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नयी दिल्ली. केंद्र सरकार ने घरेलू रसोई गैस सिलेंडर (एलपीजी) की कीमत में 29 रुपये की बढ़ोतरी के एक दिन बाद अपने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों में तेज उछाल के बावजूद भारत में परिवारों को रसोई गैस दुनिया के अन्य देशों की तुलना में सस्ती कीमत पर मिल रही है। दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत अब 942 हो गई है, जो पहले 913 रुपये थी। वहीं प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) के लाभार्थियों को साल में चार बार 300 रुपये की सब्सिडी मिलने के बाद सिलेंडर ₹642 में उपलब्ध होगा। हालांकि, पिछले साल यह सब्सिडी साल में नौ बार देने की घोषणा की गई थी। इससे पहले सात मार्च को घरेलू रसोई गैस के दाम 60 रुपये प्रति सिलेंडर बढ़ाए गए थे। इस तरह से 14.2 किलोग्राम के रसोई गैस सिलेंडर के दाम कुल मिलाकर 89 रुपये बढ़ चुके हैं। ताजा संशोधन से पहले सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों को प्रत्येक सिलेंडर की बिक्री पर 703 रुपये का नुकसान हो रह था। सरकार ने बताया कि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित होने के कारण एलपीजी का वैश्विक बेंचमार्क 'सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस' फरवरी के बाद लगभग 46 प्रतिशत बढ़ गया है। इसके चलते घरेलू एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति की वास्तविक लागत 1,600 रुपये से अधिक हो चुकी है।
सरकार का कहना है कि घरेलू उपभोक्ता केवल 942 का भुगतान कर रहे हैं, जबकि शेष लागत का बड़ा हिस्सा सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम विपणन कंपनियां और सरकार वहन कर रही हैं। सरकार के मुताबिक, घरेलू एलपीजी पर नुकसान पिछले वित्त वर्ष में बढ़कर लगभग₹60,000 करोड़ हो गया, जो एक वर्ष पहले 41,338 करोड़ थी। इस नुकसान की आंशिक भरपाई के लिए केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम कंपनियों को 30,000 करोड़ की क्षतिपूर्ति देने को मंजूरी दी है। सरकार ने यह भी कहा कि संकट के दौरान देश में एलपीजी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए घरेलू उत्पादन में 60 प्रतिशत से अधिक वृद्धि की गई और अमेरिका, कनाडा तथा अल्जीरिया जैसे देशों से अतिरिक्त आयात की व्यवस्था की गई। सरकार का दावा है कि भारत में घरेलू एलपीजी की कीमतें पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका समेत कई देशों और अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया तथा कनाडा जैसे विकसित देशों की तुलना में अब भी कम हैं। सरकार के अनुसार, कीमतों में यह संशोधन उपभोक्ताओं को वैश्विक कीमतों के पूरे असर से बचाने और देशभर में रसोई गैस की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया गया है।
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नासिक. महाराष्ट्र के किसानों ने केंद्र सरकार द्वारा प्याज खरीद के मानकों में दी गई ढील का स्वागत किया है, लेकिन उनका कहना है कि इससे उन्हें बहुत अधिक राहत नहीं मिलेगी। किसानों ने सरकार से प्याज के लिए 3,000 रुपये प्रति क्विंटल का न्यूनतम खरीद मूल्य तय करने की मांग की है। किसानों का कहना है कि भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नेफेड) और भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ (एनसीसीएफ) द्वारा लगभग 1,580 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की जा रही खरीद किसानों की लागत निकालने के लिए भी पर्याप्त नहीं है। केंद्र सरकार ने प्याज खरीद के लिए आकार और गुणवत्ता संबंधी मानकों में ढील दी है। इसके तहत स्वीकार्य आकार सीमा को 45-65 मिमी. से बढ़ाकर 35-70. मिमी कर दिया गया है। साथ ही रंग, छिलके की खामियों और हल्की धूप से हुई क्षति जैसी गुणवत्ता संबंधी शर्तों को भी आसान बनाया गया है। हालांकि, किसान नेताओं का कहना है कि मुख्य समस्या खरीद मानकों की नहीं, बल्कि कम कीमतों की है।
महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ के नासिक जिला अध्यक्ष जयदीप भदाने ने कहा कि नियमों में ढील दी गई है, लेकिन किसान अब भी घाटे में हैं। असली सवाल यह है कि प्याज के दाम कब बढ़ेंगे। उन्होंने बताया कि पहले की ग्रेडिंग व्यवस्था में यदि कोई किसान 30 क्विंटल प्याज खरीद केंद्र पर लाता था, तो उसमें से केवल लगभग 25 क्विंटल ही स्वीकार किए जाते थे और शेष प्याज उसे कम कीमत पर बाजार में बेचना पड़ता था। उनका कहना है कि नए नियमों का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब उनका प्रभावी ढंग से पालन किया जाएगा। भदाने ने दावा किया कि वर्तमान खरीद दर बाजार की अपेक्षाओं से कम है और खेती की लागत को भी पूरा नहीं करती। उन्होंने प्याज के लिए 3,000 रुपये प्रति क्विंटल का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने की मांग की। संघ के अध्यक्ष भरत दिघोले ने कहा कि प्याज उत्पादन की औसत लागत लगभग 1,800 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि किसानों को इससे कम कीमत पर फसल बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उनके अनुसार, उत्पादन लागत से कम दाम मिलने से किसान आर्थिक संकट में फंस रहे हैं। किसान संगठन ने खरीद प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता लाने की भी मांग की है। उनका कहना है कि नेफेड और एनसीसीएफ को प्रतिदिन उन किसानों की सूची सार्वजनिक करनी चाहिए, जिनसे प्याज खरीदा गया है। संगठन ने यह भी मांग की कि खरीद प्रक्रिया कृषि उपज मंडी समितियों (एपीएमसी) के माध्यम से कराई जाए, ताकि अनियमितताओं पर रोक लगे और किसानों को प्रतिस्पर्धी मूल्य मिल सके। इसके अलावा, किसानों ने पिछले चार-पांच महीनों के दौरान कम कीमत पर प्याज बेचने वाले किसानों को 1,500 रुपये प्रति क्विंटल की सब्सिडी देने की मांग भी की है। उनका दावा है कि लाखों किसानों को गिरती कीमतों के कारण भारी नुकसान उठाना पड़ा है। उधर, महाराष्ट्र सरकार ने नेफेड और एनसीसीएफ द्वारा की जाने वाली प्याज खरीद पर एपीएमसी शुल्क माफ कर दिया है, ताकि लेन-देन की लागत कम हो और खरीद प्रक्रिया तेज हो सके। हालांकि, किसान नेताओं का कहना है कि शुल्क माफी का लाभ मुख्य रूप से खरीद एजेंसियों को मिलेगा।
किसान संगठन ने चेतावनी दी कि केवल खरीद मानकों में ढील देने से प्याज उत्पादकों की समस्या का समाधान नहीं होगा। इसके लिए किसानों को लाभकारी मूल्य, पारदर्शी खरीद व्यवस्था, एपीएमसी के माध्यम से खरीद और पिछले नुकसान की भरपाई सुनिश्चित करनी होगी। -
नयी दिल्ली. भारत ने झारखंड से ब्रिटेन को 1.5 टन ताजा 'आम्रपाली' आम का निर्यात किया है। वाणिज्य मंत्रालय ने रविवार को यह जानकारी दी। ये आम झारखंड के सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड स्थित बेउरा फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड से प्राप्त किए गए हैं। यह एक पूर्ण महिला किसान उत्पादक कंपनी (एफपीसी) है, जो स्थानीय महिला किसानों को संगठित कर कृषि उत्पादन और विपणन का कार्य करती है। आमों की यह खेप चार जून को कोलकाता से ब्रिटेन के लिए रवाना की गई। यह निर्यात झारखंड के कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने और महिला किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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कोलकाता. पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के प्रसिद्ध हिमसागर आम के निर्यात पर इस वर्ष मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों ने संकट खड़ा कर दिया है। लगातार बारिश और उसके बाद बढ़े तापमान के कारण आमों पर काले धब्बे उभर आए हैं, जिससे बड़ी मात्रा में इस फल का निर्यात करना संभव नहीं है।
