ वह हमेशा खेलते रहे हैं। अपनी बात समझाते हुए उन्होंने उदाहरण के तौर पर 2022 टी20 विश्व कप में पाकिस्तान के खिलाफ मेलबर्न में खेली गई अपनी यादगार मैच जीताने वाली पारी का जिक्र किया। कोहली ने कहा, ''मैं ऐसा ही हूं। मुझे ऐसी स्थितियां पसंद हैं जब लोगों को लगता है कि मैच हाथ से निकल गया है और फिर किसी तरह आप खेल को वापस अपनी तरफ मोड़ लेते हैं। '' उन्होंने कहा, ''बहुत छोटी उम्र से ही मैं परिस्थितियों को इसी नजरिए से देखता आया हूं। और मैंने कभी भी, आखिर तक, यह नहीं माना कि हम मैच हार गए हैं या हम जीत नहीं सकते। और इसी वजह से कई जादुई पल देखने को मिले हैं। '' कोहली ने कहा, ''मेरे लिए जो घटना हमेशा सबसे खास रहेगी, वह मेलबर्न में पाकिस्तान के खिलाफ खेला गया मैच है। बाद में मुझे बताया गया था कि उस समय हमारी जीत की संभावना लगभग तीन प्रतिशत थी। लेकिन मैंने कभी इस तरह नहीं सोचा। यहां तक कि एक प्रतिशत भी काफी होता है। अगर मौका है, तो मौका है। जब तक मैच वास्तव में हार नहीं जाए, तब तक सब कुछ खत्म नहीं होता। '' कोहली अपने शुरुआती दिनों में अपने आक्रामक और बेबाक रवैये के लिए जाने जाते थे। जब उनसे पूछा गया कि क्या 18 साल की उम्र वाले कोहली अपनी आज के व्यक्तित्व की किसी खास खूबी को देखकर हैरान होंगे तो उन्होंने कहा, ''शायद वह खुद को इतना शांत कभी सोच भी नहीं सकते थे। उसे शायद उम्मीद होती कि मैं अब भी उतना ही उग्र और जोश से भरा इंसान रहूंगा। '' उन्होंने कहा, ''लेकिन चीजें बहुत अच्छे तरीके से आगे बढ़ी हैं। आज हम जो कर रहे हैं और जहां हैं, उसे देखकर मुझे गर्व महसूस होता। मुझे लगता है कि मैं किसी भी कमरे में फक्र से प्रवेश कर सकता हूं। मुझे इस बात की कोई झिझक नहीं होगी कि मैं कौन हूं और क्या करने की कोशिश कर रहा हूं। '' उन्होंने कहा, ''बस अपने विजन और दिल की बात पर भरोसा करना और उसे पूरा विश्वास के साथ निभाना, ये ऐसी बातें हैं जिन पर मुझे गर्व होगा। '' मैदान पर कोहली ने बल्ले से शानदार निरंतरता बनाए रखी है और हाल ही में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु को लगातार दूसरी बार आईपीएल खिताब दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
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नयी दिल्ली. राष्ट्रमंडल खेलों में हिस्सा लेने वाले भारतीय मुक्केबाजों ने चेक गणराज्य में हुए आमंत्रण 56वीं ग्रां प्री उस्ती नाद लाबेम टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 12 पदक जीते जिनमें आठ स्वर्ण पदक शामिल हैं। पांच सदस्यों वाली महिला टीम ने चार स्वर्ण और एक रजत पदक जीतकर शानदार शुरुआत की।
ओलंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन (75 किग्रा), मौजूदा एशियाई चैंपियन प्रीति पवार (54 किग्रा), साक्षी चौधरी (51 किग्रा) और प्रिया घंघास (60 किग्रा) ने फाइनल में सर्वसम्मति से जीत हासिल करते हुए स्वर्ण पदक जीते। परवीन हुड्डा (65 किग्रा) ने रजत पदक जीतकर महिला टीम के शानदार प्रदर्शन को पूरा किया।
पुरुष टीम ने भी महिलाओं की तरह सफलता हासिल करते हुए चार स्वर्ण पदक जीते। जादूमणि सिंह (55 किग्रा), सचिन (60 किग्रा), अंकुश (80 किग्रा) और नरेंद्र (90 किग्रा से अधिक) अपने वर्ग में चैंपियन बने। लवलीना ने फाइनल में इटली की मेलिसा जेमिनी को 5-0 से हराया जबकि प्रीति ने फ्रांस की जेसा मार्सेल को इसी अंतर से मात दी। साक्षी ने फ्रांस की मेसून बौरेग को 5-0 से हराया और प्रिया ने चेक गणराज्य की पसंदीदा खिलाड़ी बारबोरा मैक्सोवा पर शानदार जीत हासिल की। जादूमणि ने फाइनल में इंग्लैंड के अब्दुल बर्टन को 4-1 से हराया जबकि सचिन और अंकुश ने क्रमशः हंगरी के वेरेस रोहलैंड और चेक गणराज्य के फ्लोरियन डेनियल पर 5-0 से बड़ी जीत हासिल की। नरेंद्र ने कड़े मुकाबले वाले हैवीवेट फाइनल में अर्मेनिया के डेविड चालोयन को 3-2 से हराया।
आदित्य प्रताप यादव (65 किग्रा) और कपिल पोखरिया (90 किग्रा) को अपने खिताबी मुकाबलों में करीबी हार के बाद रजत पदक से संतोष करना पड़ा जबकि सुमित कुंडू (70 किग्रा) ने कांस्य पदक जीता। - नई दिल्ली। भारत की मुक्केबाज प्राची की अगुवाई में भारतीय टीम ने वर्ल्ड बॉक्सिंग कप 2026 (स्टेज-2) में शानदार प्रदर्शन किया है। क्वार्टर फाइनल मुकाबलों में बेहतरीन जीत दर्ज करते हुए भारतीय मुक्केबाजों ने देश के लिए छह पदक पक्के कर लिए हैं। 57 किग्रा वर्ग में प्राची ने पेरिस ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता चीनी ताइपे की शिह यी वू को कड़े मुकाबले में 4-1 से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया। यह भारतीय दल की सबसे उल्लेखनीय जीतों में से एक रही। 48 किग्रा वर्ग की दुनिया की नंबर-1 महिला मुक्केबाज मीनाक्षी इस प्रतियोगिता में 51 किग्रा वर्ग में हिस्सा ले रही हैं। उन्होंने कजाकिस्तान की अलुआ बाल्किबेकोवा को एकतरफा मुकाबले में 5-0 से हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई। यह दिन की सबसे प्रभावशाली जीतों में शामिल रही।पुरुष वर्ग में दीपक (70 किग्रा) ने संयमित प्रदर्शन करते हुए अजरबैजान के नबी इस्गांडारोव को 5-0 से शिकस्त दी। वहीं, निखिल (55 किग्रा) ने भी अजरबैजान के अमीन मम्मादजादा को 5-0 से हराकर अंतिम चार में जगह बनाई। इन नतीजों के साथ भारत के छह पदक सुनिश्चित हो गए हैं, जो अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय मुक्केबाजों की लगातार बढ़ती ताकत को दर्शाता है।65 किग्रा वर्ग में सनेह ने संघर्षपूर्ण प्रदर्शन किया, लेकिन पोलैंड की किंगा क्रोवका के खिलाफ 0-5 से हारकर प्रतियोगिता से बाहर हो गए। इससे पहले चौथे दिन के मुकाबलों में अभिनाश जामवाल (65 किग्रा) को किर्गिस्तान के मिर्जोखिद इमामनाजरोव के खिलाफ 0-5 से हार का सामना करना पड़ा, जिसके साथ उनका अभियान भी समाप्त हो गया।भारतीय टीम का लगातार शानदार प्रदर्शन यह दर्शाता है कि उसके पास विभिन्न भार वर्गों में मजबूत प्रतिभा मौजूद है। कई मुक्केबाजों के सेमीफाइनल में पहुंचने के बाद अब टीम की नजर फाइनल में जगह बनाने और स्वर्ण पदक जीतने पर होगी। गुरुवार को प्रतियोगिता के चौथे दिन मीनाक्षी ने 51 किग्रा वर्ग में पोलैंड की नतालिया कुक्जेवस्का को 5-0 से हराकर क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया था। इसके बाद उन्होंने क्वार्टर फाइनल में भी दमदार जीत दर्ज कर पदक सुनिश्चित किया।
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गुआंगडोंग (चीन). भारत ने बृहस्पतिवार को यहां विश्व टीम स्नूकर चैंपियनशिप में दबदबा बनाते हुए गत चैंपियन हांगकांग चीन को 3-1 से हराकर फाइनल में प्रवेश किया। भारत ने सात साल पहले म्यांमा में चैंपियनशिप जीती थी और अब शनिवार सुबह को होने वाले फाइनल में उसका सामना मेजबान चीन 'ए' और कोरिया के बीच होने वाले दूसरे सेमीफाइनल के विजेता से होगा। युगल मुकाबले में थोड़ी परेशानी के बावजूद पंकज आडवाणी और आदित्य मेहता जीत गए। आडवाणी ने चेयुंग का वाई को 74-1 से और आदित्य मेहता ने वांग युचेन को 67-9 से पछाड़ा। भारतीय जोड़ी को युचेन और वान नानसेन सिन मान से 59-68 से हार मिली। लेकिन आडवाणी ने युचेन को 74-0 से पराजित किया।
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रॉटरडम. मनप्रीत सिंह ने अपना 413वां अंतरराष्ट्रीय मैच खेलकर सबसे अधिक मैच खेलने का रिकॉर्ड बनाया, जबकि भारत ने यहां एफआईएच हॉकी प्रो लीग के अपने दूसरे मैच में शानदार प्रदर्शन करते हुए जर्मनी को 3-1 से हराया। भारत की ओर से मनदीप सिंह (सातवें), शिलानंद लाकड़ा (13वें) और नीलकांत शर्मा (35वें) ने एक-एक गोल दागा, जबकि जर्मनी की तरफ से एकमात्र गोल राफेल हार्टकॉफ (45वें) ने किया। भारतीय मिडफील्डर हार्दिक सिंह को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।
भारत ने अच्छी शुरुआत की और शुरू से ही गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा जिसका फायदा उसे सातवें मिनट में मिला जब मनदीप ने गोल करके टीम को 1-0 की बढ़त दिलाई। लाकड़ा ने पहला क्वार्टर खत्म होने से पहले ही शानदार शॉट लगाकर जर्मन गोलकीपर अलेक्जेंडर स्टैडलर को हतप्रभ किया और भारत को 2-0 से आगे कर दिया। दूसरे क्वार्टर में जर्मनी ने भारत के हाफ में घुसने की कोशिश की, लेकिन भारतीय रक्षापंक्ति ने दमदार खेल का नजारा पेश किया। जर्मनी को दो पेनल्टी कॉर्नर मिले, लेकिन पहला अमित रोहिदास ने बचा दिया और दूसरा गोलकीपर मोहित ने नाकाम कर दिया, जिससे भारत की बढ़त बरकरार रही। भारत ने तब अपनी बढ़त को 3-0 तक कर दिया जब नीलकांत ने अकेले ही दौड़ते हुए जर्मन डिफेंडरों को पछाड़कर गेंद को गोल में डाल दिया। तीसरे क्वार्टर में महज 20 सेकंड शेष रहते हुए हार्टकोफ ने 45वें मिनट में अपनी टीम के लिए पहला गोल दागा। जर्मनी की टीम ने इसके बाद आक्रामक रवैया अपनाया और चौथे क्वार्टर में लगातार हमले किए लेकिन भारतीय रक्षापंक्ति ने उन्हें नाकाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। -
