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एबी-एचडब्ल्यूसी में 24 अक्टूबर तक 211 करोड़ से अधिक लोग आएं हैं : मांडविया

नयी दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने सोमवार को कहा कि आयुष्मान भारत स्वास्थ्य और आरोग्य केंद्रों (एबी-एचडब्ल्यूसी) में 24 अक्टूबर तक 211 करोड़ से ज्यादा लोग आए हैं और लोगों ने 183 करोड़ से अधिक बार मुफ्त दवाओं का लाभ उठाया है। दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) क्षेत्रीय समिति के 76वें सत्र को संबोधित करते हुए मांडविया ने एबी-एचडब्ल्यूसी की प्रगति की सराहना करते हुए कहा कि इसने प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की व्यापक श्रृंखला प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा, ‘‘24 अक्टूबर तक, एबी-एचडब्ल्यूसी में 211 करोड़ से अधिक लोग आए हैं। इसका प्रभाव शानदार है, जहां 183 करोड़ से अधिक बार मुफ्त दवाओं और 87.3 करोड़ से अधिक बार नैदानिक सेवाओं का लाभ उठाया गया है।'' मंत्री ने कहा कि 2.6 करोड़ आरोग्य सत्र आयोजित किए गए हैं, जहां 30.6 करोड़ से अधिक लोग शामिल हुए।
 डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधनोम गेब्रेयेसस ने इस कार्यक्रम में डिजिटल तरीके से भाग लिया। मांडविया को सर्वसम्मति से दक्षिण-पूर्व एशिया की क्षेत्रीय समिति के 76वें सत्र का अध्यक्ष भी चुना गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण को दोहराते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, ‘‘भारत में, हम एक समग्र और समावेशी दृष्टिकोण का पालन कर रहे हैं। हम स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे का विस्तार कर रहे हैं। चिकित्सा की पारंपरिक प्रणालियों को बढ़ावा दे रहे हैं और सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज दृष्टि के अनुरूप किसी को भी पीछे न छोड़ने की दृढ़ प्रतिबद्धता के साथ सभी को सस्ती स्वास्थ्य सेवा प्रदान कर रहे हैं।'' मांडविया ने कहा कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन और पीएम-एबीएचआईएम (आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन) जैसी पहल ने डिजिटल स्वास्थ्य ढांचे और भौतिक बुनियादी ढांचे को काफी हद तक मजबूत किया है, जिससे देश में स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराने में क्रांतिकारी विकास हुआ है। उन्होंने कहा, ‘‘विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखकर एबी-एचडब्ल्यूसी के माध्यम से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर हमारा वर्तमान फोकस बेहद सकारात्मक स्वास्थ्य परिणाम लाएगा और जेब से होने वाले खर्च में कमी लाएगा तथा स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधारों में लगे अन्य देशों के लिए एक मॉडल बन जाएगा।'' डब्ल्यूएचओ एसईएआरओ (दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय कार्यालय) बिल्डिंग साइट, आईपी एस्टेट, नयी दिल्ली में पौधारोपण समारोह में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए मांडविया ने कहा, ‘‘डब्ल्यूएचओ एसईएआरओ बिल्डिंग दक्षिण-पूर्व क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं का समान और समावेशी विकास सुनिश्चित करते हुए वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने के लिए भारत और डब्ल्यूएचओ के सहयोगात्मक प्रयास के प्रतीक के रूप में खड़ा है।'' उन्होंने इस परियोजना को पूरा करने के लिए भारत के 239.5 करोड़ रुपये के योगदान का उल्लेख किया, जो क्षेत्रीय स्वास्थ्य चुनौतियों का समाधान करने, सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने तथा नवीन समाधान विकसित करने के लिए स्वास्थ्य पेशेवरों के बीच सहयोग, अनुसंधान और ज्ञान के आदान-प्रदान के लिये एक केंद्र की कल्पना करता है।

 

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