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नयी दिल्ली. स्टार भारोत्तोलक सेखोम मीराबाई चानू और लवप्रीत सिंह सहित राष्ट्रमंडल खेलों में शानदार प्रदर्शन करने वाले भारतीय खिलाड़ियों के पहले दल का रविवार को यहां स्वदेश लौटने पर इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सैकड़ों प्रशंसकों ने जोरदार स्वागत किया। ओलंपिक पदक विजेता मीराबाई ने महिलाओं के 49 किग्रा वर्ग में राष्ट्रमंडल खेलों का लगातार तीसरा स्वर्ण पदक जीता। मीराबाई ने हवाई अड्डे पर पीटीआई से कहा, ''मणिपुर से होने के नाते मुझे इस बात पर बहुत गर्व है कि मैं अपने देश के लिए कुछ अच्छा कर सकी।'' पुरुषों के 109 किग्रा से अधिक वर्ग में एक किग्रा के मामूली अंतर से स्वर्ण पदक से चूककर रजत पदक जीतने वाले लवप्रीत सिंह ने कहा कि उनका अगला लक्ष्य जापान में होने वाले एशियाई खेल हैं। पंजाब के 28 वर्षीय लवप्रीत ने कहा, ''मैं भारतीय नौसेना, अपने कप्तान विजय कुमार और यहां स्वागत के लिए आए सभी लोगों का धन्यवाद करना चाहता हूं।'' उन्होंने कुल 388 किग्रा वजन उठाया जिसमें 'स्नैच' में राष्ट्रमंडल खेलों का रिकॉर्ड 176 किग्रा वजन भी शामिल है। लवप्रीत ने कहा, ''ऐसा हो जाता है (स्वर्ण से चूकना) लेकिन मैंने कड़ी मेहनत की और उसका परिणाम मिला। जब दो खिलाड़ी मुकाबला करते हैं तो एक को हारना पड़ता है। अब मैं एशियाई खेलों की अच्छी तैयारी करूंगा।'' भारतीय भारोत्तोलकों ने अपने अभियान का समापन एक स्वर्ण, छह रजत और एक कांस्य सहित कुल आठ पदक के साथ किया। महिलाओं के 58 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक जीतने वाली बिंदयारानी देवी सोरोखेबम ने कहा, ''जिस तरह सभी ने हमारा स्वागत किया है, उससे बहुत अच्छा लग रहा है। सभी का धन्यवाद, आपने घर जैसा अहसास कराया।'' उन्होंने कहा, ''आने वाली प्रतियोगिताओं के लिए मैं पहले से भी अधिक कड़ी मेहनत करूंगी।''
पुरुषों के 60 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीतने वाले ऋषिकांत सिंह ने कहा कि अगली बार वह स्वर्ण पदक जीतने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा, ''भारत के लिए पदक जीतकर अच्छा लग रहा है। मैं अपने प्रदर्शन के बारे में पहले ही बात कर चुका हूं, लेकिन अगली बार और मजबूत वापसी करूंगा तथा बेहतर प्रदर्शन करूंगा।'' इम्फाल में जन्मे भारतीय सेना के भारोत्तोलक ऋषिकांत ने अपने गृह राज्य मणिपुर में शांति की अपील करते हुए कहा कि इससे राज्य से और अधिक प्रतिभाशाली खिलाड़ी निकलेंगे। उन्होंने कहा, ''मेरे लिए नौसेना और मैतेई दोनों समान हैं। मैं केवल इतना कहना चाहता हूं कि मणिपुर में शांति होनी चाहिए ताकि वहां से मुझसे भी बेहतर खिलाड़ी निकल सकें।'' भारतीय भारोत्तोलन टीम के मुख्य राष्ट्रीय कोच विजय शर्मा ने कहा, ''यहां जिस तरह हमारा स्वागत किया गया, उससे हमें बहुत गर्व महसूस हो रहा है। सभी लोग बहुत खुश हैं। मैं अपने खिलाड़ियों के प्रदर्शन से बेहद खुश हूं।'' उन्होंने कहा, ''कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जहां हम पीछे रह गए और हमें उन पर काम करने की जरूरत है ताकि अपने रजत पदक का रंग स्वर्ण में बदला जा सके। लेकिन खेलों में ऐसा होता है। कुल मिलाकर परिणाम अच्छे रहे हैं और हम खुश हैं।'' शर्मा ने मीराबाई चानू की लगातार तीसरी बार स्वर्ण पदक जीतने के लिए जमकर प्रशंसा की।
उन्होंने कहा, ''मीराबाई एक असाधारण खिलाड़ी हैं। अपने अनुशासन के कारण वह इस तरह के परिणाम हासिल कर पाती हैं। हम एशियाई खेलों की तैयारी कर रहे हैं और मुझे लगता है कि वहां भी हम पदक जीतेंगे।'' महिलाओं के 69 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीतने वाली हरजिंदर कौर ने कहा कि उनका लक्ष्य अगले राष्ट्रमंडल खेलों में अपने रजत पदक को स्वर्ण में बदलना है। उन्होंने कहा, ''मेरा लक्ष्य अहमदाबाद में होने वाले अगले राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक को स्वर्ण पदक में बदलना है।'' पुरुषों के 65 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीतने वाले राजा मुथुपांडी ने कहा कि पोडियम पर जगह बनाना कई सर्जरी और लंबे संघर्ष के बाद वर्षों की मेहनत का परिणाम है। मुथुपांडी ने कहा, ''मैं 2018 राष्ट्रमंडल खेलों में भी उतरा था लेकिन तब पदक नहीं जीत पाया। उस समय मुझे बहुत बुरा लगा था। इसके बाद मैंने इस पदक के लिए काफी मेहनत की।'' उन्होंने कहा, ''मैं स्वर्ण पदक जीतने की कोशिश कर रहा था लेकिन उस दिन मेरा प्रदर्शन उतना अच्छा नहीं रहा। फिर भी मुझे खुशी है कि मैंने पहली बार भारत के लिए पदक जीता।'' उन्होंने कहा, ''एक खिलाड़ी के तौर पर मेरी दो-तीन सर्जरी हुई हैं। हर सर्जरी के बाद मैंने और मेरे कोच ने वापसी की योजना बनाई और चरणबद्ध तरीके से काम किया। इतने संघर्ष के बाद वापसी करके पदक जीतने का अहसास बेहद खास होता है।'' मुथुपांडी ने कहा कि अब उनका पूरा ध्यान एशियाई खेलों और 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक पर है। उन्होंने कहा, ''एशियाई खेल आने वाले हैं और उसके बाद ओलंपिक है। ओलंपिक क्वालीफिकेशन की प्रक्रिया अक्टूबर से शुरू होगी। हम अपने कोच विजय शर्मा सर के साथ बैठकर पूरी योजना बनाएंगे और सभी क्वालीफिकेशन प्रतियोगिताओं तथा चरणों की तैयारी करेंगे।'' एक अन्य रजत पदक विजेता वल्लुरी अजय बाबू ने कहा कि कड़े मुकाबले के दबाव से निपटने से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और अब उनका लक्ष्य लॉस एंजिलिस ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करना है। उन्होंने कहा, ''मुझे बहुत गर्व महसूस हो रहा है। यह मेरे पहले राष्ट्रमंडल खेल थे और मेरे लिए शानदार अनुभव रहा। मेरा प्रदर्शन अच्छा रहा। मैं स्वर्ण पदक से चूक गया, लेकिन कोई बात नहीं। मैं अच्छी तैयारी करूंगा और कड़ी मेहनत करूंगा।'' अजय बाबू ने कहा, ''मुकाबला केवल एक किग्रा के अंतर से तय हुआ, इसलिए दबाव था। लेकिन मैंने उस दबाव में भी अच्छा प्रदर्शन किया और मुझे अच्छा लगा। मैं यह पदक अपने कोच और अपने पिता को समर्पित करना चाहता हूं। मैं 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक और 2030 राष्ट्रमंडल खेलों के लिए क्वालीफाई करने का प्रयास करूंगा।'' महिलाओं के 86 किग्रा से अधिक वर्ग में पांचवें स्थान पर रहीं मार्टिना देवी ने अपने पहले राष्ट्रमंडल खेल अभियान को सीखने वाला अनुभव बताया। उन्होंने कहा, ''राष्ट्रमंडल खेल मेरे लिए सीखने का अच्छा अवसर रहे। मैं भविष्य में और बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश करूंगी। हवाई अड्डे पर जिस गर्मजोशी से हमारा स्वागत किया जा रहा है, उसे देखकर बहुत अच्छा लग रहा है।'' भारत फिलहाल पदक तालिका में 13 स्वर्ण, 17 रजत और नौ कांस्य सहित कुल 39 पदक के साथ चौथे स्थान पर है। -
नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए 10वां दिन ऐतिहासिक रहा। भारतीय खिलाड़ियों ने एक ही दिन में बॉक्सिंग के 10 मेडल समेत कुल 16 मेडल अपने नाम किए। इस शानदार प्रदर्शन के दम पर भारत ने मेडल टैली में छह पायदान की लंबी छलांग लगाई और 13 गोल्ड, 17 सिल्वर तथा 9 ब्रॉन्ज मेडल के साथ चौथे स्थान पर पहुंच गया। भारत के कुल मेडल की संख्या अब 39 हो गई है।
मेडल टैली में ऑस्ट्रेलिया शीर्ष पर बना हुआ है। उसके खाते में 61 गोल्ड, 38 सिल्वर और 50 ब्रॉन्ज समेत कुल 149 मेडल हैं। इंग्लैंड 25 गोल्ड, 40 सिल्वर और 34 ब्रॉन्ज के साथ कुल 99 मेडल लेकर दूसरे स्थान पर है, जबकि कनाडा 18 गोल्ड समेत कुल 57 मेडल के साथ तीसरे नंबर पर काबिज है। भारत की शानदार छलांग का असर मेजबान स्कॉटलैंड की रैंकिंग पर भी पड़ा है। 12 गोल्ड, 8 सिल्वर और 17 ब्रॉन्ज समेत कुल 37 मेडल के साथ स्कॉटलैंड पांचवें स्थान पर पहुंच गया है। नाइजीरिया 10 गोल्ड समेत कुल 21 मेडल के साथ छठे, वेल्स 8 गोल्ड, 10 सिल्वर और 12 ब्रॉन्ज समेत 30 मेडल के साथ सातवें स्थान पर है। न्यूजीलैंड 8 गोल्ड के साथ कुल 27 मेडल लेकर आठवें स्थान पर मौजूद है।10वें दिन भारतीय मुक्केबाजों ने सबसे दमदार प्रदर्शन किया। बॉक्सिंग में भारत ने कुल 10 मेडल जीते, जिनमें 7 गोल्ड शामिल रहे। पुरुष वर्ग में अंकुश पंघाल और सचिन सिवाच ने गोल्ड मेडल अपने नाम किए। महिला वर्ग में जैस्मिन लैम्बोरिया, साक्षी चौधरी, प्रिया घनघस, अरुंधति चौधरी और प्रीति ने स्वर्ण पदक जीते। भारतीय बॉक्सरों के शानदार प्रदर्शन में तीन सिल्वर मेडल भी शामिल रहे। जदुमणि सिंह, लवलीना बोरगोहेन और नरेंद्र बेरवाल ने अपनी-अपनी स्पर्धाओं में रजत पदक जीतकर भारत की मेडल संख्या में इजाफा किया।एथलेटिक्स में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। पुरुषों की ट्रिपल जंप स्पर्धा में प्रवीण चित्रावेल ने सिल्वर मेडल जीता, जबकि सेल्वा प्रभु थिरुमारन ने ब्रॉन्ज पदक अपने नाम किया। दोनों के प्रदर्शन से भारत की एथलेटिक्स में पदक संख्या को मजबूती मिली।शॉट पुट में भी भारत को दो पदक मिले। सोमन राणा ने गोल्ड मेडल जीतकर भारत की पदक तालिका में एक और स्वर्ण जोड़ा, जबकि शुभम जुयाल ने सिल्वर मेडल अपने नाम किया। इस तरह 10वें दिन बॉक्सिंग के अलावा एथलेटिक्स में भी भारत का प्रदर्शन प्रभावशाली रहा। 10वें दिन 16 मेडल जीतने के बाद भारत ने प्रतियोगिता में अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। 13 गोल्ड, 17 सिल्वर और 9 ब्रॉन्ज के साथ भारत के कुल 39 मेडल हो गए हैं। भारतीय खिलाड़ियों के इस प्रदर्शन ने प्रतियोगिता के अंतिम चरण में देश की पदक उम्मीदों को और मजबूत कर दिया है। ( - बेंगलुरु. भारतीय टी20 टीम के उपकप्तान तिलक वर्मा आगामी दलीप ट्रॉफी में दक्षिण क्षेत्र की अगुआई करेंगे जबकि आंध्र के अनुभवी बल्लेबाज रिकी भुई को उपकप्तान बनाया गया है। भारतीय टीम से बाहर चल रहे करुण नायर को भी टीम में शामिल किया गया है। इसके अलावा उभरते हुए भारत 'ए' के बल्लेबाज एसके रशीद भी टीम का हिस्सा हैं। कर्नाटक के आर स्मरण और हैदराबाद के के हिमतेजा को भी टीम में जगह मिली है।भारत 'ए' के पूर्व विकेटकीपर एन जगदीशन भी टीम में शामिल हैं।दलीप ट्रॉफी के लिए दक्षिण क्षेत्र की टीम:तिलक वर्मा (कप्तान), रिकी भुई (उपकप्तान), अभिनव तेजराना, एसके रशीद, के हिमतेजा, आर स्मरण, एन जगदीशन, करुण नायर, टी त्यागराजन, श्रेयस गोपाल, के साई तेजा, टी विजय, वी कावेरीप्पा और अमन खान।
- नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मेंस जैवलिन थ्रो के बाद मेंस ट्रिपल जंप में भी भारत ने दो मेडल अपने नाम किए। शनिवार को स्कॉट्सटाउन स्टेडियम में हुए फाइनल में नेशनल रिकॉर्ड होल्डर प्रवीण चित्रवेल ने 16.58 मीटर की सर्वश्रेष्ठ छलांग के साथ सिल्वर मेडल जीता, जबकि युवा एथलीट सेल्वा प्रभु थिरुमारन ने 16.52 मीटर की सीजन की सर्वश्रेष्ठ छलांग लगाकर ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया।बर्मिंघम 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में महज तीन सेंटीमीटर से मेडल से चूके प्रवीण ने इस बार शानदार प्रदर्शन करते हुए पोडियम फिनिश हासिल किया। जमैका के जॉर्डन स्कॉट ने 16.72 मीटर की सर्वश्रेष्ठ छलांग के साथ गोल्ड मेडल जीता और प्रवीण से 14 सेंटीमीटर आगे रहे। प्रवीण ने प्रतियोगिता की शुरुआत 16.05 मीटर की छलांग से की। उनका दूसरा प्रयास 15.64 मीटर का रहा, जबकि तीसरे प्रयास में उन्होंने 16.31 मीटर तक सुधार किया। चौथे प्रयास में 16.58 मीटर की अपनी सर्वश्रेष्ठ छलांग लगाकर उन्होंने सिल्वर मेडल की स्थिति मजबूत की। उनका पांचवां प्रयास 16.40 मीटर का रहा, जबकि अंतिम प्रयास फाउल रहा।21 वर्षीय सेल्वा प्रभु ने भी प्रतियोगिता के दौरान लगातार सुधार किया।उन्होंने 15.87 मीटर से शुरुआत की और दूसरे प्रयास में 16.17 मीटर तक पहुंचे। तीसरे राउंड में उन्होंने 16.43 मीटर की छलांग लगाई। चौथे प्रयास में फाउल के बाद सेल्वा ने पांचवें राउंड में 16.52 मीटर की शानदार छलांग लगाकर ब्रॉन्ज मेडल पक्का किया। उनका अंतिम प्रयास 16.08 मीटर का रहा। इससे पहले शुक्रवार देर रात भारतीय समयानुसार मेंस जैवलिन थ्रो में भी भारत ने दो मेडल हासिल किए थे। नीरज चोपड़ा ने 85.83 मीटर के थ्रो के साथ सिल्वर मेडल जीता, जबकि यशवीर सिंह ने 85.41 मीटर के थ्रो के साथ ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया था।प्रवीण ने 2018 में खेलो इंडिया स्कूल गेम्स में गोल्ड और उसी साल यूथ ओलंपिक गेम्स में ऐतिहासिक ब्रॉन्ज मेडल जीतकर अपनी पहचान बनाई थी। इसके बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार शानदार प्रदर्शन किया। एशियन इंडोर एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2023 में उन्होंने सिल्वर मेडल जीतने के साथ नेशनल इंडोर रिकॉर्ड बनाया। इसके बाद 17.37 मीटर की छलांग के साथ भारतीय आउटडोर नेशनल रिकॉर्ड बेहतर किया और हांग्जो एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीता। मदुरै में जन्मे सेल्वा प्रभु ने 2022 वर्ल्ड एथलेटिक्स अंडर-20 चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। 2023 में वह एशियन एथलेटिक्स एसोसिएशन के ‘बेस्ट एशियन अंडर-20 मेल एथलीट ऑफ द ईयर’ चुने जाने वाले पहले भारतीय बने। इसी दौरान उन्होंने 16.79 मीटर की छलांग के साथ भारतीय अंडर-20 रिकॉर्ड भी तोड़ा।इस साल की शुरुआत में सेल्वा ने 17.05 मीटर की अपनी पर्सनल बेस्ट छलांग के साथ 17 मीटर का अहम आंकड़ा पार किया था। अब कॉमनवेल्थ गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल उनके तेजी से आगे बढ़ते अंतरराष्ट्रीय करियर में एक और अहम उपलब्धि बन गया है।
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ग्लास्गो/ भारतीय महिला मुक्केबाजों ने अपेक्षाओं पर खरे उतरते हुए पांच स्वर्ण पदक जीते जबकि पुरूष वर्ग में सचिन सिवाच और अंकुश पंघाल ने खिताब अपने नाम किये जिसके दम पर भारत ने राष्ट्रमंडल खेलों की मुक्केबाजी स्पर्धा में शनिवार को अपने अभियान का समापन अब तक के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ किया । मौजूदा विश्व चैम्पियन जैसमीन लंबोरिया (57 किलो) , प्रीति पवार (54 किलो), साक्षी चौधरी (51 किलो) , अरूंधति चौधरी (70 किलो) , प्रिया घंघास (60 किलो) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने वजन वर्गों में स्वर्ण पदक जीते । वहीं ओलंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन (75 किलो) को रजत पदक से संतोष करना पड़ा ।
पुरूष वर्ग में सचिन सिवाच (60 किलो) और अंकुश (70 किलो) ने स्वर्ण पदक जीते जबकि 55 किग्रा वर्ग में जादूमणि सिंह और 90 प्लस किलो स्पर्धा में नरेंदर बेरवाल ने रजत पदक जीता । इससे पहले भारत ने गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल खेल 2018 में मुक्केबाजी में तीन स्वर्ण समेत सात पदक जीते थे । 'भारत माता की जय' और 'इंडिया इंडिया' के नारों के बीच एसएसी एरेना में भारतीय मुक्केबाजों को घर जैसा समर्थन मिला । अंकुश पंघाल ने पुरुषों के 80 किग्रा वजन वर्ग के फाइनल में इंग्लैंड के दिमेजी शिट्टू को हराकर भारत को सातवां स्वर्ण पदक दिलाया। अंकुश ने शिट्टू के खिलाफ 4-1 के विभाजित फैसले से जीत दर्ज की। सचिन सिवाच ने इससे पहले पुरुषों के 60 किग्रा वजन वर्ग के रोमांचक फाइनल में नामीबिया के ट्रायागेन मॉर्निंग एनडेवेलो को हराकर स्वर्ण पदक जीता। यह भारत का छठा स्वर्ण पदक रहा। सचिन ने शुरुआती दो राउंड में पिछड़ने के बाद शानदार वापसी करते हुए जीत हासिल की। उन्होंने तीसरे और अंतिम राउंड में एनडेवेलो को 'स्टैंडिंग काउंट' के लिए मजबूर कर दिया जिसके बाद भारतीय मुक्केबाज ने 3-2 के विभाजित फैसले में जीत दर्ज की। हालांकि ओलंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन को महिलाओं के 70 किलोवर्ग के फाइनल में आस्ट्रेलिया की एम्मा सू ग्रीनट्री से खंडित फैसले में 4 . 1 से मिली हार से रजत पदक से संतोष करना पड़ा। अरूंधति ने इंग्लैंड की शेंटेले रीड को महिलाओं के 70 किलोवर्ग के फाइनल में 5 . 0 से हराया । नरेंदर को पुरूषों के 90 प्लस किलो में इंग्लैंड के डामार थॉमस ने 5 . 0 से हराया ।
प्रीति ने महिलाओं के 54 किग्रा फाइनल में कनाडा की स्कारलेट डेलगाडो को एकतरफा मुकाबले में 5-0 से हराकर स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद मौजूदा विश्व चैंपियन जैसमीन ने भी महिलाओं के 57 किग्रा वर्ग में उत्तरी आयरलैंड की गत चैंपियन माइकेला वॉल्श को 5-0 के समान अंतर से मात देकर स्वर्ण पदक पर कब्जा किया। साक्षी ने फिर महिलाओं के 51 किग्रा फाइनल में इंग्लैंड की रूबी वाइट को 5-0 से हराकर दिन में भारत को मुक्केबाजी का तीसरा स्वर्ण पदक दिलाया। प्रिया को महिलाओं के 60 किग्रा में कनाडा की मैरी बाथोल अल अहमदिएह से कड़ी चुनौती मिली लेकिन भारतीय मुक्केबाज ने 4-1 के विभाजित फैसले से पहला स्थान हासिल किया। इससे पहले भारत के दिन के तीसरे मुकाबले में जादूमणि सिंह को ऑस्ट्रेलिया के जाई डिक्सन के खिलाफ कड़े संघर्ष के बाद 0-5 से हार का सामना करना पड़ा और उन्हें रजत पदक मिला। लंबे कद के ऑस्ट्रेलियाई प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ शुरुआत में संघर्ष करने के बाद जादूमणि ने शानदार वापसी करते हुए पहला राउंड 3-2 से अपने नाम किया। डिक्सन ने हालांकि दूसरे राउंड में जोरदार वापसी की और सभी जज के सर्वसम्मत फैसले से 5-0 से जीत दर्ज की। ऑस्ट्रेलियाई मुक्केबाज ने इस बढ़त को बरकरार रखते हुए मुकाबला अपने नाम किया और भारत की स्वर्णिम लय को रोक दिया। महिलाओं के 57 किग्रा फाइनल में जैसमीन और वॉल्श के बीच पहला राउंड बेहद करीबी रहा, जिसमें दोनों मुक्केबाजों ने एक-दूसरे को कड़ी चुनौती दी। जैसमीन ने यह राउंड विभाजित फैसले से अपने नाम किया। उन्होंने दूसरे राउंड में शानदार पंच लगाए और सर्वसम्मत फैसले से जीत दर्ज की।
प्रीति ने स्वर्ण पदक मुकाबले में आक्रामक शुरुआत की। उन्होंने पहला राउंड सर्वसम्मत फैसले से जीता, जिसमें पांचों जज ने भारतीय मुक्केबाज के पक्ष में 10-8 का स्कोर दिया। बैंथमवेट वर्ग की विश्व रैंकिंग में तीसरे स्थान पर काबिज प्रीति ने दूसरे राउंड में भी अपना दबदबा कायम रखा और शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत के लिए दिन का पहला स्वर्ण पदक हासिल किया। -
