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पीएम मोदी ने  वाराणसी में दुनिया के सबसे मेडीटेशन सेंटर स्वर्वेद महामंदिर का  उद्घाटन किया

 वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को वाराणसी में दुनिया के सबसे बड़े ध्यान केंद्र ‘स्वर्वेद महामंदिर’ का उद्घाटन किया।उद्घाटन के बाद, प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ इस केंद्र का दौरा किया। यहां 20,000 से अधिक लोग एक साथ बैठकर ध्यान कर सकते हैं।सात मंजिला इस भव्य महामंदिर की दीवारों पर स्वर्वेद के छंद उकेरे गए हैं।
स्वर्वेद महामंदिर प्राचीन दर्शन, आध्यात्मिकता और आधुनिक वास्तुकला का एक मिलाजुला रूप है।
वाराणसी के उमरहा में नवनिर्मित स्वर्वेद महामंदिर का उद्घाटन करने के बाद  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि देश की स्‍वतंत्रता के दशकों बाद आर्थिक वृद्धि में नए रिकॉर्ड बनाने के साथ आध्‍यात्मिक स्‍थल अब विकास के साक्षी बन रहे हैं।  कुछ ही सप्‍ताह में अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण भी पूरा होने जा रहा है।श्री मोदी अपने संसदीय निर्वाचन क्षेत्र की दो दिन की यात्रा पर हैं।
महामंदिर के श्रद्धालुओं से संबोधन में श्री मोदी ने लोगों से जीवन में नौ संकल्‍प लेने का आग्रह किया। इनमें शामिल हैं - जल संरक्षण, डिजिटल भुगतान को प्रोत्‍साहन, स्‍वच्‍छता, स्‍थानीय उत्‍पादों को बढ़ावा, देश के विभिन्‍न स्‍थानों की यात्रा, प्राकृतिक खेती, मोटे अनाज को प्रोत्‍साहन, तंदुरूस्‍ती और कम-से-कम एक गरीब परिवार की सहायता करना। प्रधानमंत्री न  ने कहा  कि संतो के सानिध्य में काशी के लोगों ने मिलकर विकास और नवनिर्माण के कितने ही नए कीर्तिमान गढ़े हैं. सरकार, समाज और संतगण सब साथ मिलकर काशी के कायाकल्प के लिए कार्य कर रहे हैं. इस दौरान राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उनके साथ मौजूद रहे. इस मंदिर की भव्‍यता देखते ही बनती है. इसमें एक साथ 20 हजार लोग योगाभ्‍यास कर सकते हैं.  
 
पीएम मोदी ने कहा, "आज स्वर्वेद मंदिर बनकर तैयार होना, इसी ईश्वरीय प्रेरणा का उदाहरण है. ये महामंदिर महृषि सदाफल देव जी की शिक्षाओं और उनके उपदेशों का प्रतीक है. इस मंदिर की दिव्यता जितना आकर्षित करती है, इसकी भव्यता हमे उतना ही अचंभित भी करती है.स्वर्वेद मंदिर भारत के सामाजिक और आध्यात्मिक सामर्थ्य का एक आधुनिक प्रतीक है. इसकी दीवारों पर स्वर्वेद को बड़ी सुंदरता के साथ अंकित किया गया है. वेद, उपनिषद, रामायण, गीता और महाभारत आदि ग्रन्थों के दिव्य संदेश भी इसमें चित्रों के जरिये उकेरे गए हैं. इसलिए ये मंदिर एक तरह से अध्यात्म, इतिहास और संस्कृति का जीवंत उदाहरण है." 
 

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