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कोलकाता। मोहम्मडन स्पोर्टिंग क्लब ने रविवार को यहां भारतीय वायु सेना की रेजिमेंटल टीम को 4-1 से हराकर अपने डूरंड कप अभियान की शानदार शुरुआत की। यहां के साल्ट लेक स्टेडियम में मोहम्मडन स्पोर्टिंग के लिए मिलन सिंह (19वें मिनट) और अरिजीत सिंह (31वें मिनट) ने जबकि अजहरुद्दीन मलिक ने मध्यांतर से ठीक पहले तीसरा गोल किया। सौरव साधु खान ने 47वें मिनट में गोलकर भारतीय वायु सेना का खाता खोला लेकिन मैच के 77वें मिनट में मार्कस जोसेफ ने एक और गोल कर मोहम्मडन स्पोर्टिंग की बढ़त 4-1 कर दी। इससे पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने टूर्नामेंट के 130वें सत्र का उद्घाटन किया। मोहम्मडन स्पोर्टिंग 1940 में डूरंड कप जीतने वाला पहला सिविलियन क्लब बना था।
- न्यूयार्क। सर्बियाई स्टार नोवाक जोकोविच ने शनिवार को यहां अमेरिकी ओपन के तीसरे दौर में केई निशिकोरी को हराकर अगले दौर में प्रवेश किया तो वही महिलाओं में शीर्ष वरीय एश बाटी स्थानीय खिलाड़ी शेल्बी रोजर्स से हारकर टूर्नामेंट से बाहर हो गयी। जोकोविच ने फ्लशिंग मिडोज पर लगातार 14वीं बार खेलते हुए निशिकोरी से पिछड़ने के बाद वापसी करते हुए 6-7 (4), 6-3, 6-3, 6-2 से जीत दर्ज कर करियर ग्रैंड स्लैम के अपने सपने को पूरा करने की ओर मजबूत कदम बढ़ाया। महिलाओं में विश्व रैंकिंग में 43वें स्थान पर काबिज अमेरिका की रोजर्स ने बार्टी को 6-2, 1-6, 7-5 से हराकर उलटफेर किया। जोकोविच वह अमेरिका के 20 साल के वाइल्ड कार्ड से प्रवेश करने वाले जेनसन ब्रूक्सबी और 21वें वरीय अस्लान कारात्सेव के बीच होने वाले मुकाबले के विजेता से भिड़ेंगे। मैच के दौरान वह अपने हाव भाव को व्यक्त करने में झिझके नहीं। वह इस दौरान अपनी छाती थपथपाते हुए और मुट्ठी को ऊपर उठाते हुए दिखे। विश्व रैंकिंग में पहले स्थान पर काबिज इस खिलाड़ी ने कहा, ‘‘मैं कोर्ट पर इस तरह के भावुक क्षणों को दिखाने की योजना नहीं बनाता। भावनायें बस दिख जाती हैं। '' चौंतीस वर्षीय इस खिलाड़ी ने कहा, ‘‘जब आप कड़े मुकाबले में हो और जब आपको लगे कि यह क्षण बहुत महत्वपूर्ण है तो आप इन्हें बाहर निकालना चाहते हो और आप ऐसा कर देते हो। '' इस साल ग्रैंड स्लैम मुकाबलों में जोकोविच की यह 24वीं जीत है। इस साल फरवरी में आस्ट्रेलियाई ओपन, जून में फ्रेंच ओपन और जुलाई में विम्बलडन खिताब जीतने वाले जोकोविच शानदार फार्म में हैं। जोकोविच 1969 के बाद कैलेंडर ग्रैंड स्लैम पूरा करने वाला पहला पुरुष खिलाड़ी बनने की ओर बढ़ रहे हैं। रॉड लीवर ने 1969 में सत्र के सभी चारों ग्रैंड स्लैम जीते थे और स्टेफी ग्राफ 1988 में ऐसा करने वाली महिला खिलाड़ी थीं। कैलेंडर ग्रैंड स्लैम के सपने को पूरा करने के लिये उन्हें अगले हफ्ते चार और मैच जीतने होंगे।सर्बिया का यह खिलाड़ी अगर यहां खिताब जीत लेता है तो यह उनका रिकॉर्ड 21वां पुरुष एकल ग्रैंड स्लैम खिताब होगा। वह अभी 20 ग्रैंड स्लैम खिताब के साथ रोजर फेडरर और राफेल नडाल की बराबरी पर हैं। शनिवार को अगले दौर में पहुंचने वाले खिलाड़ियों में विम्बलडन के उप विजेता माटियो बेरेटिनी और जानिक सिनर शामिल हैं, दोनों इटली के हैं। इस तरह टूर्नामेंट के 140 साल के इतिहास में पहली बार इटली के खिलाड़ी अमेरिकी ओपन के चौथे दौर तक पहुंचे हैं। महिलाओं में बार्टी को उलटफेर का शिकार होना पड़ा जबकि ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली बेलिंडा बेनसिच, 2019 अमेरिकी ओपन चैम्पियन बियांका आंद्रिस्कू, 2020 फ्रेंच ओपन चैम्पियन इगा स्वियातेक, दो बार मेजर फाइनल में पहुंच चुकी कैरोलिना प्लिस्कोवा और 18 वर्षीय ब्रिटेन की एम्मा राडाकानू भी अपने मुकाबले जीतकर चौथे दौर में पहुंची। विश्व रैंकिंग में पहले स्थान पर काबिज ऑस्ट्रेलिया की बार्टी को हराकर शेल्बी अपनी करियर की सबसे बड़ी जीत दर्ज की। दोनों खिलाड़ियों के बीच यह पांचवां मुकाबला था जिसमें इस अमेरिकी खिलाड़ी ने पहली बार जीत दर्ज की। रोजर्स अगले दौर में गैरवरीय राडाकानू से भिड़ेंगी। राडाकानू ने सारा सोर्रिबेस टोरमो को 6-0, 6-1 से हराया। आंद्रिस्कू ने ग्रीट मिन्नेन पर 6-1, 6-2 से जीत दर्ज कर अमेरिकी ओपन में अपनी जीत-हार का रिकार्ड 10-0 कर लिया। कनाडा की 2019 की यह चैम्पियन पिछले साल चोट के कारण टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं ले सकी थी।
- नई दिल्ली। अवनि लेखरा को 2012 में एक कार दुर्घटना में घायल होने के कारण व्हील चेयर का सहारा लेना पड़ा ,लेकिन पैरालंपिक खेलों में निशानेबाजी में स्वर्ण सहित दो पदक जीतकर उन्होंने यह साबित कर दिया कि बुलंद हौसले और कभी हार न मानने के जज्बे से कोई भी सफलता हासिल की जा सकती है।अवनि ने तोक्यो पैरालंपिक में 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग एचएस1 वर्ग में स्वर्ण पदक जीतने के बाद 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन एसएच1 स्पर्धा का कांस्य पदक हासिल कर इतिहास रच दिया। वह दो पैरालंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बन गयीं। वह भारत की उन चुनिंदा खिलाडिय़ों में शामिल हो गयी है जिन्होंने एक से अधिक पैरालंपिक (या ओलंपिक) पदक जीते हैं। कार दुर्घटना में अवनि की रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट लगी थी जिसके बाद उनकी कमर का निचला हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया था। अवनि के पिता प्रवीण लेखरा 2015 में जब पहली बार उन्हें जयपुर के जगतपुरा खेल परिसर में निशानेबाजी में हाथ आजमाने के लिए ले गए तो उनका मकसद दुर्घटना के दिव्यांग हुई बेटी की जिंदगी से मायूसी और अवसाद कम करके उसका दिल बहलाना था । अवनि ने भी पिता के जोर देने पर निशानेबाजी करना शुरू किया और मायूसी कम करने के लिये की गयी पहल का परिणाम तोक्यो पैरालंपिक में ऐतिहासिक स्वर्ण और कांस्य पदक के रूप में सामने आया।वह शुरुआत में 'फुल-टाइम' निशानेबाज नहीं बनना चाहती थीं लेकिन अभिनव बिंद्रा (भारत के पहले ओलंपिक व्यक्तिगत स्वर्ण पदक विजेता निशानेबाज) की आत्मकथा 'ए शॉट एट ग्लोरी' पढऩे के बाद वह इतनी प्रेरित हुईं कि उन्होंने अपने पहले ही पैरालंपिक में इतिहास रच दिया। उन्होंने दूसरा पदक जीतने के बाद ने कहा, ''जब मैंने अभिनव बिंद्रा सर की आत्मकथा पढ़ी थी तो मुझे इससे प्रेरणा मिली थी क्योंकि उन्होंने अपना शत प्रतिशत देकर भारत के लिये पहला व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीता था। '' उन्होंने कहा, ''मैं हमेशा उनकी (बिंद्रा की) तरह बनना चाहती थी और हमेशा अपने देश का नाम रोशन करना चाहती थी। '' लेखरा ने कहा, ''मैं खुश हूं कि मैं देश के लिये एक और पदक जीत सकी और मैं अभी तक इस पर विश्वास नहीं कर पा रही। ''कोविड-19 महामारी से उनकी तोक्यो पैरालंपिक की तैयारियों पर असर पड़ा जिसमें उनके लिये जरूरी फिजियोथेरेपी दिनचर्या सबसे ज्यादा प्रभावित हुई लेकिन उन्होंने इन रुकावटों से अपने जज्बे को प्रभावित नहीं होने दिया और पैरालंपिक में तिरंगा ऊंचा फहराने के साथ भारतीय राष्ट्र गान की धुनों को बजाने का मौका बनाकर सब का दिल जीत लिया।
- न्यूयॉर्क ।अनुभवी भारतीय टेनिस खिलाड़ी रोहन बोपन्ना और उनके क्रोएशियाई जोड़ीदार इवान डोडिग ने यहां अमेरिकी (यूएस) ओपन में मोनाको के ह्यूगो नेस और फ्रांस के आर्थर रिंडरनेच की जोड़ी को हराकर पुरुष युगल प्री-क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया। भारत-क्रोएशिया के खिलाड़ियों की 14वीं वरीयता प्राप्त जोड़ी ने शनिवार रात एक घंटे 56 मिनट तक चले मुकाबले में अपने गैरवरीय प्रतिद्वंद्वियों पर 6-3, 4-6, 6-4 से जीत दर्ज की। बोपन्ना और डोडिग अपने सभी तीन ब्रेक प्वाइंट को भुनाने मे सफल रहे। उन्होंने इसके साथ ही विरोधी खिलाड़ियों के पांच ब्रेक प्वाइंट में से तीन का बचाव किया। अंतिम 16 मुकाबले में इस जोड़ी का सामना चौथी वरीयता प्राप्त अमेरिका के राजीव राम और ब्रिटेन की जो सैलिसबरी की जोड़ी से होगा। यह जोड़ी इस साल आस्ट्रेलियाई ओपन में उपविजेता रही थी। बोपन्ना टूर्नामेंट में बने रहने वाले एकमात्र भारतीय खिलाड़ी हैं । सानिया मिर्जा और अंकिता रैना अपने-अपने पहले दौर के मैच हारने के बाद महिला युगल से बाहर हो गयी थीं। सानिया मिश्रित युगल में भी पहले दौर की बाधा को पार करने में विफल रही।
