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-247 लीटर प्रतिदिन से शुरू हुआ सफर आज 350 लाख लीटर से अधिक दूध संग्रह तक पहुंचा; 36 लाख किसान अमूल सहकारी नेटवर्क से जुड़े
आनंद (गुजरात) । किसानों के शोषण के खिलाफ शुरू हुआ एक छोटा-सा सहकारी आंदोलन आज दुनिया के सबसे बड़े डेयरी सहकारी मॉडलों में शामिल हो चुका है। वर्ष 1946 में महज 247 लीटर प्रतिदिन दूध संग्रह से शुरू हुई अमूल की यात्रा आज गुजरात में 36 लाख से अधिक दुग्ध उत्पादक किसानों को जोड़ते हुए प्रतिदिन 350 लाख लीटर से अधिक दूध संग्रह तक पहुंच चुकी है। अमूल की इस ऐतिहासिक यात्रा और सहकारी मॉडल की जानकारी आनंद डेयरी की मानव संसाधन प्रमुख डॉ. प्रीति शुक्ला ने गुजरात के अध्ययन दौरे पर आए छत्तीसगढ़ के पत्रकारों को दी।डॉ. शुक्ला ने बताया कि 1930 और 1940 के दशक में खेड़ा क्षेत्र दूध उत्पादन के लिए प्रसिद्ध था, लेकिन दूध के विपणन और आपूर्ति पर निजी डेयरी का नियंत्रण था। किसानों को उनके दूध का उचित लाभ नहीं मिल रहा था और उन्हें लगने लगा था कि इस व्यवस्था में उनका शोषण हो रहा है। किसानों ने इस समस्या को लेकर सरदार वल्लभभाई पटेल से संपर्क किया। उनके मार्गदर्शन में वर्ष 1942 में किसानों की अपनी सहकारी संस्था स्थापित करने की दिशा में पहल शुरू हुई।उन्होंने बताया कि अमूल के संस्थापक अध्यक्ष श्री त्रिभुवनदास पटेल और श्री मोरारजी देसाई ने किसानों को संगठित किया। डेयरी की स्थापना के समर्थन में किसानों ने करीब 15 दिनों तक दूध की हड़ताल की। इसके बाद अंततः किसानों को अपनी सहकारी डेयरी स्थापित करने का मार्ग मिला। इसी आंदोलन के परिणामस्वरूप 14 दिसंबर 1946 को कैरा डिस्ट्रिक्ट को-ऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स यूनियन लिमिटेड का पंजीकरण हुआ।247 लीटर से शुरू हुई यात्राडॉ. शुक्ला ने बताया कि अमूल की शुरुआत बेहद छोटे स्तर से हुई थी। प्रारंभ में प्रतिदिन केवल 247 लीटर दूध का संग्रह होता था। आज अमूल के सहकारी नेटवर्क से गुजरात में 36 लाख से अधिक किसान जुड़े हैं और प्रतिदिन 350 लाख लीटर से अधिक दूध का संग्रह किया जा रहा है।उन्होंने बताया कि प्रारंभिक दौर में डेयरी का संचालन किराये की सरकारी क्रीमरी के एक हिस्से से किया गया। बाद में अमूल के संस्थापक अध्यक्ष श्री त्रिभुवनदास पटेल द्वारा डेयरी के लिए 50 एकड़ से अधिक भूमि उपलब्ध कराए जाने के बाद इसका विस्तार संभव हुआ।डॉ. वर्गीज कुरियन ने बदली अमूल की दिशाडॉ. प्रीति शुक्ला ने बताया कि वर्ष 1949 में डॉ. वर्गीज कुरियन के आनंद आगमन ने अमूल की विकास यात्रा को नई दिशा दी। इंजीनियर और तकनीकी विशेषज्ञ के रूप में आनंद आए डॉ. कुरियन बाद में अमूल के सहकारी आंदोलन से इतने गहराई से जुड़े कि उन्होंने अपना पूरा जीवन किसानों के इस आंदोलन को समर्पित कर दिया। उन्हें आगे चलकर 'भारत का मिल्कमैन' कहा गया।वर्ष 1952 में बॉम्बे स्टेट सरकार द्वारा पोल्सन डेयरी के स्थान पर कैरा यूनियन को दूध आपूर्ति का आदेश दिए जाने के बाद अमूल को मुंबई के एक सुनिश्चित बाजार तक पहुंच मिली। इससे दूध संग्रह और प्रसंस्करण क्षमता में तेजी से विस्तार हुआ।भैंस के दूध से मिल्क पाउडर बनाने की तकनीक बनी मील का पत्थरअमूल की विकास यात्रा में डेयरी टेक्नोलॉजिस्ट डॉ. एच. एम. दलाया के योगदान को भी डॉ. शुक्ला ने महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि उस समय दुनिया में उपलब्ध तकनीक मुख्य रूप से गाय के दूध से मिल्क पाउडर बनाने के लिए विकसित थी। भारत में भैंस के दूध की उपलब्धता अधिक थी, लेकिन उससे मिल्क पाउडर बनाना संभव नहीं था।डॉ. दलाया ने भैंस के दूध से मिल्क पाउडर बनाने की तकनीक विकसित की। इस नवाचार से अतिरिक्त दूध को संरक्षित करना संभव हुआ और दूध की अधिक उपलब्धता वाले मौसम में किसानों से दूध लेना जारी रखा जा सका। इससे अमूल के विस्तार को महत्वपूर्ण गति मिली और दूध की बर्बादी रोकने में भी मदद मिली।1955 में शुरू हुआ अमूल-1 संयंत्रअमूल के पहले बड़े संयंत्र का उद्घाटन 31 अक्टूबर 1955 को तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने किया था। करीब एक लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता वाला यह संयंत्र आज भी संचालन में है और इसे अमूल-1 के नाम से जाना जाता है।डॉ. शुक्ला ने बताया कि जब अमूल ने मक्खन का उत्पादन शुरू किया तो उसे बाजार में स्थापित करने के लिए एक ब्रांड की आवश्यकता महसूस हुई। इसी क्रम में 'अमूल' नाम सामने आया। 'अमूल' शब्द संस्कृत के 'अमूल्य' शब्द से प्रेरित माना जाता है, जिसका अर्थ है—अनमोल। बाद में इसे Anand Milk Union Limited के संक्षिप्त रूप के रूप में भी जाना गया।GCMMF ने अमूल को बनाया वैश्विक ब्रांडउन्होंने बताया कि गुजरात में अलग-अलग जिला दुग्ध संघ स्थापित होने के बाद यह महसूस किया गया कि यदि प्रत्येक डेयरी अपने अलग ब्रांड के तहत उत्पाद बेचती है तो आपसी प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है। इसी उद्देश्य से गुजरात को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (GCMMF) की स्थापना की गई।GCMMF को अमूल ब्रांड के तहत विभिन्न दुग्ध उत्पादों के विपणन की जिम्मेदारी दी गई। आज अमूल ब्रांड भारत के साथ-साथ दुनिया के 50 से अधिक देशों में अपनी पहचान बना चुका है।आनंद मॉडल से देशभर में फैला सहकारी डेयरी आंदोलनडॉ. शुक्ला ने बताया कि वर्ष 1964 में तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के आनंद दौरे ने भारतीय डेयरी क्षेत्र के विकास को नई दिशा दी। उन्होंने आनंद के सहकारी मॉडल को समझने के बाद यह महसूस किया कि देश के अन्य राज्यों के किसानों को भी इसका लाभ मिलना चाहिए।इसी सोच से राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) की स्थापना हुई और आनंद मॉडल को देशभर में लागू करने का प्रयास शुरू हुआ। डॉ. वर्गीज कुरियन इसके प्रथम अध्यक्ष बने। आनंद में NDDB का मुख्यालय बनाए जाने के कारण यह क्षेत्र आगे चलकर भारत की 'दुग्ध राजधानी' के रूप में प्रसिद्ध हुआ।किसान मालिक, पेशेवर प्रबंधन संचालकअमूल की सफलता के पीछे किसान और पेशेवर प्रबंधन के बीच संतुलन को महत्वपूर्ण बताते हुए डॉ. शुक्ला ने कहा कि अमूल के तीन प्रमुख स्तंभों में संस्थापक अध्यक्ष श्री त्रिभुवनदास पटेल, डॉ. वर्गीज कुरियन और डॉ. एच. एम. दलाया का योगदान उल्लेखनीय है।उन्होंने बताया कि अमूल की सहकारी व्यवस्था में किसानों द्वारा चुने गए प्रतिनिधि बोर्ड में शामिल होते हैं, जबकि डेयरी का दैनिक संचालन पेशेवर प्रबंधन द्वारा किया जाता है। इस मॉडल में किसान ही सहकारी संस्था के मालिक हैं और पेशेवर अधिकारी उसके संचालन की जिम्मेदारी निभाते हैं।तीन-स्तरीय सहकारी मॉडल है अमूल की ताकतडॉ. शुक्ला ने बताया कि अमूल का तीन-स्तरीय सहकारी मॉडल इसकी सफलता का आधार है। इसके तहत ग्राम स्तर पर दुग्ध सहकारी समितियां, जिला स्तर पर दुग्ध संघ और राज्य स्तर पर विपणन संघ कार्य करते हैं।गांवों में किसान सुबह और शाम दूध जमा करते हैं। दूध की गुणवत्ता की तत्काल जांच स्वचालित प्रणालियों से की जाती है और किसानों को उनके दूध की गुणवत्ता की जानकारी दी जाती है। दूध का भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों में किया जाता है और सामान्यतः 10 दिन के दूध चक्र के भीतर भुगतान कर दिया जाता है।इसके बाद दूध को बल्क मिल्क कूलर में 4 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा कर जिला दुग्ध संघों तक पहुंचाया जाता है। गुजरात में 18 जिला दुग्ध संघ विभिन्न क्षेत्रों से दूध संग्रह कर उसका प्रसंस्करण करते हैं। इसके बाद तैयार दुग्ध उत्पादों का विपणन GCMMF के माध्यम से देश और विदेश में किया जाता है।आय का बड़ा हिस्सा किसानों को वापसडॉ. शुक्ला ने बताया कि अमूल मॉडल में किसानों को केवल दूध का भुगतान ही नहीं मिलता, बल्कि वर्ष के अंत में होने वाले लाभ में भी उनकी हिस्सेदारी रहती है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक एक रुपये की आय में से लगभग 82 से 85 पैसे तक किसानों को वापस पहुंचते हैं।इसके अलावा किसानों को रियायती दरों पर पशु आहार, पशु चिकित्सा सेवाएं, पशुपालन संबंधी सुविधाएं और प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जाता है।पशु उत्पादकता बढ़ाने पर विशेष जोरउन्होंने बताया कि वर्तमान समय में अमूल का जोर पशुओं की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ प्रति पशु दूध उत्पादन बढ़ाने पर है। इसके लिए पशु पोषण, स्वास्थ्य और प्रजनन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।अमूल द्वारा 20 से अधिक प्रकार के पशु आहार तैयार किए जाते हैं। इसके अलावा हरे चारे, सूखे चारे और पशु आहार को वैज्ञानिक अनुपात में मिलाकर टोटल मिक्स्ड राशन (TMR) उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि पशुओं को संतुलित पोषण मिल सके।