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- अलसी के इस्तेमाल से बालों को पोषण मिलेगा और रूखे-बेजान बालों की समस्या भी कम होगी। अलसी में मौजूद विटामिन E, विटामिन B और ओमेगा 3 फैटी एसिड बालों की क्वालिटी बेहतर करने में मदद कर सकते हैं। इस लेख में जानिए बालों में अलसी का प्रयोग कैसे करें और इसके फायदे क्या हैं।बालों के लिए अलसी के फायदे-अलसी के बीजों में प्रोटीन की मात्रा अच्छी होती है। अलसी के बीजों से आप तेल बना सकते हैं, जिसके इस्तेमाल से स्कैल्प हेल्दी रहेगी और बालों की जड़ों को भरपूर पोषण मिलेगा और बाल मजबूत होंगे।-सर्दियों के मौसम में अलसी के इस्तेमाल से बालों की कमजोर जड़ों को पोषण मिलेगा। जिससे बालों का झड़ना कम हो सकता है।-अलसी के बीजों से बने तेल के इस्तेमाल से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होगा, जिससे बालों की ग्रोथ होगी और सफेद बालों की समस्या कम हो सकती है।-अलसी के बीजों में मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड बालों को मजबूत और हेल्दी बनाए रखने में मदद कर सकता है।-ड्राई स्कैल्प की समस्या में भी अलसी फायदा करती है, इसके इस्तेमाल से ड्राई स्कैल्प और डैंड्रफ जैसी समस्याएं कम हो सकती हैं।-अलसी में मौजूद बीटा-कैरोटीन बालों को सॉफ्ट और शाइनी बनाने में सहायक हो सकता है।-अलसी में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स से बालों की क्वालिटी में सुधार हो सकता है।बालों में अलसी का उपयोग कैसे करेंअलसी हेयर मास्क -अलसी के बीजों से आप हेयर मास्क बना सकते हैं, इसे बनाने के लिए अलसी को पानी में भिगोकर 3 से 4 घंटे के लिए रखें। फिर इसे ब्लेंडर में पीसकर एक स्मूथ पेस्ट बना लें और बालों पर लगाएं। इससे आपके बाल मॉइश्चराइज होंगे।अलसी का तेल -बाजार में आपको अलसी के बीजों का तेल आसानी से मिल जाएगा। आप घर में भी अलसी का तेल बना सकते हैं, इसे बनाने के लिए अलसी के बीजों को हल्का भूनने के बाद पीसें और फिर इसके पाउडर को जैतून के तेल के साथ पकाएं। ठंडा होने पर तेल को बोतल में भरें। इस तेल से स्कैल्प पर हल्के हाथों से मसाज करने से ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है और बालों को पोषण मिलता है। इससे बाल मजबूत होते हैं और बाल झड़ने की समस्या कम हो सकती है।अलसी का जेलअलसी के बीजों से जेल बनाना बेहद आसान है। इसे बनाने के लिए जरूरत अनुसार अलसी को रातभर के लिए पानी में भिगोकर रखें और अगली सुबह इसे धीमी आंच पर 15 से 20 मिनट के लिए पकाएं। ठंडा होने पर छानकर अलसी के जेल को अलग कर लें।
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हम सभी चाहते हैं कि हमारे बाल झड़ना भी बंद हो जाएं और साथ ही वह लंबे, घने व मजबूत हो जाएं। लेकिन अगर आप इसी तरह अपनी बालों पर केमिकल वाले प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते रहेंगे तो स्कैल्प ड्राई होने लगेगी और बालों की हेल्थ बद से बदतर होती रहेगी। ऐसे में हर कोई चाहता है कि उसके बाल खूबसूरत हो जाए और यह तभी संभव है जब आप नेचुरल और असरदार चीजों का इस्तेमाल करें। हमारी प्रकृति में आंवला, रीठा, शिकाकाई, मेहंदी जैसी कई चीजें उपलब्ध हैं जिनका इस्तेमाल आपके बालों की हर समस्या के लिए फायदेमंद हो सकता है।
पहला नुस्खा है स्मूथ हेयर पाने काइस नेचुरल हेयर मास्क को बनाने के लिए 1 चम्मच फ्लैक्स सीड्स और 1 गिलास पानी की जरूरत है। साथ ही अगर आपके बाल लंबे हैं तो सामग्री को बढ़ाया भी जा सकता है। आइए अब हम इस नुस्खे को बनाने का तरीका जानें--सबसे पहले आप एक पैन लें और उसमें पानी व फ्लैक्स सीड्स डालकर हल्की आंच में उबाल लें।-10 मिनट तक उबालने के बाद के बाद आप गैस बंद कर दें और छान लें।-हेयर मास्क को ठंडा होने के लिए छोड़ दें।-ठंडा होने के बाद आप इसे अपने बालों पर लगाएं और फिर 30 मिनट तक सूखने के लिए छोड़ दें।-समय पूरा होने के बाद शैम्पू से हेयर वॉश कर लें।-फिर देखें कैसे आपके बालों में सिल्कीनेस आती है।बाल बढ़ाने के लिए असरदार हेयर मास्कबाल बढ़ाने हैं तो आप इस आंवला मेथी वाले हेयर मास्क का इस्तेमालकरें। इसे बनाने के लिए आपको चाहिए 2 गुड़हल के फूल, 1 चम्मच आंवला पाउडर, 2 चम्मच भीगे हुए मेथी के बीज और 5 चम्मच एलोवेरा जेल। सामग्री तो बता दी, आइए अब हम आपको हेयर ग्रोथ मास्क को बनाने का तरीका बताते हैं।हेयर ग्रोथ मास्क कैसे बनाएं?इस हेयर ग्रोथ मास्क को बनाने के लिए पहले आप एक मिक्सर लें और उसमें गुड़हल के फूल, आंवला पाउडर, पानी सहित भीगे हुए मे मेथी के बीज और 5 चम्मच एलोवेरा जेल डालकर घुमा लें और पेस्ट तैयार कर लें। इस तैयार पैक को आप अपने बालों पर सिरों से लेकर जड़ों तक लगाएं और 30-45 मिनट तक सूखने के लिए छोड़ दें। समय पूरा होने के बाद हेयर वॉश कर लें और फिर देखें कैसे आपके बालों की ग्रोथ बढ़नी शुरु हो जाती है।बालों को मजबूत करेगा आंवला का नुस्खाइसे बनाने के लिए आपको चाहिए 1 चम्मच आंवला पाउडर, 2 चम्मच भृंगराज, 3 चम्मच एलोवेरा जेल और 1 चम्मच कलौंजी। ये सभी चीजें आप इकट्ठा कर लें। इसके बाद सूखे आंवला और भृंगराज पाउडर सहित सभी चीजों को मिक्स करके पेस्ट तैयार कर लें।जब पेस्ट बनकर तैयार हो जाए तो इसके अपने बालों की जड़ों से सिरों तक लगाएं और 45 मिनट तक सूखने के लिए छोड़ दें। जब समय पूरा हो जाए तो बालों को साफ पानी और शैम्पू से धो लें। पहले ही इस्तेमाल में आपको असर दिखेगा और नियमित तौर पर या हफ्ते में जितनी बार भी आप हेयर वॉश करते हैं तो इसका इस्तेमाल करें।बालों को स्मूथ बनाने के लिए आंवला फायदेमंद है।हेयर ग्रोथ के लिए भृंगराज का इस्तेमाल करें।एलोवेरा जेल आपके हेयर को स्ट्रेंथ देने में मदद करेगा। - अच्छे स्वास्थ्य के लिए अक्सर लोगों को नियमित रूप से एक्सरसाइज करने और वॉक करने की सलाह दी जाती है। नियमित रूप से वॉक करने और खाना खाने के बाद भी वॉक करने से वजन कम करने, पाचन को दुरुस्त करने, नींद की गुणवत्ता में सुधार करने, ब्रेन को रिलैक्स करने, इम्यूनिटी को बूस्ट करने, ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मदद मिलती है, साथ ही, इससे हार्ट को हेल्दी रखने में मदद मिलती है। हेल्दी हार्ट के लिए वॉक करना फायदेमंद होता है। ऐसे में कई बार लोगों के मन में सवाल उठता है कि हार्ट को हेल्दी रखने के लिए नियमित रूप से कितने कदम चलना चाहिए?हेल्दी हार्ट के लिए दिन में कितने कदम चलना चाहिए? -सर्दियों में हार्ट को हेल्दी रखने के लिए रोजाना फिजिकल एक्टिविटी बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि ठंडा मौसम अक्सर कम मूवमेंट और दिल पर ज्यादा दबाव का कारण बनता है। आदर्श रूप से, ज्यादातर वयस्कों को दिल की सेहत के लिए, सर्दियों में भी हर दिन 7 हजार से 10 हजार कदम चलने का लक्ष्य रखना चाहिए, जो लोग कम एक्टिव रहते हैं, बुजुर्ग हैं या जिन्हें हाइपरटेंशन, डायबिटीज या स्थिर दिल की बीमारी जैसी समस्याएं हैं, उनके लिए ज्यादा सही और सुरक्षित लक्ष्य रोजाना 5 हजार-7 हजार कदम चलना होगा, जिसे धीरे-धीरे सहनशक्ति बढ़ने के साथ बढ़ाया जा सकता है। चलना हेल्दी ब्लड प्रेशर बनाए रखने, ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाने, कोलेस्ट्रॉल लेवल को कंट्रोल करने और सर्दियों से जुड़ी दिल की बीमारियों के जोखिम को कम करने में मदद करता है, जो ठंड के कारण ब्लड वेसेल्स के सिकुड़ने से बढ़ जाती हैं।चलते समय इन बातों का रखें ध्यानहार्ट की समस्या से परेशान लोगों को सलाह दी जाती है कि जिससे हार्ट को हेल्दी रखने में मदद मिलती है। ऐसे में इन बातों का खास ध्यान रखना चाहिए।-चलने को छोटे-छोटे सेशन में बांट लें-दिन के गर्म समय में चलें-सही सर्दियों के कपड़े पहनें-बहुत ज्यादा ठंड में अचानक तेज एक्सरसाइज करने से बचें-तेजी से ज्यादा जरूरी है रेगुलरिटी, ऐसे में रोजाना चलें, भले ही सामान्य गति से हो।निष्कर्षदिल के सेहत के लिए सर्दियों में वयस्कों को 1 दिन में 7 हजार से 10 हजार कदम चला चाहिए। वहीं, कम एक्टिव रहने वाले, बुजुर्ग, हाइपरटेंशन, डायबिटीज या दिल से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित लोगों को नियमित रूप से 5 हजार-7हजार कदम चलना चाहिए। ऐसा करने से हार्ट के स्वास्थ्य में सुधार करने और बीमारियों से बचाव करने में मदद मिलती है, लेकिन नियमित रूप से वॉक करना बेहद जरूरी है। ऐसे में ध्यान रहे, चलने पर परेशानी होने या हार्ट से जुड़ी कोई भी परेशानी महसूस होने पर डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
