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केबीसी में पैतृक संबंध का जिक्र
प्रतापगढ़. उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के बाबूपट्टी गांव के निवासी इन दिनों खुश हैं क्योंकि अभिनेता अमिताभ बच्चन के पैतृक गांव के लोगों को उम्मीद है कि करीब दो दशक पहले किया गया उनसे एक वादा अब पूरा हो सकता है। पट्टी तहसील के निवासी चंद्रप्रकाश तिवारी ने लोकप्रिय क्विज शो 'कौन बनेगा करोड़पति' (केबीसी) में हिस्सा लिया, जिसके बाद यह उम्मीद जगी। कार्यक्रम के दौरान अमिताभ बच्चन ने अपने परिवार का इस क्षेत्र से संबंध स्वीकार किया। वर्ष 2006 में अमिताभ बच्चन की पत्नी जया बच्चन ने बाबूपट्टी गांव का दौरा किया था। यह गांव अमिताभ बच्चन के पिता और प्रसिद्ध कवि हरिवंश राय बच्चन का जन्मस्थान है।
जया बच्चन ने इस दौरान उनकी स्मृति में निर्मित एक पुस्तकालय का उद्घाटन किया था।
उन्होंने दौरे के दौरान पुस्तकालय के लिए किताबें उपलब्ध कराने और गांव में एक बालिका महाविद्यालय स्थापित करने का सार्वजनिक रूप से वादा किया था। करीब 20 साल बाद, सितंबर के अंतिम सप्ताह में प्रसारित 'केबीसी' के एक एपिसोड में अमिताभ बच्चन ने पट्टी तहसील के निवासी चंद्रप्रकाश तिवारी से बातचीत के दौरान अपने परिवार का इस क्षेत्र से संबंध स्वीकार किया। इसके बाद गांव के लोगों में पुराने वादे पूरे होने की उम्मीद फिर से जगी है।
अमिताभ बच्चन ने रविवार को अपने 84वें जन्मदिन पर अपने पिता के जन्मस्थान का जिक्र किया।
उन्होंने लंबे समय से गांव नहीं आ पाने पर अफसोस जताया और पुस्तकालय के लिए किताबें उपलब्ध कराने का वादा किया। अमिताभ की इस घोषणा के बाद स्थानीय प्रशासन का भी ध्यान इस ओर गया है।
जिलाधिकारी अभिषेक पांडेय ने बुधवार शाम बाबूपट्टी गांव का दौरा किया और ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि दिवाली से पहले पुस्तकालय में किताबें उपलब्ध करा दी जाएंगी। ग्राम प्रधान विकास यादव के अनुसार, जिलाधिकारी ने कहा, "दिवाली तक पुस्तकालय किताबों से पूरी तरह भर जाएगा। त्योहार के दौरान यह किताबों और मिट्टी के दीयों, दोनों से रोशन होगा।" बाबूपट्टी प्रसिद्ध हिंदी कवि हरिवंश राय बच्चन का जन्मस्थान है।
हिंदी साहित्य की प्रमुख हस्तियों में शामिल हरिवंश राय बच्चन के कारण इस गांव का बच्चन परिवार से लंबे समय से गहरा जुड़ाव रहा है। जिस स्थान पर अब पुस्तकालय की इमारत बनी है, वहां कभी अमिताभ बच्चन के दादा प्रताप नारायण श्रीवास्तव का घर हुआ करता था। बाद में हरिवंश राय बच्चन शिक्षा के लिए प्रयागराज चले गए, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार, उनका अपने पैतृक घर और गांव से गहरा जुड़ाव बना रहा। पुस्तकालय की इमारत बनकर तैयार हो चुकी है लेकिन किताबों और अन्य पठन सामग्री की कमी के कारण इसका अब तक समुचित उपयोग नहीं हो सका है। हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कवि हरिवंश राय बच्चन की स्मृति में बनाए गए इस पुस्तकालय का उद्देश्य अभी पूरा नहीं हो पाया है। ग्रामीणों को इंतजार है कि यहां किताबें उपलब्ध हों और विद्यार्थी तथा अन्य पाठक इसका लाभ उठा सकें।
हरिवंश राय बच्चन ने अपनी आत्मकथा 'क्या भूलूं क्या याद करूं' में गांव के लोगों के साथ अपने आत्मीय संबंधों का उल्लेख किया है। उन्होंने लिखा है कि माघ महीने में जब लोग गंगा में स्नान करने के लिए प्रयागराज आते थे, तो गांव के लोग उनके घर पर ठहरा करते थे। गांव के लोग अपने साथ घर में बने पकवान भी लाते थे, जिन्हें हरिवंश राय बच्चन स्नेहपूर्वक स्वीकार करते थे। उनकी आत्मकथा के अनुसार, उनका घर पैतृक गांव से आने वाले लोगों के लिए हमेशा खुला रहता था।
गांव के लोगों की यादों में पुस्तकालय का अधूरा वादा लंबे समय से बना हुआ है।
यही वजह है कि अमिताभ बच्चन की ओर से हाल में दिए गए आश्वासन से ग्रामीणों और बच्चन परिवार के विस्तारित सदस्यों में एक बार फिर उम्मीद जगी है। हरिवंश बच्चन के संपर्क में रहने वाले परिवार के सदस्य दिवंगत शारदा प्रसाद श्रीवास्तव के पौत्र अमित श्रीवास्तव और उनकी पत्नी मीनाक्षी श्रीवास्तव ने कहा कि अमिताभ बच्चन के बयान से उनकी यह उम्मीद फिर जगी है कि वह एक दिन गांव आएंगे और अपने पैतृक घर पर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। -
दशहरा पर शुरू होगी अग्रिम बुकिंग
मुंबई. फिल्म 'रामायण' के निर्माताओं ने रविवार को घोषणा की कि दो भागों में बनने वाली इस पौराणिक फिल्म का पहला भाग पांच नवंबर को दुनिया भर के सिनेमाघरों में रिलीज होगा। इसके साथ ही निर्माताओं ने एक नया पोस्टर भी जारी किया जिसमें रणबीर कपूर, साईं पल्लवी, रवि दुबे और यश नजर आ रहे हैं। नवरात्रि के पहले दिन की गई इस घोषणा के साथ 'यह राम के युग का आरंभ है' का संदेश दिया गया है। निर्माताओं ने यह भी बताया कि फिल्म के लिए अग्रिम बुकिंग दशहरा से शुरू होगी। पोस्टर में आगे की तरफ रणबीर कपूर भगवान राम, साईं पल्लवी सीता और रवि दुबे लक्ष्मण के रूप में दिखाई दे रहे हैं, जबकि पीछे यश रावण के बड़े अवतार में नजर आ रहे हैं। इस फिल्म में सनी देओल हनुमान की भूमिका निभाएंगे। पहला भाग हिंदी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम भाषाओं में आईमैक्स जैसे बड़े थिएटर प्रारूपों में प्रदर्शित किया जाएगा। फिल्म का दूसरा भाग दिवाली 2027 के अवसर पर रिलीज करने की योजना है। -
मुंबई. फिल्म निर्माता इम्तियाज अली ने कहा कि अमिताभ बच्चन जैसा दूसरा कोई नहीं हो सकता। वह खुद को भाग्यशाली मानते हैं कि उनका जन्म ऐसे दौर में हुआ, जिसे इस दिग्गज अभिनेता ने अपनी पहचान दी है। उन्हें उम्मीद है कि किसी दिन उन्हें अमिताभ बच्चन के साथ किसी फिल्म में काम करने का मौका मिलेगा। भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े सितारों में से एक अमिताभ बच्चन ने पांच दशक से अधिक लंबे करियर में अपनी अलग पहचान बनाई है। वह रविवार को 84 वर्ष के हो गए। इम्तियाज अली ने कहा, "अमिताभ बच्चन जैसा कोई नहीं है और न ही कभी होगा। मैं खुद को उन लोगों में शामिल करूंगा, जिनका जन्म भारत में अमिताभ बच्चन के दौर में हुआ है।" पचपन-वर्षीय फिल्म निर्माता ने कहा कि शुरुआत में उन्हें लगता था कि वह कभी इस दिग्गज अभिनेता के साथ काम नहीं कर पाएंगे, क्योंकि उनका कद बहुत बड़ा है। हालांकि, एक विज्ञापन फिल्म का निर्देशन करने के बाद उनकी यह धारणा बदल गई। इस बीच, महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाके में कवि डॉ. हरिवंश राय बच्चन के नाम पर बने एक स्कूल ने रविवार को महानायक अमिताभ बच्चन के जन्मदिन को कविता, संगीत और शिक्षा के उत्सव में बदल दिया। यह आयोजन "मधुशाला से ज्ञानशाला" नामक पहल के तहत किया गया। लातूर के अहमदपुर स्थित डॉ. हरिवंश राय बच्चन विद्यालय में बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता अमिताभ बच्चन का 84वां जन्मदिन केक काटकर या मोमबत्तियां जलाकर नहीं, बल्कि साहित्य, रचनात्मकता और नवाचार के मेल वाले आयोजन के साथ मनाया गया। सरकार से सहायता प्राप्त इस स्कूल के संस्थापक निवृत्ति यादव ने बताया कि बच्चों ने अपनी आवाज में डॉ. हरिवंश राय बच्चन की कविताओं को संगीतबद्ध करके रिकॉर्ड किया और नृत्य भी प्रस्तुत किया। इस तरह पूरे आयोजन को जीवंत उत्सव का रूप दिया गया। उन्होंने बताया कि 'मधुशाला से ज्ञानशाला' पहल के तहत स्कूल की 20वीं वर्षगांठ भी मनाई गई। इस आयोजन में जन्मदिन समारोह के साथ ग्रामीण स्कूली बच्चों के बीच हिंदी साहित्य, रचनात्मकता और डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने का प्रयास भी शामिल था।
