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 पाम ऑयल की खेती को बढ़ावा देने कृषि विज्ञान केंद्र भलेसर में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित

-नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल - ऑयल पाम योजना से किसानों की आय बढ़ेगी - कलेक्टर
-महासमुंद जिले में किसानों को प्रोत्साहित किया जाएगा
 महासमुंद / पाम ऑयल की खेती को बढ़ावा देने के लिए लगातार भारत सरकार द्वारा लगातार किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल - ऑयल पाम योजना के संबंध में आज कृषि विज्ञान केंद्र भलेसर में उद्यानिकी विभाग एवं कृषि विज्ञान केंद्र भलेसर के संयुक्त तत्वाधान में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इस अवसर पर कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह, जिला पंचायत सीईओ श्री हेमंत नंदनवार, योगेश्वर चंद्राकर, आर एल शर्मा, सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक एवं बड़ी संख्या में अंचल के किसान उपस्थित थे।
कार्यशाला में कलेक्टर श्री लंगेह ने कहा कि पाम ऑयल की खेती सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता में से एक है। उन्होंने कहा कि हमारे यहाँ धान की खेती सर्वाधिक होती है। और धान की फसल के लिए पानी की आवश्यकता बड़ी मात्रा में होती है इसलिए बदलते समय के साथ हमें ऐसी फसलों की ओर रूख करना होगा जिसमें पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचाकर बेहतर फसल ले सकें। परंपरागत खेती के अलावा फल, सब्जियों एवं मछली पालन जैसे ढेरों विकल्प हैं जिसके माध्यम से आज किसान अधिक से अधिक लाभ ले सकते हैं। भारत सरकार की भी यही मंशा है कि किसानों को अधिक से अधिक लाभ हो। पाम ऑयल के ऊपर आज हमारा देश दूसरे देशों पर निर्भर है, उसी निर्भरता को कम करने के लिए यह योजना लायी गई है। साथ ही इस खेती से जुड़े सवालों पर किसानों को संबोधित करते हुए कलेक्टर ने कहा कि किसानों को पहले इस खेती से जुड़े कृषकों के खेतों का भ्रमण कराया जाएगा ताकि इस खेती से जुड़ी शंकाओं एवं तकनीकी पहलुओं पर किसानों को स्पष्टता हो सके।
जिला पंचायत सीईओ श्री हेमंत नंदनवार ने कहा कि हम धान की खेती करते हैं लेकिन देखने में यहाँ आता है कि सब्ज़ी एवं अन्य फसलों में फायदा ज़्यादा है। विदेशों से बच्चे बड़ी बड़ी नौकरी छोड़कर युवा अपने देश लौटकर खेती करते हैं लेकिन शायद ही कोई परंपरागत धान की खेती नहीं करता है, हर कोई नगदी फसल ही लेते हैं। उन्होंने बताया कि हम आज तो तेल खाते हैं उसमें से एक बड़ा हिस्सा बाहर से आता है, तो इसमें सरकार की मंशा यह है कि खाद्यान्न तेल का आयात कम हो और इसमें हमारी आत्मनिर्भरता कम हो। इसलिए पाम ऑयल की खेती को सरकार इस योजना के माध्यम से बढ़ावा देना चाह रही है। उन्होंने किसानों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि उन्हें इस फसल को अपनी प्राथमिकता में रखना चाहिए।
कृषक की जुबानी
किसान सिदार चंद्राकर जिन्होंने ख़ुद 32 एकड़ में पाम ऑयल की खेती की है उन्होंने इसकी खेती के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पाम ऑयल कीट और बीमारियों, श्रम आवश्यकताओं, उपज के विपणन के मामले में सभी बाधाओं से मुक्त फसल है और उपज के चरण से ही नियमित मासिक आय प्रदान करता है। साथ ही अपने अनुभवों एवं लाभ के बारे में बताते हुए कहा कि पाम ऑयल के उत्पादन की सीमा 4-5 साल तक की है, और बढ़ते उत्पादन के चरम तक पहुंचने के लिए 2-3 साल की अतिरिक्त अवधि की आवश्यकता पड़ती है। इसलिए, यह सुझाव दिया गया था कि किसान शुरुआती वर्षों में सब्जियों के साथ अंतर फसलों पर स्विच कर सकते हैं।
इसके अलावा कार्यशाला में अधिकतम उपज प्राप्त करने में बाधाओं का कारण बनने वाले कारक, सब्सिडी एवं बाज़ार की उपलब्धता, अनुचित अंतर-फसल पद्धतियां, अपर्याप्त, असामयिक वितरण, उर्वरकों के उपयोग, अपर्याप्त सिंचाई, तकनीकी ज्ञान की कमी आदि, पर भी विस्तारपूर्वक चर्चा की गई।
उल्लेखनीय है कि योजना के तहत पहले केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा (60ः40 के अनुपात में) अनुदान दिए जा रहे हैं। इसके तहत 1.30 लाख रूपए प्रति हेक्टेयर के अनुदान के साथ अब राज्य सरकार द्वारा राशि 69,620 रूपए का अतिरिक्त अनुदान चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 से देने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत रख-रखाव के लिए 10,500 रुपये प्रति हेक्टेयर के इकाई लगत पर 5250 रुपये का अनुदान पूर्व से दिया जा रहा था, जिसके अतिरिक्त अब 1500 रुपये टॉप अप के रूप में राज्य शासन द्वारा अनुदान प्रदाय किया जाएगा। इसी तरह अंतरवर्तीय फसल लेने पर 10,500 रुपये प्रति हेक्टेयर के इकाई लगत पर 5250 रुपये प्रति हेक्टेयर का अनुदान पूर्व से दिया जा रहा था, जिसके अतिरिक्त अब 5000 रुपये प्रति हेक्टेयर टॉप अप के रूप में अनुदान प्रदाय किया जाएगा।

 

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