दृष्टिहीनों के लिए अलग बैंक नोट जारी करना मुश्किल कामः आरबीआई
मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को बंबई उच्च न्यायालय से कहा कि वह दृष्टि-बाधित लोगों को बैंक नोटों की पहचान में पेश होने वाली दिक्कतों से अवगत है, लेकिन उनके लिए नए बैंक नोट जारी करना एक समय-साध्य कार्य है और इस पर भारी खर्च भी आएगा। आरबीआई ने उच्च न्यायालय में दायर एक हलफनामे में कहा कि बैंक नोट की नई ‘सीरीज' जारी करने की प्रक्रिया बेहद जटिल है और इसमें छह से सात साल तक का समय लग जाता है। यह हलफनामा दृष्टिबाधितों की संस्था 'नेशनल एसोसिएशन ऑफ ब्लाइंड' (एनएबी) की तरफ से दायर याचिका के जवाब में दाखिल गया है। इस याचिका में दृष्टिहीनों को बैंक नोट एवं सिक्कों की पहचान में पेश आने वाली परेशानियों को देखते हुए आरबीआई से नए नोट एवं सिक्के जारी करने का अनुरोध किया गया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन जामदार की अगुवाई वाली एक खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है।
खंडपीठ के समक्ष दायर हलफनामे के मुताबिक, "आरबीआई बैंकनोट की पहचान के संदर्भ में दृष्टि-बाधित लोगों की समस्याओं से अवगत है। नोटों की नई सीरीज जारी करने पर वर्ष 2017 से ही काम चल रहा है।" आरबीआई ने अपने हलफनामे में कहा, "नई सीरीज के नोट जारी करना बहुत बड़ा काम है। इसके बारे में सावधानीपूर्वक सोच-समझ कर निर्णय लिया गया है क्योंकि समान मूल्य वाले नोट की विभिन्न आकार एवं खूबियों वाली कई सीरीज होने से समस्या हल होने के बजाय अधिक संदेह पैदा होगा।" केंद्रीय बैंक ने कहा कि नए सीरीज के नोट जारी करने पर आने वाला खर्च भी काफी अधिक होगा।
इसके साथ ही आरबीआई ने कहा कि उसने याचिका में उठाए गए मुद्दों को हल करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए है, लिहाजा उच्च न्यायालय इस याचिका को खारिज कर दे। मामले की अगली सुनवाई 12 सप्ताह बाद होगी।

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