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नयी दिल्ली. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पंजाब के उनके समकक्ष भगवंत मान सोमवार को अयोध्या जाएंगे और राम मंदिर में रामलला के दर्शन करेंगे। आम आदमी पार्टी (आप) के सूत्रों ने रविवार को यह जानकारी दी। ‘आप' के राष्ट्रीय संयोजक केजरीवाल को अयोध्या में नवनिर्मित राम मंदिर में 22 जनवरी को रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के लिए आमंत्रित किया गया था लेकिन उन्होंने कहा था कि वह बाद में अपने माता-पिता, पत्नी और बच्चों के साथ दर्शन करने जाएंगे। सूत्रों ने बताया, ‘‘केजरीवाल और मान कल अयोध्या जा रहे हैं। उनके साथ उनका परिवार भी होगा।'' -
टंकारा (गुजरात). प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि भारतीय मूल्यों पर आधारित शिक्षा समय की मांग है। मोदी ने आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती की 200वीं जयंती के अवसर पर गुजरात के मोरबी जिले में उनके जन्मस्थल टंकारा में आयोजित एक कार्यक्रम को डिजिटल माध्यम से संबोधित करते हुए कहा, ‘‘स्वामी दयानंद सरस्वती ने उस समय हमें यह दिखाया कि हमारी रूढ़िवादी सोच और सामाजिक बुराइयों ने हमें किस प्रकार नुकसान पहुंचाया है।'' उन्होंने कहा कि ब्रिटिश शासकों ने ‘‘हिंदू समाज की रूढ़िवादिता और सामाजिक बुराइयों के कारण हमारे समाज की खराब छवि दिखाने की कोशिश की।'' प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि स्वामी दयानंद सरस्वती ने समाज में महिलाओं के लिए समान अधिकारों की वकालत की थी। उन्होंने कहा, ‘‘भारतीय मूल्यों पर आधारित शिक्षा व्यवस्था समय की मांग है। आर्य समाज विद्यालय इसका केंद्र रहे हैं। देश अब राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से इसका विस्तार कर रहा है। इन प्रयासों से समाज को जोड़ना हमारा दायित्व है।'' प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जिस राज्य में स्वामी दयानंद सरस्वती का जन्म हुआ था, उनमें जन्म लेना उनके लिए सम्मान की बात है।
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झाबुआ (मप्र) . प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को मध्य प्रदेश के झाबुआ का दौरा किया और राज्य के लिए 7,550 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। उन्होंने राज्य की 'आहार अनुदान योजना' के तहत लगभग दो लाख महिला लाभार्थियों को मासिक किस्त भी वितरित की। योजना के तहत विशेष रूप से पिछड़ी जनजातियों की महिलाओं को पौष्टिक भोजन के लिए 1,500 रुपये प्रतिमाह प्रदान किए जाते हैं। मोदी ने स्वामित्व योजना के तहत 1.75 लाख 'अधिकार अभिलेख' (भूमि अधिकारों का रिकॉर्ड) भी वितरित किए, जो लोगों को उनकी भूमि के अधिकार के लिए दस्तावेजी साक्ष्य प्रदान करेगा। उन्होंने टंट्या मामा भील विश्वविद्यालय की आधारशिला भी रखी, जो राज्य के आदिवासी बहुल जिलों के युवाओं को सुविधाएं प्रदान करेगा। एक सौ सत्तर करोड़ रुपये की लागत से विकसित होने वाला यह विश्वविद्यालय छात्रों के समग्र विकास के लिए विश्व-स्तरीय बुनियादी ढांचा प्रदान करेगा।
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नयी दिल्ली. सरकार ने कहा है कि वर्ष 1995 से 2021 के बीच मृत और जीवित अंगदाताओं के कुल 36,640 अंग प्रत्यारोपणों में से 80 प्रतिशत से अधिक पुरुषों पर किए गए। सरकार ने कहा कि उसने इस क्षेत्र में लैंगिक असमानता को दूर करने के लिए कई कदम उठाए हैं।
लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में शुक्रवार को प्रस्तुत सरकारी आंकड़ों के अनुसार, स्वास्थ्य राज्य मंत्री एस.पी. सिंह बघेल ने कहा कि कुल अंग प्रत्यारोपणों में से 29,695 पुरुषों पर और 6,945 महिलाओं पर किए गए। हालांकि, अंग प्रत्यारोपण कराने वाली महिलाओं की हिस्सेदारी 2019 के 27.6 प्रतिशत से बढ़कर 2022 में लगभग 30 प्रतिशत हो गई। यह जवाब वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के सांसद के.जी. माधव द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में आया। माधव ने पूछा था कि क्या सरकार ने इस तथ्य पर संज्ञान लिया है कि 1995 और 2021 के बीच, देश में अंग प्राप्त करने वाले पांच में से चार पुरुष रहे हैं और इस मुद्दे के समाधान के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। अपनी प्रतिक्रिया में, बघेल ने कहा कि सरकार ने राष्ट्रीय अंग प्रत्यारोपण कार्यक्रम लागू किया है, जिसके तहत अंग दान के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि अंग प्रत्यारोपण में लैंगिक असमानता की प्रवृत्ति को कम करने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय नियमित रूप से जागरूकता सत्र आयोजित कर रहा है। -
हैदराबाद. पूर्व उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू और केंद्रीय पर्यटन व संस्कृति मंत्री जी किशन रेड्डी सोमवार को संगीत नाटक अकादमी के क्षेत्रीय केंद्र ‘दक्षिण भारत सांस्कृतिक केंद्र' का सोमवार को यहां उद्घाटन करेंगे। एक आधिकारिक विज्ञप्ति के मुताबिक, दक्षिण भारत सांस्कृतिक केंद्र के उद्घाटन के साथ ‘भारत कला मंडपम' सभागार की आधारशिला भी रखी जाएगी। किशन रेड्डी ने रविवार को कहा, ‘‘यह गर्व की बात है कि विश्वभर में प्रसिद्ध दक्षिण भारत की समृद्ध और विविध अमूर्त सांस्कृतिक विरासत को संगीत नाटक अकादमी के इस दक्षिण भारत सांस्कृतिक केंद्र के माध्यम से और मजबूत किया जाएगा।'' अकादमी की अबतक दक्षिण भारत में उपस्थिति नहीं थी।
कार्यक्रम के दौरान, हाल में पद्म पुरस्कारों से नवाजे गए तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के लोगों को केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय सम्मानित करेगा। -
नई दिल्ली । केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेन्द्र यादव की अध्यक्षता में 10 फरवरी को दिल्ली में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के केंद्रीय न्यासी बोर्ड की 235वीं बैठक आयोजित की गई। बैठक के दौरान केंद्रीय श्रम और रोजगार, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री और बोर्ड के उपाध्यक्ष श्री रामेश्वर तेली एवं सह-उपाध्यक्ष और श्रम एवं रोजगार (सचिव) सुश्री आरती आहूजा और सदस्य सचिव एवं केन्द्रीय भविष्य निधि आयुक्त श्रीमती नीलम शमी राव भी मौजूद रहीं।
केंद्रीय बोर्ड ने वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए सदस्यों के खातों में ईपीएफ संचय पर 8.25 प्रतिशत की वार्षिक ब्याज दर जमा करने की सिफारिश की। वित्त मंत्रालय की मंजूरी के बाद इस ब्याज दर को आधिकारिक तौर पर सरकारी राजपत्र में अधिसूचित किया जाएगा। इसके बाद, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन अपने ग्राहकों के खातों में स्वीकृत ब्याज दर जमा करेगा।बोर्ड ने रुपये की ऐतिहासिक आय राशि के वितरण की सिफारिश की है। बोर्ड ने ईपीएफ सदस्यों के खातों में लगभग 13 लाख करोड़ रुपये की कुल मूल राशि पर 1,07,000 करोड़ रुपये की ऐतिहासिक आय राशि वितरित करने की सिफारिश की है, जो वित्तीय वर्ष 2022-23 में क्रमश: 91,151.66 करोड़ रुपये और 11.02 लाख करोड़ रुपये थी। वितरण के लिए अनुशंसित कुल आय राशि रिकॉर्ड के मामले में सबसे अधिक है।पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में इसमें उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। आय 17.39 प्रतिशत से अधिक बढ़ी है, जबकि मूल राशि 17.97 प्रतिशत बढ़ी है। यह सदस्यों के लिए बेहतर वित्तीय प्रदर्शन और संभावित रूप से मजबूत रिटर्न का संकेत देता है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के पास वर्षों से विवेक के साथ अपने सदस्यों को उच्च आय वितरित करने का एक अच्छा ट्रैक रिकॉर्ड है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन द्वारा दी जाने वाली ब्याज दर ग्राहकों के लिए उपलब्ध अन्य तुलनीय निवेश विकल्पों के समतुल्य अधिक होती है। यह कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के निवेश की क्रेडिट प्रोफाइल के साथ-साथ अपने सदस्यों को आकर्षक रिटर्न प्रदान करने की क्षमता में विश्वास को दर्शाता है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज मध्य प्रदेश के जनजातीय बहुल झाबुआ जिले में 7,300 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का शुभारंभ किया। प्रधानमंत्री ने इस क्षेत्र के जनजातीय लोगों के कल्याण के लिए कई पहलों की शुरुआत की और शिलान्यास किया। उन्होंने आहार अनुदान योजना के अंतर्गत लगभग दो लाख महिला लाभार्थियों को आहार अनुदान की मासिक किस्त उपलब्ध कराई।
