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वाशिंगटन. मजबूत उपभोक्ता खर्च के दम पर अमेरिका की अर्थव्यवस्था जुलाई-सितंबर तिमाही में दो साल में सबसे तेज 4.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने बृहस्पतिवार को जुलाई-सितंबर, 2025 तिमाही के जीडीपी आंकड़े पहले के अनुमान से थोड़ा अधिक रहने की जानकारी दी। सितंबर तिमाही में अमेरिकी अर्थव्यवस्था वार्षिक आधार पर 4.4 प्रतिशत बढ़ी जबकि अप्रैल-जून तिमाही में इसकी वृद्धि दर 3.8 प्रतिशत रही थी। विभाग ने पहले इसके 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया था। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में पिछली बार इतनी तेजी जुलाई-सितंबर तिमाही, 2023 में दर्ज की गई थी।
जीडीपी में करीब 70 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला उपभोक्ता खर्च आलोच्य तिमाही में 3.5 प्रतिशत बढ़ा। इसके अलावा, निर्यात में तेजी और आयात में कमी ने भी अर्थव्यवस्था की वृद्धि में योगदान दिया। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शुल्क एवं व्यापार नीतियों में अनिश्चितता के बावजूद दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था काफी हद तक जुझारू बनी हुई है। हालांकि, आम अमेरिकी उच्च जीवन यापन लागत से असंतुष्ट बने हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह 'के-आकार' वाली अर्थव्यवस्था का संकेत है जिसमें संपन्न वर्ग की आय निवेश एवं शेयर बाजार लाभ के कारण बढ़ रही है, जबकि निम्न एवं मध्यम आय वर्ग के घरों की आय स्थिर और महंगाई बढ़ी हुई है। रोजगार क्षेत्र की स्थिति भी तुलनात्मक रूप से कमजोर दिख रही है। पिछले साल मार्च से यहां प्रतिमाह औसतन केवल 28,000 नौकरियां जुड़ी हैं, जबकि 2021-23 के दौर में यह आंकड़ा चार लाख नौकरी प्रति माह था। इसके बावजूद बेरोज़गारी दर 4.4 प्रतिशत पर है जो कंपनियों की 'न भर्ती, न बर्खास्तगी' नीति को दर्शाती है। -
नयी दिल्ली. होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया (एचएमएसआई) ने मंगलवार को कहा कि वह अपनी सीबीआर 650आर मोटरसाइकिल की कुछ इकाइयों को वापस मंगा रही है। दोपहिया वाहन विनिर्माता ने एक बयान में कहा कि वैश्विक बाजार की कार्रवाई के अनुरूप 16 दिसंबर, 2024 से चार मई, 2025 के बीच विनिर्मित कुछ इकाइयां इससे प्रभावित हो सकती हैं। होंडा मोटरसाइकिल ने कहा, ''कंपनी ने पाया है कि कुछ इकाइयों में इंडिकेटर का एक वायरिंग हिस्सा धातु के घटक से रगड़ खा सकता है, और समय के साथ कंपन के कारण इसमें शॉर्ट सर्किट हो सकता है। इससे कुछ लाइट काम करना बंद कर सकती हैं।'' बयान में आगे कहा गया कि एहतियाती कदम के तौर पर ग्राहकों को यह जांचने की सलाह दी जाती है कि क्या उनकी मोटरसाइकिल प्रभावित निर्माण अवधि के भीतर आती है। कंपनी ने कहा कि यदि वाहन प्रभावित श्रेणी में है, तो ग्राहकों से अनुरोध है कि वे वाहन के निरीक्षण के लिए अपने नजदीकी 'बिगविंग' डीलरशिप पर जाएं। अगर जरूरी हुआ तो प्रभावित हिस्सों को मुफ्त में बदला जाएगा, चाहे वाहन की वारंटी की स्थिति कुछ भी हो। हालांकि, एचएमएसआई ने यह नहीं बताया कि कितनी इकाइयों को वापस मंगाया जा रहा है।
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नयी दिल्ली. देश के एक तिहाई से ज्यादा पशुपालक दूध नहीं बेचते और इसके बजाय वे घरेलू पोषण, गोबर और खेती संबंधी अन्य कामकाज में पशुओं के इस्तेमाल पर जोर देते हैं। यह डेयरी उत्पादन से आगे की नीतियों की जरूरत को बताता है। एक अध्ययन रिपोर्ट में मंगलवार यह कहा गया। ‘एनर्जी, एनावायरनमेंट एंड वाटर काउंसिल' (सीईईडब्ल्यू) की अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार, ये नतीजे इस मान्यता को चुनौती देते हैं कि भारत का मवेशी क्षेत्र मुख्य रूप से दूध की बिक्री से चलता है। इसमें 15 राज्यों में 7,350 मवेशी पालने वाले परिवारों का सर्वेक्षण किया, जो देश की 91 प्रतिशत दुधारू आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं। अध्ययन में पाया गया कि लगभग 38 प्रतिशत पशुपालक या लगभग तीन करोड़ लोग, दूध की बिक्री को मवेशी रखने की प्रेरणा नहीं मानते हैं, झारखंड में यह हिस्सा 71 प्रतिशत और पश्चिम बंगाल और हिमाचल प्रदेश में 50 प्रतिशत से ज्यादा है। अध्ययन में कहा गया है, ‘‘पशुपालकों का एक बड़ा हिस्सा पशुपालन जारी रखने की इच्छा रखता है।''
इसमें कहा गया है कि इसलिए, इस क्षेत्र को भविष्य के लिए तैयार करना एक जरूरी नजरिया है जिस पर नीतियां बनाते समय विचार किया जाना चाहिए। अध्ययन में पाया गया कि लगभग तीन-चौथाई पशुपालकों को इलाके में ज्यादा दूध होने के बावजूद सस्ता चारा और आहार जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। सात प्रतिशत पशुपालक, देश भर में लगभग 56 लाख पशुपालक मवेशियों को दूध के अलावा दूसरे कामों के लिए रखते हैं। इसमें गोबर, बैलगाड़ी खींचने या जानवरों को बेचने से होने वाली कमाई जैसे कार्य शामिल हैं। पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में, यह लगभग 15 प्रतिशत है। हिमाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश और असम में, 15 प्रतिशत से ज्यादा पशुपालक मवेशी रखने की अपनी मुख्य वजह सामाजिक-सांस्कृतिक या धार्मिक वजह बताते हैं। जब गायों से जुड़े फायदों की रैंकिंग की गई, तो 34 प्रतिशत पशुपालकों ने घर में इस्तेमाल होने वाले दूध को सबसे पहले रखा, जबकि 20 प्रतिशत ने दूध से अलग वजहों को अपनी मुख्य चिंता बताई। बाजार के अलावा दूसरे इस्तेमाल के लिए मवेशी रखने वाले ज्यादातर घरों में आम तौर पर एक या दो देसी जानवर होते हैं, जो खेती के कामकाज में उनकी अहम भूमिका को दिखाता है। पंजाब में 1,389 जानवरों के अस्पताल हैं, लेकिन सिर्फ 22 मोबाइल डिस्पेंसरी हैं। जबकि आंध्र प्रदेश में 337 अस्पताल और 1,558 मोबाइल डिस्पेंसरी हैं। लगभग 75 प्रतिशत मवेशीपालक गोबर को एक मुख्य प्रेरक मानते हैं। इसलिए अध्ययन में गोबर से मूल्यवर्धन के लिए बेहतर मौकों पर जोर दिया गया, जिसमें घरेलू बायोगैस से लेकर वर्मीकम्पोस्टिंग और मूल्यवर्धित खाद तक शामिल हैं। अध्ययन में सूखे इलाकों में पानी बचाने वाले चारे की खेती को प्राथमिकता देने और आम चरागाहों को अतिक्रमण से बचाने की भी सलाह दी गई। -
कोलकाता. कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) ने मंगलवार को कहा कि उसे महाराष्ट्र में कवलापुर दुर्लभ खनिज (आरईई) ब्लॉक के लिए खनन मंत्रालय से खनिज रियायत लाइसेंस मिला है। कंपनी ने शेयर बाजार को बताया कि खननकर्ता के पास ब्लॉक का लाइसेंस पांच साल के लिए होगा।
इस विकासक्रम को खननकर्ता कंपनी के सामरिक दुर्लभ खनिज खंड में विविधीकरण की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। खनिज ब्लॉक के ब्यौरे के अनुसार, आरईई ब्लॉक नागपुर जिले की रामटेक तहसील के कवलापुर गांव में है और लगभग 398.23 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है। इस ब्लॉक में दुर्लभ खनिज के भूशास्त्रीय स्रोत लगभग 2 करोड़ 79.5 लाख टन होने का अनुमान है।यह कदम कोल इंडिया की दुर्लभ खनिज स्रोत में विस्तार करने की बड़ी रणनीति का हिस्सा है। इसका कारण दुर्लभ खनिज इलेक्ट्रॉनिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रिक परिवहन और रक्षा उपयोग के लिए बहुत जरूरी हैं। यह विकासक्रम, रणनीतिक रूप से जरूरी खनिजों के घरेलू स्रोतों को सुरक्षित करने और आयात पर निर्भरता कम करने के भारत के प्रयास से भी मेल खाता है। -
