केंद्र ने सरोगेसी अधिनियम-2021 के कामकाज का आकलन करने के लिए राज्यों से आंकड़े मांगे
नयी दिल्ली. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से उन दंपतियों और एकल तथा अविविवाहित महिलाओं का आंकड़ा मांगा है जिन्होंने सरोगेसी अधिनियम-2021 लागू होने के बाद से सरोगेसी का सफलतापूर्वक लाभ उठाया है। कानून के कामकाज का आकलन करने के लिए केंद्र ने यह कदम उठाया है। सरोगेसी से आशय किसी दंपति या महिला के बच्चे का किसी अन्य महिला की कोख में पलने से है। सरोगेसी को आम बोलचाल में ‘किराये की कोख' की भी कहा जाता है। पिछले महीने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रधान सचिव (स्वास्थ्य)/ सचिव (स्वास्थ्य) को भेजे गए एक पत्र में मंत्रालय ने उन दंपतियों और एकल महिलाओं (तलाकशुदा/विधवाओं) की कुल संख्या पर श्रेणी-वार आंकड़ा मांगा था, जिन्होंने एआरटी अधिनियम, 2021 के अस्तित्व में आने के बाद सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (एआरटी) के विकल्प का सफलतापूर्वक लाभ उठाया। पत्र में कहा गया है कि सरोगेसी अधिनियम, 2021 और एआरटी अधिनियम 2021 के उचित कामकाज के संबंध में निष्कर्ष निकालने के लिए सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा उपर्युक्त आंकड़ों का भेजा जाना अनिवार्य है। भारत में इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) क्लीनिकों को विनियमित करने और वाणिज्यिक सरोगेसी पर रोक लगाने के लिए सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 और सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021 दो साल पहले पारित किए गए थे। केवल संतान सुख पाने में असमर्थ विवाहित दंपत्ति और महिलाओं की कुछ श्रेणियों (एकल और अविवाहित) को ही एआरटी और सरोगेसी का लाभ उठाने की अनुमति है। सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम के तहत सरोगेसी को केवल परोपकारी कारणों से अनुमति दी गई है। देश में वर्ष 2015 से वाणिज्यिक सरोगेसी पर प्रतिबंध है।








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