ग्लास्गो. भारतीय जूडो खिलाड़ी उन्नति शर्मा ने शनिवार को यहां राष्ट्रमंडल खेलों में महिलाओं के 63 किग्रा से कम भार वर्ग के सेमीफाइनल में जगह बना ली जबकि हमवतन हर्ष टोकस और करणजीत सिंह मान क्वार्टर फाइनल में हारने के बाद रेपेचेज राउंड खेलेंगे। उन्नति ने अपने अभियान की शुरुआत प्री-क्वार्टर फाइनल में लामुलेला मगागुला पर एक मिनट 39 सेकेंड में इप्पोन के जरिए शानदार जीत के साथ की। क्वार्टर फाइनल में उन्नति ने न्यूजीलैंड की कोना क्रिस्टी को कड़े मुकाबले में हराया। उन्होंने पहले एक युको अंक अर्जित किया और फिर वाजा-आरी के दम पर जीत दर्ज कर अंतिम चार में जगह बनाई। पुरुषों के 90 किग्रा से कम भार वर्ग में करणजीत ने न्यूजीलैंड के एलियट कोनोली को तीन मिनट 29 सेकेंड में इप्पोन के जरिए हराकर क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया। लेकिन अंतिम आठ के मुकाबले में वह कनाडा के गियोम गॉलिन से तीन मिनट और 29 सेकेंड में हार गए। अब रेपेचेज राउंड में उनका सामना घरेलू प्रबल दावेदार स्कॉट क्यूसाक से होगा।
पुरुषों के 81 किग्रा वर्ग में टोकस को क्वार्टर फाइनल में साइप्रस के ओडिसियस जॉर्जाकिस के खिलाफ 0-1 से करीबी हार का सामना करना पड़ा। अब टोकस रेपेचेज मुकाबले में समोआ के पेनियामिना पर्सिवल का सामना करेंगे। महिलाओं के 70 किग्रा वर्ग के क्वार्टर फाइनल में इनुंगानबी तकेल्लाम्बम कनाडा की चार्ली थिबॉल्ट से तीन मिनट 23 सेकेंड में इप्पोन से हार गईं। -
ग्लास्गो. मुरली श्रीशंकर ने भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास में एक और अध्याय जोड़ दिया जब वह राष्ट्रमंडल खेलों में लंबी कूद स्पर्धा में रजत पदक के साथ लगातार दो पदक जीतने वाले पहले खिलाड़ी बन गए और घुटने की चोट से दो साल जूझने के बावजूद उन्होंने शानदार वापसी की । बर्मिंघम 2022 में रजत पदक जीतने वाले 27 वर्षीय श्रीशंकर ने इस बार 8.09 मीटर की सर्वश्रेष्ठ कूद लगाकर एक और रजत पदक अपने नाम किया। यह उपलब्धि उनके लिए इसलिए भी खास रही क्योंकि पिछले साल गंभीर घुटने की चोट के बाद उनके करियर पर संकट के बादल मंडरा रहे थे। श्रीशंकर से पहले इस स्पर्धा में भारत के लिए केवल सुरेश बाबू (पुरुष कांस्य, 1978), अंजू बॉबी जॉर्ज (महिला कांस्य, 2002) और एम प्रजुषा (महिला रजत, 2010) ही पदक जीत पाए थे। श्रीशंकर ने कहा ,'' मैं बहुत खुश हूं कि इन खेलों में भाग ले रहा हूं । विश्व स्तर पर फिर भारत के लिये खेलकर काफी खुशी महसूस कर रहा हूं । दो साल पहले मुझे लगा नहीं था कि ग्लास्गो में खेल पाऊंगा ।'' स्वर्ण पदक नहीं जीत पाने की निराशा हालांकि उनकी बातों में नजर आई । उन्होंने कहा ,'' मैं बर्मिंघम के रजत को स्वर्ण में बदलना चाहता था । अपने प्रदर्शन से खुश नहीं हूं और लगातार बेहतर करने का प्रयास करता रहूंगा ।'' उन्होंने कहा ,'' मुझे अपनी तकनीक पर काम करना होगा लेकिन इस पदक से एशियाई खेलों के लिये मेरा आत्मविश्वास बढेगा ।'' जमैका के पूर्व विश्व चैंपियन ताजे गेले ने 8.15 मीटर की कूद के साथ स्वर्ण पदक जीता जबकि मेजबान स्कॉटलैंड के स्टीफन मैकेंजी ने 8.08 मीटर की छलांग लगाकर कांस्य पदक हासिल किया। यह पदक श्रीशंकर के लिए इसलिए भी विशेष रहा क्योंकि अप्रैल 2024 में उनके घुटने की 'पैटलर टेंडन' फट गई थी। इसके बाद उन्हें सर्जरी करानी पड़ी और वह पेरिस ओलंपिक में हिस्सा नहीं ले सके। उस समय उनके करियर में वापसी को लेकर भी सवाल उठने लगे थे। हालांकि, श्रीशंकर ने शानदार वापसी करते हुए इन आशंकाओं को गलत साबित कर दिया।
अपने दूसरे राष्ट्रमंडल खेलों में हिस्सा ले रहे श्रीशंकर ने पहले प्रयास में 8.03 मीटर की कूद लगाई। दूसरे प्रयास में उन्होंने 8.09 मीटर का प्रदर्शन कर बढ़त बना ली। हालांकि यह बढ़त ज्यादा देर नहीं रही। जमैका के ताजे गेले ने 8.15 मीटर की कूद लगाकर पहला स्थान हासिल कर लिया। इसके बाद श्रीशंकर के तीसरे और चौथे प्रयास फाउल रहे। पांचवें प्रयास में उन्होंने 7.94 मीटर की कूद लगाई। यह पदक इस सत्र में उनके लगातार शानदार प्रदर्शन का भी प्रमाण है। श्रीशंकर इस साल लगातार आठ मीटर से अधिक की कूद लगाते रहे हैं। उन्होंने भुवनेश्वर में आयोजित राष्ट्रीय अंतरराज्यीय सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 8.38 मीटर के प्रयास से सत्र का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था। इसी प्रतियोगिता में भारत के दूसरे खिलाड़ी लोकेश सत्यनाथन ने पहले प्रयास में 7.97 मीटर की कूद लगाई और पांचवें स्थान पर रहे। -
ग्लास्गो. दो साल पहले मुरली श्रीशंकर की गंभीर चोट का इलाज कर रहे सर्जन ने कहा था कि वह शायद दोबारा कभी दौड़ नहीं सकेंगे, लंबी कूद प्रतियोगिता में उतरना तो दूर की बात है । उनके पिता एस मुरली घबरा गए थे क्योंकि अप्रैल 2024 में पलक्कड़ में नियमित अभ्यास सत्र के दौरान एक हादसे में उनका बेटा चोटिल हो गया था । पदक और आठ मीटर की कूद के बारे में तो भूल जाइये । पेरिस ओलंपिक 2024 भी भूल जाइये । श्रीशंकर के पिता और कोच बस अपने बेटे को बैसाखियों के बिना अपने पैरों पर फिर खड़े होते देखना चाहते थे । मुरली ने कहा ,'' मैं सिर्फ इतना चाहता था कि वह बैसाखियों के बिना चल सके ।
श्रीशंकर ने तमाम प्रतिकूल परिस्थितियों से लड़ते हुए बुधवार को राष्ट्रमंडल खेलों में लगातार दूसरा रजत पदक जीता तो ये यादें ताजा हो गई । बर्मिंघम में उपविजेता रहने के चार साल बाद उन्होंने 8 . 09 मीटर की कूद लगाकर वापसी के बाद अपना पहला अंतरराष्ट्रीय पदक जीता । मुरली ने कहा ,'' यह चमत्कार ही है कि वह वापसी कर सका और पदक जीत रहा है । ऐसी चोट के बाद कोई यह कमाल नहीं कर सकता था ।'' चोट के बाद वह 2024 में पूरे सत्र से बाहर रहे और ओलंपिक में पदार्पण भी नहीं कर पाये ।
मुरली ने कहा ,'' उसने धीरे धीरे अभ्यास शुरू किया । अप्रैल 2025 में उसने तीन मीटर की कूद लगाई । मैं उसे देख नहीं पाता था । मैं डर गया था । वह मानसिक रूप से बहुत मजबूत है। उसने सिर्फ अपनी वापसी पर फोकस रखा ।'' वहीं श्रीशंकर ने कहा ,'' मैं यह नहीं कहूंगा कि यह चमत्कार था । लेकिन मैं कृतज्ञ हूं कि वापिस देश के लिये खेल सका । यह पदक उन सभी के लिये है जिन्होंने पिछले दो साल के कठिन दौर में मेरा साथ दिया । उन सभी के लिये जिन्होंने कहा था कि मैं फिर कभी कूद नहीं सकूंगा ।'' -
नयी दिल्ली. यह पांच साल पहले की बात है जब अजिंक्य रहाणे ऑस्ट्रेलिया में कई स्टार खिलाड़ियों की अनुपस्थिति के कारण कमजोर पड़ी भारतीय टीम को टेस्ट श्रृंखला में अप्रत्याशित टेस्ट जीत दिलाने के बाद मुंबई में अपनी आवासीय सोसायटी में लौटे, तो उनके पड़ोसियों ने कंगारू के आकार के टॉपिंग वाले केक से उनका स्वागत किया। रहाणे ने उसे एक नज़र देखा और केक के ऊपर से टॉपिंग हटाने के बाद ही उसे काटने के लिए राजी हुए। कंगारू ऑस्ट्रेलियाई गौरव का प्रतीक है और अपनी जीत के बावजूद वह प्रतिद्वंद्वी टीम के राष्ट्रीय प्रतीक का अपमान नहीं करना चाहते थे। इस घटना से उस व्यक्ति के चरित्र का पता चलता है जिन्होंने शांत रहकर पूरी ईमानदारी और साहस के साथ अपना काम किया। रहाणे ने 85 टेस्ट मैचों में 12 शतकों सहित 5000 से अधिक रन बनाए। उन्होंने भारत की तरफ से अपना अंतिम मैच दो साल पहले खेला था और अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला किया। इससे हालांकि एक सवाल अब भी जवाब की तलाश में है कि क्या रहाणे अपनी क्षमता से कम प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी थे या भारतीय क्रिकेट ने उन्हें कम आंका? अपने करियर में अधिकतर समय रहाणे भारतीय क्रिकेट के दो दिग्गज खिलाड़ियों विराट कोहली और रोहित शर्मा के साए में खेलते रहे जिससे भारतीय क्रिकेट में उनके योगदान पर ज्यादा चर्चा नहीं हो पाई। इसके बावजूद उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में नियमित कप्तान कोहली की अनुपस्थिति और कुछ खिलाड़ियों के चोटिल हो जाने के बाद साबित किया कि वह एक कुशल और प्रेरणादायी कप्तान हैं। उन्होंने तब न सिर्फ कप्तान बल्कि एक बल्लेबाज के रूप में भी अच्छा प्रदर्शन करके भारत को ऐतिहासिक जीत दिलाई थी। लेकिन सभी शांत स्वभाव वाले खिलाड़ियों की तरह रहाणे ने कभी कोई शिकायत नहीं की जबकि उन्हें लंबे समय तक कप्तान नहीं रखा गया था। उन्होंने संकट के समय बखूबी टीम की कमान संभाली और दिखाया कि वह ड्रेसिंग रूम को शांत बनाए रखकर अपने काम को अंजाम देने में माहिर हैं। उन्होंने कैमरे के सामने कभी दिखावटी भावनाएं नहीं दिखाई। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ श्रृंखला जीतने के बाद उनके चेहरे पर संतुष्ट स्पष्ट नजर आ रही थी। इसके बाद नियमित कप्तान की वापसी पर वह बिना किसी शिकायत के अपनी दूसरी भूमिका निभाते रहे। शिकायत करना उनके स्वभाव में नहीं था। जब वे आठ साल के थे, तब उनके पिता मधुकर ने उन्हें उपनगरीय डोम्बिवली से अकेले मुंबई मैदान जाने को कहा, तब भी उन्होंने कोई शिकायत नहीं की। उन्होंने घरेलू क्रिकेट में कड़ी मेहनत से अपनी पहचान बनाई और सीमित अवसरों में भी भारत का शानदार नेतृत्व किया। अपने नाम के अनुरूप वह उन सभी छह टेस्ट मैचों में अजेय रहे जिनमें उन्होंने कप्तानी की थी। लॉर्ड्स की घास वाली पिच पर पहले दिन बनाया गया शतक एक ऐसी पारी थी जिसने उनके धैर्य और तकनीक दोनों को समान रूप से प्रदर्शित किया। लेकिन वाहवाही इशांत शर्मा को मिली जिन्होंने आखिरी दिन सात विकेट लिए थे। रहाणे पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा। वह संतुष्ट थे कि उन्होंने अपने काम को अच्छी तरह से निभाया। 2021 में मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में भी कुछ ऐसी ही स्थिति थी। एडिलेड में 36 रन पर ऑल आउट होने की शर्मनाक हार के बाद, मेलबर्न में रहाणे के शतक ने सीरीज बराबर करने वाली जीत की नींव रखी। उनकी कप्तानी रणनीति के लिहाज से बेहतरीन थी। यह अभिव्यक्ति में सरल और क्रियान्वयन में उत्कृष्ट थी।
