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- मुंबई। महाराष्ट्र की संस्कृति के प्रतीक गणेश महोत्सव के दौरान मुंबई का मशहूर 'लालबागचा राजा सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल' आस्था और टिकाऊपन का अनोखा मेल प्रस्तुत करेगा क्योंकि उसके द्वारा संचालित प्रसाद काउंटरों से निकलने वाले गीले कचरे से शहर भर के सरकारी अस्पतालों को बिजली मिलेगी। अधिकारियों ने बताया कि बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की 'प्रसाद से ऊर्जा' पहल के तहत, लगभग 80 मीट्रिक टन खाने का कचरा चार नगर निकाय अस्पतालों में बने बायोमेथेनेशन संयंत्र में भेजा जाएगा ताकि 7,700 यूनिट से अधिक स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन किया जा सके। नगर निकाय ने यह पहल 'लालबागचा राजा मंडल' के साथ मिलकर शुरू की है। यह शहर के सबसे लोकप्रिय गणपति पंडालों में से एक है, जहां 11 दिन के त्योहार के दौरान मशहूर हस्तियों समेत बड़ी संख्या में भक्त आते हैं। शुक्रवार को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, बीएमसी का अनुमान है कि 14 सितंबर से शुरू होने वाले 11 दिन के गणेश उत्सव के दौरान मंडल में रोज़ाना लगभग आठ से 10 मीट्रिक टन जैविक कचरा निकलेगा। अलग-अलग किए गए कचरे को उसके स्रोत से इकट्ठा किया जाएगा और विशेष वाहनों से नायर, कस्तूरबा, जीटीबी तथा सायन अस्पतालों में बने बायोमेथेनेशन संयंत्र तक ले जाया जाएगा। इन संयंत्रों में हर दिन लगभग दो मीट्रिक टन कचरा निपटाने की क्षमता है। हालांकि, वास्तविक बिजली उत्पादन इस बात पर निर्भर करेगा कि अलग-अलग किया गया कितना और कैसा कचरा मिलता है तथा संयंत्र किस हालत में काम कर रहे हैं।
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कोलकाता. प्रवासी साहित्य की भारतीय मूल की लेखिका केतकी कुशारी डायसन का इंग्लैंड स्थित उनके घर पर निधन हो गया है। परिवार के एक करीबी दोस्त ने यह जानकारी दी। डायसन ने अंग्रेजी अनुवाद और शोध के जरिए रवींद्रनाथ टैगोर की रचनाओं को बड़े पैमाने पर पाठकों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी। वह 86 वर्ष की थीं। परिवार की करीबी दोस्त और यहां रवींद्र भारती विश्वविद्यालय में शोधकर्ता सुमना दास सुर ने बताया कि लंबे समय से उम्र से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहीं केतकी ने 11 सितंबर को ऑक्सफोर्ड के बाहरी इलाके में स्थित अपने घर पर आखिरी सांस ली। उनके परिवार में उनके पति रॉबर्ट डायसन और बेटे वर्जिल पुजारी डायसन और इगोर नीलाद्री डायसन हैं।
अविभाजित बंगाल के कुश्तिया (जो अब आधुनिक बांग्लादेश का हिस्सा है) में 26 जून 1940 को जन्मीं केतकी कुशारी डायसन ने 1958 में प्रेसिडेंसी कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य में रिकॉर्ड अंकों के साथ ग्रेजुएशन किया। उन्होंने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से अपनी पढ़ाई पूरी की और 1975 में पीएचडी की डिग्री हासिल की। उनके गहन अध्ययन में नोबेल पुरस्कार विजेता टैगोर, और खासकर उनके चित्रों पर व्यापक शोध शामिल है। उन्होंने टैगोर की रचनाओं का अंग्रेजी में अनुवाद करने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान उनकी मुलाकात अपने भावी पति रॉबर्ट डायसन से हुई, जो यॉर्कशायर के रहने वाले भौतिकी के छात्र थे। बाद में वह ब्रिटिश नागरिक बन गईं, लेकिन जीवन भर बंगाली भाषा और साहित्य से उनका गहरा जुड़ाव बना रहा। उनकी रचनाओं में कई कविताएं, नाटक और उपन्यास शामिल हैं, जिनमें "बालकाल", "नारी, नगरी" और "जल फुनरे आगुन" प्रमुख हैं। उनकी सबसे महत्वपूर्ण विद्वतापूर्ण कृतियों में "रवींद्रनाथ ओ विक्टोरिया ओकांपो-र संधाने" शामिल थी, जिसमें टैगोर के अर्जेंटीना की लेखिका विक्टोरिया ओकांपो के साथ संबंधों का अध्ययन किया गया था। उन्हें 1986 में प्रतिष्ठित आनंद पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा, अपने जीवनकाल में उन्हें कई अन्य पुरस्कार भी मिले। -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को ब्रिक्स नेताओं का स्वागत किया। इस दौरान पृष्ठभूमि में तमिलनाडु का मशहूर रामनाथस्वामी मंदिर दिख रहा था, जो चार धाम तीर्थस्थलों में से एक है। माना जाता है कि रावण पर जीत के बाद भगवान राम ने यहीं पूजा की थी। भारत मंडपम में यहां 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स देशों के नेताओं का स्वागत किया, जिनमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान शामिल थे। नेताओं ने हाथ मिलाया और तमिलनाडु के रामेश्वरम में मशहूर रामनाथस्वामी मंदिर की पृष्ठभूमि में तस्वीरें खिंचवाईं। चीन के राष्ट्रपति चिनफिंग का स्वागत करते हुए मोदी ने उन्हें मंदिर का महत्व भी बताया।
भारत 12 से 13 सितंबर तक ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। इसमें 11 सदस्य देशों और 10 सहयोगी देशों के नेताओं के अलावा कुछ अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल हो रहे हैं। चार धाम तीर्थस्थलों में से रामनाथस्वामी मंदिर ही एकमात्र ऐसा मंदिर है जो भगवान शिव को समर्पित है, जबकि बाकी तीन उत्तर में स्थित हैं (द्वारका, पुरी और बद्रीनाथ)। भारत में मौजूद 12 ज्योतिर्लिंगों में से 11 उत्तर में हैं और सिर्फ रामनाथस्वामी दक्षिण में है। रामेश्वरम न सिर्फ शैव भक्तों के लिए, बल्कि वैष्णव भक्तों के लिए भी एक बहुत बड़ा तीर्थ स्थल है।
हिंदुओं के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक दायित्वों में से एक मानी जाने वाली काशी-रामेश्वरम यात्रा काशी से शुरू होती है और रामेश्वरम में भगवान रामनाथस्वामी की पूजा के साथ समाप्त होती है। तमिलनाडु सरकार की एक वेबसाइट के अनुसार, यह ऐतिहासिक तीर्थस्थल 10वीं शताब्दी ईस्वी तक एक साधु की देखरेख में था। सीलोन के राजा पराक्रमबाहु ने 12वीं सदी ईस्वी में मंदिर के गर्भगृह का निर्माण कराया।
रामनाथपुरम के राजा उदयन् सेतुपति और नागूर के एक वैश्य ने 15वीं सदी ईस्वी में पश्चिमी स्तंभ और परिसर की दीवारों का निर्माण कराया। इसके बाद, मदुरै के एक अमीर व्यक्ति ने अम्मन सन्निधि गलियारा बनवाया और मरम्मत के अन्य काम करवाए। इसके बाद, 1897 और 1904 के बीच, नट्टुकोट्टई के नागरथार परिवार के देवकोट्टई जमींदार के परिवार ने 126 फुट ऊंचे और नौ मंजिलों वाले पूर्वी राजगोपुरम का निर्माण पूरा किया। पुराणों के अनुसार, भगवान राम सीता और लक्ष्मण के साथ यहां आए थे और उन्होंने रावण (जो एक ब्राह्मण था) के वध के पाप से मुक्ति पाने के लिए शिवलिंग की स्थापना और पूजा की थी। जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है, रामेश्वरम भगवान रामेश्वर का पवित्र स्थान है, यानी भगवान राम द्वारा प्रतिष्ठित ईश्वर। -
नयी दिल्ली/ ब्रिक्स नेताओं ने उभरते बाजारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक में अधिक प्रतिनिधित्व देने के लिए वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में व्यापक सुधार का आह्वान किया है। समूह ने एकतरफा शुल्क, व्यापार प्रतिबंधों और आर्थिक प्रतिबंधों की भी कड़ी आलोचना की।
नयी दिल्ली घोषणापत्र में ब्रिक्स ने कहा कि बढ़ता संरक्षणवाद और एकतरफा व्यापार उपाय वैश्विक व्यापार तथा आपूर्ति शृंखलाओं के लिए खतरा हैं। समूह ने कहा, ''हम एकतरफा शुल्क और गैर-शुल्क उपायों में वृद्धि को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करते हैं, जो व्यापार को विकृत करते हैं और विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के नियमों के अनुरूप नहीं हैं।'' ब्रिक्स समूह ने चेतावनी दी कि व्यापार प्रतिबंधात्मक उपायों से वैश्विक व्यापार में और कमी आ सकती है, आपूर्ति शृंखलाएं बाधित हो सकती हैं तथा अंतरराष्ट्रीय आर्थिक एवं व्यापार गतिविधियों में अनिश्चितता बढ़ सकती है। समूह ने डब्ल्यूटीओ पर केंद्रित नियम-आधारित बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था के प्रति समर्थन दोहराते हुए उसके विवाद निपटान तंत्र को तत्काल बहाल करने की मांग की। घोषणा में कहा गया, ''हम सभी डब्ल्यूटीओ सदस्यों के लिए भरोसे और पूर्वानुमेयता के आधार के रूप में सुलभ, प्रभावी और पूरी तरह काम करने वाले दो-स्तरीय बाध्यकारी विवाद निपटान तंत्र की तत्काल बहाली की पुरजोर वकालत करते हैं।'' ब्रिक्स ने डब्ल्यूटीओ की अपीलीय संस्था के नए सदस्यों की नियुक्ति भी बिना और देरी के करने का आह्वान किया।
समूह ने डब्ल्यूटीओ में शामिल होने के लिए इथियोपिया और ईरान की कोशिशों का समर्थन किया तथा चीन द्वारा 53 अफ्रीकी देशों के लिए शून्य-शुल्क व्यवस्था के विस्तार का उल्लेख किया। समूह ने एकतरफा आर्थिक और द्वितीयक प्रतिबंधों की भी आलोचना की। घोषणा में कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय कानून के विपरीत एकतरफा जबरन उपायों को लागू किए जाने की निंदा की जाती है। समूह के अनुसार, ऐसे उपाय लक्षित देशों की आम आबादी के मानवाधिकारों, विकास, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा पर दूरगामी नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। ब्रिक्स ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से अधिकृत नहीं किए गए प्रतिबंधों सहित ऐसे एकतरफा जबरन उपायों को समाप्त किया जाना चाहिए, क्योंकि वे अंतरराष्ट्रीय कानून तथा 'संयुक्त राष्ट्र चार्टर' के सिद्धांतों और उद्देश्यों को कमजोर करते हैं। घोषणा में 'ब्रेटन वुड्स संस्थानों (बीडब्ल्यूआई)', मुख्य रूप से आईएमएफ और विश्व बैंक, की शासन व्यवस्था में भी सुधार की मांग की गई। ब्रिक्स ने कहा कि इन संस्थानों की शासन व्यवस्था में वैश्विक अर्थव्यवस्था में आए बदलावों को प्रतिबिंबित किया जाना चाहिए और उभरते बाजारों तथा विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की आवाज और प्रतिनिधित्व वैश्विक अर्थव्यवस्था में उनकी स्थिति के अनुरूप होना चाहिए। ब्रिक्स ने आईएमएफ और विश्व बैंक के नेतृत्व के चयन की प्रक्रिया में भी बदलाव का आह्वान किया।
समूह ने योग्यता आधारित, समावेशी और पारदर्शी चयन प्रक्रिया की मांग की, जिससे इन संस्थानों के नेतृत्व में क्षेत्रीय विविधता तथा उभरते बाजारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ सके। समूह ने आईएमएफ को वैश्विक वित्तीय सुरक्षा तंत्र के केंद्र में मजबूत और पर्याप्त रूप से वित्तपोषित संस्था बनाए रखने के लिए 'ब्रिक्स रियो डी जेनेरियो विजन फॉर आईएमएफ कोटा एंड गवर्नेंस रिफॉर्म' के प्रति समर्थन दोहराया। ब्रिक्स ने आईएमएफ के कोटा की 16वीं सामान्य समीक्षा के तहत तय बढ़ोतरी को बिना और देरी के लागू करने तथा 17वीं सामान्य समीक्षा के तहत कोटा में सार्थक बदलाव के उपाय जल्द विकसित करने का आह्वान किया। घोषणा में कहा गया कि कोटा में बदलाव से उभरते बाजारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की कोटा तथा मतदान हिस्सेदारी बढ़नी चाहिए, लेकिन इसका बोझ गरीब विकासशील देशों पर नहीं पड़ना चाहिए। समूह ने यह भी कहा कि आईएमएफ में स्वैच्छिक वित्तीय योगदान से किसी देश के कोटा, शासन व्यवस्था में प्रतिनिधित्व और मतदान अधिकार प्रभावित नहीं होने चाहिए। विश्व बैंक के संबंध में ब्रिक्स ने कहा कि 2025 की शेयरधारिता समीक्षा से संस्था को मजबूत करने और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के कम प्रतिनिधित्व को दूर करने में मदद मिलनी चाहिए। -
