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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार, 28 फरवरी 2026 को गुजरात के साणंद में माइक्रोन टेक्नोलॉजी की नई सेमीकंडक्टर असेंबली, टेस्ट और पैकेजिंग (ATMP) फैसिलिटी का उद्घाटन करेंगे। यह कार्यक्रम दोपहर करीब 3:45 बजे शुरू होगा, जहां पीएम मोदी उद्घाटन के बाद मौजूद लोगों को संबोधित भी करेंगे।
यह उद्घाटन भारत की सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग यात्रा में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा। साणंद ATMP फैसिलिटी से पहली बार मेड-इन-इंडिया सेमीकंडक्टर मेमोरी मॉड्यूल का कमर्शियल प्रोडक्शन और शिपमेंट शुरू हो जाएगा। इससे ग्लोबल सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन में भारत की स्थिति और मजबूत होगी।प्रोजेक्ट की मुख्य बातें:–प्रोजेक्ट का शिलान्यास सितंबर 2023 में हुआ था।–यह इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) के तहत मंजूर पहला प्रस्ताव था।–कुल निवेश: ₹22,500 करोड़ से अधिक।–प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलते ही निर्माण कार्य तेजी से शुरू हुआ, जो सरकार की –स्ट्रेटेजिक सेमीकंडक्टर निवेश को प्राथमिकता देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।फैसिलिटी की खासियतें:–पूरी तरह तैयार होने पर लगभग 5 लाख स्कवायर फीट का क्लीनरूम स्पेस होगा।–दुनिया के सबसे बड़े रेज्ड-फ्लोर क्लीनरूम में से एक होगा।–फैसिलिटी को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), हाई-परफॉर्मेंस कम्प्यूटिंग और –बढ़ती मेमोरी/स्टोरेज डिमांड को पूरा करने के लिए डिजाइन किया गया है।–यह माइक्रोन के ग्लोबल नेटवर्क से एडवांस्ड डायनामिक रैंडम एक्सेस मेमोरी (DRAM) और NAND सेमीकंडक्टर वेफर्स को तैयार मेमोरी और स्टोरेज प्रोडक्ट्स में कन्वर्ट करेगी, जो पूरी दुनिया के ग्राहकों को सप्लाई की जाएंगी। यह फैसिलिटी भारत को सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में एक भरोसेमंद और प्रतिस्पर्धी गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम है। यह प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत और मजबूत टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम के विजन से पूरी तरह मेल खाता है। उद्घाटन के बाद यह उम्मीद की जा रही है कि भारत में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में निवेश और रोजगार के नए अवसर तेजी से बढ़ेंगे। -
कोलकाता. पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनीक्षण (एसआईआर) के बाद मतदाता सूची 28 फरवरी को प्रकाशित की जाएगी, जिसमें मसौदा सूची के सभी 7.08 करोड़ नाम शामिल होंगे, लेकिन उन्हें तीन अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया जाएगा। निर्वाचन आयोग के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। इन श्रेणियों में अनुमोदित, हटाए गए और विचाराधीन/निर्णय के अधीन नाम शामिल होंगे।
अधिकारी ने बताया कि उच्चतम न्यायलय के निर्देशों के अनुपालन में प्रकाशित की जा रही मतदाता सूची अंतिम सूची नहीं होगी, क्योंकि तार्किक विसंगति के मामलों की जांच और निपटारे की प्रक्रिया जारी रहने के साथ-साथ पूरक सूचियां चरणबद्ध तरीके से जारी की जाती रहेंगी। सूत्रों के अनुसार, सूचियों में एसआईआर के तहत किए गए बदलाव देखे जा सकेंगे।आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन मतदाताओं के नाम "निर्णय प्रक्रियाधीन" के रूप में चिह्नित हैं, उन्हें तब तक मतदान करने की अनुमति नहीं दी जाएगी जब तक उनके मामलों का निपटारा नहीं हो जाता और उन्हें औपचारिक रूप से अनुमोदित नहीं कर दिया जाता। निर्वाचन आयोग के अधिकारी ने कहा कि मंजूरी मिलने और बाद की पूरक सूची में शामिल किए जाने के बाद ही उन्हें मतदान का अधिकार प्राप्त होगा। -
कोरापुट. ओडिशा के कोरापुट जिले के एक जंगल में बृहस्पतिवार को करीब 225 करोड़ रुपये मूल्य का हशीश तेल बरामद किया गया। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि गुप्त सूचना के आधार पर, पुलिस अधीक्षक (एसपी) रोहित वर्मा के नेतृत्व में एक टीम ने आंध्र प्रदेश की सीमा से लगे झोलापुट जंगल में एक विनिर्माण इकाई का भंडाफोड़ किया। पुलिस उपमहानिरीक्षक (दक्षिण-पश्चिमी रेंज) कंवर विशाल सिंह ने बताया, ''छापेमारी के दौरान, गांजे से निकाला गया 1,800 लीटर से अधिक हशीश तेल बरामद किया गया। जब्त किए गए प्रतिबंधित तेल का बाजार मूल्य करीब 225 करोड़ रुपये है।'' उन्होंने कहा कि आरोपी वहां से भाग गए और उन्हें गिरफ्तार करने के प्रयास जारी हैं।
उन्होंने कहा कि गांजे के खिलाफ सख्त कार्रवाई के कारण तस्करों ने अपने तौर-तरीके बदल दिए हैं। उन्होंने कहा कि गांजा भारी होता है और परिवहन के दौरान आसानी से पकड़ा जा सकता है, इसलिए तस्कर इसे हशीश तेल में बदल रहे हैं, जिसे कम मात्रा में ले जाया जा सकता है और इसमें अधिक मुनाफा मिलता है। पुलिस ने बताया कि एक अलग अभियान में, नंदपुर पुलिस थाना क्षेत्र में दो वाहनों से करीब पांच करोड़ रुपये मूल्य का 1,143 किलोग्राम गांजा जब्त किया गया। इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। -
नयी दिल्ली. विमान यात्री अब बुकिंग के 48 घंटों के भीतर बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के हवाई टिकट रद्द या उसमें बदलाव करा सकते हैं। हालांकि, यह कुछ शर्तों पर निर्भर करेगा। नागर विमानन नियामक डीजीसीए ने इसको लेकर टिकट किराया वापसी नियमों में संशोधन किया है। हालांकि, यह सुविधा उन घरेलू उड़ानों के लिए उपलब्ध नहीं होगी जिनकी प्रस्थान तिथि बुकिंग की तारीख से सात दिन से कम और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के मामले में 15 दिन से कम है। नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने नियमों में संशोधन करते हुए यह भी कहा कि यदि यात्री, बुकिंग के 24 घंटों के भीतर नाम में किसी प्रकार की गलती को बताता है और टिकट सीधे एयरलाइन की वेबसाइट के माध्यम से बुक किया गया है, तो एयरलाइन कंपनियों को उसी व्यक्ति के नाम पर सुधार के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लेना चाहिए। संशोधित नियम 26 मार्च से प्रभावी होंगे।
डीजीसीए ने कहा, ''ट्रैवल एजेंट/पोर्टल के माध्यम से टिकट खरीदने की स्थिति में, पैसे वापसी की जिम्मेदारी एयरलाइन कंपनियों की होगी क्योंकि एजेंट उनके नियुक्त प्रतिनिधि होते हैं। एयरलाइन कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि पैसे वापस करने की प्रक्रिया 14 कार्य दिवसों के भीतर पूरी हो जाए।'' इसके अलावा, चिकित्सा आपात स्थिति के कारण यात्रियों के टिकट रद्द करने के नियमों में भी बदलाव किये गये हैं। समय पर रिफंड न मिलने की यात्रियों की बढ़ती शिकायतों को देखते हुए हवाई टिकट वापसी के लिए नागर विमानन आवश्यकताओं (सीएआर) में संशोधन किये गये हैं। दिसंबर, 2025 में इंडिगो की उड़ानें रद्द होने के दौरान भी टिकट वापसी का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया था। उस समय नागर विमानन मंत्रालय ने एयरलाइन कंपनियों को निर्धारित समयसीमा के भीतर रिफंड करने का निर्देश दिया था। संशोधित नियम 24 फरवरी को जारी किए गए थे।
