प्रागैतिहासिक काल में शिकार करने वाली महिलाओं की शारीरिक रचना इसके अनुकूल थी: अमेरिकी शोधकर्ता
नयी दिल्ली । वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि प्रागैतिहासिक काल की महिलाएं न केवल शिकार करती थीं, बल्कि उनकी शारीरिक रचना और जैविकी ने भी उन्हें इसके लिए आंतरिक रूप से अपेक्षाकृत अनुकूल बनाया होगा। अमेरिकी विश्वविद्यालयों के शोधकर्ताओं ने पुरातात्विक और शारीरिक- दोनों साक्ष्यों के आधार पर पाया कि (उन दिनों) शिकार करना केवल पुरुषों का ही मामला नहीं, बल्कि सभी का था। उन्होंने कहा कि अमेरिकी एंथ्रोपोलॉजिस्ट जर्नल में प्रकाशित अपने अध्ययन के माध्यम से वे इतिहास को मिटाने या फिर से लिखने के बजाय, "उस इतिहास को सही करने की कोशिश कर रहे थे जिससे महिलाओं को हटा दिया गया था।" महिलाओं की चोटों और शिकार करने वाले हथियारों के साथ उन्हें दफनाये जाने के संबंध में उनके पुरातात्विक निष्कर्षों से पता चला है कि विशेष रूप से प्रागैतिहासिक समाजों में, "लिंग के आधार पर श्रम का कोई विभाजन मौजूद नहीं था।" नॉट्रेडम विश्वविद्यालय में मानव विज्ञान विभाग में सहायक प्रोफेसर कारा ओकोबॉक ने कहा, "समूहों में रहने वाले लोग इतने पर्याप्त नहीं थे कि वे अलग-अलग कार्यों में विशेषज्ञ हों। जीवित रहने के लिए हर किसी को कई विषयों की जानकारी रखने वाला व्यक्ति बनना पड़ता था।" ओकोबॉक ने कहा, "जब हम उनके (प्रागैतिहासिक काल के व्यक्तियों के) जीवाश्म रिकॉर्ड को देखते हैं, तो हम पाते हैं कि पुरुषों और महिलाओं दोनों में चोटों का परिणाम समान है।" उन्होंने आगे कहा, उन्होंने महिलाओं और पुरुषों दोनों में टूट-फूट की दर और पैटर्न समान पाया।
उन्होंने कहा, "इसके अलावा, हमारे पास यह मानने का कोई कारण नहीं है कि प्रागैतिहासिक काल की महिलाएं गर्भवती होने, स्तनपान कराने या बच्चों को जन्म देने के दौरान शिकार करना छोड़ देती थीं।"

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