बजट दूरदर्शी है और वर्तमान समय की चुनौतियों का सामना करने वाला भी है : नड्डा
नयी दिल्ली। केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने मंगलवार को राज्यसभा में कहा कि भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के कारण आज ‘‘औपचारिक अर्थव्यवस्था'' बढ़ी है जिसकी वजह से देश विकास के पथ पर तेजी से आगे बढ़ा और इसी सिलसिले को 2024-25 का बजट आगे बढ़ाएगा जो दूरदर्शी तथा समावेशी होने के साथ साथ वर्तमान समय की चुनौतियों का सामना करने वाला भी है। उच्च सदन में आम बजट 2024-25 एवं केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर के बजट पर संयुक्त चर्चा में भाग लेते हुए सदन के नेता जगत प्रकाश नड्डा ने लगातार तीसरी बार सरकार बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और देश की जनता को बधाई दी। उन्होंने कहा कि 60 साल बाद पहली बार ऐसा हुआ कि जनता के समर्थन से लगातार तीसरी बार कोई प्रधानमंत्री बना। उन्होंने कहा कि जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में जब लगातार तीसरी बार सरकार बनी थी तो उस समय विपक्ष बहुत कमजोर और बिखरा हुआ था किंतु आज विपक्ष काफी मजबूत है। उन्होंने कहा कि सरकार को जो जनादेश मिला है वह स्थायित्व, सुशासन, निरंतरता और विकसित भारत के लिए दिया गया जनादेश है। भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष ने कहा कि यदि विपक्षी पाटियों की सारी सीटें मिला लें तो भी वे भारतीय जनता पार्टी को मिली सीटों से कम हैं।
उन्होंने कहा कि बजट की आलोचना करने वालों को यह देखना चाहिए कि यह बजट दूरदर्शी तथा समावेशी होने के साथ साथ वर्तमान समय की चुनौतियों का सामना करने वाला भी है। उन्होंने कहा कि यह बजट सतत विकास को समर्पित है जिसमें अवसंरचना विकास, आम जन के कल्याण तथा सबके लिए समान अवसर को प्राथमिकता दी गई है। नड्डा ने कहा कि बजट चाहे देश का हो या किसी प्रदेश का या फिर किसी नगर निगम का या परिवार का क्यों न हो, यह आमदनी पर, आदमनी के दम पर होने वाले खर्च तथा लीकेज पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा ‘‘आमदनी का आकार महत्वपूर्ण होता है। कम आमदनी होने पर अभाव रहता है तथा आमदनी अधिक होने पर जीवन स्तर सुधरता है। खर्च की प्राथमिकता होनी चाहिए। जरूरी आवश्यकता पर पहले खर्च किया जाता है। विलासिता पर खर्च आखिरी में होता है। लीकेज नहीं होना चाहिए।'' नड्डा ने कहा कि देश में लंबे समय तक शासन करने वालों ने इस बारे में ठोस कदम नहीं उठाए जिसकी वजह से आमदनी और लीकेज दोनों प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि देश आंकड़ों से नहीं चलता बल्कि अंतिम छोर के व्यक्ति को लाभ होना चाहिए और यही वजह है कि मोदी सरकार के कार्यकाल में 37 लाख करोड़ रुपये प्रत्यक्ष लाभ अंतरण योजना के तहत लोगों के खाते में डाले गए। उन्होंने कहा कि लीकेज पर रोक के कारण पांच करोड़ फर्जी राशन कार्ड खत्म किए गए, चार करोड़ फर्जी लोगों की एलपीजी सब्सिडी खत्म की गई तथा सात करोड़ फर्जी नाम मनरेगा से हटाए गए। नड्डा ने कहा ‘‘लीकेज रोकने से 2.5 लाख करोड़ रुपये बचाए गए। भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के कारण ‘‘औपचारिक अर्थव्यवस्था'' बढ़ी है। आज जनधन योजना के तहत 50 करोड़ लोगों के पास बैंक खाते हैं जिससे उनको डीबीटी का लाभ मिल रहा है, कोविड के समय बहनों को 500 रुपये मिले। यह औपचारिक अर्थव्यवस्था का परिणाम है।'' उन्होंने कहा कि कर संग्रह 2014 में 6.3 लाख करोड़ रुपये था वह आज 23.37 लाख करोड़ रुपये हो गया है। उन्होंने कहा कि जीएसटी संग्रह 2017-18 में शुरू हुआ और तब यह 7.9 लाख करोड़ रुपये था जो आज 20.1 लाख करोड़ रुपये हो गया है। उन्होंने कहा कि राजकोषीय घाटा आज 5.6 फीसदी पर आ गया है। उन्होंने कहा कि 2025 तक राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.9 फीसदी करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा ‘‘यह औपचारिक अर्थव्यवस्था बढ़ने का नतीजा है। इसका परिणाम कई कल्याणकारी योजनाओं को मिलता है। जैसे आयुष्मान आरोग्य भारत योजना है जिसमें 55 करोड़ लोगों को, 12 लाख परिवारों को मुफ्त इलाज की सुविधा मिलती है।'' उन्होंने कहा कि आज अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष कह रहा है कि भारत में गरीबी उल्लेखनीय रूप से कम हुई है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की नीतियों का नतीजा है कि 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से ऊपर आ गए। नड्डा ने कहा कि उज्ज्वला योजना के तहत 10 करोड़ गैस कनेक्शन दिए गए हैं और यह महिलाओं का सशक्तीकरण है। उन्होंने कहा कि डब्ल्यूएचओ के अनुसार, पांच लाख महिलाएं धुएं के कारण दम तोड़ती हैं लेकिन आज आंकड़े बताते हैं कि श्वास संबंधी बीमारी के आंकड़े कम हो रहे हैं क्योंकि महिलाओं को धुएं से निजात मिल गई है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत चार करोड़ मकान बनाए जा चुके हैं। ‘‘पहली कैबिनेट बैठक में तीन करोड़ घर और बनाने का फैसला किया गया है। जल जीवन मिशन के तहत 2.86 लाख करोड़ रुपये की लागत से नल के 11 करोड़ कनेक्शन दिए जा चुके हैं और आईआईएम बेंगलुरु का कहना है कि इससे दो करोड़ रोजगार सृजित होंगे।'' उन्होंने कहा कि किसान सम्मान निधि के तहत 17 किस्तों में 3 लाख 24 हजार करोड़ रुपये किसानों को दिए गए जिसके चलते अब वे हर फसल के पहले आवश्यक बीज, उर्वरक खरीद सकते हैं। ‘‘इससे उनका सशक्तीकरण हुआ है। यह सतत प्रक्रिया है।'' नडडा ने कहा कि कोविड महामारी के दौरान पैकेज के तहत 20 लाख करोड़ रुपये दिए गए थे और इसमें ‘‘आपदा में अवसर'' को ध्यान में रखते हुए लगभग हर क्षेत्र को लिया गया था। उन्होंने कहा कि कोविड के बाद, आज विकसित देशों की अर्थव्यवस्था चरमरा रही है वहीं भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत है और यह मोदी सरकार के सतत प्रयासों का नतीजा है। नड्डा ने कहा ‘‘मैं कहता हूं कि यह जनादेश दस साल से चलाए जा रहे कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने के लिए है। 2047 तक विकसित भारत बनने के लिए नौ सूत्रीय एजेंडा बनाया गया है जिसमें शहरी विकास, अवसंरचना, शोध एवं अनुसंधान, रोजगार सृजन, एमएसएमई सहित विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखा गया है।'' उन्होंने कहा ‘‘हमने तीन करोड़ लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा है। मेट्रो रेल और नमो रेल को भी आगे बढ़ाया जाएगा। सूर्यघर बिजली योजना में 1.2 करोड़ पंजीयन हो चुके हैं और 14 लाख आवेदनों को आगे बढ़ाया गया है। यह विकास की गाथा है।'' उन्होंने कहा ‘‘प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत पांच साल के अंदर मेरे निर्वाचन क्षेत्र में 90 फीसदी गांवों तक सड़क संपर्क बन गया। इस साल इससे 25,000 बसावटों को जोड़ने का लक्ष्य है और एक लाख 56 हजार गांवों को ‘आल वेदर रोड' से जोड़ा जा चुका है।'' उन्होंने कहा कि गरीबी को समाप्त करने, गरीबों के सशक्तीकरण पर पूरी तरह ध्यान देते हुए नीतियां बनाई गईं जिनका प्रभाव अब सामने आ रहा