ब्रेकिंग न्यूज़

देखभाल से जुड़ी अर्थव्यवस्था: महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास की संरचनात्मक बुनियाद

  आलेख-   अन्नपूर्णा देवी, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री
 अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाते हुए, हम न सिर्फ भारत की महिलाओं की उपलब्धियों, बल्कि उनकी दृढ़ता, पालन-पोषणकारी, दृढ़ निश्चयी और परिवर्तनकारी अदम्य भावनाओं का भी सम्मान करते हैं। महिला दिवस महज कैलेंडर की एक तारीख भर नहीं है, बल्कि यह इस बात की पुष्टि है कि भारत की विकास यात्रा में महिलाओं की भूमिका परिधि में नहीं, बल्कि केंद्र में रही है। हमारी महिलाएँ केवल संस्थानों और बोर्डरूम तक सीमित नहीं हैं; वे आंगनों, खेतों, प्रयोगशालाओं, कक्षाओं, सुरक्षा बलों और प्रशासनिक तंत्र में नेतृत्व का एक नया अध्याय रच रही हैं। 
उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) के क्षेत्रों में वे नई पहचान गढ़ रही हैं। रक्षा सेवाओं में महिला अधिकारी विशिष्ट सेवाएँ दे रही हैं-लड़ाकू विमान उड़ाने से लेकर राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में प्रशिक्षण प्राप्त करने तक, वे नए क्षितिज का विस्तार कर रही हैं।
समूचे ग्रामीण भारत में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी करोड़ों महिलाएँ स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बना रही हैं। वे आर्थिक स्वतन्त्रता की नींव पर सामूहिक समृद्धि का सृजन कर रही हैं। पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व वैश्विक स्तर पर नए मानक स्थापित कर रहा है। यह साबित करता है कि जमीनी स्तर का नेतृत्व समावेशी और प्रभावशाली, दोनों ही है। वैश्विक खेल मंच पर, उत्कृष्टता और दृढ़ता का प्रदर्शन करते हुए भारतीय महिलाएँ लगातार देश को गौरवान्वित कर रही हैं।
इतिहास साक्षी है कि भारतीय नारी का सामर्थ्य कोई नई बात नहीं है। रानी लक्ष्मीबाई ने निडर होकर अपने देश की रक्षा की। सावित्रीबाई फुले ने सामाजिक रूढ़ियों को चुनौती देकर बेटियों की शिक्षा में अग्रणी भूमिका निभाई। देवी अहिल्याबाई होलकर ने बुद्धिमत्ता एवं करुणा से जन कल्याण को शासन के केन्द्र में रखा। नीतिगत सुधार और दृढ़ संकल्प की उनकी विरासत आज भी हमारा मार्गदर्शन कर रही है।
आज, यह अमिट विरासत सभी क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी को मजबूत करने के निरंतर प्रयासों में परिलक्षित होती है। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में, महिलाओं को केवल लाभार्थी के रूप में नहीं, बल्कि विकास की अग्रदूत के रूप में मान्यता दी गई है। “महिला-नेतृत्व वाला विकास” आज एक सशक्त नीतिगत-दृष्टि है, जो बजट, कार्यक्रमों और संस्थागत सुधारों में परिलक्षित होती है। महिला दिवस हमें याद दिलाता है कि उत्सव को बदलाव के रूप में साकार करना होगा। प्रत्येक महिला- चाहे वह किसी निगम का नेतृत्व करती हो, वर्दी में सेवा करती हो, खेत में पसीना बहाती हो, छोटा उद्यम चलाती हो या घर पर अपने परिवार का भरण-पोषण करती हो, मोदी सरकार उसका अभिनंदन करती है।
हमारी प्राचीन सभ्यतागत परंपरा में नारी शक्ति का सम्मान केवल शब्दों तक सीमित नहीं है, यह हमारे अस्तित्व का मूल आधार है। वह परंपरा की धरोहर को सहेजती है और बदलाव की बयार को नेतृत्व देती है। उसके व्यक्तित्व में करुणा का सागर भी है और साहस का अडिग शिखर भी; वह जहाँ एक ओर नैतिक मूल्यों की मर्यादा में बंधी है, वहीं दूसरी ओर अपने सपनों को उड़ान देने के लिए उतनी ही महत्त्वाकांक्षी भी है। बहुआयामी भूमिकाओं को एक साथ साधने का उसका कौशल सदियों से भारतीय नारी की जीवन-शैली का अभिन्न हिस्सा रहा है। वह अपनी जिम्मेदारियों को सहज भाव से ओढ़ती है, धैर्य के साथ परिवार की नींव को सींचती है और अपने 'शांत नेतृत्व' से समाज को एक नई दिशा और शक्ति प्रदान करती है।
