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- -छात्रों ने पत्र लेखन के माध्यम से दिया जल संरक्षण का संदेशबालोद। जिला प्रशासन बालोद द्वारा 'जल संचय-जनभागीदारी 2.0' एवं 'कैच द रैन 2026' अभियान के तहत जल संरक्षण को एक जन आंदोलन बनाने की दिशा में निरंतर पहल की जा रही है। इस अभियान के अंतर्गत 18 जुलाई को सुबह 10 बजे बालोद, गुरुर, गुंडरदेही, डौंडीलोहारा एवं डौंडी विकासखंड के 1048 विद्यालयों में एक ही समय में 'पत्र लेखन' गतिविधि का आयोजन किया गया।इस आयोजन के माध्यम से लगभग 29,367 विद्यार्थियों ने अपने पालकों, मित्रों और आम नागरिकों को पत्र लिखकर जल की महत्ता, इसके संरक्षण, सदुपयोग एवं पुन: उपयोग के प्रति जागरूक करने का आग्रह किया। जल संरक्षण के इस अनूठे अभियान में विद्यार्थियों के साथ 2,105 शिक्षक, 1,471 पालक, 1053 शाला प्रबंधन समिति के सदस्य, 1351 जनप्रतिनिधियो एवं 2150 आम नागरिको सहित कुल 37,497 लोगों ने अपनी सक्रिय सहभागिता निभाई। जिला प्रशासन के इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य वर्षा के जल को व्यर्थ बहने से बचाकर उसे संचित करना है। सभी प्रतिभागियों ने 'जहां वर्षा हो, जब वर्षा हो—वहीं जल संचयन' के मंत्र को आत्मसात करते हुए भविष्य में जल संकट से निपटने के लिए एकजुट होकर जल संरक्षण के कार्य में अपनी सहभागिता सुनिश्चित की है।
- -मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव करेंगे विद्यार्थियों का उत्साहवर्धनदुर्ग। दुर्ग जिले के पाटन विकासखंड अंतर्गत जामगांव (एम) स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय में 20 जुलाई को राज्य स्तरीय शाला प्रवेशोत्सव का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम में प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा तथा स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव शामिल होकर नवप्रवेशी विद्यार्थियों का स्वागत एवं उत्साहवर्धन करेंगे।कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय लगभग एक घंटे तक विद्यार्थियों के बीच रहेंगे। वे नवप्रवेशी विद्यार्थियों को तिलक लगाकर नवीन शिक्षण सत्र की शुभकामनाएं देंगे तथा उनके साथ संवाद भी करेंगे।जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार कार्यक्रम में सरस्वती साइकिल योजना के अंतर्गत छात्राओं को साइकिलों का वितरण किया जाएगा। साथ ही प्रतिभावान विद्यार्थियों का सम्मान, नए शैक्षणिक सत्र के शैक्षणिक कैलेंडर का विमोचन तथा विद्यालय में स्थापित एस्ट्रोनॉमी लैब का मुख्यमंत्री द्वारा अवलोकन भी किया जाएगा।कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री विद्यार्थियों के साथ न्योता भोज में सहभागिता कर उनके साथ भोजन करेंगे। राज्य स्तरीय शाला प्रवेशोत्सव के माध्यम से विद्यार्थियों में शिक्षा के प्रति उत्साह बढ़ाने तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को और सशक्त करने का संदेश दिया जाएगा।
- -सीएमडीसी एवं जेएनएआरडीडीसी के बीच हुआ ऐतिहासिक एमओयू-क्रिटिकल मिनरल्स के अनुसंधान एवं वैज्ञानिक विकास को मिलेगी नई दिशारायपुर / प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के "क्रिटिकल मिनरल मिशन" एवं "आत्मनिर्भर भारत" के विजन को साकार करने की दिशा में छत्तीसगढ़ ने एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में राज्य सरकार खनिज संसाधनों के वैज्ञानिक, सतत एवं मूल्यवर्धित उपयोग की दिशा में लगातार प्रभावी पहल कर रही है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (सीएमडीसी) और जवाहरलाल नेहरू एल्युमिनियम अनुसंधान, विकास एवं डिजाइन केंद्र (जेएनएआरडीडीसी), नागपुर के मध्य शनिवार को एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व, सीएमडीसी के अध्यक्ष श्री सौरभ सिंह, खनिज साधन विभाग के सचिव श्री पी. दयानंद, तथा प्रबंध संचालक श्री रजत बंसल के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। एमओयू के माध्यम से वैज्ञानिक अनुसंधान, खनन, खनिज संसाधनों के मूल्य संवर्धन तथा क्रिटिकल मिनरल्स के विकास को नई दिशा मिलेगी। साथ ही राज्य में उपलब्ध खनिज संपदा का योजनाबद्ध, समयबद्ध एवं आधुनिक तकनीकों के माध्यम से बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा, जिससे छत्तीसगढ़ के समग्र विकास को गति मिलेगी।एमओयू एक्सचेंज कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि श्री पंकज कुलश्रेष्ठ ने अपने संबोधन में अनुसंधान आधारित खनिज विकास, नवाचार और संस्थागत सहयोग के महत्व पर बल देते हुए कहा कि यह साझेदारी राज्य एवं देश के खनिज क्षेत्र के लिए दूरगामी परिणाम देने वाली पहल साबित होगी। भारतीय खान ब्यूरो के कंट्रोलर ऑफ माइंस डॉ. बी.एल. गुर्जर ने सीएमडीसी एवं खनिज साधन विभाग के बीच बेहतर समन्वय की सराहना करते हुए कहा कि दोनों संस्थाओं का तालमेल राज्य के खनिज क्षेत्र के विकास को नई गति प्रदान कर रहा है।कार्यक्रम में सीएमडीसी के महाप्रबंधक श्री यू.के. कुरैशी ने निगम की 25 वर्षों की विकास यात्रा, प्रमुख उपलब्धियों, संचालित खनिज परियोजनाओं, भविष्य की कार्ययोजनाओं तथा सेवा प्रदाता के रूप में निगम की सफल पहलों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने छत्तीसगढ़ में उपलब्ध खनिज संसाधनों की अपार संभावनाओं तथा उनके वैज्ञानिक एवं समावेशी दोहन के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी दी। वहीं रीजनल कंट्रोलर ऑफ माइंस श्री प्रेम प्रकाश ने सीएमडीसी की टिन एवं कोरंडम परियोजनाओं की सराहना करते हुए कहा कि इन परियोजनाओं से स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिले हैं तथा खनिज क्षेत्र में पारदर्शिता एवं वैधानिक प्रक्रियाओं को मजबूती मिली है।जेएनएआरडीडीसी के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक एवं विभागाध्यक्ष डॉ. उपेंद्र सिंह ने बताया कि संस्थान रेड मड से गैलियम एवं वैनेडियम तथा बॉक्साइट के उप-उत्पादों से स्कैंडियम की पुनर्प्राप्ति (रिकवरी) पर महत्वपूर्ण अनुसंधान कर रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे शोध भारत को क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।एमओयू का औपचारिक आदान-प्रदान भारतीय खान ब्यूरो के कंट्रोलर जनरल एवं जेएनएआरडीडीसी के निदेशक श्री पंकज कुलश्रेष्ठ तथा सीएमडीसी के मुख्य महाप्रबंधक श्री संजय कनकने ने वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में किया।कार्यक्रम के अंत में सभी वक्ताओं ने विश्वास व्यक्त किया कि सीएमडीसी एवं जेएनएआरडीडीसी के बीच यह सहयोग खनिज अनुसंधान, तकनीकी नवाचार, संसाधनों के वैज्ञानिक उपयोग तथा सतत खनन को नई दिशा देगा।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में खनिज क्षेत्र में हासिल यह एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। राज्य सरकार खनिज संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन, मूल्य संवर्धन और आधुनिक तकनीकों के उपयोग के माध्यम से प्रदेश की प्राकृतिक संपदा को विकास का आधार बना रही है। यह पहल न केवल प्रधानमंत्री के क्रिटिकल मिनरल मिशन और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मजबूत करेगी, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध खनिज संपदा का सुनियोजित उपयोग कर राज्य के औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और आर्थिक प्रगति को भी नई गति प्रदान करेगी।कार्यक्रम में सीएमडीसी के मुख्य महाप्रबंधक श्री संजय कनकने ने स्वागत उद्बोधन दिया उन्होंने एमओयू को खनिज क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि यह साझेदारी भविष्य में राज्य के खनिज विकास को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी।
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राजनांदगांव । कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव ने कलेक्टोरेट में उत्कृष्ट कार्य करने वाली 13 मितानिनों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए मितानिनों द्वारा किए गए कार्यों की सराहना की। कलेक्टर ने डोंगरगांव विकासखंड से शारदा सिन्हा, चितरेखा देवांगन, फलिता साहू एवं देवकी वर्मा, छुरिया विकासखंड से पुनम साहू , राधामनी एवं सुलोचना साहू, डोंगरगढ़ विकासखंड से दिलेश्वरी गोंड, कामता वर्मा एवं डोमन, घुमका से उत्तरा देवांगन, रजनी एवं मांगतीन को सम्मानित किया। मितानिनों द्वारा किशोरी बालिकाओं को सर्वाइकल कैंसर से संबंधित एचपीवी वैक्सीन, हाईरिस्क गर्भवती माता, संस्थागत प्रसव, शिशु एवं मातृ मृत्यु ,टीवी एवं कुपोषण मुक्त ग्राम पंचायत, कैंसर के मरीजों की पहचान, फाइलेरिया की दवा तथा स्कूलों में किशोरी बालिकाओं की समस्या समाधान हेतु की गई गतिविधियों में सहयोग, आयरन फोलिक एसिड की दवा, मानसिक मरीजों को मेडिकल कॉलेज ले जाना, शून्य से 5 वर्ष के कुपोषित बच्चों को कुपोषण मुक्त के लिए एनआरसी में भेजना,12 सप्ताह पहले गर्भवती माता का पंजीयन, पूर्ण टीकाकरण सहित अन्य कार्य में सराहनीय योगदान के लिए उत्कृष्ट मितानिन के रूप में चयन किया गया है। इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ श्री दुर्गा प्रसाद अधिकारी, संयुक्त कलेक्टर श्रीमती शीतल बंसल, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नेतराम नवरतन, डीपीएम श्री संदीप ताम्रकार, श्री अनिल श्रीवास्तव, डीसी श्री सुकून दास मानिकपुरी सहित मितानिन प्रशिक्षक एवं ब्लॉक कोऑर्डिनेटर उपस्थित रहे।
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रायपुर। इंदिरागांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर द्वारा शैक्षणिक सत्र 2026–27 हेतु बी.टेक. (कृषि अभियांत्रिकी) एवं बी.टेक. (खाद्य प्रौद्योगिकी) पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए संचालित ऑनलाइन यूजी काउंसिलिंग-2026 के प्रथम चरण हेतु ऑनलाइन पंजीयन की अंतिम तिथि 20 जुलाई 2026, रात्रि 11:00 बजे निर्धारित है। काउंसिलिंग में वे अभ्यर्थी पात्र हैं जिन्होंने किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं (भौतिकी, रसायन विज्ञान एवं गणित तथा अंग्रेजी विषय सहित) उत्तीर्ण की हो तथा पी.ई.टी.-2026, जेईई-मेन्स-2026 अथवा 12वीं (गणित समूह) के आधार पर प्रवेश के इच्छुक हों। छत्तीसगढ़ राज्य के साथ-साथ अन्य राज्यों के पात्र अभ्यर्थी भी ऑनलाइन पंजीयन कर सकते हैं। अन्य राज्य के अभ्यर्थियों को प्रवेश विश्वविद्यालय के प्रवेश नियम-2026 के अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य के अभ्यर्थियों की काउंसिलिंग उपरांत उपलब्ध रिक्त सीटों के विरुद्ध दिनांक 30 जुलाई 2026 को आयोजित काउंसिलिंग के माध्यम से प्रदान किया जाएगा।ऑनलाइन पंजीकृत अभ्यर्थियों की प्रावीण्य सूची 23 जुलाई 2026 को विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर प्रकाशित की जाएगी तथा 24 जुलाई 2026 से 30 जुलाई 2026 तक निर्धारित कार्यक्रमानुसार सीट आवंटन, दस्तावेज सत्यापन एवं प्रवेश की कार्यवाही संपन्न की जाएगी अभ्यर्थियों से अनुरोध है कि अंतिम समय की तकनीकी असुविधा से बचने हेतु अपना ऑनलाइन पंजीयन समय रहते पूर्ण करें। प्रवेश संबंधी विज्ञापन, काउंसिलिंग समय-सारणी, दिशा-निर्देश, सीटों का विवरण एवं अन्य आवश्यक जानकारी विश्वविद्यालय की वेबसाइट www.igkv.ac.in पर उपलब्ध है।
