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नयी दिल्ली। दूरसंचार कंपनी वोडाफोन आइडिया लिमिटेड (वीआईएल) की फिलहाल मोबाइल शुल्क दरों में व्यापक बढ़ोतरी की योजना नहीं है लेकिन वह मौजूदा दरों में मामूली संशोधन कर सकती है। कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। वोडाफोन आइडिया का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अन्य दूरसंचार कंपनी भारती एयरटेल ने हाल ही में प्रीपेड मोबाइल रिचार्ज प्लान की दरों में करीब चार-पांच प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। ऐसी स्थिति में विश्लेषकों ने चालू वर्ष की पहली छमाही में शुल्क दरों में लगभग 15 प्रतिशत तक वृद्धि की आशंका जताई है। वीआईएल के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अभिजीत किशोर ने 'सीओएआई डिजीकॉम समिट 2026' के दौरान संवाददाताओं से कहा, "दरों में कुछ मामूली सुधार होंगे, लेकिन आमतौर पर होने वाली व्यापक ढांचा-आधारित बढ़ोतरी फिलहाल नहीं होगी।" उन्होंने कहा कि सरकार कंपनी में लगभग 49 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ एक महत्वपूर्ण शेयरधारक है और इससे कंपनी को भरोसा मिला है। वीआईएल पिछले कुछ वर्षों से लगातार आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही है। इस बीच सरकार ने बकाया राजस्व के एवज में इसमें हिस्सेदारी ली है। किशोर ने कहा कि कंपनी का ध्यान अपने प्रदर्शन में सुधार पर है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ महीनों में ग्राहकों की संख्या में सुधार के संकेत मिले हैं। भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, वोडाफोन आइडिया ने मार्च में एक लाख से अधिक मोबाइल ग्राहकों को जोड़ा है, जो पिछले कुछ वर्षों में ग्राहक आधार में लगातार आ रही गिरावट के बाद सुधार को दर्शाता है।
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नयी दिल्ली. सरकारी एजेंसियों ने मौजूदा रबी विपणन सत्र में 148 लाख टन गेहूं की खरीद की है। यह पिछले साल की इसी अवधि में की गई खरीद की तुलना में 11.37 प्रतिशत कम है। इस गिरावट का मुख्य कारण मंडियों में फसल की देर से हुई आवक है। खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। पिछले साल की इसी अवधि में यह खरीद 167 लाख टन रही थी।
भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) और राज्य एजेंसियां न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं की खरीद करती हैं। गेहूं की खरीद मार्च से अप्रैल तक चलती है, जिसमें अनाज का अधिकांश हिस्सा पहले तीन महीनों में खरीदा जाता है। अधिकारी ने पीटीआई-भाषा को बताया, ''खरीद में कमी का कारण मंडियों में फसल की देर से आवक है। अब खरीद की गति बढ़ रही है।'' अधिकारी ने बताया कि विशेष रूप से चमक में कमी और टूटे हुए दानों के मामले में खरीद के नियमों में ढील पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश तक बढ़ाई गई है, क्योंकि इन राज्यों में फसल बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से प्रभावित हुई थी। ताजा आंकड़ों के अनुसार, 22 अप्रैल तक पंजाब में गेहूं की खरीद 67 लाख टन रही, जो पिछले साल की इसी अवधि के 49 लाख टन से अधिक है। हरियाणा में यह आंकड़ा 53 लाख टन के मुकाबले 61 लाख टन दर्ज किया गया। हालांकि, मध्य प्रदेश में खरीद 52 लाख टन से घटकर 10 लाख टन रह गई, जबकि राजस्थान ने पिछले साल की इसी अवधि के 7.8 लाख टन के मुकाबले पांच लाख टन गेहूं की खरीद की। अधिकारी ने कहा कि भंडारण को लेकर कोई चिंता नहीं है, क्योंकि राज्य सरकारों ने इसके लिए पर्याप्त व्यवस्था कर ली है। कृषि मंत्रालय के दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, फसल वर्ष 2025-26 (जुलाई-जून) के लिए गेहूं का उत्पादन रिकॉर्ड 12.02 करोड़ टन रहने का अनुमान है। -
नयी दिल्ली, 23 अप्रैल (भाषा) देश का चावल निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में 7.5 प्रतिशत घटकर 11.53 अरब डॉलर रह गया। पश्चिम एशिया क्षेत्र के देशों सहित प्रमुख बाजारों को निर्यात में कमी इसकी मुख्य वजह रही। वाणिज्य मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली। वहीं मार्च में निर्यात 15.36 प्रतिशत घटकर 99.75 करोड़ डॉलर रहा।
अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध के कारण ईरान, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), सऊदी अरब और ओमान सहित पश्चिम एशिया क्षेत्र के देशों को होने वाले निर्यात पर असर पड़ा है। ईरान, भारत के बासमती चावल का सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य है लेकिन मौजूदा अस्थिरता के कारण ऑर्डर प्रवाह, भुगतान और जहाजों की आवाजाही पर दबाव बढ़ता दिख रहा है। खबरों के अनुसार, आयातकों ने अपनी मौजूदा प्रतिबद्धताओं को पूरा करने और भारत को भुगतान भेजने में असमर्थता जताई है जिससे निर्यातकों के लिए अनिश्चितता उत्पन्न हो गई है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने 172 से अधिक देशों को 2.01 करोड़ टन चावल का निर्यात किया था जिसकी कीमत 12.5 अरब डॉलर थी। भारत, दुनिया के सबसे बड़े चावल उत्पादकों और निर्यातकों में से एक है। 2024-25 में देश ने लगभग 4.7 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र से करीब 15 करोड़ टन चावल का उत्पादन किया जो वैश्विक उत्पादन का लगभग 28 प्रतिशत है। औसत उपज 2014-15 में 2.72 टन प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 2024-25 में लगभग 3.2 टन प्रति हेक्टेयर हो गई है। इसकी मुख्य वजह बीज की बेहतर किस्में, उन्नत कृषि पद्धतियां और सिंचाई क्षेत्र का विस्तार है। -
