नए वर्ष
-लेखिका- डॉ. दीक्षा चौबे
- दुर्ग ( वरिष्ठ साहित्यकार और शिक्षाविद)
नए वर्ष की भोर ने, फूँक दिया है शंख ।
आशा के उडगन उड़े, ले सपनों के पंख ।।
कर्म वृक्ष को सींचना, तप श्रम का ले नीर ।
सही वक्त पर फल लगें, रखना थोड़ी धीर ।।
बेला है नव वर्ष की, जागी नव उम्मीद।
चलें समय के साथ सब, करता यह ताकीद ।।
झेले थे संकट बहुत, दिवस रहे दुर्द्धर्ष ।
नया वर्ष यह आस दे, हो जीवन-उत्कर्ष ।।
अहं ब्रह्म की भ्रांति को, मानस में मत पाल ।
टिका नहीं कोई यहाँ , कहता जाता साल ।।
खुशी मनाते हैं सभी , आया है नव वर्ष ।
झूमे नाचे आज हम , छाया मन में हर्ष ।।
मिलजुलकर हम सब रहें, आई नूतन भोर ।
खुशियों की सौगात पा, भीगे नैना कोर ।।
अनुभव जीवन का नया , लेकर आया साल ।
करके अच्छे कर्म को ,उन्नत होता भाल ।।
लोग याद रखते सदा , करते हैं शुभ कर्म ।
करें भलाई जन सभी ,छूता सबका मर्म ।।
शीत लहर यह चल रही , मना रहे नव वर्ष ।
मदद करें हम दीन की , होता सबको हर्ष ।।
देते हैं शुभकामना , कुशल सभी का क्षेम ।
आँगन भीगे प्यार से ,सुख का बरसे हेम ।।



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