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हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष की थीम पर सजेगा प्रेस क्लब
रायपुर। वर्ष 2026 हिंदी पत्रकारिता के इतिहास में विशेष महत्व रखता है। इस वर्ष हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूरे कर रहे हैं। इस ऐतिहासिक अवसर को रायपुर प्रेस क्लब द्वारा पूरे वर्ष विभिन्न आयोजनों और गतिविधियों के माध्यम से उत्सव के रूप में मनाया जा रहा है। इसी कड़ी में इस वर्ष का गणेशोत्सव भी हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्षों की गौरवशाली यात्रा को समर्पित होगा।रायपुर प्रेस क्लब परिसर में भगवान श्रीगणेश की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी और पूरे परिसर को आकर्षक रूप से सजाया जाएगा। गणेश पंडाल की सजावट और प्रस्तुति में हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्षों की यात्रा को रचनात्मक ढंग से प्रदर्शित किया जाएगा। पत्रकारिता के आरंभिक दौर से लेकर प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और वर्तमान डिजिटल एवं न्यू मीडिया तक के सफर की झलक गणेश पंडाल में देखने को मिलेगी।गणेशोत्सव की तैयारियों को लेकर रायपुर प्रेस क्लब की कार्यकारिणी की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बैठक में निर्णय लिया गया कि गणेशोत्सव को भव्य और गरिमापूर्ण स्वरूप दिया जाएगा। उत्सव के दौरान प्रेस क्लब परिसर में प्रतिदिन भक्तिमय वातावरण में भगवान गणेश की आराधना की जाएगी।प्रेस क्लब के विभिन्न प्रकोष्ठों को अलग-अलग दिवस पर भगवान श्रीगणेश की सेवा, पूजा-अर्चना और आयोजन की जिम्मेदारी दी जाएगी। वहीं महिला पत्रकार साथियों की विशेष सहभागिता सुनिश्चित करते हुए एक विशेष दिन विशेष भोग एवं प्रसाद का आयोजन भी किया जाएगा।रायपुर प्रेस क्लब अध्यक्ष मोहन तिवारी ने कहा कि वर्ष 2026 हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूरे होने का ऐतिहासिक अवसर है। रायपुर प्रेस क्लब इस गौरवशाली यात्रा को पूरे वर्ष अलग-अलग आयोजनों के माध्यम से सेलिब्रेट कर रहा है। गणेशोत्सव भी इसी श्रृंखला का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि भगवान गणेश बुद्धि, विवेक और शुभारंभ के प्रतीक हैं और पत्रकारिता भी समाज को जागरूक करने, सत्य को सामने लाने तथा लोकतंत्र को मजबूत करने का माध्यम है। इसलिए इस वर्ष गणेशोत्सव को पत्रकारिता की गौरवशाली विरासत से जोड़ते हुए प्रेस क्लब परिसर को विशेष रूप से सजाया जाएगा।उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था का उत्सव नहीं होगा, बल्कि प्रेस क्लब परिवार की एकजुटता, धार्मिक परंपरा, और पत्रकारिता की विरासत और नई पीढ़ी को पत्रकारिता के 200 वर्षों के सफर से परिचित कराने का अवसर भी बनेगा।बैठक में प्रेस क्लब अध्यक्ष मोहन तिवारी, महासचिव गौरव शर्मा, उपाध्यक्ष दिलीप साहू, कोषाध्यक्ष दिनेश यदु, संयुक्त सचिव निवेदिता साहू एवं भूपेश जांगड़े सहित कार्यकारिणी सदस्य संदीप पुराणिक, अंशुमान शर्मा, जाकिर घुडसेना, चंदन साहू, संतोष साहू, नीरज मिश्रा और संजीव सिन्हा उपस्थित रहे। - -मछली पालन विभाग द्वारा लगातार निरीक्षण जारीबिलासपुर /मछली पालन विभाग द्वारा प्रदेश में प्रतिबंधित एक्सोटिक मांगूर (क्लेरियस गेरीपिनयस) एवं बिग हेड (हाइपोप्थेलमिक्थीस नोबीलीस) मछलियों के पालन, संवर्धन, आयात, निर्यात, विक्रय, परिवहन एवं विपणन की रोकथाम के लिए लगातार निरीक्षण किया जा रहा है। इसी क्रम में मछली पालन विभाग की टीम द्वारा शनिचरी बाजार क्षेत्र में निरीक्षण कर एक्सोटिक मांगूर की मत्स्य बीज जब्त कर कार्रवाई की गई। साथ ही मछली विक्रेताओं को प्रतिबंधित मछलियों की बिक्री नहीं करने की हिदायत दी।उप संचालक मछली पालन विभाग ने बताया कि एक्सोटिक मांगुर को सामान्यतः थाई मांगुर के नाम से भी जाना जाता है। यह एक आक्रामक मांसाहारी मछली है, जो भोजन के लिए देशी मछली प्रजातियों के साथ प्रतिस्पर्धा करती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और पर्यावरण अधिकारी के अनुसार थाई मांगुर के सेवन से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है। छत्तीसगढ़ मत्स्य क्षेत्र अधिनियम 1948 की धारा 5 के तहत प्रतिबंधित मछलियां पाए जाने पर 25 हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। साथ ही पाली गई प्रतिबंधित मछलियों के मत्स्य बीज एवं भंडारण को तत्काल नष्ट किए जाने का प्रावधान भी है।
- -शिविर में कुल 705 दिव्यागजनों का किया गया पंजीयनबालोद । कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा के निर्देशानुसार समाज कल्याण विभाग, स्वास्थ्य विभाग एवं शिक्षा विभाग जिला बालोद के संयुक्त तत्वाधान में बाल दिव्यांग प्रमाणीकरण अभियान 2026 अन्तर्गत ’हर पात्र बच्चे तक प्रमाण-पत्र और अधिकार’ कार्यक्रम अंतर्गत शिविर आयोजित किया जा रहा है। समाज कल्याण विभाग के उप संचालक श्री अजय गेडाम ने बताया कि इसके अंतर्गत गुण्डरदेही विकासखण्ड के दिव्यांगजन शामिल हुए। जिसमें कुल 705 दिव्यागजनों का पंजीयन किया गया है। उन्होंने बताया कि शिविर में 40 दिव्यांगजनों का नवीन दिव्यांग प्रमाण पत्र एवं 31 दिव्यांगजनों का दिव्यांग प्रमाण पत्र का नवीनीकरण कर शिविर में तत्काल प्रदाय किया गया। साथ ही शिविर में कुल 35 दिव्यागजनों का यूनिक आई.डी. कार्ड, 53 दिव्यांगजनों का उपकरण, 42 दिव्यांगजनों का छात्रवृत्ति, 85 दिव्यांगजनों का फिजियोथैरेपी, 115 दिव्यांगजनों का विशेष शिक्षा एवं 04 दिव्यांगजनों का कृत्रिम पैर हेतु पंजीयन कर माप लिया गया है। शिविर में 41 छात्र-छात्राओं का सिकलसेल जांच हेतु ब्लड सेम्पल लिया गया है। उन्होंने बताया कि 53 छात्र-छात्राओं को स्पेसिफिक लर्निंग दिव्यांगता से ग्रसित थे, जिनकी रिपोर्ट परीक्षण हेतु जिला अस्पताल बालोद एवं सी.आर सी. राजनादगांव भेजा जा रहा है। रिपोर्ट आने के पश्चात उन्हें दिव्यांगता प्रमाण पत्र प्रदाय किया जाएगा।शिविर में समाज कल्याण विभाग अंतर्गत संचालित घरौंदा आश्रय गृह में निवासरत् कुल 40 दिव्यांगजनों का विशेष शिक्षा से संबंधित जानकारी प्रदान किया गया है। उप संचालक श्री गेडाम ने बताया कि शिविर में कुल 705 दिव्यांग बच्चों के साथ उनके परिजन भी उपस्थित हुए थे, जिन्हंे विभाग द्वारा संचालित पेंशन, उपकरण एवं छात्रवृत्ति फार्म प्रदान किया गया है। शिविर में दिव्यांगजनों एवं उनके परिजनों को समाज कल्याण विभाग अंतर्गत संचालित समस्त योजनाओं, जिला निःशक्त पुनर्वास केन्द्र (डी.डी.आर.सी), घरौंदा आश्रय गृह एवं स्वावलंबन केन्द्र के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान किया गया। शिविर में उपस्थित सभी दिव्यांगजनों एवं उनके सहायकों के लिए स्वअल्पाहार एवं भोजन का व्यवस्था किया था तथा दिव्यांगजनों को उनके निवास स्थल से शिविर स्थल तक लाये जाने एवं कार्यक्रम के पश्चात उन्हे सकुशल गन्तव्य तक पहुंचाये जाने हेतु बस की व्यवस्था किया गया है। शिविर में समाज कल्याण विभाग, जिला निःशक्त पुनर्वास केन्द्र, समाज कल्याण विभाग जिला बालोद अन्तर्गत संचालित स्वैच्छिक संस्थाओं, शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग एवं जनपद पंचायत गुण्डरदेही के संबंधित कर्मचारी उपस्थित रहे।
- बालोद । कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा के निर्देशानुसार सेवा संकल्प अभियान के शुभारंभ अवसर पर जिले के सर्वेक्षित व चिन्हांकित दिव्यांग बच्चों के परीक्षण एवं दिव्यांग प्रमाण-पत्र जारी करने हेतु जिला मेडिकल बोर्ड द्वारा समाज कल्याण विभाग परिसर, झलमला में 17 सितंबर को एक दिवसीय शिविर का आयोजन किया जाएगा। गौरतलब है कि 07 से 12 सितंबर 2026 तक विशेष शिविर का आयोजन किया जा रहा है। समाज कल्याण विभाग के उप संचालक श्री अजय गेडाम ने बताया कि डौंडीलोहारा विकासखंड के दिव्यांग बच्चों के परीक्षण सह प्रमाण-पत्र जारी करने हेतु 12 सितंबर को प्रस्तावित शिविर की तिथि में आंशिक संशोधन किया गया है। उन्होंने बताया कि उक्त शिविर का आयोजन अब गुरूवार 17 सितंबर को किया जाएगा।
- बिलासपुर /जिला अस्पताल बिलासपुर में बच्चों एवं किशोरों में होने वाले टाइप-1 डायबिटीज के बेहतर प्रबंधन और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से साप्ताहिक टाइप-1 डायबिटीज क्लीनिक का शुभारंभ किया गया। क्लीनिक के माध्यम से टाइप-1 डायबिटीज से प्रभावित बच्चों को नियमित चिकित्सकीय परामर्श और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। क्लीनिक में बच्चों को बीमारी के बेहतर प्रबंधन के संबंध में मार्गदर्शन देने के साथ-साथ काउंसलिंग की सुविधा भी प्रदान की जाएगी। इसके अलावा जरूरतमंद बच्चों को निःशुल्क इंसुलिन उपलब्ध कराया जाएगा। बच्चों के साथ उनके अभिभावकों को भी मधुमेह के बेहतर प्रबंधन, नियमित फॉलोअप और आवश्यक सावधानियों के संबंध में जानकारी दी जाएगी।विलियम जे. क्लिंटन फाउंडेशन एवं जिला चिकित्सालय बिलासपुर के तकनीकी सहयोग से यह क्लीनिक प्रत्येक बुधवार नियमित रूप से संचालित किया जाएगा। इससे टाइप-1 डायबिटीज से प्रभावित बच्चों को अपने नजदीक ही निरंतर एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी। क्लीनिक के शुभारंभ अवसर पर सिविल सर्जन जिला अस्पताल, पेडियाट्रीशियन, प्रमुख चिकित्सक, अस्पताल सलाहकार, स्टाफ नर्स एवं काउंसलर सहित संबंधित स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे।
