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 केन्द्रीय गृह  मंत्री अमित शाह  बस्तर पंडुम 2026 के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रुप में शामिल हुए

-बस्तर की पहचान बारूद नहीं, उसकी असली पहचान यहाँ की समृद्ध संस्कृति और विरासत है
-‘बस्तर पंडुम’ ने बस्तर के खान-पान, नृत्य सहित 12 विधाओं को समाहित कर यहाँ की संस्कृति को पुनर्जीवित किया है
-बस्तर पंडुम में 55 हजार आदिवासियों की सहभागिता, बस्तर का नक्सल भय से मुक्त होने का प्रमाण है
-आदिवासी जनजातियों के संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध मोदी सरकार बस्तर की नृत्य व कला तथा आदिवासी संस्कृति को वैश्विक सम्मान दिला रही है
-जो नक्सली आत्मसमर्पण करेंगे, सरकार उनका पुनर्वसन करेगी, लेकिन हाथ में हथियार का जवाब हथियार से दिया जाएगा
-अगले 5 वर्षों में सभी आदिवासी क्षेत्रों में बस्तर सबसे विकसित बनेगा, नई पर्यटन गतिविधियाँ बस्तर को रोजगार से समृद्ध करेंगी
-बिरसा मुंडा जी की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस और 150वीं जयंती को जनजातीय गौरव वर्ष घोषित करना, मोदी जी का जनजातीय समाज के प्रति सम्मान का स्पष्ट प्रमाण है
-नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई का मूल आधार आदिवासी किसानों, निर्दोष बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा है
-118 एकड़ में बन रहा नया औद्योगिक क्षेत्र बस्तरवासियों के रोजगार का मजबूत आधार बनेगा
-प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का यह विजन है कि बस्तर की संस्कृति देश और दुनिया के सामने पहुँचे
 रायपुर  /केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह आज छत्तीसगढ़ के बस्तर पंडुम 2026 के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रुप में शामिल हुए। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
अपने सम्बोधन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि जो बस्तर कुछ साल पहले नक्सलियों के डर से सहमा रहता था और मोर्टार के गोले, बंदुकों की गोलियां और IEDs के धमाके हमारे आदिवासी भाई बहनों में भय का संचार करती थी। आज उसी बस्तर में 55 हजार लोगों ने खान- पान, गीत, नृत्य, नाटक, वेशभूषा, परंपरा और वन औषधी जैसी 12 विधाओं में यहाँ की संस्कृति को पुनर्जीवित करने का काम किया। उन्होंने कहा कि यह बहुत बड़ी बात है।
श्री अमित शाह ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने हमारी बस्तर की संस्कृति को नए प्राण देने का काम किया। गत बस्तर पंडुम में 7 विधाओं में स्पर्धा आयोजित की गई थीं और इस बार पाँच  नई विधाओं को जोड़ कर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जी ने हमारी आदिवासी और बस्तर की संस्कृति को बढ़ाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि इस बार सात जिलों, 1885 ग्राम पंचायतों और 32 जनपद मुख्यालयों से 12 विधाओं में 55 हजार प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि बस्तर जैसी संस्कृति और कला विश्व में किसी भी जनजाति क्षेत्र में उपलब्ध नहीं है और हम इसे सैकड़ों वर्षों तक जिंदा रखना चाहते है। उन्होंने कहा कि बस्तर की कला, संस्कृति, गीत, नृत्य सिर्फ बस्तर का ही आभूषण नहीं है, बल्कि पूरे भारत की संस्कृति का गहना है और बस्तर पंडुम ने इसे आगे बढ़ाया है। श्री शाह ने कहा कि बस्तर की जनजातियों की अपनी एक संस्कृति है। उन्होंने कहा कि प्रभु श्री राम के समय से उन्होंने अपनी संस्कृति को संजो कर रखा है। यहां के प्रमुख नृत्य आने वाले दिनों में राष्ट्रीय फलक पर भी आगे बढ़ रहे हैं।