- आंवला के जूस और नींबू पानी दोनों का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है। इनमें बहुत से पोषक तत्व और एंटी-ऑक्सीडेंट्स के गुण होते हैं, साथ ही, ये दोनों विटामिन-सी का एक अच्छा सोर्स हैं। के जूस और नींबू पानी दोनों का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है। इनमें बहुत से पोषक तत्व और एंटी-ऑक्सीडेंट्स के गुण होते हैं, साथ ही, ये दोनों विटामिन-सी का एक अच्छा सोर्स हैं। आंवला के जूस और नींबू पानी में भरपूर विटामिन-सी होता है। इसका सेवन करने से शरीर की इम्यूनिटी को बूस्ट करने और स्वास्थ्य से जुड़ी कई समस्याओं से राहत देने में मदद मिलती है। ऐसे में कई बार सवाल उठता है कि आंवला जूस या नींबू पानी विटामिन-सी की कमी को दूर करने के लिए क्या ज्यादा फायदेमंद है?विटामिन-सी के लिए आंवला का जूस या नींबू पानी?आंवला जूस और नींबू का पानी दोनों में भरपूर मात्रा में विटामिन-सी होता है। विटामिन-सी के लिए दोनों का सेवन किया जा सकता है। ऐसे में इनका सेवन करने से शरीर में विटामिन-सी की कमी को दूर करने, शरीर में कोलेजन के उत्पादन को बढ़ावा देने, स्किन को हेल्दी और यंग बनाने, बीमारियों से बचाव करने, इम्यूनिटी को बूस्ट करने, हड्डियों को मजबूती देने, घाव को जल्दी भरने, आयरन के अवशोषण को बेहतर करने, मूड को बेहतर करने और हार्ट को हेल्दी रखने में मदद मिलती है।आंवले का जूस और नींबू पानी पीने के फायदेआंवले के जूस और नींबू पानी दोनों में भरपूर मात्रा में विटामिन-सी होता है। विटामिन-सी के लिए दोनों का सेवन करना फायदेमंद होता है।शरीर को हाइड्रेट करेआंवले के जूस और नींबू पानी का सेवन करने से शरीर को नेचुरल रूप से हाइड्रेट करने और शरीर में पानी की कमी को दूर करने में मदद मिलती है।मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करेआंवले के जूस और नींबू पानी दोनों ही विटामिन-सी का एक अच्छा सोर्स माना जाता है। इनका सेवन करने से मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करने में मदद मिलती है, जिससे वजन कम करने और पाचन प्रक्रिया में सुधार करने में मदद मिलती है।पोषक तत्वों का अवशोषण बेहतर करेविटामिन-सी से भरपूर आंवले के जूस और नींबू पानी का सेवन करने से शरीर में विटामिन-सी की कमी को दूर करने के साथ-साथ आयरन और कैल्शियम जैसे पोषक तत्वों के अवशोषण को बेहतर करने और शरीर में पोषक तत्वों की कमी को दूर करने में मदद मिलती है।स्किन और बालों को हेल्दी रखेआंवले के जूस और नींबू पानी दोनों में भरपूर मात्रा में विटामिन-सी और एंटी-ऑक्सीडेंट्स के गुण होते हैं। ऐसे में इनका सेवन करने से शरीर में कोलेजन के उत्पादन को बढ़ावा देने, स्किन को हेल्दी और यंग बनाए रखने, बालों को जड़ों से मजबूती देने और बालों के स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद मिलती है। इनसे बालों और स्किन में एजिंग के लक्षणों से बचाव करने में मदद मिलती है।इम्यूनिटी बूस्ट करेआंवले के जूस और नींबू पानी दोनों में भरपूर मात्रा में विटामिन-सी और एंटी-ऑक्सीडेंट्स के गुण होते हैं। ऐसे में इनका सेवन करने से शरीर की इम्यूनिटी को बूस्ट करने, सर्दी-खांसी से बचाव करने, इंफेक्शन से बचाव करने और बीमारियों से बचाव करने में मदद मिलती है।शरीर को डिटॉक्स करेआंवले के जूस और नींबू पानी दोनों में विटामिन-सी होता है। ऐसे में इनका सेवन करने से शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ-साथ शरीर को नेचुरल रूप से डिटॉक्स करने में मदद मिलती है, जिससे शरीर के टॉक्सिन्स बाहर निकल जाते हैं और स्वास्थ्य दुरुस्त रहता है।निष्कर्षविटामिन-सी के लिए आंवला के जूस और नींबू के पानी दोनों का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं। इनका सेवन करने से शरीर को हाइड्रेट रखने, पाचन को दुरुस्त करने, मेटाबॉलिज्म को बेहतर करने, आयरन जैसे पोषक तत्वों के अवशोषण को बेहतर करने, इम्यूनिटी को बूस्ट करने, शरीर को डिटॉक्स करने, स्किन और बालों को हेल्दी रखने में मदद मिलती है। ध्यान रहे, इनका सेवन सीमित मात्रा में करें। इसके अलावा, इनसे किसी भी तरह की एलर्जी होने पर इनका सेवन करने से बचें, साथ ही, स्वास्थ्य से जुड़ी कोई भी समस्या महसूस होने पर डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
- सुबह की शुरुआत अक्सर लोग चाय या कॉफी के साथ करना पसंद करते हैं। लेकिन, सवाल यह ये उठता है कि सुबह की शुरुआत किसी हेल्दी ड्रिंक से करनी चाहिए या कॉफी पीने से?सुबह की ड्रिंक क्यों जरूरी है?सुबह उठने के बाद हमारा शरीर 6 से 8 घंटे तक बिना पानी और पोषण के रहता है। ऐसे में सुबह उठने के बाद पहली चीज हम जो भी पीते हैं, उसका सीधा असर हमारे मेटाबॉलिज्म, पाचन, एनर्जी लेवल और हार्मोनल बैलेंस पर पड़ता है। इसलिए, सुबह आप क्या पी रहे हैं यह सोच समझकर पीना चाहिए, ताकि आपकी सेहत पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ सके।कॉफी के फायदेऑफिस, कॉलेज या घर पर रहने वाले लोगों को भी कॉफी पीना बहुत पसंद है ऐसे में आइए जानते हैं कॉफी पीने के फायदों के बारे में:-कॉफी में मौजूद कैफीन दिमाग को एक्टिव करने और फोकस बढ़ाने में मदद करता है।-मूड को बेहतर बनाने में फायदेमंद है-थकान और सुस्ती को कम करता है-वर्कआउट से पहले पीने से परफॉर्मेंस बेहतर हो सकती है।कॉफी के नुकसान-कॉफी पीने के जहां कई फायदे हैं वहीं इसके कुछ साइड इफेक्ट्स भी हैं, जैसे:-खाली पेट कॉफी पीने से एसिडिटी और गैस की समस्या होती है-ज्यादा कॉफी पीने से नींद, एंग्जाइटी और हार्टबीट प्रभावित हो सकती है-डिहाइड्रेशन होने की संभावनाहर्बल टी के फायदे-हर्बल टी जैसे ग्रीन टी, अदरक-नींबू की चाय, दालचीनी की चाय, तुलसी की चाय या कैमोमाइल टी में काफीन नहीं पाया जाता है या बहुत कम होता है, जिस कारण ये शरीर पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।-हर्बल चाय पीने से पाचन तंत्र एक्टिव और मजबूत होता है-शरीर को डिटॉक्स करने में मदद मिलती है-इम्युनिटी बूस्ट होती है-स्ट्रेस और सूजन कम होती है-वजन कंट्रोल करने में फायदेमंद हैहर्बल चाय के नुकसानहर्बल चाय पीने से भी कुछ नुकसान है, क्योंकि ज्यादा हर्बल चाय में मौजूद कुछ जड़ी-बूटियां आपके लिए नुकसानदायक होती हैं। एक्सपर्ट की माने तो सुबह खाली पेट हर्बल चाय पीना आमतौर पर सुरक्षित और फायदेमंद होता है, खासकर अगर आपको एसिडिटी, कब्ज या गैस की समस्या हो। इसलिए, आप ज्यादा मात्रा में हर्बल चाय पीने से बचें और इसकी सामग्रियों का ध्यान रखें, ताकि आपको इसका सही फायदा मिल सके।हर्बल चाय या कॉफी: किसी क्या पीना चाहिए?-हर्बल टी और कॉफी दोनों के फायदे अपने-अपने स्थान पर अलग है। इसलिए आइए जानते हैं कि किसे क्या पीना चाहिए:-अगर आपको एसिडिटी या पेट से जुड़ी समस्या है तो हर्बल चाय आपके लिए बेहतर ऑप्शन है।-लंबे समय तक फोकस चाहिए काम करने के लिए तो आप सीमित मात्रा में कॉपी पी सकते हैं।-तनाव और नींद से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के लिए आप हर्बल चाय पी सकते हैं।-अपने शरीर को डिटॉक्स करने और इम्यूनिटी बूस्ट करने के लिए हर्बल चाय पिएं।निष्कर्षहर्बल चाय और कॉफी दोनों के अपने-अपने फायदे हैं, लेकिन सुबह के समय आपके लिए ज्यादा फायदेमंद हर्बल चाय है। इसलिए, अगर आप सेहत से जुड़ी समस्याओं को दूर करना चाहते हैं तो हर्बल चाय सुबह पीना फायदेमंद होता है, वहीं फोकस बढ़ाने और शरीर को एक्टिव करने के लिए आप कॉफी का सेवन कर सकते हैं। बस ध्यान रखें कि आपको ज्यादा मात्रा में कोई भी चीज लेने से बचना चाहिए।
- आज के दौर में बढ़ती उम्र के निशान चेहरे पर जल्दी दिखाई देने लगे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सच में स्किन को जवान बनाए रखने का तरीका बोतलों में बंद है, या फिर इसका जवाब हमारी परंपरा और आयुर्वेद में छिपा है? आयुर्वेद हजारों सालों से यह मानता आया है कि स्किन की सेहत सीधे शरीर के दोषों वात, पित्त और कफ से जुड़ी होती है। जब खासकर वात दोष असंतुलित होता है, तो त्वचा सबसे पहले असर दिखाती है। अगर आप भी यह जानना चाहते हैं कि आपकी स्किन के लिए कौन-सा तेल सबसे बेहतर है और किस तरह देसी तेल एजिंग की रफ्तार को कम कर सकते हैं, तो यह जानकारी आपके लिए बेहद काम की है।कौन सा तेल स्किन एजिंग को धीमा करता है?आयुर्वेद के अनुसार स्किन की उम्र बढ़ने का मुख्य कारण वात दोष का असंतुलन होता है। जब वात बढ़ता है, तो स्किन रूखी, बेजान और झुर्रियों वाली हो जाती है। इसके अलावा दोषों का असंतुलन, गलत तेल का उपयोग और ऋतु के अनुसार देखभाल न करना भी स्किन एजिंग को तेज करता है। ''तेल वही फायदेमंद होता है जो दोषों को संतुलित रखे और शरीर की प्रकृति के अनुसार हो।''नॉर्थ इंडिया के लिए सरसों का तेल क्यों है बेहतर?आयुर्वेद के अनुसार नॉर्थ इंडियन लोगों के लिए सरसों का तेल सबसे उपयुक्त माना जाता है। यह तेल गर्म तासीर का होता है, जो वात दोष को संतुलित करता है। सरसों का तेल पूरे साल उपयोग किया जा सकता है और यह त्वचा में गहराई तक जाकर पोषण देता है। नियमित अभ्यंग से त्वचा में रक्त संचार बेहतर होता है, रूखापन कम होता है और एजिंग की प्रक्रिया धीमी होती है।साउथ इंडिया और नॉर्थ ईस्ट के लिए नारियल तेलसाउथ इंडियन और नॉर्थ ईस्ट के लोगों के लिए नारियल तेल सबसे अच्छा विकल्प है। यह शीतल प्रकृति का होता है और वहां के मौसम व शरीर की प्रकृति के अनुकूल है। नारियल तेल न सिर्फ स्किन को मॉइश्चराइज करता है, बल्कि स्किन पर नेचुरल ग्लो भी लाता है। इसका नियमित उपयोग स्किन बैरियर को मजबूत करता है और समय से पहले झुर्रियां आने से बचाता है।गुजरात और आसपास के क्षेत्रों में मूंगफली का तेलगुजरात जैसे क्षेत्रों में जहां मूंगफली प्रचुर मात्रा में उगती है, वहां मूंगफली का तेल स्किन के लिए बेहतर माना जाता है। यह तेल वहां के लोगों के दोषों को संतुलित रखता है और त्वचा को पोषण देता है। आयुर्वेद मानता है कि स्थानीय रूप से उगने वाली चीजें शरीर और स्किन के साथ बेहतर तालमेल बनाती हैं।ऋतु के अनुसार तेलआयुर्वेद में ऋतु के अनुसार तेल बदलने पर भी जोर दिया गया है। शिशिर ऋतु यानी शीत काल में वात दोष बढ़ जाता है, जिससे त्वचा ज्यादा रूखी और बेजान हो सकती है। ऐसे में नॉर्थ इंडिया में तिल के तेल का उपयोग बेहद लाभकारी माना जाता है। तिल का तेल त्वचा को गहराई से पोषण देता है और एजिंग के लक्षणों को कम करता है।स्किन एजिंग स्लो करने के लिए क्या रखें ध्यान?सिर्फ सही तेल ही नहीं, बल्कि सही समय और सही तरीका भी जरूरी है। रोज या सप्ताह में 2-3 बार अभ्यंग, मौसम के अनुसार तेल का चयन और प्राकृतिक तेलों का उपयोग स्किन एजिंग को काफी हद तक धीमा कर सकता है।निष्कर्षआयुर्वेद के अनुसार स्किन एजिंग को स्लो करने का सबसे आसान और प्रभावी तरीका है, क्षेत्र, ऋतु और शरीर की प्रकृति के अनुसार सही तेल का चुनाव। जो तेल जहां उगता है, वही वहां के लोगों के लिए सबसे ज्यादा लाभकारी होता है। इसलिए विदेशी तेलों के बजाय सरसों, नारियल, मूंगफली, तिल और घृत जैसे देसी विकल्प अपनाकर आप त्वचा को लंबे समय तक हेल्दी, सॉफ्ट और युवा बनाए रख सकते हैं।