पशु स्वास्थ्य के लिए ईयर टैगिंग, डिजिटल रिकॉर्ड और केंद्रीकृत पशु चिकित्सा कॉल सेंटर जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं। किसान मोबाइल एप के माध्यम से पशु चिकित्सा सहायता का अनुरोध कर सकते हैं और आपात स्थिति में 2 से 4 घंटे के भीतर पशु चिकित्सक किसान के घर तक पहुंच सकता है।इसी प्रकार कृत्रिम गर्भाधान, गर्भावस्था जांच और पशुओं के जन्म से जुड़ी जानकारी भी डिजिटल प्रणाली में दर्ज की जाती है। अधिक संख्या में मादा बछड़ों के जन्म को प्रोत्साहित करने के लिए सॉर्टेड सीमेन तकनीक तथा बेहतर नस्ल के पशुओं की संख्या बढ़ाने के लिए भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीक का भी उपयोग किया जा रहा है।दो वर्षों से पूरी तरह पेपरलेस अमूल डेयरीडॉ. शुक्ला ने बताया कि अमूल डेयरी में आधुनिक ऑटोमेशन और डिजिटल तकनीक का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। किसानों से संबंधित डेटा डिजिटल प्रणाली में उपलब्ध है और कर्मचारियों की गतिविधियों के लिए ट्रैकिंग सिस्टम भी लागू है।उन्होंने बताया कि अमूल डेयरी पिछले दो वर्षों से पूरी तरह पेपरलेस तरीके से काम कर रही है और दैनिक कार्यों में कागज के उपयोग को समाप्त कर दिया गया है।अमूल गर्ल बनी ब्रांड की पहचानअमूल की ब्रांड पहचान में 'अमूल गर्ल' की भूमिका का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 1966 में सिल्वेस्टर डीकुन्हा द्वारा इसकी अवधारणा तैयार की गई थी। तब से अमूल गर्ल अमूल की सबसे लोकप्रिय ब्रांड पहचान बनी हुई है। इससे जुड़ा विज्ञापन अभियान दुनिया के सबसे लंबे समय तक चलने वाले विज्ञापन अभियानों में शामिल है और गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी दर्ज है।50 से अधिक देशों में पहुंचडॉ. शुक्ला ने बताया कि अमूल आज 50 से अधिक देशों में अपने उत्पादों का निर्यात करता है। अमेरिका और स्पेन में स्थानीय सहकारी संस्थाओं के साथ साझेदारी के माध्यम से अमूल ने दूध की खरीद, प्रसंस्करण और विपणन की व्यवस्था भी विकसित की है।उन्होंने कहा कि अमूल की पूरी व्यवस्था के केंद्र में 36 लाख से अधिक किसान हैं। किसानों की समितियों के साथ नियमित संवाद और उनकी भागीदारी अमूल के निर्णयों का महत्वपूर्ण हिस्सा है।उन्होंने कहा कि डेयरी क्षेत्र महिला सशक्तिकरण का भी प्रभावी माध्यम बन सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं की देखभाल, दूध निकालने और पशुपालन से जुड़े अधिकांश कार्यों में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में डेयरी सहकारिता महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रभावी माध्यम बन सकती है।इस प्रकार अमूल की यात्रा केवल एक डेयरी ब्रांड के विकास की कहानी नहीं, बल्कि किसान सहकारिता, तकनीकी नवाचार, पेशेवर प्रबंधन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की एक सफल गाथा है। -
नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता और चुनौतियों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती से आगे बढ़ रही है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बना हुआ है। आरबीआई के जुलाई मासिक बुलेटिन में कहा गया है कि जून तक आर्थिक गतिविधियां तेज रफ्तार से चल रही हैं। औद्योगिक और सेवा क्षेत्र के संकेतक मजबूत बने हुए हैं, जबकि मजबूत घरेलू मांग ने बाहरी दबावों का सफलतापूर्वक सामना किया है।
रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु:– विदेशी व्यापार में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई। अप्रैल-जून 2026 में निर्यात और आयात दोनों में अच्छी बढ़ोतरी हुई।– भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (CETA) और अन्य द्विपक्षीय समझौतों से व्यापार को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।– विदेशी निवेश में रिकवरी देखी गई। अप्रैल-मई में सकल और शुद्ध FDI पिछले साल से ज्यादा रहा। विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) भी जून में सकारात्मक हो गया।– मुद्रास्फीति पर नियंत्रण: जून में खुदरा महंगाई में मामूली बढ़ोतरी हुई, लेकिन मुख्य मुद्रास्फीति निम्न स्तर पर बनी रही। खाद्यान्न भंडार पर्याप्त होने से खाद्य मुद्रास्फीति पर असर सीमित रहने की संभावना।– तरलता की स्थिति बेहतर हुई, जिससे ऋण वृद्धि को समर्थन मिला।आरबीआई ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था अभी भी आपूर्ति श्रृंखला के व्यवधान, भू-राजनीतिक तनाव और बिखरे व्यापारिक संबंधों जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है, लेकिन भारत की मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था इन चुनौतियों से निपटने में सक्षम साबित हो रही है। बुलेटिन में यह भी उल्लेख किया गया कि मार्च 2026 के अंत तक भारत के प्रमुख बाह्य क्षेत्रीय जोखिम संकेतक मजबूत और संतुलित स्थिति में रहे। -
नई दिल्ली। भारत के ताजे आम निर्यात क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। देश से 12.5 टन प्रीमियम दशहरी और लंगड़ा आमों को उत्तर प्रदेश के अमरोहा से संयुक्त अरब अमीरात के दुबई तक सफलतापूर्वक निर्यात किया गया है। यह निर्यात 40 फुट के रेफ्रिजरेटर कंटेनर के माध्यम से समुद्री मार्ग से किया गया, जिसके लिए आईसीएआर-केंद्रीय उपोष्णकटिबंधीय बागवानी संस्थान (आईसीएआर-सीआईएसएच), लखनऊ और कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीईडीए) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित समुद्री मार्ग निर्यात प्रोटोकॉल का उपयोग किया गया। यह खेप अमरोहा स्थित शहनाज एक्सपोर्ट द्वारा अत्ताशी ग्लोबल के सहयोग से खाड़ी क्षेत्र की अग्रणी खुदरा श्रृंखलाओं में से एक, यूएई के लुलु ग्रुप को निर्यात की गई। इसमें आईसीएआर-सीआईएसएच का तकनीकी मार्गदर्शन और एपीईडीए का सहयोग प्राप्त हुआ।ëआमों की तुड़ाई 22 जून को की गई और तुड़ाई के बाद वैज्ञानिक रूप से अनुशंसित प्रबंधन तरीकों के अनुसार उन्हें संभाला गया। फलों को आईसीएआर-सीआईएसएच द्वारा विकसित मेटवॉश से उपचारित किया गया ताकि उनकी शेल्फ लाइफ बढ़ाई जा सके, वैज्ञानिक रूप से वर्गीकृत किया गया, अमरोहा पैक हाउस में पैक किया गया, 40 फुट के रेफ्रिजरेटर कंटेनर में लोड किया गया और निरंतर कोल्ड चेन के तहत समुद्र के रास्ते दुबई ले जाया गया।
पश्चिमी विक्षोभ के कारण हुई देरी की वजह से, खेप 17 जुलाई 2026 को गंतव्य बाजार पहुंची, जिससे तुड़ाई से लेकर बाजार तक की 25 दिन की पारगमन अवधि पूरी हुई। लंबी पारगमन अवधि के बावजूद, पहुंचने पर लगभग 90% आम अच्छी और बिकने लायक हालत में पाए गए, जो इस तकनीक की प्रभावशीलता को दर्शाता है।समुद्री मार्ग प्रोटोकॉल के सफल सत्यापन से किसानों की आय बढ़ाने के लिए किफायती निर्यात का एक स्थायी मार्ग उपलब्ध हो गया है। चूंकि समुद्री माल ढुलाई हवाई माल ढुलाई की तुलना में काफी सस्ती है, इसलिए निर्यातकों ने किसानों को अधिक खरीद मूल्य की पेशकश की। परिणामस्वरूप, आम उत्पादकों को पारंपरिक निर्यात चैनलों की तुलना में प्रति किलोग्राम लगभग ₹15-20 की अतिरिक्त आय प्राप्त हुई, जिससे कृषि लाभप्रदता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय आमों की प्रतिस्पर्धात्मकता भी बनी रही।उत्तर प्रदेश से दुबई तक दशहरी और लंगड़ा आमों की यह पहली सफल व्यावसायिक समुद्री खेप है, जिसमें कटाई से लेकर बाजार तक की 25 दिन की लंबी पारगमन अवधि का पालन किया गया है। इससे यह साबित होता है कि अब उच्च गुणवत्ता वाले भारतीय आमों को समुद्री माल ढुलाई के माध्यम से गुणवत्ता से समझौता किए बिना किफायती तरीके से निर्यात किया जा सकता है। उम्मीद है कि यह उपलब्धि निर्यातकों को समुद्री माल ढुलाई को अधिक अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेगी, जिससे खाड़ी क्षेत्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारत के ताजे आमों के निर्यात का विस्तार होगा। इस तकनीक से उत्तर प्रदेश और अन्य आम उत्पादक राज्यों से समुद्री मार्ग से होने वाले आमों के निर्यात के व्यावसायीकरण में तेजी आने की उम्मीद है, जिससे खाड़ी देशों और अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नए अवसर खुलेंगे, साथ ही निर्यात से होने वाली आय में वृद्धि होगी, रसद लागत कम होगी और उत्तर प्रदेश के आम उत्पादकों की आजीविका में सुधार होगा। - नई दिल्ली। सोने और चांदी की कीमतों में बुधवार को एक प्रतिशत से अधिक की तेजी देखी गई। इसकी वजह मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ना है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने का 5 अगस्त 2026 का कॉन्ट्रैक्ट अपनी पिछली क्लोजिंग 1,42,883 रुपए प्रति 10 ग्राम के मुकाबले 1,44,852 रुपए प्रति 10 ग्राम पर खुला। सुबह 9:47 पर यह 1,517 रुपए या 1.06 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,44,400 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था।