लखनऊ/ कप्तान शुभमन गिल और इशान किशन के शतक के बाद अर्शदीप सिंह की अगुआई में तेज गेंदबाजों के उम्दा प्रदर्शन से भारत ने दूसरे एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच में बुधवार को यहां अफगानिस्तान को 170 रन से हराकर तीन मैच की श्रृंखला में 2-0 की विजयी बढ़त बना ली। भारत के 403 रन के बड़े लक्ष्य का पीछा करे हुए अफगानिस्तन की टीम अर्शदीप (45 रन पर तीन विकेट), गुरनूर बरार (60 रन पर तीन विकेट) और प्रिंस यादव (56 रन पर दो विकेट) की तेज गेंदबाजी तिकड़ी के सामने कभी लक्ष्य के करीब पहुंचने की स्थिति में भी नहीं दिखी और अंतत: 44.3 ओवर में 232 रन पर सिमट गई। अफगानिस्तान की ओर से रहमत शाह ने 89 गेंद में आठ चौकों से सर्वाधिक 79 रन बनाए जबकि सेदिकुल्लाह अटल (42) और रहमानुल्लाह गुरबाज (41) ने भी उपयोगी पारियां खेलीं। गिल ने बेहद गर्मी और पैर में जकड़न के बावजूद 154 रन की शानदार पारी खेली जबकि इशान किशन ने एकदिवसीय शतक के तीन साल के इंतजार को खत्म करते हुए 125 रन बनाए जिससे भारत ने 402 रन का स्कोर खड़ा किया। टीम हालांकि 49.5 ओवर में सिमट गई। गिल और किशन ने तीसरे विकेट के लिए सिर्फ 141 गेंद में 224 रन की तूफानी साझेदारी करके भारत के मजबूत स्कोर की नींव रखी। गिल ने 110 गेंद की अपनी पारी में 22 चौके और दो छक्के मारे जबकि किशन ने 79 गेंद का सामना करते हुए 14 चौके और सात छक्के जड़े। अफगानिस्तान की ओर से नांगेयालिया खरोटे (76 रन पर चार विकेट) और राशिद खान (48 रन पर तीन विकेट) की स्पिन जोड़ी ने सात मिलकर सात विकेट चटकाकर मेहमान टीम को अंतिम ओवरों में वापसी दिलाने की कोशिश की। लक्ष्य का पीछा करने उतरे अफगानिस्तान को पिछले मैच के शतकवीर रहमानुल्लाह गुरबाज ने 33 गेंद में 41 रन की पारी खेलकर एक बार फिर तेज शुरुआत दिलाई। गुरबाज सातवें ओवर में भाग्यशाली रहे जब पदार्पण कर रहे तेज गेंदबाज प्रिंस यादव की गेंद को हवा में लहराकर अर्शदीप सिंह को कैच बैठे लेकिन यह नोबॉल हो गई। गुरबाज हालांकि जीवनदान का फायदा नहीं उठा सके और अगले ओवर में गुरनूर बरार की गेंद पर विकेटकीपर लोकेश राहुल को कैच दे बैठे। उन्होंने अपनी पारी में सात चौके और एक छक्का मारा। गुरबाज के आउट होने के बाद रन गति में गिरावट आई और दबाव के बीच सलामी बल्लेबाज इब्राहिम जादरान (21) अर्शदीप की गेंद पर बड़ा शॉट खेलने की कोशिश में प्रिंस के हाथों लपके गए। बाएं हाथ के स्पिनर कुलदीप यादव और ऑफ स्पिनर वाशिंगटन सुंदर ने बीच के ओवरों में रन गति में अंकुश लगाया। अफगानिस्तान के रनों का शतक 20वें ओवर में पूरा हुआ।
सेदिकुल्लाह ने धीमी शुरुआत के बाद वाशिंगटन पर चौका और कुलदीप पर छक्का जड़ा। उन्होंने गुरनूर पर भी चौका मारा लेकिन फिर वाशिंगटन की सीधी गेंद को चूककर पगबाधा हो गए। कप्तान हशमतुल्लाह शाहिदी (04) भी गुरनूर की गेंद को विकेटों पर खेल बैठे।
रहमत शाह ने इसके बाद मोर्चा संभाला। उन्होंने गुरनूर और वाशिंगटन पर चौके जड़ने के अलावा प्रिंस पर भी लगातार दो चौके मारे। प्रिंस ने खरोटे (06) को बोल्ड करके अपना एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय विकेटों का खाता खोला।
राशिद (12) ने आते ही प्रिंस पर दो चौके मारे लेकिन अर्शदीप की गेंद पर थर्ड मैन पर रोहित को कैच दे बैठे। अर्शदीप ने अगले ओवर में अल्लाह गजनफर (01) को भी आउट किया।
रहमत ने इससे पहले कुलदीप की गेंद पर एक रन के साथ 52 गेंद में अर्धशतक पूरा किया।
अफगानिस्तान के रनों का दोहरा शतक 37वें ओवर में पूरा हुआ।
गुरनूर ने मोहम्मद सलीम (09) को बोल्ड करके अपना तीसरा विकेट हासिल किया जबकि प्रिंस ने रहमत को आउट करके अफगानिस्तान की पारी का अंत किया। दार्विश रसूली (06) रिटायर्ड हर्ट हुए। इससे पहले भारत ने अगले साल होने वाले विश्व कप से पहले अपने प्रयोगों को जारी रखते हुए रोहित शर्मा (48) के साथ पारी का आगाज करने के लिए यशस्वी जायसवाल (04) को उतारा। बाएं हाथ के युवा बल्लेबाज जायसवाल इस मौके का फायदा नहीं उठा सके और दूसरे ही ओवर में मोहम्मद सलीम की गेंद पर खरोटे को कैच दे बैठे। रोहित ने अपने पुराने अंदाज की झलक दिखाई। पूर्व कप्तान गेंद को बहुत अच्छे से मारे रहे थे और बड़े स्कोर की ओर बढ़ रहे थे लेकिन राशिद खान (48 रन पर तीन विकेट) की गुगली ने उन्हें चकमा दे दिया और गेंद उनके बल्ले के अंदरूनी हिस्से से लगकर विकेटों से जा टकराई। गिल और किशन ने इसके बाद पारी को संभाला। दोनों ने सटीक और बेहतरीन स्ट्रोक खेले जिससे मुश्किल हालात के बावजूद बल्लेबाजी बहुत आसान लग रही थी। गिल ने बिलाल सामी पर शानदार ड्राइव से चौका लगाते हुए 77 गेंद में अपना नौवां एकदिवसीय शतक पूरा किया जो कप्तान के रूप में उनका पहला शतक है। किशन ने भी इसी ओवर में लगातार तीन चौकों के साथ 71 गेंद में अपना दूसरा शतक जड़ा। उन्होंने पिछला शतक दिसंबर 2022 में बांग्लादेश के खिलाफ दोहरे शतक के रूप में बनाया था। बाएं हाथ के इस बल्लेबाज की पारी में ताकत और नए तरह के शॉट की झलक दिखी। उन्होंने कुछ शानदार पुल शॉट खेले। किशन ने अपना दूसरा अर्धशतक सिर्फ 19 गेंद में पूरा किया। वह 37वें ओवर में खरोटे (76 रन पर चार विकेट) की गेंद पर लगातार दो छक्कों के बाद अगली गेंद पर बड़ा शॉट खेलने की कोशिश में स्थानापन्न खिलाड़ी इकराम अलीखिल को कैच दे बैठे। शतक के करीब पहुंचते-पहुंचते भीषण गर्मी का असर गिल पर दिखने लगा। भारतीय कप्तान को 34वें ओवर के बाद पीठ के इलाज की जरूरत पड़ी और वह काफी थके हुए लग रहे थे। गिल की शानदार पारी का अंत निराशाजनक तरीके से हुआ जब वह खरोटे की गेंद को रिवर्स स्वीप करने की कोशिश में दार्विश रसूली को कैच दे बैठे। गिल के आउट होते ही भारतीय बल्लेबाजी लड़खड़ा गई। टीम ने अगली ही गेंद पर लोकेश राहुल (00) का विकेट गंवाया जबकि श्रेयस अय्यर (26) अच्छी शुरुआत को बड़ी पारी में नहीं बदल पाए। अफगानिस्तान ने आखिरी चरण में कुछ हद तक वापसी की जब भारत ने आखिरी 10 ओवर में सात विकेट गंवाए। -
कंसास सिटी. लियोनेल मेस्सी की पहली विश्व कप हैट्रिक के दम पर गत चैम्पियन अर्जेंटीना ने ग्रुप चरण के पहले मैच में अल्जीरिया को 3 . 0 से हरा दिया । अब मेस्सी के 16 विश्व कप गोल हो गए हैं जिससे वह जर्मनी के मिरोस्लाव क्लोसे के साथ सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ियों की सूची में बराबरी पर आ गए हैं । इंटर मियामी के अपने साथी रौद्रिगो डि पॉल के पास के दम पर मेस्सी ने शुरूआती मिनटों में पहला गोल दागा । दूसरा गोल दूसरे हाफ की शुरूआत में किया और तीसरा आखिरी मिनटों में दागा जिसके बाद दर्शकों ने खड़े होकर उनका अभिवादन किया । अर्जेंटीना के लिये सर्बिया और मोंटेनीग्रो के खिलाफ विश्व कप में पदार्पण के 20 साल बाद मेस्सी ने यह गोल दागा है । उन्होंने तब अपने पहले विश्व कप मैच में भी गोल किया था । पिछली बार कतर में हुए विश्व कप में अर्जेंटीना को पहले मैच में सउदी अरब ने हराया था लेकिन उसके बाद अपने अभियान को ढर्रे पर लाकर तीसरा विश्व खिताब जीता । अगले सप्ताह 39 वर्ष के होने जा रहे मेस्सी के खेल को देखकर कहीं नहीं लगा कि टूर्नामेंट से पहले वह जांघ की मांसपेशी में चोट से जूझ रहे थे । उनके नाम और भी गोल हो सकते थे लेकिन एक आफ साइड हो गया और दूसरा शॉट क्रॉसबार से टकरा गया । अब अर्जेंटीना का सामना सोमवार को आस्ट्रिया से और 27 जून को जोर्डन से होगा । वहीं अल्जीरिया सोमवार को जोर्डन से और 27 जून को आस्ट्रिया से खेलेगा ।
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नयी दिल्ली/ ओेलंपियन सी ए भवानी देवी यहां 19 से 24 जून तक होने वाली सीनियर एशियाई तलवारबाजी चैम्पियनशिप में भारत की 24 सदस्यीय टीम का हिस्सा होगी । भारतीय टीम में 12 पुरूष और 12 महिला खिलाड़ी हैं । चैम्पियनशिप में 30 से अधिक देशों के 400 से अधिक खिलाड़ी भाग लेंगे और यह जापान में होने वाले एशियाई खेलों के लिये सीधे क्वालीफाई करने का मौका होगा । भवानी देवी ने कहा ,''इतने बड़े टूर्नामेंट की मेजबानी करना भारतीय तलवारबाजी के लिये काफी महत्वपूर्ण है । घरेलू दर्शकों के सामने खेलना फख्र की बात है और इससे खेल की लोकप्रियता भी बढेगी ।'' प्रतिस्पर्धा फॉइल, एपी और साबरे श्रेणियों में खेली जायेगी ।
