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नयी दिल्ली. बॉलीवुड अभिनेता अजय देवगन की फिल्म 'धमाल 4' ने रिलीज के शुरुआती दो दिनों में घरेलू बॉक्स ऑफिस पर कुल 38.71 करोड़ रुपये की कमाई की है। इंद्र कुमार के निर्देशन में बनी यह फिल्म शुक्रवार को सिनेमाघरों में रिलीज हुई। टी-सीरीज के बैनर तले बनी यह फिल्म 'धमाल' श्रृंखला की चौथी फिल्म है। फिल्म में 'आदि' और 'मानव' के किरदारों की जोड़ी फिर नजर आई है। ये किरदार क्रमशः अरशद वारसी और रितेश देशमुख ने निभाए हैं। इनके अलावा फिल्म में अजय देवगन, जावेद जाफरी और संजय मिश्रा भी प्रमुख भूमिकाओं में हैं। एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, फिल्म ने घरेलू बॉक्स ऑफिस पर पहले दिन शुक्रवार को 15.50 करोड़ रुपये और शनिवार को 23.21 करोड़ रुपये की कमाई की। विज्ञप्ति में कहा गया है कि 'धमाल 4' की कहानी पैसे के लालची लोगों पर आधारित है, जो दूरदराज के एक द्वीप पर छिपे खजाने की तलाश में एक-दूसरे से आगे निकलने की कोशिश करते हैं। उनकी इस तलाश में नया मोड़ तब आता है, जब उनका सामना आधुनिक समुद्री डाकुओं के एक दल से होता है जो उसी खजाने की तलाश में है। फिल्म का निर्माण अजय देवगन, भूषण कुमार, कृष्ण कुमार, अशोक ठकेरिया, इंद्र कुमार, आनंद पंडित और कुमार मंगत पाठक ने किया है। 'धमाल' फिल्म श्रृंखला की शुरुआत 2007 में आई इसी नाम की फिल्म से हुई थी। इसके बाद 2011 में 'डबल धमाल' और 2019 में 'टोटल धमाल' रिलीज हुई।
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नयी दिल्ली। जाने-माने रंगमंच निर्देशक एवं अभिनेता रजत कपूर के नाटक 'द थिंग विद फेदर्स' का मंचन आठ और नौ अगस्त को मुंबई में पहली बार किया जाएगा, जो आद्यम रंगमंच के आठवें सीजन की चौथी प्रस्तुति होगी। रबिया कपूर और चंद्रचूड़ राय द्वारा सह-लिखित यह नाटक 1900 से 1950 के बीच के दौर की कहानी पेश करता है, जिसमें असाधारण परिस्थितियों का सामना करने वाले आम लोगों के जीवन को दिखाया गया है। यह नाटक युद्धों और राजनीतिक उथल-पुथल पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, उन लोगों के जीवन को दर्शाता है जो इतिहास के बदलते दौर के बीच प्यार, बिछोह, उम्मीद और संघर्ष से प्रभावित होते हैं। कपूर ने एक बयान में कहा, ''हमने 20वीं सदी के पहले हिस्से पर आधारित एक नाटक मंचन के बारे में सोचा था। फिर यह विचार आया कि अगर इन 50 महत्वपूर्ण वर्षों की कहानी को आम लोगों के नजरिये से देखा जाए तो शायद यह ज्यादा प्रभावी और जीवंत लगेगी।'' इस नाटक के कलाकारों में विनय पाठक, मंत्रा, नील भूपालम, भाव्या रामपाल, वारिस अहमद जैदी, चंद्रचूड़ राय और अमित पुरोहित शामिल हैं। मुंबई में बाल गंधर्व रंग मंदिर में प्रीमियर के बाद यह नाटक 12 और 13 सितंबर को 'नेशनल सेंटर फॉर द परफॉर्मिंग आर्ट्स' (एनसीपीए) के जमशेद भाभा रंगमंच में प्रस्तुत किया जाएगा। इसके बाद इसका मंचन 26 और 27 सितंबर को दिल्ली के कमानी ऑडिटोरियम में भी होगा। - आलेख प्रशांत शर्माजन्मदिन पर विशेष--11 जुलाईफिल्मी परदे पर सबको हंसाने वाली प्यारी टुनटुन (जन्म-11 जुलाई 1923 - निधन 23 नवम्बर 2003) की आज बर्थ एनिवर्सिरी है। वे लोगों के दिलों में ऐसे छाई कि आज भी यदि कोई मोटी महिला दिख जाती है, तो लोग मजाक में उसे टुनटुन कह देते हैं। टुनटुन ने अपना कॅरिअर पाश्र्वगायिका के रूप में अपने मूल नाम उमा देवी खत्री से शुरू किया था। अफसाना लिख रही रही हूं... गीत उन्होंने ही गाया है।नूरजहां के प्रति दीवानगी और गायिकी के जुनून ने उन्हें मथुरा से मुंबई पहुंचाया। चाचा के घर में पली-बढ़ी उमा देवी की हैसियत परिवार में एक नौकर के समान थी। घरेलू काम के सिलसिले में उमादेवी का दिल्ली के दरियागंज इलाके में रहने वाले एक रिश्तेदार के घर अक्सर आना-जाना लगा रहता था। वहीं उनकी मुलाक़ात अख्तर अब्बास क़ाज़ी से हुई, जो दिल्ली में आबकारी विभाग में निरीक्षक थे। काज़ी साहब उमा देवी का सहारा बने, लेकिन वे लाहौर चले गए।इस बीच उमा देवी ने भी गायिका बनने का ख्वाब पूरा करने के लिए मुंबई जाने की योजना बना ली। दिल्ली में जॉब करने वाली उनकी एक सहेली की मुंबई में फि़ल्म इंडस्ट्रीज के कुछ लोगों से पहचान थी। एक बार जब वो गांव आई, तो उसने उमा देवी को निर्देशक नितिन बोस के सहायक जव्वाद हुसैन का पता दिया। वर्ष 1946 था और उमादेवी 23 बरस की थी। वे किसी तरह हिम्मत जुटाकर गांव से भागकर मुंबई आ गई। जव्वाद हुसैन ने उन्हें अपने घर पनाह दी। मुंबई में उमा देवी की दोस्ती अभिनेता और निर्देशक अरूण आहूजा और उनकी पत्नी गायिका निर्मला देवी से हुई, जो मशहूर अभिनेता गोविंदा के माता-पिता थे। इस दंपत्ति ने उमा देवी का परिचय कई प्रोड्यूसर और डायरेक्टर से करवाया। उस समय तक अख्तर अब्बास काज़ी साहब भी मुंबई आ गए थे। 1947 में उमा देवी और काज़ी साहब ने शादी कर ली।उसके बाद उमा देवी काम की तलाश करने लगी। उन्हें कहीं से पता चला कि डायरेक्टर अब्दुल रशीद करदार फि़ल्म दर्द बना रहे हैं. वे उनके स्टूडियो पहुंचकर उनके सामने खड़े हो गई। उन्होंने पहले कभी करदार साहब को नहीं देखा था। बेबाक तो वो बचपन से ही थी, उनसे ही सीधे पूछ बैठी, करदार साहब कहां मिलेंगे? मुझे उनकी फि़ल्म में गाना गाना है। शायद उनका ये बेबाक अंदाज़ करदार साहब को पसंद आ गया, इसलिए बिना देर किये उन्होंने संगीतकार नौशाद के सहायक गुलाम मोहम्मद को बुलाकर उमा देवी का टेस्ट लेने को कह दिया। उस टेस्ट में उमादेवी ने फिल्म जीनत में नूरजहां द्वारा गाया गीत आँधियां गम की यूं चली गाया। हालांकि उमा देवी एक प्रशिक्षित गायिका नहीं थी, लेकिन रेडियो पर गाने सुनकर और उन्हें दोहराकर वे अच्छा गाने लगी थी। बरहलाल, उनका गया गाना सबको पसंद आया और वो 500 रुपये की पगार पर नौकरी पर रख ली गई।जब उमा देवी की मुलाक़ात नौशाद से हुई, तो उनसे भी बेबकीपूर्ण अंदाज़ में उन्होंने कह दिया कि उन्हें अपनी फि़ल्म में गाना गाने का मौका दें, नहीं तो वे उनके घर के सामने समुद्र में डूबकर अपनी जान दे देंगी। नौशाद साहब भी उनकी बेबाकी पर हैरान थे। खैर, उन्होंने उमा देवी को गाने मौका दिया और दर्द फिल्म का गीत अफ़साना लिख रही हूं ...उनसे गवाया। यह गीत बहुत हिट हुआ और आज तक लोगों की ज़ेहन में बसा हुआ है। उस फि़ल्म के अन्य गीत आज मची है धूम, ये कौन चला, बेताब है दिल .. भी लोगों को बहुत पसंद आये।फिर क्या था , उमा देवी की गायिका के रूप में गाड़ी चल पड़ी। कई फि़ल्मी गीतों को उन्होंने अपनी सुरीली आवाज़ से सजाया। 1947 में ही बनी फि़ल्म नाटक में उन्हें गाने का मौका मिला और उन्होंने गीत दिलवाले जल कर मर ही जाना गाया। फिर 1948 की फि़ल्म अनोखी अदा में दो सोलो गीत काहे जिया डोले हो कहा नहीं जाए, दिल को लगा के हमने कुछ भी न पाया और फि़ल्म चांदनी रात में शीर्षक गीत'चांदनी रात है, हाय क्या बात है, में भी उन्होंने अपनी आवाज़ दी। उमादेवी को गाने के मौके मिलते रहे और वो गाती रहीं। उन्होंने कई फि़ल्मों में गाने गए। उनके द्वारा गाये गए गीत लगभग 45 के आस-पास हैं।बच्चों के जन्म के साथ उनकी पारिवारिक जि़म्मेदारियां बढ़ रही थी। साथ ही लता मंगेशकर , आशा भोंसले जैसी संगीत की विधिवत् शिक्षा प्राप्त गायिकाओं का भी बॉलीवुड फि़ल्म इंडस्ट्रीज में पदार्पण हो चुका था। उमादेवी ने गायन का प्रशिक्षण नहीं लिया था। इसलिए धीरे-धीरे उनका गायन का काम सिमटता गया और एक दिन वह अपना गायन करिअर छोड़कर पूरी तरह अपने परिवार में रम गई। परिवार चलाना मुश्किल हुआ तो उमादेवी ने फिर से फि़ल्मों में काम करने का मन बनाया।