- Home
- देश
-
यमुनानगर (हरियाणा) . हरियाणा के यमुनानगर में रादौर-लाडवा मार्ग पर एक ट्रक ने मोटसाइकिल को टक्कर मार दी, जिससे उस पर सवार एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत हो गई। पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी। उसने बताया कि घटना मंगलवार को हुई और ट्रक चालक को गिरफ्तार कर लिया गया है।
पुलिस ने बताया कि दुर्घटना में मोटरसाइकिल चालक, उसकी पत्नी और उसके नाबालिग बेटे की मौत हो गयी। वे इसी जिले के गुंधियाना गांव के रहने वाले थे। -
बेंगलुरु. चंद्रयान-3 का 14 जुलाई को प्रक्षेपण किए जाने से लेकर आज चंद्रमा की सतह पर इसकी सॉफ्ट लैंडिंग तक भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अनूठी पहल करते हुए अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर इसके अहम दृश्यों का प्रसारण किया जिससे लाखों लोग ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने। चंद्रयान-3 की आज शाम छह बजकर चार मिनट पर चंद्रमा की सतह पर सफलतापूर्वक सॉफ्ट लैंडिंग पर इसरो ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, ‘‘चंद्रयान-3 मिशन : भारत, मैं अपने गंतव्य पर पहुंच गया हूं और आप भी।'' इसी तरह इस पूरे अभियान के दौरान इसरो के सोशल मीडिया हैंडल से भारत के महात्वाकांक्षी चंद्र मिशन की जानकारी देते हुए बीच-बीच में हल्के-फुल्के अंदाज में पोस्ट किये जाते रहे जिसमें ‘‘स्वागत है दोस्त'' और ‘‘सफर के लिए शुक्रिया, दोस्त'' शामिल हैं, ताकि आम जन तकनीकी शब्दावली में फंसे बगैर साधारण शब्दों में इससे जुड़ सकें। सोमवार को जब चंद्रयान-3 के लैंडर मॉड्यूल का चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर के साथ संचार स्थापित हुआ तो इसरो ने पोस्ट कर कहा, ‘‘स्वागत है दोस्त! चंद्रयान-2 आर्बिटर ने औपचारिक रूप से चंद्रयान-3 लैंडर मॉड्यूल का स्वागत किया। दोनों के बीच दोतरफा संचार स्थापित हो गया है। एमओक्स (मिशन ऑपरेशंस कॉम्पलेक्स) के पास अब लैंडर मॉड्यूल तक पहुंचने के लिए अधिक मार्ग हैं।'' इससे लगभग एक सप्ताह पहले 17 अगस्त को जब चंद्रयान-3 का लैंडर मॉड्यूल सफलतापूर्वक उसके प्रणोदन मॉड्यूल से अलग हुआ था तो इसरो ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा था, ‘‘लैंडर मॉड्यूल ने कहा, यात्रा के लिए धन्यवाद, दोस्त!'' हाथ हिलाते हुए एक इमोजी के साथ किए इस पोस्ट को मंगलवार तक करीब 55 लाख लोग देख चुके थे। चंद्रयान-3 के पूरे सफर के दौरान इसरो के सोशल मीडिया हैंडल से ऐसे पोस्ट किए जाते रहे जो जनता का ज्ञान और उत्साह बढ़ाते रहे हैं। इन पोस्ट के साथ लगभग हर बार चंद्रमा, रॉकेट और उपग्रह के इमोजी भी साझा किए गए। विक्रम और प्रज्ञान के चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने से महज कुछ घंटे पहले इसरो के सोशल मीडिया हैंडल पर कहा गया कि मिशन ऑपरेशन कॉम्प्लेक्स ऊर्जा और उत्साह से भरा हुआ है।
- बेंगलुरु। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के महत्वाकांक्षी चंद्रयान-3 की अब तक की यात्रा इस प्रकार है :-14 जुलाई : एलवीएम-3 एम-4 व्हीकल के माध्यम से चंद्रयान-3 को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से सफलतापूर्वक कक्षा में पहुंचाया गया। चंद्रयान-3 ने नियत कक्षा में अपनी यात्रा शुरू की।15 जुलाई : आईएसटीआरएसी/इसरो, बेंगलुरु से कक्षा बढ़ाने की पहली प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की गई। यान 41762 किलोमीटर x 173 किलोमीटर कक्षा में है।17 जुलाई : दूसरी कक्षा में प्रवेश की प्रक्रिया को अंजाम दिया गया। चंद्रयान-3 ने 41603 किलोमीटर x 226 किलोमीटर कक्षा में प्रवेश किया।22 जुलाई : अन्य कक्षा में प्रवेश की प्रक्रिया पूरी हुई।-25 जुलाई : इसरो ने एक बार फिर एक कक्षा से अन्य कक्षा में जाने की प्रक्रिया पूरी की। चंद्रयान-3 71351 किलोमीटर x 233 किलोमीटर की कक्षा में।एक अगस्त : इसरो ने ‘ट्रांसलूनर इंजेक्शन' (एक तरह का तेज़ धक्का) को सफलतापूर्वक पूरा किया और अंतरिक्ष यान को ट्रांसलूनर कक्षा में स्थापित किया। इसके साथ यान 288 किलोमीटर x 369328 किलोमीटर की कक्षा में पहुंच गया।पांच अगस्त : चंद्रयान-3 की लूनर ऑर्बिट इनसर्शन (चंद्रमा की कक्षा में पहुंचने की प्रक्रिया) सफलतापूर्वक पूरी हुई। 164 किलोमीटर x 18074 किलोमीटर की कक्षा में पहुंचा। छह अगस्त : इसरो ने दूसरे लूनर बाउंड फेज (एलबीएन) की प्रक्रिया पूरी की। इसके साथ ही यान चंद्रमा के निकट 170 किलोमीटर x 4313 किलोमीटर की कक्षा में पहुंचा। अंतरिक्ष एजेंसी ने चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश के दौरान चंद्रयान-3 द्वारा लिया गया चंद्रमा का वीडियो जारी किया।नौ अगस्त : चंद्रमा के निकट पहुंचने की एक और प्रक्रिया के पूरा होने के बाद चंद्रयान-3 की कक्षा घटकर 174 किलोमीटर x 1437 किलोमीटर रह गई।14 अगस्त : चंद्रमा के निकट पहुंचने की एक और प्रक्रिया के पूरा होने के बाद चंद्रयान-3 कक्षा का चक्कर लगाने के चरण में पहुंचा। यान 151 किलोमीटर x 179 किलोमीटर की कक्षा में पहुंचा।16 अगस्त : ‘फायरिंग' की एक और प्रक्रिया पूरी होने के बाद यान को 153 किलोमीटर x 163 किलोमीटर की कक्षा में पहुंचाया गया। यान में एक रॉकेट होता है जिससे उपयुक्त समय आने पर यान को चंद्रमा के और करीब पहुंचाने के लिए विशेष ‘फायरिंग' की जाती है।17 अगस्त : लैंडर मॉडयूल को प्रणोदन मॉड्यूल से सफलतापूर्वक अलग किया गया।19 अगस्त : इसरो ने अपनी कक्षा को घटाने के लिए लैंडर मॉड्यूल की डी-बूस्टिंग की प्रक्रिया की। लैंडर मॉड्यूल अब चंद्रमा के निकट 113 किलोमीटर x 157 किलोमीटर की कक्षा में पहुंचा।20 अगस्त : लैंडर मॉड्यूल पर एक और डी-बूस्टिंग यानी कक्षा घटाने की प्रक्रिया पूरी की गई। लैंडर मॉड्यूल 25 किलोमीटर x 134 किलोमीटर की कक्षा में पहुंचा।21 अगस्त : चंद्रयान-2 ऑर्बिटर ने औपचारिक रूप से चंद्रयान-3 लैंडर मॉड्यूल का ‘वेलकम बडी' (स्वागत दोस्त) कहकर स्वागत किया। दोनों के बीच दो तरफा संचार कायम हुआ। ‘इसरो टेलीमेट्री, ट्रैकिंग और कमांड नेटवर्क' (आईएसटीआरएसी) में स्थित मिशन ऑपरेशंस कॉम्प्लेक्स (एमओएक्स) को अब लैंडर मॉड्यूल से संपर्क के और तरीके मिले।22 अगस्त : इसरो ने चंद्रयान-3 के लैंडर पोजिशन डिटेक्शन कैमरा (एलपीडीसी) से करीब 70 किलोमीटर की ऊंचाई से ली गई चंद्रमा की तस्वीरें जारी कीं।- 23 अगस्त : शाम छह बजकर चार मिनट पर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान-3 के लैंडर मॉड्यूल के सुरक्षित एवं सॉफ्ट लैंडिग ।
