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मुंबई. अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बुधवार सुबह मुंबई में अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी और टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन से मुलाकात की। इसके बाद वह गुजरात के जामनगर के लिए रवाना हुए। वहां वह रिलायंस इंडस्ट्रीज की एक ही स्थान पर स्थित दुनिया की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी के साथ ही समूह द्वारा विकसित किए जा रहे वनतारा और बड़े ऊर्जा विनिर्माण केंद्रों का दौरा करेंगे। सूत्रों ने बताया कि मंगलवार दोपहर मुंबई पहुंचे रुबियो ने सबसे पहले अदाणी और उसके बाद चंद्रशेखरन से मुलाकात की। दोनों पक्षों ने इन मुलाकात का ब्योरा जारी नहीं किया।
अदाणी भारत के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में से एक का नेतृत्व कर रहे हैं। समूह का कारोबार बंदरगाह, हवाई अड्डा, ऊर्जा, लॉजिस्टिक और बुनियादी ढांचा सहित कई क्षेत्रों में फैला हुआ है। समूह नवीकरणीय ऊर्जा और विनिर्माण कारोबार का भी विस्तार कर रहा है। चंद्रशेखरन टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस की अगुवाई कर रहे हैं। समूह वाहन, इस्पात, सूचना प्रौद्योगिकी, विमानन, इलेक्ट्रॉनिक्स और अत्याधुनिक विनिर्माण क्षेत्रों से जुड़ा है। भारत के वैश्विक प्रौद्योगिकी और विनिर्माण आपूर्ति श्रृंखला में अपनी भूमिका बढ़ाने के प्रयासों के बीच टाटा समूह सेमीकंडक्टर और बैटरी प्रौद्योगिकी में निवेश कर रहा है। रुबियो के जामनगर दौरे के दौरान रिलायंस के औद्योगिक परिसर पर विशेष ध्यान होगा। इस परिसर में एक ही स्थान पर स्थित दुनिया की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी है। इसकी कुल प्रसंस्करण क्षमता करीब 14 लाख बैरल प्रतिदिन है। इस परिसर में वनतारा भी है। यह वन्यजीवों के बचाव, उपचार और पुनर्वास की पहल है। इसे अनंत अंबानी के नेतृत्व में रिलायंस इंडस्ट्रीज और रिलायंस फाउंडेशन ने शुरू किया है। 3,500 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैला यह केंद्र घायल, संकटग्रस्त और बचाए गए पशुओं की देखभाल और पुनर्वास के साथ वन्यजीव संरक्षण पर काम करता है। जामनगर परिसर का एक अन्य प्रमुख हिस्सा रिलायंस का प्रस्तावित नवीन ऊर्जा विनिर्माण केंद्र, धीरूभाई अंबानी ग्रीन एनर्जी गीगा कॉम्प्लेक्स है। 5,000 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैली इस परियोजना में सौर फोटोवोल्टिक मॉड्यूल, बैटरी ऊर्जा भंडारण, हरित हाइड्रोजन के लिए इलेक्ट्रोलाइजर, ईंधन सेल और बिजली इलेक्ट्रॉनिक्स बनाने वाली इकाइयां स्थापित करने की योजना है। ये निवेश रिलायंस के चेयरमैन मुकेश अंबानी की उस रणनीति का हिस्सा हैं, जिसके तहत समूह अपने स्थापित तेल शोधन और पेट्रोरसायन कारोबार के साथ बड़ा एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा कारोबार स्थापित करना चाहता है। इन इकाइयों का उद्देश्य भारत के ऊर्जा बदलाव को समर्थन देना और स्वच्छ ऊर्जा उपकरणों के आयात पर निर्भरता घटाना है। सूत्रों ने बताया कि रुबियो अमेरिका लौटने से पहले इन तीनों स्थानों का दौरा करेंगे।
अमेरिकी विदेशी मंत्री की यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब भारत और अमेरिका वाणिज्यिक तथा रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। ऊर्जा सुरक्षा, विनिर्माण और प्रौद्योगिकी दोनों देशों के बीच संभावित सहयोग के प्रमुख क्षेत्र हैं। रुबियो के जामनगर दौरे से उनकी भारत यात्रा में ऊर्जा और औद्योगिक निवेश का महत्व बढ़ गया है। वैश्विक तेल आपूर्ति के मुद्दे पर अमेरिका और भारत के बीच संभावित सहयोग के लिहाज से रिलायंस का यह परिसर प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। रिफाइनरी में विभिन्न प्रकार के कच्चे तेल के प्रसंस्करण की क्षमता इसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाती है। अमेरिका वेनेजुएला के तेल के लिए बाजार बढ़ाने की संभावनाएं तलाश रहा है, जबकि भारत अपने ऊर्जा आपूर्ति स्रोतों में विविधता लाने की कोशिश कर रहा है। रुबियो ने कहा है कि दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में तेल उत्पादन बढ़ने के साथ वहां से अधिक कच्चे तेल के प्रसंस्करण को लेकर अमेरिका, रिलायंस के साथ बातचीत कर रहा है। -
रायपुर/ जिंदल स्टील लिमिटेड ने कर्मचारियों की सुरक्षा के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कंपनी को अपने सुरक्षा कार्यक्रम “दक्षता इंजीनियरिंग सेफ्टी” के लिए वर्ल्ड स्टील एसोसिएशन (वर्ल्डस्टील) का प्रतिष्ठित 2026 स्टीली अवॉर्ड फॉर एक्सीलेंस इन पीपल मिला है।
यह पुरस्कार 12 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 17वें स्टीलीए अवॉर्ड्स में दिया गया। जिंदल स्टील को चीन बाओवू, इन्फ्राबिल्ड, टाटा स्टील और यूएसिमिनास जैसी वैश्विक कंपनियों के बीच से स्वतंत्र विशेषज्ञों की समिति ने विजेता चुना।
दक्षता कार्यक्रम का उद्देश्य हर कर्मचारी को उसकी जिम्मेदारी और काम की प्रकृति के अनुसार सुरक्षा के लिए तैयार करना है। इसमें केवल प्रशिक्षण में शामिल होना ही नहीं, बल्कि सुरक्षा ज्ञान, व्यावहारिक कौशल, आपात स्थिति से निपटने की तैयारी और सुरक्षित व्यवहार का भी आकलन किया जाता है।
इस कार्यक्रम के तहत जिंदल स्टील के छह स्थानों पर 27,100 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों को जोड़ा गया है। कंपनी ने 16,539 नए कर्मचारियों का सुरक्षा आकलन किया है और 69 प्रमाणित प्रशिक्षकों के माध्यम से 372 सुरक्षा एवं एचएसई प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए हैं। इन कार्यक्रमों में 96 प्रतिशत प्रशिक्षण पूरा किया गया।
रायपुर मशीनरी डिवीजन में एआई आधारित कार्यस्थल निरीक्षण, डिजिटल जोखिम विश्लेषण और व्यावहारिक प्रशिक्षण से सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाया गया है। वित्त वर्ष 2025-26 में यहां 17,752 सुरक्षा निरीक्षण किए गए और 379 उच्च जोखिम वाले कार्यों को हटाया गया या मशीनों के माध्यम से सुरक्षित बनाया गया।
इसी अवधि में आपातकालीन प्रतिक्रिया समय में 15 प्रतिशत सुधार हुआ और इसे घटाकर 5.25 मिनट किया गया। साथ ही, रायपुर मशीनरी डिवीजन ने एलटीआईएफआर 0.00 हासिल किया, जो कार्यस्थल सुरक्षा के प्रति जिंदल स्टील की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
यह सम्मान जिंदल स्टील के उस निरंतर प्रयास की पहचान है, जिसके माध्यम से कंपनी हर कर्मचारी के लिए अधिक सुरक्षित, सक्षम और बेहतर कार्यस्थल तैयार कर रही है। -
नयी दिल्ली/ बाजारों में विविधता लाने की पहल के असर से चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-अगस्त अवधि के दौरान अफ्रीका, आसियान और पूर्वोत्तर एशिया समेत विभिन्न क्षेत्रों में भारत के वस्तु निर्यात में अच्छी वृद्धि दर्ज की गई। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों में यह जानकारी दी गई। अमेरिका-ईरान युद्ध से प्रभावित पश्चिम एशिया को भारत का निर्यात भी धीरे-धीरे संकट से पहले के स्तर पर लौट रहा है। पश्चिम एशिया को भारत का निर्यात अप्रैल में 4.2 अरब अमेरिकी डॉलर था, जो अगस्त में बढ़कर 5.01 अरब डॉलर हो गया। इस साल जनवरी में यह 6.48 अरब डॉलर था। आंकड़ों के अनुसार, अफ्रीका को भारत का वस्तु निर्यात अप्रैल-अगस्त 2026-27 में सालाना आधार पर 47 प्रतिशत बढ़कर 26.19 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले साल की समान अवधि में 17.83 अरब डॉलर था। समीक्षाधीन अवधि में भारत के कुल निर्यात में अफ्रीका की हिस्सेदारी बढ़कर 12.2 प्रतिशत हो गई, जो पिछले साल की समान अवधि में 9.7 प्रतिशत थी। पूर्वी अफ्रीका को निर्यात करीब दोगुना होकर 94 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 8.95 अरब डॉलर पर पहुंच गया।
दक्षिणी अफ्रीकी सीमा शुल्क संघ (एसएसीयू) को निर्यात 53 प्रतिशत बढ़कर 5.09 अरब डॉलर और उत्तरी अफ्रीका को निर्यात 33 प्रतिशत बढ़कर 4.03 अरब डॉलर हो गया। पश्चिमी अफ्रीका को निर्यात इस अवधि में सात प्रतिशत बढ़कर 5.57 अरब डॉलर रहा।
इसी तरह, अप्रैल-अगस्त के दौरान दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संगठन (आसियान) के सदस्य देशों को भारत का निर्यात 56 प्रतिशत बढ़कर 23.08 अरब डॉलर हो गया। वहीं, पूर्वोत्तर एशिया को निर्यात 37 प्रतिशत बढ़कर 21.03 अरब डॉलर रहा। दक्षिण एशिया और यूरोप के अन्य देशों को निर्यात में 24 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