वे अपने गुरू नौशाद साहब से मिली। उमादेवी फिर से फि़ल्मों में गाना चाहती थीं, लेकिन समय आगे निकल चुका था। स्थिति को देखते हुए नौशाद साहब ने उन्हें कहा, तुम अभिनय में हाथ क्यों नहीं आजमाती? उमादेवी ने अपने बेबाक अंदाज़ में उन्होंने कह दिया, मैं एक्टिंग करूंगी, लेकिन दिलीप कुमार के साथ। दिलीप कुमार उस समय के सुपरस्टार थे। इसलिए उमादेवी की बात सुनकर नौशाद साहब हंस पड़े, लेकिन इसे किस्मत ही कहा जाए कि अपने अभिनय करिअर की शुरूआत उमादेवी ने दिलीप कुमार के साथ ही की। फिल्म थी - बाबुल जिसमें हिरोइन थीं - नर्गिस। उस वक्त उमा देवी का वजन काफी बढ़ गया था। दिलीप कुमार ने ही मोटी उमा को देखकर टुनटुन नाम दिया और यह नाम हमेशा के लिए उनके साथ जुड़ गया। फि़ल्म रिलीज़ हुई और छोटे से रोल में भी उनका अभिनय काफ़ी सराहा गय। उसके बाद आई मशहूर निर्माता-निर्देशक और अभिनेता गुरु दत्त की फि़ल्म मिस्टर एंड मिस 55 में उन्होंने अपने अभिनय के वे जौहर दिखाए कि हर कोई उनका कायल हो गया.बाद में टुनटुन की ख्याति इतनी बढ़ गई थी कि फि़ल्मकार उनके लिए अपनी फि़ल्म में विशेष रूप से रोल लिखवाया करते थे और टुनटुन भी हर रोल को अपने शानदार अभिनय से यादगार बना देती थीं। 70 के दशक के बाद उन्होंने फि़ल्मों में काम करना कम कर दिया और अधिकांश समय अपने परिवार के साथ गुजारने लगी। उनकी अंतिम फिल्म 1990 में आई कसम धंधे की थी। 24 नवंबर 2003 में उन्होंने इस दुनिया से विदा ली, लेकिन आज भी वे हिन्दी फिल्मों की पहली और सबसे सफ़ल महिला कॉमेडियन के रूप में याद की जाती हैं।
- जन्मदिन विशेष-9 जुलाईआलेख प्रशांत शर्मामुंबई। हिंदी सिनेमा जगत के बेहतरीन अभिनेता संजीव कुमार आज जिंदा होते तो वे अपना 82 वां जन्मदिन मना रहे होते। साथ ही फिल्मों में अपने शानदार अभिनय से लोगों को प्रभावित कर रहे होतेेे। लेकिन मात्र 47 साल की उम्र में वे इस दुनिया से रुखसत हो गए। उन्होंने हर तरह की फिल्में कीं। सबसे ज्यादा जया भादुड़ी के साथ उन्हें पसंद किया। जया फिल्म इंडस्ट्री की वो एकमात्र एक्ट्रेस हैं, जो संजीव कुमार की प्रेमिका बनी, बेटी बनी और फिर बहू के रूप में भी नजर आईं। फिल्म कोशिश में संजीव और जया के अभिनय को खूब सराहना मिली थी।9 जुलाई 1938 को संजीव कुमार का जन्म सूरत में हुआ था। उनका असली नाम हरिहर जेठालाल जरीवाला था और उनके करीबी उन्हें प्यार से हरी भाई कहकर बुलाते थे। इंडस्ट्री की रवायत थी असल जिंदगी के नाम को भुलाकर पर्दे पर नए चमकते हुए नाम को बनाना और ऐसे ही सिनेमा में आने के बाद हरिहर जेठालाल दुनिया के लिए बन गए संजीव कुमार।घर खरीदने का सपना पूरा नहीं हो पायासंजीव कुमार के दौर की बात हो तो अंजू महेन्द्रू का नाम सुनाई दे ही जाता है। राजेश खन्ना से लेकर संजीव कुमार तक अंजू की करीबियां रही हैं। संजीव अंजू को मुंहबोली बहन मानते थे। एक दफा अंजू महेन्द्र ने बीबीसी से बात करते हुए कहा था कि संजीव कुमार की एक इच्छा मरते समय तक भी पूरी नहीं हो सकी थी। दरअसल संजीव कुमार मुंबई में अपना एक बंगला खरीदना चाहते थे। जब उन्हें कोई बंगला पसंद आता और उसके लिए पैसे जुटाते तब तक उसके भाव बढ़ जाते। यह सिलसिला कई सालों तक चला। अंजू ने इस इंटरव्यू में कहा था- जब पैसा जमा हुआ, घर पसंद आया तो पता चला की वह प्रॉपर्टी कानूनी पचड़े में फंसी है। मामला सुलझे उससे पहले वह चल बसे। तो ऐसे रुपये होने के बावजूद संजीव कुमार मुंबई में अपने खुद के घर का सपना कभी पूरा ही नहीं कर सके।बहुत शक्की थे संजीव कुमारपर्दे पर अक्सर गंभीर किरदार निभाने वाले संजीव कुमार असल जिदंगी में भी संजीदा ही थे। इसी इंटरव्यू में अंजू महेन्द्रू ने संजीव कुमार को लेकर कई दिलचस्प बातें भी साझा की। उन्होंने कहा था- जिन महिलाओं के साथ भी उनका अफेयर रहा उन पर संजीव बहुत शक किया करते थे। उन्हें लगता था कि वे उन्हें नहीं उनके पैसों को चाहती हैं। इसी धारणा के चलते उनकी शादी नहीं हो पाई। संजीव कुमार हेमामालिनी से बेतहाशा प्यार करते थे। वहीं सुलक्षणा पंडित उनके प्यार में पागल थी। संजीव कुमार के ठुकराए जाने के बाद सुलक्षणा डिप्रेशन में चली गईं और उनका कॅरिअर खत्म हो गया। .मौत का लगा रहता था डरएक दिलचस्प बात यह भी है कि संजीव कुमार को हमेशा एक फिक्र यह भी रहती थी कि उनके परिवार में अधिकतर पुरुषों की मौत 50 की उम्र से पहले ही हुई थी। संजीव के छोटे भाई की मृत्यु भी कम उम्र में होने से उनके मन में यह बात और गहरे से बैठ गई। संजीव अक्सर अपने करीबियों से कहते थे कि वह भी जल्दी चले जाएंगे और नियति का खेल देखिए हुआ भी कुछ ऐसा ही और 6 नवंबर 1985 को 47 साल की उम्र में वह भी चल बसे।मौत के बाद रिलीज हुईं फिल्मेंसंजीव कुमार की मौत के बाद 10 फिल्में रिलीज हुई थीं। इनमें से अधिकांश फिल्मों की शूटिंग बाकी रह गई थी। कहानी में फेरबदल कर इन्हें प्रदर्शित किया गया था। 1993 में उनकी अंतिम फिल्म प्रोफेसर की पड़ोसन प्रदर्शित हुई। इसके अलावा कातिल (1986), हाथों की लकीरें (1986), बात बन जाए (1986), कांच की दीवार (1986), लव एंड गॉड (1986), राही (1986) दो वक्त की रोटी (1988), नामुमकिन (1988), ऊंच नीच बीच (1989) फिल्में उनकी मौत के बाद रिलीज हुई थीं।हम हिन्दुस्तानी फिल्म से शुरू किया संजीव ने फिल्मी सफरसंजीव कुमार ने अपने फिल्मी सफर के दौरान कई यादगार भूमिकाएं निभाई थी। उन्होंने 1960 में आई फिल्म हम हिन्दुस्तानी से फिल्मी सफर शुरू किया था। उन्होंने अनुभव (1971), सीता और गीता (1972), कोशिश (1972), अनामिका (1973), नया दिन नई रात (1974), आंधी (1975), शोल (1975), मौसम (1975), उलझन (1975), नौकर (1979), सिलसिला (1981) सहित कई सुपरहिट फिल्मों में काम किया। (छत्तीसगढ़आजडॉट विशेष)
- मुंबई। बॉलीवुड गलियारे में अभिनेता शाहिद कपूर और निर्देशक-कोरियोग्राफर अहमद खान की दोस्ती की मिसाल दी जाती थी, लेकिन पिछले कुछ सालों से दोनों के बीच आई दूरी लगातार चर्चा का विषय बनी हुई थी. अब इस कथित अनबन पर खुद अहमद खान ने अपनी चुप्पी तोड़ी है. एक हालिया इंटरव्यू में अहमद खान ने शाहिद कपूर के साथ अपनी तीन दशक पुरानी बचपन की दोस्ती, साल 2015 में हुए विवाद के पीछे की असल वजह और भविष्य में दोबारा साथ काम करने की संभावनाओं पर बेहद खुलकर और बेबाकी से अपनी बात रखी है.अहमद खान ने कहा, "मेरा मतलब है कि अब हम उतना नहीं मिलते हैं. हम दोनों बचपन के दोस्त हैं। जब मैं 11 साल का था और वह महज 7 साल का था, तब हमारी दोस्ती हुई थी. इस तरह हमारा रिश्ता करीब 30 साल पुराना है." फिल्म इंडस्ट्री की चकाचौंध और व्यस्त जीवनशैली का जिक्र करते हुए अहमद ने आगे कहा, "लेकिन यह काम ही ऐसा है ना कि इसमें कई नए दोस्त आते हैं.आप इस क्षेत्र में इतने नए लोगों से दोस्ती कर लेते हैं कि आप भूल जाते हैं कि आपके असली दोस्त कौन हैं. अब हमारी लाइफस्टाइल भी पूरी तरह बदल चुकी है."एक समय बेहद करीबी रहे इन दोनों दोस्तों के बीच दरार आने की खबरें पहली बार साल 2015 में खुलकर सामने आई थीं. बैकग्राउंड की बात करें तो उस दौरान अहमद खान को वर्टिगो (चक्कर आने की गंभीर बीमारी) के अटैक के कारण अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था, लेकिन शाहिद कपूर एक बार भी उनका हालचाल जानने अस्पताल नहीं पहुंचे.