भारतीय टीम :
महिला :
फॉइल : जॉयज अशिता स्टालिनराज, नाओरेम मीना देवी, सोनिया देवी
एपी : तनिष्का खत्री, प्राची लोहान, मितवा चौधरी
साबरे : सीए भवानी देवी, श्रेया गुप्ता, जेफरलिन जानी सिमला, श्रुति जोशी
पुरूष :
फॉइल : सचिन हरियाणा, सनासम हेमाश सिंह, आदित्य हरियाणा , तेजस मनोज पाटिल
एपी : श्रेजिन राजेंद्रन एस, जोसेफ बेनेट, शौर्य अश्विनी, ए कूवाक्कल जोशी
साबरे : करण सिंह, जी निधि कुमारेश पद्मा, विशाल थापर और लक्ष्य बडसेर ।
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अंताल्या. भारतीय रिकर्व तीरंदाजों की नयी पीढ़ी ने रविवार को तीरंदाजी की दिग्गज टीम दक्षिण कोरिया को एक ही दिन में दो बार हराकर यहां तीरंदाजी विश्व कप के तीसरे चरण में ऐतिहासिक रूप से दो स्वर्ण पदक जीते और शानदार अंदाज में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। पेरिस ओलंपियन धीरज बोम्मादेवरा इस अभियान के स्टार बनकर उभरे। उन्होंने पहले 17 साल की कुमकुम मोहोद के साथ मिलकर रिकर्व मिश्रित टीम फाइनल में ओलंपिक चैंपियन को हराकर उलटफेर किया और पेरिस ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता दक्षिण कोरिया के ली वू सियोक को रोमांचक फाइनल में 7-3 से हराकर अपना पहला व्यक्तिगत तीरंदाजी विश्व कप स्वर्ण पदक जीता। इस तरह उन्होंने यादगार 'स्वर्णिम डबल' पूरा किया। यह पहला मौका था जब भारत ने रिकर्व तीरंदाजी में अपनी सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्वी मानी जाने वाली दक्षिण कोरिया को हराकर एक ही विश्व कप चरण में दो स्वर्ण पदक जीते। इस प्रदर्शन की बदौलत भारत पदक तालिका में चीन (तीन स्वर्ण, एक कांस्य) के बाद दूसरे स्थान पर रहा जबकि कोरिया चौथे स्थान (1-2-1) पर खिसक गया। मेक्सिको तीसरे स्थान पर रहा। इन दो जीत ने रिकर्व स्पर्धा में भारत की वापसी को भी दिखाया जिसमें उसने लगातार विश्व कप में दो बार कोरियाई खिलाड़ियों को हराया है। पिछले महीने शंघाई विश्व कप में दीपिका कुमारी, कुमकुम और अंकिता भकत की महिला तिकड़ी ने सेमीफाइनल में रिकॉर्ड 10 बार की ओलंपिक चैंपियन दक्षिण कोरिया की टीम को चौंकाते हुए स्वर्ण पदक जीता था। चौबीस वर्षीय धीरज बोम्मादेवरा और कुमकुम ने रिकर्व मिश्रित टीम फाइनल में किम जे देओक और ओह ये जिन को 5-1 (37-36, 37-36, 39-39) से हराया। उन्होंने दुनिया की सबसे कामयाब जोड़ियों में से एक के खिलाफ गजब का संयम और जज्बा दिखाया। धीरज और 17 साल की कुमकुम पर कोरियाई टीम के खिलाफ खेलने का कोई दबाव नहीं दिखा। कोरियाई टीम में किम शामिल थे जो तोक्यो ओलंपिक में आन सान के साथ मिश्रित टीम स्वर्ण पदक विजेता के अलावा पेरिस ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली दक्षिण कोरियाई पुरुष टीम के सदस्य भी रहे हैं। धीरज और मौजूदा सत्र में विश्व कप में पदार्पण करने वाली कुमकुम ने पूरे मुकाबले में धैर्य बनाए रखा। उन्होंने कोरियाई खिलाड़ियों को कड़ी चुनौती दी और दबाव में निर्णायक निशाने लगाए। पेरिस ओलंपियन और दुनिया के 16वें नंबर के तीरंदाज धीरज ने मुकाबले के आखिरी तीर पर परफेक्ट 10 के स्कोर से भारतीय जोड़ी की जीत सुनिश्चित की। कुल मिलाकर दोनों ने तीन-तीन बार 10 का स्कोर किया। कुमकुम ने तीन बार नौ अंक भी जुटाए जबकि धीरज ने दो बार नौ और एक बार आठ अंक पर निशाना लगाया। दोनों तीरंदाजों का यह विश्व कप मिश्रित टीम स्पर्धा का पहला स्वर्ण पदक है।
वर्ष 2024 में अंकिता भकत और 2025 में भजन कौर के साथ र्मिश्रित टीम कांस्य पदक जीतने वाले धीरज ने अंतत: स्वर्ण पदक अपने नाम किया। कुमकुम ने लगातार दूसरी बार विश्व कप में स्वर्ण पदक जीता। वह शंघाई में जीत हासिल करने वाली भारत की महिला रिकर्व टीम का हिस्सा थीं और चीन के खिलाफ शूट ऑफ में जीत दिलाने वाला तीर चलाया था। संयोग से विश्व कप चरण में पर भारत का पिछला रिकर्व मिश्रित टीम स्वर्ण भी 2022 में अंताल्या में ही आया था जब रिद्धि फोर और तरुणदीप राय ने शूट ऑफ में ग्रेट ब्रिटेन की ब्रायोनी पिटमैन और एलेक्स वाइज को हराया था। फाइनल में भारतीय जोड़ी ने अच्छी शुरुआत की जब दिग्गज किम ने सिर्फ सात और ओह ने नौ अंक हासिल किए। कोरिया ने शुरुआती दो तीर से 16 अंक बनाए। कुमकुम ने नौ अंक से शुरुआत की और धीरज ने आठ अंक बनाए। दूसरे प्रयास में किम के 10 और ओह ने नौ अंक के साथ वापसी करते हुए कुल स्कोर 35 अंक किया। इसके बाद कुमकुम ने नौ और धीरज ने 10 अंक हासिल किए जिससे उनका स्कोर 36 हो गया।
बाद में हुई माप में कुमकुम के तीर के अंक नौ से बढ़कर 10 हो गए जबकि किम के शुरुआती तीर के अंक आठ कर दिए गए जिससे भारत ने 37-36 से सेट जीत लिया और 2-0 की बढ़त बना ली। दूसरे सेट में कोरियाई टीम दो बार नौ अंक से शुरुआत की जबकि भारतीय तीरंदाजों ने भी दो बार नौ अंक से 18 अंक जुटाए। किम ने दूसरे प्रयास में भी नौ अंक हासिल किए जबकि ओह ने भी इतने ही अंक के साथ कुल स्कोर 36 हो गया।
इसके बाद कुमकुम ने नौ अंक हासिल किए जिससे धीरज को सेट जीतने के लिए परफेक्ट 10 अंक की जरूरत थी। सेना के तीरंदाज ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अधिकतम अंक जुटाए जिससे भारत ने दूसरे सेट 37-36 से जीतकर बढ़त 4-0 कर दी। स्वर्ण पदक पक्का करने के लिए भारत को सिर्फ एक सेट ड्रॉ कराने की जरूरत थी।
तीसरे सेट में किम और ओह ने दो बार 10 अंक हासिल करके अच्छी शुरुआत की जबकि कुमकुम ने 10 और धीरज ने नौ अंक जुटाए। किम ने दूसरे प्रयास में फिर से 10 का स्कोर किया लेकिन ओह नौ अंक ही जुटा सकीं जिससे कोरिया का कुल स्कोर 39 रहा। भारत का स्कोर पहले दो तीर के बाद 19 था लेकिन दबाव के बावजूद कुमकुम ने 10 का स्कोर किया और ऐसा लगा कि धीरज का तीर नौ अंक पर लगा लेकिन जांच के बाद उसे 10 अंक कर दिया गया और भारत ने 39-39 के स्कोर के साथ सेट बराबर करके खिताब जीत लिया। इस बीच कुमकुम ने लगातार दूसरा विश्व कप स्वर्ण पदक जीता। इससे पहले पिछले महीने शंघाई में उन्होंने भारत को महिला टीम का खिताब दिलाने में मदद की थी जिसमें उन्होंने चीन के खिलाफ शूट-ऑफ में जीत दिलाने वाला तीर चलाया था। कुमकुम ने कहा कि उन्होंने विरोधी के बजाय प्रक्रिया पर ध्यान दिया। उन्होंने कहा, ''मुझे खुद पर पूरा भरोसा था। मैंने बस प्रक्रिया पर ध्यान दिया और इस बारे में नहीं सोचा कि मेरे सामने कौन खड़ा है।'' कुमकुम ने कहा, ''मुझे लगता है कि मैंने शंघाई की तुलना में आज बेहतर निशाने लगाए लेकिन निश्चित रूप से वहां मिले स्वर्ण पदक ने मुझे बहुत आत्मविश्वास दिया।'' अपनी युवा साथी के बारे में धीरज ने कहा, ''सच कहूं तो जब मैं उसके साथ खेलता हूं तो उससे बहुत कुछ सीखता हूं।'' उन्होंने कहा, ''मैं अपना अनुभव तो साझा करता ही हूं लेकिन उसके निडर रवैये से और भी अधिक सीखता हूं। वह इस सोच के साथ निशाना लगाती है कि सामने कौन है इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।'' धीरज ने कहा, ''हमारा टीम मंत्र है - 'जब तक खेल खत्म नहीं हो जाए तब तक हार नहीं माननी चाहिए।' हमने आखिरी तीर तक संघर्ष किया। हम आगे थे या पीछे इससे कोई फर्क नहीं पड़ा। हमने सिर्फ उन चीजों पर ध्यान दिया जो जरूरी थीं। यह पूरी तरह से टीम के बीच तालमेल की बात थी।'' फिर कुछ घंटों बाद व्यक्तिगत स्पर्धा में दुनिया में 18वें नंबर के भारतीय सेना के तीरंदाज धीरज ने बेहतर रैंकिंग वाले कोरियाई खिलाड़ी के खिलाफ शांत रहकर शानदार प्रदर्शन किया और अपने करियर का सबसे अहम दिन यादगार बनाया। धीरज ने शुरुआती दो सेट 30-29 और 29-28 से जीतकर 5-1 की बढ़त बना ली जबकि तीसरा सेट 27-27 से बराबरी पर छूटा। चौथे सेट में ली ने वापसी की। उन्होंने दो बार 10 और एक बार 9 का स्कोर करके सेट 29-27 से जीता जबकि धीरज परफेक्ट स्कोर नहीं बना पाए जिससे अंतर कम होकर 3-5 हो गया। लेकिन भारतीय खिलाड़ी ने अपनी लय नहीं बिगड़ने दी। 5-3 की बढ़त के साथ धीरज ने शानदार फाइनल सेट खेलकर मुकाबला अपने नाम किया। उन्होंने लगातार तीन बार 10 (जिसमें एक 'एक्स' भी शामिल था) का स्कोर करके स्वर्ण पदक पक्का किया। यह स्वर्ण पदक इसलिए भी खास था क्योंकि इसने विश्व कप स्वर्ण पदक मैच में किसी कोरियाई खिलाड़ी को हराने के लिए भारतीय रिकर्व तीरंदाज के 14 साल के इंतजार को खत्म कर दिया। इससे पहले 2012 में अंताल्या में दीपिका कुमारी ने यह कारनामा किया था।