नयी दिल्ली. भारत ने शनिवार को तब एक बड़ी कूटनीतिक सफलता हासिल की, जब ब्रिक्स द्वारा अंगीकार किये गए 'नयी दिल्ली घोषणापत्र' में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में अप्रैल 2025 में हुए आतंकी हमले की निंदा की गई और देश-समर्थित सीमा-पार आतंकवाद के प्रति कतई बर्दाश्त नहीं की नीति अपनाने का आह्वान किया। 'लचीलेपन, नवोन्मेष, सहयोग और स्थिरता का निर्माण' शीर्षक वाले इस व्यापक घोषणा-पत्र में वैश्विक आतंकवाद, अवैध वित्तीय लेन-देन, साइबर धोखाधड़ी और उभरते हुए सीमा-पार धोखाधड़ी नेटवर्क के खिलाफ इस समूह का एकजुट रुख सामने आया। घोषणापत्र में सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर बात करते हुए, सदस्य देशों ने पहलगाम में 22 अप्रैल, 2025 को हुए आतंकी हमले की निंदा की, जिसमें 26 लोगों की जान चली गई थी और कई लोग घायल हो गए थे।
घोषणापत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि आतंकवाद की सभी गतिविधियां आपराधिक और अनुचित हैं, चाहे उनका उद्देश्य कुछ भी हो, और उन्हें कभी भी, कहीं भी या किसी के भी द्वारा अंजाम दिया गया हो। ब्रिक्स नेताओं ने आतंकवाद के सभी रूपों और तरीकों से निपटने के अपने संकल्प को दोहराते हुए, आतंकवादियों की सीमा-पार आवाजाही रोकने, आतंकी वित्तपोषण तंत्र को ध्वस्त करने और उनके सुरक्षित ठिकानों को खत्म करने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया। सदस्य देशों ने दोहराया कि आतंकवाद को किसी भी धर्म, राष्ट्रीयता, सभ्यता या जातीय समूह से नहीं जोड़ा जाना चाहिए, और साथ ही यह भी कहा कि आतंकी गतिविधियों में संलिप्त लोगों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। -
नयी दिल्ली. भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक कामयाबी के तौर पर, ब्रिक्स समूह ने शनिवार को आम सहमति से एक साझा घोषणापत्र को अपनाया। यह सहमति पश्चिम एशिया संघर्ष को लेकर यूएई और ईरान के बीच गहरे मतभेदों को दूर करने के बाद बनी। घोषणापत्र में ईरान पर हमलों को लेकर अमेरिका का प्रत्यक्ष उल्लेख नहीं किया गया। ब्रिक्स नेताओं ने संघर्ष को ''संवाद और कूटनीति'' के जरिए समाप्त करने के भारत के रुख का समर्थन किया और ''लागू'' अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप वैश्विक व्यापार, आपूर्ति शृंखलाओं और ऊर्जा के सुचारू प्रवाह को बनाए रखने के लिए मिलकर काम करने की आवश्यकता पर जोर दिया। दो दिवसीय शिखर सम्मेलन के पहले दिन अंगीकार किए गए ब्रिक्स घोषणापत्र को भारतीय कूटनीति की बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है। घोषणापत्र के मसौदे को लेकर बातचीत आखिरी समय तक जारी रही, क्योंकि शुरुआत में ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) दोनों ने अपना रुख कड़ा कर लिया था। ब्रिक्स आम सहमति के आधार पर काम करने वाला समूह है, जिसका मतलब है कि कोई भी एक सदस्य अंतिम संयुक्त घोषणापत्र को रोक सकता है। चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, अबू धाबी के युवराज शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और समूह के अन्य शीर्ष नेताओं की मौजूदगी में पहले दिन की बैठक समाप्त होने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने घोषणापत्र को अपनाए जाने की घोषणा की। घोषणापत्र में कहा गया, ''हम पश्चिम एशिया में तनाव के लगातार बढ़ने पर गहरी चिंता व्यक्त करते हैं और अपने-अपने राष्ट्रीय रुख को ध्यान में रखते हुए अधिकतम संयम बरतने तथा ऐसी कार्रवाइयों से बचने का आह्वान करते हैं, जो हालात को और खराब कर सकती हैं।'' इसमें कहा गया, ''इसके अलावा, हम संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों के पूरी तरह पालन करने के साथ देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने एवं आम नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह करते हैं।'' घोषणापत्र में कहा गया, ''हम संवाद और कूटनीति के माध्यम से ऐसे दीर्घकालिक समझौते की दिशा में प्रयास बढ़ाने को प्रोत्साहित करते हैं, जो क्षेत्र में स्थायी शांति, सुरक्षा और स्थिरता में योगदान देगा।'' ब्रिक्स ने लागू अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप वैश्विक व्यापार, आपूर्ति शृंखलाओं और ऊर्जा के सुचारू प्रवाह को बनाए रखने के लिए मिलकर काम करने की आवश्यकता पर जोर दिया। समूह ने पिछले साल अक्टूबर में हुए युद्ध विराम समझौते के बावजूद गाजा में जारी हिंसा पर भी ''गहरी चिंता'' व्यक्त की। घोषणापत्र में कहा गया, ''हम गाजापट्टी से फलस्तीनियों के जबरन विस्थापन की किसी भी नीति को रोकने का आह्वान करते हैं और ऐसी व्यवस्थाओं पर चिंता व्यक्त करते हैं, जो फलस्तीनी लोगों के बुनियादी अधिकारों को प्रभावित कर सकती हैं तथा कब्जे को वैध ठहरा सकती हैं या उसे लंबे समय तक जारी रख सकती हैं।'' घोषणापत्र में कहा गया, ''हम दोहराते हैं कि इजराइल-फलस्तीन संघर्ष का न्यायसंगत और स्थायी समाधान केवल शांतिपूर्ण तरीकों से ही हासिल किया जा सकता है और यह फलस्तीनी लोगों के वैध अधिकारों की पूर्ति पर निर्भर करता है, जिसमें आत्मनिर्णय और वापसी का अधिकार भी शामिल है।'' ब्रिक्स ने आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने और इस खतरे से निपटने में दोहरे मापदंड नहीं अपनाने की भारत की अपील का पूरा समर्थन किया। समूह के शीर्ष नेताओं ने इस चुनौती से निपटने के लिए मिलकर एक साझा दृष्टिकोण अपनाने पर सहमति जताई। ब्रिक्स ने पिछले साल जम्मू-कश्मीर में हुए पहलगाम आतंकी हमले की ''कड़े से कड़े शब्दों'' में निंदा की, जिसमें 26 लोग मारे गए थे। घोषणापत्र में कहा गया, ''हम सभी तरह के आतंकवाद से निपटने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हैं, जिसमें आतंकवादियों की सीमा पार आवाजाही, आतंकवाद के वित्तपोषण और पनाहगाहों का मुकाबला करना भी शामिल है।'' घोषणापत्र में कहा गया, ''हम दोहराते हैं कि आतंकवाद को किसी भी धर्म, राष्ट्रीयता, सभ्यता या जातीय समूह से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। आतंकवादी गतिविधियों में शामिल सभी लोगों और उन्हें समर्थन देने वालों को संबंधित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुसार जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और न्याय के कठघरे में लाया जाना चाहिए।'' इसमें कहा गया, ''हम आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने और आतंकवाद से निपटने में दोहरे मापदंड को खारिज करने का आग्रह करते हैं।'' ब्रिक्स ने जोर दिया कि आतंकवाद से मुकाबला करने की प्राथमिक जिम्मेदारी देशों की है और आतंकवादी खतरों को रोकने तथा उनसे निपटने के लिए वैश्विक प्रयासों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर सहित अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपने दायित्वों का पूरी तरह पालन करना चाहिए। घोषणापत्र में कहा गया, ''हम 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं, जिसमें 26 लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हुए थे।'' समूह ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के नियमों के अनुरूप नहीं होने वाली ''व्यापार प्रतिबंधात्मक कार्रवाइयों'' के बढ़ते चलन की भी आलोचना की। इसमें शुल्कों और गैर-शुल्क उपायों में मनमानी बढ़ोतरी तथा पर्यावरणीय उद्देश्यों की आड़ में संरक्षणवादी नीतियां शामिल हैं। घोषणापत्र में कहा गया, ''हम एकतरफा शुल्क और गैर-शुल्क उपायों के बढ़ते चलन पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हैं, जो व्यापार को प्रभावित करते हैं और डब्ल्यूटीओ के नियमों के अनुरूप नहीं हैं।''
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नयी दिल्ली. चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए शनिवार को नयी दिल्ली की दो दिवसीय यात्रा शुरू की। यह पिछले सात वर्ष में उनकी पहली भारत यात्रा है और इसे व्यापार एवं निवेश संबंधों के विस्तार के जरिये द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने के एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शनिवार शाम शी के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।
ऐसा बताया जा रहा है कि दोनों पक्ष द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक समीक्षा करेंगे और आपसी संपर्क बढ़ाने के लिए नए कदम उठाने पर ध्यान केंद्रित करेंगे। शी की इस यात्रा से पहले दोनों देशों के बीच हाल में कई उच्चस्तरीय वार्ताएं हुई हैं। इनमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच बीजिंग में हुई विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ता भी शामिल है। हालांकि, अरुणाचल प्रदेश सेक्टर में चीन के आक्रामक सैन्य रुख को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने दिल्ली हवाई अड्डे पर शी की अगवानी की। इस दौरान सांस्कृतिक कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत कर चीन के राष्ट्रपति का स्वागत किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शी का स्वागत करते हुए सोशल मीडिया पर कहा, ''सहयोग को आगे बढ़ाने और अधिक संतुलित, प्रतिनिधित्वपूर्ण एवं बहुध्रुवीय विश्व के निर्माण में योगदान देने की दिशा में ब्रिक्स लगातार आगे बढ़ रहा है तथा ऐसे में हमें रचनात्मक चर्चा होने की उम्मीद है'' शी के प्रतिनिधिमंडल में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) की केंद्रीय समिति के पोलित ब्यूरो की स्थायी समिति के सदस्य काई ची और सीपीसी केंद्रीय समिति के पोलित ब्यूरो के सदस्य एवं विदेश मंत्री वांग यी भी शामिल हैं। शी की यात्रा संबंधी जानकारियां रखने वाले अधिकारियों ने बताया कि यह यात्रा पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध के कारण तनावपूर्ण हुए भारत-चीन संबंधों को और सामान्य बनाने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। दोनों देशों ने पूर्वी लद्दाख में साढ़े चार साल से अधिक समय तक रहे सैन्य गतिरोध के कारण बिगड़े संबंधों को सुधारने के लिए पिछले कुछ महीनों में विश्वास बहाली के कई कदम उठाए हैं। अधिकारियों ने बताया कि मोदी और शी के बीच वार्ता में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर समग्र स्थिति की समीक्षा किए जाने तथा व्यापार एवं निवेश संबंधों के विस्तार समेत द्विपक्षीय संबंधों को और सामान्य बनाने के उपाय तलाशे जाने की उम्मीद है। दोनों नेताओं के बीच बैठक शाम छह बजे निर्धारित है।
मोदी और शी ने पिछले साल 31 अगस्त को चीन के तियानजिन शहर में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन से इतर व्यापक मुद्दों पर वार्ता की थी। डोभाल ने पिछले महीने के अंत में चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ विशेष प्रतिनिधि (एसआर) स्तर की वार्ता की थी। इसमें सीमा निर्धारण, सीमा पार सहयोग से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने और एलएसी पर शांति बनाए रखने पर मुख्य रूप से चर्चा हुई थी। डोभाल और वांग दोनों सीमा वार्ता तंत्र के लिए नामित विशेष प्रतिनिधि हैं। भारत और चीन के बीच 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा से जुड़े विवाद का व्यापक समाधान तलाशने के लिए यह तंत्र 2003 में स्थापित किया गया था। भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने शुक्रवार को कहा, ''चीन दोनों नेताओं के रणनीतिक मार्गदर्शन के अनुरूप भारत के साथ मिलकर काम करेगा, द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक एवं दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखेगा, संवाद बढ़ाएगा, सहयोग मजबूत करेगा, मतभेदों का उचित ढंग से समाधान करेगा तथा अच्छे पड़ोसियों की तरह मित्र और एक-दूसरे की सफलता में सहयोग करने वाला साझेदार बनेगा।'' -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मलेशिया, वियतनाम, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और इथियोपिया के नेताओं के साथ शनिवार को द्विपक्षीय बैठकें कीं जिनमें महत्वपूर्ण खनिजों, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्रों समेत विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। ये बैठकें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर हुईं।