मोहम्मद सिराज, शार्दुल ठाकुर, टी नटराजन और वाशिंगटन सुंदर जैसे गेंदबाजों का शानदार उपयोग करके उन्होंने भारत को श्रृंखला में जीत दिलाई थी। यह बहुत बड़ी उपलब्धि थी लेकिन उन्होंने ऋषभ पंत को भारत का ध्वज लेकर विजय जुलूस का नेतृत्व करने के लिए कहा और स्वयं दूसरी पंक्ति में चले गए। मेलबर्न में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ वनडे विश्व कप में भी उन्होंने एक शानदार पारी खेली थी, लेकिन वह जल्द ही लोगों की यादों से धुंधली पड़ गई। उस पारी के डेढ़ साल के भीतर ही उन्हें वनडे टीम से बाहर कर दिया गया। स्पिनरों का सामना करने में रहाणे को दिक्कतें आती थीं, जो उनकी कमजोरी बन गई और अंततः उनके टीम से बाहर होने का कारण बनी। लेकिन रहाणे मैदान पर हों या मैदान के बाहर, हर जगह अपनी शालीनता का परिचय देते थे।
इसका एक उदाहरण यह है जब एक घरेलू मैच के दौरान विपक्षी बल्लेबाज को अपशब्द कहने पर उन्होंने यशस्वी जायसवाल को मैदान से 'बाहर निकल जाने' का आदेश दे दिया था। उन्होंने अंपायर का इंतजार नहीं किया। सीधे जायसवाल को मैदान छोड़ने को कह दिया। वह भारतीय टीम से अंदर बाहर होते रहे लेकिन उन्होंने कभी अपना जज्बा नहीं खोया। उन्होंने विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप के फाइनल में वापसी की, जहां वह ओवल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शतक बनाने से चूक गए, लेकिन वेस्टइंडीज में कुछ असफलताओं ने उनके अंतरराष्ट्रीय करियर को समाप्त कर दिया। -
मुंबई. आस्ट्रेलिया में 2020 . 21 दौरे पर सिताराहीन भारतीय टीम को टेस्ट श्रृंखला में अपनी कप्तानी में ऐतिहासिक जीत दिलाने वाले भारत के सीनियर बल्लेबाज अजिंक्य रहाणे ने बृहस्पतिवार को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को यह कहकर अलविदा कह दिया कि आगे बढने का सही समय आ गया है । भारत के लिये 2013 में पदार्पण करने वाले 38 वर्ष के रहाणे ने 85 टेस्ट, 90 वनडे और 20 टी20 खेले हैं । वह 2023 में वेस्टइंडीज में टेस्ट श्रृंखला के बाद भारत के लिये नहीं खेले हैं । उन्होंने इस साल आईपीएल के दौरान भी हालांकि कहा था कि उन्होंने वापसी की उम्मीद छोड़ी नहीं है । उन्होंने इंस्टाग्राम पर वीडियो संदेश में कहा , जीवन का सत्य यही है कि हर शुरूआत का एक अंक होता है । जब समय आ जाये तो आपको उसका सम्मान करके आगे बढ जाना चाहिये । मैने बल्लेबाजी में हमेशा टाइमिंग पर भरोसा किया है और मुझे इसका महत्व पता है ।'' उन्होंने कहा , मुझे आज लग रहा है कि आगे बढने का सही समय है इसलिये मैं अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और सभी प्रारूपों से विदा ले रहा हूं ।'' रहाणे ने टेस्ट क्रिकेट में 12 शतक और 26 अर्धशतक के साथ 38 . 46 की औसत से 5077 रन बनाये। इसके अलावा 90 वनडे में 35 . 26 की औसत से तीन शतक और 24 अर्धशतक के साथ 2962 रन जोड़े । टी20 में उन्होंने 375 रन बनाये हैं । रहाणे के लिये सबसे बड़ी उपलब्धि 2021 का आस्ट्रेलिया दौरा थी जब नियमित कप्तान विराट कोहली की गैर मौजूदगी में उन्होंने सितारों के बिना खेल रही भारतीय टीम की अगुवाई की और तमाम कयासों को धता बताते हुए आस्ट्रेलिया को उसकी धरती पर बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी में 2 . 1 से हराया । एडीलेड में पहला टेस्ट बुरी तरह हारने के बाद कोहली पितृत्व अवकाश पर भारत लौट आये थे । एडीलेड में भारतीय टीम दूसरी पारी में 36 रन पर आउट हो गई थी । उसके बाद रहाणे ने कप्तानी की और जसप्रीत बुमराह तथा रविंद्र जडेजा जैसे अनुभवी खिलाड़ियों की गैर मौजूदगी में भी श्रृंखला जीती । दूसरे टेस्ट में रहाणे ने आस्ट्रेलियाई तेज आक्रमण का डटकर सामना करते हुए 223 गेंद में 112 रन बनाये । भारत ने ब्रिसबेन में चौथा और आखिरी टेस्ट तीन विकेट से जीता । वहीं मेलबर्न टेस्ट आठ विकेट से जीतकर श्रृंखला में बराबरी की थी । रहाणे ने अपने संदेश में कहा ,'' शुरूआत में अभ्यास के लिये डोम्बिवली से ट्रेन से सफर करने के दिनों से आज तक मैने खेल को सब कुछ दिया । हर दिन, हर पारी और बल्लेबाजी के हर मौके पर मेरा सपना हमेशा से भारत के लिये खेलने का था ।'' दुनिया भर में विभिन्न भाषाओं में क्रिकेट कमेंट्री करने वाले रहाणे ने कहा कि वह खेल से जुड़े रहेंगे । उन्होंने कहा ,'' मैने हमेशा से एक ही नियम माना है कि अपने से पहले टीम और देश को रखना है । मैने पूरी ईमानदारी से क्रिकेट खेला है। प्रथम श्रेणी क्रिकेटर के तौर पर मेरे पदार्पण से आज तक भारतीय क्रिकेट ने काफी प्रगति की है । मुझे गर्व है कि मैं पिछले 20 साल से इसका हिस्सा रहा हूं ।'' रहाणे ने कहा ,'' भारतीय क्रिकेट के साथ मेरा अध्याय खत्म हो रहा है लेकिन खेल के साथ नहीं । मैं अगली पीढी की मदद करना चाहता हूं और उन मूल्यों को साझा करना चाहता हूं जो क्रिकेट ने मुझे सिखाये हैं ।'' रहाणे ने आईपीएल में मुंबई इंडियंस, राजस्थान रॉयल्स, राइजिंग पुणे सुपरजाइंट, दिल्ली कैपिटल्स, चेन्नई सुपर किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स के लिये खेला है । केकेआर ने उन्हें कप्तानी से फारिग कर दिया है । रहाणे ने कहा कि उनके नाम का आशय होता है 'जिसे हराया नहीं जा सके' लेकिन क्रिकेट ने उन्हें सिखाया कि हार से बचा नहीं जा सकता । उन्होंने कहा ,'' इस सफर में कई बार हारे और कई बार जीते लेकिन क्रिकेट खेलने का आनंद, जीवनभर की यादें मेरे कैरियर का सबसे बड़ा संतोष रहा ।'' उन्होंने अपने प्रशंसकों से कहा ,'' अजिंक्य मतलब जिसे हराया नहीं जा सके लेकिन क्रिकेट ने कई बार हार का अनुभव कराया । क्रिकेटर के तौर पर हम कामयाबी से ज्यादा नाकामी देखते हैं ।मेरी टीम मैच हारी । मैने गलतियां की लेकिन एक जगह है जहां मैं कभी नहीं हारा और वह है आपके दिल में । आपने मुझे अपनों सा समझा । आपके प्यार, भरोसे और सहयोग के लिये धन्यवाद । कैप नंबर 278 अब विदा लेता है ।'' रहाणे ने 2024 . 25 सत्र में मुंबई की कप्तानी की । उनकी कप्तानी में मुंबई ने 2023 . 24 में रणजी ट्रॉफी जीती थी ।
- नयी दिल्ली। भारत ने जापान के आइची नागोया में 19 सितंबर से चार अक्टूबर तक होने वाले एशियाई खेलों के लिए बुधवार को घोषित की गई अपनी 20 सदस्यीय पुरुष हॉकी टीम में केवल एक बदलाव करके आदित्य अर्जुन लालागे की जगह मिडफील्डर राज कुमार पाल को शामिल किया है। राज कुमार को अगले महीने होने वाले विश्व कप के लिए टीम में शामिल नहीं किया गया था, लेकिन वह एशियाई खेलों के लिए वापसी करने में सफल रहे। लालागे नीदरलैंड और बेल्जियम की संयुक्त मेजबानी में 15 से 30 अगस्त तक होने वाले विश्व कप के लिए भारत की 20 सदस्यीय टीम में शामिल हैं। भारतीय टीम प्रबंधन और हॉकी इंडिया के चयनकर्ताओं ने इसके अलावा विश्व कप में खेलने वाली टीम में कोई अन्य बदलाव नहीं किया है।स्टार डिफेंडर और ड्रैग-फ्लिकर हरमनप्रीत सिंह टीम की कप्तानी करना जारी रखेंगे। भारत ने हरमनप्रीत की अगुवाई में ही 2024 में पेरिस ओलंपिक खेलों में कांस्य पदक जीता था। भारत की तरफ से सर्वाधिक मैच खेलने वाले अनुभवी मिडफील्डर मनप्रीत सिंह सहित कई अनुभवी खिलाड़ी टीम का हिस्सा हैं। भारतीय टीम अनुभव और युवा खिलाड़ियों का अच्छा मिश्रण है। भारत के मुख्य कोच क्रेग फुल्टन ने कहा, ''एशियाई खेलों के लिए चुनी गई भारतीय टीम बेहद अनुभवी है। हम जापान में मिलने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हैं जहां विजेता टीम 2028 के लॉस एंजिलिस ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करेगी। यही हमारा अंतिम लक्ष्य है।'' गोलकीपिंग विभाग में मोहित एचएस और सूरज करकेरा जबकि रक्षापंक्ति में जरमनप्रीत सिंह, कप्तान हरमनप्रीत, अमित रोहिदास, जुगराज सिंह, संजय, सुमित और यशदीप सिवाच शामिल हैं। राजिंदर सिंह, राज कुमार पाल, हार्दिक सिंह, मनप्रीत, नीलकांत शर्मा और विवेक सागर प्रसाद मध्य पंक्ति की जिम्मेदारी संभालेंगे, जबकि दिलप्रीत सिंह, शिलाानंद लाकड़ा, सुखजीत सिंह, मनदीप सिंह और अभिषेक अग्रिम पंक्ति में शामिल खिलाड़ी हैं। हरमनप्रीत के नेतृत्व में हांगझोउ एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारत की टीम मौजूदा चैंपियन के रूप में टूर्नामेंट में उतरेगी। उसे मेजबान जापान, कोरिया, बांग्लादेश, श्रीलंका और इंडोनेशिया के साथ पूल ए में रखा गया है। एशियाई खेलों की पुरुष हॉकी में कुल 12 टीम भाग लेंगी।भारतीय कप्तान हरमनप्रीत को एशियाई खेलों में अपनी टीम के अच्छे प्रदर्शन पर पूरा भरोसा है।उन्होंने कहा, ''चाहे युवा खिलाड़ी हों या सीनियर खिलाड़ी, मुझे सभी खिलाड़ियों पर पूरा भरोसा है कि वे मौकों का पूरा फायदा उठाएंगे। हमारा मुख्य लक्ष्य दबाव में नहीं आना, खेल का आनंद लेना और अपनी जिम्मेदारियों को समझना है।'' भारत एशियाई खेलों में अपने अभियान की शुरुआत 20 सितंबर को इंडोनेशिया के खिलाफ करेगा। इसके बाद वह पूल चरण में 22 सितंबर को श्रीलंका, 24 सितंबर को कोरिया, 26 सितंबर को जापान और 28 सितंबर को बांग्लादेश का सामना करेगा।एशियाई खेलों के लिए भारतीय पुरुष हॉकी टीम इस प्रकार है:गोलकीपर: मोहित एचएस, सूरज करकेरा।डिफेंडर: जरमनप्रीत सिंह, हरमनप्रीत सिंह (कप्तान), अमित रोहिदास, जुगराज सिंह, संजय, सुमित, यशदीप सिवाच। मिडफील्डर: राजिंदर सिंह, राज कुमार पाल, हार्दिक सिंह, मनप्रीत सिंह, नीलकांत शर्मा, विवेक सागर प्रसाद। फॉरवर्ड: दिलप्रीत सिंह, शिलानंद लाकड़ा, सुखजीत सिंह, मंदीप सिंह, अभिषेक।