धीरज ने जर्मनी के मोरित्ज वीजर को कड़े मुक़ाबले वाले सेमीफाइनल में 6-4 से हराकर शानदार वापसी की।
धीरज पहला सेट 26-27 से हार गए। अगले दो सेट 28-28 से बराबरी पर छूटे, जिससे तीन सेट के बाद भारतीय खिलाड़ी 2-4 से पीछे हो गया। अब धीरज पर बाहर होने का खतरा मंडरा रहा था लेकिन उन्होंने जबरदस्त वापसी की। उन्होंने तीन बार 10 का स्कोर करके चौथा सेट 30-27 से जीता और स्कोर 4-4 से बराबर कर लिया। फैसले वाले सेट में दबाव के बीच वीजर का दूसरा तीर भटककर पांच पर लगा। हालांकि धीरज ने अपना संयम बनाए रखा। उन्होंने 9, 10 और 9 का स्कोर करके सेट 28-23 से जीता और अपना पहला विश्व कप फाइनल पक्का किया। वहीं इस प्रदर्शन ने कंपाउंड टीम के बदलते हाल को भी दिखाया। हाल के समय में ऐसा पहली बार हुआ है जब वे बिना किसी पदक के लौटे हैं जबकि पिछले कुछ सत्र में इस स्पर्धा में उनका दबदबा रहा था। भारत के कंपाउंड तीरंदाजों ने मेक्सिको के पुएब्ला में सत्र के पहले विश्व कप में महिलाओं की टीम स्वर्ण पदक जीता था और पिछले महीने शंघाई में साहिल जाधव ने कांस्य पदक हासिल किया था। जिस टीम ने हांग्झोउ एशियाई खेलों में कंपाउंड के सभी पांच स्वर्ण पदक जीते थे, उसके नतीजों में आई गिरावट को नजरअंदाज़ करना मुश्किल होता जा रहा है, खासकर तब जब तीन महीने से भी कम समय में आइची-नागोया एशियाई खेल होने वाले हैं। कोच राहुल बनर्जी ने कहा, ''कंपाउंड तीरंदाजों के लिए यह वाकई चिंता की बात है। यह अजीब बात है कि जब रिकर्व का प्रदर्शन बेहतर हो रहा है, तो कंपाउंड में गिरावट दिख रही है। हमने 2008-2012 के दौरान भी कुछ ऐसा ही देखा था जब रिकर्व का दबदबा था। बाद में कंपाउंड का दबदबा शुरू हुआ। हमें कोई रास्ता निकालना होगा। सही योजना की जरूरत है। '' - धर्मशाला. हाल में खत्म हुए इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) सत्र के दौरान फ्रेंचाइजी की चिंताओं के बावजूद भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) विदेशी खिलाड़ियों और उनकी टीम के बीच उनकी उपलब्धता को लेकर कोई मध्यस्थता नहीं करेगा। बीसीसीआई ने उन विदेशी खिलाड़ियों पर प्रतिबंध लगाया हुआ है जो नीलामी में खरीदे जाने के बाद टूर्नामेंट से हट जाते हैं। लेकिन दो महीने तक चलने वाले आईपीएल में खिलाड़ियों की उपलब्धता अभी भी एक मुद्दा बनी हुई है। जोश हेजलवुड, पैट कमिंस और मिचेल स्टार्क जैसे खिलाड़ी मामूली चोटों के कारण टूर्नामेंट के शुरूआती हिस्से में उपलब्ध नहीं थे। स्टार्क की अनुपस्थिति का दिल्ली कैपिटल्स पर प्रतिकूल असर पड़ा। राजस्थान रॉयल्स के मुख्य कोच कुमार संगकारा ने प्लेऑफ अभियान के बाद सैम करन के चोट के कारण आईपीएल से हटने के बाद ब्रिटेन में टी20 खेलने पर निराशा व्यक्त की थी। पंजाब किंग्स के सह-मालिक मोहित बर्मन का कहना है कि बीसीसीआई और अन्य बोर्डों को विदेशी खिलाड़ियों की उपलब्धता पर बेहतर तालमेल बिठाने की जरूरत है। संगकारा ने कहा था, ''हमें बताया गया था कि सैम करन को ऐसी चोट लगी है जिससे वह पूरे सत्र के लिए बाहर हो गए हैं। लेकिन मैंने उन्हें सरे के लिए दो-तीन मैच खेलते हुए देखा है। इसलिए यह निराशाजनक था। '' हालांकि बीसीसीआई का मानना है कि इस विवादित मामले को खिलाड़ी और उनकी फ्रेंचाइजी के बीच ही सुलझाया जाना चाहिए क्योंकि ''वही खिलाड़ियों के संरक्षक होते हैं।''बोर्ड का यह भी मानना है कि आखिरी समय में नाम वापस लेने पर लगने वाला दो साल का प्रतिबंध काफ़ी कड़ा है और खिलाड़ी फ्रेंचाइजी से सलाह मश्विरा करके अपना फैसला लेने के लिए स्वतंत्र हैं। आर्चर राजस्थान रॉयल्स के लिए खेलते हैं। इंग्लैंड एवं वेल्स क्रिकेट बोर्ड चाहता था कि आर्चर अपने कार्यभार को प्रबंधित करें लेकिन इसके बावजूद उन्होंने पूरे टूर्नामेंट के लिए खुद को उपलब्ध कराया मौजूदा नीलामी बजट 125 करोड़ रुपये है, लेकिन खिलाड़ियों के अनुबंधों की तुलना अब भी यूरोपीय फुटबॉल या एनएफएल के अनुबंधों से नहीं की जा सकती। बीसीसीआई आमतौर पर बजट में अचानक बड़ी बढ़ोतरी करने के बजाय धीरे-धीरे बढ़ोतरी करता है। सूत्र ने कहा, ''हम निश्चित रूप से इसमें बढ़ोतरी पर विचार कर सकते हैं, लेकिन हमें इसे समग्र रूप से देखना होगा। कई खिलाड़ी एक सत्र में भारी रकम कमाते हैं और अगले सत्र में कहीं नजर नहीं आते। साथ ही कुछ फ्रेंचाइजी खिलाड़ियों को उनके अनुबंध से कहीं ज्यादा भुगतान करती हैं। खिलाड़ियों को मैच फीस (प्रति मैच साढ़े सात लाख रुपये) भी मिलती है और टूर्नामेंट के दौरान अतिरिक्त प्रायोजन भी मिलता है।'' बीसीसीआई की योजना 2028 सत्र से मैचों की संख्या 74 से बढ़ाकर 94 करने की है और इसके लिए एक बड़ी विंडो की जरूरत होगी। बीसीसीआई सूत्रों के अनुसार सबसे अच्छी विंडो मार्च के पहले सप्ताह से मई के मध्य तक है। 2026 का चरण मार्च के अंत में शुरू हुआ और फाइनल 31 मई को खेला गया। 2027 के चक्र के बाद मीडिया अधिकारों का नवीकरण किया जाएगा और उस समय सभी हितधारकों को भविष्य में होने वाली द्विपक्षीय श्रृंखला की व्यवहार्यता पर विचार करना होगा। ज्यादातर टेस्ट खेलने वाले देशों की अपनी टी20 लीग हैं और वे अब भारत के साथ सीरीज की मेजबानी करने पर पूरी तरह निर्भर नहीं हैं, जैसा कि पहले हुआ करता था। प्रसारणकर्ता को पहले से ही कुछ द्विपक्षीय सीरीज में कोई खास फायदा नजर नहीं आ रहा है। हाल में भारत और अफगानिस्तान के बीच खेला गया एकमात्र टेस्ट मैच लगभग खाली स्टेडियम में खेला गया था।
- नई दिल्ली। लंबे इंतजार के बाद आखिरकार फीफा विश्व कप 2026 का आगाज़ 11 जून (स्थानीय समय) से होने जा रहा है। टूर्नामेंट के उद्घाटन मुकाबले में सह-मेजबान मेक्सिको का सामना दक्षिण अफ्रीका से मेक्सिको सिटी स्टेडियम में होगा। भारतीय समयानुसार यह मैच 12 जून की सुबह 12:30 बजे शुरू होगा।ग्रुप-ए का यह मुकाबला विश्व कप इतिहास के सबसे बड़े संस्करण की शुरुआत करेगा, जिसमें 48 टीमें और 104 मैच खेले जाएंगे। टूर्नामेंट की मेजबानी कनाडा, मेक्सिको और संयुक्त राज्य अमेरिका संयुक्त रूप से कर रहे हैं।मेजबान मेक्सिको की नजरें जीत के साथ अभियान की शुरुआत करने पर होंगी। घरेलू दर्शकों के सामने खेलने का फायदा उठाते हुए टीम मजबूत शुरुआत करना चाहेगी।दिलचस्प बात यह है कि यह मुकाबला 2010 फीफा विश्व कप के उद्घाटन मैच की याद दिलाता है, जब दक्षिण अफ्रीका और मेक्सिको आमने-सामने थे। उस मैच में सिफीवे त्शाबालाला के गोल से दक्षिण अफ्रीका ने बढ़त बनाई थी, लेकिन राफेल मार्केज़ ने गोल कर मेक्सिको को 1-1 की बराबरी दिला दी थी।राफेल मार्केज़ इस बार भी टीम के साथ जुड़े हुए हैं, लेकिन खिलाड़ी के रूप में नहीं। वह अब मेक्सिको के मुख्य कोच हावियर अगुइरे के सहायक कोच की भूमिका निभा रहे हैं।मेक्सिको के मुख्य कोच हावियर अगुइरे ने मैच से पहले कहा कि घरेलू मैदान पर विश्व कप खेलना उनके खिलाड़ियों के लिए बेहद प्रेरणादायक अनुभव होगा।उन्होंने कहा, “फुटबॉल में 50 वर्षों के अपने अनुभव में मैंने इससे बड़ा रोमांच कभी महसूस नहीं किया। अपने घर में विश्व कप खेलना अविस्मरणीय है। मैंने यही बात खिलाड़ियों से कही है और मुझे लगता है कि वे इसे पूरी तरह समझ चुके हैं। वे एक परिवार की तरह साथ बड़े हुए हैं और खुद को बेहद सहज महसूस कर रहे हैं।”दूसरी ओर, अफ्रीकी क्वालीफायर के ग्रुप-सी में शीर्ष पर रहकर विश्व कप में जगह बनाने वाली दक्षिण अफ्रीका की टीम मेजबानों को चौंकाने के इरादे से मैदान में उतरेगी।दक्षिण अफ्रीका के मुख्य कोच ह्यूगो ब्रूस ने कहा, “मेक्सिको हमारे ग्रुप की सबसे मजबूत टीम है, इसलिए यह हमारे लिए कठिन मुकाबला होगा। लेकिन मैं भरोसा दिलाता हूं कि मेरी टीम तैयार है और 90 मिनट तक हर गेंद और हर इंच के लिए संघर्ष करेगी। इसके बाद परिणाम जो भी होगा, देखा जाएगा।”मिडफील्डर तेबोहो मोकोएना ने भी टीम का आत्मविश्वास जताते हुए कहा, “उम्मीदें काफी ज्यादा हैं और माहौल शानदार रहने वाला है। हम इस मुकाबले का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। हमें पता है कि हमारे देश के लोगों के लिए यह कितना महत्वपूर्ण है।”दक्षिण अफ्रीका को एक और अच्छी खबर मिली है। टीम के लेफ्ट बैक ऑब्रे मोडिबा हैमस्ट्रिंग चोट से उबर चुके हैं और उनके खेलने की संभावना है।मेक्सिको की संभावित शुरुआती एकादशरैंगल; गालार्डो, वास्केज़, मोंटेस, रेयेस; गुटिएरेज़, लीरा, फिडाल्गो; क्विनोनेस, अल्वाराडो, जिमेनेज़दक्षिण अफ्रीका की संभावित शुरुआती एकादशविलियम्स; मुदाउ, ओकोन, म्बोकाज़ी, मोडिबा; मोकोएना, सिथोले, म्बाथा; मोरेमी, फोस्टर, अपोलिस