- चेन्नई। चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग के अलावा चंद्रयान मिशन का तमिल कनेक्शन और इसके मॉड्यूल पर वैज्ञानिक पेलोड की मौजूदगी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के महत्वाकांक्षी चंद्र अभियानों की दो प्रमुख विशेषताएं हैं। चंद्रयान मिशन के तमिल कनेक्शन का संदर्भ इस बात से है कि भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम से जुड़े महत्वाकांक्षी चंद्र अभियानों का नेतृत्व तमिलनाडु के तीन वैज्ञानिकों ने किया है। 'भारत के मून मैन' कहलाने वाले मयिलसामी अन्नादुरई ने 2008 में पहले चंद्रयान मिशन और एम वनिता ने 2019 में चंद्रयान-2 मिशन का नेतृत्व किया था, जबकि एम वीरमुथुवेल ने मौजूदा चंद्रयान-3 मिशन की कमान संभाली ।चंद्रयान-3 के 14 जुलाई को दोपहर 2.35 बजे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से उड़ान भरने के बाद वीरमुथुवेल रॉकेट पर नजर रखने के लिए वापस बेंगलुरु के इसरो टेलीमेट्री, ट्रैकिंग और कमांड नेटवर्क (आईएसटीआरएसी) चले गए थे।इसरो के मुताबिक, 'एसएचएपीई' यानी 'स्पेक्ट्रो-पोलरीमेट्री ऑफ हैबिटेबल प्लानेट अर्थ' चंद्रयान-3 पर मौजूद एक प्रायोगिक पेलोड है, जो निकट-अवरक्त तरंग दैर्ध्य रेंज (नियर-इंफ्रारेड वेवलेंथ रेंज) में पृथ्वी की स्पेक्ट्रो-पोलरीमेट्रिक विशेषताओं का अध्ययन करेगा। अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा, ‘‘यह (एसएचएपीई) चंद्रयान-3 मिशन के प्रणोदन मॉड्यूल में मौजूद एकमात्र वैज्ञानिक पेलोड है।'' 'एसएचएपीई' को बेंगलुरु स्थित यू आर राव उपग्रह केंद्र के वैज्ञानिकों ने तैयार किया है। इसका मुख्य लक्ष्य चंद्रमा की कक्षा के सुविधाजनक बिंदु से विभिन्न चरण कोणों पर पृथ्वी के एकीकृत स्पेक्ट्रम और ध्रुवीकरण पैमानों को चिह्नित करना है। इसरो के अनुसार, 'एसएचएपीई' पेलोड के जरिये जिन प्रमुख वैज्ञानिक गुत्थियों को सुलझाने का प्रयास किया जाएगा, उनमें पृथ्वी जैसे एक्सो-प्लानेट (बहिर्गृह यानी हमारे सौर मंडल से बाहर स्थित ग्रह) का डिस्क-एकीकृत स्पेक्ट्रम क्या हो सकता है और पृथ्वी जैसे एक्सो-प्लानेट से डिस्क-एकीकृत 'ध्रुवीकरण' क्या हो सकता है... जैसे रहस्य शामिल हैं। चंद्रयान-3 मिशन ने 17 अगस्त को एक बड़ी कामयाबी हासिल की, जब रोवर से लैस लैंडर मॉड्यूल यान के प्रणोदन मॉड्यूल से सफलतापूर्वक अलग हो गया, जिसमें 'एसएचएपीई' पेलोड मौजूद है। 'एसएचएपीई' पेलोड एक रेडियो फ्रीक्वेंसी स्रोत द्वारा संचालित एकॉस्टो-ऑप्टिक ट्यूनेबल फिल्टर आधारित तत्व को नियोजित करता है और इसमें इंडियम गैलियम आर्सेनाइड (आईएनजीएएस) डिटेक्टरों की एक जोड़ी मौजूद होती है। भविष्य में परावर्तित प्रकाश में छोटे ग्रहों की खोज 'एसएचएपीई' पेलोड का एक प्रमुख लक्ष्य होगा, जिससे इसरो को ऐसे एक्सो-प्लानेट के रहस्य खंगालने में मदद मिलेगी, जो जीवन के पनपने या रहने योग्य हो सकते हैं।
- नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चंद्रयान-3 मिशन की सफलता पर बुधवार को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रमुख एस. सोमनाथ को बधाई दी और कहा कि वह जल्द ही बेंगलुरु का दौरा कर पूरी टीम को व्यक्तिगत रूप से शुभकामनाएं देंगे। जोहानिसबर्ग में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले रहे प्रधानमंत्री ने फोन पर कहा, ‘‘सोमनाथ जी... आपका नाम सोमनाथ भी चंद्रमा से जुड़ा हुआ है। आपके परिवार के सदस्य भी खुश होंगे। आपको और आपकी टीम को हार्दिक बधाई।'' चंद्रयान की सफल लैंडिंग के तुरंत बाद प्रधानमंत्री ने इसरो प्रमुख को फोन किया।उन्होंने कहा, ‘‘कृपया मेरी शुभकामनाएं सभी तक पहुंचाएं। अगर संभव हुआ तो मैं व्यक्तिगत रूप से बहुत जल्द आपका अभिवादन करूंगा।'' इसरो ने बुधवार को अंतरिक्ष क्षेत्र में एक नया इतिहास रचते हुए चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडर ‘विक्रम' और रोवर ‘प्रज्ञान' से लैस लैंडर मॉड्यूल की ‘सॉफ्ट लैंडिग' कराने में सफलता हासिल की। भारतीय समयानुसार शाम करीब छह बजकर चार मिनट पर इसने चांद की सतह को छुआ। इसके साथ ही भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग' करने वाला दुनिया का पहला देश तथा चांद की सतह पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग' करने वाला दुनिया का चौथा देश बन गया।
- नयी दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने चंद्रयान-3 की सफल 'सॉफ्ट लैंडिंग' पर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और मिशन में शामिल सभी लोगों को बुधवार को बधाई दी और कहा कि यह एक अविस्मरणीय क्षण है तथा वैज्ञानिकों ने इतिहास रचकर भारत को गौरवान्वित किया है। चंद्रयान की सफल लैंडिंग देखने के बाद अपने वीडियो संदेश में राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘चंद्रयान-3 की ‘सॉफ्ट लैंडिंग' एक महत्वपूर्ण अवसर है। यह एक ऐसी घटना है जो जीवनकाल में एक बार होती है।'' उन्होंने कहा कि चंद्रयान-3 की चंद्रमा की सतह पर 'लैंडिंग' के साथ ही वैज्ञानिकों ने इतिहास रच दिया है और भारत को गौरवान्वित किया है। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा, ‘‘मैं इसरो, चंद्रयान-3 मिशन में शामिल सभी लोगों को बधाई देती हूं तथा उन्हें आगे और बड़ी उपलब्धियां हासिल करने की शुभकामनाएं देती हूं।'' इसरो ने बुधवार को अंतरिक्ष क्षेत्र में एक नया इतिहास रचते हुए चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडर ‘विक्रम' और रोवर ‘प्रज्ञान' से लैस एलएम की सॉफ्ट लैंडिग कराने में सफलता हासिल की। भारतीय समयानुसार शाम करीब छह बजकर चार मिनट पर इसने चांद की सतह को छुआ।
- नयी दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को चंद्रयान-3 के चंद्रमा की सतह पर सफलतापूर्वक उतरने के बाद देशवासियों, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और वैज्ञानिक समुदाय को बधाई दी और कहा कि ‘भारत अब चंद्रमा पर है' तथा यह सफलता पूरी मानवता की है। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर दक्षिण अफ्रीका से वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत ने पृथ्वी पर एक संकल्प लिया और चंद्रमा पर इसे पूरा किया। प्रधानमंत्री ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए जोहानिसबर्ग के दौरे पर हैं। उन्होंने कहा, ‘‘भारत अब चांद पर है और अब ‘चंद्र पथ' पर चलने का समय है।''