निर्यातकों के अनुसार, ये काले धब्बे रोग संक्रमण के शुरुआती संकेत हैं। आमों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए अपनाई जाने वाली बैगिंग तकनीक भी इस बार मौसम की मार से प्रभावित हुई। बैगिंग के दौरान हुई लगातार वर्षा और बाद में बढ़ी गर्मी ने फलों को नुकसान पहुंचाया। मालदा के प्रमुख निर्यातक सृष्टि फूड प्रोडक्ट्स के सह-संस्थापक प्रसून चितलांगिया ने बताया कि अमेरिका भेजी जाने वाली इस सीजन की पहली खेप को रोकना पड़ा है, क्योंकि धब्बेदार फलों को विदेशी आयातक स्वीकार नहीं करते। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में निर्यात ऑर्डर होने के बावजूद गुणवत्तापूर्ण फल उपलब्ध कराने में कठिनाई आ रही है। हालांकि, मालदा मैंगो मर्चेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष उज्ज्ल साहा का मानना है कि स्थिति पूरी तरह निराशाजनक नहीं है। उनके अनुसार, केवल लगभग 15 प्रतिशत बैग किए गए फलों में रोग के लक्षण पाए गए हैं, जबकि लाखों अन्य आम अभी भी निर्यात योग्य हैं और विदेशी बाजारों में हिमसागर आम की मांग मजबूत बनी हुई है। इस वर्ष मालदा से आम और लीची के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद थी। राज्य बागवानी विभाग और निर्यातक किसानों को बेहतर कृषि पद्धतियों, वैज्ञानिक तुड़ाई और निर्यात मानकों के अनुरूप उत्पादन के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। इसके बावजूद रोग की समस्या ने निर्यातकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। फिर भी निर्यातक प्रभावित न होने वाले बागानों से उच्च गुणवत्ता वाले आमों की पहचान कर विदेशी बाजारों में आपूर्ति बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं। उनका मानना है कि मालदा के प्रीमियम आमों की अंतरराष्ट्रीय मांग को देखते हुए निर्यात लक्ष्य का एक बड़ा हिस्सा अब भी हासिल किया जा सकता है।
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नयी दिल्ली. इस सप्ताह सोने की कीमतें पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और प्रमुख वैश्विक आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर रहेंगी। विश्लेषकों ने यह संभावना जताई है। निवेशक चीन और अमेरिका के व्यापार एवं मुद्रास्फीति के आंकड़ों, मध्य माह में आने वाले अमेरिका के उपभोक्ता धारणा (कंज्यूमर सेंटिमेंट) के आंकड़ों तथा भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति (सीपीआई) पर नजर रखेंगे। विश्लेषकों के अनुसार, इसके साथ ही यूरोपीय केंद्रीय बैंक के मौद्रिक नीति निर्णय पर भी बाजार की नजर रहेगी, क्योंकि इससे सर्राफा और अन्य जिंस बाजारों पर असर पड़ सकता है। जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के ईबीजी-जिंस एवं मुद्रा शोध के उपाध्यक्ष प्रणव मेर ने कहा, ''सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं के लिए गति अब भी सुधारात्मक प्रतीत होती हैं।'' घरेलू जिंस बाजार में सप्ताह का अंत गिरावट के साथ हुआ, जिसमें अगस्त माह में आपूर्ति के लिए मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने का वायदा भाव 5,317 रुपये या 3.3 प्रतिशत टूटकर 1.55 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। जुलाई आपूर्ति वाली चांदी 18,461 रुपये यानी सात प्रतिशत गिरकर 2.48 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। एलकेपी सिक्योरिटीज के उपाध्यक्ष शोध विश्लेषक जिंस एवं मुद्रा जतिन त्रिवेदी ने कहा, ''तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते निवेशकों का ध्यान सुरक्षित निवेश विकल्पों से हट गया, जिससे पिछले सप्ताह सोने का प्रदर्शन कमजोर रहा।'' उन्होंने कहा कि रुपये में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूती ने भी कीमती धातुओं पर अतिरिक्त दबाव डाला, जिससे घरेलू बाजार अंतरराष्ट्रीय बाजार की तुलना में कमजोर रहा। वैश्विक बाजारों में सोने का वायदा भाव 227.7 डॉलर या पांच प्रतिशत गिरकर 4,365 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ, जबकि चांदी 6.77 डॉलर यानी करीब नौ प्रतिशत टूटकर 69.10 डॉलर प्रति औंस पर आ गई। मेर ने कहा कि विदेशी व्यापार में सोने की कीमतों पर दबाव पड़ा और सप्ताह के अंत में इसमें लगभग पांच प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि औद्योगिक धातुओं में तेजी से आई गिरावट के कारण चांदी की कीमतों में भी भारी कमी आई। विश्लेषकों के अनुसार, रूस-यूक्रेन संघर्ष में संभावित समाधान के संकेतों ने भी सर्राफा की मांग को कम किया है। त्रिवेदी ने कहा कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें 4,400–4,500 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे बनी रहती हैं, तो कीमती धातुएं दबाव में रह सकती हैं। साथ ही मजबूत रुपया, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और सतर्क निवेश धारणा किसी भी तेज सुधार को सीमित कर सकते हैं।
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नई दिल्ली। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने नई दिल्ली में हीरो मोटोकॉर्प की पहली फ्लेक्स-फ्यूल मोटरसाइकिलों के लॉन्च कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस अवसर पर नितिन गडकरी ने कंपनी की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ, आत्मनिर्भर और टिकाऊ परिवहन के विजन के अनुरूप है।
उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े दोपहिया वाहन बाजार के रूप में भारत फ्लेक्स-फ्यूल मोबिलिटी को अपनाने में अग्रणी भूमिका निभा सकता है। उनके अनुसार, इस तकनीक के इस्तेमाल से कार्बन मोनोऑक्साइड उत्सर्जन में 77 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है।गडकरी ने बताया कि फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देने से पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम होगी और देश को लगभग 1.44 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हो सकती है।उन्होंने कहा कि यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगी, जैव ईंधन (बायोफ्यूल) की मांग बढ़ाएगी, किसानों की आय में सहयोग करेगी और “वेस्ट टू वेल्थ” यानी कचरे से संपदा बनाने की अवधारणा को भी बढ़ावा देगी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे और देश के आर्थिक विकास को गति मिलेगी।उन्होंने कहा कि हीरो मोटोकॉर्प की फ्लेक्स-फ्यूल मोटरसाइकिलों का लॉन्च ऑटोमोबाइल क्षेत्र, पर्यावरण संरक्षण और भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह सभी संबंधित पक्षों के सहयोग और समन्वित प्रयासों का परिणाम है। -
नई दिल्ली। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरुवार को नई दिल्ली में मारुति सुजुकी द्वारा निर्मित भारत के पहले फ्लेक्स-फ्यूल यात्री वाहन का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन नबीन भी उपस्थित रहे। फ्लेक्स-फ्यूल वाहन ई20 से लेकर ई100 तक विभिन्न इथेनॉल-पेट्रोल मिश्रणों पर चल सकते हैं। हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि यात्री वाहन क्षेत्र में फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक का प्रवेश केवल एक नए वाहन का लॉन्च नहीं, बल्कि देश के ऊर्जा परिवर्तन के एक नए अध्याय की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि भारत में लगभग 37 लाख यात्री वाहन हैं और इस क्षेत्र में फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाने से इथेनॉल आधारित परिवहन को नई गति मिलेगी।
हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि सैन्य संघर्ष शुरू होने से पहले भारत के एलपीजी आयात का लगभग 60% हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आता था। इसके बावजूद भारत ने 1.4 अरब की आबादी वाले देश में पेट्रोलियम उत्पादों की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित की। उन्होंने कहा कि देश में कहीं भी तेल की कमी नहीं हुई और लोग सामान्य रूप से सड़क व हवाई यात्रा करते रहे। उन्होंने बताया कि गलत सूचना फैलाकर कृत्रिम कमी पैदा करने की कोशिशें भी हुईं, लेकिन समय पर नीतिगत हस्तक्षेप और प्रभावी प्रबंधन से स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रही।केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ऊर्जा रणनीति के तीन प्रमुख स्तंभों- उपलब्धता, सामर्थ्य और स्थिरता- के बीच संतुलन बनाए रखने की सराहना की। उन्होंने कहा कि वैश्विक अस्थिरता के बावजूद भारत ने कच्चे तेल, एलपीजी और प्राकृतिक गैस की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखी। देश ने एलपीजी उत्पादन क्षमता को संकट से पहले के स्तर की तुलना में काफी बढ़ाया है और प्राकृतिक गैस व सीएनजी की आपूर्ति विस्तार पर भी कार्य किया है। उन्होंने कहा कि वैश्विक संकटों के बावजूद भारत में ईंधन की कीमतों में दुनिया के कई देशों की तुलना में कम वृद्धि दर्ज की गई है। साथ ही उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में 10 रुपए प्रति लीटर की कटौती का भी उल्लेख किया।सतत विकास पर बोलते हुए हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत का इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम ऊर्जा परिवर्तन की सबसे सफल पहलों में शामिल हो चुका है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2013-14 में इथेनॉल मिश्रण 1.5% से भी कम था, जो 2025-26 में बढ़कर 20% तक पहुंच गया है। यह लक्ष्य निर्धारित समय से पांच वर्ष पहले हासिल कर लिया गया। इथेनॉल खरीद 38 करोड़ लीटर से बढ़कर 1,040 करोड़ लीटर से अधिक हो गई है, जबकि उत्पादन क्षमता 421 करोड़ लीटर से बढ़कर लगभग 2,000 करोड़ लीटर तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि इससे कच्चे तेल के आयात में कमी, विदेशी मुद्रा की बचत, उत्सर्जन में कमी और किसानों की आय में वृद्धि हुई है।हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि यदि नए दोपहिया और चारपहिया वाहनों की बिक्री का 50% हिस्सा फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों में परिवर्तित हो जाता है, तो इससे 311.8 करोड़ लीटर इथेनॉल की अतिरिक्त मांग पैदा होगी। इससे किसानों को 12,403 करोड़ रुपए की अतिरिक्त आय प्राप्त हो सकती है। साथ ही 66.4 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी भी आएगी। उन्होंने बताया कि नीति आयोग ने इथेनॉल आधारित फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को शून्य-उत्सर्जन वाहन की श्रेणी में रखा है। ई85 जैसे उच्च इथेनॉल मिश्रण पर चलने वाले वाहनों से कण पदार्थ (पीएम) का उत्सर्जन लगभग शून्य होता है, जिससे वायु प्रदूषण की चुनौती से निपटने में मदद मिल सकती है।केंद्रीय मंत्री ने सरकार के फ्लेक्स-फ्यूल रोडमैप की जानकारी देते हुए कहा कि बीआईएस मानकों के अनुरूप ई85 को फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए एकल ईंधन मानक के रूप में निर्धारित करने का प्रस्ताव है। योजना के तहत शुरुआती चरण में दिल्ली-एनसीआर और मुंबई-पुणे-नागपुर कॉरिडोर में 50 से 100 फ्लेक्स-फ्यूल अनुकूल ईंधन आउटलेट स्थापित किए जाएंगे। दिसंबर 2026 तक इनकी संख्या बढ़ाकर लगभग 500 और वर्ष 2027 के अंत तक प्रमुख शहरों में लगभग 5,000 आउटलेट तक पहुंचाने का लक्ष्य है। सरकार मूल्य सहायता, सड़क कर में छूट, उपभोक्ता जागरूकता कार्यक्रम और भंडारण व वितरण अवसंरचना के विकास जैसे उपायों पर भी काम कर रही है।हाल ही में हीरो मोटोकॉर्प द्वारा फ्लेक्स-फ्यूल मोटरसाइकिलों और अब मारुति सुजुकी द्वारा फ्लेक्स-फ्यूल यात्री वाहन लॉन्च किए जाने का उल्लेख करते हुए हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत स्वच्छ गतिशीलता के एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत का ऊर्जा परिवर्तन देश में ही विकसित तकनीकों, भारतीय किसानों के सहयोग और भारतीय उपभोक्ताओं की भागीदारी से आगे बढ़ेगा। उन्होंने वाहन निर्माताओं से सभी श्रेणियों में फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल तेजी से लाने और तेल विपणन कंपनियों से देशभर में ई85 की उपलब्धता बढ़ाने का आग्रह किया। -
नयी दिल्ली. सार्वजनिक क्षेत्र खनन कंपनी एनएमडीसी ने बुधवार को लौह अयस्क की कीमतें 200 रुपये प्रति टन और फाइन की कीमतें 150 रुपये प्रति टन बढ़ा दीं। यह बढ़ोतरी तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। मौजूदा तिमाही में यह तीसरी बढ़ोतरी है। देश की सबसे बड़ी लौह अयस्क खनन कंपनी एनएमडीसी ने एक नियामकीय सूचना में बताया कि उसने बैला लंप अयस्क की कीमत 5,700 रुपये प्रति टन और फाइन की कीमत 4,850 रुपये प्रति टन तय की है। लंप अयस्क या उच्च-श्रेणी के लौह अयस्क में 65.5 प्रतिशत लौह तत्व होता है, जबकि फाइन निम्न-श्रेणी के अयस्क होते हैं जिनमें 64 प्रतिशत या उससे कम लौह तत्व होता है। तीन जून से प्रभावी नई कीमतों में रॉयल्टी, जिला खनिज कोष (डीएमएफ), राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण ट्रस्ट (डीएमईटी) शामिल नहीं हैं; साथ ही इनमें उपकर, वन परमिट शुल्क, पारगमन शुल्क, जीएसटी, पर्यावरण उपकर और अन्य कर भी शामिल नहीं हैं। लौह अयस्क और कोकिंग कोयला दो ऐसे बुनियादी कच्चे माल हैं जिनका उपयोग ब्लास्ट फर्नेस विधि से इस्पात के निर्माण में किया जाता है। इनकी कीमतों में होने वाले किसी भी बदलाव का सीधा असर इस्पात की दरों पर पड़ता है। इस्पात का व्यापक उपयोग निर्माण, बुनियादी ढांचा, वाहन और रेलवे जैसे क्षेत्रों में किया जाता है। एनएमडीसी द्वारा की गई यह नवीनतम मूल्य समीक्षा, मौजूदा तिमाही के दौरान लौह अयस्क और फाइन की कीमतों में की गई तीसरी बढ़ोतरी है। छह मई को घोषित पिछली मूल्य समीक्षा में एनएमडीसी ने बैला लंप की दर 5,500 रुपये प्रति टन और फाइन की दर 4,700 रुपये प्रति टन तय की थी। पांच अप्रैल को कंपनी ने लौह अयस्क की कीमतें 5,300 रुपये प्रति टन और फाइन की कीमतें 4,500 रुपये प्रति टन तय की थीं। हैदराबाद स्थित एनएमडीसी (जिसे पहले नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के नाम से जाना जाता था) इस्पात मंत्रालय के अधीन कार्य करती है और भारत के कुल लौह अयस्क उत्पादन में इसका योगदान लगभग 20 प्रतिशत है।
- नयी दिल्ली. पेट्रोल एवं डीजल की कीमतों में वृद्धि से अर्थव्यवस्था पर मुद्रास्फीति-जनित दबाव बढ़ने की आशंका है, जिससे आने वाले महीनों में परिवहन एवं विनिर्माण लागत बढ़ सकती है और आम उपभोग की वस्तुएं महंगी हो सकती हैं। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने मंगलवार को जारी रिपोर्ट में यह अनुमान जताया। रिपोर्ट कहती है कि 15 मई के बाद से पेट्रोल एवं डीजल की कीमतों में करीब 7.5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो चुकी है और अगर कच्चे तेल के दाम ऊंचे स्तर पर बने रहते हैं तो यह बढ़ोतरी निकट भविष्य में 10 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकती है। क्रिसिल ने कहा, "इसका असर पूरी अर्थव्यवस्था में ढुलाई लागत में बढ़ोतरी के जरिये दिखेगा, जिससे खाने-पीने की चीजों और अन्य वस्तुओं की महंगाई दोनों बढ़ेंगी।" रिपोर्ट के मुताबिक, ईंधन कीमतों में वृद्धि का सीधा असर महंगाई पर पड़ेगा। ईंधन कीमतों में 7.5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी से खुदरा मुद्रास्फीति करीब 0.36 प्रतिशत बढ़ सकती है। अगर ईंधन कीमतें 10 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ जाती हैं तो खुदरा महंगाई में करीब 0.48 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है। रिपोर्ट में कहा गया कि ईंधन के दाम बढ़ने का सर्वाधिक प्रभाव सड़क परिवहन पर पड़ेगा क्योंकि इसकी लागत का लगभग 42 प्रतिशत हिस्सा ईंधन पर निर्भर है। इससे माल ढुलाई महंगी हो जाएगी और इसका असर रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर पड़ेगा। देश में करीब 71 प्रतिशत माल ढुलाई सड़क मार्ग के जरिये ही होती है। क्रिसिल के मुताबिक, ढुलाई लागत बढ़ने से दूध, फल, दालें, चाय-कॉफी, मसाले, अंडे, मांस और मछली जैसे खाद्य उत्पादों की कीमतों में तेजी आ सकती है क्योंकि ये बड़े पैमाने पर परिवहन नेटवर्क पर निर्भर हैं। रिपोर्ट कहती है कि कपड़ा, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, लकड़ी उत्पाद, सीमेंट और सिरेमिक जैसे क्षेत्रों में भी लागत बढ़ेगी। रसायन, कोयला और धातु क्षेत्र भी महंगाई की चपेट में आएंगे। ऐसी स्थिति में कंपनियां लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर डाल सकती हैं या उत्पाद की मात्रा में कटौती कर सकती हैं। सितंबर, 2025 में जीएसटी दरों में की गई कटौती से कुछ राहत मिल सकती है लेकिन ऊंची ऊर्जा लागत के असर को यह पूरी तरह संतुलित नहीं कर पाएगी। रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष के पहले दो महीनों में कच्चे तेल की औसत कीमत 112 डॉलर प्रति बैरल रही है, जो पूरे वर्ष के अनुमान 95 डॉलर प्रति बैरल से अधिक है। हालांकि, सकल मुद्रास्फीति अभी भारतीय रिजर्व बैंक के चार प्रतिशत लक्ष्य से नीचे है, लेकिन आगे चलकर इसके बढ़ने का अनुमान है। फिर भी यह रिजर्व बैंक के दो से छह प्रतिशत के दायरे में रह सकती है। रिजर्व बैंक महंगाई के रुझान, खासकर घरेलू अपेक्षाओं और व्यापक मूल्य वृद्धि के जोखिम पर नजर बनाए रखेगा। इसके साथ ही रिपोर्ट कहती है कि रिजर्व बैंक की नजर कमजोर मानसून और अल नीनो जैसी मौसम संबंधी स्थितियों पर भी रहेगी जिनकी वजह से खाद्य महंगाई बढ़ने की आशंका है।
