गगनयान की परीक्षण उड़ान पर जितेंद्र सिंह बोले-शुरुआत अच्छी तो आधा काम पूरा
नयी दिल्ली. विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने शनिवार को कहा कि गगनयान परियोजना के ‘अबॉर्ट मिशन' की सफल परीक्षण उड़ान ने शेष परीक्षणों और मानव रहित अभियानों के लिए मंच तैयार कर दिया है, जिसका परिणाम अंतत: भारत की पहली मानव अंतरिक्ष उड़ान के रूप में सामने आएगा। अंतरिक्ष राज्य मंत्री सिंह ने श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से परीक्षण यान विकास उड़ान 1 (टीवी-डी1) की सफलता पर इसरो को बधाई दी। उन्होंने कहा, ‘‘शुरुआत अच्छी तो आधा काम पूरा।''
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने कुछ प्रारंभिक बाधाओं से पार पाते हुए देश के महत्वाकांक्षी मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम ‘गगनयान' से जुड़े पेलोड के साथ उड़ान भरने वाले परीक्षण यान का शनिवार सुबह 10 बजे सफल प्रक्षेपण किया। वैज्ञानिकों ने मिशन निष्फल होने की स्थिति में (अबॉर्ट सिचुएशन) टीवी-डी1 परीक्षण यान से ‘क्रू मॉड्यूल' (जिसमें अंतरिक्ष यात्री सवार होंगे) को बाहरी अंतरिक्ष में प्रक्षेपित करने के बाद वापस सुरक्षित लाने के लिए ‘क्रू एस्केप सिस्टम' यानी चालक दल बचाव प्रणाली (सीईएस) का परीक्षण किया। तय योजना के अनुसार, ‘क्रू मॉड्यूल' और ‘क्रू एस्केप सिस्टम' के बंगाल की खाड़ी में सुरक्षित और सटीक तरीके से गिरने पर मिशन नियंत्रण केंद्र में इसरो के वैज्ञानिकों में खुशी की लहर दौड़ गई। सिंह ने एक बयान में कहा, "आज के कार्यक्रम ने संभवत: वर्ष 2025 के किसी भारतीय अंतरिक्ष यात्री को अंतरिक्ष में भेजने के उद्देश्य से प्रणालियों और प्रक्रियाओं के परीक्षणों की एक श्रृंखला का मार्ग प्रशस्त किया है।" मंत्री ने कहा कि गगनयान मिशन में मानव सुरक्षा सर्वोपरि है और आज सुबह परीक्षण उड़ान ने प्रक्षेपण के तुरंत बाद प्रतिकूल परिस्थितियों के मामले में चालक दल को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की क्षमता की पुष्टि की। सिंह ने कहा, "आज की कवायद में गगनयान मिशन के ‘क्रू मॉड्यूल' पर ‘क्रू एस्केप' प्रणाली के प्रदर्शन का परीक्षण किया गया। मूल रूप से, इसमें सुरक्षा तंत्र का परीक्षण किया गया जो गगनयान मिशन के चालक दल को किसी खराबी के कारण मिशन के निष्फल होने की स्थिति में अंतरिक्ष यान से बचने में सफल बनाएगा।'' उन्होंने कहा कि ‘क्रू मॉड्यूल' (सीएम) चालक दल के लिए अंतरिक्ष में पृथ्वी जैसे वातावरण वाला रहने योग्य स्थान है। सिंह ने कहा कि ‘सर्विस मॉड्यूल' का उपयोग कक्षा में रहते हुए ‘क्रू मॉड्यूल' को आवश्यक सहायता प्रदान करने के लिए किया जाएगा। गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान के तहत भारत तीन अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी से 400 किलोमीटर ऊपर की कक्षा में ले जाने और उन्हें सुरक्षित वापस लाने की योजना बना रहा है। यह परीक्षण उड़ान चंद्रमा पर चंद्रयान-3 की सफल ‘सॉफ्ट लैंडिंग' के दो महीने के भीतर हुई है।
मंत्री ने कहा, "प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में, भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम का लक्ष्य अंतरिक्ष में अपना पहला मानवयुक्त मिशन और बाद में पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री को चंद्रमा पर उतारना है।" सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री ने निर्देश दिया है कि भारत को अब 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने और 2040 तक चंद्रमा पर पहले भारतीय को भेजने जैसे नए और महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित करने चाहिए।










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