मिशन के सफल होने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री ने इसरो के प्रमुख एस सोमनाथ को फोन किया और उन्हें व वैज्ञानिकों की पूरी टीम को बधाई दी। इसरो ने बुधवार को अंतरिक्ष क्षेत्र में एक नया इतिहास रचते हुए चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडर ‘विक्रम' और रोवर ‘प्रज्ञान' से लैस एलएम की साफ्ट लैंडिग कराने में सफलता हासिल की। भारतीय समयानुसार शाम करीब छह बजकर चार मिनट पर इसने चांद की सतह को छुआ। इसके साथ ही भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर साफ्ट लैंडिंग कराने वाला दुनिया का पहला देश तथा चांद की सतह पर साफ्ट लैंडिंग करने वाले चार देशों में शामिल हो गया है। मोदी ने कहा, ‘‘जब हम अपनी आंखों के सामने ऐसा इतिहास बनते हुए देखते हैं तो जीवन धन्य हो जाता है। ऐसी ऐतिहासिक घटनाएं राष्ट्रीय जीवन की चिरंजीव चेतना बन जाती है।'' उन्होंने कहा, ‘‘यह पल अविस्मरणीय है, यह क्षण अभूतपूर्व है, यह क्षण विकसित भारत के शंखनाद का है। यह क्षण नए भारत के जयघोष का है। यह क्षण मुश्किलों के महासागर को पार करने का है। यह क्षण जीत के चंद्र पथ पर चलने का है। यह क्षण 140 करोड़ धड़कनों के सार्म्थय का है। यह क्षण भारत में नई ऊर्जा, नये विश्वास, नई चेतना का है। ये क्षण भारत के उदयमान भाग्य के आह्वान का है।'' इसरो के महत्वाकांक्षी तीसरे चंद्रमा मिशन ‘‘चंद्रयान-3'' के लैंडर मॉड्यूल (एलएम) ने बुधवार शाम चंद्रमा की सतह को चूम कर अंतरिक्ष विज्ञान में सफलता की एक नयी इबारत रची। वैज्ञानिकों के अनुसार इस अभियान के अंतिम चरण में सारी प्रक्रियाएं पूर्व निर्धारित योजनाओं के अनुरूप ठीक से चली। यह एक ऐसी सफलता है जिसे न केवल इसरो के शीर्ष वैज्ञानिक बल्कि भारत का हर आम और खास आदमी टीवी की स्क्रीन पर टकटकी बांधे देख रहा था। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर दुनिया को संबोधित करते हुए कहा कि भारत का सफल चंद्र मिशन केवल भारत का नहीं है बल्कि पूरी मानव जाति का है। उन्होंने कहा, ‘‘यह एक ऐसा वर्ष है, जिसमें दुनिया भारत की जी-20 अध्यक्षता देख रही है। एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य का हमारा दृष्टिकोण दुनिया भर में गूंज रहा है। यह मानव-केंद्रित दृष्टिकोण जो हम प्रस्तुत करते हैं, उसका सार्वभौमिक रूप से स्वागत किया गया है। हमारा चंद्रमा मिशन भी उसी मानव-केंद्रित दृष्टिकोण पर आधारित है। इसलिए, यह सफलता पूरी मानवता की है।'' प्रधानमंत्री ने इस सफलता को भारत के ‘उदीयमान भाग्य के आह्वान' का भी बताया और कहा कि अमृत काल की प्रथम प्रभा में सफलता की यह अमृत वर्षा हुई है। उन्होंने कहा, ‘‘हमने धरती पर संकल्प लिया और चांद पर उसे साकार किया। हमारे वैज्ञानिक साथियों ने भी कहा है ‘इंडिया इज ऑन द मून'। आज हम अंतरिक्ष में नए भारत की नई उड़ान के साक्षी बने हैं।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि वह भले दक्षिण अफ्रीका में हैं लेकिन हर देशवासी की तरह उनका मन चंद्रयान महाअभियान पर ही लगा हुआ था। देशवासियों के उमंग और उल्लास से खुद को जोड़ते हुए मोदी ने कहा कि वह टीम चंद्रयान को, इसरो को और देश के सभी वैज्ञानिकों को जी जान से बहुत-बहुत बधाई देता हूं, जिन्होंने इस पल के लिए वर्षों तक इतना परिश्रम किया। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे वैज्ञानिकों के परिश्रम और प्रतिभा से भारत चंद्रमा के उस दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचा है, जहां आज तक दुनिया का कोई भी देश नहीं पहुंच सका है। अब आज के बाद से चांद से जुड़े मिथक बदल जाएंगे। कथानक भी बदल जाएंगे। और नई पीढ़ी के लिए कहावतें भी बदल जाएगी।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में तो सभी लोग धरती को ‘मां' कहते हैं और चांद को ‘मामा' बुलाते हैं लेकिन आज के बाद से चांद से जुड़े मिथक और कथानक भी बदल जाएंगे। उन्होंने कहा, ‘‘...और नई पीढ़ी के लिए कहावतें भी बदल जाएंगी। कभी कहा जाता था- चंदा मामा बहुत दूर के हैं, अब एक दिन वो भी आएगा...जब बच्चे कहा करेंगे, चंदा मामा बस एक टूर के हैं।'' प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर भावी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने कई बड़े और महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किए हैं। उन्होंने कहा कि चंद्रयान महाअभियान की यह उपलब्धि भारत की उड़ान को चन्द्रमा की कक्षाओं से आगे ले जाएगी। उन्होंने कहा, ‘‘हम हमारे सौरमंडल की सीमाओं का सामर्थ्य परखेंगे और मानव के लिए ब्रह्मांड की अनंत संभावनाओं को साकार करने के लिए भी जरुर काम करेंगे। हमने भविष्य के लिए कई बड़े और महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किए हैं। जल्द ही, सूर्य के विस्तृत अध्ययन के लिए इसरो ‘आदित्य एल-1' मिशन लांच करने जा रहा है। इसके बाद शुक्र भी इसरो के लक्ष्यों में से एक है। गगनयान के जरिए देश अपने पहले मानव अंतरिक्ष फ्लाइट मिशन के लिए भी पूरी तैयारी के साथ जुटा है।'' विज्ञान और प्रौद्योगिकी को देश के उज्ज्वल भविष्य का आधार बताते हुए मोदी ने कहा कि आज के दिन को देश हमेशा-हमेशा के लिए याद रखेगा। उन्होंने कहा, ‘‘यह दिन हम सभी को एक उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा। ये दिन हमें अपने संकल्पों की सिद्धि का रास्ता दिखाएगा। ये दिन, इस बात का प्रतीक है कि हार से सबक लेकर जीत कैसे हासिल की जाती है।'' ज्ञात हो कि पिछली बार भारत का चंद्रयान मिशन असफल हो गया था।
- नयी दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को चंद्रयान-3 के चंद्रमा की सतह पर सफलतापूर्वक उतरने की सराहना की और कहा कि इसी के साथ भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर अपना लैंडर उतारने वाला पहला देश बन गया है। अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम में एक बड़ी छलांग लगाते हुए, भारत के चंद्र मिशन चंद्रयान-3 शाम 6.04 बजे चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के करीब उतरा। इसी के साथ भारत किसी खगोलीय पिंड पर यान उतारने की प्रौद्योगिक हासिल करने वाले वाले चार देशों के विशिष्ट क्लब में शामिल हो गया और यह अब तक चंद्रमा के अज्ञात रहे दक्षिणी ध्रुव पर लैंडर उतारने वाला पहला देश बन गया। शाह ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर किए एक पोस्ट में कहा, ‘‘जब दुनिया चंद्रयान-3 को अंतरिक्ष में भारत के युग की पटकथा लिखते हुए देख रही है, मैं इस मिशन को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाने के लिए इसरो और हमारे वैज्ञानिकों के अथक प्रयासों के लिए उनका हृदय से आभार व्यक्त करता हूं।'' शाह ने कहा, ‘‘यह ऐतिहासिक उपलब्धि न केवल भारतीय प्रतिभा की शक्ति का प्रमाण है, बल्कि यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कल्पना के अनुसार अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक वैश्विक नेता के रूप में उभरने के लिए अमृत काल के माध्यम से भारत की यात्रा का भी शुभारंभ है।'' केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि चंद्रयान-3 मिशन की सफलता के साथ भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव को छूने वाला पहला देश बन गया है। उन्होंने कहा, ‘‘नया अंतरिक्ष सफर भारत की खगोलीय महत्वाकांक्षाओं को नई ऊंचाइयों पर ले जाता है और यह इसे अंतरिक्ष परियोजनाओं के लिए दुनिया के लॉन्चपैड के रूप में स्थापित करता है। भारतीय कंपनियों के लिए अंतरिक्ष का प्रवेश द्वार खुलने से हमारे युवाओं के लिए रोजगार के ढेरों अवसर पैदा होंगे।''