- नयी दिल्ली. सरकार ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री की अध्यक्षता वाले व्यापार बोर्ड (बीओटी) में 29 गैर-सरकारी सदस्यों को मनोनीत किया है। इनमें एसबीआई के चेयरमैन सीएस शेट्टी, एप्पल इंडिया के प्रबंध निदेशक (एमडी) विराट भाटिया और महिंद्रा एंड महिंद्रा के एमडी अनीश शाह शामिल हैं। राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्रों के वरिष्ठ अधिकारियों सहित इस बोर्ड के सदस्य विनिर्माण और निर्यात को बढ़ावा देने के तरीकों पर चर्चा करने के लिए एक मंच प्रदान करते हैं। वाणिज्य मंत्रालय की मंगलवार को जारी एक अधिसूचना के अनुसार, 2019 में सरकार ने निर्यात और आयात को बढ़ावा देने के लिए सभी पक्षों के साथ परामर्श प्रक्रिया में अधिक सामंजस्य लाने के लिए व्यापार विकास एवं संवर्धन परिषद का व्यापार बोर्ड में विलय कर दिया था। नए गैर-सरकारी सदस्यों में आईएमसी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की अध्यक्ष सुनीता रामनाथकर, अखिल भारतीय चावल निर्यातक संघ के अध्यक्ष सतीश गोयल, ऑटोमोबाइल कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विक्रमपति सिंघानिया, सोरिन इन्वेस्टमेंट्स के संस्थापक संजय नैयर, एक्सेल के भागीदार प्रशांत प्रकाश, डावर ग्रुप के चेयरमैन एवं संस्थापक पूरन डावर, ऑलकार्गो ग्रुप के संस्थापक और कार्यकारी चेयरमैन शशि किरण शामिल हैं। अन्य सदस्यों में कॉन्टिनेंटल कैरियर्स के समूह प्रबंध निदेशक वैभव वोहरा, आर्सेलरमित्तल निप्पॉन स्टील के सीईओ दिलीप ओम्मन, सोमानी इम्प्रेसा ग्रुप के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक संदीप सोमानी, सियाम के अध्यक्ष और टाटा मोटर्स के प्रबंध निदेशक और सीईओ शैलेश चंद्रा शामिल हैं। विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने एक अधिसूचना में बताया कि इसमें इन-स्पेस के चेयरमैन पवन गोयनका, ईवाई इंडिया के चेयरमैन और सीईओ राजीव मेमानी और यशोदा ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स की प्रबंध निदेशक उपासना अरोड़ा भी शामिल हैं। ये उद्योगपति जिला निर्यात केंद्र कार्यक्रमों के कार्यान्वयन में सूत्रधार के रूप में कार्य करेंगे। इन कार्यक्रमों में जागरूकता कार्यशालाएं, चिन्हित उत्पादों की पहचान और प्रचार शामिल हैं। वे राज्य सरकारों को राष्ट्रीय विदेश व्यापार नीति के अनुरूप निर्यात रणनीतियों को विकसित करने और आगे बढ़ाने में सहायता करेंगे। वे निर्यात बढ़ाने के लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक योजनाओं की तैयारी और कार्यान्वयन को नीतिगत उपायों पर सरकार को सलाह भी देंगे, विभिन्न क्षेत्रों के निर्यात प्रदर्शन की समीक्षा करेंगे, बाधाओं की पहचान करेंगे और निर्यात आय को अधिकतम करने के लिए उद्योग-विशिष्ट उपायों का सुझाव देंगे।
- नयी दिल्ली. सरकार ने मंगलवार को कहा कि रिजर्व बैंक नामित एजेंसियों, डीजीएफटी अनुमोदित संस्थाओं और इंडिया इंटरनेशनल बुलियन एक्सचेंज के माध्यम से पात्र आभूषण विक्रेताओं के जरिये चांदी के आयात को केवल वैध आयात मंजूरी के तहत ही अनुमति दी जाएगी। इस कदम ने चांदी के आयात मानदंडों को और सख्त कर दिया है।आयात मंजूरी विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) द्वारा जारी की जाएगी।पिछले महीने सरकार ने पश्चिम एशिया संकट के बीच गैर-जरूरी आयात पर अंकुश लगाने के लिए सोने और चांदी पर आयात शुल्क बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया था, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ा है। विदेश व्यापार महानिदेशालय की एक अधिसूचना में कहा गया है कि अधिकृत एजेंसियों को चांदी के आयात को लेकर डीजीएफटी से मंजूरी के आधार पर ही अनुमति होगी। इसमें सोने या प्लैटिनम के साथ चढ़ाया हुआ चांदी या पाउडर के रूप में, बिना गढ़े या अर्ध-निर्मित रूप में और वजन के हिसाब से 99.9 प्रतिशत या अधिक के रूप में चांदी शामिल है। चांदी का आयात अप्रैल में सालाना आधार पर 157 प्रतिशत बढ़कर 41.1 करोड़ डॉलर का हो गया। वर्ष 2025-26 में यह लगभग 150 प्रतिशत बढ़कर 12 अरब डॉलर का हो गया। भारत चांदी मुख्य रूप से संयुक्त अरब अमीरात, ब्रिटेन और चीन से आयात करता है। कीमती धातु का उपयोग आभूषण बनाने और औद्योगिक क्षेत्रों में किया जाता है।
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नई दिल्ली। टिकटॉक की पैरेंट कंपनी बाइटडांस (ByteDance) के सह-संस्थापक झांग यीमिंग ने संपत्ति के मामले में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कंपनी के बढ़ते मूल्यांकन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्षेत्र में मजबूत प्रगति के दम पर उन्होंने भारत के उद्योगपति मुकेश अंबानी को पीछे छोड़ते हुए एशिया के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति का स्थान हासिल कर लिया है।
ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के अनुसार, झांग यीमिंग की कुल संपत्ति बढ़कर 92.8 अरब डॉलर हो गई है। इसके साथ ही वह चीन के सबसे अमीर व्यक्ति के रूप में भी अपनी स्थिति मजबूत करने में सफल रहे हैं। वर्ष 2019 में जब ब्लूमबर्ग ने उनकी संपत्ति का आकलन शुरू किया था, तब उनकी कुल दौलत करीब 13 अरब डॉलर थी। पिछले सात वर्षों में उनकी संपत्ति में सात गुना से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।विशेषज्ञों का मानना है कि बाइटडांस की तेजी से बढ़ती लोकप्रियता और उसके डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की सफलता ने झांग की संपत्ति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। कंपनी का शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म TikTok दुनियाभर में लोकप्रिय बना हुआ है।वहीं, बाइटडांस का AI चैटबॉट Doubao भी चीन में तेजी से लोगों के बीच जगह बना रहा है। यह प्लेटफॉर्म 30 करोड़ से अधिक मासिक सक्रिय उपयोगकर्ताओं के साथ देश का सबसे लोकप्रिय AI चैटबॉट बन चुका है।इस साल की शुरुआत में बाइटडांस ने अपने अमेरिकी कारोबार के कुछ हिस्सों को अमेरिकी निवेशकों को हस्तांतरित किया था। इसके बावजूद निवेशकों का भरोसा कंपनी पर कायम है और इसका असर उसके मूल्यांकन में भी दिखाई दे रहा है।शंघाई स्थित कैपिटल सिक्योरिटीज की विश्लेषक एमी लिन के मुताबिक, कंपनी की मजबूत कारोबारी बुनियाद और Doubao जैसे उत्पादों की सफलता उसके मूल्यांकन में बढ़ोतरी की मुख्य वजह है। उनका मानना है कि अमेरिका में हुए हालिया बदलावों का कंपनी के प्रदर्शन पर कोई बड़ा नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है।ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, झांग यिमिंग की कुल संपत्ति में 24 अरब डॉलर से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। यह उछाल तब आया जब ब्लूमबर्ग ने बाइटडांस के मूल्यांकन का विश्लेषण किया, जिसमें ब्लैकरॉक, फिडेलिटी इन्वेस्टमेंट्स और टी. रो प्राइस ग्रुप जैसे बड़े संस्थागत निवेशकों के आकलन को शामिल किया गया। इसके अलावा, एचएसजी और जनरल अटलांटिक द्वारा पिछले महीने जारी किए गए मूल्यांकन को भी आधार बनाया गया।