- -आंगनबाड़ियों में लड्डू योजना का भी आगाज़रायपुर / छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले क अबूझमाड़ के प्रवेश द्वार नारायणपुर में बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य, पोषण और नियमित शिक्षा की दिशा में एक नई और क्रांतिकारी शुरुआत हुई है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 के तहत जिले के प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में अध्ययनरत 13 हजार से अधिक विद्यार्थियों के लिए निःशुल्क पौष्टिक नाश्ता योजना का शुभारंभ किया गया। इसके साथ ही जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को कुपोषण से पूरी तरह मुक्त करने के उद्देश्य से पौष्टिक लड्डू वितरण कार्यक्रम की भी शुरुआत की गई। जिले के प्रभारी मंत्री श्री टंक राम वर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप ने इस दूरगामी पहल का आधिकारिक तौर पर शुभारंभ किया और स्वयं अपने हाथों से नन्हे-मुन्ने बच्चों को स्वादिष्ट एवं पौष्टिक नाश्ता परोसकर उनका उत्साहवर्धन किया।यह महत्वाकांक्षी पहल नारायणपुर और ओरछा (अबूझमाड़) विकासखंड के कुल 476 विद्यालयों में लागू की जा रही है, जिससे 13 हजार 15 स्कूली बच्चे सीधे लाभान्वित होंगे। योजना के तहत हर विद्यार्थी को प्रतिदिन 150 ग्राम ताजा और सेहतमंद नाश्ता दिया जाएगा। बच्चों के स्वाद और पोषण का विशेष ध्यान रखते हुए दिन के हिसाब से एक संतुलित मेन्यू तय किया गया है, जिसमें पोहा-फलीदाना, सूजी का उपमा, दलिया, चना, खड़ा मूंग और मूंगफली जैसे प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थ शामिल हैं। भोजन तैयार करने वाली व्यवस्था को मजबूती देने के लिए जिले के 676 रसोइयों को 800 रुपये प्रतिमाह का अतिरिक्त मानदेय भी दिया जा रहा है, जिससे उनका मनोबल बढ़ा है।यह कार्यक्रम न केवल नौनिहालों को कुपोषण के चक्र से बाहर निकालेगा, बल्कि दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों के विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने, ठहराव सुनिश्चित करने और उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़े रखने में मील का पत्थर साबित होगा। इस गरिमामय अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और स्थानीय जनप्रतिनिधियों सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, ग्रामीण और स्कूली बच्चे मौजूद रहे।
- -उच्च स्तरीय समिति द्वारा आयोजित द्विपक्षीय चर्चा में आमंत्रित किए गए सुझावरायपुर / समान नागरिक संहिता के क्रियान्वयन के पूर्व राज्य स्तर पर गठित उच्च स्तरीय समिति द्वारा विस्तृत चर्चा एवं सुझाव के लिए दो दिवसीय बैठक 10 सितंबर से आयोजित की गई, जिसमें भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी एवं समिति के सदस्य श्री एम. के. राउत की अध्यक्षता में पीपीटी के माध्यम से समान नागरिक संहिता के वर्तमान नियमों एवं कानूनों की जानकारी दी गई। इस अवसर पर समिति के सदस्य एवं वरिष्ठ अधिवक्ता श्री मोहन पवार उपस्थित थे।पुराना सर्किट हाउस के सभाकक्ष में छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर गठित राज्य स्तरीय समिति द्वारा आयोजित दो दिवसीय परामर्श बैठक सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इस दौरान समिति के सदस्यों ने विभिन्न सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और राज्य आयोगों के प्रमुखों के साथ विस्तारपूर्वक चर्चा की। दो दिनों तक चले इस गहन मंथन सत्र के दौरान मुख्य रूप से विवाह और तलाक, उत्तराधिकार और विरासत, भरण-पोषण तथा लिव-इन रिलेशनशिप जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषयों पर सभी पक्षों से खुलकर सुझाव लिए गए।इस दौरान गोंडी धर्म संस्कृति संरक्षण समिति के प्रांतीय सचिव श्री गजानंद नुरूटी ने आदिवासी समाज की रूढ़िगत परंपराओं और विशिष्ट सांस्कृतिक ताने-बाने की रक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आदिवासी समुदाय की मौलिक पहचान और अधिकारों को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें समान नागरिक संहिता के दायरे से पृथक रखने का औपचारिक अनुरोध किया। वहीं, दूसरी ओर राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष श्री अमरजीत सिंह छाबड़ा ने समाज में लैंगिक समानता की पुरजोर वकालत की। उन्होंने महिला एवं पुरुष को समान अधिकार देने, बेटे और बेटी को संपत्ति में बराबर का उत्तराधिकार सौंपने, विवाह एवं तलाक का अनिवार्य पंजीयन कराने तथा संपत्ति व वसीयत से जुड़े स्पष्ट कानूनी प्रावधान स्थापित करने की दिशा में ठोस प्रयास करने का सुझाव दिया। क्रिश्चन समाज के श्री राजेश जॉन पाल सहित समाज के आए प्रतिनिधियों ने अपने सुझाव में कहा कि विवाह को ईश्वर के द्वारा बनाई गई अटूट जोड़ी मानी जाती है, जिसे तोड़ा नहीं जा सकता। लिव-इन संबंध को समाज द्वारा स्वीकार नहीं किया जा सकता।इस महत्वपूर्ण बैठक में राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष श्रीमती वर्णिका शर्मा भी उपस्थित रहीं और उन्होंने बच्चों के अधिकारों एवं सामाजिक सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे। समिति के सदस्यों ने सभी प्रतिनिधियों द्वारा प्रस्तुत किए गए सुझावों को बेहद गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुना। उन्होंने आश्वस्त किया कि विभिन्न सामाजिक समूहों से प्राप्त इन सभी महत्वपूर्ण व्यावहारिक तथ्यों और सुझावों का गहराई से विश्लेषण किया जाएगा, ताकि एक समावेशी, संतुलित और निष्पक्ष मसौदा तैयार किया जा सके।बैठक में अधिवक्ता संघ के वरिष्ठ अधिवक्ता श्री बृजेश पांडेय, अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष श्री दिनेश देवांगन, अधिवक्ता परिषद के अध्यक्ष श्री प्रमोद तिवारी तथा वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्रीमती भारती राठौर ने समान नागरिक संहिता के प्रावधानों को अधिक कारगर, स्पष्ट व पारदर्शी बनाने पर जोर देते हुए अपने सुझाव प्रस्तुत किए। चर्चा बैठक के द्वितीय सत्र में कान्यकुब्ज ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष डॉ. सुरेश मिश्रा तथा श्री आशीष बाजपेयी ने समान नागरिक संहिता पर अपने विचार एवं अभिमत समिति के समक्ष दर्ज कराया। इसी प्रकार मेडिकल एसोसिएशन के प्रतिनिधि डॉ. कुलदीप सोलंकी, डॉ. सुरभि दुबे तथा डॉ. के.पी. आजमानी ने समान नागरिक संहिता के क्रियान्वयन के संबंध में अपनी राय दी तथा उच्च स्तरीय समिति के सदस्यों को सुझाव दिए।
- -केन्द्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के मुख्य आतिथ्य एवं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में संपन्न हुआ राज्य स्तरीय मुख्य कार्यक्रम-हर गांव में जगमगाए दीप, सजी रंगोली, परिवारों के चेहरों पर आई ’खुशियों की रोशनी’बालोद। प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण, मुख्यमंत्री आवास योजना ग्रामीण, पीएम जनमन एवं विशेष परियोजना अंतर्गत छत्तीसगढ़ राज्य में निर्मित नए आवासों का राज्य स्तरीय गृह प्रवेश समारोह आज 11 सितम्बर 2026 को सक्ती जिले में आयोजित किया गया। इस भव्य कार्यक्रम में भारत सरकार के केन्द्रीय ग्रामीण विकास, कृषि एवं कल्याण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने की। इस अवसर पर दोनों अतिथियों द्वारा प्रतीकात्मक रूप से 02 लाख से अधिक हितग्राहियों को उनके पक्के मकानों में ’खुशियों की चाबी’ सौंपकर गृह प्रवेश कराया गया।कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा के निर्देशन एवं सीईओ जिला पंचायत श्री सुनील कुमार चन्द्रवंशी के मार्गदर्शन में 11 सितम्बर को जिले के समस्त विकासखण्डों में सामूहिक रूप से अलग-अलग कार्यक्रमों का आयोजन कर ग्रामीण अंचलो में गृह प्रवेश का यह उत्सव पारंपरिक रीति-रिवाजों और लोक परंपराओं के साथ मनाया गया।इस विशेष अवसर पर बालोद जिले के 4000 से अधिक आवासों के लाभार्थियों के नए घरों को दीपों से रोशन कर उनके आंगनों को आकर्षक रंगोली से सजाकर जिले में एक उत्सव का माहौल तैयार किया गया। गृह प्रवेश के इस गरिमामय अवसर पर सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए जिले एवं सभी जनपद स्तर के जनप्रतिनिधियों को सादर आमंत्रित किया गया था। जिनकी गरिमामय उपस्थिति में हितग्राहियों ने अपने नवीन पक्के मकानों में विधिवत प्रवेश किया। साथ ही कार्यक्रम के दौरान सभी पात्र हितग्राहियों को जनप्रतिनिधियों के करकमलों से सम्मानपूर्वक ’आभार पत्र, ’खुशियों की चाबी’ एवं ’स्मृति चिन्ह’ भेंट किए गए।इसी प्रकार स्वयं के पक्का मकान हर गरीबों को मिले इसके लिए कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा के निर्देशन एवं सीईओ जिला पंचायत श्री सुनील कुमार चन्द्रवंशी के मार्गदर्शन में हितग्राहियों को पक्का आवास निर्माण करने में हर संभव मदद की जा रही है। साथ ही कार्यक्रम के माध्यम से उन लोगों को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जा रहा है, जिनका आवास निर्माणाधीन है जिससे वे जल्द से जल्द अपने आवास का निर्माण पूर्ण कर सकें। हितग्राहियों के द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत् पक्का मकान मिलने एवं गृह प्रवेश के लिए प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के प्रति सहृदय आभार व्यक्त किया गया।
