वासंती दोहे
-लेखिका- डॉ. दीक्षा चौबे
- दुर्ग ( वरिष्ठ साहित्यकार और शिक्षाविद)
सरसों खिलकर दे रही , फागुन का संदेश ।
चमन महक कर कह रहा ,अवसर आज विशेष ।।
गदराया रस गंध से , टपका महुआ फूल ।
शाखों पर था कल चढ़ा ,आज पड़ा है धूल ।।
अधर सुधा रस से भरे , मीनल से हैं नैन ।
प्रिया रूप ज्यों चाँदनी , याद करे बेचैन ।।
मदन मनोहर रूप में , आया सखी वसंत ।
चले गए परदेश जो , लौटे मेरे कंत ।।
ऋतु वसंत का आगमन , हृदय भरे उल्लास ।
सुधियाँ परिमल हो उठीं , पिया मिलन की आस ।।










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