नयी दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एंथ्रोपिक के 'माइथोस' मॉडल द्वारा वित्तीय प्रणालियों की डेटा सुरक्षा से संबंधित खतरों की बात सामने आने के बाद बृहस्पतिवार को कृत्रिम मेधा (एआई) से जुड़े जोखिमों पर बैंक प्रमुखों के साथ बैठक की। यह बैठक एंथ्रोपिक द्वारा 'क्लाउड माइथोस' एआई मॉडल के विकास के मद्देनजर महत्वपूर्ण है, जिसमें दावा किया गया है कि उसने कई प्रमुख ऑपरेटिंग सिस्टम में कमजोरियां पाई हैं। सूत्रों के अनुसार बैठक में एआई से निपटने के लिए जरूरी जोखिमों और उपायों पर चर्चा की गई। वित्त मंत्री की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में वित्तीय क्षेत्र पर एआई द्वारा उत्पन्न विभिन्न जोखिमों पर विचार-विमर्श किया गया। सूत्रों ने बताया कि बैंकों से अपनी प्रणालियों, डेटा और ग्राहकों के पैसे को सुरक्षित करने के लिए एहतियाती कदम उठाने को कहा गया। इस बैठक में बैंकों के शीर्ष अधिकारी, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधिकारी शामिल हुए। वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार मंत्रालय और आरबीआई इस बात का अध्ययन कर रहे हैं कि इस सुरक्षा चूक से भारतीय वित्तीय क्षेत्र को किस हद तक जोखिम का सामना करना पड़ सकता है। वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार मंत्रालय और आरबीआई इस बात का अध्ययन कर रहे हैं कि इस सुरक्षा चूक से भारतीय वित्तीय क्षेत्र को किस हद तक जोखिम हो सकता है। अधिकारी ने कहा कि अब तक भारतीय प्रणालियां सुरक्षित हैं और अनावश्यक रूप से चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि आरबीआई अपने स्तर पर यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी जांच कर रहा है कि भारत का वित्तीय क्षेत्र सुरक्षित रहे। खबरों के अनुसार एंथ्रोपिक ने कहा कि 'माइथोस' साइबर सुरक्षा कार्यों में मनुष्यों से बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। यह प्रमुख ऑपरेटिंग सिस्टम और वेब ब्राउजर में 27 साल पुरानी कमियों सहित हजारों 'बग' को खोजने और उनका फायदा उठाने में सक्षम है। अमेरिका स्थित एआई कंपनी एंथ्रोपिक ने कहा कि उसके नए मॉडल 'माइथोस' तक अनधिकृत पहुंच बनाई गई थी। माइथोस एक शक्तिशाली एआई मॉडल है, जिसने डिजिटल सुरक्षा कमजोरियों की पहचान करने की अपनी अभूतपूर्व क्षमता और दुरुपयोग की संभावना के कारण नियामकों के बीच चिंता पैदा कर दी है।
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मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने फरवरी में हाजिर मुद्रा बाजार से शुद्ध रूप से 7.41 अरब डॉलर खरीदे। बृहस्पतिवार को जारी मासिक बुलेटिन के अनुसार सकल आधार पर केंद्रीय बैंक ने फरवरी में 21.40 अरब डॉलर खरीदे और 13.994 अरब डॉलर बेचे। लगातार सात महीनों तक विदेशी मुद्रा की शुद्ध बिक्री करने के बाद, यह लगातार दूसरा महीना है जब केंद्रीय बैंक ने शुद्ध खरीदारी की है। आरबीआई के मासिक बुलेटिन के आंकड़ों के अनुसार जनवरी में केंद्रीय बैंक ने 2.53 अरब डॉलर खरीदे थे। आंकड़ों के मुताबिक केंद्रीय बैंक ने दिसंबर में 10.02 अरब डॉलर, नवंबर में 9.71 अरब डॉलर, अक्टूबर में 11.88 अरब डॉलर, सितंबर में 7.91 अरब डॉलर, अगस्त में 7.69 अरब डॉलर, जुलाई में 2.54 अरब डॉलर और जून में 3.66 अरब डॉलर की शुद्ध बिक्री की थी। आरबीआई ने बुलेटिन में कहा कि फरवरी 2026 की शुरुआत में अंतरिम भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की घोषणा के चलते रुपया मजबूत हुआ, लेकिन मार्च में पश्चिम एशिया में संघर्ष तेज होने के कारण इसमें गिरावट आई। आरबीआई ने कहा कि हालांकि दूसरी छमाही में निहित विकल्प अस्थिरता पहली छमाही की तुलना में औसत रूप से कम रही, लेकिन पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और जोखिम न लेने की धारणा के कारण यह उच्च बनी रही। वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी छमाही में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 6.2 प्रतिशत कमजोर हुआ। आरबीआई ने कहा कि 40 मुद्राओं के वास्तविक प्रभावी विनिमय दर (आरईईआर) के संदर्भ में सितंबर 2025 और फरवरी 2026 के बीच रुपये में 3.3 प्रतिशत की गिरावट आई।
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नयी दिल्ली। उद्योग निकाय एसोचैम ने बुधवार को कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से उपभोग आधारित है और कच्चे तेल की कीमत 90-100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने के बावजूद देश सालाना सात प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज कर सकता है। निकाय ने कहा कि उच्च ऊर्जा लागत के प्रति भारत का लचीलापन पिछले कुछ वर्षों में काफी बढ़ा है, क्योंकि देश ने तेल के गंभीर झटकों को सहन किया है और इसके बावजूद वृद्धि दर मजबूत बनी रही है। एसोचैम ने अपने विश्लेषण के आधार पर कहा कि भारत ने आर्थिक वृद्धि की गति से समझौता किए बिना उच्च ऊर्जा कीमतों को प्रबंधित करने की अपनी क्षमता दिखाई है। इसमें कहा गया, ''2000-01 से 2025-26 के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि भारत ने कच्चे तेल की मध्यम से उच्च कीमतों के स्तर पर भी अपने कुछ सबसे मजबूत वृद्धि दर वाले वर्ष दर्ज किए हैं।'' एसोचैम के अनुसार 2022-23 में वृद्धि दर 7.6 प्रतिशत थी, जबकि तेल की कीमतें (भारतीय बास्केट) 93 डॉलर प्रति बैरल (वार्षिक औसत) पर थीं। वहीं 2023-24 में तेल की कीमतें 82 डॉलर प्रति बैरल रहने पर वृद्धि दर 7.2 प्रतिशत रही थी। एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल कुमार मिंडा ने कहा, ''भारत की वृद्धि गाथा मुख्य रूप से इसके उपभोग क्षेत्र द्वारा संचालित है। यह कारखानों के विस्तार, अधिक श्रमिकों की नियुक्ति और उच्च आय स्तरों के माध्यम से आपूर्ति पक्ष को मजबूत करती है, जिससे वृद्धि का एक सकारात्मक चक्र बनता है और अर्थव्यवस्था का लचीलापन बढ़ता है।'' मिंडा ने कहा कि एसोचैम का मानना है कि मजबूत उपभोग, स्थिर निर्यात और बढ़ते पूंजी निवेश के समर्थन से 2026-27 में भारत की जीडीपी वृद्धि सात प्रतिशत से ऊपर बनी रहेगी।
- नयी दिल्ली. देश में ग्रीष्मकालीन यानी जायद फसलों का रकबा इस साल अब तक हल्की बढ़त के साथ 69.06 लाख हेक्टेयर हो गया है, जिसमें सबसे अधिक क्षेत्र धान के तहत है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों से यह जानकारी मिली है। जायद फसलें फरवरी से जून महीने के बीच बोई जाती हैं। रबी (सर्दियों) की फसलों की कटाई और खरीफ (मानसून) फसलों की बुवाई के बीच के समय में जायद फसलों की खेती होती है। पिछले साल इसी अवधि में 66.14 लाख हेक्टेयर में जायद फसलों की बुवाई हुई थी।आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 17 अप्रैल तक धान की बुवाई 30.64 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 32.31 लाख हेक्टेयर थी। जायद फसल सत्र में धान की खेती मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, कर्नाटक और ओडिशा में की जाती है। इसके अलावा मूंग एवं उड़द जैसी जल्द तैयार होने वाली दालों और कुछ तिलहनों की खेती मध्य प्रदेश एवं राजस्थान जैसे राज्यों में होती है। वहीं, दलहनों का रकबा बढ़कर 15.47 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले साल 13.49 लाख हेक्टेयर था। तिलहनों का क्षेत्र भी बढ़कर 9.14 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया, जो पहले 7.65 लाख हेक्टेयर था। इस दौरान मोटे अनाज का रकबा भी बढ़कर 13.81 लाख हेक्टेयर हो गया है, जबकि पिछले साल यह 12.70 लाख हेक्टेयर था। सरकार किसानों को सर्दी एवं मानसून के बीच लगभग 90 दिन के अंतराल का बेहतर उपयोग करने के लिए जायद फसलों को बढ़ावा दे रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और कुछ राज्यों में आवारा पशुओं की समस्या के समाधान से जायद फसलों का रकबा और बढ़ाया जा सकता है। देश में कृषि फसलें मुख्य रूप से तीन सत्रों- रबी, खरीफ और जायद में उगाई जाती हैं।
