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 जीएसआई ने 2026 में भूस्खलन चेतावनी प्रणाली शुरू करने की योजना बनाई

 कोलकाता। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) 2026 में देश भर में संभावित भूस्खलन की पूर्व चेतावनी देने वाली प्रणाली शुरू करने की योजना बना रहा है। जीएसआई के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। जीएसआई के उप-महानिदेशक (नीति समर्थन प्रणाली- योजना एवं निगरानी) असित साहा ने बताया कि भूस्खलन के खतरों की नोडल एजेंसी जीएसआई ने पहले ही प्रायोगिक आधार पर पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग और कलिम्पोंग जिलों के अलावा तमिलनाडु में नीलगिरी में ऐसी चेतावनी देने का काम शुरू कर दिया है। असित साहा ने  गुरुवार को  कहा, ‘‘ जीएसआई एक क्षेत्रीय भूस्खलन-पूर्व चेतावनी प्रणाली को विकसित करने की प्रक्रिया में है और 2026 से विभिन्न राज्यों में कई चरणों में इसे शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है।'' जीएसआई देश के पहाड़ी और पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन की आशंका वाले क्षेत्रों के लिए 1 : 50,000 अनुपात के पैमाने पर एक राष्ट्रव्यापी भूस्खलन संवेदनशीलता मानचित्रण पहले ही कर चुका है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रफल की दृष्टि से यह लगभग 4.3 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है, जो देश के भूभाग का 12.6 प्रतिशत है और 19 राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों में फैला हुआ है। भारत में भूस्खलन के जोखिम वाले कई क्षेत्र हैं और जीएसआई के अनुसार इनमें उत्तर-पश्चिमी हिमालय (जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड) के पहाड़ी क्षेत्र, उत्तर-पूर्व का उप-हिमालयी इलाका (सिक्किम, पश्चिम बंगाल-दार्जिलिंग, असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, त्रिपुरा), पश्चिमी घाट क्षेत्र (महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल) और पूर्वी घाट क्षेत्र (आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु) शामिल हैं। असित साहा ने कहा, ‘‘ भूस्खलन संवेदनशीलता मानचित्रण उन क्षेत्रों को वर्गीकृत करता है जो भूस्खलन की दृष्टि से बेहद संवेदनशील हैं। हमने नक्शा तैयार किया है और पूर्वोत्तर सहित हिमालयी राज्यों के क्षेत्रों की पहचान की है, साथ ही पश्चिमी घाट क्षेत्र में जो इस प्राकृतिक आपदा से ग्रस्त हैं। हम अब 1 : 10,000 अनुपात के पैमाने पर देशव्यापी अध्ययन में भूस्खलन की संवेदनशीलता वाले क्षेत्रों में गंभीर रूप से पहचाने गए क्षेत्रों का अध्ययन कर रहे हैं, इनमें ज्यादातर क्षेत्र हिमालय में हैं। '' जीएसआई की स्थापना 1851 में की गयी थी और यह दुनिया के सबसे पुराने सर्वेक्षण संगठनों में से एक है।
 

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