एंटीबायोटिक दवाओं को लिखने का कारण बताना इनके तर्कसंगत उपयोग में मददगार हो सकता है:विशेषज्ञ
नयी दिल्ली. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने हाल ही में चिकित्सकों से अनुरोध किया है कि वे रोगियों को एंटीबायोटिक दवा लिखने को न्यायोचित ठहराने के लिए पर्चे पर इसके इस्तेमाल के कारण और जरूरत का अनिवार्य रूप से उल्लेख करें। संक्रामक रोग विशेषज्ञों का कहना है कि यह पहल एंटीबायोटिक के उपयोग को तर्कसंगत बनाने और इन दवाओं के अंधांधुंध इस्तेमाल पर अंकुश लगाने में मददगार साबित हो सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरीके की पहल रोगी की हालत में सुधार से जुड़े परिणामों, उपचार पर खर्च होने वाले धन और अनुचित दुष्प्रभावों पर अंकुश लगाने के साथ-साथ चिकित्सा में साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में भी मदद कर सकती है। कौशांबी स्थित यशोदा सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में संक्रामक रोग विशेषज्ञ और वरिष्ठ सलाहकार डॉ. छवि गुप्ता ने बताया, ''चिकितस्कों को एंटीबायोटिक लिखने से पहले सोचना होगा और इसकी जरूरत के बारे में बताना होगा। एंटीबायोटिक दवाओं के तर्कसंगत इस्तेमाल के लिहाज से ऐसा करना मददगार होगा। इसके अलावा इससे एंटीबायोटिक के अविवेकपूर्ण और अंधाधुंध इस्तेमाल पर अंकुश लगेगा।'' स्वास्थ्य सेवा के महानिदेशक डॉ. अतुल गोयल ने एक जनवरी को मेडिकल कॉलेजों और चिकित्सक संघों के सभी चिकित्सकों को लिखे एक पत्र में आग्रह किया कि वे एंटीबायोटिक लिखते समय उसकी जरूरत और कारण या औचित्य को अनिवार्य रूप से लिखें। उन्होंने सभी फार्मासिस्टों से औषधि एवं प्रसाधन सामग्री नियमों की अनुसूची एच और एच1 को सख्ती से लागू करने और लोगों के मांगने पर एंटीबायोटिक दवाएं न देने और केवल एक योग्य चिकित्सक के पर्चे पर ही इस तरह की दवाओं की बिक्री की अपील की।








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