- तोक्यो। कृष्णा नागर ने यहां बैडमिंटन में दूसरा स्वर्ण पदक दिलाया जबकि उनसे पहले सुहास यथिराज ने रजत पदक हासिल किया जिससे भारतीय दल के लिये तोक्यो पैरालंपिक में दिन ‘सुपर संडे' साबित हुआ। भारत ने इस तरह पांच स्वर्ण, आठ रजत और छह कांस्य से कुल 19 पदक जीतकर पैरालंपिक में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया जिससे देश पदक तालिका में 24वें स्थान पर रहा। इसमें से निशानेबाजी और बैडमिंटन में दो दो स्वर्ण जबकि एथलेटिक्स में एक स्वर्ण पदक शामिल रहा। भारत ने पिछले रियो चरण में केवल चार पदक जीते थे। भारत ने 1972 में पहली बार पैरालंपिक में हिस्सा लिया था, उसके बाद से पिछले चरण तक भारत की झोली में कुल मिलाकर 12 ही पदक थे। बैडमिंटन खिलाड़ियों ने चार पदक (दो स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य) जीते।तोक्यो पहुंचे 54 पैरा खिलाड़ियों में से 17 ने पदक जीते। खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने भी उनके प्रदर्शन पर कहा, ‘‘भारतीय पैरा खिलाड़ियों का अभूतपूर्व उदय। एक नये युग की शुरूआत हुई है। '' दूसरे वरीय नागर ने हांगकांग के चू मैन काई को पुरूषों की एकल एसएच6 क्लास के तीन गेम तक चले रोमांचक फाइनल में 21-17 16-21 21-17 शिकस्त दी। जयपुर के 22 साल के नागर बैडमिंटन में स्वर्ण पदक जीतने की सूची में हमवतन प्रमोद भगत के साथ शामिल हो गये जिन्होंने शनिवार को एसएल3 क्लास में बैडमिंटन का पहला स्वर्ण पदक जीता था। सुहास पुरूष एकल एसएल4 क्लास बैडमिंटन स्पर्धा के फाइनल में शीर्ष वरीय फ्रांस के लुकास माजूर से करीबी मुकाबले में हार गये जिससे उन्होंने ऐतिहासिक रजत पदक से अपना अभियान समाप्त किया। गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) के जिलाधिकारी सुहास पैरालंपिक में पदक जीतने वाले पहले आईएएस अधिकारी भी बन गये हैं। गैर वरीय सुहास के एक टखने में विकार है। उन्हें दो बार के विश्व चैम्पियन माजूर से 62 मिनट तक चले फाइनल में 21-15 17-21 15-21 से पराजय का सामना करना पड़ा। भगत और पलक कोहली की मिश्रित युगल जोड़ी को हालांकि कांस्य पदक के प्लेऑफ में जापान के दाइसुके फुजीहारा और अकिको सुगिनो की जोड़ी से 37 मिनट में 21-23 19-21 से हार का सामना करना पड़ा। नागर को छोटे कद का विकार है, वह अपने चचेरे भाई के प्रोत्साहन के बाद बैडमिंटन खेलने लगे। उन्होंने हालांकि चार साल पहले ही खेल को गंभीरता से खेलना शुरू किया और पैरा एशियाई खेलों में कांस्य जीता। उन्होंने 2019 विश्व चैम्पियनशिप में एकल और युगल में क्रमश: कांस्य और रजत पदक जीते। दुनिया के दूसरे नंबर के खिलाड़ी ने ब्राजील में भी रजत पदक जीता था। पिछले साल पेरू में उन्होंने एकल और युगल में दो स्वर्ण पदक हासिल किये थे। उन्होंने इस साल अप्रैल में दुबई पैरा बैडमिंटन चैम्पियनशिप में दो स्वर्ण पदक अपनी झोली में डाले। एसएल4 क्लास में वो बैडमिंटन खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं जिनके पैर में विकार हो और वे खड़े होकर खेलते हैं। एसएल4 के कांस्य पदक के प्लेऑफ में दूसरे वरीय तरुण ढिल्लों को इंडोनेशिया के फ्रेडी सेतियावान से 32 मिनट तक चले मुकाबले में 17-21 11-21 से हार का सामना करना पड़ा। कर्नाटक के सुहास के कोर्ट के भीतर और बाहर कई उपलब्धियां हासिल कर चुके हैं और साथ ही कम्प्यूटर इंजीनियर है और प्रशासनिक अधिकारी भी। वह 2020 से नोएडा के जिलाधिकारी हैं और कोरोना महामारी के खिलाफ जंग में मोर्चे से अगुवाई कर चुके हैं । उन्होंने 2017 में बीडब्ल्यूएफ तुर्की पैरा बैडमिंटन चैम्पियनशिप में पुरुष एकल और युगल स्वर्ण जीता । इसके अलावा 2016 एशिया चैम्पियनशिप में स्वर्ण और 2018 पैरा एशियाई खेलों में कांस्य पदक हासिल किया । वहीं कोई भी भारतीय निशानेबाज मिश्रित 50 मीटर राइफल प्रोन एसएच1 स्पर्धा के फाइनल्स के लिये क्वालीफाई नहीं कर सका जबकि स्टार अवनि लेखरा क्वालीफिकेशन में 28वें स्थान पर रहीं। इससे भारत का निशानेबाजी में ऐतिहासिक अभियान भी समाप्त हो गया जिसमें देश के नाम पांच (दो स्वर्ण, एक रजत और दो कांस्य) पदक रहे। सिद्धार्थ बाबू क्वालीफाई करने के करीब पहुंचे लेकिन वह मामूली 0.2 के अंतर से पिछड़ गये जिससे वह क्वालीफिकेशन दौर में नौंवे स्थान पर रहे। वहीं 10 मीटर राइफल में स्वर्ण और 50 मीटर राइफल थ्री पॉजिशंस में कांस्य पदक जीतकर स्टार बनीं अवनि लेखरा ने 612 अंक का स्कोर बनाया जिससे वह 28वें स्थान पर रहीं। इस 19 साल की निशानेबाज लेखरा ने अपने पदार्पण में खेलों में शानदार प्रदर्शन किया जो निशानेबाजी का पदक और खेलों का स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनी। तीसरे भारतीय निशानेबाज दीपक 602.2 के स्कोर से 46वें स्थान पर रहे।एसएच1 राइफल स्पर्धा में वही एथलीट हिस्सा लेते हैं जिनके पैरों में विकार हो। लेखरा के अलावा 19 साल के मनीष नरवाल ने पुरूषों की 50 मीटर पिसटल एसएच1 स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीता है। सिंघराज अडाना ने भी प्रतिस्पर्धा में दो पदक जीते हैं, उन्होंने 50 मीटर पिस्टल एसएच1 स्पर्धा का रजत और 10 मीटर एयर पिस्टल एसएच1 स्पर्धा का कांस्य पदक जीता। एथलेटिक्स में पैरालंपिक के छठे दिन भारत को भाला फेंक एथलीट सुमित अंतिल ने पुरूषों के एफ64 वर्ग में पांच बार अपना ही रिकार्ड तोड़ते हुए 68.55 मीटर की दूरी से विश्व रिकार्ड से स्वर्ण पदक दिलाया था। ट्रैक एवं फील्ड में देश ने सबसे ज्यादा आठ पदक (एक स्वर्ण, पांच रजत और दो कांस्य) हासिल किये। प्रवीण कुमार ने ऊंची कूद में एशियाई रिकार्ड से रजत पदक हासिल कर देश के सबसे युवा पदकधारी भी बने। अनुभवी देवेंद्र झाझरिया (भाला फेंक) स्वर्ण की हैट्रिक करने से भले ही चूक गये हों, लेकिन इस चरण का रजत पदक उनके लिये सबसे ज्यादा अहमियत रखता है। एक और अनुभवी मरियप्पन थांगवेलु (ऊंची कूद) ने भी रजत पदक जीता। सुंदर सिंह गुर्जर भी झाझरिया के बाद तीसरे स्थान पर रहे। टेबल टेनिस में भाविनाबेन पटेल ने क्लास 4 में रजत पदक दिलाया जिससे देश के पदकों का खाता खुला था। तीरंदाजी में एकमात्र पदक हरविंदर सिंह ने कांस्य पदक के रूप में जीता।=
- नयी दिल्ली। भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल और बी साई प्रणीत डेनमार्क में नौ से 17 अक्टूबर के बीच होने वाले थॉमस और उबर कप में भारत की महिला और पुरुष टीमों की अगुवाई करेंगे। भारतीय बैडमिंटन संघ (बाइ) ने रविवार को सुदीरमन कप के लिये भी 12 सदस्यीय भारतीय टीम घोषित की।थॉमस और उबर कप के लिये साइना के साथ एकल में मालविका बंसौड़, अदिति भट्ट और तनसीम मीर को शामिल किया है। महिलाओं की 10 सदस्यीय टीम में तीन युगल जोड़ियां हैं जिनमें तनिषा क्रैस्टो और रुतुपर्णा पांडा भी शामिल हैं। पुरुषों की 10 सदस्यीय टीम में चार एकल खिलाड़ी और तीन युगल जोड़ियां हैं। एकल में प्रणीत के अलावा किदाम्बी श्रीकांत और ट्रायल्स में शीर्ष पर रहे दो खिलाड़ी किरण जार्ज और समीर वर्मा शामिल हैं। युगल में चिराग शेट्टी और सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी के अलावा ट्रायल्स में शीर्ष पर रही दो अन्य जोड़ियों को चुना गया है। दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पी वी सिंधू को टीम में शामिल नहीं किया गया है क्योंकि वह ओलंपिक के बाद कुछ समय के लिये विश्राम लेना चाहती हैं। थॉमस कप में भारतीय टीम को ग्रुप सी में मौजूदा चैंपियन चीन के साथ रखा गया है। ग्रुप की दो अन्य टीमें नीदरलैंड और ताहिती हैं। महिला टीम को उबर कप के लिये थाईलैंड, स्पेन और स्कॉटलैंड के साथ ग्रुप बी में रखा गया है। सुदीरमन कप के लिये 12 सदस्यीय टीम में श्रीकांत, प्रणीत के अलावा युगल में सात्विक और चिराग के साथ ध्रुव कपिला और एमआर अर्जुन की जोड़ी को भी शामिल किया गया है। महिलाओं में तनिषा और रुतुपर्णा के साथ अश्विनी पोनप्पा और एन सिक्की रेड्डी की जोड़ी को टीम में लिया गया है। एकल में बंसौड़ और भट्ट को टीम में जगह मिली है।
- तोक्यो। 24 अगस्त से शुरू हुए पैरालिम्पिक खेल रविवार जापान की राजधानी तोक्यो के ओलंपिक स्टेडियम में रंगारंग कार्यक्रम के साथ सम्पन्न हो गए।पेरिस में होने वाले अगले पैरालिंपिक में नया इतिहास रचने की उम्मीदों के साथ खिलाडिय़ों ने तोक्यो पैरालंपिक को अलविदा कहा। समापन समारोह का आयोजन कोविड प्रोटोकॉल के साथ सादगी से किया गया। समारोह की शुरुआत खेलों की झलकियों के साथ हुई और फिर संगीत और नृत्य की प्रस्तुति हुई। समापन समारोह में संदेश दिया गया कि तोक्यो एक ऐसा शहर है, जहां मतभेद चमकते हैं। समारोह में सबसे पहले कोविड महामारी के दौरान स्वास्थ्य सेवा से जुड़े स्वास्थ्य कर्मियों को सम्मान देने के लिए तैराकी के खिलाडिय़ों और नर्सों ने जापान के ध्वज के साथ स्ट़ेडियम में प्रवेश किया। इस दौरान स्टेडियम वायलन की मधुर ध्वनि से गूंज उठा। साथ ही दृष्टिबाधित बैंड वादकों ने मधुर धुन छेड़ी और पूरा स्टेडियम पूरा स्टेडियम संगीतमय हो गया। समारोह में भारत की ओर से 11 खिलाडिय़ों ने हिस्सा लिया। इन खेलों में 163 देशों के लगभग 4500 खिलाड़ी ने 22 खेलों की 540 स्पर्धाओं में अपनी चुनौती पेश की। बैडमिंटन को पहली बार पैरालिंपिक में शामिल किया गया था। भारत के 7 खिलाडिय़ों ने अलग-अलग वर्गों में भाग लिया और चार पदक अपने नाम किए। प्रमोद भगत और कृष्णा नागर ने स्वर्ण जबकि सुहास यथिराज ने रजत और मनोज सरकार ने कांस्य पदक जीता। इन खेलों में भारत ने पांच स्वर्ण, आठ रजत और छह कांस्य पदक सहित कुल 19 पदक जीते हैं।---