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नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय मुक्केबाज अरुंधति चौधरी ने बुधवार को महिलाओं के 70 किग्रा भार वर्ग के क्वार्टर फाइनल में न्यूजीलैंड की मॉर्गन हेंडरसन को 3-1 के स्प्लिट फैसले से हराकर पदक पक्का कर लिया। इस जीत के बाद अरुंधति ने खुलासा किया कि मुकाबले से पहले वजन कम करना उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती थी और उन्होंने बाउट से पहले 2 किग्रा वजन घटाया।
अरुंधति चौधरी ने तीन राउंड के मुकाबले में संयम, आक्रामकता और रणनीतिक अनुशासन का शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने कड़े मुकाबले में हेंडरसन को मात दी। तीन जजों ने सभी राउंड अरुंधति के पक्ष में 30-26 के स्कोर से दिए, जबकि एक जज ने न्यूजीलैंड की मुक्केबाज के पक्ष में फैसला सुनाया। पांचवें जज का स्कोर 28-28 से बराबर रहा, लेकिन हेंडरसन के एक प्वाइंट कटने के कारण फैसला अरुंधति के पक्ष में चला गया।इस जीत के साथ अरुंधति चौधरी ने सेमीफाइनल में जगह बना ली और भारत के लिए कम से कम ब्रॉन्ज मेडल सुनिश्चित कर दिया। कॉमनवेल्थ गेम्स के बॉक्सिंग प्रारूप के तहत सेमीफाइनल में हारने वाले दोनों मुक्केबाजों को ब्रॉन्ज मेडल दिया जाता है। क्वार्टर फाइनल मुकाबले के बाद अरुंधति चौधरी ने बताया कि कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में रिंग में उतरने से पहले उनकी सबसे बड़ी चुनौती कोई दूसरी मुक्केबाज नहीं, बल्कि वजन करने वाली मशीन थी। उन्होंने कहा कि कुछ कारणों से उनका वजन बढ़ गया था, जिसे नियंत्रित करने के लिए उन्होंने मुकाबले से पहले 2 किग्रा वजन कम किया।अरुंधति चौधरी ने ‘आईएएनएस’ से बातचीत में कहा, “कुछ वजहों से मेरा वजन बढ़ गया था, लेकिन वजन को मेंटेन रखने के लिए मैंने कल 2 किलो वजन कम किया। यह वाकई बहुत मुश्किल था।” उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना है। अरुंधति ने अपनी इस उपलब्धि को छोटे भाई और परिवार को समर्पित करते हुए भारत के युवाओं को संदेश दिया कि लोगों के आशीर्वाद और समर्थन की वजह से ही वह इस मुकाम तक पहुंची हैं। अरुंधति चौधरी ने कहा कि वह कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही हैं। भारतीय मुक्केबाजी टीम का प्रदर्शन भी इस टूर्नामेंट में शानदार रहा है और कई बॉक्सर अपनी-अपनी भार श्रेणियों में आगे बढ़कर देश की पदक उम्मीदों को मजबूत कर रहे हैं। - ग्लास्गो एशियाई खेलों के कांस्य पदक विजेता भारतीय एथलीट गुलवीर सिंह ने मंगलवार को यहां राष्ट्रमंडल खेलों की पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक जीतकर नया इतिहास रचा। इसके साथ ही वह इस स्पर्धा में राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए। एथलेटिक्स में भारत का यह दूसरा रजत पदक है। इससे पहले सर्वेश कुशारे ने पुरुषों की ऊंची कूद में रजत पदक जीता था। राष्ट्रीय रिकॉर्डधारी गुलवीर ने 'स्कॉट्सटाउन स्टेडियम' में लगातार हो रही बारिश और पानी से भरे ट्रैक जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद पूरी दौड़ में अग्रणी धावकों के साथ अपनी जगह बनाए रखी। अंतिम चरण में उन्होंने जबरदस्त तेजी दिखाई और 27 मिनट 49.78 सेकंड का समय निकालकर दूसरा स्थान हासिल किया। ऑस्ट्रेलिया के काई रॉबिन्सन ने 27:48.93 सेकंड के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि आइल ऑफ मैन के डेविड मुलार्की 27:50.28 सेकंड के साथ कांस्य पदक जीतने में सफल रहे।गुरवीर ने कहा, ''पदक जीतकर हमेशा अच्छा लगता है। दौड़ अच्छी रही, बारिश भी हुई, लेकिन जब आप पदक जीतते हैं तो बारिश हो, धूप हो, गर्मी हो या कुछ और हो, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।'' उन्होंने कहा, ''मैंने सब कुछ भगवान पर छोड़ दिया था। दौड़ से पहले मैंने सर्वशक्तिमान से कहा था, देख लेना प्रभु।'' उत्तर प्रदेश के अतरौली के रहने वाले सेना के जवान से जब पूछा गया कि क्या उन्होंने इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद अपने परिवार से बात की है, तो वे हंस पड़े और खुलासा किया कि उन्होंने अभी तक उन्हें दौड़ के बारे में बताया भी नहीं है। उन्होंने कहा, ''मेरा परिवार अभी सो रहा होगा। मैं उन्हें दौड़ वाले दिन नहीं बताता, कल बताऊंगा। मैं उन्हें परेशान नहीं करता, वे बाद में देख सकते हैं। अभी मेरा पूरा ध्यान 5000 मीटर की दौड़ पर है। उम्मीद है ईश्वर की कृपा मुझ पर बनी रहेगी।''अमेरिका में कोच स्कॉट सिमंस के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण ले रहे गुलवीर ने मजबूत प्रतिस्पर्धा के बीच बेहतरीन रणनीति अपनाई। इस दौड़ में कीनिया के 2023 की विश्व चैंपियनशिप के पदक विजेता डेनियल एबेयो जैसे कई दिग्गज अफ्रीकी धावक भी शामिल थे। लगातार बारिश के बावजूद गुलवीर अधिकांश समय शीर्ष समूह के साथ बने रहे और अंतिम लैप में अपनी गति को बढाकर मुलार्की को पीछे छोड़ते हुए रजत पदक पर कब्जा जमाया। गुलवीर के इस प्रदर्शन के साथ एक और बड़ा इतिहास भी बना। वर्ष 1986 के बाद पहली बार राष्ट्रमंडल खेलों की पुरुष 10,000 मीटर स्पर्धा के पदक विजेताओं में किसी भी अफ्रीकी धावक का नाम शामिल नहीं रहा। यह उपलब्धि 2022 के बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में अविनाश साबले द्वारा 3000 मीटर स्टीपलचेज में कीनिया के लंबे समय से चले आ रहे वर्चस्व को तोड़ते हुए रजत पदक जीतने की याद भी ताजा कर गई।
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बेंगलुरु. भारतीय महिला हॉकी टीम बुधवार को जर्मनी के फ्रैंकफर्ट के लिए रवाना हो गई, जहां वह अगले महीने नीदरलैंड और बेल्जियम की संयुक्त मेजबानी में होने वाले एफआईएच विश्व कप की तैयारियों के अंतिम चरण में भाग लेगी। टीम बेंगलुरु से मुंबई होते हुए फ्रैंकफर्ट के लिए अपनी अगली उड़ान पर सवार हुई। भारतीय टीम अभ्यास शिविर में भाग लेने के अलावा 31 जुलाई और एक अगस्त को जर्मनी के खिलाफ अभ्यास मैच भी खेलेगी ताकि टीम के संयोजन को बेहतर बनाया जा सके और टीम यूरोपीय परिस्थितियों से सामंजस्य बिठा सके। विश्व कप की तैयारियों को आगे बढ़ाने के लिए भारतीय टीम दो अगस्त को नीदरलैंड के एम्स्टर्डम के लिए रवाना होगी। भारत विश्व कप में 16 अगस्त को चीन के खिलाफ अपने अभियान की शुरुआत करेगा। इसके बाद वह पूल डी में दक्षिण अफ्रीका और इंग्लैंड के खिलाफ मैच खेलेगा। भारतीय कप्तान सलीमा टेटे को 15 से 30 अगस्त तक होने विश्व कप में अच्छे प्रदर्शन पर पूरा भरोसा है।
सलीमा ने टीम के रवाना होने से पहले कहा, ''पूरी टीम चुनौती के लिए तैयार है। हमने अभ्यास शिविर में अच्छी तैयारी की है। हम अपनी अच्छी लय को अभ्यास मैचों और फिर विश्व कप में बरकरार रखना चाहते हैं।'' उन्होंने कहा, ''चीन के खिलाफ पहला मैच बेहद महत्वपूर्ण होगा। हम टूर्नामेंट की सकारात्मक शुरुआत करना चाहते हैं। एक टीम के रूप में हम अच्छा प्रदर्शन करके देश का गौरव बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय बॉक्सिंग टीम ने बुधवार को तीसरा मेडल पक्का कर लिया। पुरुषों के 60 किग्रा भार वर्ग के क्वार्टर फाइनल मुकाबले में सचिन सिवाच ने बोत्सवाना के ट्रेजर मोरेमी को 5-0 से हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई। एसईसी हॉल-5 में खेले गए मुकाबले में सचिन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सभी जजों का भरोसा जीता और भारत के लिए पदक सुनिश्चित किया।मुकाबले के पहले राउंड में सभी 5 जजों ने सचिन सिवाच के पक्ष में फैसला सुनाया। इसके बाद दूसरे राउंड में भी भारतीय मुक्केबाज ने अपना दबदबा कायम रखा और सभी जजों से अंक हासिल किए। हालांकि, तीसरे राउंड में ट्रेजर मोरेमी एक जज को प्रभावित करने में सफल रहे, लेकिन बाकी चार जजों ने सचिन के पक्ष में फैसला दिया। इस तरह भारतीय मुक्केबाज ने सर्वसम्मत फैसले से मुकाबला अपने नाम कर लिया।
