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 13 अप्रैल से प्रारंभ होगी शुभ योगों की नवरात्रि : ज्योतिषाचार्य डॉ.दत्तात्रेय होस्केरे
- चैत्र नवरात्रि में ऐसे करें देवी मां की आराधना...मिलेगा लाभ..
माँ आदि शक्ति चुंकि प्रकृति स्वरूपा भी हैं, अत: प्राचीन काल से ही प्रकृति जनित बाधाओं से भी भयभीत होकर मनुष्य ने माँ के आराधना की है। प्रत्येक युग में शक्ति स्वरूपा नारी, परिवार और समाज का केन्द्र रही है। यदि प्रत्येक युग में रक्षा का कारक पुरुष रहा है तो , शोषित रहते हुए भी एक पुरुष को जन्म देकर समाज को सुरक्षा को सुनिश्चित करने का कार्य भी नारी ने ही किया है।
माँ आदि शक्ति को मातृ स्वरूप में पूजे जाने का कारण हमारा सभी के समक्ष यह प्रश्न अवश्य प्रस्तुत करता है कि देवो को पितृ स्वरूप में हम यदा कदा ही याद करते हैं, लेकिन ऐसा क्या कारण है कि आदि शक्ति का स्मरण आते ही 'माँ  शब्द अपने आप ही हमारी जिव्हा और मन के अंत:करण दोनों  पर आ जाता है।
पूरे नौ दिनों की है नवरात्रि
 मंगलवार 13 तारीख को चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा है यानी इसी दिन से नवरात्रि प्रारम्भ हो रही है। 27 नक्षत्रों में पहले नक्षत्र अश्विनी नक्षत्र में में प्रारम्भ हो रही नवरात्रि में द्वितीया, तृतीया ,चतुर्थी पंचमी और षष्ठी को क्रमश:, प्रीति,आयुष्मान,सौभाग्य शोभन और सुकर्मा जैसे शुभ योग पड़ रहें हैं, जो की पिछले कई वर्षों में नही पड़े।  यह नवरात्रि पूरे नौ दिनों की है।
*घट स्थापन मुहुर्त*
वृषभ लग्न में : प्रात: 7.33 बजे से 9.32 बजे तक7
अभिजित मुहुर्त प्रात: 11.36 बजे से 12.24 बजे तक7
सिंह लग्न में : दोपहर 2.00 बजे से 4.10 बजे तक7
वृश्चिक लग्न में: रात्रि 8.32 बजे से 10.47 बजे तक
घर में कैसे करें पूजन और माता को करें प्रसन्न
 स्नान इत्यादि से निवृत्त होकर एक लाल या पीले वस्त्र को पाटे पर बिछा दें । गणेश, गौरी ,कलश, नवग्रह और षोडश मातृका की स्थापना कर लें7 दीप या ज्योत प्रज्ज्वलित करें। मध्य में माँ आदिशक्ति के लिए आसन स्थापित कर लें7 माँ भगवती की प्रतिमा को पंचामृत से स्नान करा कर शुद्ध जल से स्नान कराएं।  आसन पर पुष्प डाल कर माता जी का आव्हान करें7 प्रतिमा स्थापित कर दें। वस्त्र, आभूषण, सिन्दूर, पुष्प, माला,इत्र ,धूप इत्यादि अर्पित कर भोग लगाएं। तत्पश्चात आरती करें। 
 प्रतिपदा : शैलपुत्री
 मंगलवार 13 अप्रैेल 2021
सूर्योदय कालीन प्रतिपदा तिथि होने से आज से शारदीय नवरात्रि प्रारम्भ। मंगल प्रधान चित्रा नक्षत्र है।  मंत्र का यथायोग्य जाप कर माता जी को भोग समर्पित करें । माँ की आराधना से जीवन में स्थिरता, बलवृद्धि, स्वास्थ्य लाभ की प्राप्ति होती है। माँ की आज की आराधना देगी भावनात्मक कष्टों से मुक्ति।
ध्यान मंत्र: वंदे वांछित लाभाय चंद्रार्द्ध कृत शेखराम्।
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
भोग: गौ दुग्ध से बने घी या घी से बने सामग्रियों का भोग समर्पित करें7
वस्त्र: नारंगी रंग के वस्त्र पहने । आज होगी मंगल की शांति, चित्त होगा शांत।
वे जातक जिनकी कुंडली में मंगल नीच का हो, मांगलिक होने से विवाह में बाधा आ रही हो या मंगल, विपरीत अवस्था में हो, उन्हें आज माँ की आराधना से  लाभ होगा।
पूर्व दिशा की होगी शांति:
अपने घर के पूर्वी किनारे पर  ;ह्रीं मामैंद्री देव्यै नम: ; मंत्र का उच्चारण कर पीली सरसों का छिड़काव करें।  गृह क्लेश से मिलेगी मुक्ति। 
आज का गुरुमंत्र:
सायं पीले फूल की पत्तियों से थाली पर  शं  लिखे । एक दीपक रख कर कपूर की आरती करे।  तत्पश्चात पूरे घर में आरती घुमा दें।  धन धान्य में वृद्धि होगी।
