कार्यस्थल पर करीब 42 प्रतिशत महिला कर्मचारी भेदभाव की शिकारः रिपोर्ट
मुंबई. करीब 42 प्रतिशत महिलाओं को कार्यस्थल पर भेदभाव का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद कॉरपोरेट क्षेत्र में कार्यरत 90 प्रतिशत महिलाएं अपने करियर में आगे बढ़ने के लिए ‘अतिरिक्त मेहनत' करने को तैयार हैं। एक सर्वेक्षण में यह निष्कर्ष सामने आया है। वैश्विक पेशेवर सेवा फर्म एऑन ने ‘2024 वॉयस ऑफ वुमेन स्टडी इंडिया' शीर्षक से जारी अध्ययन रिपोर्ट में कहा है कि कॉरपोरेट नौकरी कर रही 42 प्रतिशत महिलाओं ने कार्यस्थल पर पक्षपात या संभावित पक्षपात का सामना करने की बात कही है। वहीं 37 प्रतिशत महिला कर्मचारियों को असंवेदनशील व्यवहार का अनुभव भी करना पड़ा है। हालांकि, 90 प्रतिशत से अधिक महिलाओं ने कहा कि वे प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद अपने करियर में आगे बढ़ने के लिए अतिरिक्त समय देने, चुनौतीपूर्ण कामों के लिए खुद आगे आने और खुद को बेहतर बनाने के लिए तैयार हैं। सर्वेक्षण में शामिल करीब छह प्रतिशत महिलाओं ने कम-से-कम एक बार यौन उत्पीड़न का सामना करने की पीड़ा भी जताई है। हालांकि, इनमें से आधे से भी कम महिला कर्मचारियों ने आधिकारिक तौर पर अपने नियोक्ता को इस घटना की सूचना दी। एऑन का अध्ययन भारत में 560 से अधिक कंपनियों की लगभग 24,000 पेशेवर महिलाओं से मिले जवाबों पर आधारित है। अध्ययन के मुताबिक, तीन-चौथाई कामकाजी महिलाओं ने कहा कि मातृत्व अवकाश के बाद उन्हें एक-दो साल के लिए करियर में झटका झेलना पड़ा। वहीं करीब 40 प्रतिशत महिलाओं को मातृत्व अवकाश पर जाने से वेतन पर नकारात्मक असर देखने को मिला और उनकी भूमिका को भी बदल दिया गया। वरिष्ठ प्रबंधन और नेतृत्व की भूमिकाओं में मौजूद 34 प्रतिशत महिलाओं ने भी भेदभाव के संकेत दिए जबकि शुरुआती स्तर की नौकरियों में 17 प्रतिशत महिलाओं को पक्षपात झेलना पड़ा। इसका असर यह हुआ कि पक्षपात की शिकार लगभग 21 प्रतिशत महिलाओं ने एक वर्ष से भी कम समय में संगठन छोड़ने का संकेत दिया। एऑन के लिए भारत में मुख्य कार्यपालक अधिकारी (प्रतिभा समाधान) नितिन सेठी ने कहा, ‘‘कार्यस्थल पर पक्षपात व्यवसायों के कुशल और प्रतिबद्ध महिलाओं को कार्यबल में शामिल करने और बनाए रखने के प्रयासों में बाधा बन रहा है... समावेशी कार्य संस्कृति का निर्माण नेतृत्व की प्राथमिकता में होना चाहिए।''





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