प्रधानमंत्री मोदी ने अबू धाबी के युवराज शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ वार्ता में पश्चिम एशिया की समग्र स्थिति और भारत-यूएई रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के कदमों पर चर्चा की। मोदी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ''रक्षा, कृत्रिम मेधा (एआई), अंतरिक्ष, महत्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा और संपर्क के क्षेत्रों में हमारी रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।'' उन्होंने कहा, ''पश्चिम एशिया में अनिश्चितता के इस दौर में मजबूत भारत-यूएई संबंध स्थिरता, समृद्धि और शांति का प्रतीक है।'' मोदी और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर बिन इब्राहिम ने अपनी बैठक में व्यापार एवं निवेश, रक्षा, सेमीकंडक्टर, बुनियादी ढांचा, डिजिटल अर्थव्यवस्था, ऊर्जा और वित्तीय प्रौद्योगिकी (फिनटेक) समेत विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग में हुई प्रगति की समीक्षा की। इब्राहिम ने मोदी को मलेशिया के सबाह प्रांत के कोटा किनाबालू में भारत का महावाणिज्य दूतावास स्थापित करने पर अपने देश की सहमति से अवगत कराया। विदेश मंत्रालय ने कहा, ''प्रधानमंत्री मोदी ने दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्रों के संगठन (आसियान)-भारत संबंधों को मजबूत करने में मलेशिया के निरंतर सहयोग की सराहना की। दोनों नेताओं ने साझा हित से जुड़े प्रमुख क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।'' मंत्रालय ने कहा कि दोनों नेताओं ने भारत-मलेशिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। मोदी और वियतनाम के प्रधानमंत्री ले मिन्ह हंग के बीच बैठक में द्विपक्षीय व्यापार और निवेश संबंधों पर मुख्य रूप से चर्चा हुई। विदेश मंत्रालय ने कहा, ''इस बैठक से दोनों नेताओं को उन द्विपक्षीय संबंधों में हुई प्रगति की समीक्षा करने का अवसर मिला जिन्हें 'उन्नत व्यापक रणनीतिक साझेदारी' का दर्जा दिया गया है।'' मंत्रालय ने कहा कि दोनों नेताओं ने साझा महत्व के विभिन्न क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया तथा अपनी साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। विदेश मंत्रालय ने कहा, ''भारत और वियतनाम के बीच साझा सभ्यतागत विरासत, आपसी विश्वास और समझ पर आधारित पुरानी मित्रता है। वियतनाम भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति का एक प्रमुख स्तंभ और दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ भारत के व्यापक जुड़ाव में महत्वपूर्ण साझेदार है।'' इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली के साथ मोदी की वार्ता भी रक्षा और व्यापार समेत विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को और विस्तार देने संबंधी कदमों पर केंद्रित रही। विदेश मंत्रालय ने कहा, ''दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के उद्देश्य से चर्चा की। उन्होंने आर्थिक सहयोग, रक्षा साझेदारी और क्षमता निर्माण समेत प्रमुख क्षेत्रों में हुई प्रगति की समीक्षा की।'' यह बैठक पिछले वर्ष दिसंबर में मोदी की अदीस अबाबा यात्रा के दौरान द्विपक्षीय संबंधों में हुई प्रगति को आगे बढ़ाने की दिशा में हुई। मंत्रालय ने कहा, ''दोनों नेताओं ने साझा हित के क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। उन्होंने बहुपक्षीय मंचों पर निकट सहयोग की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।'' -
नई दिल्ली। भारत की अध्यक्षता में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस शुक्रवार को नई दिल्ली पहुंचे। हवाई अड्डे पर केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने उनका स्वागत किया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि गुटेरेस की यात्रा बहुपक्षवाद, संवाद और वैश्विक सहयोग के प्रति ब्रिक्स देशों की साझा प्रतिबद्धता को मजबूत करती है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर गुटेरेस के भारत पहुंचने की जानकारी साझा की। संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक के अनुसार, यात्रा के दौरान गुटेरेस की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात होने की उम्मीद है। यह 2026 में गुटेरेस की भारत की दूसरी यात्रा है। इससे पहले वह फरवरी में नई दिल्ली में आयोजित इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट में शामिल हुए थे। संयुक्त राष्ट्र महासचिव के रूप में यह भारत का उनका पांचवां दौरा है।
गुटेरेस का मौजूदा कार्यकाल अब अंतिम चार महीनों में है। ऐसे में ब्रिक्स सम्मेलन उनके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ महासचिव के रूप में मुलाकात के अंतिम अवसरों में से एक हो सकता है। पुतिन और शी इस महीने के अंत में होने वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा की वार्षिक उच्चस्तरीय बैठक में शामिल नहीं होंगे, जबकि दोनों ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं।18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा भी शुक्रवार को नई दिल्ली पहुंचे। एयरपोर्ट पर केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने उनका स्वागत किया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच लंबे समय से मजबूत और दोस्ताना संबंध हैं, जो रणनीतिक साझेदारी पर आधारित हैं। दोनों देश ग्लोबल साउथ के हितों और विकास के लिए मिलकर काम करने को प्रतिबद्ध हैं। उरुग्वे के विदेश मंत्री मारियो लुबेटकिन भी नई दिल्ली पहुंचे। वह ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में ‘कम्युनिटी ऑफ लैटिन अमेरिकन एंड कैरिबियन स्टेट्स’ (सेलाक) का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत और सेलाक व्यापार बढ़ाने, तकनीकी ज्ञान एवं नवाचार साझा करने और ग्लोबल साउथ के देशों के बीच साझेदारी मजबूत करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।युगांडा की उपराष्ट्रपति जेसिका अलुपो का भी नई दिल्ली में स्वागत किया गया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत और युगांडा के बीच साझा इतिहास और द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय स्तरों पर बढ़ती साझेदारी के आधार पर गर्मजोशी भरे और दोस्ताना संबंध हैं।भारत की अध्यक्षता में 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इसमें ब्रिक्स सदस्य देशों के साथ साझेदार और आउटरीच आमंत्रित देशों के नेता भी हिस्सा ले रहे हैं। सम्मेलन के दौरान वैश्विक चुनौतियों, बहुपक्षीय सहयोग और ग्लोबल साउथ से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। - नई दिल्ली। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के तहत केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (सीएआरए) ने दिल्ली सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग और दिल्ली स्टेट एडॉप्शन रिसोर्स एजेंसी (एसएआरए) के सहयोग से नई दिल्ली में गोद लेने को लेकर जागरूकता कार्यशाला आयोजित की। “कानूनी तरीके से गोद लेना। सुरक्षित बचपन। सुरक्षित भविष्य। गैर-कानूनी गोद लेने को ना कहें” थीम पर आयोजित कार्यशाला में अस्पताल, पुलिस, बाल कल्याण समितियों, जिला बाल संरक्षण इकाइयों और जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं समेत बाल सुरक्षा से जुड़े करीब 200 हितधारकों ने हिस्सा लिया।कार्यशाला में सीएआरए की सीईओ भावना सक्सेना, दिल्ली सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव रश्मि सिंह, एसपीयूडब्ल्यूएसी की डीएसपी नेहा यादव, दिल्ली पुलिस अपराध शाखा की अपर सीपी मोनिका भारद्वाज, डीसीपीसीआर के अध्यक्ष ओ.पी. व्यास और आउटर नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट के सीएमओ डॉ. अनिल यादव समेत बाल सुरक्षा, गोद लेने, स्वास्थ्य और पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।सीएआरए की सीईओ भावना सक्सेना ने कहा कि बच्चों को गैर-कानूनी तरीके से गोद लेने से बचाने के लिए पूरे बाल सुरक्षा तंत्र में जागरूकता और सतर्कता जरूरी है। उन्होंने कहा कि हर बच्चे को सुरक्षित बचपन, सुरक्षित भविष्य और कानून का संरक्षण मिलना चाहिए। गोद लेने की प्रक्रिया में किसी तरह का शॉर्टकट नहीं हो सकता और इससे जुड़े प्रत्येक व्यक्ति को गैर-कानूनी गोद लेने की रोकथाम में अपनी भूमिका समझनी होगी।दिल्ली सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव रश्मि सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य और पुलिस विभाग, एएनएम और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से लेकर जिला बाल संरक्षण इकाइयों और बाल कल्याण समितियों तक सभी हितधारकों की भागीदारी संवेदनशीलता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि ऐसे सामूहिक प्रयास सुरक्षित बचपन सुनिश्चित करने के लिए मजबूत संस्थागत प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।जागरूकता पहल के तहत कार्यशाला में वैध तरीके से गोद लेने पर एक फिक्शन फिल्म भी लॉन्च की गई। फिल्म में अधिकृत दत्तक ग्रहण प्रक्रिया का पालन करने के महत्व और गैर-कानूनी तरीके से बच्चे गोद लेने से जुड़े जोखिमों को सरल और प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया गया है।कार्यशाला में गैर-कानूनी गोद लेने की रोकथाम और उससे निपटने से जुड़े तीन तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इनमें गैर-कानूनी गोद लेने के उभरते रुझान, चुनौतियां और राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रिया; अस्पताल, नर्सिंग होम, स्वास्थ्य प्रणाली, पुलिस और न्यायपालिका की भूमिका; तथा एसएआरए, सीडब्ल्यूसी, डीसीपीयू और सीसीआई जैसी बाल सुरक्षा प्रणालियों को मजबूत करने के विषय शामिल रहे।सत्रों में स्टेट एडॉप्शन रिसोर्स एजेंसी, बाल कल्याण समितियों, जिला बाल संरक्षण इकाइयों और बाल देखभाल संस्थानों के बीच समन्वय मजबूत करने पर चर्चा हुई। साथ ही पुलिस, स्वास्थ्य और आंगनवाड़ी क्षेत्र से जुड़े हितधारकों को वैध तरीके से गोद लेने और बाल सुरक्षा की व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए जागरूक किया गया।