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मुंबई. भारतीय टी20 क्रिकेट में शनिवार को बदलाव की नई बयार देखने को मिली जब श्रेयस अय्यर को सूर्यकुमार यादव की जगह राष्ट्रीय टी20 टीम का कप्तान नियुक्त किया गया तो वहीं युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी को आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे के लिए भारतीय टीम में शामिल कर लिया गया। महज 15 वर्ष और 71 दिन की उम्र में वैभव सूर्यवंशी राष्ट्रीय टीम में जगह पाने वाले सबसे युवा क्रिकेटर बन गए हैं। उन्होंने महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर का वर्षों पुराना रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया। तेंदुलकर ने 15 नवंबर 1989 को कराची में पाकिस्तान के खिलाफ अपना पहला टेस्ट मैच खेला था। उस समय उनकी उम्र 16 वर्ष और 205 दिन थी। भारतीय टीम 26 और 28 जून को आयरलैंड के खिलाफ दो टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेलेगी। इसके बाद टीम एक से 11 जुलाई तक इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी20 श्रृंखला में हिस्सा लेगी। अय्यर की राष्ट्रीय टी20 टीम में वापसी तीन दिसंबर 2023 के बाद पहली बार हुई है। उन्होंने अपना पिछला टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच उसी दिन बेंगलुरु में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेला था। विभिन्न दौरों के लिए भारतीय टीम की घोषणा करने के बाद मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर ने कहा, ''श्रेयस के बारे में बात करें तो पिछले कुछ वर्षों में हमने देखा है कि उन्होंने विभिन्न फ्रेंचाइजी टीमों का नेतृत्व करते हुए किस प्रकार का प्रदर्शन किया है। '' भारत के इस पूर्व तेज गेंदबाज ने कहा, '' उन्होंने एक बार फाइनल भी जीता और इस साल अच्छी शुरुआत के बाद उसे मुश्किल सत्र का सामना करना पड़ा। एक कप्तान को जिन-जिन परिस्थितियों से गुजरना पड़ सकता है, वे सभी हमने उनके मामले में देखी हैं। व्यक्तिगत रूप से उनका प्रदर्शन भी काफी अच्छा रहा है।'' अगरकर ने कहा, '' वह टी20 विश्व कप की टीम में जगह बनाने के काफी करीब भी थे। लेकिन सूर्यकुमार की मौजूदगी में उनके लिए जगह नहीं बन पाई। मेरे अनुसार वह अब एक बेहद मजबूत दावेदार हैं, जिनके पास टी20 प्रारूप में कप्तानी का पर्याप्त अनुभव है। यह हालांकि निश्चित रूप से एक अलग तरह की चुनौती होगी।'' इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में उनकी शानदार कप्तानी और लगातार बेहतरीन प्रदर्शन ने चयनकर्ताओं को प्रभावित किया। अय्यर ने 2024 में कोलकाता नाइट राइडर्स को खिताब दिलाया था, जबकि 2025 में पंजाब किंग्स को फाइनल तक पहुंचाया। बल्लेबाजी में भी दो लगातार सफल सत्रों ने उनके दावे को और मजबूत बनाया। यही कारण रहा कि चयन समिति ने टी20 विश्व कप 2026 विजेता कप्तान सूर्यकुमार के उत्तराधिकारी के रूप में श्रेयस पर भरोसा जताया। सूर्यकुमार ने कप्तानी के साथ टीम से जगह भी गंवा दी।
अगरकर ने कहा कि पिछले दो सत्रों में सूर्यकुमार की लगातार गिरती फॉर्म ने उन्हें टी20 कप्तानी से हटाने के फैसले को प्रभावित किया। मुंबई के इस खिलाड़ी के बल्ले से औसत प्रदर्शन के बावजूद कप्तान के रूप में अच्छा काम किया था। अगरकर ने कहा, ''सूर्यकुमार के मामले में यह निश्चित रूप से एक कठिन निर्णय था, खासकर तब जब उन्होंने हाल ही में टी20 विश्व कप जीता था। हम हालांकि अधिकांश विश्व कप के बाद आकलन करते है कि आगे की दिशा क्या होनी चाहिए।'' उन्होंने कहा, ''यह निर्णय कुछ हद तक उनकी फॉर्म को देखते हुए लिया गया, लेकिन साथ ही भविष्य खासकर अगले विश्व कप तक के समय को ध्यान में रखते हुए हमने लगा यह सही तरीका है। हम मानते है कि श्रेयस एक बेहद योग्य कप्तान हैं।'' अगरकर ने कहा, '' इस पर काफी विचार-विमर्श हुआ, खासकर तब जब किसी खिलाड़ी ने आपको विश्व कप जिताया हो। ऐसे निर्णय लेना आसान नहीं होता। लेकिन मेरा यह भी मानना नहीं है कि किसी स्तर पर हमें इस बदलाव पर विचार करना ही था। अब यह कहना कि आईपीएल फॉर्म ने इसे तय किया, मैं पूरी तरह से सहमत नहीं हूं। इस पर पहले से ही चर्चा चल रही थीं।'' सूर्यवंशी का चयन लगभग तय माना जा रहा था। इस युवा बल्लेबाज ने 2026 आईपीएल सत्र में 776 रन बनाकर ऑरेंज कैप अपने नाम की थी। इस दौरान उन्होंने एक शतक और पांच अर्धशतक जड़े तथा 237.30 के विस्फोटक स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी कर क्रिकेट जगत का ध्यान अपनी ओर खींचा। अगरकर ने बिहार के इस युवा खिलाड़ी की मैच का रुख बदलने की क्षमता की जमकर सराहना की।
उन्होंने कहा, ''हमने देखा है कि वह क्या कर सकता है। आईपीएल के प्लेऑफ में भी हमने देखा कि उसने लगभग अकेले दम पर राजस्थान रॉयल्स को प्लेऑफ में पहुंचाया।'' अगरकर ने आगे कहा, "एक युवा खिलाड़ी का इतने अधिक दबाव वाले माहौल में बल्लेबाजी करना और मैच का पासा पलट देने की क्षमता दिखाना बेहद सराहनीय है। वह निश्चित रूप से 'गेम-चेंजर' (मुकाबले का रूख पलटने वाला) बन सकता है।" उन्होंने कहा, ''मुझे यह बताने की जरूरत नहीं है कि वह कितना अच्छा खेल रहा है और यह केवल इस सत्र की बात नहीं है। पिछले सत्र की शुरुआत भी उसकी बेहद शानदार रही थी। एक युवा खिलाड़ी के लिए इतने प्रतिस्पर्धी और काफी दबाव वाले टूर्नामेंट में उस प्रदर्शन को मैच दर मैच जारी रखना यह दिखाता है कि वह कितना विस्फोटक और मैच का रुख बदलने वाला खिलाड़ी हो सकता है, अपने आप में बड़ी बात है।'' उन्होंने कहा, ''हम उससे काफी उम्मीदें रखते हैं और मुझे लगता है कि उसने अपने प्रदर्शन से खुद को पूरी तरह स्थापित किया है।'' मध्यक्रम के बल्लेबाज तिलक वर्मा को टीम का उपकप्तान बनाया गया है जबकि लखनऊ सुपर जायंट्स के लिए प्रभावशाली प्रदर्शन करने वाले तेज गेंदबाज प्रिंस यादव को भी आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे के लिए टीम में जगह मिली है। अगरकर ने कहा कि तिलक उपकप्तान के रूप में कार्य करते हुए नेतृत्व की जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से समझ और सीख सकेंगे। यह उनके सीमित ओवर के प्रारूप में एक अहम सदस्य के रूप में उभरते हुए विकास का संकेत है। भारतीय टीम के प्रमुख तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह इंग्लैंड और आयरलैंड के खिलाफ टी20 श्रृंखला से बाहर रहेंगे। वह हालांकि सितंबर में जापान के आइची-नागोया (19 सितंबर से चार अक्टूबर) में होने वाले एशियाई खेलों के लिए टीम में वापसी करेंगे। अगरकर ने बुमराह की उपलब्धता और फिटनेस प्रबंधन पर कहा, ''2027 में वनडे विश्व कप भी है। इसलिए यह देखना जरूरी है कि उनकी थकान और फिटनेस कैसे प्रबंधित किया जाए। हमारे पास आगे नौ टेस्ट मैच भी हैं।'' उन्होंने कहा, ''हम जानते हैं कि वह टीम के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं। विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (डब्ल्यूटीसी) चक्र को देखते हुए, अगर हम अगले नौ टेस्ट मैचों में अच्छा प्रदर्शन करते हैं तो हमारे पास फाइनल के लिए क्वालीफाई करने का मौका अभी भी मौजूद है।'' उन्होंने कहा, '' हम अगर उन्हें अधिकतर मैचों में उपलब्ध रख सकें तो यह टीम के लिए फायदेमंद होगा। हमें इस दौरान काफी टी20 क्रिकेट खेलना है और जरूरत के मुताबिक हम उन्हें टीम में शामिल कर सकते है। वह एशियाई खेलों की टीम में है। हमारा मुख्य लक्ष्य उन्हें टेस्ट और वनडे के लिए भी फिट रखना है।'' हरफनमौला हार्दिक पंड्या अफगानिस्तान के खिलाफ आगामी वनडे श्रृंखला के लिए टीम में शामिल हैं, लेकिन टी20 और किसी अन्य टीम का हिस्सा नहीं हैं। अगरकर ने कहा, '' हमारा मुख्य मकसद बुमराह की तरह पंड्या को भी फिट रखना है। उन्होंने काफी समय से एकदिवसीय क्रिकेट नहीं खेला है। अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज इंग्लैंड और आयरलैंड दौरे पर टीम का हिस्सा रहेंगे, लेकिन वह एशियाई खेलों से बाहर रहेंगे क्योंकि वह उस समय वेस्टइंडीज के खिलाफ घरेलू वनडे श्रृंखला में खेलेंगे। तेज गेंदबाजी के साथ बल्लेबाजी की काबिलियत रखने वाले हर्षित राणा चोट के कारण आईपीएल में कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए नहीं खेल पाए थे लेकिन भारतीय टीम में उनकी वापसी हुई है। विकेटकीपर-बल्लेबाज ध्रुव जुरेल श्रीलंका के खिलाफ दो बहु-दिवसीय मैचों में भारत का नेतृत्व करेंगे। देवदत्त पडिक्कल उपकप्तान होंगे जबकि रुतुराज गायकवाड़ को भी टीम में शामिल किया गया है। आयरलैंड और इंग्लैंड टी20 श्रृंखला के लिए भारतीय टीम:
श्रेयस अय्यर (कप्तान), अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन, ईशान किशन, शिवम दुबे, तिलक वर्मा (उपकप्तान), नितीश कुमार रेड्डी, अक्षर पटेल, वॉशिंगटन सुंदर, वरुण चक्रवर्ती, रवि बिश्नोई, मोहम्मद सिराज, हर्षित राणा, अर्शदीप सिंह, प्रिंस यादव और वैभव सूर्यवंशी। एशियाई खेलों के लिए भारतीय टीम
श्रेयस अय्यर (कप्तान), अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन, ईशान किशन, शिवम दुबे, तिलक वर्मा (उपकप्तान), नितीश कुमार रेड्डी, अक्षर पटेल, वॉशिंगटन सुंदर, वरुण चक्रवर्ती, रवि बिश्नोई, हर्षित राणा, अर्शदीप सिंह, जसप्रीत बुमराह और वैभव सूर्यवंशी। श्रीलंका दौरे के बहु-दिवसीय मैचों के लिए भारतीय टीम
ध्रुव जुरेल (कप्तान एवं विकेटकीपर), साई सुदर्शन, देवदत्त पडिक्कल (उपकप्तान), रुतुराज गायकवाड़, हर्ष दुबे, सारांश जैन, गुरनूर बरार, आकिब नबी, यश ठाकुर, एन. जगदीशन, अमन मोकाडे, शेख राशिद और जीशान अंसारी। -
अहमदाबाद. मेजबान भारत ने शनिवार को यहां पहली बार आयोजित हो रही विश्व योगासन चैंपियनशिप 2026 में दबदबा लगातार तीसरे दिन भी जारी रखा और स्वर्ण पदकों की संख्या को 22 तक पहुंचा दी। नेपाल, जापान और अमेरिका ने एक-एक स्वर्ण पदक जीता।
उम्मीद के मुताबिक भारत ने आयु वर्ग की लगभग हर स्पर्धा में पदक जीता। उन्होंने कुल 28 पदक जीते जिनमें 22 स्वर्ण, पांच रजत और एक कांस्य पदक शामिल हैं। नबीला सोल बाराजा के दो स्वर्ण और दो रजत पदक की बदौलत अर्जेंटीना तालिका में दूसरे स्थान पर पहुंच गया जबकि सिंगापुर दो स्वर्ण और दो कांस्य पदक के साथ तीसरे स्थान पर खिसक गया। पदक तालिका में नेपाल ने बड़ी बढ़त हासिल की और एक स्वर्ण, छह रजत और तीन कांस्य पदक के साथ चौथा स्थान हासिल किया। ऋतु मंडल ने पारंपरिक योगासन सीनियर ए महिला वर्ग में देश का पहला स्वर्ण पदक जीता था, उन्होंने ने टीम स्वर्ण भी जीता। -
ताइपे सिटी. लंबी कूद की खिलाड़ी शैली सिंह और महिलाओं की चार गुणा 100 मीटर रिले टीम ने शनिवार को न्यू ताइपे सिटी एथलेटिक्स ओपन के पहले दिन स्वर्ण पदक जीता जबकि तेजस शिरसे ने 110 मीटर बाधा दौड़ में रजत पदक हासिल किया। इस तरह प्रतियोगिता के पहले दिन में हिस्सा लेने वाले सभी भारतीय खिलाड़ियों ने पदक जीते।
शैली ने 6.24 मीटर की छलांग लगाई जो उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन तो नहीं था, लेकिन पहला स्थान दिलाने के लिए काफी था। उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 6.76 मीटर है जो उन्होंने 2023 में हासिल किया था। एस एस स्नेहा, श्रावणी नंदा, सुदेशना शिवंकर और तमन्ना की भारतीय महिला चार गुणा 100 मीटर रिले टीम ने 44.07 सेकंड का समय लेकर स्वर्ण पदक जीता और मीट रिकॉर्ड की बराबरी की। राष्ट्रीय रिकॉर्डधारी शिरसे ने पुरुषों की 110 मीटर बाधा दौड़ के फाइनल में 13.58 सेकंड का समय लिया। चीनी ताइपे के 20 वर्षीय ह्सिएह युआन-काई ने 13.57 सेकंड के समय के साथ स्वर्ण पदक जीता। इस प्रतियोगिता का आखिरी दिन रविवार को है। -
काकामिगहारा। भारतीय अंडर-18 पुरुष हॉकी टीम ने शुक्रवार को जापान के काकामिगाहारा में खेले गए फाइनल में मेजबान जापान को 4-1 से हराकर पुरुष अंडर-18 एशिया कप 2026 का खिताब जीत लिया। यह भारत का रिकॉर्ड तीसरा एशिया कप खिताब है।
भारत की जीत के नायक आशिष तानी पुर्ती रहे जिन्होंने दूसरे, 28वें और 34वें मिनट में गोल दागकर हैट्रिक पूरी की। कप्तान केतन कुशवाहा ने 30वें मिनट में एक गोल किया। जापान के लिए मुकाबले का एकमात्र गोल नुमादा गाकू ने 52वें मिनट में किया। फाइनल में शानदार प्रदर्शन के लिए आशिष तानी पुर्ती को 'प्लेयर ऑफ द मैच' चुना गया। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में 13 गोल दागकर सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ी का सम्मान भी हासिल किया। - नयी दिल्ली. भारत के पूर्व तेज गेंदबाज अतुल वासन ने कहा कि उन्हें वैभव सूर्यवंशी में युवा सचिन तेंदुलकर की झलक दिखती है। उन्होंने कहा कि इस किशोर बल्लेबाज की परिपक्वता, साहस और बेखाफ रवैया उन्हें भारत के 1989 के पाकिस्तान दौरे के दौरान दिग्गज बल्लेबाज तेंदुलकर के शुरुआती दिनों की याद दिलाता है। सूर्यवंशी ने हाल में समाप्त हुए आईपीएल में अपनी विशेष छाप छोड़ी। वह 16 पारियों में 237.30 के प्रभावशाली स्ट्राइक रेट से 776 रन बनाकर टूर्नामेंट में सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाजों की सूची में शीर्ष पर रहे। इस 15 वर्षीय इस खिलाड़ी ने जसप्रीत बुमराह, कैगिसो रबाडा और पैट कमिंस जैसे विश्व के कुछ शीर्ष गेंदबाजों के खिलाफ अपने बेखौफ रवैए से सबको प्रभावित किया। वासन ने कहा, ''वह लाखों में एक है। वह विलक्षण प्रतिभा है। यह लड़का जिस तरह की परिपक्वता और दिलेरी दिखा रहा है, क्या आप उसकी कल्पना कर सकते हैं। वह मुझे 16 साल के सचिन तेंदुलकर की याद दिलाता है।'' उन्होंने कहा, '''मैंने सचिन को देखा। मैंने (1989 के पाकिस्तान दौरे के दौरान) उनकी खेल को लेकर परिपक्वता और जोखिम उठाने का साहस देखा था। ईश्वर ने उन्हें (सूर्यवंशी) कौशल और ताकत के साथ तुरुप का इक्का होने का भी वरदान दिया है।'' तेंदुलकर ने 1989 में 16 साल की उम्र में पाकिस्तान के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया था। पाकिस्तान की उस टीम में वसीम अकरम, वकार यूनिस, अब्दुल कादिर और इमरान खान जैसे दिग्गज गेंदबाज शामिल थे जिनका तेंदुलकर ने डटकर सामना किया था। वासन ने कहा, ''उसे (सूर्यवंशी) अभी लंबा सफर तय करना है। मुझे उम्मीद है कि सचिन की तरह उसके लिए भी सब कुछ सहजता से आगे बढ़ेगा। ईश्वर ने उन्हें विशेष प्रतिभा से नवाजा है।'' इस पूर्व तेज गेंदबाज ने कहा कि सूर्यवंशी को उचित मार्गदर्शन की जरूरत है तथा उन्हें केवल टी20 विशेषज्ञ नहीं माना जाना चाहिए और एक संपूर्ण क्रिकेटर के रूप में उनका विकास होना चाहिए। वासन ने कहा, ''मुझे बस इस बात की चिंता है कि क्या उसे टेस्ट क्रिकेट की कड़ी चुनौती का सामना करने के लिए उचित मार्गदर्शन मिल रहा है। उसके पास खेल की समझ है। लेकिन क्या उसके पास सिर्फ छक्के लगाने से बढ़कर भी कोई कौशल है।'' दिल्ली के पूर्व कप्तान ने आगाह किया कि इस युवा खिलाड़ी पर उनके करियर के शुरू में ही रिकॉर्ड तोड़ने की उम्मीदों का बोझ डालना उचित नहीं है। वासन ने कहा, ''उस पर रिकॉर्ड तोड़ने का बोझ डालना सही नहीं होगा। उसे रिकॉर्ड के बारे में नहीं सोचना चाहिए और न ही उसे इस बारे में सोचने के लिए मजबूर किया जाना चाहिए। उसे तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ और विराट कोहली जैसा संपूर्ण खिलाड़ी बनने की कोशिश करनी चाहिए।''
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नई दिल्ली। नॉर्वे शतरंज 2026 के आठवें दौर में भारत के युवा ग्रैंडमास्टर आर. प्रज्ञानानंद ने विश्व नंबर-1 मैग्नस कार्लसन को एक बार फिर हराकर खिताब की दौड़ को रोमांचक बना दिया। वहीं भारतीय खिलाड़ियों डी. गुकेश और दिव्या देशमुख को अपने-अपने मुकाबलों में हार का सामना करना पड़ा।
20 वर्षीय प्रज्ञानानंद ने पिछले सप्ताह सफेद मोहरों से कार्लसन को हराया था और अब आठवें दौर में काले मोहरों से भी उन्हें मात दे दी। इसके साथ ही वह भारत के महान शतरंज खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद के बाद एक ही टूर्नामेंट में कार्लसन को दो बार हराने वाले दूसरे खिलाड़ी बन गए हैं। साथ ही वह उन चुनिंदा खिलाड़ियों की सूची में शामिल हो गए हैं जिन्होंने क्लासिकल शतरंज में कार्लसन को तीन बार हराया है।एक अन्य मुकाबले में फ्रांस के अलीरेज़ा फिरोज़ा ने मौजूदा विश्व चैंपियन गुकेश डोम्माराजू को पराजित किया। सफेद मोहरों से खेलते हुए फिरोज़ा ने कड़े मुकाबले में जीत दर्ज कर अंक तालिका में शीर्ष स्थान की दौड़ को और दिलचस्प बना दिया।वहीं वेस्ली सो और विन्सेंट कीमर के बीच क्लासिकल मुकाबला ड्रॉ रहा। इसके बाद हुए आर्मागेडन टाईब्रेक में वेस्ली सो ने जीत हासिल कर अतिरिक्त अंक अपने नाम किए।आठवें दौर के बाद वेस्ली सो 14 अंकों के साथ शीर्ष पर बने हुए हैं। अलीरेज़ा फिरोज़ा 13 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर हैं, जबकि प्रज्ञानानंद 12 अंकों के साथ खिताब की दौड़ में मजबूती से बने हुए हैं।महिला वर्ग में दिव्या को झटकामहिला वर्ग में कज़ाखस्तान की बिबिसारा अस्साउबायेवा ने भारत की दिव्या देशमुख को हराकर अपनी बढ़त मजबूत कर ली। काले मोहरों से खेलते हुए बिबिसारा ने समय के दबाव में आई दिव्या की गलतियों का फायदा उठाया और मुकाबला जीत लिया।दूसरे मुकाबले में चीन की झू जिनर ने महिला विश्व चैंपियन जू वेनजुन को हराया। इस जीत के साथ झू जिनर और दिव्या देशमुख दोनों 10-10 अंकों पर पहुंच गई हैं।भारत की कोनेरू हम्पी और यूक्रेन की अन्ना मुज़िचुक के बीच क्लासिकल मुकाबला ड्रॉ रहा। हालांकि आर्मागेडन टाईब्रेक में हम्पी ने काले मोहरों से जीत दर्ज कर अतिरिक्त अंक हासिल किए।महिला वर्ग में आठ दौर के बाद बिबिसारा अस्साउबायेवा 15.5 अंकों के साथ शीर्ष पर हैं। अन्ना मुज़िचुक 10.5 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर हैं, जबकि दिव्या देशमुख और झू जिनर 10-10 अंकों के साथ संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर हैं। -