द्वितीया: ब्रह्मचारिणी
 बुधवार 14 अप्रैल 2021,
आज आप कर सकते हैं अपने राहु को शांत। माँ ब्रह्मचारिणी की आराधना कर भोग लगाने से होगा। सभी तरह के दुखों का निवारण। 
ध्यान मंत्र- दधानाम कर पद्माभ्याम अक्षमाला कमंडलूम द्य
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्य नुत्तमा॥
भोग: शक्कर के बने पदार्थों का भोग लगायें।
वस्त्र: भूरे रंग के वस्त्र पहनें।
यदि जीवन में अस्थिरता हो तो माता की आराधना से स्थिरता आयेगी।
दक्षिण पूर्व दिशा की होगी शांति:
अपने घर के दक्षिण पूर्वी किनारे पर &प्त39; क्लीं क्लीं अग्नेयां देव्यै नम: &प्त39; मंत्र का उच्चारण कर निम्बू के रस से किनारे को सिंचित करें । रोगों का होगा निवारण।
आज का गुरुमंत्र:
किसी वृद्ध महिला को पीले वस्त्र भेंट करें। रुके हुए कार्य पूरे होंगे।
 तृतीया : चंद्रघंटा
 गुरुवार 15 अप्रैल 2021
तृतीया को गुरुदेव बृहस्पति आप से होंगे प्रसन्न। शनिवार को माँ चंद्रघण्टा आशीष प्राप्त कर दूर करें सभी बाधाएं। 
ध्यान मंत्र- प्रिण्डज प्रवरारूढा चंडको पास्त्र कैर्युता।
प्रसादं तन्युते मह्यम चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥
भोग: गौ दुग्ध के बने पदार्थों का भोग
वस्त्र : चमकीले हरे रंग के वस्त्र पहने।
माँ सम्पूर्ण कष्ट निवारण, बाधा निवारण करती हैं। विवाह संबंधी समस्या का होगा समाधान। 
दक्षिण दिशा की होगी शांति:
अपने घर के दक्षिणी किनारे पर  क्लूं वाराही देव्यै क्लूं ,  मंत्र का जाप कर एक ताँबे का सिक्का रख दें। हनुमान चालीसा का पाठ करना न भूलें। आर्थिक हानि से मिलेगी मुक्ति। 
आज का गुरुमंत्र: किसी दुर्गा जी या काली जी के मन्दिर में घंटी चढायें। न्याय की प्राप्ति होगी। बुद्धि भी तीक्ष्ण होगी।
 चतुर्थी : कुष्मांडा
शुक्रवार 16 अप्रैल 2021
चतुर्थी को शनिदेव होंगे शांत, आपको बनायेंगे कर्मवान। रविवार को माँ कुष्मांडा होंगी प्रसन्न और आपको प्रदान करेंगी आयु,यश और बल।
ध्यान मंत्र -सुरा सम्पूर्ण कलशं रूधिराप्लुतमेव च।
 दधानां हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥
भोग: मालपूआ का भोग
वस्त्र: मिश्रित रंग के वस्त्र पहने। रोगों से मिलेगी मुक्ति।
दक्षिण पश्चिम दिशा( नैऋर्त्य) की होगी शांति:
मंत्र: क्लीं क्लूं खड्गधरिणी देव्यै माम रक्ष रक्ष  ; का उच्चारण करें। पति- पत्नी के सम्बंधों में आ रही बाधाओं का होगा समाधान।
आज का गुरुमंत्र - पेठा और बेल का शर्बत वितरित करे। प्रभाव क्षेत्र बढ़ेगा। लोकप्रियता में वृद्धि होगी।
 पंचमी: स्कंदमाता
शनिवार 17 अप्रैल 2021
पंचमी को बुध ग्रह आपको बनायेगा बुद्धिमान। सोमवार को माँ स्कन्दमाता के पूजन से संतान सुख तो प्राप्त होगा ही साथ ही आपके परिवार में बढेगा सामंजस्य।
ध्यान मंत्र :सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रित करद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कंद माता यशस्विनी॥
भोग : केले या पीले फलों का भोग
वस्त्र; नीले रंग के वस्त्र चमकीले बॉर्डर के साथ। अध्ययन संबंधी बाधा दूर होगी। 
पश्चिम दिशा का करें पूजन। होगी धन वर्षा। मंत्र:  ;ह्रीं ह्रीं वारुणी देव्यै नम: ; से पश्चिम दिशा में शक्कर युक्त जल का छिड़काव करें। धन वृद्धि होगी।
आज का गुरुमंत्र :शिशुओं को आहार और दूध भेंट करें। संतान हीनता से मिलेगी मुक्ति। संतान का स्वास्थ्य भी ठीक होगा।
 
षष्टी :कात्यायनी
रविवार 18 अप्रैल 2021
षष्टी को केतु सम्बंधी दोष होंगे दूर। मंगलवार को माँ कात्यायनी की आराधना से रोगों से मिलेगी मुक्ति, मृत्यु भय होगा दूर।