नई दिल्ली। केंद्र सरकार 1 फरवरी को केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करने की तैयारी में जुटी है। बजट से पहले वित्त मंत्रालय ने मंगलवार को पिछले बजट में की गई प्रमुख घोषणाओं और उन पर अब तक हुई प्रगति का ब्यौरा साझा किया। मंत्रालय ने टैक्स सुधारों से लेकर निवेश से जुड़े बड़े फैसलों तक की जानकारी दी।
वित्त मंत्रालय ने बताया कि फाइनेंस एक्ट 2025 के तहत नए टैक्स सिस्टम यानी न्यू टैक्स रिजीम (एनटीआर) में व्यक्तिगत आयकर ढांचे में अहम बदलाव किए गए हैं। इन सुधारों का उद्देश्य टैक्स देने के बाद आम लोगों के हाथ में ज्यादा पैसा बचाना है।मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी कि ये सभी बदलाव वित्त वर्ष 2025-26 से लागू हो चुके हैं। इसका असर आकलन वर्ष 2026-27 से करदाताओं को दिखेगा।वित्त मंत्रालय ने इनकम टैक्स बिल 2025 को भी एक अहम कदम बताया। इस बिल के जरिए भारत के करीब छह दशक पुराने प्रत्यक्ष कर कानून को बदलने की तैयारी है। सरकार का लक्ष्य है कि नया कानून निवेशकों का भरोसा बनाए रखे, टैक्सपेयर्स को राहत दे और टैक्स व्यवस्था को सरल बनाए।टैक्स नीति में किए गए सुधारों में कॉरपोरेट टैक्स भी शामिल है। जो कंपनियां तय छूट और कटौतियों का लाभ नहीं लेती हैं, उनके लिए कॉरपोरेट टैक्स दर 22% रखी गई है। वहीं, नई मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए सीमित अवधि तक टैक्स दर 15% तय की गई है।व्यक्तिगत आयकर के मोर्चे पर, नए टैक्स सिस्टम में आसान स्लैब और कम टैक्स दरें लागू की गई हैं। इसके तहत 12 लाख रुपए तक की सालाना आय वाले लोगों को टैक्स नहीं देना होगा। सैलरी पाने वाले कर्मचारियों के लिए यह सीमा 12.75 लाख रुपए तक हो जाती है, क्योंकि उन्हें 75,000 रुपए की स्टैंडर्ड डिडक्शन का लाभ मिलता है।फाइनेंस एक्ट 2025 के तहत धारा 10 (23एफई) के लाभ भी बढ़ाए गए हैं। इसके अनुसार, योग्य सॉवरेन वेल्थ फंड (एसडब्ल्यूएफ) और पेंशन फंड अब 31 मार्च 2030 तक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निवेश कर सकेंगे। इन निवेशों पर डिविडेंड, ब्याज और लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ (एलटीसीजी) पर टैक्स छूट जारी रहेगी।वित्त मंत्रालय ने बताया कि इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर (आईएफएससी) से जुड़े अतिरिक्त कामकाज और समय-सीमा बढ़ाने से संबंधित नियमों को फाइनेंस एक्ट 2025 के तहत पूरी तरह लागू कर दिया गया है। ये बदलाव 1 अप्रैल 2025 से प्रभावी हो चुके हैं।मंत्रालय के अनुसार, सरकार ने अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (एआईएफ) के लिए ‘कराधान की निश्चितता’ का अपना वादा पूरा किया है। अब प्रतिभूतियों से होने वाली आय पर टैक्स से जुड़े नियम स्पष्ट कर दिए गए हैं, जिससे निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा।वित्त मंत्रालय ने कहा कि आईएफएससी से जुड़े अतिरिक्त नियमों और समय-सीमा में बढ़ोतरी को भी फाइनेंस एक्ट 2025 के तहत पूरी तरह लागू कर दिया गया है। इन सभी सुधारों का मकसद निवेश को बढ़ावा देना और टैक्स सिस्टम को पारदर्शी बनाना है। -
नयी दिल्ली. राष्ट्रीय राजधानी में मंगलवार को सोना मजबूत मांग आने से 5,100 रुपये की छलांग लगाते हुए पहली बार 1.5 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के पार पहुंच गया जबकि चांदी ने 20,400 रुपये के उछाल के साथ नया रिकॉर्ड बना दिया। अखिल भारतीय सर्राफा संघ ने कहा कि सोना दिल्ली में 5,100 रुपये की बढ़त के साथ 1,53,200 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी कर सहित) पर पहुंच गया। इसके साथ ही सोने ने 1.5 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का अहम मनोवैज्ञानिक स्तर भी पार कर लिया। सोना सोमवार को 1,48,100 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव पर बंद हुआ था।
चांदी की कीमतों ने भी स्थानीय सर्राफा बाजार में मजबूती दिखाते हुए नया उच्चतम स्तर छू लिया। सफेद धातु 20,400 रुपये यानी लगभग सात प्रतिशत बढ़कर 3,23,000 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी कर सहित) पर पहुंच गई। सोमवार को चांदी की कीमतों में 10,000 रुपये की तेजी देखी गई थी, जिससे यह तीन लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर को पार कर गई थी। विदेशी बाजारों में भी सोना और चांदी की मांग में तेजी रही। फॉरेक्स डॉटकॉम के आंकड़ों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना पहली बार 4,700 डॉलर प्रति औंस का स्तर के पार पहुंचा। सोने में 66.38 डॉलर यानी 1.42 प्रतिशत की बढ़त के साथ कीमत 4,737.40 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी हाजिर चांदी ने नया रिकॉर्ड बनाया और 95.88 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।
विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक अस्थिरता, सुरक्षित निवेश की मांग और आभूषणों एवं निवेशकों से आने वाली लगातार मांग के कारण कीमती धातुओं में यह तेजी देखी जा रही है। - नयी दिल्ली. अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) ने सोमवार को भारतीय अर्थव्यवस्था के बेहतर प्रदर्शन को देखते हुए वित्त वर्ष 2025-26 के लिए आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया जो अक्टूबर में जारी अनुमान से 0.7 प्रतिशत अंक अधिक है। वाशिंगटन स्थित बहुपक्षीय वित्तीय संस्था ने अपनी 'विश्व आर्थिक परिदृश्य' रिपोर्ट में कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भी भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 6.4 प्रतिशत कर दिया गया है, जो पहले 6.2 प्रतिशत था। आईएमएफ ने कहा, “भारत में 2025 (वित्त वर्ष 2025-26) के लिए वृद्धि अनुमान को 0.7 प्रतिशत अंक बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया गया है। इसका कारण तीसरी तिमाही में अपेक्षा से बेहतर आर्थिक प्रदर्शन और चौथी तिमाही में मजबूत रफ्तार है।” हालांकि, मुद्राकोष ने कहा कि आने वाले समय में भारत की वृद्धि दर में कुछ नरमी आ सकती है। वित्त वर्ष 2026-27 और 2027-28 में भारत की वृद्धि दर 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है, क्योंकि चक्रीय एवं अस्थायी कारकों का प्रभाव धीरे-धीरे कम होगा। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) में भारत की जीडीपी वृद्धि दर आठ प्रतिशत रही। जुलाई-सितंबर तिमाही में यह वृद्धि 8.2 प्रतिशत दर्ज की गई थी। सांख्यिकी मंत्रालय के पहले अग्रिम अनुमान के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था के 7.4 प्रतिशत की दर से बढ़ने की संभावना है। वित्त वर्ष 2024-25 में वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत रही थी। मुद्रास्फीति के मोर्चे पर आईएमएफ ने कहा कि 2025 में खाद्य कीमतों में नरमी आने से महंगाई में उल्लेखनीय गिरावट आई है और आगे चलकर इसके निर्धारित लक्ष्य के करीब लौटने की उम्मीद है। भारतीय रिजर्व बैंक को खुदरा मुद्रास्फीति दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ चार प्रतिशत पर सीमित रखने का लक्ष्य मिला हुआ है। वैश्विक स्तर पर आईएमएफ ने कहा कि वैश्विक आर्थिक वृद्धि 2026 में 3.3 प्रतिशत और 2027 में 3.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है। उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में वृद्धि दर इन दोनों वर्षों में चार प्रतिशत से थोड़ा अधिक रहने की संभावना है। मुद्राकोष ने चीन के लिए 2025 की वृद्धि दर का अनुमान 0.2 प्रतिशत अंक बढ़ाकर पांच प्रतिशत कर दिया है। वहीं, वैश्विक महंगाई 2025 में अनुमानित 4.1 प्रतिशत से घटकर 2026 में 3.8 प्रतिशत और 2027 में 3.4 प्रतिशत रहने की उम्मीद जताई गई है।
- नयी दिल्ली । राष्ट्रीय राजधानी में सोमवार को चांदी 10,000 रुपये की जोरदार उछाल के साथ तीन लाख रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर को पार कर गई जबकि सोना भी 1,900 रुपये उछलकर 1.48 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के नए शिखर पर पहुंच गया। सर्राफा कारोबारियों ने कहा कि घरेलू और वैश्विक बाजारों में मजबूत मांग बने रहने से चांदी के दाम में जबर्दस्त तेजी देखी गई। सोमवार को चांदी का कारोबार 3,02,600 रुपये प्रति किलोग्राम पर हुआ जो तीन लाख रुपये से ऊपर का पहला बंद भाव है। शुक्रवार को चांदी 2,92,600 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। स्थानीय सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में भी मजबूती देखी गई और यह नए रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई। सोना 1,48,100 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) पर पहुंच गया, जो शुक्रवार के 1,46,200 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर से 1,900 रुपये अधिक है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक (जिंस) सौमिल गांधी ने कहा, "सोमवार को सोना और चांदी दोनों ही नए रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गए। भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक स्तर पर शुल्क से जुड़ी बढ़ती अनिश्चितताओं के कारण सुरक्षित निवेश विकल्पों की मांग बढ़ी है।" अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कीमती धातुओं में मजबूती देखने को मिली। फॉरेक्स डॉट कॉम के मुताबिक, हाजिर चांदी बढ़कर 94.13 डॉलर प्रति औंस के नए रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई। सोना ने भी 4,690.80 डॉलर प्रति औंस के अब तक के उच्चतम स्तर को हासिल किया। मिराए एसेट शेयरखान के जिंस प्रमुख प्रवीण सिंह ने कहा कि वैश्विक बाजार में सुरक्षित निवेश की मांग के चलते सोने की कीमतों में तेजी आई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कुछ यूरोपीय देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की घोषणा के बाद निवेशकों में चिंता बढ़ी है। ट्रंप ने शनिवार को डेनमार्क, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड, फिनलैंड, ब्रिटेन और नॉर्वे से आयात होने वाले सामान पर एक फरवरी से 10 प्रतिशत शुल्क लगाने की धमकी दी। इस शुल्क को एक जून, 2026 से बढ़ाकर 25 प्रतिशत करने का भी प्रस्ताव रखा गया है। गांधी ने कहा, "इस घटनाक्रम से वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ी है, जिसके चलते निवेशक सोने एवं चांदी जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।"
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नयी दिल्ली/ टाटा समूह की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी टाटा कैपिटल का शुद्ध लाभ चालू वित्त वर्ष की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में सालाना आधार पर 39 प्रतिशत बढ़कर 1,285 करोड़ रुपये रहा। कंपनी ने सोमवार को शेयर बाजार को दी सूचना में कहा कि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में उसे 922 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था। टाटा कैपिटल ने कहा कि समीक्षाधीन तिमाही के दौरान कुल ब्याज आय 26 प्रतिशत बढ़कर 2,936 करोड़ रुपये हो गई, जो एक साल पहले लगभग 2,323 करोड़ रुपये थी। प्रबंधन के तहत परिसंपत्ति (एयूएम) 26 प्रतिशत बढ़कर 2,34,114 करोड़ रुपये हो गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 1,86,404 करोड़ रुपये थी।
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नयी दिल्ली. एडलवाइस लाइफ इंश्योरेंस को अगले 2-3 वर्षों में दहाई अंकों में वृद्धि की उम्मीद है। कंपनी के प्रबंध निदेशक (एमडी) और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सुमित राय ने यह जानकारी देते हुए कहा कि कंपनी वित्त वर्ष 2026-27 तक घाटे से उबर जाएगी। उन्होंने बताया, ''हम लगभग 14 साल पुराने संगठन हैं। शुरुआती साल, विशेष रूप से 2011 और 2016 के बीच समग्र जीवन बीमा उद्योग के लिए धीमी वृद्धि का दौर था। हम भी उस स्तर पर नए थे और व्यवसाय के प्रति अपने दृष्टिकोण में जानबूझकर रूढ़िवादी रहे। हमारी वृद्धि में वास्तविक उछाल 2017-2018 के बाद आया।'' राय ने कहा कि शुरुआत में बीमाकर्ता मुख्य रूप से एक ही चैनल वाली कंपनी थी। उन्होंने आगे बताया, ''अब हम एक बहु-चैनल बीमाकर्ता के रूप में काम करते हैं, जिसमें मालिकाना और साझेदारी वितरण का योगदान लगभग 50-50 प्रतिशत है।'' राय ने कहा कि यह संतुलन कंपनी के उत्पाद मिश्रण में भी दिखाई देता है। उन्होंने आगे कहा कि कंपनी का निरंतर ध्यान सभी चैनलों और उत्पादों में एक अच्छी तरह से विविध और दीर्घकालिक व्यवसाय बनाने पर रहा है। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी लगभग 650 करोड़ रुपये का नया व्यवसाय और कुल लगभग 2,400 करोड़ रुपये की प्रीमियम आय प्राप्त करने का लक्ष्य रख रही है। उन्होंने बताया, ''हम अगले दो से तीन वर्षों में 12-16 प्रतिशत की सीमा में दहाई अंकों में वृद्धि की उम्मीद करते हैं, और हमें वित्त वर्ष 2026-27 तक घाटे से उबरने की उम्मीद है।'' उन्होंने कहा कि कंपनी के पास पर्याप्त पूंजी है। मुख्य कार्यकारी ने बताया, ''हमारी चुकता पूंजी आज लगभग 2,800 करोड़ रुपये है। पिछले कुछ वर्षों में हमने सालाना लगभग 175-200 करोड़ रुपये डाले हैं, और जैसे-जैसे हम विस्तार करेंगे, अगले दो से तीन वर्षों तक पूंजी समर्थन का यह स्तर व्यापक रूप से जारी रहेगा।''
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नई दिल्ली। सरकार की उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के चलते भारत के स्मार्टफोन निर्यात में बड़ी बढ़त देखने को मिली है। साल 2025 में भारत से स्मार्टफोन का निर्यात करीब 30 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड माना जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 का यह निर्यात पिछले पांच वर्षों में हुए कुल स्मार्टफोन निर्यात का करीब 38 प्रतिशत है। साल 2021 से 2025 के बीच भारत ने कुल मिलाकर लगभग 79.03 अरब डॉलर के स्मार्टफोन विदेश भेजे हैं, जिनमें सबसे ज्यादा निर्यात 2025 में हुआ।