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पणजी. अभिनेता नाना पाटेकर की मौत खून का थक्का जमने से दिल का दौरा पड़ने के कारण हुई। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। गोवा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (जीएमसीएच) के एक वरिष्ठ चिकित्सक ने रिपोर्ट के आधार पर रविवार को कहा कि अभिनेता को खून का थक्का जमने के कारण दिल का दौरा पड़ा। उन्होंने कहा कि इस थक्के ने हृदय की बाईं मुख्य धमनी को बंद कर दिया, जो हृदय के एक बड़े हिस्से तक खून पहुंचाती है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का कारण बताते हुए कहा गया है, "धमनियों में वसा जमने से कोरोनरी धमनी में रुकावट के कारण बाईं मुख्य कोरोनरी धमनी में खून का थक्का जम गया, जिससे अचानक दिल का दौरा पड़ा। मौत प्राकृतिक कारणों से हुई।" पाटेकर (75) ने 'क्रांतिवीर' और 'खामोशी: द म्यूजिकल' समेत अलग-अलग तरह की फिल्मों में अपने शानदार अभिनय से अलग पहचान बनाई थी। उन्हें आठ अक्टूबर की सुबह पणजी के पास दोना पावला स्थित उनके घर से एक निजी अस्पताल ले जाया गया था, जहां सुबह पांच बजकर 10 मिनट पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया था।
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शाहरुख खान ने नाना पाटेकर की सलाह को किया याद
मुंबई. सुपरस्टार शाहरुख खान ने बृहस्पतिवार को वरिष्ठ अभिनेता नाना पाटेकर को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें 'उत्कृष्ट अभिनेता' और 'कैरम के अपराजेय खिलाड़ी' के रूप में याद किया। उन्होंने बताया कि करियर के शुरुआती दौर में पाटेकर ने उन्हें एक ऐसी सलाह दी थी, जिसे वह आज भी अपने दिल में संजोए हुए हैं। शाहरुख ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में पाटेकर की कही बात को याद करते हुए लिखा, ''हीरो बनने के चक्कर में अभिनेता को मत खोना।'' पाटेकर का बृहस्पतिवार तड़के दिल का दौरा पड़ने के बाद निधन हो गया। 75 वर्षीय अभिनेता गोवा स्थित अपने अपार्टमेंट में बेहोश पाए गए थे और उन्हें एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। शाहरुख ने बताया कि 1992 की फिल्म 'राजू बन गया जेंटलमैन' में साथ काम करने से पहले जब वह पहली बार पाटेकर से मिले थे तो घबराहट में अपने बालों से खेलने लगे थे। उन्होंने कहा, ''उन्होंने मेरा हाथ झटक दिया और कहा, 'हीरो की तरह बाल मत बना... तू अभिनेता है।' वह आपकी खुशामद नहीं करते थे। वह आपको वह नहीं बताते थे जो आप सुनना चाहते थे, बल्कि वह बताते थे जो आपको सुनना जरूरी होता था। यही नाना थे—सीधे-सपाट, थोड़े सख्त, ईमानदार और बेहद खूबसूरत मुस्कान वाले।'' शाहरुख ने कहा कि पाटेकर का स्नेह जताने का तरीका भी अनोखा था।
उन्होंने कहा, ''वह पहले आप पर चिल्लाते थे और फिर तीसरी या चौथी डांट के बीच आपको एहसास होता था कि वह आपको गले लगा रहे हैं। वह मुझसे प्यार करते थे और मैं भी उनसे प्यार करता था। वह मेरे मार्गदर्शक, शिक्षक, आलोचक और मित्र थे।'' उन्होंने पाटेकर को कैरम का माहिर खिलाड़ी बताते हुए कहा कि वह हर बार उन्हें और आसपास के बाकी लोगों को हरा देते थे और अपनी जीत का भरपूर आनंद लेते थे। शाहरुख ने कहा, ''नाना, आपकी तीव्रता, हंसी, पागलपन और प्यार हमेशा हमारे साथ रहेगा। बस यही इच्छा है कि हमारे पास और बातचीत करने, एक और बहस करने, एक कप चाय पीने और कैरम खेलने का समय होता।'' शाहरुख ने पाटेकर के साथ 2002 में आई फिल्म 'शक्ति : द पावर' में भी काम किया था। उन्होंने कहा कि पाटेकर के निधन से सिर्फ सिनेमा की दुनिया में ही नहीं, बल्कि भारत और दुनियाभर के लोगों के दिलों में भी एक खालीपन पैदा हुआ है। उन्होंने कहा, ''मैं बस इतना कह सकता हूं कि मैं आपको बहुत याद करूंगा और आपके शब्दों को हमेशा अपने दिल में रखूंगा... 'हीरो बनने के चक्कर में अभिनेता को मत खोना।' नाना, आपकी आत्मा को शांति मिले और अल्लाह आपको आशीर्वाद दें।'' शाहरुख ने कहा, ''स्वर्ग भी आपके होने से धन्य होगा... एक शानदार अभिनेता और अपराजेय कैरम चैंपियन। आपसे प्यार है और आपकी बहुत याद आएगी। बहुत जल्दी चले गए, मेरे हीरो-अभिनेता! श्रद्धांजलि।'' -
मुंबई. अभिनेता और फिल्मकार राज कपूर ने एक बार नाना पाटेकर को एक किरदार की पेशकश की थी, लेकिन नाना ने उसे ठुकरा दिया। दिसंबर 2024 में एक न्यूज़ एजेंसी ' को दिए एक साक्षात्कार में, पाटेकर ने उस मशहूर अभिनेता-फिल्मकार को मना करने के फैसले के पीछे की कहानी बताई। राज कपूर के बेटे ऋषि कपूर बाद में पाटेकर के करीबी दोस्त बने। पाटेकर ने कहा, ''मैं आरके स्टूडियो में शूटिंग कर रहा था, तभी राज कपूर जी ने मुझसे पूछा, 'क्या तुम मेरी फिल्म में काम करोगे?' मैंने सोचा, 'राज कपूर मुझसे पूछ रहे हैं! वह मेरे पिता के हीरो थे।' लेकिन मैंने मना कर दिया।'' उन्होंने उस बातचीत को याद करते हुए कहा, ''मैंने उनसे कहा, 'मेरे घर में, आप मेरी मां और पिता समेत सभी के पसंदीदा हीरो हैं। अगर कभी किसी सीन को लेकर हमारी राय अलग हुई, तो मैं आपको कुछ कह नहीं पाऊंगा। और अगर मैंने कहा, तो मुझे लगेगा कि मैं आपका अपमान कर रहा हूं। इसीलिए मैं आपके साथ काम नहीं कर सकता'।'' पाटेकर का बृहस्पतिवार को उनके गोवा स्थित आवास पर निधन हो गया। वह 75 वर्ष के थे।
उन्होंने एक बार कहा था कि उन्हें ऐसी ही उलझन तब भी हुई थी जब भारतीय सिनेमा के दिग्गज - देव आनंद और वी शांताराम - ने उनसे संपर्क किया था। उन्होंने कहा, ''मैंने देव आनंद साहब से भी यही बात कही थी। एक बार वी शांताराम ने भी मुझसे पूछा था, और मैंने उनसे कहा, 'मैं आपको एक आम आदमी या साधारण निर्देशक के तौर पर नहीं देखता। आप मेरे लिए बहुत बड़े कलाकार हैं और मैं आपके साथ काम करने के बारे में सोच भी नहीं सकता'।'' 'परिंदा', 'क्रांतिवीर', 'यशवंत', 'अब तक छप्पन' और 'अग्नि साक्षी' जैसी कई फिल्मों में जबरदस्त और दमदार अभिनय करने वाले नाना पाटेकर ने ऋषि कपूर के साथ अपनी 'खूबसूरत' दोस्ती को भी याद किया। ऋषि कपूर का अप्रैल 2020 में निधन हो गया था। दोनों अभिनेताओं ने 1995 की फिल्म 'हम दोनों' में साथ काम किया था, जिसमें उन्होंने बिछड़े हुए भाइयों का रोल निभाया था। असल जिंदगी में पाटेकर और ऋषि कपूर के बीच बहुत खुलकर बातचीत होती थी।
पाटेकर ने बताया कि मिथुन चक्रवर्ती, जैकी श्रॉफ और डैनी डेन्जोंगपा के साथ भी उनकी गहरी दोस्ती थी।
