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नयी दिल्ली. वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह ने रविवार को कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान पश्चिमी मोर्चे पर 1,200 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में और 200 किलोमीटर भीतर तक भारतीय वायुसेना के सटीक हमलों ने यह साबित कर दिया कि कोई भी लक्ष्य उसकी पहुंच से बाहर नहीं है। वायुसेना प्रमुख की इस टिप्पणी को पाकिस्तान के लिए चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
वायुसेना प्रमुख ने 'पीटीआई-भाषा' को दिए एक विशेष साक्षात्कार में कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' ने वायुसेना के क्षमता-केंद्रित दृष्टिकोण की पुष्टि की है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस अभियान ने किसी भी संकट में सबसे पहले कार्रवाई करने वाली शक्ति और दुश्मन को हमला करने से रोकने की प्रभावी सैन्य क्षमता के रूप में वायुसेना की निर्णायक भूमिका की एक बार फिर पुष्टि की है। हालांकि, वायुसेना प्रमुख ने आगाह किया कि वायुसेना के इस दृष्टिकोण की पुष्टि होने का मतलब यह नहीं है कि ''हम यहीं रुक जाएं। हमें अपनी क्षमताओं को और मजबूत करने तथा उनका विस्तार करने की जरूरत है।'' 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान चार दिन तक इस अभियान की कमान संभालने वाले वायुसेना प्रमुख ने कहा, ''सैन्य अभियान के स्तर पर यह सीख सबसे अहम है कि हमें हमेशा अपने पास कई विकल्प रखने चाहिए और दुश्मन के अपनी रणनीति बदलने पर तेजी से उसके अनुसार खुद को ढालने की क्षमता बनाए रखनी चाहिए।''
उन्होंने कहा, ''क्षमता-केंद्रित बल इस मामले में स्वाभाविक रूप से बेहतर होता है क्योंकि वह किसी एक साधन पर निर्भर रहने के बजाय कई तरह के साधनों का इस्तेमाल कर सकता है। इसी लचीलेपन की वजह से हम जरूरत के अनुसार अपनी जवाबी कार्रवाई तय कर पाए और संघर्ष को बढ़ने से रोकने में सफल रहे।'' पहलगाम आतंकवादी हमले के जवाब में शुरू किए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत पिछले साल मई में भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाकों में मौजूद आतंकवादी ढांचे पर सटीक हमले किए। यह 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के बाद से भारत की ओर से सीमा पार की गई सबसे साहसिक सैन्य कार्रवाई थी। उन्होंने कहा, ''ऑपरेशन सिंदूर ने साबित कर दिया है कि हमने जो रास्ता चुना है, वह सही है। हम और भी अधिक दृढ़ संकल्प के साथ इस रास्ते पर आगे बढ़ते रहेंगे ताकि अगर देश को फिर हमारी जरूरत पड़े तो भारतीय वायुसेना और भी तेजी से, अधिक सटीक और निर्णायक ढंग से देश की शर्तों पर कार्रवाई कर सके।'' वायुसेना प्रमुख ने यह भी बताया कि स्वदेश में विकसित कुछ हथियार प्रणालियों ने ''शानदार'' प्रदर्शन किया और दुश्मन के इलाके में भीतर तक जाकर उसे भारी नुकसान पहुंचाया। साथ ही पूरे अभियान के दौरान वायुसेना ने ''किसी अन्य व्यक्ति या संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचाने'' की अपनी प्रतिबद्धता भी पूरी की।
एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा, ''ऑपरेशन सिंदूर मुख्य रूप से वायुसेना के क्षमता-केंद्रित दृष्टिकोण की पुष्टि था। हमने अलग-अलग विमानों और हथियार प्रणालियों के बारे में सोचने के बजाय क्षमता के आधार पर विचार करना शुरू किया है जिसके तहत हर विमान, सेंसर, हथियार और नेटवर्क को एकीकृत किया गया।'' उन्होंने कहा, ''ऑपरेशन सिंदूर ने सैन्य अभियानों के दौरान उसी दृष्टिकोण को साकार किया और यह सफल रहा। इसने देश में किसी भी संकट के समय सबसे पहले कार्रवाई करने वाली शक्ति और दुश्मन को हमला करने से रोकने की प्रभावी सैन्य क्षमता के रूप में वायु शक्ति की निर्णायक भूमिका को फिर से साबित किया। साथ ही, इसने गति, सटीकता, एकीकरण और परिस्थितियों के अनुरूप ढलने की क्षमता के निरंतर महत्व की भी पुष्टि की।'' एयर चीफ मार्शल ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान अपनाई गई रणनीति, सामरिक विकल्प, चुनौतियों और मारक क्षमता से जुड़े एक सवाल के जवाब में कहा कि इस अभियान की सफलता किसी एक हथियार या मंच की वजह से नहीं मिली, बल्कि यह सटीक खुफिया जानकारी, नेटवर्क आधारित अभियान, दुश्मन की मारक सीमा से बाहर रहकर हमला करने वाले हथियारों, सटीक निशाना लगाने वाले हथियारों, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, कई स्तरों वाली वायु रक्षा प्रणाली एवं मानवरहित हवाई प्रणालियों (यूएएस) का मुकाबला करने की क्षमताओं का नतीजा था जहां सभी ने एक प्रणाली के रूप में मिलकर काम किया। उन्होंने कहा, ''कार्रवाई के मोर्चे पर पूरे पश्चिमी मोर्चे में 1,200 किलोमीटर लंबे क्षेत्र और 200 किलोमीटर भीतर तक पूरे इलाके में सटीक निशाना लगाने की क्षमता ने यह साबित कर दिया कि भारतीय वायुसेना की पहुंच से कोई भी लक्ष्य दूर नहीं है।'' उन्होंने कहा, ''हमारे स्वदेशी हथियारों ने शानदार प्रदर्शन किया और दुश्मन के इलाके में भीतर तक जाकर भारी नुकसान पहुंचाया। साथ ही हमने यह सुनिश्चित किया कि किसी भी नागरिक या असैन्य संपत्ति को कोई नुकसान नहीं हो।'' वायुसेना प्रमुख ने कहा कि भारत की स्वदेशी नेटवर्क आधारित वायु रक्षा प्रणाली ने पाकिस्तानी सेना की ओर से बड़ी संख्या में दागे गए ड्रोन और दुश्मन की मारक सीमा से बाहर रहकर हमला करने वाले हथियारों को विफल कर दिया। इससे देश को आत्मविश्वास के साथ कार्रवाई करने में मदद मिली।'' उन्होंने कहा कि अब वायुसेना को अपनी युद्धक क्षमता, खुफिया जानकारी, निगरानी और टोही (आईएसआर) क्षमताओं, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, ड्रोन रोधी क्षमता, मजबूत नेटवर्क और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित निर्णय सहायता प्रणाली को बेहतर बनाने पर ध्यान देना होगा। साथ ही, हमें मजबूत रसद, रखरखाव, बुनियादी ढांचे और इन सबसे ऊपर उठकर स्वदेशी उत्पादन के जरिए लंबे समय तक उच्च-तीव्रता वाले सैन्य अभियानों को जारी रखने की क्षमता विकसित करनी होगी। इन सभी मोर्चों पर पहले से ही काम जारी है। एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा कि भारतीय वायुसेना का दृष्टिकोण विकसित भारत 2047 के व्यापक राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप है क्योंकि विकसित भारत को सुरक्षित और संकटों का सामना करने में सक्षम देश भी होना चाहिए। वायुसेना प्रमुख ने कहा कि भारतीय वायुसेना के लिए इसका अर्थ ऐसी बहु-क्षेत्रीय वायु शक्ति के रूप में विकसित होना है जो हर तरह के संघर्ष में भारत के बढ़ते आर्थिक, तकनीकी और रणनीतिक हितों की रक्षा कर सके। उन्होंने कहा, ''इस दृष्टिकोण को साकार करने के लिए पूरे राष्ट्र के स्तर पर प्रयास करने होंगे और भारतीय वायुसेना इसमें अपनी पूरी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।'' उन्होंने कहा, ''वर्ष 2047 तक हमारा लक्ष्य दुनिया की सबसे सक्षम, नवोन्मेषी और तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर वायु सेनाओं में से एक बनना है, ऐसी शक्ति जो विकसित भारत की रक्षक होने के साथ-साथ उसकी प्रगति की प्रेरक भी बने।'' -
भुवनेश्वर. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि अब युद्ध केवल पारंपरिक तरीकों से नहीं लड़े जाते, बल्कि अर्थव्यवस्थाओं को निशाना बनाकर भी लड़े जाते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की बैंकिंग प्रणाली को ''साइबर आतंकवादियों'' से सुरक्षित रखने की जरूरत पर जोर दिया। यहां भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 169 करोड़ रुपये की लागत से बने डेटा सेंटर और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान का उद्घाटन करने के बाद एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इन सुविधाओं से ओडिशा और देश के लोगों को काफी लाभ होगा। प्रधानमंत्री ने कहा, ''हम सभी जानते हैं कि आजकल युद्ध केवल हथियारों से नहीं लड़े जाते। किसी देश को कमजोर करना हो, तो उसकी अर्थव्यवस्था पर हमला किया जा सकता है। भारत जैसे-जैसे आर्थिक रूप से मजबूत हो रहा है, वैसे-वैसे यह भी जरूरी है कि हम अपनी बैंकिंग प्रणाली को साइबर लुटेरों और साइबर आतंकवादियों से सुरक्षित रखें।'' उन्होंने कहा कि साइबर खतरों का स्वरूप भी बदल रहा है और देश पुरानी प्रणालियों, प्रशिक्षण व्यवस्था तथा उपकरणों के सहारे इन नयी चुनौतियों का सामना नहीं कर सकता। मोदी ने कहा कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए देश को आधुनिक बुनियादी ढांचे और कुशल मानव संसाधन की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ऐसे में आरबीआई के डेटा सेंटर और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान जैसी संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। इन नयी सुविधाओं को भारत की नयी प्राथमिकताओं का प्रतीक बताते हुए मोदी ने कहा कि पूर्वी भारत 'विकसित भारत' के शक्तिशाली विकास इंजन के रूप में उभर रहा है। मोदी ने विपक्षी कांग्रेस पर भी तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि उसके शासनकाल में आम लोगों को बैंकिंग सेवाओं से वंचित रखा गया। उन्होंने कहा कि गरीबों के नाम पर 1960 और 1970 के दशक में बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया था, लेकिन 2014 में पता चला कि देश की आधी से अधिक आबादी बैंकिंग व्यवस्था से बाहर थी। उन्होंने कहा कि उस समय मध्यम वर्ग के लिए भी बैंक से कर्ज लेना सपना था, जबकि गरीबों, छोटे किसानों और महिलाओं के लिए तो इसकी कल्पना करना भी मुश्किल था।
प्रधानमंत्री ने कहा, ''हालांकि, कांग्रेस के शासनकाल में अमीर और प्रभावशाली लोगों को फोन पर ही हजारों करोड़ रुपये का कर्ज मिल जाता था। इस कुप्रबंधन के कारण भारतीय बैंकिंग प्रणाली गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) की समस्या के प्रति संवेदनशील हो गई थी। बैंकिंग प्रणाली ढहने की कगार पर थी।'' उन्होंने कहा कि 2014 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सत्ता में आने के बाद स्थिति बदल गई। अब भारत का बैंकिंग क्षेत्र दुनिया के सबसे कुशल क्षेत्रों में शामिल है और लोगों को चौबीसों घंटे बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध हैं। मोदी ने कहा कि छोटे उद्यमियों, पारंपरिक कारीगरों, रेहड़ी-पटरी वालों और असंगठित क्षेत्र के कामगारों को पहली बार औपचारिक बैंकिंग सेवाओं का लाभ मिला है। उन्होंने कहा, ''एक पूर्व प्रधानमंत्री ने ओडिशा की धरती से कहा था कि दिल्ली से भेजे गए हर रुपये में से केवल 15 पैसे ही लोगों तक पहुंचते हैं। आज पूरी राशि लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंचती है। करीब 60 करोड़ जनधन खाते खोले जा चुके हैं।''
उन्होंने कहा कि पहले डेबिट और क्रेडिट कार्ड आम लोगों के लिए विलासिता की वस्तुएं थे, लेकिन अब ये सभी के लिए उपलब्ध हैं। मोदी ने कहा, ''हमारे लिए विकास का अर्थ भारत का संतुलित विकास और गांवों तथा छोटे शहरों के लिए अवसर उपलब्ध कराना है।'' उन्होंने कहा कि पिछला दशक उन लोगों तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने के लिए समर्पित था, जो इनसे वंचित थे। आने वाला दशक बैंकिंग सेवाओं को अधिक कुशल और भरोसेमंद बनाने पर केंद्रित होगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि ओडिशा खनन से लेकर माइक्रोचिप तक के क्षेत्रों में अपना भविष्य गढ़ेगा और युवाओं के लिए अवसरों के कई द्वार खुलेंगे। इस कार्यक्रम में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा, ओडिशा के राज्यपाल ब्रजमोहन राम, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी मौजूद थे। आरबीआई का डेटा सेंटर 18.55 एकड़ में फैला है। इसकी आधारशिला तत्कालीन आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने 22 मार्च, 2023 को रखी थी। सरकार ने बयान में कहा कि डेटा सेंटर में भुगतान और निपटान से जुड़ी महत्वपूर्ण प्रणालियों के साथ आरबीआई की अन्य प्रमुख पहल भी संचालित होंगी। -
बिरला ने रूसी ड्यूमा अध्यक्ष के साथ बैठक की
नयी दिल्ली. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के आयोजन की पूर्व संध्या पर रविवार को रूसी संसद के निचले सदन 'ड्यूमा' के अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोदिन के नेतृत्व वाले एक संसदीय प्रतिनिधिमंडल के साथ यहां द्विपक्षीय बैठक की। लोकसभा सचिवालय ने एक बयान में बताया कि दोनों पक्षों ने वैश्विक मंचों पर आपसी सहयोग को मजबूत करने और आतंकवाद के खिलाफ मिलकर प्रयास करने पर जोर दिया। बिरला ने इस मुद्दे पर लगातार समर्थन देने के लिए रूस को धन्यवाद दिया और कहा कि 2027 में दोनों देश अपने राजनयिक संबंधों के 80 साल पूरे होने का जश्न मनाएंगे। उन्होंने भारत-रूस अंतर-संसदीय आयोग की नियमित बैठकें आयोजित करने और संसदीय प्रतिनिधिमंडलों, विशेष रूप से युवा और महिला सांसदों के माध्यम से लोकसभा तथा ड्यूमा के बीच निरंतर संस्थागत जुड़ाव का आह्वान किया। बिरला ने परमाणु ऊर्जा और उद्योग के क्षेत्र में सहयोग के बारे में भी बातचीत की।