कार्यशाला में गैर-कानूनी गोद लेने के मामलों से निपटने के जमीनी अनुभव भी साझा किए गए। डीसीपीओ अरुण शर्मा ने अपने अनुभवों के जरिए प्रतिभागियों को फील्ड स्तर की चुनौतियों, समय पर हस्तक्षेप की अहमियत और संदिग्ध मामलों में बाल सुरक्षा अधिकारियों की भूमिका के बारे में जानकारी दी। कार्यशाला का समापन संवादात्मक प्रश्नोत्तरी के साथ हुआ। इसका उद्देश्य विभिन्न सत्रों में साझा की गई जानकारी को प्रतिभागियों की समझ और याददाश्त के स्तर पर परखना था। प्रश्नोत्तरी के जरिए कानूनी नियमों, संबंधित संस्थाओं की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों के साथ वैध दत्तक ग्रहण तथा बच्चों की सुरक्षा से जुड़े संदेशों को दोहराया गया। डीएमआरसी और सलाम बालक ट्रस्ट की ओर से प्रस्तुत नाटक के जरिए प्रतिभागियों को बच्चों के अधिकारों, सुरक्षा और बचाव के प्रति जागरूक किया गया। नाटक में प्रत्येक बच्चे के लिए सुरक्षित और सहयोगी माहौल सुनिश्चित करने की सामूहिक जिम्मेदारी पर जोर दिया गया। ‘गोद लेने के बारे में राष्ट्रीय जागरूकता माह-2026’ की थीम “वैध तरीके से गोद लेना। सुरक्षित बचपन। सुरक्षित भविष्य। गैर-कानूनी गोद लेने को ना कहें” रखी गई है। इसका उद्देश्य यह बताना है कि गैर-कानूनी तरीके से गोद लेना न केवल किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के प्रावधानों का उल्लंघन है, बल्कि इससे बच्चे कानूनी सुरक्षा, अधिकारों और संरक्षण से भी वंचित हो सकते हैं। जागरूकता पहल में महिला एवं बाल विकास विभाग, बाल कल्याण समितियों, जिला बाल संरक्षण इकाइयों, विशेष दत्तक ग्रहण एजेंसियों, बाल देखभाल संस्थानों, स्वास्थ्य एवं पुलिस विभागों, न्यायपालिका, कानूनी सेवा प्राधिकरणों, अस्पताल प्रशासकों, चिकित्सा पेशेवरों, आशा और एएनएम कार्यकर्ताओं, नागरिक समाज संगठनों तथा मीडिया प्रतिनिधियों की भूमिका पर जोर दिया गया। प्रतिभागियों को बच्चों के अधिकारों और उनके सर्वोत्तम हितों की रक्षा के लिए समन्वित कार्रवाई, समय पर हस्तक्षेप और कानूनी दत्तक ग्रहण प्रक्रिया का पालन करने के महत्व के बारे में जागरूक किया गया। आयोजकों ने कहा कि “कानूनी रूप से गोद लेना। सुरक्षित बचपन। सुरक्षित भविष्य। गैर-कानूनी गोद लेने को ना कहें” केवल अभियान का संदेश नहीं, बल्कि हर बच्चे की सुरक्षा, सम्मान, पहचान और सुरक्षित पारिवारिक माहौल के अधिकार की रक्षा के लिए सामूहिक आह्वान है।
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नई दिल्ली। अमेरिका में हुए 9/11 आतंकी हमले की 25वीं बरसी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमले में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी और उनके परिवारों के प्रति एकजुटता जताई। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट के जरिए आतंकवाद के खिलाफ भारत की लंबे समय से जारी लड़ाई और सभी रूपों में आतंकवाद के प्रति देश के अटूट संकल्प को दोहराया। पीएम मोदी ने कहा कि 25 साल पहले हुए भयावह 9/11 हमले के पीड़ितों को आज याद किया जा रहा है और उन्हें सम्मान दिया जा रहा है। उन्होंने उन परिवारों के प्रति भी एकजुटता जताई, जिन्होंने इस आतंकी हमले में अपने प्रियजनों को खो दिया।
पीएम मोदी ने कहा कि आतंकवाद ने दुनियाभर में अनगिनत जिंदगियां ली हैं। उन्होंने भारत को सीमा पार आतंकवाद का पीड़ित बताते हुए कहा कि देश कई दशकों से आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सबसे आगे रहा है। उन्होंने जोर दिया कि आतंकवाद का खतरा लगातार बदल रहा है, लेकिन इसके सभी रूपों के खिलाफ भारत का संकल्प और विरोध अटूट है।पीएम मोदी ने कहा कि भारत आतंकवाद के अभिशाप से लड़ने के सभी प्रयासों के साथ एकजुटता से खड़ा है। उन्होंने अपने पोस्ट के साथ वर्ष 2014 में 9/11 मेमोरियल एंड म्यूजियम की अपनी यात्रा की कुछ तस्वीरें भी साझा कीं। 11 सितंबर 2001 को अमेरिका में हुए 9/11 हमले में करीब 3,000 लोगों की जान चली गई थी। आतंकी संगठन अल-कायदा ने इस हमले की साजिश रची थी और ओसामा बिन लादेन को इसका मुख्य साजिशकर्ता माना गया। 19 आतंकवादियों ने चार वाणिज्यिक विमानों का अपहरण कर उन्हें हमले के लिए इस्तेमाल किया था।अपहृत चार विमानों में से दो न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के ट्विन टावरों से टकराए। टक्कर के बाद दोनों इमारतों में भीषण आग लग गई और कुछ समय बाद दोनों टावर ढह गए। इस हमले ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया और वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था को नई दिशा दी। तीसरा विमान वर्जीनिया के अर्लिंगटन स्थित अमेरिकी रक्षा विभाग के मुख्यालय पेंटागन से टकराया। वहीं, चौथे विमान के यात्रियों और चालक दल ने आतंकवादियों के खिलाफ प्रतिरोध करने की कोशिश की। इसके बाद विमान पेंसिल्वेनिया के एक खुले मैदान में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में सवार कोई व्यक्ति जीवित नहीं बचा।न्यूयॉर्क में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की जगह पर स्थित 9/11 मेमोरियल एंड म्यूजियम हमले के पीड़ितों की स्मृति और इतिहास को संजोए हुए है। यह संस्थान 11 सितंबर 2001 के हमलों के पीड़ितों के साथ-साथ 1993 में हुए वर्ल्ड ट्रेड सेंटर बम विस्फोट में मारे गए छह लोगों को भी सम्मान देता है। 9/11 मेमोरियल का डिजाइन माइकल अराड और पीटर वॉकर ने तैयार किया था। मेमोरियल में ट्विन टावरों की मूल जगह पर दो बड़े जलकुंड बनाए गए हैं, जिन्हें ‘रिफ्लेक्टिंग एब्सेंस’ नाम दिया गया है। इन जलकुंडों के चारों ओर हमले में मारे गए लोगों के नाम अंकित हैं, जो इस त्रासदी की स्थायी स्मृति के रूप में मौजूद हैं।9/11 हमले को 25 साल पूरे होने के बावजूद इसकी याद आज भी वैश्विक चेतना में बनी हुई है। इस हमले ने आतंकवाद की चुनौती को दुनिया के सामने नए रूप में रखा और इसके बाद सुरक्षा, खुफिया सहयोग तथा आतंकवाद विरोधी रणनीतियों में व्यापक बदलाव हुए। पीएम मोदी का संदेश इस बात को रेखांकित करता है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में वैश्विक एकजुटता और सभी रूपों के आतंकवाद के प्रति स्पष्ट विरोध आज भी उतना ही जरूरी है। -
रुद्रपुर. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष नितिन नवीन ने बृहस्पतिवार को कहा कि 1984 में हुए सिखों के 'नरसंहार' को न कभी देश भूलेगा और न भाजपा दंगाइयों को माफ करेगी। उत्तराखंड के सिख और पंजाबी बाहुल्य उधमसिंह नगर के जिला मुख्यालय रुद्रपुर में एक कार्यक्रम 'पंजाबी गौरव सम्मेलन' में नवीन ने 1984 के सिख विरोधी दंगों का जिक्र किया और कहा कि उस समय हुए नरसंहार की पीड़ा को कोई बयां नहीं कर सकता लेकिन 'हम लोगों ने उस पीड़ा का भाव आपके सबके चेहरों पर देखा है।' भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि उस दौर में दिवंगत प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी कहा था कि 'कलेजे में कटार गड़ गयी, दूध में दरार पड़ गयी।' नवीन ने कहा कि निर्दोष सिख भाइयों के जीवन से खिलवाड़ होने के बाद तीन दशक तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई और किसी को कोई सजा नहीं मिली लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2015 में इसके लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया । एसआईटी के गठन के लिए प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए नवीन ने कहा, ''आज मैं इस मंच से दोहराता हूं कि 1984 में हमारे निर्दोष सिख भाइयों के खिलाफ जो अमानवीय पाप किया गया, उसे न कभी देश भूलेगा और न भाजपा दंगाइयों को कभी माफ करेगी।'' भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि देश के विभाजन की सबसे बड़ी पीड़ा पंजाबी और सिख समाज ने झेली, लेकिन तमाम कठिनाइयों के बावजूद अपने पुरुषार्थ और पराक्रम के बल पर न केवल स्वयं को दोबारा स्थापित किया, बल्कि देश के विकास में भी योगदान दिया। उन्होंने कहा कि विभाजन के बाद तराई में आकर बसे हजारों सिख और पंजाबी परिवारों ने उसे 'उत्तराखंड का अन्न भंडार' बना दिया। उन्होंने कहा, ''तराई में विकास की जो विशाल इमारत दिखाई देती है, उसकी नींव पंजाबी और सिख भाइयों ने रखी है।'' देश की आजादी की लड़ाई से लेकर सीमाओं की रक्षा और देश में हर आवश्यकता के समय सिख समाज को सबसे आगे खड़ा बताते हुए नवीन ने कहा कि सेवा और भाईचारे की सिख परंपरा पूरे समाज के लिए प्रेरणा है । उन्होंने मोदी सरकार द्वारा सिख समाज से जुड़े लिए गए कई ऐतिहासिक फैसलों का भी जिक्र किया । उन्होंने करतारपुर साहिब गलियारा का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि गुरु नानक देव के जीवन के महत्वपूर्ण वर्षों से जुड़े करतारपुर साहिब को 70 वर्षों तक श्रद्धालु दूरबीन से ही देखकर नमन करते रहे लेकिन प्रधानमंत्री के नेतृत्व में यह गलियारा खुलने के बाद आज श्रद्धालु वहां पहुंचकर उसके प्रत्यक्ष दर्शन कर रहे हैं। नवीन ने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह के साहिबजादों के बलिदान दिवस को 'वीर बाल दिवस' का सम्मान दिया गया जिससे बच्चाों और युवाओं को उससे प्रेरणा मिले। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय में हेमकुंड साहिब की कठिन यात्रा को सुगम बनाने के लिए करीब 2700 करोड़ रुपये की लागत से गोविंदघाट-हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजना प्रस्तावित है। भाजपा अध्यक्ष ने खासतौर से पंजाब में नशे की समस्या को बेहद गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि युवा पीढ़ी पर इसके प्रभाव को लेकर पूरे देश को चिंता करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जिस दृढ़ इच्छाशक्ति से सरकार ने नक्सलवाद जैसी गंभीर चुनौती के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ी, उसी संकल्प के साथ देश को नशे की बुराई से भी मुक्त करने की तैयारी है । इस संबंध में उन्होंने युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए शुरू किए गए 'विकसित भारत के लिए नशामुक्त युवा संकल्प अभियान' का भी उल्लेख किया । नवीन ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा किए जा रहे कार्यों और उनकी कार्यशैली की भी सराहना की और कहा कि वह समाज के हर वर्ग को आगे लेकर बढ़ रह हैं ।
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नयी दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बृहस्पतिवार को कृषि विभाग से कहा कि वह पाकिस्तान की तरफ से टिड्डी दल के हमलों से निपटने के लिए 'स्थायी तैयारी' को बरकरार रखे। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (एनआईडीएम) के शासी निकाय की तीसरी बैठक की अध्यक्षता करते हुए शाह ने कहा कि ऐसे हमलों से निपटने के लिए अन्य देशों में अपनाई जा रही बेहतर कार्यप्रणालियों को भारत में लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ''कृषि विभाग को पाकिस्तान की ओर से आने वाले टिड्डी दल के हमलों से निपटने के लिए स्थायी तैयारी पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।'' गृह मंत्रालय, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी), कृषि मंत्रालय, दिल्ली विश्वविद्यालय और अन्य केंद्र एवं राज्य सरकार के संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी वाली बैठक को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश में आपदा प्रबंधन के दृष्टिकोण और तरीकों में व्यापक बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि पहले की राहत एवं पुनर्वास पर जोर देने वाली व्यवस्था से आगे बढ़कर अब 'शून्य जनहानि' के दृष्टिकोण को अपनाया गया है। आपदा को सहने में सक्षम गांवों और शहरों के निर्माण को मोदी सरकार की प्राथमिकता बताते हुए उन्होंने कहा कि नए दृष्टिकोण के तीन प्रमुख आधार हैं— जोखिम में कमी, पूर्व चेतावनी प्रणाली और 'शून्य जनहानि'। शाह ने कहा, ''हमने कई आपदाओं से सफलतापूर्वक शून्य जनहानि के साथ निपटा है, जो एक बड़ी उपलब्धि है।''
