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गर्भपात, गर्भनिरोधक के बारे में जागरुकता की कमी भी जनसंख्या वृद्धि के कारण: विशेषज्ञ

नयी दिल्ली. चीन को पीछे छोड़ते हुए भारत दुनिया में सर्वाधिक आबादी वाला देश बनने की दहलीज पर है, ऐसे में विशेषज्ञों ने साक्षरता का अभाव, गर्भनिरोधक और गर्भपात के बारे में जागरूकता की कमी को भी जनसंख्या वृद्धि के कारण बताये हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में गर्भपात कराने की दर अधिक है और यह ग्रामीण क्षेत्रों में 2.5 प्रतिशत की तुलना में 4 प्रतिशत है। आंकड़ों के अनुसार बिना स्कूली पृष्ठभूमि वाली 1.9 प्रतिशत महिलाओं ने और 10-11 साल की शिक्षा वाली 3.5 प्रतिशत महिलाओं ने गर्भपात कराने का विकल्प चुना। छाया देवी (25) के दो और बच्चे होने के बाद बेटी को डॉक्टर बनाने की उसकी योजना बदल गई। तीन बच्चों की मां छाया ने कहा, ‘‘बच्चे भगवान की देन हैं, लेकिन क्या होगा अगर आपके पास उनके लालन-पालन के लिए पैसे नहीं हों और इस स्थिति का प्रभाव आपके अन्य बच्चों पर भी पड़ता है।'' नोएडा में घरेलू सहायिका के रूप में काम करने वाली छाया चौथे बच्चे को जन्म देने वाली है। अब वह इसे लेकर चिंतित है कि वह अपने बच्चों के लिए अच्छा जीवन कैसे सुनिश्चित करेगी। संयुक्त परिवार में रहने वाली छाया ने कहा, ‘‘मैंने एक सरकारी अस्पताल की डॉक्टर से परामर्श लिया। उन्होंने फिर से गर्भवती होने पर मुझे डांटा, लेकिन वह नहीं समझती कि मेरी सहमति कभी नहीं ली जाती है।'' केवल छाया ही नहीं, बल्कि पारिवारिक मामलों में बोलने का अधिकार नहीं रहने और गर्भ निरोधकों के प्रति पति की स्वीकार्यता नहीं होने के कारण उस जैसी लाखों महिलाएं बच्चे पैदा करने के लिए मजबूर हैं। भारत की आबादी जनवरी में 140 करोड़ के आंकड़े को पार कर गई और यह जल्द ही चीन की आबादी को पीछे छोड़ देगी। कुछ अनुमानों के अनुसार संभव है कि भारत की जनसंख्या पहले ही चीन को पार कर गई हो, लेकिन जब तक आधिकारिक जनगणना नहीं हो जाती, तब तक इसकी पुष्टि नहीं की जा सकती। पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया की कार्यकारी निदेशक पूनम मुत्तरेजा ने कहा कि किसी भी देश के लिए, कम जनसंख्या वृद्धि दर के लक्ष्य के लिए गर्भनिरोधकों के अधिक प्रचलन की आवश्यकता होती है, जिसे केवल परिवार नियोजन और यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं के प्रावधान को मजबूत करके ही प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इसमें गर्भपात सेवाओं तक पहुंच भी शामिल है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस)-5 के आंकड़ों के अनुसार, भारत में सभी गर्भधारण में 0.9 प्रतिशत मामलों में ही गर्भपात कराया जाता है। हालांकि, एनएफएचएस के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में गर्भपात की दर अधिक है, जो ग्रामीण क्षेत्रों के 2.5 प्रतिशत की तुलना में 4 प्रतिशत है।

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