समाज की हर दृश्यमान उपलब्धि के पीछे एक आधारशक्ति अनवरत कार्य करती है-'देखभाल की अर्थव्यवस्था' (Care Economy)। यह वह मौन ऊर्जा है जो भारत के अस्तित्व को हर पल संबल प्रदान करती है। यह उस माँ का समर्पण है, जो सूर्योदय से पूर्व अपनों के लिए चूल्हा सुलगाती है और फिर जीविका की चुनौतियों की ओर निकल पड़ती है। यह उस पत्नी की अटूट निष्ठा है, जो कठिन से कठिन समय में भी परिवार की नींव को दरकने नहीं देती। यह उस बेटी का निःस्वार्थ भाव है, जो दिनभर की थकान के बाद भी रात के पहर अपने वृद्ध माता-पिता के सिरहाने बैठती है। यह शक्ति किसी यश या प्रशंसा की आकांक्षी नहीं है; वह तो बस कर्तव्य की उस अविरल धारा की तरह है, जो बिना शोर मचाए सृजन करती रहती है।
ऐतिहासिक रूप से, महिलाओं के योगदान का एक विशाल हिस्सा- विशेषकर अवैतनिक देखभाल (Unpaid Care), अनौपचारिक श्रम और सामुदायिक सेवा- पारंपरिक आर्थिक गणनाओं की परिधि से बाहर रहा है। किंतु इस हकीकत को पहचानते हुए,मोदी सरकार ने हमेशा देखभाल के इस ‘अदृश्य पहलू' को कम करने, उसे सामाजिक मान्यता देने और उसके न्यायसंगत पुनर्वितरण पर बल दिया है। सरकार का दृष्टिकोण देखभाल से जुड़ी सेवाओं को पेशेवर स्वरूप प्रदान कर उन्हें समावेशी विकास के एक नए 'इंजन' के रूप में रूपांतरित करना है।
भारत में महिला श्रम शक्ति सहभागिता दर (FLFPR) में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो 2017-18 में 23.3 प्रतिशत से बढ़कर 2023-24 में 41.7 प्रतिशत हो गई है। यह आंकड़ा भारतीय महिलाओं की बढ़ती आकांक्षाओं और आर्थिक गतिविधियों में उनके बढ़ते प्रभुत्व का सूचक है। सवैतनिक कार्यों में महिलाओं की यह भागीदारी न केवल घरेलू समृद्धि का आधार बनती है, बल्कि राष्ट्रीय उत्पादकता को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाती है।
आर्थिक सर्वेक्षण इस वास्तविकता को रेखांकित करता है कि यदि हम 'अवैतनिक देखभाल' के बोझ को कम कर सकें और इन सेवाओं को एक व्यावसायिक स्वरूप प्रदान करें, तो महिला रोजगार के परिदृश्य में एक क्रांतिकारी बदलाव आएगा। भारतीय 'केयर इकोनॉमी' वर्तमान में ही लाखों लोगों की आजीविका का संबल है, और आने वाले दशक में इसमें रोजगार सृजन की अपार संभावनाएँ हैं।
यही कारण है कि केंद्रीय बजट 2026-27 में 'केयर इकोनॉमी' को सुदृढ़ करने पर विशेष बल दिया गया है। 'महिलाओं के नेतृत्व में विकास' (Women-led Development) के प्रति हमारी अटूट प्रतिबद्धता ऐतिहासिक 'जेंडर बजट' में स्पष्ट झलकती है, जिसका आवंटन अब तक के उच्चतम स्तर-5 लाख करोड़ रुपये से अधिक पर पहुँच गया है। सरकार के समग्र दृष्टिकोण के अंतर्गत, हम 1.5 लाख देखभालकर्ताओं के कौशल विकास में निवेश कर रहे हैं, कामकाजी महिला छात्रावासों का विस्तार कर रहे हैं और आंगनवाड़ी केंद्रों को आधुनिक बनाकर प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल सुनिश्चित कर रहे हैं। साथ ही, स्वास्थ्य एवं पोषण प्रणालियों के समन्वय को भी सशक्त किया जा रहा है। ये सभी प्रयास एक स्पष्ट राजनीतिक और नैतिक प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं- जब महिलाओं को आवश्यक सहयोग और मंच मिलता है, तो संपूर्ण अर्थव्यवस्था की गति तीव्र हो जाती है।
 