साक्षात्कार में उन्होंने यह भी याद किया था कि कैसे मराठी अभिनेता अशोक सराफ ने 1970 के दशक के आखिर और 1980 के दशक में आर्थिक रूप से उनकी मदद की थी, जब वह एक कलाकार के तौर पर संघर्ष कर रहे थे। नाना पाटेकर ने एक समय उन पुराने कलाकारों के लिए घर बनाने की इच्छा भी ज़ाहिर की थी जिन्होंने फिल्म उद्योग में कड़ी मेहनत की थी लेकिन आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे। -
पणजी. अपने दमदार अभिनय से दर्शकों के दिलों पर छा जाने वाले दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का बृहस्पतिवार तड़के गोवा स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। सूत्रों ने यह जानकारी दी। वह 76 वर्ष के थे। सूत्रों के मुताबिक, आशंका है कि नाना पाटेकर को दिल का दौरा पड़ा था।
पणजी के पास डोना पाउला स्थित अपने अपार्टमेंट में बेहोश पाए जाने के बाद पाटेकर को एक निजी अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल से जुड़े वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. शेखर सालकर ने यह जानकारी दी। सालकर ने बताया कि लगातार 45 मिनट तक 'सीपीआर' दिए जाने के बावजूद पाटेकर होश में नहीं आए और सुबह करीब पांच बजकर 10 मिनट पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। उन्होंने बताया कि इस संबंध में 'मेडिको-लीगल' मामला दर्ज किया गया है और पोस्टमार्टम किया जाएगा।
अस्पताल के चिकित्सकों को पाटेकर के एक मित्र ने बताया कि अभिनेता ने तड़के करीब साढ़े तीन बजे उन्हें संदेश भेजकर कहा था कि तबीयत ठीक नहीं लग रही है। सालकर ने कहा, ''मित्र ने करीब चार बजे वह संदेश देखा और पाटेकर के अपार्टमेंट पहुंच गए। पाटेकर वहां एक देखभालकर्ता के साथ रह रहे थे।'' देखभालकर्ता एक निजी अस्पताल पहुंचा, जहां से एक एम्बुलेंस उनके घर भेजी गई। सालकर ने कहा, ''एम्बुलेंस में ही उनका इलाज शुरू कर दिया गया था।'' पाटेकर का आवास अस्पताल से करीब पांच मिनट की दूरी पर है।
अस्पताल पहुंचने के बाद चिकित्सकों ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन सुबह पांच बजकर 10 मिनट पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। सालकर ने बताया कि शव को बम्बोलिम के गोवा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल भेज दिया गया है, जहां मौत के सही कारण का पता लगाने के लिए पोस्टमार्टम किया जाएगा। पाटेकर हिंदी और मराठी की कई फिल्मों में अपने अभिनय के लिए जाने जाते थे।
उनकी चर्चित हिंदी फिल्मों में ''परिंदा'', ''प्रहार: द फाइनल एक्ट'', ''तिरंगा'', ''क्रांतिवीर'' और ''खामोशी: द म्यूजिकल'' शामिल हैं। पाटेकर को तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, कई फिल्मफेयर पुरस्कार, महाराष्ट्र राज्य फिल्म पुरस्कार और फिल्मफेयर अवॉर्ड्स मराठी से सम्मानित किया गया था। उन्हें देश का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री भी प्रदान किया गया था। -
मुंबई। दिग्गज एक्टर नाना पाटेकर की आज सुबह 75 की उम्र में मृत्यु हो गई है. उनकी मृत्यु गोवा में सुबह कार्डियक अटैक के कारण हुई है. सुबह वह अपने घर में बेहोश पाए गए, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया. अस्पताल में नाना पाटेकर को मृत घोषित किया गया. बता दें कि नाना पाटेकर केवल फिल्मों तक सीमित नहीं थे. पर्दे से दूर वह लंबे समय तक किसानों, सूखे से परेशान गांवों और जरूरतमंद परिवारों की मदद भी करते रहे. उन्होंने अपनी कमाई का एक हिस्सा सामाजिक कामों में लगाया है और कई ऐसे परिवारों तक मदद पहुंचाई है, जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत थी.
नाना पाटेकर नाम फाउंडेशनसाल 2015 में नाना पाटेकर ने मराठी अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ मिलकर नाम फाउंडेशन की शुरुआत की थी. इसका मकसद सूखे और कर्ज की परेशानी से जूझ रहे किसान परिवारों की मदद करना था. बता दें कि महाराष्ट्र के विदर्भ और मराठवाड़ा जैसे इलाकों में किसानों की स्थिति उस समय काफी खराब थी. कहा जाता है कि नाना पाटेकर ने करीब 1.5 करोड़ रुपये की लग्जरी कार खरीदने का अपना फैसला बदल दिया था. उन्होंने उस पैसे को किसान परिवारों की मदद में लगाने का फैसला किया था. इसके बाद उन्होंने किसान आत्महत्या से प्रभावित परिवारों और सूखे से परेशान लोगों तक सीधे मदद पहुंचाने की कोशिश शुरू की.सिर्फ 10 मिनट में 25 लाख तक लोन की मंजूरी, अब नहीं करना होगा इंतजार!नाम फाउंडेशन का काम केवल आर्थिक मदद देने तक नहीं रहा है. संस्था ने किसान परिवारों की महिलाओं के लिए सिलाई मशीन, आटा चक्की और बकरियां जैसी चीजें उपलब्ध कराईं, जिससे वह अपने लिए कमाई का रास्ता बना सकें. कई जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक सहायता दी गई. किसानों के बच्चों की पढ़ाई, भोजन और घर से जुड़ी जरूरतों में भी मदद की गई. गरीब परिवारों के सामूहिक विवाह जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए गए. नाम फाउंडेशन के अनुसार, उसकी अलग-अलग पहलों से लाखों किसान परिवारों तक मदद पहुंची है. संस्था ने आपदा से प्रभावित परिवारों, शहीद जवानों के परिवारों और विधवाओं की भी सहायता की है.गांवों को बनाया आत्मनिर्भरनाना पाटेकर की सोच केवल तत्काल मदद देने तक सीमित नहीं थी. उनका जोर इस बात पर भी रहा कि गांवों की समस्याओं का ऐसा समाधान निकले जिससे लोगों को बार-बार बाहर से मदद न मांगनी पड़े. नाम फाउंडेशन ने महाराष्ट्र के कुछ गांवों को गोद लेकर वहां पानी बचाने, खेती सुधारने और रोजगार बढ़ाने पर काम किया. इनमें छत्रपति संभाजीनगर जिले का धोंदल गांव और वर्धा जिले का आमला गांव शामिल हैं.इन गांवों में पानी की कमी दूर करने, पेड़ लगाने, खेती से जुड़े प्रशिक्षण और युवाओं व महिलाओं के लिए रोजगार के मौके बनाने पर काम किया गया. लक्ष्य ऐसे गांव तैयार करना था जहां पानी के लिए टैंकरों पर निर्भरता कम हो और लोग अपने गांव में ही बेहतर जीवन जी सकें.नाना पाटेकर की मदद महाराष्ट्र तक ही सीमित नहीं रही. जम्मू-कश्मीर के राजौरी और पुंछ में सीमा पार से हुई गोलाबारी से प्रभावित परिवारों की मदद के लिए भी उन्होंने योगदान दिया. उन्होंने राहत के लिए लाखों रुपये दिए और प्रभावित परिवारों के बच्चों की पढ़ाई से जुड़े कामों में भी सहयोग किया. इसके अलावा बिहार जैसे राज्यों में बाढ़ के समय भी उन्होंने राहत कार्यों में मदद की. फिल्म से मिलने वाली कमाई और पुरस्कार राशि का हिस्सा सामाजिक कामों में लगाने के लिए भी वह जाने जाते रहे हैं. -
मुंबई। हिंदी सिनेमा के दिग्गज कलाकार और एक्टर नाना पाटेकर का आज 75 की उम्र में निधन हो गया है. नाना पाटेकर की मृत्यु गोवा में कार्डियक अटैक के कारण हुई है. बड़े पर्दे पर अलग-अलग किरदारों में जान डालने वाले नाना पाटेकर ने करीब पांच दशक तक फिल्मों में काम किया है. वहीं उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर अच्छी खासी संपत्ति बनाई है. रिपोर्ट्स के अनुसार, उनकी कुल संपत्ति करीब 50 करोड़ रुपये से 80 करोड़ रुपये के बीच बताई जाती है. इसके अलावा अब नाना पाटेकर के निधन की खबर के बाद उनकी संपत्ति, घर, जमीन और गाड़ियों को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है.