अब तक के कारोबार में सोने ने 1,44,311 रुपए प्रति 10 ग्राम का न्यूनतम स्तर और 1,44,883 रुपए प्रति 10 ग्राम का उच्चतम स्तर बनाया है और दिखाता है कि खुलने के बाद सोने एक सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है।चांदी का 4 सितंबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 2,23,779 रुपए प्रति किलो के मुकाबले 2,26,568 रुपए प्रति किलो पर खुला।फिलहाल यह 2,259 रुपए या 1.01 प्रतिशत की मजबूती के साथ 2,26,038 रुपए प्रति किलो पर खुला। अब तक के कारोबार में चांदी ने 2,25,885 रुपए का न्यूनतम स्तर और 2,26,892 रुपए का उच्चतम स्तर छुआ है। इस तेजी की वजह अमेरिका-ईरान में तनाव के कारण सुरक्षित निवेश की मांग फिर से बढ़ना है। साथ ही, डॉलर इंडेक्स में कमजोरी आने से भी कीमती धातुओं को सपोर्ट मिल रहा है।अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। खबर लिखे जाने तक कॉमेक्स पर सोना 1.41 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,133 डॉलर प्रति औंस और चांदी 1.50 प्रतिशत की मजबूती के साथ 60 डॉलर प्रति औंस के करीब था।दूसरी तरफ, अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध के चलते मध्य पूर्व में तनाव हुआ है। अमेरिका ने लगातार 11वें दिन ईरान पर हमले किए, जिसमें उसकी ड्रोन भंडारण सुविधाओं, समुद्र में हमला करने की क्षमताओं और अन्य सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। वहीं, ईरान भी मध्यू पूर्व में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना रहा है।
- नयी दिल्ली. भारतीय रियल एस्टेट क्षेत्र में अप्रैल-जून तिमाही के दौरान 2.3 अरब डॉलर के 39 सौदे हुए, जो पिछली तिमाही की तुलना में लगभग तीन गुना है। एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। सलाहकार फर्म ग्रांट थॉर्नटन भारत की रियल एस्टेट क्षेत्र से संबंधित तिमाही रिपोर्ट के मुताबिक, जून तिमाही में कुल 39 सौदों में निजी इक्विटी (पीई) का सबसे बड़ा योगदान रहा, जिसने कुल सौदा मूल्य का लगभग आधा हिस्सा दिया। सार्वजनिक बाजार गतिविधियां भी मजबूत रहीं। रिपोर्ट के मुताबिक, विलय एवं अधिग्रहण (एमएंडए) खंड में अप्रैल-जून के दौरान 36.7 करोड़ डॉलर के 22 सौदे हुए, जो पिछले साल की समान अवधि के 33.5 करोड़ डॉलर से 10 प्रतिशत अधिक हैं।वहीं, पीई एवं उद्यम पूंजी (वीसी) क्षेत्र में 13 सौदे 115.7 करोड़ डॉलर के रहे, जो एक साल पहले की समान अवधि के 45.8 करोड़ डॉलर से काफी अधिक है। इसके अलावा, जून तिमाही में दो आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) और दो पात्र संस्थागत नियोजन (क्यूआईपी) के जरिये कुल 78.2 करोड़ डॉलर जुटाए गए, जिसमें आईपीओ से 38.1 करोड़ डॉलर और क्यूआईपी से 40.1 करोड़ डॉलर शामिल हैं। बैगमाने प्राइम ऑफिस रीट ने 35.5 करोड़ डॉलर के निर्गम के साथ आईपीओ गतिविधियों का नेतृत्व किया, जबकि ब्रुकफील्ड इंडिया रियल एस्टेट ट्रस्ट और बैगमाने प्राइम ऑफिसेज रीट ने क्यूआईपी के जरिये धन जुटाने में प्रमुख भूमिका निभाई। इस तिमाही का सबसे बड़ा सौदा माइंडस्पेस बिजनेस पार्क्स रीट और 360 वन अल्टरनेट्स एसेट मैनेजमेंट लिमिटेड द्वारा रेडियल आईटी पार्क लिमिटेड में संयुक्त रूप से 32.3 करोड़ डॉलर का निवेश रहा। ग्रांट थॉर्नटन भारत में साझेदार भाविक वोरा ने कहा, ''ये आंकड़े भारत के वाणिज्यिक रियल एस्टेट क्षेत्र में संस्थागत निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाते हैं। उच्च गुणवत्ता वाली आय-सृजन करने वाली परिसंपत्तियों की ओर पूंजी का प्रवाह तेज हुआ है, जिससे पीई निवेश और पूंजी बाजार गतिविधियों में तेजी आई है।''
- नयी दिल्ली। नवीन जिंदल समूह ने भारत में परमाणु ऊर्जा परियोजनाएं विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए वैश्विक परमाणु प्रौद्योगिकी कंपनियों से बातचीत शुरू कर दी है। समूह फ्रांस की ईडीएफ और अमेरिका की वेस्टिंगहाउस समेत कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ प्रौद्योगिकी सहयोग की संभावनाएं तलाश रहा है। मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने कहा कि भविष्य की परमाणु परियोजनाओं के लिए समूह सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) के साथ भी चर्चा कर रहा है। बातचीत का उद्देश्य 700 मेगावाट और उससे अधिक क्षमता वाले बड़े मॉड्यूलर रिएक्टर (एलएमआर) की प्रौद्योगिकी हासिल करने की संभावनाओं का मूल्यांकन करना है। इस्पात से बंदरगाह क्षेत्र में कार्यरत नवीन जिंदल समूह की योजना देश के विभिन्न राज्यों में करीब 18 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता विकसित करने की है। इस पर अनुमानित रूप से दो लाख करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। यह पहल केंद्र सरकार के वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने के लक्ष्य में योगदान देगी। समूह नौ से अधिक राज्यों में संभावित स्थलों का आकलन कर रहा है। इनमें गुजरात, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, झारखंड और छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्य शामिल हैं।परियोजनाओं में 700 मेगावाट या उससे अधिक क्षमता वाले बड़े रिएक्टर को शामिल करने की योजना है। प्रौद्योगिकी विकल्पों के रूप में समूह ईडीएफ के 1,650 मेगावाट क्षमता वाले यूरोपियन प्रेशराइज्ड रिएक्टर (ईपीआर), वेस्टिंगहाउस के 1,150 मेगावाट क्षमता वाले एपी 1000 रिएक्टर और एनपीसीआईएल की स्वदेशी 700 मेगावाट क्षमता वाली प्रेसराइज्ड हेवी वॉटर रिएक्टर (पीएचडब्ल्यूआर) प्रौद्योगिकी सहित अन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है। समूह अंतिम प्रौद्योगिकी का चयन सुरक्षा मानकों, विस्तार की क्षमता, व्यावसायिक व्यवहार्यता और लंबे समय तक परिचालन की क्षमता के आधार पर करेगा। सरकार की ओर से परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए किए गए कानूनी बदलावों के बाद नवीन जिंदल समूह उन चुनिंदा कॉरपोरेट घरानों में शामिल हो गया है, जिन्होंने इस क्षेत्र में बड़े निवेश की घोषणा की है। नवीन जिंदल समूह की अनुषंगी कंपनी जिंदल न्यूक्लियर पावर प्राइवेट लिमिटेड इस योजना को आगे बढ़ा रही है। इसके अलावा टाटा पावर और एनटीपीसी जैसी कंपनियां भी वर्ष 2047 तक देश में परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के विकास की योजनाओं पर काम कर रही हैं।
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नयी दिल्ली. भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने कॉल प्रबंधन ऐप 'ट्रूकॉलर' द्वारा विशेष नंबर श्रृंखला के तहत आने वाले नंबर पर 'फ्रीक्वेंटली ब्लॉक्ड' (अक्सर ब्लॉक किए जाने वाले) का बैज/टैग दिखाए जाने पर आपत्ति जताई है। नियामक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस तरह की टैगिंग उचित नहीं है, क्योंकि इससे दूरसंचार उपभोक्ता गुमराह और भ्रमित हो सकते हैं। साथ ही 1600 और 140 नंबर श्रेणी से आने वाली वैध कॉल को लेकर अनावश्यक संदेह पैदा हो सकता है, जबकि ये नंबर नियामकीय ढांचे के तहत आते हैं। अधिकारी ने कहा कि इसके बजाय ट्रूकॉलर को उपयोगकर्ताओं को यह जानकारी देनी चाहिए कि वे ट्राई के आधिकारिक 'डू नॉट डिस्टर्ब' (डीएनडी) वरीयता प्रबंधन ऐप के माध्यम से 140 नंबर श्रेणी से आने वाली अवांछित प्रचार कॉल को रोकने का विकल्प चुन सकते हैं। उन्होंने कहा कि समाधान डीएनडी व्यवस्था के बारे में जागरूकता बढ़ाने में है, ताकि लोग अपने पास उपलब्ध विकल्पों को समझ सकें। ट्राई ने विनियमित बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और बीमा (बीएफएसआई) संस्थाओं द्वारा सेवा एवं लेन-देन से जुड़ी कॉल और सरकार से नागरिकों तक होने वाले संचार के लिए 1600 श्रृंखला के नंबरों का उपयोग अनिवार्य किया है, जबकि 140 श्रृंखला के नंबर विभिन्न क्षेत्रों की पंजीकृत संस्थाओं द्वारा प्रचार संबंधी (प्रचारक) कॉल के लिए हैं। ट्राई अधिकारी ने कॉल प्रबंधन ऐप और उपभोक्ताओं को आगाह करते हुए कहा कि किसी भी स्थिति में 1600 नंबरों को 'फ्रीक्वेंटली ब्लॉक्ड' या किसी अन्य नकारात्मक टैग के रूप में नहीं दिखाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि 1600 श्रेणी का इस्तेमाल भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी), बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडाई) और पेंशन कोष नियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) से नियंत्रित संस्थाओं द्वारा अपने मौजूदा ग्राहकों को सेवा और लेनदेन संबंधी कॉल करने तथा सरकारी संस्थाओं द्वारा नागरिकों को सूचना देने के लिए किया जाता है। अधिकारी ने कहा कि 1600 नंबर से आने वाली कॉल धोखाधड़ी की चेतावनी, लेनदेन की पुष्टि या अन्य महत्वपूर्ण सूचनाओं से जुड़ी हो सकती हैं। ऐसे में इन पर किसी तरह का टैग लगाने से उपभोक्ताओं को नुकसान हो सकता है। ट्राई और ट्रूकॉलर के बीच 140 और 1600 नंबर श्रेणी पर टैग दिखाने को लेकर मतभेद के बीच नियामक की यह टिप्पणी आई है।