- नयी दिल्ली । कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने चंद्रयान-3 की सफल 'लैंडिंग' को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की शानदार उपलब्धि करार देते हुए बुधवार को कहा कि यह सफलता वैज्ञानिक समुदाय की प्रतिभा और कड़ी मेहतन का परिणाम है। इसरो ने बुधवार को अंतरिक्ष क्षेत्र में एक नया इतिहास रचते हुए चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडर ‘विक्रम' और रोवर ‘प्रज्ञान' से लैस एलएम की सॉफ्ट लैंडिग कराने में सफलता हासिल की। भारतीय समयानुसार शाम करीब छह बजकर चार मिनट पर इसने चांद की सतह को छुआ। राहुल गांधी ने ‘एक्स' पर पोस्ट किया, ‘‘आज की शानदार उपलब्धि के लिए टीम इसरो को बधाई। चंद्रमा पर चंद्रयान-3 की ‘सॉफ्ट लैंडिंग' हमारे वैज्ञानिक समुदाय की दशकों की जबरदस्त प्रतिभा और कड़ी मेहनत का परिणाम है।'' उन्होंने यह भी कहा, ‘‘1962 के बाद से भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम नई ऊंचाइयों को छू रहा है और युवा सपने देखने वालों की पीढ़ियों को प्रेरित कर रहा है।''
- अहमदाबाद । भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक और भौतिक विज्ञानी विक्रम साराभाई के बेटे कार्तिकेय साराभाई और पुत्री मल्लिका साराभाई ने बुधवार को कहा कि चंद्रयान-3 परियोजना ‘नये भारत' को प्रतिबिंबित करती है और प्रत्येक नागरिक को इस पर गर्व है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने विक्रम साराभाई को श्रद्धांजलि स्वरूप चंद्रयान-3 के लैंडर का नाम ‘विक्रम' रखा है। भारत इस उपलब्धि को हासिल करने वाला चौथा और चंद्रमा के अब तक अज्ञात दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला पहला देश है। पर्यावरण विज्ञानी कार्तिकेय ने कहा, ‘‘यह हम सभी के लिए, न केवल भारतीयों बल्कि दुनियाभर के लिए महान दिन है क्योंकि कोई अभी तक चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर नहीं पहुंच सका है। लोगों ने पहले भी कोशिश की है, लेकिन विफल रहे। वहां अलग स्वरूप में पानी होने की संभावना है।'' उन्होंने कहा, ‘‘यह हमारे लिए गौरवपूर्ण अनुभव है क्योंकि लैंडर का नाम विक्रम साराभाई के नाम पर है। लेकिन यह हम सभी के लिए गर्व की बात है, न केवल उनके परिवार के लिए। इस लैंडर के विभिन्न घटक विभिन्न लोगों ने बनाये हैं। इसलिए इसमें वास्तव में भारत का बड़ा हिस्सा समाहित है। पूरे देश के वैज्ञानिक शामिल हैं। यह नये भारत को प्रतिबिंबित करता है।'' कार्तिकेय ने कहा कि उनके पिता दूसरों का अनुसरण करने के बजाय उनसे सीखने में भरोसा करते थे।उन्होंने कहा कि चंद्रयान-2 विफल नहीं हुआ था क्योंकि यह अब भी चंद्रयान-3 की मदद कर रहा है।विक्रम साराभाई की पुत्री मल्लिका साराभाई ने कहा कि भारत का चंद्र अभियान पूरी मानवता के लिए आगे का एक कदम है। उन्होंने ‘ कहा, ‘‘मैं प्रयास और विज्ञान में विश्वास करती हूं। मेरा मानना है कि इसरो के वैज्ञानिकों ने कठोर परिश्रम किया है और इससे मेरे पिता का एक सपना पूरा होगा। उन्होंने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के उपयोग का सपना अन्य देशों से होड़ के लिए या खुद को महान साबित करने के लिए नहीं देखा था। बल्कि उनका उद्देश्य यह देखना था कि मानवता और पृथ्वी सभी के लिए कैसे बेहतर, सुरक्षित और अधिक सम्मानजनक हो सकते हैं।
-
नई दिल्ली। हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) एलएसपी-7 तेजस ने 23 अगस्त, 2023 को गोवा के तट पर स्वदेशी बियॉन्ड विजुअल रेंज (बीवीआर) हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल अस्त्र का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। इस मिसाइल का परीक्षण लगभग 20,000 फीट की ऊंचाई पर सफलतापूर्वक किया गया। परीक्षण से संबंधित सभी उद्देश्यों को पूरा किया गया और यह एक आदर्श और सटीक लॉन्च था।
परीक्षण प्रक्षेपण की निगरानी एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (एडीए), रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ), हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के परीक्षण निदेशक और वैज्ञानिकों के साथ-साथ सेंटर फॉर मिलिट्री एयरवर्दीनेस एंड सर्टिफिकेशन (सीईएमआईएलएसी) और वैमानिकी गुणवत्ता आश्वासन (डीजी-एक्यूए) महानिदेशालय के अधिकारियों द्वारा की गई थी। विमान की निगरानी चेज़ तेजस ट्विन सीटर विमान से भी की गई।अस्त्र, एक अत्याधुनिक बीवीआर हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल है जो अत्यधिक कलाबाजी वाले सुपरसोनिक हवाई लक्ष्यों को भेदने और नष्ट करने में सक्षम है। इसे रक्षा अनुसंधान और विकास प्रयोगशाला (डीआरडीएल), अनुसंधान केंद्र इमारत (आरसीआई) और अन्य प्रयोगशालाओं द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया है। डीआरडीओ का घरेलू तेजस लड़ाकू विमान से स्वदेशी अस्त्र बीवीआर परीक्षण 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में एक बड़ा कदम है।रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने तेजस-एलसीए से मिसाइल के सफल परीक्षण के लिए एडीए, डीआरडीओ, सेमिलैक, डीजी-एक्यूए और उद्योग को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्षेपण से तेजस की युद्धक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और आयातित हथियारों पर निर्भरता कम होगी। रक्षा विभाग (आरएंडडी) के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष ने भी सफल प्रक्षेपण में शामिल टीमों को बधाई दी है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि भारत आने वाले वर्षों में दुनिया का विकास इंजन बनेगा और जल्द ही पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगा। दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में ब्रिक्स बिजनेस फोरम लीडर्स डायलॉग में प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में आर्थिक उथल-पुथल के बावजूद भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है।
