सरकार ने आर बालासुब्रमण्यम और जोरम अनिया को नीति आयोग का पूर्णकालिक सदस्य बनाया
नयी दिल्ली। केंद्र सरकार ने शनिवार को शिक्षाविद जोरम अनिया और विद्वान-लेखक आर. बालासुब्रमण्यम को नीति आयोग के पूर्णकालिक सदस्य के रूप में नियुक्त किया।इन दो नियुक्तियों के साथ ही आयोग में उपाध्यक्ष सहित सदस्यों की कुल संख्या सात हो गई है।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नीति आयोग के पदेन अध्यक्ष हैं।
कैबिनेट सचिवालय द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक, “प्रधानमंत्री (नरेन्द्र मोदी) ने डॉ. आर बालासुब्रमण्यम और डॉ. जोरम अनिया को नीति आयोग के पूर्णकालिक सदस्य के रूप में कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से और अगले आदेश तक पूर्णकालिक सदस्यों पर लागू होने वाले समान नियमों एवं शर्तों पर नियुक्त करने की स्वीकृति दी है।”
सरकार ने 24 अप्रैल को नीति आयोग का पुनर्गठन करते हुए अशोक कुमार लाहिड़ी को उपाध्यक्ष और अर्थशास्त्री के.वी. राजू, एम्स के निदेशक एम. श्रीनिवास, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव अभय करंदीकर, वैज्ञानिक गोबर्धन दास और पूर्व कैबिनेट सचिव राजीव गाबा को पूर्णकालिक सदस्य नियुक्त किया था।प्रधानमंत्री मोदी ने नए नियुक्त सदस्यों को बधाई देते हुए ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “नीति आयोग के पूर्णकालिक सदस्य के रूप में नियुक्त होने पर डॉ. आर. बालासुब्रमण्यम जी और डॉ. जोरम अनिया जी को हार्दिक बधाई। विभिन्न मुद्दों पर उनका व्यापक अनुभव और गहन समझ नीति निर्माण प्रक्रिया को मजबूत करेगी।”
उन्होंने कहा, “मुझे विश्वास है कि उनका (बालासुब्रमण्यम और अनिया का) योगदान सभी क्षेत्रों में नवाचार और विकास को गति प्रदान करेगा। उनके उज्ज्वल और सफल कार्यकाल की कामना करता हूं।”
सूत्रों के अनुसार, अनिया का आयोग में शामिल होना एक ऐतिहासिक क्षण है, जिससे अरुणाचल प्रदेश की एक प्रख्यात बुद्धिजीवी को राष्ट्रीय नीति-निर्माण के सर्वोच्च स्तर तक पहुंचने का अवसर मिला है।कुशल शिक्षाविद, एसोसिएट प्रोफेसर और अरुणाचल प्रदेश निजी शिक्षा नियामक आयोग की सदस्य अनिया को शिक्षण, अनुसंधान और सार्वजनिक नीति में 18 वर्षों से अधिक का अनुभव है।वह निशि समुदाय की पीएचडी हासिल करने वाली पहली महिला होने के साथ ही राज्य में हिंदी भाषा में पीएचडी करने वाली पहली महिला हैं, जिन्होंने साहित्य, संस्कृति और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
विद्वान-लेखक बालासुब्रमण्यम सार्वजनिक नीति विशेषज्ञ और विकास कार्यकर्ता हैं।योग्य चिकित्सक होने के साथ-साथ वह स्वामी विवेकानंद युवा आंदोलन और ग्रासरूट रिसर्च एंड एडवोकेसी मूवमेंट (ग्राम) के संस्थापक हैं। बालासुब्रमण्यम ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय के हार्वर्ड कैनेडी स्कूल से लोक प्रशासन में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की है।






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