श्री मोदी ने स्वामित्व योजना के लाभार्थियों को 1 लाख 75 हजार अधिकार अभिलेख वितरित किये। उन्होंने प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के अंतर्गत 559 गांवों के लिए लगभग 55 करोड़ रुपये अंतरित किये।प्रधानमंत्री ने झाबुआ में सीएम राइज स्कूल का शिलान्यास किया।श्री मोदी ने धार और रतलाम जिलों के एक हजार से अधिक गांवों के लिए पेयजल आपूर्ति योजना की आधारशिला रखी। उन्होंने झाबुआ जिले की पचास गांव पंचायतों के लिए अमृत और नल-जल योजना के अंतर्गत 14 शहरी जलापूर्ति योजनाओं का शिलान्यास किया।प्रधानमंत्री ने रतलाम और मेघनगर रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास, इंदौर-देवास-उज्जैन रेलमार्ग के सी-केबिन के दोहरीकरण, इटारसी-यार्ड रीमॉडलिंग और बरखेरा-बुदनी-इटारसी को जोड़ने वाली तीसरी लाइन का शिलान्यास और लोकार्पण किया। प्रधानमंत्री ने मध्यप्रदेश में 3275 करोड़ रुपए से अधिक लागत वाली सड़क विकास परियोजनाएं भी राष्ट्र को समर्पित कीं। -
नई दिल्ली। कांग्रेस ने वरिष्ठ नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम को छह वर्ष के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है। पार्टी ने एक आधिकारिक बयान में कहा है कि अनुशासनहीनता और पार्टी के खिलाफ बार-बार बयान देने की शिकायतों को देखते हुए, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रमोद कृष्णम को तत्काल प्रभाव से पार्टी से निष्कासित करने के उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। आध्यात्मिक गुरु कृष्णम ने कांग्रेस के टिकट पर लखनऊ से 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन पराजित हो गए थे।
प्रमोद कृष्णम हाल में सार्वजनिक तौर पर कांग्रेस के खिलाफ टिप्पणी के लिए चर्चा में रहे हैं। उन्होंने 22 जनवरी को अयोध्या में श्री रामलला के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में शामिल न होने सहित कांग्रेस के कुछ अन्य फैसलों की आलोचना की थी। इस कार्यक्रम में शामिल नहीं होने के पार्टी के फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा था कि भगवान राम के बिना देश की कल्पना नहीं की जा सकती। - नयी दिल्ली । ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव' के विचार पर मंथन करने के लिए पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के नेतृत्व में पिछले साल सितंबर में गठित उच्च स्तरीय समिति ने शनिवार को अबतक इस दिशा में हुई प्रगति की समीक्षा की। समिति ने राजनीतिक पार्टियों, पूर्व न्यायाधीशों और राज्य चुनाव आयोगों के साथ चल रहे मंथन का भी आकलन किया। एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, समिति ने अलग से द्रविड मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के प्रतिनिधिमंडल से संवाद किया जिसका नेतृत्व पी.विल्सन कर रहे थे। इस दौरान पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने को लेकर प्रतिनिधिमंडल ने पार्टी के रुख से समिति को अवगत कराया। केंद्रीय मंत्री और अपना दल (सोनेलाल) की अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल ने भी कोविंद से मुलाकात की और अपनी पार्टी की राय उनके समक्ष रखी। पिछले सितंबर में गठित इस समिति को लोकसभा, राज्य विधानसभाओं, नगर पालिकाओं और पंचायतों के चुनाव एक साथ कराने की संभावना का आकलन करने और सिफारिशें देने की जिम्मेदारी दी गई है।
- जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शनिवार को कहा कि जनहित से जुड़े कार्यों में लापरवाही और भ्रष्टाचार किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘कतई बर्दाश्त नहीं करने' की नीति पर काम कर रही है। शर्मा शनिवार को सिरोही जिले में आबू रोड स्थित सेटेलाइट जनजातीय केन्द्र में पाली संभाग के उच्चाधिकारियों की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। आधिकारिक बयान के अनुसार बैठक में शर्मा ने कहा कि सभी अधिकारी-कर्मचारी अपने दायित्वों का पालन सुनिश्चित करें ताकि आमजन का सरकार के प्रति विश्वास बना रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अपने कर्तव्य का निष्ठा से पालन करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रोत्साहित करेगी तथा कार्य में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को नियमित रूप से जनसुनवाई सुनिश्चित करने, परिवादों के त्वरित निस्तारण, उनकी निगरानी करने आदि के निर्देश दिए।
- हैदराबाद। हैदराबाद में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) की प्रवेश परीक्षा की तैयारी कराने वाले एक निजी आवासीय कोचिंग संस्थान में 12वीं कक्षा के 17 वर्षीय छात्र ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संस्थान में कोचिंग कर रहे छात्र को अन्य छात्रों ने छात्रावास के कमरे में पंखे से लटका पाया और इसकी सूचना प्रधानाचार्य को दी। छात्र को नजदीकी अस्पताल ले जाया गया जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।माधापुर पुलिस थाने के एक अधिकारी ने बताया कि छात्र आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले का मूल निवासी है।उन्होंने छात्र के दोस्तों और कॉलेज प्रबंधन से बातचीत के आधार पर की गई प्रारंभिक जांच का हवाला देते हुए बताया कि छात्र हाल ही में आईआईटी- संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) में बैठा था। जब उसने उत्तर कुंजी के आधार पर अपने अंक जोड़े तो महसूस किया कि उसके खराब अंक आएंगे और इस बात से वह परेशान हो गया। पुलिस ने कहा कि इस मामले में आगे की जांच जारी है। (सांकेतिक फोटो)
- नयी दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को कहा कि केंद्र सरकार उन राज्यों की मदद नहीं कर सकती जो अवास्तविक चुनावी वादों के जरिये अपना खजाना खाली कर देते हैं। केंद्र द्वारा जारी धनराशि में कुछ राज्यों के साथ भेदभाव के आरोप के बारे में पूछे जाने पर शाह ने यहां एक कार्यक्रम में कहा कि सभी राज्यों को अपना बजट विकास कार्यक्रमों और सामाजिक कल्याण प्रतिबद्धताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार करना चाहिए। पश्चिम बंगाल, केरल और कर्नाटक की सरकारों ने हाल में राष्ट्रीय राजधानी में विरोध प्रदर्शन किया था और आरोप लगाया था कि उन्हें केंद्रीय निधि का उचित हिस्सा नहीं दिया गया। वित्त मंत्री ने इस आरोप का खंडन किया था। शाह ने कहा कि लोकसभा में पेश श्वेत पत्र में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यों को दी गई धनराशि का ब्योरा दिया है। शाह ने ‘ईटी नाउ ग्लोबल बिजनेस समिट 2024' में कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ही थे जिन्होंने 15वें वित्त आयोग के माध्यम से राज्यों को अधिक धन देने की पहल की और लोग इसके बारे में जानते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन अगर आप ऐसे चुनावी वादे करते हैं जिसके जरिए आप खजाना खाली करना चाहते हैं और इसके परिणामस्वरूप आपके पास वेतन देने के लिए भी धन नहीं है, तो ऐसी स्थिति में भारत सरकार मदद नहीं कर सकती है।'' उन्होंने कहा कि सभी को विकास और सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों को ध्यान में रखकर बजट बनाना चाहिए और भारत सरकार यही कर रही है। ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव' मुद्दे पर शाह ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली समिति मार्च तक अपनी रिपोर्ट सौंप सकती है। उन्होंने कहा कि क्योंकि लोकसभा चुनाव होने वाले हैं, इसलिए चुनाव के बाद लोग इस मुद्दे पर चर्चा कर सकते हैं। शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट कर दिया है कि देश के सर्वांगीण विकास और राष्ट्र के समग्र कल्याण के लिए एक साथ चुनाव जरूरी है।