अब एयरलाइन कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि वे यात्रियों को टिकट बुक करने के बाद 48 घंटे की अवधि के लिए 'लुक इन' यानी उसे अद्यतन करने का विकल्प प्रदान करें। नियामक ने कहा, ''इस अवधि के दौरान यात्री बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के टिकट रद्द या संशोधित करा सकते हैं। लेकिन जिस संशोधित उड़ान के लिए टिकट लेना चाहते हैं, उसके लिए जो भी किराया बनता है यानी किराये में जो अंतर है, वह देना होगा। नियामक ने कहा, ''जब टिकट सीधे एयरलाइन की वेबसाइट के माध्यम से बुक किया जाता है, यह सुविधा उन उड़ानों के लिए उपलब्ध नहीं होगी जिनकी प्रस्थान तिथि घरेलू उड़ानों के मामलों में बुकिंग की तारीख से सात दिन से कम और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए 15 दिन से कम है।'' बुकिंग समय के 48 घंटे बाद, यह विकल्प उपलब्ध नहीं होगा और यात्री को संशोधन के लिए टिकट रद्द कराने को लेकर संबंधित शुल्क का भुगतान करना होगा। डीजीसीए ने यह भी कहा है कि यदि यात्री द्वारा टिकट बुकिंग के 24 घंटे के भीतर नाम में किसी तरह की गलती बताई जाती है और टिकट सीधे एयरलाइन की वेबसाइट से बुक किया जाता है, तो उसी व्यक्ति के नाम में सुधार के लिए एयरलाइन को कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लेना चाहिए। नियामक के अनुसार, चिकित्सा आपात स्थिति के कारण टिकट रद्द होने की स्थिति में एयरलाइन कंपनी पैसा वापस कर सकती है या 'क्रेडिट' विकल्प प्रदान कर सकती हैं। इसके तहत यदि यात्री या उसी पीएनआर में सूचीबद्ध परिवार का कोई सदस्य यात्रा के दौरान अस्पताल में भर्ती होता है, तो यह नियम लागू होगा। डीजीसीए ने कहा, ''अन्य सभी परिस्थितियों में, यात्री की यात्रा के लिए 'फिटनेस' को लेकर एयरलाइन के एयरोस्पेस मेडिसिन विशेषज्ञ/डीजीसीए के पैनल में शामिल एयरोस्पेस मेडिसिन विशेषज्ञ से प्राप्त होने के बाद पैसे वापस किये जाएंगे। डीजीसीए ने पिछले साल अक्टूबर में टिकट किराया रिफंड से संबंधित संशोधित सीएआर के मसौदे पर संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे थे। अनुसूचित विमानन कंपनियों को दिसंबर, 2025 में यात्रियों से संबंधित कुल 29,212 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 7.5 प्रतिशत 'रिफंड' से संबंधित थीं। -
मथुरा (उप्र). फाल्गुन पूर्णिमा के दिन चंद्रग्रहण के चलते ब्रज में होली पूजन एवं होलिका दहन का पर्व तीन मार्च के स्थान पर दो मार्च को ही मनाया जाएगा। लेकिन धूलेंड़ी चैत्र कृष्ण प्रतिपदा (चार मार्च) के अवसर पर ही मनाई जाएगी। देशभर में इस वर्ष होलिका दहन की तिथि को लेकर असमंजस है। लेकिन ब्रज में कमोबेश सभी प्रमुख मनीषियों एवं ज्योतिषियों द्वारा यह तय हो चुका है कि तीन मार्च को चंद्रग्रहण लगने के कारण दो मार्च को ही होलिका दहन का शुभ मुहूर्त है। उनका कहना है कि चूंकि पूर्णिमा पर तो मुहूर्त के समय प्रतिपदा तिथि लग जाएगी, इसलिए तब होलिका दहन शुभ नहीं होगा। मथुरा की प्रमुख होलिकोत्सव आयोजन समिति के संस्थापक एवं महामंत्री मदन मोहन श्रीवास्तव ने बताया कि उनके यहां होलिका पूजन करने वाले श्री कार्ष्णि उदासीन आश्रम, रमण रेती, महावन के महामण्डलेश्वर कार्ष्णि गुरुशरणानन्द स्वामी के मुताबिक तीन मार्च को शाम 6.47 बजे तक ग्रहण रहेगा और इसके बाद प्रतिपदा तिथि शुरू हो जाएगी। उन्होंने बताया है कि चूंकि होलिका दहन प्रतिपदा में नहीं हो सकता, इसलिए दो मार्च को ही किया जाएगा तथा रंगों की होली चार मार्च को खेली जाएगी। पहले ऐसा माना जा रहा था कि आम वर्षों की भांति होलिका दहन फाल्गुन पूर्णिमा (तीन मार्च) को ही किया जाएगा। दूसरी ओर, ज्योतिषाचार्य कामेश्वर नाथ चतुर्वेदी के अनुसार भी चंद्रग्रहण के कारण होलिका दहन का शुभ समय दो मार्च को शाम 7.30 बजे बन रहा है, जबकि तीन मार्च को ग्रहण समाप्त होते-होते पूर्णिमा तिथि समाप्त हो जाएगी और प्रतिपदा तिथि प्रारंभ हो जाएगी, ऐसे में शास्त्र अनुसार प्रतिपदा में होलिका दहन नहीं होता है।
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नयी दिल्ली. भारत ने बृहस्पतिवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनके कनाडाई समकक्ष मार्क कार्नी के बीच अगले सप्ताह होने वाली वार्ता दोनों देशों के बीच भविष्योन्मुखी साझेदारी को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करेगी। कार्नी शुक्रवार से भारत की चार दिवसीय पर आएंगे, जो प्रधानमंत्री के रूप में उनकी भारत की पहली यात्रा होगी। इस यात्रा का उद्देश्य मुख्य रूप से द्विपक्षीय संबंधों को नयी गति प्रदान करना है। वर्ष 2023 में कनाडा में एक खालिस्तानी अलगाववादी की हत्या को लेकर हुए राजनयिक विवाद के बाद दोनों देशों के रिश्तों में गंभीर तनाव आ गया था। कनाडा के प्रधानमंत्री का पहला पड़ाव मुंबई होगा, जहां वह विभिन्न व्यावसायिक कार्यक्रमों में भाग लेंगे और शीर्ष भारतीय एवं कनाडाई कॉरपोरेट नेताओं, वित्तीय विशेषज्ञों और नवोन्मेषकों के साथ बातचीत करेंगे। कार्नी रविवार को नयी दिल्ली पहुंचेंगे और दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच सोमवार को व्यापक वार्ता होगी। विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों नेता भारत-कनाडा रणनीतिक साझेदारी के विभिन्न क्षेत्रों में अब तक हासिल की गई प्रगति की समीक्षा करेंगे, जो पिछले साल जून में कनानास्किस और पिछले साल नवंबर में जोहानिसबर्ग में हुई उनकी पिछली बैठकों पर आधारित होगी। मंत्रालय ने कहा, ''यह दौरा सामान्य होते भारत-कनाडा द्विपक्षीय संबंधों के महत्वपूर्ण चरण पर हो रहा है।'' विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, ''दोनों देशों के प्रधानमंत्री पहले ही एक रचनात्मक और संतुलित साझेदारी को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त कर चुके हैं, जो एक-दूसरे की चिंताओं और संवेदनशील मुद्दों पर पारस्परिक सम्मान, मजबूत जन-संबंधों और बढ़ती आर्थिक परस्पर पूरकता पर आधारित होगी।'' बयान के अनुसार, ''दोनों देशों के नेताओं के बीच होने वाली यह आगामी बैठक भारत तथा कनाडा के मध्य एक दूरदर्शी साझेदारी के निर्माण में सकारात्मक प्रगति तथा साझा दृष्टिकोण की पुष्टि करने का अवसर प्रदान करेगी।''
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंस्टाग्राम पर 100 मिलियन यानी 10 करोड़ फॉलोअर्स का आंकड़ा पार कर नया रिकॉर्ड बनाया है। इसके साथ ही वे इस मुकाम तक पहुंचने वाले दुनिया के पहले नेता बन गए हैं।