दूसरी तरफ, इसी बात से नाराज होकर अहमद खान भी जुलाई 2015 में मीरा राजपूत के साथ हुई शाहिद कपूर की शादी में शामिल नहीं हुए थे, जबकि उन्हें आमंत्रित भी नहीं किया गया था. उस समय अहमद ने कहा था कि हमारे बीच कुछ मतभेद लंबे समय से सुलग रहे थे, जो अचानक बाहर आ गए. शुरुआती दिनों में शाहिद कपूर के करियर को संवारने में अहमद खान का बहुत बड़ा योगदान रहा था. उन्होंने ही साल 1999 में आए बैंड 'आर्यन्स' के सुपरहिट डेब्यू म्यूजिक वीडियो "आँखों में तेरा ही चेहरा" में शाहिद को कोरियोग्राफ किया था. इसके बाद शाहिद की पहली ब्लॉकबस्टर फिल्म 'इश्क विश्क' (2003) के गानों की कोरियोग्राफी भी अहमद ने ही की थी. आगे चलकर अहमद खान ने शाहिद को मुख्य अभिनेता के रूप में लेकर फिल्म 'फूल एंड फाइनल' (2007) का निर्देशन किया और साल 2010 में फिल्म 'पाठशाला' का निर्माण (प्रोड्यूस) किया, जिसमें शाहिद ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.शाहिद कपूर के साथ भविष्य में दोबारा काम करने के सवाल पर अहमद खान ने सकारात्मक रुख दिखाया, लेकिन साथ ही व्यावहारिक विसंगतियों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा, "पिछले कुछ वर्षों में शाहिद फिल्मों के एक खास खाके (टेम्पलेट) का पालन कर रहे हैं, जैसी फिल्में वे करना चाहते हैं. दूसरी ओर, मैं उस तरह का सिनेमा बना रहा हूं जो मुझे पसंद है."दोनों के दोबारा साथ आने की शर्तों को स्पष्ट करते हुए अहमद ने कहा, "हम तब दोबारा साथ काम करेंगे जब हमारी रचनात्मक सोच (सेंसिबिलिटी) एक जैसी होगी. जब हम दोनों एक ही तरह की फिल्में बनाने को लेकर सहमत होंगे, तो काम आसान हो जाएगा. मुझे पता है कि अगर मैं उस सही समय पर उनके पास कोई स्क्रिप्ट लेकर जाऊंगा, तो वह तुरंत इसके लिए तैयार हो जाएंगे. लेकिन फिलहाल, यह पचास-पचास (50-50) वाली स्थिति है."पेशेवर मोर्चे की बात करें तो अहमद खान इन दिनों अपनी निर्देशित मल्टीस्टारर कॉमेडी फिल्म 'वेलकम टू द जंगल' की सफलता का आनंद ले रहे हैं. वहीं, 45 वर्षीय शाहिद कपूर भी 'फर्जी' और 'तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया' जैसी हालिया सफलताओं के बाद अपनी आगामी फिल्मों 'देवा' और 'ओ रोमियो' की तैयारियों में व्यस्त हैं.
- नयी दिल्ली. आलिया भट्ट और शरवरी अभिनीत फिल्म 'अल्फा' ने रिलीज के पहले सप्ताहांत में दुनियाभर के सिनेमाघरों की टिकट खिड़की पर 57.60 करोड़ रुपये की कमाई की। निर्माताओं ने सोमवार को यह जानकारी दी। शिव रवैल के निर्देशन में बनी और यशराज फिल्म्स (वाईआरएफ) द्वारा निर्मित "अल्फा", इस स्टूडियो की जासूसी कहानियों पर आधारित फिल्मों की श्रृंखला की पहली ऐसी फिल्म है जिसमें मुख्य भूमिकाएं महिला कलाकारों ने निभाई हैं। निर्माताओं ने आधिकारिक 'एक्स' हैंडल पर पोस्ट साझा कर फिल्म की कमाई के आंकड़े जारी किए।पोस्ट के कैप्शन में लिखा, 'अल्फा' के हमारे दर्शकों के लिए 'अल्फा-प्यार'। एक्शन, संगीत और रोमांच से भरपूर 'अल्फा' सिनेमाघरों में देखिए। अपने टिकट अभी बुक करें।'' यह फिल्म दो विशिष्ट खुफिया एजेंटों की कहानी पर आधारित है, जिनके किरदार आलिया भट्ट और शरवरी ने निभाए हैं। फिल्म में ये दोनों एजेंट एक खतरनाक दुश्मन (बॉबी देओल का किरदार) का मुकाबला करने के लिए एक बड़े अभियान पर निकलती हैं। फिल्म में अनिल कपूर भी एक महत्वपूर्ण भूमिका में हैं, जबकि ऋतिक रोशन विशेष भूमिका में जासूस कबीर धारीवाल के अपने किरदार को दोहराते नजर आए हैं। "अल्फा" यशराज फिल्म्स की जासूसी कहानियों पर आधारित फिल्मों की श्रृंखला की नवीनतम फिल्म है, जिसमें इससे पहले "एक था टाइगर", "टाइगर जिंदा है", "वॉर", "पठान", "टाइगर 3" और "वॉर 2" जैसी फिल्में शामिल हैं। यह फिल्म शुक्रवार को देश भर के सिनेमाघरों में हिंदी, तमिल और तेलुगु भाषाओं में रिलीज हुई।
- नयी दिल्ली. ।बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन ने उन प्रशंसकों के प्रति आभार जताया जो मुंबई में भारी बारिश के बावजूद उनकी एक झलक पाने के लिए उनके आवास 'जलसा' के बाहर एकत्र हुए। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए बेहद भावुक करने वाला क्षण है। अमिताभ बच्चन पांच दशक से भी अधिक समय से फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय हैं। वह हर रविवार अपने आवास के बाहर आकर अपने प्रशंसकों से मुलाकात करते हैं, जो उनकी एक झलक पाने के लिए वहां इकट्ठा होते हैं। अभिनेता यह वर्षों से करते आ रहे हैं। अभिनेता ने सोमवार को अपने व्यक्तिगत ब्लॉग पर इस मुलाकात की तस्वीरें साझा कर कहा कि उनके प्रशंसक खराब मौसम में भी चाहे बारिश हो या सर्दी, उनके आवास के पास आते हैं। इस समय मुंबई में मानसून की स्थिति गंभीर बनी हुई है।तस्वीरों में अभिनेता अपने प्रशंसकों का अभिवादन करते नजर आए। उन्होंने लिखा, " हाथ हिलाना, नमस्कार करना, ऑटोग्राफ देना… और वे आते हैं, इंतजार करते हैं और फिर चले जाते हैं… मैं हमेशा उनका सम्मान करता हूं। चाहे बारिश हो, धूप हो या सर्दी, वे मौसम की परवाह किए बिना आते हैं और वही उत्साह बनाए रखते हैं… यह मेरे लिए बेहद भावुक करने वाला है।" बच्चन फिल्म 'कल्कि 2898 एडी' के अगले भाग और 'सेक्शन 84' में नजर आएंगे, जिसमें वह डायना पेंटी और निमरत कौर के साथ दिखाई देंगे।
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मुंबई/ अभिनेता आमिर खान रविवार को यहां अपने निवास पर आयोजित एक निजी समारोह में गौरी स्प्रैट के साथ विवाह बंधन में बंध गए। इस दौरान परिवार के करीबी सदस्य और फिल्म उद्योग से जुड़े उनके मित्र मौजूद रहे। मुंबई में भारी बारिश के बावजूद विवाह समारोह तय कार्यक्रम के अनुसार हुआ। इस अवसर पर 'लगान' के निर्देशक आशुतोष गोवारिकर, हास्य कलाकार एवं अभिनेता वीर दास, क्रिकेटर इरफान पठान और उद्योगपति मुकेश अंबानी सहित फिल्म उद्योग एवं अन्य क्षेत्रों से जुड़े आमिर के करीबी मित्र उपस्थित रहे। अभिनेता की टीम द्वारा साझा की गई तस्वीरों के अनुसार, आमिर खान परिवार के सदस्यों की मौजूदगी में गौरी स्प्रैट के साथ विवाह संबंधी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करते नजर आए। एक तस्वीर में गौरी का बेटा इस जोड़े के बीच बैठा दिखाई दे रहा है, जबकि आमिर का बेटा आजाद अभिनेता के पास बैठा नजर आ रहा है। आमिर खान का यह तीसरा विवाह है। इससे पहले उन्होंने फिल्म निर्माता रीना दत्ता से विवाह किया था और दोनों 1986 से 2002 तक साथ रहे थे। उनके दो बच्चे, जुनैद और इरा खान हैं। इसके बाद अभिनेता ने 2005 में फिल्म निर्माता किरण राव से विवाह किया था। दोनों 2021 में अलग हो गए, हालांकि वे अपने बेटे आजाद की मिलकर परवरिश कर रहे हैं। बेंगलुरु की रहने वाली गौरी सौंदर्य एवं स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी हैं और पहले विवाह से उनका एक बेटा है।
