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आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करना एक अडिग सार्वभौमिक मानदंड होना चाहिए : भारत

 नयी दिल्ली.  भारत ने शनिवार को अरब लीग के सदस्य देशों से स्पष्ट रूप से कहा कि आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करना एक "अडिग सार्वभौमिक मानदंड" होना चाहिए। उन्होंने नयी दिल्ली में आयोजित भारत–अरब लीग देशों के विदेश मंत्रियों के दूसरे सम्मेलन में यह बात कही, जिसमें अरब लीग के 19 सदस्य देशों ने भाग लिया। अरब लीग को एक प्रभावशाली समूह माना जाता है। बैठक शुरू होने से पहले, कई देशों के विदेश मंत्रियों समेत प्रतिभागियों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की। मोदी ने कहा, "अरब जगत भारत के विस्तारित पड़ोस का हिस्सा है, जो गहरे सभ्यतागत संबंधों, जीवंत जन संपर्कों और स्थायी भाईचारे के रिश्तों के साथ-साथ शांति, प्रगति व स्थिरता के साझा संकल्प से जुड़ा है।" उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा, "मुझे विश्वास है कि प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, व्यापार और नवाचार में सहयोग बढ़ने से नए अवसर पैदा होंगे और हमारी साझेदारी नयी ऊंचाइयों पर पहुंचेगी।" विदेश मंत्रियों की बैठक के उद्घाटन भाषण में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि गाजा संघर्ष को समाप्त करने की व्यापक शांति योजना को आगे बढ़ाना एक साझा प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, "विभिन्न देशों ने इस शांति योजना पर, व्यक्तिगत रूप से या सामूहिक रूप से, नीतिगत घोषणाएं की हैं। इसी व्यापक संदर्भ में हम क्षेत्र की चुनौतियों और संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं।" जयशंकर ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में पश्चिम एशिया में कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम हुए हैं, जिनमें से अनेक का प्रभाव क्षेत्र से बाहर तक महसूस किया गया है। उन्होंने कहा कि इन अनेक चुनौतियों पर विचार करते हुए हमारे साझा हित की मांग है कि स्थिरता, शांति और समृद्धि जैसी ताकतों को मजबूत किए जाए। जयशंकर ने अपने संबोधन में आतंकवाद से उत्पन्न गंभीर चुनौतियों पर चिंता जताई और इसके खिलाफ वैश्विक स्तर पर समन्वित प्रयासों का आह्वान किया। विदेश मंत्री ने कहा, "आतंकवाद के सभी रूप एक साझा खतरा हैं।"

 
उन्होंने कहा कि सीमा-पार आतंकवाद विशेष रूप से अस्वीकार्य है, क्योंकि इससे अंतरराष्ट्रीय संबंधों और कूटनीति के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन होता है। जयशंकर ने कहा, "जिन समाजों को आतंकवाद निशाना बनाता है, उन्हें आत्मरक्षा का अधिकार है और वे स्वाभाविक रूप से इसका उपयोग करेंगे।" उन्होंने कहा कि इस "वैश्विक अभिशाप" से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है। जयशंकर ने कहा, "आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करना एक अडिग सार्वभौमिक मानदंड होना चाहिए।"

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