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- शासकीय योजनाओं के गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध क्रियान्वयन के दिए निर्देश
राजनांदगांव । मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री दुर्गा प्रसाद अधिकारी ने शनिवार को जनपद पंचायत छुरिया अंतर्गत ग्राम पंचायत महाराजपुर, खोभा एवं केशोटोला का भ्रमण कर विभिन्न शासकीय योजनाओं एवं विकास कार्यों की प्रगति का निरीक्षण किया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को योजनाओं का गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
सीईओ जिला पंचायत श्री दुर्गा प्रसाद अधिकारी ने भ्रमण के दौरान ग्राम पंचायत महाराजपुर में पूर्व माध्यमिक शाला, आंगनबाड़ी केंद्र तथा प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत पूर्ण एवं निर्माणाधीन आवासों का निरीक्षण किया। उन्होंने हितग्राहियों से संवाद कर विभिन्न शासकीय योजनाओं से प्राप्त लाभ की जानकारी ली। आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों की उपस्थिति, पोषण आहार वितरण एवं अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया। साथ ही पूर्व माध्यमिक शाला में मध्यान्ह भोजन व्यवस्था का अवलोकन कर विद्यालय परिसर में निर्मित प्रार्थना शेड का भी निरीक्षण किया।
सीईओ जिला पंचायत ने ग्राम पंचायत खोभा में आवास पारा में प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत निर्मित एवं निर्माणाधीन आवासों तथा निर्माणाधीन रिचार्ज शाफ्ट का निरीक्षण किया। महिला स्वसहायता समूह द्वारा संचालित दुकान का अवलोकन करते हुए समूह की महिलाओं से उनकी आय एवं आजीविका गतिविधियों की जानकारी ली तथा उनके प्रयासों की सराहना की। इस अवसर पर सरपंच, पंचगण एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणों की उपस्थिति में सूर्य सभा का आयोजन किया गया। सीईओ जिला पंचायत ने प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना की जानकारी देते हुए ग्रामीणों को रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि यह योजना बिजली व्यय में बचत के साथ-साथ स्वच्छ एवं नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
सीईओ जिला पंचायत ने ग्राम पंचायत केशोटोला में नवाचार एवं श्रमदान से विकसित की जा रही आवास वाटिका का निरीक्षण किया तथा इसके बेहतर विकास के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने जनपद पंचायत परिसर में संचालित सी-मार्ट का भी अवलोकन किया तथा महिला स्व-सहायता समूहों का उत्साहवर्धन करते हुए उनके द्वारा निर्मित उत्पादों की खरीदी की। उन्होंने कहा कि महिला समूहों की आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने से ग्रामीण आजीविका सशक्त होगी। निरीक्षण के दौरान सीईओ जनपद पंचायत छुरिया श्री होरीलाल साहू, एसडीओ (आरईएस) श्री जीपी लरिया सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। - -देशभर के पर्यटन एवं हॉस्पिटेलिटी विशेषज्ञों, ट्रैवल एजेंट्स और मीडिया प्रतिनिधियों के बीच छत्तीसगढ़ की पर्यटन संभावनाओं पर हुई विशेष चर्चारायपुर । देश के पर्यटन एवं हॉस्पिटेलिटी क्षेत्र की अग्रणी संस्था फेडरेशन ऑफ एसोसिएशंस इन इंडियन टूरिज्म एंड हॉस्पिटेलिटी (FAITH) द्वारा होटल ताज, नई दिल्ली में आयोजित फेथ कांक्लेव 2026 में छत्तीसगढ़ पर्यटन ने अपनी प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराते हुए राष्ट्रीय पर्यटन परिदृश्य में प्रदेश की सशक्त पहचान को नई ऊंचाई प्रदान की। सम्मेलन में देशभर से आए पर्यटन एवं हॉस्पिटेलिटी विशेषज्ञों, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय ट्रैवल एजेंट्स, विभिन्न राज्यों के पर्यटन विभागों के प्रतिनिधियों, ट्रैवल मीडिया तथा पर्यटन उद्योग से जुड़े प्रमुख हितधारकों की उपस्थिति में छत्तीसगढ़ के पर्यटन विषय पर विशेष पैनल चर्चा आयोजित की गई।इस अवसर पर छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा तथा छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के प्रबंध संचालक श्री विवेक आचार्य ने प्रदेश की प्राकृतिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, जनजातीय एवं साहसिक पर्यटन संभावनाओं का व्यापक प्रस्तुतीकरण किया। उन्होंने उपस्थित प्रतिनिधियों को बताया कि छत्तीसगढ़ अपनी प्राचीन सांस्कृतिक विरासत, अद्वितीय जनजातीय जीवन, घने वन, जलप्रपातों, पुरातात्विक धरोहरों, वन्यजीव संपदा और आध्यात्मिक स्थलों के कारण देश के सबसे विशिष्ट पर्यटन गंतव्यों में तेजी से उभर रहा है।पैनल चर्चा के दौरान प्रदेश में पर्यटन अधोसंरचना के विस्तार, नई पर्यटन नीतियों, निजी निवेश की संभावनाओं, सामुदायिक सहभागिता, ईको-टूरिज्म, होम-स्टे, धार्मिक पर्यटन, हेरिटेज पर्यटन तथा सतत पर्यटन विकास की दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर भी विस्तार से जानकारी साझा की गई। साथ ही देश-विदेश से आए टूर ऑपरेटरों एवं पर्यटन उद्योग के प्रतिनिधियों को छत्तीसगढ़ का भ्रमण कर यहां की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विविधता और पर्यटन अनुभवों से रूबरू होने का आमंत्रण दिया गया।छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ आज केवल प्राकृतिक सौंदर्य का प्रदेश नहीं, बल्कि अनुभव आधारित पर्यटन का एक उभरता हुआ केंद्र बनकर सामने आ रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पर्यटन को रोजगार, निवेश और स्थानीय आर्थिक विकास का प्रभावी माध्यम बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने पर्यटन उद्योग से जुड़े सभी प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे छत्तीसगढ़ आएं, यहां की अनूठी संस्कृति, आतिथ्य और पर्यटन स्थलों का अनुभव करें तथा राज्य को अपने पर्यटन परिपथों में प्रमुख स्थान दें।छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के प्रबंध संचालक श्री विवेक आचार्य ने कहा कि राज्य में पर्यटन क्षेत्र के विकास के लिए अधोसंरचना, डिजिटल प्रचार-प्रसार, निवेश अनुकूल वातावरण, निजी क्षेत्र की भागीदारी और गुणवत्तापूर्ण पर्यटन सेवाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड का उद्देश्य प्रदेश को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर एक विशिष्ट एवं पसंदीदा गंतव्य के रूप में स्थापित करना है। उन्होंने विभिन्न राज्यों, ट्रैवल एजेंसियों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से साझेदारी बढ़ाने तथा छत्तीसगढ़ में पर्यटन व्यवसाय की नई संभावनाओं का लाभ उठाने का आह्वान किया।सम्मेलन के दौरान छत्तीसगढ़ पर्यटन की प्रस्तुति को उपस्थित प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक सराहा तथा राज्य की विविध पर्यटन संभावनाओं में गहरी रुचि दिखाई। पर्यटन विशेषज्ञों ने माना कि प्राकृतिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, साहसिक और जनजातीय पर्यटन के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ के पास अपार संभावनाएं हैं, जिन्हें प्रभावी प्रचार-प्रसार और साझेदारी के माध्यम से वैश्विक पहचान दिलाई जा सकती है।फेथ कांक्लेव 2026 में छत्तीसगढ़ पर्यटन की यह प्रभावशाली भागीदारी देश के पर्यटन मानचित्र पर राज्य की सशक्त उपस्थिति दर्ज कराने, नए निवेश आकर्षित करने, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटन नेटवर्क से जुड़ने तथा "अनदेखा भारत" के रूप में छत्तीसगढ़ की विशिष्ट पहचान स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
- दुर्ग। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान दुर्ग जिले के विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने विधानसभा की कार्यवाही का अवलोकन किया। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव से मुलाकात कर लोकतंत्र, विधानसभा की कार्यप्रणाली एवं जनप्रतिनिधियों की भूमिका से जुड़े विषयों पर संवाद किये।शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि विधानसभा केवल कानून बनाने का सदन नहीं, बल्कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी पाठशाला भी है। यहां आकर विद्यार्थी लोकतांत्रिक व्यवस्था को निकट से समझते हैं और संविधान के प्रति सम्मान तथा जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा प्राप्त करते हैं।उन्होंने बताया कि स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय पाऊवारा, कोड़िया, चंदखुरी सहित दुर्ग जिले के विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने विधानसभा की कार्यवाही देखी तथा अनेक विषयों पर उत्साहपूर्वक प्रश्न पूछे। विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था, विधानसभा की कार्यप्रणाली, जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारियों तथा जनसेवा के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी।शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार शिक्षा को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रखकर विद्यार्थियों को व्यवहारिक शिक्षा, लोकतांत्रिक मूल्यों एवं संवैधानिक संस्थाओं से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयासरत है। ऐसे शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों में जागरूक, जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक बनने की भावना को मजबूत करते हैं।उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की जिज्ञासा, आत्मविश्वास और सीखने की उत्सुकता अत्यंत प्रेरणादायी है। प्रदेश सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ नई पीढ़ी को लोकतांत्रिक परंपराओं और संवैधानिक मूल्यों से जोड़ने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्हें विश्वास है कि विधानसभा का यह अनुभव विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास तथा उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