- आयुर्वेद में कुछ जड़ी-बूटियां ऐसी हैं, जो बहुत पॉपुलर नहीं हैं लेकिन बहुत प्रभावशाली हैं। ऐसी ही एक जड़ी-बूटी है बाकुची जिसे त्वचा संबंधी समस्याओं के लिए बहुत फायदेमंद आयुर्वेदिक औषधि माना जाता है। खास बात यह है कि इसका प्रभाव त्वचा की बाहरी समस्याओं पर ही नहीं, बल्कि कई अंदरूनी समस्याओं पर भी देखा गया है। आयुर्वेद के साथ-साथ इसके फायदों को विज्ञान ने भी सही माना है। आज इस लेख में हम जानेंगे बाकुची चूर्ण के फायदे।1. सफेद दाग में फायदेमंदबाकुची चूर्ण का सबसे ज्यादा इस्तेमाल सफेद दाग यानी विटिलिगो से जुड़े मामलों में किया जाता है। आयुर्वेद के अनुसार, यह त्वचा में रंग देने वाले तत्व मेलानिन की प्रक्रिया को सपोर्ट करता है। बाकुची का वैज्ञानिक नाम Psoralea corylifolia है। कई रिसर्च में भी सामने आया है कि Psoralea corylifolia में पाए जाने वाले Psoralen और Bakuchiol जैसे कंपाउंड्स त्वचा में पिगमेंटेशन से जुड़ी गतिविधियों को प्रभावित कर सकते हैं। कुछ क्लिनिकल स्टडीज में Psoralen आधारित थेरेपी को विटिलिगो के इलाज में सहायक पाया गया है। हालांकि इसका असर धीरे-धीरे दिखता है इसलिए इसे आयुर्वेद में लॉन्ग-टर्म सपोर्ट के रूप में देखा जाता है।2. स्किन इंफेक्शन में राहतआयुर्वेद में बाकुची को प्राकृतिक एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुणों से भरपूर माना गया है। दाद, खाज, खुजली और फंगल इंफेक्शन जैसी समस्याओं में इसका इस्तेमाल पारंपरिक रूप से किया जाता रहा है।कुछ रिसर्च में यह पाया गया है कि बाकुची में मौजूद एक्टिव कंपाउंड्स फंगस और बैक्टीरिया के ग्रोथ को कंट्रोल करने में मदद कर सकते हैं। यही वजह है कि इसे स्किन क्लीनिंग और स्किन डिटॉक्स से जोड़कर देखा जाता है।3. बार-बार निकलने वाले कील-मुंहासे में उपयोगीआजकल की लाइफस्टाइल में मुंहासे सिर्फ टीनएज की समस्या नहीं रह गई है। खराब पाचन, हार्मोनल असंतुलन और बढ़ता स्ट्रेस भी इसकी वजह बनते हैं। आयुर्वेदिक नजरिए से देखा जाए, तो बाकुची चूर्ण शरीर के अंदर जमा अशुद्ध तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है। जब अंदर की सफाई बेहतर होती है, तो उसका असर स्किन पर दिखता है। इससे त्वचा जवान बनी रहती है और व्यक्ति अपनी वास्तविक उम्र से कम दिखाई देता है। इसी वजह से ऑयली स्किन और बार-बार पिंपल्स की समस्या में बाकुची को फायदेमंद माना जाता है।4. सोरायसिस और एक्जिमा में भी फायदेमंदसोरायसिस और एक्जिमा जैसी स्किन कंडीशन में स्किन ड्राई, लाल और इरिटेटेड रहती है। आयुर्वेद में बाकुची को स्किन रिपेयरिंग गुणों वाला माना गया है। कुछ रिसर्च में यह भी सामने आया है कि इसके बायोएक्टिव कंपाउंड्स स्किन सेल्स के हेल्दी रिन्यूअल को सपोर्ट कर सकते हैं। इसी वजह से इसे क्रॉनिक स्किन डिसऑर्डर में सहायक जड़ी-बूटी माना जाता है।5. पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में मददआयुर्वेद में माना जाता है कि अगर पाचन सही है, तो आधी बीमारियां खुद-ब-खुद कंट्रोल में रहती हैं। बाकुची चूर्ण पाचन अग्नि को एक्टिव करने में मदद करता है। यह गैस, अपच और भारीपन जैसी समस्याओं को कम करने में सहायक माना जाता है। जब डाइजेशन बेहतर होता है, तो शरीर पोषक तत्वों को भी सही तरीके से एब्जॉर्ब कर पाता है।कुल मिलाकर आयुर्वेद में त्वचा संबंधी समस्याओं के लिए बाकुची का प्रयोग पुराने समय से ही किया जाता रहा है। इसके साथ-साथ यह पाचन और इम्यूनिटी को बढ़ाने में भी फायदेमंद है। आधुनिक स्टडीज भी इसके कई पारंपरिक दावों को सपोर्ट करती नजर आती हैं।
- कई लोगों को लगातार एसिडिटी की दिक्कत बनी रहती है। आमतौर पर एसिडिटी को लोग कई तरह की समस्याओं से जोड़कर देखते हैं, जैसे रात को अच्छी नींद न होना, रात को सोने से पहले तली-भुनी चीजों का सेवन कर लेना आदि। क्या आप जानते हैं कि कभी-कभी यह किसी गंभीर बीमारी का लक्षण भी हो सकता है। इसलिए, जरूरी है कि आप इसे इग्नोर न करें, बल्कि यह क्यों हो रहा है, इसके कारणों को जानने की कोशिश करें।लगातार एसिडिटी होने के कारण-1. गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स रोग (जीईआरडी)यह एक तरह का पाचन विकार है, जिसमें पेट का एसिड भोजन नली में वापिस लौट आता है। इसी वजह से पेट या सीने में जलन की समस्या बनी रहती है। कई बार जब एसिड वापिस ईसोफेगस की ओर लौटता है, तो इसकी वजह से अजीब गंध और स्वाद भी महसूस होती है। इसके मुख्य लक्षणों की बात करें, तो खाना न पचना, खाना निगलने में दिक्कतें और बार-बार उल्टी जैसा महसूस होना शामिल है।2. क्रॉनिक किडनी डिजीजविशेषज्ञों की मानें, तो क्रॉनिक किडनी डिजीज शरीर में एसिड की मात्रा को बढ़ा देते हैं। ऐसे में शरीर में एसिडोसिस जैसी स्थिति पैदा हो जाती है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि किडनी शरीर से टॉक्सिन्स और एसिड को सही तरह से बाहर नहीं निकाल पा रही है। कहने की जरूरत नहीं है कि एसिड की मात्रा शरीर में बढ़ने से सीने में जलन होने लगती है और उल्टी-मतली जैसी समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं।3. पेप्टिक अल्सरइस बीमारी में पेट या छोटी आंत की परत में दर्दनाक घाव या छाले हो जाते हैं। ये असल में, पेट में एसिड और डाइजेशन जूस से बनते हैं। आपको बता दें कि ये बीमारी घातक है। यह बैक्टीरिया के कारण हो सकता है। इस तरह की बीमारी होने पर पेट के ऊपरी हिस्से में जलन और दर्द हो सकता है, खाने के तुरंत बाद दर्द होने लगता है। हालांकि, कभी-कभी इस बीमारी के लक्षण नजर नहीं भी आते हैं। इसलिए, आपको इस ओर विशेष ध्यान देना चाहिए।4. अपचजैसा कि शब्द से ही स्पष्ट है कि खाने की चीजें न पचने के कारण यह समस्या होती है। "अपच वजह से पेट के ऊपरी हिस्से में जलन, दर्द और बेचैनी महसूस हो सकती है। असल में अपच एक आम समस्या है। जब पाचन प्रक्रिया सही से काम न करे, तभी यह समस्या देखने को मिलती है। यह अक्सर भोजन की खराब आदतें, जैसे जल्दी खाना या मसालेदार चीजों का अधिक सेवन करने से होती हैं।"5. गॉलस्टोनआपको यह जानकर हैरानी हो सकती है कि पित्ताशय की पथरी के कारण भी एसिडिटी की समस्या हो सकती है। असल में पथरी की वजह से पित्त की नलिकाएं ब्लॉक हो जाती हैं। ऐसे में पाचन प्रक्रिया बाधित होती है। नतीजतन, पेट में भारीपन महसूस होना, गैस बनना और अपच की समस्या जैसे लक्षण नजर आने लगते हैं। यहां तक कि एसिडटी और सूजन जैसे संकेत भी मरीज में दिखने लगते हैं।निष्कर्षसीने या पेट में जलन हो, तो सबसे पहले अपने खानपान की आदतों पर गौर किया जा सकता है। हां, अगर आपको यह समस्या अक्सर होती है, तो बेहतर है कि आप इसे इग्नोर न करें। यह गॉलस्टोन जैसी गंभीर बीमारी का लक्षण भी हो सकता है। अगर डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव करने के बाद भी आप नोटिस करें कि आपकी एसिडिटी कम नहीं हो रही है, तो बेहतर है कि आप डॉक्टर से संपर्क करें अपनी जांच करवाएं।
- आजकल ब्लैक टी काफी ट्रेंड में है। लोग इसे शरीर की कैलोरी बर्न करने के साथ वेट लॉस के लिए पीते हैं। कुछ लोगों का मानना है कि ये फैट बर्नर की तरह काम करता है और लिवर के लिए फायदेमंद है लेकिन बिना एक्सपर्ट से जानें आपको इन बातों पर भरोसा नहीं करना चाहिए। ब्लैक टी को लेकर सही जानकारी होना बेहद जरूरी है कि क्या ये पेट के लिए सच में फायदेमंद है? जानते हैं इस बारे मेंक्या पेट के लिए फायदेमंद है ब्लैक टीस्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, सीमित मात्रा में सेवन करने पर काली चाय पेट के लिए फायदेमंद हो सकती है। इसमें पॉलीफेनॉल नामक एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो सूजन को कम करने और आंतों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। इतना ही नहीं, ये पेट के लिए सच में फायदेमंद हैं जैसेपाचन एंजाइमों को बढ़ावा देने में मददगारकाली चाय यानी ब्लैक टी पाचन एंजाइमों को उत्तेजित करके पाचन क्रिया में सहायता करती है, जिससे पेट भोजन को बेहतर ढंग से पचा पाता है। इतना ही नहीं, ये आंतों के कामकाज को बेहतर बनाने के साथ बॉवेल मूवमेंट को कंट्रोल को रेगुलेट करने में मददगार है।दस्त में फायदेमंद है काली चायकाली चाय को पीना दस्त में बेहद कारगर तरीके से काम करता है। ब्लैक टी में मौजूद प्राकृतिक यौगिक आंतों की परत को कसते हैं इसलिए यह हल्के दस्त को कम करने में भी सहायक हो सकती है। यही कारण है कि दस्त की समस्या होने पर लोग काली चाय बनाकर पीने को कहते हैं।पेट की तकलीफ और सूजन कम करने में कारगरगर्म काली चाय पेट की तकलीफ और सूजन को भी शांत कर सकती है। जिन लोगों को ब्लोटिंग की समस्या रहती है उनके लिए काली चाय पीना बेहद कारगर हो सकता है। ये सूजन को कम करने के साथ आपके पेट की परतों को आराम दे सकता है जिससे आप बहुत ज्यादा राहत महसूस कर सकते हैं।इन स्थितियों में बिलकुल भी न पिएं ब्लैक टीआपको ब्लैक टी आंख बंद करके नहीं पीनी चाहिए। ब्लैक टी में कैफीन होता है, जो पेट में एसिड का उत्पादन बढ़ा सकता है। एसिडिटी, एसिड रिफ्लक्स या अल्सर से पीड़ित लोगों के लिए, बहुत अधिक काली चाय पीने से लक्षण और बिगड़ सकते हैं। विशेषज्ञ बेहतर पेट स्वास्थ्य के लिए दूध और चीनी के बिना काली चाय पीने की सलाह देते हैं।ध्यान दें कि इसे भोजन के बाद पीना सबसे अच्छा है, खाली पेट नहीं। कुल मिलाकर, संतुलित आहार के हिस्से के रूप में और सीमित मात्रा में सेवन करने पर काली चाय पेट के स्वास्थ्य को बेहतर बना सकती है। हालांकि, अगर आप भी ले भी रहे हैं तो पहले अपने डॉक्टर से बाक करें, अपनी स्वास्थ्य स्थितियों को देखते हुए इसका सेवन करें।ब्लैक टी पीने से क्या फायदा होता है?ब्लैक टी में कैफीन और एल-थीनाइन होता है, जो अलर्टनेस बढ़ाने के साथ मूड को बेहतर बनाता है और आपको हेल्दी रखने में मददगार है। इसके एंटीऑक्सीडेंट पाचन क्रिया को तेज करने के साथ शरीर की स्फूर्ति बढ़ाने में मददगार हैं।क्या ब्लैक टी से पेट की चर्बी बर्न हो सकती है?क्या ब्लैक टी से पेट की चर्बी आसानी से बर्न हो सकती है। इसमें मौजूद फ्लेवोनोइड, विशेष रूप से थियोफ्लेविन्स, फैट मेटाबॉलिज्म को बढ़ावा देने में मददगार है। जब आप इसे रेगुलर पीते हैं तो शरीर से फैट की मात्रा कम होने लगती है और इस प्रकार से आपको वेट लॉस में मदद मिल सकती है।क्या फैटी लिवर के लिए ब्लैक टी ठीक है?ब्लैक टी में मौजूद सूजनरोधी और एंटीऑक्सीडेंट पोषक तत्व शरीर को डिटॉक्स करने के साथ फैटी लिवर की समस्या को कम करने में मदद कर सकते हैं। इससे लिवर के सेल्स का कामकाज तेज होता है और लिवर की सेहत बेहतर होती है। इससे लिवर अंदर से हेल्दी रहते हैं।