उन्होंने 'संपूर्ण सरकारी दृष्टिकोण' अपनाने का आह्वान किया, जिसमें आपदा आने पर सभी सरकारी विभाग सक्रिय रूप से प्रतिक्रिया दें। उन्होंने कहा, ''जब भी कोई आपदा आती है, सभी सरकारी विभाग सक्रिय रूप से प्रतिक्रिया देते हैं। अब नए शोध की ताकत के साथ हमें इस प्रक्रिया को और तेजी से आगे बढ़ाना चाहिए और निरंतर निगरानी सुनिश्चित करनी चाहिए।'' शाह ने कहा कि अब इसी दृष्टिकोण का इस्तेमाल शोध, लगातार निगरानी और समन्वित कार्रवाई के जरिये आपदा प्रबंधन को मजबूत करने के लिए किया जाना चाहिए। गृह मंत्री ने कहा कि पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम करने की कोशिशें आपदाओं को रोकने में मदद कर सकती हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि 'मिशन लइाफ', 'प्रो-प्लैनेट पीपल' और 'अंतरराष्ट्रीय सौर ऊर्जा' जैसी पहल आपदाओं को रोकने में योगदान दे रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने फैसला किया है कि आपदा फंड का बंटवारा भी एक वैज्ञानिक प्रक्रिया के जरिए किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ''राज्य आपदा प्रतिक्रिया निधि के तहत आवंटन लगभग चार गुना बढ़ गया है, जबकि राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया निधि के तहत आवंटन लगभग तीन गुना बढ़ा है। पिछले 11 सालों में इस क्षेत्र में लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, जो एक बड़ी उपलब्धि है।'' -
अहमदाबाद. मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार गुजरात के दो दिवसीय दौरे के तहत बृहस्पतिवार को अहमदाबाद पहुंचे। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी और सरदार वल्लभभाई पटेल जैसी महान हस्तियों की जन्मभूमि और कर्मभूमि में आकर उन्हें बहुत गर्व महसूस हो रहा है। कुमार ने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने के लिए अहमदाबाद के साबरमती आश्रम का दौरा किया। इस दौरान उन्हें साबरमती आश्रम के नवीनीकरण से जुड़ी परियोजना के बारे में जानकारी दी गई। गुजरात की सांस्कृतिक विरासत पर प्रकाश डालने वाले एक कार्यक्रम के तहत वह गांधीनगर के ऐतिहासिक अडालज की वाव भी पहुंचे। इससे पहले, गुजरात के मुख्य निर्वाचन अधिकारी संदीप सागले, अहमदाबाद के जिलाधिकारी भव्य वर्मा और अन्य अधिकारियों ने सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कुमार का स्वागत किया। कुमार ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "यहां आकर मुझे बहुत गर्व महसूस हो रहा है। गुजरात महात्मा गांधी और सरदार वल्लभभाई पटेल जैसी महान हस्तियों की जन्मभूमि और कर्मभूमि, दोनों रहा है।" उन्होंने कहा, "आज और कल, मैं अहमदाबाद मैनेजमेंट एसोसिएशन के सदस्यों के साथ-साथ गुजरात के समर्पित बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ), कुलपतियों, प्राचार्यों और छात्रों के साथ अलग-अलग कार्यक्रमों में बातचीत करूंगा।" कुमार ने साबरमती आश्रम की आगंतुक पुस्तिका में लिखा, "मेरे लिए उस पवित्र स्थान पर आना सम्मान की बात है, जहां से विश्व शांति और मानवता के संदेश का प्रसार हुआ।" सीईसी बृहस्पतिवार को अहमदाबाद मैनेजमेंट एसोसिएशन (एएमए) के परिसर का भी दौरा करेंगे, जहां वह 'भारत में चुनाव प्रबंधन-दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र' विषय पर लोगों से संवाद करेंगे। गुजरात यात्रा के दूसरे दिन कुमार गुजरात विश्वविद्यालय के अटल कलाम सभागार में राज्यभर के 500 से ज्यादा बीएलओ से बातचीत करेंगे। इसके बाद, वह अहमदाबाद के एयूडीए ऑडिटोरियम में मतदाता साक्षरता क्लब (ईएलसी) के 1,000 से अधिक सदस्यों से संवाद करेंगे। कार्यक्रम के दौरान ईसीआईएनईटी पर एक सूचनात्मक सत्र भी आयोजित किया जाएगा, जिसे निर्वाचन आयोग ने चुनावों के लिए एक सक्रिय "ऑल सॉल्यूशंस प्लेटफॉर्म" (सभी समाधान वाला मंच) बताया है। एक बयान के मुताबिक, गुजरात के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की टीम ने "रोल से पोल तक पारदर्शिता" (मतदाता सूची से मतदान तक पारदर्शिता) पहल के तहत बीएलओ और ईएलसी सदस्यों के साथ कुमार का एक संवाद कार्यक्रम भी रखा है।
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नयी दिल्ली. जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से फोन पर बात की और भारत एवं जर्मनी के बीच रणनीतिक साझेदारी में हुई प्रगति की समीक्षा की। मोदी ने जर्मनी को यूरोप के साथ भारत के संबंधों का एक अहम स्तंभ बताया। उन्होंने कहा कि जर्मनी वैश्विक शांति, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देने में एक मूल्यवान साझेदार है। भारत और जर्मनी के बीच राजनयिक संबंधों के 75 साल पूरे होने का जिक्र करते हुए दोनों नेताओं ने उच्च-स्तरीय वार्ताओं में जारी प्रगति को रेखांकित किया। उन्होंने व्यापार एवं निवेश, उन्नत प्रौद्योगिकी, स्वच्छ ऊर्जा, रक्षा, शिक्षा और प्रतिभाओं के आदान-प्रदान सहित प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है, ''जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से आज का फोन पर बातचीत की। चूंकि, भारत और जर्मनी इस साल अपने राजनयिक संबंधों के 75 साल पूरे होने का जश्न मना रहे हैं, इसलिए प्रधानमंत्री (मोदी) और चांसलर मर्ज ने भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी की प्रगति की समीक्षा की।" बयान के मुताबिक, दोनों नेताओं ने आपसी हित के क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। उन्होंने वैश्विक शांति, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करते रहने पर सहमति जताई। इससे पहले, मोदी ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा था कि भारत और जर्मनी दोनों देशों के लोगों के फायदे के लिए भविष्योन्मुखी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करते रहेंगे। उन्होंने लिखा, "चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के साथ गर्मजोशी भरी और सार्थक बातचीत हुई। भारत और जर्मनी के बीच राजनयिक संबंधों के 75 साल पूरे होने के मौके पर हमने व्यापार एवं निवेश, रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, उन्नत प्रौद्योगिकी, प्रतिभाओं के आदान-प्रदान और अन्य अहम क्षेत्रों में अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।" मोदी ने कहा कि जर्मनी यूरोप के साथ भारत के संबंधों का एक अहम स्तंभ और वैश्विक शांति, स्थिरता एवं समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए एक मूल्यवान साझेदार है। उन्होंने लिखा, "हम दोनों देशों के लोगों के फायदे के लिए अपनी भविष्योन्मुखी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना जारी रखेंगे।"
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नयी दिल्ली. दिल्ली पुलिस ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की है, जिसके तहत राष्ट्रीय राजधानी में करीब 15,000 कर्मियों और अर्धसैनिक बलों की 200 कंपनियों को तैनात किया जाएगा। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। विशेष पुलिस आयुक्त (सुरक्षा प्रभाग) मनीष कुमार अग्रवाल ने कहा कि जनता को कम से कम असुविधा और गणमान्य व्यक्तियों के लिए अधिकतम सुरक्षा सुनिश्चित हो, इसके लिए व्यापक बंदोबस्त किए गए हैं। अग्रवाल ने कहा, "हमने यातायात व्यवस्था के संबंध में अग्रिम परामर्श भी जारी किया है।"
उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस सम्मेलन के लिए कई एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रही है और सभी चिह्नित मार्गों का व्यापक सर्वेक्षण पहले ही किया जा चुका है। विशेष आयुक्त ने कहा कि कानून-व्यवस्था, सुरक्षा और यातायात प्रबंधन के लिए बड़े पैमाने पर जवानों की तैनाती की जाएगी। उन्होंने कहा कि हवाई अड्डा, होटलों और निर्धारित अन्य स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था की गई है जहां गणमान्य व्यक्तियों का दौरा हो सकता है। अधिकारी ने कहा कि शिखर सम्मेलन के आयोजन स्थल भारत मंडपम में सतर्कता एवं मजबूत उपायों के साथ बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि निर्बाध सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने और गणमान्य व्यक्तियों की आवाजाही के दौरान समन्वय के लिए पड़ोसी राज्यों के साथ बैठकें भी की गई हैं। अग्रवाल ने कहा, "खुफिया जानकारी को संबंधित एजेंसियों के साथ साझा किया जाएगा।" उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सुरक्षा तैयारियों के तहत सभी उपलब्ध सूचनाओं का विश्लेषण किया जा रहा है। अग्रवाल ने कहा कि बल शहर में सुरक्षा आवश्यकताओं और लोगों की दैनिक आवाजाही के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को भारत मंडपम में आयोजित होने वाला है।अधिकारियों ने बुधवार को कहा था कि विदेशी प्रतिनिधिमंडलों और गणमान्य व्यक्तियों की आवाजाही से जुड़े यातायात प्रतिबंध 10 सितंबर से शुरू होंगे और लगभग 14 सितंबर तक जारी रह सकते हैं। एक अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि नयी दिल्ली क्षेत्र में 500 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे, जिनमें चेहरे की पहचान करने वाली प्रणाली (एफआरएस) वाले कैमरे और वाहन नंबर प्लेट दर्ज करने वाले कैमरे शामिल हैं। ये सभी एक निगरानी कक्ष से जुड़े रहेंगे। एक अन्य पुलिस अधिकारी ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि पुलिस खुफिया जानकारियों पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है, तथा विभिन्न स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा, "सभी लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, हमने यह भी सुनिश्चित किया है कि जनता को असुविधा न हो। व्यवस्थाओं के व्यापक पैमाने के कारण कुछ यातायात परामर्श जारी हैं और अस्थायी प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं, दिल्ली पुलिस ने पहले से ही अग्रिम परामर्श जारी करना शुरू कर दिया है।" अधिकारी ने यह भी कहा कि सम्मेलन के मुख्य स्थल भारत मंडपम में आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र के साथ-साथ सतर्कता और निगरानी की व्यवस्था की गई है। इसी तरह की व्यवस्था उन होटलों में भी मजबूत की गई है जहां विदेशी गणमान्य लोग ठहरेंगे। उन्होंने कहा कि गणमान्य लोगों की आवाजाही पर लगातार नजर रखी जाएगी और उनके कार्यक्रम के अनुसार सुरक्षा, यातायात संबंधी व्यवस्थाओं में जरूरी बदलाव किए जाएंगे। दिल्ली पुलिस को जी20 शिखर सम्मेलन समेत कई बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों को संभालने का अनुभव है। पुलिस ने ऐसे आयोजनों की तैयारियों के लिए कई सरकारी एजेंसियों के साथ व्यापक स्तर पर समन्वय अभ्यास भी किए हैं। इनमें गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, वाणिज्य मंत्रालय, एनएसजी, आसूचना ब्यूरो और सभी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के साथ-साथ अन्य संबंधित एजेंसियां शामिल रही हैं। वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने और अति विशिष्ट व्यक्तियों (वीवीआईपी) के काफिले की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए प्रमुख चौराहों और महत्वपूर्ण मार्गों पर यातायात कर्मियों को तैनात किया जाएगा। -