आसियान में ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमा, फिलीपीन, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम शामिल हैं। आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-अगस्त 2026-27 के दौरान हल्के वाणिज्यिक ट्रक और मध्यम श्रेणी के ट्रक के निर्यात में क्रमशः 71 प्रतिशत और 67 प्रतिशत की वृद्धि हुई। यह विदेशी बाजारों में इन वाहनों की मजबूत मांग को दर्शाता है। -
नयी दिल्ली. शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह चालू वित्त वर्ष में अब तक 13.21 प्रतिशत बढ़कर करीब 13.38 लाख करोड़ रुपये रहा है। यह पूरे वित्त वर्ष के बजट लक्ष्य का लगभग 50 प्रतिशत है। चालू वित्त वर्ष में एक अप्रैल से 14 अक्टूबर के बीच प्रत्यक्ष कर संग्रह बढ़ने का प्रमुख कारण कंपनी कर संग्रह में 20 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि है। कंपनियों को छोड़कर अन्य करदाताओं को दिए गए कर रिफंड में 67 प्रतिशत की वृद्धि के बावजूद यह बढ़ोतरी दर्ज की गई। अन्य करदाताओं में व्यक्ति, फर्म और हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ) शामिल हैं। चालू वित्त वर्ष में अब तक शुद्ध कंपनी कर संग्रह 20.58 प्रतिशत बढ़कर 5.99 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया, जबकि गैर-कंपनी कर संग्रह 5.83 प्रतिशत बढ़कर करीब 6.92 लाख करोड़ रुपये रहा। प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) संग्रह चालू वित्त वर्ष में 14 अक्टूबर तक करीब 52 प्रतिशत बढ़कर 46,840 करोड़ रुपये रहा। बजट में पूरे वित्त वर्ष के लिए एसटीटी संग्रह का लक्ष्य 73,700 करोड़ रुपये है। सकल आधार पर प्रत्यक्ष कर संग्रह 14 अक्टूबर तक 15 प्रतिशत बढ़कर 16.03 लाख करोड़ रुपये हो गया। इसमें 7.53 लाख करोड़ रुपये का कंपनी कर संग्रह, 8.03 लाख करोड़ रुपये का गैर-कंपनी कर संग्रह और 46,840 करोड़ रुपये का एसटीटी संग्रह शामिल है। सरकार ने चालू वित्त वर्ष में प्रत्यक्ष करों से 26.97 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है। यह वित्त वर्ष 2025-26 के 23.40 लाख करोड़ रुपये से 15 प्रतिशत अधिक है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के आंकड़ों के अनुसार, 14 अक्टूबर तक इस लक्ष्य का करीब 50 प्रतिशत यानी 13.38 लाख करोड़ रुपये हासिल कर लिया गया है। प्राइस वॉटरहाउस के भागीदार हितेश साहनी ने कहा कि कर संग्रह के आंकड़े कर राजस्व में मजबूत वृद्धि और बेहतर अनुपालन को बताते हैं। उन्होंने कहा, ''शुद्ध कंपनी कर संग्रह में वृद्धि कारोबार के अच्छे प्रदर्शन का संकेत देती है, जबकि एसटीटी संग्रह में लगातार बढ़ोतरी वित्तीय बाजारों में निवेशकों की निरंतर भागीदारी को दर्शाती है। कर संग्रह के ये रुझान भारत की मजबूत सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि के अनुरूप हैं।'' सीबीडीटी के आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में कंपनियों और गैर-कंपनी करदाताओं को जारी किए गए कर रिफंड सालाना आधार पर 24 प्रतिशत बढ़कर 2.65 लाख करोड़ रुपये रहे। ईवाई इंडिया के कर भागीदार जयेश सांघवी ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 के बजट अनुमान का करीब 50 प्रतिशत शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह पहले साढ़े छह महीने में हासिल हो जाने से लगता है कि सरकार का कर संग्रह सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, ''एसटीटी संग्रह में 51.6 प्रतिशत की वृद्धि से पता चलता है कि वैश्विक दबाव के बावजूद शेयर और वायदा-विकल्प बाजारों में गतिविधियां जारी हैं। इस वृद्धि को अप्रैल, 2026 से शेयर वायदा-विकल्प कारोबार पर लागू एसटीटी की बढ़ी हुई दरों से भी समर्थन मिला है।'' ग्रांट थॉर्नटन भारत में कर भागीदार ऋचा साहनी ने कहा कि प्रत्यक्ष कर संग्रह के ताजा आंकड़े विभिन्न क्षेत्रों में कर राजस्व की अच्छी वृद्धि को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि खासकर गैर-कंपनी करदाताओं को दिए गए रिफंड में तेज वृद्धि भी महत्वपूर्ण है। इससे पता चलता है कि कर प्रशासन करदाताओं के दावों का तेजी से निपटान करने पर ध्यान दे रहा है।
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नयी दिल्ली. देश में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों की बेरोजगारी दर सितंबर, 2026 में पांच प्रतिशत पर स्थिर रही। बृहस्पतिवार को जारी सरकारी सर्वेक्षण में यह जानकारी दी गई। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) के अनुसार, अगस्त, 2026 की तुलना में सितंबर में बेरोजगारी दर में कोई बदलाव नहीं हुआ। बेरोजगारी दर सितंबर, 2025 में 5.2 प्रतिशत थी। ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर सितंबर में मामूली रूप से बढ़कर 4.2 प्रतिशत हो गई, जो अगस्त में 4.1 प्रतिशत थी। वहीं, शहरी क्षेत्रों में यह 6.8 प्रतिशत से बढ़कर 6.9 प्रतिशत रही। ग्रामीण बेरोजगारी दर सितंबर, 2025 में 4.6 प्रतिशत और शहरी बेरोजगारी दर 6.8 प्रतिशत थी। सर्वेक्षण के अनुसार, सितंबर, 2026 में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के पुरुषों में बेरोजगारी दर 4.9 प्रतिशत पर स्थिर रही, जबकि जून, 2026 के बाद से इसमें गिरावट या स्थिरता का रुख बना हुआ है। महिलाओं में बेरोजगारी दर सितंबर में मामूली बढ़कर 5.2 प्रतिशत रही, जो अगस्त में 5.1 प्रतिशत थी। ग्रामीण महिलाओं में यह दर 3.9 प्रतिशत रही, जो 2026 में अबतक का सबसे निचला स्तर है। वहीं, शहरी महिलाओं में बेरोजगारी दर 8.9 प्रतिशत से बढ़कर 9.2 प्रतिशत हो गई। सर्वेक्षण के अनुसार, पिछले साल की समान अवधि की तुलना में पुरुषों और महिलाओं, दोनों में बेरोजगारी दर घटी है। ग्रामीण महिलाओं में यह दर 2026 के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई। एनएसओ का पीएलएफएस श्रम बल की भागीदारी तथा रोजगार और बेरोजगारी की स्थिति से जुड़े आंकड़ों का प्रमुख स्रोत है। यह मासिक सर्वेक्षण देश भर में 3,70,513 लोगों से जुटाई गई जानकारी पर आधारित हैं।
सर्वेक्षण के अनुसार, सितंबर, 2026 में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों की श्रम बल भागीदारी दर (एलएफपीआर) 55.5 प्रतिशत रही। यह सितंबर, 2025 की तुलना में 0.2 प्रतिशत अधिक है। इसी तरह, शहरी क्षेत्रों में श्रम बल भागीदारी दर अगस्त, 2026 के 50.4 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 50.7 प्रतिशत हो गई। सर्वेक्षण के मुताबिक, सितंबर, 2026 में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की महिलाओं की कुल श्रम बल भागीदारी दर सालाना आधार पर 0.5 प्रतिशत बढ़कर 34.6 प्रतिशत हो गई। इसी अवधि में ग्रामीण महिलाओं की श्रम बल भागीदारी दर एक प्रतिशत बढ़कर 38.9 प्रतिशत रही। वहीं, कुल श्रमिक-जनसंख्या अनुपात (डब्ल्यूपीआर) सितंबर, 2026 में सालाना आधार पर 0.3 प्रतिशत बढ़कर 52.7 प्रतिशत हो गया। -
मुंबई. रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल एवं दूरसंचार इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स के प्रबंध निदेशक आकाश अंबानी ने बृहस्पतिवार को कहा कि अपना प्रति ग्राहक औसत राजस्व (एआरपीयू) बढ़ाने के लिए कंपनी शुल्क बढ़ाने के बजाय अतिरिक्त सेवाओं की पेशकश पर अधिक ध्यान देगी, लेकिन जरूरत पड़ने पर दरें बढ़ाने का विकल्प भी है। जियो प्लेटफॉर्म्स के प्रस्तावित 30,213 करोड़ रुपये के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) से पहले आयोजित संवाददाता सम्मेलन में अंबानी ने कहा कि कंपनी प्रति गीगाबाइट डेटा की कीमत बढ़ाने के बजाय ग्राहकों को अतिरिक्त सेवाएं देकर उनसे अधिक राजस्व अर्जित करना चाहती है। उन्होंने कहा, ''हमारे पास शुल्क बढ़ाने की क्षमता हमेशा रहती है।'' हालांकि, उन्होंने शुल्क बढ़ोतरी की कोई समयसीमा नहीं बताई। उन्होंने कहा कि 2016 में जियो के दूरसंचार बाजार में कदम रखने के बाद से भारत की प्रति व्यक्ति आय में दूरसंचार पर प्रति उपयोगकर्ता खर्च की हिस्सेदारी घटकर करीब एक प्रतिशत रह गई है, जो पहले की तुलना में लगभग आधी है। इस मौके पर जियो प्लेटफॉर्म्स के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) पंकज पवार ने कहा कि शुल्क बढ़ाना एआरपीयू बढ़ाने के कई उपायों में से एक है। आकाश अंबानी ने कहा कि जियो प्रति गीगाबाइट डेटा के लिए करीब 4.9 रुपये लेती है, जबकि उद्योग का औसत लगभग 7.5 रुपये है। कंपनी के ग्राहकों की औसत मासिक डेटा खपत 43.7 जीबी है। उन्होंने भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था के वित्त वर्ष 2030-31 तक 1,400 अरब डॉलर का होने का अनुमान जताते हुए कहा कि जियो इसमें बड़ी बाजार हिस्सेदारी हासिल करना चाहती है। उन्होंने मोबाइल सेवाओं, घरेलू ब्रॉडबैंड तथा उद्यम एवं अंतरराष्ट्रीय सेवाओं को कंपनी की वृद्धि के प्रमुख क्षेत्र बताया। उन्होंने कहा कि जियो देश के वायरलेस डेटा ट्रैफिक का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा संभालती है।