- तोक्यो। मौजूदा विश्व चैम्पियन प्रमोद भगत ने शनिवार को यहां पुरूष एकल एसएल3 वर्ग में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीता जबकि मनोज सरकार ने कांस्य पदक अपने नाम किया जिससे भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन कर तोक्यो पैरालंपिक खेलों में देश को पदक दिलाना जारी रखा। दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी भगत ने फाइनल में ब्रिटेन के डेनियल बेथेल को हराया जबकि सरकार ने तीसरे स्थान के प्लेऑफ में जापान के दाइसुके फुजीहारा को मात दी। दोनों ही खिलाड़ियों ने सीधे गेम में जीत दर्ज की। एसएल3 वर्ग में उन खिलाड़ियों को हिस्सा लेने की अनुमति होती है जिनके पैर में विकार हो।बैडमिंटन इस साल पैरालंपिक खेलों में पदार्पण कर रहा है। दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी भगत इस तरह खेल में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय बन गये। शीर्ष वरीय भारतीय और एशियाई चैम्पियन भगत ने योयोगी नेशनल स्टेडियम में 45 मिनट तक चले रोमांचक फाइनल में दूसरे वरीय बेथेल को 21-14 21-17 से मात दी। तोक्यो खेलों में भारत को चौथा स्वर्ण पदक दिलाने के बाद भगत ने कहा, ‘‘यह मेरे लिये बहुत विशेष है, मेरा सपना सच हो गया। बेथेल ने बहुत कोशिश की लेकिन मैं संयमित रहा और अपना बेहतर खेल दिखाया। '' उन्होंने कहा, ‘‘मैं इस पदक को अपने माता-पिता और हर उस व्यक्ति को समर्पित करना चाहूंगा जिसने मेरा समर्थन किया। मैं खुश हूं कि मैं भारत को गौरवान्वित कर सका। '' भगत ने अपने प्रतिद्वद्वी के बारे में कहा, ‘‘मैं दो साल पहले जापान में इन्हीं प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ खेला था और हार गया था। वो मेरे लिये सीखने का मौका था। आज मैं उसी स्टेडियम में हूं और वही माहौल है लेकिन मैंने जीतने की रणनीति निकाली। '' भुवनेश्वर का 33 साल का यह खिलाड़ी अभी मिश्रित युगल एसएल3-एसयू5 वर्ग में कांस्य पदक की दौड़ में बना हुआ है। भगत और उनकी जोड़ीदार पलक कोहली रविवार को कांस्य पदक के प्लेऑफ में जापान के दाईसुके फुजीहारा और अकिको सुगिनो की जोड़ी से भिड़ेंगे। एसएल3-एसयू5 वर्ग में भगत और पलक की जोड़ी को सेमीफाइनल में इंडोनेशिया की हैरी सुसांतो एवं लीएनी रात्रि आकतिला से 3 - 21, 15 - 21 से हार का सामना करा पड़ा। चार वर्ष की उम्र में पोलियो के कारण उनका बायां पैर विकृत हो गया था । उन्होंने विश्व चैम्पियनशिप में चार स्वर्ण समेत 45 अंतरराष्ट्रीय पदक जीते हैं । बीडब्ल्यूएफ विश्व चैम्पियनशिप में पिछले आठ साल में उन्होंने दो स्वर्ण और एक रजत जीते । 2018 पैरा एशियाई खेलों में उन्होंने एक स्वर्ण और एक कांस्य जीता । वर्ष 2019 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार और बीजू पटनायक पुरस्कार से नवाजा गया।वहीं 31 वर्षीय सरकार जब एक साल के थे तो पोलियो से ग्रस्त हो गये थे। उन्होंने फुजीहारा के खिलाफ शानदार जज्बा दिखाते हुए 22-20 21-13 से जीत हासिल की। पुरूष एकल की एसएल3 वर्ग के सेमीफाइनल में वह ब्रिटेन के बेथेल से 8-21 10-21 से हार गये थे।लेकिन उन्होंने हार के बाद वापसी करते हुए कांसा अपने नाम किया।सरकार ने पांच साल की उम्र में बैडमिंटन खेलना शुरू किया था लेकिन अपने बड़े भाईयों के खिलाफ जीत के बाद ही वह इस खेल के प्रति जुनूनी हुए जिसके बाद उन्होंने गंभीरता से खेलना शुरू किया। वह सक्षम खिलाड़ियों के खिलाफ अंतर स्कूल प्रतिस्पर्धा में खेले जिसके बाद उन्होंने 2011 में पैरा बैडमिंटन में खेलना शुरू किया। उन्होंने बीजिंग में 2016 एशियाई चैम्पियनशिप के एसएल3 एकल में स्वर्ण पदक जीता था। 2018 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार मिला। स्वर्ण पदक के मैच में भगत ने शुरू में बढ़त गंवा दी थी लेकिन जल्द ही वापसी करते हुए वह 8-6 से आगे हो गये। बेथेल अपने प्रतिद्वंद्वी की गलतियों का इंतजार कर रहे थे लेकिन ब्रेक तक भारतीय खिलाड़ी 11-8 से आगे था। फिर भगत ने 15-9 की बढ़त बना ली, हालांकि कुछ अंक भी गंवाये लेकिन छह गेम प्वाइंट जीत लिये। भगत ने आक्रामक रिटर्न से पहला गेम जीत लिया। दूसरे गेम में बेथेल ने 11-4 की बढ़त बना ली थी लेकिन भगत ने शानदार वापसी कर अगले सात में से छह अंक जुटाकर बेथेल की बढ़त कम की। वह 10-12 से पीछे थे लेकिन जल्द ही उन्होंने पासा पलट दिया और 16-15 से आगे हो लिये। विपक्षी खिलाड़ी की गलती से भगत की बढ़त 18-16 की हो गयी और लगातार आक्रामक स्मैश से उन्होंने तीन मैच प्वाइंट जुटाये। बेथेल की एक और गलती के साथ ही भगत ने रैकेट गिराकर अपने कोच गौरव खन्ना को गले लगाया और स्वर्ण का जश्न मनाया। भारत को अभी और पदक मिलने है जिसमें सुहास यथिराज एसएल4 और कृष्णा नागर एसएच6 क्लास के पुरूष एकल फाइनल में पहुंच चुके हैं। तरूण ढिल्लों को सेमीफाइनल में पराजय का सामना करना पड़ा जिससे वह कांस्य पदक की दौड़ में शामिल हैं।एसएल4 क्लास में सुहास ने इंडोनेशिया के फ्रेडी सेतियावान को 31 मिनट में 21 . 9, 21 . 15 से हराया । अब उनका सामना शीर्ष वरीयता प्राप्त फ्रांस के लुकास माजूर से होगा । कर्नाटक के 38 वर्ष के सुहास के टखनों में विकार है । कोर्ट के भीतर और बाहर कई उपलब्धियां हासिल कर चुके सुहास कम्प्यूटर इंजीनियर है और प्रशासनिक अधिकारी भी । वह 2020 से नोएडा के जिला मजिस्ट्रेट हैं और कोरोना महामारी के खिलाफ जंग में मोर्चे से अगुवाई कर चुके हैं । उन्होंने 2017 में बीडब्ल्यूएफ तुर्की पैरा बैडमिंटन चैम्पियनशिप में पुरूष एकल और युगल स्वर्ण जीता । इसके अलावा 2016 एशिया चैम्पियनशिप में स्वर्ण और 2018 पैरा एशियाई खेलों में कांस्य पदक हासिल किया । दूसरी वरीयता प्राप्त नागर ने ब्रिटेन की क्रिस्टीन कूम्ब्स को एसएच6 क्लास सेमीफाइनल में 21 . 10, 21 . 11 से हराया । अब उनका सामना हांगकांग की चु मान केइ से होगा । बाईस वर्ष के नागर ने चार साल पहले ही खेलना शुरू किया । उन्होंने पैरा एशियाई खेलों में रजत और विश्व चैम्पियनशिप 2019 में एकल में कांस्य और युगल में रजत पदक जीता था । दूसरे एसएल4 सेमीफाइनल में माजूर ने दूसरी वरीयता प्राप्त भारतीय खिलाड़ी ढिल्लों को करीबी मुकाबले में 21 . 16, 16 . 21, 21 . 18 से हराया । हिसार के 27 वर्ष के ढिल्लों का सामना कांस्य पदक के लिये सेतियावान से होगा ।
- फ्लमसरबर्ग। भारतीय गोल्फर अमनदीप द्राल ने आखिरी के छह होल में तीन बर्डी लगाकर एक अंडर 71 का कार्ड खेला जिससे वह फ्लमसरबर्ग लेडीज ओपन में संयुक्त रूप से चौथे स्थान पर रही। ‘लेडीज़ यूरोपियन टूर एक्सेस सीरीज (एलईटीएएस)' के तहत खेली गयी प्रतियोगिता में उन्होंने शुरुआती दो दौर में 70 और 69 का कार्ड खेला था जिससे उनका कुल स्कोर छह अंडर 210 का रहा। प्रतियोगिता में भाग ले रही अन्य भारतीयों में वाणी कपूर ने तीसरे और आखिरी दौर में पार 72 का कार्ड खेला और वह दो अंडर 214 के स्कोर के साथ संयुक्त रूप से 16वें स्थान पर रही। एलईटीएएस में पहली बार खेल रही दुर्गा निट्टूर (72) सात ओवर 223 के स्कोर के साथ संयुक्त 54वें जबकि अश्मिता सतीश (77) संयुक्त 58वें स्थान पर रही।
- मांट्रियल। मैक्सिको की महिला मुक्केबाज जीनत जकारियास जापाटा की यहां प्रतियोगिता के दौरान चोटिल होने के पांच दिन बाद मौत हो गई। मुक्केबाजी प्रतियोगिता का आयोजन करने वाली कंपनी ग्रुप यवोन मिशेल ने गुरुवार को कहा कि 18 वर्षीय जापाटा की शनिवार रात आईजीए स्टेडियम में मैरी-पियर होले के साथ एक मुकाबले में लगी चोटों से मृत्यु हो गई।जापाटा को मुकाबले के दौरान कई बार तेज मुक्कों का सामना करना पड़ा, इसके बाद विरोधी खिलाड़ी के अपरकट पंच से उनका माउथगार्ड बाहर निकल गया और फिर चौथे दौर की घंटी बजने के बाद वह अपने कॉर्नर पर नहीं आ सकी। इसके बाद उन्हें रिंग में लिटाया गया और चिकित्सयीय टीम ने उन्हें स्ट्रेचर पर निकालकर एम्बुलेंस में अस्पताल पहुंचाया। प्रतियोगिता संचालन करने वाली कंपनी के अध्यक्ष यवोन मिशेल ने रविवार को बताया था कि जापाटा होश में नहीं है और उसके शरीर और मस्तिष्क को आराम देने के लिए चिकित्सकीय रूप से कोमा में रखा गया है।
- तोक्यो। भारत के प्रवीण कुमार ने शुक्रवार को यहां तोक्यो पैरालंपिक में पुरूषों की ऊंची कूद टी 64 स्पर्धा का रजत पदक जीता जिससे देश ने इन खेलों में 11 पदक अपने नाम कर लिये हैं। अठारह वर्षीय कुमार ने पैरालंपिक में पदार्पण करते हुए 2.07 मीटर की कूद से एशियाई रिकार्ड के साथ दूसरा स्थान हासिल किया।वह ब्रिटेन के जोनाथन ब्रूम एडवड्र्स के पीछे रहे जिन्होंने 2.10 मीटर की कूद से सत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीता। कुमार ने अपने शानदार प्रदर्शन के बाद कहा, मैं बयां नहीं कर सकता कि मैं कैसा महसूस कर रहा हूं। यह कूद शानदार थी। यह मेरे पहले पैरालंपिक खेल हैं और आगे क्या होता देखते हैं। यह कुमार का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी है और 2019 में खेल में आने के बाद पहला बड़ा पदक भी है। नोएडा के निवासी कुमार यहां भारतीय दल के सबसे युवा पदक विजेता भी बन गये हैं। उन्होंने कहा, जब मैंने दो मीटर की कूद लगायी तो मेरा आत्मविश्वास काफी बढ़ गया क्योंकि इससे पहले यह थोड़ी कम थी। लेकिन इसके बाद मैंने दो मीटर से ऊपर की कूद लगायी।