- - कार्यकारिणी सहित समितियों के पदाधिकारियों व महिला केंद्रों की संयोजिका, सह संयोजिकाओं का भी होगा शपथ ग्रहणरायपुर। महाराष्ट्र मंडल की नई कार्यकारिणी (2026-28) का शपथ ग्रहण समारोह रविवार, 26 जुलाई 2026 को आयोजित किया गया है। समारोह में अध्यक्ष अजय मधुकर काले और उनके नेतृत्व में 14 सदस्यीय कार्यकारिणी का शपथ ग्रहण होगा। पहले ही सभी कार्यकारिणी सदस्यों को उनके प्रकल्प सहित अन्य कार्यभार सौंपे जा चुके हैं।सचिव चेतन गोविंद दंडवते ने बताया कि संत ज्ञानेश्वर सभागृह में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में 17 समिति और 17 महिला केंद्रों के पदाधिकारी भी समारोह में शपथ ग्रहण करेंगे। पहली बार महाराष्ट्र मंडल में शिवाजी महाराज कार्यक्रम आयोजन समिति गठित की गई है। इस समिति के समन्वयक अभिषेक विद्याधर बक्षी के नेतृत्व में सभी पदाधिकारी भी शपथ लेंगे। इनके अलावा भी कुछ समितियों को नई जिम्मेदारियों व कार्यक्रमों के साथ गढ़ा गया है, तो कुछ समितियों को दो नए भागों में बांटकर नई जिम्मेदारियां व कार्यक्रम भी सौंपे गए हैं। इन तमाम समितियों के पदाधिकारी भी इस समारोह में शपथ लेंगे।
- -70 लाख माताओं का आशीर्वाद और किसानों का विश्वास हमारी सरकार की शक्ति : मुख्यमंत्री श्री साय-विपक्ष का आरोप पत्र तथ्यहीन, हमारी ढाई साल की उपलब्धियां ही उसका जवाब : मुख्यमंत्री-मोदी की गारंटी का अर्थ है गारंटी पूरी होने की गारंटी : मुख्यमंत्री श्री साय-विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव महज औपचारिकता, इसमें न तथ्य हैं और न दम : मुख्यमंत्री-नक्सलवाद की समाप्ति हमारी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि, अब बस्तर को बनाएंगे देश का सर्वश्रेष्ठ आदिवासी संभाग - मुख्यमंत्री श्री सायरायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ विधानसभा में विपक्ष द्वारा प्रस्तुत अविश्वास प्रस्ताव पर करारा पलटवार करते हुए कहा कि यह प्रस्ताव सरकार के विरुद्ध नहीं, बल्कि प्रदेश की तीन करोड़ जनता द्वारा दिए गए जनादेश, किसानों के विश्वास, माताओं-बहनों के आशीर्वाद और गरीबों के अधिकारों के विरुद्ध है। जनता के प्रचंड विश्वास और सरकार की ऐतिहासिक उपलब्धियों के सामने विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव पूरी तरह तथ्यहीन, दिशाहीन और निष्प्रभावी सिद्ध हुआ है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वे पक्ष और विपक्ष के सभी सदस्यों की बातें प्रारंभ से सुन रहे हैं और सत्ता पक्ष के सदस्यों ने तथ्यों तथा आंकड़ों के आधार पर विपक्ष के प्रत्येक आरोप का प्रभावी उत्तर दिया है। विपक्ष द्वारा प्रस्तुत अविश्वास प्रस्ताव महज एक औपचारिकता है, जिसमें न कोई ठोस तथ्य है, न विश्वसनीय आधार और न ही कोई दम है।मुख्यमंत्री ने सवाल किया कि आखिर यह अविश्वास प्रस्ताव किसके विरुद्ध लाया गया है। क्या यह वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को 54 सीटें देकर सरकार बनाने वाली छत्तीसगढ़ की तीन करोड़ जनता के विरुद्ध है? क्या यह लोकसभा चुनाव में प्रदेश की 11 में से 10 सीटों पर भाजपा को विजय दिलाने वाले मतदाताओं के विरुद्ध है? अथवा सभी नगर निगमों और 70 प्रतिशत से अधिक नगर पालिकाओं तथा नगर पंचायतों में भाजपा को जनादेश देने वाली जनता के प्रति अविश्वास है?उन्होंने कहा कि विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव उन किसानों के विरुद्ध भी प्रतीत होता है, जिन्हें हमारी सरकार 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान का मूल्य दे रही है। इस वर्ष राज्य सरकार ने 144 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की और अंतर की राशि किसानों के खातों में एकमुश्त अंतरित की। पिछली सरकार किसानों को राशि के लिए पूरे वर्ष इंतजार कराती थी और चार किश्तों में भुगतान करने के बाद भी अंतिम किश्त तक नहीं दे पाई।मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने सत्ता संभालने के केवल 12 दिनों के भीतर 13 लाख किसानों को दो वर्षों का बकाया 3716 करोड़ रुपये का धान बोनस प्रदान किया। यह बोनस पूर्ववर्ती सरकार के जनघोषणा पत्र में शामिल होने के बावजूद पांच वर्षों तक किसानों को नहीं दिया गया था। भाजपा सरकार ने किसानों का वर्षों पुराना अधिकार उन्हें तत्काल लौटाया।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश की लगभग 70 लाख माताओं-बहनों को महतारी वंदन योजना के अंतर्गत प्रत्येक महीने के प्रथम सप्ताह में आर्थिक सहायता दी जा रही है। अब तक 18 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि महिलाओं के खातों में अंतरित की जा चुकी है। पूर्ववर्ती सरकार ने महिलाओं को 500 रुपये प्रतिमाह देने का वादा किया था, लेकिन पांच वर्षों में एक रुपया भी नहीं दिया। उन्होंने कहा कि जिस सरकार के साथ 70 लाख माताओं-बहनों का आशीर्वाद हो, उसका विपक्ष के तथ्यहीन आरोप कुछ नहीं बिगाड़ सकते।मुख्यमंत्री ने शास्त्रों की उक्ति—“सत्यमेव जयते नानृतं, सत्येन पन्था विततो देवयानः” का उल्लेख करते हुए कहा कि सत्य की हमेशा विजय होती है। सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं हो सकता। विपक्ष कितना भी भ्रम और असत्य फैलाने का प्रयास कर ले, प्रदेश की जनता सच्चाई और सरकार के कार्यों को भलीभांति जानती है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि यदि असत्य बोलने और भ्रष्टाचार करने में पीएचडी होती, तो विपक्ष में बैठे कई लोग उसके विशेषज्ञ होते।श्री साय ने कहा कि शायद विपक्ष को यह स्वीकार नहीं हो पा रहा है कि एक छोटे से गांव के आदिवासी किसान का बेटा आज छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री पद पर बैठकर प्रदेश की सेवा कर रहा है। कांग्रेस ने अनुसूचित जनजाति और आदिवासी समाज का दशकों तक केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया, जबकि भारतीय जनता पार्टी ने आदिवासी समाज को वास्तविक सम्मान, अधिकार और विकास के अवसर दिए।उन्होंने कहा कि श्रद्धेय भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने आदिवासियों के समग्र विकास के लिए केंद्र में अलग जनजातीय कार्य मंत्रालय बनाया। आज आदिवासी समाज की बेटी श्रीमती द्रौपदी मुर्मु देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद राष्ट्रपति के रूप में विराजमान हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान और प्रधानमंत्री जनमन योजना के माध्यम से विशेष पिछड़ी जनजातियों के विकास के लिए अभूतपूर्व कार्य किए जा रहे हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में कोरवा, बिरहोर, कमार, बैगा और अबूझमाड़िया जैसी विशेष पिछड़ी जनजातियों के जीवन में बदलाव लाने के लिए हमारी सरकार पूरी संवेदनशीलता से कार्य कर रही है। कांग्रेस ने लंबे शासनकाल के बावजूद इन समुदायों की बुनियादी आवश्यकताओं और विकास की चिंता नहीं की।श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण का ऐतिहासिक कार्य भी श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी ने किया। वर्ष 2003 में भाजपा सरकार बनने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने मजबूत सार्वजनिक वितरण प्रणाली लागू की, जिसकी पूरे देश में सराहना हुई। इसी संवेदनशील व्यवस्था के कारण वे जन-जन में “चाउर वाले बाबा” के नाम से लोकप्रिय हुए।मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2018 में प्रदेश की जनता ने कांग्रेस को बड़ा जनादेश दिया था, लेकिन पांच वर्ष का पूरा कार्यकाल ढाई-ढाई वर्ष की कुर्सी की खींचतान में निकल गया। कांग्रेस ने अपने जनघोषणा पत्र के 36 वादों में से एक भी वादा शत-प्रतिशत पूरा नहीं किया। उसके शासन में प्रदेश में यह धारणा बन गई थी कि कोई ऐसा वर्ग नहीं बचा, जिसे कांग्रेस सरकार ने ठगा न हो।उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 के चुनाव में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ की जनता को जो वचन दिए, उन्हें “मोदी की गारंटी” का नाम दिया गया। मोदी की गारंटी का अर्थ है—गारंटी पूरी होने की गारंटी। हमारी सरकार ने मात्र ढाई वर्षों में अपने अधिकांश प्रमुख वादों को धरातल पर उतार दिया है।मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार ने राजनीतिक दुर्भावना के कारण 18 लाख गरीब परिवारों को प्रधानमंत्री आवास से वंचित रखा। केंद्र सरकार के बार-बार आग्रह और पत्राचार के बावजूद गरीबों के मकान स्वीकृत नहीं किए गए। हमारी सरकार ने 13 दिसंबर 2023 को शपथ लेने के अगले ही दिन, 14 दिसंबर को आयोजित पहली कैबिनेट बैठक में 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों को स्वीकृति प्रदान की।उन्होंने बताया कि बीते ढाई वर्षों में 11 लाख से अधिक प्रधानमंत्री आवास पूर्ण हो चुके हैं और वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 1600 मकान बनाए जा रहे हैं। सरकार पूर्ववर्ती शासन द्वारा छोड़े गए अधूरे कार्यों को भी बिना किसी भेदभाव के पूरा कर रही है। गरीबों के सिर पर पक्की छत देना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सरकार की ढाई वर्षों की सबसे बड़ी उपलब्धि नक्सलवाद की समाप्ति है। कभी ऐसा प्रतीत होता था कि इस समस्या का समाधान संभव नहीं होगा, लेकिन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन तथा सुरक्षा बलों के अदम्य साहस से छत्तीसगढ़ नक्सलवाद के अभिशाप से मुक्त हुआ है।उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार ने केंद्र के साथ आवश्यक समन्वय नहीं किया, जिसके कारण देश में बचा अधिकांश नक्सलवाद छत्तीसगढ़ में केंद्रित रहा। हमारी सरकार ने सुरक्षा और विकास की समन्वित रणनीति अपनाई। अब बस्तर में शांति लौट रही है और विकास की नई शुरुआत हुई है। केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने बस्तर संभाग को देश का सर्वश्रेष्ठ आदिवासी संभाग बनाने का संकल्प व्यक्त किया है और राज्य सरकार इस दिशा में तेजी से कार्य कर रही है।मुख्यमंत्री ने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के माध्यम से 5 लाख 60 हजार से अधिक भूमिहीन कृषि मजदूरों को प्रतिवर्ष एकमुश्त 10 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है। सरकार लगातार दो वर्षों से इस योजना का लाभ प्रदान कर रही है।किसानों के लिए खाद की उपलब्धता पर मुख्यमंत्री ने बताया कि इस वर्ष प्रदेश में 15.55 लाख मीट्रिक टन खाद के लक्ष्य के विरुद्ध 13.16 लाख मीट्रिक टन का भंडारण किया गया है। अब तक 7.27 लाख मीट्रिक टन खाद किसानों को वितरित किया जा चुका है। राज्य की मांग पर केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री जे.पी. नड्डा ने अतिरिक्त 50 हजार मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध कराया है।सिंचाई क्षेत्र की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार ने पांच वर्षों में केवल 9667 हेक्टेयर सिंचाई क्षमता बढ़ाई थी, जबकि हमारी सरकार ने ढाई वर्ष में 19 हजार 500 हेक्टेयर सिंचाई क्षमता का विस्तार किया है। कांग्रेस शासन में पांच वर्षों में सिंचाई योजनाओं के लिए 5794 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई, जबकि वर्तमान सरकार ने ढाई वर्ष में ही 11 हजार 107 करोड़ रुपये की योजनाएं स्वीकृत की हैं। सिंचाई के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को लगातार दो वर्षों में उत्कृष्ट राज्य का पुरस्कार भी प्राप्त हुआ है।मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत—जी राम जी योजना प्रदेश में 1 जुलाई से लागू हो चुकी है। ग्रामीण रोजगार का बजट 4 हजार करोड़ रुपये से बढ़ाकर 6 हजार करोड़ रुपये किया गया है। योजना में 100 दिनों के स्थान पर 125 दिनों के रोजगार की गारंटी और 15 दिनों के भीतर मजदूरी भुगतान का प्रावधान है। निर्धारित समय पर मजदूरी नहीं मिलने पर श्रमिकों को क्षतिपूर्ति भी दी जाएगी।उन्होंने कहा कि प्रदेश की 6 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों में अटल डिजिटल सेवा केंद्र शुरू किए जा चुके हैं। इन केंद्रों में ग्रामीणों को आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र सहित अनेक शासकीय सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं। एक लाख रुपये तक का बैंकिंग लेन-देन भी गांव में ही संभव हो रहा है।मुख्यमंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ के हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराने के लिए देश के पांच प्रमुख हवाई अड्डों पर शोरूम खोले जाएंगे। इसके लिए राज्य बजट में प्रावधान किया गया है। इससे प्रदेश के शिल्पकारों, स्व-सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमियों की आय बढ़ेगी।महिला सशक्तिकरण की दिशा में उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि महतारी वंदन योजना के अतिरिक्त रेडी-टू-ईट पोषण आहार निर्माण का कार्य फिर से महिला स्व-सहायता समूहों को सौंपा जा रहा है। कुछ जिलों में इसकी शुरुआत हो चुकी है। पूर्ववर्ती सरकार ने महिलाओं से यह रोजगार छीनकर निजी हाथों में दे दिया था।उन्होंने बताया कि प्रदेश की 10 लाख 40 हजार से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन को प्रोत्साहित करने के लिए स्टाम्प शुल्क एवं पंजीयन शुल्क में बड़ी रियायत दी जा रही है। ये निर्णय महिलाओं को केवल सहायता प्राप्त करने वाली हितग्राही नहीं, बल्कि संपत्ति की स्वामी और आर्थिक निर्णयों की भागीदार बना रहे हैं।भ्रष्टाचार के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने विपक्ष को घेरते हुए कहा कि पिछली सरकार में शराब दुकानों में दो-दो कैश काउंटर चलने की चर्चा पूरे प्रदेश में थी। एक काउंटर का पैसा सरकारी खजाने में जाता था और दूसरे काउंटर की राशि कहां जाती थी, यह प्रदेश की जनता जानती है। पिछली सरकार छत्तीसगढ़ के विकास के बजाय दिल्ली दरबार के लिए एटीएम बनकर रह गई थी।मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली स्थित ट्राइबल यूथ हॉस्टल की क्षमता 50 सीटों से बढ़ाकर 200 सीट कर दी गई है। यह प्रदेश के लिए गौरव का विषय है कि इस वर्ष इसी छात्रावास के 13 युवाओं ने संघ लोक सेवा आयोग की प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण की है। आदिवासी युवाओं को देश की सर्वोच्च सेवाओं तक पहुंचाने के लिए सरकार हर संभव संसाधन उपलब्ध करा रही है।कानून-व्यवस्था के क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने कहा कि डायल-112 नेक्स्ट जेन सेवा का विस्तार 16 जिलों से बढ़ाकर सभी 33 जिलों में किया गया है। साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए ढाई वर्षों में 9 साइबर थाने खोले गए हैं और 5 नए साइबर थाने प्रारंभ किए जाएंगे। इसके विपरीत पिछली सरकार पांच वर्षों में केवल पांच साइबर थाने खोल पाई थी।युवाओं के रोजगार और पारदर्शी भर्ती के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल का गठन किया गया है। तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के समान पदों के लिए सात श्रेणियों में संयुक्त भर्ती परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। भर्ती परीक्षाएं अब नियमित रूप से हर वर्ष होंगी, जिससे युवाओं में व्यवस्था के प्रति विश्वास और उत्साह बढ़ेगा।उन्होंने बताया कि पूर्ववर्ती सरकार के पांच वर्षों में पुलिस विभाग में 4174 पदों पर भर्ती की गई थी, जबकि वर्तमान सरकार ढाई वर्षों में ही 7 हजार युवाओं की भर्ती कर चुकी है। आने वाले समय में पुलिस विभाग के 7 हजार अतिरिक्त पदों पर भर्ती की जाएगी। पीएससी घोटाले की जांच सीबीआई कर रही है और प्रकरण के दोषी जेल में हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम सेतु योजना के अंतर्गत प्रदेश के 30 आईटीआई का उन्नयन किया जा रहा है। इसके लिए छह क्लस्टर बनाए गए हैं और प्रत्येक क्लस्टर में लगभग 241 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। इससे युवाओं को आधुनिक उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप प्रशिक्षण और रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे।श्री साय ने बताया कि प्रदेश में निफ्ट, नाइलिट और फोरेंसिक यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान स्थापित किए जा रहे हैं। पिछली सरकार के पांच वर्षों में केवल 8673 युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिया गया था, जबकि वर्तमान सरकार के ढाई वर्षों में प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना और मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत 22 हजार से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है।औद्योगिक विकास का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में वस्त्र उद्योग के माध्यम से 42 हजार से अधिक रोजगार के अवसर सृजित होंगे। नवा रायपुर में सेमीकंडक्टर चिप संयंत्र का कार्य प्रारंभ हो चुका है। ऊर्जा क्षेत्र में तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। आने वाले वर्षों में प्रदेश में 30 हजार मेगावाट अतिरिक्त बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है, जिससे छत्तीसगढ़ ऊर्जा क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनेगा।मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार प्रदेशवासियों को रियायती बिजली से मुफ्त बिजली की ओर ले जा रही है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत 70 हजार से अधिक घरों में सोलर पैनल स्थापित किए जा चुके हैं और प्रतिदिन 500 से अधिक घर इस योजना से जुड़ रहे हैं।उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने पांच वर्षों में 78 हजार 898 सिंचाई पंपों का ऊर्जीकरण किया था, जबकि वर्तमान सरकार ने ढाई वर्षों में ही 1 लाख 2 हजार 845 पंपों का ऊर्जीकरण कर किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया है। किसानों को दी जाने वाली बिजली सब्सिडी 9145 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 14 हजार 198 करोड़ रुपये की गई है। यह अन्नदाताओं के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है।मुख्यमंत्री ने जिला खनिज संस्थान न्यास निधि में पूर्ववर्ती सरकार के दौरान हुए कथित भ्रष्टाचार का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने खनन प्रभावित क्षेत्रों और वहां रहने वाले लोगों के विकास के लिए डीएमएफ की व्यवस्था बनाई थी, लेकिन पिछली सरकार के समय इस जनकल्याणकारी निधि को भी कमीशनखोरी का माध्यम बना दिया गया।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारी सरकार सेवा, सुशासन, सुरक्षा और विकास के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है। किसान, गरीब, युवा, महिला, आदिवासी और श्रमिक सहित समाज के प्रत्येक वर्ग का विश्वास सरकार के साथ है। विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव प्रदेश की जनता द्वारा बार-बार दिए गए प्रचंड जनादेश और सरकार की उपलब्धियों को नकारने का असफल प्रयास है।उन्होंने कहा कि जनता ने वर्ष 2023 में कांग्रेस सरकार के विश्वासघात और कुशासन का हिसाब कर उसे सत्ता से उखाड़ फेंका। अब वही विपक्ष तथ्यहीन आरोपों के सहारे अपनी राजनीतिक जमीन तलाश रहा है। छत्तीसगढ़ की जनता भ्रम और असत्य की राजनीति को पहचान चुकी है। सत्य, विकास और जनविश्वास के मार्ग पर चलते हुए हमारी सरकार विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का संकल्प अवश्य पूरा करेगी।
- -कांग्रेस का अविश्वास प्रस्ताव खारिज होना उसकी राजनीतिक दुर्दशा और दिशाहीनता का सबसे बड़ा प्रमाणरायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव ने छत्तीसगढ़ विधानसभा में कांग्रेस द्वारा भाजपा सरकार के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के औंधे मुँह गिरने पर कहा है कि इस प्रस्ताव का खारिज होना इस बात का स्पष्ट और जीवन्त परिचायक है कि कांग्रेस पर से न सिर्फ सदन का, बल्कि छत्तीसगढ़ की देवतुल्य जनता-जनार्दन का विश्वास भी पूरी तरह खत्म हो चुका है।भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री देव ने कांग्रेस की राजनीतिक दुर्दशा पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि कांग्रेस आज एक ऐसे चौराहे पर खड़ी है, जहाँ उसके पास न तो कोई दिशा है और न ही कोई नेतृत्व। बिना किसी ठोस तथ्य, तर्क और आधार के लाया गया यह अविश्वास प्रस्ताव दरअसल भाजपा सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि कांग्रेस के भीतर चल रही गुटबाजी और उसके मानसिक दिवालियेपन का हताश प्रदर्शन था। श्री देव ने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता ने भारी बहुमत से भाजपा को सेवा का मौका दिया है। मात्र कुछ ही महीनों में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार ने मोदी की गारंटियों को धरातल पर उतारा है। कांग्रेस इस जन-हितैषी विकास को पचा नहीं पा रही है। श्री देव ने कहा कि कांग्रेस आज पूरी तरह बिखर चुकी है। सदन में उनके पास सरकार को घेरने का कोई वास्तविक मुद्दा नहीं था। यह अविश्वास प्रस्ताव सिर्फ मीडिया की सुर्खियाँ बटोरने और अपनी अंदरूनी कलह को छिपाने का एक असफल ड्रामा था।भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री देव ने कहा कि विधानसभा में कांग्रेस का प्रस्ताव का ध्वस्त होना यह सिद्ध करता है कि सत्य और सुशासन के सामने झूठ की राजनीति कभी टिक नहीं सकती। जनता का आशीर्वाद भाजपा सरकार के साथ है और रहेगा। कांग्रेस को अब नकारात्मक राजनीति छोड़कर आत्मचिंतन करना चाहिए। जो दल खुद अपने विधायकों और कार्यकर्ताओं का विश्वास खो चुका हो, वह जनता के विश्वास की बात कैसे कर सकता है? छत्तीसगढ़ की जनता कांग्रेस के पाँच साल के कुशासन, भ्रष्टाचार और वादाखिलाफी को भूली नहीं है और यही वजह है कि आज कांग्रेस राजनीतिक हाशिए पर जा पहुँची है। श्री देव ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री साय के नेतृत्व में भाजपा सरकार बिना रुके, बिना थके छत्तीसगढ़ के विकास और जन-कल्याण के संकल्प को पूरा करती रहेगी।