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का यह विजन है कि बस्तर की संस्कृति देश और दुनिया के सामने पहुँचे। उन्होंने कहा कि बस्तर की पहचान बारूद नहीं बल्कि यहां की समृद्ध संस्कृति और विरासत ही हो सकती है। श्री शाह ने यह भी कहा कि आदिवासी जनजातियों के संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध मोदी सरकार बस्तर की नृत्य व कला तथा आदिवासी संस्कृति को वैश्विक सम्मान दिला रही है।  प्रधानमंत्री मोदी जी का यह स्पष्ट मानना है कि केवल किताबों में लिखा ही इतिहास नहीं होता, इतिहास वह होता है जो जनमानस की स्मृतियों में जीवित रहे।
श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने जनजातियों के सम्मान के लिए ही भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को पूरे देश में जनजाति गौरव दिवस के रूप में मनाने का काम किया। भगवान बिरसा मुंडा के 150वीं जयंती वर्ष को देशभर में जनजातीय गौरव वर्ष के रूप में मनाया गया। उन्होंने कहा कि मोदी जी ने जनजातीय शिल्प, संस्कृति, व्यंजन और वन उपजों के वाणिज्यिक उपयोग को बढ़ावा दिया और 5 लाख वन उत्पाद, पारंपरिक शिल्प की ब्रांडिंग और मार्केटिंग की व्यवस्था की।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि नारायणपुर के पंडित राम मंडावी, हेमचंद मांझी, कांकेर के अजय कुमार मंडावी, दंतेवाड़ा के भूधरी दाती, को कला, स्वास्थ्य, शिक्षा के क्षेत्र में पद्म पुरस्कार देकर समग्र देश में सम्मानित करने का काम किया है। साथ ही प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने 700 से अधिक जनजातियों को सम्मानित करने का एक बृहद कार्यक्रम बनाया है। प्रधानमंत्री जी ने 200 करोड़ रुपये से ट्राइबल म्यूजियम शुरू करवाया, जिसमें आजादी की लड़ाई भाग लेने वाले सभी जनजातियो के नेताओं की स्मृति को संजोने का काम किया है।
गृह मंत्री ने बस्तर पंडुम के उद्घाटन समारोह में आने के लिए राष्ट्रपति जी का धन्यवाद किया। श्री शाह ने बताया कि उन्होंने सभी 12 विधाओं में पहले तीन स्थानों पर आने वाले प्रतिभागियों को राष्ट्रपति भवन में भोजन पर बुलाने का अनुरोध किया था, जिसे राष्ट्रपति जी ने स्वीकार कर लिया है। श्री शाह ने कहा कि ये प्रतिभागी देश के राष्ट्रपति भवन में अपनी संस्कृति और कला का प्रदर्शन करेंगे, यह बहुत बड़ा सम्मान का विषय है।
केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई का मूल आधार आदिवासी किसानों, निर्दोष बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा है। उन्होंने कहा कि नक्सली जब IEDs लगाते हैं, क्या उनको मालूम नहीं है कि जनजातीय किसानों का उस पर पैर पड़ेगा और वे हमेशा के लिए दिव्यांग हो जाएंगे ? क्या उनको मालूम नहीं है, कोई निर्दोष बच्ची इससे उजड़ जाएगी ? नक्सली कहाँ से इतनी निर्दयता लेकर आते है? केन्द्रीय गृह मंत्री ने बचे हुए नक्सलियों से हथियार डालने की अपील करते हुए कहा कि सरकार आत्मसमर्पण करने वालों की सभी प्रकार से चिंता करेगी और सम्मान के साथ उनका पुनर्वासन किया जाएगा। श्री शाह ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा बनाया गया पुनर्वासन पैकेज बहुत  आकर्षक है।