नई दिल्ली। इंडोनेशिया ओपन 2026 में मंगलवार को भारतीय शटलर पीवी सिंधु ने थाईलैंड की बुसानन ओंगबामरुंगफान को 25-23, 21-16 से मात देकर अपने अभियान की शानदार शुरुआत की।
जकार्ता के इस्टोरा सेनायन स्टेडियम में पूर्व वर्ल्ड चैंपियन को काफी मशक्कत करनी पड़ी, लेकिन आखिरकार 51 मिनट तक चले मुकाबले को अपने नाम किया। सिंधु ने आक्रामक खेल शैली से पहले गेम को कड़े मुकाबले के बाद जीता और उसी ऊर्जा को दूसरे गेम में भी बरकरार रखते हुए सीधे सेटों में जीत सुनिश्चित की।सिंधु को अब दूसरे राउंड में एक कठिन चुनौती का सामना करना पड़ेगा, जहां उनका मुकाबला मौजूदा ओलंपिक चैंपियन और वर्ल्ड नंबर 1 खिलाड़ी एन से-यंग से होने की संभावना है। सिंधु ‘हेड-टू-हेड’ रिकॉर्ड में 0-9 से पीछे हैं और पिछले हफ्ते सिंगापुर ओपन के क्वार्टर फाइनल में भी वह इसी कोरियाई खिलाड़ी से हारी थीं।अगले राउंड में जगह बनाने वाली एक और जोड़ी मेंस डबल्स में हरिहरन अमसकारुनन और एमआर अर्जुन की थी, जिन्होंने मलेशिया के 2016 ओलंपिक पदक विजेता टैन वी किओंग और उनके मौजूदा जोड़ीदार नूर मोहम्मद अजरीन पर सीधे गेमों में जीत दर्ज की।भारत की दिग्गज शटलर सिंधु साल 2023 के बाद पहली बार दुनिया के टॉप-10 खिलाड़ियों में शामिल हुई हैं, उन्होंने थाईलैंड की शटलर के खिलाफ लगातार 11वीं जीत के साथ अपने अभियान की शुरुआत की। बुसानन के खिलाफ ‘हेड-टू-हेड’ रिकॉर्ड में अब सिंधु 21-1 से आगे हैं। अब उनका मुकाबला कोरिया की टॉप सीड एन से-यंग और तुर्की की नेस्लिहान अरिन के बीच होने वाले मैच की विजेता से होगा।बाद में, हरिहरन और अर्जुन ने अनुभवी मलेशियाई जोड़ी को सिर्फ 33 मिनट में 21-18, 21-10 से मात दी।इस बीच, लक्ष्य सेन को घरेलू पसंदीदा खिलाड़ी अल्वी फरहान के हाथों 21-19, 21-16 से हार का सामना करना पड़ा। अल्वी ने पिछले हफ्ते सिंगापुर ओपन में दुनिया के नंबर 1 खिलाड़ी शि यू क्यूई को हराया था। दूसरी ओर, भारत की डबल्स टीमों के लिए यह एक कठिन दिन रहा। ट्रीसा जॉली और गायत्री गोपीचंद की महिला युगल जोड़ी, जो दो महीने से ज़्यादा समय बाद पहली बार एक साथ खेल रही थी, इंडोनेशिया की टीम फेब्रिआना द्विपुजी कुसुमा और मेलिसा ट्रायस पुस्पितासारी से 14-21, 12-21 से हार गई। मिश्रित युगल में, ध्रुव कपिला और तनीषा क्रास्टो को छठी वरीयता प्राप्त चीनी जोड़ी गुओ शिन वा और चेन फांग हुई ने 11-21, 10-21 से हराया। -
मथुरा (उप्र) . लगातार दूसरे वर्ष रॉयल चैलेंजर्स बंगलुरु (आरसीबी) को इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) ट्रॉफी में जीत दिलाने वाले क्रिकेटर विराट कोहली अभिनेत्री पत्नी अनुष्का शर्मा संग मंगलवार को संत प्रेमानन्द महाराज के वृन्दावन स्थित आश्रम पहुंचे और गुरु का आशीर्वाद पाकर आभार जताया। आश्रम सूत्रों के अनुसार वे दोनों मुंह पर मास्क लगाए सुबह—सुबह करीब सात बजे कार से वृन्दावन परिक्रमा मार्ग स्थित श्रीहित राधा केलि कुंज आश्रम पहुंचे और संत के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। वे यहां करीब दो घण्टे तक रहे। दोनों जब आश्रम के एकांतिक वार्ता कक्ष से बाहर निकले तो उनके माथे पर संत के समान ही चंदन और त्रिपुण्ड नजर आ रहा था। उन्हें आश्रम से एक पुस्तक भी उपहार स्वरूप मिली जो वे बगल में दबाए चले आ रहे थे। उन्होंने स्वामी हित गोविंद शरण के आश्रम पहुंचकर उनके भी दर्शन किए। वे इससे पूर्व अप्रैल माह में अक्षय तृतीया के अवसर पर भी वृन्दावन पहुंचे थे और प्रेमानन्द के दर्शन कर बड़े ही प्रफुल्लित नजर आए थे। कोहली की टीम ने 31 मई को खेले गए आईपीएल के फाइनल मैच में गुजरात टाइटन्स को पांच विकेट से हराकर लगातार दूसरा आईपीएल खिताब जीता था।
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अहमदाबाद/रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) ने गेंदबाजों के शानदार प्रदर्शन के बाद विराट कोहली (नाबाद 75 रन) के अर्धशतक से रविवार को यहां इंडियंन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2026 के फाइनल में गुजरात टाइटन्स को पांच विकेट से हराकर लगातार दूसरा खिताब अपने नाम कर खचाखच भरे नरेन्द्र मोदी स्टेडियम में अपने दर्शकों को खुशियां मनाने का मौका दिया। आरसीबी ने अपने आक्रामक खेल से टूर्नामेंट में शुरू से ही दबदबा बनाए रखा और इसका समापन एक और ट्रॉफी से किया। आरसीबी ने पिछले चरण में 18 साल बाद पहली आईपीएल ट्रॉफी जीती थी और रविवार को कोहली ने छक्का लगाकर टीम को जीत तक पहुंचाया। टॉस जीतकर गेंदबाजी करने वाली आरसीबी के गेंदबाजों ने धीमी पिच का पूरा फायदा उठाते हुए गुजरात टाइटन्स को आठ विकेट पर 155 रन ही बनाने दिए। छह दिन में तीसरे स्थल पर तीसरा मैच खेल रही गुजरात टाइटन्स पर थकान हावी दिखी। इसके बाद कोहली (42 गेंद, नौ चौके और तीन छक्के) और वेंकटेश अय्यर (32 रन) की अच्छी शुरूआत दिलाई जिससे आरसीबी 18 ओवर में पांच विकेट पर 161 रन बनाकर मुंबई इंडियंस (पांच ट्रॉफी) और चेन्नई सुपर किंग्स (पांच ट्रॉफी) के बाद लगातार खिताब जीतने वाली तीसरी टीम बन गई। कोहली ने पैर में हो रही दिक्कत के बावजूद आईपीएल में अपना सबसे तेज अर्धशतक जड़ा, उन्होंने 25 गेंद में सात चौके और दो छक्के से पचास रन पूरे किए। फिजियो जांच करने के बाद दो बार मैदान में उनके लिए मैदान में आए, पर वह दर्द को भुलाकर अपनी टीम को जीत तक पहुंचाने में डटे रहे। नरेन्द्र मोदी स्टेडियम की लाल और काली मिट्टी के मिश्रण वाली पिच पर शॉट खेलना बिलकुल भी आसान नहीं था जो गुजरात टाइटन्स की बल्लेबाजी को देखकर साफ झलक रही थी जिससे आरसीबी के लिए रसिख सलाम ने तीन जबकि भुवनेश्वर कुमार और जोश हेजलवुड ने दो दो विकेट चटकाए। कृणाल पंड्या ने 23 रन देकर एक विकेट झटका। लक्ष्य इतना बड़ा नहीं था। कोहली और अय्यर ने पहले सतर्क शुरूआत करते हुए हाथ खोले जिससे पहले ओवर में पांच रन बने। दूसरे ओवर में अय्यर ने रबाडा की पहली गेंद को कवर प्वाइंट पर चौके के लिए भेजा और तीसरी गेंद को वाइड मिड विकेट पर छक्के के लिए भेज दिया। अगली गुड लेंथ गेंद पर उन्होंने मिड ऑफ पर चौका जड़ दिया और ओवर का अंत विकेटकीपर के ऊपर चौके से किया। इस ओवर में 18 रन बने। तीसरे ओवर में कोहली ने मोहम्मद सिराज पर डीप फाइन लेग और डीप स्क्वायर लेग पर दो चौके लगाए। अय्यर ने भी डीप मिडविकेट पर चौका बटोरकर इस ओवर से टीम के खाते में 13 रन जोड़ने में मदद की। कोहली ने आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए चौथे ओवर में रबाडा पर तीन चौके और एक छक्के से 19 रन जोड़े जिससे आरसीबी का रनों का अर्धशतक पूरा हुआ। अय्यर ने पांचवें ओवर में सिराज की बाउंसर पर बैकफुट में जाकर हुक करते हुए लांग लेग पर छक्का जड़ा। लेकिन अगली ही गेंद को ऊंचा खेलने की कोशिश में मिड ऑन पर खड़े रबाडा को कैच दे बैठे। लेकिन तब तक वह 16 गेंद में चार चौके और दो छक्के से 32 रन बना चुके थे। कोहली और अय्यर ने इस तरह 27 गेंद में पहले विकेट के लिए 62 रन की भागीदारी निभाई।
देवदत्त पडीक्कल (01) आते ही रबाडा की गेंद का शिकार हो गए। पर कोहली ने पावरप्ले के अंतिम ओवर का अंत लांग लेग पर छक्का लगाकर किया इससे छह ओवर में आरसीबी ने दो विकेट पर 70 रन बना लिए थे। राशिद खान (25 रन देकर दो विकेट) ने नौवें ओवर में आरसीबी को कप्तान रजत पाटीदार (15) और कृणाल पंड्या (01) के विकेट झटककर दोहरे झटके दिए जिससे स्कोर चार विकेट पर 91 रन हो गया। आरसीबी ने 10 ओवर में चार विकेट पर 100 रन बना लिए थे और उसे 60 गेंद में 56 रन बनाने थे।
कोहली और टिम डेविड (24 रन) आराम से टीम को जीत के करीब ले गए। पर डेविड को अरशद खान ने आउट किया, तब स्कोर 132 रन था। फिर कोहली और जितेश शर्मा (नाबाद 11 रन) आराम से टीम को जीत तक ले गए।
