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नयी दिल्ली. टाटा बोइंग एयरोस्पेस लिमिटेड (टीबीएएल) ने हैदराबाद स्थित अपनी अत्याधुनिक सुविधा से एएच-64ई अपाचे लड़ाकू हेलिकॉप्टर के लिए 400वें ढांचे (फ्यूजलेज) का सफलतापूर्वक निर्माण पूरा कर लिया है। टीबीएएल ने आधिकारिक बयान में सोमवार को यह जानकारी दी। टीबीएएल, बोइंग और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (टीएएसएल) का संयुक्त उद्यम है।
टीबीएएल के बयान के अनुसार, इन ढांचों का निर्माण भारत में किया जाता है और दुनिया भर में आपूर्ति किए जाने वाले अपाचे हेलिकॉप्टर में लगाए जाते हैं। इनमें अमेरिकी सेना को आपूर्ति किए जाने वाले हेलीकॉप्टरों के साथ-साथ 2025 में भारतीय सेना को सौंपे गए छह अपाचे हेलीकॉप्टर भी शामिल हैं। भारतीय वायुसेना के पास 22 एएच-64ई अपाचे हेलिकॉप्टर हैं।
बयान में कहा गया, "टीबीएएल ने हैदराबाद में 52,000 वर्ग मीटर के अपने संयंत्र से दुनिया के सबसे उन्नत और प्रमाणित लड़ाकू हेलिकॉप्टर एएच-64ई अपाचे के लिए 400वें ढांचे को सफलतापूर्वक तैयार कर लिया है।" वर्ष 2016 में स्थापित टीबीएएल में 750 से अधिक इंजीनियर और तकनीशियन कार्यरत हैं। ये कर्मचारी अपाचे हेलिकॉप्टर के लिए ढांचा बनाने के लिए उन्नत रोबोटिक्स, स्वचालन और एयरोस्पेस विनिर्माण तकनीकों का उपयोग करते हैं। कंपनी ने कहा कि करीब 1,300 अपाचे हेलिकॉप्टर 19 देशों में परिचालन में हैं और इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है। - नयी दिल्ली. माल एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद की 12 सितंबर को होने वाली बैठक अब सात अक्टूबर को होगी। यह बदलाव ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के कारण किया गया है। भारत 12 और 13 सितंबर को नयी दिल्ली में वार्षिक ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। सम्मेलन में पश्चिम एशिया संकट के आर्थिक प्रभाव सहित कई महत्वपूर्ण वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा होने की उम्मीद है। ब्रिक्स में पहले ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे। वर्ष 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात को इसमें शामिल किया गया। इंडोनेशिया 2025 में ब्रिक्स का सदस्य बना। सूत्रों ने बताया कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को देखते हुए जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक अब सात अक्टूबर को होगी। इससे पहले पांच और छह अक्टूबर को अधिकारियों की बैठक होगी। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता वाली और राज्यों के वित्त मंत्रियों वाली परिषद की बैठक एक साल से अधिक समय बाद होगी। परिषद की 56वीं बैठक तीन-चार सितंबर, 2025 को हुई थी। उस बैठक में केंद्र और राज्यों ने माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की दरों और श्रेणियों में बड़े बदलाव का फैसला किया था।
- नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (सीएनजी) की कीमतों में 3.89 रुपये प्रति किलोग्राम की वृद्धि की गई है। संशोधित दरें शनिवार सुबह 6 बजे से प्रभावी हो गई हैं। यह वृद्धि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रमुख शहरी गैस वितरक इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (आईजीएल) द्वारा घोषित की गई है। हालिया बढ़ोतरी के बाद, दिल्ली में सीएनजी की कीमत 83.09 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 86.98 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है। संशोधित दरें नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम सहित कई पड़ोसी शहरों में भी लागू होंगी।नोएडा और गाजियाबाद में अब सीएनजी की कीमत 95.59 रुपये प्रति किलोग्राम होगी, जबकि गुरुग्राम में नई कीमत 92.01 रुपये प्रति किलोग्राम तय की गई है। इस नवीनतम वृद्धि से सीएनजी पर अत्यधिक निर्भर वाहन चालकों और वाणिज्यिक वाहन संचालकों पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका है। ऑटो-रिक्शा, टैक्सी, ऐप-आधारित कैब सेवाएं और अन्य वाणिज्यिक परिवहन संचालकों को इस संशोधन के बाद ईंधन पर अधिक खर्च करना पड़ सकता है। सीएनजी का उपयोग करने वाले निजी कार मालिकों को भी ईंधन पर अधिक खर्च करना पड़ेगा।हाल के महीनों में सीएनजी की कीमतों में लगातार वृद्धि के बाद यह ताजा बढ़ोतरी हुई है। मई 2026 में, आईजीएल ने दिल्ली में 2 रुपये प्रति किलोग्राम की एक और वृद्धि की घोषणा की थी। यह संशोधन 26 मई से लागू होने वाली 1 रुपये प्रति किलोग्राम की वृद्धि के कुछ ही दिनों बाद किया गया था, क्योंकि सीएनजी की कीमतें लगातार बढ़ रही थीं। सार्वजनिक क्षेत्र की गैस वितरण कंपनी आईजीएल ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की कीमतें “काफी अधिक” बनी हुई हैं और बढ़ती लागत का असर तेजी से महसूस किया जा रहा है।कंपनी ने कहा कि सीएनजी की कीमतों में 3.89 रुपये प्रति किलोग्राम की वृद्धि आवश्यक थी ताकि इनपुट गैस की लागत में वृद्धि की आंशिक रूप से भरपाई की जा सके और उपभोक्ताओं को सीएनजी की निरंतर और विश्वसनीय आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। बार-बार हो रही मूल्य वृद्धि ने परिवहन संचालकों के बीच चिंताएं बढ़ा दी हैं, खासकर महानगरीय क्षेत्रों में जहां सीएनजी से चलने वाले वाहन सार्वजनिक और वाणिज्यिक परिवहन नेटवर्क का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
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नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर के बाजारों में प्याज 60 से 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने के बाद केंद्र सरकार ने आम लोगों को बड़ी राहत दी है। सरकारी एजेंसियां अब रियायती दर पर प्याज उपलब्ध करा रही हैं। महज 35 रुपये प्रति किलो की कीमत पर यह सस्ता प्याज दिल्ली-एनसीआर के 13 स्थानों पर बिक रहा है। जल्द ही बिक्री केंद्रों की संख्या बढ़ाकर करीब 40 कर दी जाएगी।
बृहस्पतिवार को कृषि भवन परिसर में उपभोक्ता मामलों के विभाग की सचिव निधि खरे ने नेफेड और भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ(एनसीसीएफ) की मोबाइल वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसी परिसर में लोगों को 35 रुपये किलो की दर से प्याज बेचा गया। पहले दिन करीब 400 किलो प्याज की बिक्री हुई। निधि खरे ने बताया कि देश में प्याज का उत्पादन और उपलब्धता पर्याप्त है। त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने से कीमतों में उतार-चढ़ाव होता है। इसे नियंत्रित करने के लिए सरकार बाजार में आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों पर अंकुश लगाने के कई कदम उठा रही है।दिल्ली में प्याज की आपूर्ति बढ़ाने के लिए नासिक से चली पहली ‘कांदा एक्सप्रेस’ नई दिल्ली के आदर्श नगर रेलवे स्टेशन पहुंच गई है। इस ट्रेन के जरिए बड़ी मात्रा में प्याज भेजा गया है, जिसकी रियायती दर पर बिक्री की जाएगी। आने वाले दिनों में और ट्रेनें पहुंचने की उम्मीद है। उपभोक्ता मामलों के विभाग के निर्देश पर मूल्य स्थिरीकरण कोष के तहत बनाए गए बफर स्टॉक से 840 टन प्याज दिल्ली भेजने का फैसला लिया गया है। इसमें करीब 450 टन प्याज पहली कांदा एक्सप्रेस के जरिए पहुंच चुका है। लासलगांव स्टेशन प्रबंधक प्रितेश दुबे ने बताया कि ट्रेन को जल्द से जल्द गंतव्य तक पहुंचाने का प्रयास किया गया, ताकि राजधानी के उपभोक्ताओं को राहत मिल सके। सरकार का मानना है कि रियायती दर पर बिक्री और अतिरिक्त आपूर्ति से दिल्ली-एनसीआर में प्याज की कीमतें नियंत्रित होंगी। त्योहारी सीजन में आम उपभोक्ताओं को महंगे प्याज से राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। -