नयी दिल्ली. चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आ रहे हैं। यह बीते सात साल में उनकी पहली भारत यात्रा होगी। इसे व्यापार और निवेश को बढ़ावा देकर दोनों देशों के रिश्तों को और बेहतर बनाने के एक अहम मौके के तौर पर देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शनिवार को चिनफिंग के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे। यह बातचीत ऐसे समय में होगी, जब दुनिया भू-राजनीतिक उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। चिनफिंग की भारत की दो दिवसीय यात्रा दोनों देशों के बीच हाल में हुई कई उच्च-स्तरीय बातचीत के बाद हो रही है। इनमें बीजिंग में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच विशेष प्रतिनिधि स्तर की बातचीत भी शामिल है। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब अरुणाचल प्रदेश सेक्टर में चीन की आक्रामक सैन्य गतिविधियों को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। मोदी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और कई अन्य वैश्विक नेताओं के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बातचीत करेंगे। पुतिन के साथ बातचीत शुक्रवार को दोपहर 3:30 बजे, जबकि पेजेश्कियान के साथ शाम 6:15 बजे होनी है। चिनफिंग के साथ सरकारी अधिकारियों और उद्योग जगत के दिग्गजों का एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आ रहा है। पूर्वी लद्दाख में लंबे समय तक जारी सैन्य गतिरोध के कारण बिगड़े रिश्तों को सुधारने के लिए दोनों पक्षों ने पिछले एक साल में विश्वास बहाली के कई कदम उठाए हैं। शनिवार से शुरू होने वाले दो दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए दिल्ली पहुंचने वाले अन्य प्रमुख नेताओं में मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम, अबू धाबी के युवराज मोहम्मद बिन जायद अल नाह्यान और इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबिय अहमद अली शामिल हैं। हालांकि, शनिवार को मोदी और चिनफिंग के बीच होने वाली मुलाकात पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है, लेकिन पश्चिमी एशिया में जारी संकट और यूक्रेन को लेकर पश्चिमी देशों के साथ मॉस्को के तनाव को देखते हुए शुक्रवार को पुतिन और पेजेश्कियान के साथ प्रस्तावित प्रधानमंत्री की बैठकें भी उतनी ही अहम मानी जा रही हैं। मामले से वाकिफ अधिकारियों ने बताया कि बैठक में मोदी और चिनफिंग के वास्तवित नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर मौजूदा हालात की समीक्षा करने की संभावना है। उन्होंने बताया कि दोनों नेता द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिशों के तहत व्यापार और निवेश बढ़ाने समेत सहयोग के और रास्ते तलाशने पर भी चर्चा कर सकते हैं। अधिकारियों के मुताबिक, चिनफिंग शनिवार को दिल्ली पहुंचेंगे और मोदी के साथ उनकी बैठक उसी दिन शाम छह बजे होनी है। मोदी और चिनफिंग ने पिछले साल 31 अगस्त को चीन के तियानजिन शहर में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के दौरान कई मुद्दों पर व्यापक बातचीत की थी। अधिकारियों के अनुसार, मोदी-पुतिन की बैठक में रक्षा, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, फार्मास्यूटिकल और लोगों के आदान-प्रदान जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किए जाने की उम्मीद है। क्रेमलिन (रूस के राष्ट्रपति का आधिकारित आवास और कार्यालय) के प्रवक्ता दमित्री पेस्कोव ने मंगलवार को कहा था कि दोनों पक्ष ब्रह्मोस मिसाइल को उन्नत करने पर भी विचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा था कि मॉस्को एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली की बाकी इकाइयों की आपूर्ति पूरी करने और सु-57 लड़ाकू विमान की प्रस्तावित आपूर्ति पर बातचीत करने के लिए भी प्रतिबद्ध है। पेस्कोव ने कहा था कि भारत और रूस के बीच ऊर्जा संबंध मजबूत बने हुए हैं तथा दोनों पक्ष नये असैन्य परमाणु संयंत्र लगाने की भारत की योजना पर बातचीत करने पर भी विचार कर रहे हैं। इससे पहले, पिछले हफ्ते बिश्केक में एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी और पुतिन की मुलाकात हुई थी, जिसमें प्रधानमंत्री ने यूक्रेन संघर्ष को तुरंत खत्म करने की अपील की और रूसी नेता से कहा कि वह "कभी न खत्म होने वाली जंग" से हटकर "जंग को खत्म करने" की दिशा में आगे बढ़ें। अधिकारियों ने कहा कि उम्मीद है कि मोदी और पुतिन की बातचीत में यूक्रेन संघर्ष और शांति की राह पर मुख्य रूप से चर्चा होगी। पिछले कुछ दिनों में इस संघर्ष को सुलझाने का रास्ता खोजने के लिए फिर से कोशिशें की गई हैं, जिनमें अमेरिका के ट्रंप प्रशासन के प्रयास भी शामिल हैं। मोदी और पेजेश्कियान के बीच बैठक इसलिए अहम मानी जा रही है, क्योंकि यह ऐसे समय में हो रही है, जब कुछ समय की शांति के बाद पश्चिम एशिया में संघर्ष फिर से बढ़ गया है। मोदी ने 31 अगस्त को बिश्केक में ईरानी नेता से मुलाकात की थी और कहा था कि भारत संघर्ष को खत्म करने की सभी कोशिशों का समर्थन करता है। पेजेश्कियान ने मोदी से आग्रह किया था कि वह अलग-अलग पक्षों के साथ भारत के व्यापक संपर्कों का इस्तेमाल करके उन्हें युद्ध और खून-खराबे के रास्ते से हटकर बातचीत और समझौते के रास्ते पर लौटने में मदद करें। अधिकारियों ने कहा कि मोदी और पेजेश्कियान की बैठक में भारत की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की आजादी और नागरिकों तथा असैन्य बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करने के महत्व पर फिर से जोर दिए जाने की उम्मीद है। होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की नाकेबंदी के बाद वैश्विक तेल आपूर्ति में भारी व्यवधान उत्पन्न हुआ है। इस रास्ते से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल गुजरता है। मोदी के दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति रामाफोसा, मिस्र के राष्ट्रपति अल-सीसी, इंडोनेशिया के सुबियांतो, मलेशिया के प्रधानमंत्री इब्राहिम, अबू धाबी के युवराज अल नाह्यान और इथियोपिया के प्रधानमंत्री अहमद अली के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें करने की भी संभावना है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतारेस, विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की महानिदेशक न्गोजी ओकोंजो-इवियाना, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के प्रमुख टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस, न्यू डेवलपमेंट बैंक (एनडीबी) की अध्यक्ष दिल्मा रूसेफ और एशियाई अवसंरचना निवेश बैंक के प्रमुख झोउ जियाई भी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि प्रधानमंत्री मोदी की इनमें से किसी के साथ अलग से द्विपक्षीय बैठक होगी या नहीं। भारत ब्रिक्स के मौजूदा अध्यक्ष के तौर पर इस शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है।
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नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बुधवार को घोषणा की कि वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में 17 सितंबर को उनके जन्मदिन पर महीने भर का 'सेवा संकल्प' अभियान शुरू करेगी जिसके तहत युवा संपर्क और जनभागीदारी पर केंद्रित कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने यहां पार्टी मुख्यालय में प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि मोदी का जन्मदिन 'सेवा दिवस' के रूप में मनाया जाएगा और देशभर में रक्तदान शिविर लगाए जाएंगे। पार्टी अध्यक्ष के रूप में कमान संभालने के बाद यह उनका पहला संवाददाता सम्मेलन था।
उन्होंने कहा कि 'सेवा और समर्पण' की मोदी की यात्रा तथा अंतिम व्यक्ति तक विकास और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के उनके प्रयासों को रेखांकित करने के लिए 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा, ''प्रथम दिन यानी 17 सितंबर को रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाएगा। उसी दिन शाम को सात बजे 'आशीर्वाद का दीया' कार्यक्रम होगा। इस पूरे कार्यक्रम का स्पष्ट उद्देश्य यह दर्शाना है कि पिछले 25 वर्षों में प्रधानमंत्री जी ने निष्ठा के साथ जनसेवा की है।'' भाजपा अध्यक्ष ने कहा, ''प्रधानमंत्री का सफर एक साधारण कार्यकर्ता के रूप में प्रारंभ हुआ और आज देश के प्रधान सेवक के रूप में उन्होंने कार्यों को आगे बढ़ाया है। ये केवल उनके स्पष्ट दृष्टिकोण, दृढ़ संकल्प और सामाजिक जीवन में लगातार गुणात्मक परिवर्तन लाने और जीवन में बदलाव लाने के प्रयास से संभव हुआ है।'' उन्होंने कहा, ''हम जन आशीर्वाद सामूहिक प्रदर्शन के रूप में प्रधानमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करेंगे। प्रत्येक लाभार्थी परिवारों द्वारा प्रधानमंत्री जी को आशीर्वाद देने के रूप में ये दीप जलाए जाएंगे।'' भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि यह अभियान मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्षों के दौरान लोगों के जीवन में आए बदलावों को रेखांकित करेगा। नवीन ने कहा, ''भाजपा मोदी की जनसेवा का संदेश हर व्यक्ति तक पहुंचाएगी।''
उन्होंने कहा, ''प्रधानमंत्री ने महिला नेतृत्व संबंधी विकास की बात की, और उनके नेतृत्व में 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' से जिस सफर की शुरुआत हुई, वो आज लखपति दीदी तक पहुंचा है।'' नवीन ने कहा, ''नारीशक्ति वंदन अधिनियम के माध्यम से देश की महिलाओं को उनका अधिकार देने और नीति निर्धारण में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने का हमारा प्रयास लगातार जारी है।'' उन्होंने सरकार के कल्याणकारी उपायों को रेखांकित करते हुए दावा किया कि 25 करोड़ परिवारों को गरीबी से बाहर निकाला गया है। उन्होंने दावा किया, ''जब उन्होंने (2014 में) देश का नेतृत्व संभाला, तो उस समय देश में निराशा और अंधकार का माहौल था। हमारी अर्थव्यवस्था को 'फ्रेजाइल फाइव' (पांच कमजोर अर्थव्यवस्थाओं) में गिना जाता था, लेकिन आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में सामने है।'' भाजपा अध्यक्ष ने कहा, ''स्टार्टअप और यूनिकॉर्न के माध्यम से भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा 'स्टार्टअप नेशन' बना है। हमारे युवा नौकरी मांगने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बनकर उभरे हैं। आज 'खेलो इंडिया' और 'फिट इंडिया' के माध्यम से भारत का युवा हर क्षेत्र में प्रतिनिधित्व कर रहा है। '' उन्होंने कहा कि 37 से अधिक देशों ने प्रधानमंत्री मोदी को अपने सर्वोच्च सम्मान से नवाजा है, जो 140 करोड़ भारतीयों के प्रति सम्मान को दर्शाता है। अभियान के तहत सात अक्टूबर को एक प्रमुख कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिस दिन प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक पद पर 25 साल पूरे होंगे। इस अवसर पर सभी जिला मुख्यालयों में 'पदयात्रा', मोटरसाइकिल और साइकिल रैलियों के साथ 'सेवा ज्योति कलश यात्रा' आयोजित की जाएगी। नवीन ने कहा, ''सात अक्टूबर 2001 को उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपना कार्यकाल शुरू किया था। पिछले 25 वर्षों में 'जनसेवा से राष्ट्रसेवा' के मंत्र से प्रेरित होकर उन्होंने सेवा की इस यात्रा को पूरी निष्ठा से जारी रखा है। सात अक्टूबर को जिला मुख्यालयों और देशभर में लगभग 1,000 स्थानों पर 'विकसित भारत 2047' के लिए सामूहिक संकल्प भी लिया जाएगा।'' उन्होंने कहा कि भाजपा 17 सितंबर से सात अक्टूबर के बीच स्कूलों में 'विकसित भारत' के दृष्टिकोण और प्रधानमंत्री मोदी के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन पर आधारित चित्रकला और भाषण प्रतियोगिताएं आयोजित करेगी। उन्होंने कहा कि विजेताओं को मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय मंत्रियों के स्तर पर प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि 'नमो सेवा अनकही कहानियां' और 'सेवा की कहानी' कार्यक्रमों के माध्यम से सरकारी योजनाओं से आए बदलावों की गाथाओं को नाटक, संगीत और चौपालों के जरिए लोगों तक पहुंचाया जाएगा। भाजपा प्रधानमंत्री मोदी के जन्म स्थान वडनगर और उनकी कर्मभूमि वाराणसी के बीच युवाओं की दो 'सेवा यात्राएं' भी आयोजित करेगी जिसमें करीब 1,000 युवा शामिल होंगे। 