टिकटॉक को लेकर जोखिम में कमी का असब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स ने मार्च 2024 में बाइटडांस के मूल्यांकन पर 25 प्रतिशत का जोखिम डिस्काउंट लगाया था। उस समय अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने एक विधेयक पारित किया था, जिसके तहत टिकटॉक पर प्रतिबंध लगाने या उसकी अमेरिकी इकाई को बेचने की शर्त रखी गई थी।हालांकि, 2 जून को इस जोखिम छूट को घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया। इसका कारण अमेरिकी कारोबार की बिक्री प्रक्रिया पूरी होना और हाल ही में संस्थागत निवेशकों द्वारा पेश किए गए नए मूल्यांकन रहे। इसी बदलाव का सीधा फायदा झांग यिमिंग की कुल संपत्ति पर पड़ा।ताजा रैंकिंग के अनुसार, झांग यिमिंग एशिया के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं। वहीं, रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन Mukesh Ambani 86.9 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ तीसरे स्थान पर पहुंच गए हैं।दूसरी ओर, Gautam Adani ने 117.4 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति का स्थान बरकरार रखा है। बाइटडांस की बढ़ती वैल्यूएशन और टिकटॉक से जुड़ी अनिश्चितताओं में कमी ने एशिया के अरबपतियों की रैंकिंग में बड़ा बदलाव ला दिया है। कंपनी के एआई चैटबॉट Doubao की बढ़ती लोकप्रियता के बाद अब वह इसके लिए सब्सक्रिप्शन शुल्क लेने की तैयारी कर रही है। चीन के इंटरनेट बाजार में यह कदम खास माना जा रहा है, क्योंकि वहां लंबे समय से ऑनलाइन सेवाओं के लिए भुगतान करने को लेकर उपभोक्ताओं की अनिच्छा देखी जाती रही है। -
नयी दिल्ली. मदर डेयरी ने पर्यावरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के अनुरूप एक ऐसा नवोन्मेषी दूध पाउच मंगलवार को पेश किया, जो मिट्टी में प्राकृतिक रूप से विघटित हो जाता है। भारत के प्रमुख ताजा दूध आपूर्तिकर्ताओं में से एक मदर डेयरी कई राज्यों में प्रतिदिन लगभग 55 लाख लीटर दूध बेचती है। यहां एक प्रेस वार्ता में मदर डेयरी ने '' मिट्टी में भारत का पहला प्राकृतिक रूप से विघटित होने वाला दूध पाउच" पेश किया जो पर्यावरण में प्लास्टिक का कोई निशान नहीं छोड़ेगा। कंपनी शुरुआत में इस नए जैव-विघटनीय दूध पाउच का उपयोग पांच जून यानी 'विश्व पर्यावरण दिवस' से दिल्ली-एनसीआर में बेचे जाने वाले अपने गाय के दूध के लिए करेगी। मदर डेयरी, राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी कंपनी है।
मदर डेयरी के अनुसार, उसके नए दूध पाउच में एक तरह का अनूठा विघटित होने वाला पैकेजिंग नवाचार उपयोग किया गया है, जो सामग्री को जैव-उपलब्ध मोम में बदलने में सक्षम बनाता है। यह मोम, मिट्टी में मौजूद सूक्ष्मजीवों द्वारा प्राकृतिक रूप से टूटकर प्राकृतिक तत्वों में बदल जाता है। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के चेयरमैन मीनेश शाह ने कहा, '' नई पैकेजिंग सदियों में नहीं बल्कि कुछ वर्षों में मिट्टी में स्वाभाविक रूप से विघटित होने के लिए तैयार की गई है। महत्वपूर्ण बात यह है कि यह बदलाव उपभोक्ताओं के लिए दूध की कीमतों पर बिना किसी प्रभाव के किया जा रहा है।'' उन्होंने कहा कि मदर डेयरी, पृथ्वी की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
शाह ने कहा, '' मदर डेयरी का भारत के पहले प्राकृतिक रूप से नष्ट होने वाले दूध पाउच को पेश करना एक बड़ी उपलब्धि है, जो इस क्षेत्र की अग्रणी भूमिका और नए मानक स्थापित करने की क्षमता को दर्शाता है। '' मदर डेयरी के प्रबंध निदेशक जयतीर्थ चारी ने कहा, '' हमने ऐसा पाउच बनाने के लिए चार वर्षों से अधिक तक अनुसंधान किया, जो पर्यावरण में प्लास्टिक का कोई निशान नहीं छोड़ता।'' उन्होंने कहा कि ये दूध पाउच पुनर्चक्रण योग्य (रीसाइक्लेबल) बने रहेंगे, लेकिन इनकी विशेषता यह है कि ये प्राकृतिक तत्वों में टूट सकते हैं, जिससे 'फ्यूजिटिव प्लास्टिक' (पर्यावरण में बिखरा प्लास्टिक) की समस्या से निपटने में मदद मिलेगी। मदर डेयरी की स्थापना 1974 में की गई। यह 'मदर डेयरी' ब्रांड के तहत दूध और दुग्ध उत्पादों जैसे कल्चर्ड उत्पाद, आइसक्रीम, पनीर, घी आदि का निर्माण, विपणन एवं बिक्री करती है। - नयी दिल्ली. टाटा मोटर्स की कुल वाणिज्यिक वाहन बिक्री मई में 17 प्रतिशत बढ़कर 32,850 इकाई हो गई। मई, 2025 में यह 28,147 इकाई रही थी। मोटर वाहन विनिर्माता कंपनी ने सोमवार को शेयर बाजार को दी सूचना में बताया कि घरेलू बिक्री पिछले महीने 19 प्रतिशत बढ़कर 30,784 इकाई हो गई जबकि मई, 2025 में यह 25,872 इकाई थी। अंतरराष्ट्रीय कारोबार नौ प्रतिशत घटकर 2,066 इकाई रह गया जो पिछले साल इसी महीने में 2,275 इकाई था।इसी बीच, घरेलू स्तर पर मध्यम एवं भारी वाणिज्यिक वाहन और इंटरमीडिएट वाणिज्यिक वाहन (एमएच एंड आईसीवी) की बिक्री मई, 2025 की 12,406 इकाइयों के मुकाबले 10 प्रतिशत बढ़कर 13,679 इकाई हो गई। मई, 2026 में एमएच एंड आईसीवी की घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कुल बिक्री सात प्रतिशत बढ़कर 14,596 इकाई रही, जबकि मई, 2025 में यह 13,614 इकाई थी।
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नयी दिल्ली. माल एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह मई में 3.2 प्रतिशत बढ़कर 1.94 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा। यह वृद्धि वस्तुओं एवं सेवाओं की आपूर्ति में सुधार तथा आयात से मिलने वाले कर संग्रह में लगातार बढ़ोतरी के कारण हुई। सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों में यह जानकारी सामने आई। मई, 2025 में सकल जीएसटी संग्रह 1.88 लाख करोड़ रुपये रहा था।
घरेलू लेनदेन से मई के दौरान केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) संग्रह 37,397 करोड़ रुपये, राज्य जीएसटी (एसजीएसटी) 45,143 करोड़ रुपये और एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी) 51,990 करोड़ रुपये रहा। इस अवधि में कर योग्य वस्तुओं की आपूर्ति में 26.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो घरेलू मांग को दर्शाती है। वहीं सेवाओं के क्षेत्र में यह वृद्धि 22.2 प्रतिशत रही जो घरेलू खपत की मजबूती को दिखाती है। आयात से आईजीएसटी संग्रह 19.1 प्रतिशत बढ़कर मई में 59,654 करोड़ रुपये हो गया जो औद्योगिक क्षमता के विस्तार का संकेत है। जीएसटी 'रिफंड' 2.6 प्रतिशत बढ़कर 27,281 करोड़ रुपये हो गया।
'रिफंड' समायोजित करने के बाद, मई में शुद्ध जीएसटी राजस्व 3.3 प्रतिशत बढ़कर लगभग 1.67 लाख करोड़ रुपये रहा। इससे पहले अप्रैल में जीएसटी संग्रह 2.43 लाख करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया था।
वित्त वर्ष 2026-27 के पहले दो महीनों (अप्रैल और मई) में कुल मिलाकर जीएसटी संग्रह सालाना आधार पर 6.2 प्रतिशत बढ़कर 4.37 लाख करोड़ रुपये रहा। वित्त वर्ष 2025-26 की समान अवधि में यह 4.11 लाख करोड़ रुपये था। सूत्रों ने कहा, '' सालाना आधार पर यह संचयी प्रदर्शन अच्छा है और समूचे वर्ष के लिए तय जीएसटी राजस्व लक्ष्य को हासिल करने के अनुरूप है।'' सरकार ने चालू वित्त वर्ष में जीएसटी से 10.19 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है।