उन्होंने 2026 में भारत की अध्यक्षता में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का जिक्र करते हुए, इस समूह के संसदीय सहयोग में रूस की सक्रिय भूमिका की अपील की, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार का आह्वान किया, और स्थायी सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी का समर्थन करने को लेकर मॉस्को को धन्यवाद दिया। वोलोदिन ने संयुक्त व्यापार उपक्रमों को बढ़ावा देने तथा द्विपक्षीय व्यापार एवं निवेश की राह में आने वाली बाधाओं को दूर करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने सांस्कृतिक और मानवीय क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने तथा दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी संपर्क को प्रगाढ़ करने के प्रति रूस की प्रतिबद्धता दोहराई। बिरला ने क्यूबा, मिस्र और बेलारूस के संसदीय प्रतिनिधिमंडलों से भी मुलाकात की।
यह मंच लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता पर भी अलग-अलग सत्र आयोजित करेगा।
बयान के अनुसार, सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस कार्यक्रम में शामिल होंगे और आगंतुक प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों से मुलाकात करेंगे। ब्रिक्स सदस्यों और साझेदार देशों की संसदों की अंतरराष्ट्रीय मामलों की समितियों के अध्यक्षों की एक विशेष बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें संसदीय कूटनीति, क्षमता निर्माण और सर्वोत्तम परंपराओं के आदान-प्रदान पर चर्चा होगी। उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति सी पी राधाकृष्णन विशिष्ट अतिथियों के सम्मान में रात्रिभोज की मेजबानी करेंगे। दो दिवसीय इस सम्मेलन का समापन 27 अक्टूबर को होगा। -
उत्तरकाशी/चमोली। उत्तराखंड के यमुनोत्री धाम में रविवार को मौसम की पहली बर्फबारी से मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे तीर्थयात्रियों में काफी उत्साह देखने को मिला। वहीं, तापमान में गिरावट के बीच केदारनाथ में भी बर्फबारी हुई। इसके साथ ही चारधाम यात्रा अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। यमुनोत्री में बारिश और बर्फबारी तथा केदारनाथ में हिमपात के मद्देनजर मंदिर समिति के एक सदस्य ने तीर्थयात्रियों को जरूरी दवाइयां साथ रखने और धामों की यात्रा के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी। श्री केदारनाथ-बदरीनाथ मंदिर समिति के विशेष आमंत्रित सदस्य विनीत पोस्ती ने तीर्थयात्रियों से सभी जरूरी दवाइयां साथ रखने और यात्रा के दौरान सतर्कता बरतने की अपील की। यमुनोत्री में बर्फबारी देखकर तीर्थयात्री रोमांचित हो उठे। मां यमुना के दर्शन एवं पूजा अर्चना के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं ने आसमान से गिरती बर्फ के बीच प्राकृतिक नजारों का आनंद भी लिया। पंच पंडा समिति के सचिव गिरीश उनियाल ने कहा कि मौसम की पहली बर्फबारी से तीर्थयात्रियों में खासा उत्साह देखा गया। उनियाल ने कहा, "कुछ लोगों के लिए इतने करीब से बर्फबारी देखने का यह पहला मौका था और वे इसे देखकर बेहद खुश थे।" भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने रविवार को उत्तराखंड के उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, चमोली और पिथौरागढ़ जिलों में कुछ स्थानों पर बहुत हल्की से हल्की बारिश या बर्फबारी का पूर्वानुमान जताया था। ग्रीष्मकालीन चारधाम यात्रा के अंतिम चरण में तीर्थयात्रियों की संख्या बढ़ने से यमुनोत्री धाम में फिर से चहल-पहल बढ़ गई है। इससे स्थानीय कारोबारियों को राहत और उम्मीद मिली है, जिनकी आजीविका तीर्थयात्रा पर निर्भर है। कम से कम 6,000 तीर्थयात्री शनिवार को मां यमुना के दर्शन और आशीर्वाद लेने के लिए यमुनोत्री धाम पहुंचे। यमुनोत्री मंदिर समिति के सचिव सुनील उनियाल ने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु ग्रीष्मकालीन तीर्थयात्रा के अंतिम चरण में धाम पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा, "श्रद्धालुओं की इस आमद से न केवल धाम में रौनक बढ़ी है, बल्कि चारधाम यात्रा से जुड़े कारोबारियों को भी लाभ हुआ है।" उनियाल ने बताया कि यमुनोत्री धाम के कपाट छह महीने के शीतकालीन प्रवास के लिए 11 नवंबर को भाई दूज के शुभ अवसर पर बंद कर दिए जाएंगे। सर्दियों के दौरान श्रद्धालु खरसाली स्थित यमुना मंदिर में मां यमुना के दर्शन कर सकेंगे।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को वाराणसी में अरविंद लिमिटेड की अत्याधुनिक गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और उद्योग जगत के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। लगभग 150 करोड़ रुपये के निवेश से स्थापित यह इकाई उत्तर प्रदेश में अरविंद लिमिटेड की पहली विनिर्माण इकाई है। इससे 1,000 से अधिक लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है, जिनमें बड़ी संख्या महिलाओं की होगी।
5.5 एकड़ क्षेत्रफल में फैले इस संयंत्र का कुल निर्मित क्षेत्र लगभग 65,000 वर्ग फुट है। यहां उन्नत स्वचालित सिलाई तकनीक के माध्यम से निटवियर यानी बुने हुए कपड़ों से बने परिधानों का निर्माण किया जाएगा। संयंत्र की संभावित राजस्व क्षमता 250 करोड़ रुपये बताई गई है। इस परियोजना से वाराणसी में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और कौशल विकास के अवसर भी सृजित होंगे। उद्घाटन समारोह में अरविंद लिमिटेड के चेयरमैन संजय लालभाई, वाइस चेयरमैन पुनीत लालभाई और वाइस चेयरमैन कुलिन लालभाई ने प्रधानमंत्री का स्वागत किया।इस दौरान प्रधानमंत्री ने कंपनी के पदाधिकारियों के साथ विनिर्माण इकाई का भ्रमण किया और वहां उपलब्ध आधुनिक उत्पादन सुविधाओं का अवलोकन किया। अरविंद लिमिटेड के चेयरमैन संजय लालभाई ने कहा कि प्रधानमंत्री के हाथों इस इकाई का उद्घाटन होना कंपनी के लिए गौरव का विषय है। लालभाई समूह की यात्रा वर्ष 1897 में शुरू हुई थी और इसका इतिहास भारत की औद्योगिक प्रगति से गहराई से जुड़ा रहा है। कस्तूरभाई लालभाई की संस्थान निर्माण की दूरदर्शी सोच से प्रेरित होकर समूह ने ऐसे उद्यमों में निवेश किया है, जो आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और राष्ट्र निर्माण में योगदान देते हैं।उन्होंने कहा कि वाराणसी में किया गया यह निवेश बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करेगा। कार्यबल में महिलाओं की उल्लेखनीय भागीदारी होगी, जो देश की विकास यात्रा में नारी शक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाती है। अरविंद लिमिटेड निवेश, नवाचार और रोजगार सृजन के माध्यम से भारत के विकास में योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है। अरविंद लिमिटेड के वाइस चेयरमैन पुनीत लालभाई ने कहा कि भारत परिधान विनिर्माण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव के दौर से गुजर रहा है। देश की मजबूत वस्त्र उत्पादन शृंखला, कुशल कार्यबल और वैश्विक बाजार में विविध स्रोतों से खरीद की बढ़ती मांग भारत को दुनिया के प्रमुख विनिर्माण केंद्रों में शामिल होने का अवसर प्रदान करती है।उन्होंने कहा कि इस अवसर का लाभ उठाने के लिए उत्पादन क्षमता, उत्पादकता, सतत विकास और कार्यबल के कौशल विकास में निरंतर निवेश आवश्यक है। वाराणसी की यह इकाई स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और वस्तुओं एवं सेवाओं की खरीद को बढ़ावा देगी। इसके साथ ही आपूर्ति शृंखला, परिवहन और अन्य स्थानीय सेवाओं से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों में भी वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने से कामगारों को अपने गृह क्षेत्रों के आसपास काम करने का अवसर मिलेगा। अरविंद लिमिटेड वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप विनिर्माण क्षमताओं के विकास और दीर्घकालिक आर्थिक मूल्य सृजन के लिए प्रतिबद्ध है।अरविंद लिमिटेड के वाइस चेयरमैन कुलिन लालभाई ने कहा कि उत्तर प्रदेश तेजी से देश के प्रमुख विनिर्माण गंतव्यों में अपनी पहचान स्थापित कर रहा है। राज्य में बुनियादी ढांचे के विकास, औद्योगिक विस्तार, बेहतर कनेक्टिविटी और कौशल विकास पर दिया जा रहा जोर उद्योगों को अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा कि टेक्सटाइल और परिधान उद्योग के विस्तार के साथ उत्तर प्रदेश भारत के विनिर्माण तंत्र को मजबूत करने, रोजगार के नए अवसर पैदा करने और दीर्घकालिक निवेश आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की स्थिति में है।वाराणसी में स्थापित यह ग्रीनफील्ड परियोजना अरविंद लिमिटेड के गारमेंटिंग व्यवसाय के विस्तार और वर्टिकल इंटीग्रेशन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इस इकाई के माध्यम से कंपनी अपने यहां निर्मित निटेड फैब्रिक यानी बुने हुए कपड़े से तैयार परिधान बना सकेगी। इससे कंपनी को अपने मौजूदा ग्राहकों को अधिक व्यापक उत्पाद उपलब्ध कराने और उनके साथ व्यावसायिक संबंधों को मजबूत करने में मदद मिलेगी। भारत में वस्त्र उत्पादन की मजबूत क्षमता है, लेकिन तैयार परिधानों के निर्माण की अतिरिक्त क्षमता विकसित करना भी जरूरी है। यह संयंत्र इस दिशा में योगदान देगा।हाल ही में हुए मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के बाद यूरोप और ब्रिटेन के बाजारों में उपलब्ध नए अवसरों का लाभ उठाने में भी इस इकाई की महत्वपूर्ण भूमिका रहने की उम्मीद है। इससे कंपनी के उत्पादों की पहुंच बढ़ाने और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत करने में मदद मिलेगी। इस विनिर्माण इकाई को उत्पादन दक्षता, सतत विकास और श्रमिक कल्याण को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। संयंत्र में स्थापित उन्नत स्वचालित उत्पादन प्रणालियों से उत्पादकता बढ़ाने, गुणवत्ता में एकरूपता बनाए रखने और बड़े पैमाने पर उत्पादन को सुगम बनाने में मदद मिलेगी। कंपनी ने कर्मचारियों की आवासीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए समर्पित श्रमिक हॉस्टल भी स्थापित किए हैं।उत्पादन गतिविधियों के विस्तार के साथ आवासीय सुविधाओं को और बढ़ाने की योजना है। इससे कर्मचारियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और संयंत्र के संचालन को सुचारु बनाए रखने में मदद मिलेगी। अरविंद लिमिटेड की इस परियोजना से वाराणसी और उत्तर प्रदेश के आर्थिक विकास को गति मिलने की उम्मीद है। संयंत्र में 1,000 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने के साथ आपूर्ति शृंखला, लॉजिस्टिक्स और स्थानीय सेवाओं से जुड़े कारोबार को भी बढ़ावा मिलेगा। परियोजना से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास के अवसर उपलब्ध होंगे। साथ ही, परिधान निर्माण से जुड़े सहायक उद्योगों और स्थानीय कारोबारी गतिविधियों को भी लाभ मिलने की संभावना है।यह निवेश उत्तर प्रदेश को टेक्सटाइल और अपैरल विनिर्माण के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अरविंद लिमिटेड वस्त्र और परिधान उद्योग से लेकर रिटेल तक विभिन्न क्षेत्रों में कारोबार करने वाला प्रमुख औद्योगिक समूह है। कंपनी का व्यवसाय टेक्सटाइल, परिधान, उन्नत सामग्री, पर्यावरण समाधान, दूरसंचार और ओम्नीचैनल कॉमर्स सहित कई क्षेत्रों में फैला है। कंपनी फाइबर से फैशन तक एकीकृत समाधान उपलब्ध कराती है और वैश्विक ग्राहकों को सेवाएं प्रदान करती है। दुनिया के प्रमुख फैब्रिक आपूर्तिकर्ताओं में शामिल अरविंद लिमिटेड नवाचार, सतत विकास और विनिर्माण क्षेत्र में उत्कृष्टता पर विशेष ध्यान देता है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वागत में रविवार को वाराणसी में जनसैलाब उमड़ पड़ा। पुलिस लाइन से नमो घाट तक करीब सात किलोमीटर लंबे मार्ग पर लोगों ने पुष्प वर्षा, ढोल-नगाड़ों और ‘हर-हर महादेव’ के उद्घोष के साथ उनका अभिनंदन किया। प्रधानमंत्री सड़क मार्ग से अपने काफिले के साथ नमो घाट पहुंचे, जहां उन्हें भारतीय वायुसेना के एयर शो में शामिल होना है। इस दौरान लोगों में प्रधानमंत्री की एक झलक पाने के लिए खासा उत्साह देखने को मिला।