इन पांच वर्षों में कुल स्मार्टफोन निर्यात का करीब 75 प्रतिशत हिस्सा एप्पल के आईफोन का रहा, जिसकी कीमत 22 अरब डॉलर से ज्यादा आंकी गई है। साल 2025 में स्मार्टफोन निर्यात में 47 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे पहले के 12 महीनों में यह आंकड़ा करीब 20.45 अरब डॉलर था।केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस हफ्ते एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि साल 2025 में भारत का कुल इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 4 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा हो गया है। उन्होंने बताया कि सेमीकंडक्टर यानी चिप बनाने के नए कारखाने शुरू होने से आने वाले समय में निर्यात और रोजगार दोनों बढ़ेंगे।सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2024-25 में देश में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन लगभग 11.3 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया। साल 2021 में भारत में स्मार्टफोन का उत्पादन शुरू होने के बाद पहली बार 2025 में एप्पल के आईफोन का निर्यात 2 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा हो गया, जो कि 2024 के मुकाबले करीब 85 प्रतिशत अधिक है। देश में एप्पल के कुल पांच आईफोन असेंबली प्लांट हैं, जिनमें से तीन टाटा ग्रुप और दो फॉक्सकॉन द्वारा संचालित किए जा रहे हैं।गौरतलब हो, भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता देश बन चुका है। देश में बिकने वाले 99 प्रतिशत से ज्यादा मोबाइल फोन अब मेड इन इंडिया हैं। स्मार्टफोन के लिए पीएलआई योजना मार्च 2026 में खत्म होनी है, लेकिन सरकार इसे आगे बढ़ाने के विकल्पों पर विचार कर रही है। नए नियमों के अनुसार, कंपनियां छह साल की अवधि में किसी भी लगातार पांच वर्षों तक इस योजना का लाभ ले सकती हैं। - नई दिल्ली। साल 2025 में भारत और चीन दोनों में कोयले से बनने वाली बिजली में कमी दर्ज की गई है। यह पहली बार हुआ है जब 1970 के दशक के बाद एक ही साल में दोनों देशों में कोयले से बिजली उत्पादन घटा है। इसकी मुख्य वजह यह है कि दोनों देशों ने बढ़ती बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और जल विद्युत जैसे गैर-जीवाश्म ऊर्जा स्रोतों की ओर रुख किया है। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट में यह बात कही गई है।रिपोर्ट के आधार पर ब्रिटेन के अखबार इंडिपेंडेंट में प्रकाशित एक लेख के अनुसार, पिछले साल चीन में कोयले से बिजली उत्पादन 1.6 प्रतिशत और भारत में 3 प्रतिशत कम हुआ। इसे एक ऐतिहासिक बदलाव बताया गया है, क्योंकि ऐसा 1970 के दशक की शुरुआत के बाद पहली बार हुआ है, जब दोनों देशों में एक ही वर्ष में कोयला बिजली उत्पादन में गिरावट आई है।इस बदलाव का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बड़ा महत्व है, क्योंकि भारत और चीन मिलकर दुनिया की आधे से ज्यादा कोयले से बनने वाली बिजली का उत्पादन करते हैं। इसलिए इन दोनों देशों की ऊर्जा नीति में बदलाव का असर पूरी दुनिया के प्रदूषण स्तर पर पड़ता है। जलवायु न्यूज वेबसाइट कार्बन ब्रीफ द्वारा जारी की गई इस रिपोर्ट में कहा गया है कि स्वच्छ ऊर्जा के रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ने और कोयले से बिजली उत्पादन में गिरावट को भविष्य में होने वाले बड़े बदलावों का संकेत माना जा सकता है।रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने 300 गीगावाट सौर ऊर्जा और 100 गीगावाट पवन ऊर्जा जोड़ी, जो किसी भी देश के लिए अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। यह क्षमता ब्रिटेन की कुल मौजूदा बिजली उत्पादन क्षमता से पांच गुना से भी ज्यादा है।विश्लेषण के अनुसार, सौर और पवन ऊर्जा से बिजली उत्पादन में 450 टेरावाट घंटे की बढ़ोतरी हुई, जबकि परमाणु ऊर्जा से बिजली उत्पादन 35 टेरावाट घंटे बढ़ा।वहीं, भारत ने साल के पहले 11 महीनों में 35 गीगावाट सौर ऊर्जा, 6 गीगावाट पवन ऊर्जा और 3.5 गीगावाट जल विद्युत क्षमता जोड़ी। इस दौरान नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में सालाना आधार पर 44 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।नवीकरणीय ऊर्जा के बढ़ने से कोयला बिजली संयंत्रों को कम चलाना पड़ा। इससे आर्थिक विकास जारी रहने के बावजूद कोयले से बिजली उत्पादन में गिरावट आई। रिपोर्ट के अनुसार, यह पहली बार है, जब स्वच्छ ऊर्जा की बढ़त ने भारत में कोयले से बिजली उत्पादन को कम करने में अहम भूमिका निभाई है।रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर चीन में स्वच्छ ऊर्जा का यह विकास जारी रहता है, तो वहां कोयले से बिजली उत्पादन अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचने के लिए पर्याप्त है। भारत में भी अगर तय किए गए स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य पूरे हो जाते हैं, तो 2030 से पहले ही कोयले से बिजली उत्पादन अपने चरम पर पहुंच सकता है, भले ही बिजली की मांग फिर से तेज हो जाए। हालांकि, अत्यधिक गर्मी एक बड़ी अनिश्चितता बनी हुई है।भीषण गर्मी के दौरान, खासकर शाम के समय जब सौर ऊर्जा कम हो जाती है, तब बिजली की अधिक मांग को पूरा करने के लिए अक्सर कोयला बिजली संयंत्रों का सहारा लिया जाता है। वहीं, ज्यादा तापमान से कोयला संयंत्रों की कार्यक्षमता भी घटती है और पानी की उपलब्धता पर दबाव बढ़ता है।कोयले से बिजली उत्पादन में गिरावट के बावजूद, दोनों देशों ने नए कोयला बिजली संयंत्र लगाने का काम जारी रखा। चीन में ऊर्जा सुरक्षा और अधिकतम मांग को पूरा करने की चिंता के चलते नए कोयला संयंत्रों को मंजूरी दी जाती रही। भारत में भी औद्योगिक विकास और अत्यधिक गर्मी के समय बिजली की जरूरतों को पूरा करने के लिए नए कोयला प्रोजेक्ट्स पर काम जारी रहा।इस कारण कोयला आधारित बिजली क्षमता और वास्तव में बनने वाली बिजली के बीच का अंतर बढ़ गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों देशों में कोयला बिजली संयंत्रों के चलने के घंटे प्रति वर्ष लगातार कम होते जा रहे हैं, जिससे लंबे समय में खर्च बढ़ने और निवेश की बर्बादी को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं।
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नई दिल्ली। भारत का व्यापारिक निर्यात दिसंबर में बढ़कर 38.51 अरब डॉलर हो गया है, जो कि नवंबर में 38.13 अरब डॉलर था। यह जानकारी वाणिज्य मंत्रालय की ओर से आज गुरुवार को दी गई। देश के व्यापारिक निर्यात में ऐसे समय पर इजाफा हुआ है, जब दुनिया अमेरिकी टैरिफ के कारण अस्थिरता का सामना कर रही है।
वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि देश का दिसंबर का सर्विसेज निर्यात 35.50 अरब डॉलर और आयात 17.38 अरब डॉलर रहा है, जिससे सर्विसेज ट्रेड सरप्लस 18.12 अरब डॉलर रहा है। दिसंबर में व्यापारिक आयात बढ़कर 63.55 अरब डॉलर हो गया है जो कि पहले 62.66 अरब डॉलर था। इससे देश का व्यापारिक घाटा बढ़कर 25.04 अरब डॉलर हो गया है।वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि चालू वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में भारत के कुल निर्यात में 4.33 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और वित्त वर्ष 2026 में कुल निर्यात 850 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर सकता है। इसके अतिरिक्त, वित्त वर्ष 2026 के अप्रैल-दिसंबर के दौरान भारत का अमेरिका को निर्यात पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 9.8 प्रतिशत बढ़ा है।सरकार ने कहा कि निर्यात में विविधता लाने की रणनीति के तहत, भारत मित्र देशों के साथ नई व्यापारिक साझेदारियां बना रहा है, जबकि अमेरिका के साथ टैरिफ गतिरोध को सुलझाने के लिए बातचीत भी जारी है।वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को ब्रुसेल्स में यूरोपीय संघ के साथ व्यापार वार्ता और निर्यात प्रोत्साहन मिशन की शुरुआत को अपने मंत्रालय द्वारा पिछले 10 दिनों में किए गए “प्रमुख कार्यों” में शामिल किया।केंद्रीय मंत्री ने कहा, “ब्रसेल्स में यूरोपीय संघ के व्यापार और आर्थिक सुरक्षा आयुक्त मारोस सेफकोविक के साथ सार्थक वार्ता हुई। हमने प्रस्तावित भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के प्रमुख क्षेत्रों पर विस्तृत चर्चा की। साथ ही, हमने एक निष्पक्ष, संतुलित और महत्वाकांक्षी समझौते को अंतिम रूप देने के रणनीतिक महत्व पर भी बल दिया, जो उनके साझा मूल्यों, आर्थिक प्राथमिकताओं और नियम-आधारित व्यापार ढांचे के प्रति प्रतिबद्धता के अनुरूप हो।”उन्होंने आगे बताया कि उन्होंने लिकटेंस्टीन का दौरा किया और भारत-ईएफटीए व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते के कार्यान्वयन की समीक्षा की। - नयी दिल्ली. विश्व बैंक ने मजबूत घरेलू मांग और कर सुधारों के दम पर चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 7.2 प्रतिशत कर दिया है। यह उसके जून के अनुमान से 0.9 प्रतिशत अधिक है। विश्व बैंक ने अपनी प्रमुख रिपोर्ट 'वैश्विक आर्थिक संभावनाएं' में यह भी कहा कि वर्ष 2026-27 में भारत की वृद्धि दर धीमी होकर 6.5 प्रतिशत रह सकती है। यह अनुमान इस धारणा पर आधारित है कि अमेरिका का 50 प्रतिशत आयात शुल्क इस दौरान लागू रहेगा। रिपोर्ट में कहा गया, ''इसके बावजूद उम्मीद है कि भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज वृद्धि दर बनाए रखेगा।'' विश्व बैंक ने कहा कि अमेरिका को होने वाले कुछ निर्यातों पर उच्च शुल्क के बावजूद वृद्धि के पूर्वानुमान में जून के अनुमानों के मुकाबले कोई बदलाव नहीं हुआ है। इसकी मुख्य वजह यह है कि उन शुल्कों के प्रतिकूल प्रभावों की भरपाई घरेलू मांग में मजबूत वृद्धि और अधिक निर्यात द्वारा की गई। भारत के कुल वस्तु निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी लगभग 12 प्रतिशत है। रिपोर्ट में कहा गया, ''वित्त वर्ष 2027-28 में वृद्धि दर बढ़कर 6.6 प्रतिशत होने की उम्मीद है, जिसे मजबूत सेवा गतिविधियों के साथ ही निर्यात में सुधार और निवेश में तेजी से समर्थन मिलेगा।'' चालू वर्ष की आर्थिक वृद्धि पर रिपोर्ट में कहा गया, ''भारत में वित्त वर्ष 2025-26 में वृद्धि दर बढ़कर 7.2 प्रतिशत होने का अनुमान है, क्योंकि घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है। यह मजबूत निजी उपभोग को दर्शाता है, जिसे पिछले कर सुधारों और ग्रामीण क्षेत्रों में परिवारों की वास्तविक आय में सुधार से समर्थन मिला है।'' इस बहुपक्षीय ऋण एजेंसी ने जून में भारत की वृद्धि दर 6.3 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था।
- नयी दिल्ली. सरकार की सख्ती के बाद 10 मिनट में सामान पहुंचाने की अपनी सेवाओं से जुड़ी ब्रांडिंग को ब्लिंकिट के बाद त्वरित आपूर्ति कंपनियों जेप्टो, स्विगी इंस्टामार्ट और फ्लिपकार्ट मिनट्स ने भी हटा दिया है। यह कदम चंद मिनटों में सामान पहुंचाने की जल्दबाजी से आपूर्तिकर्ताओं की सुरक्षा एवं कल्याण को पैदा होने वाले जोखिम से जुड़ी सरकार और श्रमिक अधिकार समूहों की चिंताओं के बाद उठाया गया है। केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने पिछले सप्ताह हितधारकों के साथ हुई एक बैठक में क्विक कॉमर्स कंपनियों से डिलीवरी साझेदारों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के लिए कहा था। मांडविया ने सुझाव दिया था कि सामान को जल्द पहुंचाने की सख्त समय-सीमा, खासकर 10 मिनट में डिलीवरी जैसी प्रतिबद्धताएं हटाई जानी चाहिए। सरकार के इस निर्देश के बाद ब्लिंकिट ने मंगलवार को 10 मिनट में आपूर्ति की सेवा संबंधी वादे को अपने मंच से हटा दिया। बुधवार को जेप्टो, स्विगी इंस्टामार्ट और फ्लिपकार्ट मिनट्स ने भी अपने-अपने मंच से 10 मिनट में सामान पहुंचाने का वादा करने वाली ब्रांडिंग को हटा दिया। हालांकि टाटा समूह के स्वामित्व वाले बिगबास्केट के ऐप पर 10 मिनट में ग्रॉसरी का सामान पहुंचाने का उल्लेख अब भी मौजूद है। देश के भीतर चंद मिनटों में सामान पहुंचाने का कारोबार हाल के वर्षों में बहुत तेजी से बढ़ा है। लेकिन इसके दबाव में डिलीवरी साझेदारों की कामकाजी स्थितियों और सुरक्षा को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। दस मिनट में डिलीवरी की सेवा के विरोध में गिग वर्करों (अस्थायी कामगारों) ने नए साल की पूर्व संध्या पर देशव्यापी हड़ताल की थी, जिसने कर्मचारियों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और आय की ओर ध्यान आकर्षित किया। गिग वर्कर्स एसोसिएशन ने त्वरित आपूर्ति मंचों के ‘10 मिनट में डिलीवरी' का वादा हटाने के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह कदम डिलीवरी कर्मियों पर पड़ने वाले खतरनाक और असहनीय दबाव को स्वीकार करने की दिशा में एक अहम पहल है। एसोसिएशन ने यह भी आरोप लगाया कि कई मामलों में श्रमिकों को अतिरिक्त मेहनत का उचित भुगतान नहीं किया जा रहा था। इस समय देश में इटर्नल कंपनी का ब्लिंकिट, स्विगी का इंस्टामार्ट, जेप्टो, जियोमार्ट, बिगबास्केट, अमेजन नाउ और फ्लिपकार्ट मिनट्स के रूप में सात त्वरित आपूर्ति मंच सक्रिय हैं।