- मुंबई। आलिया भट्ट और शरवरी अभिनीत फिल्म "अल्फा" ने अपने प्रदर्शन के पहले दिन दुनिया भर के बॉक्स ऑफिस पर 17.42 करोड़ रुपये की कमाई की है। निर्माताओं ने शनिवार को सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट के जरिए फिल्म की कमाई के आंकड़े साझा किए। इस पोस्ट में फिल्म का एक पोस्टर साझा किया गया है, जिस पर बॉक्स ऑफिस के आंकड़े लिखे हुए हैं। इस पोस्ट के साथ लिखे संदेश में कहा गया है, "'अल्फा' दुनिया भर में दिल जीत रही है। पहले दिन की वैश्विक सकल कमाई 17.42 करोड़ रुपये।" निर्माताओं के अनुसार, फिल्म ने घरेलू बॉक्स ऑफिस पर 11.20 करोड़ रुपये (सकल) और विदेशों में 6.22 करोड़ रुपये की कमाई की है। शिव रवैल के निर्देशन में बनी और यशराज फिल्म्स (वाईआरएफ) के द्वारा निर्मित "अल्फा", इस स्टूडियो की जासूसी कहानियों पर आधारित फिल्मों की श्रृंखला की पहली ऐसी फिल्म है जिसमें मुख्य भूमिकाएं महिला कलाकारों ने निभाई हैं। यह फिल्म दो विशिष्ट खुफिया एजेंटों की कहानी पर आधारित है, जिनके किरदार आलिया भट्ट और शरवरी ने निभाए हैं। फिल्म में ये दोनों एजेंट बॉबी देओल द्वारा निभाए गए एक खतरनाक दुश्मन का मुकाबला करने के लिए एक बड़े अभियान पर निकलती हैं। फिल्म में अनिल कपूर भी एक महत्वपूर्ण भूमिका में हैं, जबकि ऋतिक रोशन विशेष भूमिका में जासूस कबीर धारीवाल के अपने किरदार को दोहराते नजर आए हैं। "अल्फा" यशराज फिल्म्स की जासूसी कहानियों पर आधारित फिल्मों की श्रृंखला की नवीनतम फिल्म है, जिसमें इससे पहले "एक था टाइगर", "टाइगर जिंदा है", "वॉर", "पठान", "टाइगर 3" और "वॉर 2" जैसी फिल्में शामिल हैं। यह फिल्म शुक्रवार को देश भर के सिनेमाघरों में हिंदी, तमिल और तेलुगु भाषाओं में रिलीज हुई।
- मुंबई: बॉलीवुड अभिनेता इमरान हाशमी के करियर की सबसे बेहतरीन और कल्ट फिल्मों में शुमार 'आवारापन' के सीक्वल का फैंस लंबे समय से इंतजार कर रहे थे. सोमवार, 29 जून को मेकर्स ने प्रशंसकों को बड़ा सरप्राइज देते हुए 'आवारापन 2' का पहला आधिकारिक टीज़र रिलीज कर दिया है. यह टीजर ठीक उसी तारीख को रिलीज किया गया है, जिस दिन 19 साल पहले (29 जून 2007) इस फिल्म का पहला भाग सिनेमाघरों में आया था. विशेष फिल्म्स के बैनर तले बनी यह फिल्म 14 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर बड़े पर्दे पर दस्तक देने के लिए पूरी तरह तैयार है.रिलीज हुआ 1 मिनट से अधिक का यह टीज़र पुरानी यादों को ताजा कर देता है. टीज़र की शुरुआत इमरान हाशमी के एक रेगिस्तानी इलाके में बाइक चलाने से होती है, जिसमें बैकग्राउंड में भारी आवाज में संवाद सुनाई देता है— "कुछ लोगों की कहानियां उनकी मर्जी से खत्म नहीं होतीं, उनकी कहानी दूसरों के लिए लिखी जाती है।" इसके तुरंत बाद बैकग्राउंड में फिल्म का आइकोनिक गाना 'तो फिर आओ' (Toh Phir Aao) का नया वर्जन गूंजने लगता है.टीजर में दिखाया गया है कि शिवम अपनी मृत प्रेमिका आलिहा हामिद (श्रिया सरन) की कब्र पर गुलाब का फूल चढ़ाने जाता है. वह याद करता है कि कैसे पहले भाग के अंत में उसे गोली मार दी गई थी, लेकिन एक बौद्ध भिक्षु ने उसे बचा लिया था. अब वह अपनी मौत को चुनौती देते हुए इस दर्द को हमेशा के लिए खत्म करने निकला है. इमरान हाशमी टीज़र में अपना प्रसिद्ध डायलॉग दोहराते हैं, "दर्द से पुराना रिश्ता है मेरा... इस बार या तो यह आवारापन खत्म होगा, या मैं."नितिन कक्कड़ के निर्देशन में बन रही इस फिल्म में कई नए चेहरे शामिल किए गए हैं. टीजर में बॉलीवुड की ग्लैम डॉल दिशा पटानी की एक बेहद महत्वपूर्ण झलक दिखाई गई है, जो फिल्म में फीमेल लीड का किरदार निभा रही हैं. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि दिग्गज अभिनेत्री शबाना आजमी भी इस फिल्म का हिस्सा हैं और वे अपने करियर में पहली बार एक खूंखार विलेन के रूप में स्क्रीन पर नजर आने वाली हैं. फिल्म की कहानी बिलाल सिद्दीकी ने लिखी है, जो शिवम के अतीत और वर्तमान के संघर्षों, उसके बदले और मोक्ष ( की यात्रा को और गहराई से दिखाएगी. राजस्थान और दक्षिण-पूर्व एशिया की खूबसूरत लोकेशंस पर इस फिल्म की शूटिंग पूरी की जा चुकी है.
- मुंबई। टीवी इंडस्ट्री के पसंदीदा कप्लस में से एक जैस्मिन भसीन और अली गोनी के लिए इस साल का बर्थडे ट्रिप काफी तनावपूर्ण साबित हो रहा है. अभिनेत्री जैस्मिन भसीन अपने जन्मदिन का जश्न मनाने के लिए बॉयफ्रेंड अली गोनी के साथ दुबई गई थीं, लेकिन वहां अचानक एक गंभीर संक्रमण (की चपेट में आने के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. अली गोनी ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल पर अस्पताल के कमरे से जैस्मिन की कुछ तस्वीरें साझा करते हुए इस बात की जानकारी दी. उन्होंने एक बेहद भावुक पोस्ट लिखकर अपनी लेडीलव के जल्द स्वस्थ होने की कामना की है.अभिनेता अली गोनी ने इंस्टाग्राम पर जैस्मिन के साथ दो तस्वीरें और एक वीडियो पोस्ट किया है. पहली तस्वीर में अली अस्पताल के बेड पर लेटी जैस्मिन को गले लगाते हुए ढाढस बंधा रहे हैं, जबकि दूसरी तस्वीर में जैस्मिन व्हीलचेयर पर बैठी हुई नजर आ रही हैं. इसके साथ ही उन्होंने एक छोटा वीडियो भी साझा किया है, जिसमें जैस्मिन बीमारी की हालत में भी हिम्मत जुटाकर अस्पताल के कमरे में ही अपना बर्थडे केक काटती दिख रही हैं.अली ने पोस्ट के कैप्शन में लिखा, "हैप्पी हैप्पी बर्थडे जैस्मिन. हम यहां तुम्हारा जन्मदिन मनाने आए थे, लेकिन जिंदगी की कुछ और ही योजनाएं थीं. जन्मदिन की खूबसूरत यादें बनाने की जगह, आज हम अस्पताल के कमरे में हैं. तुम्हें इस तरह तकलीफ में देखना इस पूरे सफर का सबसे मुश्किल हिस्सा रहा है. तुम्हें फिर से स्वस्थ और मुस्कुराते हुए देखने के लिए मैं किसी भी जश्न को छोड़ने को तैयार हूं." अली ने आगे लिखा कि अल्लाह तुम्हें अच्छी सेहत, खुशियां और कामयाबी दे, आज मेरे दिल में बस यही एक दुआ है. अली गोनी ने बताया कि जैस्मिन भसीन को उनके जन्मदिन पर अस्पताल में भर्ती कराया गयाअली गोनी ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज पर एक और विस्तृत हेल्थ अपडेट साझा किया. उन्होंने लिखा, "मैसेज और कॉल करने वाले सभी लोगों का प्यार और दुआओं के लिए शुक्रिया. जैस्मिन अचानक बहुत ज्यादा बीमार पड़ गईं और गंभीर संक्रमण के चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. हमारे लिए पिछले कुछ दिन बेहद मुश्किल और भावुक कर देने वाले रहे हैं." अली ने प्रशंसकों से माफी मांगते हुए कहा कि वे फिलहाल किसी का फोन या मैसेज का जवाब नहीं दे पा रहे हैं, क्योंकि उनका पूरा ध्यान जैस्मिन की देखभाल पर है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि जैस्मिन को बेहतरीन मेडिकल केयर मिल रही है और वह धीरे-धीरे ठीक हो रही हैं.इस बीच, सोशल मीडिया पर लगातार कपल की शादी को लेकर कयास लगाए जा रहे थे, जिस पर अली गोनी ने कुछ समय पहले ही तीखी प्रतिक्रिया दी थी. इंस्टाग्राम पर लोगों द्वारा लगातार शादी की तारीख पूछे जाने पर अली ने मजाकिया लेकिन सख्त लहजे में लिखा था, "जब शादी करनी होगी, मैं खुद सबको बता दूंगा. मेरे रिश्तेदार भी मेरे पीछे इतने नहीं पड़े हैं, जितना यहां इंस्टाग्राम पर लोग पड़े रहते हैं. अपना-अपना काम करो, खुश रहो और दूसरों को भी रहने दो."जैस्मिन भसीन और अली गोनी की मुलाकात साल 2018 में रियलिटी शो 'खतरों के खिलाड़ी 9' के दौरान हुई थी, जहां दोनों अच्छे दोस्त बने थे. इसके बाद साल 2020 में 'बिग बॉस 14' के घर के भीतर दोनों को एक-दूसरे के लिए अपने प्यार का एहसास हुआ और तब से वे लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे हैं.