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नई दिल्ली। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने दमन के NAMO एयरपोर्ट से दमन-दिल्ली-दमन मार्ग पर पहली सीधी उड़ान को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। सरकारी क्षेत्र की एयरलाइन एलायंस एयर ने इस सेवा की शुरुआत की है, जिससे दमन को पहली बार दिल्ली से सीधा हवाई संपर्क मिला है।
सरकार के अनुसार, NAMO एयरपोर्ट का निर्माण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना के तहत किया गया है। यह भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard) के एयर स्टेशन परिसर में विकसित दोहरे उपयोग (ड्यूल-यूज) वाला हवाई अड्डा है। इसके सिविल टर्मिनल की आधारशिला 25 अप्रैल 2023 को रखी गई थी और प्रधानमंत्री ने 5 जून 2026 को इसका उद्घाटन किया था।करीब 124 करोड़ रुपये की लागत से 25 एकड़ क्षेत्र में विकसित इस एयरपोर्ट के निर्माण में नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने 88 करोड़ रुपये का योगदान दिया है। 3,700 वर्ग मीटर में फैला यह टर्मिनल फिलहाल प्रतिदिन 14 ATR उड़ानों का संचालन कर सकता है और इसकी वार्षिक क्षमता 3.67 लाख यात्रियों की है।राम मोहन नायडू ने कहा कि इस नई सेवा से अब दमन से दिल्ली की यात्रा, जो पहले सूरत या मुंबई के रास्ते 8 से 10 घंटे में पूरी होती थी, अब करीब ढाई घंटे में पूरी की जा सकेगी। उन्होंने इसका श्रेय प्रधानमंत्री की उड़ान (UDAN) योजना को दिया।मंत्री ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन एवं दीव में 13,000 करोड़ रुपये से अधिक की 450 से ज्यादा विकास परियोजनाएं पूरी की गई हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के योगदान के सम्मान में स्थानीय लोगों ने इस हवाई अड्डे का नाम NAMO एयरपोर्ट रखा है।उन्होंने बताया कि दमन, दीव और दादरा एवं नगर हवेली में 7,000 से अधिक उद्योग हैं, जबकि आसपास के वापी और वलसाड क्षेत्रों में 15,000 से ज्यादा उद्योग संचालित हैं। बेहतर हवाई संपर्क से निवेश, व्यापार और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।पर्यटन का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि हर साल करीब 20 लाख पर्यटक दमन आते हैं और सीधी उड़ान शुरू होने से यह संख्या और बढ़ने की उम्मीद है। सरकार भविष्य में रनवे का विस्तार कर एयरबस A320 जैसे बड़े विमानों का संचालन शुरू करने और मुंबई, सूरत, अहमदाबाद तथा पटना जैसे शहरों से भी हवाई संपर्क बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है।उन्होंने कहा कि दमन का मत्स्य उद्योग, समुद्री उत्पाद और फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र भी इस हवाई संपर्क से लाभान्वित होंगे, क्योंकि अब इनके उत्पाद कम समय में देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाए जा सकेंगे।मंत्री ने यह भी बताया कि संशोधित उड़ान (UDAN) योजना को अगले 10 वर्षों के लिए बढ़ाया गया है। इसके तहत 29,000 करोड़ रुपये के निवेश से देशभर में 100 नए हवाई अड्डे और 200 नए हेलीपैड विकसित किए जाएंगे। कार्यक्रम में दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन एवं दीव के प्रशासक प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि NAMO एयरपोर्ट क्षेत्र के औद्योगिक और आर्थिक विकास के लिए गेमचेंजर साबित होगा और आने वाले वर्षों में इसकी भूमिका और बढ़ेगी। -
नई दिल्ली। देश के छोटे शहरों और दूरदराज के इलाकों तक हवाई यात्रा को आसान और सुलभ बनाने के लिए केंद्र सरकार ने संशोधित उड़ान (Modified UDAN) योजना शुरू की है। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक लागू रहेगी, जिसके लिए ₹28,840 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इस नई योजना के तहत देशभर में 100 नए एयरपोर्ट और 200 आधुनिक हेलिपैड विकसित किए जाएंगे, जिससे क्षेत्रीय हवाई संपर्क को नई मजबूती मिलेगी।सरकार ने उड़ान (उड़े देश का आम नागरिक) योजना की शुरुआत अक्टूबर 2016 में की थी, जिसका उद्देश्य छोटे शहरों तक सस्ती और सुविधाजनक हवाई सेवाएं पहुंचाना था। पिछले नौ वर्षों में इस योजना ने क्षेत्रीय विमानन क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाया है। 15 जुलाई 2026 तक योजना के तहत 679 हवाई मार्ग शुरू किए जा चुके हैं, जो 95 एयरपोर्ट, हेलिपोर्ट और वाटर एयरोड्रोम को जोड़ते हैं। अब तक 3.58 लाख से अधिक उड़ानों का संचालन हुआ है और 1.68 करोड़ से ज्यादा यात्री इसका लाभ उठा चुके हैं।
नागरिक उड्डयन क्षेत्र में भी पिछले एक दशक में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2014 में जहां देश में 74 परिचालित एयरपोर्ट थे, वहीं 15 जुलाई 2026 तक यह संख्या बढ़कर 165 हो गई है। सरकार का कहना है कि इस विस्तार में उड़ान योजना की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।संशोधित उड़ान योजना में केवल नए एयरपोर्ट बनाने पर ही जोर नहीं दिया गया है, बल्कि छोटे एयरपोर्टों के संचालन को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं। योजना के तहत क्षेत्रीय हवाई अड्डों को तीन वर्षों तक संचालन एवं रखरखाव (O&M) सहायता दी जाएगी। साथ ही, छोटे शहरों में उड़ानें संचालित करने वाली एयरलाइंस को Viability Gap Funding (VGF) भी उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि शुरुआती वर्षों में कम यात्री संख्या के बावजूद सेवाएं जारी रह सकें। इस मद में अगले दस वर्षों के लिए ₹10,043 करोड़ का प्रावधान किया गया है।योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा 200 आधुनिक हेलिपैड का विकास भी है। पहाड़ी, सीमावर्ती और दूरस्थ क्षेत्रों में जहां पारंपरिक एयरपोर्ट बनाना कठिन है, वहां हेलीकॉप्टर सेवाओं के जरिए बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई जाएगी। इससे स्वास्थ्य सेवाओं, आपदा राहत, प्रशासनिक गतिविधियों और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।सरकार ने इस योजना को आत्मनिर्भर भारत अभियान से भी जोड़ा है। इसके तहत स्वदेशी विमानन क्षमता बढ़ाने के लिए पवन हंस को दो HAL ध्रुव हेलीकॉप्टर और एलायंस एयर को दो HAL डोर्नियर विमान उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा गया है। इन विमानों को विशेष रूप से कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में संचालन के लिए उपयुक्त माना जाता है।सरकार का मानना है कि संशोधित उड़ान योजना से छोटे शहरों की हवाई कनेक्टिविटी और मजबूत होगी। इससे पर्यटन, व्यापार, निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही, दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य आवश्यक सेवाओं तक तेजी से पहुंचने में भी सुविधा मिलेगी। -
नयी दिल्ली. कमजोर मानसून और बारिश में देरी के बीच किसानों एवं वाहन चालकों की तरफ से मांग बढ़ने से जुलाई के पहले पखवाड़े में देश की सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम विपणन कंपनियों की पेट्रोल एवं डीजल बिक्री में तेज वृद्धि दर्ज की गई। प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) की पेट्रोल बिक्री एक से 15 जुलाई के दौरान 22.9 प्रतिशत बढ़कर 16.3 लाख टन हो गई, जो एक वर्ष पहले इसी अवधि में 13.3 लाख टन थी। इस दौरान देश में आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख संकेतक माने जाने वाले डीजल की बिक्री सालाना आधार पर 20.9 प्रतिशत बढ़कर 34.6 लाख टन हो गई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 28.7 लाख टन थी। हालांकि, मासिक आधार पर तुलना करें तो पेट्रोल और डीजल दोनों की बिक्री में गिरावट दर्ज की गई। जून के पहले पखवाड़े की तुलना में पेट्रोल बिक्री 4.4 प्रतिशत और डीजल बिक्री 12.1 प्रतिशत कम रही। आमतौर पर मानसून के आगमन के साथ ईंधन की मांग घट जाती है। इसकी वजह यह है कि खेतों की सिंचाई के लिए पंप का उपयोग कम हो जाता है और सड़क यातायात भी धीमा पड़ जाता है। लेकिन इस वर्ष मानसून में देरी के चलते किसानों को सिंचाई के लिए डीजल चालित पंप का अधिक उपयोग करना पड़ा, जिससे डीजल की मांग बढ़ी। हालांकि, मासिक आधार पर जुलाई में बिक्री जून के मुकाबले कम रहती है। इसका कारण यह है कि जून में आमतौर पर स्कूल और कॉलेज की छुट्टियों के कारण यात्राएं बढ़ जाती हैं। इस बीच, विमान ईंधन (एटीएफ) की बिक्री एक से 15 जुलाई के दौरान 0.7 प्रतिशत बढ़कर 3.15 लाख टन रही, लेकिन जून के पहले पखवाड़े की तुलना में इसमें 10.3 प्रतिशत की गिरावट आई। जुलाई के पहले पखवाड़े में भी तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की बिक्री में गिरावट जारी रही और यह सालाना आधार पर 17.5 प्रतिशत घटकर 11.4 लाख टन रह गई। पश्चिम एशिया संकट के कारण गैस आपूर्ति प्रभावित होने से होटल एवं रेस्तरां में खपत पर लगी पाबंदियों के इसकी बिक्री प्रभावित हुई है। हालांकि, इस महीने प्रतिबंध हटने के बाद जून की तुलना में इसमें 1.7 प्रतिशत की हल्की वृद्धि दर्ज की गई।