अंबानी ने कहा कि दूरसंचार सेवाओं के अलावा कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित वॉयस सुविधा जैसी नई सेवाएं भी कंपनी की आय बढ़ाने में मदद कर सकती हैं। चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में कंपनी का कर-पूर्व लाभ (ईबीआईटीडीए) मार्जिन 53.3 प्रतिशत रहा, जो करीब तीन साल पहले लगभग 50 प्रतिशत था। विदेशी बाजारों में विस्तार की योजना पर उन्होंने कहा कि जियो अपनी आंतरिक रूप से विकसित नेटवर्क प्रौद्योगिकी विदेशी दूरसंचार कंपनियों को प्रबंधित सेवाओं के रूप में उपलब्ध कराएगी। कंपनी हार्डवेयर या सॉफ्टवेयर लाइसेंस बेचने के बजाय प्रौद्योगिकी आधारित सेवाएं देगी। इस कारोबार के लिए बड़े पूंजीगत व्यय की जरूरत नहीं होगी। अंबानी ने कहा कि विदेशी कारोबार से होने वाली आय की हिस्सेदारी कंपनी के शुरुआती अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के जुड़ने के बाद स्पष्ट होगी। कंपनी विवरण के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में उसके कुल राजस्व में भारत की हिस्सेदारी 96.62 प्रतिशत थी। जियो प्लेटफॉर्म्स ने आईपीओ के लिए प्रति शेयर 1,065 से 1,119 रुपये का मूल्य दायरा तय किया है। निर्गम में 10 रुपये अंकित मूल्य वाले अधिकतम 27 करोड़ नए शेयर जारी किए जाएंगे। इसमें मौजूदा शेयरधारकों की ओर से बिक्री पेशकश (ओएफएस) शामिल नहीं है। ऊपरी मूल्य दायरे पर कंपनी आईपीओ से करीब 30,213 करोड़ रुपये जुटा सकती है। यह अक्टूबर, 2024 में आए हुंदै मोटर इंडिया के 27,870 करोड़ रुपये के आईपीओ को पीछे छोड़कर देश का सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम बन सकता है। ऐसा होने पर कंपनी का बाजार मूल्यांकन करीब 10.3 लाख करोड़ रुपये होगा। आईपीओ के लिए बोली प्रक्रिया 21 अक्टूबर से 23 अक्टूबर तक चलेगी, जबकि एंकर निवेशक 19 अक्टूबर को बोली लगा सकेंगे। कंपनी के शेयर के 28 अक्टूबर को बाजार में सूचीबद्ध होने की उम्मीद है। मसौदा दस्तावेज के मुताबिक, निर्गम से प्राप्त राशि का इस्तेमाल दूरसंचार इकाई रिलायंस जियो इन्फोकॉम का कर्ज समय-पूर्व चुकाने और सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।
जून, 2026 के अंत तक रिलायंस जियो इन्फोकॉम के ग्राहकों की संख्या 53.33 करोड़ थी, जिनमें 28.49 करोड़ 5जी उपयोगकर्ता शामिल थे। अंबानी ने कहा कि चीन के बाहर जियो का 5जी ग्राहक आधार सबसे बड़ा है। इस दौरान कंपनी का एआरपीयू 215.6 रुपये रहा। कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 में 76,225 करोड़ रुपये का कर-पूर्व लाभ दर्ज किया था। वित्त वर्ष 2023-24 से वित्त वर्ष 2025-26 के बीच इसमें 17.8 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर रही। अंबानी ने घरेलू ब्रॉडबैंड को कंपनी की वृद्धि का प्रमुख आधार बताया। उनके मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में जियो के फिक्स्ड ब्रॉडबैंड ग्राहकों की संख्या 2.86 करोड़ थी और देश में इस दौरान जुड़े नए फिक्स्ड ब्रॉडबैंड ग्राहकों में कंपनी की हिस्सेदारी 67.5 प्रतिशत रही। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 से वित्त वर्ष 2030-31 के बीच देश में 4जी और 5जी ग्राहकों की संख्या में उद्योग स्तर पर 34 करोड़ की वृद्धि होने का अनुमान है। जियो उद्यम सेवाओं के क्षेत्र में डिजिटल सेवाओं के लिए भारत के अनुमानित 5.1 लाख करोड़ रुपये के बाजार को भी लक्ष्य बना रही है। रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास जियो प्लेटफॉर्म्स की 66.43 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसके अलावा मेटा प्लेटफॉर्म्स से संबद्ध इकाई की 9.98 प्रतिशत और गूगल इंटरनेशनल की 7.73 प्रतिशत हिस्सेदारी है। -
नयी दिल्ली. खाद्य पदार्थों, विनिर्मित वस्तुओं और ईंधन एवं बिजली की कीमतें बढ़ने से सितंबर में थोक मुद्रास्फीति बढ़कर 11.39 प्रतिशत हो गई, जो अगस्त में 9.92 प्रतिशत थी। बुधवार को जारी सरकारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली। खाद्य पदार्थों की महंगाई दर अगस्त के 7.05 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 8.66 प्रतिशत हो गई।
विनिर्मित वस्तुओं में थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित मुद्रास्फीति बढ़कर 9.76 प्रतिशत के श्रृंखला के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। अगस्त में यह 8.37 प्रतिशत थी। ईंधन एवं बिजली की महंगाई दर सितंबर में 25.85 प्रतिशत रही, जबकि पिछले महीने यह 22.93 प्रतिशत थी।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने बुधवार को थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) के आंकड़े जारी करते हुए कहा कि खनिज तेल (पेट्रोलियम उत्पादों सहित), खाद्य पदार्थों, कच्चे पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस, कोयले एवं लिग्नाइट, बुनियादी धातुओं, रसायनों एवं रासायनिक उत्पादों, वस्त्रों, रबर एवं प्लास्टिक उत्पादों तथा बिजली के उपकरणों की कीमतों में बढ़ोतरी से सितंबर 2026 में थोक महंगाई में वृद्धि दर्ज की गई। चालू वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत से ही थोक महंगाई में बढ़ोतरी हो रही है। पश्चिम एशिया में युद्ध और इसके कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में अवरोध से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल एवं उर्वरकों की लागत बढ़ गई। भारत अपने कच्चे तेल का अधिकतर हिस्सा इसी जलडमरूमध्य के रास्ते आयात करता है। इन बढ़ी हुई लागतों का असर खाद्य पदार्थों और अन्य जिंसों की कीमतों पर भी पड़ा है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति ने पिछले सप्ताह नीतिगत दर रेपो में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 प्रतिशत कर दिया था। इस सप्ताह की शुरुआत में जारी खुदरा महंगाई के आंकड़ों के अनुसार, खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के कारण सितंबर में खुदरा महंगाई बढ़कर 23 महीने के उच्च स्तर 5.54 प्रतिशत पर पहुंच गई। अगस्त में यह 4.83 प्रतिशत थी। -
नयी दिल्ली. टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने मंगलवार को कहा कि सेमीकंडक्टर भारत के भविष्य के लिए बेहद अहम होंगे। देश में कुशल प्रतिभाओं, बड़े घरेलू बाजार और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी की संभावनाओं को देखते हुए भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की स्थिति में है।
'ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम 2026' में चंद्रशेखरन ने कहा कि 160 साल पुराने टाटा समूह की प्राथमिकता ऐसे उद्योग में अपनी जगह बनाना है, जिसकी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए बुनियादी रूप से आवश्यकता है। चंद्रशेखरन ने कहा कि कुशल प्रतिभाओं, बड़े घरेलू बाजार और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भागीदारी की क्षमता के कारण भारत सेमीकंडक्टर विनिर्माण की क्षमताएं विकसित करने के लिए अनुकूल स्थिति में है। उन्होंने कहा, ''भारत में हमारे पास बहुत अच्छी स्थिति है क्योंकि हमारे पास प्रतिभाएं हैं, घरेलू बाजार है और हम हर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भूमिका निभा सकते हैं।'' इस क्षेत्र का पूरा परिवेश विकसित करने में साझेदारी के महत्व पर जोर देते हुए चंद्रशेखरन ने कहा कि जरूरी प्रौद्योगिकियां हासिल करने के लिए भारत को वैश्विक कंपनियों के साथ मिलकर काम करना होगा। साथ ही, ऊर्जा की जरूरतों पर भी करीबी नजर रखनी होगी। उन्होंने कहा, ''हमें साझेदारी की जरूरत है, क्योंकि हमारे पास सभी प्रौद्योगिकियां हैं... अगर आप इसे डिजाइन करते हैं, तो निश्चित रूप से हम वहां तक पहुंच जाएंगे। हालांकि आपको सावधान भी रहना होगा क्योंकि ऊर्जा पर नजर रखना जरूरी है।