नाना पाटेकर की संपत्ति को लेकर अलग-अलग रिपोर्ट्स में अलग-अलग आंकड़े बताए गए हैं. कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, उनकी कुल नेटवर्थ करीब 50 करोड़ रुपये थी, वहीं कुछ जगह यह आंकड़ा 80 करोड़ रुपये तक बताया गया है. फिल्मों की बात करें तो नाना पाटेकर एक फिल्म के लिए करीब 2 से 3 करोड़ रुपये तक फीस लेते थे. उनकी संपत्ति में उनकी मुंबई, गोवा और पुणे की प्रॉपर्टी भी शामिल है.नाना पाटेकर का मुंबई वाला घर उनकी सादगी की सबसे बड़ी मिसाल माना जाता है. वह लंबे समय तक अंधेरी में करीब 750 वर्ग फुट के एक बेडरूम वाले फ्लैट में रहे. रिपोर्ट्स के अनुसार, इस घर को उन्होंने कई दशक पहले करीब 1.1 लाख रुपये में खरीदा था. आज इसकी कीमत करीब 3 करोड़ रुपये के आसपास बताई जाती है. नाना अपनी मां के साथ भी इसी घर में रहे थे. मां के निधन के बाद भी उन्होंने इस घर को छोड़कर कोई बड़ा और आलीशान घर नहीं बनाया.मुंबई के अलावा नाना पाटेकर का गोवा में भी एक घर था. वह अक्सर मुंबई, गोवा और पुणे के बीच समय बिताते थे. गोवा वाला घर उनके मुंबई के फ्लैट से ज्यादा आधुनिक और बड़ा बताया जाता है. इसी गोवा वाले घर में उनकी मौत की खबर सामने आई है. उन्हें सुबह करीब 5:20 बजे घर में बेहोशी की हालत में पाया गया और अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित किया गया.नाना पाटेकर के पास पुणे के खड़कवासला इलाके में करीब 27 एकड़ में फैला फार्महाउस भी बताया जाता है. इस जमीन पर खेती की जाती थी. रिपोर्ट्स के अनुसार, यहां गेहूं और धान उगाया जाता था और इसकी कमाई का हिस्सा खेत में काम करने वाले लोगों और स्थानीय किसानों को भी दिया जाता था. फार्महाउस के अलावा पुणे के लॉ कॉलेज रोड पर भी उनका एक घर बताया जाता है.कार की बात करें तो नाना पाटेकर महंगी और चमकदार कारों का बड़ा काफिला रखने के बजाय काम की गाड़ियों को पसंद करते थे. उनके पास Mahindra Jeep CJ4, Mahindra Scorpio और Audi Q7 जैसी गाड़ियां थीं. इन गाड़ियों की पसंद से भी उनके साधारण जीवन का अंदाजा लगाया जा सकता है.नाना पाटेकर की पहली फिल्मनाना पाटेकर ने साल 1978 में फिल्म गमन से हिंदी सिनेमा में कदम रखा था. इसके बाद उन्होंने परिंदा, क्रांतिवीर, वेलकम और नटसम्राट जैसी फिल्मों में यादगार काम किया और नई पहचान बनाई. अपने लंबे करियर में उन्होंने तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, चार फिल्मफेयर पुरस्कार और दो महाराष्ट्र राज्य फिल्म पुरस्कार जीते थे. साल 2013 में उन्हें सिनेमा और कला के क्षेत्र में योगदान के लिए पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया था. -
नयी दिल्ली. अभिनेत्री जूही चावला ने सह-पायलट के हमले के बावजूद यात्रियों की जान बचाने वाले 'फ्लाईदुबई' के पायलट कैप्टन स्मित मच्छार के ''अद्भुत साहस और सूझबूझ'' की सराहना की है। बुधवार को दुबई से तेल अवीव जा रही 'फ्लाईदुबई' की उड़ान एफजेडए 1073 में सह-पायलट ने कैप्टन मच्छार पर कॉकपिट में रखी आपातकालीन कुल्हाड़ी (क्रैश एक्स) से हमला कर दिया था, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। यह कुल्हाड़ी आपात स्थिति में इस्तेमाल के लिए कॉकपिट में रखी जाती है। विमान में 27 बच्चों समेत कुल 174 यात्री सवार थे।
बोइंग 737 विमान के हजारों फुट नीचे चले जाने और खुद गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कैप्टन मच्छार आपात संकेत भेजने और कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफल रहे। जूही चावला ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर कैप्टन मच्छार की बहादुरी की तारीफ की। उन्होंने लिखा, ''कैप्टन स्मित मच्छार को सलाम। संकट की उस घड़ी में आपने जिस बहादुरी का परिचय दिया, वह काबिल-ए-तारीफ है। मैं आपके जल्द स्वस्थ होने की कामना करती हूं।'' शाहरुख खान, सलमान खान, करण जौहर, शाहिद कपूर, अनिल कपूर और भूमि पेडनेकर सहित कई अन्य हस्तियों ने भी पायलट के साहसिक कदम की सराहना की है। इससे पहले शुक्रवार को कैप्टन मच्छार ने अस्पताल से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ वीडियो कॉल पर बातचीत की थी और घटनाक्रम साझा किया था। -
मुंबई. अभिनेता सलमान खान ने फ्लाईदुबई की इजराइल जा रही उड़ान को कथित तौर पर सह-पायलट द्वारा दुर्घटनाग्रस्त करने की कोशिश को नाकाम करने वाले पायलट कैप्टन स्मित मच्छार की सराहना की है। खान ने सोशल मीडिया पर मच्छार की बहादुरी को सलाम किया। अभिनेता ने 'एक्स' में अपने पोस्ट में कहा, '' कमाल कर दिया पायलट जी, हम सब आपके साहस को सलाम करते हैं... आपके साथ उड़ान भरना खुशी की बात होगी... बहुत बढ़िया भाई... कैप्टन स्मित मच्छार।'' दुबई से तेल अवीव जा रही उड़ान एफजेड1073 ने बुधवार को आपात संकेत भेजे थे और इसके बाद विमान 34,000 फुट की ऊंचाई से तेजी से 17,000 फुट से अधिक नीचे आ गया। बाद में, उसे सऊदी अरब के तबूक शहर स्थित प्रिंस सुल्तान बिन अब्देल अजीज हवाई अड्डे की ओर मोड़ दिया गया। विमान में 27 बच्चों समेत 174 यात्री सवार थे। सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे वीडियो में पायलट खून से लथपथ, ऑक्सीजन मास्क पहने और विमान की 'गैली' में पीठ के बल लेटे हुए दिखाई दे रहे हैं। शुक्रवार को मच्छार ने अस्पताल से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से वीडियो कॉल पर बातचीत की और घटना के बारे में जानकारी दी। मोदी ने पायलट के साहस, सूझबूझ और संयम की सराहना करते हुए कहा कि उनके क्षण भर में लिए गए फैसले से विमान में सवार लोगों की जान बचाने में मदद मिली। सह-पायलट द्वारा कथित हमले के पीछे का मकसद अभी जांच के दायरे में है.