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नयी दिल्ली. चांदी की कीमत बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी में 15,000 रुपये की जबर्दस्त उछाल के साथ 2,86,000 रुपये प्रति किलोग्राम के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गयी जबकि सोने की कीमत भी वैश्विक बाजार में मजबूत रुझानों के अनुरूप 1,46,500 रुपये प्रति 10 ग्राम के उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं। अखिल भारतीय सर्राफा संघ ने कहा कि चांदी ने लगातार चौथे दिन जोरदार तेजी जारी रखी। मंगलवार को 2,71,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई चांदी बुधवार को 5.5 प्रतिशत यानी 15,000 रुपये की अभूतपूर्व तेजी के साथ 2,86,000 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों समेत) पर पहुंच गई। यह चांदी के भाव का अब तक का सर्वोच्च स्तर है। पिछले चार सत्रों में ही यह धातु 17.45 प्रतिशत यानी 42,500 रुपये की जबर्दस्त बढ़त हासिल कर चुकी है। आठ जनवरी को चांदी की कीमत 2,43,500 रुपये थी। सर्राफा कारोबारियों ने कहा कि चांदी ने हाल के समय में सोने की तुलना में बेहतर रिटर्न दिया है। वर्ष 2026 की शुरुआत से अब तक चांदी ने लगभग 47,000 रुपये प्रति किलो यानी 20 प्रतिशत की तेजी दिखाई है। यह 31 दिसंबर, 2025 को 2,39,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर थी। वहीं, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत बुधवार को 1,500 रुपये चढ़कर 1,46,500 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों समेत) तक पहुंच गई। मंगलवार को पीली धातु 1,45,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव पर बंद हुई थी। पिछले चार सत्रों में सोने की कीमत 1,40,500 रुपये से 6,000 रुपये यानी 4.3 प्रतिशत बढ़ चुकी है। साल की शुरुआत से अब तक सोने में कुल 8,800 रुपये यानी 6.4 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई है। घरेलू बाजार में कीमती धातुओं की तेजी विदेशी बाजारों के तेज रुझानों के अनुरूप है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हाजिर चांदी ने पहली बार 91 डॉलर प्रति औंस की सीमा पार करते हुए पांच प्रतिशत से अधिक की तेजी के साथ 91.56 डॉलर प्रति औंस का रिकॉर्ड बना दिया। इस दौरान सोने का हाजिर भाव भी 1.14 प्रतिशत चढ़कर 4,640.13 प्रति औंस के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। विशेषज्ञों ने कहा कि वैश्विक स्तर पर लगातार भू-राजनीतिक अस्थिरता की स्थिति, कमजोर डॉलर सूचकांक और अमेरिका में मुद्रास्फीति के नरम आंकड़े निवेशकों के लिए सुरक्षित विकल्पों की मांग को बढ़ा रहे हैं। इसके साथ ही अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा संभावित ब्याज दर में कटौती की उम्मीदों ने भी सोना और चांदी को निवेशकों के लिए आकर्षक बनाया है. - नयी दिल्ली/ केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि देश से इलेक्ट्रॉनिक निर्यात 2025 में चार लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। इस वर्ष चार सेमीकंडक्टर संयंत्रों के उत्पादन शुरू होने के बाद इसमें और वृद्धि होने की उम्मीद है। आधिकारिक अनुमानों के अनुसार, 2024-25 में इलेक्ट्रॉनिक उत्पादन लगभग 11.3 करोड़ रुपये तक पहुंच गया और निर्यात करीब 3.3 लाख करोड़ रुपये का रहा। वैष्णव ने सोमवार को सोशल मीडिया मंच पर जानकारी दी, ‘‘ इलेक्ट्रॉनिक निर्यात 2025 में चार लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया जिससे रोजगार सृजित हुए और विदेशी मुद्रा हासिल हुई। 2026 में भी यह गति जारी रहेगी क्योंकि चार सेमीकंडक्टर संयंत्र व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर देंगे।'' देश के इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण क्षेत्र में वर्तमान में मोबाइल फोन उद्योग का वर्चस्व है। उद्योग जगत के अनुमानों के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक क्षेत्र में 25 लाख से अधिक लोग कार्यरत हैं।मंत्री ने एक रिपोर्ट साझा की जिसमें बताया गया कि भारत से आईफोन का निर्यात 2025 में 2.03 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह वर्ष 2024 में एप्पल द्वारा निर्यात किए गए 1.1 लाख करोड़ रुपये से करीब दोगुना है।मोबाइल विनिर्माताओं के उद्योग निकाय ‘इंडिया सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन' के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक देश में मोबाइल फोन का उत्पादन 75 अरब अमेरिकी डॉलर (लगभग 6.76 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंचने की उम्मीद है। इसमें 30 अरब अमेरिकी डॉलर या करीब 2.7 लाख करोड़ रुपये का निर्यात शामिल होगा। देश में 2024-25 में 5.5 लाख करोड़ रुपये के मोबाइल फोन का उत्पादन हुआ और इस क्षेत्र से निर्यात लगभग दो लाख करोड़ रुपये का रहा। बाजार अनुसंधान एवं विश्लेषण कंपनी काउंटरपॉइंट के सह-संस्थापक तथा अनुसंधान उपाध्यक्ष नील शाह ने कहा कि चीन पर अमेरिकी शुल्क के बाद अपने विनिर्माण का विस्तार करके और भारत से निर्यात को रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचाकर एप्पल, भारत की सफलता का एक महत्वपूर्ण प्रतीक बन गया है। शाह ने कहा, ‘‘ भारत में मोबाइल फोन का उत्पादन करीब 30 करोड़ इकाई तक पहुंच जाएगा और 2025 में भारत में उत्पादित होने वाले हर चार स्मार्टफोन में से एक का निर्यात किया जाएगा।'' इंटरनेशनल डेटा कॉर्पोरेशन के 2025 की तीसरी तिमाही के ‘वर्ल्डवाइड क्वार्टरली मोबाइल फोन ट्रैकर' के अनुसार, एप्पल ने इस तिमाही में घरेलू बाजार के लिए 50 लाख आईफोन की अब तक की सबसे अधिक आपूर्ति दर्ज की। एप्पल प्रीमियम (53,000-71,000 रुपये प्रति इकाई की कीमत वाले स्मार्टफोन) और सुपर-प्रीमियम (71,000 रुपये प्रति इकाई से अधिक कीमत वाले स्मार्टफोन) दोनों खंड में अग्रणी है जिसने जुलाई-सितंबर तिमाही में देश के स्मार्टफोन बाजार की वृद्धि को गति दी।
- नयी दिल्ली। इटर्नल के स्वामित्व वाली इकाई ब्लिंकिट ने डिलीवरी कर्मियों के कल्याण से जुड़ी बढ़ती चिंताओं के बीच सभी मंच से अपना '10 मिनट में' डिलीवरी का दावा हटा लिया है। कंपनी ने अपनी टैग-लाइन को ''10 मिनट में 10,000 से अधिक उत्पाद पहुंचेंगे'' से बदलकर अब ''30,000 से अधिक उत्पाद आपके दरवाजे पर पहुंचेंगे'' कर दिया है। स्विगी और जेप्टो जैसे अन्य ‘क्विक कॉमर्स' मंच भी इस कदम का अनुसरण कर सकते हैं। यह बदलाव केंद्रीय श्रम मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद देखा जा रहा है, जो इतनी कठिन समय सीमा को पूरा करने की कोशिश करने वाले डिलीवरी कर्मियों के कल्याण को लेकर चिंतित था। श्रम मंत्रालय ने इस संबंध में क्विक कॉमर्स मंचों के साथ चर्चा की, ताकि गिग कर्मियों के लिए बेहतर सुरक्षा और कामकाजी परिस्थितियां सुनिश्चित की जा सकें। दस मिनट में डिलीवरी के वादे के कारण वर्ष 2025 की पूर्व संध्या पर गिग कर्मियों ने देशव्यापी हड़ताल की थी, जिसने कर्मचारियों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और आय की ओर ध्यान आकर्षित किया। जेप्टो, इंस्टामार्ट और बिगबास्केट के लिए 10 मिनट में डिलीवरी की ब्रांडिंग अभी भी गूगल प्ले स्टोर और आईओएस ऐप स्टोर पर दिखाई दे रही है, लेकिन ब्लिंकिट के लिए ऐसी कोई ब्रांडिंग अब वहां मौजूद नहीं है। हाल में सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर इटर्नल ग्रुप के सीईओ दीपिंदर गोयल ने लिखा था कि 10 मिनट में डिलीवरी का वादा सामान पहुंचाने वालों पर दबाव नहीं डालता है और न ही असुरक्षित ड्राइविंग का कारण बनता है, क्योंकि उन्हें ऐप पर 10 में मिनट का टाइमर नहीं दिखाया जाता है। उन्होंने यह भी कहा था कि 10 मिनट में या उससे तेज डिलीवरी मुख्य रूप से स्टोर ग्राहकों के करीब होने के कारण होती है, न कि सड़क पर तेज रफ्तार से गाड़ी चलाने के कारण।
