सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 लोभसभा में हुआ पारित
नई दिल्ली। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 शुक्रवार को लोकसभा में पारित हो गया है। इस विधेयक का उद्देश्य भुगतान में विलंब की समस्या को समाप्त करना और विवाद निपटारे की प्रक्रिया को आसान बनाना है। इसमें यह प्रावधान किया गया है कि सभी केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों को लघु एवं मध्यम उद्यमों से की गई खरीद के सभी बिलों का भुगतान व्यापार प्राप्य छूट प्रणाली के माध्यम से करना अनिवार्य होगा।
इस विधेयक को राज्यसभा से पहले ही मंजूरी मिल चुकी है।प्रस्तावित विधेयक में कहा गया कि अगर विवाद के मामले में मध्यस्थता विफल हो जाती है, तो मध्यस्थता खत्म होने की तारीख से 30 दिनों के भीतर आर्बिट्रेशन के लिए रेफरेंस दिया जाना चाहिए। साथ ही, दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के 90 दिन में फैसला सुनाना जरूरी है। इसमें ये भी है कि अगर कोई मामला 6 महीने से ज्यादा लटका है तो आपूर्तिकर्ता (एमएसएमई) को तय रकम का कम से कम 50 प्रतिशत भुगतान तुरंत करना पड़ेगा।इससे पहले गुरुवार को लोकसभा ने विपक्ष के विरोध के बीच ‘कराधान और अन्य विधियां (संशोधन) विधेयक, 2026’ को ध्वनि मत से पारित कर दिया। इस कानून का मकसद ‘भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007, आयकर अधिनियम, 2025 और वित्त अधिनियम, 2026 में’ में संशोधन करना है।इस बिल में टैक्स से जुड़े ऐसे बदलावों का प्रस्ताव है जिनका मकसद निवेश को बढ़ावा देना, मैन्युफैक्चरिंग को सपोर्ट करना और टैक्स से जुड़ी निश्चितता प्रदान करना है। यह विधेयक ‘आयकर (संशोधन) अध्यादेश, 2026’ की जगह लेगा।
इसके अतिरिक्त, इस हफ्ते की शुरुआत में सरकार ने आधिकारिक बयान में कहा था कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) की सस्टेनेबल जीरो डिफेक्ट जीरो इफेक्ट (जेडईडी) सर्टिफिकेशन योजना के तहत अब तक करीब 9.49 लाख एमएसएमई पंजीकृत हो चुके हैं। केंद्र सरकार महिला उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिए महिलाओं के स्वामित्व वाले एमएसएमई को जेडईडी सर्टिफिकेशन पर 100 प्रतिशत सब्सिडी भी दे रही है।








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