नयी दिल्ली. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को कहा कि भारत का इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) बाजार वर्ष 2030 तक बढ़कर 20 लाख करोड़ रुपये का हो जाएगा और इससे पांच करोड़ रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। गडकरी ने 'सीआईआई-आईटीसी टिकाऊ विकास उत्कृष्टता केंद्र' की ओर से आयोजित एक सम्मेलन में कहा कि देश में फिलहाल 57 लाख बिजलीचालित वाहन पंजीकृत हैं और कुल वाहन बाजार में ईवी की पहुंच सात प्रतिशत है। उन्होंने कहा, ''भारत का ईवी बाजार वर्ष 2030 तक 20 लाख करोड़ रुपये मूल्य का हो जाएगा। ऐसे में यह क्षेत्र 2030 तक पांच करोड़ रोजगार भी पैदा करेगा।'' गडकरी ने कहा कि भारत में हर साल एक लाख इलेक्ट्रिक बस की मांग है, लेकिन देश में सालाना केवल 50,000-60,000 ईवी बस का ही विनिर्माण हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य अगले पांच साल में भारत के वाहन उद्योग को दुनिया में पहले स्थान पर पहुंचाना है। उन्होंने कहा, ''यह मुश्किल जरूर है, लेकिन असंभव नहीं है।'' सड़क परिवहन मंत्री ने कहा कि भारत में निर्मित वाहनों की गुणवत्ता अच्छी और लागत कम होने के कारण दुनिया की प्रमुख वाहन कंपनियां देश में मौजूद हैं। गडकरी ने कहा कि जब उन्होंने परिवहन मंत्री का पद संभाला था, तब भारतीय वाहन उद्योग का आकार 14 लाख करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर करीब 22 लाख करोड़ रुपये हो गया है। इसके मुकाबले अमेरिका का वाहन उद्योग 78 लाख करोड़ रुपये और चीन का 47 लाख करोड़ रुपये का है। उन्होंने कहा कि भारत जीवाश्म ईंधन के आयात पर 22 लाख करोड़ रुपये खर्च करता है और इसके कारण प्रदूषण की समस्या भी पैदा हो रही है। उन्होंने कहा कि जैव ईंधन भविष्य का महत्वपूर्ण विकल्प है। गडकरी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य देश की लॉजिस्टिक लागत को घटाकर आठ प्रतिशत करना है।
उन्होंने आईआईटी चेन्नई, आईआईटी कानपुर और आईआईएम बेंगलुरु की हाल में आई रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि एक्सप्रेसवे और आर्थिक गलियारों के निर्माण से भारत की लॉजिस्टिक लागत 16 प्रतिशत से घटकर 10 प्रतिशत रह गई है। -
नयी दिल्ली. एनटीपीसी का 2037 तक 244 गीगावाट की परिचालन क्षमता विकसित करने और 16.86 लाख करोड़ रुपये का निवेश करने का लक्ष्य है। कंपनी पूरी ऊर्जा मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। एनटीपीसी के चेयरमैन गुरदीप सिंह ने बृहस्पतिवार को कहा कि अगला दशक कंपनी के इतिहास में वृद्धि के सबसे महत्वपूर्ण दौर में से एक होगा। अर्थव्यवस्था के विस्तार और जीवन स्तर में सुधार के साथ भारत की बिजली की जरूरत लगातार बढ़ती रहेगी। उन्होंने कंपनी की 50वीं वार्षिक आम बैठक (एजीएम) में शेयरधारकों को संबोधित करते हुए कहा कि इसी के साथ बिजली व्यवस्था की संरचना में भी तेजी से बदलाव आएगा। सिंह ने कहा, ''हमने दीर्घकालिक क्षमता के अपने लक्ष्य बढ़ाए हैं और अब 2032 तक 149 गीगावाट उत्पादन क्षमता का लक्ष्य रखा है, जिसमें 60 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा शामिल है। 2037 तक भंडारण क्षमता को छोड़कर 244 गीगावाट तक पहुंचने का हमारा लक्ष्य है।'' फिलहाल एनटीपीसी की क्षमता करीब 91 गीगावाट है।
चेयरमैन ने कहा कि कंपनी की वित्त वर्ष 2036-37 तक ताप, जलविद्युत एवं पंप स्टोरेज, नवीकरणीय ऊर्जा, बैटरी भंडारण, खनन तथा परमाणु ऊर्जा क्षेत्रों में कुल करीब 16.86 लाख करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय करने की भी योजना है। यह किसी भारतीय बिजली कंपनी द्वारा किए जाने वाले सबसे बड़े निवेश कार्यक्रमों में से एक होगा। उन्होंने कहा कि एनटीपीसी का बदलाव केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा। सिंह ने कहा कि कंपनी पूरी ऊर्जा मूल्य श्रृंखला में अपनी क्षमताएं विकसित कर रही है।
परमाणु ऊर्जा के बारे में उन्होंने कहा कि यह एनटीपीसी की भविष्य की वृद्धि के सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक है। कंपनी परमाणु ऊर्जा मिशन के तहत 2047 तक सरकार के 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता के महत्वाकांक्षी लक्ष्य में 30 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करना चाहती है। राजस्थान में एनपीसीआईएल के साथ संयुक्त उद्यम में 2.8 गीगावाट की परमाणु ऊर्जा परियोजना विकसित कर रही एनटीपीसी अलग-अलग परमाणु ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित करने की भी इच्छुक है। सिंह ने कहा, ''परमाणु परियोजनाओं एवं प्रौद्योगिकियों के लिए 13 राज्यों में 34 अतिरिक्त स्थानों को लेकर अध्ययन तथा चर्चा आगे बढ़ रही है।'' उन्होंने कहा कि परमाणु ऊर्जा विश्वसनीय, कम कार्बन उत्सर्जन वाली और चौबीसों घंटे बिजली उपलब्ध कराकर नवीकरणीय तथा ताप विद्युत, दोनों की पूरक होगी। चेयरमैन ने बताया कि एनटीपीसी की कोयला गैसीकरण आधारित कृत्रिम प्राकृतिक गैस परियोजना पर काम अच्छी तरह आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, ''हम 5.75 लाख टन सालाना क्षमता वाली परियोजना पर भी अच्छी प्रगति कर रहे हैं। इसके स्थापित होने के बाद यह भारत में अपनी तरह का पहला संयंत्र होगा और सीधे तौर पर आयातित प्राकृतिक गैस का स्थान लेगा।'' एनटीपीसी समूह ने वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक का सबसे अधिक 27,546 करोड़ रुपये का एकीकृत शुद्ध लाभ दर्ज किया है, जो इससे पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 15 प्रतिशत अधिक है। समूह की कर पूर्व आय भी बढ़कर 60,564 करोड़ रुपये हो गई जबकि समूह का नेटवर्थ भी बढ़कर करीब 2.03 लाख करोड़ रुपये रहा। -
देखें क्या है कीमत...
चेन्नई. इंडिया यामाहा मोटर ने बृहस्पतिवार को अपनी सुपरस्पोर्ट मोटरसाइकिल श्रृंखला का विस्तार करते हुए नई 'वाईजेडएफ-आर2' को वैश्विक स्तर पर पेश किया। चेन्नई संयंत्र में निर्मित इस मोटरसाइकिल की कीमत 2.30 लाख रुपये रखी गई है।
कंपनी ने बताया कि इस मोटरसाइकिल में 200 सीसी का इंजन दिया गया है, जो 26.5 हॉर्सपावर की अधिकतम शक्ति और 19.1 एनएम का अधिकतम टॉर्क पैदा करता है। कंपनी ने इस महीने की शुरुआत में 10,000 रुपये की टोकन राशि के साथ इसकी बुकिंग शुरू की थी। यह राशि मोटरसाइकिल की अंतिम कीमत में समायोजित की जाएगी। यामाहा मोटर कंपनी लिमिटेड के कार्यपालक अधिकारी और यामाहा मोटर इंडिया समूह के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक हाजिमे आओटा ने संवाददाताओं से कहा कि 200 सीसी का इंजन किसी मौजूदा इंजन में बदलाव करके नहीं, बल्कि पूरी तरह नए सिरे से विकसित किया गया है। उन्होंने कहा कि 200 सीसी इंजन का चुनाव घरेलू बाजार के साथ-साथ वैश्विक बाजारों की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया गया है। उन्होंने कहा कि पहली नजर में 'वाईजेडएफ-आर2' और आर15 एक जैसी दिख सकती हैं, लेकिन दोनों की संरचना और निर्माण प्रक्रिया अलग है। उन्होंने दोनों मॉडल के बीच अंतर को आईफोन-4 से आईफोन-5 के विकास जैसा बताया।
आओटा के मुताबिक, नई मोटरसाइकिल को वैश्विक स्तर के कड़े उत्सर्जन और सुरक्षा मानकों को पूरा करने के लिए विकसित किया गया है। इसे मुख्य रूप से जापान, यूरोप और ताइवान जैसे विकसित बाजारों में निर्यात किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कंपनी को नई मोटरसाइकिल की बिक्री में घरेलू बाजार की हिस्सेदारी 70 प्रतिशत और निर्यात की 30 प्रतिशत रहने की उम्मीद है कंपनी ने पूरे साल के लिए करीब 50,000 इकाइयों के उत्पादन का लक्ष्य रखा है। सितंबर से दिसंबर के बीच शुरुआती चरण में 15,000 से 20,000 इकाइयों के उत्पादन की उम्मीद है। -