2014 में इंस्टाग्राम से जुड़ने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले एक दशक में अपने अकाउंट को दुनिया के नेताओं के बीच सबसे अधिक सक्रिय और सबसे ज्यादा फॉलो किए जाने वाले प्लेटफॉर्म में शामिल किया है। उनकी डिजिटल मौजूदगी लगातार बढ़ी है, जो भारत और विदेश दोनों जगह लोगों से जुड़ने की उनकी रणनीति को दर्शाती है। इंस्टाग्राम पर फॉलोअर्स के मामले में पीएम मोदी अन्य वैश्विक नेताओं से काफी आगे हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 43.2 मिलियन फॉलोअर्स के साथ दूसरे स्थान पर हैं। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांटो के 15 मिलियन, ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा के 14.4 मिलियन, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन के 11.6 मिलियन और अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली के 6.4 मिलियन फॉलोअर्स हैं।सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री मोदी के 106.2 मिलियन फॉलोअर्स हैं, जबकि फेसबुक पर उनके 54 मिलियन फॉलोअर्स हैं। ये आंकड़े उनकी व्यापक वैश्विक पहुंच और मजबूत जनसंपर्क को दर्शाते हैं।भारत में इंस्टाग्राम पर अन्य नेताओं की तुलना में प्रधानमंत्री मोदी काफी आगे हैं। दूसरे स्थान पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं, जिनके लगभग 16.1 मिलियन फॉलोअर्स हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के लगभग 12.6 मिलियन फॉलोअर्स हैं।दिसंबर 2025 तक वैश्विक नेताओं के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने सबसे अधिक अप्रूवल रेटिंग हासिल की। स्टेटिस्टा के अनुसार उनकी अप्रूवल रेटिंग 70% रही। अमेरिकी बिजनेस इंटेलिजेंस फर्म Morning Consult के 2 से 8 फरवरी के बीच जुटाए गए आंकड़ों में भी वे 67% अप्रूवल रेटिंग के साथ शीर्ष पर रहे। -
नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुरुवार को जमशेदपुर के कदमा (मरीन ड्राइव) में प्रस्तावित श्री जगन्नाथ आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र के मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन किया। उन्होंने इस अवसर पर अपने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा, ”भगवान जगन्नाथ की कृपा पूरी मानवता पर बिना किसी भेदभाव के समान रूप से बरसती है।”
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन की शुरुआत ‘जय जगन्नाथ’ के उद्घोष से की और कहा कि महाप्रभु का दरबार भेदभाव से परे है। यहां जाति, वर्ग या ऊंच-नीच का कोई स्थान नहीं। उन्होंने लोक प्रचलित उक्ति ‘जगन्नाथ के भात, जगत पसारे हाथ’ का उल्लेख करते हुए कहा कि यह परंपरा साझा जीवन-मूल्यों और सामूहिकता की प्रतीक है, जहां सभी एक साथ महाप्रसाद ग्रहण कर समरसता का अनुभव करते हैं। मंदिर निर्माण के भूमिपूजन के समय को उन्होंने ईश्वरीय संयोग बताया।उन्होंने कहा कि जैसे रथयात्रा में प्रभु अपनी इच्छा से नंदीघोष रथ पर विराजमान होते हैं, उसी प्रकार इस शिलान्यास का भी यही उचित समय था। उन्होंने विश्वास जताया कि यह केंद्र सामाजिक जागरण का माध्यम बनेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अब नीलांचल के प्रभु का आशीर्वाद जमशेदपुर की धरती पर भी स्थायी रूप से स्थापित होगा।झारखंड की पूर्व राज्यपाल रहीं राष्ट्रपति ने जगन्नाथ संस्कृति को जनजातीय और गैर-जनजातीय परंपराओं के अद्भुत समन्वय का प्रतीक बताया। सबर जनजाति के राजा विश्वावसु और ब्राह्मण विद्यापति की कथा का उल्लेख करते हुए उन्होंने सामाजिक एकात्मता की विरासत को रेखांकित किया।उन्होंने कहा कि लकड़ी के देवता के रूप में भगवान जगन्नाथ प्रकृति संरक्षण और पर्यावरण-सम्मत जीवन शैली का संदेश देते हैं, जो आदिवासी समाज की मूल चेतना से जुड़ा है। मंदिर के भूमि पूजन कार्यक्रम में झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।ट्रस्ट अध्यक्ष एस.के. बेहरा के अनुसार, करीब 100 करोड़ रुपए की लागत से ढाई एकड़ में विकसित होने वाली इस परियोजना में मुख्य मंदिर डेढ़ एकड़ और आध्यात्मिक-सांस्कृतिक केंद्र एक एकड़ में बनाया जाएगा। मंदिर की वास्तु-शैली श्री जगन्नाथ मंदिर पुरी से प्रेरित होगी। 4 वर्षों में मंदिर और दो वर्षों में आध्यात्मिक केंद्र पूरा करने का लक्ष्य है। यहां गीता, भागवत जैसे ग्रंथों के अध्ययन के माध्यम से युवाओं में नैतिकता, अनुशासन और आत्मविश्वास का विकास करने की योजना है।( - नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 27 फरवरी को प्रातः लगभग 11:30 बजे “विकसित भारत के लिए प्रौद्योगिकी, सुधार और वित्त” विषय पर आयोजित बजट पश्चात वेबिनार को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से संबोधित करेंगे। इस वेबिनार में सार्वजनिक पूंजीगत व्यय को बढ़ावा देने, अवसंरचना विकास, बैंकिंग क्षेत्र में सुधार, वित्तीय क्षेत्र की संरचना को सुदृढ़ करने, पूंजी बाजारों को मजबूत बनाने तथा कर सुधारों के माध्यम से नागरिकों के जीवनयापन को अधिक सरल और सुगम बनाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा की जाएगी।यह वेबिनार केंद्रीय बजट 2026-27 से उभरने वाले प्रमुख विषयों पर आयोजित किये जा रहे बजट पश्चात वेबिनारों की श्रृंखला में पहला है। इन वेबिनारों का उद्देश्य पिछले अनुभवों से सीख लेना और प्रतिभागियों से संरचित प्रतिक्रिया प्राप्त करना है ताकि वित्त वर्ष 2026-27 के बजट घोषणाओं के परिणामोन्मुखी कार्यान्वयन को सुदृढ़ और सुनिश्चित किया जा सके, जिसमें विभिन्न हितधारकों के व्यावहारिक अनुभव और अंतर्दृष्टि का लाभ उठाया जा सके। इनमें उद्योग, वित्तीय संस्थानों, बाजार प्रतिभागियों, सरकार, उद्योग नियामकों और शिक्षा जगत के हितधारकों को एक साथ लाया जाएगा ताकि प्रमुख बजट घोषणाओं के प्रभावी कार्यान्वयन मार्गों पर विचार-विमर्श किया जा सके।
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नई दिल्ली। भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) के प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, यदि बंगाल विधानसभा चुनाव एक ही चरण में होते हैं, तो केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) की लगभग 2500 कंपनियों की आवश्यकता होगी। एक चरण में चुनाव कराने का प्रस्ताव पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कोलकाता स्थित कार्यालय से नई दिल्ली स्थित चुनाव आयोग के मुख्यालय को भेजा गया है, हालांकि सीईओ ने यह कहा था कि इस मामले में अंतिम निर्णय आयोग की ओर से लिया जाएगा।