- - महाराष्ट्र मंडल में दो दिवसीय कार्यशाला शुरू, भारतीय विद्या पारंगत पुणे के मोहिते ने छत्रपति शिवाजी पर दी अहम जानकारीरायपुर। छत्रपति शिवाजी महाराज ने हिंदवी स्वराज की स्थापना के लिए अपने राज्याभिषेक के बाद सन् 1676 से 1678 तक दक्षिण विजय के लिए ऐसी स्ट्रटीजिक डेप्थ (सामरिक गहराई) बनाई कि इन दो सालों में मराठा साम्राज्य तुंगभद्रा नदी से कावेरी तक फैल गया। अभियान की शुरुआत में शिवाजी महाराज के पास 50 किले थे, लेकिन इन दो सालों में शिवाजी महाराज ने 360 किलों में जीत हासिल की। सभी किले युद्ध में नहीं जीते गए, बल्कि कुछ किले रणनीति के साथ मराठा साम्राज्य में शामिल किए गए। महाराष्ट्र मंडल के छत्रपति शिवाजी महाराज सभागृह में ‘हिंदवी स्वराज्य से साम्राज्य तक’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के पहले दिन भारतीय विद्या पारंगण पुणे से पहुंचे विक्रम सिंह मोहिते ने इस आशय की जानकारी दी।मोहिते ने कहा कि छत्रपति शिवाजी का दक्षिण दिग्विजय (1676-1678), उनके जीवन की सबसे लंबी और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण विजय यात्रा थी। राज्याभिषेक के बाद स्वराज्य का विस्तार करने और मुगलों के खिलाफ अंतिम लड़ाई के लिए मजबूत आर्थिक-भौगोलिक आधार तैयार करने के लिए यह अभियान चलाया गया। इस महाअभियान की शुरुआत सन् 1676 को हुई। दक्षिण की ओर बढ़ते हुए, उन्होंने गोलकुंडा के सुल्तान कुतुबशाह के साथ एक ऐतिहासिक मैत्री संधि की। सुल्तान ने मराठों की बढ़ती ताकत से भयभीत होकर उन्हें भारी धन और तोपखाने की मदद दी।विक्रम सिंह मोहिते ने आगे बताया कि दक्षिण दिग्विजय अभियान के दौरान मराठा सेना आगे बढ़ते हुए कर्नाटक और तमिलनाडु के विस्तृत क्षेत्रों को अपने कब्जे में लिया। उन्होंने आदिलशाह से जींजी और वेल्लोर के अभेद्य किलों को जीत लिया। इससे मराठा साम्राज्य का राजकोष कई गुना बढ़ गया और दक्षिण में मुगलों के विस्तार को रोकने के लिए एक मजबूत मराठा सत्ता स्थापित हो गई। मोहिते ने समझाया कि राजा अपनी सल्तनत का होता लेकिन महाराजा तो राजाजों का भी राजा होता है। इसी तरह छत्रपति शिवाजी महाराजा थे।मोहिते के अनुसार उनका राज्याभिषेक हुआ था लेकिन असल में वह राज्य का नहीं राजा का अभिषेक हुआ था, अनेकानेक दायित्व व कर्त्तव्य बोध के साथ। वहीं शिवाजी महाराज छत्रपति थे। छत्रपति का आशय राजा के सर पर छत्र का होना है लेकिन शिवाजी के संदर्भ में छत्रपति का मतलब प्रजा को अपनी छत्रछाया में लेने वाला होता है अर्थात सही मायनों में शिवाजी छत्रपति व महाराजा थे जिनका राजा अभिषेक हुआ था।कार्यशाला के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के महानगर प्रचारक मनोज कश्यप ने कहा कि हिंदुस्तान में रहने वाला हिंदुस्तानी है, सनातनी है। यहीं शिवाजी जैसे पराक्रमी महाराज भी हैं, जिन्होंने हिंदवी स्वराज की स्थापना की। उनके बारे में जितनी भी जानकारी हासिल करो, कम है। ऐसे कार्यक्रम में शामिल होने वाले हर व्यक्ति को कॉपी-पेन लेकर बैठना चाहिए क्योंकि यहां ऐसी- ऐसी जानकारी और तथ्य बताए- दिखाए जाएंगे, जिसे आप दोबारा आसानी से देख, सुन या ढूंढ नहीं पाएंगे। इस तरह महाराष्ट्र मंडल में यह आयोजन प्रशंसनीय है।कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे मंडल अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज को हमारे पाठ्यक्रम में शामिल करना चाहिए। ताकि अपने शुरुआती शैक्षणिक जीवन में ही बच्चे शिवाजी महाराज के बारे में आवश्यक जानकारी हासिल कर उनसे प्रेरित हो सकें। महाराष्ट्र मंडल गत चार वर्षों 19 फरवरी को शिवाजी जयंती और 6 जून को शिवाजी राज्याभिषेक दिवस समारोह का धूमधाम से आयोजन कर रहा है। वहीं प्रति माह 19 तारीख को शिवाजी महाराज की महाआरती के अभियान को भी अब चार साल होने को आए हैं। काले ने कहा कि महाराष्ट्र मंडल में शिवाजी महाराज से संबंधित कार्यक्रमों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अब हमने अलग से छत्रपति शिवाजी महाराज कार्यक्रम आयोजन समिति गठित की है, जो सिर्फ शिवाजी महाराज से संबंधित कार्यक्रम ही आयोजित करेगी। यह कार्यशाला भी इसी नवगठित समिति ने आयोजित की है। इसमें बड़ी संख्या में युवा प्रतिभागियों के साथ- साथ हर आयु के लोग भी उपस्थित हैं। कार्यक्रम का संचालन छत्रपति शिवाजी महाराज कार्यक्रम आयोजन समिति के पुरुष अध्यक्ष गणेशा जाधव पाटिल और महिला प्रमुख रीना रितेश बाबर ने किया। समिति के समन्वयक अभिषेक बक्षी ने आभार प्रदर्शन किया।
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-निर्माण कार्यों में तेजी लाने और गुणवत्ता बनाए रखने के दिए सख्त निर्देश
भिलाई। नगर पालिक निगम भिलाई की आयुक्त सुश्री सुरूचि सिंह ने 'मॉर्निंग विजिट' के तहत शहर के विभिन्न वार्डों और प्रमुख विकास परियोजनाओं का धरातलीय निरीक्षण किया। आयुक्त ने निर्माण कार्यों को समय-सीमा के भीतर काम पूरा करने की हिदायत दी।आयुक्त ने गोठान की व्यवस्थाओं को देखा और मवेशियों के लिए चारे-पानी के समुचित प्रबंध सहित स्वच्छता बनाए रखने के निर्देश दिए। युवाओं और खेल प्रेमियों के लिए तैयार हो रहे निर्माणाधीन स्विमिंग पूल, हॉर्स राइडिंग, स्केटिंग ट्रैक सहित नालंदा परिसर का निरीक्षण कर गुणवत्ता युक्त कार्य के साथ निर्माण कार्य में तेजी लाने को कहा। शहर की लाइफलाइन 77 MLD वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का अवलोकन कर शुद्ध पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ विभिन्न स्थलों के सैंपल परीक्षण करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही कचांदुर में बन रहे निर्माणाधीन एसटीपी का बारीकी से निरीक्षण किया गया, यह शासन की महत्वपूर्ण बड़ी योजना में से है। इस ट्रीटमेन्ट प्लांट के निर्माण पश्चात् कोसानाला एवं तेलहा नाला के अपशिष्ट जल का उपचार कर औद्योगिक, कृषि, बागवानी एवं अन्य कार्य हेतु उपयोग किया जाएगा।खुर्सीपार स्थित एसएलआरएम सेंटर का भी जायजा लिया गया, जहां कचरा प्रबंधन को और दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए। निरीक्षण के दौरान जोन आयुक्त डी. के. कोसरिया, कार्यपालन अभियंता संजय अग्रवाल एवं सुनील जैन, स्वास्थ्य अधिकारी जावेद अली, सहायक अभियंता फत्ते लाल साहू, श्वेता वर्मा, उप अभियंता पुरुषोत्तम सिन्हा, अशोक देवांगन, चंदन निर्मल, विनय शर्मा सहित निगम के अन्य विभागीय अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित थे। - रायपुर ।प्रेस क्लब में स्वदेश ज्योति के मैनेजिंग एडिटर श्री अक्षत शर्मा का आत्मीय स्वागत किया गया। इस अवसर पर प्रेस क्लब अध्यक्ष मोहन तिवारी ने उन्हें प्रेस क्लब का पारंपरिक गमछा पहनाकर सम्मानित किया।कार्यक्रम में स्वदेश में अलग-अलग समय पर कार्य कर चुके वरिष्ठ पत्रकारों ने श्री अक्षत शर्मा की उपस्थिति पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए अपने अनुभव साझा किए। वरिष्ठ पत्रकारों ने स्वदेश में उनके साथ काम करने के दौरान की यादों को साझा किया और पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके योगदान को सराहा।संवाद कार्यक्रम के दौरान श्री अक्षत शर्मा ने वर्तमान पत्रकारिता के बदलते स्वरूप, डिजिटल मीडिया की चुनौतियों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के प्रयोग और उसके प्रभावों पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि एआई पत्रकारिता के लिए एक उपयोगी तकनीक साबित हो सकती है, लेकिन इसके साथ ही इसके दुरुपयोग और पत्रकारों की रचनात्मकता व बौद्धिक क्षमता पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर सजग रहने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि तकनीक का उपयोग पत्रकारिता को मजबूत बनाने के लिए होना चाहिए, न कि पत्रकारों की सोच और विश्लेषण क्षमता का विकल्प बनने के लिए। पत्रकारिता में मानवीय संवेदनाओं, तथ्यों की पड़ताल और निष्पक्ष दृष्टिकोण का महत्व हमेशा बना रहेगा।इस अवसर पर प्रेस क्लब के अध्यक्ष मोहन तिवारी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा समाधान भी है और उतनी ही बड़ी चुनौती भी। उन्होंने कहा कि एआई जहां पत्रकारों के कार्य को अधिक तेज, प्रभावी और शोधपरक बनाने में सहायक सिद्ध हो रहा है, वहीं दूसरी ओर यह पत्रकारों के पारंपरिक कार्य और रोजगार के स्वरूप में तकनीकी हस्तक्षेप के कारण नई चुनौतियां भी पैदा कर रहा है। इसलिए पत्रकारों को तकनीक के साथ स्वयं को लगातार अपडेट रखते हुए अपनी मौलिकता और विश्वसनीयता बनाए रखनी होगी।कार्यक्रम का संचालन संवादात्मक वातावरण में हुआ, जिसमें पत्रकारों ने पत्रकारिता के भविष्य, तकनीक और मीडिया की बदलती भूमिका पर खुलकर विचार साझा किए।इस अवसर पर प्रेस क्लब के कोषाध्यक्ष दिनेश यदु, वरिष्ठ पत्रकार प्रशांत शर्मा, नरेंद्र बंगाले , चंद्रकांत दौंड, प्रहलाद दमाहे, प्रत्यूष शर्मा, जावेद खान, रमेश पाण्डेय पंकज चौहान, विनय घाटगे, विजय मिश्रा ,मनोज देवांगन, लवकुश शुक्ला , हेमन्त डोंगरे, आशीष झा, देवेंद्र सिन्हा, लवलेश द्विवेदी विक्रम साहू ,सहित बड़ी संख्या में पत्रकार उपस्थित रहे।