नयी दिल्ली. प्याज की बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार बृहस्पतिवार से दिल्ली में बफर स्टॉक का प्याज 35 रुपये प्रति किलोग्राम की रियायती दर पर बेचेगी। देश के कई शहरों में प्याज का खुदरा भाव 55 से 60 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है। केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रल्हाद जोशी बृहस्पतिवार को दिल्ली में रियायती दर पर प्याज की बिक्री की शुरुआत करेंगे। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी। सरकार ने 2026 के लिए प्याज का 1.21 लाख टन का 'बफर स्टॉक' तैयार किया है। इसी भंडार से प्याज बाजार में उतारा जाएगा। इस खुदरा बिक्री का संचालन तीन एजेंसियां भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन महासंघ (नाफेड), भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ (एनसीसीएफ) और केंद्रीय भंडार करेंगी। एनसीसीएफ के प्रबंध निदेशक अनीस जोसेफ चंद्रा ने पीटीआई-भाषा को बताया, ''हम कल दिल्ली में बिक्री शुरू करेंगे और सप्ताहांत तक इसे एनसीआर क्षेत्र में भी शुरू कर दिया जाएगा।'' एनसीसीएफ के पास प्याज का करीब 62,000 टन बफर स्टॉक है। इसमें से महाराष्ट्र के नासिक से 400 टन प्याज रेल के जरिये दिल्ली भेजा जा रहा है। इसके लिए 'कांदा एक्सप्रेस' नाम से चलाई गई विशेष रेलगाड़ी के बृहस्पतिवार को दिल्ली पहुंचने की उम्मीद है। एनसीसीएफ दिल्ली में केंद्रीय भंडार के 100 स्टोर के जरिये प्याज बेचेगा। इसके अलावा मदर डेयरी के करीब 300 बिक्री केंद्रों के जरिये प्याज बेचने को लेकर भी बातचीत चल रही है। एनसीसीएफ शुरुआत में 15 मोबाइल वैन के जरिये भी प्याज बेचेगा। इनकी संख्या शुक्रवार से बढ़ाकर 40 की जाएगी। चंद्रा ने कहा कि रेल के जरिये आने वाली प्याज की खेप का इस्तेमाल चंडीगढ़, लुधियाना, वाराणसी और अन्य शहरों में भी बिक्री के लिए किया जाएगा। नाफेड के पास 55,000 टन से कम प्याज का बफर स्टॉक है। वह भी दिल्ली के अलावा कोच्चि और गुवाहाटी समेत अन्य केंद्रों पर रियायती दर पर प्याज बेचेगा। पहली विशेष रेलगाड़ी 800 टन प्याज लेकर नासिक से दिल्ली के लिए रवाना हो चुकी है।
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नयी दिल्ली. भारत के प्राथमिकता वाले 26 बाजारों में चावल का निर्यात 2025 के भारत अंतरराष्ट्रीय चावल सम्मेलन (बीआईआरसी) के बाद के पांच महीनों में पिछले तीन वर्ष के औसत से अधिक रहा। इससे संकेत मिलता है कि स्थानीय खान-पान के अनुरूप भारतीय चावल की किस्मों को बढ़ावा देने की रणनीति से विदेशों में मांग के विविधीकरण में मदद मिल सकती है। भारतीय चावल निर्यातक महासंघ (आईआरईएफ) द्वारा वाणिज्यिक आसूचना एवं सांख्यिकी महानिदेशालय के आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार, नवंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच 26 बाजारों को मिलाकर चावल का निर्यात 23,476 करोड़ रुपये और 47.9 लाख टन रहा। इसमें बासमती और गैर-बासमती दोनों तरह के चावल शामिल हैं। निर्यात मूल्य पिछले तीन वर्ष में नवंबर-मार्च की इसी अवधि के औसत से 1.1 प्रतिशत अधिक रहा, जबकि इसकी मात्रा 5.6 प्रतिशत अधिक रही। इन 26 बाजारों में से 11 में मूल्य एवं मात्रा दोनों के लिहाज से सालाना आधार पर वृद्धि दर्ज की गई। ये नतीजे ऐसे समय आए हैं जब भारत घरेलू स्तर पर चावल की पर्याप्त उपलब्धता के बीच अपने निर्यात आधार को व्यापक बनाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में जोर अधिक चावल के लिए बाजार तलाशने के बजाय ऐसी विशिष्ट किस्मों की पहचान पर है जो उपयुक्तता, गुणवत्ता में निरंतरता और पकने के गुणों के आधार पर प्रतिस्पर्धा कर सकें। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) को निर्यात मूल्य में 65 प्रतिशत और मात्रा में 64 प्रतिशत की वृद्धि हुई। बेल्जियम में क्रमश: 53.8 प्रतिशत और 44.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई। जर्मनी में निर्यात मूल्य 33.5 प्रतिशत बढ़ा, जबकि मात्रा 24.6 प्रतिशत बढ़ी। ब्रिटेन में निर्यात मूल्य 26.9 प्रतिशत और मात्रा 25.6 प्रतिशत बढ़ी। दक्षिण अफ्रीका में मूल्य 26 प्रतिशत, जबकि मात्रा 42.9 प्रतिशत बढ़ी। केन्या में दोनों में क्रमश: 22.3 प्रतिशत और 34.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई। फ्रांस में निर्यात मूल्य 31.3 प्रतिशत और मात्रा 32.9 प्रतिशत बढ़ी। ब्रिटेन को निर्यात मूल्य में 26.9 प्रतिशत और मात्रा में 25.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई। मैक्सिको को निर्यात मूल्य 22.1 प्रतिशत और मात्रा 50.9 प्रतिशत बढ़ी। नीदरलैंड को निर्यात मूल्य 20.5 प्रतिशत और मात्रा 13.8 प्रतिशत बढ़ी, जबकि कनाडा को निर्यात मूल्य 10.2 प्रतिशत और मात्रा 9.1 प्रतिशत बढ़ी। सेनेगल को निर्यात मूल्य 5.3 प्रतिशत और मात्रा 29.9 प्रतिशत बढ़ी। व्यापार आंकड़े यह भी बताते हैं कि निर्यात वृद्धि का आकलन केवल मात्रा के आधार पर नहीं किया जा सकता। उदाहरण के लिए, मैक्सिको को चावल की खेप में 50.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि निर्यात मूल्य 22.1 प्रतिशत बढ़ा। केन्या और दक्षिण अफ्रीका में भी मात्रा की वृद्धि मूल्य की तुलना में काफी अधिक रही। यह विभिन्न बाजारों में कीमत, उत्पाद मिश्रण और मांग में अंतर को दर्शाता है। इससे उद्योग अधिक लक्षित रणनीति अपना रहा है। निर्यातक चावल को केवल एक जिंस के रूप में पेश करने के बजाय यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि भारतीय चावल की अलग-अलग किस्में संभावित बाजारों के उपभोक्ताओं के परिचित व्यंजनों में किस तरह बेहतर उपयोग की जा सकती हैं। इस रणनीति को 23 से 25 अक्टूबर को नयी दिल्ली के भारत मंडपम में होने वाले भारत अंतरराष्ट्रीय चावल सम्मेलन (बीआईआरसी) 2026 में आगे बढ़ाया जाएगा।
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नई दिल्ली। 800 टन प्याज लेकर पहली ‘कांदा एक्सप्रेस’ बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी पहुंचेगी। यहां प्याज को 35 रुपये प्रति किलोग्राम की सब्सिडी वाली दर पर बेचा जाएगा। उपभोक्ता मामले सचिव निधि खरे ने मंगलवार को यह जानकारी दी। खरे ने सोशल मीडिया मंच पर बताया कि दिल्ली में प्याज की खुदरा बिक्री नेफेड, एनसीसीएफ और केंद्रीय भंडार की दुकानों के जरिए की जाएगी।उन्होंने बताया कि चार अन्य केंद्रों-चेन्नई, एर्नाकुलम, मदुरै और गुवाहाटी के लिए भी समर्पित रेलवे रेक के जरिए थोक प्याज भेजा जा रहा है। इन उपभोग केंद्रों के लिए भेजा जा रहा प्याज महाराष्ट्र के नासिक में रखे गए बफर स्टॉक का हिस्सा है। कीमतों में बढ़ोतरी पर रोक लगाने के लिए इस स्टॉक को बाजार में उतारा जा रहा है।उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 24 अगस्त को देश में प्याज की औसत खुदरा कीमत सालाना आधार पर 59 प्रतिशत बढ़कर 43.53 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई, जबकि एक साल पहले यह 27.37 रुपये प्रति किलोग्राम थी। इसी तरह औसत थोक कीमत 68 प्रतिशत बढ़कर 35.58 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई, जो एक साल पहले 21.23 रुपये प्रति किलोग्राम थी।प्रमुख शहरों में सोमवार को प्याज की खुदरा कीमत चेन्नई में 60 रुपये प्रति किलोग्राम रही, जबकि एक साल पहले यह 33 रुपये थी। दिल्ली में कीमत 55 रुपये प्रति किलोग्राम रही, जो एक साल पहले 35 रुपये थी। वहीं, कोलकाता में प्याज 53 रुपये प्रति किलोग्राम बिका।बड़े पैमाने पर प्याज की आवाजाही में लॉजिस्टिक दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से ‘कांदा एक्सप्रेस’ पहल 2024-25 में शुरू की गई थी और तब से इसका विस्तार किया गया है।
वित्त वर्ष 2024-25 में करीब 12,000 टन बफर स्टॉक प्याज लेकर 14 रेलवे रेक पांच शहरों में भेजे गए थे। वित्त वर्ष 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 86 रेक हो गई, जिनके जरिए देश के 16 प्रमुख शहरों में करीब 88,000 टन प्याज भेजा गया।प्याज का बफर स्टॉक केंद्र सरकार का रणनीतिक भंडार है, जिसे मुख्य रूप से आपूर्ति कम होने पर कीमतों में अचानक बढ़ोतरी से बाजार को बचाने के लिए तैयार किया जाता है। सरकार मूल्य स्थिरीकरण कोष योजना के तहत विभिन्न उत्पादक राज्यों में प्याज का भंडार रखती है।सरकार ने 2026 के लिए करीब 1.21 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक बनाए रखा है।सरकार के अनुसार, आने वाले महीनों में घरेलू मांग को पूरा करने के लिए प्याज की उपलब्धता पर्याप्त बनी रहने की उम्मीद है। वित्त वर्ष 2025-26 में प्याज का अनुमानित उत्पादन 307.37 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 307.67 लाख टन के लगभग बराबर है। प्याज की कीमतों में आमतौर पर अगस्त-सितंबर के दौरान मौसमी बढ़ोतरी देखी जाती है। इसके पीछे त्योहारी मांग, मौसम संबंधी व्यवधान, आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव और मांग के बदलते पैटर्न जैसे कारक प्रमुख हैं। -