आयोग के एक सूत्र ने बताया, “एकल चरण के चुनाव की सिफारिश के आधार पर, आयोग ने उस स्थिति में सीएपीएफ की आवश्यकता का प्रारंभिक आकलन किया था और अनुमान लगाया था कि एकल चरण में 2,500 कंपनियों की आवश्यकता होगी। अब, आयोग केंद्रीय गृह मंत्री से इस मामले पर चर्चा कर सकता है कि क्या सीएपीएफ की उन 2,500 कंपनियों की व्यवस्था की जा सकती है या नहीं और परिणाम के आधार पर चरणों की संख्या तय की जाएगी।”हालांकि, उन्होंने आगे कहा कि यदि एक चरण का चुनाव संभव नहीं भी है, तो इस बार चरणों की संख्या पश्चिम बंगाल में पिछले कुछ चुनावों की तुलना में काफी कम होगी। 2024 के लोकसभा चुनाव, जो राज्य में आखिरी बड़ा चुनाव था। उस दौरान सीएपीएफ की 1,099 कंपनियों को तैनात किया गया था। 2011 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में भी दो चरणों में मतदान हुआ था और उस दौरान सीएपीएफ की 725 कंपनियों को तैनात किया गया था। पश्चिम बंगाल में आखिरी बार एक चरण में मतदान 2001 के राज्य विधानसभा चुनावों में हुआ था। पश्चिम बंगाल में एक ही चरण में चुनाव होने की संभावना के अपने फायदे और नुकसान दोनों होंगे। सीईओ कार्यालय के सूत्रों ने कहा, “इसका फायदा यह है कि राजनीतिक दल अपने समर्थकों को एक इलाके से दूसरे इलाके में जुटाने में सक्षम नहीं होंगे और इस तरह मतदान के दिन या उससे एक दिन पहले बाहरी लोगों को जुटाने की पारंपरिक शिकायत का समाधान नहीं कर पाएंगे, जिससे मतदाताओं को डराया जा सके।” -
नई दिल्ली ।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ एक जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि “इंसानियत को कभी भी लड़ाई की वजह से तकलीफ नहीं होनी चाहिए।” उन्होंने ग्लोबल स्टेबिलिटी की जरूरत पर जोर दिया। PM मोदी ने गाजा शांति पहल के लिए भारत का सपोर्ट भी जताया और इसे इलाके में पक्की और सही शांति की तरफ एक कदम बताया।
PM मोदी ने गाजा में चल रहे हालात पर भारत के रुख़ के बारे में डिटेल में बताया, और कहा कि “गाज़ा पीस प्लान के जरिए शांति का रास्ता बनाया गया है” और ऐसी डिप्लोमैटिक कोशिशों के लिए भारत के कमिटमेंट को फिर से पक्का किया। PM मोदी ने कहा, “भारत का विज़न साफ़ है कि इंसानियत को कभी भी लड़ाई का शिकार नहीं बनना चाहिए। गाज़ा पीस प्लान ने शांति का रास्ता खोला है। भारत ने ऐसी कोशिशों का सपोर्ट किया है। भविष्य में भी, भारत सभी देशों के साथ कोऑपरेट करता रहेगा और बातचीत करता रहेगा।”पीएम ने ग्लोबल सिक्योरिटी चुनौतियों का सामना करने में नई दिल्ली और यरुशलम के बीच साझा इरादे पर भी ज़ोर दिया और कहा कि दोनों देश कट्टरपंथ के खतरे के खिलाफ एकजुट हैं। PM मोदी ने कहा, “भारत और इजरायल इस बात पर साफ हैं कि दुनिया में आतंकवाद के लिए कोई जगह नहीं है। आतंकवाद को किसी भी रूप में मंज़ूर नहीं किया जा सकता। हम आतंकवाद और उसके सपोर्टर्स के खिलाफ लड़ते रहेंगे।”US के नेतृत्व वाले गाजा पीस इनिशिएटिव के लिए अपना सपोर्ट दोहराते हुए, PM मोदी ने बुधवार को नेसेट में अपने भाषण को याद किया, जहां उन्होंने इस प्रस्ताव को मिडिल ईस्ट के लिए “न्यायसंगत और टिकाऊ शांति” की ओर एक “रास्ता” बताया था।“गाज़ा पीस इनिशिएटिव, जिसे UN सिक्योरिटी काउंसिल ने मंज़ूरी दी थी, एक रास्ता देता है। भारत ने इस इनिशिएटिव के लिए अपना पक्का सपोर्ट जताया है। हमारा मानना है कि इसमें इस इलाके के सभी लोगों के लिए न्यायसंगत और टिकाऊ शांति का वादा है, जिसमें फ़िलिस्तीन मुद्दे को सुलझाना भी शामिल है… हमारी सभी कोशिशें समझदारी, हिम्मत और इंसानियत से चलें। शांति का रास्ता हमेशा आसान नहीं होता। लेकिन भारत इस इलाके में बातचीत, शांति और स्थिरता के लिए आपके और दुनिया के साथ है,” PM मोदी ने कहा। 2017 में अपनी ऐतिहासिक पहली यात्रा के बाद, यह PM मोदी का अपने कार्यकाल में इजराइल का दूसरा दौरा है। -
नई दिल्ली। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने इजरायली समकक्ष बेंजामिन नेतन्याहू के साथ दो दिवसीय दौरे के आखिरी दिन द्विपक्षीय बैठक की और कई समझौतों पर मुहर लगाई। पीएम नेतन्याहू ने बाद में मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि भविष्य नई तकनीक का है। नई तकनीक को लेकर नेतन्याहू ने कहा कि आज शिक्षा के क्षेत्र में नई तकनीक और एआई की मदद से हर छात्र तक आसानी से पहुंचा जा सकता है और उसे उसकी पूरी क्षमता तक आगे बढ़ने का मौका दिया जा सकता है। पहले जो परेशानियां और सीमाएं थीं, अब वे नहीं रहीं।
उन्होंने आगे कहा कि भविष्य उन्हीं देशों का है जो नई सोच और नए कार्य करने में सक्षम हैं। इजरायल और भारत दोनों ही नए विचार और तकनीक पर जोर दे रहे हैं। दोनों देश बहुत पुरानी और महान सभ्यताएं हैं, जिन्हें अपने इतिहास पर गर्व है, लेकिन वे भविष्य को बेहतर बनाने के लिए भी पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने कहा कि भारत और इजरायल मिलकर यह काम और बेहतर तरीके से कर सकते हैं।अपने संबोधन की शुरुआत इजरायली बेंजामिन नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री मोदी के दिल छूने वाले अंदाज को बयां कर की। उन्होंने कहा, “यह एक शानदार दौरा है, एक शानदार विजिट का शानदार अंत। यह छोटी लेकिन बहुत ज्यादा फलदायी और दिल को छूने वाली मुलाकात थी। मुझे लगता है कि कल नेसेट में आपके दिल को छूने वाले बयान के बाद इजरायल में सभी भावुक होंगे। मैं आपको बता सकता हूं कि तब से हमें न केवल अपने दिलों में गहराई से देखने का मौका मिला है, बल्कि हमारे दोनों देशों में मौजूद शानदार दिमागों को देखने का भी मौका मिला है।”इसके साथ ही नेतन्याहू ने अपने मित्र पीएम मोदी के काम को भी काबिल-ए-तारिफ करार दिया। बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि आपकी सरकार बेहद कुशल है। आप एक मंत्री और एक राजदूत के साथ जो काम कर सकते हैं, वह काबिल-ए-तारीफ है। दोनों देशों के बीच जो सोच और दिलों का जुड़ाव यहां देखने को मिला है, वह आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि यह सरकार-से-सरकार सहयोग, जिसका लंबे समय से इंतजार था, अब नई गति पकड़ेगा और इससे दोनों देशों को एक-दूसरे से पहुंचने वाले फायदों में इजाफा होगा।इजरायली प्रधानमंत्री के बाद भारत के पीएम ने कहा कि भारत जल्द ही इजरायल के साथ पारस्परिक लाभ वाले फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को अंतिम रूप देगा। इजरायल में भी अब भारत का यूपीआई पेमेंट सिस्टम चलेगा, इसे लेकर द्विपक्षीय बैठक में समझौता हुआ है। -
नई दिल्ली। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इजरायल के दौरे पर राष्ट्रपति इसाक हर्जोग से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने स्टार्टअप, शिक्षा, नवाचार, और तकनीक संबंधित अन्य मुद्दों पर चर्चा की। वहीं, पीएम मोदी ने राष्ट्रपति हर्जोग के साथ मिलकर प्रेसिडेंसियल गार्डेन में ‘एक पेड़ मां के नाम’ लगाया। पीएम मोदी ने राष्ट्रपति हर्जोग को भारत आने का न्योता भी दिया।
मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने कहा, “राष्ट्रपति जी, आपने जिन उम्दा शब्दों के साथ हमारा स्वागत किया, उसके लिए मैं आपका आभारी हूं। मैं देख रहा हूं कि कल से जिस तरह से मेरा और मेरी डेलिगेशन का स्वागत सम्मान हुआ है, वो भारत के प्रति इजरायल के दिलों में जो गहरा लगाव है, उसका प्रतिबिंब है और इसके लिए मैं बहुत आभारी हूं।”पीएम मोदी ने आगे कहा, “आपने सही कहा कि भारत और इजरायल का संबंध अनेक क्षेत्रों में बड़ी मजबूती के साथ काम आ सकता है। विज्ञान, इनोवेशन, शैक्षणिक संस्थान, और कुछ चीजों में तो आप लोगों को महारथ हासिल है, जैसे पानी और खेती के संबंध में। भारत इजरायल की बहुत सी अच्छी चीजों को आज भी, खासकर खेती में, लागू करने का प्रयास करता है और उसके अच्छे परिणाम भी निकल रहे हैं।”पीएम मोदी ने इजरायली राष्ट्रपति को भारत आने का न्योता देते हुए कहा, “मुझे खुशी है कि मुझे आपसे पहले भी कई जगहों पर मिलने का मौका मिला है। मैंने आपके विचारों की स्पष्टता सुनी है। भारत के प्रति आपके मान-सम्मान का भाव देखा है, इसके लिए मैं आपका बहुत आभारी हूं। भारत के लोग आपका स्वागत करने के लिए बहुत उत्सुक हैं। इसलिए मैं विशेष रूप से भारत आने का निमंत्रण देता हूं। मैं आपसे आग्रह करूंगा कि सिर्फ दिल्ली आकर वापस मत जाना, कुछ समय ज्यादा निकालना ताकि भारत के अन्य कुछ संस्थानों को भी, वहां के लोगों को भी आपका स्वागत करने का मौका मिले।”इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने कहा, “मैं आपके होशियार युवा भारतीय स्टूडेंट्स को इजरायल में पढ़ने के लिए आने के लिए प्रोत्साहित करता हूं। मैं इजरायली स्टूडेंट्स को भारत में पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करता हूं। इजरायल और भारत के बीच यह कनेक्टिविटी पूरी जियोस्ट्रेटेजिक स्थिति को ग्लोबल साउथ के फायदे के लिए बदल सकती है। हम जानते हैं कि आप कई क्षेत्रों में दुनिया को लीड करते हैं और हम बहुत भावुक और उत्साहित हैं कि आप यहां हमारे साथ हैं।”इससे पहले राष्ट्रपति हर्जोग ने एक्स पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें पीएम मोदी के स्वागत की तैयारियां दिखाई गईं। एक्स पर वीडियो पोस्ट करते हुए, राष्ट्रपति हर्जोग ने लिखा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, इजरायल के लोग खुले हाथों से आपका स्वागत करते हैं। मैं आज येरुशलम में आपकी मेजबानी करने का इंतजार कर रहा हूं!” -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तेल अवीव यात्रा के बाद भारत-इजराइल द्विपक्षीय संबंध रणनीतिक साझेदारी के उच्च स्तर पर पहुंच गए हैं। इजराइल ने उन्हें सर्वोच्च सम्मान से नवाजा और वे पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने जिन्होंने इजराइली संसद नेसेट में संबोधन किया।
‘मोदी स्टोरी’ के अनुसार भारत-इजराइल साझेदारी की शुरुआत 2006 में हुई, जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। उस समय उनका ध्यान किसानों की उत्पादकता बढ़ाने और पानी की दक्षता को मजबूत करने पर था। उन्होंने इजराइल के एडवांस्ड सिंचाई सिस्टम, ग्रीनहाउस खेती, वेस्टवॉटर रीसाइक्लिंग, डेयरी डेवलपमेंट और हाई-वैल्यू एग्रीकल्चर का अध्ययन किया। इसके बाद ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ विजन गुजरात की जल नीति में शामिल हुआ। एक दशक बाद 2017 में नरेंद्र मोदी पहले भारतीय प्रधानमंत्री बनकर इजराइल गए। इस दौरे ने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक स्तर पर ले जाने में अहम भूमिका निभाई। कृषि के साथ-साथ टेक्नोलॉजी, डिजिटल इनोवेशन, डिफेंस और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग में सहयोग बढ़ा। भारत फोर्ज के प्रबंध निदेशक बाबा कल्याणी के अनुसार, इस दौर में उन्होंने पहली बार डिजिटल, आईओटी और एआई को व्यवसाय, मैन्युफैक्चरिंग और एग्रीकल्चर में कैसे लागू किया जा सकता है, यह सीखा। प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के मजबूत व्यक्तिगत संबंध ने भारतीय और इजराइली कंपनियों के बीच भरोसा और सहयोग को तेज किया। ‘मोदी स्टोरी’ के अनुसार, 2006 में कृषि इनोवेशन से शुरू हुई सहभागिता अब टेक्नोलॉजी, भरोसे और साझा विजन के आधार पर व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदल गई है। प्रधानमंत्री मोदी की लगातार सहभागिता और संवाद ने भारत-इजराइल संबंधों में निरंतरता और गहराई लाई है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि भारत और इजरायल जल्द ही फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को फाइनल करेंगे और टेक और इनोवेशन सेक्टर में सहयोग को गहरा करने के लिए एक “क्रिटिकल और इमर्जिंग टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप” की स्थापना की घोषणा की।
दरअसल, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ देश के दो दिन के सरकारी दौरे के हिस्से के तौर पर जॉइंट स्टेटमेंट के दौरान बोलते हुए, PM मोदी ने कहा कि दोनों नेताओं ने बाइलेटरल सहयोग को एक नई दिशा और तेज रफ्तार देने पर चर्चा की। उन्होंने कहा, “आज की मीटिंग में, हमने अपने सहयोग को एक नई दिशा और तेज रफ्तार देने पर चर्चा की। हमारा इकोनॉमिक सहयोग ग्रोथ, इनोवेशन और साझा खुशहाली का इंजन है। आपसी इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा देने के लिए, हमने पिछले साल एक बाइलेटरल इन्वेस्टमेंट एग्रीमेंट किया था। हम जल्द ही एक आपसी फायदे वाले फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को भी फाइनल करेंगे।”टेक्नोलॉजी-ड्रिवन सहयोग पर बढ़ते फोकस पर जोर देते हुए, पीएम मोदी ने कहा कि टेक्नोलॉजी दोनों देशों के बीच भविष्य की पार्टनरशिप का कोर बनेगी। उन्होंने कहा, “टेक्नोलॉजी हमारी भविष्य की पार्टनरशिप का कोर है। आज, हमने एक ‘क्रिटिकल और इमर्जिंग टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप’ बनाने का फैसला किया है। इससे AI, क्वांटम और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे एरिया में सहयोग को नई रफ़्तार मिलेगी।” भारत-इजराइल FTA के लिए बातचीत का पहला राउंड सोमवार को नई दिल्ली में शुरू हुआ और आज तक चलेगा।इससे पहले केंद्रीय कॉमर्स और इंडस्ट्री मिनिस्टर पीयूष गोयल ने मंगलवार को FTA बातचीत के पहले राउंड के लिए भारत में इजरायल के एक डेलीगेशन से मुलाकात की। नवंबर 2025 में पीयूष गोयल के दौरे के दौरान, भारत और इजरायल के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) बातचीत शुरू करने के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) पर साइन किए गए थे।PM मोदी ने इजराइल में भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के इस्तेमाल पर हुए एग्रीमेंट का भी स्वागत किया, इसे डिजिटल सहयोग को आगे बढ़ाने में एक अहम कदम बताया, और कहा कि दोनों देश अपने नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए डिजिटल हेल्थ इनोवेशन का इस्तेमाल करने के लिए कमिटेड हैं, ताकि वे अपने अनुभवों और बेस्ट प्रैक्टिस के ज़रिए अपने नागरिकों की ज़िंदगी को बेहतर बना सकें। उन्होंने कहा, “डिजिटल हेल्थ के फील्ड में भी, हम अपने अनुभव शेयर करके लोगों की जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए कमिटेड हैं।”डिफेंस सेक्टर में, पीएम ने कहा कि भारत और इजरायल के बीच दशकों पुराना, भरोसेमंद सहयोग है, जो और बढ़ने वाला है।