- नयी दिल्ली. सरकार ने मजबूत उत्पादन की संभावना और पर्याप्त भंडार को देखते हुए सोमवार को गेहूं के अतिरिक्त 25 लाख टन निर्यात की अनुमति दे दी, जिससे कुल स्वीकृत निर्यात मात्रा बढ़कर 50 लाख टन हो गई है। खाद्य मंत्रालय ने बयान में कहा कि गेहूं उत्पादन के अनुकूल अनुमान और उच्च भंडार उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त निर्यात की अनुमति देना उचित समझा गया। इसके साथ ही 10 लाख टन गेहूं उत्पादों के निर्यात को भी मंजूरी दी गई है।मंत्रालय के मुताबिक, अतिरिक्त निर्यात से बाजार में तरलता बढ़ेगी, भंडार प्रबंधन बेहतर होगा और उपज की आवक के चरम मौसम में किसानों को मजबूरी में कम कीमत पर बिक्री से राहत मिलेगी। इससे घरेलू कीमतों को स्थिर रखने एवं किसानों की आय मजबूत करने में भी मदद मिलेगी, जबकि खाद्य सुरक्षा पूरी तरह सुरक्षित रहेगी। कृषि मंत्रालय के दूसरे अग्रिम अनुमान के मुताबिक, फसल सत्र जुलाई, 2025-जून, 2026 में गेहूं उत्पादन 12.02 करोड़ टन रहने का अनुमान है। रबी 2026 सत्र में गेहूं का रकबा एक साल पहले के 3.28 करोड़ हेक्टेयर से बढ़कर 3.34 करोड़ हेक्टेयर हो गया। इससे पहले सरकार ने जनवरी में पांच लाख टन गेहूं उत्पादों और फरवरी में अतिरिक्त पांच लाख टन गेहूं उत्पादों के साथ 25 लाख टन गेहूं के निर्यात की अनुमति दी थी।
- नयी दिल्ली. खनन क्षेत्र की प्रमुख कंपनी वेदांता लि. के निदेशक मंडल ने एल्युमीनियम, बिजली, तेल और गैस तथा लौह अयस्क इकाइयों को अलग-अलग सूचीबद्ध कंपनियों में विभाजित करने की प्रभावी तिथि एक मई, 2026 तय की है। कंपनी ने सोमवार को शेयर बाजार को दी सूचना में कहा, ''कंपनी के निदेशक मंडल (बोर्ड) ने चल रही पुनर्गठन प्रक्रिया के तहत, 20 अप्रैल, 2026 को हुई अपनी बैठक में, अन्य बातों के अलावा, इस योजना को एक मई, 2026 से प्रभावी बनाने की मंजूरी दी है।'' कंपनी ने यह भी बताया कि संबंधित अन्य इकाइयों से परामर्श करने के बाद, बोर्ड ने इकाइयों को अलग करने की योजना के तहत शेयर प्राप्त करने के लिए पात्र शेयरधारकों का निर्धारण करने को लेकर एक मई को रिकॉर्ड तिथि निर्धारित किया है। वेदांता ने एक बयान में कहा कि यह कदम कंपनी की कॉरपोरेट संरचना को क्षेत्र-केंद्रित स्वतंत्र कंपनियों के साथ सरल बनाने में मदद करेगा। साथ ही यह संप्रभु संपत्ति कोष, खुदरा निवेशकों और रणनीतिक निवेशकों सहित वैश्विक निवेशकों को वेदांता की विश्व स्तरीय संपत्तियों में प्रत्यक्ष निवेश के अवसर प्रदान करेगा। कारोबार को अलग करने की योजना के तहत, वेदांता चार अलग-अलग कंपनियों... वेदांता एल्युमिनियम मेटल लि. (वीएएमएल), तलवंडी साबो पावर लि. (टीएसपीएल), माल्को एनर्जी लिमिटेड (एमईएल) और वेदांता आयरन एंड स्टील लिमिटेड (वीआईएसएल)... को अलग-अलग सूचीबद्ध करने की योजना बना रही है। शेयर बाजार को दी गयी सूचना के अनुसार, योजना के तहत, वेदांता के शेयरधारकों को चारों कंपनियों में 1:1 के अनुपात में इक्विटी शेयर प्राप्त होंगे। वेदांता ने भारत एल्युमिनियम कंपनी लि. (बाल्को) में अपनी शेयरधारिता को वेदांता एल्युमिनियम मेटल लि. को हस्तांतरित करने को भी मंजूरी दे दी है। कारोबार को अलग करने के परिणामस्वरूप एल्युमीनियम, बिजली, तेल एवं गैस, तथा लौह एवं इस्पात क्षेत्रों में चार स्वतंत्र, क्षेत्र केंद्रित इकाइयां अस्तित्व में आएंगी। तलवंडी साबो पावर लिमिटेड और माल्को एनर्जी लिमिटेड का नाम बदलकर क्रमशः वेदांता पावर और वेदांता ऑयल एंड गैस कर दिया जाएगा। कंपनी के अनुसार, विभिन्न कारोबार को अलग-अलग करने से संचालन पर ध्यान बढ़ाने में मदद मिलेगी। साथ ही यह कारोबार के सुगम संचालन में कारगर साबित होगा। वेदांता लिमिटेड ने पहले कहा था कि उसने विभिन्न कारोबार को अलग-अलग करने की प्रस्तावित समय सीमा 30 जून तक बढ़ा दी है। इसका कारण कुछ सरकारी प्राधिकरणों से मंजूरी अभी भी लंबित हैं और उन पर प्रक्रिया चल रही है। अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाली कंपनी ने पहले कारोबार को अलग करने के प्रस्ताव की मूल समय सीमा 31 मार्च, 2025 से बढ़ाकर 30 सितंबर, 2025 और फिर 31 मार्च, 2026 कर दी थी।
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नयी दिल्ली। जिंदल स्टेनलेस स्टील लिमिटेड ने सोमवार को 'जिंदल इन्फिनिटी' नाम से स्टेनलेस स्टील सरिया पेश करते हुए खुदरा बाजार में प्रवेश की घोषणा की। यह कदम निर्माण क्षेत्र की पूरी मूल्य श्रृंखला में कंपनी की मौजूदगी बढ़ाने की दिशा में एक रणनीतिक विस्तार है। इस पहल के जरिये कंपनी अब अपने पारंपरिक कारोबार से कारोबार मॉडल से आगे बढ़कर सीधे अंतिम उपभोक्ताओं, बिल्डर और निर्माण कार्य से जुड़े कारीगरों तक पहुंच बना सकेगी। कंपनी के प्रबंध निदेशक अभ्युदय जिंदल ने कहा कि जिंदल इन्फिनिटी के साथ खुदरा क्षेत्र में प्रवेश कंपनी की क्षमताओं का विस्तार है और इसका उद्देश्य उन्नत उत्पादों को सीधे भारतीय उपभोक्ताओं तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि यह पहल गुणवत्ता, सुरक्षा और टिकाऊ निर्माण को बढ़ावा देने के कंपनी के बड़े लक्ष्य के अनुरूप है। कंपनी के अनुसार, पारंपरिक सरियों की तुलना में स्टेनलेस स्टील सरिया जंग लगने के प्रति अधिक प्रतिरोधी होता है, जिससे कठिन परिस्थितियों में भी इसकी मजबूती और टिकाऊपन बढ़ जाता है। कंपनी के बिक्री प्रमुख राजीव गर्ग ने कहा कि वितरक और डीलर के बढ़ते नेटवर्क के साथ कंपनी बड़े स्तर पर विस्तार की नींव तैयार कर रही है। शुरुआती प्रतिक्रिया से यह स्पष्ट है कि बाजार में लंबे समय तक टिकाऊ और भरोसेमंद उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों की मांग बढ़ रही है।
