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नई दिल्ली। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने सोमवार को कहा कि नियामक पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (पीएमएस), लिस्टिंग ऑब्लिगेशन एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स (एलओडीआर) नियमों और सेटलमेंट ढांचे की समीक्षा करेगा। इन विषयों पर कंसल्टेशन पेपर जून में जारी किया जा सकता है।
पोर्टफोलियो मैनेजर्स कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए पांडेय ने कहा कि पीएमएस फ्रेमवर्क में निवेशक सबसे अहम पहलू है। इस सेगमेंट में पारदर्शिता पहले से बेहतर हुई है, लेकिन बाजार में बदलाव और नए निवेश उत्पादों के कारण मौजूदा नियमों की समीक्षा करना जरूरी हो गया है। उन्होंने बताया कि सेबी बाजार की गड़बड़ियों का वास्तविक समय में पता लगाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल की संभावनाएं तलाश रहा है, ताकि तुरंत समाधान किया जा सके।पांडेय ने कहा कि सेबी और भारतीय रिजर्व बैंक बाजार को गहराई देने के उद्देश्य से कॉरपोरेट बॉन्ड इंडेक्स या उससे जुड़े उत्पाद विकसित करने पर काम कर रहे हैं। इन्हें एक्सचेंज पर ट्रेड किया जा सकेगा, जिससे निवेशकों के लिए अधिक विकल्प उपलब्ध होंगे। उन्होंने ट्रेडिंग से जुड़ी फंडिंग के नियमों में बदलाव के संकेत भी दिए। आरबीआई के लेंडिंग नियमों की समीक्षा कर सेबी अपनी राय आरबीआई के साथ साझा करेगा। इससे संकेत मिलता है कि मार्जिन ट्रेडिंग या लोन लेकर ट्रेडिंग से जुड़े नियम और सख्त हो सकते हैं। पांडेय ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेज बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना हुआ है और जल्द ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। इस तेज आर्थिक वृद्धि से देश में निवेशकों की संख्या भी बढ़ने की उम्मीद है। -
नई दिल्ली। मुंबई में आयोजित पोर्टफोलियो मैनेजर्स कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए Securities and Exchange Board of India (SEBI) के चेयरमैन तुहिन कांता पांडे ने कहा कि भारत प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ने वाला देश बना हुआ है और दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने कहा कि इस तेज आर्थिक वृद्धि से देश में समृद्ध (Affluent) निवेशकों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। उनके अनुसार, उच्च-नेटवर्थ निवेशक पारंपरिक निवेश विकल्पों से आगे बढ़कर पेशेवर रूप से प्रबंधित और अधिक परिष्कृत निवेश समाधान चाहते हैं, जो मानकीकृत उत्पादों से अलग हों। पांडेय ने बताया कि बदलती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए SEBI LODR, सेटलमेंट और PMS नियमों की समीक्षा कर रहा है। यह समीक्षा उद्योग और निवेशकों से मिले फीडबैक के आधार पर तर्कसंगत (rationalization) ढांचे के लिए की जा रही है, ताकि नियामकीय ढांचा समकालीन और प्रभावी बना रहे। उन्होंने स्पष्ट किया कि PMS नियमों की समीक्षा 2020 के बाद पहचानी गई कुछ जरूरतों के आधार पर की जा रही है, हालांकि इसकी अंतिम रूपरेखा अभी तय नहीं हुई है। प्रस्तावित बदलावों पर सार्वजनिक सुझाव लेने के लिए एक परामर्श पत्र (Consultation Paper) जारी किया जाएगा। बाजार की स्थिरता और तकनीक के उपयोग पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि SEBI बाजार में गड़बड़ियों की “रियल-टाइम डिटेक्शन” के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग की संभावनाएं तलाश रहा है, ताकि केवल प्रतिक्रियात्मक कार्रवाई के बजाय त्वरित निगरानी संभव हो सके। उन्होंने बताया कि SEBI और RBI संयुक्त रूप से कॉरपोरेट बॉन्ड इंडेक्स और उससे जुड़े उत्पाद विकसित करने पर काम कर रहे हैं, जिन्हें स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेड किया जा सकेगा। यह कदम डेट मार्केट को गहराई देने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है, क्योंकि यह उत्पाद दोनों नियामकों के अधिकार क्षेत्र में आता है।
उद्योग से जुड़े मुद्दों पर उन्होंने कहा कि SEBI गिरवी (Collateral) और बैंक गारंटी से संबंधित RBI दिशा-निर्देशों पर ब्रोकरों के प्रतिनिधित्व की समीक्षा करेगा, ताकि प्रोपाइटरी ट्रेडिंग को सुगम बनाने के लिए संतुलित दृष्टिकोण अपनाया जा सके। पांडेय के अनुसार, भारत की आर्थिक प्रगति निवेश परिदृश्य में ऐतिहासिक बदलाव लाने जा रही है, जिसके लिए नियामकीय ढांचे को भी समयानुकूल बनाना आवश्यक है। -
नई दिल्ली। एप्पल का आईफोन 2025 में भारत से सबसे ज्यादा निर्यात किया जाने वाला उत्पाद बन गया है और इस दौरान करीब 23 अरब डॉलर के आईफोन (अधिकतर अमेरिका को) का निर्यात किया गया है। यह जानकारी इंडस्ट्री डेटा से सामने आई। इंडस्ट्री से जुड़े लोगों की ओर से कहा गया कि एप्पल के निर्यात में यह उछाल प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) स्कीम जैसे उत्पादन प्रोत्साहनों और चीनी आपूर्तिकर्ताओं से विविधीकरण के कारण आया।
जनवरी-दिसंबर की अवधि में कुल 30.13 अरब डॉलर के निर्यात के साथ, स्मार्टफोन पहली बार भारत की शीर्ष निर्यात श्रेणी बन गई है, जिन्होंने ऑटोमोबाइल डीजल ईंधन को पीछे छोड़ दिया है। कुल स्मार्टफोन निर्यात में एप्पल की हिस्सेदारी 76 प्रतिशत रही। एप्पल की पांच वर्षीय पीएलआई अवधि मार्च 2026 में समाप्त होने वाली है।देश में एप्पल के मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम में पांच आईफोन असेंबली प्लांट शामिल हैं, जिनमें से तीन टाटा समूह की इकाइयों द्वारा और दो फॉक्सकॉन द्वारा संचालित हैं और इन्हें लगभग 45 कंपनियों की आपूर्ति श्रृंखला का समर्थन प्राप्त है, जिनमें कई एमएसएमई शामिल हैं जो घरेलू और वैश्विक परिचालन के लिए पुर्जे की आपूर्ति करते हैं। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन उत्पादक बन गया है, जहां घरेलू स्तर पर बिकने वाले 99 प्रतिशत से अधिक फोन ‘मेड इन इंडिया’ हैं। इससे विनिर्माण मूल्य श्रृंखला में भारत का स्थान और भी बढ़ गया है।काउंटरपॉइंट रिसर्च की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय उपभोक्ताओं के स्मार्टफोन खरीदने के पैटर्न में भी बड़ा बदलाव आया है, अब बजट की जगह प्रीमियम फोन अधिक बिक रहे हैं। 2025 में एप्पल का आईफोन 16 का बेस वेरिएंट सबसे अधिक बिकने वाला स्मार्टफोन मॉडल बनकर उभरा है। दिसंबर तिमाही में, एप्पल ने अमेरिका, यूरोप, जापान और शेष एशिया प्रशांत क्षेत्र में राजस्व के सर्वकालिक नए रिकॉर्ड बनाए।