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ब्रिक्स सम्मेलन सहयोग के क्षेत्रों की पहचान करने, संस्थागत विकास का जायजा लेने का अवसर देगा : मोदी

नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 15वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के वास्ते मंगलवार सुबह दक्षिण अफ्रीका के लिए रवाना हुए। उन्होंने विश्वास जताया कि यह सम्मेलन सदस्य देशों को भविष्य के सहयोग के क्षेत्रों की पहचान करने और संस्थागत विकास का जायजा लेने का उपयोगी अवसर प्रदान करेगा। प्रस्थान से पहले जारी बयान में प्रधानमंत्री ने कहा कि ब्रिक्स देश विभिन्न क्षेत्रों में एक मजबूत सहयोग एजेंडा अपना रहे हैं। उन्होंने कहा, “हम मानते हैं कि ब्रिक्स विकास संबंधी अनिवार्यताओं और बहुपक्षीय प्रणाली में सुधार सहित पूरे ‘ग्लोबल साउथ' के लिए चिंता का सबब बने विभिन्न मुद्दों पर चर्चा और विचार-विमर्श करने का मंच बन गया है।” मोदी ने कहा कि यह शिखर सम्मेलन ब्रिक्स देशों को भविष्य के सहयोग के क्षेत्रों की पहचान करने और संस्थागत विकास का जायजा लेने का उपयोगी अवसर प्रदान करेगा। बाद में उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर पोस्ट किया, “जोहानिसबर्ग में आयोजित होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए दक्षिण अफ्रीका रवाना हो रहा हूं। मैं ‘ब्रिक्स-अफ्रीका आउटरीच' और ‘ब्रिक्स प्लस डायलॉग' कार्यक्रमों में भी शामिल होऊंगा। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ‘ग्लोबल साउथ' के लिए चिंता का सबब बने विभिन्न मुद्दों और विकास के अन्य क्षेत्रों पर चर्चा करने के वास्ते मंच प्रदान करेगा।” मोदी ने कहा कि वह कई अतिथि देशों के साथ बातचीत करने के लिए उत्सुक हैं, जिन्हें इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया है। उन्होंने कहा, “मैं जोहानिसबर्ग में मौजूद कुछ नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें करने को लेकर भी उत्सुक हूं।” मोदी दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा के निमंत्रण पर 15वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शिरकत करने के लिए 22 से 24 अगस्त तक दक्षिण अफ्रीकी शहर के दौरे पर रहेंगे। यह साल 2019 के बाद ब्रिक्स नेताओं का पहला आमने-सामने का शिखर सम्मेलन होगा। ब्रिक्स देशों में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। प्रधानमंत्री ने बताया कि वह 25 अगस्त को यूनान के अपने समकक्ष क्यारीकोस मित्सोताकिस के निमंत्रण पर दक्षिण अफ्रीका से एथेंस जाएंगे। उन्होंने रेखांकित किया कि यह इस प्राचीन भूमि की उनकी पहली यात्रा होगी। प्रधानमंत्री ने कहा, “मुझे पिछले 40 वर्षों में यूनान की यात्रा करने वाला पहला भारतीय प्रधानमंत्री बनने का सम्मान प्राप्त होगा।” उन्होंने कहा कि हमारी दोनों सभ्यताओं के बीच संपर्क दो सहस्राब्दियों से पुराना है और आधुनिक समय में हमारे संबंध लोकतंत्र, कानून के शासन और बहुलवाद के साझा मूल्यों से मजबूत हुए हैं। मोदी ने कहा कि व्यापार, निवेश, रक्षा, संस्कृति और लोगों से लोगों के बीच संपर्क जैसे विविध क्षेत्रों में सहयोग भारत और यूनान को करीब ला रहा है। उन्होंने कहा कि वह यूनान का दौरा करने और दोनों देशों के बहुआयामी संबंधों में एक नया अध्याय शुरू करने के लिए उत्सुक हैं। प्रधानमंत्री ने बताया कि यूनान में वह भारतीय समुदाय के लोगों के साथ संवाद भी करेंगे।

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