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न्यूयॉर्क। ईरान और अमेरिका के बीच जारी गतिरोध के कारण टैंकरों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने से रोके जाने के बाद रविवार को शुरुआती कारोबार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह फारस की खाड़ी का वह महत्वपूर्ण जलमार्ग है, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत अहम माना जाता है। 'शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज' में कारोबार शुरू होने के बाद अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत 6.4 प्रतिशत बढ़कर 87.88 डॉलर प्रति बैरल हो गई। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत 6.5 प्रतिशत बढ़कर 96.25 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई।
बाजार की यह प्रतिक्रिया पिछले दो दिनों से इस जलमार्ग को लेकर बनती-बिगड़ती उम्मीदों के बीच आई।
ईरान ने शुक्रवार को घोषणा की थी कि वह अपने तट के पास से वाणिज्यिक जहाजों के लिए मार्ग पूरी तरह खोल देगा, जिसके बाद कच्चे तेल की कीमतों में नौ प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई थी। ईरान इस मार्ग पर प्रभावी नियंत्रण रखता है।
हालांकि, शनिवार को तेहरान ने अपना फैसला वापस ले लिया, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी जारी रहेगी। अमेरिका-इजराइल का ईरान के खिलाफ युद्ध अब आठवें सप्ताह में है। इस युद्ध ने दशकों में सबसे भीषण वैश्विक ऊर्जा संकटों में से एक को जन्म दिया है। एशिया और यूरोप के वे देश जो पश्चिम एशिया से अपने तेल के एक बड़े हिस्से का आयात करते हैं, आपूर्ति रुकने और उत्पादन में कटौती से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने कहा कि पेट्रोल की कीमतें अगले साल ही कुछ राहत दे सकती हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के हमले के बाद से लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। संघर्ष से पहले कच्चे तेल की कीमत लगभग 70 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल थी, जो बाद में बढ़कर 119 अमेरिकी डॉलर से भी अधिक हो गई। शुक्रवार को अमेरिकी कच्चा तेल 82.59 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड 90.38 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर भाव पर बंद हुआ। -
नयी दिल्ली. चश्मों की खुदरा कंपनी लेंसकार्ट ने एक कथित आंतरिक ग्रूमिंग दस्तावेज को लेकर सोशल मीडिया पर हुए विरोध के बाद माफी मांगी है। इसके अलावा कंपनी ने नया 'इन-स्टोर स्टाइल गाइड' जारी किया है, जिसमें कर्मचारियों को कार्यस्थल पर धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीक पहनने की अनुमति दी गई है। कंपनी ने 'एक्स' पर जारी बयान में कहा कि ग्राहकों और समुदाय की चिंताओं को दूर करने के लिए वह अपने दिशानिर्देशों को सार्वजनिक और पारदर्शी बना रही है। नई नीति में टीम के सदस्यों द्वारा आस्था से जुड़े सभी प्रतीकों जैसे बिंदी, तिलक, सिंदूर, कलावा, मंगलसूत्र, कड़ा, हिजाब और पगड़ी को स्वीकार किया गया है। कंपनी ने कहा, "यदि हमारे कार्यस्थल से जुड़े किसी भी संचार से किसी को ठेस पहुंची हो या ऐसा महसूस हुआ हो कि उनकी आस्था का यहां स्वागत नहीं है, तो हमें गहरा खेद है। यह लेंसकार्ट की पहचान नहीं है और न ही कभी होगी।" यह विवाद उस समय सामने आया जब एक कथित कर्मचारी ग्रूमिंग नीति का दस्तावेज सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें बिंदी और तिलक जैसे कुछ धार्मिक प्रतीकों पर प्रतिबंध होने का दावा किया गया था। इस पर सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने नाराजगी जताई और बहिष्कार की मांग की। इस मामले पर कंपनी के संस्थापक पीयूष बंसल ने पहले स्पष्ट किया था कि वायरल दस्तावेज 'पुराना संस्करण' है और कंपनी की वर्तमान नीति को नहीं दर्शाता। उन्होंने कहा था, "यह दस्तावेज हमारी मौजूदा दिशानिर्देशों को प्रतिबिंबित नहीं करता। हमारी नीति में किसी भी धार्मिक अभिव्यक्ति, जैसे बिंदी और तिलक, पर कोई प्रतिबंध नहीं है।'' उन्होंने इसको लेकर उत्पन्न भ्रम तथा चिंता के लिए खेद जताया था। कंपनी ने अपने ताजा बयान में कहा कि उसके 2,400 से अधिक स्टोर ऐसे लोगों द्वारा संचालित हैं जो अपने विश्वास और परंपराओं के साथ काम करते हैं। बयान में कहा गया, "लेंसकार्ट भारत में बनी, भारतीयों द्वारा और भारतीयों के लिए कंपनी है। कंपनी ने यह भी कहा कि भविष्य में उसकी हर नीति, प्रशिक्षण सामग्री और संचार समावेशी मूल्यों को दर्शाएंगे और वह ग्राहकों का विश्वास बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास करती रहेगी।
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नयी दिल्ली. इलेक्ट्रिक दोपहिया विनिर्माता ओला इलेक्ट्रिक ने शनिवार को अक्षय तृतीया के अवसर पर 'ओला सोना वीकेंड' पेशकश की घोषणा की है, जिसके तहत कंपनी अपने इलेक्ट्रिक वाहन पोर्टफोलियो पर ग्राहकों को 50,000 रुपये तक के लाभ दे रही है। कंपनी ने एक बयान में कहा कि भारत के सबसे शुभ त्योहारों में से एक के उपलक्ष्य में ग्राहकों के पास 'ओला सोना' जीतने का अवसर भी होगा। यह एक सीमित संस्करण वाला स्कूटर है जिसमें असली 24 कैरेट सोने की परत वाले तत्व लगाए गए हैं। इसके अतिरिक्त, कंपनी ने बताया कि वह अपने जेन 3 एस1 एक्स (2 किलोवाट-घंटा) और रोडस्टर एक्स (2.5 किलोवाट-घंटा) को मात्र 49,999 रुपये में उपलब्ध करा रही है। साथ ही, पूरे उत्पाद पोर्टफोलियो पर ग्राहकों को अधिकतम 50,000 रुपये तक के लाभ भी दिए जा रहे हैं। ये ऑफर केवल 18 और 19 अप्रैल को ही मान्य हैं। कंपनी ने बताया कि ओला सोना वीकेंड के तहत वह रोडस्टर एक्स+ (9.1 किलोवाट-घंटा) पर 50,000 रुपये की छूट दे रही है। ग्राहक इस इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल को 1,39,999 रुपये में खरीद सकते हैं, लेकिन यह ऑफर केवल 18 और 19 अप्रैल को शाम छह बजे से नौ बजे तक सीमित समय के लिए उपलब्ध रहेगा। इसके साथ ही आठ साल की मुफ्त विस्तारित वारंटी भी दी जा रही है। कंपनी ने यह भी बताया कि ग्राहक उसके सभी उत्पादों पर अधिकतम 40,000 रुपये तक की छूट का लाभ उठा सकते हैं। ओला इलेक्ट्रिक ने बताया कि बैंक ऑफ बड़ौदा, स्कैपिया फेडरल, यस बैंक, आईडीएफसी, एचएसबीसी और एचडीएफसी के क्रेडिट कार्ड पर ईएमआई के जरिए 10,000 रुपये तक के लाभ भी दिए जा रहे हैं। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि अक्षय तृतीया समृद्धि और नई शुरुआत का प्रतीक है और 'ओला सोना वीकेंड' इसी भावना को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह ऑफर नवाचार, प्रीमियम अनुभव और बेहतर ग्राहक मूल्य देने की कंपनी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