आंकड़ों पर कर संबंधी सलाह देने वाली प्राइस वाटरहाउस एंड कंपनी एलएलपी के साझेदार प्रतीक जैन ने कहा कि अप्रैल और मई, 2026 को मिलाकर संग्रह में तुलनीय आधार पर 8.8 प्रतिशत की मजबूत सालाना वृद्धि दिखती है। उन्होंने कहा कि सितंबर, 2025 से दरों में तेज कटौती और पिछले कुछ महीनों में भू-राजनीतिक व्यवधानों के बावजूद यह वृद्धि हुई है। साथ ही, वस्तुओं और सेवाओं के आयात तथा घरेलू खपत में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है जो अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है। वैश्विक पेशेवर सेवा कंपनी केपीएमजी के अप्रत्यक्ष कर प्रमुख एवं साझेदार अभिषेक जैन ने कहा, '' आयात जीएसटी में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है, लेकिन यह रुपये में गिरावट के कारण भी हो सकती है। आधार अवधि में दूरसंचार के एकबारगी भुगतान को समायोजित करने पर घरेलू संग्रह मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप मध्यम वृद्धि दर्शाता है। '' पेशेवर सेवा कंपनी डेलॉयट इंडिया के साझेदार एवं अप्रत्यक्ष कर प्रमुख महेश जे. ने कहा कि मई में घरेलू प्रदर्शन अपेक्षाकृत नरम रहा, जिसे अप्रैल के मजबूत आधार के संदर्भ में देखना चाहिए। हालांकि, जीएसटी 2.0 के तहत दरों के युक्तिकरण और सरलीकरण के उपाय बिना राजस्व पर बड़ा असर डाले खपत एवं मांग को समर्थन दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि आगामी जीएसटी परिषद की बैठक से उद्योग जगत को उम्मीद है कि कारोबार सुगमता बढ़ाने और कार्यशील पूंजी को और मुक्त करने के उपाय किए जाएंगे। -
नयी दिल्ली. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि भारत और ओमान के बीच मुक्त व्यापार समझौता सोमवार से लागू हो गया है। गोयल ने कहा कि भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) वस्त्र, चमड़ा, प्लास्टिक, समुद्री उत्पाद, वाहन, खेल सामग्री और कृषि उत्पादों जैसे क्षेत्रों के घरेलू निर्यातकों को लाभ पहुंचाएगा। इसका कारण उन्हें प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में ओमान के बाजार में तरजीही पहुंच प्राप्त होगी। मंत्री ने यहां संवाददाताओं से कहा, ''भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता आज (सोमवार) से प्रभावी हो रहा है।'' मुक्त व्यापार समझौते पर 18 दिसंबर, 2025 को मस्कट में हस्ताक्षर किए गए थे।
दोनों पक्षों द्वारा आंतरिक प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद, समझौता एक जून, 2026 से प्रभावी हो गया।
समझौते के लागू होने के उपलक्ष्य में, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई से कृषि और रत्न एवं आभूषण उत्पादों की लगभग 10 खेप तरजीही दरों के तहत खाड़ी देश को भेजी गईं। ओमान खाड़ी क्षेत्र में भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और अपने अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस बंदरगाह बुनियादी ढांचे के माध्यम से व्यापक जीसीसी (खाड़ी सहयोग परिषद) बाजार के लिए एक रणनीतिक प्रवेश द्वार के रूप में कार्य करता है। भारत और ओमान के बीच द्विपक्षीय व्यापार वित्त वर्ष 2025-26 में 11.18 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 10.61 अरब डॉलर था। -
नयी दिल्ली. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि भारत और अमेरिका ने प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के पहले चरण के अधिकांश प्रावधानों को अंतिम रूप दे दिया है और अब बातचीत कुछ छोटे मुद्दों तक ही केंद्रित है। गोयल ने यहां संवाददाताओं से कहा कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल इस समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप देने के लिए भारत में है। दोनों पक्षों के बीच दो से चार जून तक यह बातचीत होगी। दोनों देशों ने तीन फरवरी को इस व्यापार समझौते के पहले चरण के लिए रूपरेखा तय होने की घोषणा की थी।
गोयल ने कहा, "लगभग सभी चीजें तय हो चुकी हैं। जैसा कि अमेरिकी राजदूत ने भी कहा है कि 99 प्रतिशत मुद्दों पर सहमति बन चुकी है। अब केवल छोटे-छोटे बिंदुओं पर चर्चा चल रही है।" उन्होंने कहा कि समझौते को अंतिम रूप देते समय इस पर भी विचार किया जा रहा है कि अमेरिका में हुए कानूनी बदलावों को इसमें किस तरह से जगह दी जाएगी। उन्होंने विश्वास जताया कि इन मुद्दों के सुलझने के बाद दोनों देश बीटीए के पहले चरण को अंतिम रूप देकर जल्द ही उस पर हस्ताक्षर करेंगे। गोयल ने कहा कि पहला चरण संपन्न होने के बाद एक अधिक व्यापक व्यापार समझौते की दिशा में आगे की बातचीत शुरू की जाएगी। भारत और अमेरिका ने पिछले साल की शुरुआत में द्विपक्षीय व्यापार समझौते की दिशा में प्रयास शुरू किए थे। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से भारतीय उत्पादों पर जवाबी सीमा शुल्क लगाए जाने के बाद इसकी प्रगति बाधित हुई। -
नयी दिल्ली. होटल और रेस्तरां में इस्तेमाल होने वाली वाणिज्यिक द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की कीमत 19 किलोग्राम के सिलेंडर पर सोमवार को 42 रुपये बढ़ा दी गई लेकिन घरों में इस्तेमाल होने वाली रसोई गैस की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया। उद्योग से जुड़े सूत्रों ने बताया कि दिल्ली में 19 किलोग्राम वाले वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर की कीमत 3,071.50 रुपये से बढ़ाकर 3,113.50 रुपये कर दी गई है। घरों में इस्तेमाल होने वाले 14.2 किलोग्राम के घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 913 रुपये ही है और इसमें बदलाव नहीं किया गया है।
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नयी दिल्ली. अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने कहा है कि समूह ने अमेरिका में चल रही कानूनी चुनौतियों को पीछे छोड़ दिया है और अब वह ऊर्जा, परिवहन, लॉजिस्टिक तथा डिजिटल अवसंरचना क्षेत्रों में निवेश की रफ्तार बढ़ा रहा है। उनका कहना है कि कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित विकास से पैदा होने वाली मांग समूह के लिए नए अवसर लेकर आएगी। शेयरधारकों को लिखे अपने सालाना पत्र में अदाणी ने कहा कि पिछले वर्ष बढ़ी जांच-पड़ताल और चुनौतियों के बावजूद समूह विस्तार की अपनी रणनीति पर कायम रहा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी कानूनी मामलों से जुड़े मामले अब पीछे छूट चुके हैं और समूह नए आत्मविश्वास के साथ विकास के अगले चरण पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
अदाणी ने समूह की प्रमुख कंपनी अदाणी एंटरप्राइजेज के 24,930 करोड़ रुपये के राइट्स इश्यू को निवेशकों के भरोसे का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह ऐसे समय में सफल रहा जब समूह को कॉरपोरेट प्रशासन और नियामकीय मुद्दों को लेकर सवालों का सामना करना पड़ रहा था। उन्होंने कहा कि दुनिया में बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं, ऊर्जा सुरक्षा की नई चुनौतियों और प्रौद्योगिकी के बढ़ते महत्व के बावजूद अदाणी समूह भारत के विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर अडिग रहा। समूह ने ऊर्जा, परिवहन, लॉजिस्टिक, यूटिलिटी और औद्योगिक विनिर्माण क्षेत्रों में अपनी परियोजनाओं को लगातार आगे बढ़ाया। अदाणी ने कहा कि समूह की पहचान चुनौतियों या आलोचनाओं से नहीं, बल्कि उनके प्रति उसकी प्रतिक्रिया और राष्ट्र निर्माण के प्रति उसकी प्रतिबद्धता से होती है। अमेरिका में नवीकरणीय ऊर्जा कारोबार से जुड़े कथित रिश्वतखोरी मामलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इन कानूनी प्रक्रियाओं से जुड़ी बाधाएं अब समाप्त हो चुकी हैं। समूह पहले ही इन आरोपों से इनकार करता रहा है। भविष्य की रणनीति पर प्रकाश डालते हुए अदाणी ने कहा कि समूह दो प्रमुख विकास कारकों—अवसंरचना और मेधा (इंटेलिजेंस)—पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। उनका मानना है कि एआई के व्यापक उपयोग के लिए बिजली उत्पादन, पारेषण नेटवर्क, डेटा सेंटर और लॉजिस्टिक अवसंरचना में भारी निवेश की आवश्यकता होगी।