20 दिन की यह यात्रा 10 राज्यों से होकर गुजरेगी। उन्होंने बताया कि इसके अतिरिक्त, 'सेवा मेरा योगदान' के तहत श्रमदान, पात्र लाभार्थियों की मदद के लिए ब्लॉक स्तर पर 'सेवा सेतु' शिविर, स्वास्थ्य शिविर और सरकारी योजनाओं की जानकारी देने वाले शिविर भी लगाए जाएंगे। सार्वजनिक स्थलों पर 'सेवा के रंग, राष्ट्र के संग' के तहत रंगोली बनाई जाएगी, जबकि युवाओं व स्टार्टअप्स के लिए 'सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज' आयोजित किया जाएगा। दो अक्टूबर को अभियान के हिस्से के रूप में स्वच्छता अभियान भी चलाया जाएगा। -
पणजी. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को कहा कि वह बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में देरी या खराब काम के लिए जिम्मेदार अधिकतम ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने और अधिकारियों को निलंबित करने का रिकॉर्ड बनाना चाहते हैं। गडकरी ने कहा कि मुंबई-गोवा राजमार्ग को चौड़ा करने में देरी होने पर उन्हें पहले शर्मिंदगी महसूस होती थी, लेकिन अब वह अक्टूबर में मुंबई हवाई अड्डे से सड़क मार्ग के जरिये गोवा जाएंगे और राजमार्ग का व्यक्तिगत रूप से निरीक्षण करेंगे। उन्होंने पणजी के पास पोर्वोरिम में छह लेन वाले एलिवेटेड रोड कॉरिडोर का उद्घाटन करने के बाद यह बात कही। गडकरी ने कहा, ''मैंने पहले घोषणा की थी कि चौड़ीकरण वाले मुंबई-गोवा राजमार्ग का उद्घाटन करने नहीं आऊंगा, क्योंकि मुझे इस बात पर शर्मिंदगी महसूस होती थी कि इस काम में इतनी देरी हुई।... लेकिन अब मैं व्यक्तिगत तौर पर इसका निरीक्षण करूंगा।'' उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर मंगलवार को अधिकारियों के साथ बैठक हुई थी। इसके साथ ही सड़क परिवहन मंत्री ने कहा कि बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में देरी तथा खराब क्रियान्वयन के लिए जिम्मेदार ठेकेदारों एवं अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। गडकरी ने कहा, "अब मैं एक साल के भीतर अधिकतम संख्या में ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने, उनके खिलाफ कार्रवाई करने और अधिकारियों को निलंबित करने का रिकॉर्ड बनाना चाहता हूं। मैं अब इसे रोकने वाला नहीं हूं।" उन्होंने गोवा सरकार से मुंबई-गोवा राजमार्ग के किनारे राज्य की वास्तुकला, खान-पान और हस्तशिल्प परंपराओं को दर्शाने वाली सुविधाएं विकसित करने को कहा। उन्होंने पेट्रोल-डीजल पंप के साथ जैव ईंधन, इलेक्ट्रिक वाहन और अन्य वैकल्पिक ईंधन के लिए सुविधाएं विकसित करने की भी वकालत की। गडकरी ने राजमार्ग पर वैज्ञानिक तरीके से पौधे लगाने की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि यह तय करने के लिए अध्ययन होना चाहिए कि कौन सी प्रजातियां लगाई जाएं और कौन सी अधिक कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित कर ऑक्सीजन छोड़ती हैं। उन्होंने गोवा में यातायात व्यवस्था में सुधार के लिए व्यापक अध्ययन की जरूरत बताते हुए बाजारों को एकीकृत करने, गोदामों को शहरों से बाहर स्थानांतरित करने और बस डिपो में सुधार जैसे उपाय सुझाए। गडकरी ने वैकल्पिक ईंधन तथा इलेक्ट्रिक, हाइड्रोजन और फ्लेक्स-फ्यूल प्रौद्योगिकियों के अधिक इस्तेमाल की वकालत करते हुए कहा कि इससे प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी।
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नयी दिल्ली. दिल्ली की मतदाता सूची में राघव चड्ढा का नाम जोड़े जाने पर आम आदमी पार्टी (आप) के सवाल उठाने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने बुधवार को कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राज्यसभा सदस्य ने राजेंद्र नगर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए 26 अगस्त को 'फॉर्म-6' भरा था और निर्धारित प्रक्रिया के बाद दो सितंबर को उनका आवेदन मंजूर कर लिया गया। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय ने कहा, ''मौजूदा रिकॉर्ड के अनुसार, सांसद (राज्यसभा) राघव चड्ढा ने 26 अगस्त को एसी-39 (राजेंद नगर) में 'फॉर्म-6' के जरिए अपना नाम शामिल कराने के लिए आवेदन किया था।'' कार्यालय की तरफ से बताया गया कि आवेदन को जरूरी सात दिन की नोटिस अवधि पूरी होने के बाद चुनाव पंजीकरण अधिकारी ने स्वीकृत किया था। दिल्ली सीईओ कार्यालय ने कहा, ''एसी-39 (राजेंद्र नगर) के चुनाव पंजीकरण अधिकारी ने सात दिन की जरूरी नोटिस अवधि पूरी होने के बाद इस फॉर्म को स्वीकृत किया था।'' सीईओ कार्यालय ने यह भी कहा कि आवेदन पर निर्वाचन आयोग द्वारा तय प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की गई। हालांकि, 'आप' ने निर्वाचन आयोग के स्पष्टीकरण को खारिज करते हुए आरोप लगाया कि चड्ढा का नाम मतदाता सूची में ''पिछले दरवाजे से'' जोड़ा गया है। पार्टी ने यह भी सवाल उठाया कि क्या इसमें कोई राजनीतिक दबाव था। आप के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने मांग की कि चड्ढा का फॉर्म-6 सार्वजनिक किया जाए और आम मतदाताओं की तरह ही नागरिकों को इस पर आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिया जाए।
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नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से कहा कि वह इस अकादमिक सत्र के लिए छठी कक्षा के छात्रों को अपनी त्रि-भाषा नीति से छूट देने पर विचार करे। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने सीबीएसई की त्रि-भाषा नीति को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई 17 सितंबर तक टालते हुए बोर्ड से कहा कि वह मौजूदा अकादमिक सत्र में छठी कक्षा के छात्रों को शामिल करने की संभावना पर विचार करे। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल हैं।
न्यायालय ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा, ''इस साल छठी कक्षा पर विचार करें...यदि उन्हें कुछ छूट दी जा सकती है...।'' मेहता ने अदालत से सुनवाई टालने का अनुरोध किया क्योंकि अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल ऐश्वर्या भाटी उपलब्ध नहीं थीं। फिर भी, उन्होंने भरोसा दिलाया कि संबंधित अधिकारी पीठ के सुझाव पर विचार करेंगे।
शीर्ष विधि अधिकारी ने कहा, ''हम सब मिलकर बैठेंगे और फिर आपको सूचित करेंगे।''
याचिकाकर्ताओं में से एक के वरिष्ठ वकील ने कहा कि मामले में और देरी नहीं होनी चाहिए क्योंकि छात्रों को आखिरकार परीक्षा देनी है और इससे उनके माता-पिता की चिंता बढ़ रही है। न्यायालय उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था जिनमें सीबीएसई की उस नीति को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत नौवीं कक्षा के छात्रों के लिए एक जुलाई से तीन भाषाएं (जिनमें दो भारतीय भाषाएं शामिल हैं) पढ़ना अनिवार्य किया गया था। न्यायालय ने 20 अगस्त को सीबीएसई की उस नीति से पैदा होने वाली समस्याओं का समाधान तलाशने पर जोर दिया, जिसके तहत नौवीं कक्षा के छात्रों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना जरूरी है। अदालत ने कहा कि बच्चों पर किसी भी तरह का दबाव नहीं पड़ना चाहिए।
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मथुरा (उप्र) . मथुरा में वृन्दावन स्थित ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर के विशेष उत्सव एवं पर्वों पर ठाकुरजी को भेंट किए गए सोने-चांदी आदि बहुमूल्य रत्न जड़े झूले, रथ एवं विभिन्न प्रकार के सिंहासन आदि सामग्री का सेवा में उपयोग न किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। यह जानकारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति से मिली। यह सवाल भी उठा कि उक्त सामग्री आखिर कहां है और संबंधित सेवायतों ने उनका उपयोग क्यों नहीं किया।
मंदिर की उच्चाधिकारी प्राप्त समिति ने मंगलवार शाम आयोजित बैठक में इन सभी सवालों के जवाब तलाशने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, मथुरा-वृन्दावन विकास प्राधिकरण उपाध्यक्ष एवं नगर आयुक्त की त्रिसदस्यीय समिति गठित की। बैठक की अध्यक्षता इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश एवं समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अशोक कुमार ने की। उल्लेखनीय है कि उच्चतम न्यायालय ने वृन्दावन के ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर की व्यवस्थाओं को सुचारू रूप देने के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन किया था। यह समिति तब से श्रद्धालुओं की सुविधा एवं मंदिर की कुशल व्यवस्था के लिए समय-समय पर बैठक करके आपसी मंत्रणा के आधार पर निर्णय लेती रहती है। मंगलवार को इस समिति की 19वीं बैठक सम्पन्न हुई। जिला सूचना कार्यालय द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार बैठक में ठाकुरजी को भेंट किए गए श्रृंगार के अनेक बहुमूल्य रत्नों, सोने व चांदी से निर्मित झूले, रथ, नौका एवं विभिन्न प्रकार के सिंहासन मंदिर परंपरा के अनुसार विशिष्ट उत्सवों के दौरान सेवा में प्रयोग नहीं किए जाने पर सवाल उठे। यह सवाल उठा कि आखिर उक्त सामग्री का प्रदर्शन उनके समयानुसार क्यों नहीं कराया गया और वे सब सामान कहां हैं। विज्ञप्ति के अनुसार वृन्दावन के लक्ष्मण शहीद स्मारक में हुई बैठक की अध्यक्षता इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश एवं समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अशोक कुमार ने की। विज्ञप्ति के अनुसार बैठक में मंदिर प्रबंधन से संबंधित व्यवस्थाओं में सामने आ रही कथित अनियमितताओं एवं अन्य आधा दर्जन विषयों पर चर्चा हुई। विज्ञप्ति के अनुसार चढ़ावे की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए। बताया गया कि कुछ भण्डारी एवं अन्य लोग श्रद्धालुओं के हाथ से चढ़ावा ले रहे थे। विज्ञप्ति के अनुसार इस व्यवस्था को लेकर उच्चतम न्यायालय के आदेश और मंदिर की गरिमा के अनुरूप व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। विज्ञप्ति के अनुसार बैठक में यह भी कहा गया कि मंदिर की व्यवस्थाओं में भण्डारियों की निर्धारित संख्या और प्रक्रिया का पालन किया जाना जरूरी है। श्रद्धालुओं का चढ़ावा मंदिर के खजाने में ही जाना चाहिए। विज्ञप्ति के अनुसार सेवायतों से भगवान के श्रृंगार और सेवा को परंपरा के अनुरूप भव्य बनाए रखने की अपेक्षा की गई। विज्ञप्ति के अनुसार बैठक में मंदिर के प्रसाद की गुणवत्ता और वितरण के तरीके को लेकर भी सवाल उठे।