- इंदौर (मध्यप्रदेश)/ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय सोया खली की ऊंची कीमतों के चलते मांग में कमी के कारण गत दिसंबर के दौरान देश से इस उत्पाद का निर्यात 37.50 प्रतिशत घटकर 1.73 लाख टन पर रहा। प्रसंस्करणकर्ताओं के एक संगठन ने मंगलवार को यह जानकारी दी। गठन के मुताबिक दिसंबर 2024 में देश से 2.77 लाख टन सोयाखली का निर्यात किया गया था।इंदौर स्थित सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) के एक अधिकारी ने बताया कि दिसंबर 2025 के दौरान संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ईरान, नेपाल और बांग्लादेश भारतीय सोया खली के शीर्ष आयातक बनकर उभरे।सोपा के कार्यकारी निदेशक डीएन पाठक ने ‘पीटीआई-भाषा' को बताया,‘‘भारतीय सोया खली के दाम अमेरिका, ब्राजील और अर्जेंटीना जैसे प्रमुख निर्यातक देशों की तुलना में अब भी अधिक हैं। इस कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय सोया खली की मांग दबाव में बनी हुई है।'' प्रसंस्करण कारखानों में सोयाबीन का तेल निकाल लेने के बाद बचने वाला उत्पाद सोया खली कहलाता है। यह उत्पाद प्रोटीन का बड़ा स्त्रोत है। इससे सोया आटा और सोया बड़ी जैसे खाद्य पदार्थों के साथ ही पशु आहार तथा मुर्गियों व मछलियों का दाना भी तैयार किया जाता है।
- मुंबई/ इटली की लक्जरी मोटरसाइकिल विनिर्माता डुकाटी ने मंगलवार को कहा कि उसकी इस साल भारतीय बाजार में 10 नए एवं उन्नत मॉडल पेश करने की योजना है। कंपनी ने कहा कि नए मोटरसाइकिल मॉडल में डेस्मो450 एमएक्स, नई मल्टीस्ट्राडा वी4 रैली (2026 संस्करण), पैनिगाले वी4 लैम्बर्गिनी, नई मॉन्स्टर वी2 और नई हाइपरमोटार्ड वी2/वी2 एसपी शामिल होंगे। डुकाटी ने कहा कि इन 10 नए मॉडल में से पैनिगाले वी4आर मॉडल को दो जनवरी को पहले ही बाजार में उतारा जा चुका है। डुकाटी इंडिया के प्रबंध निदेशक बिपुल चंद्रा ने कहा, “वर्ष 2026 डुकाटी के लिए एक और अहम साल होने जा रहा है। नई पेशकश की शृंखला के साथ हम प्रीमियम मोटरसाइकिल खंड में नए मानक स्थापित करेंगे।” उन्होंने कहा कि भारतीय ग्राहकों को अत्याधुनिक और प्रदर्शन पर आधारित मोटरसाइकिल मुहैया कराने की कंपनी की प्रतिबद्धता पहले से कहीं अधिक मजबूत है। कंपनी के मुताबिक, कैलेंडर वर्ष 2026 की पहली तिमाही में नई मल्टीस्ट्राडा वी4 रैली (2026 संस्करण), पैनिगाले वी4 लैम्बर्गिनी और बहुप्रतीक्षित डेस्मो450 एमएक्स मॉडल पेश किए जाएंगे। तीसरी तिमाही में नई मॉन्स्टर वी2, पैनिगाले वी2 स्पेशल एडिशन एमएम93 (मार्क मार्केज़) और पैनिगाले वी2 स्पेशल एडिशन पीबी63 (पेको बान्याया) के अलावा डियावेल वी4 आरएस पेश की जाएंगी। चौथी तिमाही में नई हाइपरमोटार्ड वी2 और वी2 एसपी मॉडल पेश किए जाएंगे और दिसंबर 2026 के अंत में पैनिगाले वी4 मार्क मार्केज़ रेप्लिका के साथ साल का समापन होगा। कंपनी ने कहा कि इन मॉडलों की सांकेतिक कीमतें जल्द ही वेबसाइट पर जारी की जाएंगी। बुकिंग दिल्ली, मुंबई, पुणे, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद, कोच्चि और कोलकाता के डुकाटी डीलरशिप पर उपलब्ध होंगी।
- नयी दिल्ली/ इलेक्ट्रिक दोपहिया बनाने वाली कंपनी ओला इलेक्ट्रिक ने मंगलवार को अपने 4680 भारत सेल उत्पाद पोर्टफोलियो के लिए ‘ओला मुहूर्त महोत्सव' अभियान दोबारा शुरू करने की घोषणा की। कंपनी ने एक बयान में कहा कि इस अभियान के तहत अब तक की सबसे आकर्षक कीमतों पर सीमित संख्या में इकाइयों की पेशकश की जाएगी। ओला इलेक्ट्रिक ने कहा कि यह अभियान 14 जनवरी से दो दिनों तक चलेगा जिसमें ओला शक्ति, एस1 प्रो+ 5.2 किलोवाट घंटा और रोडस्टर एक्स+ 9.1 किलोवाट घंटा मॉडल शामिल होंगे।मुहूर्त महोत्सव के तहत 4680 भारत सेल से संचालित शक्ति, एस1, रोडस्टर एक्स और एक्स+ मॉडलों की सीमित इकाइयों उपलब्ध कराई जाएंगी। ओला इलेक्ट्रिक के प्रवक्ता ने कहा, “हम अपने 4680 भारत सेल प्लेटफॉर्म का जश्न मनाने के लिए मुहूर्त महोत्सव को वापस ला रहे हैं। यह प्लेटफॉर्म सेल, बैटरी पैक और वाहन प्लेटफॉर्म के स्तर पर कंपनी के एकीकृत दृष्टिकोण को मजबूत करता है।”
- मुंबई/ दिसंबर महीने में देश के भीतर भर्ती गतिविधियां सालाना आधार पर 15 प्रतिशत और मासिक आधार पर पांच प्रतिशत बढ़ीं जो रोजगार बाजार के संतुलित विस्तार का रुख करने का संकेत देता है। मंगलवार को एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। ऑनलाइन भर्ती पोर्टल फाउंडइट की तरफ से जारी 'इनसाइट्स ट्रैकर रिपोर्ट' के मुताबिक, वर्ष 2025 के दौरान कृत्रिम मेधा (एआई) भर्ती का सबसे बड़ा पहलू बनकर उभरा है। इस दौरान एआई से जुड़े 2.90 लाख से अधिक पदों के लिए विज्ञापन जारी किए गए। रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि वर्ष 2026 में एआई से जुड़ी भर्तियों में सालाना आधार पर 32 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है और यह संख्या लगभग 3.8 लाख तक पहुंच सकती है। फाउंडइट के मुख्य उत्पाद एवं प्रौद्योगिकी अधिकारी तरुण शर्मा ने कहा, "वर्ष 2025 भर्ती में विस्तार के साथ अनुशासन का भी साल रहा। एआई अब प्रयोग के स्तर से आगे निकलकर कार्यबल योजना का एक अहम हिस्सा बन चुका है।" अगर क्षेत्रवार आंकड़ों का जिक्र करें तो आईटी-सॉफ्टवेयर एवं आईटी सेवाओं का एआई नौकरियों में 37 प्रतिशत हिस्सा रहा। वहीं बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं और बीमा (बीएफएसआई) क्षेत्र का हिस्सा 15.8 प्रतिशत और विनिर्माण का छह प्रतिशत रहा। बीएफएसआई क्षेत्र में भर्तियों में सालाना आधार पर 41 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसके अलावा स्वास्थ्य एवं औषधि (38 प्रतिशत), खुदरा (31 प्रतिशत), लॉजिस्टिक (30 प्रतिशत) और दूरसंचार (29 प्रतिशत) क्षेत्रों में भी मजबूत बढ़त देखी गई। भौगोलिक रूप से बेंगलुरु 26 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ एआई नौकरियों का सबसे बड़ा केंद्र बना रहा। हैदराबाद ने 35 प्रतिशत वृद्धि के साथ शीर्ष शहरों में सबसे तेज बढ़त दर्ज की, जबकि जयपुर, इंदौर और मैसूरु दूसरी श्रेणी के शहरों में अग्रणी रहे।