- -महाराष्ट्र मंडल के फिजियोथेरेपी सेंटर की डॉक्टर काले ने सुझाए सुरक्षित जीवन के लिए सावधानियांरायपुर। आमतौर पर 40 की उम्र के बाद शरीर में जकड़न और हाथ-पैर में दर्द की शिकायत ज्यादातर लोगों को रहती है। बार-बार पीठ में दर्द, उठने- बैठने पर जोड़ों में दर्द, सुबह उठने पर शरीर में अड़कन जैसी समस्या अगर लंबे समय से बनी हुई है, तो आपको त्वरित एक अच्छे फिजियोथेपिस्ट से मिलना चाहिए। उक्त बातें महाराष्ट्र मंडल की फिजियोथेरेपी सेंटर में अपनी सेवाएं दे रहीं डाॅ. अंकिता काले ने कहीं।डाॅ. काले ने आगे कहा कि शरीर में लगातार दर्द, अकड़न या चलने-फिरने में दिक्कत होना रोज़मर्रा की मामूली परेशानी नहीं है। ये इस बात के शुरुआती संकेत हो सकते हैं कि आपके शरीर को पेशेवर देखभाल की ज़रूरत है। आमतौर पर ज्यादातर लोग गुगल या चैट जीपीटी की मदद से पूछ लेते हैं, लेकिन रोज आ रही शारीरिक तकलीफ इस बात का संकेत है कि आपको फिजियो कराने की जरूरत है। शुरुआती उपचार से दर्द कम करने, चलने-फिरने में सुधार करने और दीर्घकालिक समस्याओं से बचाव में मदद मिलती है। कई लोग फिजियोथेरेपिस्ट से मिलने में बहुत देर कर देते हैं, जिससे ठीक होने में अधिक समय लग सकता है।फिजियोथेरेपिस्ट की ज़रूरत के संकेत:-0. गतिविधि के बाद कभी- कभार होने वाला दर्द आम बात है, लेकिन एक सप्ताह से अधिक समय तक रहने वाला दर्द स्पष्ट संकेत है कि कुछ गड़बड़ है। तीव्र दर्द आमतौर पर आराम करने से ठीक हो जाता है, लेकिन लगातार दर्द मांसपेशियों में खिंचाव, जोड़ों की समस्या या तंत्रिका संबंधी परेशानी का संकेत हो सकता है।0. बार-बार होने वाले पीठ या गर्दन का दर्द फिजियोथेरेपिस्ट की आवश्यकता का एक सबसे आम संकेत है। गलत मुद्रा, लंबे समय तक बैठे रहना, मांसपेशियों में असंतुलन और कमजोर कोर मांसपेशियां अक्सर बार-बार होने वाले दर्द का कारण बनती है।0. चलते या खड़े होते समय घुटनों या कूल्हों में होने वाले दर्द को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। जोड़ों में अकड़न, घुटनों या कूल्हों में दर्द गठिया, आसपास की मांसपेशियों की कमजोरी या गलत चलने- फिरने के तरीके के कारण हो सकता है।0. सुबह के समय होने वाली अकड़न, खासकर अगर यह कुछ मिनटों से अधिक समय तक बनी रहे, तो मांसपेशियों में जकड़न या गतिशीलता में कमी का संकेत हो सकती है।0. खेल चोट, लिगामेंट की चोट या गिरने के बाद लगातार होने वाला दर्द अक्सर अपूर्ण उपचार का संकेत देता है। इससे घाव के निशान और कमजोरी विकसित हो सकती है, जिससे दोबारा चोट लगने का खतरा बढ़ जाता है।0. बैठने, चलने, सीढ़ियाँ चढ़ने या रोज़मर्रा के काम करने में दर्द होता है, तो यह इस बात का प्रबल संकेत है कि आपको फिजियोथेरेपी की आवश्यकता है।0. कंधे, बांह या पैर को स्वतंत्र रूप से हिलाने में कठिनाई जैसे कि कंधे में अकड़न या फ्रोजन शोल्डर, जोड़ों या मांसपेशियों की गति में प्रतिबंध का संकेत देती है।0. सुन्नपन, झुनझुनी या जलन जैसी संवेदनाएं अक्सर तंत्रिका दर्द, साइटिका या तंत्रिका संपीड़न का संकेत देती हैं।0. संतुलन बिगड़ने और बार-बार गिरने की समस्या कमजोर कोर मांसपेशियों, खराब समन्वय या वेस्टिबुलर समस्याओं के कारण हो सकती है।0. सर्जरी या लंबे समय तक बिस्तर पर आराम करने के बाद, मांसपेशियों का कमजोर होना और जोड़ों में अकड़न होना आम बात है।
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-कोलकाता में आयोजित 17वें सीएससी स्थापना दिवस समारोह में धमतरी के कृषि नवाचार की सराहना, ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल कृषि सेवाओं के विस्तार का बना मॉडल
रायपुर / कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) ई-गवर्नेंस सर्विसेज इंडिया लिमिटेड के 17वें स्थापना दिवस के अवसर पर पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित धोनो धान्यो ऑडिटोरियम में आयोजित राष्ट्रीय समारोह में छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले की अभिनव पहल PACS ड्रोन मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान मिली। कार्यक्रम में जिले द्वारा प्राथमिक कृषि साख समितियों (PACS) के माध्यम से संचालित ड्रोन सेवाओं, डिजिटल क्रॉप सर्वे तथा किसान पंजीयन (फार्मर रजिस्ट्री) जैसे नवाचारों की सराहना की गई। समारोह के मुख्य अतिथि पश्चिम बंगाल शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री दिलीप घोष थे।कार्यक्रम के दौरान मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत धमतरी श्री जयंत नाहटा ने PACS के माध्यम से कृषि उन्नयन“ विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में भाग लेते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में ड्रोन सेवाओं के विस्तार तथा PACS को ’वन स्टॉप रूरल सर्विस सेंटर’ के रूप में विकसित करने की कार्ययोजना प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि वर्तमान में जिले की 10 प्राथमिक कृषि साख समितियों के माध्यम से ड्रोन द्वारा तरल उर्वरकों का छिड़काव किया जा रहा है, जो छत्तीसगढ़ में धमतरी जिले की एक अभिनव पहल है।उन्होंने कहा कि भविष्य में PACS के माध्यम से किसानों को कृषि यंत्रीकरण, डिजिटल सेवाएं, फसल सर्वेक्षण, किसान पंजीयन, वित्तीय एवं बैंकिंग सेवाओं सहित विभिन्न सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने की योजना है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक कृषि सेवाओं की पहुंच बढ़ेगी तथा किसानों को तकनीक आधारित सुविधाओं का लाभ सहजता से प्राप्त होगा।कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के उपयोग को किसानों की आय बढ़ाने, कृषि लागत कम करने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य करने वाले सीएससी-व्हीएलई को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल शासन के सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के अपर मुख्य सचिव, भारत सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय के सचिव तथा सीएससी ई-गवर्नेंस सर्विसेज इंडिया लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अखिल कुमार सहित देशभर के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी एवं सीएससी प्रतिनिधि उपस्थित थे। -
-217 मामलों की सुनवाई की गई
राजनांदगांव । छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के निर्देशानुसार तथा प्रधान जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण राजनांदगांव श्री विजय कुमार होता के मार्गदर्शन में राजनांदगांव, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी एवं खैरागढ़-छुईखदान-गण्डई जिले में विशेष लोक अदालत का आयोजन किया गया। जिला एवं तालुक स्तर पर आयोजित विशेष लोक अदालत में न्यायालय में लंबित, धारा-138 परक्राम्य लिखत अधिनियम के प्री-लिटिगेशन के प्रकरणों को निराकरण के लिए चिन्हित किया गया। विशेष लोक अदालत के लिए कुल 9 खंडपीठों का गठन किया गया। विशेष लोक अदालत में 217 मामलों की सुनवाई की गई। जिसमें 3 मामले प्री-लिटिगेशन के थे। विशेष लोक अदालत के माध्यम से लगभग 1 करोड़ 45 लाख 40 हजार 53 रूपए के 38 मामलों का सफलतापूर्वक निपटान किया गया। विशेष लोक अदालत में आपराधिक राजीनामा योग्य मामले, धारा 138 एनआई एक्ट से संबंधित मामले अर्थात् चेक से संबंधित मामलों की सुनवाई की गई। - बिलासपुर । छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर के चिकित्सकों ने आपसी समन्वय, त्वरित निर्णय और विशेषज्ञ उपचार से चाकू लगने से गंभीर रूप से घायल 15 वर्षीय किशोर की जान बचाने में सफलता प्राप्त की है। सिरगिट्टी निवासी किशोर पर 11 जुलाई 2026 की शाम लगभग 8:30 बजे चाकू से हमला किया गया था। गंभीर अवस्था में उसे रात लगभग 9 बजे सिम्स के आपातकालीन विभाग में भर्ती कराया गया इसकी जानकारी डीन डॉ रमणेश मूर्ति को प्राप्त होने पर तत्काल निर्देश पर उपचार प्रारंभ किया गया।चिकित्सकों के अनुसार चाकू का वार पेट और छाती के महत्वपूर्ण अंगों तक पहुंच गया था। चोट इतनी गंभीर थी कि पेट की दीवार क्षतिग्रस्त होकर छोटी आंतें बाहर निकल आई थीं तथा दाहिनी ओर छाती में लगी गहरी चोट के कारण फेफड़ों पर दबाव बन गया था, जिससे मरीज को सांस लेने में अत्यधिक कठिनाई हो रही थी। आंतों में कई स्थानों पर छेद होने से पेरिटोनाइटिस, सेप्सिस और अत्यधिक रक्तस्राव जैसी जानलेवा जटिलताओं का खतरा उत्पन्न हो गया था। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में प्रत्येक मिनट मरीज के जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए सर्जरी विभाग को तत्काल सक्रिय किया गया। वरिष्ठ सर्जन डॉ. बृजेश पटेल के निर्देशन में आपातकालीन ऑपरेशन किया गया। शल्य चिकित्सा टीम में डॉ. राजेंद्र कुमार सिंह, डॉ. शुभा एक्का, डॉ. रवि राजवाड़े एवं पी.जी. रेजिडेंट डॉ. कुणाल शामिल रहे। ऑपरेशन थिएटर में ओ.टी. सिस्टर अंजिता ने महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया।ऑपरेशन के दौरान छोटी आंतों में कई स्थानों पर हुए छेदों की सफलतापूर्वक मरम्मत की गई तथा पेट की गुहा में जमा रक्त को निकालकर आंतरिक रक्तस्राव को नियंत्रित किया गया। चिकित्सकों ने बताया कि समय पर अस्पताल पहुंचने और शीघ्र शल्य चिकित्सा किए जाने के कारण मरीज की जान बचाई जा सकी।शल्य चिकित्सा के पश्चात मरीज को एनेस्थीसिया विभाग की गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में भर्ती किया गया, जहां विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति के नेतृत्व में सहायक प्रोफेसर डॉ. अपर्णा मिश्रा एवं पी.जी. रेजिडेंट्स की टीम ने 24 घंटे निगरानी रखते हुए वेंटिलेटरी सपोर्ट, संक्रमण नियंत्रण एवं दर्द प्रबंधन किया। स्वास्थ्य में सुधार होने पर मरीज को सर्जरी वार्ड में स्थानांतरित कर दिया गया। वर्तमान में उसकी स्थिति स्थिर है तथा वह खतरे से बाहर है।चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने कहा कि चाकू लगने जैसे गंभीर ट्रॉमा मामलों में 'गोल्डन ऑवर' के भीतर उपचार मिलना अत्यंत आवश्यक होता है। सिम्स के इमरजेंसी, सर्जरी एवं एनेस्थीसिया विभागों के समन्वित प्रयासों तथा आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के कारण एक और गंभीर मरीज का जीवन बचाया जा सका है। सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने इस सफलता पर पूरी चिकित्सा टीम की सराहना करते हुए कहा कि यह उपलब्धि संस्थान की आधुनिक चिकित्सा अधोसंरचना, विशेषज्ञ चिकित्सकों की दक्षता, अनुशासित कार्यप्रणाली एवं टीम भावना का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि सिम्स चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और गुणवत्तापूर्ण रोगी सेवा के क्षेत्र में निरंतर उत्कृष्ट कार्य कर रहा है तथा भविष्य में भी मरीजों को सर्वोत्तम स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।