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पीलीभीत (उप्र)। पीलीभीत जिले के सुनगढ़ी थाना इलाके में शनिवार को एक व्यक्ति ने कथित तौर पर अपनी पत्नी की प्रताड़ना से तंग आकर जिले के पुलिस अधीक्षक के आवास के बाहर जहर खा लिया। पुलिस के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। पुलिस अधीक्षक (एसपी) अतुल शर्मा ने बताया कि ‘‘सुनगढ़ी थाना क्षेत्र निवासी प्रदीप ने जहर खा लिया। शनिवार को उसने बंगले पर खुद आकर जहर खाने की सूचना दी थी और उसे कर्मचारियों द्वारा अस्पताल ले जाया गया। मामले की जांच की जा रही है।'' युवक को पहले जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां चिकित्सकों ने उसका प्राथमिक उपचार करने के बाद हालत गंभीर होने पर बड़े अस्पताल रिफर कर दिया। पुलिस सूत्रों ने बताया कि प्रदीप ने दो महीने पहले ईशा नाम की लड़की से शादी की थी और पत्नी कथित तौर पर उससे पांच लाख रुपये की मांग कर रही थी। प्रदीप के परिजन का आरोप है कि ईशा ने कुछ दिन पहले सुनगढ़ी थाने में प्रदीप के खिलाफ घरेलू हिंसा की शिकायत भी दर्ज कराई थी। परिवार के सदस्यों ने दावा किया कि पीड़ित पति ने बताया कि उसकी पत्नी ने दबाव बनाने के लिए थाना सुनगढ़ी पुलिस को शिकायत पत्र दिया, जिसके आधार पर पुलिस ने पति को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। पीड़ित पति ने भी पत्नी के खिलाफ शिकायत की लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। (सांकेतिक फोटो)
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जम्मू/श्रीनगर। राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी (जेईआई) के खिलाफ आतंकवाद के वित्तपोषण के मामले में कार्रवाई के तहत शनिवार को जम्मू-कश्मीर के 15 स्थानों पर छापेमारी की। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। संघीय एजेंसी के प्रवक्ता ने कहा कि श्रीनगर और जम्मू के साथ-साथ बडगाम और दक्षिण कश्मीर के कुलगाम और अनंतनाग में छापेमारी के दौरान जेईआई और उससे संबंधित ट्रस्ट की गतिविधियों से जुड़े आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और 20 लाख रुपये से अधिक की नकदी जब्त की गई।
जमात-ए-इस्लामी जम्मू-कश्मीर पर फरवरी, 2019 में केंद्र द्वारा पांच साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया गया था। प्रवक्ता ने कहा कि एनआईए की कई टीम ने श्रीनगर में पांच, बडगाम में तीन, कुलगाम में दो, अनंतनाग में एक और जम्मू में चार स्थानों पर विभिन्न संदिग्धों के परिसरों पर छापेमारी की। प्रवक्ता ने कहा, ‘‘ पांच फरवरी, 2021 को दर्ज मामले की अब तक की जांच से पता चला है कि जेईआई और उसके सदस्यों ने फरवरी, 2019 में गैरकानूनी गतिविधियों (रोकथाम) अधिनियम के तहत संगठन पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भी जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी और अलगाववादी गतिविधियों को बढ़ावा देना जारी रखा है।'' उन्होंने कहा कि प्रतिबंधित संगठन के संचालक भारत और विदेशों से चंदे के माध्यम से धन एकत्र कर रहे थे। एनआईए ने कहा कि कथित तौर पर स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी अन्य कल्याणकारी गतिविधियों को बढ़ावा देने के नाम पर जुटाया गया धन मुख्य रूप से ‘जकात, मौदा और बैत-उल-माल' के रूप में एकत्र किया गया था, लेकिन इस धन का इस्तेमाल हिंसा और अलगाववादी गतिविधियों को बढ़ावा देने में किया गया। प्रवक्ता ने कहा ने कि जेईआई द्वारा जुटाए गए धन को जेईआई के नेटवर्क के माध्यम से हिज्बुल मुजाहिदीन और लश्कर-ए-तैयबा जैसे अन्य प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों को भी भेजा जा रहा था। प्रवक्ता ने कहा कि एनआईए ने इसके पहले इस मामले में चार आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था।
- नयी दिल्ली। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शनिवार को कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) राजनीति में "परिवार नियोजन" में विश्वास नहीं करती है और हमेशा नये सहयोगियों का स्वागत करती है तथा शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के साथ बातचीत जारी है। शाह ने एक कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया कि संशोधित नागरिकता अधिनियम (सीएए) लोकसभा चुनाव से पहले लागू किया जाएगा और अनुमान जताया कि भाजपा 370 सीटें जीतेगी, जबकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को आम चुनावों में 543 में से 400 से अधिक सीटें मिलेंगी। जयंत चौधरी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय लोक दल (रालोद), शिअद और अन्य क्षेत्रीय दलों के राजग में शामिल होने की संभावना के बारे में पूछे जाने पर शाह ने कहा, "हम परिवार नियोजन में विश्वास करते हैं लेकिन राजनीति में इसे नहीं अपनाते।'' उन्होंने ‘ईटी नाउ ग्लोबल बिजनेस समिट 2024' में कहा, ‘‘हम हमेशा चाहते हैं कि हमारा गठबंधन आगे बढ़े और हम हमेशा नये सहयोगियों का स्वागत करते हैं। हमारी विचारधारा जनसंघ के समय से एक ही रही है। जो लोग हमसे जुड़ना चाहते हैं वे आ सकते हैं।'' शिअद के दोबारा राजग में आने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘‘बातचीत जारी है लेकिन अभी कुछ तय नहीं हुआ है।'' सुखबीर सिंह बादल नीत शिअद ने सितंबर 2020 में तीन कृषि कानूनों को लेकर राजग का साथ छोड़ दिया था।वर्ष 2018 में राजग छोड़ने वाली तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) या, वाईएसआर कांग्रेस के साथ हाथ मिलाने की संभावना पर शाह ने कहा, "ऐसे मंचों पर हर बात का खुलासा नहीं किया जाता है। कुछ समय इंतजार करें। सब कुछ, सबके लिए स्पष्ट हो जाएगा।" लोकसभा चुनाव से पहले एक बड़े राजनीतिक बदलाव के तहत, जनता दल यूनाइटेड (जदयू) प्रमुख नीतीश कुमार पिछले महीने विपक्षी ‘इंडिया' गठबंधन का साथ छोड़कर राजग में शामिल हो गए, जबकि रालोद के भी भाजपा नीत राजग में शामिल होने की चर्चा है। शाह ने कहा कि भाजपा ने कभी भी किसी गठबंधन सहयोगी से अलग होना नहीं चाहा और बड़ा साझेदार होने के बावजूद उसने अपने क्षेत्रीय सहयोगियों को राज्य सरकारों का नेतृत्व करने दिया। उन्होंने कहा कि कई 'दोस्त' आए और कई चले गए। शाह ने कहा, "आम तौर पर उनके जाने के दो कारण होते हैं। यह किसी घटना के कारण होता है या किसी विशेष राज्य के राजनीतिक समीकरण के कारण होता है। लेकिन भाजपा ने कभी किसी पार्टी से अलग होना नहीं चाहा। भाजपा ने हमेशा गठबंधन धर्म का पालन किया।" शाह ने कहा कि लोकसभा चुनाव के नतीजों को लेकर कोई संशय नहीं है और यहां तक कि कांग्रेस एवं अन्य विपक्षी दलों को भी एहसास हो गया है कि उन्हें फिर से विपक्ष में बैठना होगा। उन्होंने कहा, ‘‘हमने (पूर्ववर्ती राज्य जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के) अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया, इसलिए हमें भरोसा है कि देश की जनता भाजपा को 370 सीट और राजग को 400 से अधिक सीटों पर जीत दिलाकर अपना आशीर्वाद देगी।'' प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा में कुछ दिन पहले, लगातार तीसरी बार जीत हासिल करने का दावा किया था।