टाटा समूह की कंपनी टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, ताइवान की पावरचिप सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कॉरपोरेशन (पीएसएमसी) के साथ साझेदारी में गुजरात के धोलेरा में करीब 91,000 करोड़ रुपये के निवेश से सेमीकंडक्टर चिप विनिर्माण संयंत्र (फैब) स्थापित कर रही है। प्रस्तावित संयंत्र में मोटर वाहन, मोबाइल उपकरणों, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, कृत्रिम मेधा (एआई) और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में इस्तेमाल होने वाले चिप बनाए जाएंगे। समूह असम में भी करीब 27,000 करोड़ रुपये के निवेश से सेमीकंडक्टर चिप की असेंबली और जांच की सुविधा विकसित कर रहा है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य बढ़ती घरेलू मांग को पूरा करना, भारत की सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना और देश को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण तंत्र से अधिक मजबूती से जोड़ना है। सेमीकंडक्टर क्षेत्र में विस्तार उन्नत विनिर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स और बैटरी प्रौद्योगिकियों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की टाटा समूह की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। चंद्रशेखरन ने कहा कि ये निवेश समूह के इस विश्वास को दर्शाते हैं कि लंबे समय में सेमीकंडक्टर विनिर्माण की क्षमता जरूरी होगी। हालांकि, परियोजनाओं को लागू करने की गति और प्रौद्योगिकियों के चयन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। उन्होंने सबसे उन्नत चिप विनिर्माण प्रौद्योगिकियों को अपनाने से पहले बाजार की मांग और आर्थिक व्यवहार्यता का सही आकलन करने की जरूरत पर भी जोर दिया। टाटा संस के चेयरमैन ने कहा, ''आप बिना सोचे-समझे यह नहीं कह सकते कि मैं दो नैनोमीटर चिप बनाने का संयंत्र लगाने जा रहा हूं। यह काम नहीं करेगा। इसलिए हमें यह भी देखना होगा कि मांग कहां है।
उन्होंने कहा कि भारत, कारोबार और लोगों के लिए वित्तीय पहलू महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने जोर दिया कि निवेश व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य होना चाहिए और लंबे समय तक रोजगार के टिकाऊ अवसर पैदा करने में सक्षम होना चाहिए। टाटा समूह के भविष्य को लेकर 'बोर्डरूम' में जारी खींचतान के बीच हाल में चंद्रशेखरन को टाटा संस के चेयरमैन के रूप में तीसरा, पांच साल का कार्यकाल दिया गया था। वैश्विक कारोबारी माहौल में अनिश्चितताओं को स्वीकार करते हुए चंद्रशेखरन ने कहा कि कंपनियां निवेश से जुड़ी हर बात के पहले से अनुमानित होने की उम्मीद नहीं कर सकतीं। उन्होंने कहा, ''लेकिन बहुत-सी चीजें निश्चित हैं। ऊर्जा की जरूरत निश्चित है, काम करने का तरीका निश्चित है और उसे लागू करने की क्षमता निश्चित है। केवल यह तय करना है कि आप उत्पादन कितना बढ़ाते हैं, कितनी तेजी से बढ़ाते हैं और किस प्रौद्योगिकी को अपनाते हैं...। -
नयी दिल्ली. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि पिछले डेढ़ साल में रुपये के मूल्य में खासी गिरावट आई है और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) घरेलू मुद्रा में अत्यधिक उतार-चढ़ाव पर लगाम लगाने के प्रयास जारी रखेगा। सीतारमण ने यहां 'ब्लूमबर्ग न्यू इकॉनमी फोरम 2026' कार्यक्रम में कहा कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया निचले स्तर पर पहुंच गया है और आरबीआई अपने नियामकीय अधिकारों का इस्तेमाल कर घरेलू मुद्रा में स्थिरता बनाए रखने के प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा, ''आरबीआई रुपये का मूल्य तय करने की कोशिश नहीं कर रहा है, बल्कि उसमें उतार-चढ़ाव रोकने का प्रयास कर रहा है। इसके लिए आरबीआई की ओर से काफी प्रयास किए जा रहे हैं। ये प्रयास आगे भी जारी रहेंगे। हम चाहेंगे कि रुपया अपना मूल्य खुद तय करे।'' रुपये में गिरावट थामने के लिए रिजर्व बैंक ने सप्ताहांत में कई उपायों की घोषणा की थी।
केंद्रीय बैंक ने पेट्रोलियम विपणन कंपनियों के लिए एक विशेष सुविधा शुरू करने की घोषणा की, जिससे डॉलर की उनकी मांग हाजिर बाजार से हट सकेगी। इसके अलावा, रुपये से जुड़ी सट्टेबाजी पर अंकुश लगाने के लिए विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव कारोबार के नियम भी कड़े किए गए। आरबीआई ने बैंकों से दो लाख अमेरिकी डॉलर से अधिक की डॉलर खरीद पर 20 प्रतिशत का आरक्षित प्रावधान करने को भी कहा है। सीतारमण ने कहा कि आरबीआई के हाल के उपायों से रुपये को समर्थन मिला है। सोमवार को रुपये के मूल्य में एक प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। मंगलवार को भी शुरुआती कारोबार में रुपया मजबूत होकर 94.96 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंच गया। उन्होंने कहा, ''मुझे भरोसा है कि आरबीआई रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव रोकने के लिए आगे भी कदम उठाएगा।'' उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत है और देश के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है। वित्त मंत्री ने कहा कि रुपये में उतार-चढ़ाव की प्रमुख वजह बाहरी चुनौतियां हैं, जबकि सरकार देश के भीतर व्यापक आर्थिक बुनियादी कारकों को मजबूत बनाए रखने के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि राजकोषीय अनुशासन निवेशकों के लिए चिंता का विषय नहीं होना चाहिए। हालांकि, डॉलर के मुकाबले रुपये की घट-बढ़ चुनौती बनी हुई है और सरकार इस पर ध्यान देगी। -
कोलकाता. पश्चिम बंगाल के व्यापारिक संगठन सीडब्ल्यूबीटीए ने त्योहारों के समय ऑनलाइन बिक्री में उछाल और ई-कॉमर्स मंच पर भारी छूट को लेकर सोमवार को चिंता जताई। संगठन ने कहा कि ऑनलाइन और ऑफलाइन कीमतों के बीच अंतर बढ़ने से पारंपरिक खुदरा कारोबार प्रभावित हो रहा है। 'पश्चिम बंगाल व्यापार संघों के परिसंघ' (सीडब्ल्यूबीटीए) ने दावा किया कि ई-कॉमर्स कंपनियों ने त्योहारी मौसम के शुरुआती दो दिन में ही करीब 24,000 करोड़ रुपये का सामान बेच दिया है। संगठन के अध्यक्ष सुशील पोद्दार ने कहा कि चिंता ई-कॉमर्स के विस्तार को लेकर नहीं, बल्कि ऑनलाइन एवं ऑफलाइन विक्रेताओं के बीच कीमतों में बड़े अंतर को लेकर है। उन्होंने कहा, ''सिर्फ दो दिन में करीब 24,000 करोड़ रुपये की ऑनलाइन बिक्री से उपभोक्ताओं की खरीदारी के रुझान में बड़े पैमाने पर बदलाव का पता चलता है। हालांकि, जब इतनी बड़ी बिक्री कीमतों में भारी अंतर के कारण होती है, तो ऑफलाइन कारोबारियों पर इसके असर को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पारंपरिक खुदरा विक्रेता कारोबार खो रहे हैं, क्योंकि वे बड़े ऑनलाइन मंचों की कीमतों से मुकाबला नहीं कर सकते।''
पोद्दार ने कहा कि पारंपरिक दुकानदारों को दुकान का किराया, कर्मचारियों का वेतन, बिजली, कर, परिवहन, माल के भंडारण और रखरखाव जैसे खर्च उठाने पड़ते हैं। इसके अलावा, उनके पास मुनाफे का मार्जिन भी कम रहता है। उन्होंने कहा कि कीमतों के आधार पर प्रतिस्पर्धा स्वस्थ है, लेकिन जब कीमतों में अंतर बहुत अधिक हो जाता है, तो प्रतिस्पर्धा का समान अवसर प्रभावित होता है। एक ही उत्पाद की कीमत केवल ऑनलाइन या स्थानीय दुकान से खरीदने के आधार पर बहुत अलग नहीं होनी चाहिए। सीडब्ल्यूबीटीए ने सरकार और संबंधित प्राधिकरणों से ऑनलाइन और ऑफलाइन कीमतों के बीच बढ़ते अंतर तथा पारंपरिक खुदरा कारोबार पर इसके दीर्घकालिक प्रभाव की समीक्षा करने का आग्रह किया। उसने समान उत्पाद एवं ब्रांड के मामले में कीमतों में पारदर्शिता तथा ऑनलाइन एवं ऑफलाइन विक्रेताओं के बीच उचित मूल्य समानता सुनिश्चित करने की मांग की। व्यापारी संगठन 'कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स' (कैट) ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए कहा कि वह डिजिटल कारोबार के खिलाफ नहीं है, लेकिन ऐसी मूल्य नीतियां स्वीकार्य नहीं हैं जिनसे पारंपरिक कारोबारियों के लिए टिके रहना मुश्किल हो जाए। संगठन ने ऑनलाइन एवं ऑफलाइन विक्रेताओं पर समान रूप से नियम लागू करने की मांग की। सीडब्ल्यूबीटीए ने स्पष्ट किया कि वह ई-कॉमर्स पर प्रतिबंध लगाने या उपभोक्ताओं की पसंद सीमित करने की मांग नहीं कर रहा है। उसने कहा कि उसका उद्देश्य निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करना है, ताकि ऑनलाइन और पारंपरिक खुदरा कारोबार साथ-साथ आगे बढ़ सकें। पोद्दार ने त्योहारी सीजन में उपभोक्ताओं से स्थानीय दुकानों और पारंपरिक बाजारों से खरीदारी करने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि पारंपरिक बाजार केवल कारोबार के केंद्र नहीं हैं, बल्कि बंगाल के आर्थिक और सामाजिक ताने-बाने का अभिन्न हिस्सा हैं। -
नयी दिल्ली. खाद्य वस्तुओं के महंगा होने से सितंबर में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 5.54 प्रतिशत हो गई। सरकार की ओर से सोमवार को जारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित मुद्रास्फीति अगस्त में 4.83 प्रतिशत के स्तर पर थी। जनवरी में जारी नई सूचकांक श्रृंखला के तहत सितंबर की महंगाई दर अबतक के सबसे ऊंचे स्तर पर रही। खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर सितंबर में बढ़कर 7.74 प्रतिशत हो गई, जबकि पिछले महीने यह 5.97 प्रतिशत थी। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने महंगाई की चिंताओं के बीच नीतिगत दर रेपो को पिछले सप्ताह 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया था।