- सर्दियां आने के साथ लोग तिल-गुड़ से बनी चीजों को ज्यादा खाने लगते हैं। हर किसी के घर में तिल और गुड़ से तिलपट्टी और तिलकुट जरूर बनते हैं। इसके अलावा लोग तिल के लड्डू और तिल की रेवड़ी बनाकर महीनों तक खाते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि इतनी ज्यादा मात्रा में तिल और गुड़ का सेवन सेहत को कैसे प्रभावित कर सकता है। दरअसल, ये दोनों ही गर्म प्रकृति वाले फूड हैं। इनका ज्यादा सेवन पित्त बढ़ाने के साथ पेट की गर्मी बढ़ाने का काम करता है जिससे दूसरी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। इतिल गुड़ ज्यादा खाने के नुकसानतिल और गुड़ का अधिक सेवन स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा कर सकता है। तिल में कैलोरी और फैटकी मात्रा अधिक होती है, इसलिए इनका अधिक सेवन वजन बढ़ा सकता है। इसके अलावा गुड़ का ज्यादा सेवन शरीर की गर्मी बढ़ा सकता है इसलिए आपको ज्यादा तिल गुड़ खाने से बचना चाहिए। साथ ही ये तमाम कारण भी हैं जिनकी वजह से आपको तिल-गुड़ खाने से बचना चाहिए।पेट में सूजन हो सकती हैतिल गुड़ ज्यादा खाने से आपके पेट में सूजन की समस्या हो सकती है। दरअसल, जब आप इन दोनों को खाते हैं तो पेट संबंधी समस्याएं परेशान करती हैं जैसे शरीर में सूजन, गैस या दस्त। ये आपकोब्लोटिंग के रूप में महसूस हो सकता है और लंबे समय तक परेशान कर सकता है। कुछ लोगों को ज्यादा मात्रा में तिल-गुड़ खाने पर भरा-भरा और असहज महसूस हो सकता है।एसिडिटी और सीने में जलनजब आप ज्यादा मात्रा में तिल-गुड़ का सेवन करते हैं तो आपको एसिडिटी और सीने में जलन की समस्या महसूस हो सकती है। दरअसल, तिल और गुड़ को पचाना आसान नहीं होता और जब ये पूरी तरह से पच नहीं पाता तो गैस की दिक्कत होती है और GERD के लक्षणों में आपको एसिडिटी महसूस हो सकती है।ब्लड शुगर बढ़ सकता हैगुड़ एक प्रकार की चीनी है और इसका अधिक सेवन ब्लड शुगर के स्तर को बढ़ा सकता है जो डायबिटीज के रोगियों के लिए खतरनाक हो सकता है। अधिक गुड़ खाने से PCOD की दिक्कत और शुगर सेंसिटिव लोगों को नुकसान हो सकता है। इससे सिर दर्द और हार्मोनल हेल्थ भी प्रभावित हो सकता है इसलिए आप तिल गुड़ खाने से बचना चाहिए।शरीर की गर्मी बढ़ने से हो सकती है ये दिक्कतये दोनों खाद्य पदार्थ शरीर में गर्मी उत्पन्न करते हैं और इनका अधिक मात्रा में सेवन करने से मुंह के छाले, त्वचा पर दाने या नाक से खून आना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा आपकी भूख भी प्रभावित हो सकती है इसलिए आपको तिल गुड़ के ज्यादा सेवन से बचना चाहिए।तिल कब नहीं खाना चाहिए?तिल की तासीर गर्म होती है और इसका ज्यादा सेवन आपकी सेहत को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में जिन लोगों को डायबिटीज, एलर्जी, पेट से जुड़ी समस्याएं या पित्ताशय की बीमारी हो उन्हें इसके सेवन से बचना चाहिए।काले तिल के साइड इफेक्ट क्या हैं?काला तिल पचाना किसी के लिए भी आसान नहीं होता और ज्यादा खाने से एसिडिटी, दस्त और गर्मी बढ़ने की वजह से त्वचा से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं।सबसे अच्छा काला या सफेद तिल कौन सा है?सफेद और काले तिल, दोनों ही सेहत के लिए फायदेमंद हैं लेकिन काले तिल में आयरन की मात्रा ज्यादा होती है जिससे सेहत को ज्यादा फायदे मिल सकते हैं। इसलिए आप इसका सेवन करें।
- औषधीय गुणों से भरपूर अजवाइन और सोंठ में बहुत से पोषक तत्व होते हैं। इनका इस्तेमाल ज्यादातर लोग मसाले के तौर पर भी करते हैं। ऐसे में इसका सेवन करने से स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद मिलती है, लेकिन अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता क्या इनका सेवन साथ में किया जा सकता है और इनको साथ खाने से क्या होगा?अजवाइन, सोंठ और काला नमक साथ खाने के फायदे?आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों और औषधीय गुण से भरपूर अजवाइन, सोंठ और काले नमक में बहुत से पोषक तत्व होते हैं। अजवाइन में अच्छी मात्रा में फाइबर, कैल्शियम और आयरन जैसे पोषक तत्व होते हैं, साथ ही, इसमें एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-वायरल के गुण होते हैं। वहीं, सोंठ में अच्छी मात्रा में विटामिन्स, मिनरल्स, एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-ऑक्सीडेंट्स और एंटी-बैक्टीरियल के गुण होते हैं। ऐसे में इनको काले नमक के साथ खाने से स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याओं से राहत देने में मदद मिलती है।पाचन को दुरुस्त करेअजवाइन, सोंठ और काले नमक में बहुत से पोषक तत्व होते हैं। ऐसे में इसका सेवन करने से गैस, अपच, ब्लोटिंग, पाचन प्रक्रिया को दुरुस्त करने, पाचन के लिए जरूरी एंजाइम्स को बढ़ावा देने और पेट से जुड़ी समस्याओं से राहत देने में मदद मिलती है। ध्यान रहे, इनका सेवन सीमित मात्रा में करें।सूजन कम करेअजवाइन और सोंठ में अच्छी मात्रा में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-ऑक्सीडेंट्स के गुण होते हैं। ऐसे में इसका सेवन करने से शरीर की सूजन कम करने, दर्द को कम करने, मांसपेशियों को दुरुस्त करने और स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद मिलती है।इम्यूनिटी बूस्ट करेअजवाइन और सोंठ में अच्छी मात्रा में एंटी-बैक्टीरियल के गुण होते हैं। इसका सेवन करने से शरीर की इम्यूनिटी को बूस्ट करने, इंफेक्शन से बचाव करने और बीमारियों से बचाव करने में मदद मिलती है। इससे स्वास्थ्य दुरुस्त रहता है।श्वसन तंत्र के लिए फायदेमंदअजवाइन और सोंठ में अच्छी मात्रा में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी के गुण होते हैं। ऐसे में इसका सेवन करने से श्वसन तंत्र को दुरुस्त करने, गले की सूजन को कम करने, गले का इंफेक्शन से बचाव करने, सर्दी-खांसी से बचाव करने और स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं से बचाव करने में मदद मिलती है।मांसपेशियों के लिए फायदेमंदअजवाइन और सोंठ की तासीर गर्म होती है। ऐसे में इनको हल्के गुनगुने पानी के साथ लेने से मांसपेशियों के दर्द, ऐंठन और सूजन को कम करने में मदद मिलती है, जिससे मांसपेशियां रिलैक्स हो जाती हैं, जिससे जोड़ों की ऐंठन कम होती है, साथ ही, इससे शरीर को गर्म रखने में भी मदद मिलती है।वजन कम करेअजवाइन और सोंठ को काले नमक के साथ लेने से शरीर की चर्बी को कम करने, मेटाबॉलिज्म को दुरुस्त करने औप वजन कम करने में मदद मिलती है। ये स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है।निष्कर्षअजवाइन, सोंठ और काला नमक में बहुत से पोषक तत्व और औषधीय गुण होते हैं। इसका सेवन करने से पाचन प्रक्रिया को दुरुस्त करने, सूजन को कम करने, इम्यूनिटी को बूस्ट करने, मांसपेशियों को दुरुस्त करने, श्वसन तंत्र को दुरुस्त करने और वजन कम करने में मदद मिलती है। ध्यान रहे, इनका सेवन सीमित मात्रा में करें और इनसे किसी भी तरह की एलर्जी होने पर इनका सेवन करने से बचें। इसके अलावा, कोई भी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होने पर डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
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आज की व्यस्त लाइफस्टाइल में सुबह या शाम समय निकालकर योग करना हर किसी के लिए मुश्किल हो गया है। लोगों के पास इतना समय भी नहीं है कि वो योग करके अपनी सेहत का ध्यान रख सकें। ये दिक्कत सबसे ज्यादा उन लोगों के सामने आती है, जो ऑफिस में घंटों बैठकर काम करते हैं। लगातार काम करने की वजह से शरीर काफी थक जाता है। ऐसे में उनके लिए योग काफी अहम होता है।
अगर आप दफ्तर में ही बैठे-बैठे कुछ आसान योगासन कर लें तो आपका शरीर और दिमाग दोनों तरो-ताजा रह सकते हैं। ऑफिस में डेस्क पर बैठकर किया जाने वाला योग न सिर्फ शरीर की मांसपेशियों को मजबूत करता है बल्कि तनाव कम करने और ध्यान केंद्रित करने में भी मदद करता है। इस लेख में हम ऐसे सरल योगासन और स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज बताएंगे जिन्हें आप अपनी या कुर्सी पर बैठकर कर सकते हैं।
नेक स्ट्रेच
इसके लिए कुर्सी पर सीधे बैठ जाएं और पीठ को पूरी तरह सीधा रखें। अब अपनी धीरे-धीरे गर्दन को दाईं ओर झुकाएं और लगभग 5 सेकंड तक वहीं रुकें। फिर बाईं ओर झुकाएं और वहीं कुछ सेकंड रुकें। इसके बाद गर्दन को धीरे-धीरे आगे और फिर पीछे झुकाएं। इस प्रक्रिया को 5–6 बार दोहराएं। नेक स्ट्रेच करने से गर्दन की मांसपेशियों में लचीलापन बढ़ता है और लंबे समय तक कंप्यूटर पर काम करने से होने वाला दर्द और तनाव कम होता है।
शोल्डर रोल्स
सीधा बैठकर कंधों को ऊपर उठाएं। अब कंधों को धीरे-धीरे पीछे की दिशा में गोल घुमाएं और 5–6 बार दोहराएं। फिर कंधों को आगे की दिशा में भी गोल घुमाएं। शोल्डर रोल्स करने से कंधों की जकड़न दूर होती है और पीठ और गर्दन की रक्त-संचार बेहतर होती है। ये अभ्यास तनाव कम करने और लंबी बैठने से होने वाली थकान मिटाने में बहुत मददगार है।
वॉटर बॉटल एक्सरसाइज
एक हल्की पानी की बोतल (250–500ml) लें और दोनों हाथों में पकड़ें। अब हाथों को धीरे-धीरे ऊपर उठाएं और फिर नीचे लाएं। इस क्रिया को 10–12 बार दोहराएं। ये भी एक सरल एक्सरसाइज है, जोकि हाथ और कंधों की मांसपेशियों की ताकत बढ़ाती है, साथ ही ऑफिस में बैठे-बैठे होने वाले तनाव और अकड़न को कम करती है।