- -केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सक्ती के जेठा में किया पौधरोपण-केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने लगाया कदम और मुख्यमंत्री श्री साय ने बादाम का पौधापर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने की प्रेरक पहल है ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियानरायपुर । पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनभागीदारी को बढ़ावा देने और प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी का संदेश देते हुए केंद्रीय ग्रामीण विकास, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज सक्ती जिले के ग्राम जेठा स्थित कॉलेज ग्राउंड में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के अंतर्गत पौधरोपण किया।केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कदम का पौधा और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने बादाम का पौधा रोपित किया। इस अवसर पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने भी पर्यावरण संरक्षण और हरियाली के विस्तार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान मातृ सम्मान की भावना को प्रकृति संरक्षण के संकल्प से जोड़ता है। अभियान के माध्यम से लोगों को अपनी माँ के सम्मान में पौधा लगाने के साथ ही उसके संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रेरित किया जा रहा है। पौधरोपण के साथ पौधों की देखभाल और उन्हें वृक्ष के रूप में विकसित करने की जिम्मेदारी का भाव भी इस अभियान का महत्वपूर्ण उद्देश्य है।यह अभियान पर्यावरण संरक्षण को केवल शासकीय प्रयास तक सीमित न रखते हुए उसे जनभागीदारी का व्यापक स्वरूप देने की पहल है। अधिक से अधिक नागरिकों की सहभागिता से हरियाली बढ़ाने, पर्यावरण संतुलन बनाए रखने और भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित एवं स्वच्छ पर्यावरण के निर्माण का संदेश अभियान के माध्यम से दिया जा रहा है।उल्लेखनीय है कि ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के माध्यम से देशभर में नागरिकों को पौधरोपण से जोड़ते हुए पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने का प्रयास किया जा रहा है। इसी कड़ी में सक्ती जिले में केंद्रीय मंत्री श्री चौहान और मुख्यमंत्री श्री साय द्वारा किया गया पौधरोपण प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश देता है। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, जिले के प्रभारी मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, जांजगीर-चांपा सांसद श्रीमती कमलेश जांगड़े, बिलासपुर संभागायुक्त श्री सुनील जैन, विकसित भारत जीरामजी के आयुक्त श्री तारण प्रकाश सिन्हा, कलेक्टर श्रीमती जयश्री जैन, पुलिस अधीक्षक श्री प्रफुल्ल ठाकुर, जिला पंचायत सीईओ श्री वासु जैन सहित जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित थे।
- -व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करने के दिए निर्देश-17 सितम्बर से 17 अक्टूबर तक होंगे विभिन्न आयोजनरायपुर। उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने आज दन्तेवाड़ा में ‘सेवा संकल्प अभियान’ की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले इस अभियान को जनभागीदारी के साथ व्यापक स्वरूप देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अभियान के अंतर्गत होने वाले कार्यक्रम केवल जिला मुख्यालय तक सीमित न रहें, बल्कि जनपद, तहसील, नगर पंचायत और ग्राम पंचायत स्तर तक प्रभावी रूप से आयोजित किए जाएं।उप मुख्यमंत्री श्री साव ने जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, शैक्षणिक संस्थाओं, स्वसहायता समूहों, युवाओं, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने विभागवार तैयारियों की जानकारी लेते हुए सभी कार्यक्रमों का समयबद्ध क्रियान्वयन और नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। अभियान के तहत ‘आशीर्वाद का दीया’, ‘सेवा की कहानी’, ‘नमो सेवा गाथा’, ‘आंगन का उत्सव’, ‘सेवा ज्योति कलश यात्रा’, ‘सेवा मेरा योगदान’ ‘जल जन सेवा संकल्प’ और ‘सेवा सेतु अभियान-सरकार आपके द्वार’ सहित विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। विद्यालयों में चित्रकला एवं भाषण प्रतियोगिताएं, आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषण जागरूकता कार्यक्रम तथा स्वच्छता एवं जनसेवा से जुड़ी गतिविधियां भी होंगी।कलेक्टर श्री देवेश ध्रुव ने जिले में अभियान की तैयारियों की जानकारी देते हुए बताया कि व्यापक जनभागीदारी के लिए विभिन्न स्तरों पर बैठकें आयोजित कर दिनवार एवं तिथिवार कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जा रही है। उप मुख्यमंत्री ने सभी विभागों के साथ नियमित समीक्षा कर तैयारियों की सतत निगरानी के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ‘सेवा संकल्प अभियान’ केवल शासकीय कार्यक्रमों की श्रृंखला न होकर सेवा, समर्पण और विकसित भारत-2047 के संकल्प को जनभागीदारी के माध्यम से मजबूत करने का अवसर बने। डीएफओ श्री रामाकृष्ण रंगानाथा वाय. और अपर कलेक्टर श्री राजेश पात्र सहित सभी विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी समीक्षा बैठक में मौजूद थे।
- -राजस्व और वन मंत्री ने किया निःशुल्क पीएससी-व्यापम आवासीय कोचिंग सेंटर का शुभारंभरायपुर । बस्तर अंचल के दूरस्थ क्षेत्रों में छुपी प्रतिभाओं को तराशने और उनके प्रशासनिक सेवाओं में जाने के सपनों को साकार करने के लिए नारायणपुर में एक बेहद सराहनीय पहल की शुरुआत हुई है। जिले के प्रभारी मंत्री श्री टंक राम वर्मा और वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जिला खनिज संस्थान न्यास (DMFT) निधि से संचालित निःशुल्क पीएससी एवं व्यापम आवासीय कोचिंग सेंटर का विधिवत शुभारंभ किया। जिला प्रशासन की इस पहल का मुख्य उद्देश्य जिले के आर्थिक रूप से कमजोर और संसाधनों के अभाव से जूझ रहे मेधावी युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए एक अनुकूल माहौल और गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन देना है। कोचिंग सेंटर के पहले बैच के लिए पारदर्शी चयन प्रक्रिया के जरिए 50 प्रतिभावान अभ्यर्थियों का चयन किया गया है, जिनमें 26 बालिकाएं और 24 बालक शामिल हैं।शुभारंभ समारोह के दौरान मंत्रियों और अतिथियों ने सभी चयनित विद्यार्थियों को बैग, कॉपी, मानक पुस्तकें, पेन और आवश्यक स्टडी किट भेंट कर उनका उत्साहवर्धन किया। इन अभ्यर्थियों को न केवल सर्वसुविधायुक्त निःशुल्क आवास और भोजन की सुविधा मिलेगी, बल्कि विषय विशेषज्ञों द्वारा नियमित कक्षाओं के माध्यम से राज्य लोक सेवा आयोग (PSC) और व्यापम जैसी कठिन परीक्षाओं की बारीकियां भी सिखाई जाएंगी।आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त को इस योजना की क्रियान्वयन एजेंसी नियुक्त किया गया है, जो सेंटर की व्यवस्थाओं और गुणवत्ता पर सीधी नजर रखेगी। इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष, छोटेडोंगर सरपंच, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, जिला शिक्षा अधिकारी और सहायक आयुक्त सहित अनेक जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ अधिकारी और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