एप्पल के सीईओ टिम कुक ने हाल ही में आयोजित अर्निंग्स कॉल में कहा, “हमने उभरते बाजारों, जिनमें भारत भी शामिल है, में अपनी गति बनाए रखी है, जहां हमने राजस्व में दो अंकों की मजबूत वृद्धि दर्ज की है।” कंपनी 26 फरवरी को मुंबई में एक और स्टोर खोलने जा रही है। एप्पल के सीईओ ने कहा कि उन्होंने भारत में दिसंबर तिमाही के दौरान राजस्व का एक नया रिकॉर्ड बनाया।उन्होंने कहा, “भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्मार्टफोन बाजार और चौथा सबसे बड़ा पीसी बाजार है।” उन्होंने आगे कहा कि कंपनी ने “आईफोन, मैक और आईपैड पर राजस्व के नए रिकॉर्ड बनाए हैं, और सेवाओं पर राजस्व का सर्वकालिक नया रिकॉर्ड बनाया है।” - नयी दिल्ली ।अरबपति मुकेश अंबानी और गौतम अदाणी की अगुवाई वाले उद्योग समूहों ने भारत को कृत्रिम मेधा (एआई) विकास के केंद्र के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से अवसंरचना निर्माण में कुल 210 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन अंबानी ने यहां आयोजित 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट' के दौरान अगले सात वर्षों में गुजरात के जामनगर में गीगावाट-स्तर के एआई-सक्षम डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए 10 लाख करोड़ रुपये (करीब 110 अरब अमेरिकी डॉलर) के निवेश की घोषणा की। यह परियोजना 10 गीगावाट तक के हरित ऊर्जा अधिशेष का उपयोग करेगी और दूरसंचार एवं डिजिटल सेवा प्रदाता जियो के नेटवर्क के साथ एकीकृत 'एज-कम्प्यूट' परत के माध्यम से देशभर में बहुत कम देरी वाली एआई सेवाएं उपलब्ध कराएगी।अंबानी ने कहा, ''हमारा संकल्प स्पष्ट है, जिस तरह आज कनेक्टिविटी हर जगह उपलब्ध है, उसी तरह एआई को भी सर्वसुलभ बनाना है। जब कंप्यूटिंग क्षमता एक बुनियादी ढांचे के रूप में विकसित हो जाएगी, तो नवाचार अपने-आप तेजी से बढ़ेगा।" दूसरी तरफ, अदाणी की अगुवाई वाले अदाणी समूह ने वर्ष 2035 तक नवीकरणीय ऊर्जा आधारित बहुत बड़े स्तर के एआई-सक्षम डेटा सेंटर विकसित करने के लिए 100 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की योजना पेश की। यह दुनिया की सबसे बड़ी एकीकृत ऊर्जा एवं कंप्यूटिंग प्रतिबद्धता है। इस पहल से सर्वर विनिर्माण, क्लाउड मंच और सहायक उद्योगों में अतिरिक्त 150 अरब डॉलर के निवेश को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। इससे भारत में लगभग 250 अरब डॉलर की एआई अवसंरचना पारिस्थितिकी विकसित हो सकती है। अदाणी समूह के कार्यकारी निदेशक जीत अदाणी ने कहा कि भारत को आयात पर निर्भर रहने के बजाय अपना खुद का एआई ढांचा विकसित करना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि एआई आने वाले समय में राष्ट्रीय संप्रभुता को नए सिरे से परिभाषित करेगा। सम्मेलन के दौरान हुई अन्य प्रमुख घोषणाओं में माइक्रोसॉफ्ट की इस दशक के अंत तक 'वैश्विक दक्षिण' में एआई पहुंच बढ़ाने के लिए 50 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता शामिल है। कंपनी ने पिछले वर्ष भारत में एआई क्षेत्र में 17.5 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की घोषणा की थी। इसी क्रम में गूगल के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) सुंदर पिचाई ने भारत, अमेरिका और अन्य क्षेत्रों के बीच एआई संपर्क को सुदृढ़ करने के लिए एक नया समुद्री केबल बिछाने की घोषणा की। इसके अलावा, योटा डेटा सर्विसेज ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के निकट स्थापित किए जा रहे एआई कंप्यूटिंग हब के लिए एनवीडिया के नवीनतम चिप्स पर दो अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक खर्च करने की योजना बनाई है। साथ ही, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) ने वैश्विक एआई अवसंरचना पहल 'स्टारगेट' के तहत अपने डेटा सेंटर कारोबार के लिए ओपनएआई को पहला ग्राहक बनाया है। वहीं, बुनियादी ढांचा कंपनी लार्सन एंड टुब्रो ने बड़े पैमाने पर एआई कार्यभार का समर्थन करने के लिए एआई-सक्षम डेटा सेंटर अवसंरचना और उन्नत कंप्यूटिंग मंच विकसित करने हेतु एनवीडिया के साथ प्रस्तावित संयुक्त उद्यम की घोषणा की है।
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नयी दिल्ली. माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट' में मुख्य भाषण नहीं देंगे। गेट्स फाउंडेशन ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर बृहस्पतिवार को जानकारी दी, '' गेट्स फाउंडेशन की ओर से अफ्रीका एवं भारत कार्यालयों के अध्यक्ष अंकुर वोरा प्रतिनिधित्व करेंगे, जो आज बाद में शिखर सम्मेलन में भाषण देंगे।'' फाउंडेशन ने कहा, '' गहन विचार-विमर्श के बाद और यह सुनिश्चित करने के लिए कि एआई शिखर सम्मेलन की प्रमुख प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित रहे, गेट्स अपना मुख्य भाषण नहीं देंगे।'' गेट्स फाउंडेशन ने कहा कि वह भारत में साझा विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के अपने कार्यों के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।
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-सोना 1,950 रुपये मजबूत
नयी दिल्ली. देश की राजधानी में बृहस्पतिवार को बहुमूल्य कीमती धातुओं की कीमतों में सात प्रतिशत से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई। चांदी जहां 2.6 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई, वहीं सोना 1.58 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम की ऊंचाई पर पहुंच गया। यह उछाल वैश्विक रुख तथा अमेरिका एवं ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच सुरक्षित निवेश वाली संपत्तियों की मांग में बढ़ोतरी की वजह से आया। स्थानीय बाजार के जानकारों के मुताबिक, चांदी बुधवार के 2,46,000 रुपये प्रति किलोग्राम के बंद स्तर से 18,000 रुपये या 7.32 प्रतिशत बढ़कर 2,64,000 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी कर मिलाकर) हो गई। 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना भी 1,950 रुपये या 1.24 प्रतिशत बढ़कर 1,58,650 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी कर मिलाकर) हो गया। पिछले सत्र में यह 1,56,700 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में, हाजिर चांदी 1.03 प्रतिशत बढ़कर 77.97 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी, जबकि सोना थोड़ा बढ़कर 4,991.24 डॉलर प्रति औंस पर था। एचडीएफसी सिक्योरिटीज में वरिष्ठ विश्लेषक (जिंस), सौमिल गांधी ने कहा, ''ईरान के खिलाफ संभावित अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की बढ़ती अटकलों के बीच भू-राजनीतिक जोखिम बढ़ने के कारण सुरक्षित निवेश परिसंपत्तियों की मांग में नई लहर से समर्थन पाकर बृहस्पतिवार को सोने की कीमतें बढ़कर लगभग 5,000 डॉलर प्रति औंस हो गईं।'' उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन के बीच नई बातचीत के विफल होने से भी वैश्विक अनिश्चितता फिर से बढ़ गई है, जिससे निवेशक सुरक्षित निवेश वाली परिसंपत्तियों में आवंटन बढ़ा रहे हैं। ऑगमोंट में शोध प्रमुख, रेनिशा चैनानी ने कहा कि निवेशक अमेरिकी जीडीपी और व्यक्तिगत खपत खर्च (पीसीई) मुद्रास्फीति आंकड़े सहित मुख्य वृहद आर्थिक आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं, जो आने वाले महीनों में फेडरल रिजर्व की ब्याज दर की उम्मीदों को आकार दे सकता है। -
