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डिजी यात्रा पूरी तरह स्वैच्छिक, यात्री की सहमति पर ही सुचना एकत्र होगी: सिंधिया

नयी दिल्ली.  केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि विमान यात्रियों के लिए ‘डिजी यात्रा' पूरी तरह स्वैच्छिक है और हवाई अड्डों पर कर्मचारियों को केवल यात्रियों की सहमति के बाद ही आवेदन के लिए सूचना एकत्र करने के निर्देश दिये गये हैं। शिकायतें मिल रही थीं कि यात्रियों से उनकी सहमति के बिना ‘डिजी यात्रा' के लिए बायोमेट्रिक डेटा एकत्र किया जा रहा था और इस मुद्दे को राज्यसभा के सदस्य साकेत गोखले द्वारा नागर एवं विमानन मंत्री सिंधिया को अवगत कराया गया। ‘डिजी यात्रा' चेहरे की पहचान प्रौद्योगिकी (एफआरटी) के आधार पर हवाई अड्डों पर विभिन्न जांच बिंदुओं पर यात्रियों की संपर्क रहित और निर्बाध आवाजाही की सुविधा प्रदान करती है और वर्तमान में घरेलू यात्रियों के लिए न्यूनतम 13 हवाई अड्डों पर यह सुविधा उपलब्ध है। सांसद को दिये गये जवाब में सिंधिया ने कहा है कि इस मुद्दे की जांच की गई और हवाई अड्डे के संचालकों को सहमति लेने की प्रक्रिया पर डिजी मित्रों को जागरूक करने और ‘डिजी यात्रा' के उपयोग को पूरी तरह से स्वैच्छिक रखने की सलाह दी गई है। ‘डिजी यात्रा' के उपयोग के प्रति यात्रियों की सहायता के लिए हवाई अड्डों पर ‘डिजी मित्र' नामक व्यक्तियों की सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं। मंत्री ने 24 जनवरी को लिखे पत्र में गोखले को बताया कि ‘डिजी यात्रा' निर्बाध और परेशानी मुक्त हवाई यात्रा के लिए एक स्वैच्छिक प्रक्रिया है जो पूरी तरह से स्वैच्छिक है। सिंधिया ने पत्र में कहा, ‘‘कियोस्क आधारित पंजीकरण पर ‘फेस बायोमेट्रिक' लेने के लिए यात्री की पहले से सहमति लेना आवश्यक है। इसके अलावा, उड़ान के प्रस्थान के 24 घंटे के बाद हवाई अड्डे के सिस्टम से डेटा स्वचालित रूप से हटा दिया जाता है।'' गोखले ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर इस पत्र को साझा किया है। ‘डिजी यात्रा' के लिए यात्री द्वारा साझा किया गया डेटा एक ‘एन्क्रिप्टेड' प्रारूप में संग्रहीत किया जाता है। सेवा का लाभ उठाने के लिए यात्री को पहले आधार-आधारित सत्यापन और खुद की फोटो का उपयोग करके ‘डिजी यात्रा' ऐप पर अपना विवरण पंजीकृत करना होगा। अगले चरण में बोर्डिंग पास को स्कैन करना होगा और जानकारी हवाई अड्डे के साथ साझा की जाएगी। हवाई अड्डा के ई-गेट पर यात्री को पहले बार-कोडेड बोर्डिंग पास को स्कैन करना होगा और ई-गेट पर स्थापित चेहरे की पहचान प्रणाली यात्री की पहचान और यात्रा दस्तावेज को मान्य करेगी। एक बार यह प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद यात्री ई-गेट के जरिए हवाई अड्डा में प्रवेश कर सकता है। एक गैर लाभकारी कंपनी ‘डिजी यात्रा फाउंडेशन' इस डिजी यात्रा के लिए नोडल निकाय है।

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