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ऑगर मशीन फिर अटकी, अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ ने क्रिसमस तक श्रमिकों के निकलने की उम्मीद जताई


 उत्तरकाशी/नयी दिल्ली.
  सिलक्यारा में धंसी निर्माणाधीन सुरंग में ‘ड्रिल' करने में प्रयुक्त ऑगर मशीन के ब्लेड मलबे में फंसने से काम बाधित होने के बाद दूसरे विकल्पों पर विचार किए जाने के बीच शनिवार को अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ ने उम्मीद जताई कि पिछले 13 दिन से फंसे 41 मज़दूर अगले महीने क्रिसमस तक बाहर आ जाएंगे। शुक्रवार को लगभग पूरे दिन ‘ड्रिलिंग' का काम बाधित रहा, हालांकि समस्या की गंभीरता का पता शनिवार को चला जब सुरंग मामलों के अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ अर्नोल्ड डिक्स ने संवाददाताओं को बताया कि ऑगर मशीन ‘‘खराब'' हो गई है। आस्ट्रेलियाई विशेषज्ञ डिक्स ने पत्रकारों से कहा, ''ऑगर मशीन का ब्लेड टूट गया है, क्षतिग्रस्त हो गया है।'' श्रमिकों के सुरक्षित होने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, '' ऑगर मशीन को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है, इसलिए हम अपने काम करने के तरीके पर पुनर्विचार कर रहे हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि सभी 41 लोग लौटेंगे।'' जब डिक्स से इस संबंध में समयसीमा बताने के लिए कहा गया, तो उन्होंने कहा, ‘‘मैंने हमेशा वादा किया है कि वे क्रिसमस तक घर आ जाएंगे।'' वहीं, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के सदस्य लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने कहा कि इस अभियान में लंबा समय लग सकता है । हसनैन ने नयी दिल्ली में कहा, ‘‘इस अभियान में लंबा समय लग सकता है।''
 दरअसल, अधिकारी अब दो विकल्पों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं - मलबे के शेष 10 या 12 मीटर हिस्से में हाथ से ‘ड्रिलिंग' या ऊपर से 86 मीटर नीचे ‘ड्रिलिंग'। हाथ से ‘ड्रिलिंग' (मैनुअल ड्रिलिंग) के तहत अलग-अलग श्रमिकों के बचाव मार्ग के पहले से ही 47-मीटर हिस्से में जाकर सीमित स्थान में एक अल्प अवधि के लिए ‘ड्रिलिंग' करना और फिर किसी और को कार्यभार संभालने के लिए बाहर आना शामिल होगा। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अनुसार, यह योजनाबद्ध निकासी मार्ग में फंसे उपकरणों को बाहर लाते ही शुरू हो सकता है। लंबवत ‘ड्रिलिंग' के लिए शनिवार को मौके पर पहले से ही लाए गए भारी उपकरण लगाए जा रहे हैं। अधिकारियों ने पहले कहा था कि इसमें कई सप्ताह लग सकते हैं। हसनैन ने कहा यह प्रक्रिया ‘‘अगले 24 से 36 घंटे'' में शुरू हो सकती है। उन्होंने संकेत दिया कि अब जिन दो मुख्य विकल्पों पर विचार किया जा रहा है उनमें से यह सबसे तेज विकल्प है। शुक्रवार को कुछ देर की ‘ड्रिलिंग' से पहले 800 मिलीमीटर चौड़े इस्पात के पाइप का 46.8 मीटर हिस्सा ड्रिल किए गए मार्ग में धकेल दिया गया था। सुरंग के ढहे हिस्से की लंबाई करीब 60 मीटर है। धामी ने संवाददाताओं को बताया कि ब्लेड के लगभग 20 हिस्से को काट दिया गया है और शेष काम पूरा करने के लिए हैदराबाद से एक प्लाज्मा कटर हवाई मार्ग से लाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसा होने पर ‘मैन्युअल ड्रिलिंग' शुरू हो जाएगी।
 चारधाम यात्रा मार्ग पर बन रही सुरंग का एक हिस्सा 12 नवंबर को ढह गया था, जिससे उसमें काम कर रहे 41 श्रमिक फंस गए थे। तब से विभिन्न एजेंसियां उन्हें बाहर निकालने के लिए युद्धस्तर पर बचाव अभियान चला रही हैं।

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