- तोक्यो। निशानेबाज अवनि लेखरा ने शुक्रवार को यहां तोक्यो खेलों की 50 मीटर राइफल थ्री पॉजिशन एसएच1 स्पर्धा का कांस्य पदक हासिल किया जिससे वह दो पैरालंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बन गयीं। खेलों में पदार्पण करने वाली लेखरा इससे पहले 10 मीटर एयर राइफल स्टैडिंग एसएच1 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनी थीं। यह भारत का निशानेबाजी में भी पहला ही पदक था।उन्नीस साल की लेखरा ने 50 मीटर राइफल थ्री पॉजिशन एसएच1 स्पर्धा में 1176 के स्कोर से दूसरे स्थान पर रहकर फाइनल के लिये क्वालीफाई किया था जिसमें 51 इनर 10 (10 अंक के 51 निशाने) शामिल थे। फाइनल काफी कड़ा मुकाबला रहा जिसमें लेखरा ने कुल 445.9 अंक का स्कोर बनाया और वह यूक्रेन की इरिना श्चेटनिक से आगे रहकर पदक हासिल करने में सफल रहीं। वहीं यूक्रेन की निशानेबाज एलिमिनेशन में खराब शॉट से पदक से चूक गयीं। उन्होंने कहा, यह मुश्किल फाइनल था लेकिन मैं खुश हूं कि कांस्य पदक जीत सकी। मैं इससे भी बेहतर कर सकती थी। फाइनल का आप पर ऐसा ही असर होता है। उन्होंने कहा, अपने पहले पैरालंपिक खेलों में दो पदक जीतने का अनुभव शानदार है। ये दोनों मेरी पसंदीदा स्पर्धायें हैं। मैं इन दोनों के लिये काफी महीनों से कड़ी मेहनत कर रही थी। मैंने अंतिम शॉट में अपना शत प्रतिशत दिया।अवनि ने अपने स्वर्ण पदक के जश्न का जिक्र करते हुए कहा, ऐसी बहुत सारी चीजें हैं जिस पर मुझे काम करना है और मैं निश्चित रूप से अगली बार इससे भी बेहतर करूंगी। काफी ध्यान भटकाने वाली चीजें रहीं लेकिन मैंने अपना शत प्रतिशत दिया।जयपुर की इस निशानेबाज के 2012 में हुई कार दुर्घटना में रीढ़ की हड्डी में चोट लग गयी थी, उन्होंने 10 मीटर एयर राइफल स्टैडिंग एसएच1 स्पर्धा में 249.6 के विश्व रिकार्ड की बराबरी कर पैरालंपिक का नया रिकॉर्ड बनाया था। उनसे पहले जोगिंदर सिंह सोढ़ी खेलों के एक ही चरण में कई पदक जीतने वाले पहले भारतीय थे। उन्होंने 1984 पैरालंपिक में एक रजत और दो कांस्य पदक जीते थे। उनका रजत पदक गोला फेंक में जबकि दो कांस्य पदक चक्का फेंक और भाला फेंक में मिले थे। भाला फेंक एथलीट देवेंद्र झाझरिया ने भी पैरालंपिक में तीन पदक (दो स्वर्ण और एक रजत) जीते हैं लेकिन उनके सभी पदक खेलों के विभिन्न चरण में मिले हैं। शुक्रवार की स्पर्धा का स्वर्ण पदक चीन की झांग कुईपिंग ने 457.9 अंक से खेलों के नये रिकार्ड के साथ हासिल किया जबकि जर्मनी की नताशा हिल्ट्रोप ने 457.1 अंक से रजत पदक हासिल किया।एचएच1 राइफल स्पर्धा में खिलाडिय़ों के पैरों में विकार होता है जिसमें उनका पैर काटना पड़ा हो या फिर नीचे के अंग में पक्षाघात हो गया। कुछ खिलाड़ी बैठकर जबकि कुछ खड़े होकर हिस्सा लेते हैं। लेखरा अब मिश्रित 50 मीटर राइफल प्रोन एसएच1 स्पर्धा में दीपक और सिद्धार्थ बाबू के साथ हिस्सा लेती हुई नजर आयेंगी। पुरूषों की 50 मीटर राइफल थ्री पी स्पर्धा में दीपक फाइनल के लिये क्वालीफाई करने में असफल रहे। वह 1114 के स्कोर से 18वें स्थान पर रहे। लेखरा के कांस्य से भारत के पदकों की संख्या 12 हो गयी है। देश ने अभी तक दो स्वर्ण, छह रजत और चार कांस्य पदक जीते हैं जो अभूतपूर्व और उल्लेखनीय प्रदर्शन है क्योंकि इससे पहले भारत ने पिछले सभी खेलों में मिलाकर 12 पदक जीते थे।
- जेंडवूर्ट (नीदरलैंड)। फिनलैंड के फार्मूला वन ड्राइवर किमी राइकोनेन मौजूदा एफवन सत्र के बाद संन्यास लेंगे। इसके साथ ही ‘आइसमैन' के नाम से मशहूर राइकोनेन के दो दशक लंबे करियर का अंत होगा। वह 2007 में विश्व चैंपियन बने थे। राइकोनेन का अल्फा रोमियो टीम के साथ अनुबंध इस साल खत्म हो रहा है। उन्होंने बुधवार को इंस्टाग्राम पर संन्यास लेने की जानकारी दी। राइकोनेन ने लिखा, ‘‘बस हो गया। यह फार्मूला वन में मेरा आखिरी सत्र होगा। मैंने पिछली सर्दियों में यह फैसला किया था। यह आसान फैसला नहीं था लेकिन इस सत्र के बाद नई चीजों का समय होगा।'
- तोक्यो। भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ियों सुहास यथिराज, तरूण ढिल्लों और कृष्ण नागर ने गुरुवार को यहां तोक्यो पैरालंपिक की बैडमिंटन स्पर्धा के पुरुष एकल में अपने अभियान की शुरुआत जीत के साथ की। सुहास और तरूण ने एसएल4 वर्ग में क्रमश: जर्मनी के येन निकलास पोट और थाईलैंड के सिरीपोंग तेमारोम के खिलाफ आसान जीत दर्ज की जबकि दूसरे वरीय नागर ने एसएच6 वर्ग में मलेशिया के तारेशॉ दिदिन को हराया। युवा पलक कोहली ने ग्रुप ए में महिला एकल के अपने दूसरे मैच में तुर्की की जेहरा बगलार को शिकस्त दी।पुरुष एकल के ग्रुप ए के एकतरफा मुकाबले में 38 साल के सुहास ने सिर्फ 19 मिनट में पोट को 21-9 21-3 से हराया। ग्रुप बी में 27 साल के तरूण को भी अधिक पसीना नहीं बहाना पड़ा और वह तेमारोम को सिर्फ 23 मिनट में 21-7 21-13 से हराने में सफल रहे। नागर ने ग्रुप बी में कड़े मुकाबले में दिदिन को 33 मिनट में 22-20 21-10 से हराया।अगले मुकाबले में सुहास का सामना शुक्रवार को इंडोनेशिया के हैरी सुसांतो और फिर फ्रांस के शीर्ष वरीय लुकास माजुर से होगा जबकि तरूण को कोरिया के शिन क्युंग ह्वान और इंडोनेशिया के फ्रेडी सेतियावान से भिड़ना है। बाइस साल के नागर शुक्रवार को ब्राजील के विटोर गोंजालवेज तवारेज से भिड़ेंगे।सुहास के एक टखने में समस्या है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले के जिला मजिस्ट्रेट के रूप में कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में अहम भूमिका निभाई है। दूसरी तरफ तरूण को आठ साल की उम्र में फुटबॉल खेलते हुए घुटने में गंभीर चोट लगी थी जिससे उनके घुटने की मूवमेंट प्रभावित हुई। वह अभी दुनिया के दूसरे नंबर के खिलाड़ी और दो बार के पूर्व विश्व चैंपियन हैं। नागर की लंबाई सामान्य से कम है और वह एसएच6 वर्ग में दुनिया के दूसरे नंबर के खिलाड़ी हैं।महिला एकल एसयू5 वर्ग में पलक ने जेहरा को 27 मिनट में 21-12 21-18 से हराया। भारतीय खिलाड़ी को अपने पहले मुकाबले में जापान की अयाको सुजूकी के खिलाफ शिकस्त झेलनी पड़ी थी। इससे पहले सुबह के सत्र में 19 साल की पलक और पारूल परमार की जोड़ी को एसएल3-एसयू5 वर्ग के ग्रुप बी के महिला युगल मुकाबले में चेंग हेफांग और मा हुईहुई की चीन की दूसरी वरीय जोड़ी के खिलाफ 7-21 5-21 से हार का सामना करना पड़ा। भारतीय जोड़ी का सामना शुक्रवार को लेनेग मोरिन और फॉस्टीन नोएल की फ्रांस की जोड़ी से होगा।एसएल3 वर्ग में चुनौती पेश करने वाली 48 साल की पारूल महिला एकल के ग्रुप डी में चीन की चेंग हेफांग को कोई चुनौती नहीं दे पाई और 18 मिनट में 8-21 2-21 से हार गई। उन्हें आज ही जर्मनी की कैटरिन सीबर्ट का सामना करना है। सुहास ने कहा कि वह शुक्रवार को शीर्ष वरीय और खिताब के प्रबल दावेदार माजुर के खिलाफ मुकाबले को लेकर उत्साहित हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हम दोनों इस मुकाबले को लेकर उत्साहित हैं। पैरालंपिक से पहले टूर्नामेंटों के हमारे बीच कड़ी टक्कर रही थी और मैंने उसके खिलाफ कुछ मुकाबले गंवाए और कुछ में जीत दर्ज की। यह अच्छी चुनौती होगी।'' सुहास ने कहा, ‘‘उसकी लंबाई के कारण कुछ शॉट ऐसे होते हैं जिसके आप आदी नहीं हैं लेकिन मैंने विशेष तौर पर इसकी ट्रेनिंग की है। मुझे यकीन है कि उसने भी मुझे ध्यान में रखते हुए ट्रेनिंग की होगी।'' उन्होंने कहा, ‘‘मेरे कोच कुर्सी पर बैठ जाते थे। मुझे मूवमेंट करनी होती थी। मेरे कोच पहले एक जगह और फिर दूरी जगह शटल फेंकते थे। वास्तविक मैच अलग होता है लेकिन आप उपलब्ध चीजों के साथ ही सर्वश्रेष्ठ तैयारी कर सकते हो।
