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 मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में एक और चीते की मौत

 भोपाल । मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान (केएनपी) में एक और चीते की मौत हो गई। मार्च के बाद से इस उद्यान में चीतों की मौत का यह नौवां मामला है, जिनमें छह वयस्क एवं तीन शावक शामिल हैं। मध्य प्रदेश वन विभाग ने बुधवार को यह जानकारी दी। विभाग ने एक बयान में कहा कि आज सुबह मादा चीतों में से एक धात्री (टिबलिसी) मृत पाई गई।
 प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) असीम श्रीवास्तव ने  कहा, ‘‘मौत का कारण पता करने के लिए पोस्टमॉर्टम किया जा रहा है। पोस्टमॉर्टम के बाद मौत के कारणों का पता चलेगा।'' विभाग के अनुसार, इस चीते की मौत के बाद अब केएनपी में 15 चीते रह गए हैं, जिनमें सात नर, सात मादा एवं एक मादा शावक शामिल हैं। उनमें एक शावक सहित 14 चीते फिलहाल बाड़े में रखे गए हैं, जबकि एक मादा चीता अभी भी जंगल में विचरण कर रही है। इसने कहा कि केएनपी में बाड़े में रखे गए 14 चीते स्वस्थ हैं और उनका लगातार स्वास्थ्य परीक्षण कूनो वन्यप्राणी चिकित्सक टीम एवं नामीबियाई विशेषज्ञ के द्वारा किया जा रहा है। विभाग ने कहा कि जंगल में विचरण कर रही इस मादा चीते की एक दल द्वारा गहन निगरानी की जा रही है और उसे भी स्वास्थ्य परीक्षण के लिए बाड़े में लाए जाने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट चीता के तहत, कुल 20 चीतों को दो दलों में नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से केएनपी में लाया गया था। पहला दल नामीबिया पिछले साल सितंबर में और दूसरा दल इस वर्ष फरवरी में आया। चार शावकों के जन्म के बाद चीतों की कुल संख्या 24 हो गई थी लेकिन नौ मौतों के बाद यह संख्या घटकर अब 15 रह गई है। चीते की मौत पर कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ट्वीट किया, ‘‘कूनो में ज़रूर बड़ी चूक हुई है...आज सुबह नौवें चीते की भी मौत हो गई। यह तर्क पूरी तरह से बकवास है कि ये मौतें अपेक्षित हैं। अंतरराष्ट्रीय चीता विशेषज्ञों द्वारा इसे ख़ारिज़ कर दिया गया है। ऐसा तब होता है जब विज्ञान और पारदर्शिता को पीछे छोड़ दिया जाता है। ऐसा तब होता है जब किसी व्यक्ति के लिए दिखावा और अपना गुणगान ही सबसे ऊपर हो जाता है।'' वहीं, मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने ट्वीट किया, ‘‘प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में  एक और चीते की मृत्यु का समाचार आया है। जब से प्रधानमंत्री ने चीतों को यहां छोड़ा है, तब से अब तक नौ चीतों की मौत हो चुकी है, लेकिन सरकार लगातार इस बात पर अड़ी हुई है कि वह अन्य किसी जगह पर चीतों को नहीं बसाएगी। बेगुनाह वन्य प्राणियों को अपने राजहठ की भेंट चढ़ाना अत्यंत निंदनीय कृत्य है।'' कमलनाथ की आलोचना का जवाब देते हुए प्रदेश भाजपा प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी ने कमलनाथ पर हमेशा मध्य प्रदेश का अपमान करने के लिए उत्सुक दिखाई देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों ने कहा है कि जब भी चीतों को स्थानांतरित किया जाता है तो मृत्यु दर लगभग 50 प्रतिशत रहती है। पिछले महीने दो चीतों की गर्दन पर रेडियो कॉलर के कारण लगे घावों में संक्रमण के कारण मौत हो गई थी। पर्यावरण मंत्रालय ने हालांकि कहा था कि सभी चीतों की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई है। file photo

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