- -अंतिम दिन हिंदी नाटक और लोकनाट्य की सशक्त प्रस्तुतियों ने बांधा समां-कलाकारों ने अभिनय के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक सरोकारों को दी जीवंत अभिव्यक्तिरायपुर ।संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित ‘रंग परब’ नाट्य श्रृंखला का अंतिम दिन हिंदी नाटक और छत्तीसगढ़ी लोकनाट्य की प्रभावशाली प्रस्तुतियों के नाम रहा। मुक्ताकाशी मंच पर आयोजित समापन दिवस में ‘टीस’ और ‘हण्डा’ नाटकों ने दर्शकों को भावनाओं, सामाजिक सरोकारों और लोक संस्कृति के विविध रंगों से जोड़ा। दोनों प्रस्तुतियों में कलाकारों ने अपने सशक्त अभिनय, संवाद और मंचीय अभिव्यक्ति के माध्यम से रंगमंच की विविधता और उसकी सामाजिक भूमिका को प्रभावी ढंग से सामने रखा।अंतिम दिन की पहली प्रस्तुति हिंदी नाटक ‘टीस’ की रही। आचार्य रंजन मोडक, लोकेश साहू एवं साथियों द्वारा प्रस्तुत इस नाटक ने मानवीय संवेदनाओं और जीवन के विभिन्न पहलुओं को मंच पर प्रभावशाली ढंग से उकेरा। कलाकारों ने अपने अभिनय और संवादों के माध्यम से पात्रों की भावनात्मक स्थितियों को जीवंत किया। प्रस्तुति में मानवीय भावनाओं के साथ सामाजिक परिस्थितियों और जीवन से जुड़े संवेदनशील पक्षों को इस तरह सामने रखा गया कि दर्शक नाटक से भावनात्मक रूप से जुड़ते चले गए।‘टीस’ की प्रस्तुति की विशेषता कलाकारों की सहज और प्रभावशाली अभिनय शैली रही। मंच पर पात्रों की भावनाओं, संवादों और घटनाक्रम के बीच बेहतर तालमेल ने नाटक को प्रभावशाली बनाया। प्रस्तुति ने यह रेखांकित किया कि रंगमंच केवल कहानी कहने का माध्यम नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं को दर्शकों तक सीधे पहुंचाने वाली सशक्त कला विधा भी है।‘हण्डा’ ने बिखेरे लोक संस्कृति के रंग‘टीस’ के बाद लोकनाट्य ‘हण्डा’ की प्रस्तुति ने पूरे माहौल को छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और ग्रामीण जीवन के रंगों से सराबोर कर दिया। श्री चंद्रशेखर चकोर, दल प्रमुख एवं निर्देशक, गुड़ी चऊंरा के दल द्वारा प्रस्तुत इस लोकनाट्य में लोक जीवन, परंपरा और ग्रामीण परिवेश की जीवंत झलक देखने को मिली। कलाकारों ने लोकभाषा, अभिनय और पारंपरिक रंगमंचीय शैली के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा को मंच पर जीवंत किया।लोकनाट्य की प्रस्तुति के दौरान कलाकारों की ऊर्जा और पारंपरिक शैली ने दर्शकों को विशेष रूप से आकर्षित किया। ‘हण्डा’ के माध्यम से लोक जीवन से जुड़े प्रसंगों और सांस्कृतिक परंपराओं को सहज एवं प्रभावी अंदाज में प्रस्तुत किया गया। इससे दर्शकों को मनोरंजन के साथ अपनी मिट्टी, बोली और लोक परंपराओं से जुड़ने का अवसर भी मिला।रंगमंच समाज की वास्तविक तस्वीर सामने रखने वाली सशक्त विधा : डॉ. संजय कनौजेइस अवसर पर संस्कृति एवं पुरातत्व संचालक डॉ. संजय कनौजे ने कहा कि नाटक केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की वास्तविक तस्वीर सामने रखने वाली सशक्त विधा है। रंगमंच के माध्यम से कलाकार जीवन के विभिन्न पहलुओं, संवेदनाओं, संघर्षों और सामाजिक सरोकारों को प्रभावी ढंग से दर्शकों तक पहुंचाते हैं। उन्होंने कहा कि नाटक दर्शकों को केवल किसी कथा या पात्र से जोड़ता ही नहीं, बल्कि उन्हें सोचने, समझने और सकारात्मक बदलाव की दिशा में प्रेरित भी करता है।डॉ. कनौजे ने कहा कि रंगमंच हमारी संस्कृति, परंपराओं और मानवीय मूल्यों को जीवंत बनाए रखने तथा उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से विभिन्न रंग शैलियों और लोक परंपराओं को मंच मिलता है तथा कलाकारों को अपनी कला और सृजनात्मकता को व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाने का अवसर मिलता है।एक मंच पर दिखे रंगमंच और लोक परंपरा के विविध रंगरंग परब नाट्य श्रृंखला के अंतिम दिन की दोनों प्रस्तुतियों ने आयोजन को सार्थक समापन दिया। एक ओर ‘टीस’ ने हिंदी रंगमंच के माध्यम से मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक सरोकारों को प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त किया, वहीं दूसरी ओर ‘हण्डा’ ने छत्तीसगढ़ की लोकनाट्य परंपरा, लोकभाषा और ग्रामीण जीवन के रंगों को दर्शकों के सामने जीवंत कर दिया।इस तरह अंतिम दिन का मंचन आधुनिक रंगमंचीय अभिव्यक्ति और पारंपरिक लोकनाट्य के सुंदर संगम का साक्षी बना। प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मनोरंजन के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक चिंतन का अवसर दिया तथा ‘रंग परब’ की पूरी नाट्य श्रृंखला के उद्देश्य को प्रभावी रूप से सामने रखा।कार्यक्रम में साहित्यकार एवं नाटककार श्री विजय मिश्रा, वरिष्ठ पत्रकार एवं छायाकार श्री दीपेंद्र दीवान, सामाजिक कार्यकर्ता श्री उदयभान चौहान, संस्कृति विभाग के भानु मरकाम एवं अजय चंद्राकर सहित अन्य गणमान्यजन विशेष रूप से उपस्थित रहे।
- -डीरिगुलेशन और अनुपालन बोझ कम करने के केंद्र के सुधारों के अनुरूप छत्तीसगढ़ की नई पहल-Negative List आधारित व्यवस्था से भूमि उपयोग होगा अधिक लचीला और व्यावहारिक, निवेश एवं विकास गतिविधियों को मिलेगी सहजतारायपुर छत्तीसगढ़ में विकास गतिविधियों को गति देने और भूमि उपयोग से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक सरल, स्पष्ट एवं व्यावहारिक बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। आवास एवं पर्यावरण विभाग ने छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया है। प्रस्तावित संशोधन में विभिन्न भूमि उपयोग श्रेणियों के लिए Negative List आधारित व्यवस्था अपनाने का प्रावधान किया गया है। यह पहल केंद्र सरकार के डीरिगुलेशन और अनुपालन बोझ कम करने के व्यापक सुधारों के अनुरूप है।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार का निरंतर प्रयास है कि नागरिकों, उद्यमियों और निवेशकों के लिए नियमों और प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाए तथा विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हो। भूमि उपयोग नियमों में प्रस्तावित संशोधन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे बदलती जरूरतों के अनुरूप विकास गतिविधियों को आगे बढ़ाने में सुविधा होगी तथा प्रदेश में निवेश, रोजगार और अधोसंरचना विकास को गति मिलेगी।आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओपी चौधरी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य नियमन को समाप्त करना नहीं, बल्कि उसे अधिक स्पष्ट, सरल, लचीला और परिणामोन्मुख बनाना है। Negative List आधारित व्यवस्था के माध्यम से प्रतिबंधित गतिविधियों को स्पष्ट रूप से निर्धारित किया जाएगा, जबकि अन्य गतिविधियों के लिए अनावश्यक नियामकीय बाधाएं कम होंगी। इससे बदलती आर्थिक एवं सामाजिक जरूरतों के अनुरूप भूमि उपयोग व्यवस्था अधिक व्यावहारिक बनेगी।मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत विजन@2047 के अनुरूप और भारत सरकार के डीरिगुलेशन एवं ईज ऑफ लिविंग से जुड़े सुधारों की दिशा में छत्तीसगढ़ लगातार नीतिगत सुधार कर रहा है। आवास एवं पर्यावरण विभाग द्वारा पिछले दो वर्षों में ग्रामीण और शहरी विकास को गति देने के लिए अनेक सुधार किए गए हैं। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियमों में प्रस्तावित यह बदलाव प्रदेश के आवासीय, वाणिज्यिक एवं औद्योगिक विकास को नई गति देगा।उन्होंने कहा कि इस सुधार से मास्टर प्लान में निर्धारित विभिन्न भूमि उपयोगों को अधिक लचीला, व्यावहारिक और समयानुकूल बनाया जा सकेगा। इसका लाभ आम नागरिकों को भी मिलेगा और भूमि उपयोग से संबंधित प्रक्रियाओं में आने वाली कठिनाइयों को कम करने का मार्ग प्रशस्त होगा। नई व्यवस्था का उद्देश्य विकास की संभावनाओं को बढ़ाने के साथ-साथ नियोजित विकास और आवश्यक प्रतिबंधों के बीच संतुलन स्थापित करना है।प्रस्तावित संशोधन के अनुसार विभिन्न भूमि उपयोग श्रेणियों में केवल निर्धारित निषिद्ध गतिविधियों को प्रतिबंधित किया जाएगा। संबंधित भूमि उपयोग श्रेणी की Negative List में शामिल नहीं होने वाली गतिविधियों को अनुमत माना जाएगा। इससे वर्तमान के साथ-साथ भविष्य में विकसित होने वाली नई गतिविधियों के लिए भी अधिक व्यापक अवसर उपलब्ध होंगे।प्रस्ताव में आवासीय, वाणिज्यिक, औद्योगिक, सार्वजनिक एवं अर्द्ध-सार्वजनिक, परिवहन, आमोद-प्रमोद तथा कृषि भूमि उपयोग के लिए अलग-अलग निषिद्ध गतिविधियों की सूची निर्धारित की गई है। इससे प्रत्येक क्षेत्र की प्रकृति, पर्यावरणीय संवेदनशीलता और विकास की जरूरतों के अनुरूप स्पष्ट नियामकीय व्यवस्था विकसित होगी।आवासीय भूमि उपयोग के अंतर्गत प्रदूषणकारी उद्योगों, बड़े भंडारण, कबाड़खानों, संक्रामक रोग अस्पताल, कारागार, बड़े परिवहन टर्मिनल, थोक व्यापार, तेल डिपो, पेट्रोलियम एवं ज्वलनशील पदार्थों के भंडारण, गैस गोदाम, पशुपालन एवं मछली पालन, डेयरी एवं कुक्कुट पालन, दाह संस्कार/कब्रिस्तान तथा खनन जैसी गतिविधियों को निषिद्ध रखने का प्रस्ताव है। इससे आवासीय क्षेत्रों की सुरक्षा, पर्यावरणीय गुणवत्ता और बेहतर जीवन-परिस्थितियों को बनाए रखने में मदद मिलेगी।वाणिज्यिक भूमि उपयोग में नारंगी, लाल एवं नीली श्रेणी के उद्योगों, खतरनाक एवं विषाक्त रसायनों तथा विस्फोटक पदार्थों के भंडारण सहित पशुपालन, मछली पालन, डेयरी एवं कुक्कुट पालन, दाह संस्कार/कब्रिस्तान तथा खनन गतिविधियों को निषिद्ध करने का प्रावधान किया गया है।वहीं औद्योगिक भूमि उपयोग में पूर्णतः आवासीय टाउनशिप, अनुमत कर्मचारी आवास को छोड़कर छात्रावास एवं शयनागार, विद्यालय, संक्रामक रोग अस्पताल, कारागार, बड़े परिवहन टर्मिनल, थोक व्यापार, तेल डिपो, पेट्रोलियम एवं ज्वलनशील पदार्थों का भंडारण, गैस गोदाम तथा पर्यावरण के प्रति संवेदनशील और असंगत गतिविधियों को प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव है।कृषि भूमि उपयोग में आवासीय अभिन्यास, किफायती जन आवास एवं एकीकृत उपनगर को छोड़कर बड़े वाणिज्यिक परिसर, खतरनाक वाणिज्यिक उपयोग, विभिन्न श्रेणी के उद्योग, उच्च घनत्व वाली आवासीय योजनाएं तथा बड़े मॉल जैसी गतिविधियों को निषिद्ध रखने का प्रस्ताव है।