केंद्रीय गृहमंत्री शाह ने कहा कि 2024 का चुनाव राजग और विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया' (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस) के बीच नहीं, बल्कि विकास एवं उज्ज्वल भविष्य का वादा पूरा करने वाले और केवल नारे देने वाले एवं निराशा का प्रतिनिधित्व करने वालों के बीच होगा। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा' के बारे में पूछे जाने पर कहा कि नेहरू-गांधी के वंशज को इस तरह की यात्रा करने का कोई अधिकार नहीं है क्योंकि 1947 में देश के विभाजन के लिए उनकी पार्टी जिम्मेदार थी। उन्होंने कहा कि अब फिर कांग्रेस के कुछ लोग देश को (दक्षिण भारत-उत्तर भारत) में बांटने की बात कर रहे हैं और पार्टी ऐसे बयानों से दूरी भी नहीं बना रही है। सदन में सरकार द्वारा ‘श्वेत पत्र' पेश किए जाने के समय पर सवाल किए जाने पर शाह ने कहा कि ऐसा करना आवश्यक था क्योंकि देश को यह जानने का पूरा अधिकार है कि 2014 में सत्ता खोने के बाद कांग्रेस नीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार कैसी अव्यवस्था छोड़ कर गई थी।उन्होंने कहा, ‘‘उस समय (2014) अर्थव्यवस्था खराब हालत में थी। हर जगह घोटाले हुए। विदेशी निवेश नहीं आ रहा था। अगर हम उस वक्त श्वेत पत्र पेश करते तो दुनिया में गलत संदेश जाता।'' उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन 10 साल बाद हमारी सरकार ने अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित किया है, वह विदेशी निवेश लेकर आई है और कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ है इसलिए श्वेत पत्र पेश करने का यह सही समय है।'' गृह मंत्री शाह ने कहा कि कांग्रेस को डर था कि 1948 से अब तक हुए उनके घोटाले श्वेत पत्र में खुलकर सामने आ जायेंगे। उन्होंने दावा किया कि पूर्ववर्ती संप्रग सरकार के दो कार्यकाल के दौरान 12 लाख करोड़ रुपये के घोटाले हुए थे। शाह ने सीएए पर कहा कि 2019 में बना कानून इस संबंध में नियम जारी करने के बाद लोकसभा चुनाव से पहले लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे मुस्लिम भाइयों को (सीएए के खिलाफ) गुमराह किया जा रहा है और भड़काया जा रहा है। सीएए केवल उन लोगों को नागरिकता देने के लिए है जो पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में उत्पीड़न का सामना करने के बाद भारत आए हैं। यह किसी की भारत की नागरिकता छीनने के लिए नहीं है।'' शाह ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर कहा कि यह एक संवैधानिक एजेंडा है, जिस पर देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और अन्य ने हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन कांग्रेस ने तुष्टिकरण के कारण इसे नजरअंदाज कर दिया था। उत्तराखंड में यूसीसी को लागू करना एक सामाजिक परिवर्तन है। इस पर सभी मंचों पर चर्चा की जाएगी और इसकी कानूनी समीक्षा की जाएगी। एक धर्मनिरपेक्ष देश में धर्म आधारित नागरिक संहिता नहीं हो सकती।'' पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह और पी वी नरसिम्हा राव तथा प्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक एम एस स्वामीनाथन को भारत रत्न से सम्मानित करने के फैसले के बारे में शाह ने कहा कि ये तीनों व्यक्ति अपने समय की बड़ी संस्था थे। उन्होंने कहा, ''कांग्रेस के समय में भारत रत्न या तो मजबूरी के कारण या परिवार को दिया जाता था।'' उद्धव ठाकरे सहित कुछ नेताओं द्वारा यह पूछे जाने पर कि विनायक दामोदर सावरकर को भारत रत्न क्यों नहीं दिया जा रहा है, शाह ने कहा, "हमने उनके सुझाव पर ध्यान दिया है।" हालांकि, गृह मंत्री शाह ने ज्ञानवापी मस्जिद और मथुरा में शाही ईदगाह मस्जिद परिसर के मुद्दों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और कहा कि ये मामले अब अदालतों के विचारार्थ हैं। उपासना स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "अधिनियम अपनी जगह पर है।" यह कानून किसी भी उपासना स्थल के रूपांतरण पर रोक लगाता है और अयोध्या के राम जन्मभूमि परिसर को छोड़कर, किसी भी उपासाना स्थल के धार्मिक चरित्र को उसी रूप में बनाए रखने का प्रावधान करता है जैसा वह 15 अगस्त 1947 को अस्तित्व में था। भाजपा के कुछ नेताओं समेत एक वर्ग की ओर से यह मांग की गई है कि इस कानून को रद्द किया जाना चाहिए।शाह ने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जाति पर बहस हो रही है और आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी को सार्वजनिक रूप से झूठ बोलने और उसके बाद उसे दोहराने की आदत है। शाह ने कहा कि गुजरात में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने 1994 में मोदी की जाति को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की सूची में शामिल किया था और केंद्र ने 2000 में प्रधानमंत्री की जाति को अपनी ओबीसी सूची में शामिल किया था। शाह ने कहा, "उस समय भी, मोदी सत्ता में नहीं थे - न सांसद, न विधायक और न ही सरपंच के तौर पर। वह 2001 में मुख्यमंत्री बने। इन लोगों को तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने की आदत है।"
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नई दिल्ली। बिहार में, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कल विधानसभा में बहुमत सिद्ध करने के प्रयास करेंगे। इसे देखते हुए, राजधानी पटना में राजनीतिक गतिविधियां तेज़ हो गई हैं। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता अपने विधायकों के साथ बैठकें कर रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में दल-बदल की अफवाहों के बीच, सभी राजनीतिक दल अपने विधायकों को एकजुट रखने के हरसंभव उपाय कर रहे हैं।
जनता दल (यूनाइटेड) के प्रमुख और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पार्टी विधायकों के साथ बैठक की है। भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल भी अपने विधायकों के साथ बैठकें कर रहे हैं। 243 सदस्यों की बिहार विधानसभा में एनडीए को 128 विधायकों का समर्थन हासिल है। एनडीए में भारतीय जनता पार्टी, जेडीयू और हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा शामिल हैं। राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस के नेतृत्व वाले महागठबंधन में 114 विधायक हैं। विधानसभा में बहुमत हासिल करने के लिए 122 विधायकों का समर्थन चाहिए। इस बीच, प्रदेश में वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष और राष्ट्रीय जनता दल के सदस्य अवध बिहारी चौधरी को पद से हटाने के लिए भी सत्ता पक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर भी कल ही चर्चा होगी। राज्य में नई सरकार के गठन के बाद भारतीय जनता पार्टी और जनता दल-यूनाइटेड के विधायकों ने मौजूदा विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया है। बजट सत्र की शुरुआत दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में राज्यपाल राजेन्द्र विश्वनाथ आर्लेकर के संबोधन से होगी। - - पहली बार केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) में कांस्टेबलों की भर्ती के लिए कांस्टेबल (जीडी) परीक्षा हिंदी और अंग्रेजी के अलावा 13 क्षेत्रीय भाषाओं में आयोजित होगी-यह परीक्षा देशभर के 128 शहरों में करीब 48 लाख उम्मीदवार के लिए 20 फरवरी से 7 मार्च 2024 तक आयोजित की जाएगी-प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन में गृह मंत्रालय ने 01 जनवरी 2024 से कांस्टेबल (जनरल ड्यूटी) परीक्षा हिंदी और अंग्रेजी के अलावा 13 क्षेत्रीय भाषाओं में आयोजित करने का फैसला किया था-यह ऐतिहासिक निर्णय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह की पहल पर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में स्थानीय युवाओं की भागीदारी बढ़ाने और क्षेत्रीय भाषाओं को प्रोत्साहन देने के लिए लिया गया है-कांस्टेबल (जनरल ड्यूटी) परीक्षा के प्रश्न पत्र अब हिन्दी और अंग्रेज़ी के अलावा असमिया,बंगाली,गुजराती,मराठी,मलयालम,कन्नड़,तमिल,तेलुगु,ओडिया,उर्दू,पंजाबी,मणिपुरी और कोंकणीमें भी तैयार किया जाएगा-कांस्टेबल (जीडी) चयन परीक्षा, कर्मचारी चयन आयोग (SSC) द्वारा आयोजित प्रमुख परीक्षाओं में से एक है जो देश भर से लाखों युवाओं को आकर्षित करती है-इस ऐतिहासिक निर्णय से देशभर के लाखों युवा अपनी मातृभाषा/क्षेत्रीय भाषा में इस परीक्षा में भाग ले सकेंगे जिससे उनके चयन की संभावनाएं बढ़ेंगी-केंद्र सरकार की इस पहल से देशभर के युवाओं को अपनी मातृभाषा में CAPFs कांस्टेबल (जनरल ड्यूटी) परीक्षा में भाग लेने और देश की सेवा में अपना करियर बनाने का सुनहरा अवसर प्राप्त हुआ हैनई दिल्ली। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) में कांस्टेबलों की भर्ती के लिए पहली बार कांस्टेबल (जीडी) परीक्षा हिंदी और अंग्रेजी के अलावा 13 क्षेत्रीय भाषाओं में आयोजित होगी। यह परीक्षा देशभर के 128 शहरों मेंकरीब 48 लाख उम्मीदवार के लिए 20 फरवरी से 7 मार्च 2024 तक आयोजित की जाएगी।प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन में गृह मंत्रालय ने 01 जनवरी 2024 से CAPFs में भर्तीके लिए कांस्टेबल (जनरल ड्यूटी) परीक्षाहिंदी और अंग्रेजी के अलावा13 क्षेत्रीय भाषाओं में आयोजित करने का फैसला किया था। यह ऐतिहासिक निर्णय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह की पहल पर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में स्थानीय युवाओं की भागीदारी बढ़ाने और क्षेत्रीय भाषाओं को प्रोत्साहन देने के लिए लिया गया है।कांस्टेबल (जनरल ड्यूटी) परीक्षा के प्रश्न पत्र अब हिन्दी और अंग्रेज़ी के अलावा निम्न13 क्षेत्रीय भाषाओं में तैयार किया जाएगाअसमियाबंगालीगुजरातीमराठीमलयालमकन्नड़तमिलतेलुगुओडियाउर्दूपंजाबीमणिपुरीकोंकणीकांस्टेबल (जीडी) चयन परीक्षा, कर्मचारी चयन आयोग (SSC) द्वारा आयोजित प्रमुख परीक्षाओं में से एक है जो देश भर से लाखों युवाओं को आकर्षित करती है।इसलिए, गृह मंत्रालय और कर्मचारी चयन आयोग ने हिंदी और अंग्रेजी के अलावा 13 क्षेत्रीय भाषाओं में परीक्षा आयोजित करने की सुविधा के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। तदनुसार, एसएससी ने कांस्टेबल (जीडी) परीक्षा, 2024 को अंग्रेजी और हिंदी के अलावा 13क्षेत्रीय भाषाओं में आयोजित करने के लिए अधिसूचना प्रकाशित की है।इस ऐतिहासिक निर्णय से देशभर के लाखों युवा अपनी मातृभाषा/क्षेत्रीय भाषा में इस परीक्षा में भाग ले सकेंगे जिससे उनके चयन की संभावनाएं बढ़ेंगी। इसके, परिणामस्वरूप पूरे देशमें परीक्षार्थियों के बीच इस परीक्षा की पहुंच बढ़ेगी और सभी को रोजगार का समान अवसर भी मिलेगा। केंद्र सरकार की इस पहल से देशभर के युवाओं को अपनी मातृभाषा में कर्मचारी चयन आयोग द्वारा आयोजित केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलोंमें कांस्टेबल (जनरल ड्यूटी) परीक्षा में भाग लेने और देश की सेवा में अपना करियर बनाने का सुनहरा अवसर प्राप्त हुआ है।
- नयी दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद सत्यपाल सिंह ने शनिवार को कहा कि इस कालखंड में तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जैसे ‘युगपुरुष' के सरकार में आने के बाद राम मंदिर बनते देखना और उसमें प्राण प्रतिष्ठा होना ऐतिहासिक और सौभाग्य की बात है। भाजपा सांसद सिंह ने शनिवार को लोकसभा में नियम 193 के तहत ‘ऐतिहासिक श्रीराम मंदिर के निर्माण और श्रीराम लला की प्राण प्रतिष्ठा' विषय पर चर्चा की शुरुआत करते हुए यह भी कहा कि राम विभिन्न धर्मों और भौगोलिक सीमाओं से परे सबके हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मेरा अहोभाग्य है कि मुझे राम मंदिर के बारे में सदन में प्रस्ताव रखने का अवसर मिला। इस कालखंड में मंदिर बनते देखना और प्राण प्रतिष्ठा होना अपने में ऐतिहासिक है। भगवान राम सांप्रदायिक विषय नहीं हैं। श्रीराम केवल हिंदुओं के लिए नहीं, वो हम सबके पूर्वज और प्रेरणा हैं। राम के समय में हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई अलग-अलग मत, पंथ नहीं थे।'' सिंह ने कहा कि जिस तरह रामकथा में सभी श्रोताओं को पुण्य मिलता है, ऐसा ही पुण्य आज सभी सदस्यों को मिलने वाला है। उन्होंने लगभग 500 साल पहले बाबर के सेनापति द्वारा राम मंदिर तोड़े जाने से लेकर गत 22 जनवरी, 2024 को अयोध्या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह तक हुए विभिन्न आंदोलनों और ऐतिहासिक घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि सौभाग्य की बात है कि जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी थे, तब 41 दिन तक उच्चतम न्यायालय में दिन प्रतिदिन के आधार पर सुनवाई के बाद नवंबर 2019 में मंदिर निर्माण का फैसला आया। सिंह ने कहा कि हर युग में कुछ युगपुरुष होते हैं जिन्हें आने वाला समय याद रखता है। उन्होंने मशहूर शायर अल्लामा इकबाल का एक शेर भी पढ़ा, ‘‘हजारों साल नरगिस अपनी बेनूरी पे रोती है। बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदावर पैदा।'' उन्होंने कहा कि ऐसे ही युगपुरुष, ऐसे ही दीदावर प्रधानमंत्री मोदी हैं जिन्हें राम मंदिर निर्माण का श्रेय जाता है। सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी आए, उन्होंने राम मंदिर बनाया और देश में राम राज्य लाने का भी काम किया। उन्होंने कहा, ‘‘राम हमारे लिए भावना हैं, भाग्य, इच्छा हैं, राम चेतना हैं, राम विरासत हैं, सभ्यता हैं, संस्कृति हैं, शास्त्र हैं और मोक्ष हैं। राम सर्वत्र हैं। राम का व्यक्तित्व इतना विशाल और इतना विराट है कि भौगोलिक सीमाओं से परे दुनिया के अनेक देशों में राम को पूजा जाता है।'' सिंह ने कांग्रेस को आड़े हाथ लेते हुए दावा किया कि 2007 में रामेश्वरम और श्रीलंका के बीच रामसेतु परियोजना पर तत्कालीन संप्रग सरकार ने उच्चतम न्यायालय में शपथपत्र दिया था कि राम नाम के कोई व्यक्ति नहीं हैं, वह काल्पनिक हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने राम को उस समय नकारा, इसलिए आज उनकी यह स्थिति है।सिंह ने कहा कि भगवान राम के अस्तित्व को नकारना अपनी संस्कृति, सभ्यता, विरासत को नकारना था।भाजपा सांसद ने कहा कि न्यायमूर्ति दिवंगत देवकी नंदन अग्रवाल ने जहां इस मामले में ‘राम लला विराजमान' को वादी बनाया था तो 90 साल से अधिक उम्र में वरिष्ठ अधिवक्ता के. परासरन ने न्यायालय में नंगे पैर खड़े होकर मामले में पैरवी की। सदन में चर्चा शुरू होने से पहले द्रमुक के सदस्य तमिलनाडु में बाढ़ और केंद्र सरकार से मदद की जरूरत का विषय उठा रहे थे, हालांकि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने यह कहते हुए विषय उठाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया कि ‘‘आज कोई शून्यकाल, कार्य स्थगन नहीं है।'' द्रमुक के सदस्य कुछ देर तक नारेबाजी करते रहे।