- नयी दिल्ली/ मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने मंगलवार को कहा कि आर्थिक वृद्धि ही वित्तीय समावेश का सबसे मजबूत एवं टिकाऊ स्वरूप है। नागेश्वरन ने यहां आयोजित 'ग्लोबल इन्क्लूसिव फाइनेंस' सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, "जब अर्थव्यवस्था रोजगार, आय, बाजार और मांग पैदा करती है तो लोगों को वित्तीय प्रणाली में जबरन लाने की जरूरत नहीं पड़ती है। जब लोगों को भविष्य वर्तमान से बड़ा लगता है, तो वे स्वाभाविक रूप से वित्तीय प्रणाली का हिस्सा बनते हैं। उन्होंने कहा, कोई भी वित्तीय संस्था वह नहीं दे सकती जो आर्थिक वृद्धि दे सकती है। वित्त, वृद्धि का पूरक है, उसका विकल्प नहीं।नागेश्वरन ने कहा कि जहां आजीविका ठहरी हुई होती है, वहां वित्तीय समावेश कमजोर रहता है, जबकि आजीविका के विस्तार की स्थिति में समावेश अपने आप सुदृढ़ होता जाता है। यदि वित्त को वास्तविक आर्थिक गतिविधियों के साथ सही ढंग से जोड़ा जाए, तो वह वृद्धि का शक्तिशाली उत्प्रेरक बन सकता है। नागेश्वरन ने 'प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना' का उदाहरण देते हुए कहा कि महामारी के समय सर्वाधिक प्रभावित हुए रेहड़ी-पटरी दुकानदारों ने कार्यशील पूंजी तक पहुंच का उपयोग केवल जीवित रहने के लिए नहीं, बल्कि कारोबार बढ़ाने, बुनियादी परिसंपत्तियों में निवेश करने और अधिक टिकाऊ व्यवसाय खड़ा करने के लिए किया और यही वित्तीय समावेश का वास्तविक अर्थ है।उन्होंने कहा कि बैंकों को सरकारी ऋण सहायता योजनाओं से आगे बढ़ चुके लाभार्थियों को अपने मुख्य पोर्टफोलियो में शामिल करना चाहिए। साथ ही, समावेशी वित्त संस्थानों में निवेश करने वालों को यह स्वीकार करना होगा कि सामाजिक लाभ के बदले वित्तीय प्रतिफल कम मिलेगा। इसके साथ ही सीईए ने आगाह किया कि बिना सोचे-समझे कर्ज देने से वित्तीय समावेश का उद्देश्य नष्ट हो जाता है और इससे सशक्तीकरण के बजाय कर्ज का बोझ और तनाव बढ़ता है।
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नई दिल्ली। सोमवार को रिकॉर्ड हाई स्तर छूने के बाद हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन, मंगलवार को शुरू में कीमती धातुओं (सोने और चांदी) की कीमतों में थोड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिसकी वजह यह रही कि रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी।
इससे पहले अमेरिकी फेडरल रिजर्व के प्रमुख के खिलाफ कार्रवाई की खबरों के चलते सोने-चांदी के दाम काफी बढ़ गए थे और रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गए थे। हालांकि, बाद में चांदी ने रिकवरी की और एमसीएक्स पर इसकी कीमतों में उछाल देखने को मिली। खबर लिखे जाने तक एमसीएक्स पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना 0.32 प्रतिशत गिरकर 1,41,577 रुपए प्रति 10 ग्राम पर आ गया। जबकि, मार्च डिलीवरी वाली चांदी 0.50 प्रतिशत यानी 1,352 रुपए की तेजी के साथ 2,70,322 रुपए प्रति किलोग्राम पर ट्रेड करते नजर आई।इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार, 24 कैरेट सोने के 10 ग्राम की कीमत घटकर 1,40,482 रुपए हो गई, जबकि पिछले कारोबारी दिन यह 1,40,499 रुपए थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत पहली बार 4,600 डॉलर प्रति औंस के स्तर को पार कर गई थी। इसके बाद निवेशकों ने मुनाफा कमाने के लिए सोना बेचना शुरू कर दिया, जिससे कीमतों में गिरावट आई।सोने की कीमतों में तेजी की एक बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वह ऐलान रहा, जिसमें उन्होंने ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत टैक्स लगाने की बात कही थी। साथ ही उन्होंने ईरान में बढ़ते प्रदर्शनों के बीच सैन्य कार्रवाई की चेतावनी भी दी थी।मेहता इक्विटीज लिमिटेड के कमोडिटी उपाध्यक्ष राहुल कलंत्री ने कहा कि बाजार की नजर अमेरिकी केंद्रीय बैंक के प्रमुख जेरोम पॉवेल से जुड़ी जांच पर बनी हुई है। पॉवेल ने इसे राजनीतिक दबाव बताया है, जिसका मकसद ब्याज दरों में कटौती करवाना है।निवेशक अब अमेरिका की महंगाई से जुड़े अहम आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं, ताकि आगे की नीति की दिशा साफ हो सके। माना जा रहा है कि इस महीने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं होगा, लेकिन साल के अंत तक दो बार कटौती हो सकती है।पिछले सप्ताह आई अमेरिका की रोजगार रिपोर्ट में उम्मीद से कम नौकरियां बढ़ने की जानकारी मिली थी। इससे यह भरोसा और मजबूत हुआ है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक इस साल ब्याज दरों में और कटौती कर सकता है। ईरान में हो रहे प्रदर्शनों, रूस-यूक्रेन युद्ध और अमेरिका की ओर से ग्रीनलैंड को लेकर दिए गए संकेतों ने भी बाजार में अनिश्चितता बढ़ाई है। इन कारणों से सोने की कीमतों को सहारा मिला है।विश्लेषकों के अनुसार, सोने को 1,39,550 से 1,37,310 रुपए के बीच सपोर्ट, जबकि ऊपर की ओर 1,44,350 से 1,46,670 रुपए के स्तर पर रेजिस्टेंस मिल रहा है। वहीं, चांदी में 2,60,810 से 2,54,170 रुपए के बीच सपोर्ट और 2,71,810 से 2,74,470 रुपए के बीच रेजिस्टेंस है।एक्सपर्ट ने आगे कहा कि चांदी की मांग लंबे समय में मजबूत बनी हुई है। उद्योगों और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में बढ़ती जरूरत और कम आपूर्ति के चलते आने वाले समय में चांदी की कीमतें और बढ़ सकती हैं। -
नई दिल्ली। सरकारी कंपनी भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) का आईपीओ शुक्रवार को सब्सक्रिप्शन के लिए खुलते ही निवेशकों की जबरदस्त प्रतिक्रिया देखने को मिली। यह आईपीओ महज 30 मिनट के भीतर ही पूरी तरह से सब्सक्राइब हो गया। देश की सबसे बड़ी कोकिंग कोल उत्पादक कंपनी बीसीसीएल का यह आईपीओ साल 2026 का पहला मेन बोर्ड आईपीओ है। 1,071 करोड़ रुपए के इस ऑफर को सब्सक्रिप्शन के लिए 13 जनवरी तक खुला रखा गया है। ग्रे मार्केट को ट्रैक करने वाली विभिन्न वेबसाइट्स के मुताबिक, इस आईपीओ का अंतिम जीएमपी (ग्रे मार्केट प्रीमियम) 9.4 रुपए दर्ज किया गया (दोपहर 1:53 बजे तक)। वहीं, इसका उच्चतम जीएमपी 16.25 रुपए तक पहुंच चुका है। जीएमपी के आधार पर अनुमान है कि कंपनी के शेयर करीब 32.4 रुपए के स्तर पर लिस्ट हो सकते हैं। ऐसे में निवेशकों को प्रति शेयर लगभग 40.87% तक के मुनाफे की संभावना जताई जा रही है। शुक्रवार की शुरुआत में ही यह आईपीओ 34.69 करोड़ शेयरों के मुकाबले 38.9 करोड़ शेयरों की बोलियों के साथ 1.12 गुना सब्सक्राइब हो गया। इसमें गैर-संस्थागत निवेशकों ने 1.99 गुना और खुदरा निवेशकों ने 1.5 गुना सब्सक्रिप्शन किया। यह आईपीओ पूरी तरह से कोल इंडिया द्वारा ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) है। कोल इंडिया के पास बीसीसीएल की 100% हिस्सेदारी है। आईपीओ का प्राइस बैंड 21 से 23 रुपए प्रति शेयर तय किया गया है, जिसके जरिए कंपनी 1,071 करोड़ रुपए जुटाना चाहती है। आईपीओ से पहले बीसीसीएल ने एंकर निवेशकों से 273 करोड़ रुपए जुटाए थे। इसके तहत 23 रुपए प्रति शेयर के भाव पर 11,87,53,500 शेयर आवंटित किए गए। इस आईपीओ में 50% हिस्सा योग्य संस्थागत निवेशकों (क्यूआईबी), 35% गैर-संस्थागत निवेशकों और 15% खुदरा निवेशकों के लिए आरक्षित किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बीसीसीएल की मजबूत बाजार स्थिति के चलते लिस्टिंग के समय निवेशकों को अच्छा-खासा मुनाफा मिल सकता है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत के कुल घरेलू कोकिंग कोल उत्पादन में कंपनी की हिस्सेदारी 58.50% रही है। बीसीसीएल की स्थापना वर्ष 1972 में हुई थी और इसे मिनी रत्न का दर्जा प्राप्त है। भारत में इसकी कोई सीधी तुलना वाली सूचीबद्ध कंपनी नहीं है। हालांकि, वैश्विक स्तर पर इसकी तुलना अल्फा मेटालर्जिकल रिसोर्सेज और वॉरियर मेट कोल जैसी विदेशी कोयला कंपनियों से की जाती है।



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