उन्होंने कहा, “डिफेंस के फील्ड में, हमारे बीच दशकों पुराना, भरोसेमंद सहयोग रहा है। पिछले साल साइन किए गए MOUs इसमें नए डायमेंशन जोड़ेंगे। हम सब मिलकर जॉइंट डेवलपमेंट, जॉइंट प्रोडक्शन और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की ओर बढ़ेंगे।”उन्होंने आगे कहा कि दोनों पक्ष सिविल न्यूक्लियर एनर्जी और स्पेस में सहयोग को आगे बढ़ाएंगे, जिससे भारत-इजराइल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप के बढ़ते दायरे पर ज़ोर दिया गया। PM मोदी अभी अपने इज़राइली काउंटरपार्ट, बेंजामिन नेतन्याहू के इनविटेशन पर इजरायल के दो दिन के स्टेट विजिट पर हैं। - कानपुर. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी)-कानपुर के भौतिकी विभाग और एसपीएएसई तथा राष्ट्रीय रेडियो खगोल भौतिकी केंद्र (एनसीआरए) के वैज्ञानिकों ने पल्सर (ऐसे तारे जो आवधिक रेडियो फ्लैश उत्सर्जित करते हैं) की दूरी का अनुमान लगाने के लिए एक नयी विधि विकसित की है। ये निष्कर्ष 'मंथली नोटिस ऑफ द रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी' नामक पत्रिका में प्रकाशित "पल्सर ऑब्जर्वेबल्स और एक नवीन दूरी अनुमान विधि का उपयोग करके गम नेबुला की आकृति विज्ञान की जांच" शीर्षक वाले एक हालिया शोध पत्र में प्रकाशित किए गए हैं। खगोल विज्ञान में तारों की सटीक दूरी मापना अब भी एक बड़ी चुनौती है। वैज्ञानिक आकाश में किसी वस्तु की स्थिति तो सटीकता से निर्धारित कर लेते हैं, लेकिन उसकी दूरी का आकलन करना जटिल बना रहता है। त्रिकोणमितीय पैरालैक्स जैसी प्रत्यक्ष तकनीक केवल अपेक्षाकृत निकटवर्ती तारों पर ही प्रभावी होती है, जबकि न्यूट्रल हाइड्रोजन अवशोषण आधारित अन्य विधियों में काफी अनिश्चितता बनी रहती है। यह नयी विधि पल्सर संकेतों द्वारा अंतरतारकीय माध्यम से यात्रा करते समय अनुभव किए जाने वाले दो स्वतंत्र रेडियो तरंग प्रभावों को मिलाकर इन सीमाओं का समाधान करती है : फैलाव माप (डीएम) और प्रकीर्णन प्रसार। यह शोध डॉ. आशीष कुमार (वर्तमान में एनसीआरए-पुणे), प्रो. अविनाश ए. देशपांडे (पूर्व संकाय, आरआरआई बेंगलुरु) और प्रो. पंकज जैन (आईआईटी-कानपुर) द्वारा किया गया।
- नयी दिल्ली. सामाजिक कार्यकर्ता हरदीप सिंह गिल और कर्म सिंह कर्मा ने 23 फरवरी को राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग (एनसीएसके) के सदस्य के रूप में कार्यभार ग्रहण किया। बुधवार को जारी एक आधिकारिक बयान से यह जानकारी सामने आयी। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अनुसार, गिल जिला और राष्ट्रीय स्तर पर सामाजिक एवं संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं और सामुदायिक विकास पहलों में योगदान देते रहे हैं। उन्होंने नशे पर रोकथाम, सामाजिक जागरूकता, सामुदायिक गतिविधियों और युवा सशक्तीकरण समेत विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर चलाए गए अभियानों में भाग लिया है। वह स्वच्छता अभियानों और जमीनी स्तर के कार्यक्रमों में भी शामिल रहे हैं। कर्मा अखिल भारतीय सफाई मजदूर संघ की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष हैं और सफाई कर्मचारियों एवं वंचित समुदायों के कल्याण से संबंधित पहलों से जुड़े रहे हैं। बयान में कहा गया है कि उन्होंने सफाई कर्मचारियों के अधिकारों, गरिमा, पेशेवर सुरक्षा एवं सामाजिक सुरक्षा की वकालत की है तथा शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच, आजीविका सहायता और नीतिगत प्रतिनिधित्व से संबंधित मुद्दों को उठाया है। मंत्रालय ने विश्वास व्यक्त किया कि दोनों सदस्य देश भर में सफाई कर्मचारियों के कल्याण, गरिमा और सामाजिक-आर्थिक उत्थान के प्रयासों को मजबूत करने में योगदान देंगे। एनसीएसके का गठन 12 अगस्त, 1994 को राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी अधिनियम, 1993 के तहत एक वैधानिक निकाय के रूप में किया गया था। शुरू में इसका गठन तीन साल की अवधि यानी 31 मार्च, 1997 तक के लिए किया गया था। इस अधिनियम की धारा एक की उपधारा (4) के अनुसार, आयोग को उस तिथि के बाद अस्तित्व में नहीं रहना था। हालांकि, बाद में 1997 और 2001 में पारित संशोधन अधिनियमों के माध्यम से अधिनियम की वैधता को मार्च 2002 तक और फरवरी 2004 तक बढ़ा दिया गया था। राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी अधिनियम, 1993 के 29 फरवरी, 2004 को समाप्त हो जाने के बाद से आयोग सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अधीन एक गैर-वैधानिक निकाय के रूप में कार्य कर रहा है।
- भोपाल. दक्षिणी कमान के सैन्य कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने भोपाल दौरे के दौरान सुदर्शन चक्र कोर की परिचालन और प्रशासनिक तैयारियों की व्यापक समीक्षा की। एक प्रवक्ता ने बताया कि सैन्य कमांडर ने मिशन तत्परता, नई पीढ़ी के प्रशिक्षण उपक्रम, ड्रोन एवं एल्गोरिद्मिक युद्ध क्षमताओं, विकसित हो रहे संगठनात्मक ढांचे, एआई-सक्षम बल संरचना और आधारभूत संरचना आधुनिकीकरण का मूल्यांकन किया। प्रवक्ता के अनुसार उन्हें भारतीय सेना के 'नेटवर्किंग और डेटा सेंट्रिसिटी वर्ष' के अनुरूप तीव्र प्रौद्योगिकी समावेशन की रूपरेखा से भी अवगत कराया गया, जो डिजिटल रूप से सशक्त और डेटा-केंद्रित युद्धक बल के निर्माण की दिशा में प्रगति को रेखांकित करता है। प्रवक्ता के मुताबिक लेफ्टिनेंट जनरल सेठ ने 'सुदर्शन चक्र एडवांस्ड ड्रोन वॉरफेयर स्कूल' का भी दौरा किया, जो भविष्य के युद्ध क्षेत्रों में विशेष प्रशिक्षण प्रदान करने वाला एक प्रमुख संस्थान है। लेफ्टिनेंट जनरल सेठ ने परिचालन क्षमता को सुदृढ़ करने के लिए उभरती प्रौद्योगिकियों के समेकन के महत्व पर जोर दिया और सभी रैंक को गतिशील सुरक्षा परिवेश में सजग एवं मिशन-उन्मुख बने रहने के लिए प्रेरित किया। दौरे के दौरान उन्होंने भोपाल स्थित दक्षिणी कमान के 'मिलिट्री-सिविल फ्यूजन नोड' का निरीक्षण किया, जहां केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के 50 कार्मिकों के लिए हवाईअड्डा सुरक्षा और आकस्मिक प्रतिक्रिया पर केंद्रित दो सप्ताह का विशेष प्रशिक्षण 'कैप्सूल' संचालित किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य महत्वपूर्ण अवसंरचना की सुरक्षा के लिए अंतर-एजेंसी समन्वय को सुदृढ़ करना है। लेफ्टिनेंट जनरल सेठ ने पूर्व सैनिकों से संवाद किया और राष्ट्र निर्माण में उल्लेखनीय योगदान के लिए विशिष्ट उपलब्धि प्राप्तकर्ताओं को 'वेटरन अचीवर्स अवॉर्ड' से सम्मानित किया। एक संवाद सत्र में उन्होंने कल्याण, पेंशन, स्वास्थ्य सेवा और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कर निरंतर संस्थागत समर्थन का आश्वासन दिया। '3 ईएमई सेंटर' के दौरे के दौरान उन्होंने अग्निवीरों से बातचीत की और उनकी मानसिक दृढ़ता तथा शारीरिक सुदृढ़ता की सराहना करते हुए भविष्य के लिए तैयार सैनिकों के निर्माण में केंद्र की भूमिका की प्रशंसा की।