नयी दिल्ली. दिग्गज आईटी कंपनी इन्फोसिस के चेयरमैन नंदन नीलेकणि ने बृहस्पतिवार को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई) के लाभ समाज के व्यापक वर्ग तक नहीं पहुंचने पर इसके खिलाफ प्रतिरोध पैदा हो सकता है, जो इस प्रौद्योगिकी की प्रगति को प्रभावित कर सकता है। नीलेकणि ने यहां आयोजित 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' के एक संवाद सत्र में कहा कि फिलहाल एआई के विकास में 'रेस टू द टॉप' (बेहतर प्रौद्योगिकी की होड़) और 'रेस टू द बॉटम' (नकारात्मक उपयोग में तेजी) दोनों तरह की स्थितियां हैं जिनमें दूसरा पहलू ज्यादा तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि एआई का उपयोग समाज के लिए उपयोगी साबित नहीं हुआ तो इसके प्रति लोगों की धारणा नकारात्मक हो सकती है। नीलेकणि ने कहा, ''मेरा मानना है कि हम सभी, जो एआई को मानवता के लिए उपयोगी बनाना चाहते हैं, उन्हें इसके प्रसार को सुनिश्चित करने के लिए अपने प्रयास बढ़ाने होंगे और उन्हें दोगुना करना होगा। ऐसा नहीं होने पर इसके नतीजे बहुत मुश्किल हो सकते हैं क्योंकि इसके खिलाफ विरोध पैदा होने की आशंका है।'' उन्होंने कहा कि एआई के कुछ मौजूदा उपयोग जैसे डीपफेक सामग्री या बढ़ती बिजली लागत जैसी चिंताएं लोगों में इसके प्रति असंतोष पैदा कर सकती हैं। नीलेकणी ने कहा, ''जिस तरह शारीरिक श्रम वाले कामगारों में असंतोष ने वैश्वीकरण को झटका दिया था। उसी तरह दफ्तरों में काम करने वाले कर्मचारियों में उपजा असंतोष एआई की प्रगति को प्रभावित कर सकता है।'' उन्होंने कहा कि एआई को सफल बनाने के लिए जरूरी है कि इसका लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे। भारत के पास आधार और एकीकृत भुगतान प्रणाली (यूपीआई) जैसी पहल के जरिये बड़ी आबादी तक प्रौद्योगिकी पहुंचाने का अनुभव है। नीलेकणि ने कहा कि एआई को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए भाषा की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। लोगों को कंप्यूटर से अपनी स्थानीय भाषा या बोलियों में संवाद करने की सुविधा मिलनी चाहिए, ताकि प्रौद्योगिकी का उपयोग ज्यादा समावेशी बन सके। इस संवाद सत्र में शामिल एंथ्रोपिक कंपनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) डारियो अमोडेई ने कहा कि 'वैश्विक दक्षिण' (दक्षिण गोलार्द्ध के विकासशील देशों) में एआई के लाभ अधिक स्पष्ट हो सकते हैं और भारत की तकनीकी क्षमता तथा इसे अपनाने की तत्परता आर्थिक वृद्धि को गति दे सकती है।
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नयी दिल्ली। ब्रिटेन की बहुराष्ट्रीय उपभोक्ता सामान कंपनी यूनिलीवर ने कहा है कि अमेरिका के बाद उसके दूसरे सबसे बड़े बाजार भारत में कारोबार की बुनियादी स्थिति में सुधार हो रहा है। चौथी तिमाही के नतीजों के दौरान यूनिलीवर ने बताया कि होम केयर खंड में कंपनी ने 4.7 प्रतिशत की अंतर्निहित बिक्री वृद्धि और बिक्री की मात्रा में चार प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। कंपनी के अनुसार, इसे भारत में उत्पादों की खपत में निरंतर मजबूती से समर्थन मिला है। यूनिलीवर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) फर्नांडो फर्नांडीस ने चौथी तिमाही के वित्तीय नतीजों पर चर्चा के दौरान कहा, ''भारत इस गति में एक प्रमुख योगदानकर्ता रहा है। होम केयर खंड में फैब्रिक वॉश और घरेलू देखभाल के मजबूत प्रदर्शन के दम पर भारत में बिक्री की मात्रा में वृद्धि मध्यम एकल अंक में रही और कंपनी ने इसमें अब तक की सर्वाधिक बाजार हिस्सेदारी हासिल की है।'' फर्नांडीस ने कहा कि वैश्विक स्तर पर अमेरिका और भारत यूनिलीवर के लिए स्पष्ट रूप से 'एंकर मार्केट' (प्रमुख आधार बाजार) हैं।
- नयी दिल्ली । हाल ही में माल एवं सेवा कर (जीएसटी) दरों में किए गए बदलाव कैंसर उपचार को अधिक किफायती और सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव का संकेत देते हैं। एम्स के शोधकर्ताओं ने यह बात कही है। इन सुधारों में कर संरचना को सरल बनाना, दवाओं और चिकित्सा उपकरणों पर कर हटाना तथा तंबाकू उत्पादों पर कर में वृद्धि शामिल है। दिल्ली में स्थित एम्स के डॉ. बीआर अंबेडकर इंस्टीट्यूट रोटरी कैंसर अस्पताल के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग के ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. अभिषेक शंकर और वैज्ञानिक डॉ. वैभव साहनी ने 'फ्रंटियर' में प्रकाशित एक टिप्पणी में कहा कि इन सुधारों के दौरान कैंसर मरीजों की आर्थिक समस्याओं का ध्यान रखा गया है और उपचार खर्च की वहनीयता से जुड़ी लंबे समय से चली आ रही खामियों को दूर करने का प्रयास किया गया। शोधकर्ताओं ने उल्लेख किया कि जीएसटी परिषद ने अपनी 56वीं बैठक में कैंसर उपचार में उपयोग होने वाली दवाओं समेत 33 जीवनरक्षक दवाओं को जीएसटी से पूर्णतः छूट देने की सिफारिश की। इन दवाओं पर पहले 12 प्रतिशत जीएसटी लगता था, जिसे अब शून्य कर दिया गया है। इसके अलावा, दुर्लभ बीमारियों और कैंसर के उपचार में इस्तेमाल होने वाली तीन महत्वपूर्ण दवाओं पर पहले पांच प्रतिशत जीएसटी था, जिसे घटाकर शून्य कर दिया गया है। जीएसटी परिषद ने व्यक्तिगत स्वास्थ्य और जीवन बीमा पॉलिसियों पर भी जीएसटी नहीं लगाने की सिफारिश की। इन पॉलिसियों पर पहले 18 प्रतिशत जीएसटी लागू था। शोधकर्ताओं ने कहा कि इस नीतिगत सुधार का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसमें कुछ ऐसी पेटेंट दवाएं भी शामिल हैं, जिनका कोई जेनेरिक विकल्प उपलब्ध नहीं है। एक अन्य महत्वपूर्ण कदम के तहत, परिषद ने तंबाकू उत्पादों पर कर स्लैब बढ़ाकर 40 प्रतिशत करने की भी सिफारिश की है, जो देश में किसी भी वस्तु वर्ग के लिए सबसे अधिक है। हालांकि, तंबाकू