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नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव कम होने की उम्मीद के बीच शुक्रवार को वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल करीब 2 प्रतिशत तक सस्ता हुआ।
ब्रेंट क्रूड वायदा शुरुआती कारोबार में 97.99 डॉलर प्रति बैरल तक गिर गया, जो दिन का निचला स्तर रहा और इसमें 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। वहीं, अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड भी लगभग 2 प्रतिशत फिसलकर 92.91 डॉलर प्रति बैरल के इंट्रा-डे लो पर पहुंच गया।हालांकि, इससे पहले के सत्र में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली थी। ब्रेंट क्रूड करीब 5 प्रतिशत की बढ़त के साथ 99.39 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था, जबकि डब्ल्यूटीआई 2 प्रतिशत से अधिक उछलकर 93.32 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा था।घरेलू वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भी कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट रही, जहां यह करीब 2.6 प्रतिशत टूटकर 8,625 रुपये तक आ गया।बाजार में यह नरमी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इजरायल और लेबनान के बीच 10 दिन के युद्धविराम (सीजफायर) की घोषणा के बाद आई है। इसके साथ ही ईरान की ओर से परमाणु हथियार न रखने के संकेतों ने भी निवेशकों की चिंताओं को कम किया है।ट्रंप ने कहा कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और उन्हें उम्मीद है कि ईरान के साथ समझौता जल्द हो सकता है। उन्होंने सभी पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील भी की। वैश्विक बाजारों की बात करें तो एशियाई बाजारों में कमजोरी रही और प्रमुख सूचकांक 1 प्रतिशत तक गिरे। वहीं, अमेरिकी बाजार वॉल स्ट्रीट हल्की बढ़त के साथ बंद हुआ, जहां नैस्डैक और एसएंडपी 500 में मामूली तेजी दर्ज की गई। - नयी दिल्ली। दिग्गज प्रौद्योगिकी कंपनी गूगल ने अपने एआई मंच जैमिनी की मदद से वर्ष 2025 में भारत में नीति का उल्लंघन करने वाले 48.37 करोड़ विज्ञापनों को हटाया है। साथ ही 17 लाख विज्ञापनदाता खातों को निलंबित किया गया। गूगल ने बृहस्पतिवार को जारी '2025 विज्ञापन सुरक्षा रिपोर्ट' में बताया कि उसने पिछले साल वैश्विक स्तर पर 8.3 अरब से अधिक विज्ञापनों को हटाया और 2.49 करोड़ विज्ञापनदाता खातों को निलंबित किया। कंपनी ने कहा कि उसके जैमिनी एआई (कृत्रिम मेधा) मॉडल के एकीकरण ने तत्काल गलत तत्वों का पता लगाने और उन्हें रोकने की उसकी क्षमता में बहुत अधिक सुधार किया है। विशेष रूप से तब, जब जालसाज बड़े पैमाने पर भ्रामक विज्ञापन बनाने के लिए जनरेटिव यानी सृजन से जुड़े एआई का तेजी से उपयोग कर रहे हैं। गूगल ने कहा कि वैश्विक स्तर पर हटाए गए 8.3 अरब विज्ञापनों में उसने 99 प्रतिशत से अधिक विज्ञापनों को उपयोगकर्ताओं द्वारा देखे जाने से पहले ही रोक दिया था। गूगल में विज्ञापन निजता और सुरक्षा मामलों के उपाध्यक्ष एवं महाप्रबंधक कीरत शर्मा ने एक ब्लॉग पोस्ट में कहा, ''हमारी सुरक्षा टीमें उन गलत तत्वों को रोकने के लिए चौबीसों घंटे काम करती हैं, जो तेजी से परिष्कृत और दुर्भावनापूर्ण विज्ञापनों को बढ़ावा देते हैं।'' शर्मा ने कहा, ''हमारे मॉडल खतरों के लोगों तक पहुंचने से पहले उन्हें रोकने के लिए अरबों संकेतों का विश्लेषण करते हैं। इसमें खाते की अवधि, व्यवहार संबंधी संकेत और अभियान पैटर्न शामिल हैं। पुरानी कीवर्ड आधारित प्रणाली के विपरीत हमारे नए मॉडल मंशा को बेहतर ढंग से समझते हैं, जिससे हमें दुर्भावनापूर्ण सामग्री को पहचानने और उसे पहले से ही रोकने में मदद मिलती है।'' भारत में विज्ञापनों को हटाने का कारण बनने वाले शीर्ष नीतिगत उल्लंघन ट्रेडमार्क, वित्तीय सेवाओं, कॉपीराइट, विज्ञापन नेटवर्क आदि के दुरुपयोग से संबंधित थे।
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नयी दिल्ली. ईरानी कच्चा तेल लेकर आए दो बड़े टैंकर भारत के पूर्वी एवं पश्चिमी तट के बंदरगाहों पर पहुंच गए हैं जो लगभग सात वर्ष में ऐसी पहली आपूर्ति है। जहाज-ट्रैकिंग विवरण से यह जानकारी मिली। नेशनल ईरानियन टैंकर कंपनी द्वारा संचालित 'फेलिसिटी' नामक एक बेहद बड़ा कच्चा तेल वाहक जहाज ने रविवार देर रात गुजरात तट के सिक्का के पास लंगर डाला। इसमें करीब 20 लाख बैरल कच्चा तेल है जिसे मार्च के मध्य में खार्ग द्वीप से लादा गया था। दूसरा टैंकर 'जया' लगभग उसी समय ओडिशा तट के पारादीप के पास पहुंचा। यह भी करीब करीब समान मात्रा में कच्चा तेल लेकर आया है जिसे फरवरी के अंत में खार्ग द्वीप से लादा गया था। यह तेल अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर सैन्य हमले करने और तेहरान की ओर से जवाबी कार्रवाई किए जाने से पहले लादा गया था। करीब सात वर्ष में भारतीय तटों पर पहुंचने वाली ये ईरानी कच्चे तेल की पहली खेप हैं जो पिछले महीने अमेरिका द्वारा जारी प्रतिबंध छूट के बाद संभव हो सकी हैं। एक महीने की इस छूट के तहत समुद्र में पहले से मौजूद ईरानी तेल की बिक्री की अनुमति दी गई थी, जिसका उद्देश्य वैश्विक आपूर्ति में व्यवधान को कम करना और कीमतों को नियंत्रित करना था। सप्ताहांत में शांति वार्ता विफल होने के बाद हालांकि अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी की घोषणा की है ताकि तेहरान के तेल निर्यात राजस्व को सीमित किया जा सके। भारतीय तटों पर पहुंची इन खेपों के खरीदारों का औपचारिक खुलासा नहीं किया गया है।