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यरूशलम. भारत-इजराइल के सह-निर्माण में बनी पहली फिल्म 'मर्डर्स टू क्लोज: लव टू फार' का चयन इटली में आयोजित होने वाले लेक्स नॉयर अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के लिए किया गया है। इस महोत्सव में थ्रिलर, 'नॉयर' और अपराध पृष्ठभूमि पर आधारित फिल्मों को दिखाया जाता है।
'नॉयर' फिल्म श्रेणी की फिल्मों में आमतौर पर अपराध, सस्पेंस, और इंसानी स्वभाव के दूसरे पक्ष (जैसे धोखा, लालच और निराशा) को दिखाया जाता है। "फ्लोच", "माई माइकल", "एन इजराइली लव स्टोरी" और "वैली ऑफ स्ट्रेंथ" जैसी फिल्मों के निर्माण के लिए मशहूर इजराइली फिल्मकार डैन वोलमैन ने भारतीय फिल्मकार मंजू बोरा के साथ मिलकर इस फिल्म का निर्देशन किया है। यह फिल्म लेक्स नॉयर महोत्सव में 'ओमिकिदी ट्रोपो विकिनी' खंड के तहत प्रदर्शित की जाएगी।
यह महोत्सव 24 से 27 सितंबर तक इटली के वारेसे और लुइनो में आयोजित होगा। फिल्म महोत्सव में वोलमैन को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड 'प्रीमियो अल्ला करियेरा' से भी सम्मानित किया जाएगा। वोलमैन ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा, "मैं मंजू बोरा का दिल से आभार व्यक्त करता हूं, जो दुर्भाग्यवश वहां मेरे साथ शामिल नहीं हो पाएंगी। साथ ही असम में पूरी फिल्म टीम का भी धन्यवाद करता हूं, जिन्होंने अपने समर्पण, प्रतिभा और सहयोग की भावना से काम किया। मैं फिल्म को आकार देने में संवेदनशील और रचनात्मक योगदान के लिए हमारे संपादक इयाल अमीर का भी आभारी हूं।" उन्होंने कहा, "मैं इस सम्मान के लिए महोत्सव का आभारी हूं और खुश हूं कि फिल्म नए दर्शकों तक पहुंचेगी।" फिल्म में सिद्धार्थ निपोन गोस्वामी, शमिन मन्नन, सीमा बिस्वास, भागीरथी बाई कदम, आदिल हुसैन और दिगंता हजारिका ने अभिनय किया है। -
नई दिल्ली। हिंदी और कन्नड़ सिनेमा में “मिंचिना ओटा”, “हंसागीते”, “अंकुर” और “मंथन” जैसी फिल्मों में शानदार काम के लिए मशहूर दिग्गज अभिनेता अनंत नाग को 2024 के दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। सरकार ने बुधवार को ये जानकारी दी।
पांच दशकों में 250 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके 78 वर्षीय अनंत नाग थिएटर की दुनिया में भी एक जाना-माना नाम हैं। उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े सम्मान, दादा साहब फाल्के पुरस्कार से 22 सितंबर को गुजरात के केवड़िया में नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स समारोह में सम्मानित किया जाएगा।अनंत नाग के बारे मेंअनंत नाग (जन्म 4 सितंबर 1948, कर्नाटक) एक वरिष्ठ भारतीय अभिनेता हैं, जो अपनी बहुमुखी प्रतिभा और पांच दशकों से अधिक समय से भारतीय सिनेमा में अपने योगदान के लिए प्रसिद्ध हैं। उन्होंने कन्नड़ फीचर फिल्म संकल्प से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की और अंकुर से हिंदी सिनेमा में पदार्पण किया। इसके बाद उन्होंने कन्नड़, हिंदी, तेलुगु, मलयालम, तमिल और मराठी सिनेमा की 300 से अधिक फिल्मों में विविध भूमिकाएं निभाईं, जिनमें मालगुडी डेज़ जैसे उल्लेखनीय कार्य भी शामिल हैं।अनंत को पांच फिल्मफेयर पुरस्कार और पांच कर्नाटक राज्य सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। इसके अलावा, उन्हें कर्नाटक राज्योत्सव पुरस्कार, कर्नाटक साहित्य अकादमी पुरस्कार और कर्नाटक राज्य लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है। उन्हें बेंगलुरु विश्वविद्यालय (उत्तर) से मानद डॉक्टरेट की उपाधि भी प्राप्त है। वर्ष 2023 में उन्होंने सिनेमा में अपने 50 वर्ष के करिअर की स्वर्ण जयंती मनाई।सिनेमा से इतर, अनंत ने वर्ष 1988 से 1994 तक कर्नाटक विधान परिषद के सदस्य और वर्ष 1994 से 1999 तक विधानसभा के सदस्य के रूप में कार्य किया। इस दौरान उन्होंने बेंगलुरु शहर विकास राज्य मंत्री के रूप में भी पद संभाला। वर्ष 2025 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया। आज श्री अनंत नाग भारत के सबसे सम्मानित सांस्कृतिक व्यक्तित्वों में से एक हैं और अपनी बहुमुखी प्रतिभा, विनम्रता तथा भारतीय सिनेमा में अपने स्थायी योगदान के लिए प्रशंसित हैं।दादासाहेब फाल्के पुरस्कार के बारे मेंवर्ष 1969 में देविका रानी को प्रदान किए जाने के साथ शुरू किया गया दादासाहेब फाल्के पुरस्कार भारत सरकार द्वारा भारतीय सिनेमा में दादासाहेब फाल्के के योगदान के सम्मान में स्थापित किया गया था। दादासाहेब फाल्के ने वर्ष 1913 में भारत की पहली पूर्ण लंबाई की फीचर फिल्म, राजा हरिश्चंद्र का निर्देशन किया था। सिनेमा के क्षेत्र में इस सर्वोच्च पुरस्कार से सम्मानित किए जाने वाले पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं को ‘भारतीय सिनेमा के विकास और संवर्धन में उत्कृष्ट योगदान’ के लिए सम्मानित किया जाता है। इस पुरस्कार में स्वर्ण कमल पदक, एक शॉल और 10 लाख रुपये की नकद पुरस्कार राशि शामिल है। -
नयी दिल्ली. बॉलीवुड अभिनेता अमिताभ बच्चन ने कहा कि उनकी हालिया पोस्ट में से एक का गलत मतलब निकाला गया और अभिनेता ने पुष्टि की है कि उनकी 'रिटायर' होने का कोई योजना नहीं है। इस हफ्ते की शुरुआत में अभिनेता ने अपने ब्लॉग पर एक नोट साझा किया था, जिसमें लिखा था "काफी देर हो चुकी है, अब रिटायर होने का समय आ गया है" और कुछ लोगों ने इसका गलत मतलब निकाल लिया। सोमवार को एक और नोट साझा करते हुए बच्चन ने रिटायरमेंट की खबर वाली एक अखबार की कटिंग भी लगाई और इसे गलत खबर बताया। उन्होंने कहा, "मैंने ब्लॉग में लिखा...'काफी देर हो चुकी है, अब रिटायर होने (सोने) का समय है...' हम सभी जानते हैं कि इसका मतलब देर रात होने पर सोने जाने से था... और यह है मीडिया - देश की अंतरात्मा - सूचना देने वाली सबसे बड़ी संस्था।" उन्होंने कहा, "नहीं जनाब, मैं अभी काम से रिटायर नहीं हो रहा हूं; अंग्रेज़ी में 'रिटायर' होने का मतलब है सोने जाना। और आपको वहां नहीं बुलाया गया है।" अभिनेता जल्द ही "सेक्शन 84" में नजर आएंगे। इस फिल्म को रिभु दासगुप्ता ने निर्देशित किया है और इसमें निमरत कौर भी अहम भूमिका में हैं। वह "कल्कि 2" में भी नजर आएंगे, जो "कल्कि 2898 एडी" की अगली कड़ी है। इस फिल्म में अमिताभ अश्वत्थामा का किरदार दोबारा निभाएंगे।
