केंद्र ने प्रशासनिक सुधारों व जनशिकायत समाधान के लिए 235 करोड़ के परिव्यय प्रस्ताव को मंजूरी दी
नयी दिल्ली । केंद्र सरकार ने अगले दो वित्त वर्ष में प्रशासनिक सुधार एवं जन सुनवाई विभाग में प्रशासनिक सुधारों की योजना को गति देने के लिए 235 करोड़ रुपये के परिव्यय प्रस्ताव को मंजूरी दी है। एक आधिकारिक बयान में गुरुवार को यह जानकारी दी गई। बयान में कहा गया कि यह योजना ‘विकसित भारत' की नयी आकांक्षाओं से मेल खाते हुए अगली पीढ़ी के प्रशासनिक सुधारों को आगे बढ़ाएगी। कार्मिक मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि इस संशोधित योजना के दो पहलू हैं - प्रशासनिक सुधार और सार्वजनिक शिकायतों के निवारण के लिए एक व्यापक प्रणाली। बयान में कहा गया, ‘‘सरकार ने 15वें वित्त आयोग कार्यकाल के अगले दो वर्षों (2024-25 और 2025-26) में लागू किए जाने वाले प्रशासनिक सुधारों के लिए संशोधित योजना के वास्ते 235 करोड़ रुपये के परिव्यय प्रस्ताव को मंजूरी दी है।'' बयान के मुताबिक यह परियोजना अन्य सभी शिकायत पोर्टल के मौजूदा ऑनलाइन मंच को केंद्रीकृत जनशिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली (सीपीजीआरएएमएस) से एकीकृत करेगी। बयान में कहा गया है कि 2023 में, सीपीजीआरएएमएस को नवंबर के अंत तक 19,45,583 शिकायतें मिली जिनमें से 19,60,021 मामलों का निवारण किया गया। इसमें कहा गया कि पिछले 17 महीनों में केंद्रीय सचिवालय में हर महीने एक लाख शिकायतें आई और राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में यह संख्या 50 हजार प्रति महीने से अधिक रही।








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