और उससे संबंधित उत्पाद 28 प्रतिशत के कर स्लैब के तहत ही रहेंगे, जब तक कि ऋण और मुआवजा उपकर का भुगतान नहीं हो जाता। शोधकर्ताओं ने कहा, "फिर भी, स्वास्थ्य के लिए हानिकारक उत्पादों पर नया कर स्लैब सही दिशा में उठाया गया कदम है और इससे प्राप्त राजस्व को देश में कैंसर देखभाल के वित्तपोषण में इस्तेमाल करने का अधिक अवसर मिलेगा।" उन्होंने कहा, "साहित्य में ऐसे प्रमाण उपलब्ध हैं जो इस तथ्य का समर्थन करते हैं कि तंबाकू पर कराधान से स्वास्थ्य परिणामों में सुधार होता है, विशेषकर समाज के आर्थिक रूप से वंचित वर्गों में।" एम्स, दिल्ली के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग में सहायक प्रोफेसर डॉ. शंकर ने कहा, "कई जीवनरक्षक कैंसर दवाओं और दुर्लभ बीमारियों के उपचारों पर जीएसटी पूर्णतः हटाया जाना, साथ ही चिकित्सा उपकरणों और डायग्नोस्टिक्स पर कर में कमी, मरीजों के जेब से होने वाले खर्च को काफी हद तक कम करेगा, बशर्ते निर्माता पूरी तरह मरीजों को ये लाभ दें।" शोध लेखकों ने यह भी कहा कि स्वास्थ्य और जीवन बीमा को जीएसटी से छूट दिए जाने से उपचार तक पहुंच में मौजूद वित्तीय बाधाएं और कम हो सकती हैं, विशेषकर मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए।
- नयी दिल्ली । अमेरिका-भारत व्यापार समझौते के बाद विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने फरवरी के पहले दो सप्ताह में भारतीय शेयर बाजार में 19,675 करोड़ रुपये डाले हैं। डिपॉजिटरी के आंकड़ों के मुताबिक, एफपीआई का यह प्रवाह लगातार तीन माह की भारी बिकवाली के बाद हुआ है। एफपीआई ने जनवरी में भारतीय शेयर बाजार से 35,962 करोड़ रुपये, दिसंबर में 22,611 करोड़ रुपये और नवंबर में 3,765 करोड़ रुपये निकाले थे। कुल मिलाकर, 2025 में, एफपीआई ने भारतीय शेयरों से शुद्ध रूप से 1.66 लाख करोड़ रुपये (18.9 अरब डॉलर) की निकासी की है। यह एफपीआई के प्रवाह की दृष्टि से सबसे खराब वर्षों में रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, एफपीआई ने इस महीने (13 फरवरी तक) शेयरों में 19,675 करोड़ रुपये का निवेश किया है। मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के प्रमुख प्रबंधक-शोध हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि हाल की खरीदारी को वैश्विक वृहद चिंताओं में कमी, खासकर अमेरिका के नरम महंगाई आंकड़ों से समर्थन मिला है। इससे उन की भारत समेत उभरते बाजार में जोखिम लेने की क्षमता बेहतर हुई है।इसी तरह की राय जताते हुए एंजेल वन के वरिष्ठ बुनियादी विश्लेषक वकारजावेद खान ने कहा कि यह प्रवाह अमेरिका-भारत व्यापार करार, समर्थन देने वाले 2026-27 के आम बजट और वैश्विक स्तर पर अनिश्चितताओं में कमी की वजह से देखने को मिला है। एफपीआई फरवरी माह के 11 कारोबारी सत्रों में से सात में शुद्ध लिवाल रहे और चार सत्रों में बिकवाल रहे। इसके बावजूद आंकड़ों से पता चलता है कि एफपीआई ने इस महीने शुद्ध रूप से 1,374 करोड़ रुपये की बिकवाली की है। इसकी वजह यह है कि 13 फरवरी को निफ्टी में 336 अंक की गिरावट के दौरान एफपीआई ने 7,395 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इस सप्ताह 'एंथ्रोपिक झटके' की वजह से आईटी शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली।
- मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को अधिग्रहण के लिए वित्तपोषण पर अंतिम दिशानिर्देश जारी करते हुए बैंकों के लिए ऋण सीमा बढ़ाकर सौदे के मूल्य का अधिकतम 75 प्रतिशत कर दिया। इसके पहले मसौदा नियमों में यह सीमा 70 प्रतिशत प्रस्तावित थी।केंद्रीय बैंक ने कहा कि कुल बैंक वित्तपोषण अधिग्रहण मूल्य के 75 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा, जिसका स्वतंत्र आकलन संबंधित बैंक द्वारा किया जाएगा। शेष राशि अधिग्रहण करने वाली कंपनी को अपने संसाधनों से जुटानी होगी। नए नियमों के तहत बैंक प्रवर्तकों की हिस्सेदारी को भी वित्तपोषित कर सकेंगे, बशर्ते अधिग्रहण के बाद ऋण-इक्विटी अनुपात निरंतर आधार पर 3:1 से अधिक न हो। अधिग्रहीत इक्विटी शेयर या अनिवार्य रूप से परिवर्तनीय डिबेंचर किसी भी प्रकार के भार से मुक्त होने चाहिए। आरबीआई ने बैंकों को अधिग्रहण वित्तपोषण के लिए निदेशक मंडल से अनुमोदित नीति बनाने के लिए कहा है। पात्र उधारकर्ता की न्यूनतम शुद्ध संपत्ति 500 करोड़ रुपये और लगातार तीन वर्षों का शुद्ध लाभ होना आवश्यक है। गैर-सूचीबद्ध कंपनियों के लिए निवेश-योग्य रेटिंग भी अनिवार्य होगी। आरबीआई के ये दिशानिर्देश एक अप्रैल से प्रभावी हो जाएंगे।केंद्रीय बैंक ने अक्टूबर के अंत में पहली बार एक मसौदा जारी किया था, जिसमें बैंकों को अधिग्रहण के लिए वित्तपोषण की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा गया था। इससे पहले तक बैंकों को इस तरह की गतिविधि की अनुमति नहीं थी।
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नई दिल्ली। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) की ओर से इनकम टैक्स के नियम, 2026 का ड्राफ्ट जारी कर दिया गया है। इसमें बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद में रहने वाले लोगों के लिए टैक्स छूट में इजाफा किया गया है। दरअसल, नए इनकम टैक्स नियम 2026 के तहत पुरानी कर प्रणाली (ओल्ड टैक्स रिजीम) चुनने वाले वेतनभोगी व्यक्ति के लिए 50 प्रतिशत हाउस रेंट अलाउंस (एचआरए) छूट वाले शहरों की संख्या को बढ़ा दिया गया है।
मौजूदा समय में 50 प्रतिशत एचआरए छूट का फायदा केवल दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में काम करने वाले कर्मचारियों को ही मिलता है, जबकि अन्य जगह के लिए यह सीमा 40 प्रतिशत है। ड्राफ्ट में इन शहरों के साथ बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद का नाम जोड़ने का प्रस्ताव रखा गया है।ऐसे में इन शहरों में भी ओल्ड टैक्स रिजीम चुनने वाले वेतनभोगी व्यक्ति भी 50 प्रतिशत एचआरए छूट का फायदा ले पाएंगे।इसके अलावा, इनकम टैक्स के नियम 2026 के ड्राफ्ट में नियोक्ता द्वारा आंशिक रूप से निजी उपयोग के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली कारों का काल्पनिक कर योग्य मूल्य बढ़ाने का प्रस्ताव दिया गया है। इसके तहत अब 1.6 लीटर इंजन क्षमता वाली कार के लिए 8,000 रुपए प्रति माह और इससे ऊपर की कारों के लिए 10,000 रुपए तक प्रति माह काल्पनिक कर योग्य मूल्य निर्धारित किया गया है। मौजूदा यह सीमा 2,700 रुपए प्रति माह और उच्च क्षमता वाली कारों के लिए 3,300 रुपए प्रति माह है।इसके अलावा, ड्राफ्ट में नियोक्ताओं द्वारा प्रदान किए जाने वाले भोजन की कर-मुक्त सीमा चार गुना बढ़ाकर 200 रुपए प्रति भोजन करने का प्रस्ताव है। इसी प्रकार, नियोक्ता उपहारों पर वार्षिक छूट 5,000 रुपए से बढ़ाकर 15,000 रुपए करने का प्रस्ताव दिया गया है। वहीं, ड्राफ्ट नियमों में कर-मुक्त कर्मचारी ऋण के दायरे को भी बढ़ाया गया है और छूट की सीमा 20,000 रुपए से बढ़ाकर 2 लाख रुपए करने का प्रस्ताव दिया गया है। -