- नयी दिल्ली. अभिनेता सैफ अली खान और अक्षय कुमार की फिल्म 'हैवान' ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बॉक्स ऑफिस पर रिलीज के शुरुआती सप्ताहांत में 11 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की है। फिल्म का निर्देशन प्रियदर्शन ने किया है, जो 'हेरा फेरी', 'हुलचुल', 'भूल भुलैया' और 'हंगामा' जैसी सफल हास्य फिल्मों के लिए जाने जाते हैं। यह फिल्म अक्षय कुमार और सैफ अली खान को 17 साल बाद फिर से साथ लेकर आई है। दोनों इससे पहले 'मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी', 'टशन', 'आरजू', 'तू चोर मैं सिपाही' और 'कीमत' जैसी फिल्मों में साथ काम कर चुके हैं। दोनों कलाकार आखिरी बार 2008 में आई एक्शन फिल्म 'टशन' में साथ नजर आए थे जिसमें करीना कपूर खान और अनिल कपूर भी थे।फिल्म कारोबार पर नजर रखने वाली वेबसाइट सैकनिल्क के अनुसार, शुक्रवार को रिलीज हुई इस फिल्म ने पहले दिन 4.60 करोड़ रुपये की कमाई की। इसके बाद शनिवार और रविवार को फिल्म ने 6.95 करोड़ रुपये कमाए। इस तरह फिल्म की कुल वैश्विक कमाई 11.55 करोड़ रुपये हो गई है। फिल्म में खान ने श्याम का किरदार निभाया है, जो दृष्टिबाधित मार्शल आर्टिस्ट और इमारत का देखभालकर्ता है। वह अपनी अति सक्रिय इंद्रियों की मदद से रोजमर्रा की जिंदगी को संभालता है। 'हैवान' में सैयामी खेर, श्रेया पिलगांवकर, राजपाल यादव, शारिब हाशमी और दिवंगत दिग्गज अभिनेता असरानी समेत अन्य कलाकारों ने भी अभिनय किया है। फिल्म का निर्माण वेंकट के नारायण और शैलजा देसाई फेन ने किया है।
- नयी दिल्ली. बॉक्स ऑफिस पर धूम मचा रही फिल्म 'हनुमान अंश' के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने निर्माता महावीर जैन के साथ मिलकर कवि-संत गोस्वामी तुलसीदास के जीवन पर आधारित फिल्म 'रामबोला' बनाने का निर्णय लिया है। भगवान राम के प्रति अपनी भक्ति के लिए प्रख्यात तुलसीदास को 'रामचरितमानस' के जरिए रामायण की कहानी को लोकप्रिय बनाने का श्रेय दिया जाता है। उन्होंने इसे आम बोलचाल की अवधी भाषा में लिखा था। तुलसीदास पर आधारित फिल्म का निर्देशन चतुर्वेदी द्वारा किया जाएगा और इसका निर्माण महावीर जैन, विशाल चतुर्वेदी, अमित उपाध्याय और रघुवेंद्र सिंह द्वारा किया जाएगा। आध्यात्मिक गुरु नीब करौरी बाबा के जीवन और शिक्षाओं पर आधारित चतुर्वेदी की फिल्म 'हनुमान अंश' सात अगस्त को रिलीज हुई थी और इसने अब तक घरेलू बॉक्स ऑफिस पर 250 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई की है। महावीर जैन फिल्म्स की आगामी फिल्मों में मृगदीप सिंह लांबा की 'नागजिला', सूरज बड़जात्या की 'ये प्रेम मोल लिया' और 'व्हाइट' भी शामिल हैं।
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नयी दिल्ली. आध्यात्मिक गुरु नीम करौली बाबा के जीवन और उनकी शिक्षाओं पर आधारित फिल्म 'हनुमान अंश' ने बॉक्स ऑफिस पर 227 करोड़ रुपये की कमाई की है। विशाल चतुर्वेदी के निर्देशन में बनी यह फिल्म मां की मृत्यु के बाद शोक में डूबे युवा लक्ष्मीनारायण की कहानी है, जो ईश्वर की तलाश में आध्यात्मिक यात्रा पर निकल पड़ता है। बॉक्स ऑफिस पर फिल्मों की कमाई पर नजर रखने वाली वेबसाइट 'सैकनिल्क' के मुताबिक, फिल्म ने घरेलू बॉक्स ऑफिस पर अब तक 192.13 करोड़ रुपये का शुद्ध कमाई की है। फिल्म महज दो करोड़ रुपये के मामूली बजट में बनाई गई थी और यह सात अगस्त को भारतीय सिनेमाघरों में रिलीज हुई। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर सामान्य शुरुआत की और पहले दो हफ्तों में इसकी कमाई काफी धीमी रही। हालांकि, दर्शकों से मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया के कारण बाद में फिल्म ने रफ्तार पकड़ ली। इस फिल्म में शोभिनव सत्य मुख्य भूमिका में हैं। उनके साथ विहान शेडगे, चंदन के आनंद, पूर्णिमा तिवारी, अनिल रस्तोगी, गुलशन पांडे और भगवानदास पटेल भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आए। नीम करौली बाबा का जन्म करीब 1900 में उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के एक गांव में हुआ था और 1973 में उनका निधन हुआ। कम उम्र में उनका विवाह हुआ था और बाद में वह संन्यासी बन गए थे।
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नयी दिल्ली. नीब करौरी बाबा के जीवन और उनकी शिक्षाओं पर आधारित फिल्म 'हनुमान अंश' ने बॉक्स ऑफिस पर 200 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई कर ली है। विशाल चतुर्वेदी के निर्देशन में बनी यह फिल्म युवा लक्ष्मीनारायण की कहानी है जो अपनी मां की मृत्यु के बाद ईश्वर की तलाश में आध्यात्मिक यात्रा पर निकलते हैं। जीवन, मृत्यु और मानवीय पीड़ा से जुड़े सवालों के जवाब तलाशते हुए वह उत्तर भारत के विभिन्न हिस्सों की यात्रा करते हैं और अंततः संत नीब करौरी बाबा के रूप में उनकी पहचान बनती है। नीब करौरी बाबा की प्रेम, सेवा और करुणा की शिक्षाओं ने अनगिनत लोगों के जीवन को प्रभावित किया। फिल्म में शोभिनव सत्य मुख्य भूमिका में हैं। अन्य कलाकारों में विहान शेडगे, चंदन के. आनंद, पूर्णिमा तिवारी, अनिल रस्तोगी, गुलशन पांडे और भगवानदास भी शामिल हैं। फिल्मों की कमाई पर नजर रखने वाली वेबसाइट 'सैकनिल्क' के अनुसार, फिल्म ने घरेलू बॉक्स ऑफिस पर सकल 205.73 करोड़ रुपये की कमाई की है, जबकि इसकी शुद्ध कमाई 170 करोड़ रुपये से अधिक रही है। फिल्म शुरुआत में 250 स्क्रीन पर रिलीज हुई थी, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर इसकी कमाई बढ़ने के बाद अब इसे 2,000 स्क्रीन पर दिखाया जा रहा है। सात अगस्त को भारतीय सिनेमाघरों में रिलीज हुई फिल्म की बॉक्स ऑफिस पर शुरुआत अत्यंत धीमी रही थी और पहले दो सप्ताह में इसकी कमाई बेहद कम थी। हालांकि, दर्शकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया के कारण बाद में फिल्म ने रफ्तार पकड़ी।
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श्रीनगर. दशकों तक कश्मीर की हसीन वादियां बॉलीवुड की कई सुपरहिट फिल्मों की पृष्ठभूमि बनती रहीं और अब पहली बार, सोमवार को यहां अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इसके जरिये कश्मीर की वादियां दुनिया भर के फिल्मकारों और सिनेमा प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींचेंगी। 