कॉमनवेल्थ गेम्स के बॉक्सिंग प्रारूप के तहत सेमीफाइनल में हारने वाले दोनों मुक्केबाजों को ब्रॉन्ज मेडल दिया जाता है। सचिन सिवाच की क्वार्टर फाइनल जीत के साथ ही उनका पदक पक्का हो गया है। अब उनकी नजर सेमीफाइनल मुकाबला जीतकर गोल्ड मेडल के लिए होने वाले फाइनल में जगह बनाने पर होगी।सचिन सिवाच कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के बॉक्सिंग इवेंट में सेमीफाइनल में पहुंचने वाले छठे भारतीय मुक्केबाज बन गए हैं। उनसे पहले प्रीति, प्रिया, जादुमनी सिंह, साक्षी और अरुंधति चौधरी अपनी-अपनी भार श्रेणियों में अंतिम चार में जगह बना चुकी हैं।मंगलवार को प्रिया ने महिलाओं के 60 किग्रा वर्ग के क्वार्टर फाइनल में स्कॉटलैंड की नियाम मिशेल को 4-1 से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया था। वहीं, प्रीति ने महिलाओं के 54 किग्रा वर्ग में नॉर्दर्न आयरलैंड की निकोल क्लाइड को 5-0 से मात दी। मंगलवार देर रात जादुमनी सिंह ने पुरुषों के 55 किग्रा वर्ग के क्वार्टर फाइनल में म्वाले म्वेंगो को 5-0 से हराकर अंतिम चार में जगह बनाई।बुधवार को सचिन सिवाच से पहले साक्षी और अरुंधति चौधरी ने भारत के लिए पदक सुनिश्चित किए। महिलाओं के 51 किग्रा वर्ग के क्वार्टर फाइनल में साक्षी ने नॉर्दन आयरलैंड की कैटलिन फ्रायर्स को 5-0 से हराया। इसके बाद अरुंधति चौधरी ने न्यूजीलैंड की मॉर्गन हेंडरसन को 3-1 के विभाजित फैसले से मात देकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करने वाले भारतीय खिलाड़ियों शर्मिला धनकड़, सर्वेश कुशारे और वल्लुरी अजय बाबू को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी हैं। प्रधानमंत्री ने महिला शॉट पुट F57 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली शर्मिला धनकड़ की ऐतिहासिक उपलब्धि की सराहना की। उन्होंने कहा कि शर्मिला ने 9.81 मीटर का सीजन का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया और कॉमनवेल्थ गेम्स में पैरा एथलेटिक्स में भारत के 20 साल के स्वर्ण पदक के इंतजार को समाप्त कर दिया।प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा, “ग्लासगो में इतिहास रच दिया गया है। महिला शॉट पुट F57 स्पर्धा में शानदार स्वर्ण पदक और सीजन का सर्वश्रेष्ठ थ्रो करने पर शर्मिला को हार्दिक बधाई। इस शानदार प्रदर्शन के साथ कॉमनवेल्थ गेम्स में पैरा एथलेटिक्स के स्वर्ण पदक का दो दशक लंबा इंतजार खत्म हुआ है। उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं।”इसके अलावा प्रधानमंत्री ने पुरुष हाई जंप में रजत पदक जीतने वाले सर्वेश कुशारे की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि सर्वेश का दृढ़ संकल्प और निरंतरता प्रेरणादायक है।उन्होंने लिखा, “कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पुरुष हाई जंप में शानदार रजत पदक जीतने पर सर्वेश कुशारे को बधाई। उनका संकल्प और निरंतरता काबिल-ए-तारीफ है। भारत को उन पर गर्व है। भविष्य के लिए उन्हें ढेरों शुभकामनाएं।”
प्रधानमंत्री मोदी ने भारोत्तोलन में पुरुष 79 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतने वाले वल्लुरी अजय बाबू की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि अजय बाबू ने रजत पदक जीतने के साथ स्नैच स्पर्धा में नया कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड भी अपने नाम किया है।प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा, “भारोत्तोलन में भारत के लिए एक और गौरवपूर्ण उपलब्धि। वल्लुरी अजय बाबू ने पुरुष 79 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है। उन्होंने स्नैच स्पर्धा में नया कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड भी बनाया। उन्हें हार्दिक बधाई और भविष्य के लिए शुभकामनाएं।” प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय खिलाड़ियों का यह प्रदर्शन देश के लिए गर्व की बात है और आने वाले समय में वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और भी बड़ी सफलताएं हासिल करेंगे। -
ग्लास्गो. भारत के लंबी कूद के खिलाड़ी एम श्रीशंकर ने सोमवार को यहां क्वालीफाइंग स्तर पार करके राष्ट्रमंडल खेलों के फाइनल में जगह बनाई जबकि लोकेश सत्यनाथन भी शीर्ष 12 में जगह बनाकर आगे बढ़ने में सफल रहे। श्रीशंकर ने ग्रुप ए में अपने पहले ही प्रयास में 8.01 मीटर की दूरी तय करके सीधे फाइनल के लिए क्वालीफाई कर लिया। उनका सत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 8.38 मीटर है। फाइनल के लिए क्वालीफाइंग स्तर आठ मीटर या सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले कम से कम 12 खिलाड़ी थे।
सत्ताइस साल के श्रीशंकर ग्रुप ए से सीधे क्वालीफाई करने वाले एकमात्र खिलाड़ी रहे। इस ग्रुप से पांच अन्य खिलाड़ियों ने शीर्ष 12 में जगह बनाकर फाइनल में प्रवेश किया। वर्ष 2022 में खेलों के पिछले सत्र में जीते रजत पदक को बेहतर करने की उम्मीद के साथ उतरे श्रीशंकर ने कहा कि हालात मुश्किल थे। श्रीशंकर ने पीटीआई से कहा, ''क्वालीफिकेशन काफी अच्छा रहा, सभी के लिए हालात मुश्किल थे। ठंड थी और हवा चल रही थी और बीच-बीच में बारिश भी हो रही थी लेकिन मैंने पहले ही प्रयास में क्वालीफिकेशन स्तर हासिल कर लिया इसलिए फाइनल के लिए बहुत उत्साहित हूं।'' अप्रैल 2024 में घुटने की चोट से उबरने के बाद वह वापसी की राह पर हैं। उनका 'पटेला टेंडन' फट गया था और यह चोट उनके करियर के लिए खतरा बन गई थी। उनकी सर्जरी भी हुई थी। इस चोट की वजह से वह पेरिस ओलंपिक से चूक गए थे। उन्होंने पिछले महीने ही भुवनेश्वर में राष्ट्रीय अंतर राज्यीय सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में अपना सत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था। ग्रुप बी में चुनौती पेश कर रहे सत्यनाथन ने अपने पहले ही प्रयास में 7.77 मीटर की दूरी तय की। वह ग्रुप बी में रेगन कोरिन (7.84 मीटर) के बाद चौथे स्थान पर रहे। जमैका के तेजाय गेल (8.10 मीटर) और उरोय रेयान (8.04 मीटर) ने ग्रुप बी से सीधे फाइनल में जगह बनाई। -
नई दिल्ली। ग्लासगो में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के मुक्केबाज अंकुश और सचिन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने-अपने भार वर्ग के क्वार्टरफाइनल में जगह बना ली है। अब दोनों भारतीय मुक्केबाज पदक से सिर्फ एक जीत दूर हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स के बॉक्सिंग प्रारूप के अनुसार क्वार्टरफाइनल जीतने पर पदक सुनिश्चित हो जाएगा।
पुरुषों के 80 किग्रा वर्ग में 2025 वर्ल्ड बॉक्सिंग कप के रजत पदक विजेता अंकुश ने प्री-क्वार्टरफाइनल में एंटीगुआ और बारबुडा के जलान को 5-0 के सर्वसम्मत निर्णय से हराया। भारतीय मुक्केबाज ने मुकाबले की शुरुआत से अंत तक दबदबा बनाए रखा और तीनों राउंड अपने नाम किए। पांचों जजों ने उन्हें प्रत्येक राउंड में सर्वोच्च अंक देते हुए एकतरफा विजेता घोषित किया। इस जीत के साथ अंकुश क्वार्टरफाइनल में पहुंच गए हैं। यदि वह अपना अगला मुकाबला जीत लेते हैं तो उनका पदक सुनिश्चित हो जाएगा।पुरुषों के 60 किग्रा वर्ग में सचिन ने इंग्लैंड के विलियम हेविट को 4-1 के विभाजित निर्णय से हराकर अंतिम आठ में जगह बनाई। उन्होंने पूरे मुकाबले में तेज कॉम्बिनेशन, सटीक पंच और प्रभावी रणनीति का प्रदर्शन किया। मुकाबले में चार जजों ने सचिन के पक्ष में 29-27 का स्कोर दिया, जबकि एक जज ने विलियम हेविट के पक्ष में फैसला सुनाया। मुकाबले के दौरान एक अंक गंवाने के बावजूद सचिन ने साफ-सुथरे पंच, आक्रामक खेल और रिंग पर नियंत्रण बनाए रखते हुए जीत दर्ज की। अंकुश और सचिन दोनों अब अपने-अपने वर्ग के क्वार्टरफाइनल में पहुंच चुके हैं। दोनों के पास अब एक और जीत के साथ कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए पदक सुनिश्चित करने का मौका होगा। -
नई दिल्ली। केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने सोमवार को कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में कांस्य पदक जीतने वाले पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार से मुलाकात की और उन्हें 10 लाख रुपये के नकद इनाम से सम्मानित किया। खेल मंत्री ने एक्स पर लिखा, “पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार से मिलकर खुशी हुई। उन्होंने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में कांस्य पदक जीतकर भारत को गर्व महसूस कराया। उनकी यह कामयाबी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पैरा-स्पोर्ट्स को मुख्यधारा में लाने और यह पक्का करने के विजन का सबूत है कि हमारे पैरा-एथलीटों को हर दूसरे एथलीट की तरह ही प्रथामिकता, सहयोग और अवसर मिलें।”
झंडू कुमार ने पुरुषों की हैवीवेट पैरा-पावरलिफ्टिंग में 130.9 अंक और 190 किग्रा की बेस्ट लिफ्ट के साथ कांस्य पदक जीतकर पदक तालिका में भारत को बढ़त दिलाई। दो ग्रुप में मुकाबला करते हुए, झंडू ने 130.9 अंक के श्रेष्ठ परिणाम के साथ ग्रुप बी में शीर्ष स्थान हासिल किया। युगांडा के डेनिस मबाजीरा (114.1) और ऑस्ट्रेलिया के बेन राइट (110.9) से आगे रहकर पदक की दौड़ में आगे बढ़े।लेकिन, कंबाइंड स्टैंडिंग में, नाइजीरिया के रिलुवान इदरीस ने 132.8 का सबसे अच्छा लिफ्ट करके स्वर्ण पदक जीता, जबकि इंग्लैंड के मैथ्यू हार्डिंग ने 131.0 के साथ रजत जीता। झंडू का 130.9 का प्रयास कांस्य पदक पक्का करने के लिए काफी था। वह रजत के लिए हुए करीबी मुकाबले में हार्डिंग से सिर्फ 0.1 पीछे रहे।बिहार के नालंदा जिले के हरनौत में जन्मे झंडू जन्म से ही पोलियो से पीड़ित थे। उन्होंने 2017 में एक पैरा एथलेटिक्स एथलीट के तौर पर अपना करियर शुरू किया। झंडू ने एफ55 शॉट पुट और डिस्कस थ्रो इवेंट्स में हिस्सा लिया, जहां उन्होंने कई जिलास्तरीय और राज्य स्तरीय पदक जीते। इस दौरान, जिम में स्ट्रेंथ ट्रेनिंग से पावरलिफ्टिंग में उनकी दिलचस्पी बढ़ी। राजिंदर सिंह राहेलू के मार्गदर्शन में, झंडू तेजी से भारत के शीर्ष पैरा पावरलिफ्टर्स में से एक बन गए। 