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राजा रवि वर्मा से सुबोध गुप्ता तक : मेट गाला में भारतीय कला और शिल्प की बेहतरीन झलक दिखी

नयी दिल्ली.  भारतीय कला और विरासत की छटा ने 'मेट गाला' 2026 के भव्य मंच को और आकर्षक बना दिया, जहां राजा रवि वर्मा की कालजयी शैली से लेकर अजंता गुफाओं की भित्ति चित्रकला, सुबोध गुप्ता की समकालीन अभिव्यक्ति और बारीक कढ़ाई व रत्नों की चमक तक—अतीत और वर्तमान की विविध कलाएं एक साथ जीवंत होती नजर आईं। इस मौके पर भारतीय सितारों ने भी बेहद सधे और सोच-समझकर चुने गए परिधानों के जरिए दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा। ईशा अंबानी ने एक हजार हीरे-जवाहरात और 800 अन्य बहुमूल्य रत्नों से सजी साड़ी पहनी, सुधा रेड्डी ने डेढ़ करोड़ डॉलर का हार पहना और अनन्या बिड़ला ने सुबोध गुप्ता द्वारा बनाए गए चमकदार स्टील मास्क लगाकर सभी को चौंका दिया। फैशन की इस सबसे बड़ी शाम में उद्योगपतियों के अलावा फिल्म निर्देशक करण जौहर राजा रवि वर्मा की मशहूर चित्रकला से प्रेरित भव्य 'केप' में नजर आए। परोपकारी एवं उद्यमी नताशा पूनावाला ने आर्किड से प्रेरित विस्तृत गाउन पहना। जयपुर के पूर्व राजघराने की सदस्य गौरवी कुमारी और सवाई पद्मनाभ सिंह शिफॉन और मखमल के परिधानों में दिखे, जबकि डिजाइनर मनीष मल्होत्रा ने अलंकृत काले-सफेद केप के साथ बंदगला सूट के जरिये अपनी छाप छोड़ी। हर परिधान अपने आप में एक कलाकृति था, जिसे तैयार करने में सैकड़ों कारीगरों ने दिन-रात मेहनत की और सैकड़ों घंटे लगाए। 'कॉस्ट्यूम आर्ट' विषय और 'फैशन इज आर्ट' ड्रेस कोड के अनुरूप इन परिधानों को गढ़ने में आरी, दबका, नक्षी, कलमकारी, जरी-जरदोजी और हस्तचित्रण जैसी पारंपरिक कढ़ाई और तकनीकों का इस्तेमाल किया गया। न्यूयॉर्क शहर स्थित मेट्रोपॉलिटन म्यूज़ियम ऑफ़ आर्ट में हर साल मई में होने वाले इस वार्षिक आयोजन की सह-अध्यक्षता इस वर्ष बियॉन्से, वीनस विलियम्स, निकोल किडमैन और अन्ना विंटूर ने की।
'मेट गाला' में केवल आमंत्रित अतिथि ही शामिल हो सकते हैं। एक टिकट की कीमत करीब एक लाख डॉलर और पूरी टेबल की कीमत साढ़े तीन लाख डॉलर या उससे अधिक बताई जाती है। इन टिकटों को आमतौर पर फैशन हाउस, लग्जरी ब्रांड और बड़ी कंपनियां खरीदती हैं। 'मेट गाला' में पहली बार शिरकत कर रहे करण जौहर ने अपने पुराने मित्र एवं डिजाइनर मनीष मल्होत्रा से 'फ्रेम्ड इन इटर्निटी' नाम की विशेष पोशाक तैयार कराई। पावर-शोल्डर्ड विंटेज जैकेट पर डोरी कढ़ाई, ऑयल और एक्रेलिक रंगों तथा हाथ से की गई चित्रकारी से राजा रवि वर्मा की प्रसिद्ध रंग-संपन्न कला को जीवंत किया गया। यह पोशाक 5,600 घंटों की मेहनत से तैयार हुई। मल्होत्रा के 50 से अधिक प्रमुख कारीगरों ने बिना किसी डिजिटल सहायता के पूरी तरह हाथ से इसे बनाया, जिसमें चित्रकारी, मूर्तिकला और कपड़े की कला का अद्भुत संगम है। इस आयोजन में नियमित तौर पर शिरकत करने वाली ईशा अंबानी ने गौरव गुप्ता का एक अनूठा परिधान धारण किया, जिसमें आभूषण और कपड़े के बीच की रेखा ही मिट गई। अकेले ब्लाउज को तैयार करने में 40 कारीगरों को 500 घंटे लगे। इस ब्लाउज में एक हजार से अधिक हीरे और कीमती रत्न जड़े थे, जिनका कुल वजन 1,800 कैरेट से अधिक है। इनमें उनकी मां नीता अंबानी के निजी संग्रह से लिए गए दुर्लभ पुराने हीरे, हरे पन्ने और पोल्की-कुंदन के नग शामिल हैं। हैदराबाद की व्यवसायी एवं समाजसेविका सुधा रेड्डी मनीष मल्होत्रा द्वारा डिजाइन किए गए गहरे नीले रंग के मखमली लहंगे में नजर आईं। लहंगे पर सोने की जरदोजी कढ़ाई थी और साथ में लंबा केप था जिस पर सोने, लाल और हरे रंग में फूल-पत्तियों की रंग-बिरंगी कढ़ाई थी। उनके परिधान का मुख्य आकर्षण उनके निजी संग्रह से लिया गया डेढ़ करोड़ डॉलर से अधिक मूल्य का एक ऐतिहासिक हार था। इसमें विक्टोरियन शैली में तैयार की गई बड़ी त्रिकोणीय और नाशपाती आकार की रोज़-कट हीरों की श्रृंखला थी, जिन्हें फूलों के गुच्छों जैसे डिज़ाइन में जड़ा गया था। हार के केंद्र में 'क्वीन ऑफ़ मेरेलानी' था, जो तंज़ानिया की मेरेलानी पहाड़ियों से प्राप्त 550 कैरेट का गहरे बैंगनी-नीले रंग का 'टैंज़नाइट पेंडेंट' है। मल्होत्रा ने खुद के लिए पारंपरिक भारतीय बंदगला डिजाइन किया और उसके ऊपर स्थापत्य शैली का एक केप पहना, जिसे 50 कारीगरों ने 960 घंटों में तैयार किया। अनन्या बिड़ला का लुक भारतीय समकालीन कलाकार सुबोध गुप्ता और ब्रिटिश डिजाइनर रॉबर्ट वुन का साझा प्रयास था। उनकी टीम ने बताया कि गुप्ता ने अपने खास स्टेनलेस स्टील से एक मुखौटा बनाया, जो चेहरे को छिपाने के साथ-साथ ताकत और रहस्यमयी प्रभाव का प्रतीक भी था। मेट गाला को अक्सर अमीर वर्ग की सांस्कृतिक प्रतिष्ठा बढ़ाने के अवसर के रूप में भी देखा जाता है, और इसी कारण इसकी आलोचना भी होती है। इस साल अमेज़न के प्रमुख जेफ बेज़ोस और उनकी पत्नी लॉरेन बेज़ोस को मानद सह-अध्यक्ष और मुख्य प्रायोजक बनाए जाने पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। प्रदर्शनकारी अमेज़न की श्रम नीतियों और अमेरिकी आव्रजन प्रवर्तन एजेंसी (आईसीई) से इसके कथित संबंधों को लेकर बहिष्कार की मांग कर रहे हैं।

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