नई दिल्ली। भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित सभी पारंपरिक मिसाइल प्रणालियों की तकनीक भारतीय उद्योगों को हस्तांतरित करने को मंजूरी दे दी है। इसके बाद निर्धारित मानदंडों को पूरा करने वाली भारतीय कंपनियां देश में ही इन मिसाइल प्रणालियों का उत्पादन कर सकेंगी। इस फैसले से भारतीय सेनाओं की युद्धक तैयारी मजबूत होने और उन्हें आवश्यक मिसाइलों की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने की उम्मीद है।
रक्षा मंत्रालय के इस फैसले को भारत के मिसाइल निर्माण क्षेत्र में अनुसंधान से औद्योगिक उत्पादन तक की यात्रा को तेज करने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। डीआरडीओ द्वारा विकसित तकनीक को उद्योगों तक पहुंचाने से प्रमाणित प्रणालियों के बड़े पैमाने पर उत्पादन की प्रक्रिया को गति मिल सकती है।रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का अर्थ केवल स्वदेशी हथियारों का विकास और इस्तेमाल करना नहीं, बल्कि उनके उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला को भी देश के भीतर विकसित करना है। मिसाइल तकनीक के हस्तांतरण से घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने, विदेशी निर्भरता कम करने और भारतीय रक्षा उद्योग को मजबूत बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। अब तक उन्नत मिसाइल प्रणालियों के विकास में डीआरडीओ की प्रमुख भूमिका रही है। नई व्यवस्था के तहत डीआरडीओ द्वारा विकसित तकनीक निर्धारित योग्यता, प्रमाणन और नियामकीय आवश्यकताओं को पूरा करने वाले भारतीय उद्योगों को हस्तांतरित की जाएगी। इससे विकास और परीक्षण के बाद मिसाइल प्रणालियों को औद्योगिक स्तर पर उत्पादन में बदलने की प्रक्रिया आसान होगी।इस फैसले का एक महत्वपूर्ण पहलू भारतीय रक्षा उद्योग में छोटी और मध्यम कंपनियों की भागीदारी बढ़ाना भी है। मिसाइल निर्माण की आपूर्ति श्रृंखला में विभिन्न उपकरणों, कलपुर्जों, इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों, विशेष सामग्रियों और तकनीकी घटकों की जरूरत होती है। ऐसे में भारतीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए भी नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।सरकार का उद्देश्य रक्षा उत्पादन के लिए ऐसा मजबूत घरेलू औद्योगिक आधार तैयार करना है, जिसमें बड़ी कंपनियों के साथ एमएसएमई और अन्य तकनीकी भागीदार भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं। यह कदम ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब भारत अपने रक्षा उत्पादन को लगातार बढ़ाने और उन्नत सैन्य प्रणालियों के निर्माण का वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।तकनीक हस्तांतरण से डीआरडीओ अत्याधुनिक रक्षा प्रौद्योगिकियों के अनुसंधान और विकास पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेगा, जबकि प्रमाणित तकनीकों को भारतीय उद्योगों के माध्यम से उत्पादन के स्तर तक पहुंचाया जा सकेगा। इससे नई तकनीक विकसित करने और उसे सेनाओं के लिए उपलब्ध कराने के बीच का समय कम करने में भी मदद मिल सकती है।रक्षा मंत्री की मंजूरी को भारत के मिसाइल क्षेत्र में ‘डीआरडीओ की प्रयोगशाला से भारतीय कारखानों तक’ तकनीक पहुंचाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे स्वदेशी रक्षा उत्पादन को गति मिलने के साथ भारतीय कंपनियों, एमएसएमई और तकनीकी भागीदारों के लिए रक्षा क्षेत्र में भागीदारी के नए रास्ते खुलेंगे। -
नयी दिल्ली. राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में सोमवार को सोने की कीमतें पांच महीने से अधिक के उच्चतम स्तर 1.64 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गईं। ऐसा वैश्विक रुख और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण मांग बढ़ने से हुआ। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 900 रुपये बढ़कर 1,64,400 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी कर सहित) हो गई, जो शुक्रवार को 1,63,500 रुपये प्रति 10 ग्राम रही थी। सोने की कीमत आखिरी बार नौ मार्च को इस स्तर के आसपास थी। उस समय यह 1,64,300 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। सर्राफा संघ के अनुसार, चांदी में भी लगातार तीसरे सत्र में बढ़त देखी गई और यह 3,500 रुपये बढ़कर चार महीने से अधिक के उच्चतम स्तर 2,53,500 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी कर सहित) पर पहुंच गई। पिछले सत्र में चांदी 2,50,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। आखिरी बार यह 17 अप्रैल को इस स्तर के आसपास थी, जब इसकी कीमत 2,53,000 रुपये प्रति किलोग्राम थी। लेमन मार्केट्स डेस्क के शोध प्रमुख गौरव गर्ग ने कहा कि सोमवार को घरेलू बाजारों में सोने में तेजी आई, जबकि अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण कमजोर डॉलर और सुरक्षित निवेश की मजबूत मांग से चांदी की कीमतें भी ऊंची बनी रहीं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में, हाजिर सोना 42.45 डॉलर या एक प्रतिशत बढ़कर 4,646.54 डॉलर प्रति औंस हो गया और चांदी 69 डॉलर प्रति औंस पर स्थिर रही। कोटक सिक्योरिटीज की जिंस शोध विभाग की एवीपी, कायनात चैनवाला ने कहा कि सोमवार को वैश्विक बाजार में हाजिर सोने की तेजी जारी रही और यह 4,650 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गया। सर्राफा कारोबारियों का कहना है कि सर्राफा में अगली चाल भू-राजनीति पर कम और महंगाई पर ज्यादा निर्भर हो सकती है।
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नयी दिल्ली. चीनी की कीमतों में अचानक आए उछाल के बीच उद्योग संगठन इस्मा ने सोमवार को कहा कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है और शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति देने तथा कारोबारियों एवं थोक उपभोक्ताओं पर भंडारण सीमा लगाने से आने वाले दिनों में खुदरा कीमतें घटने की उम्मीद है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को चीनी की अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमत 63.05 रुपये प्रति किलोग्राम रही, जो एक महीने पहले के 48.73 रुपये से 29 प्रतिशत अधिक है। अधिकतम खुदरा कीमत 75 रुपये और मॉडल कीमत करीब 65 रुपये प्रति किलोग्राम रही। भारतीय चीनी एवं जैव-ऊर्जा विनिर्माता संघ (इस्मा) के अध्यक्ष नीरज शिरगांवकर ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे कई कारण हैं। इनमें कारोबारियों एवं थोक उपभोक्ताओं की ओर से कीमत बढ़ने की उम्मीद में की गई खरीदारी और अनुमान से कम उत्पादन प्रमुख हैं। उन्होंने कहा, ''भारत में चीनी की कोई कमी नहीं है। हमारा उत्पादन और भंडार बुनियादी रूप से संतोषजनक स्थिति में है।'' उन्होंने कहा कि अक्टूबर, 2025-सितंबर, 2026 के मौजूदा चीनी सत्र में एथनॉल उत्पादन में इस्तेमाल हुई चीनी को घटाने के बाद शुद्ध उत्पादन करीब 279 लाख टन रहने का अनुमान है। सत्र की शुरुआत में 50 लाख टन का भंडार था और घरेलू मांग 280-285 लाख टन रहने का अनुमान है। सरकार द्वारा निर्यात पर रोक लगाने से पहले आठ लाख टन चीनी का निर्यात भी किया जा चुका था। शिरगांवकर ने सितंबर के अंत में करीब 35 लाख टन चीनी का भंडार रहने का अनुमान जताया। उन्होंने कहा, ''एथनॉल में इस्तेमाल की गई चीनी को ध्यान में रखने के बाद भी यह सामान्य घरेलू मांग के लिहाज से पर्याप्त सुरक्षित भंडार है।'' उन्होंने कहा कि 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति, कारोबारियों एवं थोक उपभोक्ताओं के लिए भंडारण सीमा, कुछ राज्यों में विशेष पेराई तथा नए सत्र की जल्दी शुरुआत से घरेलू आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में चीनी मिलों से बिक्री की कीमतें घटकर फिलहाल करीब 55-56 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई हैं। शिरगांवकर ने कहा कि हालिया तेजी मौसम संबंधी प्रभाव, त्योहारी मांग, वैश्विक आपूर्ति में कमी और