पारादीप बंदरगाह मुख्य रूप से इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन द्वारा संचालित है जिसने छूट के तहत कम से कम एक ईरानी खेप खरीदने की पुष्टि की है। वहीं, सिक्का क्षेत्र रिलायंस इंडस्ट्रीज और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन के लिए एक प्रमुख कच्चा तेल 'हैंडलिंग' केंद्र है जिनकी यहां बुनियादी सुविधाएं मौजूद हैं। 'पिंग शुन' नामक टैंकर करीब छह लाख बैरल ईरानी कच्चा तेल के साथ पिछले महीने के अंत में गुजरात के वाडिनार के लिए रवाना हुआ था लेकिन भुगतान संबंधी समस्याओं के कारण इसे बीच रास्ते में चीन की ओर मोड़ दिया गया था। यदि यह वाडिनार पहुंच जाता, तो यह सात वर्ष में भारत पहुंचने वाली ईरानी तेल की पहली खेप होती। भारत ऐतिहासिक रूप से ईरानी कच्चे तेल का बड़ा खरीदार रहा है और रिफाइनरियों की अनुकूलता तथा सहायक व्यावसायिक शर्तों के कारण ईरान के हल्के और भारी दोनों प्रकार के तेल का आयात करता रहा है। वर्ष 2018 में प्रतिबंध सख्त होने के बाद मई 2019 से आयात बंद हो गया और इसकी जगह पश्चिम एशिया, अमेरिका तथा अन्य स्रोतों से आपूर्ति होने लगी। एक समय ईरानी तेल भारत के कुल आयात का 11.5 प्रतिशत हिस्सा था। भारत ने 2018 में ईरान से प्रतिदिन 5.18 लाख बैरल तेल खरीदा था जो जनवरी से मई 2019 के बीच घटकर 2.68 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया। इसके बाद से कोई आयात नहीं हुआ। भारतीय रिफाइनरियां मुख्य रूप से 'ईरान लाइट' और 'ईरान हेवी' श्रेणी का तेल खरीदती थीं।अमेरिका ने पिछले महीने समुद्र में ईरानी तेल की खरीद पर 30 दिन के लिए प्रतिबंधों में छूट दी थी, ताकि ईरान पर अमेरिका-इजराइल युद्ध के कारण बढ़ी तेल कीमतों को नियंत्रित किया जा सके। यह छूट 19 अप्रैल को समाप्त हो रही है। अनुमान है कि समुद्र में लगभग 9.5 करोड़ बैरल ईरानी तेल मौजूद है जिसमें से करीब 5.1 करोड़ बैरल भारत को बेचा जा सकता है जबकि शेष चीन तथा पूर्व एशिया के खरीदारों के लिए अधिक उपयुक्त है। -
-पीएनजी विस्तार तेज किया
नयी दिल्ली. पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण ईंधन आपूर्ति में आई बाधाओं के बीच भारत ने छोटे पांच किलोग्राम के एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति बढ़ा दी है और पाइप से मुहैया कराई जाने वाली प्राकृतिक गैस (पीएनजी) कनेक्शन का विस्तार तेज कर दिया है। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, 23 मार्च से अब तक पांच किलोग्राम के 13 लाख से अधिक एलपीजी सिलेंडर बेचे गए हैं और इनकी दैनिक बिक्री एक लाख से अधिक हो गई है। यह कदम प्रवासी श्रमिकों और कम आय वर्ग के उपभोक्ताओं तक पहुंच बढ़ाने के लिए उठाया गया है।
इसी अवधि में 4.24 लाख से अधिक नए पीएनजी कनेक्शन दिए गए हैं, जबकि 30,000 से अधिक उपभोक्ताओं ने एलपीजी कनेक्शन वापस कर पीएनजी को अपनाया है। छह सप्ताह से जारी पश्चिम एशिया संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया है। भारत अपनी जरूरत का लगभग आधा कच्चा तेल, 40 प्रतिशत गैस और 85-90 प्रतिशत एलपीजी इस क्षेत्र से आयात करता है, जिस पर इस संकट का असर पड़ा है। हालांकि कच्चे तेल की कमी को अन्य स्रोतों से पूरा कर लिया गया है, लेकिन एलपीजी आपूर्ति प्रभावित हुई है। ऐसे में सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी आपूर्ति को प्राथमिकता दी है और होटल-रेस्तरां जैसे वाणिज्यिक उपभोक्ताओं के लिए आपूर्ति में कटौती की है। संकट से पहले फरवरी में जहां रोजाना लगभग 77,000 सिलेंडर बिक रहे थे, वहीं पिछले दो-तीन सप्ताह में यह संख्या एक लाख से अधिक हो गई है। बयान के अनुसार, घरेलू एलपीजी आपूर्ति कुल मिलाकर स्थिर बनी हुई है और कहीं भी कमी की सूचना नहीं है। 11 अप्रैल को 52 लाख से अधिक सिलेंडर वितरित किए गए। मांग का लगभग 98 प्रतिशत हिस्सा ऑनलाइन बुकिंग के जरिए पूरा हो रहा है, जबकि वितरण में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए 93 प्रतिशत लेनदेन में सत्यापन प्रणाली लागू की गई है। वाणिज्यिक एलपीजी की उपलब्धता भी अब संकट-पूर्व स्तर के करीब 70 प्रतिशत तक बहाल हो गई है। सरकारी तेल विपणन कंपनियां इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड राज्य सरकारों के साथ मिलकर आपूर्ति को सुचारु बना रही हैं। बयान में कहा गया है कि रिफाइनरियां उच्च क्षमता पर काम कर रही हैं और कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। साथ ही, घरेलू एलपीजी उत्पादन भी बढ़ाया गया है। - हैदराबाद। देश की प्रमुख कार विनिर्माता मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड वर्ष 2031 तक चार नए इलेक्ट्रिक वाहन पेश करेगी। कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी। कंपनी ने इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में एक अहम उपलब्धि हासिल करते हुए आयोजित एक कार्यक्रम में एक ही दिन में ई-विटारा की 108 इकाइयां ग्राहकों को सौंपी। मारुति सुजुकी के वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी ( विपणन एवं बिक्री) पार्थो बनर्जी ने कहा कि यह ग्राहकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है, क्योंकि कंपनी स्वच्छ परिवहन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। उन्होंने यह भी कहा कि 2031 तक कंपनी बैटरी आधारित इलेक्ट्रिक वाहन खंड में भी अग्रणी बनने का लक्ष्य रखती है और बाजार की मांग के अनुसार अपनी रणनीति तय करेगी। पश्चिम एशिया संकट के प्रभाव पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि के कारण कंपनी को वाहनों के दाम बढ़ाने होंगे, हालांकि बढ़ोतरी की सीमा जल्द घोषित की जाएगी। उन्होंने बताया कि पिछले वित्त वर्ष में कंपनी ने करीब 4.50 लाख वाहनों का निर्यात किया, जबकि पश्चिम एशिया संकट के प्रभाव का अभी आकलन किया जा रहा है। कंपनी के अनुसार, अब तक ई-विटारा की 25,000 से अधिक इकाइयों का 44 देशों में निर्यात किया जा चुका है और इसे 100 से अधिक देशों में भेजने की योजना है।
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नयी दिल्ली. राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में बृहस्पतिवार को चांदी की कीमत 7,800 रुपये घटकर 2.43 लाख रुपये प्रति किलोग्राम रह गई, जबकि सोना 1.54 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम रहा। ऐसा पश्चिम एशिया में युद्धविराम के टिकने को लेकर चिंताओं के बीच निवेशकों द्वारा की गई मुनाफावसूली के कारण हुआ। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, चांदी बुधवार के 2,51,000 रुपये प्रति किलोग्राम के बंद स्तर से 7,800 रुपये या 3.10 प्रतिशत घटकर 2,43,200 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स मिलाकर) रह गई। 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना भी 1,500 रुपये या करीब एक प्रतिशत घटकर 1,54,900 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी टैक्स मिलाकर) रह गया। पिछले बाजार सत्र में सोने की कीमत 1,56,400 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुई थी। विश्लेषकों ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम को लेकर अनिश्चितता के कारण कीमती धातुओं में बिकवाली का दबाव देखा गया, जिससे निवेशकों की कारोबारी धारणा प्रभावित हुई। एचडीएफसी सिक्योरिटीज़ में वरिष्ठ विश्लेषक (जिंस) सौमिल गांधी ने कहा, ''बृहस्पतिवार को सोने की कीमतों में गिरावट आई, जिससे पिछले सत्र की ज़्यादातर बढ़त लुप्त हो गई, क्योंकि निवेशकों ने पश्चिम एशिया में युद्धविराम का फिर से मूल्यांकन किया।'' उन्होंने कहा कि चल रही छिटपुट लड़ाई, होर्मुज जलडमरूमध्य के फिर से खुलने को लेकर अनिश्चितता, और टैंकर की आवाजाही रुकने की खबरों के साथ-साथ कथित युद्धविराम उल्लंघन ने बाजार की कारोबारी धारणा पर असर डाला। मिराए एसेट शेयरखान में जिंस प्रमुख प्रवीण सिंह ने कहा कि सोना 4,730 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है और शुक्रवार को जारी होने वाली मार्च के अमेरिकी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के आंकड़ों का इसपर असर पड़ने की संभावना है। उन्होंने आगे कहा कि विदेशी कारोबार में सोने की कीमतें जल्द ही 5,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती हैं।