- नयी दिल्ली. राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने कक्षा आठ की पाठ्यपुस्तक में 'न्यायिक भ्रष्टाचार' से संबंधित एक अध्याय को लेकर उच्चतम न्यायालय की नाराजगी के बाद बुधवार को "अनुचित सामग्री" के लिए माफी मांगी और कहा कि संबंधित पुस्तक को उपयुक्त अधिकारियों के परामर्श से फिर से लिखा जाएगा। स्कूल शिक्षा पाठ्यक्रम के लिए जिम्मेदार एनसीईआरटी ने अपनी वेबसाइट से पुस्तक हटाने के कुछ घंटों बाद ही पाठ्यपुस्तक का वितरण भी रोक दिया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "यह देखा गया कि संबंधित अध्याय में कुछ अनुचित पाठ्य सामग्री और निर्णय की त्रुटि अनजाने में शामिल हो गई है।" एनसीईआरटी ने कहा कि वह ''न्यायपालिका को सर्वोच्च सम्मान देता है और उसे भारतीय संविधान का संरक्षक तथा मौलिक अधिकारों का रक्षक मानता है''। उसने इस त्रुटि को पूरी तरह अनजाने में हुई गलती बताया।अधिकारी ने कहा, ''एनसीईआरटी यह पुनः दोहराता है कि नई पाठ्यपुस्तकों का उद्देश्य विद्यार्थियों में संवैधानिक साक्षरता, संस्थाओं का सम्मान और लोकतांत्रिक भागीदारी पर समझ को मजबूत करना है। किसी भी संवैधानिक संस्था के अधिकारक्षेत्र पर प्रश्न उठाने या उसे कमतर करने का (परिषद का) कोई इरादा नहीं है।'' एनसीईआरटी ने कहा, ''अपनी सतत समीक्षा प्रक्रिया के तहत एनसीईआरटी रचनात्मक सुझावों का स्वागत करता है। इसलिए आवश्यकतानुसार संबंधित अधिकारी से परामर्श के बाद उक्त सामग्री को दोबारा लिखा जाएगा और इसे शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत पर कक्षा आठ के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।'' प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका के बारे में की गई "आपत्तिजनक" टिप्पणियों का स्वत: संज्ञान लिया। यह कदम वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिषेक सिंघवी की ओर से मामले की तत्काल सुनवाई के लिए विशेष उल्लेख किए जाने के बाद उठाया गया। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने एनसीईआरटी की कक्षा आठ की पाठ्यपुस्तक में न्यायिक भ्रष्टाचार से संबंधित अध्याय पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि किसी को भी न्यायपालिका को बदनाम करने या उसकी निष्पक्षता और गरिमा को ठेस पहुंचाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
- भुवनेश्वर. ओडिशा सरकार में मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने बुधवार को कहा कि पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार में रखे कीमती सामानों और आभूषणों की सूची बनाने का काम मार्च के पहले सप्ताह में शुरू होने की संभावना है। मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) ने घोषणा की कि राज्य सरकार ने रत्न भंडार की सूची तैयार करने के इस कार्य के लिए 14 पृष्ठों की मानक संचालन प्रक्रिया को पहले ही मंजूरी दे दी है। रत्न भंडार की आखिरी सूची 46 साल पहले 1978 में तैयार की गई थी।हरिचंदन ने यहां संवाददाताओं को बताया कि पुरी के गजपति महाराजा दिब्यसिंह देब की अध्यक्षता वाली श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति (एसजेटीएमसी) और एसजेटीए पूरी सूची तैयार करने की प्रक्रिया की देखरेख करेंगे। ओडिशा के कानून मंत्री हरिचंदन ने कहा, ''रत्न भंडार में रखे सामान की सूची तैयार करने की प्रक्रिया मार्च के पहले सप्ताह में शुरू होने की संभावना है। यह प्रक्रिया शुरू करने का अंतिम निर्णय एसजेटीएमसी द्वारा लिया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देवी-देवताओं की दैनिक नीति और दर्शन में कोई बाधा न आए।'' पुरी में श्री जगन्नाथ मंदिर के अंदर रत्न भंडार (खजाना) के दो कक्ष हैं - 'बाहरी रत्न भंडार' (बाहरी कक्ष) और 'भीतरी रत्न भंडार' (आंतरिक कक्ष)। इस रत्न भंडार में भगवान जगन्नाथ की बहुमूल्य वस्तुएं और आभूषण सदियों से संरक्षित रखे गए हैं। उड़ीसा उच्च न्यायालय ने 27 जनवरी को राज्य सरकार को तीन महीने के भीतर रत्न भंडार की सूची तैयार करने और उसके सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया था। अदालत ने राज्य सरकार को यह भी आदेश दिया कि वह रत्न भंडार की गुम हुई चाबियों के संबंध में न्यायिक आयोग की रिपोर्ट को ओडिशा विधानसभा के मौजूदा सत्र में पेश करे। सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार ने रत्न भंडार की सूची तैयार करने के कार्य के लिए बजट में पांच करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।
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चेन्नई. भारतीय नौसेना तटीय सुरक्षा को और सुदृढ़ करने की दिशा में 27 फरवरी को चेन्नई बंदरगाह पर 'डॉल्फिन हंटर' पोत आईएनएस अंजदीप को तैनात करने जा रही है। आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, यह पोत 'एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट' परियोजना के तहत बनाए जा रहे आठ पोतों में से तीसरा है। कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स द्वारा निर्मित अंजदीप एक अत्याधुनिक युद्धपोत है, जिसे विशेष रूप से तटीय और उथले जल क्षेत्रों में परिचालन की चुनौतियों से निपटने के लिए डिजाइन किया गया है। यह पोत 'डॉल्फिन हंटर' के रूप में कार्य करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य तटीय क्षेत्रों में दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाना, उनका पीछा करना और उन्हें निष्क्रिय करना है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि ऐसे क्षेत्र देश की समुद्री सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी शुक्रवार को यहां आईएनएस अंजदीप के कमीशनिंग समारोह में भाग लेंगे। आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, 'अंजदीप' का नाम कर्नाटक के कारवार तट (अरब सागर) के निकट स्थित अंजदीप द्वीप के नाम पर रखा गया है। इस युद्धपोत के शामिल होने से नौसेना की भारत के व्यापक समुद्री हितों की सुरक्षा के साथ-साथ तमिलनाडु और पुडुचेरी के तटीय क्षेत्रों की निगरानी तथा रक्षा क्षमता और मजबूत होगी। विज्ञप्ति में कहा गया है कि पनडुब्बी रोधी युद्ध (एंटी-सबमरीन वॉरफेयर) भूमिका के अलावा यह पोत तटीय निगरानी, कम तीव्रता वाले समुद्री अभियानों तथा खोज एवं बचाव अभियानों को अंजाम देने में भी सक्षम है। -
मुंबई. दिल का दौरा पड़ने के बाद फिल्म निर्माता संजय लीला भंसाली को अस्पताल में भर्ती कराये जाने की खबरों के बीच उनके परिवार ने बुधवार को बताया कि भंसाली बिल्कुल ठीक हैं। परिवार ने भंसाली को दिल का दौरे पड़ने की पुष्टि नहीं की और न ही इसका जिक्र किया, हालांकि बताया कि वह नियमित जांच के लिए अस्पताल गए थे। परिवार ने कहा, ''संजय लीला भंसाली बिल्कुल ठीक हैं। उन्होंने नियमित चिकित्सा जांच कराई है और चिंता की कोई बात नहीं है। हम आप सभी के स्नेह के लिए दिल से आभारी हैं। आपके निरंतर समर्थन और शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद।'' मीडिया में आई खबरों में दावा किया गया था कि भंसाली को मंगलवार को उनके 63वें जन्मदिन पर दिल का दौरा पड़ा और उन्हें कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल ले जाया गया।