सबसे महत्वपूर्ण रूप से कीमत बढ़ने की उम्मीद में भंडारण के कारण आई है, न कि वास्तविक आपूर्ति की कमी से। मिल स्तर की कीमतें बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा उद्योग को जिम्मेदार ठहराए जाने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उद्योग कृत्रिम कमी पैदा करने और कीमतें बढ़ाने में शामिल नहीं रहा है। हालांकि, उन्होंने इस संभावना से इनकार नहीं किया कि कुछ मिलों ने भंडार रोककर रखा हो सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले को देख रही है। उन्होंने कहा कि सकल चीनी उत्पादन का शुरुआती अनुमान 345 लाख टन था, लेकिन मौसम संबंधी कारणों, गन्ने की कम पैदावार और गन्ने से चीनी निकलने की कम दर के कारण इसे घटाकर करीब 309 लाख टन कर दिया गया। शिरगांवकर ने कीमतों में वृद्धि के लिए एथनॉल उत्पादन में चीनी के इस्तेमाल को जिम्मेदार मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि 2025-26 सत्र में अब तक करीब 29 लाख टन चीनी एथनॉल के लिए इस्तेमाल हुई है और पूरे सत्र में यह करीब 30 लाख टन रहने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि ब्राजील में चीनी उत्पादन के अनुमान में कमी से वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हुई है और अंतरराष्ट्रीय कीमतें जून में करीब 474 डॉलर प्रति टन से बढ़कर अगस्त में करीब 552 डॉलर प्रति टन हो गई हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि कीमतों में तेजी की सबसे बड़ी वजह दाम बढ़ने की उम्मीद में की गई खरीदारी रही है। शिरगांवकर ने कहा, ''कुछ कारोबारियों ने बाजार में आपूर्ति कम होने की भ्रामक धारणा पैदा की, जिसके बाद बड़े थोक खरीदारों ने भी डेढ़-दो महीने की जरूरत का चीनी भंडार पहले ही जमा करना शुरू कर दिया। इससे चीनी बाजार में उपलब्ध रहने के बजाय गोदामों में चली गई और कृत्रिम रूप से कमी जैसी स्थिति पैदा हो गई।'' उन्होंने कारोबारियों के लिए मौजूदा 400 टन की भंडारण सीमा को घटाकर 200 टन करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि इस्मा और राष्ट्रीय सहकारी चीनी कारखाना महासंघ (एनएफसीएसएफ) आगामी चीनी सत्र की पेराई 10-15 दिन पहले शुरू करने पर काम कर रहे हैं। तमिलनाडु और कर्नाटक में विशेष पेराई शुरू हो चुकी है। इससे अक्टूबर में करीब 10 लाख टन चीनी उत्पादन की उम्मीद है, जबकि सामान्य उत्पादन करीब चार लाख टन रहता है। शिरगांवकर ने कहा कि सरकार के कदमों से पिछले कुछ दिनों में कीमतों में नरमी आई है और त्योहारों के मौसम में पर्याप्त आपूर्ति के साथ आगे भी कीमतों में नरमी की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि कच्ची चीनी का आयात आर्थिक रूप से व्यावहारिक है और इसके अक्टूबर तक भारत पहुंचने की उम्मीद है। -
नयी दिल्ली. केंद्र सरकार ने त्योहारों के मौसम से पहले चीनी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बीच थोक उपभोक्ताओं के लिए बृहस्पतिवार को भंडारण सीमा तय कर दी। इसके तहत महीने में 10 टन से अधिक चीनी की खपत करने वाले उपभोक्ता 15 दिन की खपत से अधिक स्टॉक नहीं रख सकेंगे। खाद्य मंत्री प्रल्हाद जोशी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि खाद्य मंत्रालय ने इस संबंध में 'चीनी (थोक उपभोक्ताओं के लिए भंडारण सीमा) आदेश, 2026' को अधिसूचित कर दिया है। इस आदेश के दायरे में कन्फेक्शनरी, शीतल पेय बनाने वाली कंपनियां, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां, मिठाई विक्रेता और अन्य संस्थागत खरीदार आएंगे। खाद्य मंत्रालय का यह आदेश एक सितंबर से लागू होगा और 30 नवंबर तक प्रभावी रहेगा। इससे पहले सरकार ने एक अगस्त से 30 नवंबर तक चीनी कारोबारियों के पास 30 दिन के लिए अधिकतम 4,000 क्विंटल स्टॉक रखने की सीमा तय की थी। चीनी मिलों के स्तर पर बिक्री कीमतों में तेज वृद्धि होने के बीच सरकार ने यह कदम उठाया है। चीनी उद्योग के एक संगठन के मुताबिक, मंगलवार को देशभर में चीनी की औसत मिल-स्तरीय बिक्री कीमत बढ़कर 5,400-5,500 रुपये प्रति क्विंटल हो गई, जो एक साल पहले 3,900 रुपये प्रति क्विंटल थी। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि 18 अगस्त को चीनी का खुदरा दाम सालाना आधार पर करीब 13 प्रतिशत बढ़कर 52.30 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया, जो एक साल पहले 46.34 रुपये प्रति किलोग्राम था। चीनी की मांग आमतौर पर अगस्त से नवंबर महीनों के दौरान बढ़ती है क्योंकि इस दौरान गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे प्रमुख त्योहार मनाए जाते हैं। नए सरकारी आदेश के तहत प्रत्येक मिल द्वारा किसी थोक उपभोक्ता को सीधे या कारोबारियों के जरिये बेची गई चीनी की मासिक मात्रा का सत्यापन किया जाएगा। खपत का निर्धारण विक्रेता और/या खरीदार द्वारा दाखिल माल एवं सेवा कर (जीएसटी) रिटर्न में चीनी के लिए लागू एचएसएन कोड के आधार पर किया जाएगा। आदेश में थोक उपभोक्ता का मतलब ऐसे कन्फेक्शनरी निर्माता, शीतल पेय विनिर्माता, खाद्य प्रसंस्करण इकाई, मिठाई विक्रेता या अन्य संस्थागत खरीदार से है, जिसकी औसत मासिक खपत पिछले एक साल में औसत कम-से-कम 10 टन रही हो। इसमें मौजूदा महीने की खपत शामिल नहीं होगी। हालांकि, केंद्र या राज्य सरकारों, केंद्रशासित प्रदेशों के प्रशासन और स्थानीय निकायों से संबंधित संस्थानों पर यह आदेश लागू नहीं होगा। चीनी का पेराई सत्र 2026-27 एक अक्टूबर से शुरू होने वाला है। उद्योग का अनुमान है कि नया सत्र शुरू होते समय चीनी का शुरुआती स्टॉक 40-42 लाख टन रह सकता है। कुछ शोधकर्ताओं ने इसके 32-35 लाख टन रहने का अनुमान जताया है। दोनों ही अनुमान करीब 50 लाख टन की अनुमानित घरेलू जरूरत से कम हैं।
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नयी दिल्ली. देश की आर्थिक वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष 2026-27 में 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है जो पिछले वित्त वर्ष में 7.6 प्रतिशत थी। इंडिया रेटिंग एंड रिसर्च (इंड-रा) ने पश्चिम एशिया संघर्ष से उत्पन्न अनिश्चितता, ईंधन एवं खाद्य महंगाई, कमजोर मुद्रा तथा कृषि पर अल नीनो के संभावित प्रभाव का हवाला देते हुए मंगलवार को भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर का अनुमान जारी किया। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 6.8 प्रतिशत का जीडीपी वृद्धि अनुमान मई में इंडिया रेटिंग्स के पहले लगाए गए 6.7 प्रतिशत के अनुमान से थोड़ा अधिक है। इस महीने की शुरुआत में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था का हवाला देते हुए वृद्धि दर का अनुमान 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया था। घरेलू रेटिंग एजेंसी ने अब वित्त वर्ष 2026-27 में कच्चे तेल की औसत कीमत 85 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान लगाया है, जबकि मई, 2026 में उसने 95 डॉलर प्रति बैरल का अनुमान लगाया था। एजेंसी को वित्त वर्ष 2026-27 में रुपये-डॉलर विनिमय दर औसतन 93.98 रुपये रहने की उम्मीद है, जो मई, 2026 के 94.28 रुपये के अनुमान से कम है। फिच समूह की अनुषंगी इंड-रा ने विदेशी मुद्रा प्रवासी (बैंक) (एफसीएनआर-बी) और विदेशी वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) के तहत 70 अरब डॉलर के पूंजी प्रवाह का अनुमान लगाया है। इंडिया रेटिंग्स ने बयान में कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 में वित्त वर्ष 2025-26 की तुलना में जीडीपी वृद्धि में कमी पश्चिम एशिया संघर्ष से उत्पन्न अनिश्चितता, कमजोर मुद्रा और कृषि पर अल नीनो के संभावित प्रभाव से ईंधन तथा खाद्य महंगाई बढ़ने की वजह से होगी। एजेंसी ने अप्रैल-जून, जुलाई-सितंबर, अक्टूबर-दिसंबर और जनवरी-मार्च तिमाहियों के लिए जीडीपी वृद्धि दर क्रमशः 6.9, 6.6, 6.7 और 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। वहीं, आरबीआई ने इन तिमाहियों के लिए क्रमशः 7, 6.4, 6.5 और 6.8 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया है। इंड-रा के मुख्य अर्थशास्त्री एवं सार्वजनिक वित्त प्रमुख देवेंद्र पंत ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही में भारत के आयातित कच्चे तेल की औसत कीमत 101.31 डॉलर प्रति बैरल और अप्रैल-जुलाई 2026 में 96.49 डॉलर प्रति बैरल रही। इंड-रा ने चालू वित्त वर्ष में खुदरा महंगाई औसतन 4.9 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में यह दो प्रतिशत थी। चालू खाते का घाटा वित्त वर्ष 2025-26 के 0.6 प्रतिशत से बढ़कर जीडीपी के 1.5 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। पंत ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 में राजकोषीय घाटे का 4.3 प्रतिशत का लक्ष्य एलपीजी और उर्वरक पर सब्सिडी के कारण चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। प्रत्यक्ष कर संग्रह और गैर-कर राजस्व से राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिल सकती है लेकिन अप्रत्यक्ष कर संग्रह चुनौती पैदा कर सकता है।