- लॉस एंजिलिस। फिल्म 'माइकल' ने दुनियाभर के बॉक्स ऑफिस पर 97.75 करोड़ अमेरिकी डॉलर से अधिक की कमाई कर ली है। इसी के साथ यह सर्वाधिक कमाई करने वाली 'बायोपिक' फिल्म बन गई है। इसने क्रिस्टोफर नोलन की ऑस्कर विजेता फिल्म 'ओपेनहाइमर' की कमाई को भी पीछे छोड़ दिया है।पॉप संगीत के बादशाह माइकल जैक्सन के जीवन पर आधारित इस फिल्म में उनके भतीजे जाफर जैक्सन ने मुख्य भूमिका निभाई है। यह फिल्म 24 अप्रैल को रिलीज हुई थी। 'ट्रेनिंग डे' और 'द इक्वलाइजर' फ्रेंचाइजी जैसी फिल्मों के लिए मशहूर एंटोनी फूक्वा ने 'माइकल' का निर्देशन किया है। मनोरंजन समाचार संस्था 'वैरायटी' के अनुसार, इस फिल्म ने क्रिस्टोफर नोलन की फिल्म 'ओपेनहाइमर' की वैश्विक कमाई को पीछे छोड़ दिया है, जिसने दुनियाभर में 97.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर की कमाई की थी। इसके साथ ही 'माइकल' सबसे ज्यादा कमाई करने वाली 'म्यूजिकल बायोपिक' भी बन गई है।माइकल जैक्सन ने 'बिली जीन', 'बीट इट' और 'थ्रिलर' सहित कई बेहद लोकप्रिय गाने गाए हैं। वर्ष 2009 में लॉस एंजिलिस में 'प्रोपोफॉल' के अत्यधिक सेवन से हुई विषाक्तता के कारण उनका निधन हो गया था। उस समय उनकी उम्र 50 वर्ष थी। यह फिल्म माइकल जैक्सन के जीवन के सफर को दिखाती है।
- नयी दिल्ली/ अक्षय कुमार की फिल्म "वेलकम टू द जंगल" ने दुनियाभर के बॉक्स ऑफिस पर 50 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की है। इस फिल्म के निर्देशक अहमद खान हैं और इसे स्टार स्टूडियो18, बेस इंडस्ट्रीज ग्रुप, केप ऑफ गुड फिल्म्स और सीता फिल्म्स ने बनाया है। यह फिल्म शुक्रवार को सिनेमाघरों में रिलीज हुई। निर्माताओं के अनुसार, फिल्म ने पहले दिन दुनियाभर के बॉक्स ऑफिस पर 27.60 करोड़ रुपये कमाए और अगले दिन 31.8 करोड़ रुपये की कमाई की। दुनियाभर के बॉक्स ऑफिस पर फिल्म की कुल कमाई 59.40 करोड़ हो गयी है। "वेलकम टू द जंगल", "वेलकम" (2007) और "वेलकम बैक" (2015) के बाद "वेलकम" फ्रैंचाइजी की तीसरी फिल्म है। इस फिल्म से अक्षय की फ्रैंचाइजी में वापसी हो रही है, वह "वेलकम बैक" में नहीं थे।
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मुंबई. ऑस्कर विजेता संगीतकार ए. आर. रहमान को वाशिंगटन में आयोजित एक समारोह में 'एकेडमी ऑफ अचीवमेंट अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया। रहमान ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट के जरिए यह जानकारी साझा की और प्रतिष्ठित फिल्मकार पीटर जैकसन से प्राप्त 'गोल्डन प्लेट' पुरस्कार की तस्वीरें भी पोस्ट कीं। उन्होंने कहा, ''आज शाम 'एकेडमी ऑफ अचीवमेंट अवॉर्ड' प्राप्त कर मैं बेहद सम्मानित महसूस कर रहा हूं।'' वाशिंगटन स्थित गैर-लाभकारी संगठन 'द एकेडमी ऑफ अचीवमेंट' कला, विज्ञान, कारोबार और लोक सेवा जैसे क्षेत्रों में असाधारण योगदान देने वाले व्यक्तियों को सम्मानित करता है। रहमान को भारतीय और अंतरराष्ट्रीय सिनेमा में तीन दशक से अधिक लंबे करियर के दौरान देश के सबसे प्रतिष्ठित संगीतकारों में शुमार किया जाता है। रहमान को गीत 'जय हो' और उसके संगीत के लिए दो ऑस्कर पुरस्कार मिले थे। उन्हें 'सर्वश्रेष्ठ मौलिक संगीत' और 'सर्वश्रेष्ठ मौलिक गीत' श्रेणियों में यह सम्मान प्रदान किया गया था।
- मुंबई । अभिनेता अक्षय कुमार ने कहा कि लोगों को हंसाना हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन सोशल मीडिया के इस दौर में यह काम और कठिन हो गया है, क्योंकि आज हर कोई मजेदार रील्स, मीम्स और स्टैंड-अप प्रस्तुतियों से रूबरू हो रहा है। फिल्म 'भूत बंगला' के बाद अक्षय अब कॉमेडी फिल्म 'वेलकम टू द जंगल' की रिलीज की तैयारी में हैं। यह फिल्म 'वेलकम' फ्रेंचाइजी का हिस्सा है और शुक्रवार को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। अक्षय ने कहा, "यह अब कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है। आज हर जगह रील्स, मीम्स और कॉमेडी सामग्री मौजूद है। लेकिन कॉमेडी एक बड़ी नदी की तरह है, जो कभी नहीं सूखती। कॉमेडी के कई रूप हैं—फिजिकल कॉमेडी, परिस्थितिजन्य कॉमेडी, स्लैपस्टिक कॉमेडी और डार्क ह्यूमर।" अभिनेता ने कहा कि आज फिल्मों के अलावा भी लोगों के पास मनोरंजन के कई अन्य साधन उपलब्ध हैं।उन्होंने कहा, "लोगों को हंसाने के अनगिनत तरीके हैं। अगर आप इंस्टाग्राम खोलें, तो आपको अंतहीन मीम्स और मजेदार वीडियो मिल जाएंगे। लोग हर दिन कॉमेडी देखते हैं। कई कॉमेडी शो हैं और कई प्रतिभाशाली स्टैंड-अप कॉमेडियन नया कंटेंट तैयार कर रहे हैं। लेकिन लोगों को हंसाना आज भी सबसे कठिन कामों में से एक है। लोग अक्सर कॉमेडी को कम आंकते हैं। मैं स्टैंड-अप कॉमेडियन का बहुत सम्मान करता हूं। अकेले मंच पर खड़े होकर दर्शकों को हंसाना बेहद मुश्किल काम है।" फिल्म 'वेलकम टू द जंगल' की कहानी गैंगस्टर, अपराधियों और अजीबोगरीब किरदारों के एक समूह के इर्द-गिर्द घूमती है, जिनकी राहें सीमा क्षेत्र के एक जंगल में आपस में टकराती हैं। इस फिल्म में अक्षय कुमार के साथ 30 से अधिक प्रमुख कलाकार काम करते नजर आएंगे। कलाकारों में सुनील शेट्टी, परेश रावल, रवीना टंडन, अरशद वारसी, लारा दत्ता समेत कई अभिनेता और अभिनेत्रियां शामिल हैं। 'वेलकम' फ्रेंचाइजी की शुरुआत 2007 में रिलीज हुई इसी नाम की हिट फिल्म से हुई थी। इस फिल्म में अक्षय कुमार के साथ नाना पाटेकर, अनिल कपूर, परेश रावल, कैटरीना कैफ और दिवंगत फिरोज खान भी नजर आए थे। इसके बाद 2015 में 'वेलकम बैक' रिलीज हुई थी।
- नयी दिल्ली ।फिल्म कलाकार शाहिद कपूर, कृति सैनन और रश्मिका मंदाना की फिल्म 'कॉकटेल 2' ने वैश्विक बॉक्स ऑफिस पर 100 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई कर ली है। होमी अदजानिया द्वारा निर्देशित यह फिल्म 19 जून को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी।प्रोडक्शन बैनर 'मैडॉक फिल्म्स' ने बुधवार को अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर शाहिद, कृति और रश्मिका के पोस्टर के साथ फिल्म की बॉक्स ऑफिस कमाई के आंकड़े साझा किए। इसके मुताबिक, फिल्म ने अपने रिलीज के पहले दिन 24 करोड़ रुपये कमाए थे, जिसके बाद के दिनों में इसने क्रमशः 29.4 करोड़ रुपये, 29.4 करोड़ रुपये, 32.19 करोड़ रुपये, 10 करोड़ रुपये और 11.01 करोड़ रुपये की कमाई की। वैश्विक बॉक्स ऑफिस पर फिल्म की कुल कुमाई 106.61 करोड़ रुपये हो चुकी है।यह फिल्म 2012 की सुपरहिट फिल्म 'कॉकटेल' की अगली कड़ी है। मूल फिल्म में फिल्म कलाकार सैफ अली खान, दीपिका पादुकोण और डायना पेंटी ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं। हालांकि, यह फिल्म एक बिल्कुल नयी कहानी और नये किरदारों पर आधारित है। फिल्म की कहानी कुणाल (शाहिद), दीया (रश्मिका) और एली (कृति) के प्रेम त्रिकोण के इर्द-गिर्द घूमती है। 'कॉकटेल 2' का निर्माण दिनेश विजन, लव रंजन, प्रमिता आर. विजन और अंकुर गर्ग ने किया है।