नई दिल्ली। भारत ने 2024 को आधार वर्ष मानकर नई उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) सीरीज शुरू की है। मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा कि यह नई सीरीज लोगों के खर्च करने के तरीके को बेहतर ढंग से दिखाती है और इससे गरीबी का अनुमान ज्यादा सही तरीके से लगाया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि नए आंकड़े यह भी दिखाते हैं कि लोगों की आय और काम करने की क्षमता (उत्पादकता) में बढ़ोतरी हुई है।
नई सीरीज के अनुसार, अब लोग खाने-पीने की चीजों पर कम और सेवाओं जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, यात्रा और इंटरनेट जैसी सुविधाओं पर ज्यादा खर्च कर रहे हैं। नागेश्वरन ने कहा कि सही आंकड़े मिलने से सरकार और रिजर्व बैंक को बदलती आर्थिक स्थिति के अनुसार सही फैसले लेने में मदद मिलेगी।जनवरी में देश की महंगाई दर 2.75 प्रतिशत रही, जो ग्रामीण क्षेत्रों में 2.73 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 2.77 प्रतिशत रही। पुरानी सीरीज में दिसंबर 2025 तक खाद्य महंगाई नकारात्मक थी, लेकिन नई सीरीज में यह 2.1 प्रतिशत दर्ज की गई है।मुख्य आर्थिक सलाहकार नागेश्वरन ने कहा कि अब ब्याज दर जैसे फैसले लेते समय सरकार मांग और आपूर्ति की स्थिति को बेहतर समझ सकेगी। उन्होंने बताया कि नई सीरीज में खाने-पीने की चीजों का हिस्सा कम कर दिया गया है, जिससे महंगाई के आंकड़ों में उतार-चढ़ाव कम हो सकता है।अगर महंगाई में उतार-चढ़ाव कम होगा, तो महंगाई भत्ता (डीए) और अन्य सरकारी खर्च, जो सीपीआई से जुड़े होते हैं, वे भी ज्यादा स्थिर और अनुमानित रहेंगे। इससे सरकार के बजट की योजना बनाना आसान होगा।सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) ने गुरुवार को 2024 आधार वर्ष वाली नई सीपीआई सीरीज जारी की। पहले इसमें छह समूह थे, जिन्हें अब बढ़ाकर 12 भागों में बांटा गया है ताकि यह अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार हो सके। इसमें ‘एचसीईएस 2023-24’ सर्वे के आधार पर लोगों की खर्च की टोकरी को अपडेट किया गया है।नई सीरीज में वस्तुओं की संख्या 299 से बढ़ाकर 358 कर दी गई है, जिनमें 308 वस्तुएं और 50 सेवाएं शामिल हैं। इससे यह साफ होता है कि लोगों के खर्च में सेवाओं की भूमिका बढ़ रही है।मंत्रालय के सचिव सौरभ गर्ग ने बताया कि सरकार अब हर पांच साल में सीपीआई का आधार वर्ष बदलने की योजना बना रही है। अगला उपभोक्ता खर्च सर्वे 2027-28 में किया जाएगा। -
नयी दिल्ली. जिंदल स्टेनलेस ने विशेष इस्पात के लिए नई पेश की गई उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) 1.2 योजना के तहत इस्पात मंत्रालय के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। सोमवार को केंद्रीय इस्पात मंत्री एच डी कुमारस्वामी ने विशेष इस्पात के लिए पीएलआई योजना के तीसरे चरण की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य उन्नत मिश्रधातु इस्पात की 87 लाख टन अतिरिक्त क्षमता जोड़ना है। कंपनी ने बयान में कहा कि जिंदल स्टेनलेस लिमिटेड (जेएसएल) ने इस्पात मंत्रालय के साथ क्षमता विस्तार के साथ-साथ विशेष मिश्र धातुओं और फोर्ज्ड उत्पादों (वाहन और विमान के इंजन के पुर्जे, गियर, शाफ्ट, नट-बोल्ट और वॉल्व आदि) सहित मूल्यवर्धित उत्पादों की नई क्षमताएं स्थापित करने के लिए समझौता किया है। कंपनी के प्रबंध निदेशक अभ्युदय जिंदल ने कहा कि यह नीति न केवल भारत में विशेष इस्पात की क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य रखती है, बल्कि देश को विशेष ग्रेड में आत्मनिर्भर बनाने का भी उद्देश्य रखती है।
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नयी दिल्ली. वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत को अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते के तहत अमेरिकी धागा और कपास से बने परिधान पर वही रियायती शुल्क का लाभ मिलेगा, जो बांग्लादेश को वर्तमान में मिल रहा है। अमेरिका, बांग्लादेश की वस्तुओं पर जवाबी शुल्क घटाकर 19 प्रतिशत कर देगा, लेकिन वस्त्रों पर शून्य शुल्क तभी लगेगा जब वे अमेरिकी कपास और कृत्रिम रेशों से बने हों। वर्तमान में बांग्लादेशी परिधानों पर 31 प्रतिशत शुल्क लगता है (12 प्रतिशत सर्वाधिक तरजीही राष्ट्र शुल्क और 19 प्रतिशत जवाबी शुल्क) और यदि उनमें अमेरिकी रेशों का उपयोग किया जाता है, तो शुल्क घटकर 12 प्रतिशत हो जाता है। गोयल ने यहां संवाददाताओं से कहा, ''बांग्लादेश को जो मिला है, वही भारत को भी अंतिम समझौते में मिलने वाला है।'' उन्होंने बताया कि अगर कोई भारतीय कंपनी अमेरिका से धागा और कपास खरीदकर परिधान बनाती है और उन्हें अमेरिका को निर्यात करती है, तो उन परिधानों को भी बांग्लादेशी कंपनियों की तरह अमेरिका में शुल्क-मुक्त प्रवेश मिलेगा। गोयल ने कहा कि यह बात अमेरिका-बांग्लादेश समझौते में लिखी है और ''हमारे समझौते में भी होगी।'' उन्होंने यह भी कहा कि इसका भारतीय कपास किसानों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। मंत्री ने बताया कि अमेरिका में कपास का उत्पादन सीमित है। उसका निर्यात केवल 50 लाख अमेरिकी डॉलर है, जबकि भारत का लक्ष्य 50 अरब अमेरिकी डॉलर है। भारत और अमेरिका ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण के लिए एक रूपरेखा तैयार कर ली है। इसे मार्च में लागू किए जाने की संभावना है। ये टिप्पणियां महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बुधवार को आरोप लगाया था कि भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता 'पूरी तरह से आत्मसमर्पण' है, जिसमें भारत की ऊर्जा सुरक्षा अमेरिका को सौंप दी गई है और किसानों के हितों से समझौता किया गया है। इस बीच, यहां आयोजित एक 'मेडटेक, इनोवेशन और स्टार्टअप' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा कि भारत के अन्य देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों से घरेलू चिकित्सा उपकरण उद्योग को रियायती शुल्कों पर व्यापक बाजार पहुंच प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि कुछ मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) में भारतीय चिकित्सा उपकरणों को शुल्क में छूट भी मिलेगी। मंत्री ने कहा, ''हम नौ एफटीए के माध्यम से विकसित बाजारों के लिए द्वार खोल रहे हैं, जिनमें 38 ऐसे देश शामिल हैं जहां की आबादी समृद्ध है और प्रति व्यक्ति आय अधिक है।'' गोयल ने कहा कि राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम (एनआईसीडीसी) देश में चिकित्सा उपकरण इकाइयों के लिए 50 से 100 एकड़ भूमि आरक्षित करने पर विचार कर सकता है।