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नई दिल्ली।कोयला सचिव विक्रम देव दत्त ने शुक्रवार को कहा कि 2030 तक भारत में कोयले की मांग लगभग 1.6 अरब टन तक पहुंचने का अनुमान है। देश अब कोयले की कमी वाली स्थिति से सरप्लस (अतिरिक्त आपूर्ति) की ओर बढ़ चुका है, इसलिए कोयले के व्यापार के लिए ज्यादा कुशल, पारदर्शी और मार्केट-बेस्ड तरीकों की जरूरत बढ़ गई है।
‘ग्लोबल कमोडिटी कॉन्क्लेव 2026’ में दत्त ने बताया कि कोयला एक्सचेंज खरीदारों और विक्रेताओं के लिए एक पारदर्शी बाजार तैयार करेगा। इससे आगे चलकर कोयला डेरिवेटिव्स मार्केट की नींव भी पड़ेगी। उन्होंने कहा, “2030 तक कोयले की मांग बढ़कर 1.6 अरब टन होने का अनुमान है। ऐसे में जब देश सरप्लस स्थिति में आ गया है, तो ज्यादा कुशल और मार्केट-बेस्ड ट्रेडिंग की जरूरत है।”सचिव ने जानकारी दी कि 2024-25 में घरेलू कोयला उत्पादन पहली बार एक अरब टन के पार पहुंच गया और 2025-26 में भी लगातार दूसरे साल इसी स्तर से ऊपर बना रहा। यह उपलब्धि ऊर्जा क्षेत्र में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता और निर्बाध ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करने की क्षमता को दर्शाती है।सरकार मौजूदा ‘वन-टू-मेनी’ (एक से कई) सेल्स मॉडल से आगे बढ़कर ‘मेनी-टू-मेनी’ (कई से कई) ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ना चाहती है। कोयला एक्सचेंज के जरिए खरीदार और विक्रेता एक साथ बोली लगा सकेंगे, जिससे प्रतिस्पर्धी कीमतें तय होंगी और कोयला बिक्री के कई चैनल एक स्टैंडर्ड फ्रेमवर्क के तहत आ जाएंगे। इससे कमर्शियल और कैप्टिव कोयला माइनर्स को बड़े बाजार तक पहुंच मिलेगी। उपभोक्ता कई घरेलू उत्पादकों से कोयला खरीद सकेंगे, जिससे किसी एक सप्लायर पर निर्भरता कम होगी।एक्सचेंज क्लियरिंग और सेटलमेंट के लिए सेंट्रल काउंटर पार्टी के रूप में भी काम करेगा, जिससे दोनों पक्षों के लिए रिस्क मैनेजमेंट बेहतर होगा। साथ ही, अचानक या कम समय की जरूरतों को पूरा करना आसान हो जाएगा।दत्त ने कहा कि आगे चलकर यह प्लेटफॉर्म डेरिवेटिव्स मार्केट के विकास में भी मदद करेगा, जिससे उत्पादक और उपभोक्ता कीमतों से जुड़े जोखिमों को मैनेज कर सकेंगे। आने वाले महीनों में जब कोयला एक्सचेंज का ढांचा काम करना शुरू करेगा, तो सरकार एक्सचेंज, रेगुलेटर, मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर संस्थानों, वित्तीय मध्यस्थों और उद्योग से जुड़े लोगों के साथ मिलकर काम करेगी। इस बड़े सुधार का मकसद ज्यादा पारदर्शिता, तेज प्रोजेक्ट पूरा होना, प्राइवेट सेक्टर की अधिक भागीदारी और एक कुशल व आत्मनिर्भर कोयला इकोसिस्टम तैयार करना है। -
मुंबई. टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा संस का नेतृत्व करने के लिए एन. चंद्रशेखरन के उत्तराधिकारी की तलाश की प्रक्रिया बृहस्पतिवार को शुरू कर दी है। टाटा संस, विविध कारोबार वाले टाटा ट्रस्ट्स समूह की होल्डिंग कंपनी है।
टाटा संस की करीब दो-तिहाई हिस्सेदारी रखने वाले टाटा ट्रस्ट्स ने बयान में कहा, ''सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (एसडीटीटी) चंद्रशेखरन के टाटा संस में फिर से नियुक्ति नहीं लेने के फैसले का सम्मान करता है। हम टाटा संस और टाटा समूह के नेतृत्व में पिछले एक दशक के दौरान उनके योगदान और मार्गदर्शन के लिए आभार जताते हैं।'' चंद्रशेखरन ने अचानक लिए गए फैसले में बुधवार को कहा कि निदेशक मंडल में आम सहमति न होने के कारण वह टाटा संस के चेयरमैन के तौर पर तीसरे कार्यकाल के लिए फिर से नियुक्ति नहीं चाहेंगे। टाटा ट्रस्ट्स ने बृहस्पतिवार को जारी बयान में कहा कि सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के न्यासियों ने जल्द से जल्द चयन समिति गठित करने का प्रस्ताव पारित किया है। यह समिति टाटा संस के निदेशक मंडल के नए चेयरमैन की नियुक्ति के लिए उपयुक्त व्यक्ति के नाम की सिफारिश करेगी। रतन टाटा के निधन के बाद उनके सौतेले भाई नोएल टाटा, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन बने थे। वह सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट का भी नेतृत्व कर रहे हैं। टाटा ट्रस्ट्स ने कहा, ''हम टाटा संस और टाटा समूह के मूल्यों तथा हितों को ध्यान में रखते हुए नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया को सुचारू, समयबद्ध और व्यवस्थित तरीके से पूरा करने में पूरा सहयोग देंगे। -
- सीआईआई के दो दिवसीय समिट में प्राइम स्पॉन्सर के रूप में शामिल हुई कंपनी, ग्रीन स्टील और सस्टेनेबल भविष्य की योजनाओं का प्रदर्शन
रायपुर। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा रायपुर में आयोजित 5वें ग्रीन स्टील एवं माइनिंग समिट में जिंदल स्टील लिमिटेड प्राइम स्पॉन्सर के रूप में सहभागी रहा। दो दिवसीय समिट का शुभारंभ छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव एवं उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ।
समिट के एग्जीबिशन एरिया में जिंदल स्टील द्वारा स्थापित आकर्षक स्टॉल प्रमुख आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। स्टॉल में जिंदल समूह का परिचय, कंपनी की उत्पादन क्षमताओं, वर्तमान परियोजनाओं तथा भविष्य की विस्तार योजनाओं को प्रदर्शित किया गया है। इसके साथ ही ग्रीन स्टील, ग्रीन एनर्जी तथा कार्बन फुटप्रिंट को कम करने की दिशा में कंपनी की भावी योजनाओं और पहलों को भी विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया है। जिंदल स्टील के विभिन्न उत्पादों का प्रदर्शन भी स्टॉल पर किया गया है, जिसे आगंतुकों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों द्वारा सराहा जा रहा है। सेल्स एवं मार्केटिंग टीम के सदस्य आगंतुकों को उत्पादों की विशेषताओं एवं उपयोग से संबंधित जानकारी दे रहे हैं।
जिंदल स्टील के बिजनेस हेड-रायपुर श्री निलेश शाह एवं हेड-कॉरपोरेट अफेयर्स, रायपुर श्री एस.एस. बजाज ने स्टॉल पर उपमुख्यमंत्री, उद्योग मंत्री सहित अन्य गणमान्य अतिथियों का स्वागत किया और कंपनी की वर्तमान परियोजनाओं एवं भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी। अतिथियों ने राज्य के औद्योगिक एवं समग्र विकास में जिंदल स्टील के योगदान की सराहना की। इसके अतिरिक्त, प्रदर्शनी क्षेत्र के बाहर जिंदल स्टील लिमिटेड के मशीनरी डिवीजन, रायपुर के उत्पादों का एक अलग स्टॉल भी लगाया गया है, जो आगंतुकों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
पैनल एवं तकनीकी सत्र में जिंदल स्टील की सक्रिय भागीदारी
समिट के दौरान जिंदल स्टील लिमिटेड की ओर से श्री नवीन अहलावत ने वर्ष 2047 के लिए इस्पात उद्योग जगत की तैयारी विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में सहभागिता की। उन्होंने जिंदल स्टील द्वारा अपनाई जा रही उत्कृष्ट कार्यप्रणालियों, हरित एवं सतत विनिर्माण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों तथा समूह की भविष्य की योजनाओं को साझा किया। उन्होंने भारत के इस्पात क्षेत्र को भविष्य के लिए तैयार करने में तकनीक, नवाचार, ऊर्जा दक्षता और पर्यावरणीय स्थिरता की महत्वपूर्ण भूमिका पर अपने विचार रखे। उनके विचारों और कंपनी की भावी योजनाओं ने उपस्थित उद्योग प्रतिनिधियों एवं श्रोताओं को प्रेरित किया।
