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 पेंशन राशि निकालनी हो या कोई और राशि से जुड़ा बैंकिंग काम, बैंक सखी ममता बनी हैं बुजुर्गों, दिव्यांगों का सहारा

-बैंक सखी के रूप में 10 करोड़ रुपए से अधिक का किया अब तक ट्रांसेक्शन, बैंक खाते खुलवाकर शासकीय योजनाओं से जोड़ने का भी कर रहीं हैं कार्य
=बिहान से मिली बैंक सखी के काम की जानकारी, बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने का सपना होगा अब पूरा- बैंक सखी ममता
 अम्बिकापुर   । उदयपुर के ग्राम राजबान की ममता जायसवाल तीन गांवों सलका, सरगवां और खोडरी में बैंक सखी के रूप में कार्य कर रहीं हैं और यहां के लोगों के लिए एक चलता-फिरता बैंक हैं। ममता के जरिए इन गांवों के निशक्त, दिव्यांग, बुजुर्ग, महिलाएं सभी को बैंकिग सुविधा अब घर तक मिल रहीं हैं। वहीं बैकिंग लेनदेन में भी लोग आसानी से सुविधाओं का लाभ ले पा रहे हैं। बैंक खाता ना होने की वजह से जिन लोगों तक शासकीय योजनाओं का लाभ नहीं पहुंच पाता था, बैंक सखी ममता के जागरूक करने पर उनका भी अब घर बैठे बैंक खाता खुल गया है। वहीं ममता स्वयं भी बैंक सखी के रूप में कार्य कर आर्थिक रूप से सशक्त हुईं हैं और अपने सपनों को पूरा कर रहीं हैं।
पेंशन, बीमा सहित अन्य बैंकिंग सुविधाओं का दिला रहीं हैं लाभ-
ममता घर-घर जाकर लोगों तक बैंकिग सुविधा पहुंचा रहीं हैं। ममता  बैंक सखी का कार्य कर रहीं हैं, और उन्होंने अब तक 10 करोड़ रुपए से अधिक की राशि का ट्रांसेक्शन किया है। पेंशन, बीमा, महतारी वंदन योजना की राशि, मजदूरी भुगतान सहित अन्य सभी का लाभ ग्रामीणों तक आसानी से पहुंच रहा है। ग्राम सलका के ग्राम पंचायत राजबान कि दिव्यांग वर्षा बताती हैं कि दिव्यांगता के कारण उन्हें कई समस्या का सामना करना पड़ता है, कहीं आने जाने के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता है। वर्षा बताती हैं कि उन्हें दिव्यांग पेंशन की राशि लेने बैंक जाना पड़ता था, अब बैंक वाली दीदी स्वयं घर आकर पेंशन की राशि देकर जाती हैं।
ग्राम राजबान की संतोषी जयसवाल बताती हैं कि मुझे शासन की महतारी वंदन योजना का लाभ मिल रहा है, हर माह एक हजार रुपए बैंक में आता है। जिसे निकालने के लिए कामकाज के बीच से समय निकालकर बैंक जाना पड़ता था। बैंक सखी ममता गांव में ही आकर अब हम महिलाओं को महतारी वंदन योजना की राशि देकर जाती हैं। इन पैसों से हम महिलाएं अपनी घरेलू आवश्यकताओं को पूरा कर पा रहे हैं। इसी क्रम में विधवा पेंशन योजना से लाभान्वित बुजुर्ग मानोबाई ने बताया ग्राम पंचायत भवन में बैंक सखी ममता आतीं हैं और गांव वालों की मदद करती हैं।
 बिहान योजना से बैंक सखी बनीं ममता, हर माह 10 से 15 हजार रूपए कमाकर आर्थिक रूप से हुईं सशक्त, अब बच्चों को बेहतर शिक्षा का सपना भी हो रहा पूरा-
स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद, ममता को बिहान योजना के अंतर्गत बैंक सखी बनने का अवसर मिला। ममता को आरसेटी में बैंकिंग सेवाओं के सम्बन्ध में प्रशिक्षण दिया गया। ममता बताती हैं कि बैंक सखी का कार्य मुझे बहुत अच्छा लगता है, लोगों की मदद कर संतोष मिलता है। उन्होंने बताया कि बैंक सखी के रूप में उन्हें प्रतिमाह 10 से 15 हजार रुपए की आमदनी हो जाती है। आर्थिक रूप से सशक्त होकर उन्हें समाज में पहचान मिली है। उन्होंने बताया कि उनके पति का होटल और किराने के दुकान का व्यवसाय है, जिससे परिवार की जरूरतें तो पूरी जाती हैं।  उन्होंने बताया कि उनके 4 बच्चे हैं, बैंक सखी से मिले पैसों को बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए जमा किया है और उनका यह सपना भी अब पूरा हो जाएगा।
ममता ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का जताया आभार-
बिहान योजना से जुड़कर ममता जायसवाल जैसी कई महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हुईं हैं। ममता ने बताया कि बिहान योजना से जुड़कर उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। उन्होंने इस हेतु राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन का आभार व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय को धन्यवाद दिया। बता दें वर्तमान में सरगुजा जिले के 7 जनपद पंचायतों में 87 बीसी सखी कार्यरत हैं, जिनके द्वारा ग्रामीणों के घर-घर तक बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रहीं है।

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