सीटेड लेग स्ट्रेच
कुर्सी पर सीधे बैठें और दोनों पैर जमीन पर रखें। अब एक पैर को धीरे-धीरे आगे बढ़ाएं और एड़ी को ऊपर-नीचे हिलाएं। 10–15 बार करने के बाद दूसरे पैर से भी दोहराएं। सीटेड लेग स्ट्रेच करने से पैरों की मांसपेशियों में खिंचाव कम होता है, रक्त-संचार बेहतर होता है और लंबे समय तक बैठने से होने वाली थकान दूर होती है। - चाहे ऑफिस हो या स्कूल लोग या बच्चे घर से निकलते समय टिफिन जरूर ले जाते हैं, लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि टिफिन बॉक्स का मटेरियल आपकी सेहत पर क्या असर डाल सकता है? हमारी भागदौड़ भरी जिंंदगी में, खासकर ज्यादा ह्रयूमिडिटी वाले शहरोंं में, लंच पैक करने का सही तरीका आजमाना बहुत जरूरी है, लेकिन गलत डिब्बे में खाना रखने से खाने में हानिकारक केमिकल मिल सकते हैं, जिससे हार्मोन असंतुलन, पाचन की समस्या और यहां तक कि कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है।सबसे अच्छे टिफिन बॉक्स मटेरियल-1. स्टेनलेस स्टील ग्रेड 304 या 18/8-खाने के लिए वे सबसे अच्छे मटेरियल के तौर पर स्टेनलेस स्टील ग्रेड 304 या 18/8 को देखते हैं। ये नींबू चावल या करी जैसे खट्टे खाने के साथ भी रिएक्शन नहीं करते, बीपीए-फ्री होते हैं और कोई जहरीला तत्व नहीं छोड़ते। स्टील के टिफिन में खाने का स्वाद नहीं बदलता, जंग नहीं लगती और साफ करना भी आसान होता है। जर्नल ऑफ फूड साइंंस की रिसर्च के अनुसार, अगर स्टील के टिफिन को ठीक से इस्तेमाल किया जाए, तो इनमें से भारी धातुएं नहीं निकलतीं। भारतीय खाने के लिए लीक-प्रूफ और इंसुलेटेड स्टील टिफिन चुनें।2. कांच के डिब्बे-इनमें खाना साफ दिखाई देता है और ये नॉन-पोरोस होते हैं यानी इस मटेरियल में पानी, तेल या खाने के कण अंदर नहीं जाते, जिससे बैक्टीरिया नहीं पनपते। बोरोसिलिकेट गिलास माइक्रोवेव में सुरक्षित रहता है। सलाद या सब्जी दोबारा गर्म करने के लिए ये बेहतरीन हैं क्योंकि इनमें कोई केमिकल नहीं निकलता।3. फूड ग्रेड सिलिकॉन-फूड ग्रेड सिलिकॉन हल्का, लचीला और 220°C तक गर्मी सहने वाला मटेरियल होता है। इस मटेरियल के टिफिन का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह नॉन-टॉक्सिक होता है, दाग नहीं पकड़ता और छोटे हिस्सों में खाना रखने के लिए अच्छा है। हमेशा 100% प्लैटिनम क्योर सिलिकॉन ही लें।सबसे खराब टिफिन मटेरियल1. प्लास्टिक-अक्सर प्लास्टिक वाले टिफिन में बीपीए, थैलेट्स या स्टाइरीन होते हैं, जो गर्म करने या ऑयली और खट्टी चीजों के साथ भोजन में मिल जाते हैं। एंडोक्राइन सोसाइटी की स्टडी बताती है कि गर्मी से ये केमिकल जल्दी निकलते हैं जिससे मोटापा, बांझपन और हार्मोनल समस्याएं हो सकती हैं। सिंगल-यूज प्लास्टिक को रीसायकल करने से भी वह सुरक्षित नहीं बनता।2. बिना कोटिंग वाला एल्युमिनियमबिना कोटिंग वाला एल्युमिनियम खट्टे खाने के साथ रिएक्शन करके धातु जैसा स्वाद देता है और शरीर में एल्युमिनियम जमा हो सकता है। यह अल्जाइमर जैसी न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से जुड़ा माना जाता है। जरूरी हो तो केवल एनोडाइज्ड या कोटेड एल्युमिनियम ही लें।3. मेलामाइन-दिखने में यह मटेरियल सिरेमिक जैसा लगता है, लेकिन गर्म खाने पर इसमें से फॉर्मेल्डिहाइड (CH₂O) या रासायनिक यौगिक निकलता है, जो अंतर्राष्ट्रीय कैंसर अनुसंधान एजेंसी के मुताबिक संभावित कैंसरकारक है। सस्ते टिफिन में इसका मौजूद होना आम बात है इसलिए इससे पूरी तरह से बचें।निष्कर्ष:खाने में टिफिन के जरिए टॉक्सिन कम होने से पाचन और एनर्जी दोनों में सुधार आता है। इसलिए अच्छी सेहत के लिए प्लास्टिक, बिना कोटिंग वाले एल्युमिनियम, मेलामाइन से बचें और स्टेनलेस स्टील या गिलास जैसे मटेरियल के टिफिन का इस्तेमाल करें।
- हर नए साल की शुरुआत में लोग हेल्दी खाने का संकल्प लेते हैं लेकिन कुछ ही हफ्तों में फिर से पुरानी आदतों में लौट जाते हैं। इसकी वजह यह नहीं होती कि लोग कोशिश नहीं करते बल्कि यह होती है कि वे बहुत हार्ड या ऐसी डाइट चुन लेते हैं जो भारतीय खाने और रोजाना की लाइफस्टाइल के हिसाब से सही नहीं बैठती। फड डाइट और विदेशी खाने के ट्रेंड कुछ दिनों तक तो चल जाते हैं लेकिन लंबे समय तक निभाना मुश्किल होता है।शरीर को किसी थोड़े समय की डाइट नहीं बल्कि ऐसी आसान और टिकाऊ खानपान की जरूरत होती है जिसे रोज अपनाया जा सके। NFHS-5 के अनुसार करीब 56% भारतीय वयस्क पोषण की कमी या असंतुलन से जूझ रहे हैं, जिसकी बड़ी वजह गलत खानपान और प्रोसेस्ड फूड का बढ़ता सेवन है।भोजन के बारे में होम्योपैथी क्या कहती है?होम्योपैथी के अनुसार खाना सिर्फ शरीर को ऊर्जा देने का जरिया नहीं है बल्कि यह शरीर की 'वाइटल फोर्स' यानी अंदरूनी ऊर्जा से जुड़ा होता है। यही ऊर्जा शरीर का संतुलन बनाए रखती है और बीमारियों से लड़ने में मदद करती है। इसलिए होम्योपैथी में टिकाऊ और संतुलित पोषण को अच्छी इम्युनिटी, बेहतर पाचन, मानसिक स्पष्टता और हार्मोन बैलेंस का आधार माना जाता है।क्यों बेहतर है टिकाऊ डाइट?सख्त डाइट की तुलना में टिकाऊ डाइट इसलिए ज्यादा असरदार मानी जाती है क्योंकि भारतीय शरीर स्वाभाविक रूप से घर के बने अनाज, दाल, सब्जियों और पारंपरिक मसालों के अनुसार ढला हुआ है। बहुत सख्त या सीमित डाइट कुछ समय के लिए वजन तो घटा सकती है, लेकिन लंबे समय तक उसे निभाना मुश्किल हो जाता है और लोग जल्दी हार मान लेते हैं। अच्छी सेहत के लिए जरूरी है कि खाने से सब कुछ हटाने के बजाय संतुलित भोजन किया जाए, कैलोरी गिनने के तनाव में पड़ने के बजाय मौसमी और ताजा खाना चुना जाए और खुद को भूखा रखने के बजाय सही मात्रा में भोजन लिया जाए। इसी सोच के साथ भारतीयों के लिए बनाया गया यह आसान न्यू ईयर मील प्लान एक सामान्य और लचीला गाइड है जिसे अधिकतर लोग अपनी रोजाना की जिंदगी में बिना किसी परेशानी के आसानी से अपना सकते हैं और लंबे समय तक स्वस्थ रह सकते हैं।सुबह उठते ही क्या करें?सुबह उठते ही गुनगुना पानी पीना, चाहे नींबू के साथ हो या बिना, पाचन तंत्र को एक्टिव करने में मदद करता है। चाहें तो इसके साथ 2 भीगे हुए बादाम और 1 भीगी हुई खजूर ली जा सकती है, जिससे शरीर को हल्की एनर्जी मिलती है। होम्योपैथी के अनुसार, दिन की शुरुआत में पाचन सही रहने से पूरे दिन का मेटाबॉलिज़्म संतुलित रहता है और शरीर की आंतरिक ऊर्जा बेहतर तरीके से काम करती है।ऐसा होना चाहिए आपका नाश्तानाश्ते में रोज इन चीजों में से किसी एक को चुना जा सकता है जैसे सब्जियों वाला पोहा या उपमा जिसमें मूंगफली शामिल हो, मल्टीग्रेन पराठा घर की बनी दही के साथ, इडली या डोसा सांभर के साथ या फिर ओट्स और रागी की खीर फल के साथ। ये सभी नाश्ते पोषण से भरपूर होते हैं, जिससे ब्लड शुगर लेवल संतुलित रहता है, देर तक भूख नहीं लगती और पाचन तंत्र सही तरीके से काम करता है।मिड-मॉर्निंग स्नैकमिड-मॉर्निंग में हल्का और हेल्दी स्नैक लेना फायदेमंद होता है। इस दौरान अमरूद, पपीता, केला या संतरा जैसे ताजे फल खाए जा सकते हैं, साथ ही नारियल पानी भी एक अच्छा विकल्प है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन के अनुसार, फल शरीर की इम्युनिटी को मजबूत करते हैं और एंटीऑक्सिडेंट स्तर बढ़ाकर कई बीमारियों से बचाव में मदद करते हैं।दोपहर का खानादोपहर के भोजन में संतुलित थाली बेहद जरूरी होती है। इसमें 1-2 मल्टीग्रेन रोटी या 1 कटोरी चावल, साथ में दाल, राजमा या छोले की एक कटोरी, मौसमी सब्ज़ी और गाजर, खीरा व चुकंदर का सलाद शामिल करें। दही या छाछ पाचन को बेहतर बनाती है। होम्योपैथी के अनुसार शरीर की लगभग 70% इम्युनिटी पेट से जुड़ी होती है, इसलिए लंच का सही और हल्का होना बहुत जरूरी है।इवनिंग स्नैक्सशाम के नाश्ते में तले-भुने या पैकेट वाले खाने की जगह हल्के और पौष्टिक विकल्प चुनें। भुने चने या मूंगफली, स्प्राउट्स की चाट, तुलसी-अदरक या दालचीनी वाली हर्बल चाय और थोड़ा सा फल शरीर को ऊर्जा देते हैं, पाचन पर बोझ नहीं डालते और शाम की भूख को हेल्दी तरीके से कंट्रोल करते हैं।रात का खाना हल्का रखेंरात का खाना हमेशा हल्का और आसानी से पचने वाला रखें। सब्ज़ियों वाली खिचड़ी, दाल का सूप एक रोटी के साथ, ग्रिल्ड पनीर या चिकन के साथ सब्ज़ियां या वेज दलिया अच्छे विकल्प हैं। सोने से 2-3 घंटे पहले डिनर करने से पाचन ठीक रहता है, नींद की गुणवत्ता सुधरती है और शरीर को रात में बेहतर तरीके से रिकवर करने का समय मिलता है।हफ्ते में शामिल करेंहफ्ते में अपनी डाइट में बाजरा, ज्वार और रागी जैसे मिलेट्स कम से कम दो बार जरूर शामिल करें। साथ ही दही, छाछ और कांजी जैसे प्रोबायोटिक्स पाचन और इम्युनिटी को मजबूत करते हैं। मीठे के लिए रिफाइंड चीनी की जगह गुड़ का इस्तेमाल करें और नट्स व बीजों को डाइट में जोड़ें क्योंकि ये शरीर को अच्छी फैट और लंबे समय तक ऊर्जा देते हैं।किन चीजों से दूरी बनाएंअच्छी सेहत बनाए रखने के लिए कुछ आदतों से दूरी बनाना जरूरी है। ज्यादा तला-भुना खाना जैसे समोसा, पकौड़े और कचौड़ी पाचन पर बोझ डालते हैं, वहीं ज्यादा चीनी वाली मिठाइयां वजन और ब्लड शुगर बढ़ा सकती हैं। प्रोसेस्ड और पैकेज्ड फूड, बहुत ज्यादा चाय-कॉफी और देर रात भारी खाना शरीर की प्राकृतिक लय बिगाड़ता है, इसलिए इनका सेवन जितना कम किया जाए उतना बेहतर है।डाइट के साथ ये आदतें भी अपनाएंडाइट के साथ कुछ अच्छी आदतें अपनाना भी जरूरी है। रोजाना 20-30 मिनट टहलने से शरीर एक्टिव रहता है, पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बेहतर है, खासकर गुनगुना पानी। खाना खाते समय मोबाइल से दूर रहकर ध्यान से खाना चाहिए। नियमित और पूरी नींद लेना तथा सुबह की धूप से प्राकृतिक विटामिन डी लेना भी सेहत को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है।