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नयी दिल्ली. भारतीय चावल निर्यातकों के संगठन ने पश्चिम एशिया के साथ व्यापार को प्रभावित कर रही जहाजरानी संबंधी बाधाओं, कंटेनर की कमी और बढ़ती लॉजिस्टिक लागत के बीच इराक को तीन बड़े मालवाहक जहाजों से 1,02,210 टन बासमती चावल भेजने की व्यवस्था की है। इसका लक्ष्य माल ढुलाई की लागत में 74 प्रतिशत की कमी लाना है। भारतीय चावल निर्यातक संघ (आईआरईएफ) ने कहा कि सिंगापुर स्थित एक्सिमवाला सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के साथ मिलकर इस व्यवस्था से माल ढुलाई की लागत करीब 350 डॉलर प्रति टन के कंटेनर परिवहन के प्रस्तावित शुल्क के मुकाबले घटकर लगभग 90 डॉलर प्रति टन रह जाएगी। इससे प्रति टन करीब 260 डॉलर की बचत हो सकती है।
प्रस्तावित दरों के आधार पर तीनों जहाजों से चावल भेजने के इस कार्यक्रम में माल ढुलाई पर कुल करीब 2.66 करोड़ डॉलर की सकल बचत हो सकती है। हालांकि, वास्तविक बचत अंतिम लागत और खेप भेजने की शर्तों पर निर्भर करेगी। आईआरईएफ ने कहा कि इस कार्यक्रम के तहत तीन जहाज इराक के उम्म कसर बंदरगाह जाएंगे। 36,810 टन चावल ले जा रहा जहाज एमवी लामार एस बंदरगाह पहुंच चुका है। यह तीसरे 'बर्थ' पर खड़ा है और चावल उतारने का काम शुरू हो गया है। दो अन्य जहाज एमवी लोलो गेट और एमवी आउटलैंडर को क्रमशः 25,500 टन और 39,900 टन चावल लेकर जाएंगे। यह पहल ऐसे समय में की गई है, जब निर्यातकों को खाड़ी देशों में खेप भेजने के दौरान माल ढुलाई की ऊंची दरों और लॉजिस्टिक संबंधी अनिश्चितताओं का सामना करना पड़ रहा है। खाड़ी क्षेत्र बासमती चावल के लिए भारत का सबसे बड़ा क्षेत्रीय बाजार है। आईआरईएफ के हवाले से दिए गए आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 में समाप्त वित्त वर्ष के दौरान भारत ने पश्चिम एशिया को 45.64 लाख टन बासमती चावल का निर्यात किया, जिसका मूल्य 34,284 करोड़ रुपये था।
यह भारत के कुल बासमती चावल निर्यात की मात्रा का करीब 70 प्रतिशत है। गैर-बासमती चावल को भी शामिल करने पर इस क्षेत्र को कुल 56.48 लाख टन चावल का निर्यात किया गया, जिसका मूल्य 39,657 करोड़ रुपये रहा। फेडरेशन ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के बासमती चावल के लिए पश्चिम एशिया में सऊदी अरब सबसे बड़ा बाजार रहा। वहां 8,324 करोड़ रुपये मूल्य का चावल निर्यात किया गया। इसके बाद ईरान में 6,970 करोड़ रुपये, इराक में 5,583 करोड़ रुपये और संयुक्त अरब अमीरात में 4,132 करोड़ रुपये मूल्य का बासमती चावल भेजा गया। इस अवधि में इराक ने भारत से करीब 7.64 लाख टन बासमती चावल आयात किया। यह प्रतिस्पर्धी माल ढुलाई लागत और भरोसेमंद आपूर्ति मार्ग बनाए रखने के महत्व को दर्शाता है। आईआरईएफ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष देव गर्ग ने कहा, ''पश्चिम एशिया भारत के बासमती चावल निर्यात में करीब 70 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है और जहाजरानी की बढ़ती लागत का हमारी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर सीधा असर पड़ता है। माल ढुलाई की लागत 350 डॉलर से घटाकर 90 डॉलर प्रति टन करने का लक्ष्य रखकर हम दिखा रहे हैं कि बेहतर लॉजिस्टिक व्यवस्था से भारतीय निर्यातकों और विदेशों में खरीदारों, दोनों को फायदा हो सकता है। हमारा उद्देश्य खाड़ी के अन्य बाजारों के लिए भी इसी तरह के व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य समाधान विकसित करना, भारत के चावल निर्यात को मजबूत करना और पूरी मूल्य श्रृंखला में लाभ बढ़ाना है।'' माल ढुलाई की लागत घटने से निर्यातकों को अपने लाभ मार्जिन को बचाए रखने और विदेशी बाजारों में कीमतों के लिहाज से प्रतिस्पर्धी बने रहने में मदद मिल सकती है।
खासकर उन बाजारों में इसका फायदा हो सकता है, जहां लॉजिस्टिक खर्च चावल की अंतिम कीमत को प्रभावित करता है। यदि दूसरे बाजारों में भी ऐसी व्यवस्था अपनाई जाती है, तो कंटेनर की कमी के समय बड़े मालवाहक जहाजों से परिवहन निर्यातकों को एक वैकल्पिक रास्ता मिल सकता है। इस व्यवस्था से मिलने वाला वास्तविक लाभ बड़े मालवाहक जहाजों की नियमित उपलब्धता, बंदरगाह पर माल चढ़ाने-उतारने की लागत, खेप भेजने के कार्यक्रम और अलग-अलग खेपों तथा खरीदारों के लिए बड़े जहाजों से परिवहन की उपयुक्तता पर निर्भर करेगा। यह पहल 23 से 25 अक्टूबर तक नयी दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होने वाले भारत अंतरराष्ट्रीय चावल सम्मेलन (बीआईआरसी) 2026 से पहले की गई है। सम्मेलन में 'जहाजरानी : बड़े जहाज एवं कंटेनर—लाभ मार्जिन बचाना और विवादों को कम करना' विषय पर एक विशेष सत्र होगा। इसमें माल ढुलाई की लागत, बड़े जहाजों और कंटेनर से परिवहन के बीच अंतर, माल बीमा, बंदरगाहों पर देरी, समुद्री परिवहन अनुबंध और विवादों की रोकथाम पर चर्चा की जाएगी। -
नई दिल्ली। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) की ओर से सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) में शुद्ध निवेश अगस्त के 2,597 करोड़ रुपए से महीने-दर-महीने आधार पर 71.4 प्रतिशत बढ़कर सितंबर में 4,451 करोड़ रुपए हो गया है। यह दिखाता है कि सोने की ओर लोगों का रुझान बढ़ रहा है।गोल्ड ईटीएफ में मजबूत निवेश के बावजूद, व्यापक म्यूचुअल फंड उद्योग में महीने के दौरान 1.33 लाख करोड़ रुपए का शुद्ध निकासी दर्ज की गई। इससे पहले अगस्त में 41,353 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश दर्ज किया गया था।
इस गिरावट की मुख्य वजह फिक्स्ड इनकम म्यूचुअल फंड योजनाओं से बड़ी मात्रा में निकासी रही।डेट म्यूचुअल फंड्स से सबसे अधिक निकासी हुई। सितंबर में इनसे शुद्ध निकासी तेजी से बढ़कर 1.83 लाख करोड़ रुपए हो गई, जबकि पिछले महीने यह 8,127 करोड़ रुपए थी।भारी निकासी के कारण म्यूचुअल फंड उद्योग की कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) अगस्त के 87.08 लाख करोड़ रुपए से घटकर सितंबर में 82.64 लाख करोड़ रुपए हो गया है।इसके विपरीत, इक्विटी म्यूचुअल फंड्स की ओर निवेशकों का रुझान बना रहा। सितंबर में इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में शुद्ध निवेश 30.6 प्रतिशत बढ़कर 38,307 करोड़ रुपए हो गया, जबकि अगस्त में यह 29,328 करोड़ रुपए था।इक्विटी श्रेणियों में स्मॉल-कैप फंड निवेशकों की सबसे पसंदीदा श्रेणी बने रहे। इनमें सितंबर में 9,039 करोड़ रुपए का निवेश आया, जबकि पिछले महीने यह 7,973 करोड़ रुपए था। मिड-कैप फंड में भी निवेशकों की अच्छी भागीदारी रही। इनमें अगस्त के 6,989 करोड़ रुपए की तुलना में सितंबर में 7,835 करोड़ रुपए का निवेश आया।फ्लेक्सी-कैप फंड में शुद्ध निवेश एक महीने पहले के 5,059 करोड़ रुपए से बढ़कर 6,702 करोड़ रुपए हो गया। वहीं, सेक्टोरल और थीमैटिक फंड में निवेश बढ़कर 3,640 करोड़ रुपए हो गया, जबकि अगस्त में यह 1,713 करोड़ रुपए था।लार्ज-कैप फंड एक महीने की शुद्ध निकासी के बाद फिर से सकारात्मक दायरे में लौट आए। सितंबर में इनमें 859 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश आया, जबकि अगस्त में 1,147 करोड़ रुपए की शुद्ध निकासी हुई थी।इस बीच, मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड में 3,667 करोड़ रुपए का निवेश आया, जो पिछले महीने के 3,671 करोड़ रुपए के लगभग बराबर रहा। सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के माध्यम से निवेशकों की भागीदारी मजबूत बनी रही। सितंबर में मासिक एसआईपी योगदान रिकॉर्ड 32,490 करोड़ रुपए पर पहुंच गया, जो अगस्त में दर्ज 32,297 करोड़ रुपए से थोड़ा अधिक है। -
नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार सोमवार के कारोबारी सत्र में लाल निशान में बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 547.65 अंक या 0.76 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 71,924.68 और निफ्टी 157.10 अंक या 0.70 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 22,363.35 पर था।