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नयी दिल्ली। सरकार ने 16 जुलाई से शुरू होने वाले पखवाड़े के लिए डीजल और विमानन ईंधन (एटीएफ) के निर्यात पर अप्रत्याशित लाभ कर बढ़ा दिया है जबकि पेट्रोल के निर्यात पर शुल्क घटाया है। डीजल के निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (एसएईडी) बढ़ाकर 8.5 रुपये प्रति लीटर से 15.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इसी तरह, एटीएफ के निर्यात पर एसएईडी 15 जुलाई तक लागू 7.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 14.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। दूसरी ओर, पेट्रोल के निर्यात पर शुल्क चार रुपये प्रति लीटर से घटाकर 2.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। वित्त मंत्रालय ने एक अधिसूचना में कहा कि संशोधित शुल्क 16 जुलाई से प्रभावी होंगे।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच सरकार ने 27 मार्च को डीजल और विमान ईंधन के निर्यात पर शुल्क लगाया था और इसके बाद से हर पखवाड़े इसकी दरों में संशोधन किया जा रहा है। इसके बाद 16 मई से पेट्रोल के निर्यात पर भी शुल्क लगाया गया था।
मंत्रालय ने साथ ही कहा कि घरेलू खपत के लिए निकाले जाने वाले पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा शुल्क दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण देश में ईंधन की उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से अप्रत्याशित लाभ कर लगाया गया था। साथ ही इसका मकसद पश्चिम एशिया जारी संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी के मद्देनजर निर्यातकों को मूल्य अंतर का अनुचित लाभ उठाने से रोकना भी है। सरकार के अनुसार, पश्चिम एशिया संकट की पृष्ठभूमि में पेट्रोलियम उत्पादों की घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए निर्यात को हतोत्साहित करने के उद्देश्य से यह अप्रत्याशित लाभ कर लगाया गया है।
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नई दिल्ली। भारत पोस्ट (इंडिया पोस्ट) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में पहली बार 4,000 करोड़ रुपए से अधिक का कारोबार दर्ज कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने विज्ञान भवन में आयोजित तिमाही बिजनेस रिव्यू बैठक में बताया कि इंडिया पोस्ट ने पहली तिमाही में 4,008.95 करोड़ रुपए का कारोबार किया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में 22.2% अधिक है। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इंडिया पोस्ट के आधुनिकीकरण और भविष्य के लिए तैयार संगठन बनाने की दिशा में किए गए प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा कि इंडिया पोस्ट ‘डाक सेवा, जन सेवा’ के मूल मंत्र के साथ आगे भी नए कीर्तिमान स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।
विज्ञान भवन में आयोजित बिजनेस रिव्यू बैठक में देशभर के इंडिया पोस्ट के 23 सर्किलों के प्रदर्शन की समीक्षा की गई। बैठक में पहली तिमाही के कारोबार का आकलन करने के साथ-साथ वित्त वर्ष 2026-27 के लिए रणनीतिक रोडमैप और भविष्य की कार्ययोजना पर भी चर्चा की गई।संचार राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी ने कहा कि पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में विभाग का राजस्व लगभग 3,280 करोड़ रुपए था, जो इस वर्ष बढ़कर 4,000 करोड़ रुपए से अधिक हो गया है। उन्होंने कहा कि करीब 22% की वार्षिक वृद्धि विभाग के 30% वार्षिक वृद्धि लक्ष्य की दिशा में मजबूत शुरुआत है।बैठक के दौरान बेहतर प्रदर्शन करने वाले सर्किलों और इकाइयों को सराहा गया। आंध्र प्रदेश पोस्टल सर्किल ने अपने तिमाही कारोबारी लक्ष्य का 100% से अधिक हासिल किया। बिहार और तमिलनाडु सर्किलों ने पार्सल व्यवसाय में लक्ष्य से बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि मेल ऑपरेशंस में आंध्र प्रदेश ने 100% से अधिक लक्ष्य प्राप्त किया। नागरिक-केंद्रित सेवाओं में पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश सर्किलों को सम्मानित किया गया। पोस्ट ऑफिस सेविंग्स बैंक श्रेणी में छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और झारखंड ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया, जबकि डाक जीवन बीमा (PLI/RPLI) श्रेणी में पश्चिम बंगाल और जम्मू-कश्मीर सर्किलों ने उत्कृष्ट उपलब्धि हासिल की। -
कानपुर (उप्र) . देश में 20 प्रतिशत एथनॉल-मिश्रित पेट्रोल (ई-20) से गाड़ियों के इंजन को नुकसान पहुंचने का कोई सुबूत नहीं है। ई-20 लागू करने को लेकर व्यक्त की जा रही चिंताओं के बीच भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-कानपुर के अध्ययन में यह बात सामने आई है। आईआईटी-कानपुर के मैकेनिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट में इंजन रिसर्च लैबोरेटरी के परियोजना वैज्ञानिक ध्रुव राज करणा ने मंगलवार को बताया कि बड़े पैमाने पर हुए अध्ययन में सामने आया कि ई-20 से इंजन को नुकसान, जंग लगने या कोई दूसरी तकनीकी समस्या नहीं होती है। उन्होंने सोशल मीडिया पर ई-20 पेट्रोल से गाड़ियों को नुकसान पहुंचने के दावों को वैज्ञानिक आधार पर बेबुनियाद करार दिया और गाड़ी चलाने वालों को अपुष्ट ऑनलाइन खबरों के बजाय अपनी गाड़ी बनाने वाली कंपनी के 'मैनुअल' तथा पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के दिशानिर्देशों पर भरोसा करने की सलाह दी। करणा ने बताया कि हेड प्रोफेसर अविनाश कुमार अग्रवाल की अगुवाई वाली आईआईटी-कानपुर की इंजन रिसर्च लैबोरेटरी एथनॉल-मिश्रित ईंधन पर व्यापक अध्ययन कर रही है। उन्होंने कहा, '' संस्थान के अध्ययनों में ई-20 के कारण गाड़ियों के 'माइलेज' में कोई खास कमी नहीं पाई गई। 'माइलेज' में कोई भी बदलाव दरअसल ईंधन के बजाय गाड़ी चलाने की आदतों, सड़क की स्थिति और गाड़ी के रखरखाव से ज्यादा प्रभावित होता है।'' शोधकर्ताओं के मुताबिक अब तक किए गए परीक्षणों में इंजन के टिकाऊपन या गाड़ी की रफ्तार एवं 'माइलेज' पर ई-20 ईंधन का कोई प्रतिकूल असर नहीं देखा गया है। करणा ने साथ ही बताया कि इंजन रिसर्च लैबोरेटरी के दल ने 85 प्रतिशत एथनॉल मिश्रित (ई-85) ईंधन का भी सफलतापूर्वक परीक्षण किया है। हालांकि, इतने ज्यादा मिश्रण के लिए खास तौर पर तैयार किए गए इंजन और उपयुक्त ईंधन प्रणाली की जरूरत होती है।
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-सिर्फ 23 प्रतिशत युवा एआई-नेटिव: नैसकॉम
नयी दिल्ली. आईटी उद्योग के संगठन नैसकॉम ने मंगलवार को आगाह किया कि अगर उद्योग और अकादमिक जगत बुनियादी इंजीनियरिंग विशेषज्ञता को बनाए रखने में नाकाम रहते हैं, तो भारत में प्रौद्योगिकी कार्यबल 'एआई-नेटिव' होने के बजाय केवल 'एआई-निर्भर' बनकर रह सकता है। एआई-नेटिव व्यक्ति कृत्रिम मेधा (एआई) का इस्तेमाल करने के साथ अपनी समझ से भी काम करता है, जबकि एआई-निर्भर व्यक्ति हर काम के लिए एआई पर ही निर्भर रहता है। नैसकॉम की रिपोर्ट के मुताबिक, देश के 90 प्रतिशत से अधिक शुरुआती करियर वाले प्रौद्योगिकी पेशेवर पहले से ही एआई को अपना रहे हैं। हालांकि, संगठन ने इस बात को लेकर आगाह किया कि रोजमर्रा के कोडिंग कार्यों में गिरावट आने से मूलभूत तकनीकी कौशल में कमी नहीं आनी चाहिए। नैसकॉम की वरिष्ठ उपाध्यक्ष और मुख्य रणनीति अधिकारी संगीता गुप्ता ने कहा, "भारत के पास एआई-नेटिव प्रौद्योगिकी प्रतिभा का वैश्विक केंद्र बनने का अनूठा अवसर है। लेकिन एआई कौशल का प्रसार और एआई-नेटिव होना अलग-अलग बातें हैं। यदि सावधानी नहीं बरती गई, तो कार्यबल एआई-नेटिव होने के बजाय एआई-निर्भर बनकर रह सकता है।" नैसकॉम ने 'भारत में एआई-नेटिव प्रतिभा की स्थिति' शीर्षक से जारी अपनी रिपोर्ट में करियर के शुरुआती दौर वाले युवा प्रौद्योगिकी पेशेवरों और अंतिम वर्ष के इंजीनियरिंग छात्रों की एआई क्षमताओं का