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शेगांव (महाराष्ट्र). राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को कहा कि औषधीय पौधों की खेती न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार करती है बल्कि मिट्टी के स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होती है। महाराष्ट्र के बुलढाणा में शेगांव में आयोजित राष्ट्रीय आरोग्य मेला 2026 के उद्घाटन के बाद मुर्मू ने यह भी कहा कि स्वस्थ नागरिक देश को स्वस्थ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मुर्मू ने कहा, ''हम सभी को औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के तरीकों पर विचार करना होगा।''
राष्ट्रपति ने कहा कि दुनिया भर में लोग तनावमुक्त और स्वस्थ जीवनशैली के लिए योग को अपना रहे हैं। उन्होंने कहा कि अच्छे स्वास्थ्य के लिए नियमित व्यायाम, उचित आहार और संतुलित जीवनशैली जैसे रोग निवारक उपाय महत्वपूर्ण हैं। मुर्मू ने कहा, ''जंगल खत्म हो गए हैं, आग लगने से जंगल नष्ट हो गए हैं।'' उन्होंने कहा कि इससे औषधीय पौधे भी नष्ट हो गए हैं। उन्होंने कहा, ''न सिर्फ सरकार बल्कि हम सभी को औषधीय पौधों का पुन: पैदावार शुरू करने के बारे में विचार करना चाहिए।'' राष्ट्रीय आरोग्य मेला चार दिवसीय आयोजन है जो आयुष प्रणालियों के माध्यम से सुलभ, निवारक और समुदाय आधारित स्वास्थ्य देखभाल पर केंद्रित है। उद्घाटन समारोह में महाराष्ट्र के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे और केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव उपस्थित थे। -
नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने आने वाली फिल्म 'यादव जी की लव स्टोरी' पर बुधवार को प्रतिबंध लगाने या उसके नाम में बदलाव करने के अनुरोध वाली याचिका को यह कहकर खारिज कर दिया कि यह नाम यादव समुदाय को किसी भी तरह से अपमानजनक तरीके से चित्रित नहीं करता है। न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने संगठन 'विश्व यादव परिषद' के प्रमुख द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया। पीठ ने रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री का अध्ययन किया और पाया कि मुख्य शिकायत यह थी कि फिल्म का नाम समाज में यादव समुदाय को गलत तरीके से दर्शाता है। न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा, ''इसलिए, यह दलील दी जा रही है कि फिल्म का नाम बदला जाना चाहिए। हम यह समझने में असमर्थ हैं कि फिल्म का शीर्षक किस प्रकार समुदाय को अपमानजनक रूप में चित्रित कर सकता है। फिल्म के शीर्षक में कहीं भी ऐसा कोई विशेषण या शब्द नहीं है जो यादव समुदाय को गलत तरीके से दर्शाता हो।'' पीठ ने इन आशंकाओं को ''पूरी तरह निराधार'' करार दिया और 'घूसखोर पंडत' से संबंधित ऐसे ही मामले में अपने पूर्व के आदेश की व्याख्या की जिसमें न्यायालय ने निर्माता को उस फिल्म का शीर्षक बदलने का निर्देश दिया था। आदेश में कहा गया है, '''घूसखोर' शब्द का अर्थ भ्रष्ट होता है। इसलिए यह शीर्षक समुदाय को नकारात्मक अर्थ में दर्शा रहा था। वर्तमान मामले में यादव समुदाय के साथ ऐसा कोई नकारात्मक अर्थ नहीं जुड़ा है। संविधान के अनुच्छेद 19(2) (भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर उचित प्रतिबंध) के तहत कोई भी उचित प्रतिबंध लागू नहीं होता है। यह नाम किसी भी तरह से यादव समुदाय को गलत या नकारात्मक रूप में चित्रित नहीं करता है। इसलिए रिट याचिका खारिज की जाती है।'' याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि फिल्म का शीर्षक समुदाय के प्रति एक आपत्तिजनक रूढ़िवादिता को बढ़ावा देता है। याचिका में महिला मुख्य किरदार के चित्रण पर चिंता व्यक्त की गई थी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि वे अंतर-सामुदायिक विवाहों का विरोध नहीं करते लेकिन फिल्म में एक महिला का चित्रण अस्वीकार्य है। वकील ने कहा, ''एक महिला को इस तरह प्रचारित नहीं किया जा सकता।'' साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म एक सच्ची घटना पर आधारित होने का दावा करती है। हालांकि, न्यायाधीश इस बात से सहमत नहीं हुए और फिल्म को काल्पनिक रचना करार दिया।
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नई दिल्ली। योग को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने में योगदान देने वाले व्यक्तियों और संस्थानों को सम्मानित करने के लिए प्रधानमंत्री योग पुरस्कार 2026 के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में योग को विश्वभर में व्यापक पहचान मिली है और इसे समग्र स्वास्थ्य पद्धति के रूप में अपनाया जा रहा है।
प्रधानमंत्री योग पुरस्कार–2026 का उद्देश्य उन व्यक्तियों और संस्थानों को सम्मानित करना है जिन्होंने योग के प्रचार-प्रसार और विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया है। यह पुरस्कार उत्कृष्टता, नवाचार और नेतृत्व को प्रोत्साहित करते हुए योग के प्रभाव को व्यापक बनाने का प्रयास है।आयुष मंत्रालय ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योग के विकास में योगदान देने वालों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। आवेदन राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल www.awards.gov.in के माध्यम से ऑनलाइन जमा किए जा सकते हैं। प्रत्येक विजेता को ट्रॉफी, प्रमाण पत्र और 25 लाख रुपए की नकद राशि प्रदान की जाएगी।पुरस्कार दो प्रमुख श्रेणियों में दिए जाएंगे—व्यक्तिगत श्रेणी (राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय) और संस्थागत श्रेणी (राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय)। प्रत्येक श्रेणी में दो पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।व्यक्तिगत श्रेणी के लिए न्यूनतम आयु 30 वर्ष निर्धारित की गई है। आवेदकों के पास योग का गहन ज्ञान और कम से कम 10 वर्षों का उत्कृष्ट तथा बेदाग अनुभव होना अनिवार्य है। पुरस्कार उन व्यक्तियों और संस्थानों को दिया जाएगा जिन्होंने योग के प्रचार में उल्लेखनीय भूमिका निभाई हो। आवेदन प्रक्रिया 21 फरवरी 2026 से शुरू हो चुकी है और आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 21 मार्च 2026 निर्धारित की गई है। आवश्यकता पड़ने पर अंतिम तिथि 15 दिनों तक बढ़ाई जा सकती है। पात्र व्यक्तियों और संस्थानों को निर्धारित समय सीमा के भीतर राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल (www.awards.gov.in) के माध्यम से आवेदन करने के लिए आमंत्रित किया जाता है। (



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