बाजार में बिकवाली का सबसे अधिक दबाव एफएमसीजी और सरकारी बैंकिंग स्टॉक्स में देखा गया। सूचकांकों में निफ्टी एफएमसीजी 1.67 प्रतिशत और निफ्टी पीएसयू बैंक 1.18 प्रतिशत की कमजोरी के साथ टॉप लूजर्स थे। इसके अलावा, निफ्टी इन्फ्रा, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी आईटी, निफ्टी कंजप्शन, निफ्टी कमोडिटीज और निफ्टी ऑयल एंड गैस सबसे ज्यादा गिरने वाले सूचकांकों में शामिल थे।दूसरी तरफ निफ्टी मीडिया, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी ऑटो, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग, निफ्टी फार्मा, निफ्टी पीएसई और निफ्टी एनर्जी हरे निशान में थे।लार्जकैप के उलट मिडकैप और स्मॉलकैप में खरीदारी देखी गई। निफ्टी स्मॉलैकप 100 इंडेक्स 272.10 अंक या 1.42 प्रतिशत की बढ़त के साथ 19,425.80 और निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 47.25 अंक की मामूली तेजी के साथ 58,834.55 पर बंद हुआ।सेंसेक्स पैक में बीईएल, एमएंडएम, कोटक महिंद्रा बैंक, एचसीएल टेक, बजाज फाइनेंस, सन फार्मा और टाइटन गेनर्स थे। आईटीसी, टेक महिंद्रा, एचयूएल, एलएंडटी, एसबीआई, टीसीएस, भारती एयरटेल, बजाज फिनसर्व, अल्ट्राटेक सीमेंट, इंडिगो, टाटा स्टील, इन्फोसिस, आईसीआईसीआई बैंक, मारुति सुजुकी, एशियन पेंट्स, एचडीएफसी बैंक, ट्रेंट, एक्सिस बैंक, एनटीपीसी, इटरनल और पावर ग्रिड लूजर्स थे। 10-साल के बॉन्ड यील्ड के तीन साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचने और बाहरी अनिश्चितताओं के कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली से सेंटीमेंट कमजोर होने के कारण भारतीय बाजार सत्र की शुरुआती बढ़त को बनाए नहीं रख पाए। आरबीआई द्वारा ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की डॉलर की जरूरतों के लिए एक स्पेशल विंडो खोलने और हेजिंग नियमों को सख्त करने के बाद रुपए में रिकवरी आई, जिससे करेंसी पर दबाव कम करने में मदद मिली। -
नयी दिल्ली. विश्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर मंगलवार को 7.1 प्रतिशत कर दिया। यह अप्रैल में लगाए गए अनुमान से 0.5 प्रतिशत अंक अधिक है। वृद्धि के अनुमान में यह बढ़ोतरी पहली तिमाही के उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन के कारण की गई है। विश्व बैंक ने अपनी नवीनतम 'इंडिया डेवलपमेंट अपडेट' रिपोर्ट में कहा, ''हमने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वृद्धि का अनुमान अप्रैल के 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया है, क्योंकि व्यापार एवं भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद वृद्धि उम्मीद से बेहतर रही है।'' भारत की आर्थिक वृद्धि दर वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 7.8 प्रतिशत हो गई, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 7.2 प्रतिशत थी। इस वृद्धि को मजबूत निवेश और ठोस निजी खपत से समर्थन मिला तथा अनुकूल नीतिगत एवं ऋण परिस्थितियों का असर व्यापारिक तनाव पर भारी पड़ा। विश्व बैंक ने कहा कि शुरुआत में ग्रामीण खपत शहरी मांग से आगे रही। इसे कृषि क्षेत्र के बेहतर प्रदर्शन, ग्रामीण आय सहायता, खाद्य सब्सिडी और कम मुद्रास्फीति से समर्थन मिला। वहीं, आयकर में राहत और माल एवं सेवा कर (जीएसटी) में कटौती के बाद साल के बाकी बचे हिस्से में शहरी खपत मजबूत हुई। अप्रैल के बाद से वैश्विक प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद औद्योगिक गतिविधियां उम्मीद से बेहतर रही हैं।
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नयी दिल्ली. नियोक्ता अपने कर्मचारियों को बीमा आवरण देने के लिए जो प्रीमियम चुकाते हैं, जल्द ही वे उस पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का दावा कर सकते हैं। माल एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद सात अक्टूबर को होने वाली अपनी बैठक में इससे संबंधित एक प्रस्ताव पर विचार कर सकती है। जीएसटी कानून के तहत व्यक्तियों द्वारा अपने या अपने परिवार के लिए जीवन या स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी खरीदने पर जीएसटी से छूट प्राप्त है। हालांकि, जब कोई कारोबारी संस्थान अपने कर्मचारियों के लिए जीवन या स्वास्थ्य बीमा खरीदता है, तो उस पर कर लगाया जाता है और अब तक कंपनियां इस पर आईटीसी का दावा नहीं कर सकती हैं। इस समय ऐसी सभी समूह बीमा पॉलिसियों पर 18 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगाया जाता है। जीएसटी परिषद अब कारोबारों को कर्मचारियों के लिए बीमा कवर खरीदने पर क्रेडिट का दावा करने की अनुमति देने के प्रस्ताव पर विचार करेगी। सूत्रों ने कहा, ''इससे हर नियोक्ता के लिए कर्मचारियों को बीमा उपलब्ध कराना सस्ता हो जाएगा।'' सूत्रों ने आगे बताया कि लगभग हर संगठित नियोक्ता अपने कर्मचारियों को बीमा कवर देता है, इसलिए यह सुविधा उपलब्ध कराने की लागत कम होगी। इससे बीमा का दायरा बढ़ाने में मदद मिलेगी और स्वयं बीमा उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा।
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नयी दिल्ली. भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने दूरसंचार कंपनियों को अपनी वेबसाइट, मोबाइल ऐप और विशेष बिक्री केंद्रों पर अनिवार्य रिचार्ज प्लान तथा विशेष शुल्क (टैरिफ) वाउचर प्रमुखता से प्रदर्शित करने का निर्देश दिया है। एक आधिकारिक आदेश में बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी गई। उपभोक्ताओं की शिकायतों के बाद यह निर्देश जारी किया गया है। नियामक ने जांच में पाया कि दूरसंचार कंपनियों की वेबसाइट और मोबाइल ऐप पर ये प्लान ऐसे प्रदर्शित किए गए थे, जिससे उन्हें आसानी से देखा नहीं जा सकता था। ट्राई ने अपने आदेश में कहा, ''सभी दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को अलग और स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाला एक खंड बनाना होगा, जिसका शीर्षक 'ट्राई-अनिवार्य पैक्स' होगा। इसमें ट्राई द्वारा अनिवार्य किए गए विभिन्न प्रकार के वाउचर शामिल होंगे। दूरसंचार कंपनियों को इस निर्देश का पालन आदेश जारी होने की तारीख से 30 दिन के भीतर करना होगा।'' ट्राई ने हाल ही में दूरसंचार कंपनियों के लिए 'वॉयस कॉल' और 'एसएमएस' की अलग से सुविधा वाले विशेष टैरिफ वाउचर जारी करना भी अनिवार्य किया था। इन वाउचर के साथ डेटा यानी इंटरनेट प्लान लेने की जरूरत नहीं होंगी और ये सस्ते भी होंगे। विशेष शुल्क वाउचर मोबाइल ग्राहकों के लिए अतिरिक्त रिचार्ज की तरह काम करता है। इसके जरिये ग्राहक अतिरिक्त राशि का भुगतान कर कुछ अतिरिक्त सुविधाएं हासिल कर सकते हैं। ट्राई ने कहा कि विभिन्न दूरसंचार कंपनियों की वेबसाइट और मोबाइल ऐप की जांच में पाया गया कि ट्राई द्वारा अनिवार्य वाउचर न तो प्रमुखता से प्रदर्शित किए गए थे और न ही उन तक आसानी से पहुंचा जा सकता था। नियामक के अनुसार, कुछ मामलों में इन वाउचर को अलग-अलग श्रेणियों के तहत रखा गया था या उन्हें खोजने के लिए उपभोक्ताओं को कई पेज या स्क्रीन पर जाना पड़ता था। इसके कारण ग्राहकों को अपनी जरूरत के मुताबिक वाउचर ढूंढने और उन्हें लेने में परेशानी हो रही थी। ट्राई ने प्रत्येक दूरसंचार कंपनी के लिए कम से कम एक प्लान वाउचर, एक विशेष शुल्क वाउचर और एक कॉम्बो वाउचर 30 दिन की वैधता के साथ उपलब्ध कराना अनिवार्य किया है।
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नयी दिल्ली. घरेलू रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने बुधवार को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए देश की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर सात प्रतिशत कर दिया। इससे पहले, उसने 6.6 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान जताया था। एजेंसी ने यह संशोधन अप्रैल-सितंबर की पहली छमाही में मजबूत आर्थिक वृद्धि की उम्मीद को देखते हुए किया है। क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री डी.के. जोशी ने कहा कि पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि के साथ पहली छमाही में मजबूत आर्थिक वृद्धि की उम्मीद को देखते हुए वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाया गया है। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ''अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है। हमें उम्मीद है कि पहली छमाही में तेज वृद्धि होगी, जबकि दूसरी छमाही में वृद्धि की रफ्तार धीमी होगी।'' जोशी ने कहा कि वृद्धि के अनुमान में वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान कच्चे तेल की औसत कीमत 87-93 डॉलर प्रति बैरल मानी गई है, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में यह 70 डॉलर प्रति बैरल थी। उन्होंने कहा कि दूसरा प्रमुख कारक मानसून होगा। फिलहाल मानसून दीर्घकालिक औसत से 12 प्रतिशत कम है और इसका असर सर्दियों की फसल पर भी पड़ सकता है। जलाशयों में पानी का स्तर और मिट्टी में नमी की स्थिति रबी फसल को प्रभावित करेगी, जिसका असर आर्थिक वृद्धि पर भी पड़ सकता है। जोशी ने रुपये के बारे में कहा कि भारतीय मुद्रा अपने उचित मूल्य से नीचे है और मार्च, 2027 तक डॉलर के मुकाबले यह 93.5 रुपया तक जा सकता है। उन्होंने कहा कि रुपये में पहले भी गिरावट के दौर के बाद मजबूती देखी गई है।