आकलन किया है। अध्ययन रिपोर्ट कहती है कि भारत के लगभग दो-तिहाई युवा कार्यबल को 'एआई-प्रवीण' माना जा सकता है, लेकिन केवल 23 प्रतिशत ही 'एआई-नेटिव' की श्रेणी में आते हैं। ऐसे में इंजीनियरिंग निर्णय क्षमता और तकनीकी गहराई को मजबूत कर इस प्रतिभा आधार को और विकसित करने की पर्याप्त गुंजाइश है। रिपोर्ट में यह पाया गया कि एआई उत्पादकता और सीखने की गति को बढ़ाता है, लेकिन यह उन नियमित कार्यों को भी स्वचालित कर रहा है जिनके माध्यम से कनिष्ठ इंजीनियर अपनी बुनियादी समझ विकसित करते थे। ऐसे में कंपनियों और शैक्षणिक संस्थानों को इंजीनियरों में स्वतंत्र निर्णय क्षमता और समस्या समाधान कौशल विकसित करने के लिए नए अवसर सृजित करने होंगे। नैसकॉम ने सुझाव दिया कि अकादमिक जगत को पारंपरिक कोडिंग शिक्षा से आगे बढ़कर इंजीनियरिंग समझ, विषय-विशेष ज्ञान और मूल्यांकन के तरीकों में बदलाव करना होगा। वहीं, उद्योग को भर्ती, प्रशिक्षण और मार्गदर्शन के ढांचे को इस तरह बनाना होगा कि करियर के शुरुआती दौर वाले पेशेवरों में बुनियादी क्षमताएं मजबूत हों और स्वतंत्र समस्या समाधान को बढ़ावा मिले। रिपोर्ट के अनुसार, आईटी उद्योग को अपनी स्थापित कार्यप्रणालियों पर भी नए सिरे से गौर करना होगा। भर्ती प्रक्रिया में केवल बुनियादी कोडिंग के बजाय एआई-नेटिव क्षमताओं का आकलन किया जाना चाहिए, जबकि प्रशिक्षण में एआई-सहायता प्राप्त बुनियादी सीख, सिमुलेशन आधारित अभ्यास और बहु-स्तरीय मार्गदर्शन को शामिल करना होगा। -
नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष में भारत का सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह मजबूत गति से बढ़ा है। 13 जुलाई 2026 तक का आंकड़ा सालाना आधार पर 16.11 प्रतिशत बढ़कर 7.74 लाख करोड़ रुपए पहुंच गया है। वित्त मंत्रालय द्वारा मंगलवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस बढ़ोतरी के पीछे कॉरपोरेट कर, गैर-कॉरपोरेट कर और सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में हुई अच्छी वृद्धि मुख्य कारण है।
रिफंड समायोजित करने के बाद शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 16.4 प्रतिशत बढ़कर 6.51 लाख करोड़ रुपए हो गया। इस दौरान जारी किए गए रिफंड में 14.57 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह आंकड़ा 1.22 लाख करोड़ रुपए पहुंच गया।सेक्टर-वार प्रदर्शन– कॉरपोरेट कर संग्रह (शुद्ध): 2.40 लाख करोड़ रुपए (पिछले साल 1.97 लाख करोड़)– गैर-कॉरपोरेट कर संग्रह (शुद्ध): 3.85 लाख करोड़ रुपए (पिछले साल 3.44 लाख करोड़)– सकल कॉरपोरेट कर: 3.35 लाख करोड़ रुपए– सकल गैर-कॉरपोरेट कर: 4.12 लाख करोड़ रुपए– सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT): 26,428.96 करोड़ रुपए (पिछले साल 17,875.88 करोड़)विशेषज्ञों का मानना है कि प्रत्यक्ष कर संग्रह में लगातार मजबूत वृद्धि देश की अर्थव्यवस्था की स्वस्थ गति और मजबूत घरेलू कारकों को दर्शाती है। ये आंकड़े व्यक्तिगत करदाताओं, कंपनियों, हिंदू अविभाजित परिवार (HUFs), फर्मों और अन्य संस्थाओं द्वारा चुकाए गए करों पर आधारित हैं। -
नई दिल्ली। भारत का तेजी से बढ़ता डेटा सेंटर उद्योग आने वाले वर्षों में देश के सबसे बड़े रोजगार सृजक क्षेत्रों में शामिल हो सकता है। एक नई रिपोर्ट में मंगलवार को कहा गया कि वर्ष 2030 तक इस क्षेत्र में करीब 1 लाख कुशल पेशेवरों (स्किल्ड प्रोफेशनल्स) की आवश्यकता होगी। एनएलबी सर्विसेज की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की स्थापित डेटा सेंटर क्षमता मौजूदा लगभग 1.5 गीगावाट (जीडब्ल्यू) से बढ़कर दशक के अंत तक 6.5 गीगावाट तक पहुंचने का अनुमान है। वहीं, देश का डेटा सेंटर बाजार 22 अरब डॉलर से अधिक का हो सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, इस क्षेत्र में अब तक 126 अरब डॉलर से अधिक के निवेश की प्रतिबद्धताएं हो चुकी हैं। यही वजह है कि डेटा सेंटर उद्योग भारत के सबसे तेजी से बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टरों में शामिल हो गया है। हालांकि, विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि शिक्षा संस्थान, उद्योग और नीति-निर्माता मिलकर भविष्य के अनुरूप कुशल कार्यबल तैयार नहीं करते हैं, तो कौशल की कमी (स्किल गैप) इस क्षेत्र की तेज रफ्तार वृद्धि में बड़ी बाधा बन सकती है।एनएलबी सर्विसेज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सचिन अलुग ने कहा कि भारत में डेटा सेंटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार केवल एक बुनियादी ढांचा परियोजना नहीं, बल्कि देश के युवाओं के लिए राष्ट्र निर्माण का बड़ा अवसर है। उन्होंने कहा, “भारत जिस तेजी से डिजिटल परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ रहा है, उससे एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, क्लाउड ऑपरेशंस, ऑटोमेशन, पावर सिस्टम और क्रिटिकल फैसिलिटी मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञ पेशेवरों की नई पीढ़ी की मांग तेजी से बढ़ रही है।”उन्होंने कहा कि यह केवल नौकरियां भरने का मामला नहीं है, बल्कि आने वाले दशकों तक भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार देने वाले कुशल कार्यबल का निर्माण करना है। रिपोर्ट के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को तेजी से अपनाने के कारण एआई इंफ्रास्ट्रक्चर इंजीनियरिंग, क्लाउड ऑपरेशंस, प्लेटफॉर्म इंजीनियरिंग, डेवऑप्स, एमएलऑप्स और डेटा सेंटर ऑटोमेशन जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञों की मांग लगातार बढ़ रही है।अनुमान है कि आने वाले वर्षों में एआई-आधारित वर्कलोड भारत की कुल डेटा सेंटर क्षमता का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा बन जाएगा। ऐसे में डेटा सेंटर उद्योग में प्रवेश करने वाले इंजीनियरों के लिए एआई इंफ्रास्ट्रक्चर की समझ एक महत्वपूर्ण कौशल बनती जा रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में भी कई नई विशेषज्ञ भूमिकाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है। इनमें एआई इंफ्रास्ट्रक्चर ऑपरेशंस इंजीनियर, लिक्विड कूलिंग इंजीनियर, एनर्जी ऑप्टिमाइजेशन स्पेशलिस्ट, क्रिटिकल फैसिलिटीज इंजीनियर और पावर सिस्टम एक्सपर्ट जैसे पद प्रमुख हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अगली पीढ़ी के एआई-संचालित डेटा सेंटरों को उन्नत कूलिंग सिस्टम, बेहतर ऊर्जा प्रबंधन और अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होगी, जिसके कारण इन विशेषज्ञों की मांग आने वाले वर्षों में और तेजी से बढ़ने की संभावना है। -
नयी दिल्ली. खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी के कारण देश में खुदरा मुद्रास्फीति जून में बढ़कर 4.38 प्रतिशत हो गई, जबकि मई में यह 3.93 प्रतिशत थी। सोमवार को जारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गई। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित खाद्य मुद्रास्फीति जून में 5.32 प्रतिशत रही, जो मई के 4.78 प्रतिशत से अधिक है। इस तरह खाने-पीने की चीजों के दामों में बढ़ोतरी ने मुख्य मुद्रास्फीति पर दबाव डाला। सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को यह जिम्मेदारी दी हुई है कि वह खुदरा मुद्रास्फीति को दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ चार प्रतिशत के स्तर पर बनाए रखे।
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नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच फिर से शुरू हुए सैन्य संघर्ष के कारण वैश्विक तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है।दोनों देशों के बीच फिर से एक-दूसरे पर हमले के बाद तेल की कीमतों में 3 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। वहीं होर्मुज जलडमरूमध्य में फिर से रुकावट की आशंका बढ़ गई है।