है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार के कार्यकाल में रोजगार सृजन के लिए विभिन्न क्षेत्रों पर जोर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूती की सराहना पूरी दुनिया कर रही है। ‘‘आज भारत को देखने का तरीका बदल गया है। कभी हमसे पूछा जाता था कि आपकी मांग क्या है और इस पर विचार किया जाएगा। आज हमसे कहा जाता है कि आपने यह कैसे किया, हमें बताइये।'' नड्डा ने कहा कि हमने खुद पर 200 साल राज करने वाले ब्रिटेन को पछाड़ दिया और पांचवी अर्थव्यवस्था बन गए तथा जल्द ही दुनिया में इस क्षेत्र में तीसरा स्थान हासिल कर लेंगे। उन्होंने कहा कि आज भारत की वृद्धि दर 6.8 फीसदी है जबकि विकासित देश हमसे बहुत पीछे हैं। उन्होंने कहा ‘‘हमारा इलेक्ट्रानिक निर्यात 70 हजार करोड़ रुपये बढ़ा है। पहले 90 फीसदी मोबाइल आयात होते थे और आज 97 फीसदी मोबाइल का देश में ही निर्माण हो रहा है।'' उन्होंने कहा कि ऑटो मोबाइल क्षेत्र में हमने खरीदी बढ़ाई और तीसरे स्थान पर आ गए। ‘‘यह तब हुआ जब हमारे पास पैसा आया। मेट्रो रेल आज पांच शहरों से बढ़ कर बीस शहरों में चल रही है। 2014 में 74 हवाईअड्डे थे जिनकी संख्या आज 149 है। पहले मेडिकल कालेज 387 थे जो आज 706 हो चुके हैं।'' नड्डा ने कहा कि विकास से कोई क्षेत्र मोदी सरकार के कार्यकाल में अछूता नहीं रहा है। ‘‘आज मेडिकल में स्नातक सीटें और स्नातकोत्तर सीटें भी बढ़ी हैं। आईआईटी आज 16 से 23 हो गए और आईआईएम 20 हो गए। आईआईआईटी 9 से 25 हो गए। इसमें पैसा तो लगा ही है, प्रधानमंत्री मोदी की दृढ़ इच्छा शक्ति भी लगी है।'' उन्होंने कहा कि आज सुधार के लिए उठाए गए कदमों के चलते गांव गांव में डिजिटल इंडिया की झलक दिखती है। उन्होंने कहा कि गांवों में लाखों ‘‘कॉमन सर्विस सेंटर'' खुले हैं जहां बैठ कर युवा ऑनलाइन काम करते हैं और किसान मंडी तो क्या देश और दुनिया में उपज का हाल जान रहे हैं। उन्होंने विपक्षी दल कांग्रेस पर तंज करते हुए कहा ‘‘आज कुछ लोग ओबीसी के चैंपियन बन गए। यह अच्छी बात है कि देर आयद दुरुस्त आयद। लेकिन एकाधिकार मत रखें। पहले बताएं कि काका कालेलकर की रिपोर्ट और मंडल आयोग की रिपोर्ट किस सरकार के कार्यकाल में आई और उनका क्या किया गया। ''
उन्होंने कहा कि कांग्रेस को बताना चाहिए कि उसकी कार्यकारी समिति में, संप्रग के कार्यकाल में बनी राष्ट्रीय सलाहकार समिति में और राजीव गांधी फाउंडेशन में कितने ओबीसी रहे हैं। ‘‘घड़ियाली आंसू बहाने से काम नहीं चलता बल्कि ओबीसी के साथ जीना पड़ता है। मोदी सरकार की पहली, दूसरी और तीसरी कैबिनेट में सबसे ज्यादा एससी एसटी को रखा गया है।'' नड्डा ने सेना में भर्ती की योजना ‘‘अग्निपथ'' का जिक्र करते हुए कहा कि आज कल अग्निपथ पर अग्नि लगी है। आप आज बड़े हिमायती हो गए लेकिन ध्यान रखें की राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करना चाहिए। भारत की फौज को दुनिया की सबसे अच्छी फौज बनाने के लिए 400 से अधिक बैठकों के बाद ‘अग्निपथ' का निर्णय किया गया लेकिन 1970 से ‘एक रैंक एक पेंशन' को आपने अटका कर रखा था। इस पर भी एक लाख 15 हजार करोड़ रुपये दे कर निर्णय नरेन्द्र मोदी सरकार ने लिया था।'' नड्डा ने कहा ‘‘आज आप (कांग्रेस) किसानों के लिए एमएसपी की मांग उठा रहे हैं लेकिन लंबे समय तक तो आपकी सरकार सत्ता में थी। समय के अनुसार आपके सुर और अंदाज बदल जाते हैं। स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश मोदी सरकार ने लागू किया, आपने नहीं।''

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