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 राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री ने ‘सदैव अटल’ पर पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी को श्रद्धांजलि अर्पित की

 नयी दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी स्थित ‘सदैव अटैल’ जाकर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पांचवीं पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इनके अलावा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, राज्यसभा में सदन के नेता पीयूष गोयल ने भी ‘भारत रत्न’ वाजपेयी को पुष्पांजलि अर्पित की।
 कई केंद्रीय मंत्रियों और सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के घटक दलों के नेताओं ने भी वाजपेयी को श्रद्धांजलि अर्पित की।इस अवसर पर प्रार्थना सभा का भी आयोजन किया गया। ‘सदैव अटल’ वाजपेयी का स्मारक है। वर्ष 2018 में आज ही के दिन दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में उनका लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था।
प्रधानमंत्री मोदी ने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट किया, ‘अटल जी को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित करने में भारत के 140 करोड़ लोगों के साथ मैं भी शामिल हूं। उनके नेतृत्व से भारत को बहुत लाभ हुआ। उन्होंने हमारे देश की प्रगति को बढ़ावा देने और इसे विभिन्न क्षेत्रों में 21 वीं सदी में ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।’
उपराष्ट्रपति धनखड़ ने वाजपेयी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनके दूरदर्शी नेतृत्व से और सुशासन पर उनके ध्यान से एक महत्वपूर्ण अवधि के दौरान भारत के भाग्य को आकार मिला। उन्होंने कहा कि वाजपेयी की विरासत सभी को प्रेरित करती है।
बिरला ने कहा, ‘‘पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की पुण्यतिथि पर उनके समाधि स्थल ‘सदैव अटल’ पर भावभीनी पुष्पांजलि अर्पित की।’’
भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष जे पी नड्डा ने कहा, ‘भारतीय जनता पार्टी के कोटिशः कार्यकर्ताओं के प्रेरणा-पुंज, सेवा व सुशासन के पथ प्रदर्शक, ‘भारत रत्न’ श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की पुण्यतिथि पर उन्हें शत-शत नमन करता हूं। उन्होंने भारत में नए राजनीतिक युग का सूत्रपात किया। गरीब कल्याण के प्रति उनका समर्पण सदैव हमारा पथ प्रशस्त करेगा।’
शाह ने वाजपेयी को भारतीय राजनीति का ‘अजातशत्रु’ बताया और कहा कि उन्होंने विचारधारा व सिद्धांतों पर आधारित राजनीति के सबसे उच्च मानक स्थापित किए।
उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्रसेवा की अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से एक तरफ उन्होंने सुशासन की नींव रखी तो दूसरी ओर उन्होंने पोखरण में परमाणु परीक्षण कर पूरे विश्व को भारत के सामर्थ्य का परिचय कराया। अपने संगठन कौशल से पार्टी को शून्य से शिखर तक पहुंचाने में अमूल्य योगदान देने वाले ऐसे युगपुरुष को उनकी पुण्यतिथि पर कोटिशः नमन।’’
राजनाथ सिंह ने कहा, ‘‘अटलजी की पुण्यतिथि पर मैं उन्हें स्मरण एवं नमन करता हूं। उन्होंने देश को विकास और सुशासन के पथ पर अग्रसर किया। उन्हें मेरी भावभीनी श्रद्धांजलि।’’
 
 
वाजपेयी को 2015 में देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ प्रदान किया गया था।
 
वाजपेयी भारतीय जनता पार्टी के संस्थापकों में एक थे। वह तीन बार देश के प्रधानमंत्री बने। उनका पहला कार्यकाल 1996 में मात्र 13 दिनों का था। इसके बाद, वह 1998 में फिर प्रधानमंत्री बनें और उन्होंने 13 महीने तक इस पद को संभाला। वर्ष 1999 में वह तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री बने। वह पहले ऐसे गैर-कांग्रेसी नेता थे, जिन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में अपना कार्यकाल पूरा किया।

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