इसी प्रकार सार्वजनिक एवं अर्द्ध-सार्वजनिक, परिवहन तथा आमोद-प्रमोद भूमि उपयोग के लिए भी असंगत, प्रदूषणकारी, खतरनाक एवं अत्यधिक भारी गतिविधियों को स्पष्ट रूप से निषिद्ध किया गया है। इससे निर्धारित भूमि उपयोग और संबंधित क्षेत्र की विकास आवश्यकताओं के बीच बेहतर संतुलन स्थापित किया जा सकेगा।तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था के साथ नई सेवाओं, संस्थाओं, व्यवसायों और तकनीकी गतिविधियों के स्वरूप भी लगातार विकसित हो रहे हैं। ऐसे में पहले से तय गतिविधियों की लंबी सूची के बजाय स्पष्ट रूप से निर्धारित निषिद्ध गतिविधियों के आधार पर नियमन करने से नई और उभरती गतिविधियों के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे।प्रस्तावित व्यवस्था से अनावश्यक अनुपालन बोझ कम होने के साथ विकास परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है। साथ ही निवेशकों के लिए अधिक स्पष्ट और पूर्वानुमानित नियामकीय वातावरण तैयार होगा। इससे प्रदेश के शहरों और कस्बों में नियोजित विकास को बढ़ावा देने के साथ आवास, व्यापार, सेवाओं और अधोसंरचना से जुड़ी बदलती जरूरतों को पूरा करने में भी सुविधा होगी।प्रस्तावित संशोधन पर नागरिकों एवं संबंधित पक्षों से आपत्ति और सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से 15 दिवस की अवधि में प्राप्त आपत्तियों एवं सुझावों पर शासन द्वारा विचार किया जाएगा। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत नियमों में प्रस्तावित संशोधन को अंतिम रूप दिया जाएगा।भूमि उपयोग नियमों में प्रस्तावित यह बदलाव छत्तीसगढ़ में सरल नियमन, कम अनुपालन बोझ, स्पष्ट नियोजन और विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण सुधार है। इससे प्रदेश की बदलती विकास आवश्यकताओं के अनुरूप नियोजन व्यवस्था को अधिक लचीला और भविष्य के लिए तैयार बनाने में मदद मिलेगी।
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*समय-सीमा की फॉलोअप बैठक में दिए निर्देश, लोक सेवा गारंटी के प्रकरण समय पर निराकृत करने पर जोर*
रायपुर/ कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित होने वाले दीपोत्सव की तैयारियां समय रहते पूरी करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय से तैयारियां सुनिश्चित करें।कलेक्टर ने आज रेडक्रॉस सभाकक्ष में समय-सीमा की फॉलोअप बैठक लेकर जिले में संचालित योजनाओं एवं विभिन्न शासकीय कार्यों की प्रगति की समीक्षा की और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।बैठक में कलेक्टर ने पीएमएवाई के प्रकरणों को शीघ्र पूर्ण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि लाभार्थियों को बुलाकर योजना से संबंधित आवश्यक जानकारी दी जाए और प्रकरणों के निराकरण में किसी प्रकार की लापरवाही न हो। उन्होंने अभनपुर एसडीएम द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए अन्य एसडीएम को भी इसी तरह प्रभावी ढंग से कार्य करने के निर्देश दिए।कलेक्टर ने सभी एसडीएम को आरआरसी वसूली की कार्रवाई में तेजी लाने तथा निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप प्रगति सुनिश्चित करने को कहा। पीएम किसान सम्मान निधि से संबंधित कोई भी प्रकरण लंबित नहीं रहना चाहिए।डॉ. सिंह ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, राशन कार्ड सहित लोक सेवा गारंटी से जुड़े सभी आवेदनों का निर्धारित समय-सीमा में निराकरण करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रकरण समय-सीमा से बाहर जाने पर लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्कूलों में शिविर लगाकर विद्यार्थियों के जाति, निवास एवं अन्य आवश्यक प्रमाण पत्र बनाने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि किसी आवेदन को निरस्त करने की स्थिति में आवेदक को निरस्तीकरण का स्पष्ट कारण अनिवार्य रूप से बताया जाए। सीमांकन से संबंधित आवेदनों का प्राथमिकता के आधार पर निराकरण करने के निर्देश भी दिए।कलेक्टर ने तिलापिया मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए क्लस्टर विकसित करने हेतु कार्ययोजना तैयार करने को कहा। उन्होंने कहा कि योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जाए तो तिलापिया मछली उत्पादन के क्षेत्र में रायपुर जिला देश में विशिष्ट स्थान हासिल कर सकता है।उन्होंने सभी जोन में साफ-सफाई व्यवस्था बेहतर करने तथा खराब स्ट्रीट लाइटों को दुरुस्त कराने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने कहा कि नागरिक सुविधाओं से जुड़े कार्यों में तेजी लाते हुए मैदानी स्तर पर नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए।बैठक में जिला पंचायत सीईओ श्री कुमार बिश्वरंजन, अपर कलेक्टर श्री कीर्तिमान सिंह राठौर सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। -
दुर्ग/ ग्राम जंजगिरी निवासी 52 वर्षीय श्रीमती उमा बाई साहू के पति स्वर्गीय श्री जितेन्द्र कुमार साहू के आकस्मिक निधन के बाद परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया था। पति के निधन से परिवार की जिम्मेदारियां अचानक उमा बाई के कंधों पर आ गईं। घर की कमजोर आर्थिक स्थिति के बीच तीन बेटियों की पढ़ाई और भविष्य की चिंता भी उनके सामने थी।
ऐसे कठिन समय में छत्तीसगढ़ शासन की मुंख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु सहायता योजना उनके परिवार के लिए आर्थिक संबल बनकर सामने आई। स्वर्गीय श्री जितेन्द्र कुमार साहू के नाम से असंगठित श्रमकार्ड खेतिहर मजदूर के रूप में पंजीयन दर्ज था। उमा बाई ने इस श्रमकार्ड के माध्यम से मुख्यमंत्री मृत्यु सहायता योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन किया। आवेदन के बाद श्रम विभाग द्वारा उन्हें एक लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई। आर्थिक सहायता मिलने से उमा बाई को परिवार की जरूरतों को पूरा करने और बेटियों की पढ़ाई एवं भविष्य से जुड़ी जिम्मेदारियों को संभालने में काफी राहत मिली।श्रीमती उमा बाई साहू ने सहायता राशि मिलने पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा पति के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी मेरे ऊपर आ गई थी। आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी और बेटियों की पढ़ाई एवं भविष्य की चिंता थी। शासन से मिली एक लाख रुपये की सहायता से मुझे बहुत सहारा मिला। मुख्यमंत्री का धन्यवाद करते हुए श्रीमती उमा बाई कहती है कि शासन की ऐसी जनकल्याणकारी योजनाएं जरूरतमंद श्रमिक परिवारों को संकट की घड़ी में आर्थिक सुरक्षा और संबल प्रदान कर रही हैं। -
0- प्रज्ञा के मूक- बधिर स्कूल के बच्चे भी बने प्रतिभागी, करीब 50 बच्चों ने निभाई सहभागिता
0- बैल सजाओ स्पर्धा में तीन आयु वर्गों में स्वनय, संतृप्ति और अनवी रहे विजेतारायपुर। छत्तीसगढ़ी में ‘पोरा तिहार’ कहो या मराठी में ‘तान्हा पोळा’ दोनों एक ही उत्सव है। महाराष्ट्र मंडल में आयोजित ‘तान्हा पोळा’ उत्सव में महाराष्ट्रीयन परिवारों के साथ अन्य समाजों के लोगों ने भी सहभागिता निभाई और उत्सव का आनंद दोगुना कर दिया। इस उत्सव में प्रज्ञा विद्यालय के मूक बधिर बच्चों ने सहभागिता निभाकर कई गुना उत्साह बढ़ा दिया। हर आयु वर्ग के बच्चों की बैल जोड़ी में गजब की क्रिएटिविटी नजर आई। उत्सव में आकर्षक बैल, रंगोली और बच्चों की क्रिएटिविटी से आयोजन स्थल पर ग्रामीण माहौल बन गया। कुछ बच्चे अपने घरों से 50- 60 साल पुराने लकड़ी के खूबसूरत बैल लाकर आकर्षण का केंद्र बने रहे।अपनी सांस्कृतिक धरोहर को संजोकर चल रही महाराष्ट्र मंडल की संस्कृति समिति ने तान्हा पोळा उत्सव का ऐसा आयोजन किया, जो ऐतिहासिक बन गया। क्योंकि पिछले साल तक चार- पांच- सात प्रविष्टियों वाले तान्हा पोळा में इस बार करीब 50 बच्चों ने अपने खूबसूरत सजे- धजे बैलों के साथ भाग लिया। संस्कृति समिति के समन्वयक प्रेम उपवंशी, सचिव चेतन दंडवते, महिला प्रमुख विशाखा तोपखानेवाले, उपाध्यक्ष गीता दलाल, स्पर्धा की निर्णायक चारूशीला देव और धनश्री पेंडसे ने दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंडल अध्यक्ष अजय काले ने सभी प्रतिभागियों के साथ उनके अभिभावकों को भी बधाई देते हुए आभार जताया। काले ने कहा कि महाराष्ट्र मंडल संस्कृति को सहेजने और अगली पीढ़ी तक उसे प्रतिष्ठित करने के अभियान में गत कई दशकों से लगा हुआ है। उसी कड़ी में अभिभावकों के साथ उनकी बच्चों ने तान्हा पोळा में जो सहभागिता निभाई वह भविष्य को लेकर संभावनाएं जगातीं हैं। बच्चों के उत्साह को देखते हुए आश्चर्य नहीं कि जल्दी ही यह आयोजन महाराष्ट्र मंडल को मैदान में करना पड़े। सचिव चेतन दंडवते ने कहा कि इस वर्ष लोगों की सहभागिता काफी अच्छी है।*स्पर्धा के विजेता:-*बैल सजाओ स्पर्धा को तीन अलग-अलग आयु वर्ग में आयोजित किया गया। प्रथम वर्ग चार वर्ष से छोटे बच्चों का था, जिसमें स्वनय देशमुख विजेता और आर्विका बनोदे उप विजेता रहीं। चार से नौ वर्ष आयु वर्ग में संतृप्ति केसकर प्रथम, आश्रणी बोबडे द्वितीय और सर्वज्ञ और अभिग्या शुक्ला संयुक्त से तृतीय रहे। नौ से 15 वर्ष के आयु वर्ग में अनवी राउत अव्वल, अद्विता बल्कि दूसरे और आरोही भुजाड़े तीसरे स्थान पर रहीं। -