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नई दिल्ली। भारत में अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित खुदरा महंगाई दर जनवरी 2026 में सालाना आधार पर 2.75 प्रतिशत रही है। यह जानकारी सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की ओर से गुरुवार को दी गई।बेस ईयर में बदलाव के बाद खुदरा महंगाई दर के यह पहले आंकड़े हैं। सरकार की ओर से बेस ईयर को बदलकर 2024 कर दिया गया है, जो कि पहले 2012 था।
दिसंबर में खुदरा महंगाई दर 1.33 प्रतिशत थी। हालांकि, यह पुराने बेस ईयर 2012 पर आधारित थी।सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, ग्रामीण इलाकों में खुदरा महंगाई दर 2.73 प्रतिशत रही है और शहरी इलाकों में 2.77 प्रतिशत थी। वहीं, खाद्य महंगाई दर जनवरी में 2.13 प्रतिशत रही है। यह ग्रामीण इलाकों में 1.96 प्रतिशत और शहरी इलाकों में 2.44 प्रतिशत रही है।आंकड़ों में मुताबिक, जनवरी में सालाना आधार पर लहसुन की कीमत 53.05 प्रतिशत, प्याज की कीमत 29.27 प्रतिशत, आलू की कीमत 28.98 प्रतिशत, अरहर की कीमत 24.90 प्रतिशत और मटर की कीमत 15.56 प्रतिशत कम हुई है।दूसरी तरफ, जनवरी में सालाना आधार पर चांदी की ज्वेलरी 159.67 प्रतिशत, टमाटर 64.80 प्रतिशत, कोपरा 47.18 प्रतिशत, सोने/हीरे/प्लेटिनम की ज्वेलरी 46.77 प्रतिशत और नारियल तेल की कीमतें 40.44 प्रतिशत बढ़ी हैं।सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी में सालाना आधार पर कपड़ों और जूतों की कीमतें 2.98 प्रतिशत, स्वास्थ्य सेवाओं का दाम 2.19 प्रतिशत, ट्रांसपोर्ट की कीमत 0.09 प्रतिशत, पान/तंबाकू जैसे उत्पादों की कीमतें 2.86 प्रतिशत; आवासीय, पानी, बिजली और अन्य ईंधनों की कीमतें 1.53 प्रतिशत बढ़ी हैं।देश में जिन पांच राज्यों में जनवरी में महंगाई दर सबसे अधिक रही है, उनमें तेलंगाना (4.92 प्रतिशत), केरल (3.67 प्रतिशत), तमिलनाडु (3.36 प्रतिशत), राजस्थान (3.17 प्रतिशत) और कर्नाटक (2.99 प्रतिशत) शामिल थे।सरकार ने बयान में कहा, “सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय बेस 2024=100 के साथ उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) जारी कर रहा है। आइटम बास्केट और संबंधित भार घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण 2023-24 पर आधारित हैं। मुद्रास्फीति माप के कवरेज और प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के लिए यह अभ्यास किया गया है। संशोधन अधिक विस्तृत डेटा पेश करता है जो नीति निर्माताओं, वित्तीय संस्थानों, व्यवसायों और नागरिकों को सटीक डेटा-संचालित निर्णय लेने में सक्षम बनाता है।” - नयी दिल्ली. भारत पश्चिम एशिया और विभिन्न एशियाई देशों में इस्पात निर्यात के लिए नए बाजारों की तलाश कर रहा है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि इस संबंध में अगले छह महीनों में भारतीय कंपनियों के साथ कई समझौतों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। अधिकारी ने बताया, "...मुख्य रूप से हमारा निर्यात यूरोप पर केंद्रित था, लेकिन हम (सरकार) निर्यात में विविधता लाने की कोशिश कर रहे हैं।" उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया और एशिया के कई देशों के साथ सरकार-से-सरकार (जी-टू-जी) के स्तर पर बातचीत जारी है। विभिन्न स्तरों पर वार्ता जारी है और अगले छह मरह में इसके सकारात्मक परिणाम मिलने की उम्मीद है। अधिकारी ने कहा, ''हम देशों के साथ समझौता ज्ञापनों पर काम कर रहे हैं, ताकि इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जा सके। उदाहरण के लिए, पश्चिम एशिया एक नया बाजार क्षेत्र है जहां बुनियादी ढांचे का बड़े पैमाने पर विकास हो रहा है।
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नयी दिल्ली। टोरेंट समूह की कंपनी टोरेंट पावर लिमिटेड का चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में एकीकृत शुद्ध लाभ करीब 34 प्रतिशत बढ़कर 654.74 करोड़ रुपये हो गया। मुख्य रूप से राजस्व में वृद्धि के कारण मुनाफे में यह उछाल आया है। कंपनी का गत वित्त वर्ष 2024-25 की तीसरी (अक्टूबर-दिसंबर) तिमाही में एकीकृत शुद्ध लाभ 489.33 करोड़ रुपये रहा था। टोरेंट पावर ने मंगलवार को शेयर बाजार को दी सूचना में बताया कि चालू वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में उसकी कुल आय बढ़कर 6,847.02 करोड़ रुपये रही, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 6,671.25 करोड़ रुपये थी। कंपनी के निदेशक मंडल ने 10 रुपये अंकित मूल्य वाले प्रत्येक शेयर पर 150 प्रतिशत लाभांश की घोषणा की है। इसके अतिरिक्त, बोर्ड ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 15 रुपये प्रति शेयर के अंतरिम लाभांश को भी मंजूरी दी है। इस लाभांश का भुगतान 12 मार्च, 2026 या उससे पहले किया जाएगा। कंपनी ने बताया कि उसके निदेशक मंडल (बोर्ड) ने निजी नियोजन के आधार पर एक या अधिक किस्तों में गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर (एनसीडी) के माध्यम से 7,000 करोड़ रुपये तक जुटाने की भी मंजूरी दी है।
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नयी दिल्ली/ सार्वजनिक क्षेत्र की इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) ने संयुक्त रूप से वेनेजुएला से 20 लाख बैरल कच्चे तेल की खरीद की है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में वेनेजुएला के तेल की आपूर्ति दोबारा शुरू होने के बाद भारतीय रिफाइनरी कंपनियों द्वारा किया गया यह दूसरा बड़ा सौदा है। सूत्रों ने बताया कि दोनों कंपनियों ने अप्रैल के दूसरे पखवाड़े में आपूर्ति के लिए 'ट्रैफिगुरा' से 20 लाख बैरल 'मेरे' कच्चा तेल खरीदा है। इसमें से 15 लाख बैरल तेल ओडिशा में आईओसी की पारादीप तेल रिफाइनरी को और शेष 5,00,000 बैरल तेल आंध्र प्रदेश में एचपीसीएल की विशाखापत्तनम इकाई को दिया जाएगा। वेनेजुएला के कच्चे तेल के लिए यह दूसरा सौदा है। इससे पहले रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अप्रैल में आपूर्ति के लिए 'विटोल' से 20 लाख बैरल तेल खरीदा था। दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल उपभोक्ता भारत ने अमेरिकी प्रतिबंध दोबारा लागू होने के बाद वेनेजुएला से कच्चे तेल की खरीद रोक दी थी। हालांकि, अब अमेरिका द्वारा विटोल और ट्रैफिगुरा को वेनेजुएला का तेल बेचने का लाइसेंस दिए जाने के बाद आयात फिर से शुरू हो गया है। यह घटनाक्रम वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को बंदी बनाए जाने और वहां के ऊर्जा उद्योग पर अमेरिका के बढ़ते नियंत्रण के बीच हुआ है।