वहीं, श्री निलेश शाह, बिजनेस हेड–रायपुर, जिंदल स्टील लिमिटेड ने ‘ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग इन हेवी इक्विपमेंट’ विषय पर आयोजित तकनीकी सत्र में भाग लिया। उन्होंने हरित विनिर्माण, ऊर्जा दक्षता एवं पर्यावरण-अनुकूल औद्योगिक प्रक्रियाओं से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं तथा जिंदल स्टील के अनुभवों को साझा किया। उनके संबोधन को सत्र में उपस्थित उद्योग विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों ने सराहा और इसकी प्रशंसा की।
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नयी दिल्ली. प्याज और अदरक समेत रसोई में इस्तेमाल होने वाली जरूरी वस्तुओं के महंगे होने से जुलाई में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 4.45 प्रतिशत पर पहुंच गई। इसके साथ ही महंगाई लगातार दूसरे महीने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के चार प्रतिशत के संतोषजनक स्तर से ऊपर रही है। सरकार की ओर से बुधवार को जारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गई। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित खुदरा मुद्रास्फीति जून में 4.38 प्रतिशत थी।
जुलाई में दर्ज महंगाई दर जनवरी से लागू 2024 आधार वर्ष वाली नई श्रृंखला में अब तक का उच्चतम स्तर है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा जारी सीपीआई आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में खाद्य मुद्रास्फीति बढ़कर 5.52 प्रतिशत हो गई, जो जून में 5.32 प्रतिशत थी। जुलाई में प्याज की महंगाई दर बढ़कर 22.54 प्रतिशत हो गई, जो जून में 4.73 प्रतिशत थी। अदरक की कीमतों में वृद्धि की दर भी बढ़कर 83.62 प्रतिशत हो गई। लहसुन की महंगाई में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई। दूसरी ओर, आलू, भिंडी, मटर और टमाटर की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।
भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि ऊंची महंगाई मुख्य रूप से ईंधन और खाद्य वस्तुओं की वजह से है तथा अभी तक कीमतों में व्यापक स्तर पर बढ़ोतरी के बहुत कम संकेत हैं। कीमती धातुओं को छोड़कर अन्य वस्तुओं की कीमतों में होने वाली मूल मुद्रास्फीति अब भी कम बनी हुई है।
मल्होत्रा ने कहा था कि पहले लगाए गए अनुमान के अनुसार निकट अवधि में खुदरा महंगाई और बढ़ सकती है तथा वित्त वर्ष 2026-27 की तीसरी तिमाही में इसका स्तर सबसे ऊंचा हो सकता है। इसके बाद इसमें कमी आने की उम्मीद है। यह वृद्धि मुख्य रूप से खाद्य और ईंधन की कीमतों के कारण होगी। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सीपीआई आधारित महंगाई का अनुमान पांच प्रतिशत रखा है, जो जून के अनुमान से मामूली कम है। एनएसओ के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में राष्ट्रीय स्तर पर खुदरा महंगाई दर 4.45 प्रतिशत (अस्थायी) रही। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में यह दर क्रमशः 4.84 प्रतिशत और 3.96 प्रतिशत रही। जुलाई में तेलंगाना में महंगाई सबसे अधिक 6.32 प्रतिशत रही, जबकि मिजोरम में यह सबसे कम 1.84 प्रतिशत दर्ज की गई। क्रिसिल की वरिष्ठ निदेशक एवं मुख्य अर्थशास्त्री दीप्ति देशपांडे ने कहा कि जुलाई में महंगाई के मोर्चे पर कुछ राहत मिली, क्योंकि खाद्य महंगाई में वृद्धि की गति धीमी रही और गैर-खाद्य महंगाई स्थिर रही। उन्होंने कहा, "हालांकि, यह राहत कुछ समय के लिए ही रह सकती है। खाद्य महंगाई में प्रतिकूल आधार प्रभाव, खाद्य तेलों की ऊंची कीमतें, माल एवं सेवा कर (जीएसटी) दरों में कटौती का असर कम होना और खासकर परिवहन लागत में कच्चे माल की लागत का धीरे-धीरे उपभोक्ताओं तक पहुंचना आने वाले महीनों में महंगाई बढ़ा सकता है।" इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च की निदेशक मेघा अरोड़ा ने कहा कि ईंधन की कीमतों का असर उपभोक्ताओं पर स्पष्ट दिखाई दिया। परिवहन की कीमतों में जुलाई में 4.43 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो जून में 4.31 प्रतिशत और मई में 1.75 प्रतिशत थी। उन्होंने कहा कि रेस्तरां और आवास सेवाओं की कीमतों में जुलाई में 7.72 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो जून में 6.91 प्रतिशत और मई में 5.75 प्रतिशत थी। यह पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वाणिज्यिक तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) पर पड़ने वाले असर को दर्शाता है। अरोड़ा ने कहा, "वैश्विक तनाव और अल नीनो मौसम प्रणाली से महंगाई पर ऊपर की ओर दबाव बना हुआ है, हालांकि अगस्त के आंकड़ों में अल नीनो के प्रभाव में कुछ सुधार दिख सकता है। आने वाले सप्ताह में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहने की आशंका है और कच्चे तेल की कीमत 80-85 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के आसपास रह सकती है।" एनएसओ देशभर के 1,407 चयनित शहरी बाजारों, जिनमें ऑनलाइन बाजार भी शामिल हैं, और 1,465 गांवों से वास्तविक समय में कीमतों के आंकड़े एकत्र करता है। - नयी दिल्ली. भारी उद्योग मंत्री एच डी कुमारस्वामी ने सोमवार को उच्च क्षमता, स्वच्छ एवं सक्षम परिवहन प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए फ्लैश चार्जिंग पर आधारित आर्टिकुलेटेड इलेक्ट्रिक बस प्रणाली की शुरुआत से संबंधित प्रस्ताव की समीक्षा बैठक की। इस बैठक में भारी उद्योग मंत्रालय, नीति आयोग, वित्त मंत्रालय, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, बिजली मंत्रालय, आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल हुए। कुमारस्वामी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर पोस्ट में कहा कि प्रस्तावित परिवहन प्रणाली में लगभग 130 यात्रियों की क्षमता वाली 18 मीटर लंबी बाई-आर्टिकुलेटेड इलेक्ट्रिक बसें शामिल हैं, जिन्हें छोटे स्टॉप पर तेज फ्लैश या अवसर आधारित चार्जिंग से संचालित किया जाएगा। बाई-आर्टिकुलेटेड इलेक्ट्रिक बस दो जोड़ वाली, लंबी और अधिक यात्रियों को ले जाने में सक्षम बैटरी-चालित बस होती है। उन्होंने कहा कि फ्लैश चार्चिंग तकनीक से इन बसों की चार्जिंग में लगने वाले समय में कमी आएगी और इनका संचालन निरंतर बनाए रखना संभव होगा। कुमारस्वामी ने कहा, "हमने ऐसे नवाचारपूर्ण समाधानों की संभावनाओं पर चर्चा की, जो भारत में स्वच्छ, दक्ष और भविष्य के लिए तैयार शहरी परिवहन को मजबूत कर सकते हैं।"
- नयी दिल्ली। जिंदल स्टेनलेस महाराष्ट्र में प्रस्तावित ₹40,000 करोड़ रुपये की स्टेनलेस स्टील विनिर्माण परियोजना के लिए जमीन की तलाश कर रही है। कंपनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) तरुण खुल्बे ने कहा कि परियोजना के लिए स्थल का चयन अगली एक-दो तिमाहियों में होने की उम्मीद है। खुल्बे ने जमीन अधिग्रहण से जुड़े सवाल के जवाब में कहा, "इसमें थोड़ा समय लग रहा है, लेकिन हम इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।" उन्होंने बताया कि कंपनी महाराष्ट्र में कई संभावित स्थानों पर जमीन के विकल्प तलाश रही है।कंपनी के अनुसार, प्रस्तावित संयंत्र की कुल उत्पादन क्षमता 40 लाख टन सालाना की होगी और इसे चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जाएगा। परियोजना का पहला चरण अगले चार साल में शुरू होने की उम्मीद है। इस संयंत्र में हाइड्रोजन, परमाणु ऊर्जा, रक्षा, परिवहन, बुनियादी ढांचे और प्रसंस्करण उद्योग जैसे उभरते क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा करने वाले विशेष ग्रेड के स्टेनलेस स्टील का भी उत्पादन किया जाएगा। महाराष्ट्र सरकार ने इस निवेश को समर्थन देने का भरोसा दिया है। इसके तहत संबंधित विभागों से जरूरी अनुमति, पंजीकरण, मंजूरी और वित्तीय प्रोत्साहन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी। जिंदल स्टेनलेस देश की सबसे बड़ी स्टेनलेस स्टील विनिर्माता कंपनी है। वर्तमान में हरियाणा के हिसार और ओडिशा के जाजपुर स्थित संयंत्रों में कंपनी की संयुक्त उत्पादन क्षमता 30 लाख टन सालाना है। महाराष्ट्र की प्रस्तावित परियोजना के चालू होने के बाद कंपनी की सालाना विनिर्माण क्षमता 70 लाख टन हो जाएगी।
