हनुमान मंदिर तात्यापारा में मनाया गया दासनवमी महोत्सव
- महिला भजन मंडली की सदस्यों ने प्रस्तुत किए सुमधुर लयबद्ध भजन
- दासबोध का परायण करने के साथ ही करुणाष्टक का किया गया पाठ
रायपुर। तात्यापारा स्थित हनुमान मंदिर में माघ कृष्ण नवमीं पर दास नवमी महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर तात्यापारा की भजन मंडली ने मराठी भजनों की सुमधुर प्रस्तुति दी। वहीं दासबोध का परायण और करुणाष्टक के पाठ ने आयोजन को भक्तिमय कर दिया।
बताते चले कि छत्रपति शिवाजी महाराज के गुरु समर्थ रामदास स्वामी की पुण्यतिथि (माघ कृष्ण नवमी) पर महाराष्ट्रीयन समाज की ओर से दास नवमी महोत्सव मनाया जाता है। स्वामी रामदास को 'दासबोध' के रचयिता के रूप में जाना जाता है। इस अवसर पर विशेष पूजा, कीर्तन और सत्संग का आयोजन होता है, जो भक्त के समर्पण को दर्शाता है। यह महोत्सव समर्थ रामदास स्वामी को याद करने और उनके विचारों को आत्मसात करने का अवसर है।
महाराष्ट्र मंडल की आध्यात्मिक समिति की समन्यवक आस्था काले ने बताया कि रामदास महोत्सव पर हनुमान मंदिर तात्यापारा में भजन राम नामावली पाठ हुआ। इस अवसर पर छाया भवालकर ने समर्थ रामदास स्वामीजी की जीवनी के बारे में बताते हुए कहा कि परमार्थ प्रसार के साथ ही राष्ट्र जागरण के लिए 1100 हनुमान मंदिर स्थापित किए।
चारुशीला देव ने दासबोध की प्रासंगिकता पर कहा कि प्रपंच और परमार्थ दोनों का तालमेल रखकर कार्य करना चाहिए, आलस्य को त्यागकर कठिन परिश्रम से ही सफलता मिलती है। भक्ति, ज्ञान और वैराग्य मानव जीवन को कृतार्थ बना सकते हैं। प्रभा हिशीकर, निशा राहटगांवकर और तात्यापारा भजन समूह द्वारा दासनवमी उत्सव वर्षों से मनाया जाता है। इस अवसर पर महाराष्ट्र मंडल की आस्था काले और नमिता शेष भी उपस्थित थीं।
इस अवसर पर तात्यापारा भजन मंडल की कुमुद कान्हे, अल्पना मोहदीवाले, अलका संत, ज्योति कान्हे ओर दासबोध अध्ययन वर्ग के सदस्य भी उपस्थित थे। हर मंगलवार शाम 6.30 बजे चारूशीला देव दासबोध अध्ययन वर्ग संचालित करतीं हैं, जिसमें समर्थ साहित्य का अध्ययन किया जाता है।









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