प्रधानमंत्री मोदी का काफिला पुलिस लाइन से सांस्कृतिक संकुल, चौकाघाट, कज्जाकपुरा और राजघाट पुल होते हुए नमो घाट पहुंचा। मार्ग में जगह-जगह स्वागत मंच बनाए गए थे और बड़ी संख्या में लोग बैरिकेडिंग के दोनों ओर खड़े होकर उनके आगमन का इंतजार कर रहे थे। भदऊचुंगी समेत कई स्थानों पर समर्थकों की भारी भीड़ जुटी। लोगों का उत्साह देखकर प्रधानमंत्री ने कुछ स्थानों पर वाहन से बाहर निकलकर हाथ हिलाते हुए उनका अभिवादन किया। इस दौरान उनके काफिले पर फूलों की पंखुड़ियां बरसाई गईं और देशभक्ति गीतों के साथ स्वागत किया गया।नमो घाट पहुंचने पर वायु सेना के अधिकारियों और भाजपा नेताओं ने प्रधानमंत्री का स्वागत किया। गंगा तट पर आयोजित कार्यक्रम स्थल पर ‘नमो-नमो’ के उद्घोष के बीच प्रधानमंत्री ने लोगों का अभिवादन स्वीकार किया। स्वागत के लिए जुटे लोगों में विभिन्न समुदायों के लोग शामिल रहे। घाटों और आसपास के इलाकों में उत्सव जैसा माहौल दिखाई दिया। प्रधानमंत्री इससे पहले मिर्जामुराद क्षेत्र के खोचवां में अरविंद मिल लिमिटेड की नई टेक्सटाइल इकाई का उद्घाटन कर चुके हैं। कई करोड़ रुपये की लागत से सात एकड़ में स्थापित इस इकाई में विभिन्न प्रकार के परिधानों का उत्पादन किया जाएगा।इसके बाद वह भारतीय वायुसेना के एयर शो में शामिल होने के लिए नमो घाट पहुंचे। भारतीय वायुसेना के 94वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित एयर शो को ‘विंग्स ओवर गंगा’ नाम दिया गया है। इसमें करीब 100 विमानों के हिस्सा लेने की जानकारी दी गई है, जिनमें राफेल और सुखोई जैसे 52 लड़ाकू विमान भी शामिल हैं। एयर शो के दौरान लड़ाकू विमानों के साथ हेलीकॉप्टरों की हवाई प्रस्तुतियां भी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।रविवार को कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही नमो घाट और आसपास के घाटों पर लोगों की भीड़ जुटने लगी थी। सुबह से ही दर्शक घाटों की सीढ़ियों और अन्य निर्धारित स्थानों पर बैठकर आसमान में होने वाले हवाई करतबों का इंतजार करते नजर आए। गंगा के दूसरे किनारे डोमरी, बहादुरपुर और कटेसर समेत आसपास के इलाकों में भी लोगों की भीड़ जुटी। भारतीय वायुसेना की सारंग हेलीकॉप्टर प्रदर्शन टीम ने भी अपने समन्वित हवाई करतबों से दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।ध्रुव हेलीकॉप्टरों से बनी टीम ने गंगा के ऊपर एक साथ उड़ान भरते हुए सटीक तालमेल, नियंत्रित मोड़ और समूह में बदलती आकृतियों का प्रदर्शन किया। घाटों पर मौजूद दर्शकों ने हेलीकॉप्टरों की इस प्रस्तुति को उत्सुकता से देखा। प्रधानमंत्री के दौरे और एयर शो को देखते हुए वाराणसी में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। पुलिस और प्रशासन की टीमें प्रमुख मार्गों तथा कार्यक्रम स्थल पर मुस्तैद रहीं। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई। -
नई दिल्ली। मां गंगा की अविरल धारा, काशी के ऐतिहासिक घाट और आसमान में गूंजते भारतीय लड़ाकू विमानों की गगनभेदी गर्जना। कहीं राफेल की तेज रफ्तार, कहीं सुखोई की आक्रामक उड़ान, कहीं स्वदेशी तेजस के हैरतअंगेज हवाई करतब तो कहीं सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम की आसमान पर उकेरी गई कलात्मक आकृतियां। आध्यात्मिक नगरी काशी रविवार को भारतीय वायुसेना के शौर्य, साहस, तकनीकी सामर्थ्य और पेशेवर दक्षता की साक्षी बनी। मां गंगा के ऊपर आयोजित भव्य एयर शो ‘विंग्स ओवर गंगा’ में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारतीय वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ के अवसर पर वायु शक्ति का अद्भुत प्रदर्शन देखा।
इस ऐतिहासिक आयोजन में सैन्य विमानन की विरासत, आधुनिक युद्धक क्षमता, स्वदेशी तकनीक और राष्ट्र की सुरक्षा के प्रति वायु योद्धाओं के समर्पण का प्रभावशाली संगम देखने को मिला। काशी के आसमान में जब विमानों की गर्जना गूंजी तो गंगा के दोनों तटों पर मौजूद दर्शकों की निगाहें आसमान पर टिक गईं। हर फॉर्मेशन के साथ रोमांच बढ़ता गया और हर करतब के बाद तालियों की गड़गड़ाहट वायु योद्धाओं के साहस और कौशल का अभिनंदन करती रही। यह केवल विमानों की उड़ान का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि बदलते समय के साथ भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता, युद्धक तैयारी, सटीक प्रहार क्षमता और तकनीकी विकास की यात्रा का जीवंत प्रस्तुतिकरण था।कार्यक्रम की शुरुआत भारतीय वायुसेना की प्रसिद्ध सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम के प्रदर्शन के साथ हुई। हेलीकॉप्टरों के बीच सटीक तालमेल, नियंत्रित गति और समन्वित हवाई करतबों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। इसके बाद वायुसेना प्रमुख एवं भारतीय वायुसेना के समस्त वायु योद्धाओं की ओर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का स्वागत और अभिनंदन किया गया। वायुसेना प्रमुख ने इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री को स्मृति चिह्न भेंट किया। समारोह में भारतीय वायुसेना के 94 गौरवशाली वर्षों की यात्रा को काशी की आध्यात्मिक विरासत से जोड़ते हुए कर्तव्य, त्याग और राष्ट्र सेवा के भाव को रेखांकित किया गया।फ्लाईपास्ट के अगले चरण में तीन एमआई-17 वी5 हेलीकॉप्टरों की ‘ओंकार’ फॉर्मेशन ने प्रवेश किया। ग्रुप कैप्टन अनुज गुप्ता के नेतृत्व में उड़ रहे हेलीकॉप्टरों पर राष्ट्रीय ध्वज और भारतीय वायुसेना के ध्वज लहरा रहे थे। भगवान शिव से जुड़े पवित्र ‘ओंकार’ के नाम वाली इस संरचना ने राष्ट्रभक्ति और आध्यात्मिक आस्था को एक साथ प्रस्तुत किया। इसके बाद ग्रुप कैप्टन दीपांकर दास के नेतृत्व में तीन चेतक हेलीकॉप्टरों की ‘गंगा’ फॉर्मेशन ने काशी के आकाश में प्रवेश किया। मां गंगा के प्रति श्रद्धा और सम्मान व्यक्त करने के लिए हेलीकॉप्टरों से पुष्प वर्षा की गई। आकाश से बरसते फूलों और नीचे बहती गंगा के बीच बना यह दृश्य समारोह के सबसे भावपूर्ण क्षणों में शामिल रहा।इसके बाद आसमान में भारतीय वायुसेना के शक्तिशाली सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान की गर्जना सुनाई दी। ‘रुद्र’ कॉल साइन के साथ विंग कमांडर एस. भार्गव के नेतृत्व में विमान ने अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई। इसी क्रम में सुखोई-30 एमकेआई से जुड़े हवाई निगरानी और टोही कौशल का भी प्रदर्शन किया गया। स्क्वाड्रन लीडर निखिल बाबू ने ‘शंकर’ कॉल साइन के साथ इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल प्रणाली का उपयोग करते हुए वायुसेना की इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस (आईएसआर) क्षमताओं का परिचय दिया। इसके बाद ‘भागीरथी’ फॉर्मेशन में लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (एलसीएच) और अमेरिकी अपाचे अटैक हेलीकॉप्टरों का सटीक समन्वय दिखाई दिया। ग्रुप कैप्टन अनुभव महेंद्र के नेतृत्व वाली इस संरचना ने आधुनिक युद्धक्षेत्र में हेलीकॉप्टरों की भूमिका और उनकी परिचालन उपयोगिता को प्रदर्शित किया। ‘त्रिदेव’ फॉर्मेशन ने तीनों सेनाओं के संयुक्त संकल्प को प्रदर्शित किया।भारतीय नौसेना के कामोव-31 हेलीकॉप्टर और भारतीय वायु सेना तथा थल सेना के एएलएच मार्क-3 हेलीकॉप्टरों का साझा प्रदर्शन सैन्य सेवाओं के बीच समन्वय और संयुक्त अभियान क्षमता का प्रतीक बना। इसका नेतृत्व भारतीय नौसेना के कैप्टन दिव्येंदु शर्मा ने किया। तीनों सेनाओं का संदेश एक ही था- तीन सेवाएं, एक मिशन और एक राष्ट्र। ‘अलकनंदा’ फॉर्मेशन में सुखोई और एएलएच हेलीकॉप्टरों ने अपनी उड़ान के तालमेल से दर्शकों को प्रभावित किया। ग्रुप कैप्टन हर्ष पांडे के नेतृत्व में प्रस्तुत इस संरचना ने संयुक्त परिचालन क्षमता और अनुशासित उड़ान कौशल का प्रदर्शन किया। भारतीय वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ को विशिष्ट रूप देने के लिए एक हेलीकॉप्टर के पिछले रैंप से आकाश में ‘94’ का अंक प्रदर्शित किया गया। इसके साथ वर्षगांठ का विशेष बैनर भी दिखाया गया। यह दृश्य वायुसेना के 94 वर्षों के साहस, बलिदान, उपलब्धियों और निरंतर राष्ट्र सेवा का प्रतीक बना।इस प्रदर्शन ने यह भी दिखाया कि सैन्य विमानन में केवल शक्ति ही नहीं, बल्कि पायलटों की सटीकता, प्रशिक्षण और सूक्ष्म समन्वय भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसके बाद ‘भैरव’ फॉर्मेशन में सी-295 और डोर्नियर-228 विमानों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। विंग कमांडर अनिमेश लांबा के नेतृत्व में इस प्रदर्शन ने भारतीय वायुसेना की परिवहन क्षमता, बहुउद्देशीय उपयोगिता और सटीक फॉर्मेशन फ्लाइंग को प्रदर्शित किया। काशी के रक्षक बाबा कालभैरव के नाम वाली इस संरचना ने निगरानी, विश्वसनीयता और सुरक्षा के भाव को सैन्य विमानन से जोड़ा। ‘कैलाश’ फॉर्मेशन में सी-130 और एएन-32 विमानों ने अपनी एयरलिफ्ट क्षमता तथा समन्वित उड़ान का प्रदर्शन किया।इसके बाद ‘त्रिलोचन’ फॉर्मेशन में एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल विमान और मिग-29 लड़ाकू विमान नजर आए। यह संयोजन आधुनिक हवाई अभियानों में दूर तक निगरानी रखने, संभावित खतरों का आकलन करने और लड़ाकू विमानों को आवश्यक सामरिक जानकारी उपलब्ध कराने की अहमियत को रेखांकित करता है। ‘नटराज’ फॉर्मेशन में भारतीय नौसेना के पी-8आई समुद्री निगरानी विमान और वायुसेना के मिराज-2000 लड़ाकू विमान का प्रदर्शन हुआ। इसके बाद ‘महादेव’ फॉर्मेशन में आईएल-78 एरियल रिफ्यूलिंग टैंकर और मिराज-2000 लड़ाकू विमानों ने हिस्सा लिया। हवा में ईंधन भरने की क्षमता आधुनिक वायु अभियानों का एक महत्वपूर्ण आधार है, क्योंकि इससे लड़ाकू विमानों की परिचालन पहुंच और मिशन पूरा करने की क्षमता बढ़ती है।काशी की आध्यात्मिक पहचान को ध्यान में रखते हुए कई फॉर्मेशन के नाम भी विशेष रखे गए थे। ‘विश्वनाथ’ फॉर्मेशन में तीन शक्तिशाली सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान शामिल रहे। विंग कमांडर आयुष कुणाल के नेतृत्व में इन विमानों ने आकाश में अपनी गति, शक्ति और सटीक उड़ान कौशल का प्रदर्शन किया। इसके बाद चार जगुआर लड़ाकू विमानों की ‘पशुपति’ फॉर्मेशन ने डायमंड संरचना में उड़ान भरी। ग्रुप कैप्टन मयंक पवार के नेतृत्व में विमानों के बीच सटीक दूरी, अनुशासन और तालमेल ने दर्शकों को प्रभावित किया। जगुआर विमान की भूमिका मुख्यतः जमीनी लक्ष्यों पर प्रहार करने से जुड़ी रही है, इसलिए यह फॉर्मेशन वायुसेना की स्ट्राइक क्षमता का प्रतीक बना।तीन राफेल लड़ाकू विमानों की ‘नीलकंठ’ फॉर्मेशन ने अत्याधुनिक युद्धक विमानन शक्ति का प्रदर्शन किया। विंग कमांडर कौस्तुभ नलावड़े के नेतृत्व में विंग फॉर्मेशन में उड़ते विमानों ने आधुनिक एवियोनिक्स, उच्च परिचालन क्षमता और समन्वित उड़ान का प्रभावशाली परिचय दिया। इसके बाद ‘प्रचंड’ फॉर्मेशन में सुखोई-30 एमकेआई, राफेल, जगुआर, मिराज-2000, एलसीए तेजस और मिग-29 जैसे विभिन्न लड़ाकू विमानों का संयुक्त प्रदर्शन देखने को मिला। अलग-अलग पीढ़ियों और भूमिकाओं वाले इन विमानों का एक साथ आना भारतीय वायुसेना की बहुआयामी युद्धक क्षमता और विविध परिस्थितियों में मिशन पूरा करने की तैयारी का परिचायक रहा।एयर शो का सबसे आकर्षक और तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण पड़ाव स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) तेजस का एकल प्रदर्शन रहा। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) और भारतीय निजी उद्योग की भागीदारी से विकसित इस विमान ने आत्मनिर्भर भारत की रक्षा तकनीक का प्रभावशाली उदाहरण प्रस्तुत किया। ग्रुप कैप्टन रूप के नेतृत्व में तेजस ने काशी के आकाश में अपनी फुर्ती, नियंत्रण और उड़ान कौशल का प्रदर्शन किया। तेजस ने पहले चार-बिंदु रोल प्रस्तुत किया, जिसमें विमान ने अपनी धुरी पर नियंत्रित घुमाव लेते हुए सटीकता का परिचय दिया। इसके बाद वर्टिकल पिच-बैक, मैक्सिमम रेट टर्न और रेड आई टर्न जैसे करतबों ने दर्शकों को रोमांचित किया। इन करतबों के जरिए विमान की दिशा बदलने, तीव्र मोड़ लेने और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में नियंत्रण बनाए रखने की क्षमता को प्रदर्शित किया गया।इसके बाद तेजस ने ‘वर्टिकल चार्ली’ और ‘फॉर्मूला वन टर्न’ जैसे करतब प्रस्तुत किए। धीमी गति पर नियंत्रित उड़ान के ‘स्लो मार्च’ प्रदर्शन ने यह दिखाया कि लड़ाकू विमान की दक्षता केवल अधिकतम रफ्तार तक सीमित नहीं होती, बल्कि विभिन्न गति और परिस्थितियों में सटीक नियंत्रण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। तेजस के प्रदर्शन का समापन ‘स्पाइडरमैन फेयरवेल’ के साथ हुआ। विमान ने उल्टी उड़ान की मुद्रा में दर्शकों का अभिवादन किया। इस दौरान गंगा के दोनों तटों से तालियों की गूंज सुनाई दी। तेजस का प्रदर्शन केवल हवाई करतबों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने स्वदेशी एयरोस्पेस इंजीनियरिंग, तकनीकी आत्मनिर्भरता और देश में विकसित रक्षा प्रणालियों की बढ़ती क्षमता का संदेश भी दिया।