रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा - तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य में आत्मनिर्भरता एक विकल्प नहीं बल्कि एक आवश्यकता है
नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता आवश्यक है क्योंकि तेजी से बदल रहे विश्व में उभर रहे नए युद्ध-कौशल के कारण देश की सीमा पर दोहरा खतरा पैदा हो गया है। श्री सिंह ने यह बात कल लखनऊ में आत्मनिर्भर भारत रक्षा संवाद में कही। उन्होंने कहा कि सशक्त और आत्मनिर्भर सेना किसी भी संप्रभु देश के लिए आवश्यक होती है जो सीमा के साथ-साथ देश की सभ्यता-संस्कृति की भी सुरक्षा करती है। श्री सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि सशस्त्र बल विदेशी हथियारों और उपकरणों पर निर्भर न रहें। उन्होंने यह भी कहा कि आपात स्थिति में आत्मनिर्भरता ही वास्तविक शक्ति सिद्ध होती है।
श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि देश को ऐसे अत्याधुनिक स्वदेशी हथियार और प्लेटफॉर्म विकसित करने की आवश्यकता है, जिनसे नई और उभरती चुनौतियों का मुकाबला किया जा सके। उन्होंने कहा कि देश को आला तकनीकों के मामले में भी आत्मनिर्भरता हासिल करनी होगी। रक्षा मंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भर बनने से आयात पर व्यय में कमी आएगी और असैन्य क्षेत्र को भी बहुआयामी लाभ मिलेंगे। श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश रक्षा औद्योगिक गलियारे के लिए काम तेज गति से चल रहा है और इस गलियारे के लिए जरूरी सत्रह सौ हेक्टेयर भूमि में से 95 प्रतिशत भूखंड का अधिग्रहण किया जा चुका है। इस भूखंड में से लगभग छह सौ हेक्टेयर भूमि 36 उद्योगों और संस्थानों को आवंटित की गई है। उन्होंने बताया कि इस गलियारे के लिए एक सौ नौ सहमति - पत्रों पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिनसे सोलह हजार करोड रूपये से अधिक मूल्य के निवेश का अनुमान है।









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