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भारत-मलेशिया संबंधों को और मजबूत करेंगे, आतंकवाद पर 'कोई समझौता नहीं': प्रधानमंत्री मोदी

कुआलालंपुर.  भारत और मलेशिया ने रविवार को व्यापार एवं निवेश, रक्षा, ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण तथा सेमीकंडक्टर जैसे उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में अपने संबंधों का विस्तार करने का संकल्प लिया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जोर देकर कहा कि दोनों पक्ष हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध हैं। मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ व्यापक वार्ता के बाद मोदी ने आतंकवाद से निपटने के मुद्दे पर भारत के रुख को दोहराते हुए कहा: ''आतंकवाद पर हमारा संदेश स्पष्ट है; कोई दोहरा मापदंड नहीं, कोई समझौता नहीं।'' दोनों पक्षों ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में गहन सहभागिता के लिए एक रूपरेखा समझौते सहित कई प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए कुल 11 समझौतों और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए। मोदी शनिवार को कुआलालंपुर पहुंचे। मोदी और इब्राहिम दोनों ने व्यापार निस्तारण के लिए स्थानीय मुद्राओं - भारतीय रुपया और मलेशियाई रिंगिट के उपयोग को बढ़ावा देने के प्रयासों की सराहना की। मोदी ने भारत-मलेशिया संबंधों को ''विशेष'' बताते हुए कहा, ''हम रणनीतिक विश्वास के माध्यम से आर्थिक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करेंगे।'' उन्होंने मीडिया में जारी अपने बयान में कहा, ''हम समुद्री पड़ोसी हैं। सदियों से दोनों देशों के लोगों के बीच गहरे और स्नेहपूर्ण संबंध रहे हैं।'' मोदी ने मलेशिया में भारतीय वाणिज्य दूतावास स्थापित करने के भारत के निर्णय की भी घोषणा की।
अपने संबोधन में इब्राहिम ने भारत की आर्थिक वृद्धि का उल्लेख किया और कहा कि अगर उनका देश भारत के साथ सहयोग के और अधिक तरीके एवं अवसर तलाश सके तो उसे बहुत लाभ होगा। उन्होंने कहा, ''यह (भारत की आर्थिक वृद्धि) अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था और व्यापार के क्षेत्र में एक शानदार उन्नति है।'' उन्होंने द्विपक्षीय व्यापार के लिए स्थानीय मुद्राओं का उपयोग करने के निर्णय को ''उल्लेखनीय'' बताया। वार्ता के दौरान मलेशिया ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार के बाद भारत की स्थायी सदस्यता के लिए अपना समर्थन व्यक्त किया। सुरक्षा क्षेत्र में सहयोग के बारे में विस्तार से बताते हुए मोदी ने कहा कि आतंकवाद विरोधी अभियान, खुफिया जानकारी साझा करने और समुद्री सुरक्षा में सहयोग को मजबूत किया जाएगा, साथ ही दोनों पक्ष रक्षा संबंधों को और आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा, ''कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और डिजिटल प्रौद्योगिकियों के साथ-साथ हम सेमीकंडक्टर, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में साझेदारी को आगे बढ़ाएंगे।'' उन्होंने यह भी कहा कि सीईओ (मुख्य कार्यकारी अधिकारी) फोरम में हुई चर्चाओं ने व्यापार और निवेश के नए अवसर खोले हैं। प्रधानमंत्री ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर भारत के रुख और इस क्षेत्र में 10 देशों के समूह वाले आसियान (दक्षिणपूर्व एशियाई देशों का संघ) की केंद्रीय भूमिका पर भारत के दृढ़ विचारों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, ''हिंद-प्रशांत क्षेत्र विश्व के विकास के इंजन के रूप में उभर रहा है। भारत आसियान के साथ मिलकर पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में विकास, शांति और स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध है।'' उन्होंने कहा, ''मलेशिया जैसे मित्र देशों के सहयोग से भारत आसियान के साथ अपने संबंधों को और अधिक विस्तारित करेगा। हम इस बात से सहमत हैं कि आसियान-भारत व्यापार समझौते (आईटीआईजीए) की समीक्षा शीघ्रता से पूरी की जानी चाहिए।'' मोदी ने कहा कि उन्होंने और इब्राहिम ने क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर भी ''सार्थक चर्चा'' की।
उन्होंने कहा, ''वैश्विक अस्थिरता के इस माहौल में भारत और मलेशिया के बीच बढ़ती मित्रता दोनों देशों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।'' उन्होंने कहा, ''हम इस बात से सहमत हैं कि आज की चुनौतियों का सामना करने के लिए वैश्विक संस्थानों में सुधार आवश्यक है। हम शांति के सभी प्रयासों का समर्थन करना जारी रखेंगे और आतंकवाद पर हमारा संदेश स्पष्ट है: कोई दोहरा मापदंड नहीं; कोई समझौता नहीं।'' प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ''भारत-मलेशिया संबंधों के प्रति आपकी प्रतिबद्धता की हम सराहना करते हैं। आइए, हम मिलकर एक समृद्ध मलेशिया के आपके सपने और विकसित भारत के हमारे संकल्प को साकार करें।'' एक संयुक्त बयान के अनुसार, दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने सीमा पार आतंकवाद सहित आतंकवाद के सभी रूपों की ''स्पष्ट और कड़ी निंदा'' की और आतंकवाद के प्रति ''बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करने की नीति'' का आह्वान किया। दोनों नेताओं ने आतंकवाद से व्यापक और सतत तरीके से निपटने के लिए समन्वित वैश्विक प्रयासों का आह्वान किया तथा कट्टरता और हिंसक चरमपंथ का मुकाबला करने की दिशा में काम करने पर सहमति व्यक्त की। उन्होंने आतंकवाद के वित्तपोषण से निपटने और आतंकवादी उद्देश्यों के लिए नयी और उभरती प्रौद्योगिकियों के उपयोग को रोकने की दिशा में काम करने का भी संकल्प लिया। बयान में कहा गया है कि दोनों नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र और एफएटीएफ (वित्तीय कार्रवाई कार्य बल) सहित आतंकवाद का मुकाबला करने में द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। मोदी और इब्राहिम ने संयुक्त राष्ट्र सहित बहुपक्षीय मंचों में सहयोग को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के सुधारों का समर्थन करने पर भी सहमति व्यक्त की। संयुक्त बयान में कहा गया है, ''उन्होंने समकालीन वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करते हुए बहुपक्षवाद को बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने का संकल्प लिया, ताकि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) सहित अंतरराष्ट्रीय संगठनों को अधिक प्रतिनिधिक बनाया जा सके।'' बयान में कहा गया है, ''बहुपक्षीय मंचों में आपसी सहयोग की मजबूत भावना को दर्शाते हुए दोनों नेताओं ने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय सदस्यता प्रस्तावों के लिए आपसी समर्थन पर चर्चा की। भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार के बाद देश की स्थायी सदस्यता के लिए मलेशिया के समर्थन की अत्यधिक सराहना की।

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