ध्यान मंत्र- चन्द्रहासोज्ज्वल करा शार्दूल वर वाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानव घातिनी॥
 भोग: मधु या शहद का भोग
वस्त्र; चमकीले सफ़ेद वस्त्र पहने। सौन्दर्य और धन संबंधी समस्या का होगा समाधान। उत्तर पश्चिम दिशा को करें सुगंधित: ऊर्जा का होगा संचार, प्रतियोगी परीक्षा में मिलेगी
सफलता  मंत्र: 'अं कं मृगवहिनी देव्यै नम:  के उच्चारण से शुद्ध जल छिड़ककर सुगंधित धूप जलाएं। 
आज का गुरुमंत्र: खड़ी हल्दी, केला, फल को पीले कपड़े में रखकर माता पिता से स्पर्श कराकर उनका आशीर्वाद लें और किसी भी माता जी के मंदिर में अर्पित कर दें।  विवाह में आ रही बाधाएं दूर होंगी।
 सप्तमी: कालरात्रि
सोमवार 19 अप्रैल 2021
सप्तमी को शुक्र प्रसन्न होकर आपको देगा सम्पन्नता। बुधवार को माँ कालरात्रि का विधिवत पूजन आपको रोग,शोक और शत्रु से मुक्ति दिलाएगा।
ध्यान मंत्र : एकवेणी जपाकर्णपूर नग्ना खरास्थिता ।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी ॥
वामपादोल्लसल्लोह लताकण्टक भूषणा ।
वर्धन मुर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर भयंकरी॥
भोग : गुड़ य गुड़ के बने पदार्थ का भोग
वस्त्र: लाल रंग के वस्त्र पहने। ऋण और रोजगार संबंधी समस्या का होगा समाधान। 
वास्तु समाधान- घर के उत्तरी किनारे पर गुड़ और चना रखें। रोगों से मिलेगी मुक्ति। बढ़ेगा धन धान्य, सौन्दर्य भी बढ़ेगा।
मंत्र "क्लूं कौमारी देव्यै नम:" का उच्चारण करें।
आज का गुरुमंत्र: माता जी के समक्ष कपूर युक्त जल रखें और पूजन करें। इस  जल को शिवालय में अर्पित कर दें। स्वास्थ्य लाभ होगा।
 अष्टमी: माँ महागौरी
 मंगलवार 20 अप्रैल 2021
आज है सर्वार्थ सिद्धि योग और रवियोग।
अष्टमी को सूर्य देव होंगे प्रसन्न और आपको देंगे वैवाहिक सुख।  माँ महागौरी का विधिवत पूजन आपको वैवाहिक जीवन में आ रही बाधाओं से दिलाएगा मुक्ति,और कुँआरों का शीघ्र होगा विवाह।
ध्यान मंत्र : श्वेते वृषे समारूढा श्वेताम्बरधरा शुचि:।
महागौरी शुभम् दद्यान महादेव प्रमोददा॥
भोग :नारियल का भोग
वस्त्र: चमकीले सफेद और पीले के वस्त्र।  पारिवारिक समस्या का होगा समाधान।  उत्तर पश्चिमी किनारे (ईशान) पर शुद्ध जल और गुलाब जल का छिड़काव करें। बढ़ेगी लोकप्रियता। आध्यात्म और पूजन की ओर बढ़ेगा रुझान।
 मंत्र:   ह्रीं क्लीं शूलधारिणी देव्यै ह्रीं क्लीं ; का उच्चारण करें। इस मंत्र से ऊर्ध्व और अधो दिशायें भी शांत होंगी।
आज का गुरुमंत्र: सौन्दर्य सामग्री और वस्त्र माता जी को अर्पित करें। नारियल पर हल्दी
का लेप लगाकर कुंकुम का टीका लगायें और माता जी को अर्पित कर दें। सौभाग्य में वृद्धि होगी, रोजगार भी मिलेगा।
नवमी माँ सिद्धिदात्री
बुधवार 21 अप्रैल 2021
नवमी को चंद्र देव प्रसन्न होकर देंगे मन की शांति। माँ सिद्धिदात्री का विधिवत पूजन करने से आपका कोई भी कार्य अपूर्ण नहीं रहेगा,जीवन
में आ रही सभी बाधाएं होंगी दूर।
ध्यान मंत्र- सिध्दगन्धर्व यक्षाद्यैर सुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना सदा भूयात् सिध्दिदा सिध्दिदायिनी॥
भोग: धान का लावा भोग
वस्त्र: नारंगी और लाल रंग के वस्त्र पहने। अवसाद यानी डिप्रेशन से मिलेगी मुक्ति।
ऊर्ध्व और अधो दिशायें शांत होंगी: मंत्र,- ह्रीं क्लीं शूलधारिणी देव्यै ह्रीं क्लीं  का उच्चारण करें।  इस मंत्र से ऊर्ध्व और अधो दिशायें शांत होंगी। रोगों से मिलेगी मुक्ति।
आज का गुरुमंत्र: माता जी को एक सफेद कपड़े में सात मुट्ठी चावल बांधकर चढ़ाएं। पारिवारिक अशांति से मुक्ति मिलेगी। 

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