मुख्य बिंदु:– सीएनबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, यूएस क्रूड फ्यूचर्स 3.4 प्रतिशत बढ़कर 73.87 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया।– ब्रेंट क्रूड में 3.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी, कीमत 78.67 डॉलर (न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार लगभग 79 डॉलर) प्रति बैरल पर पहुंच गई है।– युद्ध से पहले की तुलना में तेल की कीमतें लगभग 9 प्रतिशत अधिक हो गई हैं।संघर्ष की स्थिति:– यूएस सेंट्रल कमांड ने ईरान के खिलाफ नए हमले शुरू किए। हमलों का मुख्य लक्ष्य हॉर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की क्षमता को कम करना है।– अमेरिका ने पिछले 24 घंटों में तीसरी बार हमले किए। ईरानी मिसाइल, एयर-डिफेंस सिस्टम, रडार और हथियार डिपो को निशाना बनाया गया।– अमेरिकी विमानों ने एक ईरानी क्रूज मिसाइल और एक अटैक ड्रोन को मार गिराया।– ईरान ने दावा किया कि उसने जलडमरूमध्य को अगली सूचना तक बंद कर दिया है, जबकि अमेरिका ने इस दावे का खंडन करते हुए कहा कि जहाजों की आवाजाही सामान्य है।समुद्री यातायात पर असर:– युद्ध से पहले प्रतिदिन 130 से अधिक जहाज हॉर्मुज से गुजरते थे, जबकि गुरुवार को केवल 22 जहाज ही गुजरे।– नाविकों को अत्यधिक सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।अन्य नुकसान:– अमेरिका ने रात भर ईरान के लगभग 140 ठिकानों पर हमले किए।– ईरान की जवाबी कार्रवाई में कुवैत के तीन बॉर्डर पोस्ट और एक ऑयल प्लेटफॉर्म को नुकसान पहुंचा, एक कर्मचारी घायल।स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है और विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष बढ़ा तो तेल आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है। -
नयी दिल्ली. सार्वजनिक क्षेत्र की इस्पात कंपनी स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) और इंडोनेशिया की पीटी क्राकाटाउ स्टील प्रस्तावित संयुक्त उद्यम के तहत पांच लाख से 10 लाख टन क्षमता की स्टेनलेस स्टील परियोजना स्थापित करने की संभावना तलाश रही हैं। दोनों कंपनियों ने संयुक्त उद्यम की स्थापना के लिए सहमति ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। सूत्रों ने यह जानकारी दी है। सूत्र ने कहा कि सेल और इंडोनेशिया की कंपनी पांच लाख टन क्षमता की स्टेनलेस स्टील परियोजना स्थापित करने की संभावना तलाशेंगी। यह संयंत्र 10 लाख टन क्षमता का भी हो सकता है। हालांकि, इसपर चर्चा संयुक्त उद्यम बनने के बाद होगी। यह संयुक्त उद्यम स्टेनलेस स्टील स्लैब के विनिर्माण के लिए होगा।
यदि संयुक्त उद्यम का गठन हो जाता है तो स्लैब का उत्पादन इंडोनेशिया में होगा और इसकी आपूर्ति सेल के आंध्र प्रदेश के सलेम स्टील प्लांट को की जाएगी। सूत्रों ने बताया कि इंडोनेशिया में स्लैट का उत्पादन सस्ता बैठता है। इंडोनेशिया के पास दुनिया का सबसे बड़ा निकल भंडार है। सेल के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक अशोक कुमार पांडा ने कहा, ''बुनियादी ढांचा, परिवहन, नवीकरणीय ऊर्जा और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में स्टेनलेस स्टील की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में विश्वसनीय कच्चे माल की उपलब्धता और रणनीतिक साझेदारियां अधिक महत्वपूर्ण हो जाती हैं।'' इस्पात मंत्रालय के तहत सेल देश की सबसे बड़ी सार्वजनिक क्षेत्र की इस्पात कंपनी है। -
नयी दिल्ली. अनिश्चित मानसून इस खरीफ मौसम में घुलनशील उर्वरक (सॉल्युबल फर्टिलाइजर) उद्योग के लिए मांग बढ़ाने वाला कारक बन सकता है, लेकिन इन उर्वरकों की कीमतों में आई तेज वृद्धि मांग पर अधिक बड़ा असर डाल सकती है। उद्योग संगठन 'सॉल्युबल फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसएफएआई)' ने रविवार को यह बात कही। एसएफएआई के अध्यक्ष राजीब चक्रवर्ती ने कहा कि चीन द्वारा निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों और पश्चिम एशिया में तनाव के कारण आपूर्ति प्रभावित होने से पिछले एक वर्ष में प्रमुख कच्चे माल की कीमतों में 60 से 100 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा, "मौजूदा समय में कीमतें 60 से 100 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में मोनो अमोनियम फॉस्फेट (एमएपी) की कीमत लगभग 1,000 डॉलर प्रति टन थी, जो अब बढ़कर 1,500 से 1,600 डॉलर प्रति टन हो गई है। चक्रवर्ती ने कहा, "प्रति टन 600 डॉलर की वृद्धि बहुत बड़ी बढ़ोतरी है।"
इस मौसम में उद्योग के सामने सबसे बड़ी चुनौती के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि कीमतों में भारी वृद्धि के कारण खपत घटने की आशंका सबसे बड़ा जोखिम है। उन्होंने कहा, "जैसे ही कीमतें बहुत अधिक बढ़ जाती हैं, किसान इनका इस्तेमाल कम कर देते हैं। उन्होंने कहा कि कीमतों को नियंत्रित करना उद्योग के हाथ में नहीं है।
चक्रवर्ती ने कहा कि चीन द्वारा प्रमुख उत्पादों के निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंध और पश्चिम एशिया संकट के कारण भारत के लिए आयात प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि देश में जल में घुलनशील उर्वरकों का घरेलू उत्पादन बहुत कम है। ऐसे में आयात में कमी की भरपाई घरेलू स्तर पर करना संभव नहीं है। चक्रवर्ती ने कहा कि कीमतों में तेजी के बावजूद फिलहाल आपूर्ति की स्थिति चिंताजनक नहीं है, क्योंकि पिछले वर्ष का बचा हुआ भंडार उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि पिछले साल प्रमुख कृषि क्षेत्रों में अधिक बारिश और बाढ़ के कारण इन उर्वरकों की खपत कम रही थी। उन्होंने कहा, "फिलहाल मुझे कोई बड़ी समस्या नहीं दिख रही है।"
हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि यदि इस मौसम में मांग तेजी से बढ़ी तो आगे की आपूर्ति पर दबाव पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि भारत हर साल लगभग चार लाख टन जल में घुलनशील उर्वरकों का आयात करता है और यह मात्रा लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष में कुल आयात दो लाख से 2.5 लाख टन रहने का अनुमान है, जिसमें से जून तक लगभग एक लाख टन उर्वरक भारत पहुंच चुका है। इन उर्वरकों की अधिकांश खपत सितंबर से मार्च के बीच होती है। चक्रवर्ती ने कहा कि ऊंची कीमतों के कारण किसान कम कीमत वाले विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि कई किसान पहले ही सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) जैसे फॉस्फेट आधारित उर्वरकों का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं। हालांकि, इनमें फॉस्फोरस की मात्रा 20-22 प्रतिशत होती है, जबकि एमएपी में यह 61 प्रतिशत होती है, लेकिन इनकी कीमत काफी कम है। चक्रवर्ती ने कहा कि यदि किसान फिर से यूरिया और डीएपी जैसे पारंपरिक उर्वरकों का अधिक इस्तेमाल करने लगते हैं तो सरकार पर उर्वरक सब्सिडी का बोझ भी बढ़ेगा। चक्रवर्ती ने कहा कि यदि इस मौसम में वर्षा असमान रहती है तो जल में घुलनशील उर्वरकों की मांग बढ़ सकती है, क्योंकि इनके उपयोग में पारंपरिक उर्वरकों की तुलना में काफी कम पानी लगता है। उन्होंने कहा कि कपास जैसी फसलों में, जहां सामान्यतः एक मौसम में दो बार इन उर्वरकों का छिड़काव किया जाता है, शुष्क मौसम बने रहने पर इनका उपयोग बढ़ सकता है। उन्होंने कहा, "यदि बारिश नहीं होगी तो पौधों की पत्तियां पीली पड़ने लगेंगी। ऐसे में किसान इन उर्वरकों का अधिक इस्तेमाल करेंगे।" उन्होंने कहा कि कृषि संकट की परिस्थितियों में विशेष प्रकार के उर्वरकों का उपयोग सामान्यतः बढ़ जाता है। - नई दिल्ली। देश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को समय पर भुगतान दिलाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब सभी केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को एमएसएमई से खरीदी गई वस्तुओं और सेवाओं के बिलों का भुगतान टीआरईडीएस प्लेटफॉर्म के जरिए करना होगा।एमएसएमई मंत्रालय ने 30 जून 2026 को इस संबंध में अधिसूचना जारी की है। यह फैसला केंद्रीय बजट 2026-27 में की गई घोषणा के तहत लिया गया है।नई व्यवस्था के तहत सभी केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा मंजूर टीआरईडीएस प्लेटफॉर्म के माध्यम से एमएसएमई के बिलों का निपटारा करना होगा।इस कदम से छोटे कारोबारियों को लंबे समय तक भुगतान का इंतजार नहीं करना पड़ेगा और उन्हें बिना गारंटी के आसानी से कार्यशील पूंजी मिल सकेगी।सरकार के अनुसार, एमएसएमई भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। उद्यम पंजीकरण पोर्टल और उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म पर 8.70 करोड़ से अधिक उद्यम पंजीकृत हैं, जो 38 करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं।हालांकि, भुगतान में देरी लंबे समय से एमएसएमई क्षेत्र की बड़ी समस्या रही है। इससे कारोबारियों की पूंजी फंस जाती है और उनके विकास पर असर पड़ता है।नई व्यवस्था में एमएसएमई अपने मंजूर बिलों को तय समय से पहले ही नकदी में बदल सकेंगे। बैंक और वित्तीय संस्थान इन बिलों पर प्रतिस्पर्धी दरों पर वित्त उपलब्ध कराएंगे।टीआरईडीएस भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा नियंत्रित डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसकी शुरुआत 2017 में हुई थी। इसके जरिए एमएसएमई को कंपनियों, सरकारी विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों से मिलने वाले भुगतान के लिए वित्तीय सहायता मिलती है।वर्तमान में आरएक्सआईएल, एम1एक्सचेंज, इनवॉयसमार्ट, सी2टीआरईडीएस और डीटीएक्स जैसे पांच प्लेटफॉर्म काम कर रहे हैं।सरकार के मुताबिक, टीआरईडीएस के जरिए बिल छूट की राशि वित्त वर्ष 2021-22 में 40 हजार करोड़ रुपए से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 3.47 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। नई व्यवस्था से भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और एमएसएमई क्षेत्र को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।
- नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र की डिजिटल तकनीक से जुड़ी एजेंसी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) एजेंट्स पर भरोसा बढ़ाने और इनके सुरक्षित इस्तेमाल के लिए नई पहल की घोषणा की है। तेजी से विकसित हो रहे ऐसे AI सिस्टम को लेकर जवाबदेही और इंसानी नियंत्रण से जुड़ी चिंताएं बढ़ रही हैं।AI एजेंट्स कृत्रिम बुद्धिमत्ता की नई पीढ़ी के सिस्टम हैं, जो उपयोगकर्ताओं की ओर से स्वतंत्र रूप से कई तरह के काम कर सकते हैं। इनमें समय तय करने, खरीदारी करने और जटिल व्यावसायिक प्रक्रियाओं को संभालने जैसे कार्य शामिल हैं।अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (आईटीयू) के अनुसार, AI एजेंट्स उत्पादकता बढ़ाने में मदद कर सकते हैं, लेकिन इनके साथ कुछ जोखिम भी जुड़े हैं। इनमें किसी व्यक्ति की पहचान का गलत इस्तेमाल करने या बिना अनुमति के फैसले लेने जैसी चुनौतियां शामिल हो सकती हैं।इन जोखिमों को देखते हुए आईटीयू ने जिनेवा में आयोजित ‘AI फॉर गुड समिट’ में एक विशेष समूह बनाने की घोषणा की है।यह समूह ऐसे ढांचे तैयार करेगा, जिससे AI एजेंट्स की पहचान, विश्वसनीयता और उन पर इंसानी नियंत्रण सुनिश्चित किया जा सके।विशेष रूप से वित्तीय लेन-देन और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में AI के सुरक्षित इस्तेमाल पर ध्यान दिया जाएगा।समूह की सह-अध्यक्ष डेबोरा कंपेरिन ने कहा कि आने वाले समय में AI एजेंट्स हमारी ओर से बातचीत, लेन-देन और फैसले लेने में सक्षम होंगे। इसलिए इनके लिए साझा अंतरराष्ट्रीय नियम और भरोसेमंद व्यवस्था बनाना जरूरी है।इस समूह में तकनीकी, नीतिगत और कानूनी विशेषज्ञ शामिल होंगे। इसकी पहली बैठक नवंबर में पेरिस और दूसरी बैठक जनवरी में जिनेवा में होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भविष्य में AI तकनीक को सुरक्षित, जिम्मेदार और भरोसेमंद बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।
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नई दिल्ली। उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और घरेलू फुटवियर विनिर्माण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से फुटवियर से जुड़े दो गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों (क्यूसीओ) में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। नए प्रावधानों के तहत पुराने स्टॉक को बेचने की समय सीमा एक वर्ष बढ़ाकर 31 जुलाई 2027 कर दी गई है। साथ ही अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) के लिए हर साल 4,500 जोड़ी फुटवियर नमूनों के आयात की अनुमति भी दी गई है।
डीपीआईआईटी द्वारा 12 जून 2026 को अधिसूचित संशोधनों के अनुसार, चमड़े तथा रबर एवं पॉलिमर सामग्री से बने फुटवियर से संबंधित गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों में बदलाव किया गया है। इसके तहत पुराने स्टॉक के निपटान की समय सीमा 31 जुलाई 2026 से बढ़ाकर 31 जुलाई 2027 कर दी गई है। सरकार का कहना है कि फुटवियर एक मौसमी उत्पाद है और इसका स्टॉक अक्सर एक बिक्री चक्र से अधिक समय तक आपूर्ति श्रृंखला में बना रहता है। ऐसे में अतिरिक्त समय मिलने से निर्माताओं, वितरकों और खुदरा विक्रेताओं को मौजूदा स्टॉक का व्यवस्थित तरीके से निपटान करने में सुविधा होगी। इसके बाद बाजार में केवल बीआईएस प्रमाणित फुटवियर की बिक्री सुनिश्चित करने का लक्ष्य है।संशोधित नियमों के तहत चमड़े और फुटवियर निर्माता अनुसंधान एवं विकास तथा अन्य गैर-व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए प्रति वर्ष 4,500 जोड़ी फुटवियर आयात कर सकेंगे। हालांकि, इन नमूनों की व्यावसायिक बिक्री नहीं की जा सकेगी। प्रत्येक नमूने पर स्पष्ट रूप से “बिक्री के लिए नहीं” अंकित होना अनिवार्य होगा और उपयोग के बाद उनका निर्धारित तरीके से निपटान करना होगा। निर्माताओं को इन आयातों का वर्षवार रिकॉर्ड भी रखना होगा, जिसे आवश्यकता पड़ने पर सरकार को उपलब्ध कराना होगा। सरकार के अनुसार यह छूट उत्पाद डिज़ाइन के मूल्यांकन, तकनीकी परीक्षण, दस्तावेज़ आधारित आकलन और भारत में स्थानीय उत्पादन के लिए आवश्यक नमूनों के परीक्षण में मदद करेगी। आयातित नमूनों का उपयोग केवल विक्रेता प्रस्तुति, डिज़ाइन मूल्यांकन और भारत में प्रतिकृति विकसित करने के लिए किया जा सकेगा।डीपीआईआईटी ने कहा कि ये संशोधन ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने, अनुपालन प्रक्रिया को सरल बनाने, नवाचार को प्रोत्साहित करने और गुणवत्ता मानकों से समझौता किए बिना उद्योग संचालन को सुगम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। यह पहल प्रधानमंत्री के “जीरो डिफेक्ट, जीरो इफेक्ट” विनिर्माण दृष्टिकोण और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को मजबूत करेगी तथा भारत को गुणवत्तापूर्ण विनिर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने में मदद करेगी। -
नयी दिल्ली. प्रौद्योगिकी कंपनी मेटा ने अपने अब तक के सबसे उन्नत एआई इमेज जनरेटर 'म्यूज इमेज' को पेश करने की घोषणा की है लेकिन इस कदम को डेटा गोपनीयता, इमेज-स्क्रैपिंग और सहमति से जुड़े सवालों के बीच आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। इमेज-स्क्रैपिंग का मतलब ऑनलाइन मंचों से तस्वीरों को उपयोगकर्ता की स्पष्ट अनुमति के बगैर स्वचालित रूप से इकट्ठा करने से है। कंपनी ने कहा कि 'म्यूज इमेज' मेटा सुपरइंटेलिजेंस लैब्स द्वारा विकसित पहला मीडिया-जनरेशन मॉडल है, जो निर्देशों का सटीक पालन, मल्टी-रेफरेंस कम्पोजिशन और तस्वीर संपादन जैसी क्षमताएं प्रदान करता है। मेटा ने कहा कि 'म्यूज इमेज' में 'कंटेंट सील' नामक एक अदृश्य वॉटरमार्किंग सिस्टम जोड़ा गया है, जिससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि कोई तस्वीर एआई से बनाई गई है या नहीं। कंपनी ऐसे डिटेक्शन टूल का भी परीक्षण कर रही है, जो इस वॉटरमार्क की पहचान कर सके। यह सेवा फिलहाल मेटा एआई ऐप, मेटा.एआई और अमेरिका में इंस्टाग्राम स्टोरीज पर उपलब्ध है, जबकि कुछ देशों में सीमित तौर पर व्हाट्सऐप पर शुरू की गई है। इसे जल्द ही फेसबुक और अन्य मंचों पर भी उपलब्ध कराया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की प्रौद्योगिकी के व्यापक इस्तेमाल से ऑनलाइन सामग्री की विश्वसनीयता को लेकर चुनौतियां बढ़ सकती हैं और उपयोगकर्ता सार्वजनिक रूप से साझा की जाने वाली सामग्री के प्रति अधिक सतर्क हो सकते हैं। विशेषज्ञों ने इस मॉडल के उस फीचर पर चिंता जताई है, जिसमें उपयोगकर्ता किसी इंस्टाग्राम यूजरनेम को निर्देश (प्रॉम्प्ट) में डालकर सार्वजनिक प्रोफाइल में मौजूद तस्वीरों के आधार पर एआई जनित तस्वीर तैयार कर सकते हैं। काउंटरपॉइंट रिसर्च के वरिष्ठ विश्लेषक प्राचीर सिंह ने कहा कि यह बदलाव सार्वजनिक इंस्टाग्राम अकाउंट के मायने बदल देता है। अब इसका मतलब केवल दृश्यता नहीं, बल्कि किसी व्यक्ति की छवि का एआई सामग्री के लिए उपयोग भी हो सकता है, वह भी बिना स्पष्ट अनुमति के। साइबरमीडिया रिसर्च (सीएमआर) के उपाध्यक्ष (उद्योग शोध समूह) प्रभु राम ने कहा कि व्यवस्था से अलग होने का 'ऑप्ट-आउट' मॉडल आम तौर पर उपयोगकर्ताओं की निष्क्रियता का फायदा उठाता है, न कि सूचित सहमति को दर्शाता है।
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नयी दिल्ली. महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड जिंसों की बढ़ती लागत की भरपाई के लिए 10 जुलाई से अपने स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल (एसयूवी) और वाणिज्यिक वाहनों की कीमतों में औसतन क्रमश: 2.7 प्रतिशत और दो प्रतिशत की वृद्धि करेगी। कंपनी ने एक बयान में कहा, "कीमतों में यह वृद्धि मुख्य रूप से जिंस लागत में बढ़ोतरी के कारण की जा रही है।" कंपनी ने कहा कि कीमतों में वृद्धि की मात्रा अलग-अलग उत्पादों के आधार पर अलग-अलग होगी। महिंद्रा एंड महिंद्रा के एसयूवी पोर्टफोलियो में लोकप्रिय स्कॉर्पियो श्रृंखला, थार, एक्सयूवी 3एक्सओ और एक्सयूवी 7एक्सओ समेत अन्य मॉडल शामिल हैं। इन वाहनों की शोरूम कीमतें 7.54 लाख रुपये से लेकर 25.07 लाख रुपये तक हैं।


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