- दुबई। सलामी बल्लेबाज रोहित शर्मा बुधवार को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद की नवीनतम टेस्ट खिलाड़ी रैंकिंग में अपने कप्तान विराट कोहली को पछाड़कर भारत के शीर्ष रैंकिंग वाले बल्लेबाज बन गए। रोहित ने तीसरे टेस्ट में 19 और 59 रन की पारी खेली जिससे वह एक स्थान के फायदे से करियर के सर्वश्रेष्ठ पांचवें स्थान पर पहुंच गए। उनके कुल 773 रेटिंग अंक हैं जो कोहली से सात अधिक हैं।कोहली भारतीय बल्लेबाजों के बीच पिछली बार नवंबर 2017 में आईसीसी रैंकिंग में शीर्ष पर नहीं थे। तब चेतेश्वर पुजारा दूसरे और वह पांचवें स्थान पर थे। पुजारा इंग्लैंड के खिलाफ हैडिंग्ले में तीसरे टेस्ट की दूसरी पारी में 91 रन बनाकर तीन स्थान के फायदे से 15वें स्थान पर पहुंच गए हैं। ऋषभ पंत चार स्थान के नुकसान के बावजूद 12वें स्थान पर चल रहे हैं।भारतीय तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह भी गेंदबाजों की सूची में एक स्थान के फायदे से नौवें स्थान पर हैं। स्पिनर रविचंद्रन अश्विन आस्ट्रेलिया के पैट कमिंस के बाद दूसरे स्थान पर बरकरार हैं। रविंद्र जडेजा और अश्विन ने टेस्ट आलराउंडरों की सूची में भी अपना तीसरा और चौथा स्थान बरकरार रखा है। वेस्टइंडीज के जेसन होल्डर इस सूची में शीर्ष पर हैं। इंग्लैंड के कप्तान जो रूट ने भारत के खिलाफ मौजूदा विश्व टेस्ट चैंपियनशिप श्रृंखला में शानदार प्रदर्शन की बदौलत लगभग छह साल बाद एक बार फिर बल्लेबाजी रैंकिंग में शीर्ष पर पहुंच गए हैं। तीस साल के रूट ने श्रृंखला की शुरुआत पांचवें स्थान से की थी लेकिन तीन टेस्ट में 507 रन बनाकर वह कोहली, मार्नस लाबुशेन, स्टीव स्मिथ और न्यूजीलैंड के कप्तान केन विलियमसन को पछाड़कर शीर्ष पर पहुंचने में सफल रहे। उन्होंने अब विलियमसन पर 15 अंक की बढ़त बना ली है।लीड्स टेस्ट से पहले रूट दूसरे स्थान पर थे। लीड्स में इंग्लैंड की एकमात्र पारी में उन्होंने 121 रन बनाए। रूट ने पिछली बार दिसंबर 2015 में शीर्ष स्थान हासिल किया था और तब विलियमसन ने उन्हें पछाड़ा था। इसके बाद स्मिथ और कोहली भी रैंकिंग में शीर्ष पर पहुंचे। इन चारों के अलावा पिछली बार बल्लेबाजी रैंकिंग में दक्षिण अफ्रीका के एबी डिविलियर्स नवंबर 2015 में शीर्ष पर पहुंचे थे।रूट अब अपने करियर के सर्वश्रेष्ठ 917 रेटिंग अंक से सिर्फ एक अंक पीछे हैं। उन्होंने अगस्त 2015 में नॉटिंघम में आस्ट्रेलिया के खिलाफ 130 रन बनाकर इस आंकड़े को छुआ था। सप्ताहिक रैंकिंग में इंग्लैंड के बल्लेबाजों में सलामी बल्लेबाज रोरी बन्र्स (पांच स्थान के फायदे से 24वें स्थान पर) और जॉनी बेयारस्टो (दो स्थान के फायदे से 70वें स्थान पर) को भी फायदा हुआ है जबकि डेविड मलान ने 70 रन की पारी खेलकर रैंकिंग में 88वें स्थान पर पुन: प्रवेश किया है। गेंदबाजों में इंग्लैंड के अनुभवी तेज गेंदबाज जेम्स एंडरसन ने शीर्ष पांच में वापसी की है। मैन आफ द मैच ओली रोबिनसन मैच में सात विकेट चटकाने के बाद नौ स्थान के फायदे से 36वें पायदान पर हैं। क्रेग ओवरटन ने दोनों पारियों में तीन विकेट की बदौलत रैंकिंग में 73वें स्थान पर पुन: प्रवेश किया है। पुरुष टी20 अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में आयरलैंड के पॉल स्टर्लिंग जिंबाब्वे के खिलाफ 24 और 37 रन की पारियों के साथ एक स्थान के फायदे से 23वें स्थान पर हैं। केविन ओब्रायन डबलिन में दो मैचों में 25 और 60 रन बनाकर 42वें से 39वें स्थान पर पहुंच गए हैं। जिंबाब्वे के तेंडाई चेतारा गेंदबाजों की सूची में पांच स्थान के फायदे से 99वें स्थान पर हैं।
- जोहानिसबर्ग। अपनी स्विंग लेती गेंदों और स्टीक यॉर्कर के लिए पहचाने जाने वाले दक्षिण अफ्रीका के दिग्गज तेज गेंदबाज डेल स्टेन ने मंगलवार को क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास की घोषणा की। इसके साथ ही स्टेन के शानदार क्रिकेट करियर का अंत हो गया जिसमें उन्होंने दुनिया के कुछ सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों को कड़ी चुनौती दी । स्टेन ने ट्विटर पर संन्यास की घोषणा की। इस 38 साल के तेज गेंदबाज ने अपने 17 साल लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर के दौरान दक्षिण अफ्रीका के लिए 93 टेस्ट, 125 एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय और 47 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले जिसमें उन्होंने क्रमश: 439, 196 और 64 विकेट चटकाए। स्टेन ने लिखा, ‘‘आज मैं औपचारिक रूप से उस खेल से संन्यास लेता हूं जिससे मैं सबसे अधिक प्यार करता हूं। सभी को धन्यवाद, परिवार से लेकर टीम के साथियों, पत्रकारों से लेकर प्रशंसकों तक, यह एक साथ शानदार सफर रहा।'' स्टेन ने संन्यास लेने की घोषणा करने वाले अपने पत्र में अमेरिका के रॉक बैंड ‘काउंटिंग क्रोज' के गाने का जिक्र करते हुए अपनी भावनाओं को उजागर किया। इस तेज गेंदबाज ने लिखा, ‘‘यह ट्रेनिंग, मैच, यात्रा, जीत, हार, उपलब्धियों, थकान, खुशी और भाईचारे के 20 साल रहे। बताने के लिए काफी यादगार पल हैं। कई लोगों को धन्यवाद देना है। इसलिए इसे मैं विशेषज्ञों पर छोड़ देता हूं, मेरा पसंदीदा बैंड, काउंटिंग क्रोज।'' सीमित ओवरों के प्रारूप में करियर को लंबा खींचने के लक्ष्य के साथ 2019 में टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कहने वाले स्टेन ने अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला फरवरी 2020 में आस्ट्रेलिया के खिलाफ टी20 मैच के रूप में खेला था। पिछले कुछ वर्षों में स्टेन लगातार चोटों से परेशान रहे। नवंबर 2016 में दक्षिण अफ्रीका के आस्ट्रेलिया दौरे के दौरान कंधे की चोट से उनका करियर प्रभावित हुआ। इस तेज गेंदबाज को 2019 विश्व कप के लिए दक्षिण अफ्रीका की टीम में शामिल किया गया था लेकिन कंधे की समस्या के कारण उन्हें बिना कोई मैच खेले हटना पड़ा। पिछले साल उन्होंने आईसीसी टी20 विश्व कप में खेलने का लक्ष्य बनाया था लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इसे स्थगित कर दिया गया। वह इसके बाद टी20 फ्रेंचाइजी लीग में खेले जिसमें इस साल मार्च में पाकिस्तान सुपर लीग भी शामिल है। वह आईपीएल से भी हट गए थे लेकिन उन्होंने कहा था कि वह संन्यास नहीं ले रहे। उन्होंने हालांकि मंगलवार को ‘ए लांग दिसंबर' की पंक्तियों का जिक्र करते हुए अपने करियर को खत्म किया। नार्दर्न के लिए प्रथम श्रेणी मुकाबले के साथ 2003 में अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत करने वाले स्टेन ने इसके अगले साल पोर्ट एलिजाबेथ में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट पदार्पण किया। स्टेन ने 2005 में सेंचुरियन में एशियाई एकादश के खिलाफ अफ्रीका एकादश की ओर से एक दिवसीय पदार्पण किया। उन्होंने 2013 में पोर्ट एलिजाबेथ में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 39 रन देकर छह विकेट चटकाए। स्टेन ने 2007 में न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 अंतरराष्ट्रीय पदार्पण किया और वेस्टइंडीज के खिलाफ अपने दूसरे मैच में करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए नौ रन देकर चार विकेट चटकाए। उन्होंने 2019 में श्रीलंका के खिलाफ अपना आखिरी एक दिवसीय मुकाबला खेला जबकि पिछले साल फरवरी में आस्ट्रेलिया के खिलाफ टी20 मैच उनका आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच रहा।
- नयी दिल्ली। विनेश फोगाट की मुश्किलें थमती नजर नहीं आ रही जिन्होंने कुश्ती विश्व चैम्पियनशिप के लिये ट्रायल बीच में ही छोड़ दिया जबकि उनकी चचेरी बहन संगीता (62 किलो) ने तीन साल बाद शानदार वापसी करते हुए भारतीय टीम में जगह बनाई । इस महीने की शुरूआत में अनुशासनात्मक कारणों से भारतीय कुश्ती महासंघ का निलंबन झेलने वाली विनेश को बाद में चेतावनी देकर छोड़ दिया गया था । ट्रायल में सभी की नजरें उन पर थी लेकिन वह शुरू ही से कमजोर नजर आई । भारत की सबसे कामयाब महिला पहलवान विनेश ने 55 किलोवर्ग के पहले मुकाबले में अंजू को 10 . 5 से हराया लेकिन वह फॉर्म में नहीं दिखी । इसके बाद पिंकी के खिलाफ वह मैट पर उतरी ही नहीं जिससे दो से 10 अक्टूबर तक होने वाली चैम्पियनशिप में पिंकी को टीम में जगह मिली । विनेश ने कहा ,‘‘ मुझे नहीं पता कि मुझे क्या हो गया है। चोट नहीं है लेकिन मुझे चक्कर आ रहे थे । मेरा शरीर पहले जैसा नहीं है । मैं डॉक्टर को दिखा रही हूं । शायद कोरोना संक्रमण का शरीर पर असर हुआ है ।' विनेश ने पहले भी कहा था कि तोक्यो ओलंपिक क्वार्टर फाइनल में उन्हें कुछ सूझ नहीं पड़ रहा था । वह मुस्कुरा रही थी लेकिन अपनी निराशा छिपा नहीं सकी । ओलंपिक कांस्य पदक विजेता बजरंग पूनिया की पत्नी संगीता घुटने के दो आपरेशन के बाद मैट पर उतरी और शानदार जीत दर्ज की । उन्होंने जूनियर विश्व चैम्पियनशिप रजत पदक विजेता संजू देवी को तकनीकी श्रेष्ठता के आधार पर हराया और फिर मनीषा को 9 . 5 से मात दी । मुकाबले के दौरान बजरंग कोच कॉर्नर पर खड़े थे । संगीता घुटने के आपरेशन के कारण 2018 विश्व चैम्पियनशिप नहीं खेल सकी थीं । फिर 2019 में उनके बायें घुटने का भी आपरेशन हुआ । संगीता ने कहा ,‘‘ मेरे पिता (महावीर फोगाट) ने मुझे कुश्ती सिखाई और अब बजरंग प्रेरित करने के साथ सलाह देते रहते हैं ।'' इसी 62 किलो वर्ग में रियो ओलंपिक कांस्य पदक विजेता साक्षी मलिक को मनीषा ने हरा दिया ।जूनियर पहलवानों का प्रदर्शन काबिले तारीफ रहा । शुभम कौशिक ने सीनियर राष्ट्रीय चैम्पियन पंकज को 8 . 3 से हराने के बाद रेलवे के अरूण को 57 किलो ट्रायल में 8 . 4 से मात दी । यश तुषिर ने अमित धनकड़ को 74 किलो फाइनल में हराया । वहीं गौरव बालियान ने नरसिंह यादव को मात दी । पृथ्वीराज पाटिल ने 92 किलो और अनिरूद्ध गुलिया ने 125 किलो में क्वालीफाई किया । रविंदर दहिया (61 किलो), रोहित (65 किलो), सुशील (70 किलो), संदीप मान (86 किलो) और सत्यव्रत कादियान (97 किलो) भी जीत गए । महिला वर्ग में अंशु मलिक ने 57 किलोवर्ग में मानसी और ललिता को हराकर टीम में जगह बनाई । सरिता मोर (59 किलो) , दिव्या ककरान (72 किलो), हैनी (50 किलो), पूजा जाट (53 किलो), भटेरी (65 किलो) , रितु मलिक (68 किलो) और किरण (76 किलो) ने भी क्वालीफाई कर लिया । ग्रीको रोमन वर्ग में संदीप (55 किलो), ज्ञानेंदर (60 किलो), गौरव दुहान (67 किलो), साजन (77 किलो), सुनील कुमार (87 किलो), रवि (97 किलो) और नवीन कुमार (130 किलो) ने भारतीय टीम में जगह बनाई । डब्ल्यूएफआई ने चार वर्गों (पुरूषों की फ्रीस्टाइल 92 किलो, ग्रीको रोमन 63 किलो और 82 किलो और महिलाओं के 76 किलोवर्ग) में ट्रायल फिर से कराने का फैसला किया क्योकि इन वर्गों में एक एक पहलवान ही पहुंचे थे ।-
