सरकार पूर्वोत्तर राज्यों में ‘भूमि शासन' के लिए कार्य बल गठित करेगी
नयी दिल्ली. पूर्वोत्तर राज्यों में ‘भूमि शासन' के लिए एक कार्य बल गठित किया जाएगा। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने बुधवार को बताया कि असम के गुवाहाटी में तीन-चार मई को हुए ‘पूर्वोत्तर राज्यों में भूमि शासन पर राष्ट्रीय सम्मेलन' में इस बाबत फैसला किया गया है। असम, त्रिपुरा, मिजोरम और मेघालय राज्यों में प्रादेशिक और स्वायत्त जिला परिषदों ने भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण और आधुनिकीकरण को विकास के लिए जरूरी बताया है। यह इस प्रकार का पहला राष्ट्रीय सम्मेलन था। इसमें वर्तमान समय में जारी राज्य कार्यप्रणालियों और भूमि अभिलेखों के आधुनिकीकरण व भूमि शासन आकलन ढांचे पर सत्र शामिल थे। साथ ही परंपरागत और स्वदेशी कानून, वर्तमान कार्यप्रणालियों और नई पहल तथा भूमि रिकॉर्ड आधुनिकीकरण में भारत के सर्वेक्षण की भूमिका पर भी एक सत्र हुआ था। ग्रामीण विकास मंत्रालय के बयान के मुताबिक, बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद, कार्बी आंगलोंग स्वायत्त जिला परिषद और दीमा हसाओ स्वायत्त जिला परिषद के तहत आने वाले क्षेत्रों को छोड़कर असम के बाकी हिस्सों में भूमि अभिलेखों और नक्शों के कम्प्यूटरीकरण और डिजिटलीकरण की पहल ने अच्छी प्रगति दिखाई है। बोडोलैंड भूमि की नीति तैयार की जा रही है और शीघ्र ही इसे अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है।
मंत्रालय ने कहा कि कार्बी आंगलोंग क्षेत्रों में अभी सर्वेक्षण नहीं किया गया है जबकि दीमा हसाओ स्वायत्त जिला परिषद ने असम भूमि विनियमन अधिनियम को अपनाया है। बयान के मुताबिक, त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त परिषद में आठ जिले और लगभग 10,000 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र छठी अनुसूची और 10 प्रथागत कानूनों के तहत आते हैं। छठी अनुसूची के तहत ‘लाई' स्वायत्त जिला परिषद क्षेत्र में सर्वेक्षण/पुनः सर्वेक्षण की आवश्यकता महसूस की गई। बयान में कहा गया है कि मेघालय के खासी हिल्स स्वायत्त जिला परिषद क्षेत्रों में भूमि का अधिकांश हिस्सा खासी समुदाय के अधीन है। गारो हिल्स स्वायत्त जिला परिषद में जिला परिषद द्वारा वार्षिक पट्टा जारी करने की व्यवस्था है। मेघालय की जयंतिया हिल्स स्वायत्त जिला परिषद ‘मेघालय भूमि सर्वेक्षण और अभिलेख तैयारी अधिनियम 1980' का पालन करती है। भूमि संसाधन विभाग के सचिव अजय तिर्की ने कहा कि राज्यों में विभिन्न स्वायत्त जिला परिषदों के डिजिटलीकरण और उनके भूमि अभिलेखों का आधुनिकीकरण करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक ढांचे और स्थापित कानूनों के भीतर परिषदों का समर्थन करने के लिए सभी प्रयास किए जाएंगे। इस बयान में कहा गया है कि इस दिशा में एक कदम आगे बढ़ते हुए, बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद ने भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण और आधुनिकीकरण के लिए एक प्रस्ताव रखा और भूमि संसाधन विभाग ने उसे विधिवत मंजूरी दे दी। बयान में कहा गया है, “ भूमि संसाधन विभाग के सचिव ने पूर्वोत्तर राज्यों में आवश्यक कार्य को देखते हुए सूचित किया कि पूर्वोत्तर राज्यों में भूमि शासन के लिए उचित प्रक्रिया के बाद विभिन्न स्वायत्त जिला परिषदों के साथ मिलकर सक्षम प्राधिकारी के अनुमोदन के साथ एक कार्यबल का गठन किया जाएगा।”
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