तेजस के प्रदर्शन के बाद मिराज-2000, सुखोई-30 एमकेआई और राफेल विमानों की फॉर्मेशन ने पुनः प्रवेश किया। ‘महादेव’, ‘विश्वनाथ’ और ‘नीलकंठ’ संरचनाओं में विमानों ने एरियल स्प्लिट जैसे करतब प्रस्तुत किए। फॉर्मेशन में उड़ते विमानों का निर्धारित समय और दूरी पर अलग-अलग दिशाओं में बंटना पायलटों के अनुशासन, आपसी समन्वय और उच्च स्तर के प्रशिक्षण का परिचायक रहा। इसके बाद दर्शकों को एक काल्पनिक हवाई युद्ध का दृश्य दिखाया गया। इसमें दो जगुआर विमानों को जमीनी लक्ष्य पर हमला करने की भूमिका में रखा गया, जबकि दो सुखोई विमानों ने उन्हें रोकने और काल्पनिक शत्रु विमानों को निष्क्रिय करने की भूमिका निभाई।रडार आधारित पहचान, पीछा करने और लक्ष्य को रोकने की इस नाटकीय प्रस्तुति ने आधुनिक हवाई युद्ध की जटिलता और वायु रक्षा में त्वरित निर्णय लेने के महत्व को सामने रखा। इस प्रदर्शन ने दर्शकों को यह समझने का अवसर दिया कि हवाई युद्ध में केवल विमान की गति या हथियार ही निर्णायक नहीं होते। पायलट का प्रशिक्षण, लक्ष्य की पहचान, सामरिक स्थिति का आकलन, सेंसर से प्राप्त जानकारी और समय पर लिया गया निर्णय भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं। प्रदर्शन के दौरान विभिन्न लड़ाकू विमानों से जुड़ी आधुनिक हथियार प्रणालियों का भी उल्लेख किया गया।सुखोई-30 एमकेआई के साथ ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, राफेल के साथ स्कैल्प, जगुआर के साथ सेंसर फ्यूज्ड वेपन, मिराज-2000 के साथ क्रिस्टल मेज तथा तेजस व मिग-29 के साथ दृश्य सीमा से परे मार करने वाली मिसाइलों का संदर्भ दिया गया। इन प्रणालियों का उल्लेख भारतीय वायुसेना की विभिन्न प्रकार के लक्ष्यों के विरुद्ध कार्रवाई करने की क्षमता को प्रदर्शित करता है। लंबी दूरी पर सटीक प्रहार, जमीनी लक्ष्यों पर हमला, हवाई श्रेष्ठता और आधुनिक सेंसरों के जरिए लक्ष्य की पहचान- ये सभी आधुनिक वायु अभियानों के महत्वपूर्ण आयाम हैं। कार्यक्रम में ऑपरेशन बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर का भी उल्लेख किया गया। इन अभियानों के संदर्भ में वायुसेना की सटीक प्रहार क्षमता, परिचालन तत्परता और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में कार्रवाई करने के संकल्प को प्रदर्शित किया गया।एयर शो के अंतिम चरण में सी-17 ग्लोबमास्टर और सूर्य किरण एरोबैटिक टीम की उपस्थिति ने समारोह को नई ऊंचाई दी। ‘दशाश्वमेध’ कॉल साइन वाली फॉर्मेशन में विशाल सी-17 ग्लोबमास्टर के साथ सूर्य किरण टीम का प्रदर्शन काशी की सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक वायु शक्ति के संगम का प्रतीक बना। दशाश्वमेध घाट के नाम से जुड़ी इस संरचना ने समारोह के स्थानीय और राष्ट्रीय महत्व को एक साथ प्रदर्शित किया। इसके बाद सूर्य किरण एरोबैटिक टीम ने आसमान में रोमांचक करतबों की श्रृंखला प्रस्तुत की। ग्रुप कैप्टन अजय दशरथ के नेतृत्व में नौ हॉक विमानों की टीम ने अनुशासित और समन्वित उड़ान से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया।विमानों ने एक साथ उड़ते हुए अपनी संरचना बदली, अलग-अलग आकृतियां बनाईं और अत्यंत कम अंतर पर सटीक तालमेल के साथ हवाई करतब दिखाए। टीम ने तेजस को समर्पित फॉर्मेशन, विजय फॉर्मेशन, फ्लावर और बैरल रोल जैसे प्रदर्शन प्रस्तुत किए। एक विमान के फॉर्मेशन से अलग होने और बाद में पुनः प्रदर्शन में शामिल होने के दृश्यों ने रोमांच बढ़ाया। विमानों के एक साथ दिशा बदलने, रोल करने और आकाश में सममित आकृतियां बनाने के दौरान दर्शकों की तालियां लगातार गूंजती रहीं। सूर्य किरण टीम का प्रदर्शन इस बात का प्रमाण था कि एरोबैटिक्स केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि पायलटों के असाधारण आत्मविश्वास, एकाग्रता, उड़ान अनुशासन और आपसी विश्वास की परीक्षा भी है। टीम की सटीकता ने भारतीय वायुसेना के प्रशिक्षण और पेशेवर उत्कृष्टता की झलक प्रस्तुत की। -
नई दिल्ली। ओडिशा के भुवनेश्वर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को भारतीय रिजर्व बैंक के नवस्थापित डेटा सेंटर और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि आज भुवनेश्वर नए भारत को एक नया संस्थान दे रहा है। भुवनेश्वर में आरबीआई का डेटा सेंटर और साइबर सिक्योरिटी ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट का उद्घाटन एक महत्वपूर्ण अवसर है। ये ओडिशा और देश के लोगों के लिए बहुत हितकारी होने वाले हैं।
उन्होंने कहा कि मैं इस परियोजना से जुड़े सभी लोगों को बधाई देता हूं। आज का यह कार्यक्रम इस बात का प्रमाण है कि भारत में गवर्नेंस की अप्रोच कैसे और कितनी तेजी से बदल रही है। हमारा ध्यान है, विकास की प्राथमिकता, विस्तार और आखिरी व्यक्ति तक पहुंच। आजादी के बाद देश में बड़े-बड़े शहरों का विकास हुआ, बड़े संस्थान बने, बड़े अस्पताल और बड़े एयरपोर्ट भी बने, लेकिन देश का एक बहुत बड़ा हिस्सा बुनियादी सुविधाओं का इंतजार करता आ रहा था। दिल्ली में बड़े अस्पताल थे, लेकिन छोटे शहरों और दूरदराज के क्षेत्रों में बेहतर इलाज के लिए लोगों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। बड़े शहरों में हवाई यात्रा की सुविधा थी, लेकिन छोटे शहरों को एयर कनेक्टिविटी से जोड़ने पर उतना फोकस नहीं था। रेलवे स्टेशन आम नागरिक की यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा था, लेकिन रेलवे स्टेशनों पर आधुनिक सुविधाओं का अभाव था। यानी विकास का लाभ देश के हर क्षेत्र और हर नागरिक तक पहुंचाना एक बड़ी चुनौती बना हुआ था। हमने इसी को बदलने का प्रयास किया है।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमारे लिए विकास का मतलब है भारत का संतुलित विकास और गांवों को अवसर। हमारा मकसद है गरीब परिवारों को सम्मान के साथ जीवन जीने की सुविधाएं देना। हर नागरिक को निरंतर यह विश्वास देना कि विकास की इस यात्रा में वह पीछे नहीं छूटेगा। आज देश के एक्सप्रेसवे छोटे शहरों को भी जोड़ रहे हैं। एम्स जैसे संस्थानों का निर्माण छोटे शहरों में भी हुआ है। गांवों में करीब पौने दो लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिर खोले गए हैं। आज दूरदराज के क्षेत्रों में डिजिटल कनेक्टिविटी का विस्तार हो रहा है। यही गवर्नेंस का असल मकसद है, नागरिकों के जीवन को आसान बनाना और उसके सपनों को नए अवसर देना। सामान्य परिवारों को कैसे दशकों तक अभाव में रखा गया, उसका एक बड़ा उदाहरण हमारा बैंकिंग सेक्टर भी रहा है। गरीबों के नाम पर 60-70 के दशकों में बैंकों का नेशनलाइजेशन किया गया, लेकिन 2014 तक देश की आधी आबादी बैंकिंग सिस्टम से ही बाहर थी।उन्होंने कहा कि आज भारत में डिजिटल बैंकिंग ने सबको 24 घंटों बैंकिंग सिस्टम से जोड़ा है। लेकिन 2014 से पहले अलग ही फोन बैंकिंग का दौर था। दिल्ली में कांग्रेस के कुछ खास लोगों को और कनेक्शन वाले लोगों को फोन बैंकिंग से हजारों करोड़ रुपए का लोन दिया जाता था, लेकिन गरीब आदमी को बैंक में खाता खुलवाने के लिए गारंटर की जरूरत पड़ती थी। कांग्रेस की फोन बैंकिंग स्कीम में अमीरों के लिए हजारों करोड़ रुपए हमेशा उपलब्ध रहते थे, जिसके चलते भारत का बैंकिंग सिस्टम एनपीए की चपेट में आ गया। बैंकिंग सिस्टम बर्बादी के कगार पर पहुंच गया। किसी भी बदलाव के लिए सोच का भी बड़ा होना जरूरी है। नीयत साफ हो, इरादे नेक हों तो असंभव लगने वाले काम भी संभव हो जाता है। जहां नीयत में खोट हो तो संभावनाएं भी सीमित हो जाती हैं।उन्होंने कहा कि आज भारत का बैंकिंग सेक्टर दुनिया के सबसे सशक्त बैंकिंग सेक्टर में से एक है। ओडिशा की धरती से ही देश के एक पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा था कि दिल्ली से एक रुपया भेजते हैं तो जनता तक केवल 15 पैसे ही पहुंचते हैं। एक वो दौर था और एक आज का दौर है। आज दिल्ली से एक रुपया निकलता है तो पूरा का पूरा रुपया लाभार्थी के खाते में पहुंचता है। मुद्रा योजना से 13 करोड़ लोग पहली बार उद्यमी बने हैं। अटल पेंशन स्कीम से 9 करोड़ लोगों को सोशल सिक्योरिटी कवरेज मिला है। अकेले ओडिशा में ही इससे 38 लाख लोग कवर होते हैं, हमारे लिए ‘नागरिक देवो भव:’ ही सुशासन का मंत्र है।पीएम मोदी ने कहा कि यह वही देश है, जहां डेबिट और क्रेडिट कार्ड अमीरों के लिए होते थे और अब देश के हर नागरिक के लिए सुलभ हैं। विगत दशक बैंकिंग को उन लोगों के पास पहुंचाने का था, जो उससे वंचित थे। आने वाला दशक बैंकिंग को अधिक भरोसेमंद बनाने का है। हम सभी जानते हैं कि आजकल युद्ध केवल हथियारों से नहीं लड़े जाते, किसी देश की अर्थव्यवस्था पर चोट करके भी लड़े जाते हैं, इसलिए भारत आर्थिक रूप से सशक्त हो रहा है, तो हमें अपने बैंकिंग सिस्टम को भी साइबर लुटेरों से सुरक्षित करना होगा।( -
नई दिल्ली। वाराणसी में रविवार को गंगा की लहरों के ऊपर भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों की गर्जना गूंजी। नमो घाट पर आयोजित ‘विंग्स ओवर गंगा’ हवाई प्रदर्शन में वायुसेना के राफेल, सुखोई और तेजस जैसे लड़ाकू विमानों के हवाई करतब आकर्षण का केंद्र रहे। भारतीय वायुसेना के विमानों और हेलीकॉप्टरों ने आसमान में अपनी उड़ान क्षमता, सटीक नियंत्रण और पायलटों के असाधारण कौशल का प्रदर्शन किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस आयोजन के पर मौजूद रहे व इस ऐतिहासिक क्षण के गवाह बने। भारतीय वायुसेना के 94 गौरवशाली वर्षों के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम में गंगा के ऊपर विमानों की तेज उड़ान और रोमांचक हवाई करतबों ने आयोजन को खास बनाया। आसमान में विमानों की गर्जना और उनकी कलाबाजियों ने भारतीय वायुसेना की ताकत और पेशेवर दक्षता की झलक पेश की। इस प्रदर्शन के जरिए वायुसेना की तकनीकी क्षमता, सटीक उड़ान और हवाई अभियानों में उसके कौशल को सामने लाया गया।रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘विंग्स ओवर गंगा’ को भारतीय वायुसेना के शौर्य और शक्ति का उत्सव बताया। उन्होंने वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत करते हुए कहा कि काशी भारतीय वायुसेना के पराक्रम को देखने के लिए तैयार है। उन्होंने वाराणसी को सशक्त, आत्मनिर्भर और नए भारत की उभरती ताकत का प्रतीक भी बताया। गंगा के ऊपर आसमान में उड़ान भरते लड़ाकू विमानों की गर्जना ने हवाई प्रदर्शन को खास बना दिया।तेज रफ्तार से उड़ान भरना, हवा में दिशा बदलना और सटीक नियंत्रण के साथ अलग-अलग हवाई करतब दिखाना लड़ाकू विमानों की क्षमताओं को सामने लाता है। राफेल, सुखोई और स्वदेशी तेजस जैसे विमानों की मौजूदगी ने भारतीय वायुसेना की विविध लड़ाकू क्षमताओं की झलक पेश की। इन विमानों को उड़ाने वाले पायलटों के लिए बेहद सटीक नियंत्रण, समय का सही आकलन और परिस्थितियों के अनुसार तुरंत निर्णय लेना जरूरी होता है।गौरतलब है कि हवाई प्रदर्शन केवल रोमांच और मनोरंजन तक सीमित नहीं है। ऐसे आयोजनों के जरिए वायुसेना अपनी उड़ान दक्षता, तकनीकी क्षमता और हवाई अभियानों के लिए जरूरी तालमेल को भी प्रदर्शित करती है। लड़ाकू विमानों की गति, उनके संचालन और हवा में सटीक गतिविधियों के पीछे पायलटों का कठोर प्रशिक्षण और तकनीकी तैयारी होती है। इस तरह के प्रदर्शन आम लोगों को भी यह समझने का अवसर देते हैं कि देश की हवाई सुरक्षा के लिए वायुसेना किस स्तर की तैयारी और कौशल के साथ काम करती है।इस आयोजन में भारतीय वायुसेना के विमानों और हेलीकॉप्टरों ने अपनी उड़ान क्षमताओं का प्रदर्शन किया। गंगा के विस्तृत जलक्षेत्र के ऊपर हवाई करतबों ने कार्यक्रम को अलग पहचान दी। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व वाली काशी में इस तरह का आयोजन भारतीय वायुसेना की शक्ति को आम लोगों के करीब लाने का अवसर भी बना। कार्यक्रम के लिए वाराणसी में विशेष स्वागत तैयारियां भी की गईं।विभिन्न स्थानों पर स्वागत केंद्र बनाए गए, जहां पारंपरिक ढोल-नगाड़ों, डमरू की गूंज, शंखनाद और पुष्प वर्षा के साथ लोगों का स्वागत किया गया। इस तरह आयोजन में काशी की सांस्कृतिक विरासत और भारतीय वायुसेना के शौर्य का संगम देखने को मिला। भारतीय वायुसेना का ध्येय वाक्य ‘नभः स्पृशं दीप्तम्’ है, जिसका अर्थ है ‘गर्व के साथ आकाश को छुओ’। वाराणसी में आयोजित ‘विंग्स ओवर गंगा’ ने इसी भावना को केंद्र में रखते हुए भारतीय वायुसेना की हवाई क्षमताओं और उसके पायलटों के कौशल को प्रदर्शित किया। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में महर्षि वाल्मीकि और स्वतंत्रता सेनानी भाई परमानंद को याद किया। उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि की रामायण हजारों वर्ष बाद भी हमें जीवन के नए मूल्य और सीख देती है। प्रधानमंत्री ने भाई परमानंद की 150वीं जयंती का उल्लेख करते हुए कहा कि आर्य समाज से उनका गहरा जुड़ाव उनकी प्रेरणा और आदर्शों का प्रमुख स्रोत था।