- तोक्यो । गत चैंपियन मरियप्पन थंगावेलु और शरद कुमार ने मंगलवार को यहां पुरुष ऊंची कूद टी42 स्पर्धा में क्रमश: रजत और कांस्य पदक जीते जिससे तोक्यो पैरालंपिक में भारत के पदकों की संख्या 10 तक पहुंच गई। मरियप्पन ने 1.86 मीटर के प्रयास के साथ रजत पदक अपने नाम किया जबकि अमेरिका के सैम ग्रेव ने अपने तीसरे प्रयास में 1.88 मीटर की कूद के साथ सोने का तमगा जीता। शरद ने 1.83 मीटर के प्रयास के साथ कांस्य पदक जीता। स्पर्धा में हिस्सा ले रहे तीसरे भारत और रियो 2016 पैरालंपिक के कांस्य पदक विजेता वरूण सिंह भाटी नौ प्रतिभागियों में सातवें स्थान पर रहे। वह 1.77 मीटर की कूद लगाने में नाकाम रहे। इससे पहले मंगलवार को निशानेबाज सिंहराज अडाना ने पुरुष 10 मीटर एयर पिस्टल एसएफ1 स्पर्धा में कांस्य पदक जीता। भारत ने अब तक दो स्वर्ण, पांच रजत और तीन कांस्य पदक जीते हैं।
- नयी दिल्ली। एक दिवसीय क्रिकेट में एक मैच में सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी का रिकॉर्ड बनाने वाले भारतीय आलराउंडर स्टुअर्ट बिन्नी ने सोमवार को प्रथम श्रेणी और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा की। सैंतीस वर्षीय बिन्नी ने अपने करियर की शुरुआत अपने राज्य कर्नाटक की तरफ से की। उन्होंने भारत की तरफ से छह टेस्ट, 14 वनडे और तीन टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में हिस्सा लिया। उनके पिता रोजर बिन्नी भी भारत की तरफ से खेलते थे। बिन्नी ने बयान में कहा, ‘‘मैं आपको सूचित करना चाहता हूं कि मैंने प्रथम श्रेणी और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला किया है। '' उन्होंने कहा, ‘‘अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने से मुझे बहुत खुशी मिली और मुझे इस पर गर्व है।'' बिन्नी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक रन नहीं बनाये लेकिन उन्होंने बांग्लादेश के खिलाफ जून 2014 में ढाका में खेले गये वनडे मैच में केवल चार रन देकर छह विकेट लिये थे। यह भारत की तरफ से वनडे में अब भी सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी प्रदर्शन है। उन्होंने अनिल कुंबले का रिकार्ड तोड़ा था जिन्होंने 1993 में वेस्टइंडीज के खिलाफ 12 रन देकर छह विकेट लिये थे। भारतीय क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष सौरव गांगुली और सचिव जय शाह ने बिन्नी को उनके कैरियर के लिये बधाई और भविष्य के लिये शुभकामना दी । गांगुली ने बोर्ड द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा ,‘‘ मैं स्टुअर्ट बिन्नी को भविष्य के लिये शुभकामना देता हूं । उनका कैरियर लंबा रहा है । प्रथम श्रेणी क्रिकेट अच्छे अंतरराष्ट्रीय ढांचे का आधार होता है और स्टुअर्ट का उसमें बड़ा योगदान रहा है ।'' उन्होंने कहा ,‘‘ कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ के लिये उनका योगदान स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जायेगा । '' शाह ने कहा ,‘‘स्टुअर्ट बिन्नी भारतीय क्रिकेट के सच्चे सेवक रहे हैं । उन्होंने घरेलू सर्किट पर काफी योगदान दिया ।'' बिन्नी को 95 प्रथम श्रेणी मैचों में खेलने का अनुभव भी है। पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने उन्हें कुछ टेस्ट मैचों में भी आजमाया लेकिन उन्हें विशेष सफलता नहीं मिली। इंग्लैंड के खिलाफ जुलाई 2014 में अपने पदार्पण टेस्ट मैच में उन्होंने 78 रन बनाये। यह छह टेस्ट मैचों में उनका एकमात्र अर्धशतक है। वेस्टइंडीज के खिलाफ 2016 में एक टी20 मैच में एक ओवर में 31 रन लुटाने से उनका अंतरराष्ट्रीय करियर भी समाप्त हो गया। बिन्नी ने भारतीय क्रिकेट बोर्ड, विभिन्न टीमों, साथी खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों का भी आभार व्यक्त किया जिन्होंने एक खिलाड़ी के रूप में आगे बढ़ने में उनकी मदद की।
- जयपुर। फरवरी 2012 में एक सड़क दुर्घटना के बाद अवनि के कमर के नीचे के शरीर को लकवा मार गया था। उसके बाद से तोक्यो पैरालंपिक में स्वर्ण पदक जीतने तक का उनका सफर अवसाद से निकलकर संघर्ष करने एवं दृढ़ संकल्प से आगे बढऩे की सफल कहानी बन गया है। यह सफलता की ऐसी कहानी है जिसमें उनके पिता के पास अपनी खुशी बयान करने के लिए शब्द तक कम पड़ गए हैं। अवनि ने सोमवार को तोक्यो पैरालंपिक में महिलाओं की आर-2 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग एसएच1 में पहला स्थान हासिल करके स्वर्ण पदक जीता।जयपुर की यह 19 वर्षीय निशानेबाज पैरालंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बन गयी हैं। अवनि के पिता प्रवीण लेखरा ने बेटी की सफलता पर कहा कि उनके पास अपनी खुशी व्यक्त करने के लिए शब्द नहीं हैं। प्रवीण यहां राजकीय सेवा में हैं। अवनि 20 फरवरी 2012 को एक कार दुर्घटना की शिकार हो गई थीं जब वह केवल 11 साल की थीं। इस दुर्घटना में रीढ़ की हड्डी को गहरी चोट लगी और उनके कमर के नीचे के शरीर को लकवा मार गया। उसके बाद से वह व्हीलचेयर के सहारे हैं। प्रवीण लेखरा ने कहा,'"दुर्घटना से पहले वह बहुत सक्रिय थी और हर गतिविधि में भाग लेती थी लेकिन दुर्घटना ने उसकी जिंदगी बदल दी। वह अपनी हालत पर गुस्से में थी और शायद ही किसी से बात करना चाहती थी। बदलाव के लिए, मैं उसे जयपुर के जगतपुरा में जेडीए शूटिंग रेंज में ले गया, जहां उसमें शूटिंग में रुचि पैदा हुई।'' प्रवीण ने बताया कि उन्होंने अवनि को शूटर अभिनव बिंद्रा की जीवनी भी पढऩे के लिए दी और उसे पढऩे के बाद अवनि के मन में ख्याल आया कि वह शूटिंग भी कर सकती और अप्रैल 2015 से वह लगभग नियमित रूप से शूटिंग रेंज में जाने लगीं। पिता के मुताबिक हालांकि शुरूआत में उसे व्हीलचेयर चलाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा जो कि मानदंडों के मुताबिक नहीं थी। इसके अलावा बंदूक और शूटिंग किट भी उपलब्ध नहीं थी। उन्होंने कहा, ''हालांकि, कोच ने पूरा सहयोग दिया और उसने अच्छा प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। अकरौली जिले के देवलेन गांव में भी जश्न का माहौल है। यहां के सुंदर सिंह गुर्जर ने पुरुषों के भाला फेंक की एफ46 स्पर्धा में कांस्य पदक जीता है। गुर्जर ने जयपुर के सवाई मान सिंह स्टेडियम में अपने कोच महावीर सैनी की देखरेख में अभ्यास किया और उन्होंने आज पैरालंपिक खेलों में कांस्य पदक जीता। उनके भाई हरिओम गुर्जर ने कहा कि इस उपलब्धि से पूरा गांव खुश है, हालांकि सुंदर सिंह को स्वर्ण पदक जीतने का भरोसा था लेकिन वह चूक गये। उन्होंने कहा, '' अधिकांश ग्रामीण दो स्थानों पर टीवी देखने के लिए एकत्रित हुए। एक तो उनके घर तथा दूसरा गांव का मंदिर जहां सुंदर की सफलता की कामना के लिए विशेष पूजा की जा रही थी। ''उन्होंने कहा कि ग्रामीण ने मिठाई बांटकर सुंदर सिंह की सफलता का जश्न मनाया। उन्होंने कहा, ''सुंदर शादीशुदा है और उसके दो बच्चे हैं। उनमें से एक का जन्म पिछले साल जन्माष्टमी के दिन हुआ था और इस साल जन्माष्टमी के दिन सुंदर ने देश का नाम रोशन किया है।'' गुर्जर की मां स्थानीय ग्राम पंचायत की सरपंच हैं।अवनि लेखरा और सुंदर सिंह गुर्जर के अलावा पैरालंपिक में रजत पदक जीतने वाले भाला फेंक खिलाड़ी देवेंद्र झाझडिय़ा भी राजस्थान के हैं। राजस्थान सरकार ने तोक्यो पैरालंपिक खेलों में शानदार प्रदर्शन करने वाले राज्य के खिलाडिय़ों को नकद राशि का इनाम देने की घोषणा सोमवार को की जिसके तहत अवनि लेखरा को तीन करोड़ रुपए, देवेंद्र झाझडिय़ा को दो करोड़ रुपए तथा सुन्दर सिंह गुर्जर को एक करोड़ रुपए दिए जाएंगे।मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ट्वीट किया,' तोक्यो पैरालंपिक में राज्य की अवनि लेखरा को स्वर्ण जीतने पर तीन करोड़ रुपए, देवेंद्र झाझडिय़ा को रजत जीतने पर दो करोड़ रुपए तथा सुन्दर सिंह गुर्जर को कांस्य पदक जीतने पर एक करोड़ रूपये की राशि इनाम स्वरुप प्रदान की जाएगी।' उल्लेखनीय है कि 19 वर्षीय लेखरा ने सोमवार को तोक्यो पैरालंपिक खेलों की निशानेबाजी प्रतियोगिता में महिलाओं के आर-2 10 मीटर एयर राइफल के क्लास एसएच1 में स्वर्ण पदक जीतकर यह मुकाम हासिल किया।