'रंग-ए-सिनेमा' विषय पर आधारित चार दिवसीय अंतरराष्ट्रीय जम्मू कश्मीर फिल्म महोत्सव (आईएफएफजेएंडके) सोमवार से शुरू होगा, जिसके लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। यह महोत्सव मुख्य रूप से जम्मू कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में आयोजित किया जाएगा। इसके अलावा शीतकालीन राजधानी जम्मू, प्रसिद्ध स्की रिजॉर्ट गुलमर्ग और शहर का इकलौता मल्टीप्लेक्स 'आइनॉक्स' भी इस ऐतिहासिक आयोजन के गवाह बनेंगे। सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित इस महोत्सव में अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय फिल्मों को प्रदर्शित किया जाएगा, जिसमें इसमें स्थानीय सिनेमा की दमदार प्रस्तुतियों के साथ दुनिया के विभिन्न हिस्सों से चुनी गई फिल्मों को भी जगह दी गई है। इस आयोजन का सबसे भावुक और आकर्षक पहलू 'फ्लोटिंग सिनेमा' (पानी पर तैरता सिनेमाघर) है। डल झील में तैरते शिकारे पर बैठे दर्शक जब पानी की सतह पर बनी स्क्रीन पर फिल्में देखेंगे, तो यह दृश्य कला और प्रकृति के एक अनदेखे संगम जैसा होगा। जम्मू कश्मीर की सूचना एवं जनसंपर्क निदेशक श्रेया सिंघल ने कहा कि यह पहल 'फिल्म स्क्रीनिंग' के लिए एक अनूठा माहौल प्रदान करेगी और भारत तथा विदेशों से आने वाले फिल्म निर्माताओं, कलाकारों और प्रतिनिधियों के समक्ष जम्मू कश्मीर की सांस्कृति और प्राकृतिक छटा को प्रदर्शित करेगी। उन्होंने कहा कि इस महोत्सव का उद्देश्य जम्मू कश्मीर की सिनेमाई विरासत को पुनर्जीवित करना और इसे फिल्म निर्माण तथा सांस्कृतिक आदान-प्रदान के केंद्र के रूप में उभारना है। इस महोत्सव में 40 से अधिक देशों की 135 फिल्म प्रदर्शित की जाएंगी। महोत्सव के लिए 92 देशों से करीब 1,100 फिल्म प्राप्त हुई थीं, जिनमें से पूर्वावलोकन समिति ने प्रदर्शन के लिए 135 फिल्म का चयन किया है। सूचना एवं जनसंपर्क निदेशक ने एक बयान में कहा, ''उद्घाटन संस्करण में 41 देशों की 135 फिल्म का प्रदर्शन किया जाएगा, जो दुनिया भर की विविध सिनेमाई परंपराओं, कहानी कहने के प्रारूपों और रचनात्मक आवाज को एक मंच पर लाएगा।'' उन्होंने बताया कि देशवार भागीदारी में भारत 64 फिल्म के साथ शीर्ष पर है, इसके बाद फ्रांस की 13 और ईरान की आठ फिल्म हैं। अर्जेंटीना और स्पेन से चार-चार फिल्म, जबकि ब्राजील, जर्मनी, रूस और अमेरिका से तीन-तीन फिल्म शामिल हैं। इसके अलावा दक्षिण कोरिया, स्वीडन, ताइवान, कतर, कोलंबिया और तुर्किये सहित अन्य देशों की चयनित फिल्में भी प्रदर्शित की जाएंगी। महोत्सव में सर्वश्रेष्ठ फिल्म, सर्वश्रेष्ठ निर्देशक और प्रथम फिल्म के सर्वश्रेष्ठ निर्देशक व अन्य कई श्रेणियों में पुरस्कार दिए जाएंगे, जिसके लिए अलग-अलग धन पुरस्कार के तौर पर दी जाएगी। विजेताओं का चयन पांच सदस्यीय अंतरराष्ट्रीय निर्णयक मंडल करेगा, जिसकी अध्यक्षता जाने-माने सिनेमैटोग्राफर और निर्देशक संतोष सिवन कर रहे हैं। निर्णायक मंडल में ऑस्कर और बाफ्टा विजेता साउंड डिजाइनर रसूल पुकुट्टी, जर्मन फिल्म क्यूरेटर डोरोथी वेनर, मीडिया उद्यमी कीको बैंग और राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म निर्माता हिमांशु शेखर खटुआ शामिल हैं।
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मुंबई. दिग्गज पार्श्व गायिका आशा भोसले का रिकॉर्ड किया गया आखिरी फिल्मी गीत आठ सितंबर को उनकी जयंती के अवसर पर फिल्म 'ओम का हरी' के तहत रिलीज किया जाएगा। निर्माताओं ने बृहस्पतिवार को इसकी घोषणा की। "ऐ मेरी ज़िंदगी, तू छुपी है कहां" शीर्षक वाला यह गीत 2023 के अंत में रिकॉर्ड किया था और उस समय भोंसले 90 की उम्र पार कर चुकी थीं। यह गीत फिल्मकार हरीश व्यास की पिता-पुत्र के रिश्ते पर आधारित फिल्म में शामिल होगा, जिसमें अंशुमान झा, रघुबीर यादव, सोनी राजदान और आयशा कपूर प्रमुख भूमिकाओं में हैं। व्यास ने एक बयान में कहा, "उनके जन्मदिन पर इस गीत को रिलीज करने का उद्देश्य आशा जी की सदाबहार आवाज़, उनकी विराट विरासत और उन पीढ़ियों के श्रोताओं को सम्मान देने का प्रयास है, जिनके जीवन को उनके संगीत ने छुआ है।" फिल्म में अभिनय करने वाले और इसकी कहानी से भी जुड़े अंशुमान झा के लिए आशा भोसले की आवाज़ इस कथानक में एक बेहद निजी आयाम जोड़ती है।
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नयी दिल्ली. अभिनेता राणा दग्गुबाती की कंपनी 'स्पिरिट मीडिया' अरविंद अडिगा के चर्चित उपन्यास 'लास्ट मैन इन टावर' पर आधारित फिल्म 11 सितंबर को भारतीय सिनेमाघरों में रिलीज करेगी। बेन रेखी के निर्देशन में बनी इस फिल्म में मनोज वाजपेयी, बोमन ईरानी और दिव्या दत्ता मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म की पटकथा 'सलाम बॉम्बे!', 'मिसिसिपी मसाला' और 'द नेमसेक' जैसी फिल्मों में मीरा नायर के साथ काम कर चुकीं सोनी तारापोरवाला ने लिखी है। फिल्म की कहानी सेवानिवृत्त शिक्षक मास्टरजी (वाजपेयी) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो उस समय अकेले पड़ जाते हैं जब उनके समुदाय के लोग ऐसे फैसले लेने लगते हैं जो उनकी मान्यताओं को चुनौती देते हैं। आसपास के लोगों के सामने बेहतर जीवन की संभावना उभरने के बीच अपने सिद्धांतों पर कायम रहने का उनका फैसला रिश्तों और वफादारी में तनाव पैदा करता है। दिव्या दत्ता ने मिसेज पुरी की भूमिका निभाई है, जिनकी उम्मीदें और फैसले मास्टरजी के विचारों से टकराते हैं। बोमन ईरानी ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। फिल्म समुदाय, परिवार, समझौते और जीवन बदलने वाले अवसर मिलने पर लोगों द्वारा लिए जाने वाले फैसलों की पड़ताल करती है। रेखी ने कहा कि फिल्म को पर्दे पर उतारना उनके लिए संतोषजनक अनुभव रहा और खासतौर पर पहली बार मनोज वाजपेयी और बोमन ईरानी को एक साथ काम करते देखना बेहद खास रहा। दग्गुबाती ने कहा कि फिल्म की कहानी उन्हें इसलिए आकर्षित करती है क्योंकि यह लोगों के एक खास समूह की जिंदगी के जरिए ऐसे सार्वभौमिक सवाल उठाती है जिनसे हर कोई जुड़ सकता है। फिल्म के संवाद 'पीकू' और 'अक्टूबर' जैसी फिल्मों की लेखिका जूही चतुर्वेदी ने लिखे हैं, जबकि संगीत गोविंद वसंता ने दिया है। फिल्म का निर्माण दग्गुबाती के अलावा रेखी, गुनीत डोगरा और प्रतीक्षा राव ने किया है।
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80 वर्ष की उम्र में निधन
नैशविले (अमेरिका) अमेरिका की मशहूर गायिका डॉली पार्टन का 80 वर्ष की आयु में नैशविल में निधन हो गया। अपनी दमदार आवाज, भावपूर्ण गीतों और चमकदार परिधानों के लिए प्रसिद्ध पार्टन ने टेनेसी के पहाड़ी क्षेत्र में एक साधारण पृष्ठभूमि वाले परिवार से होने के बावजूद संगीत की दुनिया में बड़ी पहचान बनाई। उनकी प्रचार प्रतिनिधि मार्सेल पैरिसो ने मंगलवार को एक बयान में कहा, ''कैंसर से थोड़े समय तक जूझने के बाद डॉली ने अपने प्रियजनों की मौजूदगी में वेंडरबिल्ट-इंग्राम कैंसर सेंटर में अंतिम सांस ली।'' डॉली पार्टन ने ''जोलीन'', ''कोट ऑफ मैनी कलर्स'' और ''आई विल ऑलवेज लव यू'' जैसे सैकड़ों लोकप्रिय गीत लिखे। उनके गीतों की दुनियाभर में 10 करोड़ से अधिक बार बिक्री दर्ज की गयीं और उन्हें ऑनलाइन एक अरब से ज्यादा बार सुना गया। बारह भाई-बहनों में पली-बढ़ी पार्टन ने अपने परिवार के बेहद गरीबी भरे दिनों को कभी नहीं भुलाया। उनके पिता पढ़ाई छोड़कर खेती करने लगे थे। इसी अनुभव ने उन्हें बच्चों को मुफ्त किताबें उपलब्ध कराने के लिए 'इमैजिनेशन लाइब्रेरी' की शुरुआत करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने 10 साल की उम्र में स्थानीय टीवी कार्यक्रमों में गाना शुरू कर दिया था और 13 साल की उम्र में नैशविल के ग्रैंड ओले ओप्री में प्रस्तुति दी। उन्होंने 1960 के दशक में पोर्टर वैगनर के साथ काम किया, जिसने उनके करियर को नई दिशा दी। बाद