प्रधानमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में किए गए सुधारों के बारे में कहा कि भारत सरकार के मिशन मोड में किए गए सुधारों के कारण व्यापार आसान करने में वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि जीएसटी और दिवाला और ऋण अक्षमता कानून लागू होने से निवेशकों का भरोसा बढ़ रहा है।उन्होंने कहा कि रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्रों को पहले प्रतिबंधित माना जाता था लेकिन उन्हें अब निजी क्षेत्र के लिए खोल दिया गया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकार विशेष रूप से सार्वजनिक सेवा वितरण और सुशासन पर ध्यान केंद्रित कर रही है। उन्होंने कहा कि अब तक लाभार्थियों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण-डीबीटी के माध्यम से तीन सौ 60 अरब डॉलर से अधिक की धनराशि अंतरित की जा चुकी है। श्री मोदी ने बताया कि डीबीटी योजना से सेवा वितरण में पारदर्शिता बढ़ी है और भ्रष्टाचार कम हुआ है।प्रधानमंत्री मोदी ने डिजिटल लेनदेन के बारे में कहा कि आज भारत में यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस- यूपीआई का इस्तेमाल रेहड़ी-पटरी वालों से लेकर बड़े-बड़े शॉपिंग मॉल तक हर स्तर पर हो रहा है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया के सभी देशों में भारत सबसे ज्यादा डिजिटल लेनदेन वाला देश है और संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर और फ्रांस जैसे देश भी इस मंच से जुड़ रहे हैं।प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के बुनियादी ढांचे में बड़े पैमाने पर किए जा रहे निवेश देश के परिदृश्य को बदल रहे हैं और इस साल के बजट में हमने बुनियादी ढांचे के लिए लगभग एक सौ 20 अरब अमेरिकी डॉलर आवंटित किए हैं।उन्होंने कहा कि इस निवेश के माध्यम से हम भविष्य के नए भारत के लिए एक मजबूत नींव रख रहे हैं। श्री मोदी ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी, दूरसंचार, फिनटेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में हम "मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड" की परिकल्पना को बढ़ावा दे रहे हैं।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कोविड ने उदार और समावेशी आपूर्ति श्रृंखलाओं के महत्व को उजागर किया है और इसके लिए आपसी विश्वास और पारदर्शिता के महत्व पर जोर दिया है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि ब्रिक्स देश मिलकर वैश्विक कल्याण विशेष रूप से ग्लोबल साउथ में महत्वपूर्ण योगदान कर सकते हैं। प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स देशों के उद्योगपतियों को भारत की विकास यात्रा में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स लीडर्स रिट्रीट में भी भाग लिया और वैश्विक विकास के बारे में पांच सदस्यों के गुट के अन्य नेताओं के साथ विचार-विमर्श किया।प्रधानमंत्री ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए कल दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग पहुंचे। दक्षिण अफ्रीका के उपराष्ट्रपति पॉल मैशाटाइल ने हवाई अड्डे पर श्री मोदी का स्वागत किया। भव्य स्वागत के बाद प्रधानमंत्री मोदी उनके स्वागत के लिए एकत्र प्रवासी भारतीयों से मिले। श्री मोदी ने भारतीय प्रवासियों का अभिनंदन किया और उनसे बातचीत की।प्रधानमंत्री मोदी आज ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के पूर्ण सत्र में भाग लेंगे और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा द्वारा आयोजित भोज रात्रिभोज में शामिल होंगे।तीन दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन दक्षिण अफ्रीका की अध्यक्षता में जोहान्सबर्ग में आयोजित हो रहा है। श्री मोदी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की गतिविधियों के हिस्से के रूप में आयोजित ब्रिक्स-अफ्रीका आउटरीच और ब्रिक्स प्लस डायलॉग कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं।15वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का विषय है - ब्रिक्स और अफ्रीका: पारस्परिक त्वरित विकास, सतत विकास और समावेशी बहुपक्षवाद के लिए साझेदारी। ब्रिक्स देश दुनिया की कुल आबादी का 42 प्रतिशत, विश्व के सकल घरेलू उत्पाद का 23 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार के 18 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करते हैं। ब्रिक्स में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। - -प्रत्येक मृतक के निकटतम परिजन को 2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणानई दिल्ली।मिजोरम में बुधवार सुबह एक दर्दनाक हादसा हो गया है। सैरांग इलाके में एक निर्माणाधीन रेलवे पुल के गिरने से कम से कम 17 मजदूरों की मौत हो गई है। घटनास्थल पर कई अन्य लोगों के फंसे होने की आशंका है। जहां हादसा हुआ है वह जगह राजधानी आइजोल से करीब 21 किलोमीटर दूर है। बताया जा रहा है कि हादसा सुबह 10 बजे के करीब हुआ। उस वक्त सभी मजदूर पुल का काम कर रहे थे। कुरुंग नदी पर बैराबी को सैरांग से जोड़ने वाला रेलवे पुल निर्माणाधीन था।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिजोरम में पुल दुर्घटना पर दुख व्यक्त किया है। उन्होंने दुर्घटना में मारे गए लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की है और घायलों के स्वस्थ होने की कामना की है। प्रधानमंत्री ने कहा कि राहत और बचाव कार्य चल रहा है तथा प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता दी जा रही है। प्रधानमंत्री राहत कोष से प्रत्येक मृतक के परिजन को दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी।
- नयी दिल्ली। शिक्षा मंत्रालय ने स्कूली शिक्षा का नया राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचा (एनसीएफ) तैयार किया है जिसके तहत अब बोर्ड परीक्षाएं साल में दो बार होंगी, छात्र-छात्राओं को सर्वश्रेष्ठ अंक बरकरार रखने का विकल्प होगा। इसके साथ ही कक्षा 11वीं और 12वीं के छात्र-छात्राओं को दो भाषाओं का अध्ययन करना होगा और इनमें से कम से कम एक भाषा भारतीय होनी चाहिए।मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, नयी शिक्षा नीति (एनईपी) के अनुसार नया पाठ्यचर्या ढांचा तैयार है और इसके आधार पर 2024 के शैक्षणिक सत्र के लिए पाठ्य पुस्तकें तैयार की जाएंगी ।स्कूली स्तर पर राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचे के दस्तावेज के अनुसार, कक्षा 11वीं और 12वीं में विषयों का चयन कला, विज्ञान, वाणिज्य ‘स्ट्रीम’ तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि छात्र-छात्राओं को अपनी पसंद का विषय चुनने की आजादी मिलेगी।इसमें कहा गया है कि नए पाठ्यचर्या ढांचे के तहत बोर्ड परीक्षाएं साल में दो बार होंगी और छात्र-छात्राओं को सर्वश्रेष्ठ अंक बरकरार रखने की इजाजत होगी।दस्तावेज के अनुसार, छात्र इसमें से उस परीक्षा में उपस्थित हो सकते हैं जिसके लिए वे अपने को तैयार महसूस करेंगे।इसके अनुसार, कक्षा 11 और 12 के छात्र-छात्राओं को दो भाषाओं का अध्ययन करना होगा और इनमें से कम से कम एक भाषा भारतीय होनी चाहिए। नये पाठ्यचर्या ढांचे के अनुसार, बोर्ड परीक्षाएं महीनों की कोचिंग और रट्टा लगाने की क्षमता के मुकाबले छात्र-छात्राओं की समझ और दक्षता के स्तर का मूल्यांकन करेंगी। इसके तहत कक्षाओं में पाठ्य पुस्तकों को ‘कवर’ करने की मौजूदा प्रथा से बचा जाएगा और पाठ्य पुस्तकों की कीमतों में कमी लाई जाएगी। नये पाठ्यचर्या ढांचे के अनुसार, स्कूल बोर्ड उचित समय में ‘मांग के अनुसार’ परीक्षा की पेशकश करने की क्षमता विकसित करेंगे।
-