- नयी दिल्ली। अभिनेता अमिताभ बच्चन ने स्टील वायर विनिर्माता डीपी वायर्स लिमिटेड में अपनी करीब एक प्रतिशत हिस्सेदारी 2.48 करोड़ रुपये से अधिक में बेच दी है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) पर उपलबध आंकड़ों के अनुसार, अमिताभ हरिवंश राय बच्चन ने मध्य प्रदेश स्थित कंपनी के 1,23,622 शेयर बेचे, जो 0.79 प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर है। ये शेयर मंगलवार को औसतन 200.84 रुपये प्रति शेयर के भाव पर बेचे गए, जिससे कुल लेनदेन मूल्य 2.48 करोड़ रुपये रहा। जनवरी-मार्च तिमाही के अंत तक बच्चन के पास डीपी वायर्स में 2.11 प्रतिशत या 3.27 लाख शेयर की हिस्सेदारी थी। एनएसई के आंकड़ों के अनुसार, इस बीच दिग्गज अभिनेता ने 41,566 शेयर 199.90 रुपये प्रति शेयर के औसत भाव पर खरीदे, जिसकी कुल कीमत 83.09 लाख रुपये रही। एनएसई पर डीपी वायर्स के अन्य खरीदारों का उल्लेख नहीं किया गया।
- नयी दिल्ली. फिल्मकार इम्तियाज अली इस बात से बहुत खुश हैं कि दर्शक "मैं वापस आऊंगा" को पसंद कर रहे हैं। बंटवारे की कहानी पर आधारित यह फिल्म दूसरे हफ़्ते में थियेटर में अच्छा प्रदर्शन कर रही है। अली फिल्म पर प्रतिक्रिया जानने के लिए विभिन्न शहरों का दौरा कर रहे हैं और सिनेमाघरों में जाकर दर्शकों से संवाद कर रहे हैं। बारह जून को रिलीज हुई फिल्म ''मैं वापस आऊंगा'' ने रिलीज के 10वें दिन सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। फिल्मों के व्यवसाय पर नजर रखने वाली वेबसाइट 'सैकनिल्क' के अनुसार, फिल्म ने उस दिन भारत में 1,971 शो से 5.75 करोड़ रुपये की शुद्ध कमाई की। अली ने कहा, ''आखिरकार जनता ही जनार्दन है।हम अक्सर लोगों की पसंद का अनुमान लगाने की कोशिश करते हैं, उन्हें अलग-अलग वर्गों और सामाजिक-आर्थिक श्रेणियों में बांटते हैं तथा यह रणनीति बनाते हैं कि वे किसी ब्रांड या फिल्म पर कैसी प्रतिक्रिया देंगे। लेकिन मेरा मानना है कि लोग सिनेमा को काफी अच्छी तरह समझते हैं। वास्तव में हमें उनसे यह सीखना चाहिए कि फिल्म कैसे बनाई जाए और उसका प्रचार-प्रसार कैसे किया जाए।'' उन्होंने कहा, " 'मैं वापस आऊंगा' को मिल रही प्रतिक्रिया से मैं बेहद अभिभूत हूं। मैं सिनेमाघरों में जाकर दर्शकों के चेहरों को देखता रहता हूं और उनकी नजरों से फिल्म को समझने की कोशिश करता हूं। मैं अब तक छह शहरों का दौरा कर चुका हूं और आगे भी कई अन्य शहरों में जाने की योजना है।'' फिल्म को समीक्षकों से अच्छी प्रतिक्रिया मिली, लेकिन रिलीज के शुरुआती तीन दिन में बॉक्स ऑफिस पर इसका प्रदर्शन अपेक्षाकृत धीमा रहा। 'सैकनिल्क' के अनुसार, फिल्म की अब तक की कुल शुद्ध कमाई 24.25 करोड़ रुपये पहुंच चुकी है।
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नई दिल्ली। शुक्रवार को 19वें मुंबई अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (एमआईएफएफ) के श्रद्धांजलि खंड में दो प्रशंसित वृत्तचित्र, रघु राय: हियरिंग थ्रू द आइज़ और ताल एंड रिद्म- मृदंगम प्लेड बाई पालघाट रघु प्रदर्शित किए गए। इन वृत्तचित्रों के माध्यम से फोटोग्राफी, सिनेमा और भारतीय शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान को सम्मानित किया गया।
सुवेंदु चटर्जी द्वारा निर्देशित, रघु राय: हियरिंग थ्रू द आइज़, प्रसिद्ध भारतीय फोटोग्राफर रघु राय के जीवन और कार्यों की एक अंतर्दृष्टि प्रस्तुत करती है। चित्रों और व्यक्तिगत अनुभवों के माध्यम से, यह वृत्तचित्र उनकी रचनात्मक यात्रा और अनुभवों की खोज करता है जिसने उनके विजन को आकार दिया। 1977 में, श्री राय को दिग्गज फोटोग्राफर हेनरी कार्टियर-ब्रेसन द्वारा मैग्नम फोटोज के लिए नामांकित किया गया था।यह फिल्म श्री राय की "दर्शन" की अवधारणा को दर्शाती है, जिसे वे विषय के साथ एक भावनात्मक और आध्यात्मिक जुड़ाव के रूप में वर्णित करते हैं। उनके अनुसार, फोटोग्राफी केवल छवियों को कैद करना नहीं है, बल्कि लोगों और उनकी भावनाओं को समझना भी है।यह वृत्तचित्र श्री राय द्वारा प्रलेखित प्रमुख ऐतिहासिक घटनाओं को फिर से दिखाता है और मदर टेरेसा जैसी हस्तियों की उनकी प्रतिष्ठित तस्वीरों के साथ-साथ गणेश विसर्जन, ताजमहल और नागा साधुओं सहित रोजमर्रा की जिंदगी की छवियों को प्रदर्शित करता है, जो भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता और विरासत को दर्शाती हैं।इस वृत्तचित्र में उनकी बेटी, फिल्म निर्माता अवनी राय भी हैं, जिनका दृष्टिकोण कैमरे के पीछे के व्यक्ति की एक झलक प्रदान करता है और छवि निर्माताओं की दो पीढ़ियों के बीच संवाद स्थापित करता है।रचनात्मकता पर विचार करते हुए रघु राय कहते हैं कि प्रेम ही वह केंद्रीय सूत्र है जो कलात्मक अभिव्यक्ति को जोड़ता है। उनका मानना है कि एक तस्वीर स्वयं बोलती है और वे एक छवि को किसी व्यक्ति के आंतरिक और बाहरी जगत के एक सार्थक क्षण में मिलन के रूप में वर्णित करते हैं। वे युवा फोटोग्राफरों को अपनी शैली और माध्यम के प्रति अपना खुद का दृष्टिकोण खोजने के लिए भी प्रोत्साहित करते हैं।आज प्रदर्शित की गई दूसरी फिल्म, ताल एंड रिद्म- मृदंगम प्लेड बाई पालघाट रघु , फिल्म्स डिवीजन ऑफ इंडिया द्वारा निर्मित और प्रख्यात फिल्म निर्माता श्याम बेनेगल द्वारा निर्देशित है। यह वृत्तचित्र कर्नाटक संगीत के सबसे प्राचीन और महत्वपूर्ण वाद्य यंत्रों में से एक, मृदंगम की पड़ताल करता है।प्रसिद्ध तालवादक पालघाट रघु की प्रस्तुति वाली यह फिल्म भारतीय शास्त्रीय संगीत में ताल (लयबद्ध चक्र) और लय की अवधारणाओं को समझाती है। प्रदर्शनों और प्रस्तुतियों के माध्यम से, यह दर्शकों को ताल, चक्र और सुधार की संरचना से परिचित कराती है, जो संगीत परंपरा की नींव का निर्माण करते हैं।इस वृत्तचित्र में मृदंगम बजाने की तकनीकें भी दिखाई गई हैं, जिनमें उंगलियों की गति, स्वर में भिन्नता और लयबद्ध पैटर्न शामिल हैं। यह वाद्ययंत्र में महारत हासिल करने के लिए अनुशासन, अभ्यास और रचनात्मकता के महत्व पर प्रकाश डालता है।संगीत सिद्धांत की पड़ताल के साथ-साथ, यह फिल्म उस समृद्ध मौखिक परंपरा पर भी बल देती है जिसके माध्यम से ज्ञान गुरु से शिष्य तक पहुंचाया जाता है। यह गुरु और शिष्य के बीच के उस मजबूत बंधन को दर्शाती है जिसने पीढ़ियों से भारत की शास्त्रीय संगीत परंपराओं को बनाए रखा है।श्रद्धांजलि खंड में दोनों वृत्तचित्रों के प्रदर्शन ने दर्शकों को विख्यात उस्तादों के जीवन और योगदान के बारे में जानकारी प्राप्त करने का अवसर प्रदान किया, साथ ही भारत की कलात्मक और सांस्कृतिक विरासत के प्रति उनकी सराहना को और गहरा किया। -