- सर्दियों में ज्यादातर लोगों को सर्दी-जुकाम और खांसी जैसी समस्याएं हो जाती हैं। इसलिए इस मौसम में शरीर की इम्यूनिटी को मजबूत बनाए रखना बहुत जरूरी होता है। इम्यूनिटी बूस्ट करने के लिए ज्यादातर लोग तरह-तरह की चीजों का सेवन करते हैं। इसमें आप सूप भी शामिल कर सकते हैं। सूप पीने से भी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनती है। अगर आप अपनी विंटर डाइट में सूप शामिल करेंगे, तो इससे कई रोगों और संक्रमणों से भी बचाव संभव है।टमाटर का सूप पिएंसर्दियों में टमाटर का सूप पीना बेहद फायदेमंद होता है। टमाटर के सूप में लाइकोपीन, विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो शरीर के लिए बहुत जरूरी होते हैं। टमाटर का सूप पीने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनती है और कई संक्रमणों से बचाव होता है। टमाटर का सूप पीने से सर्दी-जुकाम और खांसी जैसी समस्याओं से राहत मिलती है। टमाटर का सूप पीने से पाचन-तंत्र में सुधार होता है और इससे जुड़ी समस्याएं ठीक होती हैं।मशरूम का सूप पिएंसर्दियों में आप मशरूम का सूप पी सकते हैं। मशरूम में विटामिन डी होता है, जो हड्डियों को मजबूत बनाता है। सर्दियों में फिट और हेल्दी रहने के लिए आपको मशरूम का सूप जरूर पीना चाहिए। मशरूम का सूप पीने से शरीर की इम्यूनिटी बूस्ट होती है और सर्दियों में होने वाले कई रोगों से बचाव होता है। मशरूम का सूप एनीमिया रोगियों के लिए भी फायदेमंद होता है। अगर आप रोजाना मशरूम का सूप पिएंगे, तो इससे में गर्माहट बनी रहेगी और आप हेल्दी महसूस करेंगे।दाल का सूप पिएंदाल का सूप सेहत के लिए काफी अच्छा होता है। आपको अपनी रोज की डाइट में दाल का सूप जरूर शामिल करना चाहिए। आप घर पर ही दाल का सूप आसानी से बना सकते हैं। दाल में विटामिन्स और मिनरल्स अधिक मात्रा में पाए जाते हैं, तो शरीर के लिए जरूरी होते हैं। सर्दियों में दाल का सूप पीने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनती है और कई तरह के संक्रमण दूर होते हैं। सर्दियों में रोज शाम को एक बाउल दाल का सूप जरूर पीना चाहिए।पालक का सूप पिएंसर्दियों में आपको पालक का सूप जरूर पीना चाहिए। पालक में कैल्शियम, आयरन और विटामिन्स अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। अगर आप सर्दियों में रोजाना पालक का सूप पिएंगे, तो इससे हड्डियां मजबूत बनेंगी और हीमोग्लोबिन का स्तर भी बढ़ेगा। पालक का सूप पीने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनती है। रोजाना पालक का सूप पीने से मौसमी बीमारियों से बचाव होता है। शरीर में गर्माहट बनी रहती है और जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है। आप शाम को चाय की जगह पालक का सूप पी सकते हैं।ब्रोकली का सूप पिएंसर्दियों में ब्रोकली का सूप पीना बेहद लाभकारी होता है। ब्रोकली में विटामिन्स, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स अधिक मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर के लिए जरूरी होते हैं। इसके लिए आप ब्रोकली को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटें और इसमें प्याज-लहसुन मिलाकर अच्छी तरह से पका लें। आप इसमें पालक भी मिक्स कर सकते हैं। रोजाना ब्रोकली का सूप पीने से पाचन-तंत्र मजबूत बनता है और रोगों से बचाव होता है।
- सुबह उठते ही टखनों में जकड़न होना एक आम समस्या है। इसका कारण रातभर शरीर की कम मूवमेंट, ब्लड सर्कुलेशन धीमा होना या अर्थराइटिस, प्लांटर फैसीसाइटिस और काफ मसल्स का टाइट होना हो सकता है। सिंपल मोबिलिटी स्ट्रेच से कई मरीजों को काफी राहत मिली है। ये एक्सरसाइज जॉइंट में लुब्रिकेशन बढ़ाती हैं, ब्लड फ्लो बेहतर करती हैं और फ्लेक्सिबिलिटी सुधारती हैं। इन्हें रोज सुबह उठते ही करें। हर स्ट्रेच को 20 से 30 सेकंड तक होल्ड करें और गहरी सांस लेते रहें। अगर पहले से कोई चोट या क्रॉनिक बीमारी है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। इ1. एंकल सर्कल्स-बिस्तर के किनारे बैठें या कुर्सी पकड़कर खड़े हो जाएं।-एक पैर जमीन से ऊपर उठाएं, घुटना थोड़ा मोड़ा रखें।-अब टखने को धीरे-धीरे 10 बार घड़ी की दिशा में और 10 बार उल्टी दिशा में घुमाएं।-यह मूवमेंट जॉइंट और टेंडन को एक्टिव करता है, रात की जकड़न को कम करता है और टखने में मौजूद लिक्विड के सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है। फिर दूसरा पैर बदलें।2. तौलिये से काफ स्ट्रेच करें--पीठ के बल लेट जाएं और पैर को सीधा रखें।-एक पैर के पंजे में तौलिया या बेल्ट डालें।-अब तौलिए को हल्के से अपनी तरफ खींचें, घुटना सीधा रखें।-काफ मसल और एड़ी के पास गहरी स्ट्रेच महसूस होगी।-झटके न दें। हर पैर पर 3 बार दोहराएं।-टाइट काफ मसल्स टखनों पर दबाव डालती हैं, यह स्ट्रेच चलने में जरूरी फ्लेक्सिबिलिटी को बढ़ाती है।3. अल्फाबेट राइटिंग विद एंकल- आराम से बैठें और अपने पैर के अंगूठे से हवा में A से Z तक अक्षर लिखें।-धीरे-धीरे और कंट्रोल के साथ करें।-इस एक्सरसाइज से टखने की हर दिशा में मूवमेंट होती है और लंबे समय तक बैठने या गलत चाल से बने असंतुलन को ठीक करने में मदद मिलती है।निष्कर्ष:एड़ी का दर्द दूर करने के लिए नियमितता बहुत जरूरी है। साथ में सही फुटवियर पहनें, पानी पर्याप्त पिएं और हल्दी जैसे एंटीइंफ्लामेटरी फूड्स को डाइट में शामिल करें। अगर जकड़न लगातार बनी रहती है, तो यह गाउट या टेंडोनाइटिस का संकेत हो सकता है, ऐसे में डॉक्टर से जांच कराएं।
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अगर आप चाहते हैं कि स्किन में बढ़ती उम्र के लक्षण नजर न आएं, तो इसके लिए आवश्यक है कि आप अपनी स्किन की अच्छी तरह देखभाल करें। क्या आप जानते हैं कि झुर्रियों को कम करने के लिए आप अरंडी के तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं। हालांकि इसे यूज कैसे करना है, यह भी आपको पता होना चाहिए।
चेहरे पर अरंडी का तेल लगाने के फायदे-
1. सबसे पहले लें पैच टेस्टअरंडी के तेल को स्किन पर यूज करने से पहले पैच टेस्ट लेना न भूलें। इसके लिए आप अरंडी के तेल की कुछ बूंदें लें और अपनी स्किन पर अप्लाई करें। करीब 24 घंटे तक इसे ऑब्जर्व करें। अगर एलर्जिक रिएक्शन हो, तो इसे दोबारा यूज न करें।2. चेहरा साफ करेंजब भी आप अरंडी का तेल यूज करें, तो सबसे पहले अपने चेहरे को अच्छी तरह साफ कर लें। इसके लिए क्लींजर यूज करना अच्छा होता है। अगर आप रात को सोने से पहले इसे यूज करना चाहते हैं, तो बेहतर है कि अपना मेकअप रिमूव कर लें। इसके बाद चेहरे को क्लीन करें। इससे चेहरे में जमा एक्स्ट्रा ऑयल रिमूव हो जाता है।3. अरंडी का तेल चेहरे पर लगाएंअरंडी के तेल की सिर्फ दो से तीन बूंदों को अपनी फिंगर टिप पर लें और इसे सर्कुलर मोशन में अपने चेहरे पर अप्लाई करें। विशेषकर, जिन हिस्सों में झाइयां और झुर्रियां हो रही हैं, जैसे माथा या अंडर आई इसे अप्लाई करें और हल्के हाथों से मसाज करें। आप चाहें, तो इसे अपनी गर्दन पर भी लगा सकते हैं।4. रात भर चेहरे पर लगा रहने देंअगर आप अपनी स्किन को डीप कंडीशनिंग करना चाहते हैं, हाइड्रेट रखना चाहते हैं, तो चेहरे पर अरंडी का तेल लगाने के बाद इसे रात भर के लिए अपने चेहरे पर लगा छोड़ दें। अरंडी के तेल में कई तरह के न्यूट्रिएंट्स और फैटी एसिड्स होते हैं, जो कि स्किन में गहराई तक एब्जॉर्ब होते हैं। इससे स्किन नॉरिश होती है और त्वचा का निखार भी बढ़ता है।चेहरे पर अरंडी का तेल लगाने के फायदे-अरंडी का तेल लगाने स्किन डीप मॉइस्चर होती है।-अरंडी के तेल में इमोलिएंट होता है, जो कि स्किन की नेचुरल प्रोटेक्टिव लेयर को सुरक्षित रखती है।-अरंडी के तेल में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो फ्री रेडिकल से त्वचा की रक्षा करते हैं।-अरंडी के तेल में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व स्किन की सूजन को कम करता है।-अरंडी का तेल लगाने से स्किन टेक्सचर में सुधार होता है।निष्कर्षअरंडी का तेल त्वचा के लिए लाभकारी माना जाता है। इसमें कई तरह के पोषक तत्व होते हैं, जो त्वचा को नॉरिश रखते हैं और लंबे समय तक स्किन को हाइड्रेटेड रखने में मदद करते हैं। आप चाहें, तो अरंडी के तेल को कैरियर तेल के साथ मिक्स करके भी अपने चेहरे पर लगा सकते हैं। रात भर के लिए इसे अपने चेहरे पर लगाकर छोड़ दें। इस प्रक्रिया को रोजाना दोहराएं। कुछ ही सप्ताह में आपको फर्क नजर आने लगेगा। - केला हमारी सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है. इस मिठाई को बनाने में चीनी की जगह गुड़ का इस्तेमाल किया जाता है, जो इसे एक नेचुरल और हेल्दी ऑप्शन बनाता है. यह मिठाई साउथ की पारंपरिक मिठाई से प्रेरित है. तो चलिए बिना किसी देरी के आपको बताते हैं इसकी रेसिपी.मिठाई की तैयारीइस मिठाई को बनाने के लिए पके हुए केले, देसी घी, गुड़, और इलायची का उपयोग होता है. इस मिठाई के लिए पके हुए केले ही बेस्ट होते हैं. कई लोग अक्सर पिलपिले केलों का भी इस्तेमाल करते हैं. रेसिपी की शुरुआत केलों को छीलने के साथ होती है. जिसके बाद उनका एक फाइन पेस्ट तैयार किया जाता है. इसके बाद इसका स्वाद और बढ़ाने के लिए काजू को हल्का रोस्ट किया जाता है, जिसे बाद में मिठाई में मिलाया गया.सबसे पहले केले को देसी घी में धीमी आंच पर पकने के लिए छोड़ देना चाहिए. इस मिठाई में सारी कुकिंग मीडियम फ्लेम पर होती है, क्योंकि हाई फ्लेम पर पकाने से अनइवन तरीके से कुकिंग होने के चांस हैं. केले को तब तक पकाया जाए, जब तक उसका पानी पूरी तरह से सूख न जाए और उसका रंग बदलकर गाढ़ा न हो जाए.कैसे होगी मिठाई और मीठीअब गुड़ को पिघलाने के लिए थोड़े पानी में गुड़ डाले और केले के साथ मिलाएं. गुड़ नेचुरल स्वीटनर है और इससे मिठाई में एक लचीलापन आता है. मिठाई को तब तक पकाया गया जाता है जब तक वह पूरी तरह से गाढ़ी और सेट न हो जाए.फाइनल टच और परोसने का तरीकामिठाई को ठंडा करने के लिए बटर पेपर का इस्तेमाल करें, और इसे फ्रिज में सेट होने के लिए छोड़ दें. ठंडी होने के बाद इसे आसानी से काटें. और बस तैयार है सर्व करने के लिए.