- नयी दिल्ली। गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को लोकसभा में कहा कि राम के बिना भारत की कल्पना नहीं की जा सकती तथा 22 जनवरी, 2024 को अयोध्या में राममंदिर में प्राण प्रतिष्ठा का दिन भारत को विश्वगुरु बनने के मार्ग पर ले जाना वाला है। उन्होंने लोकसभा में शनिवार को नियम 193 के तहत ‘ऐतिहासिक श्रीराम मंदिर के निर्माण और श्रीराम लला की प्राण प्रतिष्ठा' विषय पर चर्चा में भाग लेते हुए यह भी कहा कि अयोध्या मामले में उच्चतम न्यायालय के निर्णय ने भारत के पंथनिरपेक्ष चरित्र को उजागर किया तथा दुनिया में कोई ऐसा देश नहीं है जहां बहुसंख्यक समाज ने अपनी आस्था के निर्वहन के लिए इतनी लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी है। उन्होंने विपक्षी दलों का परोक्ष रूप से हवाला देते हुए कहा, ‘‘ हमारे गुजरात में एक कहावत है, हवन में हड्डी नहीं डालनी चाहिए। पूरा देश जब आनंद में डूबा है तो स्वागत कर लो, साथ में जुड़ जाओ। इससे देश का भला होगा और सभी का भला होगा।'' गृह मंत्री का कहना था कि 22 जनवरी का दिन इतिहास में 10 हजार साल तक याद रखा जाएगा।शाह ने कहा, ‘‘मैं आज अपने मन की बात और देश की जनता की आवाज को इस सदन के सामने रखना चाहता हूं। जो वर्षों से कोर्ट के कागजों में दबी हुई थी। मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने के बाद उसे आवाज भी मिली और अभिव्यक्ति भी मिली।'' उनका कहना था कि सदन में आजादी के बाद जो महत्वपूर्ण प्रस्ताव आए हैं उनमें एक यह रामजन्म भूमि से संबंधित प्रस्ताव है। गृह मंत्री ने कहा, ‘‘22 जनवरी का दिन सहस्त्रों वर्षों के लिए ऐतिहासिक बन गया है। जो इतिहास और ऐतिहासिक पलों को नहीं पहचानते, वो अपने अस्तित्व को खो देते हैं।'' उनके अनुसार, 22 जनवरी का दिन 1528 में शुरू हुए एक संघर्ष और एक आंदोलन के अंत का दिन है और 1528 से शुरू हुई न्याय की लड़ाई, इस दिन समाप्त हुई। शाह ने कहा, ‘‘22 जनवरी का दिन करोड़ों भक्तों की आशा, आकांक्षा और सिद्धि का दिन है। ये दिन समग्र भारत की आध्यात्मिक चेतना का दिन बन चुका है।'' उन्होंने कहा, ‘‘22 जनवरी का दिन महान भारत की यात्रा की शुरुआत का दिन है। ये दिन मां भारती के विश्व गुरु के मार्ग पर ले जाने को प्रशस्त करने वाला दिन है।'' उनके अनुसार, उच्चतम न्यायालय के निर्णय ने दुनिया में भारत के पंथनिरपेक्ष चरित्र को उजागर किया। दुनिया में कोई ऐसा भी देश नहीं है जहां बहुसंख्यक समाज ने अपनी आस्था का निर्वहन के लिए इतनी लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी है। गृह मंत्री ने कहा कि इस देश की कल्पना राम और रामचरितमानस के बिना नहीं की जा सकती तथा राम का चरित्र और राम इस देश के जनमानस का प्राण हैं। गृह मंत्री का कहना था, ‘‘जो लोग राम के अलावा भारत की कल्पना करते हैं वो भारत को नहीं जानते और वो गुलामी के काल का प्रतिनिधित्व करते हैं।'' उनके मुताबिक, राम राज्य किसी एक धर्म और संप्रदाय के लिए नहीं है, यह एक आदर्श राज्य का प्रतीक है।उन्होंने कहा, ‘‘राम और राम के चरित्र को फिर से प्रतिस्थापित करने का काम मोदी जी के हाथ से हुआ है। '' शाह ने कहा, ‘‘कई भाषाओं, कई प्रदेशों और कई प्रकार के धर्मों में भी रामायण का जिक्र, रामायण का अनुवाद और रामायण की परंपराओं को आधार बनाने का काम हुआ है।'' गृह मंत्री ने इस बात का उल्लेख किया, ‘‘भारत की संस्कृति और रामायण को अलग करके देखा ही नहीं जा सकता। कई भाषाओं, कई प्रदेशों और कई प्रकार के धर्मों में भी रामायण का जिक्र, रामायण का अनुवाद और रामायण की परंपराओं को आधार बनाने का काम हुआ है।'' शाह ने कहा, ‘‘जब राम मंदिर निर्माण के लिए न्यायालय का निर्णय आया तब कई लोग अनुमान लगा रहे थे कि इस देश में रक्तपात हो जाएगा, दंगे हो जाएंगे। मगर मैं आज इस सदन में कहना चाहता हूं कि ये भाजपा की सरकार है, नरेन्द्र मोदी जी इस देश के प्रधानमंत्री हैं।'' उनका कहना था, ‘‘न्यायालय के निर्णय को भी जय-पराजय की जगह, सबके मान्य न्यायालय के आदेश में परिवर्तित करने का काम मोदी जी के दूरदर्शी विचार ने किया।'' गृह मंत्री ने कहा, ‘‘1990 में जब ये आंदोलन ने गति पकड़ी उससे पहले से ही ये भाजपा का देश के लोगों से वादा था। हमने पालमपुर कार्यकारिणी में प्रस्ताव पारित करके कहा था कि राम मंदिर निर्माण को धर्म के साथ नहीं जोड़ना चाहिए, ये देश की चेतना के पुनर्जागरण का आंदोलन है। इसलिए हम राम जन्मभूमि को कानूनी रूप से मुक्त कराकर वहां पर राम मंदिर की स्थापना करेंगे।'' शाह ने कहा, ‘‘हम 1996 से कह रहे हैं कि संवैधानिक तरीके से भव्य राम मंदिर बनना चाहिए।''उन्होंने विपक्षी नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘क्या पांच न्यायाधीशों से आदेश से वास्ता रखते हो या नहीं रखते, संविधान से वास्ता रखते हो या नहीं रखते? गृह मंत्री ने किसी का नाम लिये बिना कहा, ‘‘निर्णय पसंद का हो तो स्वीकार कर लेते हैं और कोई निर्णय पसंद नहीं आए तो उच्चतम न्यायालय को बुरा-भला कहना है।'' उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि ‘‘प्राण प्रतिष्ठा'' के लिए प्रधानमंत्री ने 11 दिनों तक कठोर अनुष्ठान किया। शाह ने कहा, ‘‘ अध्योध्या में राम मंदिर धर्मांधता के सामने आध्यामिकता और भक्ति की विजय, भारत के गौरवमयी युग की शुरुआत है।'' उन्होंने कहा कि राम मंदिर सामाजिक एकता का प्रतीक है।उन्होंने कहा, ‘‘10 साल के कार्यकाल में कई पड़ाव आए हैं। इनके (कांग्रेस) द्वारा छोड़े गए गड्ढे भरकर नए भारत की इमारत बनाना, राम मंदिर की यात्रा से कम नहीं है।'' गृह मंत्री का कहना था कि कभी नीतिगत पंगुता वाली अर्थव्यवस्था कहलाने वाला भारत आज विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है।
- भुवनेश्वर। बीजू जनता दल (बीजद) की वरिष्ठ नेता और ओडिशा विधानसभा की 10 बार सदस्य रह चुकीं वी सुगनना कुमारी देव का चेन्नई के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वह 87 वर्ष की थीं। अधिकारियों ने बताया कि शुक्रवार देर रात करीब एक बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने शुक्रवार को दिन में उनसे अस्पताल में मुलाकात की थी। वह खलीकोट के पूर्व शाही परिवार की सदस्य थीं। ओडिशा के राज्यपाल रघुवर दास, मुख्यमंत्री नवीन पटनायक, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और कई अन्य गणमान्य लोगों ने देव के निधन पर शोक व्यक्त किया। पटनायक ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर पोस्ट कर कहा, ‘‘ वी सुगनना कुमार देव के निधन के बारे में जानकर दुख हुआ। वह बीजद की वरिष्ठ नेता थीं और उन्होंने पार्टी के लिए बहुत योगदान दिया। उन्होंने खलीकोट और कविसूर्यानगर दोनों क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व कर जन सेवा में अपनी अलग छाप छोड़ी। वह 10 बार विधानसभा के लिए चुनी गईं। उनका जाना एक अपूरणीय क्षति है। उनकी आत्मा को शांति मिले। शोक संतप्त परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं प्रकट करता हूं।'' देव पहली बार 1963 में ओडिशा विधानसभा के लिए चुनी गई थीं। वह खलीकोट से आठ बार और कविसूर्यनगर से दो बार विधायक रहीं। वह 1963, 1974, 1977, 1985, 1990, 1995, 2000, 2004, 2009 और 2014 में विधायक चुनी गईं।