श्री अमित शाह ने कहा कि वे सभी नक्सलियों से अपील करना चाहते हैं कि वे बच्चियों को एक बार पुनर्वासन के लिए भेज दे क्योंकि बच्चियों का पूरा जीवन अभी बाकी है। उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर जिन लोगों ने सरेंडर किया है उन्हे कोई आंच नहीं आएगी। गृह मंत्री ने कहा कि जो लोग गांव में गोली चलाएंगे, खेतों और सड़क पर IEDs लगाएंगे, स्कूल और अस्पताल जलाएंगे, मोबाइल टावर बंद कर देंगे उन्हे बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा हथियार का जवाब हथियार से दिया जाएगा। श्री शाह ने यह भी कहा कि माओवाद ने किसी का भला नहीं किया।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि आज हमारा बस्तर पूरे देश के सामने एक बेहतरीन ब्रांड के रूप में उभर कर चमक रहा है। कई ऐसे स्कूल हैं जो 40 साल से बंद थे, छत्तीसगढ़ शासन ने उन्हे फिर से खोल दिया है। श्री शाह ने कहा कि वे आदिवासी भाइयों-बहनों से पूछना चाहते हैं कि स्कूल बंद कर नक्सलियों ने किसका भला किया? हमारी नई पीढ़ी अक्षर ज्ञान से वंचित रह गई। श्री शाह ने कहा कि अगले 5 वर्षों में सभी आदिवासी क्षेत्रों में बस्तर सबसे विकसित बनेगा, नई पर्यटन गतिविधियाँ बस्तर को रोजगार से समृद्ध करेंगी। सभी बंद पड़े प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, अस्पताल और स्कूल शुरू किए जाएंगे, साथ ही हायर सेकेंडरी स्कूल और कॉलेजों भी बनाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि अब हर गांव में पोस्ट ऑफिस खुल रहे हैं, मोबाइल टावर लग रहे हैं और गांव को जोड़ने वाली सड़कें भी बहुत अच्छी तरीके से बन रही हैं। गृह मंत्री ने कहा कि कई गांव ऐसे हैं जहां चार दशक के बाद हमारा राष्ट्रध्वज तिरंगा फहराया गया।
श्री अमित शाह ने कहां कि हर गांव में कनेक्टिविटी होगी, हर 5 किलोमीटर में पोस्ट ऑफिस या बैंक की ब्रांच खोलेंगे। हर आदिवासी का धान ₹3100 की दर से खरीदा जाएगा और आदिवासियों को प्रति व्यक्ति प्रति माह 5 किलो धान मुफ्त दिया जाएगा। इसके अलावा गैस का सिलेंडर, हर घर में नल दिया जाएगा और नल से जल आएगा। चुने हुए प्रतिनिधि ही पंचायत, तहसील पंचायत और जिला पंचायत का प्रतिनिधित्व करेंगे। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद समाप्त होते ही एडवेंचर टूरिज्म, होम स्टे, कैनोपी वॉक और ग्लास ब्रिज जैसी कई नई टूरिज्म की विधाएं विकसित होने लगेंगी और देखते-देखते हम बस्तर को बहुत आगे बढ़ाएंगे। श्री शाह ने कहा कि बस्तर में 118 एकड़ में नया औद्योगिक क्षेत्र और ऑटो गिग क्षेत्र बस रहा है जिससे आदिवासी युवा भाइयों बहनों को रोजगार मिलेगा।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि 3500 करोड़ रुपये से रावघाट जगदलपुर रेल परियोजना का काम शुरू हो गया है। नदी जोड़ो परियोजना को भी हम आगे बढ़ा रहे हैं और 90,000 से अधिक युवाओं को विभिन्न व्यवसायों का परीक्षण देने का काम भी आगे बढ़ रहा है। 36 करोड़ रुपये की लागत से इंद्रावती नदी पर एक नई सिंचाई योजना भी लाई जाएगी जिससे120 मेगावाट बिजली भी मिलेगी।
श्री अमित शाह ने कहा कि आज बस्तर में कर्फ्यू जैसा कोई वातावरण नहीं हैं और गाँवों में रात को सांस्कृतिक नृत्यों की झलक दिखाई देती है, हमारे बस्तर के लिए यह बहुत बड़ा परिवर्तन हुआ है। उन्होंने कहा कि बस्तर ओलंपिक का सफल आयोजन हो चुका है और आज हम बस्तर पंडुम को बढ़ाने की सोच रहे हैं। गृह मंत्री ने नक्सलवाद के खिलाफ मजबूत निर्णायक लड़ाई में भाग लेने वाले सभी जवानों को बस्तर के आदिवासियों की ओर से धन्यवाद दिया और इस लड़ाई में बलिदान देने वाले बहादुर सुरक्षाकर्मियों के परिजनों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि तय समय सीमा में ही बस्तर नक्सल मुक्त हो जाएगा, इसमें किसी को संदेह नहीं होना चाहिए।

 

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