भारत में तैयार होने वाले कुशल कार्यबल का दुनिया को भी फायदा होगा: बिरला
नई दिल्ली।लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मंगलवार को कहा कि देश में युवाओं के बीच उद्यमशीलता एवं कौशल को बढ़ावा देकर कुशल कार्यबल तैयार करने एवं अनुसंधान और विकास में महत्वपूर्ण निवेश किए जा रहे हैं तथा इस कार्यबल का भारत सहित पूरी दुनिया को फायदा होगा। बिरला ने नॉर्वे की सांसद ट्राइन लिज़ सुंडनेस के नेतृत्व में आए यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) संसदीय समिति के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान यह बात कही, जिसमें आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड के सदस्य शामिल थे। लोकसभा सचिवालय के बयान के अनुसार, बिरला ने कहा कि यह यात्रा भारत और ईएफटीए देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई गति प्रदान करेगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ईएफटीए और भारत दोनों को हरित ऊर्जा के क्षेत्र में आपसी सहयोग से काफी लाभ होगा। उन्होंने कहा कि भारत और ईएफटीए देश विश्व शांति, अहिंसा, मानवाधिकारों और मौलिक स्वतंत्रता के लिए प्रतिबद्धता को साझा करते हैं, जो एक "जीवंत लोकतंत्र" का आधार है। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर हाल के वर्षों में भारत और ईएफटीए देशों के बीच रिश्ते मजबूत हुए हैं और इसे और अधिक गति देने के लिए लोगों के बीच सम्पर्क को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। बिरला ने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत में कामकाजी आयु वर्ग के लोगों की सबसे बड़ी आबादी होगी, ऐसे में सरकार ने युवाओं के बीच उद्यमशीलता और कौशल को बढ़ावा देने के लिए कई नीतियों और योजनाओं की शुरुआत की है। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि उन्हें (युवाओं) कुशल कार्यबल में बदलने के लिए उच्च शिक्षा, अनुसंधान और विकास में महत्वपूर्ण निवेश किए जा रहे हैं और यह कार्यबल न केवल भारत, बल्कि पूरे विश्व के लिए उपलब्ध होगा। उन्होंने कहा कि भारत विविधता के बावजूद एक मजबूत लोकतांत्रिक व्यवस्था के रूप में विकसित हुआ है तथा इस जीवंत विविधता को एक ताकत बनाकर भारत आज दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। बिरला ने कहा कि भारत निकट भविष्य में जी20 शिखर सम्मेलन के मौके पर पी20 शिखर सम्मेलन का भी आयोजन करेगा, जिसमें जी20 देशों के अलावा अन्य आमंत्रित देशों की संसदों के पीठासीन अधिकारी शामिल होंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस शिखर सम्मेलन में संसदीय व्यवस्था और लोकतांत्रिक मूल्यों की प्रासंगिकता पर उद्देश्यपूर्ण संवाद होगा, जो पूरे विश्व को लाभ पहुंचाने का काम करेगा।

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