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नयी दिल्ली. विश्व बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान मामूली बढ़ाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया है। साथ ही उसने कहा कि पश्चिम एशिया संकट से उत्पन्न चुनौतियां वृद्धि पर असर डाल सकती हैं। हालांकि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) दरों में कटौती से शुरुआती महीनों में उपभोक्ता मांग को सहारा मिलेगा। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने देश की आर्थिक वृद्धि के 6.9 प्रतिशत, आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी) ने 6.1 प्रतिशत और मूडीज रेटिंग्स ने छह प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। विश्व बैंक ने बुधवार को जारी अपनी 'दक्षिण एशिया आर्थिक अद्यतन रिपोर्ट' में कहा कि भारत की वृद्धि दर वित्त वर्ष 2024-25 के 7.1 प्रतिशत से बढ़कर 2025-26 में 7.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इसका मुख्य कारण मजबूत घरेलू मांग और निर्यात की मजबूती है। रिपोर्ट के अनुसार, निजी उपभोग में वृद्धि विशेष रूप से मजबूत रही जिसे कम मुद्रास्फीति एवं माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के युक्तिकरण से समर्थन मिला। विश्व बैंक ने कहा, '' वृद्धि दर के 2026-27 में घटकर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है जो पश्चिम एशिया संघर्ष से उत्पन्न प्रतिकूल परिस्थितियों को दर्शाता है।'' रिपोर्ट के अनुसार जीएसटी दरों में कटौती से वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में उपभोक्ता मांग को सहारा मिलेगा, लेकिन ऊंची वैश्विक ऊर्जा कीमतें महंगाई बढ़ा सकती हैं और परिवारों की उपलब्ध आय पर दबाव डाल सकती हैं। इसके अलावा रसोई गैस एवं उर्वरक पर अधिक सब्सिडी खर्च के कारण सरकारी खपत वृद्धि में नरमी आने की उम्मीद है। बढ़ती अनिश्चितता तथा कच्चे माल की लागत में वृद्धि के कारण निवेश वृद्धि भी धीमी पड़ सकती है। विश्व बैंक ने कहा कि अमेरिका और यूरोपीय संघ के बाजारों तक भारत की निर्यात पहुंच में सुधार का लाभ मुख्य व्यापारिक साझेदार देशों में धीमी वृद्धि से कुछ हद तक प्रभावित हो सकता है। विश्व बैंक ने जनवरी में जारी 'ग्लोबल इकोनॉमिक प्रॉस्पेक्ट्स रिपोर्ट' में भारत की वृद्धि दर 2026-27 में 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था। रिपोर्ट में कहा गया कि पश्चिम एशिया संकट का असर अत्यधिक अनिश्चित है और अन्य आकलनकर्ताओं ने 2026-27 के लिए वृद्धि अनुमान 5.9 प्रतिशत से 6.7 प्रतिशत के बीच कर दिए हैं। उल्लेखनीय है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर सैन्य हमले किए थे जिसके बाद तेहरान ने जवाबी कार्रवाई की। हालांकि आठ अप्रैल को ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमति बनी जिससे पश्चिम एशिया में फैले संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा बाजार में आई उथल-पुथल में कुछ राहत की उम्मीद जगी है।
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-देखिए क्या है दाम
नयी दिल्ली. आयशर मोटर्स समूह की दोपहिया कंपनी रॉयल एनफील्ड ने बृहस्पतिवार को अपना पहला इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन 'फ्लाइंग फ्ली सी6' पेश किया। कंपनी ने शेयर बाजार को दी एक सूचना में कहा कि 'फ्लाइंग फ्ली' उसका नया 'सिटी+ इलेक्ट्रिक मोबिलिटी' ब्रांड है। इस इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल की शोरूम कीमत 2.79 लाख रुपये रखी गई है, जबकि बैटरी अलग से लेने के विकल्प के साथ यह 1.99 लाख रुपये में उपलब्ध होगी। रॉयल एनफील्ड के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) बी गोविंदराजन ने कहा, ''यह कंपनी के 125वें वर्ष में इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल की दिशा में पहला कदम है, जो इसकी विरासत और नए दौर की शुरुआत को दर्शाता है।'' उन्होंने कहा कि कंपनी एक सदी से अधिक समय से बेहतर मोटरसाइकिल अनुभव देने पर केंद्रित रही है और 'फ्लाइंग फ्ली' के साथ वह इसी दर्शन को इलेक्ट्रिक युग में आगे बढ़ा रही है। रॉयल एनफील्ड ने कहा कि इस इलेक्ट्रिक मॉडल की आपूर्ति मई, 2026 के अंत से शुरू होगी।
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मुंबई. रुपया बुधवार को 47 पैसे की बढ़त के साथ 92.59 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर रहा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के खिलाफ दो सप्ताह के लिए सैन्य हमले स्थगित करने की घोषणा करने और भारतीय रिजर्व बैंक के प्रमुख नीतिगत दरों को अपरिवर्तित रखने के फैसले से घरेलू मुद्रा को बल मिला है। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92.92 पर खुला। यह शुरुआती कारोबार में 92.56 प्रति डॉलर तक पहुंचा और अंत में 92.59 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर रहा जो पिछले बंद भाव से 47 पैसे की बढ़त है। रुपया मंगलवार को 93.06 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.96 प्रतिशत की गिरावट के साथ 98.90 पर रहा। घरेलू शेयर बाजारों में सेंसेक्स 2,946.32 अंक चढ़कर 77,562.90 अंक पर जबकि निफ्टी 873.70 अंक बढ़त के साथ 23,997.35 अंक पर बंद हुआ। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव 13.73 प्रतिशत की गिरावट के साथ 94.27 डॉलर प्रति बैरल रहा।
शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) मंगलवार को शुद्ध बिकवाल रहे थे और उन्होंने 8,692.11 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। -
मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को भरोसा जताया कि मुद्रास्फीति की अनुकूल स्थिति को देखते हुए ब्याज दरें मध्यम से लंबी अवधि में नीचे बनी रहेंगी। मल्होत्रा ने द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद संवाददाताओं से कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था अत्यंत मजबूत है और इसमें बाहरी झटकों या प्रतिकूल परिस्थितियों से उबरने की जबरदस्त क्षमता है। उन्होंने कहा कि देश की बुनियादी आर्थिक स्थिति बेहतर है, जिसके कारण वृद्धि को गति मिल रही है और कीमतों पर दबाव भी कम है। गवर्नर ने कहा, "इस बात की पूरी संभावना है कि अल्पावधि से मध्यम अवधि में भी ब्याज दरें कम बनी रहेंगी।" आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। वहीं, चालू वित्त वर्ष के लिए मुद्रास्फीति 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो रिजर्व बैंक के मुद्रास्फीति के लिए निर्धारित दो से छह प्रतिशत लक्ष्य के भीतर है। इससे पहले, रिजर्व बैंक की छह-सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने सर्वसम्मति से 'रेपो दर' को 5.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया। यह फैसला ईरान संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार पर पड़ने वाले प्रभावों को देखते हुए लिया गया है। आरबीआई गवर्नर ने स्पष्ट किया कि मौद्रिक नीति की समीक्षा करते समय अमेरिका और ईरान के बीच हुए दो सप्ताह के युद्धविराम को भी ध्यान में रखा गया है। ब्याज दरों में कटौती का लाभ ग्राहकों तक पहुंचाने के मुद्दे पर मल्होत्रा ने कहा कि आरबीआई की तरफ से रेपो दर में की गई कुल 1.25 प्रतिशत अंकों की कटौती के मुकाबले बैंकों ने ऋण पर लगभग 0.90 प्रतिशत अंकों की कटौती की है, जो संतोषजनक है। रुपये की स्थिति पर उन्होंने कहा कि मुद्रा बाजार में हाल ही में उठाए गए कदम रुपये की विनिमय दर में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए थे और ये स्थायी उपाय नहीं हैं।
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नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को भारत की आर्थिक वृद्धि दर को लेकर नया अनुमान जारी किया है। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026 के लिए वास्तविक जीडीपी ग्रोथ को 7.4% से बढ़ाकर 7.6% कर दिया है, हालांकि भू-राजनीतिक तनाव से जुड़े जोखिमों को लेकर चिंता भी जताई है। आरबीआई के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में यह वृद्धि मजबूत सर्विस सेक्टर, मैन्युफैक्चरिंग में विस्तार और घरेलू मांग के चलते संभव होगी। यह रुझान देश की आर्थिक मजबूती को दर्शाता है।
आरबीआई ने वित्त वर्ष 2027 के लिए जीडीपी ग्रोथ 6.9% रहने का अनुमान जताया है। यह संकेत देता है कि बाहरी जोखिम और लागत के दबाव के कारण वृद्धि दर में कुछ नरमी आ सकती है। यह जानकारी आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के बाद दी। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के लिए ग्रोथ अनुमान 6.9% से घटाकर 6.8% कर दिया गया है, जबकि दूसरी तिमाही का अनुमान 7% से घटाकर 6.7% किया गया है। इसके पीछे ईरान से जुड़े वैश्विक तनाव और बढ़ते दबाव को प्रमुख कारण बताया गया है। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि ऊर्जा की कीमतों में तेज बढ़ोतरी से महंगाई का खतरा बढ़ गया है, जिससे वैश्विक विकास पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।वित्त वर्ष 2026 की दिसंबर तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 7.8% रही, जो पिछली तिमाही के 8.4% से कम है। आरबीआई को उम्मीद है कि निजी क्षेत्र का निवेश आगे भी बढ़ता रहेगा, क्योंकि उद्योगों में क्षमता उपयोग का स्तर ऊंचा बना हुआ है। गवर्नर ने यह भी कहा कि बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त लिक्विडिटी सुनिश्चित की जाएगी ताकि अर्थव्यवस्था की जरूरतों को पूरा किया जा सके। वित्त वर्ष 2027 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) मुद्रास्फीति 4.6% रहने का अनुमान है। तिमाही आधार पर पहली तिमाही में 4%, दूसरी में 4.4%, तीसरी में 5.2% और चौथी तिमाही में 4.7% रहने की संभावना जताई गई है। 3 अप्रैल तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 697.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। आरबीआई गवर्नर के अनुसार, पिछले साल के मुकाबले नेट एफडीआई में सुधार हुआ है और भारत ग्रीनफील्ड निवेश के लिए एक आकर्षक गंतव्य बना हुआ है। - नयी दिल्ली. दूरसंचार नियामक ट्राई ने मंगलवार को दूरसंचार परिचालकों के लिए यह अनिवार्य किये जाने का प्रस्ताव किया कि वे केवल कॉल और एसएमएस सेवाओं के लिए कम कीमत पर मोबाइल प्लान जारी करें। इसकी कीमत मौजूदा विशेष शुल्क वाउचर की तुलना में कम हो, जिनमें डेटा (इंटरनेट) सुविधा भी शामिल है। दूरसंचार उपभोक्ता संरक्षण (तेरहवां संशोधन) विनियमन, 2026 के मसौदे में ट्राई ने कहा कि उसने प्रत्येक दूरसंचार परिचालक के लिए कम से कम एक विशेष शुल्क वाउचर जारी करना अनिवार्य किया है, जो केवल कॉल (वॉयस) और एसएमएस के लिए हो। लेकिन कंपनियों ने लंबी वैधता वाले कुछ ही प्लान जारी किए। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने यह भी पाया कि केवल वॉयस और एसएमएस पैक को पेश करते समय, दूरसंचार परिचालकों ने शुरू में अपेक्षाकृत अधिक कीमत तय की और प्लान से डेटा लाभ हटाने के अनुपात में इन कीमतों को कम नहीं किया गया। नियामक ने कहा कि पिछले बदलाव का परिणाम संतोषजनक नहीं रहा है और इसलिए उसने एक नया प्रस्ताव पेश किया है। ट्राई ने कहा, ''प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य इस समस्या का समाधान करना है। इसके तहत, वॉयस, एसएमएस और डेटा वाले विशेष शुल्क वाउचर (चाहे उनमें अतिरिक्त सेवाएं हों या न हों) के लिए दी जाने वाली प्रत्येक वैधता अवधि के लिए, सेवा प्रदाता को केवल वॉयस और एसएमएस के लिए एक अलग विशेष शुल्क वाउचर भी देना अनिवार्य होगा।'' नियामक ने कहा कि इस संशोधन से पारदर्शिता बढ़ेगी, अनावश्यक सेवाओं की जबरन खरीद पर रोक लगेगी और यह सुनिश्चित होगा कि जिन उपभोक्ताओं को डेटा की आवश्यकता नहीं है, उन्हें इसके लिए भुगतान के लिए बाध्य नहीं किया जाए। नियामक ने कहा, ''साथ ही, इससे उपभोक्ताओं को केवल वॉयस और एसएमएस वाले पैक के अधिक विकल्प मिलेंगे, जिससे वे डेटा-युक्त पैक के बराबर हो जाएंगे।'' ट्राई ने इस प्रस्ताव पर संबंधित पक्षों से 28 अप्रैल तक सुझाव देने को कहा है।



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