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नई दिल्ली। भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने इस बार भी नीतिगत दर रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को यहां रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर बरकरार रखने की घोषणा की। आरबीआई के इस फैसले की वजह से लोन की ब्याज दरें भी जस की तस रहेंगी।
आरबीआई गवर्नर ने मौद्रिक नीति समीति (एमपीसी) की तीन दिवसीय समीक्षा बैठक के फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि एमपीसी ने तटस्थ रुख को बनाये रखने का निर्णय किया है। संजय मल्होत्रा ने कहा कि रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने आम सहमति से प्रमुख नीतिगत दर रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर कायम रखा है।मल्होत्रा ने कहा कि रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए आर्थिक विकास दर के अनुमान को बढ़ाकर 7.4 फीसदी कर दिया है। इससे पहले केंद्रीय बैंक ने विकास दर 7.3 फीसदी रहने का अनुमान जताया था। आरबीआई गवर्नर ने कहा घरेलू महंगाई और वृद्धि परिदृश्य सकारात्मक होने से रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए मुद्रास्फीति 2.1 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है।उल्लेखनीय है कि आरबीआई फरवरी, 2025 से लेकर अबतक नीतिगत ब्याज दर रेपो रेट में कुल 125 फीसदी की कटौती कर चुका है, जिससे रेपो रेट 5.25 फीसदी पर है।याद हो, मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ने अर्थव्यवस्था में विकास को बढ़ावा देने के लिए दिसंबर की समीक्षा में रेपो रेट को 25 आधार अंक घटाकर 5.5 प्रतिशत से 5.25 प्रतिशत कर दिया था। आरबीआई गवर्नर की अध्यक्षता वाली मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ने अगस्त और अक्टूबर में हुई समीक्षाओं में मुद्रास्फीति को नियंत्रण में रखने के लिए रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया था।उससे पहले, RBI ने फरवरी और जून के बीच तेजी से रेपो रेट को 100 बेसिस पॉइंट्स घटाकर 6.5 प्रतिशत से 5.5 प्रतिशत कर दिया था, और अर्थव्यवस्था पर इसका असर अभी भी हो रहा था। कम पॉलिसी रेट और बैंकों के पास ज्यादा लिक्विडिटी से बैंक लोन पर इंटरेस्ट रेट कम हो जाते हैं, जिससे कंज्यूमर्स और बिज़नेस दोनों के लिए लोन लेना आसान हो जाता है, जिसके परिणामस्वरूप इकॉनमी में ज़्यादा कंजम्पशन और इन्वेस्टमेंट होता है, जिससे ज़्यादा ग्रोथ होती है।हालांकि, रेट कट का असर इस बात पर निर्भर करता है कि कमर्शियल बैंक कितनी जल्दी और कुशलता से इसका फायदा कर्ज लेने वालों तक पहुंचाते हैं। -
नयी दिल्ली. सरकार ने छतरियों पर न्यूनतम आयात मूल्य बृहस्पतिवार को 100 रुपये प्रति इकाई निर्धारित किया, जिसका उद्देश्य देश में छतरी के विनिर्माण को बढ़ावा देना है। इस मूल्य से कम कीमत वाली छतरियों का आयात अनुमति नहीं होगी।
विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने एक अधिसूचना में कहा कि तैयार छतरियों के आयात की नीति और शर्तें अब मुक्त से अंकुश की श्रेणी में डाल दी गई हैं। हालांकि, यदि प्रति छतरी का सीआईएफ (लागत, बीमा और भाड़ा) मूल्य 100 रुपये या उससे अधिक है, तो आयात पर कोई प्रतिबंध नहीं रहेगा। हालांकि, ये अंकुश अग्रिम प्राधिकरण, निर्यात-उन्मुख इकाइयों (ईओयू) और विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) वाले आयातकों पर लागू नहीं होंगे। सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के आम बजट में छतरियों के आयात पर शुल्क बढ़ाकर 60 रुपये प्रति छतरी या 20 प्रतिशत कर दिया है, जिसमें जो भी राशि अधिक हो, वही लागू होगी। छतरियों के पुर्जे, सजावट और सहायक सामान के आयात पर शुल्क बढ़ाकर 10 प्रतिशत या 25 रुपये प्रति किलोग्राम कर दिया गया है, जिसमें अधिकतम राशि लागू होगी। -
नयी दिल्ली. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत और अमेरिका मार्च के मध्य तक बहुप्रतीक्षित द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। इसके बाद अमेरिका, भारतीय वस्तुओं पर आयात शुल्क कम कर देगा। समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद भारत भी अमेरिका से आयातित कुछ वस्तुओं पर आयात शुल्क कम करना शुरू करेगा। मंत्री ने कहा कि दोनों देशों के द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण पर एक संयुक्त बयान को चार से पांच दिन में अंतिम रूप देने और उस पर हस्ताक्षर किए जाने की उम्मीद है, जिसके बाद अमेरिका द्वारा लगाया गया शुल्क घटकर 18 प्रतिशत हो जाएगा। दोनों देशों ने इस सप्ताह की शुरुआत में समझौते को अंतिम रूप दिया। इसके तहत अमेरिका में प्रवेश करने वाले भारतीय सामान पर शुल्क 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया जाएगा। उन्होंने यहां पत्रकारों से कहा, '' द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) का पहला चरण लगभग तैयार है और हमें उम्मीद है कि अगले चार से पांच दिन में हम अमेरिका तथा भारत के बीच एक संयुक्त बयान को अंतिम रूप देकर उस पर हस्ताक्षर कर देंगे। इसके आधार पर इस साझेदारी का पहला चरण शुरू होगा।'' गोयल ने कहा कि औपचारिक समझौते का मसौदा तैयार किया जा रहा है जिसमें एक या डेढ़ महीने का समय लग सकता है। संभवत: औपचारिक समझौते पर मार्च के मध्य तक हस्ताक्षर हो जाएंगे। भारतीय वस्तुओं पर कम किए गए 18 प्रतिशत शुल्क अमेरिका के एक कार्यकारी आदेश के माध्यम से लागू होंगे, जो संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर करने के एक या दो दिन बाद जारी किया जाएगा। गोयल ने साथ ही बताया कि इस समझौते में किसी भी प्रकार के निवेश की प्रतिबद्धता नहीं है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि इस कानूनी समझौते से हमें अमेरिकी सामान पर शुल्क कम करने का अधिकार मिलेगा। अग्रवाल ने कहा, '' भारतीय शुल्क में कमी केवल एक कानूनी समझौते के बाद ही होगी।''