नई दिल्ली। भारत रत्न से सम्मानित जाने-माने क्रिकेट खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर को मतदाताओं में जागरूकता पैदा करने और चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने के वास्ते निर्वाचन आयोग का राष्ट्रीय आइकन घोषित किया गया है। आज नई दिल्ली में आकाशवाणी भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में श्री तेंदुलकर ने कहा कि क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद उनकी यह नई पारी है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के विकास में प्रत्येक मत महत्वपूर्ण है। उन्होंने मतदाताओं विशेष रूप से युवा नागरिकों को मत देने के लिए प्रोत्साहित किया।
इस अवसर पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार की उपस्थिति में सचिन तेंदुलकर के साथ तीन वर्ष के लिए एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर हुए। इस भागीदारी के माध्यम से निर्वाचन आयोग शहरी और युवा मतदाताओं में मतदान के प्रति बेरुखी दूर करने की कोशिश करेगा।इससे पहले एक बयान में, निर्वाचन आयोग ने कहा कि यह सहयोग आगामी चुनावों विशेष रूप से अगले साल होने वाले आम चुनाव में मतदाताओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए युवाओं के बीच सचिन तेंदुलकर के अद्वितीय प्रभाव का लाभ उठाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।निर्वाचन आयोग विभिन्न क्षेत्रों के प्रसिद्ध भारतीयों के साथ लगातार जुड़ा हुआ है और मतदाताओं को प्रेरित करने के लिए उन्हें अपने राष्ट्रीय आइकन के रूप में नामित करता है। पिछले साल आयोग ने मशहूर अभिनेता पंकज त्रिपाठी को नेशनल आइकॉन के रूप में मान्यता दी थी। इससे पहले, 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान, क्रिकेट खिलाड़ी एमएस धोनी, अभिनेता आमिर खान और बॉक्सिंग चैंपियन मैरी कॉम निर्वाचन आयोग के राष्ट्रीय आइकन थे। -
नई दिल्ली। मौसम विभाग ने उत्तराखंड में अगले 36 घंटों के दौरान राज्य के विभिन्न हिस्सों में मूसलाधार बारिश की चेतावनी देते हुए रेड अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग ने बताया कि देहरादून, हरिद्वार, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल, चंपावत, बागेश्वर और उधम सिंह नगर में कल तक भारी वर्षा होने की संभावना है।
हिमाचल प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है, जिससे बारिश का दौर शुरू हो गया है। कल से राजधानी शिमला और सोलन समेत प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में रुक-रुक कर बारिश हो रही है।तेज बारिश के कारण कई जगहों पर भूस्खलन हुआ है, जिससे सड़कें बाधित हो गई हैं। इसके अतिरिक्त, बिजली और जल आपूर्ति सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं, जिसके परिणामस्वरूप लोगों को महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। -
नई दिल्ली। देश का तीसरा चन्द्र मिशन चन्द्रयान-तीन आज शाम छह बजकर चार मिनट पर चन्द्रमा की सतह पर उतरेगा। चंद्रमा से करीब 25 किलोमीटर की दूरी से उतराई शुरू करते समय लैंडर की गति कम करना इस अभियान का सबसे कठिन चरण होगा।
इसे सर्वाधिक चुनौतीपूर्ण समझते हुए विक्रम लैंडर को रोवर प्रज्ञान के साथ चन्द्रमा पर सबसे कठिन स्थिति का सामना करना पडेगा, परन्तु चंद्रयान का चन्द्रमा की सतह पर उतरना ऐतिहासिक होगा। इसके साथ भारत दक्षिणी ध्रुव के निकट यान उतारने वाला विश्व का पहला देश होगा, जबकि चन्द्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला चौथा देश होगा।तेलंगाना में आज शाम सभी स्कूलों में चंद्रयान-तीन मिशन की लैंडिंग की विशेष स्क्रीनिंग की जाएगी। स्कूल शिक्षा विभाग के निदेशक ने राज्य में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि वे शाम साढे पांच बजे से साढ़े छह बजे तक विद्यार्थियों और शिक्षकों की विशेष सभाएं आयोजित करें, ताकि चन्द्रयान-तीन मिशन की लैंडिंग के विशेष लाइव कार्यक्रम को देखा जा सके।स्कूल शिक्षा विभाग ने बताया है कि विशेष स्क्रीनिंग की व्यवस्था टी-सैट विद्या और निपुण चैनलों तथा राज्य शिक्षा चैनलों के जरिये की जाएगी। मध्य प्रदेश के स्कूलों में बच्चे चंद्रयान-3 को चंद्रमा पर उतरते देख सकेंगे। राज्य के सभी स्कूलों में चंद्रयान-3 की लैंडिंग का लाइव प्रसारण किया जाएगा। स्कूलों में शाम साढ़े पांच से साढ़े छह बजे तक चंद्रयान लाइव प्रसारण की व्यवस्था करने के निर्देश जारी किये हैं। -
बेंगलुरु. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) अपने अगले चंद्र मिशन को संभवत: अपने जापानी समकक्ष के साथ साझेदारी में अंजाम देगा। इसके लिए तेजी से काम किया जा रहा है। ‘जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी' (जाक्सा)और इसरो ने अगले चंद्र मिशन ‘लूनर पोलर एक्सप्लोरेश मिशन' (लुपेक्स) के लिए साझेदारी की है। जक्सा और इसरो क्रमश: रोवर और लैंडर का विकास कर रहे हैं। रोवर अपने साथ न केवल इसरो और जाक्सा के उपकरणों को चांद तक ले जाएगा बल्कि अमेरिकी एजेंसी नासा और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) के उपकरण भी उसके साथ होंगे। जापान की राष्ट्रीय अंतरिक्ष नीति पर कैबिनेट समिति के उपाध्यक्ष, जापान की राष्ट्रीय खगोलीय वेधशाला के महानिदेशक साकू त्सुनेता इस महीने के शुरु में बेंगलुरु स्थित इसरो के मुख्यालय आए थे और उन्होंने भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी के प्रमुख सोमनाथ एस. के साथ हुई बैठक में लुपेक्स मिशन की प्रगति पर चर्चा की। इसरो के एक अधिकारी ने बताया, ‘‘अन्य मुद्दों सहित लुपेक्स मिशन के लिए छोटे लैंडर के निर्माण पर भी चर्चा की गई।'' जाक्सा के मुताबिक, लुपेक्स मिशन का लक्ष्य चंद्रमा पर स्थायी गतिविधियों के लिए आधार बनाने के उद्देश्य से उसके अनुकूल ध्रुवीय इलाके की खोज की संभावना का पता लगाना, चंद्रमा की सतह पर मौजूद जल संसाधन की उपलब्धता को लेकर जानकारी हासिल करना और चंद्रमा एवं वाहन (अंतरिक्ष यान) के पहुंचाने और वहां रात भर रहने जैसी ग्रहीय सतह अन्वेषण प्रौद्योगियों का प्रदर्शन करना है। अंतरिक्ष विभाग के अहमदाबाद स्थित स्वायत्त संस्थान भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल) ने लुपेक्स के लिए कई उपकरणों का प्रस्ताव किया है जिनमें प्रमुख रूप से चंद्रमा के ध्रुवीय क्षेत्र में हमेशा में छाया में रहने वाली सतह या उपसतह को मापने वाले यंत्र शामिल हैं। इसरो अधिकारी के मुताबिक, लुपेक्स मिशन को 2025 में भेजने की योजना है।
- -