नेत्र दान, महादान
# सरस्वती शिशु मंदिर में व्याख्यान.
रायपुर।वरिष्ठ नेत्र विशेषज्ञ डॉ दिनेश मिश्र ने राष्ट्रीय नेत्र दान पखवाड़ा के अवसर पर सरस्वती शिशु मंदिर मठपुरैना में आयोजित व्याख्यान में कहा,हमारी आंखें प्रकृति का अनमोल उपहार हैं। इनके माध्यम से हम अपने आसपास की दुनिया को देखते, सीखते और जीवन का आनंद लेते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दृष्टि हानि के अधिकांश कारणों की समय पर जांच, उचित उपचार तथा जागरूकता से रोकथाम की जा सकती है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को आंखों की देखभाल और नियमित नेत्र परीक्षण के महत्व को समझना चाहिए।एक व्यक्ति के नेत्रदान से दो व्यक्तियों को दृष्टि मिल सकती हैडॉ दिनेश मिश्र ने दृष्टि हीनता के कारणों पर चर्चा करते हुए कहा कुछ बच्चों में जन्म से ही आंखों की विकृतियां (जन्मजात दोष) पाई जाती हैं। यदि जन्म के बाद समय पर नेत्र परीक्षण कराया जाए तो इनमें से कई समस्याओं का सफल उपचार संभव है। विटामिन ए की कमी बच्चों में रतौंधी तथा कॉर्निया को गंभीर क्षति पहुंचा सकती है। हरी पत्तेदार सब्जियां, गाजर, पपीता, आम, दूध और अंडे जैसे पौष्टिक आहार इसके अच्छे स्रोत हैं। बैक्टीरियल, वायरल तथा फंगल संक्रमण भी आंखों में लालिमा, दर्द, पानी आना और दृष्टि कम होने का कारण बन सकते हैं। संक्रमण होने पर स्वयं दवा लेने के बजाय नेत्र विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।डॉ मिश्र ने कहा दृष्टि दोष (निकट दृष्टि, दूर दृष्टि और एस्टिग्मैटिज्म) आज बच्चों और युवाओं में तेजी से बढ़ रहे हैं। नियमित नेत्र परीक्षण कराकर सही नंबर का चश्मा पहनना आवश्यक है। मोतियाबिंद बढ़ती उम्र में अंधत्व का सबसे सामान्य कारण है, लेकिन आधुनिक शल्य चिकित्सा द्वारा इसका सफल उपचार संभव है। कांचबिंदु (ग्लूकोमा) एक गंभीर रोग है जो बिना किसी प्रारंभिक लक्षण के धीरे-धीरे आंख की रोशनी नष्ट कर देता है। इसलिए 40 वर्ष की आयु के बाद नियमित नेत्र जांच अत्यंत आवश्यक है।डॉ मिश्र ने बताया डायबिटीज और उच्च रक्तचाप का प्रभाव आंख के पर्दे (रेटिना) पर पड़ता है। समय पर जांच और उपचार न मिलने पर स्थायी दृष्टि हानि हो सकती है। पर्दा उखड़ना (रेटिनल डिटैचमेंट) एक आपातकालीन स्थिति है, जिसमें अचानक चमक दिखाई देना, काले धब्बे उड़ते हुए दिखना या दृष्टि पर पर्दा गिरने जैसा अनुभव हो सकता है।डॉ मिश्र ने कहा आंखों की चोटें बच्चों में खिलौनों, पेंसिल, तीर-कमान तथा अन्य नुकीली वस्तुओं से हो सकती हैं। वयस्कों में सड़क दुर्घटनाओं, फैक्ट्री में काम करते समय, वेल्डिंग, एसिड, चूना और अन्य रसायनों के कारण आंखों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। दीपावली के दौरान पटाखे, बम और रॉकेट तथा होली में गुलाल और रंगों से आंखों की सुरक्षा के लिए सुरक्षात्मक चश्मे का उपयोग करना चाहिए। रसायन आंख में चले जाने पर तुरंत साफ पानी से आंख धोकर अस्पताल पहुंचना चाहिए।डॉ मिश्र ने वर्तमान में इलेक्ट्रॉनिक गैजेट के बेतहाशा उपयोग पर कहा आज मोबाइल, कंप्यूटर और अन्य डिजिटल स्क्रीन का अत्यधिक उपयोग एक नई चुनौती बन गया है। लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों में सूखापन (ड्राई आई), जलन, सिरदर्द, धुंधला दिखाई देना तथा कंप्यूटर विज़न सिंड्रोम जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इससे बचने के लिए 20-20-20 नियम अपनाएं—हर 20 मिनट बाद 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर देखें, बार-बार पलकें झपकाएं, उचित रोशनी में काम करें तथा स्क्रीन से पर्याप्त दूरी बनाए रखें।डॉ मिश्र ने नेत्र दान पर चर्चा करते हुए कहा मृत्यु के बाद नेत्रदान करके दो कॉर्नियल अंध व्यक्तियों को नई रोशनी दी जा सकती है। नेत्रदान एक महान मानव सेवा है, जिसके प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है।नियमित नेत्र परीक्षण, संतुलित एवं पौष्टिक आहार, स्वच्छता, सुरक्षात्मक उपाय, मधुमेह और उच्च रक्तचाप का नियंत्रण तथा समय पर उपचार अपनाकर अधिकांश नेत्र रोगों से बचाव किया जा सकता है। स्वस्थ आंखें ही स्वस्थ, सुरक्षित और खुशहाल जीवन की आधारशिला हैं।कार्यक्रम को संस्था के सचिव देवेंद्र अग्रवाल ने भी संबोधित किया - -उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने समीक्षा बैठक में दिए कड़े निर्देश, कार्यों में प्रगति नहीं होने पर पर होगी कार्रवाई-विकास कार्यों और योजनाओं के क्रियान्वयन का असर धरातल पर दिखे – अरुण साव-लोक निर्माण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, नगरीय प्रशासन, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के कार्यों की समीक्षा कीरायपुर। उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने आज दंतेवाड़ा में लोक निर्माण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, नगरीय प्रशासन एवं विकास तथा खेल एवं युवा कल्याण विभाग के जिला स्तरीय अधिकारियों की बैठक लेकर कार्यों की समीक्षा की और आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने चारों विभागों के स्वीकृत, निर्माणाधीन एवं प्रस्तावित कार्यों की प्रगति की विस्तार से समीक्षा कर कार्यों को समय-सीमा में पूर्ण करने, गुणवत्ता सुनिश्चित करने तथा योजनाओं का लाभ नागरिकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के निर्देश दिए।श्री साव ने अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों को निर्देशित करते हुए कहा कि विकास कार्यों में गुणवत्ता और समय-सीमा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को अपनी कार्य शैली और कार्य संस्कृति में बदलाव लाते हुए परिणाम आधारित कार्य करने के निर्देश दिए। कलेक्टर श्री देवेश ध्रुव भी समीक्षा बैठक में उपस्थित थे।उप मुख्यमंत्री श्री साव ने बैठक में कहा कि लोक निर्माण विभाग सहित सभी निर्माण एजेंसियां सड़कों, भवनों, पुल-पुलियों एवं अन्य निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दें। निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूर्ण कराना अधिकारियों की जिम्मेदारी है। कार्यों में अनावश्यक विलंब होने पर जवाबदेही तय कर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी शासकीय कार्यालयों एवं परिसरों को स्वच्छ, व्यवस्थित एवं नागरिकों के अनुकूल रखने के निर्देश दिए।उप मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत बनाए जा रहे आवासों के निर्माण में तेजी लाने तथा निर्माणाधीन आवासों को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने जल जीवन मिशन की पूर्ण हो चुकी योजनाओं को संचालन के लिए ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित करने को कहा। उन्होंने प्रगतिरत नल जल योजनाओं को शीघ्र पूरा करने तथा ठेकेदारों व संबंधित एजेंसियों के लंबित बिलों के भुगतान के निर्देश दिए। उन्होंने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर जल आपूर्ति योजनाओं का प्रभावी संचालन सुनिश्चित करने को कहा।श्री साव ने बरसात की समाप्ति के तुरंत बाद सभी निर्माण कार्यों में तत्परता से गति लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आज की समीक्षा बैठक में दिए गए निर्देशों का गंभीरता से पालन सुनिश्चित करें। सभी अधिकारी अपने दायित्वों का पूरी गंभीरता, सक्रियता और जवाबदेही के साथ निर्वहन करें। विकास कार्यों और योजनाओं के क्रियान्वयन का असर धरातल पर दिखाई देना चाहिए। वनमंडलाधिकारी श्री रामाकृष्ण रंगानाथा वाय. और अपर कलेक्टर श्री राजेश पात्रे सहित लोक निर्माण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, नगरीय प्रशासन एवं विकास तथा खेल एवं युवा कल्याण विभाग के बस्तर संभागीय कार्यालय और दंतेवाड़ा जिला कार्यालय के अधिकारी बैठक में मौजूद थे।