विज्ञप्ति के अनुसार अध्यक्ष ने बताया कि यह निर्णय लिया गया है कि मंदिर में ठाकुरजी की ओर पेड़े ओर मालाएं फेंकी नहीं जाएंगी। विज्ञप्ति के अनुसार समिति की ओर से प्रसाद को श्रद्धालुओं तक सम्मानजनक और व्यवस्थित तरीके से पहुंचाने की जरूरत पर जोर दिया गया। विज्ञप्ति के अनुसार मंदिर में फूलों की सजावट को लेकर भी नई व्यवस्था पर विचार किया गया लेकिन इस पर सेवायतों ने इन्कार कर दिया। विज्ञप्ति के अनुसार मंदिर की बैंकिंग व्यवस्था भी बैठक में चर्चा का अहम विषय रही। विज्ञप्ति के अनुसार सेवायत सदस्य हिमांशु गोस्वामी ने बताया कि सेवायत सदस्यों ने कहा कि समिति की पिछली बैठक में निजी बैंकों को फण्ड नहीं देने के निर्देश के बावजूद निजी बैंक में फण्ड जमा किया जा रहा है। विज्ञप्ति के अनुसार इस पर सेवायत सदस्यों ने संबंधित दस्तावेज और कागजात मांगे हैं। विज्ञप्ति के अनुसार साथ ही, समिति द्वारा कार्यभार संभालने के बाद से बैंकों ने मंदिर और श्रद्धालुओं के हित में कौन-कौन से कार्य किए तथा उन पर कितना खर्च हुआ, इसका भी विवरण मांगा गया। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने आज रेल मंत्रालय की कुल 10,783 करोड़ रुपये की लागत वाली तीन परियोजनाओं को मंजूरी दी। इन परियोजनाओं में शामिल हैं:
खड़गपुर – झारसुगुड़ा (बागडेही) चौथी लाइनकटनी – पेंड्रा रोड चौथी लाइनबिलासपुर (उस्लापुर) – पेंड्रा रोड तीसरी लाइनलाइन क्षमता में वृद्धि से आवागमन में उल्लेखनीय सुधार होगा, जिससे भारतीय रेलवे की परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता बेहतर होगी। ये मल्टी-ट्रैकिंग प्रस्ताव परिचालन को सुव्यवस्थित करने और भीड़भाड़ कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘न्यू इंडिया’ के विजन के अनुरूप हैं, जिसके तहत क्षेत्र के व्यापक विकास के माध्यम से लोगों को “आत्मनिर्भर” बनाया जाएगा और रोजगार तथा स्वरोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी।इन परियोजनाओं की योजना पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत बनाई गई है, जिसमें एकीकृत योजना और हितधारकों के साथ परामर्श के माध्यम से मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक दक्षता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। ये परियोजनाएं लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की आवाजाही के लिए निर्बाध कनेक्टिविटी उपलब्ध कराएंगी।पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 14 जिलों को कवर करने वाली ये तीन परियोजनाएं भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 656 किलोमीटर की वृद्धि करेंगी। प्रस्तावित मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं से लगभग 4,790 गांवों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी, जिनकी कुल आबादी करीब 56 लाख है।प्रस्तावित क्षमता वृद्धि से देश के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों तक रेल कनेक्टिविटी बेहतर होगी। इनमें तारातारिणी मंदिर, श्री क्षेत्र जगन्नाथ मंदिर (झारसुगुड़ा के निकट प्राचीन मंदिर), बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, विराटेश्वर मंदिर, अमरकंटक मंदिर, ज्वालेश्वर धाम, अचानकमार टाइगर रिजर्व, खुटाघाट बांध, मल्हार पुरातात्विक स्थल, रतनपुर महामाया मंदिर आदि शामिल हैं।प्रस्तावित परियोजनाएं कोयला, सीमेंट, लौह एवं इस्पात आदि जैसी वस्तुओं के परिवहन के लिए महत्वपूर्ण मार्ग हैं। क्षमता विस्तार के इन कार्यों से अतिरिक्त माल ढुलाई यातायात में 27 एमटीपीए (मिलियन टन प्रति वर्ष) की वृद्धि होने की संभावना है।रेलवे परिवहन का पर्यावरण-अनुकूल और ऊर्जा-कुशल साधन है। इन परियोजनाओं से देश के जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने और लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही, लगभग 12 करोड़ लीटर तेल आयात में कमी आएगी और लगभग 62 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन कम होगा, जो 2.48 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है। - नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 14 जिलों को कवर करने वाली तीन मल्टीट्रैकिंग रेल परियोजनाओं को मंजूरी दी है। कुल 10,783 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाली इन परियोजनाओं के तहत भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में करीब 656 किलोमीटर की वृद्धि होगी। परियोजनाओं को 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे रेल परिचालन की क्षमता बढ़ने के साथ भीड़भाड़ कम होगी और यात्रियों तथा माल की आवाजाही अधिक सुगम हो सकेगी।तीन प्रमुख रेल परियोजनाओं को मंजूरीप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने रेल मंत्रालय की तीन परियोजनाओं को मंजूरी दी। इनमें खड़गपुर-झारसुगुड़ा (बागदेही) चौथी लाइन, कटनी-पेंड्रा रोड चौथी लाइन और बिलासपुर (उसलापुर)-पेंड्रा रोड तीसरी लाइन शामिल हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने से संबंधित रेल मार्गों पर अतिरिक्त लाइन क्षमता उपलब्ध होगी।14 जिलों और 4,790 गांवों को मिलेगा लाभतीनों परियोजनाएं पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 14 जिलों से होकर गुजरेंगी। करीब 656 किलोमीटर के अतिरिक्त रेल नेटवर्क से लगभग 4,790 गांवों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। इससे करीब 56 लाख की आबादी को सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलेगा।परिचालन क्षमता बढ़ने से घटेगी भीड़मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं से रेल मार्गों की क्षमता बढ़ेगी, जिससे ट्रेनों के आवागमन में सुधार होगा। रेलवे के मुताबिक, इससे परिचालन अधिक सुचारु होगा और महत्वपूर्ण रेल मार्गों पर भीड़भाड़ कम करने में मदद मिलेगी। इसके परिणामस्वरूप भारतीय रेल की प्रचालनगत दक्षता और सेवा विश्वसनीयता भी बढ़ेगी।गति शक्ति मास्टर प्लान के तहत परियोजनाएंइन परियोजनाओं को प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य एकीकृत योजना और विभिन्न हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय के माध्यम से मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स दक्षता को बढ़ावा देना है। नई रेल क्षमता से लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की निर्बाध आवाजाही को मजबूती मिलेगी।पर्यटन स्थलों तक बेहतर रेल संपर्करेल क्षमता बढ़ने से क्षेत्र के कई प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थलों तक कनेक्टिविटी में सुधार होगा। इनमें तारातारिणी मंदिर, श्री क्षेत्र जगन्नाथ मंदिर, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, विराटेश्वर मंदिर, अमरकंटक मंदिर, ज्वालेश्वर धाम, अचानकमार टाइगर रिजर्व, खुटाघाट बांध, मल्हार पुरातात्विक स्थल और रतनपुर महामाया मंदिर समेत कई प्रमुख स्थल शामिल हैं।माल ढुलाई के लिए महत्वपूर्ण मार्गप्रस्तावित रेल परियोजनाएं कोयला, सीमेंट, लोहा और इस्पात जैसी प्रमुख वस्तुओं के परिवहन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हैं। क्षमता वृद्धि से इन मार्गों पर हर साल करीब 27 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई की क्षमता विकसित होगी। इससे औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलेगी और माल परिवहन की दक्षता बढ़ेगी।रेलवे से घटेगी लॉजिस्टिक्स लागतरेलवे को पर्यावरण-अनुकूल और ऊर्जा दक्ष परिवहन माध्यम बताते हुए सरकार ने कहा कि इन परियोजनाओं से देश के जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने में भी मदद मिलेगी। अधिक माल को रेल के जरिए परिवहन किए जाने से सड़क परिवहन पर दबाव कम होगा और देश की लॉजिस्टिक्स लागत घटाने में योगदान मिलेगा।12 करोड़ लीटर तेल आयात में कमी का अनुमानपरियोजनाओं से परिवहन क्षेत्र में ईंधन की खपत कम होने की उम्मीद है। सरकार के अनुसार, इन परियोजनाओं से हर साल करीब 12 करोड़ लीटर तेल के आयात में कमी आ सकती है। साथ ही करीब 62 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन घटने का अनुमान है, जो करीब 2.48 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है।रोजगार और क्षेत्रीय विकास को मिलेगा बढ़ावासरकार के मुताबिक, इन रेल परियोजनाओं का उद्देश्य केवल रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ाना नहीं है, बल्कि संबंधित क्षेत्रों के व्यापक आर्थिक विकास को गति देना भी है। बेहतर कनेक्टिविटी से रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ने तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है। इससे क्षेत्र के लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में भी मदद मिलेगी।
- मुंबई. घरों में बनने वाले भोजन की लागत अगस्त में मामूली रूप से बढ़ गई। शाकाहारी थाली की लागत सालाना आधार पर एक प्रतिशत बढ़कर 29.5 रुपये रही, जबकि मांसाहारी थाली की लागत पांच प्रतिशत बढ़कर 57.5 रुपये हो गई। क्रिसिल इंटेलिजेंस की मंगलवार को जारी मासिक रिपोर्ट के मुताबिक, प्याज, खाद्य तेल, चावल और रसोई गैस (एलपीजी) की ऊंची कीमतों ने थाली की लागत को ऊंचा बनाए रखा। हालांकि, आलू और टमाटर की कीमतों में गिरावट से कुल बढ़ोतरी सीमित रही। रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त में प्याज की कीमत सालाना आधार पर 43 प्रतिशत बढ़कर 40 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई, जो एक साल पहले 28 रुपये प्रति किलोग्राम थी। महाराष्ट्र में मार्च-अप्रैल में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से आपूर्ति प्रभावित होने के कारण प्याज की कीमत बढ़ी।इस दौरान खाद्य तेल की कीमत में 11 प्रतिशत और एलपीजी यानी रसोई गैस की कीमत में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। वहीं, आलू की कीमत 12 प्रतिशत और टमाटर की कीमत 28 प्रतिशत घटने से थाली की लागत में कुल बढ़ोतरी को सीमित करने में मदद मिली। इसके परिणामस्वरूप शाकाहारी थाली की लागत में सालाना और मासिक दोनों आधार पर एक-एक प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी हुई। मुर्गे के मांस की कीमत में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी के कारण मांसाहारी थाली की लागत सालाना आधार पर पांच प्रतिशत बढ़कर 57.5 रुपये हो गई। हालांकि, जुलाई की 58.3 रुपये की लागत की तुलना में अगस्त में यह एक प्रतिशत कम रही। क्रिसिल इंटेलिजेंस के निदेशक पुषन शर्मा ने कहा, ''अगले दो-तीन महीनों तक प्याज की कीमतें ऊंची बनी रहने का अनुमान है। इसकी वजह रबी फसल की कम आपूर्ति और खरीफ फसल की आवक में देरी है।'' मासिक आधार पर अगस्त में प्याज की कीमत 17 प्रतिशत बढ़ी, लेकिन टमाटर की कीमत में सात प्रतिशत की गिरावट से इसका असर सीमित रहा। रिपोर्ट के मुताबिक, हिंदुओं के लिए पवित्र माने जाने वाले श्रावण माह के कारण मुर्गे के मांस की कीमत में चार प्रतिशत की मासिक गिरावट आई। इससे अगस्त में मांसाहारी थाली की लागत जुलाई के मुकाबले एक प्रतिशत घट गई।







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