2025 में, उन्होंने नेशनल चैंपियनशिप में 205 किग्रा लिफ्ट के साथ एक नया नेशनल रिकॉर्ड बनाया और खेलो इंडिया पैरा गेम्स में इसे और बेहतर करके 206 किग्रा कर लिया। उन्होंने बीजिंग वर्ल्ड कप 2025 में कांस्य पदक जीता, इसके बाद एशियन और ओशिनिया चैंपियनशिप 2026 में कांस्य पदक जीतकर कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के लिए क्वालीफाई किया। - ग्लास्गो (स्कॉटलैंड)। राजनांदगांव की बेटी भारतीय भारोत्तोलक ज्ञानेश्वरी यादव ने ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में महिलाओं के 53 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक अपने नाम किया। ज्ञानेश्वरी ने कुल 199 (स्नैच में 88 और क्लीन एंड जर्क में 111 किलोग्राम) भार उठाया। गोल्ड मेडल नाइजीरिया के ओनेमो डीडी ने जीता। उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स का नया रिकॉर्ड सेट किया। डीडी ने कुल 206 किलोग्राम (स्नैच में 93 और क्लीन एंड जर्क में 113 किलोग्राम) भार उठाया। छत्तीसगढ़ पुलिस में असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर ज्ञानेश्वरी यादव लोअर वेट कैटेगरी में भारत की बेहतरीन वेटलिफ्टर्स में से एक हैं। 2025 में छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े खेल सम्मान 'गुंडाधुर सम्मान' से नवाजी गई ज्ञानेश्वरी यादव ने ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में पहले ही प्रयास में 82 किलोग्राम का भार सफलतापूर्वक उठाया। उन्होंने अपना दूसरा प्रयास 85 किलोग्राम का लिया और उसे सफलतापूर्वक पूरा किया.। उन्होंने तीसरे प्रयास में 88 किलोग्राम भार उठाया। क्लीन एंड जर्क के पहले प्रयास में उन्होंने 103 किलोग्राम भार उठाकर सिल्वर मेडल पक्का कर लिया। उन्होंने अपने दूसरे प्रयास में 107 किलोग्राम भार उठाया. उन्होंने अपने तीसरे प्रयास में 111 किलोग्राम भार उठाया और सिल्वर मेडल पर मुहर लगा दी.।वेटलिफ्टिंग में भारत का यह चौथा पदकज्ञानेश्वरी देवी के इस पदक के साथ ही वेटलिफ्टिंग में भारत ने 4 मेडल जीत लिए हैं, जिसमें एक गोल्ड और दो सिल्वर मेडल शामिल हैं। इसके अलावा पावरलिफ्टिंग में एक कांस्य मेडल भारत के नाम है। भारत को इस बार वेटलिफ्टिंग में पहला मेडल झंडू कुमार ने पैरा पॉवरलिफ्टिंग में दिलाया जब उन्होंने कांस्य पदक जीता था। उसके बाद ऋषिकांत सिंह ने सिल्वर मेडल जीता था। भारत को पहला गोल्ड मेडल मीराबाई चानू ने दिलाया। उसके बाद राजा मुथुपंडी ने सिल्वर मेडल दिलाया।
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मस्कट. भारतीय महिला हॉकी टीम शनिवार को यहां एफआईएच यूथ हॉकी फाइव्स एशियाई चैंपियनशिप के फाइनल में चीन से 2-4 से हारकर उपविजेता रही। इससे पहले दिन में भारत ने सेमीफाइनल में कजाकिस्तान को 8-1 से हराकर फाइनल में अपनी जगह पक्की की थी।
इस प्रतियोगिता में अपने शानदार प्रदर्शन के दम पर भारत ने एफआईएच यूथ हॉकी फाइव्स विश्व कप के लिए भी क्वालीफाई कर लिया है। फाइनल में चीन ने जोरदार शुरुआत करते हुए पहले ही मिनट में टोंगटोंग लू के गोल से बढ़त हासिल कर ली।
केक्सिन तांग ने पांचवें मिनट में चीन की बढ़त को दोगुना कर दिया, जिसके एक मिनट बाद जियाक्सिन गुओ ने स्कोर 3-0 कर दिया। भारत ने 13वें मिनट में नौशीन नाज के गोल से अंतर कम किया लेकिन चेन गे ने 19वें मिनट में चीन को फिर से तीन गोल की बढ़त दिला दी। पुष्पा मांझी ने 20वें मिनट में गोल करके भारत की उम्मीद जगाई लेकिन चीन ने अपनी बढ़त बरकरार रखते हुए खिताब जीत लिया। हॉकी इंडिया ने भारतीय टीम के प्रत्येक खिलाड़ी को एक लाख रुपये और सहयोगी स्टाफ के प्रत्येक सदस्य को 50,000 रुपये का नकद पुरस्कार देने की घोषणा की। -
ग्लास्गो. भारतीय पुरुष चार गुणा 200 मीटर फ्रीस्टाइल रिले टीम ने रविवार को यहां राष्ट्रमंडल खेलों की तैराकी स्पर्धा में अपनी हीट में तीसरा स्थान हासिल कर फाइनल में प्रवेश कर पदक जीतने की उम्मीद कायम रखी है। धक्षण शशिकुमार, अनीश सुनील कुमार गौड़ा, आर्यन नेहरा और श्रीहरि नटराज की भारतीय चौकड़ी ने सात मिनट 39.48 सेकंड का समय निकाला। टीम अपनी हीट में तैराकी की मजबूत टीमों ऑस्ट्रेलिया (7:08.66) और इंग्लैंड (7:18.13) के बाद तीसरे स्थान पर रही। कनाडा के प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं लेने के कारण इस हीट में केवल चार टीमें उतरी थीं। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, भारत और जर्सी चारों ने आठ टीमों के फाइनल के लिए क्वालीफाई कर लिया। ऑस्ट्रेलिया ने शुरुआत से अंत तक मुकाबले पर अपना दबदबा बनाए रखा, जबकि तीसरे स्थान के लिए भारत और जर्सी के बीच कड़ा संघर्ष देखने को मिला। जर्सी की टीम 350 मीटर तक आगे थी, लेकिन इसके बाद भारत ने बढ़त बना ली। हालांकि 450 मीटर के बाद जर्सी ने फिर तीसरा स्थान हासिल कर लिया। भारतीय तैराकों ने अंतिम चरण में शानदार प्रदर्शन करते हुए 700 मीटर के बाद तीसरा स्थान दोबारा हासिल किया और आखिरी 100 मीटर तक उसे बरकरार रखते हुए जर्सी को पीछे छोड़ फाइनल का टिकट पक्का कर लिया। दोनों हीट के संयुक्त परिणामों में भारत ने पांचवें सबसे तेज समय के साथ फाइनल में जगह बनाई। ऑस्ट्रेलिया, स्कॉटलैंड, इंग्लैंड और वेल्स ने भारत से बेहतर समय दर्ज किया। भारतीय चौकड़ी के इस प्रदर्शन से फाइनल में पदक की दौड़ में चुनौती पेश करने की उम्मीद जगी है। टीम अगर अपनी हीट के समय में सुधार करने में सफल रहती है तो उसके पास पोडियम पर जगह बनाने का बेहतर मौका होगा।
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ग्लासगो. भारत के ऋषिकांत सिंह चानमबम ने रविवार को यहां राष्ट्रमंडल खेलों की पुरुषों की 60 किग्रा भारोत्तोलन स्पर्धा में रजत पदक जीता। ऋषिकांत ने स्नैच में 121 किग्रा वजन उठाकर खेलों का नया रिकॉर्ड बनाया। हालांकि क्लीन एवं जर्क में वह केवल 143 किग्रा वजन ही उठा सके। इस तरह उन्होंने कुल 264 किग्रा भार उठाकर दूसरा स्थान हासिल किया। मलेशिया के बिन कसदान मोहम्मद अनीक ने कुल 273 किग्रा (121 और 152 किग्रा) वजन उठाकर स्वर्ण पदक जीता और खेलों का नया रिकॉर्ड भी बनाया। कीनिया के जोशुआ अमुंगा एमबोया ने कुल 260 किग्रा वजन उठाकर कांस्य पदक जीता। उन्होंने स्नैच में 115 जबकि क्लीन एवं जर्क में 145 किग्रा वजन उठाया। स्नैच में ऋषिकांत ने सफलतापूर्वक 116 किग्रा वजन उठाकर शुरुआत की और फिर 119 किग्रा और आखिर में 121 किग्रा वजन उठाया। क्लीन एवं जर्क में ऋषिकांत ने पहले प्रयास में 143 किग्रा वजन सफलतापूर्वक उठाया लेकिन दूसरे प्रसास में 148 और तीसरे प्रयास में 151 किग्रा वजन उठाने में नाकाम रहे और स्वर्ण पदक जीतने से चूक गए।
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ग्लास्गो. स्टार भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा का मुकाबला सोमवार से शुरू होने वाली राष्ट्रमंडल खेलों की एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं में मौजूदा ओलंपिक चैंपियन पाकिस्तान के अरशद नदीम और श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिरागे से होगा जबकि भारत की नजरें पिछले सत्र की तुलना में अधिक पदक जीतने पर होंगी। नीरज के अलावा भारत के स्वर्ण पदक के प्रमुख दावेदारों में लंबी कूद के खिलाड़ी मुरली श्रीशंकर शामिल हैं जिन्होंने 2022 के बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीता था। वहीं ऊंची कूद के खिलाड़ी सर्वेश कुशारे भी स्वर्ण पदक के दावेदार हैं। उन्होंने हाल ही में 2.31 मीटर के प्रयास से राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया है। भारतीय टीम प्रबंधन को पुरुषों की भाला फेंक, लंबी कूद, ऊंची कूद और त्रिकूद स्पर्धा में दो-दो पदक की उम्मीद है। इसके अलावा पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़, डेकाथथन और महिलाओं की 10,000 मीटर पैदल चाल में भी पदक मिलने की संभावना जताई जा रही है। पुरुषों की 100 मीटर बाधा दौड़, गोला फेंक और महिलाओं की 3000 मीटर स्टीपलचेज़ में भी भारत को पदक का दावेदार माना जा रहा है। यदि ऐसा होता है तो भारत कुल पदक के मामले में बर्मिंघम में जीते गए आठ पदक (एक स्वर्ण, चार रजत और तीन कांस्य) से आगे निकल सकता है। हालांकि स्वर्ण की संख्या को लेकर कोई निश्चितता नहीं है क्योंकि अधिकांश एथलेटिक्स स्पर्धाओं में विश्वस्तरीय खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। नीरज सितंबर 2025 से कमर दर्द की समस्या से परेशान हैं। इसी वजह से उन्होंने इस साल सत्र की शुरुआत में विलंब करते हुए अपना पहला मुकाबला 19 जून को दोहा डाइमंड लीग में खेला। वहां उन्होंने 85.69 मीटर भाला फेंककर चौथा स्थान हासिल किया। यह प्रदर्शन उनके स्तर के हिसाब से कमजोर है। इसके बाद उन्होंने स्विट्जरलैंड के बिएन शहर में एक महीने तक रिहैबिलिटेशन (चोट से उबरकर फिटनेस हासिल करने की प्रक्रिया) और अभ्यास किया। अब 28 साल के दो बार के ओलंपिक पदक विजेता नीरज की कोशिश 2018 गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों जैसा प्रदर्शन दोहराने की होगी जहां उन्होंने स्वर्ण पदक जीता था। वह शुक्रवार को स्विट्जरलैंड से ग्लास्गो पहुंच गए। नीरज ने 2018 राष्ट्रमंडल खेलों में 86.47 मीटर भाला फेंककर स्वर्ण पदक जीता था। हालांकि चोट के कारण वह 2022 के राष्ट्रमंडल खेलों में नहीं खेल सके थे। भारतीय एथलेटिक्स टीम के मुख्य कोच राधाकृष्णन नायर का कहना है कि नीरज पूरी तरह फिट हैं। उन्हें उम्मीद है कि इस बार 32 सदस्यीय भारतीय टीम पिछले राष्ट्रमंडल खेलों से अधिक पदक जीतेगी। हालांकि नीरज के लिए स्वर्ण पदक जीतना आसान नहीं होगा। पुरुषों की भाला फेंक स्पर्धा में दुनिया के कई बड़े खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। क्वालीफाइंग