एजेंसी को उम्मीद है कि भारतीय रिजर्व बैंक अक्टूबर और दिसंबर की मौद्रिक नीति समीक्षा में 0.25-0.25 प्रतिशत अंक की वृद्धि कर सकता है। हालांकि, इससे निजी क्षेत्र के पूंजी निवेश पर असर पड़ने की संभावना नहीं है क्योंकि कंपनियों के पास पर्याप्त नकदी है और उनकी देनदारियां कम हुई हैं। जोशी ने कहा कि आरबीआई आगे भी व्यवस्था में अतिरिक्त नकदी को नियंत्रित करने के लिए विभिन्न उपायों का उपयोग करता रहेगा। उन्होंने कहा कि वृद्धि की प्रक्रिया को और मजबूत बनाने के लिए कौशल विकास पर ध्यान देने की जरूरत है। कृत्रिम मेधा कुछ कामों को स्वचालित कर सकती है, लेकिन पिछली तकनीकी क्रांतियों की तरह यह नए रोजगार के अवसर भी सृजित कर सकती है। -
मुंबई. भारत का बाह्य यानी विदेशी कर्ज मार्च तिमाही के मुकाबले जून तिमाही में 15.4 अरब डॉलर बढ़कर 778.2 अरब डॉलर हो गया। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के बुधवार को जारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली। हालांकि, सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के अनुपात में बाह्य ऋण जून, 2026 के अंत में घटकर 20.8 प्रतिशत रहा, जो 31 मार्च, 2026 को 20.9 प्रतिशत था। आरबीआई ने कहा, ''येन और यूरो जैसी प्रमुख मुद्राओं की तुलना में अमेरिकी डॉलर की मजबूती से मूल्यांकन लाभ 90 करोड़ डॉलर रहा। मूल्यांकन प्रभाव को हटाने पर जून, 2026 के अंत में बाह्य ऋण में 15.4 अरब डॉलर के बजाय 16.4 अरब डॉलर की वृद्धि होती।'' जून तिमाही में एक साल से अधिक की मूल परिपक्वता अवधि वाला दीर्घकालिक ऋण 624.7 अरब डॉलर रहा। यह मार्च, 2026 के मुकाबले 11.2 अरब डॉलर अधिक है। वहीं, कुल बाह्य ऋण में एक साल तक की मूल परिपक्वता अवधि वाले अल्पकालिक ऋण की हिस्सेदारी जून, 2026 के अंत में बढ़कर 19.7 प्रतिशत हो गई, जो पिछली तिमाही के अंत में 19.6 प्रतिशत थी। इसी तरह, विदेशी मुद्रा भंडार की तुलना में अल्पकालिक ऋण का अनुपात जून, 2026 के अंत में बढ़कर 23 प्रतिशत हो गया, जो मार्च, 2026 के अंत में 21.6 प्रतिशत था। आरबीआई के अनुसार, अमेरिकी डॉलर में ऋण भारत के बाह्य ऋण का सबसे बड़ा हिस्सा रहा। जून, 2026 के अंत में इसकी हिस्सेदारी 54.8 प्रतिशत थी। इसके बाद भारतीय रुपये में ऋण की हिस्सेदारी 29.8 प्रतिशत, येन 6.9 प्रतिशत, विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) 4.1 प्रतिशत और यूरो की हिस्सेदारी 3.5 प्रतिशत रही। केंद्रीय बैंक ने कहा, ''जून, 2026 के अंत में सरकार और गैर-सरकारी, दोनों क्षेत्रों का बकाया ऋण मार्च, 2026 के मुकाबले बढ़ गया।'' विदेशी ऋण में कर्ज सबसे बड़ा घटक रहा, जिसकी हिस्सेदारी 34.3 प्रतिशत थी। इसके बाद मुद्रा एवं जमा (22.2 प्रतिशत), व्यापार ऋण एवं अग्रिम (19.1 प्रतिशत) और ऋण प्रतिभूतियों (16.5 प्रतिशत) का स्थान रहा। मूलधन और ब्याज भुगतान जून, 2026 के अंत में चालू प्राप्तियों का 5.6 प्रतिशत रहा। मार्च, 2026 में भी यह अनुपात इतना ही था।
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नयी दिल्ली. सरकार ने यात्री वाहन विनिर्माताओं के लिए सीएएफई-3 के कड़े ईंधन दक्षता मानक अधिसूचित किए हैं, जिनका लक्ष्य पांच साल में वाहनों की औसत ईंधन खपत में 16.7 प्रतिशत सुधार करना है। इसके लिए वाहन कंपनियों को इलेक्ट्रिक वाहन, हाइब्रिड, वैकल्पिक ईंधन और ईंधन बचाने वाली प्रौद्योगिकियों के जरिये लक्ष्य हासिल करने के अधिक विकल्प भी दिए गए हैं। बिजली मंत्रालय की तरफ से अधिसूचित नए 'कॉरपोरेट औसत ईंधन अर्थव्यवस्था' (सीएएफई-3) मानक एक अप्रैल, 2027 से लागू होंगे और 31 मार्च, 2032 तक प्रभावी रहेंगे। इसके तहत औसत ईंधन खपत का मानक 2027-28 में 3.996 लीटर प्रति 100 किलोमीटर से घटकर 2031-32 में 3.327 लीटर प्रति 100 किलोमीटर हो जाएगा। नए ईंधन दक्षता मानक मौजूदा सीएएफई व्यवस्था की जगह लेंगे। इनमें वाहनों के औसत वजन को भी अधिक महत्व दिया गया है। संदर्भ वाहन का वजन मौजूदा 1,082 किलोग्राम से बढ़ाकर 1,229 किलोग्राम कर दिया गया है। इससे हल्के वाहनों के लिए अपेक्षाकृत नरम लक्ष्य और भारी वाहनों के लिए अधिक ईंधन दक्षता सुधार की जरूरत होगी। नए मानकों के तहत इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों को कंपनी के औसत ईंधन दक्षता लक्ष्य की गणना में उनकी वास्तविक संख्या से अधिक भार दिया जाएगा। इसके तहत बैटरी इलेक्ट्रिक और रेंज एक्सटेंडेड इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए 3.0, प्लग-इन हाइब्रिड और फ्लेक्स-फ्यूल एथनॉल आधारित मजबूत हाइब्रिड वाहनों के लिए 2.5, मजबूत हाइब्रिड वाहनों के लिए 1.6 और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए 1.1 का गुणक तय किया गया है। मसलन, 3.0 के गुणक के तहत एक बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन को अनुपालन गणना में तीन वाहनों के बराबर माना जाएगा। मानकों में ईंधन बचाने वाली मान्य प्रौद्योगिकियों की संख्या भी चार से बढ़ाकर 12 कर दी गई है। प्रत्येक पात्र प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल पर कार्बन डाइऑक्साइड (सीओ2) उत्सर्जन में एक ग्राम प्रति किलोमीटर की कमी का लाभ मिलेगा, हालांकि इसकी अधिकतम सीमा नौ ग्राम प्रति किलोमीटर होगी। इनमें स्टार्ट-स्टॉप प्रणाली, टायर प्रेशर निगरानी, रीजनरेटिव ब्रेकिंग, अधिक दक्षता वाले अल्टरनेटर, माइक्रो-हाइब्रिड प्रणाली और एलईडी लाइटिंग जैसी प्रौद्योगिकी शामिल हैं। वैकल्पिक ईंधन से चलने वाले वाहनों को भी सीएएफई-3 के तहत कार्बन निरपेक्षता घटक के जरिये अनुपालन में अतिरिक्त लाभ मिलेगा। इसके तहत ई20 या इससे अधिक एथनॉल-मिश्रित पेट्रोल से चलने वाले वाहनों के टेलपाइप सीओ2 उत्सर्जन पर आठ प्रतिशत का कार्बन निरपेक्षता घटक लागू होगा। फ्लेक्स-फ्यूल एथनॉल वाहनों के लिए यह घटक 22.3 प्रतिशत होगा। सीएनजी वाहनों के मामले में पांच प्रतिशत या अधिसूचित सीबीजी मिश्रण के प्रतिशत, जो भी अधिक हो, का कार्बन तटस्थता घटक लागू होगा। लक्ष्य से बेहतर प्रदर्शन करने वाली कंपनियां अनुपालन क्रेडिट अर्जित कर सकेंगी, जबकि लक्ष्य से पीछे रहने पर डेबिट जमा होगा। क्रेडिट को संबंधित अनुपालन अवधि में आगे ले जाने के साथ कंपनियों के बीच उनका कारोबार या विनिमय किया जा सकेगा। कंपनियां ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) से भी क्रेडिट खरीदकर डेबिट की भरपाई कर सकेंगी। नए नियमों के अनुपालन की पहली अवधि वित्त वर्ष 2027-28 से तीन साल की होगी, जबकि दूसरी अवधि वित्त वर्ष 2030-31 से दो साल की होगी। किसी भी अवधि के अंत में निपटान नहीं किए गए क्रेडिट समाप्त हो जाएंगे। अप्रैल, 2027 से वाहन कंपनियों को संशोधित भारतीय ड्राइविंग चक्र (एमआईडीसी) और विश्व स्तर पर सामंजस्यपूर्ण हल्के वाहनों की परीक्षण प्रक्रिया (डब्ल्यूएलटीपी) दोनों के तहत वाहनों के प्रदर्शन की जानकारी देनी होगी। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय वाहनों के परीक्षण, प्रमाणन और रिपोर्टिंग से जुड़ी व्यवस्था की निगरानी करेगा, जबकि बीईई क्रेडिट और अनुपालन ढांचे का संचालन करेगा। सरकार ने कहा कि इन मानकों को वाहन कंपनियों, उद्योग संगठनों, शिक्षाविदों और अन्य हितधारकों के साथ विचार-विमर्श के बाद अंतिम रूप दिया गया है। इसका उद्देश्य भारत में जीवाश्म ईंधन की खपत कम करने के साथ इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड, एथनॉल और अन्य स्वच्छ वाहन प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देना है। एक हजार से कम पात्र वाहनों का सालाना उत्पादन या आयात करने वाली कंपनियां किसी विशिष्ट औसत ईंधन दक्षता लक्ष्य को पूरा करने से मुक्त रहेंगी। हालांकि, उन्हें ईंधन खपत से जुड़े आंकड़ों की जानकारी देनी होगी।
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नयी दिल्ली. दिग्गज इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी सैमसंग ने अपने प्रमुख स्मार्टफोन गैलेक्सी एस26 सीरीज की कीमतें 17 प्रतिशत तक बढ़ा दी हैं। मोबाइल फोन उद्योग पर नजर रखने वाले सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी। सूत्रों के मुताबिक, सैमसंग ने अपने प्रमुख स्मार्टफोन के दाम मेमोरी चिप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक कलपुर्जों की बढ़ती लागत के बीच बढ़ाए हैं। अब 256 जीबी स्टोरेज वाला गैलेक्सी एस26 का बेस मॉडल 1,02,999 रुपये का हो गया है, जो जनवरी में पेश किए जाने के समय 87,999 रुपये का था। इस तरह इस मॉडल की कीमत में करीब 17 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इस साल जनवरी में जब गैलेक्सी एस26 सीरीज को पेश किया गया था तो उसके दाम गैलेक्सी एस25 सीरीज की तुलना में 8-15 प्रतिशत अधिक रखे गए थे। उस समय गैलेक्सी एस26 अल्ट्रा की शुरुआती कीमत 1,39,999 रुपये, गैलेक्सी एस26 प्लस की 1,19,999 रुपये और बेस एस26 मॉडल की 87,999 रुपये थी। हालांकि, कीमतों में इस बढ़ोतरी के बाद गैलेक्सी एस26 सीरीज के सभी मॉडल एक लाख रुपये से अधिक कीमत के हो गए हैं। वहीं, एक टीबी (टेराबाइट) स्टोरेज वाला गैलेक्सी एस26 अल्ट्रा अब 2,14,999 रुपये में उपलब्ध होगा। कीमत बढ़ोतरी के बारे में सैमसंग को भेजे गए ईमेल का कंपनी ने कोई जवाब नहीं दिया। उद्योग सूत्रों ने कीमत बढ़ोतरी के लिए इस साल मेमोरी चिप, मदरबोर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक कलपुर्जों की बढ़ती लागत को जिम्मेदार बताया है। सैमसंग का यह कदम ऐसे समय आया है जब प्रतिद्वंद्वी कंपनी एप्पल ने भी इस साल आईफोन 18 सीरीज को पिछली आईफोन 17 सीरीज की तुलना में अधिक कीमत पर पेश किया है। भारत में आईफोन 18 सीरीज की कीमतें पिछली सीरीज के मुकाबले 20-43 प्रतिशत अधिक घोषित की गई हैं।
