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 बीज, कीटनाशक से जुड़े कानून लगभग तैयार, संसद के अगले सत्र में पेश होने की संभावना : चौहान

लखनऊ.  केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को कहा कि बीज और कीटनाशक से जुड़े नए कानून लगभग तैयार हैं और उन्हें संसद के अगले सत्र में पारित कराने के लिए पेश किया जा सकता है। चौहान ने यहां आयोजित उत्तरी राज्यों के क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि प्रस्तावित 'बीज अधिनियम' और 'कीटनाशक अधिनियम' का मसौदा सुझावों के लिए पहले ही साझा किया जा चुका है। इन कानूनों का उद्देश्य नकली और घटिया कृषि उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाना है। उन्होंने कहा, "यदि कोई व्यक्ति नकली या खराब गुणवत्ता के बीज या कीटनाशक बेचता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मौजूदा दंड बहुत कम और अप्रभावी हैं।" उन्होंने बताया कि राज्यों के सहयोग से ऐसी कुप्रथाओं के खिलाफ देशव्यापी अभियान भी चलाया जाएगा।
इस सम्मेलन में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्य के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही और अन्य राज्यों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार ने रबी और खरीफ फसलों पर एक ही राष्ट्रीय सम्मेलन की जगह अब क्षेत्रवार परामर्श की रणनीति अपनाई है, ताकि अलग-अलग जलवायु और मिट्टी की परिस्थितियों के अनुसार बेहतर योजना बनाई जा सके। उन्होंने कहा कि देश में खाद्यान्न का पर्याप्त भंडार है और भारत अब आयात पर निर्भर नहीं है। उन्होंने कहा, "भारत दुनिया में चावल का सबसे बड़ा उत्पादक बन गया है और गेहूं का प्रमुख निर्यातक भी है।" कृषि मंत्री ने खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने, किसानों की आय बढ़ाने और पोषक आहार उपलब्ध कराने को प्राथमिकता बताते हुए छह-सूत्रीय रणनीति का जिक्र किया, जिसमें उत्पादन बढ़ाना, लागत घटाना, उचित मूल्य दिलाना, फसल नुकसान की भरपाई और फसल विविधीकरण शामिल है। उन्होंने विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में उर्वरकों के बढ़ते उपयोग पर चिंता जताई और कहा कि इसका अंधाधुंध इस्तेमाल मिट्टी की सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने प्राकृतिक खेती और बागवानी व औषधीय फसलों को बढ़ावा देने की बात कही। 
चौहान ने 'अल नीनो' के कारण सामान्य से कम बारिश के अनुमान का हवाला देते हुए जल संकट की आशंका को ध्यान में रखकर योजना बनाने पर जोर दिया। उन्होंने राज्यों से स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप कृषि रोडमैप तैयार करने और 'किसान पहचानपत्र' तथा किसान क्रेडिट कार्ड योजना के तहत अधिक किसानों को जोड़ने का भी आग्रह किया। चौहान ने कहा कि ''मेरे दिल में भी यह हसरत है कि हम अपने देश की कृषि को और उन्नत स्तर पर ले जाएं, ताकि देश की सारी जरूरतें हम पूरी कर सकें। उन्होंने किसान पहचान पत्र बनाने में राज्यों से तेजी लाने का आह़वान करते हुए कहा कि इससे 17 तरह की सुविधाएं मिलेंगी। उन्होंने कहा कि ''पूरे देश में साढ़े सात करोड़ क्रेडिट कार्ड बने हैं लेकिन किसानों की संख्या 13 करोड़ है। इसके लिए राज्य सरकार अभियान चलाएं। हम कम ब्याज पर कर्ज देने की व्यवस्था कर लें तो इसका छोटे किसानों को लाभ मिलेगा। हम आपके साथ मिलकर यह कार्य करना चाहते हैं।'' उन्‍होंने विकसित कृषि संकल्प अभियान पिछले साल चलाने के लिए योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार जताया और कहा कि अनुसंधान को प्रयोगशालाओं से किसानों तक पहुंचाना जरूरी है। 
चौपाल लगाएं, किसान की जिज्ञासा का समाधान करें। उन्होंने बताया कि साठ हजार गांवों में किसानों को सुझाव दिए गये। इस सम्मेलन में उत्तरी क्षेत्र के विभिन्‍न राज्‍यों से आये कृषि और उद्यान मंत्रियों समेत प्रमुख लोग मौजूद थे। इसके पहले सात अप्रैल को भी जयपुर में एक क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन आयोजित किया गया था। एक आधिकारिक बयान के अनुसार इस अवसर पर केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर व भागीरथ चौधरी, उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, उद्यान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह, कृषि राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलख, हिमाचल प्रदेश के उद्यान मंत्री जगत सिंह नेगी, जम्मू कश्मीर के कृषि उत्पादन मंत्री जाविद अहमद डार, पंजाब के कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां, पंजाब के उद्यान मंत्री मोहिंदर भगत एवं उत्तराखंड के कृषि मंत्री गणेश जोशी मौजूद थे।

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