नई दिल्ली। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म निर्माता और डॉक्यूमेंट्री फिल्मकार श्री संजीव सिवन ने शुक्रवार को 19वें मुंबई अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (एमआईएफएफ) में “सामाजिक प्रचार-प्रसार का सिनेमा: मुद्दों को कहानी में बदलना और उन्हें सामने लाना” विषय पर मास्टरक्लास देते हुए उभरते कहानीकारों से कहा कि वे टेक्नोलॉजी से अधिक जिज्ञासा को महत्व दें।
महोत्सव की चल रही मास्टरक्लास सीरीज़ के तहत आयोजित इस कार्यशाला में, सिवन ने प्रतिभागियों को दिखाया कि असल ज़िंदगी के मुद्दों को असरदार फ़िल्मी कहानियों में कैसे बदला जा सकता है। इसके लिए उन्होंने अपने करियर में बनाई 75 से अधिक डॉक्यूमेंट्री, 30 से ज़्यादा शॉर्ट फ़िल्मों और कई फ़ीचर फ़िल्मों के उदाहरण दिए।सिवन ने कहा, "मुझे लगता है कि आपके लिए सबसे ज़रूरी कैमरे नहीं, बल्कि जिज्ञासा होनी चाहिए।" उन्होंने कहा कि शानदार कहानियां महंगे उपकरणों से नहीं, बल्कि लोगों को देखने-समझने, रिसर्च करने और उनसे सच्चे जुड़ाव से बनती हैं।सिवन ने अपने फिल्म निर्माण के सफर से जुड़े अनुभव साझा करते हुए, अपनी कई सराहनीय कृतियों के बनने की कहानी बताई। उन्होंने बताया कि कैसे अमेरिका में एक 'ओइजा बोर्ड' (Ouija board) से अचानक हुई मुलाक़ात से उनकी जिज्ञासा बढ़ी, जिससे उनकी 15 मिनट की पहली एक डॉक्यूमेंट्री बनी और बाद में ममूटी स्टारर मलयालम फ़ीचर फ़िल्म 'अपरिचितन' बनी। उन्होंने बताया,"यह फ़िल्म पहले एक डॉक्यूमेंट्री थी, लेकिन बाद में फ़ीचर फ़िल्म बन गई।" इस तरह उन्होंने समझाया कि कैसे एक ही विचार अलग-अलग फ़ॉर्मेट में विकसित हो सकता है।पूरे सत्र के दौरान, सिवन ने उभरते फिल्मकारों को याद दिलाया कि डॉक्यूमेंट्री फ़िल्में अंततः विषयों की बजाय लोगों के बारे में होती हैं। उन्होंने कहा, "यदि आप मछुआरों पर कोई डॉक्यूमेंट्री बना रहे हैं, तो कहानी मछली पकड़ने के बारे में नहीं है। यह उनके जीवन निर्वाह के बारे में है। यदि आप किसी गांव पर फ़िल्म बना रहे हैं, तो वह भूगोल के बारे में नहीं, बल्कि उसकी पहचान के बारे में है।"उन्होंने डॉक्यूमेंट्री के विषयों (जिन लोगों पर फ़िल्म बन रही है) के साथ भरोसा कायम करने के महत्व पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने कहा, "लोगों को खुलकर बात करने से पहले सहज महसूस करना चाहिए। इसमें कई दिन, कई महीने या यहां तक कि कई वर्ष भी लग सकते हैं।"सिवन ने नॉन-फ़िक्शन फ़िल्ममेकिंग में नैतिक ज़िम्मेदारियों की चर्चा करते हुए, सनसनी फैलाने से बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा, "जब आप डॉक्यूमेंट्री बनाते हैं, तो आपकी एक ज़िम्मेदारी होती है। आप सिर्फ़ इसे नाटकीय बनाने के लिए गलत चीज़ें नहीं दिखा सकते या बता सकते हैं।"अनुभवी फिल्म निर्माता ने अपनी फिल्मों जैसे 'लिटिल विमेन' पर भी चर्चा की, जिसमें तस्करी और वेश्यावृत्ति के बाद अपना जीवन फिर से संवारने वाली महिलाओं के जीवन को दिखाया गया था। उन्होंने संगीतकार शंकर महादेवन पर आधारित बायोग्राफिकल डॉक्यूमेंट्री 'डिकोडिंग शंकर' और भारतीय नौसेना के लिए किए गए प्रोजेक्ट्स पर भी बात की। उन्होंने यह भी बताया कि कैसे उनकी डॉक्यूमेंट्री 'आफ़्टर लाइफ़' से उन्हें अपनी पुरस्कार विजेता मलयालम फ़ीचर फ़िल्म 'वेनालोडुंगाथे' (एंडलेस समर) बनाने की प्रेरणा मिली। इससे पता चलता है कि डॉक्यूमेंट्री में की गई ऑब्ज़र्वेशन (अवलोकन) कैसे फ़िक्शन (काल्पनिक कहानी) का आधार बन सकती हैं।युवा फ़िल्म निर्माताओं को डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म और ओटीटी सर्विस की वजह से उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित करते हुए सिवन ने कहा कि फ़िल्म बनाना अब पहले से कहीं ज़्यादा आसान हो गया है। उन्होंने कहा, "आपको बड़े क्रू की ज़रूरत नहीं है। बस अच्छी लाइव साउंड होनी चाहिए। इसके अलावा, फ़िल्म शूट करने के लिए तीन से अधिक लोगों की आवश्यकता नहीं होती है।" सत्र का समापन करते हुए, सिवन उसी बात पर वापस आए जिसने उनके करियर को दिशा दी है। उन्होंने कहा, "हर जगह, हर उस व्यक्ति में जिससे आप मिलते हैं, एक कहानी होती है। अपनी कहानी बनाएं और उसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सवों में सही तरीके से प्रदर्शित करें, ताकि आपकी पहचान बढ़े और फ़िल्म के डिस्ट्रीब्यूशन के अवसर मिल सकें।" - नयी दिल्ली. अभिनेता राम चरण की फिल्म 'पेद्दी' ने वैश्विक 'बॉक्स ऑफिस' पर 366 करोड़ रुपये की कमाई की है। इस फिल्म का निर्देशन बुची साना ने किया है और यह चार जून को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी।फिल्म में शिवा राजकुमार और जाह्नवी कपूर ने भी अभिनय किया है।फिल्म की निर्माता कंपनी 'वृद्धि सिनेमाज' ने शनिवार को अपने आधिकारिक 'एक्स' हैंडल पर टिकट खिड़की पर हुई कुल कमाई की जानकारी दी। फिल्म ने रिलीज के पहले दिन ही 135.36 करोड़ रुपये की कमाई की थी और इसने अपने पहले सप्ताहांत में 236.7 करोड़ रुपये कमाए। कैप्शन में लिखा था, "पेद्दी वर्ष 2026 में दक्षिण भारत की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म है। इसने नौ दिनों में दुनिया भर में 366 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई की है।" अस्सी के दशक के ग्रामीण आंध्र प्रदेश पर आधारित, ''पेद्दी" एक निचली जाति के ग्रामीण की कहानी है, जो अपने समुदाय के लिए पहचान और सम्मान पाने के लिए कुश्ती का रास्ता चुनता है। फिल्म में जगपति बाबू, दिव्येंदु और बोमन ईरानी भी अहम भूमिका निभा रहे हैं।इस फिल्म का निर्माण 'वृद्धि सिनेमाज' के तहत वेंकट सतीश किलारू ने किया है। फिल्म का संगीत ए.आर. रहमान ने तैयार किया है।
- मुंबई. ओटीटी मंच नेटफ्लिक्स ने शनिवार को घोषणा की कि सनी देओल और अक्षय खन्ना अभिनीत अदालती ड्रामा फिल्म 'इक्का' 10 जुलाई को रिलीज होगी। निर्देशक सिद्धार्थ पी मल्होत्रा के निर्देशन में बनी यह फिल्म लगभग तीन दशक बाद दोनों अभिनेताओं को फिर से एक साथ पर्दे पर ला रही है। इससे पहले दोनों निर्देशक जेपी दत्ता की 1997 में रिलीज़ हुई युद्ध-आधारित फिल्म 'बॉर्डर' में साथ दिखाई दिए थे। फिल्म 'इक्का' में सनी देओल ने एक प्रसिद्ध वकील की भूमिका निभाई है जिसे अपने अतीत से जुड़े एक व्यक्ति का बचाव करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इस व्यक्ति की भूमिका अक्षय खन्ना निभा रहे हैं। यह मामला उनके सिद्धांतों और परिवार दोनों को कठिन परीक्षा में डाल देता है।फिल्म में तिल्लोतमा शोम लोक अभियोजक की भूमिका में हैं, जो सनी देओल के किरदार के खिलाफ अदालत में पेश होंगी। वहीं, दीया मिर्जा सनी देओल की पत्नी की भूमिका निभा रही हैं। यह ओटीटी की दुनिया में सनी देओल की पहली फिल्म है, साथ ही 33 वर्षों बाद वह फिर से किसी फिल्म में वकील की भूमिका निभाते नजर आएंगे। इससे पहले उन्होंने 1993 में आई फिल्म 'दामिनी' में वकील का किरदार निभाया था। निर्देशक मल्होत्रा ने कहा कि यह विषय कई वर्षों से उनके दिल के बेहद करीब रहा है।उन्होंने कहा, ''एक कहानीकार के रूप में मैं हमेशा ऐसी कहानियों की तलाश में रहता हूं जो मुझे भावनात्मक और रचनात्मक दोनों स्तरों पर चुनौती दें तथा 'इक्का' ऐसी ही एक यात्रा रही है। मैं हमेशा से अदालती ड्रामा फिल्मों का बहुत बड़ा प्रशंसक रहा हूं।'' 'नेटफ्लिक्स इंडिया' (कंटेंट) की उपाध्यक्ष मोनिका शेरगिल ने कहा कि यह फिल्म इस ओटीटी मंच के लिए एक महत्वपूर्ण और विशेष उपलब्धि है। उन्होंने कहा, ''इक्का में वह सबकुछ है जो दर्शकों को एक बेहतरीन अदालती ड्रामा में पसंद आता है-ऊंचे दांव, नैतिक जटिलताएं और भावनात्मक टकराव। मल्होत्रा के निर्देशन में बनी यह फिल्म एक रोमांचक कहानी के माध्यम से न्याय, सत्य और जवाबदेही जैसे विषयों की पड़ताल करती है, जो अंत तक दर्शकों में उत्सुकता बनाए रखती है...।''
