औपनिवेशिक विरासत को त्यागने का समय आ गया है : नायडू
नयी दिल्ली ।पूर्व उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने विश्वविद्यालय परीक्षाओं में ‘स्थानीय भाषा' के इस्तेमाल पर जोर देने के लिए गुरुवार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के अध्यक्ष की तारीफ की। उन्होंने कहा कि “समय आ गया है कि हम औपनिवेशिक विरासत को त्याग दें।” यूजीसी ने बुधवार को विश्वविद्यालयों से आग्रह किया था कि वे छात्रों को स्थानीय भाषाओं में परीक्षा लिखने की अनुमति दें, भले ही पाठ्यक्रम अंग्रेजी माध्यम में उपलब्ध हो। आयोग ने पाठ्यपुस्तकों के अनुवाद और स्थानीय भाषा में परीक्षा देने वाले छात्रों के मूल्यांकन के लिए शिक्षकों की व्यवस्था करने को भी कहा था। नायडू ने ट्वीट किया, “यूजीसी के अध्यक्ष प्रोफेसर जगदीश कुमार विश्वविद्यालयों को लिखे अपने उस पत्र के लिए प्रशंसा के पात्र हैं, जिसमें छात्रों को स्थानीय भाषा में परीक्षा लिखने की अनुमति देने का आग्रह किया गया है, भले ही शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी हो। मातृभाषा में शिक्षण-अध्ययन की प्रक्रिया को बढ़ावा देना एक स्वागत योग्य कदम है।” उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा, “मैंने हर स्तर की शिक्षा में मातृभाषा के व्यापक इस्तेमाल की हमेशा वकालत की है। मैं इस पहल से बहुत खुश हूं। अब समय आ गया है कि हम उस औपनिवेशिक विरासत को त्याग दें, जो हमारे सर्वांगीण सामाजिक-आर्थिक विकास में बाधा थी और अपनी स्थानीय भाषाओं को समान महत्व दें।”








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