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नयी दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को कहा कि सरकार ने पिछले दस साल में देश की अर्थव्यवस्था को कांटों में फंसी साड़ी की तरह सही-सलामत निकालकर भविष्योन्मुखी सुधारों की राह पर चलाने का प्रयास किया है। वित्त मंत्री सीतारमण ने राज्यसभा में श्वेत पत्र पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि निरंतर प्रयासों और प्रभावी नीतिगत योजनाओं ने भारतीय अर्थव्यवस्था को पटरी पर ला दिया है तथा इसके परिणामस्वरूप यह दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हो गई है। उन्होंने दावा किया प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में भारत विश्व की तीन सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शुमार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी व्यक्तिगत रूप से जमीनी स्तर पर विकास परियोजनाओं की प्रगति की निगरानी करते हैं। संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के दौरान आर्थिक कुप्रबंधन की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले शासन के दौरान 18 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाएं रुकी हुई थीं। उन्होंने कहा, ‘‘मोदी सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में 17 लाख करोड़ रुपये से अधिक की 348 लंबित परियोजनाओं को मंजूरी दी।'' वित्त मंत्री ने लोगों तक लाभ नहीं पहुंचाने के लिए संप्रग सरकार की आलोचना की और यह आरोप भी लगाया कि उसने शासनकाल के दौरान सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय जैसी केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग किया था। महंगाई के मोर्चे पर वित्त मंत्री ने बताया कि अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान मुद्रास्फीति की दर 4 प्रतिशत से नीचे थी जबकि संप्रग शासन के दौरान मुद्रास्फीति की औसत दर 8.2 प्रतिशत तक पहुंच गई थी। उन्होंने कहा कि इस सरकार को जो अर्थव्यवस्था विरासत में मिली थी, उसके बारे में विपक्ष द्वारा बड़े-बड़े दावे किए गए। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष के लोग भी कहते हैं कि अटल बिहार वाजपेयी सरकार से जो विरासत संप्रग सरकार को मिली, उसी कारण उसके पहले पांच वर्ष में अर्थव्यवस्था बहुत अच्छी रही। सीतारमण ने कहा कि संप्रग सरकार ने राजनीतिक लाभ के लिए गलत राजकोषीय नीतियां बनाई तथा सब्सिडी और फिजूलखर्ची की गई। उन्होंने बुनियादी ढांचे की जरूरतों को दरकिनार कर पूर्वोत्तर राज्यों की आकांक्षाओं की अनदेखी करने के लिए भी पूर्ववर्ती सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि पहले ही इस बात को स्पष्ट किया जा चुका है कि यदि यह श्वेत पत्र पहले लाया जाता तो लोगों एवं निवेशकों का अपने देश, अर्थव्यवस्था और संस्थानों पर विश्वास डोलने लगता। उन्होंने कहा कि प्रश्न किया जाता है कि यह श्वेत पत्र अभी क्यों लाया गया? उन्होंने कहा कि एक निर्वाचित सरकार के नाते उनका यह दायित्व है कि वह संसद के दोनों सदनों के माध्यम से जनता को यह जानकारी दें कि अर्थव्यवस्था की स्थिति दस वर्ष पहले क्या थी और आज वह किस स्तर पर पहुंच गयी है। सीतारमण ने कहा, ‘‘हम दो पटरियों पर चल रहे थे। एक थी- अर्थव्यवस्था को दुरूस्त करना, पूर्व के गलत कामों को सही करना, अड़चनों को दूर करना और इनके साथ ही भविष्योन्मुखी सुधारों की ओर भी ध्यान देना...। '' उन्होंने कहा कि 1991 में आर्थिक सुधारों की प्रक्रिया शुरू हुई थी लेकिन उसे 2004 के बाद पूरा नहीं किया गया, आगे नहीं बढ़ाया गया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने सुधारों विशेषकर भविष्योन्मुखी सुधारों पर जोर दिया। वित्त मंत्री ने एक तमिल कहावत का उदाहरण देते हुए कहा कि 2014 में जो अर्थव्यवस्था उनकी सरकार को मिली थी, उसकी तुलना कांटेदार झाड़ी में फंसी साड़ी से की जा सकती है जिसे कांटों से सही सलामत निकालने की चुनौती रहती है। उन्होंने कहा कि सरकार ने अर्थव्यवस्था को उस कांटेदार झाड़ी से निकाला। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था की यह ‘हालात' थी कि यह विश्व की पांच कमजोर अर्थव्यवस्था में एक थी और आज सरकार के प्रयासों के कारण यह विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गयी है। सीतारमण ने कहा कि आज अर्थव्यवस्था की जो स्थिति है, उसके आधार पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी विश्वास के साथ यह कह रहे हैं कि उनके तीसरे कार्यकाल में भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश होगा।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को कहा कि 17वीं लोकसभा के पांच वर्ष ‘रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म' वाले रहे और आज देश का यह संकल्प बन चुका है कि आने वाले 25 साल में वह विकसित भारत बनाने के इच्छित परिणाम प्राप्त करके रहेगा। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि देशवासियों में भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का जज्बा पैदा हुआ है।
बजट सत्र और मौजूदा लोकसभा की आखिरी बैठक के अंतिम दिन सदन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा, ‘‘आने वाले 25 वर्ष देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। राजनीतिक गहमा-गहमी अपनी जगह है, राजनीतिक आकांक्षा और अपेक्षा अपनी जगह हैं। लेकिन देश का संकल्प बन चुका है कि अगले 25 साल में वह इच्छित परिणाम प्राप्त करके रहेगा।'' उन्होंने 17वीं लोकसभा के आखिरी सत्र में 97 प्रतिशत कार्य उत्पादकता रहने का उल्लेख करते हुए कहा कि अगली लोकसभा में कामकाज की 100 प्रतिशत उत्पादकता का संकल्प लेना चाहिए। मोदी ने कहा कि ये पांच वर्ष देश में ‘रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म' के थे। उन्होंने कहा कि अपनी आंखों के सामने ही ‘ट्रांसफॉर्म' होते देखना दुर्लभ होता है। प्रधानमंत्री ने 17वीं लोकसभा में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने, महिला आरक्षण कानून बनाने, तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाने, दंड संहिता की जगह नयी न्याय संहिता लाने समेत कई विधेयकों के पारित होने का उल्लेख किया। मोदी ने कहा, ‘‘सदन ने अनुच्छेद 370 हटाया जिससे संविधान का पूर्ण रूप से प्रकटीकरण हुआ...संविधान निर्माताओं की आत्मा हमें जरूर आशीर्वाद दे रही होगी।'' प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘इस कार्यकाल में परिवर्तनकारी सुधार हुए, इनमें 21वीं सदी के भारत की मजबूत नींव नजर आती है।'' उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर के लोगों को समाजिक न्याय से वर्षों तक वंचित रख गया था, आज वहां तक सामाजिक न्याय पहुंचाकर हमें संतोष है। मोदी का कहना था कि जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान देश के हर राज्य ने भारत के सामर्थ्य और अपने प्रदेश की खूबी विश्व के सामने रखी जिसका असर आज भी है तथा ‘पी-20' के माध्यम से भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को पूरी दुनिया के सामने प्रस्तुत किया गया। उन्होंने संसद के नए भवन के निर्माण का श्रेय लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को देते हुए कहा कि उनकी पहल से ही यह संभव हुआ है। मोदी ने लोकसभा के संचालन के लिए अध्यक्ष बिरला का आभार जताते हुए कहा कि वह हमेशा मुस्कराते हुए काम करते रहे और अनेक विपरीत परिस्थितियों में संतुलित और सच्चे अर्थों में निष्पक्ष भाव से सदन का नेतृत्व किया। उन्होंने कहा, ‘‘आक्रोश के पल भी आए, आरोप के पल भी आए। लेकिन आपने पूरे धैर्य के साथ इन सभी चीजों को संभालते हुए सूझ-बूझ के साथ सदन का संचालन किया और हम सबका मार्गदर्शन किया। इसके लिए हम सभी आपके आभारी हैं।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि कोविड महामारी के चुनौतीपूर्ण दौर में भी लोकसभा अध्यक्ष ने देश के काम को रुकने नहीं दिया और सदन की गरिमा को भी बनाकर रखा। उन्होंने संसद सदस्यों की भी प्रशंसा करते हुए कहा कि कोविड के कालखंड में देश की आवश्यकताओं को देखते हुए सांसद निधि छोड़ने के प्रस्ताव को एक पल के बिलंब के बिना सभी सदस्यों ने स्वीकार किया। मोदी ने कहा, ‘‘इतना ही नहीं, देशवासियों को सकारात्मक संदेश देने के लिए, अपने आचरण से समाज को विश्वास देने के लिए सांसदों ने अपने वेतन में 30 प्रतिशत कटौती का निर्णय भी स्वयं लिया। देश को विश्वास हुआ कि ये सबसे पहले छोड़ने वाले लोग हैं।'' उन्होंने संसद की कैंटीन में सब्सिडी समाप्त होने, महापुरुषों की जयंती पर देशभर में बच्चों के बीच निबंध और भाषण प्रतियोगिता आयोजित कराने, संसद पुस्तकालय के दरवाजे आम लोगों के लिए खोलने, पेपरलेस कामकाज करने, डिजिटलीकरण जैसी पहल गिनाते हुए भी अध्यक्ष बिरला की तारीफ की। उन्होंने कहा, ‘‘संसद के नये भवन में विरासत को हमेशा जीवंत रखने वाला सेंगोल स्थापित किया गया है। यह भारत की आने वाली पीढ़ियों को आजादी के प्रथम पल के साथ जोड़कर रखेगा। इससे देश को आगे ले जाने की प्रेरणा भी बनी रहेगी।'' मोदी ने कहा कि 17वीं लोकसभा के पहले ही सत्र में दोनों सदनों में 30 विधेयक पारित हुए थे, यह अपने आप में रिकॉर्ड है। उन्होंने कहा, ‘‘हम संतोष से कह सकते हैं कि हमारी अनेक पीढ़ियां जिन बातों का इंतजार करती थीं, ऐसे बहुत से काम इस 17वीं लोकसभा के माध्यम से पूरे हुए। पीढ़ियों का इंतजार खत्म हुआ।'' मोदी ने कहा कि आतंकवाद नासूर बन गया था और देश के नौजवान आतंकवाद की बलि चढ़ जाते थे, ऐसे में सरकार ने आतंकवाद के विरुद्ध सख्त कानून बनाए। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे पक्का विश्वास है कि जो लोग ऐसी समस्याओं से जूझते हैं, उन्हें बल मिला है, मनोबल बढ़ा है। पूर्ण रूप से आतंकवाद की मुक्ति का एहसास हो रहा है और यह सपना सिद्ध होकर रहेगा।'' मोदी ने कहा, ‘‘यह युवा शक्ति के लिए महत्वपूर्ण कालखंड है। हर किसी का सपना विकसित भारत का है। ऐसा कोई नहीं है जो विकसित भारत को नहीं देखना चाहता। सभी को इसके लिए जुड़ना होगा। जो नहीं जुड़ेंगे वो भी इसका फल तो खाएंगे।'' उन्होंने कहा कि बीते पांच वर्ष में युवाओं के लिए प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ विधेयक पारित करने समेत ऐतिहासिक कानून बने। मोदी ने कहा कि जल, थल, नभ के बाद अब देश समुद्री, अंतरिक्ष और साइबर क्षेत्र में सामर्थ्य पैदा करते हुए नकारात्मक चुनौतियों से निपट रहा है। उन्होंने कहा कि वह लाल किले से भी इस बात की घोषणा कर चुके हैं कि ‘‘जब वह ‘न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन' की बात करते हैं तो उसका अर्थ है कि लोगों की जिदगी में से जितना सरकार निकल जाए, उतना अच्छा है।'' मोदी ने कहा, ‘‘हर जगह सरकार टांग क्यों अड़ाए। हां, यदि लोग अभाव में हैं तो सरकार उनके साथ हर समय मौजूद रहे। लेकिन लोगों के रोजमर्रा के जीवन में सरकार की उपस्थिति कम से कम हो। इस सपने को पूरा करेंगे।'' उन्होंने कहा कि इस संसद ने देश के ट्रांसजेंडर समुदाय के कल्याण के लिए भी कदम उठाया और अब तक करीब 16-17 हजार ट्रांसजेंडर को पहचान पत्र दिए गए हैं। मोदी ने कहा कि लोकतंत्र और भारत की यात्रा अनंत है और देश का एक उद्देश्य, एक लक्ष्य है जो महर्षि अरविंद और स्वामी विवेकानंद ने भी देखा था। उन्होंने कहा कि दुनिया भारत के सामर्थ्य और महात्म्य को स्वीकारने लगी है और हमें इस यात्रा को और आगे बढ़ाना है। मोदी ने कहा कि चुनाव बहुत दूर नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘कुछ लोगों को चुनाव का नाम सुनकर घबराहट रहती होगी। लेकिन यह सहज और आवश्यक पहलू है। हम इसे गर्व से स्वीकार करते हैं। मुझे विश्वास है कि हमारे चुनाव देश की शान बढ़ाने वाले, लोकतंत्र की परंपरा को रखने वाले और विश्व को अचंभित करने वाले रहेंगे।'' उन्होंने कहा, ‘‘बुरे दिन कितने ही क्यों न रहें, हम भावी पीढ़ी के लिए कुछ न कुछ अच्छा करते रहेंगे, सदन प्रेरणा देता रहेगा और सरकार सामूहिक शक्ति से काम करती रहेगी। -
नयी दिल्ली. बैंकिंग क्षेत्र और इससे जुड़े लोगों को कृत्रिम मेघा (एआई) से पैदा होने वाले कानूनी, साइबर जोखिमों और कौशल की कमी जैसे जोखिमों के प्रति सचेत रहना चाहिए। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के डिप्टी गवर्नर टी रवि शंकर ने शुक्रवार को यह बात कही। उन्होंने कहा कि एआई और जेन'एआई को अपनाने के साथ कानूनों को फिर से परिभाषित किया जाना है। उद्योग को यह ध्यान देना चाहिए कि डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (डीपीडीपी) अधिनियम के नियम जल्द ही आने वाले हैं, और हो सकता है कि बैंक इनमें से कुछ का उल्लंघन कर दें। इसलिए तैयारी महत्वपूर्ण है। उन्होंने मुंबई में भारतीय बैंक संघ (आईबीए) के द्वारा आयोजित 19वें वार्षिक बैंकिंग प्रौद्योगिकी सम्मेलन में कहा कि बैंकों को ग्राहक सुविधा के बारे में सोचने और उसके अनुसार सेवाएं देने की जरूरत है। उन्होंने कहा, ''हम जब नियम बनाते हैं, तो हमें इसे ग्राहकों के लिए सुविधाजनक बनाने के बारे में सोचना चाहिए और इसमें लगातार सुधार करना चाहिए।'' शंकर ने कहा कि हर नई तकनीक ने कुछ नौकरियां खत्म की हैं, लेकिन नई नौकरियां पैदा भी की हैं। ऐसे में कार्यबल को प्रशिक्षित करने की जरूरत है।
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नयी दिल्ली. चित्रकार ए. रामचंद्रन का शनिवार को यहां उनके आवास पर निधन हो गया। वह 89 वर्ष के थे। उनके बेटे राहुल ने बताया, वह पिछले कुछ समय से बीमार थे और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण आज सुबह नौ बजे उनका निधन हो गया।'' उन्होंने बताया कि रामचंद्रन का अंतिम संस्कार सोमवार दोपहर ढाई बजे लोधी रोड शवदाह गृह में किया जाएगा। केरल के अतिंगल में 1935 में जन्मे रामचंद्रन अपनी शानदार चित्रकारी के लिए जाने जाते थे। उन्हें 2002 में ललित कला अकादमी का फेलो चुना गया और 2005 में उन्हें पद्म भूषण से नवाजा गया।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि लगातार वृद्धि दर बढ़ने के साथ अब भारत का वक्त आ गया है और ‘हमारे आलोचक सबसे निचले स्तर' पर पहुंच गये हैं। प्रधानमंत्री ने टाइम्स ग्रुप के 'ईटी नाउ ग्लोबल बिजनेस समिट' को संबोधित करते हुए कहा कि भारत पर पूरी दुनिया का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, "कारोबारियों के लिए कुंभ मेले की तरह मानी जाने वाली दावोस बैठक में भी भारत को लेकर बहुत उत्साह था। वहां किसी ने कहा कि भारत एक अभूतपूर्व सफलता की कहानी है, किसी ने कहा कि भारत का डिजिटल बुनियादी ढांचा नई ऊंचाइयां छू रहा है जबकि किसी ने कहा कि ऐसी कोई जगह नहीं है जहां भारत का प्रभाव न हो।" प्रधानमंत्री ने कहा कि आज विकास से जुड़े हरेक विशेषज्ञ समूह में इस बात पर चर्चा है कि भारत पिछले 10 वर्षों में बदल गया है। उन्होंने कहा, "ये चीजें दिखाती हैं कि दुनिया को भारत पर कितना भरोसा है। भारत की क्षमताओं के लिए ऐसी सकारात्मक धारणा पहले कभी नहीं थी। भारत की सफलता को लेकर ऐसी सकारात्मक धारणा शायद पहले कभी नहीं देखी गई।" मोदी ने कहा कि किसी भी देश की विकास यात्रा में एक समय ऐसा आता है जब सारी परिस्थितियां उसके पक्ष में होती हैं और उस समय वह देश आने वाली कई शताब्दियों के लिए खुद को मजबूत बनाता है। उन्होंने कहा, ''अब मुझे भारत के लिए वही समय दिखता है।'' उन्होंने कहा, "यह वह समय है जब हमारी वृद्धि दर लगातार बढ़ रही है और राजकोषीय घाटा कम हो रहा है। यह वह समय है जब हमारा निर्यात बढ़ रहा है और चालू खाते का घाटा कम हो रहा है। यह वह समय है जब उत्पादक निवेश रिकॉर्ड ऊंचाई पर है और मुद्रास्फीति नियंत्रण में है।“ इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने कहा, "यह वह समय है जब अवसर और आय दोनों बढ़ रही है और गरीबी कम हो रही है। यह वह समय है जब खपत और कंपनियों की लाभप्रदता दोनों बढ़ रही है और बैंकों की गैर-निष्पादित संपत्ति (एनपीए) में रिकॉर्ड गिरावट हुई है। यह वह समय है जब उत्पादन और उत्पादकता बढ़ रही है और यह वह समय है जब हमारे आलोचक अब तक के सबसे निचले स्तर पर हैं।” प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार की नीतियों में स्थिरता और निरंतरता है।
उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति अधिक खर्च करने का दुष्परिणाम है और उनकी सरकार ने परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए 'बचाया गया पैसा कमाया हुआ पैसा है' के मंत्र का पालन किया। उन्होंने कहा, "हमने संसद भवन जैसी बड़ी परियोजनाओं को रिकॉर्ड समय में पूरा करके करदाताओं के पैसे को मान दिया। हमने कबाड़ से भी पैसा कमाया।






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