प्रधानमंत्री ने महर्षि वाल्मीकि के जीवन और रामायण की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा, “महर्षि वाल्मीकि ने रामायण के माध्यम से हमें जीवन की गहरी सीख दी है। एक ओर वे निरंतर प्रयास करते रहने का संदेश देते हैं, तो दूसरी ओर सेवा, करुणा और सामाजिक समरसता का महत्व समझाते हैं। वाल्मीकि रामायण में भगवान राम का चरित्र इन मूल्यों का सुंदर उदाहरण है।”उन्होंने आगे कहा, “भगवान राम ने माता शबरी के प्रेम और भक्ति को अपनाया। निषादराज की मित्रता को सम्मान दिया। सबको साथ लेकर चलने का भाव, ये आदर्श आज भी हमें दिशा दिखाते हैं। इस भावना का प्रतिबिंब अयोध्या के भव्य राम मंदिर में भी दिखाई देता है। वहां महर्षि वाल्मीकि, निषादराज और माता शबरी के मंदिर भी बनाए गए हैं। मुझे संतोष है कि अयोध्या में एयरपोर्ट का नाम भी महर्षि वाल्मीकि के नाम पर ही रखा गया है। ये प्रयास हमारी उसी महान परंपरा को समृद्ध करते हैं, जिसमें सेवा, समरसता और करुणा को सर्वोच्च स्थान दिया गया है।”भाई परमानंद जी को याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “भारत की माटी में ऐसे कितने ही महान व्यक्तित्व पैदा हुए जिन्होंने अपनी अमिट छाप छोड़ी है। ऐसे ही एक महान व्यक्तित्व हैं, भाई परमानंद जी। कुछ ही दिनों बाद 4 नवंबर को हम उनकी 150वीं जयंती मनाएंगे। भाई परमानंद जी की प्रेरणा और आदर्श का बड़ा स्त्रोत था – आर्य समाज से उनका गहरा जुड़ाव।”पीएम मोदी ने कहा कि 20वीं सदी के बिल्कुल शुरुआती कालखंड में ही भाई परमानंद जी आर्य समाज के काम से दक्षिण अफ्रीका गए थे। वहां उनकी मुलाकात पूज्य बापू से भी हुई थी। उन्होंने गुयाना में गिरमिटिया समाज के बीच भी काम किया, जो उस समय आर्य समाज का एक बड़ा केंद्र था। अपनी गुयाना यात्रा का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “मुझे भी गुयाना की अपनी यात्रा के समय आर्य समाज के स्मारक पर जाने का सौभाग्य मिला था।”उन्होंने यह भी कहा कि भाई परमानंद जी ने स्वतंत्रता आंदोलन में बड़ी भूमिका निभाई थी। कहा जाता है कि भाई परमानंद जी ने ही लाला हरदयाल जी को अमेरिका जाने के लिए मनाया था। वे गदर पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से भी एक थे। आजादी की लड़ाई में उनका प्रभाव इतना ज्यादा था कि अंग्रेजों ने उन्हें काला पानी की सजा दे दी थी। उनकी एक किताब है ‘आपबीती : काले पानी की कारावास कहानी’ स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदानों को समझने के लिए ये किताब जरूर पढ़नी चाहिए।प्रधानमंत्री ने कहा कि भाई परमानंद जी ने सजा खत्म होने के बाद शिक्षा के क्षेत्र में कदम बढ़ाया। उन्होंने कहा, “आपको यह जानकार हैरानी होगी कि उन्होंने वीर भगत सिंह को भी पढ़ाया था। बाद के समय में वे कई वर्षों तक हिंदू महासभा से भी जुड़े रहे। यानि गांधी जी से लेकर गुयाना तक, गदर से लेकर अंडमान तक उनका व्यक्तित्व बहुत प्रेरणादायक है। मैं भाई परमानंद जी को आदरपूर्वक श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। युवा साथियों से मेरा आग्रह है कि वे उनके बारे में जानें और दूसरों को भी प्रेरित करें। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 139वें एपिसोड में देशवासियों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने विज्ञान, अनुसंधान और मानवता से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर बात की। पीएम मोदी ने बताया, “अक्टूबर की शुरुआत में मैं चेन्नई गया था। वहां मेरी मुलाकात देश के कई वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और युवा प्रतिभाओं से हुई। यह देखकर गर्व होता है कि हमारे युवा आज ऐसे विषयों पर काम कर रहे हैं जो पूरी मानवता के भविष्य को बदलने की क्षमता रखते हैं।” प्रधानमंत्री ने ब्रेन रिसर्च के क्षेत्र में भारत की बड़ी उपलब्धि का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने आईआईटी मद्रास में सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर का लोकार्पण किया था।
पीएम मोदी ने कहा, “इस सेंटर ने एक ऐसा ब्रेन इमेजिंग प्लेटफॉर्म विकसित किया है जो पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल है। इस प्लेटफॉर्म के जरिए मानव मस्तिष्क की हाई-रिजॉल्यूशन डिजिटल थ्री-डी तस्वीरें तैयार की जा रही हैं। इसका लक्ष्य आने वाले समय में 100 मानव मस्तिष्कों की थ्री-डी मैपिंग कर उनका सूक्ष्म अध्ययन करना है। यह दुनिया में अपनी तरह का पहला मिशन है। इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए परम शक्ति सुपर कंप्यूटर का उपयोग किया जा रहा है।”उन्होंने बताया कि इस ब्रेन सेंटर के निर्माण में उद्योग जगत ने सरकार के साथ मिलकर अहम भूमिका निभाई है। आईआईटी के कई पूर्व छात्र और शिक्षाविद इस रिसर्च सेंटर से जुड़े हैं। पीएम मोदी ने इस प्रोजेक्ट के महत्व को समझाते हुए कहा कि विज्ञान ने भले ही कितनी प्रगति कर ली हो लेकिन मानव मस्तिष्क आज भी एक बड़ी पहेली बना हुआ है। अल्जाइमर और डिमेंशिया जैसी कई बीमारियां हैं जिनका अब तक कोई ठोस इलाज नहीं मिल पाया है। विज्ञान मानव मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को जितनी गहराई से समझेगा और भविष्य में स्वास्थ्य के क्षेत्र में उतने ही नए रास्ते खुलेंगे।उन्होंने यह भी जानकारी दी कि 100 मानव मस्तिष्कों से जुड़ा यह डेटा भविष्य में विभिन्न क्षेत्रों में शोध के लिए ओपन सोर्स के रूप में उपलब्ध कराया जाएगा ताकि दुनियाभर के वैज्ञानिक इसका लाभ उठा सकें। उन्होंने कहा कि इस तरह के एडवांस रिसर्च में अंगदान की बहुत बड़ी भूमिका होती है। जो लोग जीवन के बाद अपने अंगों का दान करते हैं, वे न केवल कई लोगों की जान बचाते हैं बल्कि वैज्ञानिक अनुसंधान को भी आगे बढ़ाते हैं। इसका उदाहरण देते हुए पीएम मोदी ने मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम की शिवानी का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “शिवानी एक सड़क हादसे का शिकार हो गई थीं। उनके परिवार पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा था लेकिन इस कठिन समय में भी परिवार ने एक प्रेरणादायक फैसला लिया। उन्होंने शिवानी के अंगदान का निर्णय लिया।” प्रधानमंत्री ने कहा कि शिवानी के परिवार के इस फैसले ने पूरे समाज और देश को एक बड़ा संदेश दिया है। मानवता की दिशा में उठाया गया एक छोटा कदम किसी दूसरे परिवार की खुशियां लौटा सकता है और अनुसंधान के कार्यों में भी बड़ी मदद कर सकता है। -
वाराणसी. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भारतीय वायु सेना दिवस के अवसर पर रविवार को उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित नमो घाट पर आयोजित होने वाले 'एयर शो' से एक दिन पहले शनिवार शाम यहां दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पदाधिकारियों ने यह जानकारी दी। पदाधिकारियों ने बताया कि रक्षा मंत्री के संकट मोचन मंदिर और काल भैरव मंदिर में पूजा करने की संभावना है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी दो दिवसीय दौरे पर वाराणसी पहुंचे हैं।
पदाधिकारियों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 25 अक्टूबर को पूर्वाह्न करीब 10 बजे वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंचेंगे और वहां से वह हेलीकॉप्टर से मिर्जामुराद जाएंगे। मोदी, मिर्जामुराद में अरविंद मिल का उद्घाटन करेंगे।
इसके बाद प्रधानमंत्री दोपहर करीब 12 बजे हेलीकॉप्टर से पुलिस लाइंस पहुंचेंगे और वहां से सड़क मार्ग से नमो घाट जाएंगे। मोदी, गंगा नदी के ऊपर भारतीय वायु सेना द्वारा आयोजित 'एयर शो' देखेंगे। पदाधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए पार्टी कार्यकर्ता और काशी के निवासी विभिन्न स्थानों पर मौजूद रहेंगे। उन्होंने बताया कि इस दौरान वे प्रधानमंत्री पर गुलाब की पंखुड़ियां बरसाएंगे, पारंपरिक वाद्ययंत्र बजाएंगे और सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे। भाजपा पदाधिकारियों ने बताया कि नमो घाट पर भी प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए विशेष व्यवस्था की गई है।
प्रधानमंत्री रविवार को यहां 'एयर फोर्स डे एरियल डिस्प्ले-2026' देखेंगे। यह कार्यक्रम भारतीय वायु सेना की 94वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है। - अयोध्या। अयोध्या में 10वें दीपोत्सव की तैयारियां तेज हो गई हैं और सरयू तट के 56 घाटों पर 30 लाख दीप प्रज्ज्वलित करने का लक्ष्य रखा गया है। दीपोत्सव के लिए घाटों की साफ-सफाई के बाद दीप सजाने के लिए निशान लगाने का काम शुरू कर दिया गया है। डॉक्टर राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के नोडल अधिकारी (दीपोत्सव) संत शरण मिश्र ने बताया कि दीपों की सजावट के लिए 30 लाख के लक्ष्य के मुकाबले 33 लाख दीप मंगाए जा रहे हैं, ताकि उन्हें लाने और सजावट के दौरान टूटने वाले दीपों की कमी न हो। उन्होंने बताया कि दीपोत्सव की तैयारियों के तहत शुक्रवार सुबह साढ़े सात बजे सरयू तट के घाट संख्या 10 पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भूमि पूजन किया जाएगा और यह अनुष्ठान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉक्टर बिजेंद्र सिंह की मौजूदगी में होगा।अधिकारियों ने बताया कि इस बार विस्तारित राम की पैड़ी, चौधरी चरण सिंह घाट और भजन संध्या स्थल सहित कुल 56 घाटों पर दीप सजाये जायेंगे जबकि पिछले वर्षों में 55 घाटों पर दीपोत्सव आयोजित होता था। उन्होंने बताया कि दीपों को व्यवस्थित और आकर्षक ढंग से सजाने के लिए चार वर्ग फुट के ब्लॉक बनाए जा रहे हैं और मार्किंग का काम अगले तीन से चार दिन में पूरा करने का लक्ष्य है।अधिकारियों ने बताया कि दीप सज्जा और प्रज्ज्वलन के लिए अवध विश्वविद्यालय करीब 35 हजार स्वयंसेवक तैनात करेगा। उन्होंने बताया कि इनमें विभिन्न डिग्री और इंटर कॉलेजों के विद्यार्थी शामिल होंगे और स्वयंसेवकों को घाटवार जिम्मेदारी सौंपी जाएगी जिसके लिये उन्हें प्रशिक्षण दिया जा रहा है।प्रशासन के अनुसार, स्वयंसेवकों की पहचान के लिए क्यूआर कोड वाले पहचान पत्र जारी किए जाएंगे, जिनमें नाम, फोटो, मोबाइल नंबर और तैनाती स्थल जैसी जानकारियां होंगी। अधिकारियों ने बताया कि विश्वविद्यालय और जिला प्रशासन दीपों की व्यवस्था, स्वयंसेवकों की तैनाती तथा सुरक्षा तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।--
- नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज शुक्रवार को सोशल मीडिया पर एक सुभाषित शेयर किया है, जिसमें दुख और भय को दूर करने का संदेश दिया गया है। पीएम मोदी की ओर से संस्कृत श्लोक, “यावदस्यास्वतन्त्रत्वं तावदीश्वरतो भयम्। य एतत्समुपासीरंस्ते मुह्यन्ति शुचार्पिताः॥” शेयर किया गया है, जिसका हिंदी भावार्थ है कि जब तक मनुष्य स्वयं को स्वतंत्र नहीं समझता, तब तक वह अपने से अधिक प्रभुत्वशाली शक्ति के भय में जीता रहता है। इस विचार को स्वीकार करने वाले लोग भय और दुख से घिरे रहते हैं तथा भ्रमित हो जाते हैं। वास्तव में, स्वतंत्रता का महत्व इसी में है कि मनुष्य भय और पराधीनता से मुक्त होकर आत्मविश्वास के साथ जीवन जी सके।प्रधानमंत्री की ओर से साझा किया गया यह श्लोक श्रीमद्भागवत महापुराण के 11वें स्कंध के 10वें अध्याय का 33वां श्लोक है, जो उद्धव गीता का हिस्सा है। इस श्लोक में भगवान श्री कृष्ण उद्धव को जीव की पराधीनता (परतंत्रता) और उसके कारण उत्पन्न होने वाले भय व मोह के बारे में समझा रहे हैं।भगवान कहते हैं कि जब तक मनुष्य स्वयं को शरीर, मन और अहंकार के स्तर पर देखता है, वह प्रकृति के तीनों गुणों (सत्व, रज, तम) के अधीन रहता है। यह आध्यात्मिक परतंत्रता है, जहां व्यक्ति बाहरी परिस्थितियों और अपने कर्मों का दास बन जाता है। जो व्यक्ति खुद को कर्ता मानता है और संसार के द्वंद्वों (सुख-दुख, लाभ-हानि) में फंसा रहता है, वह हमेशा ‘काल’ (मृत्यु या अदृश्य दैवीय शक्ति) से डरता रहता है कि कब उसका सब कुछ छिन न जाए।भगवान कहते हैं कि इस अनित्य संसार और शारीरिक पहचान (अहंकार) को ही जो अपना सर्वस्व मान बैठते हैं, वे कभी इस चक्र से बाहर नहीं निकल पाते। वे निरंतर चिंताओं, दुखों और मोह के जाल में फंसे रहते हैं। यानी भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि जीव जब तक अपने वास्तविक स्वरूप (आत्मा) को भूलकर माया के अधीन रहता है, वह दुखी रहेगा। वास्तविक स्वतंत्रता और निर्भयता केवल आत्मज्ञान या ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण से ही संभव है।--
- नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को नई दिल्ली में एक निजी कार्यक्रम वर्ल्ड समिट 2026 को संबोधित किया। देश में चल रहे उत्सवी मौसम के बीच अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री ने शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले सभी अतिथियों का अभिनंदन किया। एनडीटीवी समिट में हो रही चर्चाओं की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि नई विश्व व्यवस्था को लेकर चर्चा आज हर जगह हो रही है, क्योंकि वैश्विक बदलाव अब सीधे आम नागरिकों के दैनिक जीवन को प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब वैश्विक घटनाओं का असर आम लोगों के जीवन पर पड़ रहा है तो ऐसे अंतरराष्ट्रीय मंचों का महत्व और बढ़ जाता है। उन्होंने कहा, “ऐसी स्थिति में इस तरह के विश्व सम्मेलनों का महत्व और बढ़ जाता है।”‘द वर्ल्ड बिटवीन ऑर्डर्स’ विषय पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक समुदाय को यह समझने की जरूरत है कि मौजूदा व्यवस्था क्यों बदल रही है और पुरानी व्यवस्थाएं वर्तमान संकटों का समाधान करने में क्यों विफल हो रही हैं। उन्होंने कहा कि इन सवालों के जवाब खोजते हुए यह प्रश्न भी सामने आता है कि बदलती दुनिया में भारत की भूमिका क्या होगी।द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अंतरराष्ट्रीय संबंधों के विकास का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की स्थापना इस सोच के साथ हुई थी कि शक्ति के बजाय संवाद और सहयोग को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, लेकिन समय के साथ नई अर्थव्यवस्थाओं, नई तकनीकों और नए देशों के उभरने के बावजूद वैश्विक संस्थाएं अपने ढांचे में आवश्यक बदलाव नहीं कर सकीं।उन्होंने कहा कि व्यापार, तकनीक और समुद्री मार्ग जैसे माध्यम, जो पहले देशों को जोड़ने का कार्य करते थे। अब कई स्थानों पर संघर्ष, हथियारकरण और भू-राजनीतिक तनाव के केंद्र बन गए हैं। इसलिए आज जरूरत ऐसी समावेशी विश्व व्यवस्था की है जो निर्णय लेने वाली संस्थाओं और वर्तमान वास्तविकताओं के बीच अंतर को पाट सके।कोविड-19 महामारी के दौरान वैश्विक स्तर पर दिखी विभाजनकारी प्रवृत्तियों और विश्वास की कमी का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि उन्होंने 2020 में जी-20 मंच से मानवता केंद्रित नई विश्व व्यवस्था बनाने का आह्वान किया था। उसी वर्ष संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से उन्होंने संस्थागत सुधारों की आवश्यकता पर भी जोर दिया था। उन्होंने कहा, “यदि सदी बदल जाए और हम न बदलें, तो परिवर्तन लाने की हमारी क्षमता भी कमजोर हो जाती है।”उभरती हुई वैश्विक व्यवस्था की संरचना पर प्रश्न उठाते हुए प्रधानमंत्री ने बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार और ग्लोबल साउथ की आवाज को उचित महत्व देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग केवल अनुकूल समय तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि संकट के समय भी उतना ही प्रभावी होना चाहिए। उन्होंने कहा, “इसके लिए सभी हितधारकों के बीच प्रभावी सहमति आवश्यक है।”चाणक्य के अर्थशास्त्र का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कमजोर व्यवस्था ‘मत्स्य न्याय’ को जन्म देती है, जहां बड़ी मछली छोटी मछली को निगल जाती है। उन्होंने कहा कि भारत की मूल सोच ऐसी व्यवस्था बनाने की है, जिसमें इस प्रकार की स्थिति पैदा ही न हो। उन्होंने महामारी के दौरान 100 से अधिक देशों को भारत द्वारा वैक्सीन और दवाइयां उपलब्ध कराए जाने का जिक्र करते हुए कहा कि यह भारत की उसी सोच का प्रमाण है।प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने स्वयं को विश्वबंधु के रूप में स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि जी-20 और ब्रिक्स सम्मेलनों के दौरान जब कई लोगों को सर्वसम्मति की संभावना पर संदेह था, तब भारत ने विभिन्न पक्षों के बीच पुल का काम करते हुए सर्वसम्मत दिल्ली घोषणापत्र तैयार करवाए। उन्होंने कहा, “यह भारत की विश्वबंधु की भूमिका पर दुनिया के विश्वास को दर्शाता है।”प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की बढ़ती शक्ति वैश्विक कल्याण से सीधे जुड़ी हुई है। उन्होंने अपने ‘पावर टू एम्पावर’ विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि आत्मनिर्भर, आर्थिक रूप से मजबूत और कुशल विकसित भारत वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत करेगा और दुनिया की समृद्धि में योगदान देगा। उन्होंने कहा, “आज भारत अपनी क्षमता इसलिए बढ़ा रहा है ताकि दुनिया की क्षमता भी बढ़ सके।”देश के विकास का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत लगातार दुनिया की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद देश सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है। उन्होंने हरित ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्टार्टअप और डिजिटल अर्थव्यवस्था में भारत की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा, “रियल-टाइम डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में भारत दुनिया में नंबर एक है।”प्रधानमंत्री ने बताया कि जनगणना में डिजिटल तकनीक का उपयोग किया जा रहा है और देश में पहली बार हाइड्रोजन ट्रेन का संचालन हुआ है। उन्होंने कहा, “पहली बार भारत ने गैर-जीवाश्म बिजली क्षमता के क्षेत्र में 300 गीगावाट का आंकड़ा पार किया है।”हाल ही में एशियाई खेलों में 85 पदक जीतने वाले भारतीय दल से अपनी मुलाकात का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कई खेलों में भारत ने पहली बार ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। उन्होंने महिला रिकर्व तीरंदाजी टीम और मुक्केबाजों की उपलब्धियों की सराहना की। सेपक टकरॉ का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस खेल में भी भारत ने हालिया एशियाई खेलों में पहली बार पुरुष क्वाड्रेंट स्पर्धा में पदक जीता।प्रधानमंत्री ने कहा कि ये सभी उपलब्धियां देश में हो रहे व्यापक बदलाव की पहचान हैं और यह सब “रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म” की नीति का परिणाम है। उन्होंने कहा कि जब कोई राष्ट्र दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ता है तो उसकी आधारभूत संरचना कमजोरी का नहीं, बल्कि शक्ति का प्रतीक बनती है।विकसित भारत के निर्माण में युवाओं, महिलाओं, किसानों, मछुआरों, गरीबों और मध्यम वर्ग की भूमिका की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सितंबर में वस्तुओं के निर्यात में 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और पिछले 12 वर्षों में समुद्री उत्पादों का निर्यात दोगुने से अधिक हो गया है। उन्होंने कहा कि गांवों में 3.5 करोड़ से अधिक लखपति दीदियां बनाई जा चुकी हैं और सरकार 6 करोड़ लखपति दीदियां बनाने के लक्ष्य पर काम कर रही है। साथ ही प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना के तहत 70 लाख नए रोजगार सृजित किए गए हैं।उन्होंने यह भी कहा कि मध्यम वर्ग के लिए 12 लाख रुपए तक की आय को करमुक्त किया गया है। प्रधानमंत्री ने कहा, “देश में जीवन की सुगमता बढ़ रही है और रोजगार के नए अवसर भी बन रहे हैं।” अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में भारत की प्रगति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश शोध प्रकाशनों के मामले में दुनिया में तीसरे स्थान पर है और केवल 2025 में लगभग 1.5 लाख पेटेंट आवेदन दाखिल किए गए।प्रधानमंत्री ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र की चर्चा करते हुए कहा कि दुनिया के 20 प्रतिशत चिप डिजाइन विशेषज्ञ भारत में हैं और भारतीय इंजीनियर अत्याधुनिक 2 से 3 नैनोमीटर चिप डिजाइन कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “हमारे छात्रों ने अब तक 325 से अधिक चिप डिजाइन तैयार किए हैं।” प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया के आधे से अधिक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर भारत में हैं और अब ये केवल बैक-ऑफिस सेवाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि एआई, क्लाउड कंप्यूटिंग, इंजीनियरिंग, एनालिटिक्स और उत्पाद विकास जैसे क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा, “भारत अब दुनिया के लिए केवल बैक ऑफिस नहीं, बल्कि ब्रेन ऑफिस के रूप में भी काम कर रहा है।”फार्मास्यूटिकल क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि पीएलआई योजना के तहत पेनिसिलिन-जी का घरेलू उत्पादन फिर शुरू हो गया है और आंध्र प्रदेश के काकीनाडा में वर्षों बाद इसका निर्माण शुरू हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार सक्रिय औषधीय घटकों की संपूर्ण घरेलू आपूर्ति शृंखला विकसित कर रही है और इस दिशा में 5,000 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश आकर्षित किया गया है।अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने विकसित भारत के लक्ष्य को दोहराते हुए कहा कि 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाएं और “वी विल डू इट” का विश्वास देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। उन्होंने कहा, “हम बड़े सपने देखेंगे, हर चुनौती को अवसर में बदलेंगे और हर संकल्प को पूरा करेंगे।”
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नयी दिल्ली. सेना कमांडरों का तीन दिवसीय सम्मेलन बुधवार को यहां शुरू हुआ और इस दौरान रक्षामंत्री राजनाथ सिंह 'भूमि युद्ध सिद्धांत' जारी करेंगे। यह एक दृष्टि दस्तावेज है, जो युद्ध के बदलते स्वरूप और भविष्य के संघर्षों से उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने के लिए सेना को तैयार करने की व्यापक रूपरेखा प्रदान करेगा। अधिकारियों ने बताया कि इस सम्मेलन में भारतीय सेना का वरिष्ठ नेतृत्व एकत्रित होकर बदलते सुरक्षा परिदृश्य, अभियान संबंधी तैयारियों, क्षमता विकास और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बदलाव की पहलों पर विचार-विमर्श करेगा। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ की अध्यक्षता में आयोजित होने वाला यह शीर्ष स्तरीय द्विवार्षिक सम्मेलन 21 से 23 अक्टूबर तक चलेगा। मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ''व्यापक एजेंडे वाला यह सम्मेलन सेना के वरिष्ठ नेतृत्व को मौजूदा पहलों की समीक्षा करने, भविष्य के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान करने और प्रगतिशील, अनुकूलनशील, प्रौद्योगिकी-सक्षम एवं भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार भारतीय सेना के निर्माण की दिशा में उचित नीतिगत दिशा तय करने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करेगा।
मंत्रालय ने कहा कि सम्मेलन का प्रमुख आकर्षण रक्षा मंत्री द्वारा 'भूमि युद्ध सिद्धांत' जारी करना होगा। सिंह सम्मेलन को संबोधित भी करेंगे। बयान में कहा गया, ''यह सिद्धांत युद्ध के बदलते स्वरूप और भविष्य के संघर्षों से उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने के लिए भारतीय सेना को तैयार करने की व्यापक रूपरेखा प्रदान करेगा।'' प्रमुख समसामयिक सुरक्षा मुद्दों पर प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल एन एस राजा सुब्रमणि, नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन और इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव भी व्याख्यान देंगे।
रक्षा मंत्रालय ने बताया कि सिंह संयुक्त राष्ट्र की वार्षिक पत्रिका का अनावरण करेंगे और संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षक के रूप में उल्लेखनीय योगदान देने वाले भारतीय सेना के जवानों को सम्मानित करेंगे। यह सम्मान संयुक्त राष्ट्र के बैनर तले अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा में उनके उत्कृष्ट सेवाभाव, पेशेवर दक्षता और योगदान को मान्यता देने के लिए दिया जाएगा। मंत्रालय ने कहा कि पर्यावरणीय स्थिरता, संसाधन प्रबंधन और विमानन सुरक्षा की मजबूत संस्कृति को बढ़ावा देने में उत्कृष्ट योगदान को मान्यता देने के लिए थलसेना प्रमुख 'ग्रीन मिलिट्री स्टेशन' और विमानन उड़ान सुरक्षा पुरस्कार भी प्रदान करेंगे। -
नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष नितिन नवीन ने बुधवार को भारत की युवा पीढ़ी को 'सांस्कृतिक राष्ट्रवाद' की जड़ों से जोड़ने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने आगाह किया कि वैश्विक स्तर पर अराजकता को बढ़ावा देकर विभिन्न देशों के लोकतंत्र को चुनौती देने के प्रयास किए जा रहे हैं। भारतीय जनसंघ के 75वें स्थापना वर्ष के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नवीन ने कहा कि दुनिया में बदलते हालात एक बड़ी चुनौती पेश कर रहे हैं। इससे निपटने के लिए न केवल विचारधारा की निरंतरता बनाए रखने, बल्कि नयी पीढ़ी को भारत की सांस्कृतिक राष्ट्रवादी नींव से गहराई से जोड़ने की भी जरूरत है। नवीन ने भाजपा के विस्तार और मजबूती का श्रेय पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी तथा भाजपा और जनसंघ के कई अन्य नेताओं के समर्पण और कड़ी मेहनत को दिया। उन्होंने कहा, "हालांकि, मित्रों, हमें इस विस्तार को अपने मूल उद्देश्य के प्रति दृढ़ संकल्प से जोड़ने की जरूरत है। हमारे सामने एक बड़ी चुनौती है। परिस्थितियां बदल रही हैं और नई पीढ़ियां सामने आ रही हैं। ऐसे में हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारी विचारधारा के साथ-साथ युवा पीढ़ी भी देश के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की जड़ों से जुड़ी रहे।" नवीन ने कहा, "आज हम देख रहे हैं कि वैश्विक स्तर पर विभिन्न देशों के लोकतंत्र को चुनौती देने के लिए अराजकता का सहारा लिया जा रहा है।" उन्होंने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि जनसंघ ने जो बीज बोए और अपने कार्यकर्ताओं को जिन आदर्शों की शिक्षा दी, वे देश के सभी 140 करोड़ नागरिकों को एकजुट करने और उन्हें साथ लेकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देंगे।
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भुवनेश्वर. भुवनेश्वर में दुर्गा पूजा समितियों को चेतावनी दी गई है कि प्रतिमा विसर्जन के दौरान तेज आवाज में डीजे बजाने पर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी। भुवनेश्वर के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) सरवना विवेक एम ने कहा कि विसर्जन के दौरान डीजे बजाने पर प्रतिबंध है। उन्होंने कहा कि आदेश का उल्लंघन करने वाली किसी भी समिति के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाएगा। उन्होंने कहा, "समितियों से अनुरोध है कि वे विसर्जन के दौरान केवल पारंपरिक वाद्ययंत्रों का इस्तेमाल करें। प्रतिबंध का पालन सुनिश्चित करने के लिए विसर्जन यात्रा शुरू होने के स्थानों पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी।" डीसीपी ने बताया कि दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए शहर में अलग-अलग स्थानों पर छह अस्थायी तालाब बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि विसर्जन के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस की 48 कंपनी तैनात की जाएंगी।
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नागपुर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने मंगलवार को इस बात पर बल दिया कि वंदे मातरम् राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है और इसके पूर्ण गायन में कोई झिझक या आपत्ति नहीं होनी चाहिए। भागवत ने यहां संघ के वार्षिक विजयादशमी समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि वंदे मातरम् ने बंगाल विभाजन की साजिश को विफल कर दिया था और आज भी यह राष्ट्रीय एकता के लिए एक शक्तिशाली प्रेरणास्रोत बना हुआ है। उन्होंने कहा, ''यह हमारा राष्ट्रीय गीत है, और इसे पूरे गर्व तथा बुलंद आवाज में पूरा गाने में कोई झिझक या आपत्ति नहीं होनी चाहिए।'' भागवत ने सामाजिक एकता की आवश्यकता पर बल देते हुए याद दिलाया कि जब लॉर्ड कर्जन ने हिंदुओं और मुसलमानों को बांटने के लिए सांप्रदायिक आधार पर बंगाल के विभाजन का प्रयास किया था, तब समाज ने इस कदम का दृढ़ता से विरोध किया था जिससे ब्रिटिश सरकार को यह प्रस्ताव वापस लेने के लिए मजबूर होना पड़ा था। उन्होंने कहा, ''यह वही दौर था जब वंदे मातरम् एकता और देशभक्ति के प्रतीक के रूप में उभरा था। तब विभाजन को विफल कर दिया गया था। फिर, 1947 में वही परिणाम क्यों नहीं हासिल किया जा सका? क्योंकि जो लोग हमें बांटना चाहते थे, उन्होंने हमारे दिमाग में यह बात बैठा दी कि चूंकि हम अलग दिखते हैं, इसलिए हमें वास्तव में अलग ही होना चाहिए।'' भागवत ने आरोप लगाया कि तुष्टीकरण की मानसिकता ने इस विभाजनकारी सोच को बढ़ावा दिया, जिसके परिणामस्वरूप अंततः देश का विभाजन हुआ। उन्होंने कहा, ''इसके बावजूद, इस विभाजनकारी और विनाशकारी खेल के वादे के रूप में जो एक अलग, स्वायत्त अस्तित्व की शांति और खुशी दिखाई गई थी, वह कभी साकार नहीं हुई। इसके बजाय, हमने सीमाओं पर और देश के भीतर स्थायी अशांति, आपसी अविश्वास, असुरक्षा और छोटी से छोटी बातों पर लगातार कलह को ही न्योता दिया।'' संघ प्रमुख ने कहा कि मातृभूमि के रूप में भारत की भक्ति, साझा पूर्वजों पर गर्व और शाश्वत भारतीय संस्कृति के सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों के अनुसार जीना ही राष्ट्र को हमेशा एकजुट रखता है। उन्होंने भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार का भी जिक्र किया। मच्छार ने पिछले माह दुबई से तेल अवीव जा रही 'फ्लाईदुबई' की उड़ान में हुए हमले के दौरान 174 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों की जान बचाई थी। भागवत ने कहा कि आरएसएस हिंदू चेतना को जगाने और एक सुसंगठित व मजबूत समाज के निर्माण के लिए काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज का दृष्टिकोण और स्वभाव समावेशी है, और ऐसे प्रयासों से हम सभी के बीच भावनात्मक एकता, सद्भावना और अच्छे आचरण को ही मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा, ''यह वही स्वभाव और मूल्य हैं जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी चले आ रहे हैं, जो कैप्टन स्मित मच्छार को अपनी जान जोखिम में डालने और मानव जीवन की रक्षा के लिए समर्पित होने के लिए प्रेरित करते हैं।''
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नागपुर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने मंगलवार को आगाह किया कि सत्ता परिवर्तन के आंदोलन मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं करते और ये राजनीतिक स्वार्थों का औजार बनकर समाज में विभाजन बढ़ा सकते हैं। भागवत ने यहां संघ के वार्षिक विजयादशमी उत्सव को संबोधित करते हुए बांग्लादेश, नेपाल, फ्रांस और अल्बानिया में हाल में हुई हिंसा का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि अपने हितों को साधने वाली ताकतें राजनीतिक परिस्थितियों को बदलने के लिए सत्ता परिवर्तन का सहारा लेती हैं, लेकिन इससे इच्छित परिणाम शायद ही कभी मिलते हैं। आरएसएस प्रमुख ने कहा, ''वे दावा करते हैं कि सत्ता बदलने से स्थिति बदल जाएगी, लेकिन वास्तव में ऐसा कभी नहीं हुआ है।'' भागवत ने कहा कि एक मजबूत भारत ऐसी ताकतों की राह में रुकावट बनेगा, इसीलिए देश को कमजोर और विभाजित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हालांकि कुछ वैश्विक शक्तियां चाहती हैं कि भारत का विकास हो, लेकिन वे इसे बहुत अधिक शक्तिशाली नहीं बनने देना चाहतीं क्योंकि इससे उनके वर्चस्व को चुनौती मिल सकती है। इससे पहले भागवत ने परंपरा अनुसार शस्त्र पूजन किया।
संघ प्रमुख ने लोकतंत्र में आंदोलनों के संदर्भ में कहा कि प्रदर्शनों का उद्देश्य समस्याओं को हल करना होना चाहिए, न कि सामाजिक विभाजन को गहरा करना। उन्होंने कहा, ''समस्याएं बनी रहेंगी और लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन स्वाभाविक हैं। लेकिन इन प्रदर्शनों का उद्देश्य क्या होना चाहिए? इनका एकमात्र लक्ष्य समाधान खोजना होना चाहिए।'' उन्होंने आगाह किया कि जब प्रदर्शन जन कल्याण के बजाय अन्य उद्देश्यों से संचालित होते हैं, तो वे राजनीतिक हथियार बन जाते हैं और व्यक्तियों, समूहों या विचारधाराओं के प्रति विद्वेष भड़काते हैं। भागवत ने राजनीतिक दलों के नेताओं, प्रदर्शनकारियों और प्रशासन से भी यह सुनिश्चित करने की अपील की कि उनके किसी भी कदम से समाज में कड़वाहट या विभाजन न पैदा हो। उन्होंने कहा, ''हमारी भावनाएं कितनी भी तीव्र क्यों न हों, हमें अपने संविधान में तय मर्यादाओं, सभ्य जनसंवाद के नियमों और शालीन आचरण के मानकों का हमेशा सम्मान करना चाहिए।'' भागवत ने युवा पीढ़ी द्वारा जानकारी प्राप्त करने में अधिक विवेक और समझदारी बरतने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने ओटीटी मंचो पर बिना किसी रोक-टोक के परोसी जा रही सामग्री के दुष्प्रभावों पर चिंता जताते हुए उन्होंने सरकार से समाज के हित में उचित नियम बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि इसके बुरे परिणामों का अनुभव करने के बाद कई देशों ने सोशल मीडिया मंचों पर नियम और पाबंदियां लगा दी हैं। भागवत ने कहा कि भारत में भी समाज, विशेषकर ओटीटी मंचों के संबंध में ऐसे उपायों की जरूरत को तेजी से महसूस कर रहा है। भागवत ने कहा कि भले ही जानकारी आसानी से उपलब्ध हो, लेकिन युवा पीढ़ी को यह सिखाया जाना चाहिए कि वे विवेक का इस्तेमाल करें और यह पहचान सकें कि क्या उचित है और क्या नहीं। भागवत ने कहा कि संतुलित और समग्र विकास का दायरा केवल भौतिक सुख-सुविधाओं तक सीमित नहीं होना चाहिए।उन्होंने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी जीवन को बेहतर बना सकते हैं और तार्किक सोच को बढ़ावा दे सकते हैं, लेकिन वे केवल एक साधन हैं, साध्य नहीं। उन्होंने कहा कि केवल उपभोक्तावाद और भौतिकवाद से प्रेरित विकास सामाजिक और मानवीय नुकसान की कीमत पर सुविधाएं लाता है। भागवत ने कहा कि मादक पदार्थों की लत एक गंभीर राष्ट्रीय समस्या है, और सरकार तथा समाज को समय रहते इसका समाधान करना चाहिए तथा इससे पार पाने के उपाय शुरू करने चाहिए। उन्होंने कहा कि माता-पिता और बुजुर्गों को युवा पीढ़ी में यह विवेक पैदा करना चाहिए, ताकि वे खुद को ऐसे सभी प्रभावों और गतिविधियों से दूर रखें जो इन हानिकारक आदतों के विकास का कारण बन सकते हैं। भागवत ने कहा कि नेपाल में हाल में आई विनाशकारी बाढ़ के लिए आंशिक रूप से कई देशों में फैले पूरे हिमालयी क्षेत्र में हुए एकतरफा विकास के परिणामों को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। उन्होंने कृत्रिम मेधा (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस या एआई) का जिक्र करते हुए कहा कि लोगों को इस प्रौद्योगिकी का उपयोग करना और इसमें महारत हासिल करना सीखना चाहिए, साथ ही यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि नैतिक सिद्धांतों की अनदेखी न हो। उन्होंने कहा, ''हम पहले ही देख सकते हैं कि एआई का उपयोग करके कितने फर्जी वीडियो बनाए जा रहे हैं। झूठा प्रचार फैलाने के लिए एक नया हथियार मिल गया है।'' भागवत ने इस बात पर भी जोर दिया कि राष्ट्रीय एकता किसी सौदेबाजी के रिश्ते के बजाय एक भावनात्मक बंधन पर आधारित होती है। उन्होंने कहा, ''हम सभी भारतीय एक हैं और हमारी एकता आंतरिक है। यह दिल की एकता है। यह कोई सौदा या अनुबंध नहीं है।'' आरएसएस प्रमुख ने आरोप लगाया कि कुछ ताकतें असंतोष और अराजकता पैदा करने के लिए सामाजिक विभाजन का फायदा उठाती हैं, समुदायों के बीच पीड़ित होने की भावना को बढ़ावा देती हैं और देश की संस्थाओं में विश्वास को कम करने का प्रयास करती हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि देश की दृढ़ नीतियों, नेतृत्व और युवा पीढ़ी के बीच बढ़ती राष्ट्रीय चेतना ने भारत को मजबूत किया है। आरएसएस प्रमुख ने सार्वभौमिक भाईचारे, आध्यात्मिकता और मानवता में निहित एक 'हिंदू दृष्टि' का आह्वान करते हुए कहा कि दुनिया का मार्गदर्शन करने के लिए भारत को एकीकृत और संतुलित विकास का एक नया मॉडल विकसित करना चाहिए। भागवत ने हिंदू दृष्टिकोण की व्याख्या करते हुए कहा कि यह पूजा के किसी विशेष रूप, खान-पान की आदतों, भाषा, रीति-रिवाजों, जीवन शैली या राजनीतिक विचारधारा से परिभाषित नहीं होता है। उन्होंने कहा कि हिंदू भावना में किसी को भी अपनी पहचान बदलने के लिए मजबूर किए बिना या विभिन्न समुदायों की विशिष्ट पहचान को नष्ट किए बिना दुनिया को एकजुट करने की क्षमता है। भारत की सभ्यतागत परंपरा का वर्णन करने के लिए उन्होंने ''सा प्रथमा संस्कृति विश्ववारा" वाक्यांश का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि आरएसएस एक सुसंगठित, मजबूत हिंदू समाज का निर्माण करना चाहता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह प्रयास सभी पंथों के सम्मान या राष्ट्र की भावनात्मक एकता के विरोध में नहीं है। भागवत ने कहा, ''विचार बोइए, तो कर्म की फसल काटेंगे; चरित्र बोएंगे तो प्रारब्ध का निर्माण होगा।''उन्होंने कहा, ''जब से हमने भावनात्मक एकता को भुला दिया है तब से हम कमजोर हो गए हैं।''भागवत ने कहा कि भारत विविधताओं से भरा देश है और विविधताओं को स्वीकार करना व उनकी रक्षा करना हमारी पारंपरिक पहचान रही है। -