- तोक्यो। भारत की अवनि लेखरा ने सोमवार को यहां तोक्यो पैरालंपिक खेलों की निशानेबाजी प्रतियोगिता में महिलाओं के आर-2 10 मीटर एयर राइफल के क्लास एसएच1 में स्वर्ण पदक जीतकर भारतीय खेलों में नया इतिहास रचा। जयपुर की रहने वाली यह 19 वर्षीय निशानेबाज पैरालंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बन गयी हैं। उनकी रीढ़ की हड्डी में 2012 में कार दुर्घटना में चोट लग गयी थी। उन्होंने 249.6 अंक बनाकर विश्व रिकार्ड की बराबरी की। यह पैरालंपिक खेलों का नया रिकार्ड है। अवनि से से पहले भारत की तरफ से पैरालंपिक खेलों में मुरलीकांत पेटकर (पुरुष तैराकी, 1972), देवेंद्र झाझरिया (पुरुष भाला फेंक, 2004 और 2016) तथा मरियप्पन थंगावेलु (पुरुष ऊंची कूद, 2016) ने स्वर्ण पदक जीते थे। अवनि ने कहा, ‘‘मैं अपनी भावनाओं को व्यक्त नहीं कर सकती। मुझे ऐसा लग रहा है जैसे कि मैं दुनिया में शीर्ष पर हूं। इसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। '' यह भारत का इन खेलों की निशानेबाजी प्रतियोगिता में भी पहला पदक है। तोक्यो पैरालंपिक में भी यह देश का पहला स्वर्ण पदक है। अवनि पैरालंपिक खेलों में पदक जीतने वाली तीसरी भारतीय महिला हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मैं बहुत खुश हूं कि मैंने अपना योगदान दिया। उम्मीद है कि आगे हम और पदक जीतेंगे। ''इस बीच पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग एसएच1 स्पर्धा में भारत के महावीर स्वरूप उनहालकर चौथे स्थान पर रहे। उनहालकर ने कुल 203.9 अंक बनाये। कोल्हापुर का यह 34 वर्षीय निशानेबाज एक समय आगे चल रहा था लेकिन छठी सीरीज में 9.9 और 9.5 अंक बनाने से वह पदक की दौड़ से बाहर हो गये। भारत के एक अन्य निशानेबाज दीपक क्वालीफाईंग दौर में ही बाहर हो गये। उन्होंने 592.6 अंक के साथ 20वां स्थान हासिल किया था। उनहालकर 615.2 अंक के साथ सातवें स्थान पर रहकर आठ खिलाड़ियों के फाइनल्स में पहुंचे थे। अवनि ने असाका शूटिंग रेंज पर फाइनल में चीन की रियो पैरालंपिक की स्वर्ण पदक विजेता झांग कुइपिंग (248.9 अंक) को पीछे छोड़ा। यूक्रेन की विश्व में नंबर एक और मौजूदा विश्व चैंपियन इरियाना शेतनिक (227.5) ने कांस्य पदक जीता। अवनि ने कहा, ‘‘मैं स्वयं से यही कह रही थी कि मुझे एक बार केवल एक शॉट पर ध्यान देना है। अभी बाकी कुछ मायने नहीं रखता। केवल एक शॉट पर ध्यान दो। '' उन्होंने कहा, ‘‘मैं केवल अपने खेल पर ध्यान दे रही थी। मैं स्कोर या पदक के बारे में नहीं सोच रही थी।'' अवनि ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपना पहला पदक जीता। वह 2019 में विश्व चैंपियनशिप में चौथे स्थान पर रही थी। पहली बार पैरालंपिक में भाग ले रही विश्व में पांचवीं रैंकिंग की अवनि ने क्वालीफिकेशन और फाइनल्स दोनों में लगातार 10 से अधिक के स्कोर बनाये। वह विश्व रिकार्ड तोड़ने के करीब थी लेकिन आखिर में 9.9 के दो स्कोर से ऐसा नहीं कर पायी।अवनि ने इससे पहले क्वालीफिकेशन राउंड में 21 निशानेबाजों के बीच सातवें स्थान पर रहकर फाइनल्स में प्रवेश किया था। उन्होंने 60 सीरीज के छह शॉट के बाद 621.7 का स्कोर बनाया जो शीर्ष आठ निशानेबाजों में जगह बनाने के लिये पर्याप्त था। अवनि को उनके पिता ने खेलों में जाने के लिये प्रेरित किया। उन्होंने पहले निशानेबाजी और तीरंदाजी दोनों खेलों में हाथ आजमाये। उन्हें निशानेबाजी अच्छी लगी। उन्हें बीजिंग ओलंपिक 2008 के स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा की किताब पढ़कर भी प्रेरणा मिली। उन्होंने 2015 में जयपुर के जगतपुरा खेल परिसर में निशानेबाजी शुरू की थी। कानून की छात्रा अवनि ने संयुक्त अरब अमीरात में विश्व कप 2017 में भारत की तरफ से पदार्पण किया था। राजस्थान में सहायक वन संरक्षक के पद पर कार्यरत अवनि को भारत सरकार ने 2017 में लक्ष्य ओलंपिक पोडियम कार्यक्रम (टॉप्स) में शामिल किया था। इससे उन्होंने 12 अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं और राष्ट्रीय कोचिंग शिविरों में भाग लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनके प्रदर्शन की प्रशंसा की।मोदी ने ट्वीट किया, ‘‘अविस्मरणीय प्रदर्शन अवनि लेखरा। कड़ी मेहनत की बदौलत स्वर्ण जीतने पर बधाई जिसकी आप हकदार भी थी। कर्मशील स्वभाव और निशानेबाजी के प्रति जज्बे से आपने ऐसा संभव कर दिखाया। भारतीय खेलों के लिए यह एक विशेष क्षण है। आपको भविष्य के लिये शुभकामनाएं।'' प्रधानमंत्री ने उनसे फोन पर भी बात की और उन्हें बधाई दी।अवनि पैरालंपिक खेलों में पदक जीतने वाली तीसरी भारतीय महिला खिलाड़ी हैं। रविवार को भाविनाबेन पटेल ने महिला टेबल टेनिस में रजत पदक जीता था। भारतीय पैरालंपिक समिति की अध्यक्ष दीपा मलिक रियो पैरालंपिक 2016 में गोला फेंक में रजत पदक जीतकर इन खेलों में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनी थी। अवनि मिश्रित 10 मीटर एयर राइफल प्रोन एसएच1, महिलाओं की 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन एसएच1 और मिश्रित 50 मीटर राइफल प्रोन में भी हिस्सा लेंगी। एसएच1 राइफल वर्ग में वे निशानेबाज शामिल होते हैं जो हाथों से बंदूक थाम सकते हैं लेकिन उनके पांवों में विकार होता है। इनमें से कुछ एथलीट व्हील चेयर पर बैठकर जबकि कुछ खड़े होकर प्रतिस्पर्धा में भाग लेते हैं।
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नयी दिल्ली। भारत ने दुबई में खेली जा रही एशियाई जूनियर मुक्केबाजी चैंपियनशिप में रविवार को लड़कों और लड़कियों के वर्ग में मुक्केबाजों के शानदार प्रदर्शन से छह स्वर्ण पदक अपनी झोली में डाले। राष्ट्रीय चैम्पियन रोहित चमोली (48 किग्रा) और भरत जून (81 किग्रा से अधिक) ने लड़कों के वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर शुरूआत की। इसके बाद लड़कियों के वर्ग में वीशू राठी (48 किग्रा), तनु (52 किग्रा), निकिता चंद (60 किग्रा) और माही राघव (63 किग्रा) ने फाइनल में विपरीत अंदाज में जीत दर्ज की। रोहित ने कड़े फाइनल में मंगोलिया के ओटगोनबयार तुवशिंजया को 3-2 से हराया जबकि जून ने कजाखस्तान के यरदोस शारिपबेक को 5-0 से शिकस्त दी। लड़कियों की स्पर्धा में वीशू ने उज्बेकिस्तान की बाखतियोरोवा रोबियाखोन पर 5-0 की जीत से स्वर्ण पदक हासिल किया। फिर अन्य वजन वर्गों के फाइनल में तनु ने कजाखस्तान की तोमिरिस माइरजाकुल को 3-2 से, निकिता ने कजाखस्तान की आसेम तानाटार को सर्वसम्मत फैसले में और माही ने कजाखस्तान की अलजेरिम काबडोल्डा को 3-2 से मात देकर लड़कियों के वर्ग में भारत को चौथा स्वर्ण दिलाया। चंडीगढ़ के रोहित ने इस प्रतिष्ठित महाद्वीपीय प्रतियोगिता में अपना प्रभावशाली प्रदर्शन जारी रखते हुए जूनियर लड़कों के 48 किग्रा भार वर्ग के फाइनल में सतर्क शुरुआत करने के बाद सटीक आक्रमण से करीबी मुकाबले में अपने मंगोलियाई प्रतिद्वंद्वी पर बढ़त हासिल की जिससे उन्होंने पहला स्थान प्राप्त किया। जून को दूसरी तरफ अपने प्रतिद्वंद्वी को हराने में कोई दिक्कत नहीं हुई। एक अन्य फाइनल में गौरव सैनी (70 किग्रा) को उज्बेकिस्तान के बोलताइव शवाकातजोन से 0-5 से हार के कारण रजत पदक से संतोष करना पड़ा। मुस्कान (46 किग्रा), आंचल सैनी (57 किग्रा) और रुद्रिका (70 किग्रा) को लड़कियों के वर्ग में रजत पदक से संतोष करना पड़ा। मुस्कान उज्बेकिस्तान की गानिएवा गुलसेवर से करीबी मुकाबले में हार गयी। आंचल को काजखस्तान की उल्जान सारसेनबेक से 0-5 से जबकि रूद्रिका को उज्बेकिस्तान की ओयशा तोइरोवा से 1-4 से पराजय का सामना करना पड़ा। प्रांजल यादव (75 किग्रा), संजना (81 किग्रा) और कीर्ति (+81 किग्रा) रविवार को शाम के बचे हुए सत्र में लड़कियों के वर्ग में फाइनल में चुनौती पेश करेंगी। भारत जूनियर स्पर्धा में पहले ही छह कांस्य पदक जीत चुका है, जिसमें देविका घोरपड़े (50 किग्रा), आरज़ू (54 किग्रा) और सुप्रिया रावत (66 किग्रा) ने लड़कियों के वर्ग में जबकि आशीष (54 किग्रा), अंशुल (57 किग्रा) और अंकुश (66 किग्रा)) ने लड़कों के वर्ग में पदक जीते। पिछली एशियाई जूनियर चैंपियनशिप 2019 में भारत 21 पदक (छह स्वर्ण, नौ रजत और छह कांस्य) के साथ तीसरे स्थान पर रहा था। जूनियर वर्ग में स्वर्ण पदक विजेताओं को 4,000 डॉलर जबकि रजत और कांस्य पदक विजेताओं को क्रमशः 2,000 डॉलर और 1,000 डॉलर दिए जाएंगे।
