ब्रेकिंग न्यूज़

आरबीआई ने कर्ज नहीं लौटाने वालों के मोबाइल फोन बंद करने पर लगाई रोक

मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक ने बृहस्पतिवार को कहा कि बैंक व्यक्तिगत, वाहन या आवास ऋण नहीं लौटाने वालों से कर्ज की वसूली के लिए उनके मोबाइल फोन, टैबलेट या लैपटॉप को बंद या निष्क्रिय नहीं कर सकते हैं। हालांकि, यदि संबंधित उपकरण की खरीद के लिए उसी बैंक ने कर्ज दिया है, तो यह कदम उठाया जा सकता है। आरबीआई ने कहा कि जिन मामलों में उपकरण की कार्यक्षमता सीमित या निष्क्रिय करने की अनुमति है, उनमें भी बैंक को शुरुआत से ही उपकरण बंद करने के बजाय चरणबद्ध तरीका अपनाना होगा। केंद्रीय बैंक ने कर्ज वसूली और 'रिकवरी' एजेंसियों की नियुक्ति से जुड़े आचरण संबंधी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उधारकर्ताओं ने सोशल मीडिया के जरिये उत्पीड़न और अभद्र भाषा के इस्तेमाल जैसी शिकायतें की थीं। उसके बाद यह कदम उठाया गया है। आरबीआई के परिपत्र के अनुसार, ये नियम एक जनवरी, 2027 से प्रभावी होंगे।
 केंद्रीय बैंक ने कहा, ''कोई भी बैंक ऐसी प्रौद्योगिकी आधारित व्यवस्था का इस्तेमाल नहीं करेगा, जो ऋण वसूली के साधन के रूप में उधारकर्ता के मोबाइल फोन, टैबलेट या लैपटॉप जैसी मोबाइल उपकरण की किसी भी कार्यक्षमता को सीमित या निष्क्रिय करे। अपवाद केवल उन मामलों में होगा, जहां संबंधित उपकरण की खरीद के लिए बैंक ने ही ऋण उपलब्ध कराया हो।'' केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया कि यदि मोबाइल उपकरण की खरीद बैंक से कर्ज लेकर की गई है, तो बैंक उसकी कार्यक्षमता सीमित या निष्क्रिय करने का विकल्प अपना सकता है। हालांकि, ऐसे मामलों में भी बैंक को उपकरण को तुरंत बंद करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से कार्रवाई करनी होगी। आरबीआई ने यह भी कहा कि बैंक आवश्यक सुविधाओं को किसी भी स्थिति में बंद या सीमित नहीं कर सकेंगे। इनमें 'इनकमिंग कॉल', एसएमएस और आपातकालीन एसओएस सुविधा शामिल हैं। इससे पहले, मई में आरबीआई ने बैंक और एनबीएफसी समेत उसके दायरे में आने वाले वित्तीय संस्थानों द्वारा ऋण वसूली और रिकवरी एजेंसियों की नियुक्ति से संबंधित आचरण' पर मसौदा दिशा-निर्देश जारी किए थे, जिस पर विभिन्न पक्षों से सुझाव प्राप्त हुए थे। केंद्रीय बैंक ने कहा कि सुझावों में यह सुनिश्चित करने की बात कही गई थी कि बैंक और एनबीएफसी (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी) केवल सुरक्षित, मानकों के अनुरूप और परीक्षण की गई 'डिवाइस-लॉकिंग' तकनीक का ही उपयोग करें तथा बिना लाइसेंस या गैर-भरोसेमंद सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल को रोका जाए। इन सुझावों को स्वीकार करते हुए आरबीआई ने कहा कि तकनीक आधारित वसूली प्रणाली लागू करने वाली वित्तीय संस्थाएं और उससे जुड़ी तीसरे पक्ष की सेवा प्रदाता कंपनी को संबंधित डिवाइस के मूल उपकरण विनिर्माता या 'ऑपरेटिंग सिस्टम' मंच से इस तकनीक का प्रमाण पत्र प्राप्त करना होगा। आरबीआई ने बैंकों को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया है कि किसी भी उधारकर्ता या गारंटर की जानकारी केवल उतनी ही सीमा तक अपने कर्मचारियों या रिकवरी एजेंसियों के साथ साझा की जाए, जितनी ऋण वसूली से जुड़े दायित्वों के निर्वहन के लिए आवश्यक हो।

Related Post

Leave A Comment

Don’t worry ! Your email address will not be published. Required fields are marked (*).

Chhattisgarh Aaj

Chhattisgarh Aaj News

Today News

Today News Hindi

Latest News India

Today Breaking News Headlines News
the news in hindi
Latest News, Breaking News Today
breaking news in india today live, latest news today, india news, breaking news in india today in english