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कनेक्टिविटी, सतत विकास को नयी दिशा मिलेगी: भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप कॉरिडोर पर प्रधानमंत्री मोदी

नयी दिल्ली. महत्वाकांक्षी भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप आर्थिक गलियारे की योजना की शनिवार को घोषणा की गई और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत 'कनेक्टिविटी' को क्षेत्रीय सीमाओं तक नहीं बांधता और उसका मानना ​​है कि यह आपसी विश्वास को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान 'वैश्विक बुनियादी ढांचे और निवेश के लिए साझेदारी' तथा 'भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप आर्थिक गलियारे' की घोषणा से संबंधित कार्यक्रम में मोदी ने कहा कि आज "हम सभी एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक साझेदारी पर पहुंच गए हैं"। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में यह भारत, पश्चिम एशिया और यूरोप के आर्थिक एकीकरण का प्रभावी माध्यम बनेगा। प्रधानमंत्री ने कहा, "यह पूरी दुनिया की कनेक्टिविटी और सतत विकास को एक नयी दिशा देगा।" मोदी ने कहा, "यह पूरी दुनिया के लिए सतत विकास को बढ़ावा देगा।
 उन्होंने इस मौके पर यह भी कहा कि मजबूत कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचा मानवता के लिए बुनियादी आधार है तथा भारत ने हमेशा इस पर जोर दिया है। प्रधानमंत्री ने कहा, "हम एक विकसित भारत के लिए एक मजबूत नींव रख रहे हैं। पीजीआईआई (वैश्विक बुनियादी ढांचे और निवेश के लिए साझेदारी) के माध्यम से, हम ‘ग्लोबल साउथ' देशों में बुनियादी ढांचे के अंतर को भरने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। भारत कनेक्टिविटी को क्षेत्रीय सीमाओं तक सीमित नहीं करता है। हमारा विश्वास है कि कनेक्टिविटी आपसी विश्वास को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।" ‘ग्लोबल साउथ' शब्द का इस्तेमाल एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के विकासशील देशों के लिए किया जाता है। मोदी ने सभी देशों की संप्रभुता और अखंडता का सम्मान करने पर जोर दिया। उन्होंने कर्ज के बोझ के बजाय वित्तीय व्यवहार्यता को बढ़ावा देने के साथ-साथ सभी पर्यावरणीय दिशानिर्देशों का पालन करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, "कनेक्टिविटी पर इतने बड़े कदम के साथ, हम भविष्य के विकास के लिए बीज बो रहे हैं।"
 अमेरिकी राष्ट्रपति जो. बाइडन ने कहा कि उन्हें यह घोषणा करते हुए गर्व हो रहा है कि वे नए भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप आर्थिक गलियारे के लिए एक "ऐतिहासिक समझौते" को अंतिम रूप देने में सफल हुए हैं। उन्होंने कहा, "इस गलियारे के प्रमुख हिस्से के रूप में, हम जहाजों और रेलगाड़ियों में निवेश कर रहे हैं, जो भारत से संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, जॉर्डन और इज़राइल के माध्यम से यूरोप तक विस्तारित है। इससे व्यापार करना बहुत आसान हो जाएगा। मैं प्रायोजकों और विशेष रूप से प्रधानमंत्री मोदी और (सऊदी युवराज) मोहम्मद बिन सलमान को धन्यवाद देना चाहता हूं।” यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने गलियारे पर समझौते की सराहना करते हुए कहा कि यह ऐतिहासिक है। उन्होंने कहा, "रेल लिंक के साथ यह भारत, अरब की खाड़ी और यूरोप के बीच अब तक का सबसे सीधा कनेक्शन होगा, जिससे भारत और यूरोप के बीच व्यापार की गति में 40 प्रतिशत का इजाफा होगा।" फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि यह पहले वैश्विक हरित व्यापार मार्ग से संबंधित है क्योंकि हाइड्रोजन भी इस परियोजना का हिस्सा है। जर्मन चांसलर ओलाफ शोल्ज ने कहा, "हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हम इसे सफलतापूर्वक लागू करें और जर्मनी इस संबंध में योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है।" इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने कहा कि नया गलियारा वैश्विक एकीकरण को मजबूत करने में एक मील का पत्थर है। उन्होंने मोदी, बाइडन और अन्य सभी को धन्यवाद दिया जिन्होंने इसे संभव बनाया। मेलोनी ने कहा, "इससे हमारी आर्थिक प्रगति बढ़ेगी। इटली इस पहल में निर्णायक भूमिका निभाने के लिए तैयार है और हम भूमध्यसागरीय एवं हिंद प्रशांत के बीच सेतु निर्माण में योगदान देना चाहते हैं।

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