- नयी दिल्ली। सोने और चांदी की कीमतों में तेजी अगले सप्ताह भी जारी रहने की उम्मीद है। विश्लेषकों ने बताया कि प्रमुख देशों के महंगाई के आंकड़े और पश्चिम एशिया में तनाव खत्म करने की कोशिशों पर सर्राफा बाजार की नजर रहेगी। उन्होंने आगे बताया कि निवेशक अमेरिका, जर्मनी, जापान और भारत के महंगाई के आंकड़ों पर नजर रखेंगे। इसके अलावा चीन के आगामी आर्थिक आंकड़े भी औद्योगिक धातुओं के लिए काफी अहम साबित होंगे। जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज के जिंस एवं मुद्रा शोध के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रणव मेर ने कहा, ''सोने और चांदी का रुख सकारात्मक दिख रहा है। उम्मीद है कि छोटी अवधि में सोना 1.57 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 2.80 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर की ओर बढ़ सकती है।'' घरेलू बाजार में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर अक्टूबर डिलिवरी वाला सोना इस सप्ताह ₹8,444 या लगभग छह प्रतिशत चढ़कर 1.51 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। सितंबर डिलिवरी वाली चांदी की वायदा कीमत 14,268 रुपये या लगभग सात प्रतिशत की बढ़त के साथ 2.31 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई। एलकेपी सिक्योरिटीज के शोध विश्लेषक जतीन त्रिवेदी ने कहा, ''इस सप्ताह सोने में जोरदार तेजी देखी गई और यह लगभग छह प्रतिशत चढ़ गया। अमेरिका में रोजगार के उम्मीद से कमजोर आंकड़ों ने अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों को फिर से जगा दिया है।'' उन्होंने आगे कहा कि डॉलर के कमजोर होने से भी कीमती धातुओं में नई खरीदारी को बढ़ावा मिला, जिससे सोना हाल के महीनों में अपनी सबसे मजबूत साप्ताहिक बढ़त दर्ज करने में सफल रहा।
- नयी दिल्ली। वाणिज्य मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि भारत ने बिहार से ऑस्ट्रेलिया के लिए 18 टन मिथिला मखाना की खेप भेजी है। दरभंगा जिले के मखाना उत्पादकों से मिली यह खेप बिहार के इस प्रमुख जीआई (भौगोलिक संकेत) उत्पाद की अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति को मजबूत करेगी। साथ ही निर्यात आधारित बाजार पहुंच के माध्यम से किसानों के लिए आय के बेहतर अवसर पैदा करेगी। भारत के कुल मखाना उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी लगभग 85 प्रतिशत है। इस क्षेत्र को और मजबूत करने के लिए, जुलाई 2025 से मखाना के लिए एक अलग एचएस (हार्मोनाइज्ड सिस्टम) कोड लागू किया गया था। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत ने अमेरिका, पश्चिम एशिया और अफ्रीका सहित 20 से अधिक अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों को सात हजार टन से अधिक मखाना और मूल्यवर्धित मखाना उत्पादों का निर्यात किया।
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नयी दिल्ली .राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में बृहस्पतिवार को सोने की कीमतों में लगातार तीसरे सत्र में बढ़त देखी गई। रुपये की कीमत में गिरावट और मजबूत वैश्विक रुख की वजह से सोना 3,800 रुपये महंगा होकर सात सप्ताह के सबसे ऊंचे स्तर 1.53 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना बुधवार के 1,50,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के बंद स्तर से 3,800 रुपये बढ़कर 1,53,800 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी टैक्स सहित) हो गया। इससे पहले सोना 18 जून को 1,53,440 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर के आसपास बंद हुआ था।
चांदी की कीमत भी पिछले सत्र के 2,32,700 रुपये प्रति किलोग्राम से 2,100 रुपये बढ़कर 2,34,800 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स सहित) हो गई। कारोबारियों ने कहा कि रुपये में कमजोरी के कारण घरेलू बाज़ार में आयातित सर्राफा महंगा हो गया, जबकि कमजोर डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में नरमी के बीच विदेशी बाज़ार में सोने की कीमतों में बढ़त ने कीमती धातुओं को और सहारा दिया। बृहस्पतिवार को डॉलर इंडेक्स में मामूली बढ़त और अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में थोड़ी बढ़ोतरी के कारण रुपया, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 16 पैसे गिरकर 95.24 (अस्थायी) पर रहा। लेमन मार्केट्स डेस्क के शोध प्रमुख, गौरव गर्ग ने कहा कि कमज़ोर डॉलर, अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में नरमी और पश्चिम एशिया संघर्ष में कूटनीतिक समाधान की उम्मीदों से कीमती धातु की मांग बढ़ी है, जिससे सोने की कीमतों में लगातार तीसरे सत्र में बढ़त हुई और यह सात सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंच गया। विदेशी बाज़ारों में, हाजिर सोने की कीमत बढ़कर 4,264.24 डॉलर प्रति औंस हो गई, जबकि चांदी की कीमत 61.80 डॉलर प्रति औंस पर रही। मिराए एसेट शेयरखान में जिंस प्रमुख प्रवीण सिंह ने कहा कि ईरान के यह कहने के बाद कि होर्मुज जलडमरूमध्य से समुद्री यातायात के प्रबंधन को लेकर ओमान के साथ समझौते पर सैद्धांतिक रूप से सहमति बन गई है, हाजिर सोने की कीमत बढ़कर 4,260 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गई। -
नयी दिल्ली. सरकारी स्वामित्व वाली कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह ओडिशा के गदाधरपुर लौह अयस्क ब्लॉक के लिए तरजीही बोलीदाता बनकर उभरी है। इसके साथ ही देश की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी ने लौह अयस्क खनन क्षेत्र में भी कदम रख दिया है। सीआईएल मुख्य रूप से कोयले के खनन एवं उत्पादन में सक्रिय है और देश में कोयले के घरेलू उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी 80 प्रतिशत से अधिक है। कोल इंडिया का अब लौह अयस्क खनन में उतरने का कदम दीर्घकालिक ऊर्जा बदलाव के बीच कंपनी की व्यापक विविधीकरण योजना का संकेत माना जा रहा है। कंपनी ने शेयर बाजार को दी सूचना में कहा कि उसे यह खनन पट्टा प्रेषित खनिज के मूल्य के 114.05 प्रतिशत नीलामी प्रीमियम पर प्रदान किया गया है। सीआईएल को यह ब्लॉक ओडिशा सरकार ने आवंटित किया है। गदाधरपुर ब्लॉक जी-3 अन्वेषण चरण में है, जहां कुल अयस्क संसाधन लगभग 28.8 करोड़ टन आंका गया है। जी-3 चरण वह प्रारंभिक अन्वेषण में सर्वेक्षण के आधार पर चिन्हित क्षेत्रों में विस्तृत नमूने, मानचित्रण और खुदाई के जरिये खनिज भंडार का आकलन किया जाता है। नीलामी की शर्तों के मुताबिक, कोल इंडिया को सफल बोलीदाता घोषित होने के लिए एक वर्ष में औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी, जबकि खनन पट्टा समझौते को अंजाम देने के लिए तीन वर्ष तक का समय मिलेगा। लौह अयस्क खनन में सीआईएल का प्रवेश सरकार की उस रणनीति के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य इस्पात क्षेत्र के लिए कच्चे माल की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना और महत्वपूर्ण खनिजों के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है। चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कच्चा इस्पात उत्पादक भारत वर्ष 2030 तक 30 करोड़ टन इस्पात उत्पादन क्षमता का लक्ष्य लेकर चल रहा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए लौह अयस्क उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि जरूरी होगी। सीआईएल ने चालू वित्त वर्ष में 81.5 करोड़ टन कोयला उत्पादन और 85 करोड़ टन आपूर्ति का लक्ष्य रखा है। जुलाई में कंपनी का उत्पादन 8.4 प्रतिशत बढ़कर 5.03 करोड़ टन रहा। वित्त वर्ष 2026-27 के पहले चार महीनों (अप्रैल-जुलाई) में कंपनी की कुल कोयला आपूर्ति 6.9 प्रतिशत बढ़कर 26.20 करोड़ टन हो गई, जो इस अवधि का अब तक का सर्वाधिक स्तर है।

















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