- सर्दी के मौसम में खाने का स्वाद ही कुछ और होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस मौसम में खाने के कई सारे विकल्प उपलब्ध रहते हैं। इन्हीं विकल्पों में शामिल है लहसुन की चटनी, जो अपने तीखे स्वाद और स्वास्थ्य लाभों के लिए प्रसिद्ध है। इस मौसम में लहसुन की चटनी खाने का एक बेहतरीन विकल्प बन सकती है।लहसुन न केवल आपके भोजन को स्वादिष्ट बनाता है, बल्कि ये सेहत के लिए भी फायदेमंद है, क्योंकि ये शरीर को गर्मी प्रदान करता है और इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है। ऐसे में आप इसकी चटनी बनाकर भी सेवन कर सकते हैं।लहसुन की चटनी सर्दी में खासतौर पर बहुत पसंद की जाती है, क्योंकि ये पेट को हल्का महसूस कराती है और भोजन के स्वाद को बढ़ा देती है। इस चटनी को बनाने में भी ज्यादा समय नहीं लगता। तो आइए बिना देर किए आपको लहसुन की चटनी बनाने की विधि के बारे में बताते हैं।लहसुन की चटनी बनाने का सामान---लहसुन की कलियां – 6-7हरी मिर्च – 2सूखी लाल मिर्चकश्मीरी लाल मिर्चनींबू का रस – 1 चम्मचनमक – स्वाद अनुसारजीरा – 1/2 चम्मचधनिया पाउडर – 1/2 चम्मचकाली मिर्च – 1/4 चम्मचलहसुन की चटनी बनाने की विधिलहसुन का स्वाद चटनी में तीखा और मसालेदार होता है, जो खाने में शानदार लगता है। इसे बनाने के लिए सबसे पहले तो लहसुन की कलियों को छीलकर बारीक काट लें। इसके बाद हरी मिर्च, सूखी लाल मिर्च, नमक, कश्मीरी लाल मिर्च, जीरा, धनिया पाउडर और काली मिर्च डालें।इन सभी सामग्री को मिक्सी में अच्छे से पीस लें, ताकि सभी मसाले आपस में अच्छे से मिल जाएं और चटनी एकसार हो जाए। अब इस मिश्रण में ताजे नींबू का रस डालकर अच्छे से मिला लें। नींबू का रस चटनी में ताजगी और खट्टापन लाता है, जिससे इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है। इस चटनी को आप खाने के साथ सर्व कर सकती हैं। ये चटनी किसी भी स्नैक, पराठे, पूरी, या चाय के साथ बेहतरीन लगती है।बरतें ये सावधानी--लहसुन की चटनी का स्वाद बहुत तीखा होता है, इसलिए हरी मिर्च और नमक को अपनी पसंद के हिसाब से कम या ज्यादा कर सकती हैं।चटनी को पिसने के दौरान ध्यान रखें कि अधिक पानी न डालें, वरना चटनी का स्वाद हल्का हो सकता है।नींबू का रस ताजे और खट्टे नींबू से ही डालें, ताकि चटनी में सही खट्टापन रहे।चटनी को हवादार जार या कंटेनर में रखें, ताकि वो ताजगी से लंबे समय तक बची रहे।यदि आपको लहसुन का स्वाद थोड़ा ज्यादा तीखा लगे, तो थोड़ा सा शहद भी डाल सकती हैं ताकि चटनी का स्वाद संतुलित हो जाए।
- ठंड के मौसम में पेट से जुड़ी समस्याएं बढ़ जाती हैं. यदि आपको सर्दी के मौसम में कब्ज और गैस की समस्या रहती है तो परेशान न हों. इससे छुटकारा पाने के लिए अपनी डाइट में आपको कुछ बदलाव करना पड़ेगा. हम आपको पांच ऐसे फलों के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें खाने के बाद पाचन तंत्र से जुड़ी हर समस्या दूर हो जाएगी. आपको मालूम हो कि ठंड के मौसम में कम पानी पीने. फिजिकल एक्टिविटी अधिक नहीं करने और हैवी खाने से पेट सुस्त हो जाता है. ऐसे में हमें डाइजेशन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है.पपीतापपीता में ढेर सारे पोषक तत्व पाए जाते हैं. इस फल में फाइबर खूब पाया जाता है. पानी की मात्रा भी अधिक होती है. पपीता पेट और डाइजेशन के लिए किसी दवा से कम नहीं है. पपीता में पपेन नामक एक ऐसा एंजाइम होता है, जो पाचन को दुरुस्त करता है. आप पपीता को सीधे छिलका उतारकर खा सकते हैं. इसे सलाद और जूस के रूप में भी उपयोग कर सकते हैं.केलाकेला पेट के लिए बहुत ही अच्छा होता है. यह आसानी से पच जाता है. फाइबर से भरपूर केला का इस्तेमाल लंबे समय से कब्ज के घरेलू उपचार के रूप में किया जाता रहा है. केला में मौजूद पोटेशियम शरीर को संतुलित रखता है. इनका हल्का प्रतिरोधी स्टार्च अच्छे बैक्टीरिया को पोषण देता है जो पाचन क्रिया को शांत रखते हैं. पका केला खाने से बाउल सिंड्रोम में सुधार होता है. छोटी आंत में मौजूद माइक्रोविली को अच्छे से काम करने में मदद मिलती है. केला खाने से पाचन तंत्र बेहतर रहता है और कब्ज-गैस से राहत मिलती है.अमरूदसर्दी के मौसम में अमरूद का उत्पादन खूब होता है. अमरूद में ढेर सारे पोषक तत्व पाए जाते हैं. अमरूद में फाइबर बहुत ज्यादा मात्रा में पाया जाता है, जो कब्ज की परेशानी को दूर करने में मदद करता है. अमरूद खाली पेट खाने से आंतों की सफाई शुरू हो जाती है. यह मल को नरम बनाता है और उसे आसानी से बाहर निकलने में मदद करता है.संतरासंतरा का सेवन सभी को करना चाहिए. संतरा न सिर्फ स्वाद बल्कि सेहत के लिए भी काफी अच्छा होता है. संतरा फाइबर और विटामिन सी का एक बढ़िया स्रोत है. संतरा पेट के लिए काफी अच्छा माना जाता है. इसका सेवन करने से कब्ज और गैस जैसी समस्याओं से छुटकारा मिल जाता है. संतरा को आप फल और जूस किसी भी रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं.सेबसेब हमारी सेहत के लिए बहुती ही फायदेमंद होता है. इसी के कारण डॉक्टर भी इसे रोज खाने की सलाह देते हैं. सेब कब्ज के साथ दस्त से भी राहत दिलाने में मदद कर सकता है. सेब में फाइबर पाया जाता है, जो पेट के गुड बैक्टीरिया को बढ़ावा देने में मददगार है. हर दिन एक-दो सेब खाने से कब्ज और दस्त की समस्या दूर हो जाती है.
- बालों का झड़ना रोकने और नए बालों को उगाने के लिए आप कुछ बहुत ही हेल्दी चीजों को अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। इससे बालों की जड़ों को मजबूती मिलेगी और चोटी भी नेचुरल तरीके से मोटी हो जाएगी। आइए अब जान लेते हैं कि वो कौन-सी चीजें हैं, जिनका आपको सेवन करना है।बालों के झड़ने और नए बाल ना उगने की समस्या कई लोगों को परेशान करती है। इन समस्याओं का वैसे कोई एक खास मौसम नहीं आता है, लेकिन सर्दियों में बाल थोड़े ज्यादा झड़ते हैं। अगर आप इस स्थिति से बचने के लिए तरह-तरह के शैंपू और कंडीशनर का इस्तेमाल कर चुके हैं, तो ये आर्टिकल आपके लिए है। कई बार हमारे बालों को बाहरी देखभाल के साथ अंदरूनी केयर की भी जरूरत होती है। अब अंदरूनी केयर के लिए आपको सप्लीमेंट्स की जरूरत नहीं होती है। आप अपनी डाइट में बदलाव कर सकते हैं। अगर आप कुछ चीजों को डेली डाइट का हिस्सा बनाएंगे, तो बालों का झड़ना कम होगा। इनमें चमक आएगी और नए बाल तेजी से उगेंगे। बता दें कि फूड्स की इस लिस्ट के बारे में जानकारी डॉक्टर सरीन ने अपनी वीडियो में दी है। आइए अब बिना समय बर्बाद किए इन फूड्स के बारे में जान लेते हैं।सोयाबीनआपको बालों को बढ़ाने और इनका झड़ना रोकने के लिए अपनी डेली डाइट में सोयाबीन को जरूर शामिल करना चाहिए। इसमें 52 ग्राम प्रोटीन की मात्रा होती है, जो बालों को जड़ों से मजबूत बनाते हैं। साथ ही, इसमें फाइबर और अन्य पोषक तत्व भी होते हैं। ये सेहत और स्किन दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं।बादामबादाम में 21 ग्राम प्रोटीन होता है। ये बालों के लिए बहुत फायदेमंद है, क्योंकि इसमें विटामिन ई, बायोटिन (B7), मैग्नीशियम और ओमेगा-3 फैटी एसिड की भी अच्छी मात्रा होती है। इनसे बालों को मजबूत बनाने में मदद मिलती है। हेयर फॉल रुकता है और हेयर ग्रोथ बढ़ती है।कद्दू के बीजकद्दू के बीजों में 19 ग्राम प्रोटीन होता है। इसके अलावा, जिंक, आयरन, मैग्नीशियम, ओमेगा-3 फैटी एसिड जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। ये बालों की ग्रोथ को बढ़ावा देने का काम करते हैं। इनसे बालों को मजबूती मिलती है और इनका झड़ना भी धीरे-धीरे कम हो जाता है। ये बालों को घना बनाने में मदद करते हैं।दालदालों में 9 ग्राम प्रोटीन होता है। इसके साथ ही, दालों में आयरन, जिंक और विटामिन जैसे पोषक तत्व भी अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं। इनसे बालों को जड़ से मजबूत बनाने, हेयर ग्रोथ बढ़ाने, हेयर फॉल रोकने और इन्हें चमकदार बनाने में मदद मिलती है।मजबूत बालों के लिए क्या खाएं?हरी मटरहरी मटर में 7 ग्राम प्रोटीन होता है। इसमें बायोटिन, आयरन, जिंक, और विटामिन बी की अच्छी मात्रा होती है। इससे बालों की ग्रोथ बढ़ती है, उन्हें मजबूत मिलती है और बालों का झड़ना कम होता है।
- ---फैटी लिवर, कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, कब्जआंवला बहुत ही गुणकारी खाद्य पदार्थ है। मॉडर्न साइंस से लेकर आयुर्वेद तक इसे शरीर के लिए स्वास्थ्यवर्धक मानता है। इसमें कई सारे न्यूट्रिएंट्स की भरमार होती है, जो आपके पेट, लिवर, दिल, बाल और स्किन को हेल्दी बनाने के लिए जरूरी होते हैं। लेकिन अगर आप किसी तरह की दिक्कत का सामना कर रहे हैं तो उसमें इसे इस्तेमाल करने का तरीका मालूम होना चाहिए।आयुर्वेदिक एक्सपर्ट ने आंवला खाने के कई तरीके बताए हैं। जिसे आप अपनी समस्या के हिसाब से प्रयोग में ला सकते हैं। इसे उपयोग करने से आपको फैटी लिवर, कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, कब्ज, व्हाइट डिस्चार्ज, हेयरफॉल, पुरानी खांसी से राहत मिलने लगेगी।फैटी लिवरआज के समय में फैटी लिवर काफी आम हो गया है, लेकिन इसे नजरअंदाज ना करें। डॉक्टर का कहना है कि अगर फैटी लिवर की समस्या है तो 10ml आंवला जूस को 10ml एलोवेरा जूस के साथ लीजिए। इसमें 20ml पानी भी मिलाना है।कोलेस्ट्रॉलयह हार्ट अटैक के सबसे प्रमुख कारणों में से एक है। इसलिए इसे कम करना जरूरी है। एक्सपर्ट ने बताया कि कोलेस्ट्रॉल की समस्या में 10ml आंवला जूस को 10ml अदरक के जूस और 15ml पानी के साथ लीजिए।आंवला का सेवन कैसे करें?व्हाइट डिस्चार्ज और हेयरफॉलव्हाइट डिस्चार्ज की समस्या से राहत पाने के लिए 5 ग्राम आंवला चूर्ण को 1 चम्मच शहद के साथ मिक्स करके लीजिए। ऊपर से चावल का पानी लीजिए। वहीं हेयरफॉल रोकने के लिए 20ml आंवला जूस को 5 ग्राम मिश्री के साथ या फिर 1 चम्मच आंवला चूर्ण को 1 चम्मच देसी घी और मिश्री के साथ लीजिए।पुरानी खांसी और डायबिटीजअगर पुरानी खांसी है और बार बार बीमार पड़ जाते हो, तो आपको इम्यूनिटी बढ़ानी होगी, इसके लिए आंवला चूर्ण या आंवला जूस को शहद के साथ लीजिए। डायबिटीज के रोगी आंवला जूस में ताजी हल्दी का जूस मिलाकर लें।कब्जफिजिकल एक्टिविटी कम होने और खाने में फाइबर की कमी से कब्ज की समस्या बेहद आम हो गई है। जो कि आगे चलकर गंभीर हो सकती है। इसे ठीक करने के लिए सादा आंवला जूस को सुबह खाली पेट लेना है।