- रायपुर.। छत्तीसगढ़ विधानसभा में शासन, भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर लगातार करीब 14 घंटे तक चली चर्चा के बाद शुक्रवार देर रात मुख्यमंत्री विष्णु देव साय नीत भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार के खिलाफ कांग्रेस का अविश्वास प्रस्ताव गिर गया। अविश्वास प्रस्ताव के गिरने के साथ पांच दिवसीय मानसून सत्र का समापन भी हो गया। सत्ता पक्ष ने किसानों, आदिवासियों, युवाओं और महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार की कथित विफलताओं को लेकर कांग्रेस के 136 सूत्री ''आरोपपत्र'' को खारिज कर दिया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय समेत कुल 17 विधायकों ने चर्चा में भाग लिया जो शुक्रवार दोपहर बाद शुरू हुई और देर रात करीब ढाई बजे समाप्त हुई। कांग्रेस ने 136 सूत्री ''आरोपपत्र'' पेश करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा सरकार अपने ढाई वर्ष के कार्यकाल में किसानों, आदिवासियों, युवाओं और महिलाओं की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकी। चर्चा का जवाब देते हुए साय ने अविश्वास प्रस्ताव को ''खोखला, निराधार और राजनीतिक नौटंकी'' करार दिया।उन्होंने कहा कि यदि ''झूठ और भ्रष्टाचार'' में पीएचडी का कोई पाठ्यक्रम होता, तो कांग्रेस के सदस्य उसमें विशेषज्ञ होते। साय ने सवाल किया कि क्या यह प्रस्ताव उन तीन करोड़ छत्तीसगढ़वासियों के खिलाफ है, जिन्होंने 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को सत्ता सौंपी और बाद में लोकसभा तथा स्थानीय निकाय चुनावों में भी पार्टी का समर्थन किया। उन्होंने कहा, ''शायद वे यह पचा नहीं पा रहे हैं कि एक गांव के आदिवासी किसान का बेटा आज मुख्यमंत्री है।'' साय ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर कटाक्षा करते हुए दावा किया कि ''राजा'' (भूपेश बघेल) और ''महाराजा'' (टीएस सिंह देव) के बीच नेतृत्व को लेकर चली खींचतान और आपसी गुटबाजी से राज्य का शासन प्रभावित हुआ। साय ने कहा कि उनकी सरकार की कथनी और करनी में समानता है। उन्होंने 25 लाख किसानों से 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी, लंबित बोनस के रूप में 3,716 करोड़ रुपये के भुगतान, सिंचाई क्षमता दोगुनी करने तथा 11,000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को प्रशासनिक स्वीकृति देने जैसी उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने बस्तर से माओवादियों को पूरी तरह हटाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और राज्य सुरक्षा बलों को श्रेय दिया। प्रस्ताव का समर्थन करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि राज्य को एक ''अदृश्य शक्ति'' चला रही है।'' बघेल ने कानून-व्यवस्था और पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम (पेसा) के क्रियान्वयन को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि जहां नक्सलवाद कम हुआ है, वहीं अब ''भू-माफिया'' बस्तर की खनिज संपदा का दोहन कर रहे हैं। बघेल ने कहा, ''नक्सली भले ही चले गए हों, लेकिन भू-माफिया आ गए हैं। इसलिए बस्तर के लोग चिंतित हैं।''इससे पहले चर्चा की शुरुआत करते हुए नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने कहा कि सरकार ने सत्ता में अपने 135 सप्ताह पूरे कर लिए हैं और 136वें सप्ताह में प्रवेश कर चुकी है। इसलिए विपक्ष ने सरकार की कथित विफलताओं का दस्तावेजीकरण करते हुए 136 सूत्री ''आरोपपत्र'' तैयार किया है। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कांग्रेस के आरोपों का खंडन करते हुए दावा किया कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार आबकारी, कोयला और छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) भर्ती घोटालों सहित कई मामलों में घिरी रही। अविश्वास प्रस्ताव गिरने के बाद विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह ने सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी।
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-प्रभावित परिवारों तक बिना विलंब राहत सामग्री एवं आवश्यक सहायता पहुँचाने के निर्देश
रायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने बिलासपुर एवं जांजगीर-चांपा जिलों में हुई अत्यधिक वर्षा एवं जलभराव की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता नहीं बरतने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि जिला प्रशासन पूरी सतर्कता और तत्परता के साथ कार्य करते हुए प्रत्येक प्रभावित एवं जरूरतमंद व्यक्ति तक समय पर राहत और आवश्यक सहायता सुनिश्चित करे।मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री, भोजन, पेयजल, चिकित्सा सहित सभी आवश्यक सुविधाएँ बिना किसी विलंब के उपलब्ध कराई जाएँ। साथ ही जलनिकासी की त्वरित व्यवस्था, क्षतिग्रस्त मार्गों की शीघ्र बहाली तथा जनसुविधाओं को जल्द सामान्य करने के लिए सभी उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और प्रभावित क्षेत्रों की निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है। आवश्यकता के अनुरूप अतिरिक्त संसाधन एवं सहायता भी तत्काल उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि राहत कार्यों में किसी प्रकार की बाधा न आए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेशवासियों की सुरक्षा तथा प्रत्येक प्रभावित परिवार तक समय पर राहत पहुँचाना राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। राज्य सरकार पूरी संवेदनशीलता, तत्परता और प्रतिबद्धता के साथ प्रभावित नागरिकों के साथ खड़ी है तथा जनजीवन को शीघ्र सामान्य बनाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। - -मोबाइल और डिजिटल एडिक्शन से बचें, मानव बुद्धि ही सर्वाेच्च है: राज्यपाल श्री डेकारायपुर । राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा कि बच्चों के बीच आकर उन्हें अपना बचपन याद आ जाता है। आज जीवनशैली पूरी तरह बदल चुकी है। उन्होंने कहा कि उनके समय में सीमित संसाधनों के बीच पढ़ाई होती थी, तथा मेहनत और लगन ही सफलता का आधार थी। आज इंटरनेट और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के इस युग में सुविधाएं बढ़ी हैं, लेकिन विद्यार्थियों को अपनी मौलिक सोच और अध्ययन की आदत को बनाए रखना चाहिए।राज्यपाल श्री डेका ने आज रायपुर के विमतारा ऑडिटोरियम में पीएसवाय एजुकेशन एवं रिसर्च फेडरेशन द्वारा आयोजित राष्ट्रीय उत्कृष्टता सम्मान समारोह एवं पदक तथा निधि वितरण 2026 के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इस अवसर पर प्रदेश के विभिन्न जिलों के मेधावी विद्यार्थियों एवं उत्कृष्ट जिला शिक्षा अधिकारियों को सम्मानित किया गया।इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि छात्र जीवन की मित्रता सबसे निर्मल और अमूल्य होती है, जिसे जीवनभर संजोकर रखना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से किसी भी प्रकार की लत से दूर रहने का आह्वान करते हुए कहा कि डिजिटल एडिक्शन भी अन्य नशों की तरह हानिकारक है। मोबाइल का उपयोग केवल आवश्यक अध्ययन और उपयोगी कार्यों तक सीमित होना चाहिए।उन्होंने कहा कि आज के समय में गूगल और एआई उपयोगी साधन हैं, लेकिन वे मानव बुद्धि का विकल्प नहीं बन सकते। जीवन में गूगल इफेक्ट नहीं होना चाहिए। सोचने, समझने और निर्णय लेने की क्षमता ही मनुष्य की सबसे बड़ी शक्ति है।राज्यपाल ने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे बच्चों की प्रतिभा और रुचि को पहचानें तथा उसी दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें। उन्होंने कहा कि हर बच्चा आईआईटी या मेडिकल के क्षेत्र में ही जाए, यह आवश्यक नहीं है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में विद्यार्थियों की विविध प्रतिभाओं को विकसित करने के लिए अनेक नए पाठ्यक्रम और विकल्प उपलब्ध कराए गए हैं। आज प्रत्येक क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं हैं और नवाचार के लिए पर्याप्त अवसर मौजूद हैं।उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपने सपने बड़े रखें। व्यक्ति किस पृष्ठभूमि से आता है, यह महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि उसकी मेहनत, लगन और संकल्प ही उसका भविष्य तय करते हैं। उन्होंने कहा कि केवल सफल व्यक्ति ही खुश हो, यह आवश्यक नहीं है, बल्कि संतुष्ट व्यक्ति ही वास्तविक रूप से प्रसन्न रहता है। परिवार, पड़ोसियों और मित्रों के साथ सौहार्द एवं शांति से जीवन जीना ही सच्ची सफलता है।राज्यपाल ने कहा कि आज यहां सम्मानित होने वाले प्रत्येक विद्यार्थी की उपलब्धि केवल उसकी व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि उसके माता-पिता के त्याग और गुरुजनों के मार्गदर्शन का भी परिणाम है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों की तुलना दूसरों से न करने का आग्रह करते हुए कहा कि प्रत्येक बच्चा अपने आप में विशिष्ट होता है। उसे अंधी प्रतिस्पर्धा में धकेलने के बजाय उसकी रुचि और क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ने का अवसर देना चाहिए। जब बच्चा अपनी पसंद के क्षेत्र में कार्य करता है, तभी उसकी उत्कृष्ट प्रतिभा निखरकर सामने आती है।उन्होंने सभी विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि वे आगे चलकर आत्मनिर्भर भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि, विधायक तथा पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्री धरमलाल कौशिक ने कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं। प्रत्येक विद्यार्थी का एक स्पष्ट लक्ष्य होना चाहिए और उस लक्ष्य को प्राप्त करने का सबसे प्रभावी माध्यम शिक्षा है। शिक्षा पर जितना अधिक ध्यान दिया जाएगा, भविष्य उतना ही उज्ज्वल होगा।विधायक श्री पुरंदर मिश्रा ने भी विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए सफलता के लिए अनुशासन, परिश्रम और निरंतर सीखने की आवश्यकता पर बल दिया।कार्यक्रम के प्रारंभ में पीएसवाय शैक्षणिक एवं अनुसंधान संघ के निदेशक डॉ. एस.के. मिश्रा ने कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। अंत में मुख्य योजना समन्वयक पीएसवाय श्रीमती शुभ्रा शुक्ला मिश्रा ने आभार व्यक्त किया। समारोह में सीबीएसई के क्षेत्रीय निदेशक श्री जगदीश बर्मन, पीएसवाय के पदाधिकारी, प्रदेश के सभी संभागों से आए जिला शिक्षा अधिकारी, प्राचार्य, शिक्षक, सम्मानित विद्यार्थी, उनके अभिभावक उपस्थित थे।
- -24 घंटे, सातों दिन संचालित व्यवस्था, 8 हजार अधिकारी शिकायतों के समयबद्ध समाधान में जुटे-एक माह में ही जनता के भरोसे का सबसे सशक्त माध्यम बनी सीएम हेल्पलाइन, 42 हजार से अधिक शिकायतों का हुआ समाधानरायपुर / मुख्यमंत्री हेल्पलाइन ने अपने संचालन के पहले ही महीने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। 13 जुलाई 2026 तक इसके माध्यम से 42 हजार 653 शिकायतों का सफलतापूर्वक निराकरण किया जा चुका है। इनमें 13 हजार 600 शिकायतकर्ताओं ने समाधान से संतुष्ट होकर स्वयं सकारात्मक अभिमत के साथ अपने प्रकरण बंद कराए।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक की समस्या का त्वरित, पारदर्शी और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। इसी उद्देश्य से शुरू की गई मुख्यमंत्री हेल्पलाइन-1076 आज आमजन और शासन के बीच विश्वास का मजबूत सेतु बनकर उभर रही है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि किसी भी प्रकार की समस्या होने पर वे मुख्यमंत्री हेल्पलाइन-1076 का अधिकाधिक उपयोग करें तथा अपने आसपास के लोगों को भी इसकी जानकारी दें, ताकि हर जरूरतमंद नागरिक तक इस व्यवस्था का लाभ पहुँच सके।मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन केवल शिकायत दर्ज कराने की सुविधा नहीं है, बल्कि यह सरकार की जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित कार्यसंस्कृति का सशक्त उदाहरण है। हेल्पलाइन चौबीसों घंटे और सप्ताह के सातों दिन संचालित होती है। इसके लिए समर्पित कॉल सेंटर में पर्याप्त मानव संसाधन तैनात हैं, जो लगातार शिकायतें दर्ज कर संबंधित विभागों तक पहुँचाते हैं। शिकायतों के निराकरण के लिए स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की गई है तथा तहसीलदार से लेकर सचिव स्तर तक लगभग आठ हजार अधिकारी इस व्यवस्था से जुड़े हैं, जिससे प्रत्येक शिकायत पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित हो रही है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारी सरकार ऐसा प्रशासन विकसित कर रही है, जहाँ नागरिकों को अपनी समस्या लेकर कार्यालय-दर-कार्यालय भटकना न पड़े। अब केवल एक फोन कॉल के माध्यम से शिकायत दर्ज होती है, उसकी सतत मॉनिटरिंग होती है और निर्धारित समय-सीमा में समाधान सुनिश्चित किया जाता है। इससे शासन और जनता के बीच संवाद अधिक सरल, पारदर्शी और प्रभावी हुआ है तथा प्रशासन के प्रति लोगों का विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है।उन्होंने कहा कि तकनीक आधारित यह व्यवस्था सुशासन को व्यवहार में उतारने का प्रभावी माध्यम बन रही है। आने वाले समय में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन का दायरा और अधिक व्यापक किया जाएगा, ताकि प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक भी त्वरित और गुणवत्तापूर्ण प्रशासनिक सेवाएँ पहुँच सकें।विभागवार आँकड़े बताते हैं कि ऊर्जा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभागों से संबंधित शिकायतें सर्वाधिक प्राप्त हुईं। वहीं समाधान के मामले में भी इन विभागों ने उल्लेखनीय कार्य करते हुए क्रमशः 3,066, 2,530 और 1,314 शिकायतों का सफलतापूर्वक निराकरण किया। महज एक माह में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन-1076 ने यह साबित कर दिया है कि जब शासन संवेदनशीलता, तकनीक और जवाबदेही के साथ कार्य करता है, तब सुशासन का लाभ सीधे नागरिकों तक पहुँचता है। "समस्या तुंहर, समाधान हमर" की भावना के साथ संचालित यह पहल आज विकसित छत्तीसगढ़ के जन-केंद्रित, पारदर्शी और उत्तरदायी शासन मॉडल की मजबूत पहचान बन चुकी है।
- महासमुंद / जिले में खरीफ मौसम के दौरान धान के स्थान पर वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कृषि विभाग द्वारा लगातार किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी प्रयास के तहत जिले में लगभग 1,000 हेक्टेयर क्षेत्र में मूंगफली की खेती की जा रही है। यह पहल किसानों की आय बढ़ाने, जल संरक्षण तथा फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रही है। कृषि उपसंचालक श्री एफ आर कश्यप ने बताया कि सरायपाली विकासखंड के ग्राम बोंदानवापाली के किसान श्री फागू लाल कैवर्त और श्री नंदकुमार कैवर्त इस बदलाव के साक्षी हैं। दोनों किसानों ने राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन के अंतर्गत धान के स्थान पर 0.40-0.40 हेक्टेयर क्षेत्र में 1 जुलाई 2026 को मूंगफली की बुवाई की।इन किसानों का कहना है कि मूंगफली की खेती में धान की तुलना में कम पानी की आवश्यकता होती है। साथ ही इसकी लागत अपेक्षाकृत कम होने के कारण लाभ की संभावना अधिक रहती है। कृषि विभाग के मार्गदर्शन और तकनीकी सहयोग से उन्होंने समय पर बुवाई कर वैज्ञानिक विधियों को अपनाया है, जिससे अच्छी उपज की उम्मीद है।कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, जिले में धान के स्थान पर दलहन, तिलहन एवं अन्य लाभकारी फसलों का रकबा लगातार बढ़ रहा है। मूंगफली जैसी तिलहनी फसलें किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने और जल संसाधनों के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।किसान फागू लाल और नंदकुमार द्वारा की जा रही मूंगफली की खेती क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए उदाहरण बन रहा है। यदि अधिक किसान धान के साथ-साथ वैकल्पिक फसलों को अपनाते हैं, तो इससे खेती अधिक लाभकारी, टिकाऊ और जलवायु अनुकूल बन सकेगी।
- -कठिन चुनौतियों के बीच अपने सपनों को कर रही साकार-संभाग स्तरीय तीरंदाजी प्रतियोगिता में प्रथम स्थान हासिल कर राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए किया क्वालीफाईरायपुर। कठिन परिस्थितियाँ अक्सर जीवन की राह को चुनौतीपूर्ण बना देती हैं, लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति, उचित मार्गदर्शन और निरंतर प्रयास से हर चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है। कोंडागांव जिला प्रशासन तथा महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा कोंडागांव में संचालित छत्तीसगढ़ राज्य बाल कल्याण परिषद, बालिकागृह की शिवबती ने अपने संघर्ष और प्रतिभा के दम पर यह साबित कर दिखाया है।श्रवण दिव्यांग शिवबती का बचपन अनेक कठिनाइयों से भरा रहा। बीमारी के कारण उन्होंने कम उम्र में अपनी माँ को खो दिया और कुछ समय बाद नक्सली हिंसा में पिता का साया भी सिर से उठ गया। माता-पिता के निधन के बाद उनके चाचा ने उन्हें बालिकागृह में प्रवेश दिलाया। जीवन की इन विषम परिस्थितियों के बावजूद शिवबती ने हार मानने के बजाय अपने सपनों को नई दिशा देने का संकल्प लिया।बालिकागृह में उन्हें सुरक्षित वातावरण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, संरक्षण और अपनी प्रतिभा को निखारने के अवसर मिले।तीरंदाजी में रुचि को देखते हुए उन्हें भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के प्रशिक्षकों से प्रशिक्षण दिलाया गया। उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर उनका चयन खेलो इंडिया स्टेट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, बहतराई (बिलासपुर) में हुआ, जहाँ उन्होंने एक वर्ष तक उच्च स्तरीय प्रशिक्षण प्राप्त कर अपनी तकनीकी दक्षता और आत्मविश्वास को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया।महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा बाल कोष निधि से बालिकागृह की बालिकाओं के लिए इंडियन एवं रिकर्व तीरंदाजी उपकरण भी उपलब्ध कराए गए। समय पर मिले संसाधनों, प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन और शिवबती की अथक मेहनत ने उनके सपनों को नई उड़ान दी।वर्तमान में बालिकागृह कोण्डागांव में रहकर नियमित अभ्यास कर रही शिवबती ने जगदलपुर में आयोजित संभाग स्तरीय शालेय तीरंदाजी प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया और राज्य स्तरीय शालेय तीरंदाजी प्रतियोगिता के लिए अपना स्थान सुनिश्चित किया। उनकी यह उपलब्धि संघर्ष, आत्मविश्वास और अवसरों की शक्ति का प्रेरणादायी उदाहरण है। शिवबती की सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि बच्चों को सुरक्षित वातावरण, गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण, उचित मार्गदर्शन और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, तो वे विपरीत परिस्थितियों को पीछे छोड़ते हुए अपने सपनों को साकार कर सकते हैं। आज शिवबती न केवल बालिकागृह की गौरव हैं, बल्कि उन हजारों बच्चों, विशेषकर दिव्यांग बेटियों के लिए प्रेरणा हैं जो चुनौतियों के बीच भी अपने सपनों को पूरा करने का साहस रखती हैं। कोंडागांव जिला प्रशासन, महिला एवं बाल विकास विभाग, छत्तीसगढ़ राज्य बाल कल्याण परिषद एवं बालिकागृह कोण्डागांव परिवार ने शिवबती की इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें राज्य स्तरीय शालेय तीरंदाजी प्रतियोगिता एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ दी हैं और विश्वास व्यक्त किया है कि शिवबती आने वाले समय में राज्य ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी छत्तीसगढ़ का नाम गौरवान्वित करेंगी।
- -कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी के निर्देश पर प्रवर्तन कार्रवाई को मिली गति-किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए कठोर और रिकॉर्ड कार्रवाईरायपुर । कृषि उत्पादन आयुक्त श्री सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ कृषि विभाग गुणवत्तापूर्ण उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने, किसानों के हितों की रक्षा करने तथा कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही स्थापित करने की दिशा में राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रभावी मॉडल के रूप में उभर रहा है।कृषि विभाग द्वारा किसानों को गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराने तथा नकली एवं अमानक उर्वरकों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए व्यापक अभियान चलाया जा है। उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 के तहत चालू खरीफ सीजन के दौरान विभाग द्वारा की गई प्रवर्तन कार्रवाई छत्तीसगढ़ देश के लिए मिसाल बना है। वर्ष 2025 की तुलना में कुल कार्रवाई में 10.25 गुना वृद्धि दर्ज करते हुए विभाग ने 44 से बढ़ाकर 451 मामलों में कार्रवाई की है।बता दें कि कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री श्री रामविचार नेताम के नेतृत्व में कृषि विभाग द्वारा किसानों के हितों की रक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए उर्वरकों की गुणवत्ता, भंडारण, विक्रय एवं वितरण पर राज्यभर में सघन निरीक्षण अभियान संचालित किया जा रहा है। इसके परिणामस्वरूप अमानक उर्वरकों के विक्रय पर प्रभावी अंकुश लगा है तथा कृषि आदानों की पारदर्शी आपूर्ति व्यवस्था सुनिश्चित हुई हैं।कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2026 में प्रवर्तन कार्रवाई के प्रत्येक क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। वहीं गड़बड़ी सख्त कार्रवाई से किसानों का भरोसा विभागों के प्रति बढ़ा है। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष कि तुलना में इस खरीफ सीजन में न्यायालय में प्रस्तुत प्रकरणों की संख्या 4 से बढ़कर 56 हो गई, जबकि जब्ती की कार्रवाई 2 से बढ़कर 98 तक पहुंच गई। इसी प्रकार लाइसेंस निलंबन के मामलों में 3 से बढ़कर 97, लाइसेंस निरस्तीकरण 2 से बढ़कर 10 तथा विक्रय प्रतिबंध की कार्रवाई 33 से बढ़कर 183 हो गई। इसके अतिरिक्त पहली बार 7 एफआईआर भी दर्ज कराई गईं, जो विभाग की कड़ी निगरानी एवं शून्य सहिष्णुता की नीति को दर्शाती हैं।कृषि मंत्री श्री नेताम के नेतृत्व में विभाग ने यह सुनिश्चित किया गया है कि किसानों को केवल प्रमाणित एवं गुणवत्तापूर्ण उर्वरक ही उपलब्ध हों। विभाग द्वारा राज्यभर में नियमित निरीक्षण, नमूना परीक्षण, शिकायतों का त्वरित निराकरण तथा दोषी विक्रेताओं के विरुद्ध कठोर कार्रवाई से किसानों का विश्वास और मजबूत हुआ है।कृषि विभाग का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि कृषि आदानों की गुणवत्ता सुनिश्चित कर किसानों की आय एवं उत्पादकता बढ़ाना भी है। विभाग द्वारा नियमों का कड़ाई से पालन, सतत निगरानी तथा पारदर्शी व्यवस्था के माध्यम से प्रदेश में सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण कृषि वातावरण विकसित किया जा रहा है।






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