इससे पहले गुजरात टाइटन्स के लिए एकमात्र वॉशिंगटन सुंदर ही इस मुश्किल का सामना करते हुए 37 गेंद में पांच चौके से नाबाद 50 रन बना पाए। शुक्रवार को 'दूसरा क्वालीफायर' खेलने की थकान और मुल्लांपुर में खराब मौसम के कारण देरी से हुई रवानगी ने भी शायद उनकी मुश्किलों को और बढ़ा दिया था। लेकिन आरसीबी के गेंदबाजों ने इस पिच पर ज्यादातर समय सही लाइन एवं लेंथ पर गेंदबाजी की।
आरसीबी ने टॉस जीतकर गेंदबाजी करने का फैसला किया और उसके गेंदबाजों ने शुरू से ही दबदबा बनाते हुए पावरप्ले में सलामी बल्लेबाज शुभमन गिल (10) और साई सुदर्शन (12) के विकेट झटक लिए। गुजरात टाइटन्स को अपनी सलामी जोड़ी से अच्छी शुरूआत की उम्मीद थी जिससे टीम इन झटकों से उबर नहीं सकी। हालांकि टीम शुरू से ही धीमी शुरूआत करती रही है जो कोई नयी बात नहीं थी। लेकिन हेजलवुड (37 रन देकर दो विकेट) की गेंद पर गिल ने जोरदार शॉट खेला और गेंद उनके बल्ले का किनारा चूमते हुए आरसीबी के कप्तान रजत पाटीदार के हाथों में चली गई। सुदर्शन एक बार डीआरएस की मदद से जैकब डफी की गेंद पर कैच आउट होने से बच गए थे लेकिन वह भी ज्यादा देर तक टिक नहीं पाए। भुवनेश्वर (29 रन देकर दो विेट) की एक सटीक, ऊंची और वाइड बाउंसर पर इस बाएं हाथ के बल्लेबाज ने खराब पुल शॉट खेला और विकेटकीपर जितेश शर्मा ने दौड़कर आसान कैच लपक लिया। गिल और सुदर्शन ने इस सत्र में 700 से ज्यादा रन बनाए थे। इन दोनों के आउट होने के बाद गुजरात टाइटन्स की की बल्लेबाजी पूरी तरह से लड़खड़ा गई। उनका पावर प्ले में स्कोर दो विकेट पर 45 रन रन था। बाकी बल्लेबाजों में पारी को संभालने का जोश और धैर्य नहीं दिखा। जोस बटलर (19) और वाशिंगटन पारी को संभालने की कोशिश की, लेकिन रक्षात्मक खेलने से जूझते नजर आए।
युवा तेज गेंदबाज रसिक सलाम अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखा। उन्होंने निशांत सिंधु (18 गेंद में 20 रन) और राहुल तेवतिया के विकेट लिए। घरेलू टीम ने 100 रन के आंकड़े तक पहुंचने से पहले ही मुख्य बल्लेबाजों के विकेट गंवा दिए थे। गुजरात टाइटन्स को अपनी पारी का पहला छक्का लगाने के लिए 13वें ओवर तक इंतजार करना पड़ा जो कृणाल की गेंद पर अरशद खान (15 रन) मिड-विकेट के ऊपर से लगाया था। आरसीबी के गेंदबाजों के दबदबे का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि घरेलू टीम की पारी में (अरशद के दो और राशिद खान के एक छक्के से) केवल तीन छक्के शामिल थे। -
नयी दिल्ली. अनुभवी खेल प्रशासक और एशियाई खेलों में निशानेबाजी में भारत के पहले स्वर्ण पदक विजेता रणधीर सिंह का बुधवार को यहां उम्र संबंधित बीमारियों से जूझने के बाद निधन हो गया जिससे भारतीय खेल जगत के एक ऐसे युग का अंत हो गया जिस पर उन्होंने विभिन्न भूमिकाओं में अपनी अमिट छाप छोड़ी थी। कई दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहने के बाद 79 वर्ष के सिंह ने यहां अपने आवास पर अंतिम सांस ली। सिंह के परिवार में उनकी पत्नी विनीता और तीन बेटियां महिमा, सुनयना और राजेश्वरी हैं। राजेश्वरी भी एक निशानेबाज हैं। स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं के कारण सिंह ने हाल में एशियाई ओलंपिक परिषद (ओसीए) के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्हें 2024 में चार साल के कार्यकाल के लिए चुना गया था जबकि वह 1991 से 2015 तक इस संस्था में महासचिव रह चुके थे। उनका अंतिम संस्कार बृहस्पतिवार को दोपहर में हरिद्वार में किया जायेगा ।
भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) के सचिव राजीव भाटिया ने कहा, ''गहरे दुख के साथ हम राजा रणधीर सिंह के निधन की दुखद खबर साझा कर रहे हैं जो आज 27 मई 2026 को स्वर्ग सिधार गए। '' उन्होंने कहा, ''एक विशिष्ट ओलंपियन, अर्जुन पुरस्कार विजेता और भारत, एशिया और अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति में सबसे सम्मानित खेल प्रशासकों में से एक राजा रणधीर सिंह ने निशानेबाजी खेल और ओलंपिक आंदोलन के विकास में अमूल्य योगदान दिया। '' भाटिया ने कहा, ''एनआरएआई और पूरा निशानेबाजी समुदाय इस अपूरणीय क्षति पर शोक व्यक्त करता है और उनके परिवार तथा प्रियजनों के प्रति हार्दिक संवेदना व्यक्त करता है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे। '' सिंह के निधन पर शोक संदेशों का तांता लग गया। मौजूदा और पूर्व प्रशासकों के साथ-साथ शीर्ष खिलाड़ियों ने भी भावुक श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए भारतीय खेलों में उनके योगदान की जमकर सराहना की। सिंह के शानदार खेल करियर में पांच ओलंपिक में भागीदारी और 1978 के बैंकॉक एशियाई खेलों में ऐतिहासिक ट्रैप स्वर्ण पदक शामिल था जिससे उन्हें 1979 में अर्जुन पुरस्कार से नवाजा गया था। उन्होंने तोक्यो 1964 (रिजर्व निशानेबाज), मेक्सिको 1968, म्यूनिख 1972, मॉन्ट्रियल 1976, मॉस्को 1980 और लॉस एंजिल्स 1984 में ओलंपिक में हिस्सा लिया। खेलों की तरह ही अपने सफल प्रशासनिक करियर में उन्होंने 1987 से 2010 तक भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के महासचिव के तौर पर तथा 2001 से 2014 तक अलग अलग भूमिकाओं में अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) के सदस्य के रूप में कार्य किया। वह 2003 में दो साल के लिए विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (वाडा) में आईओसी के प्रतिनिधि बन गए।
पटियाला के पूर्व महाराजा और क्रिकेट खिलाड़ी भूपिंदर सिंह के वंशज रणधीर सिंह भारत के सबसे जाने-माने खेल प्रशासकों में से एक थे। भारतीय खेलों की अक्सर बिखरी हुई प्रशासनिक व्यवस्था में आम सहमति बनाने की अपनी काबिलियत के लिए उनकी प्रशंसा की जाती थी। देश में ओलंपिक आंदोलन को बढ़ावा देने का श्रेय भी बड़े पैमाने पर उन्हें ही दिया जाता था। उनकी बेटी राजेश्वरी ने उनकी निशानेबाजी की विरासत को बरकरार रखा और वह भी ट्रैप निशानेबाज हैं। राजेश्वरी ने 2016 की एशियाई चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक के अलावा 2022 के एशियाई खेलों में रजत पदक भी जीता था। वहीं उनकी बेटी सुनयना ने 2018 में आईओए की उपाध्यक्ष बनकर खेल प्रशासन में अपनी एक अलग जगह बनाई। वह आईओए की अंतरराष्ट्रीय संबंधों और शिक्षा समिति की सदस्य भी हैं। -
नयी दिल्ली. भारत 24 से 31 मई तक म्यूनिख में होने वाले आईएसएसएफ राइफल/पिस्टल विश्व कप में 22-सदस्यीय टीम उतारेगा। इस टीम में शामिल दोहरी ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर मिश्रित टीम मुकाबले के अलावा दो व्यक्तिगत पिस्टल स्पर्धाओं में भी हिस्सा लेंगी। भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) ने रविवार को टीम की घोषणा की जिसमें अनुभवी और युवा निशानेबाजों का मिश्रण है। इस टूर्नामेंट को इस खेल के सबसे बड़ी सालाना प्रतियोगिताओं में से एक माना जाता है। मनु के अलावा ओलंपियन और विश्व चैंपियनशिप की पदक विजेता ईशा सिंह भी दो व्यक्तिगत पिस्टल स्पर्धाओं में हिस्सा लेंगी। इस सत्र में पहली बार भारत के शीर्ष निशानेबाज देश से बाहर किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में हिस्सा लेने जा रहे हैं। प्रतियोगिताएं 26 मई से शुरू होंगी जिसकी शुरुआत महिलाओं के 25 मीटर पिस्टल प्रिसिजन चरण से होगी। पहले दिन पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल का क्वालीफिकेशन दौर और महिलाओं की 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन्स का एलिमिनेशन दौर भी होगा। इसके साथ ही पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा का क्वालीफिकेशन दौर भी खेला जाएगा। पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल और 10 मीटर एयर राइफल के फाइनल भी प्रतियोगिता में पहले ही दिन होंगे।
म्यूनिख विश्व कप में 80 देशों के कुल 696 निशानेबाजों के हिस्सा लेने की उम्मीद है जिनमें कई ओलंपिक और विश्व चैंपियन भी शामिल हैं। यह टूर्नामेंट इस साल के आखिर में होने वाली विश्व चैंपियनशिप और अन्य बड़े बहु खेल मुकाबलों की तैयारी के लिए एक अहम मंच का काम करेगा। भारत ने अप्रैल में ग्रेनाडा में हुए मौजूदा सत्र के पहले राइफल/पिस्टल विश्व कप में एक स्वर्ण पदक जीता था। उस टूर्नामेंट में भारत ने ऐसे निशानेबाजों को उतारा था जिनकी घरेलू रैंकिंग तीसरे से छठे स्थान के बीच थी। हालांकि म्यूनिख में होने वाली इस प्रतियोगिता में भारत के शीर्ष रैंकिंग वाले राइफल और पिस्टल निशानेबाज हिस्सा लेंगे और उनका मुकाबला अंतरराष्ट्रीय स्तर के मजबूत खिलाड़ियों से होगा।