- रोजमर्रा के खाने के साथ अक्सर घरों में धनिया-पुदीना वाली हरी चटनी तो जरूर बनती है। ये चटनी केवल स्वाद बढ़ाने के काम में नहीं आती। ये सेहत के लिए भी गजब की फायदेमंद है। न्यूट्रिशनिस्ट शाह ने बताया कि अगर आपके घर में अगर इन 5 चीजों को मिलाकर हरी चटनी तैयार की जाती है तो इसे जरूर खाएं। इस चटनी को खाने के कई सारे फायदे हैं।किन चीजों को मिलाकर बनाएं हरी चटनी--हरी चटनी बनाने के लिए न्यूट्रिशनिस्ट ने बताया कि पुदीना, लहसुन, अदरक, करी पत्ता और अनारदाना लें। साथ ही इसमे सेंधा नमक, हरी मिर्च, नींबू का रस मिलाएं। इस चटनी को इन चीजों के साथ मिलाकर तैयार करें।रोजाना खाने के फायदे--न्यूट्रिशनिस्ट ने बताया कि रोजाना इस चटनी को आदत की तरह अपने मील में शामिल करें। एक चम्मच ये चटनी अगर मील के साथ खाया जाए तो ये शरीर की सौ से ज्यादा बीमारियों को सॉल्व कर सकती है।हरी चटनी कैसे पहुंचाएगी शरीर को फायदा--------अनारदाना और लहसुन--अनारदाना और लहसुन का कॉम्बिनेशन ब्लड फ्लो को इंप्रूव करता है। आर्टरीज को क्लीन करता है। जिससे ब्लड साफ होता है और साथ ही ब्लड का फ्लो भी बेहतर होता है।अदरक और लहसुन--अदरक और लहसुन का कॉम्बिनेशन खाने को पचाने में मदद करता है और डाइजेशन को इंप्रूव करता है।करी पत्ते के फायदे--वहीं इस चटनी में मिक्स करी पत्ता बॉडी के ऑर्गंस को एक दूसरे से सिंक करने में मदद करता है। जिससे सारे बॉडी ऑर्गंस सुचारु रूप से काम कर सके।हरी चटनी के बता दिए इतने सारे फायदे--जब इन सारी चीजों की सामग्री को मिलाकर चटनी बनाकर खाते हैं तो इससे कई तरह की समस्याएं नहीं होगी और फायदा पहुंचेगा।डाइजेशन इंप्रूव होगा। खाया हुआ खाना आसानी से डाइजेस्ट होगा। जिससे बॉडी को बेहतर नरिश्मेंट मिलेगी।खाना आसानी से डाइजेस्ट होगा तो गैस और ब्लोटिंग नहीं होगी।ब्लड क्लीन होने से स्किन पर एक्ने और पिंपल की समस्या नहीं होगी और ज्यादा फ्रेश ग्लोइंग स्किन नजर आएगी।ब्लड का फ्लो ना केवल अच्छा होगा बल्कि चूंकि आर्टरीज क्लीन होंगी जिसकी वजह से ब्लड की क्वालिटी में भी सुधार होगा।
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प्रकृति ने हमें अनमोल औषधीय पौधों का खजाना दिया है, जिनमें भूमि आँवला (भूम्यामलकी) एक महत्वपूर्ण पौधा है। आयुर्वेद में इसे लीवर टॉनिक और पथरी नाशक माना गया है। इसका उपयोग लीवर रोग, किडनी स्टोन, पाचन विकार और मधुमेह जैसी समस्याओं में किया जाता है।
भूमि आँवला के पौधे की पहचान कैसे करें —भूमि आँवला एक छोटा हरा-भरा पौधा है जो जमीन के पास फैलकर बढ़ता है। इसके पत्ते आँवला के पत्तों जैसे होते हैं और इसकी डंठल के नीचे छोटे-छोटे हरे फल लगते हैं, जो दानों के समान दिखते हैं। यही फल इसके औषधीय गुणों का प्रमुख स्रोत हैं। यह भारत के अधिकांश हिस्सों में, विशेष रूप से बरसात के मौसम में खेतों, बागानों और रास्तों के किनारे स्वाभाविक रूप से उग आता है।✅️ भूमि आँवला के 7 चमत्कारिक औषधीय फायदे —1️⃣ किडनी स्टोन में लाभकारी :-भूमि आँवला का सबसे बड़ा गुण यह है कि यह गुर्दे की पथरी को गलाने और मूत्रमार्ग से बाहर निकालने में मदद करता है। यह पेशाब की रुकावट, जलन और मूत्र संबंधी संक्रमणों को भी दूर करता है।2️⃣ लीवर को बनाए मजबूत :-यह लीवर की कार्यक्षमता को बढ़ाता है और हेपेटाइटिस, फैटी लिवर व जॉन्डिस जैसी बीमारियों में अत्यंत लाभकारी है। यह लीवर को विषैले पदार्थों से मुक्त करके शरीर को डिटॉक्स करता है।3️⃣ पाचन तंत्र को सुधारने में :-भूमि आँवला गैस, अपच, पेट दर्द और कब्ज जैसी समस्याओं में बहुत उपयोगी है। इसका नियमित सेवन पाचन शक्ति को मजबूत करता है और भोजन का सही अवशोषण सुनिश्चित करता है।4️⃣ शरीर की गर्मी और त्वचा की समस्या में राहत दे :-यह शरीर की आंतरिक गर्मी को कम करता है, जिससे त्वचा पर निकलने वाले दाने, खुजली या एलर्जी जैसी समस्याएँ कम होती हैं।5️⃣ ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में :-इस पौधे में एंटी-डायबिटिक तत्व होते हैं जो रक्त शर्करा को नियंत्रित रखते हैं और इंसुलिन के स्तर को संतुलित करते हैं।6️⃣ खून को साफ करने में :-यह रक्त को शुद्ध करने में मदद करता है और शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालकर त्वचा को स्वस्थ बनाए रखता है।7️⃣ संक्रमण से बचाव :-भूमि आँवला में एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-वायरल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो शरीर को इंफेक्शन से बचाते हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं।✅️ भूमि आँवला का काढ़ा बनाने का तरीका जाने —■ ताज़े पौधे से :-5–6 टहनियाँ (पत्ते और फल सहित) लें। उन्हें साफ पानी से धो लें, फिर 1 कप पानी उबालें और उसमें टहनियाँ डालें। लगभग 5–7 मिनट धीमी आँच पर पकाएँ। इसे छानकर गुनगुना पीएँ। स्वाद के लिए थोड़ा शहद या नींबू मिला सकते हैं।■ सूखे पत्तों या पाउडर से :-1 कप पानी में 1 चम्मच सूखा भूमि आँवला पाउडर डालें, 5 मिनट तक उबालें। इसे सुबह खाली पेट पीना सबसे ज्यादा लाभदायक होता है।✅️ भूमि आँवला के पत्तियों और फलों का उपयोग —1) रोज सुबह 4–5 ताज़ी पत्तियाँ चबाना लीवर और पाचन के लिए बहुत लाभदायक है।2) छोटे हरे फलों का रस या पेस्ट बनाकर पीने से पेशाब की जलन, पथरी और मूत्र संक्रमण में राहत मिलती है।3) एक चम्मच सूखा पाउडर गुनगुने पानी के साथ रोज लेना शरीर को डिटॉक्स करता है और लीवर को मजबूत बनाता है।⚠️ सावधानियाँ —■ लगातार 15–20 दिन सेवन के बाद 5–7 दिन का ब्रेक लेना चाहिए।■ अधिक मात्रा में सेवन करने से शरीर में ठंडक अधिक बढ़ सकती है।■ गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएँ इसका सेवन डॉक्टर की सलाह से ही करें।भूमि आँवला का नियमित सेवन शरीर को स्वस्थ रखने के साथ-साथ लीवर, किडनी और पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। यह सचमुच प्रकृति की एक अनमोल देन है, जो बिना किसी साइड इफेक्ट के अनेक गंभीर बीमारियों से बचाव करने में सहायक है। - सर्दियों में हड्डियों में अकड़न के साथ दर्द व सूजन की समस्या बढ़ जाती है। इसके अलावा सर्दियों में जोड़ों के दर्द से भी लोग खूब परेशान रहते हैं। ऐसे में पुराने लोग इन तमाम समस्याओं से बचने के लिए रोजाना लहसुन की 1 कली खाने का सुझाव देते थे। कुछ लोग तो पूरी सर्दी लहसुन खाते हैं ये मानते हुए कि ये इम्यूनिटी बूस्टर है। इसके अलावा लहसुन में मिलने वाले कई कंपाउंड्स और एंटीऑक्सीडेंट्स सेहत से जुड़ी कई समस्याओं से बचाव में मदद कर सकते हैं। जानते हैं कि 7 दिन तक खाली पेट लहसुन खाने से क्या होता है?7 दिन तक खाली पेट लहसुन खाना कितना सही?अगर आप लहसुन उन लोगों के लिए बेहद फायदेमंद है जो कि सम तासीर वाले हैं। जिन लोगों का शरीर ठंडा रहता है जिन्हें सर्दी-जुकाम की समस्या रहती है उनके लिए लहसुन का सेवन फायदेमंद है। ध्यान देने वाली बात ये है कि लहसुन एसिडिक है और पित्त शरीर वाले लोगों के लिए इसे हर दिन खाना नुकसानदेह हो सकता है, सिर्फ सम तासीर हो वहीं इसे खाएं। इसके अलावा शरीर के वायु पर असर आएगा और पाचक पित्त एसिडिक हो जाएगी। आम भाषा में इसे ऐसे समझे कि अगर आप एसिडिक पीएच वाले व्यक्ति हैं तो खाली पेट लहसुन का सेवनइरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) का कारण बन सकता है। इससे पाचन तंत्र से जुड़ी समस्याएं परेशान कर सकती हैं। खाली पेट लहसुन का सेवन बॉवेल मूवमेंट को प्रभावित करने के साथ पाचन क्रिया को प्रभावित करता है। इससे पेट में दर्द के साथ कई सारी समस्याएं हो सकती हैं इसलिए सिर्फ सम प्रकृति वाले लोग ही खाली पेट लहसुन का सेवन करें।7 दिन तक खाली पेट लहसुन खाने से क्या होता है-खाली पेट लहसुन का सेवन सेहत के लिए कई प्रकार से फायदेमंद है। पहले तो ये रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और पाचन और हृदय स्वास्थ्य में सुधार करता है क्योंकि इसमें एलिसिन जैसे शक्तिशाली यौगिक होते हैं। दरअसल, कच्चे लहसुन में मौजूद एलिसिन में शक्तिशाली एंटीबैक्टीरियल और एंटीसेप्टिक गुण होते हैं, जो संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं। इसके अलावा लहसुन खाना शरीर को डिटॉक्स करने में मददगार है। लहसुन में सल्फर यौगिक होते हैं जो लिवर को शरीर से विषाक्त पदार्थों को साफ करने में मदद करते हैं। ये पाचक एंजाइमों को उत्तेजित करता है और स्वस्थ आंत बैक्टीरिया यानी प्रीबायोटिक प्रभाव को बढ़ावा देता है। इस प्रकार से ये गट हेल्थ के लिए फायदेमंद है।बीपी और हाई कोलेस्ट्रॉल कम करने में मददगाररोज सुबह खाली पेट लहसुन खाना दिल को हेल्दी रखने में मददगार है। ये ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद कर सकता है। यह भोजन के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया को प्रभावित कर सकता है और ग्लूकोज के स्तर को स्थिर कर सकता है। येबैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने के साथ गुड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ावा देने में मददगार है। अधिक मात्रा में सेवन करने या संवेदनशील व्यक्तियों में इससे सीने में जलन, मतली, दस्त या पेट में खुजली जैसे दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं, इसलिए संयम बरतना और अपने शरीर की जरूरतों को समझना जरूरी है।जोड़ों के दर्द के लिए लहसुन का उपयोग कैसे करें?जोड़ों में दर्द के लिए आप लहसुन का उपयोग दो प्रकार से कर सकते हैं। पहले तो आप रोज सुबह खाली पेट 1 लहसुन की कली खा सकते हैं और दूसरा आप लहसुन को सरसों के तेल में पकाकर इससे हड्डियों की मालिश कर सकते हैं।पुरुषों को लहसुन खाने से क्या फायदा होता है?पुरुषों को लहसुन खाने से कई प्रकार के फायदे हो सकते हैं। पहते तो ये टेस्टोस्टेरोन हार्मोन बढ़ाता है जिससे पुरुषों की स्टेमिना बढ़ती है और पुरुष की फर्टिलिटी भी बढ़ती है।बालों के लिए लहसुन का तेल कैसे बनाएं?बालों के लिए लहसुन का तेल आप कई प्रकार से तैयार कर सकते हैं लेकिन सर्दियों में सरसों तेल में पकाकर लहसुन का तेल बनाएं और इसे अपने बालों में लगाएं। ये बालों की ग्रोथ बढ़ाने के झड़ते बालों की समस्या को रोकने में मददगार है।

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