उन्होंने कहा, "एआई के सोचने से पहले ऊर्जा का प्रवाह होना जरूरी है।" उनके अनुसार, भविष्य का प्रौद्योगिकी नेतृत्व केवल सॉफ्टवेयर से नहीं, बल्कि मजबूत भौतिक अवसंरचना से भी तय होगा।'' समूह ने वित्त वर्ष 2025-26 में 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है, जो उसके अब तक के सबसे बड़े वार्षिक पूंजीगत व्यय कार्यक्रमों में से एक है। यह निवेश नवीकरणीय ऊर्जा, बिजली पारेषण, बंदरगाह, हवाई अड्डा, डेटा सेंटर और विनिर्माण गतिविधियों में किया गया। प्रमुख उपलब्धियों में अदाणी ग्रीन एनर्जी द्वारा 5.1 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ना शामिल है, जिससे उसकी कुल परिचालन क्षमता 19 गीगावाट से अधिक हो गई। वहीं अदाणी न्यू इंडस्ट्रीज ने पांच मेगावाट की हरित हाइड्रोजन पायलट परियोजना शुरू की है। अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस की पारेषण परियोजनाओं की ऑर्डर बुक बढ़कर 71,779 करोड़ रुपये पर पहुंच गई है, जबकि अदाणी पावर 2032 तक उत्पादन क्षमता 42 गीगावाट तक ले जाने के लिए दो लाख करोड़ रुपये से अधिक के विस्तार कार्यक्रम पर काम कर रही है। डिजिटल अवसंरचना के क्षेत्र में समूह ने 2030 तक दो गीगावाट क्षमता वाले डेटा सेंटर प्लेटफॉर्म के निर्माण की योजना बनाई है। इसके अलावा गूगल के साथ विशाखापत्तनम में बड़ी डेटा सेंटर परियोजना के लिए समझौता भी किया गया है। लॉजिस्टिक क्षेत्र में अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकनॉमिक जोन ने वर्ष के दौरान 50 करोड़ टन से अधिक कार्गो को संभाला। वहीं समूह के हवाई अड्डा कारोबार ने नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट और गुवाहाटी हवाई अड्डे पर नए टर्मिनल को चालू किया। - नई दिल्ली। मेटा ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के उपयोग के तरीके में बड़ा बदलाव करते हुए इंस्टाग्राम, फेसबुक और व्हाट्सऐप के लिए नए पेड सब्सक्रिप्शन प्लान लॉन्च करने की तैयारी की है। इन योजनाओं के तहत उपयोगकर्ताओं को विशेष प्रीमियम फीचर्स उपलब्ध कराए जाएंगे, जिनका लाभ सामान्य उपयोगकर्ताओं को नहीं मिलेगा।कंपनी ने अपने ऐप्स के “प्लस” संस्करण पेश किए हैं, जिनके जरिए भुगतान करने वाले उपयोगकर्ताओं को उन्नत टूल्स, अतिरिक्त कस्टमाइजेशन विकल्प और अधिक दृश्यता से जुड़े फीचर्स मिलेंगे।यह कदम विज्ञापन आधारित आय पर निर्भरता कम करते हुए मासिक सदस्यता के जरिए नए राजस्व स्रोत विकसित करने की मेटा की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।इंस्टाग्राम प्लस और फेसबुक प्लस की कीमत 3.99 डॉलर प्रति माह (करीब 387 रुपये) रखी गई है, जबकि व्हाट्सऐप प्लस के लिए 2.99 डॉलर प्रति माह (करीब 290 रुपये) शुल्क तय किया गया है। हालांकि, भारत के लिए आधिकारिक कीमतों की अभी घोषणा नहीं की गई है।टेकक्रंच की रिपोर्ट के अनुसार, इंस्टाग्राम प्लस उपयोगकर्ताओं को कई विशेष सुविधाएं मिलेंगी। इनमें यह देखने की सुविधा शामिल होगी कि उनकी स्टोरी को कितने लोगों ने दोबारा देखा। साथ ही, मौजूदा ‘क्लोज फ्रेंड्स’ विकल्प से आगे बढ़कर असीमित स्टोरी ऑडियंस सूची बनाने की सुविधा भी मिलेगी।प्रीमियम उपयोगकर्ता बिना दर्शक सूची में दिखाई दिए किसी की स्टोरी देख सकेंगे। इसके अलावा स्टोरी को 24 घंटे की मौजूदा समय सीमा से अधिक समय तक रखने और हर सप्ताह एक स्टोरी को अतिरिक्त दृश्यता के लिए प्रमुखता से प्रदर्शित करने की सुविधा भी मिलेगी।सब्सक्राइबर स्टोरी देखने वालों की सूची में खोज कर सकेंगे और प्रोफाइल तथा हाइलाइट्स पर सीधे पोस्ट साझा कर सकेंगे, बिना उन्हें फॉलोअर्स की मुख्य फीड में दिखाए।मेटा प्रीमियम उपयोगकर्ताओं के लिए कुछ अतिरिक्त डिजाइन और कस्टमाइजेशन फीचर्स भी ला रहा है। इंस्टाग्राम प्लस उपयोगकर्ताओं को एनिमेटेड “सुपर हार्ट” रिएक्शन, बायो के लिए विशेष फॉन्ट, कस्टम ऐप आइकन और प्रोफाइल पिन करने के अतिरिक्त विकल्प मिलेंगे।फेसबुक प्लस में भी इसी तरह के प्रीमियम फीचर्स दिए जाने की उम्मीद है, जबकि व्हाट्सऐप प्लस का फोकस मैसेजिंग अनुभव को बेहतर बनाने पर रहेगा।व्हाट्सऐप प्लस उपयोगकर्ताओं को कस्टम चैट थीम, विशेष रिंगटोन, प्रीमियम स्टिकर्स, अतिरिक्त पिन की गई चैट और उन्नत सूची कस्टमाइजेशन फीचर्स उपलब्ध होंगे।इंस्टाग्राम पर साझा की गई जानकारी में मेटा की प्रोडक्ट प्रमुख नाओमी ग्लाइट ने संकेत दिया है कि भविष्य में सब्सक्राइबरों के लिए और भी नए फीचर्स जोड़े जाएंगे।मेटा ने स्पष्ट किया है कि ये सब्सक्रिप्शन उसकी मौजूदा मेटा वेरिफाइड सेवा से अलग हैं। मेटा वेरिफाइड के तहत पहचान सत्यापन, प्रतिरूपण से सुरक्षा और ग्राहक सहायता जैसी सेवाएं प्रदान की जाती हैं।कंपनी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित सेवाओं के क्षेत्र में भी अपने पेड ऑफर का विस्तार कर रही है। इसके तहत “मेटा वन” नामक नया सब्सक्रिप्शन इकोसिस्टम विकसित किया जा रहा है, जिसमें एआई, कंटेंट क्रिएटर और व्यवसायों के लिए विशेष टूल्स शामिल होंगे।
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नयी दिल्ली. अग्रणी बीमा कंपनी एलआईसी के प्रमुख आर दुरईस्वामी ने कहा है कि पश्चिम एशिया संकट के लंबे समय तक बने रहने की स्थिति में देश के बीमा क्षेत्र की वृद्धि दर में कुछ नरमी आ सकती है, क्योंकि इससे लोगों की आय और बचत क्षमता प्रभावित हो सकती है। भारतीय जीवन बीमा निगम के मुख्य कार्यपालक अधिकारी एवं प्रबंध निदेशक दुरईस्वामी ने कहा कि यदि पश्चिम एशिया संकट लंबा चलता है तो इसका शृंखलाबद्ध प्रभाव लोगों की आय, खर्च और बचत के रुझान पर पड़ेगा। इसके साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि स्थिति जल्द सामान्य होगी। हालांकि दुरईस्वामी ने कहा कि यदि अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा इस संकट से प्रभावित होता है तो बीमा उद्योग भी इससे अछूता नहीं रह सकता है। लोगों की आय और बचत क्षमता पर असर पड़ने से बीमा क्षेत्र पर भी स्वाभाविक रूप से प्रभाव पड़ेगा। गौरतलब है कि 28 फरवरी को पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद ऊर्जा समेत कई क्षेत्रों पर असर पड़ा है। इससे आर्थिक वृद्धि में सुस्ती और महंगाई बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। एलआईसी में सरकार की हिस्सेदारी घटाने की संभावना के बारे में पूछे जाने पर दुरईस्वामी ने कहा कि कंपनी इस तरह के कदमों के लिए पहले से तैयार है। उन्होंने कहा, "जब हमने अपना आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) लाने की तैयारी शुरू की थी, तभी से हम आगे के ऐसे कदमों के लिए तैयार थे। इस पर अंतिम फैसला सरकार को लेना है।" एलआईसी प्रमुख ने कहा कि जैसे ही समय और हिस्सेदारी के स्तर पर निर्णय लिया जाएगा, एलआईसी सरकार के साथ मिलकर इसे सफल बनाने के लिए तैयार है। वर्ष 2022 में एलआईसी का आईपीओ आया था, जो उस समय आकार के लिहाज से देश का सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम था। इसके जरिए सरकार ने 3.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचकर करीब 21,000 करोड़ रुपये जुटाए थे। उन्होंने कहा कि सूचीबद्ध कंपनियों के लिए निर्धारित मानकों के तहत न्यूनतम सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़ाने के लक्ष्य पर सरकार काम कर रही है, लेकिन मौजूदा बाजार अस्थिरता के कारण अगले सार्वजनिक पेशकश के लिए उचित समय का इंतजार किया जा रहा है। आईपीओ के बाद शेयरधारकों को लाभ देने के सवाल पर उन्होंने कहा कि एलआईसी ने हाल में एक मौजूदा शेयर पर एक बोनस शेयर जारी किया और इसके बाद 67 प्रतिशत अधिक लाभांश देने की भी घोषणा की। एलआईसी के निदेशक मंडल ने वित्त वर्ष 2025-26 के नतीजों को अंतिम रूप देते समय 10 रुपये अंकित मूल्य वाले शेयर पर 10 रुपये के अंतिम लाभांश की सिफारिश की है। इसे शेयरधारकों की मंजूरी के अधीन रखा गया है। एलआईसी ने हाल ही में जनवरी-मार्च तिमाही में 23 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 23,420 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया, जो देश की किसी भी वित्तीय सेवा कंपनी का अब तक का उच्चतम स्तर है।
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नयी दिल्ली. राष्ट्रीय राजधानी में सीएनजी की कीमत में मंगलवार को दो रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी की गई। यह दो सप्ताह से भी कम समय में चौथी बार है जब सीएनजी की कीमत बढ़ाई गई है। इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड के अनुसार, सीएनजी की कीमत अब 83.09 रुपये प्रति किलोग्राम होगी। सीएनजी की कीमत में 15 मई के बाद से चौथी बार बढ़ोतरी की गई है और अब तक कुल चार रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ाए जा चुके हैं।