नयी दिल्ली। अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक दशहरा मंगलवार को पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस दौरान लोग रावण के पुतलों का दहन देखने के लिए बड़ी संख्या में रामलीला मैदानों में पहुंचे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के साथ द्वारका में दशहरा समारोह में हिस्सा लिया और रावण का पुतला दहन किया।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इंद्रप्रस्थ रामलीला मैदान में विजयादशमी समारोह में हिस्सा लिया। वहीं, उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन, दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू और चांदनी चौक के सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने लालकिले के पास रामलीला मैदान में आयोजित लव कुश रामलीला समारोह में भाग लिया। राष्ट्रपति मुर्मू ने रावण के पुतले के दहन से पहले भगवान राम, लक्ष्मण और माता सीता की पारंपरिक आरती की। इसके बाद उन्होंने तीर चलाकर रावण के पुतले को आग लगाई। द्वारका श्री रामलीला की आयोजन समिति के सदस्य और मीडिया प्रमुख भरत भूषण मालवीय ने बताया कि रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के 90 फुट ऊंचे पुतले बनाए गए थे। राष्ट्रपति ने दशहरे की शुभकामनाएं देते हुए लोगों से भगवान राम के गुणों को अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि भगवान राम की कहानी लोगों को प्रकृति का सम्मान करने, पर्यावरण की रक्षा करने और सभी का ख्याल रखने की प्रेरणा देती है।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि देश के सभी संस्थानों और राजनीतिक दलों को राष्ट्रहित में एकजुट होकर देश के दुश्मनों के खिलाफ मिलकर लड़ना चाहिए। मोदी ने यहां दशहरा समारोह में शामिल होते हुए यह भी कहा कि संकट कितना भी बड़ा या मुश्किल क्यों न हो, किसी को भी दूसरों के भरोसे बैठकर नहीं रहना चाहिए, बल्कि अपनी ताकत को पहचानना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा, "हमारे विचार एक जैसे हों और... देश के सभी संस्थान तथा सभी राजनीतिक दल राष्ट्रहित के लिए एक साथ खड़े हों। हमें इसी भावना के साथ आगे बढ़ना चाहिए और देश के दुश्मनों के खिलाफ मिलकर लड़ना चाहिए।" पीतमपुरा के डीडीए मैदान में श्री केशव रामलीला समिति की ओर से आयोजित विजयादशमी समारोह में 30 फुट ऊंचे 'राक्षस कॉकरोच' के पुतले को भी जलाया गया। कॉकरोच का यह विशाल पुतला लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा। इससे पहले दिन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोगों को विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं।
दिल्ली में 'रावण दहन' के दौरान एक नाटकीय दृश्य दिखाया गया, जिसमें भगवान राम का तीर लगने के बाद 110 फुट ऊंचे रावण के पुतले ने "हे राम" कहा। इसके बाद एक संवाद के जरिए लोगों से अपने अंदर की बुराइयों का सामना करने की अपील की गई। इस संवाद में कहा गया, "मैं हर साल जलता हूं। लेकिन इस बार अपने अंदर के रावण को जलाओ।" इसमें लोगों से घमंड छोड़ने की अपील की गई। - नई दिल्ली। समुद्र की लहरों पर सवार आईएनएस सुदर्शिनी ओमान के सलालाह बंदरगाह से आगे बढ़ गया है। यह भारतीय नौसेना का तीन मस्तूलों वाला पारंपरिक डिजाइन वाला पाल प्रशिक्षण पोत है। ओमान में यह भारतीय पोत 14 से 17 अक्टूबर तक रहा। ओमान में ठहरने के बाद पोत ने अपनी ऐतिहासिक अंतरमहासागरीय यात्रा ‘लोकायन-2026’ फिर शुरू कर दी है। इस यात्रा के जरिए भारतीय नौसेना अपनी समृद्ध समुद्री विरासत को दुनिया तक पहुंचा रही है। साथ ही, युवा नौसैनिकों को समुद्र की चुनौतियों के बीच कौशल, धैर्य और नेतृत्व सीखने का अवसर मिल रहा है। नौसेना के मुताबिक सलालाह में आईएनएस सुदर्शिनी का ठहराव भारत और ओमान की नौसेनाओं के बीच दोस्ती को और मजबूत करने वाला रहा।इस दौरान दोनों देशों के नौसैनिकों ने पेशेवर बातचीत की और खेल गतिविधियों में भी हिस्सा लिया। इन मुलाकातों ने आपसी तालमेल बढ़ाने के साथ दोनों नौसेनाओं के बीच विश्वास और मित्रता के रिश्तों को भी मजबूती दी। लोकायन-2026 की यह यात्रा दस महीने लंबी है। यह यात्रा समुद्र के रास्ते भारत की मित्रता का संदेश लेकर चल रही है। अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्रों से गुजरता आईएनएस सुदर्शिनी भारतीय नौसेना के प्रशिक्षुओं को समुद्री परिस्थितियों का व्यावहारिक अनुभव दे रहा है। पाल के सहारे लंबी समुद्री यात्रा करना नौसेना के प्रशिक्षुओं को अनुशासन, धैर्य और नेतृत्व की अहम सीख दे रहा है।इस अभियान का उद्देश्य केवल समुद्र की दूरियां तय करना नहीं है। आईएनएस सुदर्शिनी भारत और दूसरे देशों के बीच समुद्री सहयोग तथा सद्भाव बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभा रहा है। इसके साथ भारत की प्राचीन सभ्यतागत भावना ‘वसुधैव कुटुंबकम्,’ यानी पूरी दुनिया एक परिवार है, का संदेश भी अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्रों तक पहुंच रहा है। यह यात्रा भारत की ‘महासागर’ परिकल्पना को भी आगे बढ़ाती है। इसका उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए आपसी सहयोग तथा साझा प्रगति को बढ़ावा देना है। नौसेना द्वारा शुरू किया गया यह लोकायन-2026 भारतीय नौसेना की समुद्री परंपरा, साहसिक खोज और पेशेवर उत्कृष्टता का प्रतीक बन रहा है। आईएनएस सुदर्शिनी अपनी पालों के साथ आगे बढ़ते हुए भारत की समुद्री पहचान को मजबूत करने और दुनिया के देशों के साथ मित्रता के नए रिश्ते बनाने के अभियान में जुटा है।---
- नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को शारदीय नवरात्र के अंतिम दिन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर देवी दुर्गा का स्मरण करते हुए एक संस्कृत श्लोक साझा किया। उन्होंने भक्तों को संकटों से मुक्ति और उन्नति की कामना करते हुए मां सिद्धिदात्री की स्तुति की।पीएम मोदी का शेयर किया श्लोकप्रधानमंत्री ने लिखा –“यैस्तु भक्त्या स्मृता नूनं तेषां वृद्धिः प्रजायते।ये त्वां स्मरन्ति देवेशि रक्षसे तान्न संशयः।”इसका भावार्थ है कि जो भक्त भक्तिपूर्वक देवी का स्मरण करते हैं, उनकी निश्चित रूप से उन्नति होती है। हे देवेश्वरी! जो आपका चिंतन करते हैं, आप उनकी संकटों से रक्षा करती हैं। इसमें कोई संदेह नहीं। यह श्लोक श्रीदेवीकवचम् (दुर्गा कवच) का आठवां श्लोक है, जिसमें देवी की महिमा और उनके स्मरण से मिलने वाली सुरक्षा का वर्णन है।मां सिद्धिदात्री का महत्वनवरात्र के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। ‘सिद्धि’ का अर्थ है पूर्णता या सामर्थ्य और ‘दात्री’ का अर्थ है देने वाली। यह स्वरूप भक्तों को अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशत्व और वशित्व जैसी आठ सिद्धियां प्रदान करती हैं। मां का वाहन सिंह है। उनकी चार भुजाओं में गदा, चक्र, कमल और शंख सुशोभित हैं। यह स्वरूप शक्ति, सिद्धि और दिव्य ज्ञान का प्रतीक माना जाता है।पौराणिक मान्यतामान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव ने मां सिद्धिदात्री की कृपा से अनेक सिद्धियां प्राप्त की थीं। देवी की अनुकंपा से ही शिव का आधा स्वरूप शक्ति के रूप में अभिव्यक्त हुआ और वे अर्धनारीश्वर कहलाए। यह स्वरूप शिवशक्ति की एकता और स्त्री-पुरुष ऊर्जा के संतुलन का प्रतीक है।पूजा विधि और भोगमां सिद्धिदात्री को खीर, हलवा, पूरी, काले चने और मौसमी फल अत्यंत प्रिय हैं। लाल या नीले रंग के फूल, विशेषकर कमल अर्पित किए जाते हैं। महानवमी के दिन कन्या पूजन और प्रसाद अर्पण का विशेष महत्व होता है।
- नई दिल्ली। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में गंभीर चेतावनी दी है कि महत्वपूर्ण वित्तीय संस्थानों और बाजार के बुनियादी ढांचे पर साइबर हमले जरूरी सेवाओं को बाधित कर सकते हैं तथा बाजार का भरोसा डगमगा सकते हैं। IMF ने साइबर खतरों को बढ़ता हुआ सिस्टमिक रिस्क करार दिया है।रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय सेवाओं के तेजी से डिजिटल और एक-दूसरे से जुड़ने के कारण साइबर हमलों का असर पहले से कहीं अधिक गंभीर हो सकता है। बड़े बैंकों, भुगतान प्रणालियों या अन्य महत्वपूर्ण ढांचे पर सफल हमला तुरंत नुकसान पहुंचा सकता है और पूरे वित्तीय सिस्टम में अविश्वास पैदा कर सकता है।IMF ने फ्रंटियर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल की बढ़ती भूमिका पर विशेष ध्यान दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ये मॉडल साइबर हमलों को और शक्तिशाली बनाने के साथ-साथ बचाव की क्षमताओं को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं। सरकारी समर्थन वाले समूहों, रैनसमवेयर गिरोहों और अंदरूनी लोगों के पास अब पहले से कहीं अधिक उन्नत उपकरण मौजूद हैं।तेजी से हो रहे डिजिटलीकरण ने वित्तीय संस्थानों के हमले के दायरे को बढ़ा दिया है। क्लाउड सेवाओं, बाहरी सेवा प्रदाताओं और रियल-टाइम भुगतान प्रणालियों पर निर्भरता के कारण ‘कॉमन पॉइंट ऑफ फेलियर’ का खतरा बढ़ गया है। चुनिंदा टेक्नोलॉजी प्रदाताओं पर अत्यधिक निर्भरता पूरे सिस्टम को कमजोर बना सकती है।IMF ने साइबर सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने, घटनाओं की बेहतर रिपोर्टिंग, थर्ड-पार्टी जोखिमों की कड़ी निगरानी और परिचालन संबंधी लचीलापन बढ़ाने का आह्वान किया है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि ये जोखिम अकेले वित्तीय स्थिरता के लिए खतरा न हों, लेकिन मौजूदा कमजोरियों के साथ मिलकर गंभीर आर्थिक नुकसान पहुंचा सकते हैं। IMF ने साइबर जोखिमों को उन तीन प्रमुख खतरों में शामिल किया है जो वित्तीय स्थितियों को सख्त बना सकते हैं और बाजार में उथल-पुथल पैदा कर सकते हैं।
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चंडीगढ़। पंजाब के संगरूर जिले में लहरागागा-जाखल मार्ग पर रविवार को एक तेज रफ्तार कार की चपेट में आने से आठ मजदूरों की मौत हो गई और 12 अन्य घायल हो गए। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मृतकों के परिवार को दो-दो लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की और कहा कि आरोपी चालक को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। वहीं, एंबुलेंस के मौके पर पहुंचने में काफी देरी होने के आरोप भी लगे हैं। एक स्थानीय व्यक्ति ने दावा किया कि बार-बार फोन करने के बावजूद दुर्घटना के करीब एक घंटे बाद आपातकालीन सेवाएं मौके पर पहुंचीं।
यह घटना अलीशेर गांव के पास उस समय हुई जब 'विकसित भारत गारंटी रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण' (वीबी-जी राम जी) के तहत पंजीकृत 20 से अधिक मजदूरों का समूह कुछ काम में लगा हुआ था। इनमें से कई महिलाएं भी थीं और कुछ मजदूर सड़क के किनारे बैठे हुए थे। पुलिस ने बताया कि मजदूरों का एक समूह जाखल की दिशा से आ रही एक तेज रफ्तार कार की चपेट में आ गया।
पुलिस अधीक्षक (एसपी) पलविंदर सिंह ने बताया कि इसके बाद कार चालक अपना वाहन वहीं छोड़कर मौके से फरार हो गया। पुलिस के एक अन्य अधिकारी के अनुसार, पांच मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई। घायलों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। संगरूर की उपायुक्त (जिलाधिकारी) पूनमदीप कौर ने पुष्टि करते हुए बताया कि इस हादसे में आठ मजदूरों की जान गई है, जबकि 12 घायल हुए हैं। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन पीड़ितों को हर संभव चिकित्सा सहायता प्रदान करने सहित सभी जरूरी कदम उठा रहा है। हालांकि, दुर्घटना के बाद घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस के मौके पर पहुंचने में देरी होने के आरोप लगे। पास की एक फैक्टरी में काम करने वाले और हादसे के तुरंत बाद घटनास्थल पर पहुंचे एक स्थानीय व्यक्ति ने आरोप लगाया कि दुर्घटना के करीब एक घंटे बाद एंबुलेंस मौके पर पहुंचीं। उसने बताया कि घटनास्थल पर पहुंचने पर उसने देखा कि एक कार ने कई मजदूरों को कुचल दिया था। इनमें ज्यादातर महिलाएं थीं। उसने कहा कि सड़क किनारे कम से कम पांच शव पड़े थे। आरोपी चालक उस समय भी घटनास्थल पर मौजूद था, लेकिन पुलिस को आते देखकर वहां से फरार हो गया। उसने आरोप लगाया कि पुलिस के एक अधिकारी द्वारा एंबुलेंस बुलाए जाने के बावजूद आपातकालीन सेवाओं को घटनास्थल पर पहुंचने में एक घंटे का समय लग गया। उसने आरोप लगाया, ''समय पर चिकित्सा सहायता नहीं मिलने के कारण मजदूरों की मौत हुई।'' उसने कहा कि सभी मजदूर गरीब परिवारों से ताल्लुक रखते थे। उसने कहा कि कई बार अनुरोध किए जाने के बावजूद एंबुलेंस के पहुंचने में अत्यधिक देरी हुई, जिसके कारण कई घायलों को कैंटर वाहनों से अस्पताल पहुंचाया गया। उसने आरोप लगाया, ''एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंचीं, इसके लिए प्रशासन जिम्मेदार है।''






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