नयी दिल्ली. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने देश के विश्वविद्यालयों एवं कालेजों से कहा है कि वे 23 अगस्त को चंद्रयान-3 के चंद्रमा पर लैंडिंग की लाइव स्ट्रीमिंग देखने के लिए छात्रों एवं शिक्षकों को प्रोत्साहित करें। यूजीसी के सचिव मनीष जोशी ने इस संबंध में 21 अगस्त को सभी विश्वविद्यालयों एवं कालेजों से आग्रह किया है। इसमें कहा गया है कि छात्रों और शिक्षक संकाय के लिए एक विशेष सभा का आयोजन किया जाए जिससे वे भी इस गौरवशाली क्षण का हिस्सा बन सकें। चंद्रयान-3 बुधवार को शाम 6 बजकर 4 मिनट पर चांद की सतह पर लैंड करेगा । इस ऐतिहासिक पल के गवाह छात्र भी बन सकें इसके लिए यूजीसी ने एक कदम उठाया है। नोटिस में कहा गया है, ‘‘ जैसा कि आपको मालूम है कि भारत चंद्रयान-3 के माध्यम से अंतरिक्ष अन्वेषण में महत्वपूर्ण मील का पत्थर स्थापित करने जा रहा है। यह भारतीय विज्ञान, इंजीनियरिंग प्रौद्योगिकी और उद्योग के लिए एक अहम कदम होगा।'' इसमें कहा गया है कि चंद्रयान-3 की लैंडिंग एक यादगार पल है, जो न केवल जिज्ञासा को बढ़ावा देगी बल्कि हमारे युवाओं के मन में नवाचार के लिए एक जुनून भी पैदा करेगी। आयोग ने कहा कि इससे गर्व और एकता की गहरी भावना पैदा होगी क्योंकि हम सामूहिक रूप से भारतीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी की शक्ति का जश्न मनाएंगे। यूजीसी ने कहा है कि इसका सीधा प्रसारण 23 अगस्त को शाम 5 बजकर 27 मिनट से भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की वेबसाइट सहित कई प्लेटफार्मो पर उपलब्ध होगा। आयोग ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों से आग्रह किया जाता है कि वे इस दिन शाम 5 बजकर 30 मिनट से 6 बजकर 30 मिनट तक विशेष आयोजन करें और छात्रों एवं शिक्षकों को इसमें सक्रिया हिस्सेदारी एवं लाइव स्ट्रीमिंग देखने के लिए प्रेरित करें।
- -
बेंगलुरु. चंद्रयान-3 मिशन के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की प्रक्षेपण सूची बेहद लंबी है। आने वाले दिनों में इसरो द्वारा किये जाने वाले प्रक्षेपणों में सूर्य का अध्ययन करने के लिए एक मिशन, जलवायु अवलोकन उपग्रह का प्रक्षेपण, गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम के तहत एक प्रायोगिक यान और भारत-अमेरिका सिंथेटिक एपर्चर रडार का प्रक्षेपण शामिल है। इसरो के एक अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि इसके अलावा एक्सपोसैट (एक्स-रे पोलारीमीटर उपग्रह) भी प्रक्षेपण के लिए तैयार है जो चरम स्थितियों में चमकदार खगोलीय एक्स-रे स्रोतों की विभिन्न गतिशीलता का अध्ययन करने वाला देश का पहला समर्पित पोलारीमेट्री मिशन है। सूर्य का अध्ययन करने वाली पहली अंतरिक्ष-आधारित भारतीय वेधशाला, आदित्य-एल1, प्रक्षेपण के लिए तैयार हो रही है, इसका प्रक्षेपण संभवतः सितंबर के पहले सप्ताह में किया जाएगा। इसरो अध्यक्ष सोमनाथ एस. के अनुसार, अंतरिक्ष एजेंसी ने एक जलवायु अवलोकन उपग्रह इनसैट-3डीएस के प्रक्षेपण की भी योजना बनाई है। देश के पहले मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन गगनयान के लिए ‘क्रू एस्केप सिस्टम' के सत्यापन के लिए एक परीक्षण वाहन मिशन का प्रक्षेपण भी जल्द ही होने की उम्मीद है। सोमनाथ ने 15 अगस्त को इसरो मुख्यालय में अपने स्वतंत्रता दिवस संबोधन में कहा, ‘‘(फिर) हमें भारत-अमेरिका निर्मित सिंथेटिक एपर्चर रडार 'निसार' प्रक्षेपित करना है। इसलिए हमारे प्रक्षेपण की सूची लंबी है।'' सोमनाथ ने कहा था, ‘‘आने वाले दिनों में हम अपनी सुरक्षा के लिए भी बड़ी संख्या में उपग्रह बनाने जा रहे हैं।'' इसरो अधिकारियों के अनुसार, नासा-इसरो एसएआर (निसार) एक निगरानी उपग्रह है जिसे अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा और इसरो द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि निसार 12 दिनों में पूरे विश्व का मानचित्रण करेगी और पृथ्वी के पारिस्थितिक तंत्र, बर्फ द्रव्यमान, वनस्पति, समुद्र स्तर में वृद्धि, भूजल तथा भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखी और भूस्खलन सहित प्राकृतिक खतरों में परिवर्तन को समझने के लिए स्थानिक और अस्थायी रूप से सुसंगत डेटा प्रदान करेगी। गगनयान मानव अंतरिक्ष (मानवयुक्त) उड़ान मिशन शुरू करने से पहले, इसरो ने दो मानवरहित मिशन की योजना बनाई है। इसरो के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘हम अगले साल की शुरुआत तक (दो में से पहले) मानवरहित क्रू मॉड्यूल मिशन के लिए तैयारी कर रहे हैं।
- -
कासरगोड/तिरुवनंतपुरम. केरल में विपक्षी कांग्रेस ने ट्रेन पर पथराव की बढ़ती घटनाओं को लेकर रेल यात्रा के दौरान सुरक्षा पर मंगलवार को सवाल खड़े किए। कांग्रेस ने ट्रेन पर पथराव की घटनाओं में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की जबकि कासरगोड जिले में होसदुर्ग पुलिस ने रेल की पटरियों के पास संदिग्ध परिस्थितियों में घूम रहे तकरीबन 50 लोगों को हिरासत में लिया है। उत्तरी केरल के जिले में सोमवार को राजधानी एक्सप्रेस पर उस समय पथराव किया गया जब यह काजनगाड़ और निलेश्वर के बीच थी। बाद में दूसरी घटना मलप्पुरम जिले में हुई जहां शाम को पांच बजकर करीब 10 मिनट पर वंदे भारत ट्रेन पर तब पत्थर फेंके गए जब यह तनूर और तिरुर के बीच थी। दूसरी घटना का जिक्र करते हुए कांग्रेस सांसद के. मुरलीधरन ने कहा कि उनकी पुत्रवधू और बच्चा उस ट्रेन में यात्रा कर रहे थे। उन्होंने तिरुवनंतपुरम में पत्रकारों से कहा, “ अगर यही स्थिति रही तो लोग अपने परिवार और बच्चों के साथ ट्रेन में यात्रा करने की हिम्मत कैसे करेंगे? जब मुख्यमंत्री ट्रेन से यात्रा करते हैं तो निगरानी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया जाता है।” सांसद ने कहा, “ ट्रेन पर पत्थर फेंकने वालों पर कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं की गई? अफसोस की बात है। अगर ऐसा ही चलता रहा तो ट्रेन से यात्रा करना पूरी तरह से असुरक्षित हो जाएगा।” केरल प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने मांग की कि सरकार को ऐसी गतिविधियां रोकने के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए। मुरलीधरन ने कहा, “ मुख्यमंत्री को इस संबंध में सख्त निर्देश जारी करने चाहिए। जो भी जिम्मेदार हैं, उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए और कानून के समक्ष लाना चाहिए।” वहीं कासरगोड में पुलिस अधिकारियों ने सुबह में काजनगाड़ के पास रेल की पटरियों का मुआयना किया। जिला प्रशासन ने एक बयान में बताया कि निरीक्षण के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में घूम रहे करीब 50 लोगों को हिरासत में लिया गया और उनसे पूछताछ की जा रही है। बयान में कहा गया है कि होसदुर्ग पुलिस ने रेलवे अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया है जिसके तहत अधिकतम सज़ा 10 साल है। इसमें यह भी कहा गया कि पटरियों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और गुप्त निगरानी के लिए अतिरिक्त कर्मियों की तैनात की गई है। ट्रेन पर पथराव की घटनाएं 13 अगस्त को भी सामने आई थी जब कन्नूर जिले में बदमाशों ने मंगलुरु-चेन्नई सुपरफास्ट एक्सप्रेस ट्रेन और नेत्रवती एक्सप्रेस पर हमला किया था। इसके बाद 16 अगस्त को वंदे भारत एक्सप्रेस पर भी पथराव किया गया था। इससे पहले, मई में कई बार वंदे भारत ट्रेन पर पथराव की घटनाएं हुई हैं। केरल में अप्रैल में इस ट्रेन को शुरू किया गया था।