उन्होंने कहा कि भारतीय शुल्क, एमएफएन (सबसे तरजीही राष्ट्र) शुल्क हैं जबकि अमेरिकी आयात शुल्क, कार्यकारी शुल्क हैं। गोयल ने कहा, '' हमें उम्मीद है कि हम चीजों को तेजी से आगे बढ़ा पाएंगे क्योंकि कानूनी समझौते के बाद हमें और भी रियायतें मिलेंगी।'' सौदे के 500 अरब अमेरिकी डॉलर के खरीद वाले हिस्से के बारे में मंत्री ने कहा कि भारत जिस तेजी से विकास कर रहा है, उसे देखते हुए देश को बड़ी मात्रा में ऊर्जा, डेटा सेंटर उपकरण और आईसीटी उत्पादों की आवश्यकता होगी। मंत्री ने कहा, '' हमारी इस्पात उत्पादन क्षमता वर्तमान के 14 करोड़ टन से बढ़कर अगले कुछ वर्ष में करीब 30 करोड़ टन हो जाएगी। इसलिए, जब हमने अमेरिका से अपनी आवश्यकताओं का अनुमान लगाया तो हम कम से कम 500 अरब डॉलर के आंकड़े पर पहुंचे। हम स्पष्ट रूप से देख सकते हैं कि अगले पांच वर्ष में हम अमेरिका से कितनी मात्रा में इस्पात प्राप्त कर सकते हैं।'' उन्होंने कहा कि केवल भारत की विमानों की मांग, बोइंग को दिए गए और अभी दिए जाने वाले लेकिन तैयार ऑर्डर की संख्या करीब 70-80 अरब डॉलर है। गोयल ने कहा कि अगर इसमें इंजन और अन्य कलपुर्जे भी जोड़ दिए जाएं तो लागत शायद 100 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगी। मंत्री ने साथ ही कहा कि बजट में डेटा केंद्रों के लिए भारी रियायतों की घोषणा की गई है।
उन्होंने कहा, '' अब कल्पना कीजिए कि अगर हमें डेटा केंद्रों में 100-150 अरब डॉलर का निवेश मिलता है तो जाहिर है कि हमें उन डेटा केंद्रों के लिए उपकरणों की आवश्यकता होगी।'' मंत्री ने कहा कि फरवरी, 2025 में दोनों देशों के बीच निर्धारित 500 अरब अमेरिकी डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य को पूरा करने के लिए भारत को निश्चित रूप से अमेरिका से निर्यात और खरीद में काफी वृद्धि करनी होगी। उन्होंने कहा कि भारत ने अमेरिका के साथ हुए इस समझौते के तहत जिन वस्तुओं को खरीदने का वादा किया है उनकी वर्तमान वैश्विक खरीद 300 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक है। अमेरिका... तेल, एलपीजी, एलएनजी, विमान, आईसीटी उत्पाद, लैपटॉप, स्मार्टफोन और डेटा सेंटर उपकरण जैसी सभी वस्तुएं उपलब्ध करा सकता है जिन्हें भारत अन्य देशों से खरीद रहा है। अग्रवाल ने कहा, '' अगले पांच वर्षों में ये खरीद 2,000 अरब डॉलर की होने वाली है। अगर हम अमेरिका से 500 अरब डॉलर की खरीद कर लेते हैं तो इससे हमारी आपूर्ति श्रृंखला में विविधता और मजबूती ही बढ़ेगी।'' संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर ऑनलाइन माध्यम से किए जाएंगे। -
नयी दिल्ली. एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (एनजीईएल) ने राजस्थान के फलोदी में 125 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता का परिचालन शुरू किया। एनजीईएल ने शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि यह कंपनी की अनुषंगी इकाई एनटीपीसी रिन्यूएबल एनर्जी लिमिटेड के 500 मेगावाट (एमडब्ल्यू) भाडला सोलर पीवी परियोजना का हिस्सा है। एनजीईएल ने कहा, '' राजस्थान रिन्यूएबल एनर्जी कॉरपोरेशन लिमिटेड (आरआरईसी) से प्राप्त प्रमाणपत्र के आधार पर भाडला सोलर पीवी परियोजना की दूसरी चरण की 125 मेगावाट क्षमता का वाणिज्यिक परिचालन 31 जनवरी देर रात 12 बजे से शुरू किया गया।'' एनजीईएल, बिजली क्षेत्र की दिग्गज कंपनी एनटीपीसी लिमिटेड की एक इकाई है।
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मुंबई. रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने बुधवार को कहा कि भारत के लिए निरंतर दोहरे अंकों की वृद्धि संभव है और किसी भी देश को स्थिर आर्थिक नेतृत्व ही परिभाषित करता है। यहां जियोब्लैकरॉक के कार्यक्रम में अंबानी ने कहा कि अगले दशक में भारत अपनी 80 प्रतिशत ऊर्जा का आयात नहीं करेगा। उन्होंने बताया कि भारत के हर गांव में 5जी नेटवर्क है जो किसी भी अन्य देश से बेहतर एवं सस्ते हैं।
अंबानी ने कहा कि आर्थिक वृद्धि के लिए 15-20 वर्ष तक निरंतर कानून व्यवस्था एवं सामाजिक सद्भाव आवश्यक है। उन्होंने कहा, '' मैं स्पष्ट तौर पर देश में रिलायंस जैसी 100 नई कंपनियों को उभरते हुए देखता हूं। -
नयी दिल्ली. कीमती धातुओं ने बुधवार को लगातार दूसरे दिन राष्ट्रीय राजधानी में अपनी तेज़ी को बरकरार रखा। इस दौरान चांदी की कीमतें बढ़कर 2.98 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गईं और सोना 1.65 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम रहा। कारोबारियों ने कहा कि मजबूत वैश्विक रुख, कमजोर डॉलर ने इस उछाल में योगदान दिया। पिछले सप्ताह की भारी बिकवाली के बाद डॉलर के कमजोर होने से निवेशकों में बहुमूल्य धातुओं के प्रति रुचि फिर से जगी थी। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, चांदी 14,300 रुपये, या 5.03 प्रतिशत बढ़कर 2,98,300 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) हो गई। पिछली सत्र में चांदी 2,84,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना भी तेजी से बढ़ा और 7,400 रुपये या 4.69 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,65,100 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) हो गया, जबकि मंगलवार को यह 1,57,700 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। लेमन मार्केट्स डेस्क के शोध विश्लेषक, गौरव गर्ग ने कहा, ''सोने और चांदी ने बुधवार को अपनी तेजी जारी रखी, सोने की कीमतें तीन प्रतिशत से अधिक बढ़ीं और लगभग 1.6 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गईं, जबकि चांदी में भारी अस्थिरता और सुधार की अवधि के बाद दिन के कारोबार के दौरान छह प्रतिशत तक का उछाल आया।'' अंतरराष्ट्रीय बाजार में, हाजिर चांदी 4.28 डॉलर, या 5.03 प्रतिशत बढ़कर 89.35 डॉलर प्रति औंस हो गई, जबकि सोना 100.03 डॉलर, या 2.02 प्रतिशत बढ़कर 5,047.07 डॉलर प्रति औंस हो गया। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक - जिंस, सौमिल गांधी ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव से सुरक्षित निवेश की नई खरीदारी के कारण बुधवार को सोने और चांदी में तेजी आई। गांधी ने कहा, ''यह टकराव इस सप्ताह के आखिर में होने वाली अमेरिका-ईरान परमाणु वार्ता को लेकर उम्मीदों को कमज़ोर करता है और अमेरिका और ईरान के बीच और ज़्यादा टकराव की संभावना के बारे में चिंताएं बढ़ा दी हैं, जिससे सोने पर जोखिम प्रीमियम बढ़ सकता है और सुरक्षित निवेश के विकल्प के रूप में बहुमूल्य धातुओं की मांग बढ़ सकती है।




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