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नयी दिल्ली. पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी और सोने-चांदी पर आयात शुल्क में वृद्धि के चलते खुदरा मुद्रास्फीति जून तक बढ़कर करीब पांच प्रतिशत तक जा सकती है। हालांकि, अर्थशास्त्रियों का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ब्याज दरों में किसी भी बदलाव से पहले स्थिति का आकलन करने के लिए 'इंतजार और निगरानी' की नीति अपनाएगा। 15 मई से शुरू हुई 11 दिन की अवधि में पेट्रोल की कीमतों में 7.38 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 7.48 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो चुकी है। विश्लेषकों के अनुसार, ईंधन की कीमतों में यह वृद्धि परिवहन, भंडारण और आंशिक रूप से बिजली जैसे क्षेत्रों की लागत बढ़ाकर महंगाई पर सीधा असर डालेगी। इसके अलावा, सरकार ने 13 मई को सोने और चांदी पर आयात शुल्क बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है। इस तरह कीमती धातुओं के गैर-जरूरी आयात पर अंकुश लगाने की कोशिश की गई है। ईवाई इंडिया के मुख्य नीति सलाहकार डी.के. श्रीवास्तव ने कहा कि पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में औसतन 7.5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी से खुदरा मुद्रास्फीति में करीब 0.75 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है। मई, 2026 में खुदरा मुद्रास्फीति 4-4.5 प्रतिशत और जून में 4.5-5 प्रतिशत के दायरे में रह सकती है। उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति में यह वृद्धि लागत पर आधारित होने से रेपो दर में बदलाव का असर सीमित हो सकता है। हालांकि, यदि मुद्रास्फीति पांच प्रतिशत से ऊपर जाती है और उसमें तेजी का रुझान दिखता है, तो केंद्रीय बैंक दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च की निदेशक मेघा अरोड़ा ने कहा कि जून में खुदरा मुद्रास्फीति चार प्रतिशत से ऊपर जा सकती है, लेकिन आरबीआई के छह प्रतिशत के ऊपरी संतोषजनक स्तर के भीतर रहने की संभावना है। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की पांच जून को होने वाली की बैठक में सभी प्रमुख नीतिगत दरों को यथावत रखते हुए 'तटस्थ रुख' बनाए रखा जा सकता है। थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित मुद्रास्फीति अप्रैल में 42 महीने के उच्चस्तर 8.3 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित खुदरा मुद्रास्फीति 3.48 प्रतिशत रही। बार्कलेज इंडिया की मुख्य अर्थशास्त्री आस्था गुडवानी ने कहा कि मौजूदा अनिश्चितताओं के बने रहने से परिवहन लागत और कच्चे माल की कीमतों के जरिये महंगाई का दबाव बढ़ सकता है, जिससे वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जरूरत पड़ सकती है। क्रिसिल की प्रमुख अर्थशास्त्री दीप्ति देशपांडे ने कहा कि चालू वित्त वर्ष में औसत मुद्रास्फीति 5.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इक्रा रेटिंग्स की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि जून में महंगाई पर ईंधन मूल्य वृद्धि का व्यापक असर दिखेगा और दरों में संभावित बढ़ोतरी वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में हो सकती है।
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नयी दिल्ली. पेट्रोल और डीजल की कीमतों में सोमवार को एक बार फिर वृद्धि की गयी। पेट्रोल की कीमत 2.61 रुपये प्रति लीटर जबकि डीजल के दाम 2.71 रुपये प्रति लीटर बढ़ाये गये हैं। सरकारी तेल कंपनियों द्वारा अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बढ़ोतरी का बोझ उपभोक्ताओं पर डाले जाने के बीच पिछले दो सप्ताह से भी कम समय में यह चौथी बार है जब कीमतों में बढ़ोतरी की गई है। ईंधन कीमतों में 15 मई से फिर संशोधन शुरू हुआ था। तब से अब तक पेट्रोल और डीजल के दाम कुल मिलाकर करीब 7.5 रुपये प्रति लीटर बढ़ चुके हैं। उद्योग सूत्रों ने बताया कि दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 2.61 रुपये प्रति लीटर बढ़ाकर 102.12 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है, जो पहले 99.51 रुपये प्रति लीटर थी। डीजल के दाम 2.71 रुपये बढ़ाकर 95.20 रुपये प्रति लीटर कर दिए गए हैं, जो पहले 92.49 रुपये प्रति लीटर थे। यह वृद्धि वैश्विक कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और रुपये में कमजोरी के बीच की गई है। वैश्विक कच्चे तेल की कीमत बढ़ने और रुपये के कमजोर होने से तेल विपणन कंपनियों की आयात लागत पर दबाव बढ़ा है।
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नयी दिल्ली. सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) मार्च तिमाही में वित्तीय क्षेत्र की सबसे अधिक मुनाफा कमाने वाली कंपनी बनकर उभरी है। तिमाही के दौरान कंपनी का शुद्ध लाभ 23,420 करोड़ रुपये से अधिक रहा है। केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (सीपीएसई) में भी वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में एलआईसी ने लाभ के मामले में पहला स्थान बरकरार रखा। एलआईसी का मार्च, 2026 को समाप्त तिमाही में शुद्ध लाभ 23 प्रतिशत बढ़कर 23,420 करोड़ रुपये रहा है, जो एक साल पहले की समान अवधि में 19,013 करोड़ रुपये था। कंपनी ने पिछले सप्ताह अपने तिमाही नतीजों की घोषणा की थी। शेयर बाजारों के पास उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, चौथी तिमाही में देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) का लाभ 19,684 करोड़ रुपये और निजी क्षेत्र के एचडीएफसी बैंक का लाभ 19,221 करोड़ रुपये रहा। हालांकि, पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान वार्षिक लाभ के मामले में एसबीआई ने एलआईसी को पीछे छोड़ दिया। एसबीआई का सालाना शुद्ध लाभ 80,032 करोड़ रुपये रहा, जबकि एलआईसी का लाभ 57,419 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। इसी तरह, एचडीएफसी बैंक का वार्षिक लाभ 74,670 करोड़ रुपये और आईसीआईसीआई बैंक का लाभ 50,147 करोड़ रुपये रहा है। अन्य सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) ने चौथी तिमाही में 11,378 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया है। इसके बाद कोल इंडिया का लाभ 10,839 करोड़ रुपये रहा। वहीं, पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (पीएफसी) ने 8,598 करोड़ रुपये और एनटीपीसी ने 8,747 करोड़ रुपये का लाभ अर्जित किया। शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया का लाभ 4,546 करोड़ रुपये, आरईसी लिमिटेड का 3,375 करोड़ रुपये और स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) का लाभ 1,680 करोड़ रुपये रहा। एलआईसी के शानदार नतीजों के एक दिन बाद 23 मई को बीएसई में उसका शेयर शुरुआती कारोबार में लगभग पांच प्रतिशत चढ़कर 839 रुपये पर पहुंच गया। एलआईसी के प्रबंधन के तहत परिसंपत्तियां (एयूएम) 31 मार्च, 2026 तक बढ़कर 57,29,396 करोड़ रुपये हो गईं, जो एक साल पहले 54,52,297 करोड़ रुपये थीं। यह सालाना आधार पर पांच प्रतिशत की वृद्धि है। वर्ष के दौरान कंपनी की कुल प्रीमियम आय में 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वहीं, समायोजित नेटवर्थ बढ़कर 1,69,605 करोड़ रुपये हो गया, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 1,20,258 करोड़ रुपये थी। पूरे कॉरपोरेट क्षेत्र की बात करें तो जनवरी-मार्च तिमाही में वोडाफोन आइडिया 51,970 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड लाभ के साथ सबसे अधिक तिमाही मुनाफा कमाने वाली कंपनी रही। करीब छह वर्षों में यह कंपनी का पहला तिमाही लाभ था, जो मुख्य रूप से वैधानिक देनदारियों में राहत मिलने से संभव हुआ। इसके बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज का स्थान रहा, जिसका शुद्ध लाभ 16,971 करोड़ रुपये रहा। हालांकि, यह पिछले वर्ष की समान अवधि के 19,407 करोड़ रुपये की तुलना में कम है।








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