में ''जोलीन'' और ''आई विल ऑलवेज लव यू'' जैसी सफलताओं ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्टार बना दिया। पार्टन ने 1960 के दशक के मध्य में डामर की सड़क बनाने का ठेका लेने वाले कारोबारी कार्ल डीन से शादी की थी। दोनों 2025 में डीन की 82 वर्ष की उम्र में मृत्यु होने तक साथ रहे। डीन को सार्वजनिक रूप से बहुत कम देखा जाता था, लेकिन डॉली पार्टन के करियर पर उनका प्रभाव था। पार्टन ने 'एनपीआर' को बताया था कि उन्होंने अपना मशहूर गीत 'जोलीन' एक ऐसी बैंक कर्मचारी के बारे में लिखा था, जो उनके पति कार्ल डीन में खास दिलचस्पी लेती दिखाई दी थी। पार्टन ने फिल्मों में भी सफलता हासिल की और '9 टू 5', 'द बेस्ट लिटिल वोरहाउस इन टेक्सास' तथा 'स्टील मैग्नोलियास' में अभिनय किया। वह एक सफल कारोबारी और परोपकारी भी थीं। - लॉस एंजिलिस । हॉलीवुड अभिनेता टॉम हिडलस्टन और विलेम डफो अभिनीत तथा फिल्म निर्माता जेनिफर पीडम की एवरेस्ट पर आधारित ड्रामा फिल्म 'तेनजिंग' के साथ 24 सितंबर को 22वें ज्यूरिख फिल्म फेस्टिवल की शुरुआत होगी। अमेरिका की मनोरंजन पत्रिका 'वेराइटी' की रिपोर्ट के अनुसार, 'एप्पल ओरिजिनल फिल्म्स' द्वारा निर्मित इस फिल्म के यूरोप में पहली बार प्रदर्शित किए जाने के मौके पर हिडलस्टन, डफो और पीडम ज्यूरिख में ग्रीन कार्पेट पर नजर आएंगे। यह फिल्म माउंट एवरेस्ट की पहली सफल चढ़ाई की कहानी बयां करती है। ज्यूरिख फिल्म महोत्सव के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) क्रिश्चियन जुंगेन ने कहा कि इस साल महोत्सव का मूल विचार (थीम) 'सपने बड़े देखो' है और हमारी शुरुआती फिल्म 'तेनजिंग' इसमें पूरी तरह फिट बैठती है, क्योंकि यह दिखाती है कि बड़ा सपना देखने पर इंसान अपनी सीमाओं से आगे कैसे निकल सकता है। फिल्म 'तेनजिंग' नौ अक्टूबर को कुछ चुनिंदा सिनेमाघरों में प्रदर्शित होगी और इसके बाद 16 अक्टूबर को ओटीटी मंच 'एप्पल टीवी' पर प्रदर्शित की जाएगी।
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मुंबई. अभिनेत्री और भाजपा सांसद कंगना रनौत ने एक आभूषण ब्रांड के लिए अदाकारा कृति सैनन के नए विज्ञापन पर तंज कसते हुए मंगलवार को कहा कि यह विज्ञापन ''जानबूझकर असहज करने वाला'' लगता है, वहीं कुछ लोगों ने इस विज्ञापन को भद्दा बताया। वहीं कुछ लोगों ने अभिनेत्री के पहनावे का समर्थन भी किया।
रनौत ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा, ''महिला होने के लिए यह शानदार समय है। हमारी अलमारियां तरह-तरह के कपड़ों से भरी हैं। आज की महिला वैश्विक महिला है-कॉकटेल ड्रेस से लेकर लहंगा-चोली, जींस से साड़ी और बिकिनी से सलवार-कमीज तक।'' रनौत ने कहा, ''आज हमारे पास कपड़ों के इतने विकल्प हैं, फिर आप अपनी बिकिनी/अंतर्वस्त्र में अपने भाई को राखी क्यों बांधोगी? आपके पास स्टाइल के सारे विकल्प कहां हैं? हा हा, यह विज्ञापन जानबूझकर असहज करने वाला लगता है।'' कृति ने अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी हैं।
इस विज्ञापन में सैनन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हुई दिख रही हैं, जबकि उनका पालतू कुत्ता उन्हें देख रहा है। इसके बाद वह कुत्ते के पैर पर भी एक राखी बांधती हैं। इस वीडियो को लेकर विवाद शुरू हो गया। कई लोगों ने पारंपरिक त्योहार के दौरान उनके कपड़ों के चुनाव को लेकर आलोचना की और कुछ लोगों ने कुत्ते को राखी बांधने पर भी आपत्ति जताई। एक सोशल मीडिया उपयोगकर्ता ने लिखा, ''कृति सैनन ब्रा जैसा परिधान पहनकर राखी बांध रही हैं। पहले नग्नता इतनी आम नहीं थी।'' एक अन्य उपयोगकर्ता ने लिखा, ''रचनात्मक स्वतंत्रता अच्छी बात है, लेकिन इससे परंपरा का मूल भाव नहीं बदलना चाहिए।'' शिवसेना (उबाठा) के सांसद संजय राउत समेत कई लोगों ने अभिनेत्री का बचाव भी किया।
सैनन पर रनौत की टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "आप उस महिला सांसद को इतनी गंभीरता से क्यों लेते हैं? मत लीजिए।" उन्होंने संवाददाताओं से कहा, "उन्हें इतना महत्व मत दीजिए। वे 'अंध भक्त' हैं। वह एक कदम आगे हैं, उनके पास दिमाग नहीं है। इतने सारे मुद्दे हैं, लेकिन... आप उनसे यह क्यों नहीं पूछते कि चाय महंगी क्यों हो रही है... हमारा गन्ना कहां गया, वह इथेनॉल बनाने में चला गया।" कई लोगों ने अभिनेत्री का बचाव भी किया। एक उपयोगकर्ता ने सोशल मीडिया पर लिखा, ''भारतीय पुरुष रक्षाबंधन के विज्ञापन में कृति सैनन के आधुनिक कपड़े पहनने से परेशान हो रहे हैं। काश, वे उन महिलाओं के लिए भी ऐसा ही आक्रोश दिखाते जो सामान्य कपड़े पहनने के बावजूद रोजाना भारतीय पुरुषों के हाथों बलात्कार का शिकार होती हैं और उन्हें न्याय नहीं मिलता। -
मुंबई. भारतीय फिल्म महोत्सव मेलबर्न (आईएफएफएम) के 17वें संस्करण का आगाज बृहस्पतिवार को मेलबर्न में हुआ। इस मौके पर ऋषभ शेट्टी, दुलकर सलमान और विजय वर्मा समेत भारतीय फिल्म जगत के कई अन्य कलाकार और फिल्म निर्माता मौजूद रहे। भारत के बाहर भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े उत्सव के रूप में चर्चित यह महोत्सव इस साल 13 से 23 अगस्त तक आयोजित किया जाएगा। महोत्सव के उद्घाटन समारोह में अभिनेत्री मानुषी छिल्लर, गायिका निकिता गांधी और चर्चित फिल्म निर्माता निखिल आडवाणी तथा आर एस प्रसन्ना भी शामिल हुए। इस कार्यक्रम ने भारतीय कहानी कहने की विविधता, विस्तार और वैश्विक प्रभाव का जश्न मनाने वाले महोत्सव की शुरुआत का माहौल तैयार किया। कन्नड़ भाषा की एक्शन थ्रिलर फिल्म 'कांतारा' से दुनियाभर में प्रसिद्धि पाने वाले शेट्टी ने भारतीय सिनेमा को मिल रही बढ़ती वैश्विक पहचान और दुनिया भर के दर्शकों तक भारतीय कहानियों तथा क्षेत्रीय आवाजों को पहुंचाने में आईएफएफएम जैसे मंचों के महत्व पर चर्चा की। भारतीय फिल्म महोत्सव मेलबर्न के 17वें संस्करण ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय सिनेमा का जश्न मनाने की अपनी परंपरा को जारी रखा। उद्घाटन प्रेस कॉन्फ्रेंस के साथ ऐसे संस्करण की शुरुआत हुई, जो भारतीय कहानी कहने की समृद्धि और विविधता को प्रदर्शित करने के साथ-साथ सिनेमा, संस्कृति और प्रतिनिधित्व से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर सार्थक संवाद के लिए एक मंच भी उपलब्ध कराएगा। आईएफएफएम में अभिनेत्री रेखा को 'एक्सीलेंस इन सिनेमा अवॉर्ड' से सम्मानित किया जाएगा। महोत्सव में अभिनेत्री के बेजोड़ फिल्मी सफर और भारतीय सिनेमा में उनके असाधारण योगदान का जश्न मनाने के लिए उनकी 1981 की चर्चित फिल्म 'उमराव जान' का प्रदर्शन भी किया जाएगा। मुजफ्फर अली के निर्देशन में बनी फिल्म 'उमराव जान' रेखा के करियर की सबसे महत्वपूर्ण फिल्मों में से एक है और इस साल इसकी रिलीज के 45 वर्ष पूरे हुए हैं।
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