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नयी दिल्ली. रिलायंस जियो ने अगस्त में सबसे अधिक करीब 24 लाख मोबाइल ग्राहक जोड़े। वहीं इस दौरान जबकि भारती एयरटेल ने करीब 21.1 लाख नए कनेक्शन जोड़े हैं। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) के सोमवार को जारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गई। ट्राई के अनुसार, जियो के वायरलेस मोबाइल ग्राहकों की संख्या जुलाई के अंत में 50.60 करोड़ थी जो अगस्त के अंत में बढ़कर 50.84 करोड़ हो गई। इस दौरान कंपनी ने 24 लाख ग्राहक जोड़े। आंकड़ों के अनुसार, इस दौरान एयरटेल के ग्राहकों की संख्या 48.94 करोड़ से बढ़कर 49.16 करोड़ हो गई, यानी उसने करीब 21.1 लाख ग्राहक जोड़े। वोडाफोन आइडिया ने अगस्त में करीब 5.06 लाख और सरकारी दूरसंचार कंपनी बीएसएनएल ने करीब 4.93 लाख वायरलेस मोबाइल ग्राहक जोड़े। वहीं, एमटीएनएल के ग्राहकों की संख्या करीब 5,900 घट गई। ट्राई के अनुसार, मोबाइल और फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस (एफडब्ल्यूए) सहित कुल वायरलेस ग्राहकों की संख्या अगस्त के अंत में बढ़कर 131.22 करोड़ हो गई। जुलाई की तुलना में इसमें 0.46 प्रतिशत की मासिक वृद्धि हुई। शहरी क्षेत्रों में वायरलेस ग्राहकों की संख्या जुलाई में 75.38 करोड़ थी जो अगस्त में बढ़कर 75.91 करोड़ हो गई। ग्रामीण क्षेत्रों में यह संख्या 55.24 करोड़ से बढ़कर 55.31 करोड़ हो गई। अगस्त के अंत में निजी दूरसंचार कंपनियों की वायरलेस मोबाइल ग्राहकों में कुल हिस्सेदारी 92.75 प्रतिशत रही, जबकि सरकारी कंपनियों बीएसएनएल और एमटीएनएल की संयुक्त हिस्सेदारी 7.25 प्रतिशत थी। ट्राई के अनुसार, प्रमुख दूरसंचार कंपनियों में एयरटेल के सक्रिय मोबाइल ग्राहकों का अनुपात सबसे अधिक रहा। अगस्त में पीक विजिटर लोकेशन रजिस्टर (वीएलआर) के दिन एयरटेल के वायरलेस मोबाइल ग्राहकों में 99.01 प्रतिशत सक्रिय थे। वायरलाइन कनेक्शन सहित कुल टेलीफोन ग्राहकों की संख्या अगस्त के अंत में बढ़कर 136.07 करोड़ हो गई। इसमें जुलाई की तुलना में 0.47 प्रतिशत की मासिक वृद्धि हुई।
- नई दिल्ली। 28 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित देशव्यापी बैंक हड़ताल के बीच भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने ग्राहकों को बड़ी राहत देते हुए घोषणा की है कि हड़ताल की अवधि के दौरान सभी एटीएम ट्रांजैक्शन पर कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। बैंक का कहना है कि यह फैसला ग्राहकों को निर्बाध बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराने और हड़ताल के संभावित प्रभाव को कम करने के उद्देश्य से लिया गया है।सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक पोस्ट में एसबीआई ने कहा कि प्रस्तावित हड़ताल के दौरान भी ग्राहकों की बैंकिंग जरूरतों को पूरा करने के लिए उसकी सेवाएं उपलब्ध रहेंगी। इसी के तहत 28 सितंबर से 30 सितंबर 2026 के बीच ग्राहकों से किसी भी बैंक के एटीएम पर किए गए लेनदेन के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।बैंक ने यह भी बताया कि ग्राहकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उसकी सभी शाखाएं रविवार, 27 सितंबर को भी खुली रहेंगी। इसके अलावा यूपीआई, आईएमपीएस, आरटीजीएस और एनईएफटी जैसी ऑनलाइन भुगतान सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी, जिससे डिजिटल माध्यम से लेनदेन में किसी प्रकार की बाधा नहीं आएगी।सरकार ने भी आम लोगों की बैंकिंग जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को रविवार को खुला रखने का निर्देश दिया है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 27 सितंबर को सभी बैंक शाखाओं, कार्यालयों, एटीएम से जुड़ी शाखाओं और करेंसी चेस्ट को पूर्ण रूप से संचालित रखने की अनुमति दे दी है।वित्त मंत्रालय ने कहा है कि सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक रविवार को सामान्य रूप से कार्य करेंगे। मंत्रालय के अनुसार, यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) द्वारा 28 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित तीन दिवसीय हड़ताल ऐसे समय रखी गई है, जब उससे पहले 26 और 27 सितंबर को सप्ताहांत की छुट्टियां भी हैं। ऐसे में यदि विशेष व्यवस्था नहीं की जाती, तो बैंकिंग गतिविधियां लगातार पांच दिनों तक प्रभावित हो सकती थीं।सरकार का कहना है कि आम नागरिकों की सुविधा और बैंकिंग सेवाओं की उपलब्धता उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी कारण सरकार और बैंक प्रबंधन ने यूनियनों से प्रस्तावित हड़ताल को स्थगित करने की अपील भी की है। साथ ही यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं कि आवश्यक बैंकिंग सेवाएं बिना किसी रुकावट के जारी रह सकें।
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नयी दिल्ली. ई-कॉमर्स मंच मिंत्रा ने बृहस्पतिवार को कहा कि उसने त्योहारी मौसम और अपने 'बिग फैशन फेस्टिवल' से पहले 26,000 से अधिक अस्थायी रोजगार के अवसरों का सृजन किया है। यह संख्या पिछले साल की तुलना में दोगुने से अधिक है। कंपनी ने बयान में कहा कि इन अस्थायी नौकरियों में 350 से अधिक पद दिव्यांगजनों के लिए रखे गए हैं, जबकि उसके ऑर्डर पूर्ति केंद्रों में तैनात कार्यबल में महिलाओं की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत होगी। त्योहारी भर्तियों में आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े काम, जैसे छंटाई, ग्रेडिंग और पैकिंग शामिल हैं। इसके अलावा 8,000 डिलिवरी साझेदार और 2,700 ग्राहक सेवा कर्मचारियों को भी शामिल किया गया है। मिंत्रा ने बताया कि इन कर्मचारियों की भर्ती ओडिशा, कर्नाटक, बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और झारखंड समेत कई राज्यों से की गई है। ये कर्मचारी बेंगलुरु, मुंबई, कोलकाता, बिलासपुर और बिनोला स्थित पांच ऑर्डर पूर्ति केंद्रों में काम करेंगे। कंपनी के मुताबिक, चुनिंदा स्थानों पर 24 से 48 घंटे में डिलिवरी देने वाली 'एम-एक्सप्रेस' सेवा के लिए भी इनकी तैनाती होगी। अतिरिक्त कर्मचारियों से त्योहारी अवधि में परिचालन और डिलिवरी क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी। मिंत्रा के मुख्य मानव संसाधन अधिकारी गोविंदराज एमके ने कहा, ''इस साल त्योहारों के मौसम में कार्यबल बढ़ाने के साथ कंपनी रोजगार और आय के अवसर पैदा करने के अलावा कर्मचारियों को सहयोग और प्रोत्साहन देने पर भी ध्यान दे रही है।''
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कोलकाता. अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने बृहस्पतिवार को कहा कि पश्चिम बंगाल को देश के अगले विकास चरण के लिए एक अहम इंजन के तौर पर उभरना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य की रणनीतिक स्थिति इसे 'विकसित भारत' के सपने को पूरा करने के लिए जरूरी बनाती है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दशक में भारत की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार का ज्यादातर हिस्सा देश के पश्चिमी और दक्षिणी हिस्सों से आया है, लेकिन विकास के अगले चरण में विकास के नए केंद्र बनने चाहिए। अदाणी ने यहां इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स के एक कार्यक्रम में कहा, ''भारत के अगले ट्रिलियन (एक हजार अरब) डॉलर के विकास के लिए पूर्वी भारत का आगे बढ़ना जरूरी है। यहीं पर 'विकसित भारत' के सपने को पूरा करने के लिए बंगाल अहम हो जाता है।'' उन्होंने कहा कि पश्चिम में ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ के खनिज और औद्योगिक क्षेत्र और बंगाल की खाड़ी के जरिये तेजी से बढ़ते दक्षिण-पूर्व एशियाई और हिंद-प्रशांत बाजारों तक पहुंच के कारण, देश में कोई दूसरी जगह इस राज्य के फायदों के मेल का मुकाबला नहीं कर सकती।

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