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खाद्य मंत्री दयालदास बघेल के विभागों के लिए 6216 करोड़ रुपए से अधिक की अनुदान मांगें पारित

-किसानों और गरीबों की खाद्य सुरक्षा पर सरकार का जोर
-धान खरीदी में पारदर्शिता और किसानों को 72 घंटे में भुगतान : खाद्य मंत्री
-73 लाख राशन कार्डधारियों को मुफ्त चावल, चना-गुड़ और नमक योजनाओं पर जोर
-किसानों को 33 हजार करोड़ का भुगतान, खाद्य सुरक्षा योजनाओं का विस्तार
-नई राशन दुकानों और भंडारण क्षमता बढ़ाने पर सरकार का बड़ा कदम
 रायपुर / छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री दयाल दास बघेल के विभागों से संबंधित वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 6216 करोड़ 73 लाख 82 हजार रूपए की अनुदान मांगें सर्वसम्मति से पारित किया गया है। मंत्री श्री दयाल दास बघेल ने अपने विभागीय बजट भाषण में विभाग की योजनाओं और उपलब्धियों का विस्तृत उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों, गरीब परिवारों और उपभोक्ताओं की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। 
मंत्री ने बताया कि खरीफ वर्ष 2025-26 में प्रदेश के 25 लाख 24 हजार 339 किसानों से समर्थन मूल्य पर 141 लाख 04 हजार 365 टन धान की खरीदी की गई, जिसकी कुल कीमत लगभग 33 हजार 431 करोड़ रुपये रही। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है।
धान खरीदी प्रक्रिया को पूर्ण पारदर्शी बनाने के लिए इस वर्ष किसानों का एग्रीस्टेक पोर्टल में पंजीयन कराया गया और राज्य के 2,740 धान खरीदी केंद्रों में बायोमेट्रिक उपकरण स्थापित किए गए, इसके माध्यम से किसानों के बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के बाद ही धान की खरीदी की गई।
मंत्री श्री बघेल ने बताया कि किसानों को भुगतान की व्यवस्था भी बेहतर बनाई गई है। अधिकांश किसानों को धान बेचने के 72 घंटे के भीतर उनके बैंक खातों में भुगतान कर दिया गया, जिससे करीब 33 हजार करोड़ रुपये की राशि सीधे किसानों तक पहुंची। धान खरीदी केंद्रों में टोकन व्यवस्था में सुधार करते हुए इस वर्ष 25 लाख से अधिक किसानों को 29 लाख से अधिक टोकन जारी किए गए। इससे किसानों को अपने धान को सुगमता से बेचने में मदद मिली और खरीदी प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित बनी।
खाद्य मंत्री ने बताया कि वर्ष 2025-26 में खरीदे गए धान का कस्टम मिलिंग के माध्यम से तेजी से निराकरण किया जा रहा है। 9 मार्च 2026 तक 141 लाख टन धान में से 92 लाख 72 हजार टन यानी लगभग 66 प्रतिशत धान का उठाव कस्टम मिलिंग के लिए किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत राज्य के 73 लाख 97 हजार अंत्योदय एवं प्राथमिकता राशन कार्डधारियों को दिसंबर 2028 तक निःशुल्क चावल उपलब्ध कराया जाएगा। वर्ष 2025-26 में इसके लिए 11,300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वर्ष 2026-27 में मुख्यमंत्री खाद्यान्न सहायता योजना के तहत 5,000 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है।
पोषण सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्राथमिकता वाले राशन कार्डधारियों को खाद्यान्न के साथ आयोडीन युक्त नमक, चना और गुड़ भी उपलब्ध कराया जा रहा है। अनुसूचित क्षेत्रों में नमक वितरण, 85 विकासखंडों में 5 रुपये प्रति किलो की दर से चना वितरण और बस्तर संभाग में रियायती दर पर गुड़ वितरण की योजनाएं संचालित हैं। 
सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से अंत्योदय एवं प्राथमिकता वाले  राशनकार्डधारी परिवारों में आयोडीन की कमी दूर करने के लिए अनुसूचित क्षेत्रों में 02 किलो प्रति एवं गैर अनुसूचित क्षेत्रों में 01 किलो प्रति राशनकार्ड प्रतिमाह निःशुल्क नमक वितरण किया जा रहा है। वर्तमान में 73.62 लाख राशनकार्डधारी परिवारों को योजना का लाभ मिल रहा है। इसके लिए रिफाईन्ड आयोडाईज्ड नमक वितरण हेतु वित्तीय वर्ष 2026-27 में उपरोक्त योजना के लिये 150 करोड रूपये का बजट स्वीकृत किया गया है। 
मंत्री श्री बघेल ने बताया कि राज्य के 85 अनुसूचित विकासखण्ड एवं 09 माडा क्षेत्र के 31.32 लाख प्राथमिकता एवं अंत्योदय कार्डधारियों को मात्र 5 रूपए किलो की दर पर 2 किलो चना वितरण किया जा रहा है। चना वितरण योजना के लिये वित्तीय वर्ष 2026-27 में 450 करोड रूपये का बजट स्वीकृत किया गया है।
इसी तरह बस्तर संभाग के निवासियों में आयरन की कमी दूर करने के लिए संभाग के 7.75 लाख अंत्योदय, प्राथमिकता, एकल निराश्रित एवं निःशक्तजन राशनकार्डधारियों को प्रतिमाह रियायती दर पर 02 किलो गुड़ वितरण किया जा रहा है। गुड़ योजना के लिये वित्तीय वर्ष 2026-27 में 75 करोड़ रूपये का बजट स्वीकृत किया गया है।
राज्य में सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मजबूत करने के लिए इस वर्ष 181 नई उचित मूल्य दुकानों की शुरुआत की गई है। इसके साथ ही 3 लाख 32 हजार नए राशन कार्ड जारी किए गए और 6 लाख 57 हजार नए सदस्यों के नाम राशन कार्ड में जोड़े गए हैं।
खाद्य मंत्री ने बताया कि खाद्यान्न भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए राज्य भंडारगृह निगम की 139 शाखाओं के माध्यम से फरवरी 2026 की स्थिति में 25 लाख 31 हजार मीट्रिक टन भंडारण क्षमता उपलब्ध है। 01 लाख 17 हजार मीट्रिक टन क्षमता के गोदामों का निर्माण किया जा रहा है। गोदाम निर्माण के अतिरिक्त निगम में 210 इलेक्ट्रानिक धर्मकांटा की स्थापना की गई है। आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 में नाबार्ड सहायता से गोदाम निर्माण हेतु 180 करोड़ रूपये का बजट स्वीकृत किया गया है। साथ ही उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए ई-दाखिल पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने की व्यवस्था की गई है, जिससे उपभोक्ता संरक्षण को और मजबूत बनाया जा रहा है।

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