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शहरी आर्थिक क्षेत्रों के लिए 5,000 करोड़ रुपये के आवंटन का प्रस्ताव

 नयी दिल्ली.  केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को शहरी विकास को मजबूत करने के लिए एक बड़े कदम की घोषणा की। इसके तहत शहरी आर्थिक क्षेत्रों (सीईआर) के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा और प्रत्येक क्षेत्र के लिए पांच वर्षों में 5,000 करोड़ रुपये के आवंटन का प्रस्ताव किया गया है। इसका मकसद संबंधित योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करना है।

 
सीतारमण ने लोकसभा में 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश करते हुए शहरों को भारत के विकास, नवोन्मेष और अवसरों का इंजन बताया और कहा कि यह नई पहल दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों के साथ-साथ मंदिर नगरों पर केंद्रित होगी, जिन्हें आधुनिक बुनियादी ढांचे और बेहतर सुविधाओं की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बजट का उद्देश्य विशिष्ट विकास कारकों के आधार पर शहर आर्थिक क्षेत्र का मानचित्रण करके शहरों की आर्थिक शक्ति को और अधिक बढ़ाना है। सीतारमण ने कहा, ''सुधार-सह-परिणाम आधारित वित्तपोषण व्यवस्था के साथ चुनौतीपूर्ण तरीके से उनकी योजनाओं को लागू करने के लिए प्रत्येक सीईआर के लिए पांच वर्षों में 5,000 करोड़ रुपये का आवंटन प्रस्तावित किया गया है।'' उन्होंने कहा कि पिछले दशक में, उनकी सरकार ने सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के व्यापक सुधार के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें बुनियादी ढांचा निवेश ट्रस्ट (इनविट) और रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट (रीट) जैसे नए वित्तपोषण साधन और एनआईआईएफ (राष्ट्रीय निवेश और बुनियादी ढांचा कोष) और एनएबीएफआईडी (राष्ट्रीय बुनियादी ढांचा और विकास वित्त पोषण बैंक) जैसी संस्थाएं शामिल हैं। सरकार पांच लाख से अधिक आबादी वाले शहरों (टियर 2 और टियर 3) में अवसंरचना के विकास पर ध्यान केंद्रित करना जारी रखेगी। ये शहर विकास केंद्रों के रूप में विकसित हुए हैं।

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