- -कौशल से स्वरोजगार एवं स्थानीय कृषि-उद्यमिता को मिलेगा बढ़ावारायपुर। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ’’कौशल भारत, आत्मनिर्भर भारत एवं कौशल आधारित रोजगार’’ के विजन तथा माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ के ग्रामीण युवाओं, महिलाओं एवं कृषकों को कौशल, स्वरोजगार एवं उद्यमिता से जोड़ने की प्राथमिकता के अनुरूप इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर द्वारा प्रदेश के कृषि विज्ञान केन्द्रों के माध्यम से कौशल विकास को सुदृढ़ करने की महत्वपूर्ण पहल की जा रही है।इसी क्रम में कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन, श्री रामविचार नेताम की प्रेरणा से इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. गिरीश चंदेल के मुख्य आतिथ्य तथा निदेशक विस्तार सेवाएं डॉ. एस. एस. टुटेजा की अध्यक्षता में निदेशालय विस्तार सेवाएं द्वारा ’’कृषि कौशल परिषद, भारत’’ के सहयोग से ’’08 से 12 सितम्बर 2026’’ तक दो बैचों में ’’प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण एवं प्रमाणन कार्यक्रम’’ आयोजित किया जा रहा है। आज इस कार्यक्रम के अंतर्गत विशेष सत्र का आयोजन किया गया।प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण एवं प्रमाणन कार्यक्रम के प्रथम बैच में ’’41 प्रतिभागियों’’ ने 08 से 10 सितम्बर तक प्रशिक्षण एवं प्रमाणन प्रक्रिया में भाग लिया, जिसमें दो दिवस का गहन प्रशिक्षण तथा तीसरे दिवस ’’मूल्यांकन, परीक्षा एवं मौखिक परीक्षा’’ आयोजित की गई। द्वितीय बैच 10 से 12 सितम्बर तक ’’42 प्रतिभागियों’’ के साथ प्रारंभ हुआ है। दोनों बैचों के माध्यम से विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित सभी ’’27 कृषि विज्ञान केन्द्रों’’ का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया है।कार्यक्रम में प्रतिभागियों को ’’कौशल पारिस्थितिकी तंत्र, योग्यता पैकध्राष्ट्रीय व्यावसायिक मानक, प्रशिक्षक दक्षता, वयस्क अधिगम, प्रशिक्षण प्रदान करने की प्रक्रिया एवं मूल्यांकन’’ के साथ उनकी विशेषज्ञता एवं स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप विभिन्न कृषि एवं संबद्ध ’’रोजगार भूमिकाओं’’ के लिए तैयार किया जा रहा है। इनमें ’’मशरूम उत्पादक, जैविक फसल उत्पादक, गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादक, सब्जी उत्पादक, मधुमक्खी पालक, वर्मी कम्पोस्ट उत्पादक, नर्सरी तैयारकर्ता, कृषि मशीनरी प्रदर्शनकर्ता, सूक्ष्म सिंचाई तकनीशियन, मत्स्य पालन तथा मुर्गी पालन’’ जैसे रोजगारपरक क्षेत्र प्रमुख हैं।इस पहल का प्रमुख उद्देश्य केवल प्रशिक्षकों का प्रमाणीकरण नहीं, बल्कि 27 कृषि विज्ञान केन्द्रों में ’’कृषि कौशल परिषद, भारत द्वारा प्रमाणित मास्टर प्रशिक्षकों’’ का सक्षम समूह विकसित करना है। प्रमाणित होने के पश्चात ये मास्टर प्रशिक्षक ’’मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना’’ के अंतर्गत संबंधित रोजगार भूमिकाओं में ग्रामीण युवाओं, महिलाओं एवं कृषकों को व्यावहारिक एवं रोजगारपरक कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेंगे।कुलपति डाॅ. गिरीश चंदेल ने अपने उद्बोधन में कौशल प्रशिक्षण को ’’स्वरोजगार, स्थानीय संसाधनों के मूल्य संवर्धन तथा कृषि-उद्यमिता’’ से जोड़ने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कृषि विज्ञान केन्द्रों की तकनीकी विशेषज्ञता को कौशल विकास के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए प्रशिक्षण को आय सृजन एवं व्यावहारिक उद्यम के अवसरों में परिवर्तित करने की आवश्यकता रेखांकित की।कार्यक्रम के अध्यक्ष एवं निदेशक विस्तार सेवाएं डॉ. एस. एस. टुटेजा ने ’’27 कृषि विज्ञान केन्द्रों के नेटवर्क’’ के माध्यम से जिलों की आवश्यकता, स्थानीय संसाधनों एवं संभावनाओं के अनुरूप कौशल प्रशिक्षणों के विस्तार पर प्रकाश डाला। कृषि कौशल परिषद, भारत के श्री आशुतोष पाटिल ने कौशल प्रमाणन तथा प्रमाणित मास्टर प्रशिक्षकों की भावी भूमिका एवं महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए।कार्यक्रम के दौरान निदेशालय विस्तार सेवाएं द्वारा ’’प्रकाशनपरिक्रामी निधि’’ से अर्जित लाभांश राशि का चेक विश्वविद्यालय को प्रदान किया गया। साथ ही माननीय कुलपति महोदय द्वारा कृषकोपयोगी पत्रिका ’’‘छत्तीसगढ़ खेती’’’ के नवीन अंक का विमोचन किया गया। यह निदेशालय द्वारा कृषि तकनीकी ज्ञान के प्रसार एवं कृषकों तक उपयोगी जानकारी पहुँचाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को रेखांकित करता है।इस पहल के माध्यम से भविष्य में कृषि विज्ञान केन्द्र स्तर पर ’’मशरूम उत्पादन, मधुमक्खी पालन, नर्सरी, गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन, वर्मी कम्पोस्ट, कृषि यंत्रीकरण’’ तथा अन्य स्थानीय कृषि एवं संबद्ध व्यवसायों पर आधारित छोटे उद्यम एवं ’’व्यावसायिक मॉडल’’ विकसित करने की संभावनाएं सुदृढ़ होंगी। इससे प्रदेश के ग्रामीण युवा, महिलाएं एवं कृषक स्थानीय संसाधनों एवं बाजार की संभावनाओं के अनुरूप कौशल प्राप्त कर ’’स्वरोजगार, स्थानीय कृषि-उद्यमिता एवं आय सृजन’’ की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे।
- -बंदियों को शिक्षा के महत्व की जानकारी देकर आगे की पढ़ाई के लिए किया गया प्रोत्साहितदंतेवाड़ा । कलेक्टर एवं जिला साक्षरता मिशन प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री देवेश कुमार ध्रुव के निर्देशानुसार अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर जिला जेल दंतेवाड़ा एवं डाइट परिसर में साक्षरता एवं शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला साक्षरता मिशन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री एम. भार्गव थे।जिला पंचायत सीईओ श्री भार्गव ने परिरुद्ध बंदियों को शिक्षा के महत्व की जानकारी देते हुए कहा कि शिक्षा व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। साक्षरता केवल पढ़ने-लिखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति को अपने अधिकारों, कर्तव्यों एवं सामाजिक दायित्वों के प्रति जागरूक बनाती है। उन्होंने पढ़ाई छोड़ चुके बंदियों को आगे की शिक्षा जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया। साथ ही जेल प्रशासन द्वारा बंदियों को शिक्षा से जोड़ने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।जिला परियोजना अधिकारी डॉ. रत्नबाला मोहंती ने बताया कि भारत सरकार, शिक्षा मंत्रालय के निर्देशानुसार राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप सभी के लिए शिक्षा पर केंद्रित उल्लास-नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत 15 वर्ष से अधिक आयु के असाक्षरों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस का आयोजन किया गया। जिले के सभी विकासखंडों के विद्यालयों में भी विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से कार्यक्रम आयोजित किए गए।कार्यक्रम में बंदियों ने हिंदी एवं स्थानीय गोंडी भाषा में साक्षरता गीत और देशभक्ति गीत प्रस्तुत किए। जेल में बंदियों को साक्षर बनाने के लिए संचालित साक्षरता कार्यक्रम में सहयोग करने वाले बंदियों सोमू पुनेम, लक्ष्मण ताती, सामू पोयाम, संतु कुंजाम, ककैम मुन्ना एवं मेटा को उत्साहवर्धन हेतु विशेष पुरस्कार से सम्मानित किया गया। जेल अधीक्षक श्री निर्मल सिंह ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री एम. भार्गव एवं जिला परियोजना अधिकारी डॉ. रत्नबाला मोहंती का बंदियों को शिक्षा के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के अंत में श्री भार्गव ने उपस्थित अधिकारियों, कर्मचारियों एवं बंदियों को अन्य लोगों को भी साक्षर बनाने के लिए शपथ दिलाई। कार्यक्रम में जेल एवं जिला साक्षरता मिशन के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