- मुंबई। फिल्म निर्देशक बुची बाबू सना ने हाल में रिलीज हुई अपनी फिल्म 'पेद्दी' में अभिनेत्री जाह्नवी कपूर के किरदार के चित्रण को लेकर हो रही आलोचनाओं के बाद शनिवार को सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। उन्होंने कहा कि फिल्म की टीम ने दर्शकों की प्रतिक्रिया को 'गंभीरता से' लिया है और इसमें आवश्यक बदलाव किए जाएंगे। खेल की पृष्ठभूमि पर बनी इस एक्शन फिल्म में अभिनेता राम चरण मुख्य भूमिका में है। यह तेलुगु फिल्म उस समय विवादों से घिर गई जब दर्शकों के एक वर्ग ने आलोचना करते हुए कहा कि इसके फिल्मांकन, संवाद तथा चरण व जाह्नवी के बीच के रूमानी दृश्यों के माध्यम से महिलाओं को वस्तु के रूप में पेश किया गया है। फिल्म के एक खास दृश्य की तीखी आलोचना हो रही है, जिसमें राम चरण का किरदार बिजली चले जाने की आड़ में जाह्नवी कपूर के किरदार 'अचियम्मा' के साथ अनुचित व्यवहार करता दिख रहा है। इंटरनेट पर लोगों ने इस दृश्य को ''यौन उत्पीड़न'' करार दिया है। सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर साझा किए गए एक बयान में बाबू सना ने कहा कि सिनेमा वह है जो ''दर्शकों का मनोरंजन करे, उन्हें प्रेरित करे और उनसे जुड़े'' तथा इससे कोई भी ''असहज या अपमानित'' महसूस नहीं करे। निर्देशक ने कहा कि टीम ने दर्शकों की प्रतिक्रिया की समीक्षा की और विवादित दृश्यों में बदलाव करने का निर्णय लिया है। इससे पहले 'उप्पेना' जैसी फिल्म बनाने वाले सना ने जिम्मेदारपूर्ण तरीके से कहानियां पर्दे पर लाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। हालांकि, अभिनेत्री जाह्नवी कपूर ने इस मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।यह फिल्म 1980 के दशक की ग्रामीण आंध्र प्रदेश की पृष्ठभूमि पर आधारित है। 'पेद्दी' में एक निचली जाति के ग्रामीण के संघर्ष और यात्रा को दिखाया गया है, जो अपने समुदाय को पहचान और सम्मान दिलाने के लिए कुश्ती का सहारा लेता है। फिल्म में शिव राजकुमार, जगपति बाबू, दिव्येंदु और बमन ईरानी सहायक भूमिकाओं में हैं। यह फिल्म चार जून को रिलीज हुई थी।
- नयी दिल्ली. "द व्हाइट टाइगर", "खो गए हम कहां" और "तू या मैं" जैसी फिल्मों में अपने प्रदर्शन के लिए मशहूर अभिनेता आदर्श गौरव विज्ञान-कथा श्रृंखला "एलियन: अर्थ" के एक और सीजन की शूटिंग शुरू करने के लिए तैयार हैं। 31 वर्षीय अभिनेता जून के पहले सप्ताह में एक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के लिए रवाना होंगे। एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, वह श्रृंखला में अपने 'स्लाइटली' के किरदार को फिर से निभाएंगे। यह श्रृंखला नोह हॉली ने बनाई है और इसके कार्यकारी निर्माता रिडले स्कॉट हैं। अन्य कलाकारों के साथ-साथ इसमें सिडनी चांडलर, एलेक्स लॉदर, एस्सी डेविस, सैमुअल ब्लेंकिन, बाबु सीसे, टिमोथी ओलिफेंट और पीटर डिंकलेज भी शामिल हैं। गौरव ने कहा कि इस प्रोजेक्ट में वापस आना उनके लिए बेहद खास है। उन्होंने एक बयान में कहा, "'स्लाइटली' एक ऐसा किरदार है जो शूटिंग खत्म होने के बाद भी लंबे समय तक मेरे साथ रहा, क्योंकि वह भावनात्मक रूप से काफी जटिल और अप्रत्याशित है।'' उन्होंने आगे कहा ''मैं जून के पहले सप्ताह में अंतरराष्ट्रीय शेड्यूल के लिए रवाना हो जाऊँगा, और हम इसके तुरंत बाद शूटिंग शुरू कर देंगे। इस सीज़न को लेकर उत्सुकता का एक बड़ा माहौल है।'' इस श्रृंखला का पहला सीज़न 2025 में रिलीज़ हुआ था।
- मुंबई. अभिनेता मनोज वाजपेयी का कहना है कि उनकी आगामी फिल्म 'गवर्नर' में उन लोगों के योगदान के बारे में बताया जाएगा, जिन्होंने तीन दशक पहले देश को गंभीर आर्थिक संकट से उबारने में अहम भूमिका निभाई थी। सच्ची घटनाओं पर आधारित इस फिल्म में 1990 के दशक की शुरुआत में भारत को झकझोर देने वाले आर्थिक संकट की कहानी दिखाई जाएगी। फिल्म में मनोज वाजपेयी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर की भूमिका निभा रहे हैं। उनका किरदार आरबीआई के पूर्व गवर्नर एस. वेंकटरमणन से प्रेरित है। फिल्म का निर्देशन चिन्मय मांडलेकर ने किया है, जबकि इसमें अदा शर्मा और मधु भी प्रमुख भूमिकाएं निभाती नजर आएंगी। वाजपेयी ने कहा कि 1991 के आर्थिक संकट के समय वह दिल्ली में रंगमंच कलाकार थे और अखबारों के जरिए घटनाक्रम पर नजर रखते थे। उन्होंने कहा, "मैं हमेशा से खबरों का शौकीन रहा हूं। इसलिए मुझे पूरी तरह पता है कि यह हुआ था। लेकिन बंद दरवाजों के पीछे क्या हुआ और वे कौन लोग थे जो भारत को उस संकट से बाहर निकालने के लिए जिम्मेदार थे, इसकी मुझे कोई जानकारी नहीं थी।" अभिनेता ने कहा कि वह उस समय एक संघर्षरत रंगमंच कलाकार के रूप में पूरी तरह कंगाली में जीवन बिता रहे थे। वाजपेयी ने कहा, "एक गरीब व्यक्ति की जिंदगी चलती रहती है, लेकिन यह स्पष्ट है कि जब रुपये का मूल्य घटता है तो उसका बोझ सभी को उठाना पड़ता है। उस समय भी स्थिति ऐसी ही थी।" अभिनेता ने राजनीतिक अस्थिरता के बीच वित्तीय संकट से निपटने में पूर्व आरबीआई गवर्नर एस. वेंकटरमणन, अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह और तत्कालीन प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जैसी प्रमुख हस्तियों के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, "इन लोगों के योगदान के बारे में कोई नहीं जानता। ऐसे में एक फिल्मकार या पटकथा लेखक की जिम्मेदारी है कि ऐसी घटनाओं को सिनेमाई और नाटकीय रूप देकर लोगों तक पहुंचाया जाए।" जब वाजपेयी से पूछा गया कि क्या फिल्म में किसी एक पक्ष का समर्थन किया गया है, तो अभिनेता ने कहा कि उन्होंने इसे यथासंभव प्रामाणिक बनाए रखने की कोशिश की है। निर्माता विपुल अमृतलाल शाह की इस फिल्म का सह-निर्माण आशिन ए. शाह ने किया है। फिल्म 12 जून को सिनेमाघरों में प्रदर्शित होगी।







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