मुकाबले 30 जुलाई को और फाइनल 31 जुलाई को होगा। अमेरिका के कर्टिस थॉम्पसन और जर्मनी के जूलियन वेबर को छोड़कर दुनिया के लगभग सभी बड़े भाला फेंक खिलाड़ी ग्लास्गो में खेलेंगे। नीरज के अलावा नदीम, पथिरागे, त्रिनिदाद एवं टोबैगो के मौजूदा विश्व चैंपियन केशॉर्न वॉलकॉट, ग्रेनाडा के एंडरसन पीटर्स और कीनिया के जूलियस येगो भी मैदान में होंगे। भारत के रोहित यादव भी पदक के मजबूत दावेदार हैं। उन्होंने पिछले महीने 87.05 मीटर भाला फेंका था जो इस सत्र में राष्ट्रमंडल देशों के खिलाड़ियों के बीच दूसरा सबसे बेहतर प्रदर्शन है। यशवीर सिंह भी भारत की ओर से इस स्पर्धा में खेलेंगे। श्रीलंका के 23 वर्षीय पथिरागे इस समय सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। उन्होंने इस सत्र में 92.62 मीटर का थ्रो किया है और 90 मीटर से ज्यादा भाला फेंकने वाले दुनिया के इकलौते खिलाड़ी हैं। उन्होंने इस साल दो डाइमंड लीग खिताब भी जीते हैं। वहीं नदीम इस समय अच्छी फॉर्म में नहीं हैं। उन्होंने 16 जुलाई को स्विट्जरलैंड के लूजर्न में सिर्फ 78.47 मीटर का थ्रो किया था। पीटर्स का इस सत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 86.38 मीटर है जबकि वॉलकॉट का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 83.45 मीटर रहा है। लंबी कूद के खिलाड़ी मुरली श्रीशंकर ने पिछले महीने 8.38 मीटर का प्रयास किया था। वह मौजूदा सत्र में राष्ट्रमंडल देशों के खिलाड़ियों के बीच पहले स्थान पर हैं। वेन पिनॉक (8.39 मीटर) ने उनसे बेहतर प्रदर्शन किया है लेकिन जमैका ने उनकी जगह तेजाय गेल (8.37 मीटर) को भेजने का फैसला किया है। श्रीशंकर ने बर्मिंघम 2022 राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीता था और इस बार राष्ट्रमंडल खेलों में अपना दूसरा पदक जीतने की कोशिश करेंगे। भारत के लोकेश सत्यनाथन ने भी इस सत्र में 8.21 मीटर का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है और उनसे भी पदक की उम्मीद है। पुरुषों की ऊंची कूद में मौजूदा सत्र के शीर्ष छह खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। भारत के सर्वेश कुशारे ने हाल ही में 2.31 मीटर के प्रयास से राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया है। उनके साथ इंग्लैंड के किमानी जैक (2.31 मीटर), न्यूजीलैंड के ओलंपिक चैंपियन हैमिश केर (2.28 मीटर, सत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन), जमैका के रोमेन बेकफोर्ड (2.30 मीटर, सत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन) और ऑस्ट्रेलिया के युआल रीथ (2.28 मीटर, सत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन) भी मुकाबले में होंगे। आदर्श राम (2.27 मीटर, सत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन) और तेजस्विन (2.26 मीटर, सत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन) भी ऊंची कूद में हिस्सा लेंगे। किशारे ने तेजस्विन का ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा था। हालांकि तेजस्विन से सबसे अधिक उम्मीद डेकाथलन में है जिसमें वह राष्ट्रीय रिकॉर्डधारक हैं। मौजूदा सत्र के प्रदर्शन के आधार पर वह राष्ट्रमंडल देशों के खिलाड़ियों में दूसरे स्थान पर हैं। उनसे बेहतर प्रदर्शन सिर्फ 2014 राष्ट्रमंडल खेलों और तोक्यो ओलंपिक के चैंपियन कनाडा के डेमियन वार्नर ने ही किया है। वार्नर भी ग्लास्गो में चुनौती पेश करेंगे। पुरुषों की त्रिकूद में भारत के प्रवीण चित्रावेल और सेल्वा प्रभु भी पदक की दौड़ में हैं। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती जमैका के जॉर्डन स्कॉट की होगी। ट्रैक स्पर्धाओं में भारत की उम्मीदें कम हैं लेकिन 100 मीटर बाधा दौड़ में तेजस शिर्से फाइनल में पहुंच सकते हैं। अगर वह 13.27 सेकेंड के अपने सत्र के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन और राष्ट्रीय रिकॉर्ड से बेहतर प्रदर्शन करते हैं तो पदक भी जीत सकते हैं। सोमवार को भारत का पहला एथलेटिक्स पदक कुशारे दिला सकते हैं। शिर्से भी उसी दिन मुकाबले में उतरेंगे। इसके अलावा मुरली श्रीशंकर, लोकेश सत्यनाथन और पूजा सिंह (महिला ऊंची कूद) भी अपने-अपने क्वालीफाइंग दौर खेलेंगे। राष्ट्रीय रिकॉर्डधारक गुरिंदरवीर सिंह भी सोमवार को 100 मीटर दौड़ के पहले दौर में हिस्सा लेंगे।
- ग्लास्गो। ओलंपिक पदक विजेता मीराबाई चानू ने रविवार को यहां राष्ट्रमंडल खेलों में लगातार तीसरा स्वर्ण पदक जीतकर भारतीय भारोत्तोलन में अपनी बादशाहत एक बार फिर साबित कर दी तो वहीं, चोट से जूझने के बावजूद ऋषिकांत सिंह ने ऐतिहासिक रजत पदक जीतकर भारत के लिए दिन को यादगार बनाया। महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में मीराबाई ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 190 किलोग्राम (स्नैच में 85 किग्रा और क्लीन एवं जर्क में 105 किग्रा) वजन उठाया। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों के कई रिकॉर्ड भी तोड़ दिए। यह मौजूदा राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का पहला स्वर्ण पदक और कुल तीसरा पदक है।इससे पहले शुक्रवार को पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने पुरुषों के हेवीवेट वर्ग में कांस्य पदक जीतकर भारत का खाता खोला था। मणिपुर की 31 वर्षीय दिग्गज भारोत्तोलक ने स्नैच और क्लीन एवं जर्क, दोनों में पहला प्रयास असफल रहने के बावजूद शानदार वापसी की और 22 किलोग्राम के बड़े अंतर से स्वर्ण पदक अपने नाम किया। नाइजीरिया की रूथ असुक्वो न्योंग 168 किलोग्राम के साथ रजत पदक जीता। स्वर्ण पदक सुनिश्चित करने और एशियाई खेलों में दो महीने से भी कम समय शेष होने के कारण मीराबाई ने क्लीन एवं जर्क का अपना अंतिम प्रयास नहीं किया। इससे पहले पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में ऋषिकांत सिंह चोट के बावजूद रजत पदक जीतने में सफल रहे। घुटने की चोट के कारण वह स्वर्ण पदक की दौड़ में अपनी बढ़त बरकरार नहीं रख सके। मणिपुर के 28 वर्षीय भारोत्तोलक ने स्नैच में 121 किलोग्राम वजन उठाकर राष्ट्रमंडल खेलों के रिकॉर्ड की बराबरी की और क्लीन एवं जर्क से पहले शीर्ष स्थान पर थे। वह हालांकि क्लीन एंड जर्क में 143 किलोग्राम ही उठा सके। अंतिम दो प्रयास असफल रहने से उनका कुल वजन 264 किलोग्राम रहा और उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा।मलेशिया के मोहम्मद अनीक कसदान ने क्लीन एवं जर्क में 152 किलोग्राम का इन खेलों का नया रिकॉर्ड बनाते हुए कुल 273 किलोग्राम वजन उठाकर स्वर्ण पदक जीता, जबकि केन्या के जोशुआ अमुंगा म्बोया 260 किलोग्राम के साथ कांस्य पदक विजेता रहे। ऋषिकांत ने बताया कि प्रतियोगिता से एक सप्ताह पहले लगी घुटने की चोट क्लीन एवं जर्क के दौरान फिर उभर आई, जिससे भारी वजन उठाने की उनकी क्षमता प्रभावित हुई। उन्होंने कहा, "मैं यहां स्वर्ण पदक जीतने आया था। स्नैच के बाद मैं पहले स्थान पर था, लेकिन घुटने में परेशानी हो गई। मैं वजन को क्लीन तो कर पाया, लेकिन उसे ऊपर नहीं धकेल सका क्योंकि एक जांघ ठीक से काम नहीं कर रही थी। मैंने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की।'' ऋषिकांत ने इसके बावजूद इतिहास रचते हुए राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतने वाले मणिपुर के पहले पुरुष भारोत्तोलक बनने का गौरव हासिल किया। वह खेलों की भारोत्तोलन स्पर्धा में हिस्सा लेने वाले राज्य के पहले पुरुष खिलाड़ी भी हैं।भारतीय पुरुष चार गुणा 200 मीटर फ्रीस्टाइल रिले टीम ने तैराकी स्पर्धा में अपनी हीट में तीसरा स्थान हासिल कर फाइनल में प्रवेश कर पदक जीतने की उम्मीद कायम रखी है। धक्षण शशिकुमार, अनीश सुनील कुमार गौड़ा, आर्यन नेहरा और श्रीहरि नटराज की भारतीय चौकड़ी ने सात मिनट 39.48 सेकंड का समय निकाला। टीम अपनी हीट में तैराकी की मजबूत टीमों ऑस्ट्रेलिया (7:08.66) और इंग्लैंड (7:18.13) के बाद तीसरे स्थान पर रही। कनाडा के प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं लेने के कारण इस हीट में केवल चार टीमें उतरी थीं। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, भारत और जर्सी चारों ने आठ टीमों के फाइनल के लिए क्वालीफाई कर लिया। दोनों हीट के संयुक्त परिणामों में भारत ने पांचवें सबसे तेज समय के साथ फाइनल में जगह बनाई। ऑस्ट्रेलिया, स्कॉटलैंड, इंग्लैंड और वेल्स ने भारत से बेहतर समय दर्ज किया। भारतीय चौकड़ी के इस प्रदर्शन से फाइनल में पदक की दौड़ में चुनौती पेश करने की उम्मीद जगी है। टीम अगर अपनी हीट के समय में सुधार करने में सफल रहती है तो उसके पास पोडियम पर जगह बनाने का बेहतर मौका होगा। लॉन बॉल्स में भारत की रूपा रानी तिर्की और पिंकी सिंह की लगातार तीन मैचों की जीत का सिलसिला थम गया। महिला युगल वर्ग के सेक्शन मुकाबले में उन्हें नामीबिया से करीबी हार का सामना करना पड़ा। भारतीय जोड़ी पहला सेट 5-7 से हार गई, लेकिन दूसरे सेट में 10-1 से शानदार वापसी की। हालांकि, टाई-ब्रेकर में अमांडा स्टीनकैंप और डायना विलजोन की नामीबियाई जोड़ी ने 3-0 से जीत दर्ज की। अब भारतीय जोड़ी अपने अंतिम सेक्शन मुकाबले में इंग्लैंड का सामना करेगी, जिसमें जीत से सेमीफाइनल का टिकट तय होगा।











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