- -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 15वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के वास्ते मंगलवार सुबह दक्षिण अफ्रीका के लिए रवाना हुए। उन्होंने विश्वास जताया कि यह सम्मेलन सदस्य देशों को भविष्य के सहयोग के क्षेत्रों की पहचान करने और संस्थागत विकास का जायजा लेने का उपयोगी अवसर प्रदान करेगा। प्रस्थान से पहले जारी बयान में प्रधानमंत्री ने कहा कि ब्रिक्स देश विभिन्न क्षेत्रों में एक मजबूत सहयोग एजेंडा अपना रहे हैं। उन्होंने कहा, “हम मानते हैं कि ब्रिक्स विकास संबंधी अनिवार्यताओं और बहुपक्षीय प्रणाली में सुधार सहित पूरे ‘ग्लोबल साउथ' के लिए चिंता का सबब बने विभिन्न मुद्दों पर चर्चा और विचार-विमर्श करने का मंच बन गया है।” मोदी ने कहा कि यह शिखर सम्मेलन ब्रिक्स देशों को भविष्य के सहयोग के क्षेत्रों की पहचान करने और संस्थागत विकास का जायजा लेने का उपयोगी अवसर प्रदान करेगा। बाद में उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर पोस्ट किया, “जोहानिसबर्ग में आयोजित होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए दक्षिण अफ्रीका रवाना हो रहा हूं। मैं ‘ब्रिक्स-अफ्रीका आउटरीच' और ‘ब्रिक्स प्लस डायलॉग' कार्यक्रमों में भी शामिल होऊंगा। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ‘ग्लोबल साउथ' के लिए चिंता का सबब बने विभिन्न मुद्दों और विकास के अन्य क्षेत्रों पर चर्चा करने के वास्ते मंच प्रदान करेगा।” मोदी ने कहा कि वह कई अतिथि देशों के साथ बातचीत करने के लिए उत्सुक हैं, जिन्हें इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया है। उन्होंने कहा, “मैं जोहानिसबर्ग में मौजूद कुछ नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें करने को लेकर भी उत्सुक हूं।” मोदी दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा के निमंत्रण पर 15वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शिरकत करने के लिए 22 से 24 अगस्त तक दक्षिण अफ्रीकी शहर के दौरे पर रहेंगे। यह साल 2019 के बाद ब्रिक्स नेताओं का पहला आमने-सामने का शिखर सम्मेलन होगा। ब्रिक्स देशों में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। प्रधानमंत्री ने बताया कि वह 25 अगस्त को यूनान के अपने समकक्ष क्यारीकोस मित्सोताकिस के निमंत्रण पर दक्षिण अफ्रीका से एथेंस जाएंगे। उन्होंने रेखांकित किया कि यह इस प्राचीन भूमि की उनकी पहली यात्रा होगी। प्रधानमंत्री ने कहा, “मुझे पिछले 40 वर्षों में यूनान की यात्रा करने वाला पहला भारतीय प्रधानमंत्री बनने का सम्मान प्राप्त होगा।” उन्होंने कहा कि हमारी दोनों सभ्यताओं के बीच संपर्क दो सहस्राब्दियों से पुराना है और आधुनिक समय में हमारे संबंध लोकतंत्र, कानून के शासन और बहुलवाद के साझा मूल्यों से मजबूत हुए हैं। मोदी ने कहा कि व्यापार, निवेश, रक्षा, संस्कृति और लोगों से लोगों के बीच संपर्क जैसे विविध क्षेत्रों में सहयोग भारत और यूनान को करीब ला रहा है। उन्होंने कहा कि वह यूनान का दौरा करने और दोनों देशों के बहुआयामी संबंधों में एक नया अध्याय शुरू करने के लिए उत्सुक हैं। प्रधानमंत्री ने बताया कि यूनान में वह भारतीय समुदाय के लोगों के साथ संवाद भी करेंगे।
- बेंगलुरु। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने चंद्रयान-3 के लैंडर के चंद्रमा की सतह पर उतरने के तय समय से एक दिन पहले मंगलवार को कहा कि चंद्रयान-3 मिशन निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ रहा है। अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि यहां ‘इसरो टेलीमेट्री, ट्रैकिंग और कमांड नेटवर्क' (आईएसटीआरएसी) में स्थित ‘मिशन ऑपरेशंस कॉम्प्लेक्स' में उत्साह का माहौल है। इसरो ने चंद्रमा पर भारत के तीसरे मिशन की मंगलवार दोपहर को ताजा जानकारी देते हुए कहा, ‘‘मिशन तय कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ रहा है। प्रणालियों की नियमित जांच की जा रही है। सुचारू संचालन जारी है।'' उसने कहा कि एमओएक्स/आईएसटीआरएसी से चंद्रयान-3 के चंद्रमा की सतह पर उतरने का सीधा प्रसारण बुधवार शाम पांच बजकर 20 मिनट से शुरू किया जाएगा। लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) से युक्त लैंडर मॉड्यूल के बुधवार को शाम छह बजकर चार मिनट पर चंद्रमा की सतह के दक्षिण ध्रुवी क्षेत्र के निकट उतरने की उम्मीद है।
-
नयी दिल्ली । केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को देश का पहला दुर्घटना परीक्षण कार्यक्रम ‘भारत एनसीएपी' पेश किया। इसका मकसद 3.5 टन तक के मोटर वाहनों के सड़क सुरक्षा मानकों में सुधार करना है। सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री ने कहा कि यह ऑटोमोबाइल उद्योग और समाज के लिए एक महत्वपूर्ण दिन है क्योंकि इससे वाहनों की सुरक्षा सुविधाओं में सुधार होगा। उन्होंने कहा कि भारत एनसीएपी (न्यू कार असेसमेंट प्रोग्राम) तंत्र को सभी हितधारकों के दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थित तरीके से तैयार किया गया है। गडकरी ने कहा कि देश दो चुनौतियों सड़क दुर्घटना और वायु प्रदूषण का सामना कर रहा है। भारत में हर साल करीब पांच लाख दुर्घटनाएं होती हैं और इन दुर्घटनाओं के कारण करीब 1.5 लाख लोगों की जान जाती है। कार्यक्रम के तहत, कार निर्माता स्वेच्छा से ऑटोमोटिव उद्योग मानक (एआईएस) 197 के अनुसार परीक्षण किए गए अपने वाहनों की पेशकश कर सकते हैं। भारत एनसीएपी एक अक्टूबर 2023 से लागू किया जाएगा।
- ग्वालियर. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को कहा कि मध्य प्रदेश के ग्वालियर सहित देश के 1,300 रेलवे स्टेशनों का 'अमृत भारत स्टेशन योजना' के तहत पुनर्विकास और आधुनिकीकरण किया जा रहा है। वह ग्वालियर स्टेशन पर निर्माण कार्य का जायजा लेने के बाद पत्रकारों से बात कर रहे थे।रेल मंत्री ने कहा कि कुल 1,300 रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास और आधुनिकीकरण किया जा रहा है और इसके तहत ग्वालियर स्टेशन पर 500 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। ‘नैरोगेज' लाइन को ‘ब्रॉडगेज' में बदलने का काम तेजी से जारी है। उन्होंने कहा कि रेलवे सुरक्षा आयुक्त (सीआरएस) जल्द ही ग्वालियर और सुमावली के बीच ‘ब्रॉडगेज' कार्य का निरीक्षण करेंगे। उन्होंने कहा कि ग्वालियर स्टेशन पर काम वहां की समृद्ध विरासत को ध्यान में रखते हुए किया गया है।वैष्णव ने कहा कि रेलवे स्टेशन पर दो और प्लेटफार्म बनाए जाएंगे। यह खूबसूरत डिजाइन और आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा। मंत्री ने कहा कि पुनर्विकास और आधुनिकीकरण के दौरान पुराने रेलवे स्टेशनों की विरासत को संरक्षित किया जाएगा।



.jpg)
.jpg)




.jpg)



.jpg)
.jpg)

.jpg)






.jpg)
.jpg)
.jpeg)

.jpg)