- तोक्यो। भारत के लिये पैरालंपिक खेलों में रविवार का दिन पदकों की सौगात लेकर आया तथा टेबल टेनिस खिलाड़ी भाविनाबेन पटेल और ऊंची कूद के एथलीट निषाद कुमार ने जहां रजत पदक जीते वहीं विनोद कुमार चक्का फेंक में कांस्य पदक हासिल करने में सफल रहे।भाविनाबेन टेबल टेनिस क्लास 4 स्पर्धा के महिला एकल फाइनल में दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी चीन की झाउ यिंग के खिलाफ 0-3 से शिकस्त का सामना करना पड़ा लेकिन वह ऐतिहासिक रजत पदक के साथ पैरालंपिक खेलों में पदक जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला खिलाड़ी बनने में सफल रहीं। निषाद कुमार ने पुरूषों की ऊंची कूद टी47 स्पर्धा में एशियाई रिकार्ड के साथ रजत पदक जीता। विनोद कुमार ने भी पुरुषों के चक्का फेंक की एफ52 स्पर्धा में एशियाई रिकार्ड बनाया और कांस्य पदक अपने नाम किया। भारत के इस तरह से वर्तमान खेलों में दो रजत और एक कांस्य पदक सहित कुल तीन पदक हो गये हैं और वह अभी पदक तालिका में 45वें स्थान पर है।तोक्यो पैरालंपिक में भारत का खाता 34 वर्षीय भाविनाबेन ने खोला। वह फाइनल में दो बार की स्वर्ण पदक विजेता झाउ से 19 मिनट में 7-11, 5-11, 6-11 से हार गई। भाविनाबेन पैरालंपिक खेलों में पदक जीतने वाली सिर्फ दूसरी भारतीय महिला खिलाड़ी हैं। भारतीय पैरालंपिक समिति (पीसीआई) की मौजूदा अध्यक्ष दीपा मलिक पांच साल पहले रियो पैरालंपिक में गोला फेंक में रजत पदक के साथ पैरालंपिक खेलों में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनीं थी।पुरुषों की ऊंची कूद की टी47 स्पर्धा में 21 वर्षीय निषाद कुमार ने 2.06 मीटर की कूद लगाकर एशियाई रिकार्ड बनाया और दूसरे स्थान पर रहे। अमेरिका के डलास वाइज को भी रजत पदक दिया गया क्योंकि उन्होंने और कुमार दोनों ने समान 2.06 मीटर की कूद लगायी। एक अन्य अमेरिकी रोडरिक टाउनसेंड ने 2.15 मीटर की कूद के विश्व रिकार्ड के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसी स्पर्धा में एक अन्य भारतीय राम पाल 1.94 मीटर की कूद से पांचवें स्थान पर रहे। भारतीय एथलीटों का पदक बटोरने का अभियान चक्का फेंक में भी जारी रहा जिसकी एफ52 स्पर्धा में 41 वर्षीय विनोद कुमार ने 19.91 मीटर के सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ तीसरा स्थान हासिल किया। वह पोलैंड के पियोट्र कोसेविज (20.02 मीटर) और क्रोएशिया के वेलिमीर सैंडोर (19.98 मीटर) से पीछे रहे जिन्होंने क्रमश: स्वर्ण और रजत पदक अपने नाम किये।तीरंदाजी में हालांकि राकेश कुमार और ज्योति बालियान की जोड़ी के क्वार्टर फाइनल से हार के साथ रिकर्व तीरंदाजी प्रतियोगिता के मिश्रित युगल वर्ग में भारतीय चुनौती समाप्त हो गयी। छठी वरीयता प्राप्त इस जोड़ी को मुकाबले के पहले चरण के आखिर में छह अंक का निशाना लगाने का खामियाजा भुगतना पड़ा। भारतीय जोड़ी करीबी मुकाबले में तुर्की की ओजनूर क्योर और बुलेंट कोरकमज से 151-153 से हार गयी। इस भारतीय जोड़ी ने इससे पहले अपने पहले दौर के मुकाबले में थाईलैंड के एनॉन औंगापहीनान और प्रफापोर्न होमजानथुइक को 147-141 से हराया था। कंपाउंड वर्ग के महिला एकल में भी ज्योति की हार के साथ भारतीय चुनौती समाप्त हो गयी। ज्योति को पहले दौर में आयरलैंड के केरी-लुईस लियोनार्ड ने 141-137 से शिकस्त दी।
- मुंबई। सिडनी ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता कर्णम मल्लेश्वरी का मानना है कि मीराबाई चानू का हाल के तोक्यो ओलंपिक में जीता गया रजत पदक भारतीय भारोत्तोलन के लिये प्राण वायु ‘ऑक्सीजन' की तरह है और इससे युवा इस खेल से जुड़ने के लिये प्रेरित होंगे। ओलंपिक 2000 में भारोत्तोलन का कांस्य पदक जीतने वाली मल्लेश्वरी ने इसके साथ ही कहा कि तोक्यो खेलों में भारत के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन से देश में खेल संस्कृति को भी बढ़ावा मिलेगा। मल्लेश्वरी ने यहां एक कार्यक्रम से इतर संवाददाताओं से कहा, ‘‘मीराबाई (चानू) का पदक 20 साल बाद आया है और इसलिए यह हमारे लिये आक्सीजन की तरह काम कर रहा है। मुझे लगता है कि इस पदक से भविष्य में कई बच्चे प्रेरणा लेंगे और हमारे अधिक पदक आएंगे। '' तोक्यो ओलंपिक में भारत के प्रदर्शन के बारे में मल्लेश्वरी ने कहा, ‘‘हमने सात पदक जीते। हमने अच्छा प्रदर्शन किया और सबसे खुशी की बात यह रही कि नीरज चोपड़ा ने उस एथलेटिक्स में स्वर्ण पदक जीता जिसमें हम पदक के बारे में भी नहीं सोच रहे थे। '' उन्होंने कहा, ‘‘भारत सरकार, साइ (भारतीय खेल प्राधिकरण), खेल मंत्रालय से जो सहयोग मिला उसने भी अपनी भूमिका निभायी। सरकार ने ओलंपियन की हर तरह से मदद की। उन्हें सर्वश्रेष्ठ सुविधाएं और प्रशिक्षण मुहैया कराया गया और परिणाम हमारे सामने है। '' ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला मल्लेश्वरी ने कहा कि सरकार के सहयोग के कारण ही खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन कर पाये और माता पिता अपने बच्चों को खेल को करियर के रूप में अपनाने की अनुमति दे रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘लोग जागरूक हुए हैं। इससे पहले असमंजस की स्थिति रहती थी कि इसे करियर बनाये या नहीं लेकिन आज खिलाड़ी खेलों में शत प्रतिशत करियर बना रहे हैं। '' मल्लेश्वरी ने कहा, ‘‘ओलंपिक पदक जीतने पर आप एक हस्ती बन जाते हो और आप वित्तीय रूप से मजबूत बन जाते हो। अब माता पिता भी समर्थन कर रहे हैं। मुझे भविष्य में भारत में अच्छी खेल संस्कृति के विकास की उम्मीद है और हमारे पास तब अधिक पदक विजेता खिलाड़ी होंगे।
- तोक्यो भाविनाबेन पटेल को तोक्यो खेलों की टेबल टेनिस क्लास 4 स्पर्धा के महिला एकल फाइनल में रविवार को यहां दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी चीन की झाउ यिंग के खिलाफ 0-3 से शिकस्त का सामना करना पड़ा लेकिन वह एतिहासिक रजत पदक के साथ पैरालंपिक खेलों में पदक जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला खिलाड़ी बनने में सफल रहीं। चौंतीस साल की भाविनाबेन दो बार की स्वर्ण पदक विजेता झाउ के खिलाफ 19 मिनट में 7-11, 5-11, 6-11 से हार गई। वह हालांकि भारत को मौजूदा पैरालंपिक खेलों का पहला पदक दिलाने में सफल रहीं। भाविनाबेन पैरालंपिक खेलों में पदक जीतने वाली सिर्फ दूसरी भारतीय महिला खिलाड़ी हैं। भारतीय पैरालंपिक समिति (पीसीआई) की मौजूदा अध्यक्ष दीपा मलिक पांच साल पहले रियो पैरालंपिक में गोला फेंक में रजत पदक के साथ पैरालंपिक खेलों में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनीं थी। व्हीलचेयर पर बैठकर खेलने वाली भाविनाबेन को इस हफ्ते की शुरुआत में अपने पहले ग्रुप मैच में भी झाउ के खिलाफ शिकस्त का सामना करना पड़ा था। भाविनाबेन ने पदक जीतने के बाद कहा, ‘‘मैं यह पदक उन लोगों को समर्पित करती हूं जिन्होंने मेरा समर्थन किया, पीसीआई (भारतीय पैरालंपिक समिति), साइ (भारतीय खेल प्राधिकरण), टॉप्स (टारगेट ओलंपिक पोडियम योजना), ब्लाइंड पीपल एसोसिएशन और मेरे सभी मित्र और परिवार।'' उन्होंने कहा, ‘‘यह पदक मेरे कोच को भी समर्पित है जिन्होंने हमेशा मेरा समर्थन किया और मुझे कड़ी ट्रेनिंग दी जिससे कि मैं इस जगह पर पहुंच सकी। मेरे फिजियो, डाइटीशियन और खेल मनोवैज्ञानिक को भी विशेष धन्यवाद।'' बीजिंग और लंदन में स्वर्ण पदक सहित पैरालंपिक में पांच पदक जीतने वाली झाउ के खिलाफ भाविनाबेन जूझती नजर आईं और अधिकतर समय वापसी करने की कोशिशों में लगी रहीं। विश्व चैंपियनशिप की छह बार की पदक विजेता झाउ ने दुनिया की 12वें नंबर की खिलाड़ी भाविनाबेन को कोई मौका नहीं दिया। झाउ ने पहले गेम में 3-3 के स्कोर के बाद 7-5 की बढ़त बनाई। भाविनाबेन ने कुछ अंक और जुटाए लेकिन चीन की खिलाड़ी पहला गेम जीतने में सफल रही। दूसरे गेम में झाउ ने शानदार शुरुआत करते हुए 7-1 की बढ़त बनाई जिसके बाद उन्हें दूसरा गेम जीतकर 2-0 की बढ़त बनाने में कोई परेशानी नहीं हुई। तीसरे गेम में भाविनाबेन ने झाउ को कड़ी टक्कर देने की कोशिश की। एक समय स्कोर 5-5 से बराबर था लेकिन इसके बाद चीन की खिलाड़ी ने जोरदार खेल दिखाते हुए गेम, मैच और खिताब जीत लिया। मात्र 12 महीने की उम्र में पोलियो से संक्रमित होने वाली भाविनाबेन ने शनिवार को सेमीफाइनल में चीन की दुनिया की तीसरे नंबर की खिलाड़ी मियाओ झैंग को 7-11, 11-7, 11-4, 9-11, 11-8 से हराया था। शुक्रवार को क्वार्टर फाइनल में भाविनाबेन ने रियो पैरालंपिक की स्वर्ण पदक विजेता और दुनिया की दूसरे नंबर की खिलाड़ी सर्बिया की बोरिस्लावा पेरिच रेंकोविच को हराकर पदक सुनिश्चित करते हुए इतिहास रचा था। पैरा टेबल टेनिस की क्लास 1 से 5 व्हीलचेयर खिलाड़ियों के लिए होती है। क्लास 4 के खिलाड़ियों का बैठने का संतुलन ठीक-ठाक होता है और उनकी बांह और हाथ पूरी तरह काम करते हैं। भाविनाबेन 13 साल पहले अहमदाबाद के वस्त्रपुर क्षेत्र में ‘ब्लाइंड पीपल्स एसोसिएशन' में इस खेल से जुड़ी। वह वहां दिव्यांग लोगों के लिए आईटीआई की छात्र थी। वहां उन्होंने दृष्टिबाधित बच्चों को टेबल टेनिस खेलते हुए देखा और इस खेल से जुड़ने का फैसला किया। उन्होंने अहमदाबाद के रोटरी क्लब का प्रतिनिधित्व करते हुए प्रतियोगिता में अपना पहला पदक जीता। वह गुजरात के लिए जूनियर क्रिकेट खेलने वाले निकुंज पटेल के साथ विवाह करके अहमदाबाद में रहती हैं। भाविनाबेन पीटीटी थाईलैंड टेबल टेनिस चैंपियनशिप में भारत के लिए रजत पदक जीतकर 2011 में दुनिया की दूसरे नंबर की खिलाड़ी बनी। अक्तूबर 2013 में भाविनाबेन ने बीजिंग में एशियाई पैरा टेबल टेनिस चैंपियनशिप में महिला एकल क्लास 4 का रजत पदक जीता।











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