सामाजिक सुरक्षा संहिता और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य स्थिति संहिता जैसे वैधानिक ढांचे शिशु देखभाल केंद्रों और श्रमिक कल्याण के प्रावधानों को सुदृढ़ करते हैं। ये सुधार एक गहरे सिद्धांत को प्रतिपादित करते हैं- शिशु देखभाल सहायता कोई गौण विकल्प या सुविधा मात्र नहीं, बल्कि यह आर्थिक न्याय का एक अनिवार्य संरचनात्मक आधार है।
हमारी सरकार महिलाओं और बच्चों को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के केन्द्र में रखती है, जो देश की कुल जनसंख्या का 65 प्रतिशत से अधिक हिस्सा हैं। अतः उनका सर्वांगीण कल्याण एक अनिवार्य रणनीतिक आवश्यकता है। वर्ष 2050 तक वरिष्ठ नागरिकों की संख्या में बढ़ोतरी होगी। इससे परिवार के भीतर भी देखभाल से जुड़ी जिम्मेदारियाँ बढ़ेंगी। साथ ही, करोड़ों बच्चों को उनके जीवन के सबसे महत्वपूर्ण प्रारंभिक वर्षों के दौरान- जब सीखने की क्षमता और भविष्य की उत्पादकता की नींव रखी जाती है- व्यवस्थित प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा, सुदृढ़ पोषण और स्वास्थ्य सहायता की नितांत आवश्यकता होगी।  
तेजी से होते शहरीकरण, प्रवासन और एकल परिवारों के बढ़ते चलन ने हमारी पारंपरिक सामाजिक सहायता प्रणालियों को बुनियादी रूप से बदल दिया है। अनौपचारिक ढांचों पर बढ़ते दबाव के कारण अब सुलभ, किफायती और गुणवत्तापूर्ण शिशु देखभाल व पारिवारिक सेवाओं की आवश्यकता अनिवार्य होती जा रही है। संगठित और सामुदायिक सेवाओं की यह मांग केवल महानगरों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि द्वितीय एवं तृतीय श्रेणी के शहरों (Tier-2 & 3 Cities) और ग्रामीण जनपदों में भी तीव्रता से उभरेगी।
देखभाल की अर्थव्यवस्था में निवेश एक साथ कई राष्ट्रीय लक्ष्यों को मजबूत करता है। इससे महिला श्रमशक्ति की भागीदारी बढ़ती है, बाल विकास के परिणाम सुधरते हैं, बुजुर्गों का कल्याण सुनिश्चित होता है और गरिमापूर्ण रोजगार के नए अवसर सृजित होते हैं। देखभाल प्रणालियों के संस्थागत और पेशेवर होने से महिलाएँ सशक्त होती हैं, परिवारों को स्थिरता मिलती है और संपूर्ण अर्थव्यवस्था को गति प्राप्त होती है।
जैसे-जैसे भारत 'अमृतकाल' से 'विकसित भारत @2047' की ओर बढ़ रहा है, हम इस परिवर्तनकारी सत्य को स्वीकार कर रहे हैं कि सामाजिक बुनियाद को सुदृढ़ किए बिना विकास को टिकाऊ नहीं बनाया जा सकता-और केयर इकॉनमी ही वह अनिवार्य आधार है।
इस अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर, हम देखभाल के अदृश्य श्रम को सम्मान देने और उसे संस्थागत रूप से सशक्त करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हैं। 'महिलाओं के नेतृत्व वाले विकसित भारत' का हमारा दृष्टिकोण केवल बोर्डरूम एवं संस्थानों में महिलाओं की भागीदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन सशक्त देखभाल प्रणालियों पर आधारित है, जो महिलाओं के विकल्पों, गरिमा और आर्थिक सामर्थ्य का विस्तार करती हैं। 
 

Related Post

Leave A Comment

Don’t worry ! Your email address will not be published. Required fields are marked (*).

Chhattisgarh Aaj

Chhattisgarh Aaj News

Today News

Today News Hindi

Latest News India

Today Breaking News Headlines News
the news in hindi
Latest News, Breaking News Today
breaking news in india today live, latest news today, india news, breaking news in india today in english