- दंतेवाड़ा। कलेक्टर के निर्देशानुसार विगत दिवस नगर पंचायत बारसूर के सभाकक्ष में प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 के अंतर्गत वर्ष 2026 में स्वीकृत आवासों के विरूद्ध अप्रारम्भ आवास के हितग्राहियों के साथ समीक्षा की गई। जिसमें हितग्राहियों को आवास को जल्द से जल्द प्रारम्भ करने के निर्देश दिये गये है। मुख्य नगरपालिका अधिकारी द्वारा समीक्षा में बैंक से लोन संबंधित योजना के बारे में बताया गया तथा प्रधानमंत्री आवास 2.0 बी.एल.सी. घटक अंतर्गत 18 माह के भीतर पूर्ण करने पर हितग्राहियों को मुख्यमंत्री गृह प्रवेश सम्मान निधि के तहत् 32,850.00 रूपये की अतिरिक्त सहायता राशि शासन द्वारा प्रदान की जा रही है। उक्त बैठक में नगर पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, वॉर्ड पार्षदगण एवं निकाय के अधिकारी, कर्मचारी उपस्थित थे।
- दंतेवाड़ा । जिले के शिक्षित बेरोजगार युवाओं के लिए निजी क्षेत्र के नियोजक द्वारा रिलेशनशिप मैनेजर के 25 पद तथा असिस्टेंट मैनेजर ट्रैनी के 10 पद रिक्तियों प्राप्त की गई है। इस संबंध में 28 सितंबर 2026 दिन शुक्रवार को जिला परियोजना लाईवलीहुड कॉलेज कारली दन्तेवाड़ा में रोजगार मेला का आयोजन किया जा रहा है। इस संबंध में इच्छुक आवेदक, प्रातः 11 से 03 बजे तक निर्धारित स्थल पर अपनी शैक्षणिक दस्तावेजों की मूल प्रति, रोजगार पंजीयन, आधारकार्ड, की छाया प्रति एवं पासपोर्ट साईज फोटोग्राफ बायोडाटा सहित, उपस्थित होकर अवसर का लाभ ले सकते है। रोजगार मेला में उपस्थित होने के पूर्व रोजगार कार्यालय का जीवित पंजीयन होना अनिवार्य है। यह आयोजन पूर्णतः निःशुल्क है।
- दंतेवाड़ा । शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था से जारी विज्ञप्ति अनुसार प्रधानमंत्री नेशनल अप्रेन्टिस मेला योजना के तहत शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था दंतेवाड़ा (आईटीआई) में 15 अप्रैल को प्रातः 11 बजे से अप्रेंटिसशिप मेले का आयोजन किया जाएगा। मेले में जिले के समस्त आईटीआई के वर्तमान प्रशिक्षणार्थियों, पूर्व प्रशिक्षणार्थियों एवं अन्य इच्छुक युवाओं को आमंत्रित किया जाता है। इस संबंध में प्रशिक्षणार्थियों का एनएपीएस पोर्टल पर पंजीयन, स्वरोजगार एवं रोजगार मार्गदर्शन केंद्र, दंतेवाड़ा द्वारा करियर काउंसलिंग एवं मार्गदर्शन, औद्योगिक प्रतिष्ठानों द्वारा अप्रेंटिसशिप हेतु कैंपस इंटरव्यू एवं प्रारंभिक चयन प्रक्रिया, संस्था के प्राचार्य ने जिले के समस्त प्रशिक्षण संस्थानों के प्रमुखों से आग्रह किया है कि वे अपने अधीनस्थ प्रशिक्षणार्थियों एवं पूर्व प्रशिक्षणार्थियों को मेले में प्रतिभाग हेतु प्रोत्साहित करें साथ ही औद्योगिक संस्थानों से भी अनुरोध है कि अधिक से अधिक संख्या में भागीदारी कर युवाओं को रोजगार से जोड़ने में सहयोग करें।
- दंतेवाड़ा । भारत सरकार आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय, नई दिल्ली द्वारा आयोजित सी.एस.एम.सी. की 8वी बैठक के अनुक्रम में माह अगस्त में प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 के लाभार्थी आधारित निर्माण बी एल सी घटक अतर्गत नगर पंचायत बारसूर में 21 आवासों की स्वीकृति प्रदान की गई है। आज दिनांक 10 सितंबर 2026 को नगर पंचायत बारसूर के सभाकक्ष में भवन अनुज्ञा जारी कार्यक्रम जिराका विधिवत हितग्राहियों को प्रधानमंत्री आवारा निर्माण हेतु भवन अनुज्ञा अध्यक्ष नगर पंचायत बारसूर के द्वारा वितरित किया गया। गुख्य नगरपालिका अधिकारी बारसूर के द्वारा बताया गया कि, हितग्राहियों को अनुदान के रूप में प्रति आवास कुल 2.50 लाख लाख रूपये उनके आवासों के प्रगति अनुसार चार किश्तों में प्रथम फाउण्डेशन स्तर पर राशि 1 लाख रूपये, द्वितीय लिंटल स्तर पर राशि 0.50 लाख, लाख रूपये तृतीय रूफ स्तर पर राशि, 0.50 लाख लाख रूपये एवं चतुर्थ पूर्ण स्तर पर राशि 0.50 लाख रूपये हितग्राहियों को अनुदान राशि का भुगतान भारत सरकार के निर्देशानुसार एस.एन.ए. स्पर्स के माध्यम से किया जाना है। मुख्यमंत्री गृह प्रवेश सम्मान योजना हेतु राशि लाभार्थी आधारित बी.एल.सी. घटक अंतर्गत ऐसे हितग्राही जिनके द्वारा निर्धारित 18 माह के भीतर अपने आवास को पूर्ण करते हुए गुह प्रवेश किया जावेगा, नियमानुसार उन्हें राशि 32,850.00 प्रति आवास हितग्राहियों के खातों में सीधे स्थानांतरण की जावेगी। उक्त कार्यक्रम में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, पार्षदगण एवं मुख्य नगरपालिका अधिकारी, नगर पंचायत के अधिकारी कर्मचारी तथा सी. एल टी सी विशेषज्ञ उपस्थित थे।
- दंतेवाड़ा । कार्यालय खाद्य शाखा से जारी विज्ञप्ति अनुसार शासन के निर्देशानुसार जिले में माह सितम्बर 2026 से सार्वजनिक वितरण प्रणाली का क्रियान्वयन भारत सरकार के स्मार्ट-पीडीएस, सार्थक पीडीएस मॉड्यूल में किया जावेगा। उपरोक्त संबंध में छत्तीसगढ़ शासन, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, नवा रायपुर के द्वारा स्मार्ट पीडीएस के अंतर्गत नया राशनकार्ड बनाने, प्रचलित राशनकार्ड में नाम जोड़ने व काटने एवं राशनकार्ड से संबंधित अन्य समस्त कार्यों के संबंध में विस्तृत निर्देश जारी किये गये हैं,इसके अनुसार जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत राशनकार्ड जारी करने की समस्त प्रक्रिया भारत सरकार के स्मार्ट-पीडीएस राशनकार्ड मॉड्यूल के माध्यम से किया जावेगा। नवीन राशनकार्ड हेतु आवेदन पत्र करने के लिए यूआरएल https://cg.smartpds.nic.in/login/citizen है। उपरोक्त मॉड्यूल में नवीन राशनकार्ड, राशनकार्ड में नाम जोड़ने, विलोपित करने, अंतरित करने हेतु आवदेक, नागरिक के द्वारा उपरोक्त लिंक के माध्यम से अथवा सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से प्राधिकृत अधिकारी को आवेदन किया जा सकेगा। स्मार्ट-पीडीएस राशनकार्ड मॉड्यूल में नवीन राशनकार्ड, नवीन सदस्य जोड़ने हेतु आवेदन के पश्चात् आवेदक एवं सदस्यों का ई-केवायसी उचित मूल्य दुकान में संचालित ई-पॉस मशीन के माध्यम से अथवा फेस ई-केवायसी के माध्यम से ई-केवायसी पूर्ण कराया जावेगा। प्राधिकृत अधिकारी द्वारा छत्तीसगढ़ राशनकार्ड नियम 2016 के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करते हुए नियमानुसार प्रक्रिया ऑनलाईन पूर्ण कराकर नवीन राशनकार्ड जारी करने की कार्यवाही ऑनलाईन की जावेगी।ऑनलाईन जारी नवीन राशनकार्ड पीडीएफ में प्राधिकृत अधिकारी द्वारा ई-साईन उपरांत पीडीएफ प्रिंट कराकर राशनकार्ड में संलग्न कर संबंधित हितग्राही को प्रदाय किया जावेगा। सामान्य एपीएल राशनकार्ड हेतु निर्धारित शुल्क का भुगतान ऑफलाईन स्थानीय निकायों को जमा कराया जावेगा। स्थानीय निकायों द्वारा प्राप्त शुल्क को खाद्य विभाग के मद में नियमानुसार जमा कराया जावेगा। अतः षाखा द्वारा जिले के समस्त नागरिकों से अपील कि गई है कि वे नवीन राशनकार्ड, राशनकार्ड में नाम सेतु पोर्टल के माध्यम से अपने क्षेत्र के प्राधिकृत अधिकारी (शहरी क्षेत्र में मुख्य नगरपालिका अधिकारी, नगरपालिका, नगर पंचायत एवं ग्रामीण क्षेत्र में मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत) को आवेदन कर सकते हैं।










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